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पुतिन आर्मी ने एक और शहर में लहराया रूसी झंडा, रूस ने यूक्रेन की लगभग 20 प्रतिशत जमीन पर नियंत्रण स्थापित कर लिया

कीव/मॉस्को रूस-यूक्रेन युद्ध को तीन साल पूरे हो गए हैं। दिन-ब-दिन यह जंग खतरनाक बनती जा रही है। पिछले दिनों यूक्रेन के रूस पर घातक वार और रूस के पलटवार ने युद्ध को और खतरनाक बना दिया है। इस महायुद्ध की सबसे भयावह बात यह है कि यह तीन साल से बिना रुके जारी है। यूक्रेन एक तरफ रूस के भीतर सेंध लगाकर उसकी धरती दहला रहा है तो दूसरी ओर रूसी सेना लगातार यूक्रेनी शहरों पर कब्जा करती जा रही है। रविवार को रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसकी सेना ने यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में ज़ोरिया नामक बस्ती पर कब्जा कर लिया है। इस ताज़ा बढ़त के साथ रूस ने यूक्रेन की लगभग 20 प्रतिशत जमीन पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। वॉर रिपोर्ट कार्ड-2025 और रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेन में अब तक रूसी सेना 1,12,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक जमीन पर अपना कब्जा कर चुकी है। इसमें क्रीमिया, डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और ज़ापोरिज़्झिया के बड़े हिस्से शामिल हैं। यह भूभाग यूक्रेन के कुल क्षेत्रफल का लगभग पांचवां हिस्सा है। धीमी लेकिन लगातार बढ़त रूस की यह ताज़ा सैन्य सफलता कोई अचानक हुई घटना नहीं है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि रूस अब धीमी लेकिन स्थिर गति से पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। ज़ोरिया जैसे छोटे शहरों पर कब्जा इसी रणनीति का हिस्सा है। यह इलाका अवदीवका और चासिव यार के बीच स्थित है और दोनों ही पक्षों के लिए सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यूक्रेनी जवाबी कार्रवाई सीमित हालांकि यूक्रेन ने खेरसॉन और खारकीव जैसे क्षेत्रों में कुछ कामयाबी पाई थी, लेकिन 2024 के अंत और 2025 की शुरुआत में उसकी जवाबी कार्रवाइयां सीमित साबित हुई हैं। रूस अब न केवल अपने कब्जे को बनाए रखने में सफल रहा है, बल्कि धीरे-धीरे उसे विस्तार भी दे रहा है। उधर, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने एक बार फिर रूस की इस कार्रवाई की आलोचना की है, लेकिन जमीनी हालात बता रहे हैं कि फिलहाल रूसी सेना यूक्रेन में रणनीतिक बढ़त बनाए हुए है।  

सड़क दुर्घटना में घायलों के लिए अब प्रदेश कैशलेस स्कीम 2025 की शुरुआत, अब अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को मिलेगा इनाम

इंदौर सड़क दुर्घटना में घायलों को अब अस्पतालों में तुरंत उपचार मिल सकेगा। उपचार का डेढ़ लाख रुपये तक का खर्च सरकार उठाएगी। यह सुविधा भारत सरकार द्वारा शुरू की गई कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम-2025 के तहत मिलेगी। प्रदेश में इस योजना को लागू किया जा रहा है। बता दें कि योजना का लाभ इंदौर के सभी अस्पतालों में मिलेगा और घायलों का कैशलेस उपचार हो सकेगा। इससे सड़क हादसे में घायल को जल्द शुरुआती उपचार मिल सकेगा और उसकी जान बचाई जा सकेगी। इंदौर के सभी अस्पतालों को इसके लिए पंजीयन करना होगा, ताकि उनको उपचार के बाद भुगतान मिल सके। इंदौर जिले में कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम-2025 के क्रियान्वयन को लेकर कलेक्टर आशीष सिंह ने सभी अस्पताल संचालकों की बैठक ली। कलेक्टर ने निर्देशित किया कि सभी अस्पताल तीन दिन में अपना पंजीयन करवा लें, जिससे आगामी सात दिन में योजना को पूरी तरह से लागू किया जा सके। बताया गया कि भारत सरकार ने पांच मई को कैशलेस स्कीम 2025 की शुरुआत की है, जो सड़क हादसों में घायल लोगों के लिए उपयोगी होगी। इसमें किसी भी अस्पताल में घायल व्यक्ति को डेढ़ लाख रुपये तक का उपचार आसानी से मिल सकेगा। इसके लिए किसी तरह के कागज, एडवांस और इंश्योरेंस की आवश्यकता नहीं होगी। 2 हजार से अधिक हादसे हर माह इंदौर जिले में प्रत्येक माह लगभग दो हजार से अधिक सड़क हादसे होते हैं। हादसे के बाद वक्त पर उपचार नहीं मिलने की वजह से कई लोग जान गंवा देते हैं। वहीं अस्पताल भी एडवांस की मांग करते, तो कभी इंश्योरेंस पॉलिसी दिखाने पर अड़ जाते हैं। अब ऐसा नहीं होगा और घायल को समय पर उपचार मिल सकेगा। उपचार के दौरान सात दिन में अधिकतम डेढ़ लाख रुपये तक का खर्च सरकार उठाएगी। घायल को अस्पताल पहुंचाने पर मिलेगी राशि प्रदेश सरकार ने राहवीर योजना भी लागू की है। इसमें सड़क दुर्घटना में घायल को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपये दिए जाएंगे। इस योजना को प्रदेश सरकार ने घायलों की मदद करने वालों को प्रेरित करने के लिए शुरू किया है, ताकि घायलों को भी तुरंत उपचार मिल सके। इससे हादसों के बाद घायलों की मदद करने के लिए लोग आगे आ सकेंगे। 

पर्याप्त नमी नहीं मिलने के कारण मध्य प्रदेश में अधिकतम तापमान बढ़ने लगा, ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में चल सकती है लू

भोपाल  दक्षिण-पश्चिम मानसून अभी भी मुंबई में ठहरा हुआ है। वैसे तो अलग-अलग स्थानों पर पांच मौसम प्रणालियां मौजूद हैं, लेकिन पर्याप्त नमी नहीं मिलने के कारण मध्य प्रदेश में अधिकतम तापमान बढ़ने लगा है। इसी क्रम में प्रदेश में सबसे अधिक 42.2 डिग्री सेल्सियस तापमान गुना एवं खजुराहो में दर्ज किया गया। सुबह साढ़े आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक नर्मदापुरम में पांच एवं इंदौर में 0.5 मिलीमीटर बारिश हुई। मौसम विज्ञानियों के अनुसार चार दिन में अधिकतम तापमान में तीन से चार डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है।   यहां चल सकती है लू ग्वालियर, चंबल एवं सागर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं लू भी चल सकती है। मौसम विज्ञानी वीएस यादव ने बताया कि वर्तमान में मानसून की उत्तरी सीमा मुंबई, अहिल्यानगर, आदिलाबाद, भवानीपटना, पुरी, बालुरघाट से होकर ही गुजर रही है। एक पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान के आसपास द्रोणिका के रूप में बना हुआ है। पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर बना चक्रवात उत्तर-पश्चिमी राजस्थान और उसके आसपास हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात बना हुआ है। उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उसके आसपास भी हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात मौजूद है। इसी तरह उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश पर भी हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात है।   इसके अतिरिक्त पूर्व विदर्भ से उत्तरी कर्नाटक तक एक द्रोणिका बनी हुई है, लेकिन हवाओं के साथ पर्याप्त नमी नहीं आ रही है। इस वजह से तापमान बढ़ने लगा है। इस तरह की स्थिति चार दिन तक बनी रह सकती है। इस दौरान ग्वालियर, चंबल एवं सागर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं लू भी चल सकती है।

इंदौर मेट्रो अब फ्री नहीं, आज से देना होगा किराया, पांच स्टेशन तक सफर करने पर आठ रुपये शुल्क देना होगा

इंदौर  सुपर प्रायोरिटी कारिडोर पर मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों को रविवार से किराया देना होगा। दो स्टेशन के बीच सफर करने पर पांच रुपये और पांच स्टेशन तक सफर करने पर आठ रुपये शुल्क देना होगा। देवी अहिल्याबाई होलकर स्टेशन (गांधी नगर) से मेट्रो में बैठने के बाद पांचवें वीरांगना झलकारी बाई स्टेशन (टीसीएस) पर उतरने पर यात्री को आठ रुपये किराया देना होगा। वीरांगना झलकारी बाई स्टेशन से पुन: मेट्रो में बैठ देवी अहिल्याबाई होलकर स्टेशन पर लौटने के लिए फिर से आठ रुपये का टिकट लेना होगा। गौरतलब है कि पिछले एक सप्ताह में डेढ़ लाख से ज्यादा इंदौरवासियों ने सफर किया है। शहरवासी अभी तक मेट्रो में निश्शुल्क सफर कर रहे थे। रविवारी से बिना टिकट यात्रा करने पर मेट्रो में जुर्माना भी लगेगा। गौरतलब है कि आठ से 15 जून तक मेट्रो के निर्धारित किराए में 75 फीसद छूट यात्रियों को मिलेगी। मेट्रो के शुभारंभ मौके पर जहां 25 हजार से ज्यादा लोगों ने सफर किया था। वहीं एक से सात जून तक टिकट लेकर एक लाख 43 हजार 301 लोगों ने सफर किया।   मेट्रो में सफर करने से पहले सुरक्षाकर्मी पांचों स्टेशन पर यात्रियों की जांच कर रहे हैं। यात्रियों के पास बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू व गुटखे के पाउच मिलने पर जब्त कर एक बक्से में डाला जा रहा है। पिछले पांच दिन से हर दिन मेट्रो स्टेशन पर इस तरह के उत्पादों से बक्से भर गए हैं। पिछले आठ दिन में मेट्रो में शहरवासियों ने किया सफर 31 मई – 25 हजार से ज्यादा 1 जून- 26803 2 जून- 16071 3 जून- 19701 4 जून- 20534 5 जून- 21179 6 जून- 19215 7 जून- 19798

मांगलिया जाने के लिए 20 किमी चक्कर लगाकर जाना होगा, आरओबी बनाने के लिए पूरी तरह से फाटक हुआ बंद

इंदौर मांगलिया-सांवेर मुख्य मार्ग रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) बनाने के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया। करीब एक साल बंद सांवेर रोड की तरफ जाने वाले लोगों को परेशानी होगी। इस मार्ग पर आने वाले एक दर्जन से अधिक गांवों में रहने वाले ग्रामीणों को मांगलिया आने-जाने के लिए 20 किमी लंबा चक्कर लगाकर सफर करना होगा। इनको सिंगापुर टाउनशिप अंडरपास, डकाच्या या शिप्रा होकर आना-जाना करना होगा।   लोग हो रहे परेशान सांवेर से आने वाले लोगों को भी शिप्रा या डकाच्या का मार्ग चुनना होगा। पीडब्ल्यूडी द्वारा मांगलिया का आरओबी बनाया जा रहा है। 32 करोड़ की लागत से बनने वाले आरओबी के निर्माण के लिए रेलवे फाटक को पूरी तरह से बंद कर दिया गया। शनिवार रात से निर्माण कार्य में गति लाने के लिए फाटक बंद किया गया है। मांगलिया से सांवेर रोड की ओर जाने वालों को परेशानी उठानी होगी। अन्य वैकल्पिक मार्ग का उपयोग कर वह आवागमन कर सकते हैं। जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने ब्रिज निर्माण करने वाली कंपनी को निर्देशित किया है कि निर्माण कार्य में लापरवाही नहीं बरती जाए। वहीं आमजन को कम से कम परेशानी हो। किसानों ने शुरू किया विरोध रेलवे फाटक एक साल के लिए बंद करने के निर्णय को लेकर क्षेत्र में विरोध भी शुरू हो गया है। किसान नेता हंसराज मंडलोई ने निर्माण एजेंसी और प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लिए बिना ही मुख्य मार्ग को बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन द्वारा प्लेथिको के पास स्थित पुराने मार्ग को (रेलवे गेट न. 244) थोड़ा सुधार दिया जाता, तो हजारों ग्रामीणों को रोजाना 20 किलोमीटर का बेवजह चक्कर लगाने से राहत मिल सकती थी। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो विरोध और तेज होगा।

रिंकू सिंह और सपा से सांसद प्रिया सरोज की सगाई पर दिग्गजों का जमावड़ा, दोनों ने पहनाई एक दूसरे को रिंग

नई दिल्ली लखनऊ स्थित एक होटल में रविवार को इंडियन क्रिकेटर रिंकू सिंह और समाजवादी पार्टी(सपा) से सांसद प्रिया सरोज की सगाई पर दिग्गजों का जमावड़ा लगा। इस सगाई समारोह में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, सांसद डिंपल यादव, जया बच्चन सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। सगाई समारोह से रिंकू सिंह और प्रिया सरोज की तस्वीर भी सामने आई है। इन तस्वीरों में प्रिया सरोज प्याजी रंग के लहंगे में दिखीं तो रिंकू सफेद रंग की शेरवानी पहने दिखे। सगाई की अंगूठी पहनाते वक्त सपा सांसद काफी भावुक हो गईं और फफक-फफक कर रो पड़ीं। इस भावुक क्षण में रिंकू ने उन्हें संभाल लिया। दोनों की जोड़ी को हर ओर से बधाईयां मिल रही हैं। यह जोड़ी इसी साल 18 नवंबर को शादी के बंधन में बंधेगी। सगाई समारोह से कई वीडियो भी सामने आई हैं, जिसमें दोनों एक-दूसरे का हाथ थामे नजर आ रहे हैं। रिंकू सिंह के चेहरे पर खुशी साफ तौर पर देखने को मिल रही है। क्रिकेटर रिंकू सिंह और सपा सांसद प्रिया सरोज की सगाई पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मीडिया से कहा कि हम दोनों परिवारों को बधाई देने आए हैं। विधायक शिवपाल सिंह यादव ने कहा, उन्हें बहुत-बहुत बधाई। वहीं, समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने कहा, मैं उन्हें बधाई देने आया हूं। वे खुश रहें, धन्य रहें, और उनका वैवाहिक जीवन शानदार रहे। बीसीसीआई उपाध्यक्ष और कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने इस जोड़ी को अद्भुत बताते हुए उन्हें हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा, दोनों अपने-अपने क्षेत्र में बेहद सफल हैं। दोनों का प्रदर्शन अपने-अपने फील्ड पर काफी शानदार चल रहा है। एक क्रिकेटर और राजनीतिज्ञ की यह शादी काफी अच्छी रहेगी। दोनों की यह जोड़ी काफी सफल रहेगी। रिंकू सिंह बेहतरीन खिलाड़ी हैं तो वहीं प्रिया सरोज भी शानदार सांसद हैं।  

UPSC के परिक्षार्थियों के इंतजार की घड़ी जल्द समाप्त होने वाली है, जल्द जारी होगा रिजल्ट

नई दिल्ली  दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं की लिस्ट में शामिल संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के परिक्षार्थियों के इंतजार की घड़ी जल्द समाप्त होने वाली है। UPSC द्वारा आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 का रिजल्ट जल्द ही घोषित किया जाएगा। पिछले रुझानों के आधार पर सीएसई रिजल्ट 2025 आमतौर पर परीक्षा के लगभग दो सप्ताह बाद जारी किए जाते हैं। हालांकि आयोग द्वारा सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा रिजल्ट की सटीक तिथि और समय के बारे में आधिकारिक घोषणा का इंतजार है.   कैसे चेक कर सकते हैं रिजल्ट? UPSC की आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं। होम पेज पर उपलब्ध UPSC CSE प्रीलिम्स परीक्षा परिणाम 2025 के लिंक पर क्लिक करें। लॉगिन करने के लिए अपनी पहचान संबंधी जानकारी भरें। स्क्रीन पर अपना रिजल्ट देखें। भविष्य के लिए रिजल्ट का प्रिंटआउट डाउनलोड कर सुरक्षित रखें। 25 मई को हुआ था एग्जाम UPSC प्रीलिम्स 2025 की परीक्षा 25 मई (रविवार) को दो सत्रों में आयोजित हुई थी। इसमें दो वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्र थे, प्रत्येक की अवधि दो घंटे और 200 अंक थे। पिछले कुछ सालों के रुझानों के आधार पर माना जा रहा है कि इस साल भी 10 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने यूपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा दी होगी। आमतौर पर आयोग परीक्षा के 15 दिन के भीतर परिणाम घोषित करता है। पिछले सालों की बात करें तो 2023 में परीक्षा 28 मई को हुई थी और रिजल्ट 12 जून को आया, जबकि 2024 में 16 जून को परीक्षा हुई और 1 जुलाई को रिजल्ट जारी हुआ। इसी आधार पर इस साल भी जून के दूसरे हफ्ते में परिणाम आने की प्रबल संभावना है। रिजल्द के बाद क्या होगा अलगा कदम? जो उम्मीदवार UPSC CSE प्रीलिम्स 2025 में सफल होंगे, उन्हें मुख्य परीक्षा (UPSC CSE Mains 2025) में बैठने का मौका मिलेगा। फिलहाल, उम्मीदवार आयोग की वेबसाइट पर जाकर GS Paper 1 और GS Paper 2 के प्रश्न पत्र भी डाउनलोड कर सकते हैं। साथ ही UPSC ने हाल ही में अपना ऑनलाइन एप्लिकेशन पोर्टल भी अपडेट किया है, जहां अब चार चरणों में पंजीकरण प्रक्रिया को पहले से बेहतर और सुविधाजनक बनाया गया है। इस नए सिस्टम का लिंक https://upsconline.nic.in है।

पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक डायलिसिस पर हैं, अस्पताल से आज फिर किया पोस्ट, हालत बहुत गंभीर

नई दिल्ली  किडनी की बीमारी से जूझ रहे जम्मू-कश्मीर के पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक को 11 मई को राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था और फिलहाल वह डायलिसिस पर हैं। इस बीच वह लगातार सोशल मीडिया के जरिए भावुक पोस्ट लिख रहे हैं। आज उन्होंने फिर एकबार एक्स पर पोस्ट किया और लिखा, ‘हालात बहुत गंभीर। संपर्क सूत्र- 9610544972’ आपको बता दें कि इससे पहले उन्होंने एक भावुक पोस्ट लिखकर कई मुद्दों पर अपनी बातें रखीं। उन्होंने लिखा, ‘नमस्कार साथियों। मैं पिछले लगभग एक महीने के करीब से हस्पताल में भर्ती हूं और किड़नी की समस्या से जूझ रहा हूं। परसों सुबह से मैं ठीक था लेकिन आज फिर से मुझे ICU में शिफ्ट करना पड़ा। मेरी हालत बहुत गंभीर होती जा रही है। मैं रहूं या ना रहूं इसलिए अपने देशवासियों को सच्चाई बताना चाहता हूं।’ सत्यपाल मलिक ने क्या-क्या कहा? जब गवर्नर के पद पर था तो उस समय मुझे 150-150 करोड़ रूपए की रिश्वत की पेशकश भी हुई परंतु में मेरे राजनीतिक गुरु किसान मसीहा स्वर्गीय चौधरी चरणसिंह जी की तरह ईमानदारी से काम करता रहा ओर मेरा ईमान वो कभी डिगा नहीं सकें। जब मैं गवर्नर था उस समय किसान आंदोलन भी चल रहा था, मैंने बग़ैर राजनीतिक लोभ लालच के पद पर रहते हुए किसानों की मांग को उठाया। फिर महिला पहलवानों के आंदोलन में जंतर-मंतर से लेकर इंडिया गेट तक उनकी हर लड़ाई में उनके साथ रहा। पुलवामा हमले में शहीद वीर जवानों के मामले को उठाया, जिसकी आज तक इस सरकार ने कोई जांच नहीं करवाई है। सरकार मुझे CBI का डर दिखाकर झूठे चार्जशीट में फंसाने के बहाने ढूंढ रही है। जिस मामले में मुझे फंसाना चाहते हैं उस टेंडर को मैंने खुद निरस्त किया था, मैंने खुद प्रधानमंत्री जी को बताया था इस मामले में करप्शन है और उन्हें बताने के बाद में मैंने खुद उस टेंडर को कैंसिल किया, मेरा तबादला होने के बाद में किसी अन्य के हस्ताक्षर से यह टेंडर हुआ। मैं सरकार को और सरकारी एजेंसियों को बताना चाहता हूं कि मैं किसान कौम से हूं, मैं ना तो डरने वाला हूं ओर ना ही झूकने वाला हूं।सरकार ने मुझे बदनाम करने में पुरी ताकत लगा दी, अंत में मेरा सरकार से ओर सरकारी एजेंसियों से अनुरोध है कि मेरे प्यारे देश की जनता को सच्चाई जरूर बताना कि आपको छानबीन में मेरे पास मिला क्या? हालांकि सच्चाई तो यह है कि 50 साल से अधिक लंबे राजनीतिक जीवन में बहुत बड़े-बड़े पदों पर देशसेवा करने का मौका मिलने के बाद आज़ भी मैं एक कमरे के मकान में रह रहा हूं ओर कर्ज में भी हूं। अगर आज मेरे पास धन दौलत होती तो मैं प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज करवाता। राहुल ने भी की मुलाकात कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने यहां राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती सत्यपाल मलिक से शुक्रवार को मुलाकात की और कहा कि सत्य की लड़ाई में वह मलिक के साथ खड़े हैं। वह शाम में करीब साढ़े पांच बजे अस्पताल पहुंचे और जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल मलिक के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। कांग्रेस नेता ने उनका इलाज कर रहे डॉक्टर से भी इस बारे में चर्चा की। राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “आज राम मनोहर लोहिया अस्पताल में जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक जी से मिलकर उनका हालचाल जाना। मैं उनके जल्द स्वस्थ होने की आशा करता हूं। सत्य की इस लड़ाई में मैं उनके साथ खड़ा हूं।”  

सरकार अब सीधे 1950 में बने कानून का उपयोग करेगी, असम से बाहर निकाले जाएंगे बांग्लादेशी: हिमंत बिस्वा सरमा

असम  असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राज्य में अब अवैध प्रवासियों की पहचान कर बाहर निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के निष्कासन के लिए विदेशी न्यायाधिकरणों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। इसके बजाय, सरकार अब सीधे 1950 के ‘Immigrants (Expulsion from Assam) Order’ का उपयोग करेगी, जो अभी भी कानूनी रूप से मान्य है। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने क्लॉज 6A पर संविधान पीठ की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया है कि हर मामले में न्यायिक प्रक्रिया की जरूरत नहीं है। असम में प्रवासियों को सीधे निष्कासित करने के लिए पहले से ही एक वैध कानून मौजूद है। हम पहले इस कानून के प्रभाव को नहीं समझ सके क्योंकि हमारे वकीलों ने इस पर ध्यान नहीं दिया था।” जिलाधिकारियों को सीधे कार्रवाई का अधिकार 1950 के इस आदेश के तहत जिलाधिकारी को सीधे आदेश जारी कर प्रवासियों को निष्कासित करने का अधिकार प्राप्त है। मुख्यमंत्री के अनुसार, जहां कोई मामला अदालत में लंबित नहीं है, वहां अब तुरंत कार्रवाई होगी। सरमा ने कहा, “जिन मामलों में न्यायिक प्रक्रिया नहीं चल रही है, वहां अब हम सीधे निष्कासन की प्रक्रिया अपनाएंगे। जरूरत पड़ी तो बार-बार निष्कासन किया जाएगा।” मुख्यमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) प्रक्रिया और विदेशी ट्रिब्यूनल की प्रणाली ने राज्य सरकार की कार्रवाई को धीमा किया है। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और पुराने कानून की पुनः खोज से राज्य सरकार को नया रास्ता मिला है। असम में फिलहाल 100 Foreigners Tribunals संचालित हो रहे हैं, जो 2005 से कार्यरत हैं। ये ट्रिब्यूनल असम पुलिस की बॉर्डर विंग द्वारा चिह्नित संदिग्ध नागरिकों की नागरिकता की जांच करते हैं, जिनमें से अधिकांश को बांग्लादेशी नागरिक माना जाता है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यह नई प्रक्रिया उन मामलों पर लागू नहीं होगी जो पहले से न्यायिक प्रक्रिया में हैं, बल्कि केवल उन्हीं मामलों पर जहां कोई अदालती कार्यवाही नहीं हो रही।  

सीबीएसई छात्र राज्य खेलों में नहीं लेंगे भाग, सत्र 2025-26 से यह नियम लागू होगा: SGFI का बड़ा फैसला

बिलासपुर छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश के सीबीएसई स्कूलों के छात्र खिलाड़ियों को एक बड़ा झटका लगा है। अब वे राज्य सरकार द्वारा आयोजित विकासखंड, जिला, संभाग और राज्य स्तर की शालेय खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) ने सीबीएसई को एक स्वतंत्र खेल इकाई के रूप में मान्यता दी है। इसके चलते यह फैसला लिया गया है।   सीबीएसई छात्र राज्य खेलों में नहीं लेंगे भाग सत्र 2025-26 से यह नियम लागू होगा। इसका मतलब यह है कि अब सीबीएसई स्कूलों के खिलाड़ी राज्य स्तर पर अपने हुनर का प्रदर्शन नहीं कर सकेंगे। वे सीधे SGFI द्वारा आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में ही भाग ले सकेंगे। लेकिन यह मंच बेहद सीमित अवसर देता है, जिससे कई खिलाड़ियों के भविष्य पर असर पड़ेगा। बिलासपुर के कई होनहार खिलाड़ी, जो पिछले वर्षों में जिला और संभाग स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं, अब इस बदलाव से प्रभावित होंगे। वे अब अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए केवल SGFI की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर निर्भर रहेंगे। स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया का फैसला दरअसल, 2024-25 में SGFI ने सीबीएसई को अपनी 68वीं राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वतंत्र इकाई के रूप में शामिल किया था। उस समय सीबीएसई का खुद का खेल ढांचा पूरी तरह तैयार नहीं था, इसलिए राज्य सरकार ने छात्रों के हित में उन्हें अस्थायी छूट दी थी। लेकिन अब सीबीएसई ने अपना स्वतंत्र खेल ढांचा तैयार कर लिया है और उसी के आधार पर छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग ने सीबीएसई छात्रों को राज्य स्तरीय खेलों से बाहर कर दिया है।   छात्र राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में ले सकेंगे भाग SGFI की आधिकारिक वेबसाइट पर भी साफ तौर पर लिखा है कि सीबीएसई बोर्ड के छात्रों ने 2024-25 की प्रतियोगिता में स्वतंत्र रूप से भाग लिया और मेडल भी जीते। इसका मतलब है कि सीबीएसई अब SGFI की निगरानी में अपनी प्रतियोगिताएं आयोजित करने में सक्षम है। अब सीबीएसई बोर्ड के छात्र राज्य स्तरीय स्कूल खेलों में भाग नहीं ले पाएंगे। SGFI ने उन्हें स्वतंत्र इकाई माना है, जिससे अब वे सिर्फ राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में ही खेल सकेंगे। यह फैसला कई होनहार खिलाड़ियों को प्रभावित कर सकता है।

चंदन नगर से कालानी नगर लिंक रोड पर मार्किंग के लिए बिछेगी सेंटर लाइन, 60 फीट चौड़ी सडक़ बनाने की तैयारी

 इंदौर चंदन नगर से कालानी नगर तक बनने वाली लिंक रोड की चौड़ाई को लेकर नया विवाद उत्पन्न हो गया है। नगर निगम इस सड़क की चौड़ाई 60 फीट रखना चाहता है, जबकि रहवासी इसे 40 फीट करने पर अड़े हुए हैं। निगम का तर्क है कि यह सड़क चंदन नगर और एयरपोर्ट रोड के ट्रैफिक को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, इसलिए इसकी चौड़ाई 60 फीट रखना आवश्यक है। दूसरी ओर, रहवासियों का कहना है कि वर्तमान में यह सड़क कहीं 20 तो कहीं 25 फीट चौड़ी है। यदि इसे 60 फीट करने के बजाय 40 फीट किया जाए, तो कई मकान टूटने से बचाए जा सकते हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना की टीम ने शुक्रवार को क्षेत्र का दौरा किया। टीम तैयार कर रही प्रभावित मकानों की लिस्ट टीम उन लोगों की सूची तैयार कर रही है, जिनके मकान सड़क की चौड़ाई 60 फीट रखने की स्थिति में प्रभावित हो रहे हैं। निगम ऐसे लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए फ्लैट आवंटित करने के लिए तैयार है, लेकिन रहवासी सड़क की चौड़ाई कम करने की मांग पर अड़े हैं। उनका कहना है कि उन्हें विस्थापित किया गया, तो उनके सामने जीवन यापन का संकट खड़ा हो जाएगा। रहवासी ईद के बाद कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से मिलकर सड़क की चौड़ाई कम करने की मांग करेंगे। महापौर परिषद की मिल चुकी है स्वीकृति निगम चंदन नगर से एयरपोर्ट के लिए सीधी कनेक्टिविटी के लिए 60 फीट चौड़ी लिंक रोड बनाने की योजना बना रहा है। महापौर परिषद सम्मेलन में इस पर स्वीकृति भी मिल चुकी है। यह सड़क चंदन नगर चौराहा से नगीन नगर, नंदन नगर और कालानी नगर होते हुए एयरपोर्ट रोड तक बनाई जाएगी। कालानी नगर का हिस्सा पहले से बना हुआ है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि नंदन नगर तक कुछ मकान चौड़ीकरण में प्रभावित हो रहे हैं। जिन लोगों के मकान पूरी तरह से जा रहे हैं, उन्हें पीएम योजना में आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। हवासी माने और टीम ने दोबारा पहुंचकर मार्किंग शुरू की। प्रस्तावित सड़क का रूट अब नंदन नगर और मोहता बाग होते हुए कालानी नगर तक तय किया गया है। पहले यह लिंक रोड एयरपोर्ट से जोड़ने के लिए बनाई जानी थी, लेकिन 1600 से अधिक बाधक सामने आने के कारण रूट में बदलाव किया गया। नगर निगम के मुताबिक, इस निर्माण कार्य के तहत चंदन नगर क्षेत्र में लगभग 150 से 200 मकान प्रभावित होंगे। महापौर परिषद की हालिया बैठक में इस सड़क के निर्माण को मंजूरी दी गई थी। इसके लिए 25 करोड़ रुपए के टेंडर स्वीकृत किए गए हैं। सोमवार को जहां विरोध के चलते सर्वे और सेंट्रल लाइन का काम रोकना पड़ा था, वहीं निगमायुक्त के हस्तक्षेप और पुनर्वास के आश्वासन के बाद मंगलवार को यह कार्य दोबारा शुरू किया गया। आसान नहीं होगी शिफ्टिंग पार्षद पति रफीक खान का कहना है कि यह शिफ्टिंग आसान नहीं होगी। कोई घर के बाहर पंचर की दुकान चला रहा है, तो कोई चाय की। ऐसे में यदि इन्हें शिफ्ट किया गया, तो उनके व्यवसाय का क्या होगा? चौड़ाई 60 के बजाय 40 फीट कर दी जाए, तो अधिकांश मकान टूटने से बच जाएंगे। निश्शुल्क देने होंगे आवास नगर निगम को प्रधानमंत्री आवास निश्शुल्क प्रदान करने होंगे। कुछ सप्ताह पहले ही मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इस संबंध में स्पष्ट दिशा निर्देश दिए थे। कोर्ट ने आरई-2 की जद में आ रहे लीजधारकों को निश्शुल्क आवास उपलब्ध कराने का आदेश दिया था। आयुक्त ने की सुलझाने की कोशिश इस घटनाक्रम के बाद नगर निगम के आयुक्त शिवम वर्मा द्वारा इस मामले को सुलझाने की कोशिश की गई। उन्होंने कांग्रेस पार्षद रफीक खान से चर्चा की और फिर उन्हें नगर निगम में बुलवाकर अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर के साथ उनकी मीटिंग कराई गई। इस मीटिंग में फैसला लिया गया कि पहले सर्वे करके यह देख लिया जाए कि कितने मकान का कितना हिस्सा सडक़ के कारण तोडऩा पड़ेगा। जब यह आंकड़े सामने आ जाएंगे, तब व्यवस्थापन के बारे में फैसला लिया जाएगा। इस पर कांग्रेस पार्षद भी सहमत थे। अब आज से नगर निगम की टीम द्वारा चंदन नगर क्षेत्र में सर्वे की कार्रवाई को अंजाम दिया जाएगा। जिनके मकान पूरे टूटेंगे उन्हें कितने फ्लैट देने होंगे     सेंट्रल लाइन डालने के बाद मकानों पर निशान भी लगा दिए गए हैं। सड़क की चौड़ाई 60 फीट रखने की स्थिति में जिन लोगों के मकान पूरी तरह टूट रहे हैं, उनके परिवार का सर्वे चल रहा है। पता लगाया जा रहा है कि कितने फ्लैट देने होंगे और कहां दिए जा सकते हैं। रहवासी चौड़ाई कम करने की मांग कर रहे हैं, हालांकि इस संबंध में अब तक कोई निर्देश नहीं मिले हैं। – डीआर लोधी, अधीक्षण यंत्री नगर निगम इंदौर  

विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में दक्षिण अफ्रीका से भिड़ना एक अलग चुनौती होगी: नाथन लियोन

ऑस्ट्रेलिया ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के बीच 11 जून से वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल खेला जाएगा। ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज स्पिनर नाथन लियोन का मानना है कि सभी प्रारूपों में आईसीसी ट्रॉफी जीतने का अनुभव होने के बावजूद उनकी टीम के लिए विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में दक्षिण अफ्रीका से भिड़ना एक अलग चुनौती होगी क्योंकि यह मुकाबला ड्यूक गेंद के साथ विदेशी परिस्थितियों में खेला जाएगा। ऑस्ट्रेलिया 11 जून से लॉर्ड्स में होने वाले डब्ल्यूटीसी फाइनल में गत विजेता के रूप में उतरेगा। उनकी टीम में पिछले डब्ल्यूटीसी फाइनल के अलावा 2015 वनडे विश्व कप, 2021 टी20 विश्व कप और 2023 वनडे विश्व कप जीतने वाले खिलाड़ी भी शामिल हैं। आईसीसी ने लियोन के हवाले से कहा, ‘‘ हमारी टीम में तीन (50 ओवर) विश्व कप और टी20 विश्व कप जीतने वाले खिलाड़ियों के साथ दो साल पहले विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल जीतने वाले खिलाड़ियों का अनुभव है। यह अनुभव और बड़े मैचों के दबाव झेलने की क्षमता हमारे पक्ष में है। लेकिन जब आप मैदान में उतर जाते है तो अतीत के परिणाम का कोई मतलब नहीं रह जाता है।’’ इस अनुभवी ऑफ स्पिनर ने कहा, ‘‘दक्षिण अफ्रीका के पास कुछ विश्व स्तरीय बल्लेबाज हैं और जाहिर है कि उनके पास कुछ अविश्वसनीय गेंदबाज भी हैं। ऐसे में यह एक अच्छी चुनौती होगी।’’ इंग्लैंड की परिस्थितियों गेंदबाजों को अच्छी स्विंग मिलती है। ऑस्ट्रेलिया में तेज गेंदबाजों को अधिक उछाल मिलता है। ऑस्ट्रेलिया घरेलू मैचों के लिए कूकाबुरा गेंदों का उपयोग करता है। यह गेंद थोड़ी पुरानी होने के बाद स्पिनरों के लिए मददगार होती है। लियोन ने कहा, ‘‘यह मुकाबला ड्यूक गेंद से विदेशी परिस्थितियों में होगा। दुनिया के दो सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी आक्रमण एक दूसरे के सामने होंगे। यह इस मुकाबले को और रोचक बनायेगा। ऐसे में यह बल्लेबाजों को कड़ी चुनौती का सामना करना होगा। ’’  

उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए सीएम योगी के निर्देश पर जल्द पूरे होंगे 20 विभागों से जुड़े 95 बड़े प्रोजेक्ट

लखनऊ  उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार प्रदेश में बड़े स्तर पर सरकारी इन्फ्रास्ट्रक्चर को भविष्य की जरूरतों के अनुसार निर्मित करने पर फोकस कर रही है। इसी कड़ी में सीएम योगी के निर्देश को धरातल पर उतारने के लिए 20 विभागों से संबंधित बड़े निर्माण कार्यों को पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग द्वारा इस विषय में एक खाका तैयार किया गया है जिसके अंतर्गत भवन सेल द्वारा 95 निर्माण कार्यों को 18767 करोड़ रुपए की लागत से पूरा किया जाएगा। इसमें विभागों के कार्यालयों समेत विभिन्न प्रकार के आवासीय-अनावासीय अवसंरचनाओं का निर्माण शामिल है। कार्ययोजना के अनुसार गृह विभाग के सर्वाधिक 35 कार्यों को 6550 करोड़ की लागत से पूरा करने का लक्ष्य है। जबकि, चिकित्सा शिक्षा, कारागार व उच्च शिक्षा विभाग के भी कई बड़े निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं। उल्लेखनीय है कि इन 95 निर्माण कार्यों में से 26 की प्रगति 76 से 99 प्रतिशत है, जबकि 10 कार्यों की प्रगति 51 से 75 प्रतिशत के बीच है। बड़ी बात यह है कि 17 कार्यों को रिकॉर्ड समय में पूरा भी कर लिया गया है। लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार की गई कार्य योजना के अनुसार, गृह विभाग के बाद ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन) मोड पर दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा कार्य चिकित्सा शिक्षा विभाग के लिए पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित है। इसमें कुल 5357 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। वहीं, उच्च शिक्षा विभाग के 6 निर्माण कार्यों को 773 करोड़ की लागत से पूरा किया जाएगा। कारागार विभाग के कुल 7 निर्माण कार्यों को भी 1334 करोड़ रुपए से पूरा करने की तैयारी है। इसी प्रकार, न्याय विभाग के कुल 3 कार्यों को 1227 करोड़ की लागत से पूरा किया जाएगा। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए 3 कार्यों को 312 करोड़ की लागत से पूरा करने का लक्ष्य है। वहीं, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग विभाग के लिए 324 करोड़ रुपए की लागत से 3 निर्माण कार्यों को पूरा किया जाएगा। कार्ययोजना के अनुसार, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के लिए 229 करोड़ की लागत से 2 कार्य, राजस्व एवं आपदा विभाग के लिए 350 करोड़ से 2 कार्य, श्रम विभाग के लिए 149 करोड़ की लागत से 2 कार्य तथा राज्य संपत्ति विभाग के लिए 2 निर्माण कार्यों को 182 करोड़ की लागत से पूरा किया जाएगा। इसी प्रकार, आयुष विभाग के लिए 267 करोड़ रुपए, माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए 153 करोड़ रुपए, खेल विभाग के लिए 388 करोड़, नागरिक उड्डयन विभाग के लिए 103 करोड़, नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के लिए 95 करोड़, वित्त विभाग के लिए 187 करोड़, पशुधन विभाग के लिए 277 करोड़, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के लिए 434 करोड़ तथा धर्मार्थ कार्य विभाग के लिए 65 करोड़ की लागत से एक-एक कार्य को पूरा किया जाना प्रस्तावित है। लोकनिर्माण विभाग द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना के अनुसार भवन सेल द्वारा जिन 20 विभागों के 95 कार्यों को पूरा किया जाना है उनकी प्रगति भी उल्लेखनीय है। खास बात यह है कि इनमें से 17 कार्यों को रिकॉर्ड समय के अंदर पूरा किया जा चुका है। वहीं, अन्य कार्यों को भी पूरा करने पर तेज गति से कार्य हो रहा है। 95 निर्धारित कार्यों में से 26 की निर्माण प्रगति 76 से 99 प्रतिशत के बीच है। इसी प्रकार, 50 से 75 प्रतिशत निर्माण प्रगति वाले कार्यों की संख्या 10 है, जबकि 5 कार्य ऐसे हैं जिनकी पूर्ति प्रगति 26 से 50 प्रतिशत के बीच है और इनमें से 4 कार्य कारागार विभाग से जुड़े हैं। उल्लेखनीय है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के 21 निर्धारित कार्यों में से 9 पूरे हो चुके हैं जबकि 6 कार्यों की प्रगति 76 से 99 प्रतिशत तथा 1 कार्य की प्रगति 50 से 75 प्रतिशत के बीच है। इसी प्रकार, गृह विभाग के 35 में से 2 कार्य पूरे हो चुके हैं जबकि 12 कार्यों की प्रगति 76 से 99 प्रतिशत के बीच है।

भोजन हमारी ऊर्जा का स्रोत है, खाद्य सुरक्षा पर ध्यान देकर हम अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं : जेपी नड्डा

नई दिल्ली  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शनिवार को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर कहा कि खाद्य सुरक्षा पर ध्यान देना स्वास्थ्य और कल्याण के लिए जरूरी है। हर साल 7 जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाया जाता है, ताकि असुरक्षित भोजन से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को रोका, पहचाना और नियंत्रित किया जा सके। इस साल का थीम ‘खाद्य सुरक्षा: विज्ञान को अमल में लाना’ है, जो खाद्य जनित बीमारियों को कम करने, लागत बचाने और जिंदगियां बचाने में वैज्ञानिक ज्ञान के महत्व पर जोर देता है। जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर हम स्वच्छ और सुरक्षित भोजन की अहमियत को समझते हैं, जो स्वास्थ्य की रक्षा करता है और खाद्य जनित बीमारियों को रोकता है। भोजन हमारी ऊर्जा का स्रोत है। खाद्य सुरक्षा पर ध्यान देकर हम अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं।” उन्होंने कहा कि इस साल का थीम विज्ञान और तकनीक के जरिए खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने का जश्न मनाता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने भी एक्स पर पोस्ट किया, जिसमें लिखा है, “विज्ञान खाद्य सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है। प्रयोगशालाओं से लेकर मानक तय करने तक, विज्ञान हमें सही विकल्प चुनने में मदद करता है। समझदारी से चुनें, सुरक्षित खाएं!” विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या रासायनिक पदार्थों से दूषित भोजन 200 से ज्यादा बीमारियों का कारण बन सकता है। सुरक्षित भोजन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन सलाह देता है कि भोजन को साफ रखें, कच्चे और पके भोजन को अलग करें, अच्छी तरह पकाएं, सुरक्षित तापमान पर रखें और खाना बनाते समय साफ पानी का इस्तेमाल करें। केंद्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के मौके पर पोस्ट किया, जिसमें कहा, “विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर हम सुरक्षित खाद्य आदतों को अपनाने का संकल्प लें। सुरक्षित भोजन सभी की जिम्मेदारी है और यह स्वस्थ, मजबूत और सुरक्षित कल की नींव है।”

रूस भारत को Su-57E की पूर्ण सोर्स कोड एक्सेस देने को तैयार, रूस तोड़ेगा अमेरिका का घमंड !

रूस रूस ने भारत को Su-57 लड़ाकू विमान की सोर्स कोड तक पूरी पहुंच की पेशकश की, भारत अब अमेरिका के F-35 प्रस्ताव से इसकी तुलना कर रहा है। रूस ने भारत को अपने अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान Su-57E  की तकनीक के साथ एक बड़ा ऑफर दिया है। इस प्रस्ताव में न केवल विमान की आपूर्ति शामिल है, बल्कि उसके पूरे सॉफ्टवेयर सोर्स कोड तक पहुंच तकनीकी हस्तांतरण और भारत में इसका स्थानीय निर्माण भी प्रस्तावित है।यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत अमेरिका के F-35A स्टील्थ फाइटर को खरीदने पर भी विचार कर रहा है। अब भारत के सामने यह रणनीतिक विकल्प है कि वह रूस के प्रस्ताव को स्वीकार करे या अमेरिका के साथ जाए।   रूस के प्रस्ताव में क्या है खास?  रूस भारत को Su-57E की पूर्ण सोर्स कोड एक्सेस देने को तैयार है, जिससे भारत इसमें अपने हथियार और एवियोनिक्स सिस्टम जोड़ सकेगा।यह कदम भारत को स्वदेशीकरण की दिशा में बड़ा तकनीकी लाभ देगा। रूस, भारत में इस विमान का निर्माण करने की अनुमति  भी देगा, जिससे ‘ मेक इन इंडिया ’ को बल मिलेगा। भारत इसमें अपनी मिसाइलें जैसे अस्त्र, रुद्रम * और अन्य हथियार जोड़ सकता है।        F-35A बनाम Su-57  अमेरिका का F-35A विमान तकनीकी रूप से बहुत उन्नत माना जाता है लेकिन अमेरिका पूर्ण तकनीक साझा नहीं करता । अमेरिका भारत को F-35 की केवल सीमित संख्या और सीमित क्षमताओं के साथ देने पर सहमत है। वहीं रूस न सिर्फ  पूरी टेक्नोलॉजी देने को तैयार है बल्कि  उत्पादन का अधिकार भी देगा। भारत की रणनीतिक दुविधा भारत का अमेरिका के साथ QUAD  जैसे रणनीतिक समझौते हैं, वहीं रूस लंबे समय से भारत का भरोसेमंद रक्षा साझेदार रहा है। इस समय भारत को यह निर्णय लेना है कि वह रणनीतिक दृष्टि से किस साझेदार पर अधिक विश्वास कर सकता है । टेक्नोलॉजी ट्रांसफर देने वाला रूस या  राजनयिक सहयोग देने वाला अमेरिका । रूस का यह प्रस्ताव भारत की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार बना सकता है। अमेरिका के साथ जुड़ने के राजनीतिक लाभ हैं, लेकिन तकनीकी और सामरिक आत्मनिर्भरता के लिए रूस का प्रस्ताव बेहद लुभावना है।

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