LATEST NEWS

एपस्टीन फाइलों में भी इसका जिक्र, ट्रंप का नया नहीं है नोबेल शांति पुरस्कार प्रेम

वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर दिखाया गया प्रेम दुनिया में किसी से छिपा नहीं है। ट्रंप ने हर तरीके से प्रयास करके आखिरकार वेनेजुएला की मचाडो से नोबेल शांति पुरस्कार ले ही लिया। इन सब के बीच अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी की जा रही एपस्टीन फाइल्स में भी डोनाल्ड ट्रंप के नोबेल पुरस्कार के प्रति प्रेम का जिक्र किया गया है। यहां पर एक ईमेल में एपस्टीन ट्रंप के सहयोगी को लिखता है कि डोनाल्ड को अगर इस बात का पता चलेगा कि नोबेल समिति का चेयरमैन यहां रुका हुआ है तो उसका सिर फट जाएगा। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी की गई बदनाम फाइनेंशर जेफ्री एपस्टीन की फाइलों में सामने आया है कि उसने नोबेल शांति पुरस्कार समिति के चैयरमेन रहे थॉरबोर्न यागलैंड के साथ अपने संबंधों के जरिए बिल गेट्स और स्टीव बैनन जैसे कई प्रभावशाली लोगों के साथ दोस्ती की थी। गौरतलब है कि यागलैंड 2009 से लेकर 2015 तक नोबेल समिति के प्रमुख रहे थे। फाइल्स से मिली जानकारी के मुताबिक यागलैंड से एपस्टीन की मुलाकात करवाने वाले नॉर्वेजियन राजनयिक थे, जो कि इजरायल और फिलिस्तीन के बीच ओसलो अकॉर्ड साइन करवाने के लिए जाने जाते हैं। यॉगलैंड का कई बार जिक्र यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलों में यागलैंड का नाम कई हजार बार सामने आता है। हालांकि अभी तक जितनी भी फाइलें सामने आई हैं, उसमें पुरस्कार के लिए किसी के नाम पर लॉबिंग की बात सामने नहीं आई है, लेकिन इतना साफ है कि एपस्टीन ने यागलैंड से अपनी दोस्ती के चलते कई बड़े नामों से अपनी दोस्ती मजबूत की। रिपोर्ट्स के मुताबिक एपस्टीन ने एक मेल में इस बात की जानकारी दी है कि 2010 में उसने यागलैंड को न्यूयॉर्क और पेरिस स्थिति अपनी संपत्तियों में ठहरने की मदद की थी। डोनाल्ड ट्रंप के करीबी को किया मैसेज यागलैंड का जिक्र करते हुए एपस्टीन ने 2018 में डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी स्टीव बैनन को भी एक मेल किया था, जिसमें उसने ट्रंप के शांति पुरस्कार के प्रति प्रेम का जिक्र किया था। एक मेल में एपस्टीन ने लिखा, “डोनाल्ड का सिर फट जाएगा अगर उसे पता चले कि तुम अब उस व्यक्ति के दोस्त हो जो सोमवार को नोबेल शांति पुरस्कार का फैसला करेगा।” कई लोगों को नोबेल समिति के अध्यक्ष के नाम पर फंसाने की कोशिश एपस्टीन ने यागलैंड के नाम पर कई लोगों के साथ दोस्ती स्थापित करने की कोशिश की थी। एपस्टीन ने यागलैंड का नाम लेकर वाइट हाउस की पूर्व कानूनी सलाहकार कैथी रूमलर को भी एक मेल भेजा था, जिसमें उसने लिखा, “नोबेल शांति पुरस्कार के प्रमुख मिलने के लिए आ रहे हैं, क्या आप जुड़ना चाहेंगी?” इसके अलावा एपस्टीन ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी लैरी समर्स को भी मेल किया था, जिसमें उसने लिखा, “नोबेल शांति पुरस्कार के प्रमुख मेरे यहां ठहरे हुए हैं, अगर आपकी रुचि हो।”2014 में एपस्टीन ने बिल गेट्स को लिखे एक ईमेल में बताया कि यागलैंड को काउंसिल ऑफ यूरोप के प्रमुख के रूप में दोबारा चुना गया है। इसके जवाब में गेट्स ने लिखा, “मेरा ख्याल है कि उनकी शांति पुरस्कार समिति की भूमिका भी अब अनिश्चित होगी?” गौरतलब है कि यागलैंड के नोबेल पुरस्कार समिति के अध्यक्ष के तौर पर रहते 2009 में बराक ओबामा और 2012 में यूरोपीय संघ को नोबेल शांति पुरस्कार मिला था। एपस्टीन फाइ्ल्स में नाम आने के बाद यागलैंड को ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। इसके बाद नार्वे की आर्थिक अपराध इकाई इन मामलों की जांच कर रही है।

दुनिया के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर को ईरान के पास तैनात, ऑपरेशन मादुरो में ट्रंप की अहम कदम

न्यूयॉर्क अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत के बीच तनाव फिर चरम पर है. अमेरिका ने दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS गेराल्ड आर. फोर्ड को पारस की खाड़ी में भेजने का फैसला किया है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जानकारी चार अमेरिकी अधिकारियों ने दी है. इससे पहले खबरें थीं कि USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश को भेजा जाएगा, लेकिन अब फोर्ड को चुना गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर बातचीत फेल हुई तो अमेरिका ईरान पर हमला करने को तैयार है. क्या हुआ नया?     USS गेराल्ड आर. फोर्ड की तैनाती: यह दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर है. इसमें 100 से ज्यादा लड़ाकू विमान, हजारों सैनिक और एस्कॉर्ट जहाज होते हैं.     पहले यह, यह कैरेबियन सागर में था. वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी से जुड़े ऑपरेशन में शामिल था.     अब इसे मिडिल ईस्ट भेजा जा रहा है. अप्रैल अंत या मई तक यह घर (नॉरफोक, वर्जीनिया) नहीं लौटेगा – क्रू के लिए लंबी तैनाती और मेंटेनेंस में देरी होगी.     पहले की रिपोर्ट: वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कहा था कि USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश (वर्जीनिया तट पर ट्रेनिंग कर रहा) को भेजा जा सकता है. लेकिन अब फोर्ड को चुना गया.     पहले से मौजूद ताकत: USS अब्राहम लिंकन कैरियर और कई अन्य जहाज पहले से मिडिल ईस्ट में तैनात हैं. गेराल्ड आर फोर्ड क्लास  यह अमेरिकी जंगी जहाज है दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर है. अपने क्लास का पहला विमानवाहक पोत, जिसे मई 2017 में कमीशन किया गया. इसके चार और पोत तैयार हो रहे हैं. यह 337 मीटर लंबा है. इसकी बीम 748 मीटर की है. इसका फुल लोड डिस्प्लेसमेंट 1 लाख टन है. इसपर 78 मीटर चौड़ा फ्लाइट डेक है. इसपर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्चिंग सिस्टम लगा है. एडवांस्ड अरेस्टिंग गीयर की सुविधा है. इसपर एक बार में 75 एयरक्राफ्ट तैनात किए जा सकते हैं. इसके आलावा यह 4539 सैनिकों को अपने साथ ले जा सकता है.  ट्रंप का बयान: हमला करने को तैयार ट्रंप ने इजरायली चैनल N12 को इंटरव्यू में कहा…     या तो हम डील करेंगे, या बहुत सख्त कदम उठाएंगे – जैसे पिछली बार.      अगर ईरान के साथ बातचीत फेल हुई, तो सैन्य कार्रवाई होगी.     ट्रंप मैक्सिमम प्रेशर नीति अपना रहे हैं – प्रतिबंध, सैन्य तैनाती और धमकी से ईरान को नया परमाणु समझौता करने पर मजबूर करना. क्यों हो रहा है यह सब?     ईरान का परमाणु कार्यक्रम: ईरान यूरेनियम को हथियार बनाने लायक स्तर तक समृद्ध कर रहा है. अमेरिका और इजरायल इसे बड़ा खतरा मानते हैं.     ट्रंप का रुख: 2018 में ट्रंप ने पुराना समझौता (JCPOA) तोड़ा था. अब नई डील चाहते हैं – ईरान को पुरानी से बेहतर शर्तें माननी होंगी.     रणनीतिक महत्व: मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ताकत बढ़ाकर ट्रंप ईरान को दबाव में रखना चाहते हैं. कैरियर से F-35 जैसे स्टेल्थ फाइटर इस्तेमाल हो सकते हैं.     क्षेत्रीय तनाव: इजरायल-ईरान संघर्ष, हूती हमले और गाजा युद्ध के बीच अमेरिका अपने सहयोगियों (इजरायल, सऊदी) की रक्षा कर रहा है. क्या होगा आगे? फोर्ड की तैनाती से अमेरिका की हवाई ताकत दोगुनी हो जाएगी. अगर दूसरा कैरियर (बुश) भी आया, तो क्षेत्र में अमेरिकी मौजूदगी और मजबूत होगी. विशेषज्ञ कहते हैं कि यह ‘सिग्नलिंग’ है – अमेरिका दिखा रहा है कि वह गंभीर है. दुनिया शांति की अपील कर रही है, ताकि बातचीत से हल निकले. अमेरिका ईरान को परमाणु डील के लिए मजबूर करने के लिए सैन्य ताकत बढ़ा रहा है. दुनिया के सबसे बड़े कैरियर की तैनाती तनाव को और बढ़ा रही है. फिलहाल बातचीत का मौका है, लेकिन फेल होने पर मिडिल ईस्ट में बड़ा संघर्ष हो सकता है.   

तेल खरीद पर ट्रंप के आरोपों पर रूस ने किया पर्दा फ़ाश, भारत में असमंजस

मॉस्को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के बाद भारत-रूस संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ट्रंप ने भारत पर लगे टैरिफ को घटाते हुए सोमवार को कहा था कि भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है, लेकिन रूस ने इस दावे पर साफ शब्दों में कहा है कि भारत की ओर से उसे ऐसा कोई आधिकारिक संदेश नहीं मिला है। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय (क्रेमलिन) के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को कहा कि मॉस्को भारत के साथ अपने रणनीतिक साझेदारी वाले रिश्तों को बेहद अहम मानता है और उन्हें आगे भी मज़बूत करना चाहता है।   ट्रंप का बड़ा ऐलान ट्रंप ने एक दिन पहले घोषणा की थी कि अमेरिका और भारत के बीच एक नया व्यापार समझौता हुआ है। इसके तहत अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात पर लगने वाला टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया जाएगा। इसी के साथ ट्रंप ने दावा किया था कि इसके बदले भारत रूस से तेल खरीद बंद करेगा और अमेरिका से ज़्यादा तेल खरीदेगा। ट्रंप ने यह भी कहा था कि भारत के रूसी तेल खरीदने से यूक्रेन युद्ध में रूस को अप्रत्यक्ष रूप से मदद मिल रही है। रूस की दो टूक इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए क्रेमलिन के प्रवक्ता पेसकोव ने कहा, “रूस भारत के साथ संबंधों पर ट्रंप की टिप्पणियों का ध्यान से विश्लेषण कर रहा है।” जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद करने का फैसला किया है, तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया, “अब तक तो हमने भारत की ओर से रूस से तेल खरीद रोकने को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं सुना है।” उन्होंने कहा कि नई दिल्ली भारत-रूस साझेदारी को भी उतनी ही अहमियत देता है। पेसकोव ने कहा, “हम द्विपक्षीय अमेरिकी-भारतीय संबंधों का सम्मान करते हैं लेकिन हम रूस और भारत के बीच एक उन्नत रणनीतिक साझेदारी के विकास को भी उतना ही महत्व देते हैं। भारत के साथ हमारे रिश्ते हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और हम उन्हें आगे भी विकसित करना चाहते हैं।” तेल और कूटनीति यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद 2022 से भारत रियायती रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है। पश्चिमी देशों ने इस पर नाराज़गी जताई है और रूस की ऊर्जा आय को सीमित करने के लिए कई प्रतिबंध लगाए हैं। हालांकि भारत का रुख हमेशा यही रहा है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है। बहरहाल, तस्वीर अभी साफ नहीं है क्योंकि एक तरफ ट्रंप का बड़ा दावा है, तो दूसरी तरफ रूस का इनकार। भारत की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे में यह साफ है कि तेल, व्यापार और कूटनीति का यह खेल अभी जारी रहेगा।

ट्रंप से टैरिफ डील फाइनल, PM मोदी ने कहा– आत्मविश्वास से लिख रहा भारत नई आर्थिक कहानी

नई दिल्ली भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच वार्ता के बाद टैरिफ डील पर बड़ा फैसला हुआ है। अमेरिका ने अब भारत पर लगने वाले टैरिफ को सीधे 50 फीसदी से घटाकर 18 पर्सेंट कर दिया है। इसे भारत और अमेरिका के रिश्तों में सुधार की नई पहल के तौर पर देखा जा रहा है। इसके अलावा भारत के एक्सपोर्ट बाजार के लिहाज से भी यह अहम है। इस फैसले को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार रात को ही एक ट्वीट किया था और डोनाल्ड ट्रंप को धन्यवाद दिया था। अब उन्होंने एक और पोस्ट की है, जिसमें आत्मविश्वास के जरिए विकसित भारत के रास्ते में आगे बढ़ने की बात कही है।   पीएम नरेंद्र मोदी ने इस पोस्ट में टैरिफ डील का जिक्र नहीं किया, लेकिन उनकी बात को उससे ही जोड़कर देखा जा रहा है। पीएम मोदी ने लिखा, ‘आत्मविश्वास वह बल है जिससे सब कुछ संभव है और विकसित भारत के सपने को साकार करने में यही शक्ति काम आएगी।’ मोदी ने यह टिप्पणी अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति बनने के कुछ घंटों बाद की है। इस समझौते के तहत वाशिंगटन भारतीय वस्तुओं पर जवाबी शुल्क को मौजूदा 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘आत्मविश्वास वह शक्ति है जिसके बल पर सब कुछ संभव है। विकसित भारत के सपने को साकार करने में देशवासियों की यही शक्ति बहुत काम आने वाली है।’ मोदी ने संस्कृत का यह श्लोक भी साझा किया- ”श्रीर्मङ्गलात् प्रभवति प्रागल्भ्यात् सम्प्रवर्धते। दाक्ष्यात् तु कुरुते मूलं संयमात् प्रतितिष्ठत।’ उन्होंने इस श्लोक का अर्थ समझाते हुए लिखा, ‘शुभ कार्यों से धन अर्जित होता है। यह साहस और आत्मविश्वास से बढ़ता है, कुशलता एवं दक्षता से स्थिर रहता है और संयम द्वारा सुरक्षित होकर राष्ट्र की प्रगति में सहायक बनता है।’ ट्रंप के दावों पर अब भी सस्पेंस, भारत सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार बता दें कि भारत पर अमेरिका ने मोटे टैरिफ लादे थे। इसके बाद कई बार ऐसा हुआ कि दोनों देशों के बीच टैरिफ खत्म करने को लेकर बात कई बार बात हुई, लेकिन सिरे नहीं चढ़ सकी। अब इस डील के बाद माना जा रहा है कि अमेरिका और भारत के बीच संबंधों में सुधार हो सकता है। अब नई डील के साथ ही भारत पर अमेरिकी टैरिफ काफी कम हो गया और यह पाकिस्तान, चीन समेत अपने तमाम पड़ोसी देशों के मुकाबले कम है। हालांकि अब भी इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत ने अमेरिकी उत्पादों की भारतीय बाजार में एंट्री और रूस से तेल खरीद रोकने पर सहमति जताई है या नहीं।

बिना शर्त सरेंडर! हम जानते हैं कहां छिपा हैं खामेनेई …अमेरिका ने रवाना किए 30 फाइटर जेट

वाशिंगटन ईरान और इजरायल जंग के बीच भीषण जंग चल रही है. इजरायल की राजधानी तेल अवीव पर ईरान ने हाइपरसोनिक मिसाइलों से हमला कर कहर बरपा दिया है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने बुधवार को कहा कि इजरायल पर नवीनतम हमले के दौरान हाइपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया था. दोनों देशों के बीच लड़ाई छठे दिन में प्रवेश कर गई है. इधर इजरायल की वायु सेना ने भी कहा है कि उन्होंने तेहरान में फिर से कई क्षेत्रों को निशाना बनाया है.  इजरायली हमले में अबतक ईरान के 585 लोगों की मौत हो चुकी है और 1326 लोग घायल हो चुके हैं. जबकि ईरान के हमले में अबतक 24 इजरायलियों की मौत हो चुकी है. दोनों कट्टर दुश्मनों के बीच एक दूसरे पर हमले की ताजा फेज तब शुरू हुई जब इस युद्ध को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार बयान आ रहे हैं. ट्रंप ने ईरान से बिना शर्त सरेंडर करने को है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ट्रूथ सोशल पर बड़े-बड़े बोल्ड अक्षरों में लिखा- UNCONDITIONAL SURRENDER. ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के लिए तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा है कि हमें ठीक ठीक पता है कि तथाकथित सुप्रीम लीडर कहा छिपा हुआ है. वह एक आसान टारगेट है लेकिन अभी वह सेफ है. हम उसे अभी नहीं मारने जा रहे हैं, कम से कम अभी तो नहीं मार रहे हैं. लेकिन हम नहीं चाहते हैं कि मिसाइलों से नागरिकों पर हमला किया जाए और अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाया जाए. हमारा धैर्य जवाब दे रहा है. इस बीच बीबीसी की ओर से वेरिफाई किए गए उड़ान ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि पिछले तीन दिनों में कम से कम 30 अमेरिकी सैन्य विमानों को अमेरिका के ठिकानों से यूरोप भेजा गया है. ये सभी अमेरिकी सैन्य टैंकर विमान हैं जिनका इस्तेमाल लड़ाकू विमानों और बमवर्षकों को ईंधन भरने के लिए किया जाता है. लेकिन ट्रंप की धमकियों से बेपरवाह ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने एक्स पर ही अमेरिका और इजरायल को करारा जवाब दिया है और टॉप जनरलों और वैज्ञानिकों की मौत के बावजूद जंग में टिके रहने की मंशा जताई है.  अली खामेनेई ने एक्स पर लिखा है कि ने अपने पहले ट्वीट में लिखा है, The battle begins. यानी कि युद्ध अब शुरू हुआ है. खामेनेई ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “हमें आतंकवादी ज़ायोनी शासन को कड़ा जवाब देना चाहिए. हम यहूदियों पर कोई रहम नहीं दिखाएंगे. अली खामेनेई एक तरफ ट्वीट कर रहे थे दूसरी ओर ईरानी सेना इजरायल पर हमले के लिए मिसाइलों की लॉन्चिंग कर रही थी.  ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने सरकारी टेलीविजन पर एक बयान जारी कर दावा किया है कि ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस -3 की 11वीं लहर में एक विध्वसंक हमले को अंजाम दिया गया है और फतह-1 हाइपरसोनिक मिसाइलों से इजरायल पर हमला किया गया है. रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि ईरानी सेना ने इजरायल द्वारा कब्जे वाले क्षेत्रों के आसमान पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया है. तेल अवीव पर ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट करते हुए इजरायली मिसाइल डिफेंस सिस्टम (AP) हाइपरसोनिक मिसाइलें ऐसी मिसाइलें हैं जो ध्वनि की गति से पांच गुना से अधिक (मैक 5 या उससे ज्यादा) की गति से उड़ती हैं. ये अत्यधिक तेज, सटीक और चालाकी से लक्ष्य को भेदने में सक्षम होती हैं, जिससे इन्हें रडार और रक्षा प्रणालियों द्वारा पकड़ना मुश्किल होता है. ईरान ने इजरायल के दूसरे ठिकानों पर भी हमला किया है. इजरायल ने कहा है कि एक घंटे से भी कम समय में ईरान से इजरायल की ओर कम से कम 30 मिसाइलें दागी गईं, जिनमें तेल अवीव समेत कई इलाके शामिल थे. इजरायल फायर एंड रेस्क्यू सर्विसेज के अनुसार मिसाइलों के हमले की वजह से तटीय, दक्षिणी और मध्य क्षेत्रों में खुले इलाकों में कई जगह आग लग गई. इससे पहले, मध्य और उत्तरी इजरायल में कई जगहों पर सायरन की आवाजें सुनी गईं.  टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार ईरान ने पहली बमबारी रात 12:40 (स्थानीय समय) बजे शुरू की. इससे पहले ही इजरायल के एक बड़े हिस्से में सायरन बजने शुरू हो गए थे. इस हमले में लगभग 15 प्रोजेक्टाइल शामिल थे. लगभग 10 रॉकेटों की अगली बौछार लगभग 40 मिनट बाद शुरू हुई और इसने मध्य इजरायली समुदायों और वेस्ट बैंक की कई बस्तियों में अलर्ट जारी कर दिया. हमलों से कई मिनट पहले इजरायली रक्षा बलों ने मिसाइल फायर की निवासियों को चेतावनी देते हुए अलर्ट जारी किया और उन्हें आश्रय लेने का निर्देश दिया. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई ने मंगलवार देर रात X पर लिखा- जंग शुरू होती है। हम आतंकी यहूदी शासन को कड़ा जवाब देंगे। उन पर कोई दया नहीं दिखाएंगे। इस ऐलान के बाद ईरान ने इजराइल पर 25 मिसाइलें दागी हैं। ईरान-इजराइल के बीच पिछले 5 दिनों से हिंसक संघर्ष जारी था, अब खामेनेई की पोस्ट को जंग का अधिकारिक ऐलान माना जा रहा है। यानी अब इसे संघर्ष की बजाय जंग कहा जाएगा। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जल्द अमेरिका भी इसमें शामिल हो सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से आने के बाद व्हाइट हाउस में नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ बैठक की। इसके बाद अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में और ज्यादा फाइटर जेट्स भेजने का फैसला किया। ईरान-इजराइल के बीच लड़ाई में अब तक 224 ईरानी मारे जा चुके हैं, जबकि 1,277 घायल हुए हैं। वहीं, इजराइल में अब तक 24 की मौत हुई है, जबकि 600 से ज्यादा घायल हैं। इजरायल का हमला जारी इस बीच इजरायल का भी तेहरान पर जवाबी हमला जारी है. आईडीएफ ने बुधवार को तेहरान के डिस्ट्रिक्ट 18 के निवासियों को क्षेत्र छोड़ने के लिए एक अलर्ट जारी किया, इजरायली सेना ने कहा है कि वह सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर क्षेत्र में कार्रवाई करने जा रहा है. इसके तुरंत बाद सेना ने घोषणा की कि इजरायली वायु सेना ने ईरान की राजधानी में हमलों की एक नई लहर शुरू की है. तेहरान में हमलों के साथ-साथ ईरानी समाचार वेबसाइटों ने राजधानी के पास खोजिर मिसाइल प्रोडक्शन सेंटर और करज शहर में विस्फोटों की सूचना दी. यहां इजरायल ने … Read more

ट्रंप की धमकी के बाद बोले ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन, ‘ऐसा हमला करेंगे कि इजरायल को होगा अफसोस’

वॉशिंगटन/ तेहरान/ तेल अवीव इजरायल के हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि ‘कुछ भी न बचे’ उससे पहले ईरान जल्द से जल्द परमाणु समझौते के लिए तैयार हो जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान पर बाद में होने वाले इजरायली हमले “और भी क्रूर” होंगे। हाल के हफ्तों में ईरान के साथ एक नए परमाणु समझौते पर बातचीत तेज हो गई है, लेकिन तेहरान का यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार पर जोर देना एक बड़ा मुद्दा साबित हुआ है। शुक्रवार को इजरायल ने ईरान के परमाणु सुविधाओं, बैलिस्टिक मिसाइल फैक्ट्री और एयर डिफेंस सिस्टम पर भीषण हमला किया। इन हमलों में कम छह ईरानी परमाणु वैज्ञानिक मारे गए हैं। इसके बाद ईरान ने इजरायल से बदला लेने का कसम खाई है। ट्रंप बोले- नरसंहार को खत्म करने को अब भी समय शुक्रवार की सुबह ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने लिखा कि ईरानी नेताओं को “पता नहीं था कि क्या होने वाला है। वे सभी अब मर चुके हैं, और यह और भी बदतर हो जाएगा!” ट्रंप ने लिखा, “पहले से ही बहुत सारी मौतें और विनाश हो चुके हैं, लेकिन इस नरसंहार को समाप्त करने के लिए अभी भी समय है, अगले पहले से ही योजनाबद्ध हमले और भी क्रूर हैं।” उन्होंने कहा, “ईरान को एक समझौता करना चाहिए, इससे पहले कि कुछ भी न बचे, और जिसे कभी ईरानी साम्राज्य के रूप में जाना जाता था उसे बचाना चाहिए।” ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर क्या लिखा ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, “मैंने ईरान को सौदा करने के लिए कई मौके दिए। मैंने उन्हें सबसे कड़े शब्दों में कहा, “बस करो”, लेकिन चाहे उन्होंने कितनी भी कोशिश की हो, चाहे वे कितने भी करीब क्यों न पहुंचे हों, वे इसे पूरा नहीं कर पाए। मैंने उनसे कहा कि यह उनके द्वारा ज्ञात, प्रत्याशित या बताई गई किसी भी चीज से कहीं ज़्यादा बुरा होगा, कि संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया में कहीं भी सबसे अच्छा और सबसे घातक सैन्य उपकरण बनाता है, अब तक, और इजरायल के पास इसका बहुत ज़्यादा हिस्सा है, और आने वाले समय में और भी बहुत कुछ होगा – और वे इसका इस्तेमाल करना जानते हैं।” महायुद्ध की आहट; खामेनेई का करीबी भी इजरायली हमले में घायल इजरायल के हमले में ईरान को बड़ा नुकसान पहुंचा है। ईरान के आर्मी चीफ मोहम्मद घावेरी मारे गए हैं तो वही एलीट फोर्स कही जाने वाली इस्लामिक रिवॉलूशनरी गार्ड के लीडर हुसैन सलामी की भी मौत हो गई है। यही नहीं इस हमले में ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के करीबी सलाहकार भी जख्मी हो गए हैं। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने ही अपनी रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की है। रिपोर्ट में कहा गया कि शीर्ष नेता के सलाहकार अली शमखानी भी आज के यहूदी अटैक में घायल हुए हैं। इस बीच इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग के महायुद्ध में तब्दील होने की भी आशंका है। एक तरफ इजरायल के जवाब में ईरान ने 100 ड्रोन्स से जवाब देने की कोशिश की है तो वहीं इजरायल का कहना है कि अभी तो यह शुरुआत है। इस बीच मिडल ईस्ट के कई देशों ने अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया है। आशंका यह है कि कहीं यात्री विमान ना ईरान और इजरायल के हमले की चपेट में आ जाएं। ईरान और इजरायल के पड़ोसी देशों इराक, लेबनान, सीरिया और जॉर्डन ने अपने एयरस्पेस फिलहाल बंद कर लिए हैं। इसके चलते कई देशों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ईरान का एयरस्पेस बंद होने से भारत की ही तमाम उड़ानों को वापस दिल्ली या मुंबई लौटना पड़ा है। इसके अलावा विदेशों से आ रही फ्लाइट्स को डायवर्ट करके लाया जा रहा है। इजरायल ने तो अपने यहां विमानों का संचालन अगली सूचना तक रोक दिया है। ईरान ने तेहरान के अपने मुख्य हवाई अड्डे तक को बंद कर दिया है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच जंग में तेजी आ सकती है। इजरायल का कहना है कि वह अब भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले करेगा। इजरायल ने कहा कि यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि ईरान के पास परमाणु हथियार हो। यही बात डोनाल्ड ट्रंप ने भी कही है और उन्होंने इजरायल की सुरक्षा के लिए तत्पर रहने की बात कही है। इस तरह नेतन्याहू से लेकर ट्रंप तक के रुख ने महायुद्ध की आशंकाओं को बल प्रदान किया है। गौरतलब है कि इजरायल ने करीब 100 ठिकानों पर ईरान के अंदर अटैक किया है। इस हमले के बाद से ही दुनिया भर में आशंकाओं का दौर तेज है। बाजारों पर भी इस जंग का असर दिख रहा है। कच्चे तेल के दामों में इजाफा हुआ है तो वहीं एयरलाइन कंपनियों के शेयर गिरे हैं। ऐसे में अगले कुछ दिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से अहम रहने वाले हैं। ईरान को दी सीधी चेतावनी ट्रंप ने आगे कहा, “कुछ ईरानी कट्टरपंथियों ने बहादुरी से बात की, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि क्या होने वाला था। वे सभी अब मर चुके हैं, और यह और भी बदतर हो जाएगा! पहले से ही बहुत ज़्यादा मौतें और विनाश हो चुका है, लेकिन इस नरसंहार को समाप्त करने के लिए अभी भी समय है, अगले पहले से ही योजनाबद्ध हमलों के साथ और भी ज़्यादा क्रूर। ईरान को सौदा करना चाहिए, इससे पहले कि कुछ भी न बचे, और जो कभी ईरानी साम्राज्य के रूप में जाना जाता था उसे बचाएं। अब और मौत नहीं, और विनाश नहीं, बस करो, इससे पहले कि यह हो जाए बहुत देर हो चुकी है। भगवान आप सबका भला करे!” ईरान के न्यूक्लियर साइट पर इजरायल ने फिर शुरू किए हमले इजरायल ने एक बार फिर से ईरान पर हमले शुरू कर दिए है. ईरानी मीडिया के अनुसार इजरायल ने अब शिराज और तबरीज शहरों के साथ-साथ नतान्ज न्यूक्लियर साइट पर फिर से हमला शुरू कर दिया है.  हिजबुल्लाह इजरायल पर हमला नहीं करेगा इजरायल पर हमले के लिए हिजबुल्लाह ईरान का साथ नहीं देगा. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक हिजबुल्लाह के एक अधिकारी ने शुक्रवार को कहा … Read more

एलन मस्क राष्ट्रपति ट्रम्प के खिलाफ गई अपनी कुछ सोशल मीडिया पोस्ट पर खेद व्यक्त किया

वाशिंगटन   दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ पिछले सप्ताह की गई अपनी कुछ सोशल मीडिया पोस्ट पर खेद व्यक्त किया और कहा कि उनकी पोस्ट ” बात बहुत आगे बढ़ गई”।एलन मस्क ने लिखा, “मुझे पिछले सप्ताह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बारे में लिखी गई अपनी कुछ पोस्टों पर खेद है। बात बहुत आगे निकल गईं।” क्या थी विवाद की वजह?  एलॉन मस्क और ट्रंप के बीच विवाद तब गहरा गया जब मस्क ने डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) के चीफ के पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद मस्क ने ट्रंप के खर्च और टैक्स कटौती वाले विधेयक जिसे ट्रंप ‘One Big Beautiful Bill’ कह रहे हैं, उसकी कड़ी आलोचना की. इस पर ट्रंप ने मस्क को जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने एलॉन को इस बिल के बारे में बताया था, खासकर इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सब्सिडी में कटौती की बात, लेकिन एलॉन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पलटवार करते हुए कहा कि यह बिल उन्हें कभी दिखाया ही नहीं गया. इतना ही नहीं, मस्क ने X पर ट्रंप के इंपीचमेंट (महाभियोग) का समर्थन करते हुए एक पोस्ट किया था, हालांकि उसे बाद में डिलीट कर दिया. बात इतनी बढ़ गई थी कि एलॉन ने ट्रंप के जेफरी एपस्टीन से पुराने संबंधों का भी ज़िक्र किया, जिसे ट्रंप ने पुराना और झूठा मुद्दा बताया. सरकारी ठेकों और सब्सिडी खत्म करने की धमकी  Elon Musk से विवाद बढ़ा तो ट्रंप ने खुली धमकी दी कि वे मस्क की कंपनियों विशेष रूप से SpaceX के साथ सरकारी ठेकों और सब्सिडी खत्म करने पर विचार कर सकते हैं. ट्रंप ने कहा कि मुझे लगता है एलॉन बहुत दुखी और निराश महसूस कर रहे हैं. NBC न्यूज को दिए एक टेलीफोनिक इंटरव्यू में तो ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि मुझे लगता है अब हमारा रिश्ता खत्म हो गया है.  ‘डेमोक्रेट्स को फंड न दें मस्क’  ट्रंप ने मस्क को ये भी धमकी दी कि अगर एलॉन मस्क डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को फंडिंग करते हैं, खासकर उन उम्मीदवारों को जो रिपब्लिकन पार्टी के टैक्स बिल का विरोध कर रहे हैं, तो उसके गंभीर परिणाम होंगे. हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे परिणाम क्या होंगे. मस्क को ट्रंप से दिक्कत क्या है?  डोनाल्ड ट्रंप सरकार के खर्च और टैक्स कटौती वाले बिल में इलेक्ट्रिक व्हीकल की खरीद पर मिलने वाली टैक्स छूट को खत्म करने का प्रस्ताव है. अमेरिका की पिछली बाइडेन सरकार नई EV खरीदने पर 7500 डॉलर की टैक्स छूट देती थी. ट्रंप इसे खत्म करने जा रहे हैं. इस बिल में प्रावधान है कि जो कंपनियां 2009 से 2025 के बीच दो लाख EV बेच चुकी हैं, उन्हें छूट नहीं मिलेगी. यह सीधेतौर पर एलॉन मस्क की टेस्ला के लिए झटका है.  एक दूसरी वजह ये भी है कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA में एलॉन मस्क अपने भरोसेमंद जेरेड इसाकमैन को एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में नियुक्त करवाना चाहते थे, लेकिन ट्रंप ने उनकी सिफारिश को नजरअंदाज कर दिया. मस्क का मानना था कि अगर इसाकमैन NASA में एडमिनिस्ट्रेटर बनते हैं, तो इससे उनकी कंपनी SpaceX को भी फायदा होगा.

मस्क ने अमेरिका के राष्ट्रपति पर लगाया गंभीर आरोप, एपस्टीन की फाइलों में है ट्रंप का नाम

वॉशिंगटन: अमेरिकी सरकारी दक्षता विभाग (डीओजीई) के पूर्व प्रमुख एलन मस्क ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर गंभीर आरोप लगाया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट करते हुए एलन मस्क ने दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम एपस्टीन फाइलों में है, इसीलिए उन्हें जारी नहीं किया जा रहा है. मस्क ने लिखा “अब समय आ गया है कि बहुत बड़ा बम गिराया जाए: डोनाल्ड ट्रम्प एपस्टीन फाइलों में हैं. यही असली कारण है कि उन्हें सार्वजनिक नहीं किया गया है. आपका दिन शुभ हो, डीजेटी!” उन्होंने आगे कहा, “इस पोस्ट को भविष्य के लिए मार्क कर लें. सच्चाई सामने आ जाएगी.” वाकई बड़ा बम गिराने का समय आ गया एलॉन मस्क ने एक्स पर पोस्ट किया, “अब वाकई बड़ा बम गिराने का समय आ गया है, डोनाल्ड ट्रंप का नाम एपस्टीन फाइलों में है.और यही असली वजह है कि उन्हें सार्वजनिक नहीं किया गया है. आपका दिन शुभ हो, DJT!” कौन है जेफरी एपस्टिन जिसकी चर्चा कर मस्क ने अमेरिका की राजनीति में हलचल ला दी है. अमेरिका जैसे देश में बड़ी हस्तियों का सेक्स स्कैंडल से नाम जुड़ना नई बात नहीं है. बिल क्लिंटन- मोनिसा लेवेंस्की की सनसनीखेज कहानी इसका प्रमाण है. जेफरी एपस्टिन: दौलत और सेक्स क्राइम की काली दुनिया जेफरी एपस्टिन अमेरिका का एक अरबपति फाइनेंसर था. अकूत दौलत के दम पर इस शख्स ने दुनिया के अमीरों के साथ रिश्ते बनाए. एपस्टिन के रिश्तों के इस सर्किल में डोनाल्ड ट्रंप का भी नाम शामिल है. इतनी दौलत के अलावा एपस्टिन ने सेक्स क्राइम की काली दुनिया में भी घुसपैठ की. उस पर सेक्स ट्रैफिकिंग के भी आरोप लगे. 1953 में न्यूयॉर्क में जन्मे एपस्टिन ने बिना कॉलेज डिग्री के बैंकिंग और वित्त क्षेत्र में अपनी फर्म स्थापित की. एपस्टीन पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और सेक्स तस्करी के गंभीर आरोप लगे. 2005 में एक 14 वर्षीय लड़की के शोषण की शिकायत के बाद जांच शुरू हुई, जिसमें 36 नाबालिग पीड़िताओं की पहचान हुई. 2008 में उन्हें वेश्यावृत्ति से संबंधित दो आरोपों में दोषी ठहराया गया और 13 महीने की जेल मिली. जैसा कि हमने बताया जेफरी एपस्टिन की हाई-प्रोफाइल हस्तियों जैसे बिल क्लिंटन, डोनाल्ड ट्रंप और प्रिंस एंड्रयू से दोस्ती थी. जेल में रहस्यमयी मौत 2019 में, उन्हें फिर से मानव तस्करी और यौन अपराधों के लिए गिरफ्तार किया गया, लेकिन सुनवाई से पहले उनकी जेल में मृत्यु हो गई, जिसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या बताया गया, हालांकि इस पर कई साजिश सिद्धांत मौजूद हैं. अमेरिका में जेफरी एपस्टिन को यौन शोषण का आरोपी कहा जाता है. प्राइवेट आईलैंड और लोलिता एक्सप्रेस! जेफरी एपस्टिन अथाह दौलत का स्वामी था. उसने अमेरिका में प्राइवेट आईलैंड खरीद रखे थे. उसकी अपनी जेट थी. इस जेट पर अमेरिका के प्रभावशाली व्यक्ति सवार होकर उसके निजी द्वीप में पहुंचते थे और पार्टियां करते थे. एपस्टीन को यूएस वर्जिन आइलैंड्स में अपने द्वीप, लिटिल सेंट जेम्स पर मशहूर लोगों का मनोरंजन करने के लिए जाना जाता था. वह अक्सर लोगों को अपने निजी जेट से द्वीप पर ले जाता था और वहां यात्रा करने वालों का लिखित रिकॉर्ड छोड़ जाता था. अमेरिका में जेफरी एपस्टिन के इस निजी जेट विमान को पार्टी सर्किल में ‘लोलिता एक्सप्रेस’ कहा जाता था. न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार इस लोलिता एक्सप्रेस में पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और डोनाल्ड ट्रम्प ने यात्राएं की है.  एक रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 1993 से 1997 के बीच निजी विमान से कम से कम 7 यात्राएं कीं. ट्रम्प उस समय एकबिजनेस टायकून और रियल एस्टेट डेवलपर थे और उन्हें एपस्टीन के सहयोगी के रूप में जाना जाता था. हालांकि ट्रंप ने इससे इनकार किया था, लेकिन एपस्टीन की साथी और गर्लफ्रेंड गिस्लेन मैक्सवेल के मुकदमे के तहत 2021 में जारी फ्लाइट लॉग से पता चला कि अमेरिकी राष्ट्रपति एपस्टीन के विमान में 7 बार सवार हुए थे. ट्रंप ने 2024 ट्रुथ सोशल पोस्ट में दावा किया, “मैं कभी एपस्टीन के विमान या उसके बेवकूफ़ द्वीप पर नहीं था.” पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिटंन की भी इस जेट पर कई बार तस्वीरें आई है. बता दें कि किसी मामले से संबंधित फाइलों में किसी व्यक्ति का नाम शामिल होने का यह मतलब नहीं है कि उन पर किसी गलत काम का आरोप लगाया गया है. उन्हें भी उतनी ही सुंदर महिलाएं पसंद हैं जितनी मुझे हालांकि ट्रंप ने 6 जुलाई, 2019 को एपस्टीन की गिरफ्तारी के बाद से ही उनसे दूरी बना ली थी, लेकिन 1980 के दशक के अंत से लेकर 2000 के दशक की शुरुआत तक दोनों अच्छे दोस्त थे. हाल ही में एक तस्वीर सामने आई थी जिसमें दोनों को मार-ए-लागो में एक पार्टी में एक-दूसरे से बात करते हुए दिखाया गया था. उन्हें विक्टोरिया सीक्रेट एंजेल्स पार्टी में भी साथ देखा गया था. ट्रंप ने अपने हमेशा की तरह ही जोरदार अंदाज में 2002 में न्यूयॉर्क पत्रिका को दिए एक साक्षात्कार में एपस्टीन की प्रशंसा की थी और उन्हें “शानदार व्यक्ति” कहा था जिन्हें वे 15 सालों से जानते हैं. तब ट्रंप ने जेफरी एपस्टिन के बारे में कहा था, “उनके साथ रहना बहुत मजेदार है. यह भी कहा जाता है कि उन्हें भी उतनी ही सुंदर महिलाएं पसंद हैं जितनी मुझे और उनमें से कई युवा हैं. इसमें कोई संदेह नहीं है- जेफरी को अपना सोशल लाइफ पसंद है.” ट्रंप के साथ दोस्ती बिगड़ने के बाद मस्क ने इन्हीं मामलों का जिक्र किया है. ये मामले और कानूनी रिकॉर्ड जिन दस्तावेजों में जब्त हैं उन्हें एप्सटीन फाइल्स के नाम से जाना जाता है. इनमें से कुछ फाइलें सार्वजनिक की गई हैं, लेकिन कुछ अभी भी गोपनीय हैं, जिसके कारण कई साजिश सिद्धांत और अटकलें चल रही हैं. मस्क इन्हीं फाइलों को सार्वजनिक करने की बात कर रहे हैं. एलन मस्क का दावा कि डोनाल्ड ट्रम्प का नाम इन फाइलों में है, एक गंभीर लेकिन अपुष्ट बयान है. ट्रंप और एप्सटीन की पुरानी दोस्ती के कुछ सबूत हैं (जैसे, ट्रंप का उनके जेट में यात्रा करना), लेकिन ट्रंप के खिलाफ कोई ठोस आपराधिक सबूत सार्वजनिक नहीं हुआ है जो उन्हें एप्सटीन के अपराधों से सीधा जोड़ सके.   क्या है एपस्टीन मामला     ये सारा मामला … Read more

ट्रंप प्रशासन ने 12 देशों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया

वॉशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नई घोषणा (प्रोक्लेमेशन) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत उन्होंने 12 देशों के नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. इसके साथ ही 7 अन्य देशों से आने वाले लोगों पर आंशिक पाबंदियां लगाई गई हैं. ट्रंप ने ये कदम अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए उठाया है. ये जानकारी CBS न्यूज ने प्रशासनिक अधिकारियों के हवाले से दी. । ट्रंप ने ईरान, अफगानिस्तान समेत दुनिया के 12 देशों के नागरिकों की अमेरिका में एंट्री पर बैन लगा दिया है। उन्होंने बुधवार को इसकी घोषणा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में इससे जुड़े एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें यह कहा गया कि आतंकवादियों और अन्य खतरों से सुरक्षा के लिए यह कदम बेहद जरूरी था। ट्रंप ने जिन देशों के नागरिकों पर यह प्रतिबंध लगाया है उनमें अफगानिस्तान, म्यांमार, चाड, कांगो, इक्वेटोरियल गिनी, इरिट्रिया, हैती, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन का नाम शामिल है। ट्रंप ने कहा है कि इन देशों के अलावा सात अन्य देशों, बुरुंडी, क्यूबा, ​​लाओस, सिएरा लियोन, टोगो, तुर्कमेनिस्तान और वेनेजुएला के लोगों के प्रवेश पर आंशिक रूप से प्रतिबंध लगाया जाएगा। 9 जून 2025 से लागू होगा आदेश जानकारी के मुताबिक ट्रंप का यह आदेश 9 जून 2025 को आधी रात से लागू हो जाएगा। आदेश में बताया गया है कि इस तारीख से पहले जारी किए गए वीजा रद्द नहीं किए जाएंगे। ट्रंप ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि इन देशों की सूची में और भी नाम जोड़े जा सकते हैं। ट्रंप ने कहा, “हम ऐसे लोगों को अपने देश में नहीं घुसने देंगे जो हमें नुकसान पहुंचाना चाहते हैं।” कोलोराडो हमले का जिक्र ट्रंप ने कहा कि जिन देशों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं वे आतंकवादियों को पनाह देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह देश वीजा सुरक्षा पर सहयोग करने में और अपने देश के नागरिकों की पहचान सत्यापित करने में भी विफल रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि इन देशों के नागरिक आपराधिक इतिहास का रिकॉर्ड रखते हैं और वीजा की अवधि से अधिक समय तक अमेरिका में रहते हुए पाए गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में कोलोराडो में हुए हमले का भी जिक्र किया। पहले कार्यकाल में भी लगाए थे प्रतिबंध बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी ऐसे कदम उठा चुके हैं। उन्होंने पहले कार्यकाल में सात मुस्लिम बहुल देशों के यात्रियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। हालांकि ट्रंप के बाद राष्ट्रपति बने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 2021 में इन प्रतिबंधों को हटा दिया था। बाइडेन ने इस फैसले को अमेरिकी मूल्यों पर एक धब्बा भी बताया था।

विदेशी सिनेमा पर डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ स्ट्राइक, US से बाहर बनने वाली फिल्मों पर लगाया 100% टैक्स

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक के बाद एक कड़े फैसले लेकर दुनिया को चौंका रहे हैं। हाल ही में उन्होंने सख्ती दिखाते हुए कई देशों पर टैरिफ बम फोड़ा। इसके बाद अब तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने फिल्मों पर ही 100% टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है। यह टैरिफ उन फिल्मों पर लगेगा जो अमेरिका से बाहर बन रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने यह खत्म दम तोड़ रही अमेरिकी फिल्म इंडस्ट्री को फिर से जिंदा करने के लिए उठाया है। उन्होंने इसे देश की सुरक्षा के लिए खतरा भी बताया और साथ ही अमेरिका में फिर से फिल्में बनाने पर जोर दिया। ‘नए टैरिफ का मकसद…’ डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “अमेरिकी फिल्म इंडस्ट्री बहुत तेजी से खत्म हो रही है. यह अन्य देशों द्वारा किया गया एक ठोस उपाय है और इसलिए, यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है. यह, बाकी सब चीजों के अलावा, संदेश और प्रोपेगैंडा है.” ट्रंप ने घरेलू फिल्म प्रोडक्शन पर लौटने की जरूरत पर जोर दिया और कहा, “हम चाहते हैं कि फिल्में फिर से अमेरिका में बनाई जाएं. नए टैरिफ का मकसद खेल के मैदान को लेवल में लाना और स्टूडियो को अमेरिकी धरती पर अपना ऑपरेशन जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है. अलकाट्राज़ जेल खोलने का प्लान… रविवार को ट्रंप ने सैन फ्रांसिस्को खाड़ी में अलकाट्राज़ जेल को फिर से खोलने की योजना का भी खुलासा किया. उन्होंने कथित तौर पर न्याय विभाग, एफबीआई और होमलैंड सिक्योरिटी के साथ कोऑर्डिनेशन में जेल ब्यूरो को ऐतिहासिक सुविधा का पुनर्निर्माण और विस्तार करने का निर्देश दिया, जिसमें 1963 में बंद होने से पहले देश के कुछ सबसे कुख्यात अपराधियों को रखा गया था. ट्रंप ने लिखा, “अलकाट्राज़ का पुनर्निर्माण करें और उसे खोलें! जब अमेरिका एक ज्यादा गंभीर राष्ट्र था, तो हम जानते थे कि सबसे खतरनाक अपराधियों को कैसे अलग-थलग किया जाए. अब इसे वापस लाने का वक्त आ गया है.” ट्रंप ने कहा कि नया अलकाट्राज़ देश के सबसे हिंसक और खतरनाक अपराधियों के लिए एक हाई-सेक्योरिटी सुविधा के रूप में काम करेगा. ट्रंप ने ऐलान करते हुए क्या कहा? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ के जरिए दी। उन्होंने लिखा, “अमेरिकी फिल्म उद्योग तेजी से खत्म हो रहा है। अन्य देश फिल्म निर्माताओं और स्टूडियो को आकर्षित करने के लिए कई तरह के प्रोत्साहन दे रहे हैं, जिससे वे अमेरिका से दूर हो रहे हैं। हॉलीवुड और अमेरिका के कई अन्य क्षेत्रों को इससे बड़ा नुकसान हो रहा है। यह अन्य देशों की एक साजिश है और इसलिए यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।” ‘अमेरिका में फिर से बनें फिल्में’ उन्होंने कहा कि इसलिए, मैं वाणिज्य विभाग और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को विदेशी फिल्मों पर 100% टैरिफ लगाने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दे रहा हूं। हम चाहते हैं कि फिल्में फिर से अमेरिका में बनें। चीन ने कम कर दिया था अमेरिकी फिल्मों का कोटा यह कदम ऐसे वक्त में उठाया गया है जब टैरिफ को लेकर पहले ही अमेरिका और चीन आमने-सामने हैं। इससे पहले अप्रैल में चीन ने डोनाल्ड ट्रंप के फैसले पर पलटवार करते हुए अपने देश में अमेरिकी फिल्मों का कोटा कम कर दिया था। इसको लेकर चीन के फिल्म प्रशासन ने जारी एक बयान में कहा था, “अमेरिकी सरकार द्वारा टैरिफ का दुरुपयोग चीन के प्रति गलत कार्रवाई है, जिससे अमेरिकी फिल्मों में घरेलू दर्शकों की रुचि कम हो सकती है। हम बाजार के नियमों का पालन करेंगे, दर्शकों की पसंद का सम्मान करेंगे और आयातित अमेरिकी फिल्मों की संख्या में थोड़ी कमी लाएंगे।”

डोनाल्ड ट्रंप का ऐलान, फार्मास्यूटिकल्स पर भी जल्द लगाया जाएगा टैरिफ, जानिए किन सामानों के एक्सपोर्ट पर क्या असर होगा

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से तकरीबन 180 देशों पर लगाया गया रेसिप्रोकल टैरिफ आज से लागू हो गया है. सुबह 9.31 बजते ही भारत पर लगाया गया 26 फीसदी टैरिफ लागू हो गया. भारत पर लगाए गए इस टैरिफ के बाद आज से अमेरिका में निर्यात किए जाने वाले हर भारतीय सामान पर 26 फीसदी शुल्क लगेगा. कहा जा रहा है कि इस टैरिफ का भारत पर कई स्तरों पर असर देखने को मिल सकता है. अमेरिका में भारत के सामान पर 26 फीसदी टैरिफ लगाने से यकीनन उस सामान की कीमत बढ़ेगी. इससे वहां भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा कम हो सकती है, खासकर उन देशों की तुलना में जिन पर कम टैरिफ लगाया गया है. भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्र इलेक्ट्रॉनिक्स, रत्न और आभूषण, ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल हैं. ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ का सबसे ज्यादा असर दवाओं पर पड़ेगा. भारत से अमेरिका में सस्ती दवाएं जाती हैं. भारत से अमेरिका 12 अरब डॉलर से ज्यादा की दवाएं और फार्मा प्रोडक्ट्स लेता है. 2023-24 में भारत का अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस 35.32 अरब डॉलर था. टैरिफ से यह सरप्लस कम हो सकता है. कॉमर्स मिनिस्ट्री के मुताबिक, भारत से 73.7 अरब डॉलर का निर्यात जबकि अमेरिका से 39.1 अरब डॉलर का आयात होता है. हालांकि, अमेरिकी सरकार के आंकड़े इससे अलग हैं. अमेरिका के आंकड़े बताते हैं कि भारत से 91.2 अरब डॉलर का निर्यात तो 34.3 अरब डॉलर का आयात होता है. अमेरिका के साथ कारोबार करना भारत के लिए फायदे का सौदा रहा है क्योंकि उसके इंपोर्ट कम और एक्सपोर्ट ज्यादा है. टैरिफ के कारण एक्सपोर्ट कम हो सकता है. लेकिन भारत पर टैरिफ क्यों? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की दोस्ती जगजाहिर है. दोनों एक-दूसरे को अच्छा दोस्त बताते हैं. ‘हाउडी मोदी’ और ‘नमस्ते ट्रंप’ रैलियों को इसका सशक्त उदाहरण भी बताया जाता है. लेकिन ट्रंप कई मौकों पर भारत को टैरिफ किंग बता चुके हैं. ट्रंप ने कहा था कि भारत बहुत अधिक टैरिफ लगाता है यह बहुत Brutal है. ऐसे में ट्रंप ने भारत पर 26 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया है. वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) के आंकड़ों की माने तो भारत में औसत टैरिफ सबसे ज्यादा है. भारत में औसत टैरिफ 17 फीसदी तो अमेरिका में 3.3 फीसदी ही है. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका से आने वाले खाने-पीने के सामान, मांस और प्रोसेस्ड फूड पर भारत में 37.66 फीसदी टैरिफ लगता है, जबकि इन्हीं सामानों पर भारत, अमेरिका में 5.29 फीसदी टैरिफ देता था. अब तक ऑटोमोबाइल पर भारत 24.14 फीसदी तो अमेरिका 1.05 फीसदी टैरिफ लगाता आया है. शराब पर भारत 124.58 फीसदी तो अमेरिका 2.49 फीसदी टैरिफ वसूलता है. सिगरेट और तंबाकू पर अमेरिका में 201.15 फीसदी तो भारत में 33 फीसदी टैरिफ लगता रहा है. ट्रंप का मानना है कि टैरिफ की मदद से अमेरिका का व्यापार घाटा कम किया जा सकता है. व्यापार घाटा उस स्थिति को कहा जाता है जब कोई देश किसी दूसरे देश से आयात ज्यादा करता है लेकिन निर्यात कम करता है. भारत और अमेरिका के बीच करीब 45 अरब डॉलर का व्यापार घाटा है. वहीं, कैबिनेट की आज सुबह 11 बजे की मीटिंग में ट्रंप के टैरिफ के मुद्दे पर चर्चा हो सकती है. केंद्रीय कैबिनेट आज से लागू होने जा रहे टैरिफ को लेकर भारत की रणनीति पर चर्चा कर सकती है. कहा जा रहा है कि इसे लेकर सरकार निर्यातकों के संपर्क में हैं. वाणिज्य मंत्रालय आज निर्यातकों के साथ बैठक भी कर सकता है. जल्द ही दवाओं पर भी लगाएंगे भारी भरकम शुल्क अमेरिका के राष्ट्रपति और टैरिफ किंग डोनाल्ड ट्रंप ने एक और बड़ा धमाका किया है। दुनियाभर के 180 से अधिक देशों पर 2 अप्रैल को पारस्परिक टैरिफ लगाने के बाद ट्रंप ने अब एलान किया है कि जल्द ही दवाओं के आयात पर शुल्क लगाया जाएगा। ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका जल्द ही दवा आयात पर बड़े टैरिफ की घोषणा करेगा। नेशनल रिपब्लिकन कांग्रेसनल कमेटी के एक कार्यक्रम में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि इस टैरिफ से दवा कंपनियों को अपना कारोबार अमेरिका में सेटअप करना पड़ेगा। चीन पर लगाया 104 फीसदी टैरिफ मंगलवार की आधी रात से सभी देशों से अमेरिका आने वाले सामानों पर टैरिफ की नई दर लागू हो गई है। इस बीच ट्रंप ने चीन पर 104 फीसदी टैरिफ का एलान किया है। पहले चीन पर अमेरिका ने कुल 54 फीसदी टैरिफ लगाया था। जवाब में चीन ने भी अमेरिकी सामानों पर 34 फीसदी टैरिफ की घोषणा की। इससे डोनाल्ड ट्रंप भड़क उठे थे। इस बीच ट्रंप ने मंगलवार को चीन पर अमेरिकी टैरिफ से बचने की खातिर अपनी मुद्रा में हेरफेर करने का आरोप लगाया है। ट्रंप ने कहा कि आपको उन्हें जवाब देना होगा। वे आज टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए अपनी मुद्रा में हेरफेर कर रहे हैं। बातचीत में जुटे 70 देश ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामानों पर 26 फीसदी टैरिफ लगाया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि 70 देशों के साथ व्यापार के मुद्दे पर बात चल रही है। हर देश के साथ एक कस्टम-मेड डील पर सहमत होने की कोशिश है। कई नेताओं से ट्रंप ने की बात डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा से बात की और इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने दक्षिण कोरिया के कार्यवाहक राष्ट्रपति हान डक-सू से भी बात की। अमेरिका इस बात पर खफा है कि चीन ने बातचीत के बजाय जवाबी शुल्क लगाने का फैसला किया, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप हर समय फोन उठाने को तैयार हैं।

25 सेकंड में ही हूती विद्रोहियों के गुट को B-2 परमाणु बॉम्बर से खत्म कर दिया गया

न्यूयॉर्क अमेरिका इन दिनों हूती विद्रोहियों पर कहर बरपा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक वीडियो शेयर करते हुए हूतियों को फिर से चेतावनी दे दी है। वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे 25 सेकंड में ही हूती विद्रोहियों के गुट को खत्म कर दिया गया। राजनीतिक और रणनीतिक लिहाज से यह वीडियो काफी मायने रखता है। हूती विद्रोहियों ने आंकड़े जारी करते हुए बताया था कि डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल शुरू होने के बाद से ही अमेरिकी हमलों में कम से कम 67 लोग मारे गए हैं। हालांकि वास्तविक संख्या ज्यादा भी हो सकती है। डोनाल्ड ट्रंप के वीडियो में देखा जा सकता है कि हूती गोलाकार बनाकर खड़े हुए हैं। इसके बाद अचानक विस्फोट होता है। तेज चमक के बाद पूरा इलाका धुएं और धूल के गुबार में समा जाता है। इसके बाद वीडियो जूमआउट होता है और बड़ा इलाका इस धुएं की गिरफ्त में दिखाई देता है। इसमें दो गाड़ियां भी दिखाई देती हैं। अनुमान है कि इन गाड़ियों का इस्तेमाल हमले के लिए किया गया होगा। डोनाल्ड ट्रंप ने वीडियो शेयर करते हुए संदेश भी दिया। उन्होंने लिखा,ये हूती हमले की साजिश के लिए इकट्ठा हुए थे। अब हूती कोई हमला नहीं कर पाएंगे। अब वे हमारा शिप नहीं डुबो सकते। बता दें कि लाल सागर में हूती जहाजों को निशाना बनाते हैं। हमास का समर्थन करने के लिए हूती इजरायल और अमेरिका के जहाजों को ज्यादा निशाना बना रहे हैं। इसी का जवाब देने के लिए अमेरिका ने हूतियों के ठिकानों को तबाह कर दिया। हूती विद्रोहियों ने अभी तक अपने किसी भी नेता की मौत की बात स्वीकार नहीं की है, उधर अमेरिका ने भी किसी भी मारे गए विद्रोही नेता का नाम उजागर नहीं किया है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के बीच हुई बातचीत के लीक होने पर यह जानकारी सामने आई है कि विद्रोहियों के मिसाइल बल के एक नेता को निशाना बनाया गया था। बता दें कि हूतियों को ईरान से समर्थन मिलता है। जानकारों का कहना है कि यह हमला ईरान के परमाणु कार्यक्रम का जवाब है। व्हाइट हाउस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी कहा गया कि इन हमलों से ईरान कमजोर हो गया है। अमेरिकी बी-2 बॉम्बर्स की ताकत अमेरिकी वायु सेना के पास कुल मिलाकर केवल 20 स्टील्थ बॉम्बर हैं, जिसका अर्थ है कि पूरे बेड़े का 30 प्रतिशत अब हिंद महासागर में तैनात है। बी-2 बेड़े की बड़ी संख्या ये बताती है कि वायु सेना इनका इस्तेमाल महत्वपूर्ण मिशन के लिए कर रही है। परमाणु हमला करने के अलावा बी-2 स्पिरिट अमेरिकी वायुसेना का इकलौता विमान है, जो 30000 पाउंड के जीबीयू-57/B मैसिव आर्डनेंस पेनेट्रेटर (MOP) बंकर बस्टर बमों को संचालित कर सकता है। हूतियों के पास भूमिगत सुविधाओं का व्यापक नेटवर्क है, जिस पर हमला करने के लिए MOP की जरूरत हो सकती है। हूती लगातार लाल सागर में कर रहे हमला हालांकि, यह अभी पता नहीं कि क्या MOP को हूतियों के खिलाफ तैनात किया गया है या नहीं। यमन के हूती चरमपंथी लाल सागर के व्यापारिक मार्ग के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। हूतियों ने लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर हमले किए हैं, जिससे व्यापार मार्ग पर असर पड़ा है। हूतियों के खतरे को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने नए अभियान की घोषणा की थी। अमेरिकी अभियान के बावजूद हूती चरमपंथी झुकने के संकेत नहीं दे रहे हैं। इस बीच उन्होंने इजरायल पर भी हमला तेज किया है। हूतियों ने इस दौरान और इसके पहले कई MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराने में कामयाबी हासिल की है।

राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ ऐलान से शेयर बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स-निफ्टी क्रैश

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो अप्रैल को कई देशों पर ताबड़तोड़ टैरिफ लगाने का ऐलान कर दुनियाभर में खलबली मचा दी. भारत और चीन समेत कई देशों पर रियायती रेसिप्रोकल टैरिफ (Discounted Reciprocal Tariff) लगाया गया है. अब भारत की ओर से ट्रंप के इस टैक्स पर प्रतिक्रिया सामने आई है. भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए 27 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ के प्रभाव का विश्लेषण किया जा रहा है. वाणिज्य मंत्रालय इसका विश्लेषण कर रहा है. उन्होंने बताया कि अमेरिका में सभी तरह के इंपोर्ट पर सार्वभौमिक 10 फीसदी टैरिफ पांच अप्रैल से लागू होगा जबकि बाकी 16 फीसदी टैरिफ 10 अप्रैल से प्रभावी होगा. वाणिज्य मंत्रालय इन टैरिफ के प्रभावों का विश्लेषण कर रहा है. उन्होंने बताया कि इसमें एक प्रावधान है कि अगर कोई देश टैरिफ से जुड़ी हुई चिंताओं को अमेरिका के समक्ष रखता है तो ट्रंप प्रशासन उस देश पर टैरिफ की दर घटाने पर विचार कर सकता है. ट्रंप ने इस टैरिफ को रियायती बताकर बातचीत के रास्ते खुले रखे हैं. भारत पर उसके 52 फीसदी की जगह 27 फीसदी टैरिफ लगाया गया है. इससे ट्रंप ने भारत के साथ बातचीत की संभावना को खुला रखा है. दोनों देश लगातार एक दूसरे के संपर्क में हैं. ट्रंप का टैरिफ भारत के लिए नहीं है झटका भारत पहले से ही अमेरिका के साथ द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत कर रहा है. दोनों देशों का लक्ष्य इस साल सितंबर-अक्तूबर तक इस समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने का है. अधिकारी ने बताया कि ट्रंप का भारत पर यह टैरिफ झटका नहीं है बल्कि इसका मिला-जुला असर हो सकता है. बता दें कि अमेरिका ने भारत पर 27 फीसदी डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. ट्रंप ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल में ही अमेरिका आए थे. वह मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं. लेकिन इस दौरे के दौरान मैंने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि आप हमारे साथ सही व्यवहार नहीं कर रहे हैं. भारत हमेशा अमेरिका से 52 फीसदी टैरिफ वसूलता है. बता दें कि व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में मीडिया को संबोधित करते हुए ट्रंप ने दो अप्रैल को अमेरिका के लिए मुक्ति दिवस बताया. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को इस लिबरेशन डे की लंबे समय से जरूरत थी. अब से दो अप्रैल को अमेरिकी इंडस्ट्री के पुनर्जन्म के तौर पर याद किया जाएगा. इसी दिन को हम अमेरिका को फिर से संपन्न राष्ट्र बनाने के तौर पर याद रखेंगे. हम अमेरिका को फिर से संपन्न बनाएंगे. सेंसेक्स-निफ्टी क्रैश ट्रंप के नए टैरिफ ऐलान के बाद दुनियाभर के बाजारों में हड़कंप मच गया है. एशियाई बाजारों से लेकर अमेरिकी स्टॉक मार्केट तक, हर जगह गिरावट देखने को मिल रही है. इस फैसले का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा, जहां सेंसेक्स और निफ्टी ने भारी गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की. शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों को झटका आजा यानी गुरुवार को बाजार खुलते ही भारतीय स्टॉक मार्केट में बिकवाली हावी हो गई. सेंसेक्स 805.58 अंकों की गिरावट के साथ 75,811.86 पर आ गया. निफ्टी 50 भी 182.05 अंक लुढ़ककर 23,150.30 पर कारोबार कर रहा है. हालांकि, शुरुआती कारोबार में बाजार में तेज रिकवरी देखने को मिली. सुबह 9:30 बजे सेंसेक्स 345.21 अंक (0.45%) की गिरावट के साथ 76,272.23 और निफ्टी 77.70 अंक (0.33%) की गिरावट के साथ 23,254.65 पर ट्रेड कर रहा था. मिडकैप-स्मॉलकैप में हल्की बढ़त, लार्जकैप शेयरों में दबाव शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स हल्की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे थे, जबकि लार्जकैप शेयरों में दबाव देखने को मिला. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 125 अंकों (0.24%) की बढ़त के साथ 52,183 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 121 अंकों (0.75%) की तेजी के साथ 16,283 पर कारोबार कर रहा था. फार्मा, रियल्टी और एनर्जी सेक्टर में तेजी सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो ऑटो, आईटी, पीएसयू बैंक, एफएमसीजी, मेटल और मीडिया सेक्टर में गिरावट देखी गई. वहीं, फार्मा, रियल्टी और एनर्जी सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली. सेंसेक्स के टॉप लूजर्स और गेनर्स इंफोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस, टेक महिंद्रा, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारती एयरटेल, रिलायंस, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी और कोटक महिंद्रा बैंक टॉप लूजर स्टॉक्स रहे. वहीं, सन फार्मा, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, टाइटन और अल्ट्राटेक सीमेंट टॉप गेनर के रूप में उभरे. अमेरिकी और एशियाई बाजार भी धड़ाम ट्रंप के ऐलान के बाद अमेरिकी और एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट आई.डाउ जोन्स 2.4% गिरा,नैस्डैक 4.2% टूटा,एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में 3.5% की गिरावट,टोक्यो के निक्केई 225 इंडेक्स में 2.9% की गिरावट,कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 1.9% टूटा और ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 1.8% गिरकर बंद हुआ. क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट? डोनाल्ड ट्रंप ने चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की घोषणा की है. ट्रंप ने करीब 180 देशों पर जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान किया गया है. भारत पर 26 प्रतिशत, चीन पर 34 प्रतिशत, वियतनाम पर 46 प्रतिशत और यूरोपीय यूनियन पर 20 प्रतिशत का टैरिफ लगाया गया है. इसके तहत,जापान पर 24%,दक्षिण कोरिया पर 25% टैरिफ लगाए गए हैं. इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है, जिससे बाजार में डर का माहौल बन गया है. भारतीय कंपनियों को भी इस फैसले से झटका लग सकता है, खासकर वे जो एक्सपोर्ट और टेक सेक्टर से जुड़ी हैं. ट्रंप के इस फैसले से रुपया कमजोर हो सकता है, जिससे विदेशी निवेश प्रभावित होगा. रेसिप्रोकल टैरिफ और न्यूनतम बेसलाइन टैरिफ का ऐलान: इसके अलावा, ट्रंप ने 10% न्यूनतम बेसलाइन टैरिफ की भी घोषणा की है, जो उन देशों पर लागू होगा जो अमेरिकी उत्पादों पर भारी शुल्क लगाते हैं। ट्रंप का कहना है कि यह नीति उन देशों पर दबाव बनाने के लिए है, जो अमेरिकी निर्यात के खिलाफ ऊंचे शुल्क लगाते हैं। उनका आरोप है कि अमेरिका के व्यापारिक साझेदार अपनी नीतियों से अमेरिका को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचा रहे हैं, और इसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। ऑटोमोबाइल्स पर भारी टैरिफ: ट्रंप ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा की, जिसमें उन्होंने विदेशी … Read more

जेलेंस्की के खिलाफ रूसी राष्ट्रपति के बयान पर भड़के ट्रंप, मॉस्को को दे डाली बड़ी धमकी

वॉशिंगटन यूक्रेन के राष्ट्र्पति वोलोदिमिर जेलेंस्की को लेकर पुतिन की टिप्पणी पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भड़क गए हैं। ट्रंप ने रविवार को कहा कि वह जेलेंस्की की आलोचना से बहुत नाराज हैं। इसके साथ ही ट्रंप ने धमकी दी कि अगर रूसी राष्ट्रपति युद्ध विराम के लिए सहमत नहीं होते हैं तो वे मॉस्को के तेल निर्यात पर टैरिफ लगा देंगे। एनबीसी न्यूज के साथ फोन पर दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने 50% टैरिफ लगाने की बात कही, जो रूसी तेल खरीदने वाले देशों को प्रभावित करेगा। उन्होंने यूक्रेन में जंग न रोकने के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराने की बात कही। उन्होंने कहा, ‘अगर रूस और मैं यूक्रेन में खून-खराबे को रोकने के लिए कोई समझौता करने में असमर्थ हैं और अगर मुझे लगता है कि यह रूस की गलती थी, जो कि शायद न हो- तो मैं रूस से आने वाले सभी तेल पर सेकेंडरी टैरिफ लगाने जा रहा हूं।’ पुतिन को लेकर ट्रंप की टिप्पणी रूसी नेता को लेकर उनके पिछले रुख से अलग है। जेलेंस्की को हटाने की मांग पर भड़के ट्रंप पुतिन को लेकर ट्रंप का गुस्सा तब आया, जब रूसी राष्ट्रपति ने यूक्रेन में जेलेंस्की को हटाकर एक नई सरकार बनाने की मांग की। एनबीसी के साथ फोन पर ट्रंप ने कहा, ‘यह सही जगह पर नहीं जा रहा है।’ इसके पहले ट्रंप ने जेलेंस्की को लेकर निराशा जाहिर की थी और उन्हें तानाशाह तक कह दिया था। लेकिन अब वह रूस के खिलाफ सीधे बोल रहे हैं। ट्रंप ने कहा, मैं बहुत गुस्सा था, नाराज था, जब पुतिन ने जेलेंस्की की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया, क्योंकि यह सही जगह पर नहीं जा रहा था, आप समझते हैं?’ रूस की अर्थव्यवस्था को धमकी अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस की अर्थव्यवस्था को झटका देने की चेतावनी दी और कहा कि सभी रूस तेल पर टैरिफ 25 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी किया जा सकता है। इसका मतलब यह होगा कि अगर आप रूस से तेल खरीदते हैं तो अमेरिका में व्यापार नहीं कर सकते। हालांकि, ट्रंप ने दोनों नेताओं के बीच सुलह का भी संकेत दिया और कहा, ‘पुतिन जानते हैं कि मैं गुस्से में हूं, लेकिन गुस्सा जल्दी खत्म हो जाता है, अगर वह सही काम करते हैं।’ क्या कह रहे विश्लेषक अब ऐसे में सवाल उठता है कि अगर रूस ने यूक्रेन युद्ध विराम समझौते पर अपनी सहमति नहीं दी और ट्रंप ने रूसी तेल निर्यात पर 25 से 50 फीसदी की टैरिफ लगाया तो किन-किन देशों को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके जवाब में विश्लेषकों और अधिकारियों का कहना है कि अगर डोनाल्ड ट्रम्प रूसी तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ 25-50% टैरिफ लगाते हैं, तो चीन और भारत इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। दरअसल, 2022 में यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध छिड़ने के बाद अमेरिका समेत तमाम पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे। उसके तेल खरीदने पर भी बैन लगा दिया गया था लेकिन भारत और चीन के अलावा कुछ और देशों ने रूस से तेल खरीदना चालू रखा। ऐसे में अमेरिका द्वारा सीधे खरीददारों पर सेकंडरी टैरिफ लगाने से न केवल पुतिन की तेल राजस्व तक पहुंच कम हो सकती है बल्कि जो देश इसका उल्लंघन करेंगे उन्हें भी आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ सकता है। रूस के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में शामिल न होने के बावजूद, चीन इसका उल्लंघन करने के बारे में सावधान रहा है, क्योंकि उसे सेकंडरी टैरिफ का डर सताता रहा है। उदाहरण के लिए, कुछ चीनी बैंकों ने अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रणाली से प्रतिबंधित होने के डर से रूसी कंपनियों के साथ लेन-देन कम कर दिया है। चीन को भारत ने छोड़ा पीछे मल्टीनेशनल इन्वेस्टमेंट बैंक और वित्तीय सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनी UBS के विश्लेषक जियोवानी स्टानोवो ने द गार्डियन से कहा, “जैसा कि ट्रम्प ने वेनेजुएला के तेल के मामले में किया है, वैसा ही रूस के मामले में खरीदारों को लक्षित करने के लिए कर सकते हैं। इस कदम से चीन और भारत प्रभावित हो सकता है। हालांकि, हमें यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में क्या घोषणा होती है। बता दें कि भारत चीन को पीछे छोड़ते हुए समुद्री रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। भारत-चीन के अलावा और किन देशों पर असर 2024 में भारत के कुल कच्चे तेल के आयात का लगभग 35% रूसी कच्चा तेल था। यूक्रेन युद्ध की शुरुआत से ही भारत रूसी तेल खरीदता रहा है लेकिन अब अमेरिकी टैरिफ की चिंता होने लगी है। भारत और चीन के अलावा तुर्किए भी रूसी तेल का बड़ा खरीदार है। इसके अलावा बुल्गारिया,इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, स्लोवाकिया, हंगरी भी रूसी तेल खरीदने में आगे रहा है। पाकिस्तान ने भी रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए डील किया है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में दी इफ्तार पार्टी, गेस्ट के तौर इन्हें बुलाया और हो गया कांड, Not Trump Iftar के लगे नारे

वाशिंगटन डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर व्हाइट हाउस में पहली इफ्तार (Iftar) पार्टी की मेजबानी की. लेकिन ट्रंप की यह इफ्तार पार्टी विवादों में घिर गई है. अमेरिकी मुस्लिम इस इफ्तार डिनर पर भड़के हुए हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में इफ्तार डिनर की मेजबानी करते हुए कहा कि मैं आप सभी का व्हाइट हाउस के इफ्तार डिनर में स्वागत करता हूं. हम इस्लाम के पवित्र महीने रमजान का जश्न मना रहे हैं. यह बहुत बेहतरीन महीना है. दुनियाभर के मुस्लिमों को रमजान मुबारक. हम दुनिया के बेहतरीन धर्मों में से एक धर्म का सम्मान करते हैं. उन्होंने कहा कि इस पवित्र महीने के दौरान मुस्लिम सुबह से शाम तक रोजा रखते हैं. खुदा की इबादत करते हैं. इसके बाद पूरी दुनिया के मुसलमान हर रात परिवारों और दोस्तों के साथ एकजुट होकर ईश्वर का धन्यवाद करते हैं और इफ्तार करते हैं. हम सभी पूरी दुनिया में शांति चाहते हैं. ट्रंप ने कहा कि 2024 राष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए मुस्लिम अमेरिकी समुदाय का आभार भी जताया. बता दें कि व्हाइट हाउस में इफ्तार पार्टी आयोजित करने की दो दशक पुरानी परंपरा है. लेकिन आरोप हैं कि इस बार अमेरिकी मुस्लिम सांसदों और समुदाय से जुड़े नेताओं को इसमें शामिल होने का न्योता नहीं दिया गया. इसके बजाए मुस्लिम देशों के विदेशी राजदूतों को इफ्तार डिनर में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था. व्हाइट हाउस के बाहर कई मुस्लिम सिविल राइट्स ग्रुप ने Not Trump’s Iftar प्रोटेस्ट किया. इस दौरान एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि यह डोनाल्ड ट्रंप का एक तरह का पाखंड है. वह एक तरफ देश में मुस्लिमों के प्रवेश पर बैन लगाते हैं तो दूसरी तरफ इफ्तार पार्टी का आयोजन करते हैं. बता दें कि इससे पहले 2017 में ट्रंप ने राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले कार्यकाल के दौरान व्हाइट हाउस की इफ्तार पार्टी को रद्द कर दिया था. दरअसल 1996 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल के दौरान व्हाइट हाउस में इफ्तार पार्टी की शुरुआत की गई थी, जिसे बाद के राष्ट्रपतियों जॉर्ज बुश और बराक ओबामा ने भी जारी रखा. इस इफ्तार पार्टी में मुस्लिम समुदाय के प्रतिष्ठित सदस्यों के साथ ही मुस्लिम देशों के राजनयिक और सीनेटर शामिल होते रहे हैं.  

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet