मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ,भारत संकल्प यात्रा , की समीक्षा बैठक ली.
Chief Minister Dr. Mohan Yadav held a review meeting for the Bharat Sankalp Yatra.
Chief Minister Dr. Mohan Yadav held a review meeting for the Bharat Sankalp Yatra.
The association has accused the GRP station in-charge of illegal extortion. एसोसिएशन ने पुलिस कप्तान से कार्रवाई की मांग सदस्य रहे मौजूद, The association demanded action against the police captain from the present members. कटनी। शहर के एक सराफा कारोबारी ने जीआरपी पर अवैध वसूली का आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर जीआरपी थाना प्रभारी पर कार्रवाई की मांग की है। इस दौरान सराफा कारोबारी के साथ सराफा एसोसिएशन के पदाधिकारी व सदस्य भी उपस्थित थे। पुलिस अधीक्षक अभिजीत रंजन को दी गयी शिकायत में सराफा कारोबारी राजू सोनी ने बताया कि विगत कुछ दिनों से थाना जीआरपी में रोककर अवैध रूप से धमकी देकर अवैध वसूली की जा रही है। व्यापारी द्वारा बिल बताने पर उसे नकली बताकर उक्त माल को चोरी डकैती का बताकर माल को जप्त कर जेल भेजने की धमकी दी जाती है तथा बैग जबरन खुलवाया जाता है। जिसे भीड में असामाजिक तत्वों के सामने दिखाकर व्यापारी को आगे सफर में जान व माल जाने की पूर्ण रूप से अशंका रहती है। जिससे कभी भी कोई भी अनहोनी हो सकती है। राजेन्द्र सोनी आत्मज जगदीश प्रसाद सोनी निवासी मिर्जापुर शिवशंकर सोनी आत्मज शिवदास सोनी हम दोनों क्रमश: मोहित ज्वेलर्स, द्धारका प्रसाद महादेव प्रसाद ज्वेलर्स एलएलपी, सिद्धि ज्वेलर्स के माल का बिल लेकर सागर जाने हेतु लोकमान्य ट्रेन से सांयकाल लगभग 7:05 बजे कटनी स्टेशन उतरे और खाना खाने स्टेशन से बाहर आये वहां पर जीआरपी के सिपाही रघुराम सिंह परमार, प्रभारी मैडम अरूणा बहने के द्वारा होटल से बाहर निकलते ही पकड़ कर जीआरपी थाने ले जाकर मेरे बैग की तलाशी लेकर तराजू मंगवा कर चांदी जेवर, तौली की गई जो बिल के अनुसार पूरा 30 किलो 877 ग्राम निकला। मेरे द्वारा बैग वापिस मांगने पर बिल को नकली बताकर बिल फाड़ देने की धमकी राजू को दी गई और हम दोनों के मोबाइल छीनकर पीछे के कमरे में बंद कर दिया गया। मेरे द्वारा काफी अनुनय-विनय करने के बाद माल छोडऩे के लिये एक लाख रूपये की मांग की गई। मेरे द्वारा इंकार करने पर कि मेरा पूरा माल बिल बाउचर सही है में कोई रिश्वत नहीं दे पाउंगा। मेरे दामाद मनोज सोनी कटनी के द्वारा रूपयो का इंतजाम कर दिये गये। तब रघुराज सिंह परमार एवं जीआरपी थाना की पूरी टीम एवं मैडम अरूणा बहाने द्वारा हमें हमारा सामान चांदी के जेवर वापिस दिये गये एवं धमकी दी गई कि यदि किसी से बताया तो तुम्हारा यहां आना जाना व व्यापार बंद करा देगे। तथा व्यापार करने के लिये महीना बांधने की धमकी दी गई। सराफा कारोबारियों ने शिकायत देकर मामले की जांच कराते हुए जीआरपी थाना प्रभारी अरूणा बहाने पर कार्रवाई की मांग की है।
The Deputy Tehsildar, in response to the businessman’s complaint, removed the unauthorized encroachment. मामला शिवाजी मार्केट में अवैध अतिक्रमण का. The matter involves unauthorized encroachment in Shivaji Market. आमला। नगर के जनपद चौक स्थित शिवाजी कमलेक्स से सटी सरकारी भूमि पर स्थाई टीन शेड रख व्यक्ति द्वारा अवैध रूप से अतिक्रमण किया गया था । किए गए अवैध अतिक्रमण से शिवाजी मार्केट के व्यापारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था । जिस बात की शिकायत व्यापारी मंगलेश कामतकार ने तहसीलदार आमला को कर बताया में आमला निवासी हूं एवं जपनद पंचायत द्वारा आबंटीत दुकान में अपना व्यवसाय संचालित करता आ रहा हूं मेरी छत्रपति शिवाजी काम्पेलेक्स में हार्डवेयर की दुकान है। दुकान करीब 6 सालो से संचालीत है। 2. किसी व्यक्ति द्वारा रात्रि 12 से 1 बजे के बिज में दिनांक 13/12/2023 को आवेदक की दुकान के सामने एक पक्का टिन सेड लाकर रख दिया गया है, जिसेसे अपनी दुकान लगाने में परेशानी हो रही है। प्राप्त शिकायत को संज्ञान में लेकर बुधवार नायब तहसीलदार आमला एस. बी. समेलिक ने राजस्व अमले एवं नगर पालिका आमला के संयुक्त दल द्वारा मौके पर पहोंच अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की। मिली जानकारी अनुसार तहसीलदार ने मौके पर शिकायत कर्ता एवं अन्य व्यापारियों के समक्ष पंचनामा बना ठेला जप्ती की कार्यवाही की ।
The current regulations on municipal councils are aimed at providing benefits to the preferred contractors. एक करोड रुपए से अधिक की निविदा का नहीं हो रहा राष्ट्रीय प्रकाशन, बटोरने में लगे अध्यक्ष और सीएमओ. The national tender for amounts exceeding one crore rupees is not currently being processed due to the efforts of the chairman and CEO involved in scrutinizing it. छतरपुर! नगर पालिका परिषद छतरपुर में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग मध्य प्रदेश शासन भोपाल के किसी भी नियम को नहीं माना जा रहा है। अध्यक्ष और अफसरों की लाट साबी ऐसी है कि नियमों को ही ताक पर रख दिया जाता है। अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ देने के लिए पोर्टल पर निविदा ऑनलाइन कर दी जाती है परंतु अखबारों में उसका राष्ट्रीय प्रकाशन नहीं करवाया जाता है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग मध्य प्रदेश शासन भोपाल के नियम है कि एक करोड़ से अधिक रुपए की निविदा को प्रतिष्ठित किसी अंग्रेजी समाचार पत्र में राष्ट्रीय प्रकाशन करवाना होता है लेकिन नगर पालिका परिषद छतरपुर में भर्राशाही का है कि राष्ट्रीय प्रशासन तो छोड़ वह प्रादेशिक प्रकाशन भी नहीं करवाते हैं। जिले के जागरूक लोगों के द्वारा जल्द ही इस संबंध में भोपाल में वरिष्ठ अफसर से मामले में हस्तक्षेप की मांग की जा रही है। नगर पालिका परिषद छतरपुर में अध्यक्ष और सीएमओ बटोरने में लगे हैं।
In Bundelkhand, all stalwarts of the BJP emerged victorious, while Congress was confined to 5 seats. हारते-हारते सुरखी में जीत गए गोविंद राजपूत ,राजनगर में 302 के प्रकरण के बावजूद जीते अरविंद. Amidst setbacks, Govind Rajput secured victory, while Arvind emerged triumphant in Rajnagar despite the 302 case. भोपाल। विधानसभा चुनाव के नतीजों ने पूरे प्रदेश की तरह बुंदेलखंड में भी सभी को चौंका दिया। यहां भाजपा के सभी दिग्गज चुनाव जीत गए। प्रदेश के परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पिछड़ रहे थे लेकिन अंतत: उन्होंने लगातार तीसरी जीत दर्ज कर ली। छतरपुर जिले के राजनगर भाजपा प्रत्याशी अरविंद पटैरिया के खिलाफ मतदान के दिन ही हत्या का प्रकरण दर्ज हो गए था। उनकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राजनगर थाने के सामने रात भर धरना दिया था लेकिन अरविंद भी चुनाव जीतने में सफल रहे। हालात ये है कि कांग्रेस 26 में से मात्र 5 सीटें हासिल कर सकी जबकि भाजपा ने 21 सीटें जीत कर सबको चौंका दिया। सागर में मंत्रियों की तिकड़ी जीतीसागर जिले की 8 विधानसभा सीटों में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया। सरकार में शामिल जिले के तीनों मंत्री गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह और गोविंद सिंह राजपूत जीत दर्ज करने में सफल रहे। गोपाल और भूपेंद्र ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। भार्गव क्षेत्र में प्रचार के लिए निकले तब भी लगभग 73 हजार वोटों के अंतर से चुनाव जीते। कांग्रेस ने भाजपा से बीना सीटी छीनी तो भाजपा ने कांग्रेस की दो सीटें देवरी और बंडा छुड़ा लीं। देवरी में कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे हर्ष यादव चुनाव हार गए। कुल मिलाकर भाजपा 7 सीटें जीती जबकि कांगेस एक सीट पर सिमट गई। छतरपुर में कांग्रेस के तीनों विधायक हारेछतरपुर जिले की 6 में से 5 सीटेँ भाजपा ने जीत लीं। यहां कांग्रेस के तीनों विधायक छतरपुर से आलोक चतुर्वेदी, महाराजपुर से नीरज दीक्षित और राजनगर से विक्रम सिंह नातीराजा चुनाव हार गए। कांग्रेस सिर्फ एक सीट जीती। कांग्रेस को यहां पूर्व विधायक और जिले के कद्दावर नेता शंकरप्रताप सिंह मुन्ना राजा को अलग-थलग करने का नुकसान हुआ। मलेहरा में कांग्रेस की रामसिया भारती ने भाजपा के प्रद्युम्न सिंह लोधी को हरा दिया। मुन्ना राजा ने सिर्फ रामसिया का प्रचार किया था। प्रद्युम्न 2018 का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर जीते थे लेकिन बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए थे। टीकमगढ़, निवाड़ी में कांग्रेस का बेहतर प्रदर्शनबुंदेलखंड अंचल के टीकमगढ़ और निवाड़ी जिले ही ऐसे रहे जहां कांग्रेस ने पांच में से तीन सीटें जीत कर बेहतर प्रदर्शन किया। टीकमगढ़ जिले की जतारा में ही हरिशंकर खटीक भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते शेष दो सीटें टीकमगढ़ और खरगापुर कांग्रेस ने छीन लीं। टीकमगढ़ में पूर्व मंत्री यादवेंद्र सिंह ने भाजपा के राकेश गिरि को हरा दिया। यहां भाजपा को पार्टी के बागी केके श्रीवास्तव ने नुकसान पहुंचाया। खरगापुर में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के भतीजे राहुल लोधी चुनाव हार गए। उन्हें कांग्रेस की चंदारानी गौर ने शिकस्त दी। निवाड़ी की दो सीटों में से प्रथ्वीपुर में कांग्रेस के नितेंद्र सिंह राठौर जबकि निवाड़ी में भाजपा के अनिल जैन चुनाव जीते। इस तरह यहां मुकाबला बराबरी का रहा। पन्ना, दमोह में नहीं खुला कांग्रेस का खातापन्ना और दमोह जिले में कांग्रेस का खाता ही नहीं खुला। भाजपा ने सभी 7 सीटें जीत लीं। दमोह में जयंत मलैया बड़े अंतर से जीते और पन्ना में सरकार के खनिज मंत्री ब्रजेंद्र प्रताप सिंह भी चुनाव जीत गए। पन्ना जिले की पवई सीट में कांग्रेस के पूर्व मंत्री मुकेश नायक को पराजय का सामना करना पड़ा। गुनौर सीट पिछली बार कांग्रेस के पास थी जिसे इस बार भाजपा के राजेश वर्मा ने छीन लिया। इस तरह बुंदेलखंड में एक तरह से कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया।
Discussions have commenced on the appointment of the new Chief Secretary following the swearing-in of the Chief Minister. अनुराग जैन, विवेक अग्रवाल व हरिरंजन राव मप्र लौटेंगे, मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी. Anurag Jain, Vivek Agrawal, and Hariranjan Rao will return to Madhya Pradesh, taking on significant responsibilities. भोपाल। प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. मोहन यादव की ताजपोशी के साथ नए मुख्य सचिव को लेकर चर्चाएं प्रारंभ हो गई है। इसके साथ ही यह चचर्चा भी है कि केंद्रीय भूतल परिवहन सचिव अनुराग जैन प्रदेश लौट सकते हैं। यदि अनुराग जैन प्रदेश लौटते हैं तो श्रीमती बीरा राणा के बाद उन्हें प्रदेश का मुख्य सचिव बनाया जाएगा। अतिविश्वसनीय सूत्रों के अनुसार श्रीमती राणा का कार्यकाल पूरा होने के एक माह पूर्व यानी फरवरी 2024 के अंतिम या मार्च के प्रथम सप्ताह में राज्य सरकार किसी वरिष्ठ अधिकारी को मंत्रालय मेंओएसडी नियुका कर देगी। ओएसडी ही श्रीमती राणा की सेवानिवृत्ति पर 31 मार्च 2024 को राज्य के प्रशासनिक मुखिया का पदभार संभाल लेगा। सूत्रों का कहना है कि अनुराग जैन यदि प्रदेश नहीं लौटते तो अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य च चिकित्सा शिक्षा मोहम्मद सुलेमान, अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा या अपर मुख्य सचिव नर्मदा घाटी विकास एसएन मिश्रा में से किसी एक को मुख्य सचिव बनाया जा सकता है। अंतिम फैसला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लेना है। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ अतिरिक्त सचिव वित्त विवेक अग्रवाल तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में पदस्थ अतिरिक्त सचिव हरिरंजन राव भी प्रदेश लौट सकते हैं। यदि अग्रवाल व राव प्रदेश लौटते हैं तो उन्हें महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। दोनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले उजजैन में कलेक्टर रह चुके हैं। मुख्यमंत्री यादव जब पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष थे, तब हरिरंजन राव निगम के एमडी थे।
Gopal Bhargav becomes the Protem Speaker of Madhya Pradesh. राज्यपाल ने दिलाई शपथ; सबसे सीनियर और नौ बार के विधायक हैं भार्गव The Governor administered the oath; Bhargav is the most senior and a nine-time legislator. भाजपा के सबसे सीनियर व रहली से नौ बार के विधायक गोपाल भार्गव ने गुरुवार को प्रोटेम स्पीकर पद की शपथ ली। सुबह 11 बजे राजभवन में गवर्नर मंगुभाई पटेल उनको शपथ दिलाई। बाद में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर विधायकों को शपथ प्रोटेम स्पीकर दिलाएंगे। यहां स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर भी शपथ लेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस करेंगे। इसके बाद एसीएस की बैठक लेंगे। वे इससे पहले विधानसभा स्पीकर और प्रोटेम स्पीकर के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में शामिल हुए। सीएम ने पहली कैबिनेट बैठक में बुधवार को खुले में मांस की बिक्री और तेज आवाज में बजने वाले लाउड स्पीकर को लेकर अहम फैसले किए। पूर्व सीएम उमा भारती ने गुरुवार को इनकी तारीफ की है। ऐसी है प्रोटेम स्पीकर की व्यवस्था प्रोटेम स्पीकर का जिक्र संविधान के अनुच्छेद 180(1) में है। इसमें प्रावधान है कि जब विधानसभा अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का पद रिक्त हो तो कार्यालय के कर्तव्यों का पालन ऐसे विधानसभा सदस्य द्वारा किया जाना चाहिए जिसे राज्यपाल नियुक्त कर सकते हैं। आमतौर पर सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य को प्रोटेम स्पीकर चुना जाता है। इस मामले में वरिष्ठता सदन में सदस्यता से देखी जाती है न कि सदस्य की उम्र से तय की जाती है। संवैधानिक परंपरा के अनुसार प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति के लिए कोई विशिष्ट संवैधानिक या वैधानिक प्रावधान नहीं है।
The expansion of the cabinet, here are the names of the ministers who could be surprising. हर अंचल से बनाए जाएंगे 4 से 6 तक मंत्री- खाली रखे जा सकते हैं आधा दर्जन मंत्री पद, मंत्रिमंडल में जातीय संतुलन साधने की तैयारी उदित नारायण भोपाल। जिस प्रकार मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्रियों के चयन में रसूखदार नेताओं की नहीं चली, ठीक इसी तर्ज पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के मंत्रिमंडल का गठन होगा। लोकसभा चुनाव की दृष्टि से इसमें क्षेत्रीय और जातीय संतुलन तो साधा जाएगा लेकिन पट्ठावाद बिल्कुल नहीं चलेगा। अर्थात रसूखदार नेताओं का समर्थक होने के कारण किसी को मंत्री नहीं बनाया जाएगा। सूत्रों के अनुसार पहले चरण में 26-27 मंत्रियों को शामिल कर शपथ दिलाई जाएगी और आधा दर्जन से ज्यादा मंत्री पद खाली रखे जाएंगे। हमेशा की तरह नेतृत्व मंत्रिमंडल के गठन में भी सभी को चौंका सकता है। मोहन-वीडी लेकर जाएंगे संभावित मंत्रियों की सूचीमंत्रिमंडल के गठन पर भी केंद्रीय नेतृत्व की मुहर लगेगी। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा संभावित मंत्रियों की सूची लेकर दिल्ली जाएंगे। वहां नेतृत्व के साथ सूची पर डिस्कशन होगा। नाम जोड़े और घटाएं जाएंगे। इसके बाद फायनल सूची के अनुसार मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी।वरिष्ठ और नए के बीच होगा संतुलनमंत्रिमंडल के गठन में भी मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्रियों का फार्मूला अपनाया जा सकता है। इसके तहत वरिष्ठ और नए विधायकों के बीच संतुलन साधा जा सकता है। कुछ वरिष्ठों के साथ नए मंत्री ज्यादा बनाए जा सकते हैं। जैसे 8-9 वरिष्ठ मंत्रियों के साथ 16-18 नए विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। चंबल-ग्वालियर अंचल से ये बन सकते मंत्रीभाजपा सूत्रों के अुनसार अंचलों में मिली सीटों के संख्या के आधार पर मंत्रियों की संख्या तय हो सकती है। इस आधार पर चंबल- ग्वालियर, बुंदेलखंड, विंध्य और मध्य अंचल से 4-4 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इनमें जातीय संतुलन भी साधा जाएगा। जैसे, चंबल-ग्वालियर से नेता प्रतिपक्ष को हराने वाले अंबरीश शर्मा, जनता के बीच सक्रिय प्रद्युम्न सिंह तोमर, केपी सिंह को हराने वाले देवेंद्र कुमार जैन और घनश्याम सिंह को हराने वाले प्रदीप अग्रवाल को मंत्री बनाया जा सकता है। नरेंद्र सिंह तोमर पहले ही विधानसभा अध्यक्ष घोषित किए जा चुके हैं। बुंदेलखंड, विंध्य में ये हो सकते चेहरेबुंदेलखंड और विंध्य से मंत्रिमंडल में वरिष्ठ और कनिष्ठ के बीच संतुलन के तहत चेहरे तय किए जाएंगे। बुंदेलखंड से नरयावली विधायक प्रदीप लारिया, छतरपुर की ललिता यादव और जबेरा के धर्मेंद्र लोधी को मौका मिल सकता है। इनके अलावा वरिष्ठों में गोपाल भार्गव, भूपेेंद्र सिंह, गोविंद सिंह राजपूत, जयंत मलैया और बृजेंद्र प्रताप सिंह में से 1 अथवा 2 को मौका मिल सकता है। विंध्य अंचल से सीधी की रीति पाठक, जयसिंह नगर की मनीषा सिंह, मऊगंज से प्रदीप पटेल और रामपुर बघेलान से जीते विक्रम सिंह को मौका मिल सकता है। इस अंचल के राजेंद्र शुक्ला पहले ही उप मुख्यमंत्री बन चुके हैं। महाकौशल से बनाए जा सकते हैं 5 मंत्रीमहाकौशल अंचल में भाजपा को इस बार 38 में से 21 सीटें मिली हैं। यह कमलनाथ का भी इलाका है। इसलिए यहां से 5 मंत्री बनाए जा सकते हें। इनमें बहोरीबंद के प्रणव पांडे, नरसिंहपुर के प्रहलाद पटेल और बैतूल के हेमंत खंडेलवाल को मौका मिल सकता है। इनके अलावा जबलपुर के राकेश सिंह और गाडरवारा के उदयप्रताप सिंह में से किसी एक को मौका मिल सकता है। ये दोनों पूर्व सांसद हैं। इसी प्रकार शहपुरा के ओम प्रकाश धुर्वे और मंडला की संपतिया उइके में से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है। मालवा-निमाड़ से बन सकते सर्वाधिक मंत्रीमालवा- निमाड़ अंचल में सर्वाधिक 66 सीटें हैं। भाजपा ने इनमें से 48 सीटें जीती हैं। इसलिए यहां से सर्वाधिक मंत्री बनाए जा सकते हैं। इंदौर से तुलसीराम सिलावट के अलावा कैलाश विजयवर्गीय और रमेश मैंदोला में से किसी एक काे मंत्री बनाया जा सकता है। इनके अलावा सज्जन सिंह वर्मा को हराने वाले राजेश सोनकर, दीपक जोशी को हराने वाले आशीष शर्मा, हरसूद के विजय शाह, नेपानगर की मंजू राजेंद्र दादू मंत्री बन सकते हैं। भोपाल के आसपास भी कम दावेदार नहींप्रदेश के मध्य अंचल अर्थात भोपाल के आसपास मंत्री पद के दावेदारों की संख्या कम नहीं है। इस बार रामेश्वर शर्मा, विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, विष्णु खत्री में से दो मंत्री बन सकते हैं। रायसेन जिले में प्रभुराम चौधरी और सुरेंद्र पटवा में से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है। इनके अलावा सीहोर के सुदेश राय और खिलचीपुर में पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह को हराने वाले हजारीलाल दांगी मंत्री बनाए जा सकते हैं। संभावित मंत्रियों की यह सूची सूत्रों पर आधारित है क्योंकि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी क्या करेगी, कोई नहीं जानता।
I will stand by you until my last breath. कमलनाथ ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के इस्तीफे को लेकर किया खुलासा छिंदवाड़ा। भले ही प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं बन पाई है, लेकिन पूर्व सीएम कमलनाथ अपने गढ़ छिंदवाड़ा में अपना किला बचाने में कामयाब रहे। लगभग 43 सालों से कमलनाथ छिंदवाड़ा की पहचान बनकर राजनीति में छाए हुए हैं। ऐसे में इस बार भी विधानसभा चुनाव में छिंदवाड़ा की सातों सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली है। कमलनाथ अब छिंदवाड़ा दौरे पर हैं और वे हर विधानसभा क्षेत्र में जाकर आभार सभा कर रहे हैं। पांढुर्णा और सौंसर में बुधवार को कमलनाथ ने आभार सभा में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पांढुर्णा में कहा कि वे आखिरी सांस तक छिंदवाड़ा की जनता के बीच रहेंगे, वह रिटायरमेंट नहीं ले रहे है। नहीं लेगें रिटायरमेंट कमलनाथ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उनकों लेकर राजनीतिक गलियारो में यही चर्चा चल रही थी कि विधानसभा चुनाव में मिली हार के कारण उन्हें पीसीसी चीफ पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। हालांकि आला कमान ने नाथ को दोबारा लोकसभा चुनाव तक की जवाबदारी दी है। ऐसे में कमलनाथ ने अपने गढ़ छिंदवाड़ा से आज इसको लेकर एक बड़ा बयान देकर यह साफ कर दिया है कि वे आने वाले समय में भी पूरी सक्रियता के साथ जनता के बीच रहेंगे और रिटायरमेंट नहीं लेंगे।आखिरी सांस तक जनता के साथ उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपनी आखिरी सांस तक जनता के साथ खड़े है। वह रिटायरमेंट नहीं ले रहे है। उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा की जनता का प्यार उन्हे पिछले 43 सालों से मिलता आ रहा है। आगे भी यह प्यार और स्नेह उन्हे मिलता रहेगा। उन्होंने कहा कि जिले के विकास के लिए वह कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। लोकसभा चुनाव का फूंका बिगुल कमलनाथ ने छिंदवाड़ा में मिली बंपर जीत के बाद अब लोकसभा चुनाव की तैयारियों का बिगुल फूंक दिया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से छिंदवाड़ा की जनता ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का साथ दिया है। इसी तरह से लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को यही प्यार और विश्वास लोकसभा चुनाव में भी मिलेगा। इस दौरान उनके साथ उनके बेटे नकुलनाथ भी मौजूद थे।
As soon as becoming the Chief Minister, signs of significant administrative changes in the state. सचिवालय से सबसे पहले हटाए जाएंगे पीएस रस्तोगी, मुख्य सचिव के लिए तीन नाम का भेजा जाएगा डीओपीटी में पैनल – मंत्रालय स्तर पर सचिव सेक्रेट्री सहित कई अन्य विभागों के अधिकारियों के भी होंगे ट्रांसफर – प्रदेश में कानून व्यवस्था की समीक्षा के साथ कई जिलों के पुलिस अधीक्षकों के भी होंगे तबादले। *उदित नारायण* भोपाल। मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वल्लभ भवन में अधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक के साथ ही प्रशासनिक हमले में हड़कंप मच गया है। इसके पीछे की वजह है कि जनता से जुड़े हुए कामकाज करने वाले अधिकारियों की पूछ परख ज्यादा होगी। मुख्यमंत्री यादव ने स्पष्ट अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बिना भ्रष्टाचार की जनता से जुड़े हुए काम किए जाएं। सीएम के फरमान के बाद जरूर जल्द ही सर्जरी होगी सबसे पहले मुख्यमंत्री सचिवालय में लंबे समय तक पदस्थ रहे मनीष रस्तोगी को किसी और विभाग में पदस्थित किया जाएगा। मुख्यमंत्री सचिवालय में अनुभवी प्रमुख सचिव की पोस्टिंग होगी। जिन्हें कई विभागों में कामकाज का अनुभव रहा है। ऐसे में कई नाम सामने आ रहे हैं। वही मार्च में 2024 मौजूदा मुख्य सचिव वीरा राणा भी रिटायर होगी। इससे पहले सरकार की कोशिश होगी कि तीन सीनियर आईएएस अधिकारियों के नाम का पैनल डीओपीटी भेजा जाएगा। जिससे मध्य प्रदेश में 2 से 3 साल तक फिक्स मुख्य सचिव की पोस्टिंग हो सके। मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि दो से तीन विभाग में प्रमुख सचिव के पद खाली हैं अवसरों को प्रमोशन के साथ नई पोस्टिंग भी दी जाएगी मंत्रालय स्तर पर सचिव, डिप्टी सेक्रेटरी भी ट्रांसफर किए जाएंगे। कई सीनियर अधिकारियों की मीटिंग के बाद मंत्रालय में पदस्थ सक्रिय अधिकारियों को फ्रंट में लेकर आया जाएगा। सबसे पहले नपेंगे बड़े जिले की कलेक्टर – सूत्र बताते हैं कि तत्कालीन कलेक्टर ने जनता की कई मांगों को लेकर तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री और मौजूदा मुख्यमंत्री मोहन यादव को काफी परेशान किया था मोहन यादव ने इस बात की जानकारी संगठन को भी दी थी लेकिन सीनियर आईएएस अधिकारी के दबाव में कलेक्टर को नहीं हटाया गया अब सरकार के हाथ में कमान मोहन यादव के हाथ में है ऐसे में माना जा रहा है कि एक बड़े जिले के कलेक्टर को भी सबसे पहले हटाया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि सीएम बनने के बाद कलेक्टर और सीएम सचिवालय में पदस्थ रहे मनीष रस्तोगी तक उनसे मिलने नहीं गए। हालांकि मंत्रालय आने के बाद प्रमुख सचिव औपचारिकता के तौर पर मुलाकात की। सचिवालय में शिफ्ट होंगे उच्च शिक्षा विभाग के कई ओएसडी – उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े हुए अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा मुख्यमंत्री पहले इसी विभाग के मंत्री थे। ऐसे में अपने भरोसेमंद और काबिल ओएसडी को सचिवालय में जगह देंगे। इसके पीछे का कारण है कि कैबिनेट की पहली बैठक में ही उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े हुए कई फैसलों पर अमल किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शिक्षा से जुड़े हुए कार्यों को पूरा करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पदस्थ सीएम सचिवालय में किया जाएगा।
The first order in the interest of the environment, CM Mohan. भोपाल। म.प्र. में धार्मिक स्थल एवं अन्य स्थानों पर म.प्र. कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के प्रावधानों तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर जारी दिशा निर्देशों के अनुक्रम में राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया गया है कि किसी भी प्रकार के धार्मिक स्थल अथवा अन्य स्थान में निर्धारित मापदण्ड के अनुरूपही ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकर / डी.जे.) आदि का उपयोग किया जा सकेगा। ■ धार्मिक स्थल एवं अन्य स्थानों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकर / डी.जे.) को अवैधानिक रूप से और निर्धारित मापदंड से अधिक आवाज में बजाने पर लगेगा प्रतिबंध। ■ म.प्र. कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के प्रावधानों, माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशा- निर्देशों के अनुक्रम में लिया गया निर्णय। ■ धर्म गुरुओं से संवाद और समन्वय के आधार लाउडस्पीकरों को हटाने का प्रयास किया जाएगा और ऐसे धार्मिक स्थलों की सूची बनाई जाएगी जहां उक्त नियमों/निर्देशों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। ■ ध्वनि प्रदूषण तथा लाउडस्पीकर आदि के अवैधानिक उपयोग की जांच के लिये सभी जिलों में उड़नदस्तों के गठन का निर्णय लिया गया है।• जिला स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी एवं इस संबध में 31 दिसंबर 2023 तक पालन प्रतिवेदन गृह विभाग को उपलब्ध कराना होगा। ■ ध्वनि प्रदूषण के मामलों की सतत निगरानी के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान विभाग पुलिस मुख्यालय को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
The establishment of the Central Tribal University received approval from the Rajya Sabha, passing before the Lok Sabha. संसद ने बुधवार को राज्यसभा से मंजूरी मिलने के बाद तेलंगाना में सम्मक्का सरक्का केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए एक विधेयक पारित कर दिया। संसद ने बुधवार को राज्यसभा से मंजूरी मिलने के बाद तेलंगाना में सम्मक्का सरक्का केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए उच्च सदन ने केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2023 को विपक्षी सदस्यों की अनुपस्थिति में ध्वनि मत से पारित कर दिया, जिन्होंने पहले लोकसभा में सुरक्षा उल्लंघन पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर दबाव बनाने के लिए वॉकआउट किया था। केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2023 को पिछले हफ्ते लोकसभा ने मंजूरी दे दी थी। तेलंगाना में केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अनिवार्य केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत तेलंगाना में एक केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना अनिवार्य है। आंध्र प्रदेश में एक आदिवासी विश्वविद्यालय पहले ही स्थापित किया जा चुका है और परिसर ने काम करना शुरू कर दिया है, उन्होंने कहा, “अगर तेलंगाना सरकार ने सही समय पर सहयोग किया होता, तो यह विश्वविद्यालय अब तक सामने आ गया होता। उन्होंने एक कदम उठाया जमीन उपलब्ध कराने में काफी समय लग गया, इसलिए कार्यान्वयन में देरी हुई। केंद्रीय मंत्री ने सदन को आश्वासन दिया कि एक बार जब राष्ट्रपति विधेयक को मंजूरी दे देंगी, तो विश्वविद्यालय को जल्द से जल्द खोलने के लिए सभी प्रक्रियाएं तेजी से शुरू की जाएंगी ताकि यह आगे बढ़ सके और एक राष्ट्रीय संस्थान के रूप में कार्य कर सके। प्रधान ने विपक्षी सदस्यों के उन आरोपों का भी खंडन किया कि सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के माध्यम से इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश कर रही है।
Dr. Kusmariya assumed office as the Chairman of the State Backward Classes Commission, appointed in October. डॉ. कुसमरिया को राज्य शासन ने मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था. कार्यभार ग्रहण करने के बाद डॉ. कुसमरिया ने आयोग की गतिविधि के बारे में जानकारी प्राप्त की. आयोग मुख्य रूप से प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के लिये हितप्रहरी के रूप में कार्य करता है! मध्य प्रदेश में डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने आज भोपाल के श्यामलाहिल्स हिल्स मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग पहुंचकर अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण किया. इस मौके पर पिछड़ा वर्ग से जुड़े जन-प्रतिनिधि भी मौजूद थे डॉ. रामकृष्ण कुसमारिया (जन्म 30 जुलाई 1942) उनका जन्म सकोर में एक किसान परिवार में हुआ था। वह 8 फरवरी 2019 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए, फिर भारतीय जनता पार्टी10वीं, 11वीं के सदस्य थे। , 12वीं, 13वीं और 14वीं लोकसभा भारत की। 10वीं, 11वीं, 12वीं और 13वीं लोकसभा में उन्होंने दमोह निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और 14वीं लोकसभा में उन्होंने खजुराहो निर्वाचन क्षेत्र मध्य प्रदेश राज्य का। 2008 में, वह मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए पथरिया विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। के अध्यक्ष भी हैं।। बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण में किसान कल्याण और कृषि विकास मंत्री बने। वर्तमान में उन्हें वर्ष 2023 में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है!
BJP: Taking the risk in entrusting key responsibilities to lesser-known faces without hesitation. उदित नारायण इन अप्रत्याशित फैसलों के भीतर कई राजनीतिक संदेश छुपे हैं, जो भाजपा के स्वयंभू नेताओं के लिए तो हैं ही, उन विपक्षी नेताओं के लिए भी हैं, जो मात्र सीट बंटवारे और वोटों के कागजी गणित के भरोसे आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी को पटखनी देने का अरमान पाले हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व ने हिंदी भाषी तीन राज्यों में भारी जीत के बाद जिन अचर्चित चेहरों के हाथों में सत्ता की कमान सौंपी है, उससे ‘चौंकना’ शब्द भी फीका लगने लगा है। यह कुछ वैसा ही था कि कोई जादूगर अपनी जेब में हाथ डाले और नोट किसी भीड़ में छिपे शख्स की जेब से निकले।मोदी- शाह ने मीडिया के तमाम अटकलों को बेकार साबित कर दिया है। लेकिन इन अप्रत्याशित फैसलों के भीतर कई राजनीतिक संदेश छुपे हैं, जो भाजपा के स्वयंभू नेताओं के लिए तो हैं ही, उन विपक्षी नेताओं के लिए भी हैं, जो मात्र सीट बंटवारे और वोटों के कागजी गणित के भरोसे आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी को पटखनी देने का अरमान पाले हुए हैं। विधानसभा चुनावों में भाजपा के जीते हुए मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ राज्यों में ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ की रेस असली हार्स रेस से भी ज्यादा रोमांचक होने लगी थी। दावेदारी और राजयोग में अदृश्य मुकाबला चल रहा था। मीडिया की आंखें और राजनीतिक भविष्यवाणियां उन्हीं चंद चेहरों के आसपास मंडरा रही थीं, जिन्हें परंपरागत रूप से कुर्सी की दौड़ में प्रथम पंक्ति में माना जाता रहा था। ऐसे कुछ नाम जो सीएम या फिर वो भी नहीं तो कम से कम डिप्टी सीएम पद की शपथ लेने के लिए नए सूट सिलवा चुके थे। लेकिन हाय री किस्मत!भाजपा आलाकमान ने इन फैसलों से छह संदेश दिए हैं। पहला तो कोई खुद को पार्टी से ऊपर न समझे, दूसरा भाजपा में संघ अभी भी पूरी तरह ताकतवर है, तीसरा भाजपा में कोई साधारण कार्यकर्ता भी शीर्ष पद तक पहुंच सकता है, चौथा भाजपा ने आने वाले 15 साल तक राजनीति करने वाले नए खून की फौज तैयार कर दी है, पांचवां सोशल इंजीनियरिंग में भाजपा सभी राजनीतिक दलो से मीलों आगे है और छठा, इस बदलाव के जरिए भाजपा ने आगामी लोकसभा चुनाव की जमीन भी तैयार कर दी है और तकरीबन मुद्दे भी तय कर दिए हैं। मप्र में डा. मोहन यादव, छग में विष्णुदेव साय और राजस्थान में भजनलाल शर्मा बाकी दुनिया के लिए भले ही अचर्चित चेहरे रहे हों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा को उनकी कार्यक्षमता पर भरोसा है। अब यह इन तीनो पर है कि मिले हुए अवसर को कामयाबी में वो कितना बदल पाते हैं। खुद को कितना साबित कर पाते हैं। हालांकि यह जोखिम तो हर उस प्रयोग में रहता है, जो राजनीति की प्रयोगशाला में पहली बार किया जाता है। मप्र में जब पहली बार शिवराज को मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपी गई थी तब कई लोगों ने उनकी नेतृत्व क्षमता और देसी छवि पर तंज कसा था, लेकिन वक्त के साथ शिवराज ने खुद को न सिर्फ साबित किया बल्कि अपरिहार्य बन गए। उन्होंने अपनी राजनीति की नई इबारत लिखी। इमोशनल पॉलिटिक्स का नया सिलेबस तय किया और पूरे 18 साल तक सीएम पद पर जमे रहे।हालांकि, पहली पारी के सीएम शिवराज और चौथी पारी के सीएम शिवराज में काफी अंतर था । उनका अपना आभा मंडल और काकस तैयार हो गया था। इस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को भी यथासंभव किनारे लगाया और शायद इसकी इंतिहा हो चुकी थी। यही स्थिति राजस्थान में वसुंधरा राजे की थी। राजे तो पहले से राज परिवार से हैं। लिहाजा कुर्सी पर विराजना उनके लिए नैसर्गिक अधिकार था। उन्होंने खुद को पार्टी और राज्य का भाग्य विधाता मान लिया था। अलबत्ता छग के 15 साल सीएम रहे और बाद में भाजपा में ही हाशिए पर डाल दिए गए डॉ रमनसिंह ने खुली बगावत के रास्ते पर जाने से खुद को बचाया और कुछ बेहतर पाने की आस जिंदा रखी।कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा में इस तरह क्षत्रप संस्कृति को समाप्त पर ‘ एक हाईकमान कल्चर’ को लागू कर भाजपा ने बहुत बड़ा जोखिम लिया है, जो भविष्य में आत्मघाती भी हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चेहरे पर ही पार्टी का पूरी तरह आश्रित हो जाना संगठन की आंतरिक कमजोरी को दर्शाता है। यानी जब मोदी भी नहीं रहेंगे, तब क्या होगा? इसके अलावा इन तीन राज्यों में बिल्कुल ताजा चेहरों की ताजपोशी के साथ राजनीतिक और जातीय समीकरण भी साधने की कोशिश है। छग में आदिवासी चेहरे विष्णुदेव साय को सीएम बनाकर समूचे आदिवासी समुदाय को यह संदेश दिया गया है कि आदिवासी भी हिंदू ही हैं और वो हमारे लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इसी तरह मप्र में बिल्कुल अप्रत्याशित चेहरे डॉ. मोहन यादव को सीएम बनाकर यूपी और बिहार के यादवों को भी संदेश दिया गया है कि वो क्षेत्रीय पार्टियों के मोह से उबरें और भाजपा से जुड़ें। मप्र और राजस्थान में दलित डिप्टी सीएम बनाकर बहनजी मायावती और उनकी पार्टी के समर्थकों को संदेश है कि भाजपा में दलितों के लिए भी पूरी जगह है। दिलचस्प बात यह है कि विस चुनाव के दौरान तीनों राज्यों में कांग्रेस पूरे समय ओबीसी जातिजनगणना का मुद्दा उठाती रही, लेकिन जिस तेलंगाना में वह स्पष्ट बहुमत के साथ चुनाव जीती, वहां उसने किसी ओबीसी के बजाए रेवंत रेड्डी के रूप में एक अगड़े को ही मुख्यमंत्री बनाया। 26 विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की आगामी बैठक 19 दिसंबर को होनी है। उसमें लोकसभा सीटों के बंटवारे के किसी फार्मूले पर बात होती है या नहीं, यह देखने की बात है। लेकिन हो भी गया तो थके चेहरों और सतही जोश से लोकसभा चुनाव की जंग कैसे जीती जाएगी, यह देखने की बात है। बहरहाल चुनाव रणविजय शास्त्र की क्लास में भाजपा से कुछ तो सबक लेने ही चाहिए।
Chhattisgarh, the newly appointed Chief Minister and Deputy Chief Minister taking the oath of office.