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BJP के कार्यकर्ताओं में शिथिलता, अपने मूल समर्थक वर्ग को नहीं संभाला गया तो 2027 के विधानसभा चुनाव में काफी मुश्किल – सूत्र

नई दिल्ली लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद हो रही विभिन्न राज्यों की समीक्षा बैठकों में भाजपा के मौजूदा सांसदों और विधायकों के खिलाफ आवाज उठी है। संगठन के तौर तरीकों, मंत्रियों के व्यवहार और टिकट वितरण को भी प्रतिकूल नतीजों की वजह बताई गई है। दूसरे दलों से आए नेताओं को ज्यादा तरजीह देने से मूल काडर की नाराजगी भी जाहिर हुई है। ऐसे में पार्टी के भीतर बड़े बदलावों को लेकर दबाव बढ़ने लगा है। बीते दो लोकसभा चुनावों में अपने दम पर स्पष्ट बहुमत हासिल कर रही भाजपा को इस बार सहयोगी दलों के सहारे बहुमत के आंकड़े तक पहुंचना पड़ा है। भाजपा का अपना प्रदर्शन खराब रहा और उसकी 63 सीटें घट गईं। सबसे ज्यादा झटका उत्तर प्रदेश में लगा, जहां उसकी सीटों और वोटों में भारी गिरावट आई है। भाजपा का वोट पिछले चुनाव के 49.98 फीसद से घटकर 41.37 फीसद रह गया है, वहीं सीटें 62 से घटकर 33 रह गईं। सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश की समीक्षा बैठक में पार्टी के कई नेताओं ने राज्य से लेकर केंद्र तक की कई खामियों को उजागर किया है। साथ ही तत्काल प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया है। मूल काडर की उपेक्षा की बात आई सामने सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के एक प्रमुख नेता ने कहा है कि हार के कारण साफ हैं। समीक्षा में ज्यादा समय गंवाने के बजाय अभी से उन कमियों को सुधारा जाना चाहिए, जिनसे प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। 2027 के लिए अभी से कार्यकर्ताओं से लेकर ऊपर तक काफी काम करना होगा। इसमें यह भी देखना होगा कि दूसरे दलों से आए नेताओं को तरजीह देने में मूल काडर की उपेक्षा न हो। सूत्रों के अनुसार, पार्टी में एक बात यह भी उभर रही है कि केंद्र सरकार में उत्तर प्रदेश से शामिल 11 मंत्रियों में केवल तीन ही मूल काडर से हैं। सहयोगी दलों से दो मंत्री हैं। बाकी छह मूल काडर से बाहर के हैं। ऐसे में राज्य में कार्यकर्ताओं में शिथिलता आना स्वाभाविक है। सूत्रों का यह भी कहना है कि अभी कार्यकर्ताओं में ही शिथिलता है और आगे सामाजिक समीकरणों में अपने मूल समर्थक वर्ग को नहीं संभाला गया तो 2027 के विधानसभा चुनाव में काफी मुश्किल हो सकती है। उत्तर प्रदेश की तरह ही हरियाणा, महाराष्ट्र एवं राजस्थान की समीक्षा रिपोर्ट भी भाजपा के लिए अच्छी नहीं है। पू्र्वोत्तर के विभिन्न घटनाओं को ठीक तरह से हल न कर पाने से वहां पर भी नुकसान हुआ है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल से पीड़ित कार्यकर्ताओं की चिंता न हो पाने की भी बात उभरी है। राज्यों में सरकार के स्तर पर भी बदलाव संभव संकेत हैं कि पार्टी सभी राज्यों की समीक्षा रिपोर्ट आने के बाद बड़े बदलाव कर सकती है। यह बदलाव संगठन के स्तर पर तो होंगे ही, राज्यों में सरकार के स्तर पर भी हो सकते हैं। दूसरे दलों से या नौकरशाही से आने वाले नेताओं को लेकर भी पार्टी सतर्कता बरत सकती है। खासकर, उन राज्यों में जहां वह मजबूत है और उसे गठबंधन की भी जरूरत नहीं है। सामाजिक आधार पर अपने समर्थक वर्ग को भी साधना होगा। सबसे ज्यादा काम कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर करने का होगा और उनकी बात को संगठन तथा सरकार के स्तर पर सुना जाए।  

हाधरस हादसे के बाद तीन बार ‘भोले बाबा’ ने आयोजकों से की थी बात, मैनपुरी वाले आश्रम के पास मोबाइल फोन स्विच ऑफ हो गया था

हाथरस हाथरस हादसे के बाद कथावाचक सूरज पाल उर्फ ​​भोले बाबा ने तीन बार आयोजकों से बात की थी। इसके बाद उनके मैनपुरी वाले आश्रम के पास मोबाइल फोन स्विच ऑफ हो गया था। पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आए हैं। 2 जुलाई को हाथरस में पुलराई मुगलगढ़ी गांव में भगदड़ में 121 लोगों की मौत हो गई थी। प्रारंभिक जांच में आयोजकों और सेवादारों को हादसे के लिए जिम्मेदार माना गया है। अफसरों के अनुसार भोले बाबा की चरण रज के लिए उनकी तरफ बढ़ रही महिलाओं को रोकने के बाद भगदड़ मची थी। हालांकि पुलिस अभी भी उनके ठिकाने के बारे में चुप्पी साधे हुए है। बाबा से अभी तक पूछताछ नहीं की गई है। बाबा के वकील एपी सिंह ने कहा है कि वह अभी आरोपी नहीं हैं और पुलिस जब भी उन्हें बुलाएगी उनके लिए उपलब्ध रहेंगे। मैनपुरी के डिप्टी एसपी (भोगांव) सुनील कुमार सिंह ने कहा कि बाबा हाथरस से लगभग 150 किलोमीटर पूर्व मैनपुरी के बिछवान में अपने फार्महाउस-सह-आश्रम में नहीं थे। हालांकि उनके कुछ अनुयायियों ने इस संवाददाता को बताया कि वह आश्रम के अंदर थे। घटना के बाद से ही आश्रम के आसपास पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि बाबा ने 2 जुलाई की दोपहर अपना मोबाइल बंद होने से पहले कुछ कार्यक्रम आयोजकों से कम से कम तीन बार बात की थी। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों से धर्मसभा के आयोजन के विभिन्न सुरक्षा पहलुओं पर पूछताछ की जा रही है। 80,000 लोगों के लिए मांगी गई अनुमति के मुकाबले 2.5 लाख लोग वहां मौजूद थे। सूरज पाल से पूछताछ/जांच की किसी संभावना के बारे में पूछे जाने पर पुलिस महानिरीक्षक (अलीगढ़ रेंज) शलभ माथुर ने कहा कि अगर उनके बारे में कुछ है तो इसकी विधिवत जानकारी दी जाएगी। जांच साक्ष्य आधारित होगी। हमने जांच के तहत कई लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया है। हालांकि आईजी ने संख्या बताने से इनकार कर दिया। दूसरी ओर, अतिरिक्त महानिदेशक (आगरा जोन) और आयुक्त (अलीगढ़) के नेतृत्व में एक जांच समिति ने पुलिस और प्रशासन के लगभग 100 अधिकारियों और अन्य लोगों के बयान दर्ज करने के साथ अपनी रिपोर्ट को लगभग अंतिम रूप दे दिया है। माथुर ने कहा कि अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर निर्णय लेना सरकार का काम है। जांच समिति के निष्कर्ष या संबंधित चीजें जांच समिति के सदस्यों के अधिकार क्षेत्र में हैं। जहां तक ​​जांच का सवाल है, जांच अब सर्कल अधिकारी (हाथरस शहर) द्वारा की जा रही है। हाथरस में विशेष अभियान समूह (एसओजी) को जोनल स्तर की एसओजी टीमों द्वारा भी सहायता प्रदान की जा रही है और इन टीमों का नेतृत्व पुलिस अधीक्षक (हाथरस) कर रहे हैं। हाथरस पुलिस ने गुरुवार को सिकंदरा देव पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के सिलसिले में दो महिलाओं सहित छह सेवादारों को गिरफ्तार किया था। एफआईआर में मुख्य आयोजक वेदप्रकाश मधुकर को मुख्य आरोपी बताया गया है लेकिन बाबा का नाम एफआईआर में नहीं है। आईजी ने कहा कि घटना के बाद से बाबा और आयोजक छिपे हुए हैं। हाथरस पुलिस ने गुरुवार को वेदप्रकाश मधुकर की गिरफ्तारी के लिए 1 लाख रुपए के इनाम की भी घोषणा की। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 3 जुलाई को अपने हाथरस दौरे के दौरान कहा था कि एफआईआर में शुरू में केवल आयोजकों का नाम था लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ इसका दायरा बढ़ सकता है। एपी सिंह का कहना है कि आने वाले समय में सभी को सामने लाने का प्रयास करेंगे। आयोजकों में से एक वेदप्रकाश मधुकर वर्तमान में स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अस्पताल में हैं। धर्मसभा में भगदड़ के दौरान उनके परिवार में भी एक मौत हो चुकी है। सिंह ने शुक्रवार को कहा कि उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों ने कहा कि वह गंभीर रूप से बीमार हैं और भगदड़ की घटना के बाद उनका स्वास्थ्य खराब है।  

कई बार भारतीय उच्चायोग के सामने धरना दे चुके खालिस्तानियों ने फिर से उत्पात मचाया

नई दिल्ली कनाडा में खालिस्तानी तत्व लगातार अतिवादी कदम उठा रहे हैं। कई बार भारतीय उच्चायोग के सामने धरना दे चुके खालिस्तानियों ने फिर से उत्पात मचाया। ओटावा में स्थित भारतीय उच्चायोग के सामने एक बार फिर से सिख्स फॉर जस्टिस नाम के खालिस्तानी संगठन के लोगों ने धरना दिया। इन लोगों ने करीब साढ़े 4 घंटों तक उच्चायोग को घेर कर रखा। इन लोगों का मकसद था कि भारतीय उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा को घेर कर रखा जाए। हालांकि इस दौरान कुछ भारत समर्थक भी वहां पहुंचे, जिनके हाथों में तिरंगे झंडे थे। ये लोग खालिस्तानियों का विरोध कर रहे थे। बीते एक साल से कम के अंदर ही कनाडा में ऐसे 20 प्रदर्शन हो चुके हैं। पिछले साल 18 जून को खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा के सरे में हत्या हो गई थी। निज्जर के मारे जाने के बाद पहली बार 8 जुलाई, 2023 को प्रदर्शन हुआ था। खालिस्तानी कई बार भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों को घेर चुके हैं और एक बार तो झड़प की कोशिश भी की थी। हालांकि तब कनाडा के सुरक्षाकर्मियों के चलते बीच-बचाव कर लिया गया था। हर घटना के दौरान भारत ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी और कनाडा से सुरक्षा व्यवस्था देने की मांग की थी। इसके चलते कनाडा ने सुरक्षा तो दी, लेकिन उसने कभी भी खालिस्तानियों पर रोक नहीं लगाई। गुरुवार को भारतीय उच्चायोग के सामने जुटे खालिस्तानियों ने भारत विरोधी नारे लगाए। ये लोग वहां करीब साढ़े 4 घंटे तक डटे रहे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा में कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, ‘सुरक्षा कम थी। हमने कनाडा सरकार के समक्ष शिकायत दर्ज करा दी है।’ हालांकि अधिकारी ने कहा कि आंदोलन कर रहे खालिस्तानियों के चलते हमें कोई बाधा नहीं आई। बीते साल जुलाई से ही खालिस्तानी कनाडा में उग्र हैं। इन लोगों ने ‘किल इंडिया’ नाम से कैंपेन भी चलाया था। इसके अलावा भारतीय अधिकारियों की आपत्तिजनक तस्वीरें भी उन्होंने लहराई थीं। कनाडा में खालिस्तानियों को तब ज्यादा बढ़ावा मिला, जब पीएम जस्टिन ट्रूडो ने संसद में भारतीय एजेंट्स पर निज्जर की हत्या का आरोप लगाया। उन्होंने संसद में कहा था कि निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंट्स का हाथ है। उनके इस आरोपों से खालिस्तानी तत्वों को बढ़ावा मिला है। इसके अलावा 4 भारतीय नागरिकों को अब तक इस मामले में कनाडा में अरेस्ट भी किया गया है। अब तक कनाडा इस मामले में कोई सबूत नहीं दे सका है। इन खालिस्तानी तत्वों ने कई बार मंदिरों को भी कनाडा में नुकसान पहुंचाया है।  

धरमजयगढ़ बस स्टैंड के पास एक दुकान में लगी आग, दकमल व पुलिस टीम लगी आग को बुझाने में जुटे

रायगढ़ बस स्टैंड में ड्रीम गर्लं कलेक्शन के नाम से संचालित दुकान में आज सुबह 9 बजे के आसपास दुकान से धुंआ बाहर आ रहा था। जब तक दुकानदार सुबह दुकान खोलने आता और उसे इस घटना की जानकारी होती तब तक धुंआ आग में तब्दील हो गई। आग की लपटे दुकान में फैल गई। इस इलाके में अक्सर भीड़ रहती है। सुबह के समय होने के कारण चहलकदमी कम थी। बस स्टैंड में मौजूद दुकान में इस तरह की घटना को देखकर लोग सकते में आ गए। स्थानीय दुकानदारों का हुजूम मौके पर उमड़ गया। दुकान संचालक को पूरे घटना के बारे मव जानकारी देते हुए आग को बुझाने का प्रयास कर दमकल विभाग को सूचित किए। ततपश्चात नगर पंचायत की दमकल वाहन मौके पर आई। जिस बुझाने के लिए पुलिस प्रशासन एवं नगर पंचायत की टीम जुट गई। जहां भारी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। वहीं आग का लपटे इतनी तेज थी की बगल के मोबाईल दुकान को भी अपने चपेट में ले लिया। बारिश के मौसम में यह आगजनी से लोगो मे हड़कंप मचाकर रख दिया। वहीं,आगजनी शाट सर्किट से लगने की आशंका दुकानदार तथा स्थानीय लोग जता रहे है। फिलहाल पुलिस पहुंचकर आगे की जांच कार्यवाही में जुटी हुई है।

बिहार भाजपा के दिग्गज नेता नबीन किशोर सिन्हा के बेटे नितिन को मिली CG की जिम्मेदारी

रायपुर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा ने छत्तीसगढ़ समेत कई प्रदेशों में प्रदेश प्रभारी और सहप्रभारियों की नियुक्ति की है. छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी बिहार के विधायक नितिन नबीन को दी गई है. बता दें कि इससे पहले वे सह प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. वहीं कोंडागांव विधायक लता उसेंडी को ओडिशा का सह प्रभारी बनाया गया है. जानिए कौन हैं नितिन नबीन? नितिन नबीन की बात करें तो वे बिहार भाजपा के दिग्गज नेता नबीन किशोर सिन्हा के बेटे हैं. नितिन नबीन चार बार बांकीपुर से विधान सभा सदस्य (एमएलए) चुने गए हैं. 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा को बड़े अंतर से हराकर शानदार जीत हासिल की थी. ​​इसके अलावा, इसी सीट से प्लुरल्स पार्टी की पुष्पम प्रिया चौधरी को भी इसी चुनाव में बड़ी हार का सामना करना पड़ा था. नितिन नबीन भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव का पद संभाल चुके हैं. उन्होंने 9 फरवरी, 2021 से 9 अगस्त, 2022 तक बिहार सरकार में सड़क निर्माण मंत्री के रूप में कार्य किया है.

कांग्रेस ने कहा- टेलिकॉम कंपनियों द्वारा बढ़ाए गए प्लान्स के दामों को लेकर केंद्र सरकार पर साधा निशाना

नई दिल्ली कांग्रेस ने शुक्रवार को टेलिकॉम कंपनियों द्वारा बढ़ाए गए प्लान्स के दामों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने दावा किया है कि प्राइवेट टेलिकॉम कंपनियों ने वार्षिक शुल्क बढ़ाकर जनता की जेब से 34,834 करोड़ रुपये वसूले हैं। इसके अलावा, मोदी 3.0 में प्राइवेट टेलिकॉम कंपनियों की एक बार फिर से मुनाफाखोरी बढ़ने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने सवाल किया है कि आखिर क्यों मोदी सरकार ने अपनी आंखें बंद कर रखी हैं? कांग्रेस सांसद व महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि तीन जुलाई से देश की प्राइवेट सेलफोन कंपनियों यानी कि रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने एक साथ अपना टैरिफ औसतन 15 फीसदी बढ़ा दिया है। इन तीनों प्राइवेट कंपनियों का मार्केट शेयर 91.6 फीसदी है यानी कि 119 करोड़ यूजर्स में से 109 करोड़ यूजर्स इन्हीं तीन कंपनियों के हैं। कांग्रेस ने कहा कि 23 अप्रैल को पेश की गई ट्राई रिपोर्ट के अनुसार, देश में सेलफोन इस्तेमाल करने वाले प्रति ग्राहक से प्रतिमाह औसत कमाई 152 रुपये की है। तीन जुलाई से रिलायंस जियो ने अपने यूजर्स के लिए शुल्क 12 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी तक बढ़ा दिया। वहीं, एयरटेल ने भी 11 फीसदी से 21 फीसदी तक की वृद्धि की है। वोडाफोन इंडिया ने 10 फीसदी से 24 फीसदी तक कीमतें बढ़ा दीं। इससे साफ है कि कीमतें बढ़ाने की तारीख तीनों कंपनियों ने आपस में मिलकर तय की। मोदी सरकार से सवाल करते हुए कांग्रेस ने कहा है कि बिना रेगुलेशन, नियम या निगरानी के बिना प्राइवेट कंपनियों को एकतरफा मर्जी व मनमानी से कीमतें बढ़ाने की अनुमति क्यों दी? क्या सरकार ने कीमतों में होने वाली वृद्धि को चुनाव पूरा होने तक रोक कर नहीं रखा था, ताकि उनसे अतिरिक्त वसूली के लिए जवाब न मांगा जाए? ऐसा कैसे हो सकता है कि सभी निजीी कंपनियां अपना औसत टैरिफ समान रूप से 15-16 फीसदी बढ़ाएं, जबकि उनकी प्रॉफिटेबिलिटी, निवेश, कैपेक्स की जरूरत अलग-अलग हैं। फिर भी मोदी सरकार ने इस पर अपनी आंखें क्यों मूंद रखी हैं।  

प्रशासन ने टिटोड़ी में पांच करोड़ की शासकीय भूमि अतिक्रमण से मुक्त करवाई

उज्जैन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के शहर उज्जैन में जिला प्रशासन ने पांच करोड़ रुपये की सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाया. उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा. इस अभियान के तहत जिले में अभी और भी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत मिल रही है. कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने कहा कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही लगातार जारी है. इसी क्रम में बुधवार (3 जुलाई) को तहसील तराना के ग्राम टिटोडी में तहसीलदार तराना रामलाल मुनिया के नेतृत्व में राजस्व, पुलिस और ग्रामीण विकास विभाग की संयुक्त टीम की ओर से अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की गई. एसडीएम तराना राजेश बोरासी ने बताया कि प्रशासन द्वारा 5.38 हेक्टयर सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया हैं. इसकी बाजार कीमत लगभग पांच करोड़ रुपये है. राजेश बोरासी ने कहा कि जमीन पर ग्राम टिटोडी के इस्माइल पिता पीर खां, नौशाद पिता इस्माइल खां और अकरम पिता इस्माइल खां की तरफ से अतिक्रमण किया गया था. अब उस जमीन से अतिक्रमण हटवाकर सरकारी जमीन का बोर्ड लगाया. उन्होंने बताया कि जमीन पर बड़े स्तर पर पौधारोपण किया जाएगा, पौधरोपण के लिए गड्डे भी खुदवाए गए हैं. ग्रामीणों ने की थी शिकायत कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि ग्रामीण ग्रामीणों की ओर से सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत की गई थी. इसी शिकायत की पहले जांच की गई, फिर जांच में शिकायत सही पाई जाने पर जिला प्रशासन ने रणनीति बनाकर अतिक्रमण हटाया. माफियाओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में पिछले तीन साल में उज्जैन जिले में एक हजार करोड़ से ज्यादा की अचल संपत्ति माफिया के कब्जे से मुक्त कराई जा चुकी है. फिलहाल अभी भी यह अभियान जारी है. ये कार्रवाई तराना के तहसीलदार रामलाल मुनिया के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने की। तराना एसडीएम राजेश बोरासी ने बताया कि 5.38 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया है। इसका बाजार मूल्य करीब 5 करोड़ रुपए है। भूमि पर ग्राम टिटोडी के इस्माइल पिता पीर खां, नौशाद पिता इस्माइल खां एवं अकरम पिता इस्माइल खां द्वारा अतिक्रमण किया गया था। उक्त भूमि से अतिक्रमण हटवाकर शासन की भूमि होने के बोर्ड लगाए गए हैं। भूमि पर वृहद स्तर पर पौधारोपण किया जाएगा, इसके लिए गड्ढे भी खुदवाए गए हैं।

सिंधिया बोले राहुल का बयान पाप से कम नहीं है,हिंदुओं को असत्य व हिंसक कहने वाले को जनता जवाब देगी

गुना ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव जीतने और केंद्रीय मंत्री बनने के बाद अपने क्षेत्र के लोगों को धन्यवाद देने गुना पहुंचे. यहां पहुंचकर उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि राहुल गांधी ने संसद में जो बयान दिया, वह किसी पाप से कम नहीं है. सिंधिया ने चर्चा के दौरान राहुल गांधी पर भी जमकर हमला बोला. सिंधिया बोले राहुल गांधी का बयान पाप से कम नहीं है,हिंदुओं को असत्य व हिंसक कहने वाले राहुल गांधी को जनता जवाब देगी.     सिंधिया ने क्षेत्र के विकास की योजना पर बताया कि अब वह मीडिया से भी क्षेत्र के विकास के लिए अलग से चर्चा करेंगे. उनसे सलाह लेंगे. वहीं सिंधिया ने मध्य प्रदेश के बजट को लोगों के हितों का बजट बताया. सिंधिया आज अशोकनगर जिले के चंदेरी व मुंगावली क्षेत्र में पहुंचे. सिंधिया ने यहां रोड शो के माध्यम से जनता का धन्यवाद दिया, तो वही मंच पर पहुंचकर एक सभा को भी संबोधित किया. सिंधिया ने आज फिर क्षेत्र में बड़े भू माफिया और राशन माफिया के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का आश्वासन लोगों को दिया व जनता से कहा कि आप लोग मुझे सीधे तौर पर शिकायत करें. जो भी क्षेत्र में खनन माफिया भू माफिया हैं उनको मैं कड़ी से कड़ी सजा दिला कर रहूंगा. सिंधिया बोले, उन्होंने लोगों से बना ली है कनेक्टिविटी इसी बीच एमपी तक से चर्चा के दौरान जब एमपी तक ने सिंधिया से पूछा कि लोगो का कहना है कि आपकी कनेक्टिविटी तो जनता से नहीं हो पाती, तब सिंधिया बोले की अब तो सबके पास कनेक्टिविटी हो गई है. mptak ने पूछा कैसे तो सिंधिया फिर थोड़े हड़बडा गए व सवाल का गोल-मोल जवाब देने लगे.  

बेबसी : गुना में लगातार बारिश के लकड़ी लगाकर तिरपाल लगाई फिर महिला की चिता को अग्नि दी गई

 गुना मध्य प्रदेश के गुना जिले में महिला का अंतिम संस्कार तिरपाल लगाकर करना पड़ा है। लगातार बारिश से परिजनों ने लकड़ी लगाकर तिरपाल लगाई फिर महिला की चिता को अग्नि दी गई। ये तस्वीर विकास के दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। मामला राजधानी भोपाल जाने वाले रास्ते पर स्थित बुढ़ाना ग्राम पंचायत के भरेड नदी का है। जानकारी के मुताबिक बुढ़ाना निवासी धर्मेन्द्र भील की पत्नी सीमा भील (22) का निधन हो गया था। सीमा भील का 8 दिन पहले प्रसव हुआ था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ती गई और अंतत: गुरुवार को सीमा ने दम तोड़ दिया। सीमा के परिजन शव का अंतिम संस्कार करने के लिए भरेड नदी के पास ग्राम पंचायत द्वारा बनाए गए मुक्तिधाम पर पहुंचे थे, यहां अचानक बारिश होने लगी। मुक्तिधाम पर दीवार और टीनशेड नहीं होने की वजह से लोगों ने एक तिरपाल को चिता के ऊपर लकड़ियों के सहारे लगाया। तब जाकर शव का अंतिम संस्कार किया जा सका। कुछ ग्रामीणों ने बारिश के बीच तिरपाल का सहारा लेकर किए गए अंतिम संस्कार का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो सामने आने के बाद गांवों में किए जा रहे चहुंमुखी विकास के दावों की जमकर आलोचना की जा रही है। बहरहाल बुढ़ाना के ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत के मुक्तिधाम पर टीनशेड नहीं लगा पाई है, जिसकी वजह से हर साल बारिश में इस तरह के दृश्य यहां देखने को मिल जाते हैं।

वेतन-भत्तों में अंतर समझिए, नियमित सैनिकों से कितना अलग है अग्निवीरों का मुआवजा?

लुधियाना लुधियाना जिले में स्थित रामगढ़ सरदारन गांव के मृतक अग्निवीर अजय सिंह (23) के परिवार ने दावा किया है कि उनके बेटे की मौत के छह महीने बाद भी उन्हें केंद्र या सेना से कोई अनुग्रह राशि नहीं मिली है। इस मुद्दे को लेकर खूब राजनीतिक बयानबाजी भी हो रही है। इस सप्ताह की शुरुआत में, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जनवरी में बारूदी सुरंग विस्फोट में मारे गए अग्निवीर अजय कुमार के परिवार को सरकार से वित्तीय सहायता नहीं मिली। इसके जवाब में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में बताया कि ड्यूटी के दौरान मारे गए अग्निवीर को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलता है। हालांकि राहुल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके राजनाथ सिंह पर सदन से झूठ बोलने का आरोप लगाया। अब खुद सेना ने इस तरह के दावों को खारिज किया है। भारतीय सेना ने कहा कि परिवार को देय राशि में से 98.39 लाख रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। इसने स्पष्टीकरण में कहा कि कुल राशि लगभग 1.65 करोड़ रुपये होगी। सरकारी सूत्रों ने बताया कि 1.65 करोड़ रुपये में केंद्र सरकार से 48 लाख रुपये और वित्तीय संस्थानों से सहमति पत्र के तहत बीमा के रूप में 50 लाख रुपये शामिल हैं। इसमें 39,000 रुपये की अतिरिक्त राशि; अनुग्रह राशि के रूप में 44 लाख रुपये; सेना कल्याण कोष से 8 लाख रुपये; कार्यकाल पूरा होने तक वेतन शेष के रूप में 13 लाख रुपये; और सेवा निधि के रूप में 2.3 लाख रुपये शामिल हैं। सेना ने कहा कि शहीद अग्निवीर के परिवार को पहले ही 98.39 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। बीमा और अनुग्रह राशि मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अग्निवीरों और नियमित सैनिकों के बीच युद्ध में हताहतों के लिए मुआवजे की व्यवस्था अलग तरह से काम करती है। नियमित सैनिकों की मृत्यु को पांच श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है – A से E – जबकि अग्निवीरों की मृत्यु को तीन श्रेणियों में रखा जाता है – X, Y और Z. श्रेणी ए (नियमित सैनिकों के लिए) और श्रेणी एक्स (अग्निवीरों के लिए) की मौतें सैन्य कारणों में नहीं आती हैं। यानी वे मौतें जो सैन्य कारणों से नहीं हुई हैं उन्हें श्रेणी ए और श्रेणी एक्स में रखा जाता है। श्रेणी बी और सी में रखी गई मौतें सैन्य सेवा के कारण होती हैं और इसमें ड्यूटी पर दुर्घटनाएं शामिल हैं। अग्निवीरों के लिए, इन मौतों को श्रेणी वाई (Y) में रखा गया है। नियमित सैनिकों की श्रेणी D और E व अग्निवीरों की श्रेणी Z की मौतों को हिंसा, प्राकृतिक आपदाओं, दुश्मन की कार्रवाई, सीमा पर झड़पों और युद्ध जैसी स्थितियों में रखा जाता है। यानी अगर कोई नियमित सैनिक हिंसा, प्राकृतिक आपदाओं, दुश्मन की कार्रवाई, सीमा पर झड़पों और युद्ध जैसी स्थितियों में शहीद होता है तो उसे श्रेणी D और E रखा जाएगा वहीं इसी स्थिति में अग्निवीर को श्रेणी Z में रखा जाएगा। बीमा सभी नियमित सैनिक सेना समूह बीमा कोष में हर महीने 5,000 रुपये का योगदान करते हैं, जिससे उन्हें 50 लाख रुपये का बीमा मिलता है। अग्निवीरों का बीमा 48 लाख रुपये का है, लेकिन वे इस बीमा के प्रीमियम के लिए अपने वेतन से कोई योगदान नहीं देते हैं। बीमा राशि सभी सैनिकों और अग्निवीरों को दी जाती है, चाहे उनकी मृत्यु का कारण कुछ भी हो। तीनों सेनाओं ने बैंकों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अग्निवीरों सहित सभी रक्षा कर्मियों के वेतन को रक्षा वेतन पैकेज के तहत जमा किया जाता है। इन कर्मियों का बैंकों द्वारा उनकी नीतियों के अनुसार विभिन्न राशियों के लिए बीमा किया जाता है। अनुग्रह राशि जिन अग्निवीरों की मृत्यु सैन्य सेवा के कारण हुई हो या ऑपरेशन के दौरान हुई हो उनके लिए 44 लाख रुपये की अनुग्रह राशि निर्धारित की गई है। वहीं नियमित सैनिक के लिए अनुग्रह राशि 25 लाख रुपये, 35 लाख रुपये या 45 लाख रुपये हो सकती है, जो हताहत की प्रकृति पर निर्भर करता है। अग्निवीरों या नियमित सैनिकों की मृत्यु अगर सैन्य सेवा के कारण नहीं हुई है तो वे किसी भी अनुग्रह राशि के लिए पात्र नहीं है। हालांकि राज्य सरकारों की ओर से दी जाने वाली अनुग्रह राशि राज्य के आधार पर शून्य से लेकर 1 करोड़ रुपये तक होती है। यह उन अग्निवीरों और नियमित सैनिकों दोनों पर लागू होती है जो या तो ड्यूटी पर मारे जाते हैं या विकलांग हो जाते हैं। इसके अलावा भी, अग्निवीरों और नियमित सैनिकों को ऑपरेशन के दौरान मृत्यु होने पर 8 लाख रुपये और किसी अन्य कारण से मृत्यु होने पर 2.5 लाख रुपये दिए जाते हैं। अग्निवीरों के लिए सेवा निधि सेवा निधि एक अंशदायी योजना है जो केवल अग्निवीरों के लिए लागू है। जिन लोगों की मृत्यु सैन्य सेवा के कारण नहीं हुई है उन्हें मृत्यु की तिथि तक जमा की गई राशि, सरकार के अंशदान और ब्याज के साथ मिलती है। ड्यूटी या ऑपरेशन के दौरान मरने वाले अग्निवीरों को सेवा निधि घटक सहित चार वर्ष तक की असेवा अवधि के लिए पूरा वेतन मिलता है। केवल नियमित सैनिकों के लिए कुछ लाभ केवल नियमित सैनिकों के लिए हैं। ग्रेच्युटी और मासिक पारिवारिक पेंशन केवल नियमित सैनिकों को ही उपलब्ध है। ग्रेच्युटी अधिकतम 25 लाख रुपये तक सीमित है। सैनिकों के परिवार को साधारण पारिवारिक पेंशन मिलती है, जो 10 साल तक के लिए अंतिम वेतन का 50% और उसके बाद 30% है। सैन्य सेवा के कारण होने वाली मौतों के मामले में, एक विशेष पारिवारिक पेंशन लागू होती है, जो सैनिक के अंतिम वेतन का 60% होती है। ऑपरेशन में मारे गए सैनिकों के लिए, एक उदार पारिवारिक पेंशन (Liberalised Family Pension) होती है, जो अंतिम वेतन का 100% होती है और परिवार को दी जाती है।

ज्वेलरी दुकान से 10 लाख के जेवर पार, पत्थर और सब्बल के साथ आए थे चोर

रायपुर राजधानी रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र की ज्वेलरी दुकान में चोरों ने धावा बोलकर 20 हजार रुपये नकद सहित 10 लाख सोने-चांदी के जेवर पार कर दिए। पुलिस को घटना का सीसीटीवी फुटेज मिला है। इसमें तीन चोर अर्ध नग्न हालत में और एक पेंट, शर्ट पहने हुए दिख रहा है। आशंका जताई गई है कि चोर चड्डी-बनियान गिरोह के हो सकते हैं। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार कमल विहार गेट-1 स्थित प्रभुचंदा ज्वेलर्स के संचालक कमल बघेल की दुकान में चोरी हुई है। कमल ने पुलिस को बताया है कि वह किराए की दुकान लेकर ज्वेलरी शाप संचालित कर रहा है। बुधवार को वह दुकान बंद करके गया। दूसरे दिन तड़के छह बजे उसे उसके मकान मालिक ने दुकान के शटर का ताला टूटे होने के साथ शटर ऊपर उठे होने की जानकारी दी। दुकान के कैश काउंटर, डिसप्ले और बाक्स में रखे जेवर के साथ नकदी गायब मिली। चोरों ने दुकान में लगे तीन सीसीटीवी कैमरे चोरी कर अपने साथ ले गए। आसपास की दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों में पुलिस को जो फुटेज मिले हैं, उसमें एक चोर के हाथ में सब्बल दिख रहा है। इसके साथ ही एक अन्य चोर के हाथ में चाकूनुमा हथियार और दो अन्य चोरों के हाथ में पत्थर रखा है। चोरों ने दुकान में चोरी की घटना तीन से साढ़े तीन बजे के आसपास की है। कमल के अनुसार जहां उसकी ज्वेलरी शाप है, वहां देर रात लोगों की आवाजाही होती रहती है। दुकान मेन रोड पर है। इसे देखते हुए कमल ने चोरी की घटना रात दो बजे के बाद होने की आशंका व्यक्त की है।

पंजाब के लुधियाना में शिवसेना नेता पर तीन निहंगों ने सिविल अस्पताल के बाहर उनपर तलवार से कई वार किए

लुधियाना पंजाब के लुधियाना में शिवसेना टकसाली नेता संदीप थापर उर्फ गोरा पर निहंगों ने जानलेवा हमला कर दिया। जानकारी के मुताबिक तीन निहंगों ने सिविल अस्पताल के बाहर उनपर तलवार से कई वार किए और इसके बाद वे फरार हो गए। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। जानकारी के मुताबिक संदीप थापर शुक्रवार की सुबह संवेदना ट्रस्ट के एक कार्यक्रम में शामलि होने के लिए अस्पताल गए थे। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि स्कूटी से तीन लोग पहुंचते हैं। इसके बाद व्यस्त सड़क पर ही एक आरोपी तलवार से संदीप थापर पर हमला करने लगता है। वह नीचे गिर जाते हैं। इसके बाद वह चार से पांच बार वार करता है। दूर से लोग चिल्लाते हैं को इन्हें छोड़ दो। कुछ ही सेकंड में वे स्कूटी पर बैठकर भाग जाते हैं। घटना के वक्त आसपास काफी संख्या में लोग मौजूद थे। हालांकि आरोपियों के हाथ में धारदार हथियार देखकर किसी के पास जाने की हिम्मत नहीं हुई। आरोपियों ने संदीप थापर को लहूलुहान कर दिया। वहीं उनके सिर पर गंभीर चोट आई है। तुरंत लोग उन्हें लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे। उनकी हालत को देखते हुए डीएमसी अस्पताल रेफर कर दिया गया है। खालिस्तान के खिलाफ खूब बोलते हैं थापर जानकारी के मुताबिक थापर अकसर खालिस्तान के खिलाफ बयान देते हैं। इसके अलावा उन्होंने पंजाब में किसान आंदोलन के खिलाफ भी बयान दिए थे। जिस समय हमला हुआ उस समय थापर के साथ उनका गनमैन भी मौजूद था। हालांकि उसका कहना है कि निहंगों ने उसे पकड़ लिया और उसका हथियार छीनने की भी कोशिश की। थापर के समर्थकों का कहना था कि लंबे समय से उन्हें धमकी मिल रही थी इसके बाद उन्हें केवल एक गनमैन दिया गया था। डीसीपी जसकिरनजीत सिंह तेजा ने कहा कि अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या की कोशिश का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की टीम आरोपियों की तलाश में जुटी ह। जब थापर के गनमैन के बारे में डीसीपी से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अगर कोई लापरवाही हुई है तो उसकी जांच की जाएगी। विभाग उसके खिलाफ ऐक्शन लेगा।

Google Pixel 9 श्रृंखला के लॉन्च डेट की पुष्टि हुई

Google Optimus 9 सीरीज लॉन्च के लिए तैयार है। यह गूगल का अगली पीढ़ी का स्मार्टफोन है, जिसे ऐपल की फिल्मी स्मार्टफोन सीरीज iPhone 16 से पहले लॉन्च किया जाएगा। फोन को 13 अगस्त को लॉन्च किया जा सकता है। फोन का टीजर जारी कर दिया गया है, जिसके अनुसार फोन में कई नए फीचर्स दिए जाएंगे। मिलेंगे कमाल के फीचर्स रिपोर्ट की जानकारी, तो Google AI फीचर आपकी सर्च को आसान बना देगा। गूगल के आगामी फीचर में सर्च ऑप्शन दिया जाएगा। इसका मतलब है कि सीधे पृष्ठ की मदद से सर्च कर पाएंगे। इसके अलावा ग्रुप फोटो के लिए Add Me सुविधा दी गई है, जो ग्रुप के सभी लोगों को कई टेक को एक साथ मर्ज करने की सुविधा देगी। Google की ओर से स्टूडियो सुविधा दी जाएगी। यह फीचर ट्रेंडी इमेज क्रिएटर की तरह होगा। स्टिकर सहित कई तरह से फोटो को संपादित करने की सुविधा दी जाएगी। गूगल प्ले स्टोर पर इमेज प्ले स्टोर पर इमेज प्ले स्टोर जैसा फीचर दिया जाएगा। यह सभी फ़ायदेमंद गूगल ट्यून टूल जैसे सर्कल टू सर्च और जेमिनी से जुड़े होंगे। हालाँकि Google की ओर से इस बारे में कोई भी पूर्वानुमान रिपोर्ट जारी नहीं किया गया है। क्षमफ फीचर्स वैसे, तो Google की अपकमिंग स्मार्टफोन सीरीज Google Pixel 9 के स्पेसिफिकेशन्स का ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन लीक रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल आउटलुक 9 सीरीज में 6.24 इंच का डिस्प्ले दिया जा सकता है। फोन की डिस्प्ले सैमसंग की एमोलेड डिस्प्लेटाइप के साथ आएगी। फोन में गूगल का इन-हाउस चिपसेट टेंसर G4 दिया जा सकता है। फोन एंड्रॉइड 15 ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ आएगा। गूगल अपडेट 9 प्रो सीरीज में 6.34 इंच का एमोलेड डिस्प्ले दिया जा सकता है। दोनों फोन में इन-हाउस Tensor G4 प्रोसेसर दिया जाएगा।

शिंदे सरकार ने ‘मेरी लाडली बहन योजना’ के लिए लांच किया एप, महिलाओं के पास ऑफलाइन और ऑनलाइन के विकल्प

मुंबई महाराष्ट्र सरकार ने मेरी लाडली बहन योजना में आवेदन करने के लिए नारी शक्ति दूत ऐप लांच किया है। महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली महायुति सरकार ने मुख्यमंत्री मेरी लाडली बहन योजना के तहत राज्य की पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये देने का ऐलान किया है। राज्य सरकार ने आवेदन के लिए 31 अगस्त की डेडलाइन रखी है। अब सरकार ने इस योजना को लेकर राज्यभर में भारी उत्साह को देखते हुए नारी शक्ति दूत एप लांच कर दिया है, ताकि महिलाएं एप के जरिए अपने अर्जी को आसानी से जमा कर सकें। क्या है पूरी योजना? वित्त मंत्री अजित पवार ने विधानसभा सत्र में राज्य का बजट पेश करते हुए राज्य की महिला आबादी के लिए मुख्यमंत्री मेरी लाडली बहन योजना का ऐलान किया था। सरकार गरीब महिलाओं और बेटियों की 1500 रुपये प्रति महीने की आर्थिक सहायता देगी ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। सरकार ने इसके लिए उम्र सीमा 21 से 65 साल रखी है। सरकार का दावा है कि इस योजना से महिलाओं के संपूर्ण विकास के साथ-साथ वित्तीय स्वतंत्रता हासिल होगी। योजना के लिए सरकार ने आवंटन के लिए 46 हजार करोड़ रुपये आवंटित करने का लक्ष्य रखा है। महाराष्ट्रीयन महिलाओं में इस योजना को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। क्या है आवेदन की प्रक्रिया? मुख्यमंत्री मेरी लाडली बहन योजना के अच्छे क्रियान्वयन के लिए सीएम एकनाथ शिंदे जिला कलेक्टरों से निगरानी और पारदर्शी व्यवस्था रखने के निर्देश दिए है। योजना में आवेदन के लिए महिलाएं गूगल प्ले स्टोर से नारी शक्ति दूत एप डाउनलोड कर सकती हैं। वह एप डाउनलोड करने के बाद योजना के लाभ के लिए 31 अगस्त तक आवेदन कर सकती है। योजना का लाभ 1 जुलाई से ही मिलेगा। इसके साथ सरकार ने मुख्यमंत्री मेरी लाडली बहन योजना आवेदन तहसील कार्यालय, आंगनबाडी सेविका, सेतु कार्यालय में ऑफलाइन जमा कराने का विकल्प रखा है। महाराष्ट्र सरकार ने इस योजना का आवेदन पत्र उपलब्ध करा दिया है। मुख्यमंत्री मेरी लाडली बहन योजना के आवेदन पत्र में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस, अजीत पवार और अदिति तटकरे की तस्वीर है। ऑफलाइन प्रक्रिया क्या है? पात्र महिलाएं घर बैठे ही योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं। इसके लिए आपको मुख्यमंत्री मेरी लाडली बहन योजना (Ladki Bahin Yojana online Form ) का पीडीएफ आवेदन पत्र डाउनलोड करना होगा। आपको इसमें अपना नाम, पता, बैंक विवरण, आधार कार्ड नंबर और अन्य सभी चीजें भरनी होंगी। इसके बाद आवेदन पत्र को आवश्यक दस्तावेजों के साथ दोबारा वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। बैंक खाते में भुगतान करते समय आपको उसी खाते में भुगतान करना होगा जिसमें आप राशि चाहते हैं। इसमें बैंक का नाम, खाताधारक का नाम, बैंक खाता संख्या, बैंक का आईपीएससी कोड भरना होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपका आधार उस बैंक खाते से लिंक होना चाहिए। कैसे काम करेगी एप? ऐप डाउनलोड हो जाने पर अपनी जानकारी भरें और एक प्रोफाइल बनाएं। अपना नाम और अन्य जानकारी ध्यानपूर्वक भरें। योजना के लिए आवेदन करने वाली महिला किस श्रेणी की है इसकी जानकारी भरें। मुख्यमंत्री मेरी लाडली बहन योजना पर क्लिक करें और नाम, पता, बैंक खाते का विवरण भरें। आवेदक का फोटो अपलोड करें। फिर जरूरी दस्तावेज अपलोड करें, फिर सबमिट करें। आपको एक संदेश मिलेगा कि आवेदन पूरा हो गया है। मेरी लाडली बहन योजना के लिए क्या है नियम? महिला लाभार्थी की आयु 21 वर्ष होनी चाहिए, अधिकतम उम्र सीमा 65 साल रखी गई है महिला महाराष्ट्र की निवासी हो, परिवार की वार्षिक आय ढाई लाख से अधिक न हो। यह लाभ राज्य की विवाहित, विधवा, तलाकशुदा और निराश्रित महिलाओं को मिलेगा। मेरी लाडली बहन योजना के लिए लाभार्थी महिला के पास बैंक खाता होना जरूरी है। मेरी लाडली बहन योजना चाहिए ये डॉक्युमेंट आधार कार्ड। महाराष्ट्र राज्य अधिवास प्रमाण पत्र/महाराष्ट्र राज्य जन्म प्रमाण पत्र। सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी परिवार के मुखिया का आय प्रमाण पत्र बैंक खाता पासबुक के प्रथम पृष्ठ की फोटोकॉपी। पासपोर्ट के आकार की तस्वीर। राशन पत्रिका। योजना के नियमों एवं शर्तों का अनुपालन करने के लिए अपनी सहमति।

रक्षा उत्पादों का 2023-24 में हुआ रिकॉर्ड प्रोडक्शन, जानें डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने क्या कहा

नई दिल्ली भारत का वार्षिक रक्षा उत्पादन वर्ष 2023.. 24 में 1 . 27 लाख करोड रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।रक्षा मंत्रालय के अनुसार रक्षा उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 16.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह वर्ष 2019-20 की तुलना में 60 प्रतिशत की वृद्धि है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इस उपलब्धि पर कहा है कि सरकार भारत को अग्रणी वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि रक्षा क्षेत्र के सभी सार्वजनिक उपक्रमों , रक्षा वस्तुओं का निर्माण करने वाले अन्य सार्वजनिक उपक्रमों और निजी कंपनियों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, देश में रक्षा उत्पादन का मूल्य रिकॉर्ड-उच्च आंकड़े यानी 1,26,887 करोड़ रुपये तक बढ़ गया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष के रक्षा उत्पादन की तुलना में 16.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वित्त वर्ष 2022-23 में रक्षा उत्पादन का मूल्य 1,08,684 करोड़ रुपये था।   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रक्षा मंत्री द्वारा दी गई इस जानकारी पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने राजनाथ सिंह के पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए लिखा, ”बहुत उत्साहजनक विकास। इस उपलब्धि में योगदान देने वाले सभी लोगों को बधाई। हम अपनी क्षमताओं को और बढ़ाने और भारत को एक अग्रणी वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए एक बेहतरीन वातावरण तैयार करने के साथ इसको समग्र प्रयास के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। यह हमारे सुरक्षा तंत्र को मजबूत करेगा और हमें आत्मनिर्भर बनाएगा।” स्वदेशी रक्षा उत्पादन में अब तक की सबसे अधिक वृद्धि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने पोस्ट में लिखा कि रक्षा मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की नीतियों और पहलों के सफल कार्यान्वयन के आधार पर वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान मूल्य के संदर्भ में स्वदेशी रक्षा उत्पादन में अब तक की सबसे अधिक वृद्धि हासिल की है, जिसका उद्देश्य ‘आत्मनिर्भरता’ हासिल करना है। रक्षा क्षेत्र के सभी सार्वजनिक उपक्रमों (डीपीएसयू), रक्षा सामानों का निर्माण करने वाले दूसरे सार्वजनिक उपक्रमों और निजी कंपनियों से हासिल आंकड़ों के मुताबिक, देश में रक्षा उत्पादन का मूल्य 1,26,887 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह पिछले वित्तीय वर्ष के रक्षा उत्पादन की तुलना में 16.7% की वृद्धि को दर्शाता है। वित्त वर्ष 2022-23 में रक्षा उत्पादन का मूल्य 1,08,684 करोड़ रुपये था। श्री सिंह ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम साल-दर-साल नए मील के पत्थर पार कर रहा है। उन्होंने भारत को एक अग्रणी वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के सरकार के अटूट संकल्प को दोहराया। वर्ष 2023-24 में उत्पादन के कुल मूल्य में, लगभग 79.2 प्रतिशत का योगदान सरकारी और 20.8 प्रतिशत निजी क्षेत्र द्वारा किया गया है। आंकड़ों से पता चलता है कि पूर्ण मूल्य के संदर्भ में सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों ने रक्षा उत्पादन में लगातार वृद्धि दर्ज की है। उन्होंने रक्षा उत्पादन को सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर ले जाने के लिए रक्षा वस्तुओं का निर्माण करने वाले सार्वजनिक उपक्रमों और निजी उद्योग सहित उद्योग को बधाई दी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार आत्मनिर्भरता पर ध्यान देने के साथ पिछले 10 वर्षों में सरकार द्वारा लाए गए नीतिगत सुधारों/पहलों और व्यापार करने में आसानी के कारण यह उपलब्धि हासिल की गई है। स्वदेशीकरण के प्रयासों को निरंतर आधार पर आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाया गया है।

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