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अमरनाथ यात्रा के पहले पांच दिनों में रिकॉर्ड तोड़ एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन किए

जम्मू, वार्षिक अमरनाथ यात्रा के पहले पांच दिनों में रिकॉर्ड तोड़ एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन किए।5,696 तीर्थयात्रियों का एक और जत्था कश्मीर के लिए रवाना हुआ। यात्रा का प्रबंधन करने वाले श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) के अधिकारियों ने बताया कि 29 जून को यात्रा शुरू होने के बाद से एक लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कहा, ”आज 5696 यात्रियों का एक और जत्था जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से दो सुरक्षा काफिलों में घाटी के लिए रवाना हुआ। इनमें से 2028 यात्री 97 वाहनों के सुरक्षा काफिले में सुबह 3.13 बजे उत्तरी कश्मीर के बालटाल बेस कैंप के लिए निकले। वहीं 3,668 यात्री 122 वाहनों के सुरक्षा काफिले में सुबह 3.40 बजे दक्षिण कश्मीर के नुनवान (पहलगाम) बेस कैंप के लिए रवाना हुए।” बता दें कि पिछले वर्ष यात्रा के पहले पांच दिनों में लगभग 50,000 तीर्थ यात्री मंदिर पहुंचे थे। मौसम विभाग ने दोनों यात्रा मार्गों पर आमतौर पर बादल छाए रहने और दिन में हल्की बारिश/गरज के साथ छींटे पड़ने का अनुमान जताया है। अमरनाथ यात्रा में यात्री या तो 48 किलोमीटर लंबे पारंपरिक पहलगाम मार्ग से यात्रा करते हैं या फिर 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग से यात्रा करते हैं। पहलगाम मार्ग से जाने वालों को गुफा मंदिर तक पहुंचने में चार दिन लगते हैं, जबकि बालटाल मार्ग का उपयोग करने वाले लोग दर्शन करने के बाद उसी दिन बेस कैंप में लौट आते हैं। इस वर्ष लगभग 300 किलोमीटर लंबे जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग में दोनों यात्रा मार्गों पर दो बेस कैंप और पवित्र गुफा मंदिर में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं ताकि बिना किसी दुर्घटना के यात्रा को सुचारू रूप से संपन्न कराया जा सके। दोनों मार्गों पर तथा पारगमन शिविरों और गुफा मंदिर के पास 124 से अधिक लंगर (सामुदायिक रसोई) स्थापित किए गए हैं। इस वर्ष की यात्रा के दौरान 7,000 से अधिक ‘सेवादार’ (स्वयंसेवक) यात्रियों की सेवा कर रहे हैं। इसके अलावा दोनों मार्गों पर यात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं भी उपलब्ध हैं।  

PM मोदी 13 जुलाई को मुंबई में करेंगे कई परियोजना का शिलान्यास

मुंबई  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 13 जुलाई को मुंबई में विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास करने के वाले हैं। इसके लिए प्रशासन की ओर से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहली बार मुंबई का दौरा करेंगे। जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी 13 जुलाई को मुंबई में प्रस्तावित गोरेगांव- मुलुंड लिंक रोड और बोरीवली- ठाणे लिंक रोड के सबवे की आधारशिला रखेंगे। मुंबई में गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड परियोजना के लिए 6,300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही प्रधानमंत्री 1,170 करोड़ रुपये की प्रस्तावित ऑरेंज गेट टू ग्रांट रोड एलिवेटेड रोड परियोजना का भूमि पूजन भी करेंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी मुंबई नगर निगम की विभिन्न प्रस्तावित परियोजनाओं का भी शिलान्यास करने वाले हैं। इनमें सड़क कंक्रीटिंग परियोजनाएं, सीवरेज योजनाएं शामिल हैं।      

रूस के हथियार निर्यातक ने भारत में मैंगो आर्मर-पियर्सिंग टैंक राउंड्स का निर्माण शुरू किया

मॉस्को/ नईदिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते रूस का दौरा करने वाले हैं। इससे पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को बड़ा तोहफा दिया है। दरअसल, पीएम मोदी की यात्रा से पहले रूस ने ऐलान किया है कि वह भारत में टैंकों के मजबूत कवच को फाड़ने वाले गोलों का निर्माण शुरू कर दिया है। इसे खास तौर पर भारतीय सेना के लिए बनाया जा रहा है। ये गोले किसी भी बख्तरबंद को पलक झपकते फाड़ सकते हैं। इसे भारत रूस के रक्षा संबंधों में मील का पत्थर माना जा रहा है। भारत रूस के बीच रक्षा संबंधों का एक लंबा और ठोस इतिहास है। इसमें भारत में हथियारों और गोला-बारूद का संयुक्त और लाइसेंस के जरिए उत्पादन भी शामिल है। भारत में ‘मैगो शेल’ बना रहा रूस रूसी राज्य के स्वामित्व वाली रक्षा निगम रोस्टेक का हिस्सा रोसोबोरोनएक्सपोर्ट हथियार निर्यातक ने भारत में मैंगो आर्मर-पियर्सिंग टैंक राउंड्स का निर्माण शुरू कर दिया है। निगम ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि यह सहयोग भारत के मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान पहलों के साथ एलाइन किया गया है, जिसमें भारतीय रक्षा उद्योग के सहयोग से रोसोबोरोनएक्सपोर्ट ने कई फैसिलिटी स्थापित की है। आत्मनिर्भर भारत में मदद कर रहा रूस रोस्टेक ने रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के महानिदेशक अलेक्जेंडर मिखेव के हवाले से कहा, “मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल के साथ तालमेल बिठाते हुए रूसी-भारतीय सहयोग एक नए मील के पत्थर पर पहुंच गया है। भारतीय रक्षा ढांचे के आधार पर, रोसोबोरोनएक्सपोर्ट ने मैंगो टैंक राउंड के निर्माण के लिए आवश्यक उत्पादन सुविधाएं स्थापित की हैं। यह विकास भारत को प्रौद्योगिकी आत्मसात और उत्पादन संगठन की प्रक्रिया शुरू करने में सक्षम बनाता है।” भारत में रोसोबोरोनएक्सपोर्ट का काम “व्यापक औद्योगिक साझेदारी का एक शानदार उदाहरण” है। संयुक्त हथियार उत्पादन पर रूस का जोर रूस ने कहा है कि इस सहयोगी ढांचे के भीतर, विभिन्न प्रकार के हथियारों से जुड़ी संयुक्त परियोजनाओं को विकसित किया गया है, जो दो अलग-अलग देशों की कंपनियों के बीच सहयोग के एक असाधारण स्तर को प्रदर्शित करता है। इस बीच, रोस्टेक के प्रमुख सर्गेई चेमेजaव ने उसी बयान में कहा कि भारत में रूसी गोला-बारूद के उत्पादन का स्थानीयकरण भविष्य में आगे बढ़ता रहेगा। भारत के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोह बढ़ा रहा रूस चेमेजोव ने कहा, “रोस्टेक के पास मित्र देशों के साथ औद्योगिक साझेदारी का काफी अनुभव है। कई परियोजनाओं में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और विशेषज्ञता साझा करना शामिल है। इस तरह की साझेदारी आयात करने वाले देश को अपना उत्पादन विकसित करने में सक्षम बनाती है, जो एक प्रमुख रक्षा समाधान आपूर्तिकर्ता के रूप में रोस्टेक के लिए एक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ है। हम भारत के साथ ऐसी कई परियोजनाओं को लागू करने का इरादा रखते हैं।” इन परियोजनाओं में टी-90 टैंकों, कवच-भेदी सब-कैलिबर प्रोजेक्टाइल से लैस मैंगो शेल और अन्य उन्नत हथियार प्रणालियों का लाइसेंस प्राप्त उत्पादन शामिल है। टैंक भेदी गोले क्या होते हैं? 3VBM17 मैंगो शेल में 3BM42 फिन-स्टेबलाइज्ड आर्मर-पियर्सिंग सब-कैलिबर प्रोजेक्टाइल है, जो समग्र कवच से लैस आधुनिक टैंकों को प्रभावी ढंग से निशाना बनाता है। चेमेज़ोव ने कहा कि भविष्य में, मैंगो राउंड के स्थानीय उत्पादन को सुविधाजनक बनाने के लिए, कंपनी भारत में बारूद निर्माण शुरू करने की योजना बना रही है, जिसे वाहनों को संयुक्त सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके अलावा, रूसी कंपनी भारत की रक्षा होल्डिंग के आधार पर भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमताओं का निर्माण करने के लिए प्रतिबद्ध है।

सुविधा और स्वच्छता के साथ-साथ महाकुंभ की सुंदरता को लेकर योगी सरकार कर रही काम

प्रयागराज संगमनगरी प्रयागराज में अगले वर्ष की शुरुआत में होने जा रहे महाआयोजन महाकुंभ 2025 को योगी सरकार भव्य और दिव्य बनाने के लिए जोरदार तैयारियों में जुटी है। योगी सरकार महाकुंभ में सुरक्षा, सुविधा और स्वच्छता के साथ-साथ महाकुंभ की सुंदरता को लेकर भी मिशन मोड में कार्य कर रही है। इस क्रम में महाकुंभ से पहले ही प्रयागराज को दुल्हन की तरह सजा दिया जाएगा। योगी सरकार की पूरे शहरी इलाके के सौंदर्यीकरण की योजना है, जिस पर कार्य भी शुरू हो चुका है। अयोध्या में रामलला के नव विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान जिस तरह की साज सज्जा की गई थी, उसी तरह प्रयागराज का कायाकल्प किया जाएगा। जगह-जगह ग्रीन बेल्ट, हार्टिकल्चर, थीमैटिक डेवलपमेंट समेत सैकड़ों स्तंभ स्थापित किए जाएंगे। महाकुंभ के आयोजन के दौरान जब श्रद्धालु संगमनगरी पहुंचेंगे तो यहां की आभा देखकर न सिर्फ दंग रह जाएंगे, बल्कि पूरी तरह धार्मिक आस्था के रंग में सराबोर हो जाएंगे।   सीएम योगी ने दिए थे निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में प्रयागराज महाकुंभ की तैयारियों की समीक्षा करते हुए इसके प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए थे। उन्होंने महाकुंभ को स्वच्छता, सुविधा और सुरक्षा का मानक आयोजन बनाने के लिए हर संभव प्रयास करने को कहा था। मुख्यमंत्री के अनुसार, महाकुंभ 2025 पूरे विश्व को सनातन भारतीय संस्कृति से साक्षात्कार कराने का सुअवसर है। यह न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि भारत की ग्लोबल ब्रांडिंग का माध्यम बनेगा। हमें इसके सफल आयोजन के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देना होगा। उन्होंने कहा कि महाकुंभ भारत की प्राचीन संस्कृति का परिचायक है। इसकी गरिमा के अनुरूप पूरे नगर को सजाया जाना चाहिए। कुंभ से जुड़े कथानक, सनातन संस्कृति के प्रतीकों आदि को चित्रित किया जाए। चौराहों पर कुंभ के लोगो लगाए जाने चाहिए। थीम आधारित द्वार, स्तम्भ, लाइटिंग के प्रयास होने चाहिए। प्रत्येक मार्ग पर ग्रीन बेल्ट का निर्माण सीएम योगी की मंशा के अनुरूप प्रयागराज में 38 जंक्शन का सौंदर्यीकरण कार्य प्रगति पर है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा एजेंसी आबद्ध करके ट्रैफिक डेंसिटी एनालिसिस के प्रयोग से स्टडी करके डिजाइन तैयार किया गया है। इसके साथ ही 5 साल के मेंटीनेंस के साथ ग्रीन बेल्ट एवं स्कल्प्चर्स की स्थापना की जाएगी। कुल मिलाकर 19 जंक्शन पीडीए द्वारा, 15 जंक्शन पीडब्ल्यूडी एवं 2 जंक्शन का निर्माण सेतु निगम द्वारा किया जा रहा है। दूसरी तरफ, शहरी मार्गों का भी सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। इसके तहत 38 शहरी मार्गों (75 किलोमीटर) का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। मेला प्राधिकरण द्वारा 8 आर्किटेक्ट आबद्ध कर प्रत्येक मार्ग पर ग्रीन बेल्ट, हार्टिकल्चर, लैंड स्केपिंग डेवलपमेंट, थीमैटिक डेवलपमेंट एवं गैप एनालिसिस पूर्ण किया जा रहा है। कुल 36 मार्ग पीडीए द्वारा और 2 मार्ग का सौंदर्यीकरण पीडब्ल्यूडी द्वारा किया जा रहा है। 4 थीमैटिक गेट का भी प्रस्ताव इसके अतिरिक्त लगभग 10 लाख वर्गफीट पर स्ट्रीट आर्ट व दीवारों पर कलाकृतियां बनाई जाएंगी। इसमें 5 लाख वर्गफीट कुंभ मेला मद से एवं 5 लाख वर्गफीट एनएमसीजी मद से प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा कार्य किया जाएगा। साथ ही,  4 थीमैटिक गेट बनाए जाने की भी योजना है। इन प्रस्तावित थीमैटिक गेट के नाम सरस्वती द्वार, शिव द्वार, गंगा द्वार और यमुना द्वार रखा जाएगा। इसकी निविदा प्रक्रियाधीन है। इसके अतिरिक्त 108 स्तंभों का भी निर्माण होगा। इन्हें, नदी के किनारे की सड़कों, विषयगत द्वारों और स्थलों पर स्तंभों का प्रस्ताव किया जा रहा है। भारद्वाज आश्रम में 8 नग, 4 विषयगत द्वार में 48 नग और रिवर फ्रंट रोड में 52 नग स्थापित किए जाएंगे। इस योजना की कार्यदायी संस्था सीएंड डीएस है।  

लोकसभा में बीजेपी को खुली चुनौती देने के बाद राहुल गांधी जल्द गुजरात में अपनी सक्रियता बढ़ा सकते है

अहमदाबाद  कांग्रेस नेता राहुल गांधी जल्द ही गुजरात के मोर्चे पर सक्रिय होंगे। राहुल गांधी ने लोकसभा में नेता विपक्ष के तौर पर बोलते हुए बीजेपी को गुजरात में हराने की चुनौती दी थी। इसके बाद सवाल खड़ा हुआ था कि राहुल गांधी ने बीजेपी को इतनी बड़ी चुनौती कैसे दे दी? अब राहुल गांधी के गुजरात में सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। राज्य में हिंदू वाले बयान को लेकर जहां कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने हैं तो वहीं इसी बीच राहुल गांधी गुजरात का पहला दौरा सकते हैं। इसके संकेत पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल ने दिए हैं। गोहिल ने कहा कि बीजेपी के हमले के दौरान बब्बर शेर की तहत मुकाबला करने वाले कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए राहुल गांधी जल्द राज्य का दौरा करेंगे। गोहिल ने कहा कि कांग्रेस दफ्तर के बाहर हुई झड़प के मामले में पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई की है। गोहिल ने 6 जुलाई को पूरे राज्य के कार्यकर्ताओं को अहमदाबाद आने की अपील की है। संभावना जताई जा रही है कि अगर अहमदाबद पुलिस बीजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है तो राहुल गांधी छह जुलाई को भी अहमदाबाद पहुंच सकते हैं।अहमदाबाद में सात जुलाई को 18 किलोमीटर लंबी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकलनी है। लंबे समय बाद आमना-सामना गुजरात में कांग्रेस तीन दशक से सत्ता से बाहर है, लेकिन राज्य में पिछले कई सालों में ऐसी कोई घटना नहीं हुई। जिसमें दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच सीधी झड़प हुई हो। अहमदाबाद में कांग्रेस कार्यालय के बाहर पुलिस की मौजूदगी में पथराव हुआ था। 2013 तक ऐसी घटनाएं दोनों पार्टियों की युवा इकाईयों के बीच छात्र राजनीति में होती थीं। कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी ने हिंदू धर्म को लेकर जो भी कहा है वह एकदम सही है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। लोकसभा में बीजेपी को क्लीन स्वीप से रोकने और राजकोट अग्निकांड हादसे पर पूरे शहर के बंद करके गोहिल ने अपना कद बढ़ाया है। ऐसा माना जा रहा है कि अब राहुल गांधी सीधे तौर पर गुजरात में अपनी सक्रियता बढ़ा सकते हैं। लोकसभा चुनावों नहीं आए थे लोकसभा चुनावों में राहुल गांधी गुजरात के दौरे पर नहीं आए थे। प्रियंका गांधी ने सिर्फ वलसाड और बनासकांठा में सभाएं की थी। गोहिल के बयान को राजनीतिक हलकों में बड़ी तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। संभावना है कि राहुल गांधी राज्य में पंचायत चुनावों से पहले पूरी तरह से सक्रिय हो सकते हैं। इसी के साथ कांग्रेस पार्टी के राज्य में नए सिरे से संगठन को मजबूत करने की कवायद भी शुरू हो सकती है। कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि आने वाले दिनों में राज्य की दो विधानसभा सीटों पर उप चुनाव होना है। पार्टी दोनों सीटों पर मजबूती से लड़ेगी। माणावदर सीट को पार्टी इंडिया अलांयस के तहत आम आदमी पार्टी के लिए छोड़ सकती है। इसी महीने एंट्री संभव राहुल गांधी ने लोकसभा में बीजेपी को सीधी चुनौती फेंकते हुए कहा था कि हम आपको गुजरात में हराएंगे। उनके बयान का मतलब 2027 के चुनावों से था। गुजरात की 182 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 92 सीटों का है। कांग्रेस ने पिछले चुनावों में 17 सीटें जीती थीं, हालांकि 2017 के चुनावों में पार्टी ने 77 सीटें जीती थीं। तब बीजेपी पिछले दो दशक में पहली बार दो अंकों पर आ गई थी। बीजेपी को 99 सीटें मिली थी। पार्टी को उस चुनाव में 41.44 फीसदी वोट मिले थे। बीजेपी के खाते में 49.05 प्रतिशत वोट गए थे। राहुल गांधी के नेता विपक्ष बनने के बाद प्रदेश इकाई गुजरात में उनकी सक्रियता बढ़ाना चाहती है। इसकी शुरुआत इसी महीने हो सकती है। चर्चा यह भी है कि राहुल गांधी अपने दौरे में राजकोट टीआरपी गेम जोन के पीड़ितों से मिलने के लिए भी जा सकते हैं। राहुल गांधी अपने दौरों में मोरबी ब्रिज हादसे, वडोदरा हरनी नाव हादसे के पीड़ितों से भी मिलने जा सकते हैं। गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति पीड़ितों को न्याय दिलाने को लेकर बड़े कार्ययोजना पर काम कर रही है। सूत्रों की मानें तो पार्टी आने वाले दिनों के इसका ऐलान कर सकती है। टीम राहुल गांधी का हिस्सा जिग्नेश मेवाणी राजकोट में सक्रिय हैं।  

आम आदमी पार्टी ने संजय सिंह को दी अहम जिम्मेदारी, राज्यसभा में AAP संसदीय दल का अध्यक्ष बनाया

Aam Aadmi Party gave important responsibility to Sanjay Singh, made him the President of AAP Parliamentary Party in Rajya Sabha

Aam Aadmi Party gave important responsibility to Sanjay Singh, made him the President of AAP Parliamentary Party in Rajya Sabha

HC ने कहा अगर धर्मांतरण को रोका नहीं गया तो एक दिन बहुसंख्यक आबादी अल्पसंख्यक हो जाएगी, जाने ये संकट कितना बड़ा …..

इलाहाबाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्मांतरण को लेकर अहम टिप्पणी की है. हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर धर्मांतरण को रोका नहीं गया तो एक दिन बहुसंख्यक आबादी अल्पसंख्यक हो जाएगी. जस्टिस रोहित रंजन ने ये टिप्पणी सामूहिक धर्मांतरण कराने के आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की. मामला एक गांव में हिंदुओं के सामूहिक रूप से धर्म बदलकर ईसाई धर्म अपनाने से जुड़ा था. सामूहिक धर्मांतरण कराने का आरोप कैलाश नाम के व्यक्ति पर लगा है. हाईकोर्ट ने कैलाश की जमानत याचिका भी खारिज कर दी. हाईकोर्ट ने कहा, ऐसे धार्मिक जमावड़ों को तुरंत रोका जाना चाहिए, जहां धर्मांतरण हो रहा है और लोगों का धर्म बदला जा रहा है. जस्टिस रोहित रंजन ने कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजन संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिले ‘धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार’ का सीधा-सीधा उल्लंघन हैं. इस दौरान हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में एससी-एसटी और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बड़े पैमाने पर ईसाई धर्म में बदला जा रहा है. क्या था ये मामला? रामकली प्रजापति नाम की महिला ने हमीरपुर जिले के मौदाहा गांव के रहने वाले कैलाश के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी. प्रजापति ने आरोप लगाया था कि कैलाश मानसिक रूप से बीमार उसके भाई को दिल्ली ले गया था. कैलाश ने वादा किया कि वो उसके भाई का इलाज करवाएगा और ठीक होने पर वापस गांव भेज देगा, लेकिन इसकी जगह उसे ईसाई धर्म में परिवर्तित कर दिया गया. एफआईआर के मुताबिक, जब कैलाश वापस लौटा तो वो गांव के सभी लोगों को दिल्ली में एक कार्यक्रम में ले गया, जहां उसने सभी को कथित तौर पर ईसाई धर्म में परिवर्तित कर दिया. कैलाश ने प्रजापति के भाई को ईसाई धर्म अपनाने के बदले पैसे की पेशकश की थी. वहीं, कोर्ट में कैलाश के वकील ने दावा किया कि रामकली के भाई का धर्म परिवर्तन नहीं किया गया है. हालांकि, कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोपों को देखते हुए उसे जमानत देने से इनकार कर दिया. धर्मांतरण पर यूपी में क्या है कानून? देश के कई राज्यों में जबरन धर्मांतरण को लेकर सख्त कानून हैं. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 2021 में जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून पास किया था. इस कानून में 10 साल तक की सजा का प्रावधान है. इस कानून के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति जबरदस्ती से, लालच देकर या डरा-धमकाकर किसी का धर्म परिवर्तन करवाता है तो दोषी पाए जाने पर उसे 1 से 5 साल तक की जेल और 15 हजार रुपये के जुर्माने की सजा हो सकती है. महिला, नाबालिग और एससी-एसटी के मामले में 2 से 10 साल की जेल और 25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा का प्रावधान है. वहीं, सामूहिक धर्मांतरण पर 3 से 10 साल की जेल और कम से कम 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा हो सकती है. कानून कहता है कि अगर कोई व्यक्ति दूसरी बार जबरन धर्मांतरण का दोषी पाया जाता है तो सजा को दोगुना किया जा सकता है. मसलन, दूसरी बार दोषी पाए जाने पर 1 से 5 साल की जेल की बजाय 2 से 10 साल की सजा हो सकती है. किस धर्म की आबादी कितनी तेजी से बढ़ रही? 2011 की जनगणना के मुताबिक, भारत की आबादी 121 करोड़ से ज्यादा है. इसमें 96.63 करोड़ हिंदू और 17.22 करोड़ मुस्लिम हैं. भारत की कुल आबादी में 79.8% हिंदू और 14.2% मुस्लिम हैं. इनके बाद ईसाई 2.78 करोड़ (2.3%) और सिख 2.08 करोड़ (1.7%) हैं. बाकी बौद्ध और जैन धर्म को मानने वालों की आबादी 1% से भी कम है. 2001 की तुलना में 2011 में भारत की आबादी 17.7% तक बढ़ गई थी. इस दौरान मुस्लिमों की आबादी सबसे ज्यादा करीब 25% तक बढ़ी थी. जबकि, हिंदू 17% से कम बढ़े थे. इसी तरह ईसाइयों की आबादी 15.5%, सिख 8.4%, बौद्ध 6.1% और जैन 5.4% बढ़े थे. वहीं, अगर 1951 से 2011 तक की तुलना की जाए तो सबसे ज्यादा आबादी मुस्लिमों की बढ़ी है. 1951 में 3.54 करोड़ थी, जो 2011 तक 386% बढ़कर 17.22 करोड़ हो गई. जबकि, 1951 में हिंदुओं की आबादी 30.35 करोड़ थी. 2011 तक हिंदुओं की आबादी 218% बढ़कर 96.62 करोड़ पहुंच गई. इसी तरह सिखों की आबादी 235% और ईसाइयों की 232% बढ़ गई. 1951 में भारत में हिंदू 84%, मुस्लिम 9%, ईसाई 2.2% और सिख 1.7% थे. 2011 की आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी 79.8%, मुस्लिमों की 14.2%, ईसाइयों की 2.3% और सिखों की 1.7% थी. अल्पसंख्यक बन रहे बहुसंख्यक? इसी साल मई में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति की एक स्टडी आई थी. इस स्टडी में दावा किया गया था 1950 से 2015 के बीच हिंदुओं की आबादी 7.8% तक घट गई. स्टडी में कहा गया था कि भारत में बहुसंख्यक आबादी घट रही है, जबकि दूसरे मुल्कों में बहुसंख्यक आबादी बढ़ रही है. भारत के अलावा म्यांमार और नेपाल में भी बहुसंख्यक आबादी घटी है. म्यांमार में बहुसंख्यक आबादी (बौद्ध) में 9.8% और नेपाल में बहुसंख्यक (हिंदू) आबादी में 3.6% की गिरावट आई है. दूसरी ओर, बांग्लादेश में बहुसंख्यक समुदाय मुसलमानों की आबादी में हिस्सेदारी 18.5% और पाकिस्तान में 3.75% तक बढ़ गई है. स्टडी में कहा गया था कि 1971 में बांग्लादेश के अलग मुल्क बनने के बाद से मुस्लिम आबादी की हिस्सेदारी 10% से ज्यादा बढ़ी है. जबरन धर्मांतरण पर क्या है कानून? फिलहाल, देश में जबरन धर्मांतरण को रोकने के खिलाफ कोई समग्र कानून नहीं है. संविधान के तहत, देश के सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है और वो अपनी मर्जी से किसी भी धर्म को अपना सकता है. हालांकि, किसी की इच्छा के खिलाफ या जबरन धर्मांतरण करवाना अपराध है. जबरन धर्मांतरण के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर तो कोई कानून नहीं है, लेकिन कई राज्यों में इसे लेकर कानून है. इनमें ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्य शामिल हैं. भारत के पड़ोसी देशों में जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून हैं. पाकिस्तान, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका और भूटान में इसे लेकर कानून है. नेपाल में जबरन धर्मांतरण पर 6 साल तक की कैद हो सकती है. वहीं, म्यांमार में 2 साल … Read more

भारत से बाहर कई देशों में यूपीआई से भुगतान करने की सुविधा, अब दुबई भी हुआ शामिल

नई दिल्ली  संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Amirate) और खाड़ी के अन्य देशों में ढेरों भारतीय रहते हैं। इसके साथ ही इन देशों में काफी भारतीय पर्यटक भी जाते हैं। अब इन पर्यटकों को वहां पेमेंट करने में काफी आसानी होगी। दरअसल, अब आसानी से मध्य पूर्व के देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में यूपीआई (QR-based Unified Payments Interface (UPI)से भुगतान किया जा सकेगा। इसके लिए नेशनल पेमेंट्स कारपोरेशन ऑफ इंडिया (National Payments Corporation of India) के इंटरनेशनल आर्म एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NPCI International Payments Ltd (NIPL) ने मिडिल ईस्ट और अफ्रीका की बड़ी डिजिटल कॉमर्स कंपनी नेटवर्क इंटरनेशनल (Network International) के साथ साझेदारी की है। कैसे होगा पेमेंट एनपीसीआई इंटरनेशनल के सीईओ रितेश शुक्ला का कहना है कि अब यूएई में अब भारतीय यात्री या एनआरआई पॉइंट ऑफ सेल मशीन के माध्यम से क्यूआर कोड के जरिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) भुगतान कर पाएंगे। उनका कहना है कि यूएई के मर्चेंट्स के बीच यूपीआई पेमेंट की बढ़ती हुई स्वीकार्यता केवल भारतीय यात्रियों के लिए ही नहीं सुविधाजनक होगा, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनोवेटिव डिजिटल पेमेंट सॉल्यूशन को भी प्रमोट करेगा। लाखों भारतीय पहुंचते हैं वहां खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) में भारतीय यात्रियों का आंकड़ा 98 लाख पहुंचने का अनुमान है। इस साल अकेले यूएई में 53 लाख के करीब भारतीयों के पहुंचने की संभावना है। भारत सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और एनपीसीआई इंटरनेशनल मिलकर यूपीआई को वैश्विक मंच पर बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं। अब वहां यूपीआई पेमेंट सिस्टम काम करने से भारतीयों को और आसानी होगी। भारत से बाहर कई देशों में चलता है यूपीआई फिलहाल भारत के बाहर नेपाल, श्रीलंका, मॉरीशस, यूएई, सिंगापुर, फ्रांस और भूटान में यूपीआई से भुगतान किया जा सकता है। यूपीआई से डिजिटल भुगतान आसान होने के कारण इसके जरिए होने वाले लेनदेन की संख्या में साल दर साल इजाफा हो रहा है। अरबों ट्रांजेक्शन हो रहे हैं एनपीसीआई के डेटा के मुताबिक, यूपीआई प्लेटफॉर्म पर जून में लेनदेन की संख्या 13.9 अरब थी। इसमें सालाना आधार पर 49 प्रतिशत का इजाफा देखा गया है। इस दौरान यूपीआई से औसत लेनदेन की संख्या प्रतिदिन 463 मिलियन रही और प्रतिदिन औसत 66,903 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। यूपीआई के लेनदेन में बढ़त की वजह रुपे क्रेडिट कार्ड को यूपीआई से जोड़ना और यूपीआई को विदेशों में भी लॉन्च करना है।

बीए, बीएससी, बीकाम समेत अन्य पाठ्यक्रमों में स्नातक प्रथम वर्ष के लिए प्रवेश प्रक्रिया जारी

रायपुर  बीए, बीएससी, बीकाम समेत अन्य पाठ्यक्रमों में स्नातक प्रथम वर्ष के लिए प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए 29 जून को पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय की तरफ से कॉलेजों को पहली मेरिट सूची जारी की गई थी। इसके तहत प्रवेश हो रहे हैं। शहर के प्रतिष्ठित कॉलेजों में विज्ञान संकाय में प्रवेश की मेरिट बहुत हाई है। 12वीं कक्षा में 80 प्रतिशत अंक लाने वाले छात्र-छात्राओं का ही विज्ञान संकाय में प्रवेश के लिए पहली मेरिट सूची में नाम आया है। पहली सूची के आधार पर कॉलेजों में अभी तक सिर्फ 20 प्रतिशत प्रवेश हो पाए हैं। दूसरी सूची में कटऑफ नीचे आने का अनुमान है। इस बार कॉलेजों में प्रवेश 31 जुलाई तक होंगे, अभी तक 14 अगस्त तक प्रवेश होते थे। प्रदेश में इस शिक्षा सत्र से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू हो रही है, इस वजह से शासन की तरफ से प्रवेश प्रक्रिया को जल्दी पूरी करने के उद्देश्य से दिनों में कटौती की गई है। उच्च शिक्षा विभाग की तरफ से नए शैक्षणिक सत्र का कैलेंडर भी जारी कर दिया गया है। जारी कैलेंडर के मुताबिक एक जुलाई से कॉलेजों में पढ़ाई शुरू करना है, लेकिन अभी तक प्रवेश प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो पाई है। पीआरएसयू से संबद्ध 150 कालेजों में यूजी प्रथम वर्ष की लगभग 42 हजार सीटें हैं। कालेजों में प्रवेश के लिए दूसरी मेरिट सूची पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय की तरफ से सात जुलाई को जारी की जाएगी। प्रथम मेरिट सूची के अनुसार छह जुलाई तक कॉलेजों में प्रवेश होंगे। दूसरी सूची आने के बाद आठ जुलाई से प्रवेश शुरू होने के अनुमान है। छात्रों को भी दूसरी सूची का इंतजार है। पहली सूची में ज्यादा कटआफ रहने के कारण छात्रों को मनमुताबिक कालेजों में विषय नहीं मिल पा रहे हैं, इस वजह से भी छात्र प्रवेश नहीं ले रहे है। इस कारण से अभी तक बहुत कम कालेजों में प्रवेश हुए हैं। विश्वविद्यालय के पोर्टल में करना है आवेदन कॉलेजों में प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिय चल रही है। इस बार भी छात्रों को विश्वविद्यालय के पोर्टल में ही आवेदन करना है। प्रवेश के लिए आवेदन चल रहे हैं। प्राप्त आवेदनों के आधार पर विश्वविद्यालय की तरफ से कॉलेजों को मेरिट सूची भेजी जाती है। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन अपने यहां मेरिट सूची चस्पा कर प्रवेश प्रक्रिया शुरू करता है। इस वजह से भी प्रवेश में देरी हो रही है। एक छात्र कई कॉलेजों के लिए आवेदन कर देते हैं। अच्छी मेरिट होने के कारण कई कॉलेजों में नाम आ जाता है, प्रवेश सिर्फ एक कॉलेज में लेते हैं। इस वजह से भी विश्वविद्यालय को कई मेरिट लिस्ट जारी करना पड़ता है, इसके बावजूद भी प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो पाती है। 15 जुलाई को कालेज स्तर पर होंगे प्रवेश संशोधित शैक्षणिक कैलेंडर के मुताबिक कालेजों में सिर्फ दो चरणों में ही प्रवेश होंगे। दूसरे चरण की मेरिट सूची सात से नौ जुलाई के बीच होगी। इसके बाद छात्रों को प्रवेश लेने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाएगा। 15 से 25 जुलाई तक खाली सीटों पर कालेज अपने स्तर से प्रवेश दे सकेंगे। कुलपति के विशेष अनुमति से 26 से 31 जुलाई तक प्रवेश दिए जाएंगे।

शाहजहांपुर में टमाटर 162, कोलकाता में 152 तो दिल्ली में 120 रुपए किलो में बिका

नई दिल्ली बीते साल की तरह ही इस बार भी टमाटर 200 रुपए के पार पहुंच सकता है। देश के कई इलाकों में बारिश और बाढ़ की वजह से टमाटर समेत कई सब्जियों की सप्लाई पर असर पड़ा है, जिससे टमाटर के साथ-साथ लोगों के किचन में हमेशा विराजमान रहने वाले आलू-प्याज भी भाव खाने लगे हैं। चर्चित अमेरिकी उपन्यासकार और फूड कॉलम राइटर लॉरी कॉल्विन ने एक बार कहा था कि बिना टमाटर के दुनिया उसी तरह है, जैसे बिना तारों के वायलिन। आज भारतीय किचन में बेहद करीने से टमाटर सहेजे जाते हैं। बिना टमाटर के किसी तरीदार सब्जी की कल्पना करना भी मुश्किल है। यूपी के शाहजहांपुर में टमाटर 162 रुपए किलो में बिक रहा है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, महानगरों में टमाटर की खुदरा कीमतें कोलकाता में सबसे अधिक 152 रुपए प्रति किलो रहीं। वहीं, दिल्ली में यह प्रति किलो 120 रुपए, चेन्नई में 117 रुपए और मुंबई में 108 रुपए के हिसाब से बिका। बाजारों में आलू 35 से 40 रुपए किलो बिक रहा है तो प्याज भी कहीं-कहीं 45 से 50 रुपए किलो तक बिक रहा है। शाहजहांपुर में सबसे ज्यादा में बिका टमाटर खुदरा टमाटर की अखिल भारतीय औसत कीमत बृहस्पतिवार को 95.58 रुपए प्रति किलो थी। आंकड़ों से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में इसकी सबसे अधिक कीमत 162 रुपये प्रति किलो रही, जबकि राजस्थान के चूरू जिले में न्यूनतम दर 31 रुपए प्रति किलो थी। देश के चार बड़े शहरों के अलावा भी बाकी शहरों में भी टमाटर की कीमतें ऊंची रहीं। गुरुग्राम में टमाटर की खुदरा कीमत 140 रुपए प्रति किलो, बेंगलुरु में 110 रुपए प्रति किलो, वाराणसी में 107 रुपए प्रति किलो, हैदराबाद में 98 रुपए प्रति किलो और भोपाल में 90 रुपए किलो थी। नीचे दिए ग्राफिक से जानिए टमाटर की पैदावार में कौन से राज्य आगे हैं। एक महीने में 158 फीसदी तक बढ़ गए दाम उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 3 जुलाई को टमाटर की औसत कीमत 55.04 रुपए किलो था, जो बीते 3 जून को 34.73 रुपए किलो था। बीते साल 3 जुलाई को टमाटर की कीमत 67.57 रुपए किलो थी। जूलाई खत्म होने के साथ टमाटर की कीमत 67.57 रुपए किलो थी और 2023 अगस्त के पहले हफ्ते में यह बढ़कर 250 रुपए किलो तक जा पहुंचा था। पेट्रोल से दोगुना महंगा हो सकता है टमाटर आज कई खुदरा मार्केट में टमाटर के दाम 100 रुपए के पार पहुंच चुके हैं। अभी इसके महंगे होने की रफ्तार 158 फीसदी है, जिसके और ज्यादा होने के आसार हैं। माना जा रहा है कि अभी बारिश और बाढ़, घटता उत्पादन और सप्लाई में बाधा पहुंचने की वजह से अगस्त तक इसके दाम और बढ़ सकते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि अगर यही रफ्तार रही तो यह 200 रुपए किलो के पार भी जा सकता है। यानी पेट्रोल की मौजूदा कीमतों से दोगुने दाम पर टमाटर बिक सकते हैं, क्योंकि पेट्रोल के दाम देश के कई शहरों में 100 रुपए प्रति लीटर के करीब है। बीते साल क्यों 200 के पार पहुंचा था टमाटर बीते साल इसी वक्त टमाटर की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला था। दिल्ली-एनसीआर, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में टमाटर की कीमतें काफी बढ़ गई थीं। बेमौसमी घटनाओं और किसानों के ज्यादा रिटर्न देने वाली फसलें उगाने से टमाटर की आपूर्ति अचानक गिर गई थी। इसी वजह से जुलाई के अंत तक खुदरा कीमतें मामूली 20 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 200 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गईं। वहीं, दिल्ली के मदर डेयरी के सफल रिटेल स्टोर पर टमाटर 259 रुपए किलो बिका था। उस वक्त केंद्र सरकार ने अपनी एजेंसियों को आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख टमाटर उत्पादक राज्यों में टमाटर खरीदने का निर्देश दिया था। इस साल भी अगर टमाटर के भाव काबू से बाहर जाने लगेंगे तो सरकार ऐसा ही कुछ कर सकती है। नीचे ग्राफिक से समझिए, कहां कितना लाल हुआ टमाटर। जुलाई-अगस्त में क्यों बढ़ जाते हैं टमाटर के भाव टमाटर का उत्पादन आमतौर पर जुलाई-अगस्त और अक्टूबर-नवंबर के दौरान घट जाता है, जिससे बाजार में इसकी पैदावार में कमी आ जाती है। यह कमी टमाटर की मांग और आपूर्ति की चुनौतियों को पूरा नहीं कर पातीं। इसके अलावा, कई राज्यों में बारिश के कारण टमाटर की फसल को नुकसान पहुंचा है। देश के ज्यादातर हिस्सों में भीषण गर्मी की वजह से भी उत्पादन में गिरावट आई। इसके अलावा, पड़ोसी राज्यों से पर्याप्त मात्रा में टमाटर की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। कुछ इलाके ऐसे हैं, जहां इस बार टमाटर की फसल कम लगाई गई थी। पड़ोसी राज्यों से कम आपूर्ति, दक्षिण से मंगाने पर लागत ज्यादा दिल्ली की आजादपुर थोक मंडी और नागपुर के कलमना मार्केट के ट्रांसपोर्टर और कारोबारी लालचंद्र पांडेय ने बताया कि दिल्ली समेत देशभर में हफ्ते भर में टमाटर की कीमतें डेढ़ से दोगुनी हो गई हैं। इसकी वजह कारण हरियाणा और उत्तर प्रदेश से टमाटर की कम आपूर्ति है। टमाटर की आपूर्ति को पूरा करने के लिए दक्षिण के राज्यों से टमाटर मंगाए जा रहे हैं जिससे टमाटर की ढुलाई की लागत बढ़ी है। कई बार किसानों ने सही कीमत नहीं मिलने की वजह से टमाटर की फसल पर कीटनाशकों और उर्वरकों का इस्तेमाल नहीं किया। इससे कई जगहों पर टमाटर की फसल बीमारियों की चपेट में आ गई। इसस टमाटर की पैदावार गिर गई और इसकी कीमतें बढ़ गईं। अभी अगस्त तक ज्यादा राहत नहीं, टमाटर बना रहेगा लाल लालचंद्र पांडेय के अनुसार, टमाटर की नई फसल आने में करीब 2 महीने का वक्त लग सकता है। ऐसे में अगस्त तक दाम में मामूली गिरावट आ सकती है। जुलाई के आखिर तक इसके भाव 200 के पार जा सकते हैं, क्योंकि यह वक्त भीषण बारिश और बाढ़ का भी है। दरअसल, टमाटर के पौधे जब तीन महीने के हो जाते हैं तो इनसे हफ्ते में दो बार टमाटर तोड़ सकते हैं। ये पौधे 1-2 महीने की अवधि तक फसल देते हैं। हालांकि टमाटर की पैदावार उसकी किस्मों, मिट्टी और बारिश पर ज्यादा निर्भर करती है। अगस्त के आखिर से टमाटर के … Read more

सपने में सांप के रंग का मतलब

स्वप्न शास्त्र में स्वप्न के अर्थ वर्णित किए गए हैं। ये बताता है कि सपने भविष्य में कैसा फल देंगे, सपने हमें आने वाले फायदों के बारे में भी बताते हैं और नुकसान भी पहुंचाते हैं। इसलिए ज्योतिष शास्त्र में स्वप्न को बहुत महत्व दिया गया है। सपने में सांप देखने का मतलब बहुत खास होता है। ये शुभ और अशुभ दोनों हो सकते हैं। सपने में अलग-अलग रंग के सांप देखने का मतलब भी अलग-अलग होता है। आइए जानते हैं आज सांप से जुड़े सपने और उनके फल। सपने में सांप देखने का मतलब सांप कई रंग के होते हैं और इनके अलग-अलग रंग के सपने में सांप देखने का मतलब क्या है। सपने में सफेद रंग का सांप देखना: सपने में सफेद रंग का सांप दिखाई देना तो यह बहुत शुभ सपना है। यह सपना अपार धन लाभ का संकेत देता है। ऐसे जातक को अप्राप्य पैसा मिलता है. सपने में भूरे रंग का सांप देखना: सपने में भूरे रंग का सांप देखना अचंता फल देता है। चेहरे पर यदि यह सांप के पेड़ पर चढ़ता हुआ दिखाई दिया तो इसका मतलब है कि आपको जल्द ही काम या व्यापार में विकास मिलने वाला है। आपको नई जॉब का ऑफर मिल सकता है या बिजनेस में बड़ा मुकाम या ऑर्डर मिल सकता है। सपने में हरे रंग का सांप देखना: सपने में हरे रंग का सांप देखने का मतलब है कि आपको जल्द ही कोई अच्छी नौकरी मिल सकती है। आपको मनचाहा काम या सफलता मिल सकती है. साथ ही आर्थिक उन्नति भी मिलने के योग बनते हैं। सपने में रंगीला या रंग-बिरंगा सांप देखने का अर्थ है आपके जीवन में बड़ी सफलता मिलने वाली है। आपका जीवन खुशियों और धन-समृद्धि से भरने वाला है। ऐसा सपना गरीब आदमी को भी आए तो कुछ ही समय में वो बड़ा आदमी बन सकता है। सपने में पीले रंग का सांप देखना: सपने में पीले रंग का सांप देखना अच्छा भी है और बुरा भी है। यह आपके घर से दूर जाने का संकेत दे सकता है। जैसे काम या व्यवसाय के चलते आपको लंबे समय के लिए अपना घर छोड़ना पड़ता है। सपने में काला नाग देखना : सपने में काला सांप देखना अच्छा होता है। यह आर्थिक स्थिति बेहतर होने का संकेत है। नौकरी में पदोन्नति, नई नौकरी मिलने, वेतन और मान-सम्मान में वृद्धि का योग बनता है। किसी महतत्वपूर्ण काम में सफलता पाने के योग बनते हैं। सपने में लाल रंग का सांप देखना: सपने में लाल रंग का सांप देखने का मतलब है कि आपको किसी महान कार्य में अड़चन आ सकती है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप क्या कर रहे हैं या आपको कोई धोखा दे सकता है। सपने में काले रंग का सांप देखना: सपने में काले रंग का सांप देखना दो तरह के संकेत देता है। एक ओर तो यह धन लाभ का संकेत देता है. वहीं यदि सुनहरा सांप धर्मस्थल के साथ देखा जाए तो यह बताता है कि आपने शायद मनोकामना का चढ़ावा नहीं चढ़ाया है। अपने मन्नत के बाद वादा पूरा करें.

टी20 श्रृंखला से एशिया कप और विश्व कप की तैयारी पुख्ता करने आज उतरेगा भारत

चेन्नई भारतीय महिला क्रिकेट टीम शुक्रवार से यहां दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शुरू हो रही तीन मैचों की टी20 श्रृंखला का इस्तेमाल एशिया कप और टी20 विश्व कप के लिए अपनी तैयारियों और रणनीति को पुख्ता करने के लिए करेगी। श्रीलंका में 19 जुलाई से होने वाले एशिया कप और बांग्लादेश में चार अक्टूबर से होने वाले आईसीसी टी20 विश्व कप से पहले यह भारत की सफेद गेंद से आखिरी द्विपक्षीय श्रृंखला है। इसे देखते हुए हरमनप्रीत कौर की अगुआई वाली भारतीय टीम इन बड़े टूर्नामेंट की तैयारी के लिए अपने प्रयास में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। टीम ने बेंगलुरू में तीन मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला और यहां एकमात्र टेस्ट में भी इसके संकेत दिए हैं। दक्षिण अफ्रीका से टक्कर मिलने के बावजूद भारत ने अब तक सभी मैच जीते हैं। 2023 से अब तक भारत ने सात टी20 श्रृंखला खेली हैं जिनमें से तीन में उसे जीत मिली है और चार में हार का सामना करना पड़ा है। टीम इस आंकड़े को बेहतर करना चाहेगी। भारत को एकदिवसीय श्रृंखला और टेस्ट मैच में अपनी खिलाड़ियों की फॉर्म से राहत मिलेगी। एकदिवसीय टीम की उप कप्तान और स्टार बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने तीन मैच में दो शतक और एक अर्धशतक के साथ शानदार प्रदर्शन किया जबकि हरमनप्रीत ने अंतिम वनडे में शतक जड़ा। एकदिवसीय श्रृंखला के दौरान सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा की खराब फॉर्म चिंता का विषय थी लेकिन उन्होंने यहां एकमात्र टेस्ट में महिला क्रिकेट में सबसे तेज दोहरा शतक लगाकर इन चिंताओं को दूर कर दिया। जेमिमा रोड्रिग्स और रिचा घोष भी धीरे धीरे लय हासिल कर रही हैं। टीम प्रबंधन को इन पांचों बल्लेबाजों से दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी। मेहमान टीम श्रीलंका के खिलाफ स्वदेश में टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला में काफी प्रभावशाली प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। कागज पर भारत की गेंदबाजी भी काफी मजबूत दिखती है। तेज गेंदबाजों रेणुका सिंह, पूजा वस्त्रकार और अरुंधति रेड्डी ने अच्छा प्रदर्शन किया है। दीप्ति शर्मा, राधा यादव, आशा शोभना और श्रेयंका पाटिल की स्पिन चौकड़ी भी टीम की मजबूत ताकत है। दक्षिण अफ्रीका बल्लेबाजी में अच्छी शुरुआत के लिए कप्तान लॉरा वोलवार्ट पर बहुत अधिक निर्भर होगा। वोलवार्ट ने एकदिवसीय श्रृंखला और एकमात्र टेस्ट में शतक लगाकर अपनी शानदार फॉर्म की झलक दिखाई। अगर दक्षिण अफ्रीका को पिछले साल जनवरी के बाद टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला जीतनी है तो सलामी बल्लेबाज वोलवार्ट का प्रदर्शन महत्वपूर्ण होगा। टीम को वोलवार्ट के अलावा मारिजेन कैप, सुने लुस, एनेके बॉश और तेजमिन ब्रिट्स के बल्ले से भी अच्छे रनों की उम्मीद होगी। नोनकुलुलेको मलाबा और मसाबाता क्लास के अलावा नादिन डि क्लार्क और अयाबोंगा खाका को भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। दक्षिण अफ्रीका को उम्मीद होगी कि अनुभवी मारिजेन कुछ ओवर कर पाएंगी। चोट से उबरने के कारण उन्होंने अब तक भारत दौरे पर गेंदबाजी नहीं की है। टीमें इस प्रकार हैं: भारत महिला: हरमनप्रीत कौर (कप्तान) स्मृति मंधाना, उमा छेत्री, रिचा घोष, डी हेमलता, जेमिमा रोड्रिग्स, शेफाली वर्मा, अमनजोत कौर, श्रेयंका पाटिल, सजीवन सजाना, दीप्ति शर्मा, आशा शोभना, अरुंधति रेड्डी, रेणुका सिंह, शबनम शकील, पूजा वस्त्रकार और राधा यादव। दक्षिण अफ्रीका महिला: लॉरा वोलावार्ट (कप्तान), तेजमिन ब्रिट्स, मीके डि रिडर, सिनालो जाफ्ता, एनेके बॉश, नादिन डि क्लार्क, एनेरी डर्कसेन, मारिजेन कैप, सुने लुस, क्लो ट्रायोन, अयाबोंगा खाका, मसाबाता क्लास, एलिज-मारी मार्क्स, नोनकुलुलेको मलाबा और तुमी सेखुखुने। समय: मैच शाम सात बजे से खेला जाएगा।  

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