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मुख्यमंत्री यादव ने वीडियो कॉल के माध्यम से वारिस से बात की और कुशलक्षेम पूछी, उन्होंने कहा कि आप मध्यप्रदेश के गौरव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजगढ़ जिले के ब्यावरा निवासी प्लंबर वारिस खान को एबी रोड हाई-वे पर कार पलटने की घटना में शिवपुरी के परिवार के सात लोगों की जान बचाने पर एक लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीडियो कॉल के माध्यम से वारिस से बात की और उसकी कुशलक्षेम पूछी। उन्होंने कहा कि आप मध्यप्रदेश के गौरव हैं। वारिस ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि वह बाइक से बीनागंज जा रहे थे, तभी सामने आ रही कार दुर्घटनावश खंती में गिर गई। मैंने बिना देरी किये अपने हाथों से कार के कांच तोड़े और एक-एक कर के सभी यात्रियों को बाहर निकाला। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वारिस के इस साहसी कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि वारिस आपने बहुत अच्छा कार्य किया है। मुसीबत के समय में एक दूसरे की सहायता करना ही सच्ची मानवता है। आपके इस कार्य से सभी लोगों को प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कलेक्टर्स को 15 अगस्त के अवसर पर लोगों की मदद करने वाले साहसी लोगों को सम्मानित करने के निर्देश दिए।  

संकल्प, सफलता और परम्परा से आधुनिकता की ओर, उन्नत बकरी पालन एक नई शुरूआत

छतरपुर छतरपुर जिले के लखनगुवां गांव में वाटरसेड के माध्यम से बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। यह कहानी उसी बदलाव की है, जो न केवल गाँव के लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने में मदद कर रहा है, बल्कि उनके जीवन में आशा की किरण भी जगा रहा है। जिसमें मुख्य रूप से बकरी पालन में वाटरसेड की भूमिका है। गांव की अधिकांश महिलाएं आर्थिक रूप से निर्भर हैं और उन्हें अपने परिवारों की भलाई के लिए महत्वपूर्ण स्रोतों की आवश्यकता है। इस विचार के तहत, वाटरसेड के माध्यम से स्व-सहायता समूहों का गठन किया गया, जिसमें स्थानीय महिलाएं शामिल थीं। वाटर सेड के माध्यम से ओम साई स्व-सहायता समूह को 7 नग, मां दुर्गा स्व-सहायता समूह को 12 यूनिट एवं श्री गणवेश स्व-सहायता समूह को 12 यूनिट बकरी प्रदान की। इन बकरियों की नस्ल सिरोही, बरबरी एवं देशी है विशेष रूप से दूध एवं मांस उत्पादन के लिए प्रजनित की गई थी, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए जा सके। सिर्फ बकरियाँ ही नहीं, बल्कि आजीविका मिशन ने रिवोलिंग फंड और सामुदायिक निवेश निधि के माध्यम से इन महिलाओं की मदद की। इस फंड का उपयोग उचित प्रबंधन के साथ अपने व्यवसाय को बढ़ाने में किया जा सकता था। सामुदायिक निवेश निधि ने उन्हें अपने व्यवसाय में निवेश करने का एक और रास्ता प्रदान किया, जिससे वे अपने आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें। * उन्नत बकरी पालन के लिए पशु सखी की भूमिका जब महिलाएँ अपने बकरी पालन के कार्य में जुट गईं, तब यह महसूस किया गया कि उन्हें प्रशिक्षण की आवश्यकता है। इसलिए, गाँव में पशु सखी की नियुक्ति की गई, जो बकरी पालन में आवश्यक ज्ञान और प्रशिक्षण प्रदान करती थी। पशु सखी गाँव की एक आत्मनिर्भर महिला थीं, जिन्होंने पशुओं की देखभाल, टीकाकरण, और खानपान का पर्याप्त ज्ञान प्राप्त किया था। पशु सखी ने गाँव में टीकाकरण कैंप का आयोजन किया, जिसमें सभी समूह की महिलाएँ शामिल हुईं। इस कैंप में उन्हें यह सिखाया गया कि बकरियों को कैसे स्वस्थ रखा जाए, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए क्या उपाय किए जाएं, और उन्हें कौन-कौन सी बीमारियों से बचाने की आवश्यकता है। महिलाओं को यह समझ में आया कि सही टीकाकरण से उन्हें न केवल बकरियों की सेहत सुधारने में मदद मिलेगी, बल्कि यह उनके आर्थिक लाभ में भी योगदान देगा। इसके आगे, पशु सखी ने भोजन प्रबंधन का प्रशिक्षण भी दिया। उन्होंने बताया कि बकरियों को कौन-कौन से खाद्य पदार्थ दिए जा सकते हैं ताकि उनकी दूध एवं मांस उत्पादन क्षमता बढ़ सके। महिलाएँ अब जानती थीं कि पौष्टिक भोजन का मतलब केवल खाना ही नहीं, बल्कि उसकी मात्रा और गुणवत्ता भी होती है। इसके अलावा, बकरियों की देखभाल के प्रति उचित ध्यान रखने की दिशा में भी उन्हें प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें बताया गया कि बकरियों को किस प्रकार की जगह पर रखा जाए, ताकि उन्हें पर्याप्त जगह मिले। बकरियों की सफाई और स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी था जितना कि उनका भोजन। ग्राम लखनगुवां में समूह सदस्यों को बकरी पालन से एक अच्छी आय प्राप्त होने लगी है जिसमें एक महिला को औसतन मासिक आय 10 हजार रूपए की होने लगी। इस प्रकार, ग्राम लखनगुवां में बकरी पालन के इस स्व-सहायता समूह की कहानी एक प्रेरणा बनी है।

पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वालों को अब नहीं करना पड़ेगा शहरों से अपडाउन, बनेगी विशाल टाउनशिप

पीथमपुर  पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारी-अफसरों को इंदौर और आसपास के शहरों से अपडाउन न करना पड़े, इसलिए मप्र औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) उद्योगों के समीप ही आवासीय टाउनशिप तैयार करने की योजना पर काम कर रहा है। दरअसल केंद्र सरकार की मंशा है कि औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए उसी क्षेत्र में आवासीय सुविधाएं विकसित की जाए ताकि उन्हें कार्यस्थल तक जाने में परेशानी न हो। टाउनशिप विकसित की जाएगी इसलिए एमपीआईडीसी ने दो प्रोजेक्ट का प्रस्ताव बनाकर केंद्र सरकार के आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय को भेजा है। जिसमें इंदौर जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं वाली आवासीय सोसायटियों की तर्ज पर पीथमपुर में टाउनशिप विकसित की जाएगी। पीथमपुर के सेक्टर-1 और 6 में दो टाउनशिप में बनने वाली 22 इमारतों में 1362 फ्लैट तैयार किए जाएंगे। टाउनशिप परिसर में गार्डन, सीसीटीवी सर्विलांस, पार्किंग, चौड़ी सड़कें, प्ले जोन, लिफ्ट, फायर सेफ्टी आदि सुविधाएं मिलेंगी। पीथमपुर में पायलट प्रोजेक्ट के तहत टाउनशिप विकसित की जाएंगी। प्रयोग सफल होने पर प्रदेश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसे लागू किया जाएगा। लोग रोज अपडाउन करते हैं पीथमपुर में एक हजार से अधिक उद्योग संचालित किए जा रहे हैं। इन उद्योगों में मप्र सहित अन्य प्रदेशों से आए लाखों कर्मचारी काम करते हैं। इनमें से एक लाख से अधिक लोग इंदौर, राऊ और महू से अपडाउन करते हैं। हर वर्ष इस औद्योगिक क्षेत्र में सात फीसद की दर से कर्मचारियों की बढ़ोतरी हो रही है। एमपीआईडीसी ने इन्हीं बिंदुओं को लेकर कुछ समय पहले सर्वे किया था, जिसमें पता चला कि पीथमपुर में इन कर्मचारियों के लिए किफायती बजट में 15 से 20 हजार घरों की जरूरत है। इधर पीथमपुर के आसपास निजी कॉलोनियों में जमीन के दाम आसमान छू रहे हैं। आवासीय टाउनशिप की प्लानिंग श्रमिकों को मलिन बस्तियों और अवैध बस्तियों में अस्वच्छ परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसलिए एमपीआईडीसी ने पीथमपुर के सेक्टर-1 और 6 में आवासीय टाउनशिप की प्लानिंग की है। हाल ही में इन दोनों टाउनशिप का मसौदा तैयार कर स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेजा गया है। संभवत: आगामी वर्ष में इन प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा। दोनों टाउनशिप में गार्डन, सीसीटीवी सर्विलांस, पार्किंग, प्ले जोन, लिफ्ट, फायर सेफ्टी जैसी अनेक सुविधाएं रहेंगी।

अब भोपाल में खादी के कपड़े परंपरागत दुकानों के बजाय अब ब्रांडेड कपड़ों की तरह चमचमाते माॅल में मिलेंगे

भोपाल मध्य प्रदेश में अब खादी के कपड़ों के भी दिन बदलने वाले हैं. खादी के कपड़े परंपरागत दुकानों के बजाय अब ब्रांडेड कपड़ों की तरह चमचमाते माॅल में मिलेंगे. राजधानी भोपाल में प्रदेश का पहला खादी मॉल बनने जा रहा है. अगले छह माह में खादी माॅल संचालित करने की रूपरेखा तैयार कर ली गई है. राजधानी भोपाल में बनने जा रहे खादी माॅल में खादी के कपड़े, हैंडीक्राफ्ट और अन्य कुटीर उत्पाद मिलेंगे. इसमें हस्तशिल्प, हथकरघा, माटीकला, रेशम और ग्रामोद्योग से जुड़े सभी उत्पाद मिलेंगे. माॅल में उत्पादों के लिए विशेष डिस्प्ले स्पेस भी तैयार किए जाएंगे. भोपाल के एमपी नगर के जोन वन स्थित तीन मंजिला चित्तौड़ कॉम्पलेक्स को मॉल में परिवर्तित किया जाएगा. मध्य प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड ने कॉम्पलेक्स में स्थित सरकारी कार्यालय व बीमा कंपनियों के दफ्तर खाली करा लिए हैं. कॉम्प्लेक्स को माॅल बनाने के लिए मध्य प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड ने टेंडर निकाले हैं. वर्तमान में ग्राउंड फ्लोर पर खादी एम्पोरियम संचालित है. माॅल निर्माण के दौरान इसका भी रिनोवेशन होगा. माॅल खुलने के बाद विभाग फ्लिपकार्ट, अमेजन जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों से भी करार करने की तैयारी कर रहा है. ताकि उपभोक्ताओं को इन परंपरागत उत्पादों की होम डिलेवरी की सुविधा भी दी जा सके. फर्स्ट फ्लोर पर बनेगा हैंडीक्राफ्ट एग्जीबिशन मॉल का फर्स्ट फ्लोर हैंडीक्राफ्ट एग्जीबिशन के लिए आरक्षित रखा जाएगा. यहां प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की कला और संस्कृति से जुड़े हैंडीक्राफ्ट की स्थाई एग्जिबिशन लगाई जाएगी. यहां फैशनेबल खादी ब्रांड व सिल्क के उत्पाद का एक सेगमेंट होगा. सेकंड फ्लोर में विंध्या वैली ब्रांड और ग्राउंड फ्लोर परंपरागत खादी वस्त्रों के लिए रखा जाएगा. छत पर ओपन कैफेटेरिया भी संचालित किया जाएगा. मध्य प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड ने इसके टेंडर निकाले हैं। माॅल खुलने के बाद विभाग फ्लिपकार्ट, अमेजन जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों से भी करार करने की तैयारी कर रहा है। बता दें कि इसमें फर्स्ट फ्लोर पर हैंडीक्राफ्ट एग्जीबिशन बनेगा।  सेकंड फ्लोर में विंध्या वैली ब्रांड, ग्राउंड फ्लोर परंपरागत खादी वस्त्रों के लिए रखा जाएगा। वहीं छत पर ओपन कैफेटेरिया संचालित किया जाएगा।

दिल्ली में प्रदूषण की पड़ रही मार, याचिकाकर्ता ने कहा- लोग गंभीर स्थिति में, अब सुनवाई होगी 18 नवंबर को

नई दिल्ली दिल्ली में बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 18 नवंबर को सुनवाई होगी। वरिष्ठ अधिवक्ता और न्याय मित्र अपराजिता सिंह की ओर से दायर याचिका पर गौर करते हुए न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने पीठ से कहा कि कल से लोग गंभीर स्थिति में हैं। इससे बचने के लिए अदालत ने सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को एहतियाती कदम उठाने को कहा है। उन्होंने कुछ नहीं किया। उन्होंने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को इस बारे में सूचित कर दिया है और उन्हें यह बताना चाहिए कि क्या कदम उठाए जा रहे हैं? दिल्ली समेत एनसीआर में एक्यूआई खतरनाक स्तर पर प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ने के कारण राजधानी में धुंध की चादर छाई हुई है। सीरीफोर्ट इलाके में एक्यूआई 438 दर्ज किया गया है, जिसे सीपीसीबी के मुताबिक ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा गया है। आनंद विहार में एक्यूआई 472 दर्ज हुआ है। विशेषज्ञ बताते हैं कि जिस तरह से उत्तर भारत में पराली जलाने के मामले दिख रहे हैं, उसके हिसाब से फिलवक्त इसमें बड़े पैमाने पर कमी आने का अंदेशा नहीं है। राजधानी के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गई है, जिससे अक्षरधाम मंदिर और आस-पास के इलाकों में धुंध की मोटी परत छा गई है। 11 नवंबर को दिल्ली पुलिस को लगाई थी फटकार सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर प्रतिबंध के उसके आदेश को गंभीरता से न लेने पर 11 नवंबर को दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि ऐसा माना जाता है कि कोई भी धर्म किसी भी ऐसी गतिविधि को बढ़ावा नहीं देता, जो प्रदूषण को बढ़ाती है या लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचाती है।’ जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की सदस्यता वाली पीठ ने कहा कि अगर पटाखे इसी तरह से फोड़े जाते रहे तो इससे नागरिकों का सेहत का मौलिक अधिकार प्रभावित होगा। सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत सहित अन्य न्यायाधीशों ने आज सुप्रीम कोर्ट कैंटीन में वकीलों की तरफ से आयोजित लंगर में भाग लिया।

2025 से शुरू होने वाली10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए CBSE बोर्ड ने कई महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की

नई दिल्ली केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 2025 से शुरू होने वाली 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए कई महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है। ये बदलाव छात्रों के मानसिक दबाव को कम करने, शिक्षा को अधिक समझने योग्य बनाने और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से किए गए हैं। CBSE ने इन बदलावों की जानकारी हाल ही में इंदौर में आयोजित “ब्रिजिंग द गैप” प्रिंसिपल्स समिट में दी, जिसमें बोर्ड के भोपाल रीजनल ऑफिसर, विकास कुमार अग्रवाल ने ये फैसले साझा किए। 1. सिलेबस में 15% की कमी CBSE ने घोषणा की है कि 10वीं और 12वीं के सभी विषयों के सिलेबस में 15% की कमी की जाएगी। इससे छात्रों पर अध्ययन का दबाव कम होगा और वे परीक्षा के लिए रटने की बजाय विषयों को अच्छे से समझने पर ध्यान देंगे। इस बदलाव का उद्देश्य छात्रों को अधिक गहराई से विषयों की समझ प्रदान करना है, जिससे उनका अकादमिक विकास बेहतर हो सके और वे इन विषयों का व्यावहारिक उपयोग कर सकें। विकास कुमार अग्रवाल ने बताया कि सिलेबस में की गई यह कमी छात्रों को एक अधिक संतुलित और समझने योग्य अध्ययन सामग्री प्रदान करेगी, जिससे उन्हें आसानी से और अधिक प्रभावी ढंग से सीखने का अवसर मिलेगा। 2. असेसमेंट स्ट्रक्चर में बदलाव असेसमेंट के तरीके में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। अब फाइनल ग्रेड का 40% आंतरिक असेसमेंट (जैसे प्रोजेक्ट, असाइनमेंट, पीरियडिक टेस्ट) पर आधारित होगा, जबकि 60% अंक छात्रों के फाइनल लिखित परीक्षा पर आधारित होंगे। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य यह है कि छात्रों को पूरे साल अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखने का अवसर मिले, जिससे केवल अंतिम परीक्षा पर निर्भर रहने की स्थिति से बचा जा सके। आंतरिक असेसमेंट छात्रों के ज्ञान और कौशल का समग्र मूल्यांकन करेगा, जिससे उनका पूरा शैक्षिक सफर अच्छा रहेगा। आंतरिक असेसमेंट में छात्रों को प्रोजेक्ट्स, असाइनमेंट्स, और पीरियडिक टेस्ट्स के माध्यम से अपनी समझ और क्षमता दिखाने का मौका मिलेगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि छात्र पूरे साल सक्रिय रूप से पढ़ाई करते रहें और केवल अंतिम परीक्षा तक सीमित न रहें। 3. डिजिटल असेसमेंट का उपयोग CBSE ने परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल असेसमेंट की शुरुआत करने का निर्णय लिया है। इससे उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन त्वरित और सटीक तरीके से किया जा सकेगा। डिजिटल असेसमेंट प्रणाली से छात्रों के उत्तरों का मूल्यांकन तेज, सुरक्षित और अधिक पारदर्शी होगा। इसके अलावा, इससे मूल्यांकन में इंसान से होने वाली त्रुटियों को भी कम किया जा सकेगा। 4. ओपन बुक परीक्षा का प्रयोग CBSE ने इंग्लिश लिटरेचर और सोशल साइंस जैसे विषयों के लिए ओपन बुक परीक्षा का प्रयोग शुरू किया है। इस प्रक्रिया में छात्रों को किताबों और नोट्स के साथ परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। ओपन बुक परीक्षा का उद्देश्य छात्रों को केवल रटने के बजाय विषयों की गहरी समझ प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना है। यह प्रक्रिया छात्रों को अधिक सोच-समझकर उत्तर देने का मौका प्रदान करेगी, जिससे उनकी सोच और विश्लेषणात्मक क्षमता में सुधार होगा। 5. एक टर्म परीक्षा 2025 से, दो टर्म परीक्षा 2026 से CBSE ने यह भी घोषणा की है कि 2025 से शुरू होने वाली बोर्ड परीक्षाएं एक टर्म (semester) की होंगी, लेकिन 2026 से यह प्रणाली दो टर्म वाली परीक्षाओं में बदल जाएगी। इस प्रणाली के तहत, परीक्षा को दो भागों में विभाजित किया जाएगा, जिससे छात्रों को पूरे साल अध्ययन करने की आदत पड़ेगी और वे किसी एक परीक्षा पर अत्यधिक निर्भर नहीं होंगे। दो टर्म प्रणाली का मुख्य उद्देश्य यह है कि छात्रों को एक ही समय में सभी विषयों को तैयार करने का दबाव न हो। एक टर्म प्रणाली में, छात्रों को पहले टर्म के बाद एक मध्यावधि परीक्षा का मौका मिलेगा, जिससे वे पूरे साल अधिक संगठित तरीके से पढ़ाई करेंगे और परीक्षा के दौरान तनाव कम होगा। 6. छात्रों के मानसिक दबाव को कम करने के प्रयास CBSE के अधिकारियों का मानना है कि इन बदलावों से छात्रों का मानसिक दबाव कम होगा। विकास कुमार अग्रवाल ने कहा कि छात्रों के लिए एक अधिक संतुलित और समान्य अध्ययन प्रणाली विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस प्रणाली के तहत, छात्रों को केवल अंतिम परीक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की बजाय पूरे साल अपने प्रदर्शन पर ध्यान देने का अवसर मिलेगा। इससे उनके मानसिक दबाव में कमी आएगी और वे बिना तनाव के बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे।  7. उत्साहवर्धक कदम छात्रों के लिए इन बदलावों से छात्रों को न केवल परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा, बल्कि यह कदम उनकी अकादमिक जीवन को भी अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में मदद करेगा। बोर्ड परीक्षा की तनावपूर्ण प्रक्रिया को कम करने के साथ-साथ, यह छात्रों को अधिक आत्मविश्वास और बेहतर लर्निंग अनुभव प्रदान करेगा। CBSE के इन नए बदलावों से 10वीं और 12वीं के छात्रों को एक नई दिशा मिलेगी। अब छात्रों को रटने की बजाय विषयों को समझने और सीखने का ज्यादा मौका मिलेगा, जिससे उनका शैक्षिक विकास होगा। साथ ही, डिजिटल असेसमेंट और ओपन बुक परीक्षा जैसे कदम परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और लचीलापन बढ़ाएंगे। इन बदलावों का उद्देश्य छात्रों के मानसिक दबाव को कम करते हुए, उन्हें एक अधिक संतुलित और व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करना है। यह बदलाव शिक्षा व्यवस्था में एक नया सुधार लेकर आएंगे, जो छात्रों के लिए फायदेमंद साबित होगा और भारतीय शिक्षा के भविष्य को और बेहतर बनाएगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 2025 से लागू होने वाले ये बदलाव छात्रों और शिक्षा प्रणाली पर किस प्रकार के प्रभाव डालते हैं।

कांदा एक्सप्रेस : नासिक से दिल्ली 1333 टन प्याज लायी मालगाड़ी, अब मिलेगी राहत

नई दिल्ली  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर में अब प्याज की कीमतें कम हो सकेंगी। जी हां, इन इलाकों में प्याज की सप्लाई बढ़ सके, इसके लिए नासिक से पिछले दिनों ही एक विशेष एक्सप्रेस ट्रेन चली थी। यह ट्रेन कल यानी बुधवार को ही दिल्ली के किशनगंज रेलवे स्टेशन पर पहुंच चुकी है। इस ट्रेन में 1333 टन प्याज है। इसे यदि ट्रक से मंगाया जाता तो कम से कम 56 ट्रक में लाना होता। कीमतें होंगी स्थिर आजादपुर मंडी के प्याज कारोबारियों का कहना है कि एक मालगाड़ी प्याज आने से अब इसकी कीमतें स्थिर होंगी। दरअसल एक मल्टी एक्सल ट्रक में करीब 25 टन प्याज आता है। ट्रक से प्याज मंगाने पर रेलगाड़ी के मुकाबले ज्यादा समय लगता है। वहीं मालगाड़ी में एक साथ 1333 टन प्याज आ गया। इसे यदि ट्रक से मंगाया जाता तो 56 ट्रक में लाने पड़ते। प्याज लाने में खर्च भी कम लगा केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के एक अधिकारी का कहना है कि यिद ट्रक से इतना प्याज मंगाना पड़ता तो 56 ट्रकों का किराया ही 84 लाख रुपये पड़ता। लेकिन रेलगाड़ी से मंगाने पर रेलवे को 70 लाख 20 हजार रुपये का किराया चुकाना पड़ा। मतलब कि करीब 14 लाख रुपये की बचत। इससे प्याज खुले बाजार में सस्ती बिकेगी। एक और मालगाड़ी की लोडिंग चल रही है रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि मालगाड़ी से इतने बड़े पैमाने पर प्याज की ढुलाई से दिल्ली में प्याज की उपलब्धता में वृद्धि होगी। इस पहल से प्याज़ की आवक बढ़ेगी और मंडियो मे प्याज़ की खुदरा मूल्य स्थिर होंगी । उन्होंने बताया कि इस समय नासिक में एक और मालगाड़ी में प्याज लोड की जा रही है। उस रैक में 1400 टन प्याज लोड किया जाएगा। यह प्याज भी अगले कुछ दिनों में दिल्ली पहुंच जाएगी। केंद्र सरकार के पास है पौने पांच लाख टन प्याज प्याज की बढ़ती कीमतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस साल प्याज का 4.7 लाख टन बफर स्टॉक बनाया है। इसी में से प्याज दिल्ली समेत देश के विभिन्न शहरों में भेजा जा रहा है। अभी तक बफर स्टॉक से प्याज गुजरात, कर्नाटक, गोवा, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश और मणिपुर भेजा जा चुका है। बफर स्टॉक के लिए जो प्याज की खरीद की गई है, उसकी औसत खरीद मूल्य 28 रुपये किलो है। खुले बाजार में महंगी बिक रही है प्याज इस समय दिल्ली के खुले बाजार में प्याज की कीमत 70 से 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इस वजह से लोगों का खाना बेस्वाद हो गया है। अब जबकि मालगाड़ी भर कर प्याज दिल्ली आ गई है तो माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में इसकी कीमतें स्टेबल हो जाएंगी।

इस वर्ष पड़ेगी कड़ाके की ठंड, IMD की भविष्याणी ने बढ़ा दी टेंशन, ला नीना के एक्टिव होने की संभावना

नई दिल्ली भारत में इस साल ठंड के तेवर कैसे रहेंगे इसको लेकर मौसम विभाग की चेतावनी आ गई है। आईएमडी के मुताबिक इस साल देश में कड़ाके की ठंड पड़ने के आसार हैं। इसके मुताबिक इस दौरान हालात बहुत चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। मौसम विभाग के मुताबिक हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में सर्दी काफी ज्यादा सता सकती है। गौरतलब है कि मौसम ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। उत्तर भारत के शहरों में सुबह धुंध की चादर में लिपटी नजर आ रही है। इसके अलावा दिन और रात के तापमान में ठीक-ठाक अंतर महसूस होने लगा है। क्यों कहा जा रहा कि पड़ेगी कड़ाके की ठंड इसकी वजह है अक्टूबर-नवंबर के दौरान ला नीना के एक्टिव होने की संभावना। IMD के अनुसार अक्टूबर-नवंबर में ला नीना की स्थिति बनने की 71% संभावना है। हालांकि मौसम विभाग का यह भी कहना है कि ठंड कितनी पड़ेगी इसका सटीक पूर्वानुमान नवंबर में ही लग पाएगा। ला नीना के इसी महीने एक्टिव होने पर दिसंबर और जनवरी के महीने में कड़ाके की ठंड पड़ सकती है। ला नीना की वजह से आमतौर पर तापमान में गिरावट आती है। सर्दियों में भी इसकी वजह से अधिक बारिश होती है। ला नीना का प्रभाव कितना ला नीना के दौरान पूर्वी हवाएं समुद्र के पानी को पश्चिम की ओर धकेलती हैं। इस वजह से समुद्र की सतह ठंडी हो जाती है। आईएमडी के अनुमान के मुताबिक ला नीना अक्टूबर और नवंबर के बीच एक्टिव होने की संभावना 71 प्रतिशत है। IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र के अनुसार अक्टूबर-नवंबर में ला नीना की स्थिति बनने की 71% संभावना है। जब ला नीना होता है, तो उत्तर भारत, खासकर उत्तर-पश्चिमी भारत और आसपास के मध्य क्षेत्र में तापमान सामान्य से कम हो जाता है। क्यों पड़ेगी अधिक ठंड मौसम विभाग के मुताबिक भारत में अधिक ठंड का संबंध ला-नीना से है। ला-नीना मौसम की एक खास अवस्था है। अगर ला-नीना बनता है तो भारत के उत्तरी, उत्तर-पश्चिमी और दिल्ली-एनसीआर समेत मध्य क्षेत्र में आमतौर पर ठंड का प्रकोप देखने को मिलता है। हालांकि ला-नीना का पूरा प्रभाव आने वाले महीने में समझ में आएगा। क्या है ला-नीना स्पेनिश में ला-नीना का मतलब होता है छोटी लड़की, यह अल-नीनो का उलटा होता है। जब ला-नीना बनता है तो यह काफी ज्यादा ठंड ले आता है। यह प्रशांत महासागर की सतह पर ठंड को बढ़ाता है। इस दौरान बारिश खूब होती है और तापमान में कमी आती है। ला-नीना विभिन्न वैश्विक जलवायु परिवर्तनों से जुड़ा हुआ है। जैसे-अटलांटिक में अधिक तूफान, दक्षिण अमेरिका में सूखा, और दक्षिण पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया में गीला मौसम। यह अप्रैल और जून के बीच शुरू होता है, अक्टूबर से फरवरी तक मजबूत होता है। यह 9 महीने से लेकर 2 साल तक कहीं भी रह सकता है। भारत पर कितना असर सितंबर में आईएमडी ने भविष्यवाणी की थी कि ला नीना के चलते भारत में कड़ाके की सर्दी पड़ सकती है। यह उम्मीद की जाती है कि उत्तरी क्षेत्रों, विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू और कश्मीर को ठंड के तापमान का सामना करना पड़ेगा, जो संभावित रूप से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। तेज बरसात के साथ खतरनाक ठंड सर्दियों की फसल को भी नुकसान पहुंचा सकती है। फिलहाल भारत में फॉग शुरू हो चुका है। उत्तरी भारत, जिसमें जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में सुबह धुंध भरी हो रही है। इसके अलावा आने वाले कुछ दिनों में देश के उत्तर और मध्य हिस्सों में मिनिमम टेम्प्रेचर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वहीं, अगले दो दिन में पूर्वी भारत में तापमान में तीन से चार डिग्री की गिरावट आ सकती है। वहीं, अगले कुछ दिन के अंदर तापमान में काफी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

सर्दियों में जंगल सफारी: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में प्रकृति और वन्यजीवों का अद्भुत संगम

Jungle Safari in Winter: Amazing confluence of nature and wildlife in Bandhavgarh Tiger Reserve Kanha and Bandhavgarh tiger reserve घने वन के बीच घास के लंबे-लंबे मैदान और वन्य जीवों की गतिविधियों के बीच सर्दी के मौसम में जंगल सफारी का आनंद अलग है। अगर आप भी इस सर्दी के मौसम में प्रकृति के निकट कुछ समय व्यतीत करना चाहते हैं तो टाइगर स्टेट कहे जाने वाले मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ कान्हा पेंच और संजय दुबरी टाइगर रिजर्व स्वागत को तैयार हैं। उमरिया। Kanha and Bandhavgarh tiger reserve ऊंचे-ऊंचे साल के वृक्षों के बीच से होकर धरती को चूमती सूर्य रश्मियां, पक्षियों के कलरव, कुलांचे मारते हिरणों के झुंड और उन्मुक्त विचरण करते बाघ। घने वन के बीच घास के लंबे-लंबे मैदान और वन्य जीवों की गतिविधियों के बीच सर्दी के मौसम में जंगल सफारी का आनंद अलग है।अगर आप भी इस सर्दी के मौसम में प्रकृति के निकट कुछ समय व्यतीत करना चाहते हैं तो टाइगर स्टेट कहे जाने वाले मध्य प्रदेश के बांधवगढ़, कान्हा, पेंच और संजय दुबरी टाइगर रिजर्व स्वागत को तैयार हैं।पर्यटकों से संकोच नहीं करते बजरंग और छोटा भीमटाइगर स्टेट में सर्वाधिक बाघों की संख्या वाला बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व है। 165 बाघों वाले इस राष्ट्रीय उद्यान में बजरंग और छोटा भीम नाम के बाघ लोगों को सर्वाधिक आकर्षित करते हैं। यह दोनों पर्यटकों के समक्ष आने में संकोच नहीं करते। बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान पहुंचने वाले पर्यटक एक ही दिन में कम से कम दो टाइगर रिजर्व की सफारी कर सकते हैं। बांधवगढ़ में सुबह की सफारी करने के बाद पर्यटक कान्हा टाइगर रिजर्व, संजय धुबरी टाइगर रिजर्व अथवा मुकुंदपुर टाइगर सफारी का भ्रमण आसानी से कर सकते हैं। इन सभी स्थानों की दूरी चंद घंटों की है। टाइगर स्टेट के टाइगर रिजर्व की बुकिंग के आंकड़ों के अनुसार दिसम्बर के दूसरे पखवाड़ा से जनवरी के पहले पखवाड़ा तक एक लाख से ज्याद पर्यटकों के पहुंचने की संभावना है। अन्य प्रमुख स्थल बांधवगढ़ से कान्हा की दूरी महज 210 किलोमीटर है और सड़क बेहद शानदार है। पर्यटक रास्ते में पड़ने वाले घुघुवा जीवाश्म पार्क का भ्रमण भी कर सकते हैं। बांधवगढ़ आने वाले पर्यटक मुकुंदपुर टाइगर सफारी इसलिए जाना चाहते हैं क्योंकि उन्हें वहां सफेद बाघ की सतवीं-आठवीं पीढ़ी के दर्शन सुगम होते हैं। यहां से 129 किमी की दूरी पर मुकुंदपुर टाइगर सफारी तथा 84 किमी की दूरी पर संजय धुबरी टाइगर रिजर्व है। इस तरह पहुंचे कान्हा, बांधवगढ़, पेंच और दुबरी टाइगर रिजर्व तक पहुंचने के लिए जबलपुर केंद्र बिंदु है। जबलपुर हवाई अड्डे से सभी प्रमुख शहरों की कनेक्टिवटी है। जबलपुर और कटनी रेलवे स्टेशन से भी पर्यटक बांधवगढ़ पहुंच सकते हैं इसके लिए उमरिया स्टेशन उतरना होता है। कान्हा नेशनल पार्क जबलपुर से 160 किमी तथा पेंच पार्क 170 किमी दूर है। वहीं संजय दुबरी टाइगर रिजर्व जबलपुर से 350 किमी की दूरी पर है। ठहरने की व्यवस्था बांधवगढ़, पेंच, कान्हा और संजय दुबरी में रुकने के लिए अच्छे होटल और सर्वसुविधा संपन्न होम स्टे सुविधा है। यहां मध्य प्रदेश टूरिज्म कार्पोरेशन के गेस्ट हाउस भी पर्यटकों की अच्छी आवभगत करता है।

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत फिलहाल श्रृंखला में 2-1 से आगे, आज होगा श्रृंखला जीतने पर फोकस

जोहानिसबर्ग दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शुक्रवार को निर्णायक चौथा टी20 मैच और श्रृंखला जीतने की कोशिश में जुटी भारतीय टीम के लिये रिंकू सिंह का बल्लेबाजी क्रम और खराब फॉर्म चिंता का सबब होगा। संजू सैमसन और तिलक वर्मा के शतकों के अलावा भारतीय बल्लेबाजों ने प्रभावी प्रदर्शन नहीं किया है। भारत फिलहाल श्रृंखला में 2-1 से आगे है लेकिन 3-1 से जीतने के लिए बल्लेबाजों पर जिम्मेदारी होगी। भारत के लिए वांडरर्स हमेशा से भाग्यशाली रहा है जहां उसने 2007 में पाकिस्तान को हराकर पहला टी20 विश्व कप जीता था। एक साल पहले पिछली टी20 श्रृंखला में कप्तान सूर्यकुमार यादव ने शतक जमाकर टीम को जीत दिलाई थी। सूर्यकुमार की कप्तानी में भारत ने 16 में से 13 मैच जीते हैं और इस बार वह श्रृंखला जीतकर लौटना चाहेंगे। पिछली बार श्रृंखला 1-1 से ड्रॉ रही थी चूंकि एक मैच बारिश की भेंट हो गया था। टी20 क्रिकेट के सबसे आक्रामक बल्लेबाजों में शुमार रिंकू सिंह का फॉर्म भी चिंता का सबब है जो पिछले कुछ महीने से अच्छा नहीं खेल पा रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि छठे या सातवें नंबर पर उतरने से वह सहज होकर खेल नहीं पा रहे हैं। भारत में अगला टी20 विश्व कप 2026 में है और सूर्यकुमार के पास रिंकू में आत्मविश्वास भरकर उनके प्रदर्शन को ढर्रे पर लाने का पूरा समय है। स्पष्टता के अभाव में उनके जैसे हुनरमंद क्रिकेटर को खोने का जोखिम भारतीय टीम नहीं उठा सकती। मौजूदा श्रृंखला में रिंकू दो मैचों में छठे और एक मैच में सातवें नंबर पर उतरे और 28 रन ही बना सके। निचले क्रम पर उतरने से 11, 9 या 8 रन का स्कोर चिंता का विषय नहीं है लेकिन असल चिंता इस बात की है कि इसके लिए उन्होंने कुल 34 गेंदें खेल डाली। आईपीएल के दौरान भी रिंकू को 15 मैचों में कुल 113 गेंद ही खेलने को मिली थी यानी प्रति मैच 7.5 गेंद। एक फिनिशर के तौर पर रिंकू को हर पारी में करीब दस ही गेंद मिल सकती है। इससे शायद उनके आत्मविश्वास पर असर पड़ा है क्योंकि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वह आक्रामक खेलें या सहायक की भूमिका में रहें। रिंकू ने अधिकांश समय पांचवें नंबर पर उतरकर अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन जब संजू सैमसन सलामी बल्लेबाज के तौर पर और तिलक वर्मा तीसरे नंबर पर उतर रहे हैं तो रिंकू को हार्दिक पांड्या से पहले उतारना कठिन है। टीम प्रबंधन को इस मसले का तुरंत हल निकालना होगा। भारत ने अपने 15 में से 12 खिलाड़ियों को पहले तीन मैचों में आजमाया है और अब देखना है कि तेज गेंदबाज यश दयाल या विशाख विजयकुमार को पहला मौका मिलता है या नहीं। संभावित प्लेइंग 11 : भारत : संजू सैमसन (विकेटकीपर), अभिषेक शर्मा, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), तिलक वर्मा, रिंकू सिंह, हार्दिक पंड्या, अक्षर पटेल, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह, विजयकुमार विशाक, रवि बिश्नोई दक्षिण अफ्रीका : एडेन मार्कराम (कप्तान), रयान रिकेलटन, ट्रिस्टन स्टब्स, हेनरिक क्लासेन (विकेटकीपर), डेविड मिलर, पैट्रिक क्रूगर, मार्को जानसन, एंडिले सिमलेन, गेराल्ड कोएत्ज़ी, केशव महाराज, लूथो सिपाम्ला समय : रात 8:30 बजे। कहां देखें मैच टीवी पर : स्पोर्ट्स 18 लाइव स्ट्रीमिंग : जियोसिनेमा ऐप और वेबसाइट पर

गुलाब उद्यान में 15 से 17 नवंबर तक बोनसाई प्रदर्शनी आयोजन

 भोपाल राजधानी में लिंक रोड नंबर एक स्थित गुलाब उद्यान में आज से 17 नवंबर तक बोनसाई प्रदर्शनी आयोजन किया जा रहा है। भोपाल लेक सिटी बोनसाई एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित इस तीन दिवसीय प्रदर्शनी में चार सौ से अधिक बोनसाई पौधों की अनूठी प्रतिकृतियों का प्रदर्शन होगा। 15 नवंबर को शाम चार बजे प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रदेश के खेल व युवा कल्याण, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग करेंगे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह द्वारा की जाएगी। प्रदर्शनी में बोनसाई को लेकर कार्यशाला का भी आयोजन किया जाएगा। प्रदर्शनी 16 और 17 नवंबर को सुबह 11 बजे से रात आठ बजे तक खुली रहेगी। भोजपुर क्लब में आयोजित पत्रकारवार्ता में भोपाल लेक सिटी बोनसाई एसोसिएशन की संस्थापक सदस्य अरुंधति तिवारी ने बताया कि इंडोनेशिया के बोनसाई विशेषज्ञ ययात हिदायत, अधित्य आजी पमुनगकास के साथ ही सौमिक दास नई दिल्ली, अनुपमा वडेचला बेंगलुरु, गोविंद राज हैदराबाद आदि बोनसाई प्रेमियों को इस विधा की बारीकियों से अवगत कराएंगे। भोपाल के 40 साल से ज्यादा समय से बोनसाई से जुड़े लोग इसमें अपने पुराने संग्रह का प्रदर्शन करेंगे। दशकों पुराने पौधे होंगे प्रदर्शित उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी में जैड, मधुकामिनी, फाइकस, बुद्धा पीपल के 50 से 55 साल पुराने पेड़ विशेष रूप से प्रदर्शित होंगे। इन्हें बड़े गमलों में विशेष आकार दिया जाएगा। एसोसिएशन के अध्यक्ष जेएन बिंद्रा ने बताया कि इस दौरान कार्यशालाएं और सत्र भी आयोजित किए जाएंगे, जिसमें प्रतिभागियों को बोनसाई की देखभाल, पेड़ों के आकार को नियंत्रित करने के तरीकों और उन्हें सही आकार में बनाए रखने के लिए टिप्स दिए जाएंगे। बोनसाई कला का इतिहास और विकास विषय पर विशेष सत्र भी रखा गया है।

28 नवंबर तक करा सकते हैं मतदाता सूची में संशोधन, केंद्रों पर बीएलओ कर रहे मतदाता सूची सुधार कार्य

भोपाल  जिले में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने, संशोधन करने के लिए 28 नवंबर तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। मतदाता सूची संशोधन कार्य का निरीक्षण करने के लिए संभागायुक्त संजीव सिंह मतदान केंद्रों पर पहुंचे। उन्होंने बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) से चर्चा की और उन्हें दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद नए मतदाताओं का नाम जोड़ने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा कि अधिक से अधिक युवा मतदाताओं के नाम जोड़े जाएं। इस बात का ध्यान रखें कि किसी भी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में जुड़ने से न छूटे। जिन मतदाताओं की मृत्यु हो गई है या फिर जिला छोड़ दिया है, उनकी जानकारी जुटाकर नाम हटाने की कार्रवाई करें। निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सीईओ ऋतुराज सिंह, संयुक्त कलेक्टर दीपक पांडे, एसडीएम टीटीनगर अर्चना शर्मा सहित अन्य अधिकारी संभागायुक्त के साथ रहे। इन केंद्रों पर पहुंचे संभागायुक्त संभागायुक्त गुरुवार को चार इमली क्षेत्र के मतदान केंद्र 213, 214 और 215 पर पहुंचे और बीएलओ द्वारा किए जा रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण के कार्यों का देखा । इसके साथ ही वह नर्मदा भवन स्थित मतदान केंद्र 203, 204 और 205, तुलसी नगर स्थित शासकीय नवीन कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के मतदान केंद्र 172, 173, 174, 175 और 176 पर भी पहुंचे और निरीक्षण किया। संभागायुक्त ने मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए बीएलओ और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस प्रक्रिया को तय समय सीमा में पूर्ण किया जाए। सूची में सभी पात्र नागरिकों का नाम दर्ज हो, यह सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। जिले में 21 लाख से ज्यादा मतदाता भोपाल जिले में कुल 2029 मतदान केंद्र हैं। वहीं, सात विधानसभा क्षेत्रों में 21 लाख 14 हजार 70 मतदाता हैं। इन मतदाताओं में 10 लाख 85 हजार 470 पुरुष और 10 लाख 28 हजार 432 महिला और 168 अन्य यानी थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। अवकाश के दिनों में लगेंगे शिविर पुनरीक्षण अभियान के तहत 28 नवंबर तक दावे-आपत्ति प्राप्त किए जाएंगे। इस दौरान अवकाश के दिनों में 16 नवंबर, 17 नवंबर दावे-आपत्ति प्राप्त करने के लिए विशेष शिविर का आयोजन किया जाएगा। जिसमें संबंधित बीएलओ अपने-अपने मतदान केंद्रों पर दावा-आपत्ति प्राप्त करेंगे।

राज्य शासन ने 55 लाख हितग्राहियों को 2674 करोड़ 39 लाख रूपये से अधिक की आर्थिक सहायता की प्रदान

भोपाल राज्य शासन द्वारा सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत 55 लाख से अधिक हितग्राहियों को इस वित्तीय वर्ष में 2674 करोड़ 39 लाख रूपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। आयुक्त सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण डॉ. आर.आर. भोंसले ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा समाज के निर्धन, निराश्रित, वृद्धजन, कल्याणी, परित्यक्ता, अविवाहित, दिव्यांगजनों तथा कन्या अभिभावकों को सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत 6 प्रकार की पेंशन योजनाओं के माध्यम से 55 लाख से अधिक हितग्राहियों को प्रति माह 600 रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। डॉ. भौसले ने बताया कि चालू वित्त वर्ष अप्रैल माह में 57 लाख 12 हजार हितग्राहियों को 342 करोड़ 73 लाख, मई माह में 56 लाख 33 हजार हितग्राहियों को 338 करोड़ 2 लाख, जून माह में 55 लाख 29 हजार हितग्राहियों को 381 करोड, जुलाई माह में 55 लाख 16 हजार हितग्राहियों को 330 करोड़ 96 लाख, अगस्त माह में 55 लाख 40 हजार हितग्राहियों को 332 करोड़ 42 लाख, सितम्बर माह में 55 लाख 40 हजार हितग्राहियों को 332 करोड़ 41 लाख रूपये, अक्टूबर माह में 55 लाख 45 हजार हितग्राहियों को 332 करोड़ 71 लाख रूपये तथा नवम्बर माह में 55 लाख 55 हजार हितग्राहियों को 333 करोड़ 32 लाख रूपये की राशि उनके खातों में अंतरित की जा चुकी है।  

सिंहस्थ में एंटी-टेरर स्क्वाड, बम निरोधक दस्ते भी तैनात, श्रद्धालुओं की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी

 उज्जैन  में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ के शांतिपूर्ण आयोजन के लिए अन्य विभागों के साथ-साथ पुलिस ने भी अपनी तैयारियां प्रारंभ दी हैं। पुलिस महानिदेशक सुधीर सक्सेना ने पुलिस मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें निर्देश दिए गए कि विदेश आने वाले पर्यटकों के लिए विशेष दल तैनात किया जाए। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि मेले की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन, और फेस रिकग्निशन तकनीक का उपयोग किया जाए। मेला क्षेत्र में मोबाइल पुलिस चौकियां स्थापित की जाएं। 24 घंटे पुलिस गश्त रहेगी और एंटी-टेरर स्क्वाड तथा बम निरोधक दस्ते को भी तैनात किया जाएं। किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए टीम हर समय तैयार रखें। बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को विशेष प्राथमिकता बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता दी जाए। मेला क्षेत्र को विभिन्न सेक्टर में विभाजित किया जाए और प्रत्येक सेक्टर में एक प्रभारी अधिकारी तैनात होगा, जो सुरक्षा व्यवस्थाओं की निगरानी करेगा। यातायात को नियंत्रित करने के लिए उज्जैन के पास के जिलों को भी शामिल करके विस्तृत योजना बनाई जाए। सिटी बसों के साथ-साथ ई-रिक्शा की भी व्यवस्था की जाएगी। रियल-टाइम ट्रैफिक अपडेट के लिए एक मोबाइल एप्लिकेशन भी उपलब्ध कराया जाना प्रस्तावित है। हेल्पलाइन नंबर भी होगा जारी पुलिस महानिदेशक ने बताया कि पुलिस प्रशासन इस बार श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सहायता के लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी करेगा, जो 24 घंटे सक्रिय रहेगा। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष हेल्पडेस्क और बाल सुरक्षा केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई जाएगी। भीड़ के मूवमेंट का विशेष ध्यान रखें विभिन्न सिंहस्थ के समय सेवा दे चुके सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों को भी अपने अनुभव साझा करने के लिए बैठक में बुलाया गया। सेवानिवृत्त आईपीएस सरबजीत सिंह ने भीड़ के मूवमेंट का विशेष ध्यान के साथ ही टेली कम्यूनिकेशन में नवीन तकनीक का प्रयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया। वहीं, विशेष पुलिस महानिदेशक उपेन्द्र जैन ने बताया कि सभी विभागों से पुलिस का अच्छा समन्वय होना चाहिए। इससे काम काफी आसान हो जाता है। सेवानिवृत्त अधिकारी मनोहर वर्मा ने स्नान घाट की अच्छे से योजना बनाने के साथ यातायात प्रबंधन, महिला और बच्चों की सुरक्षा के लिए उज्जैन के पड़ोसी जिलों को भी कार्ययोजना में शामिल करने का सुझाव दिया।

प्रदेश के मालवा क्षेत्र में जल्द ही रोजगार के नए अवसर खुलने वाले हैं, तीन नए इंडस्ट्रियल एरिया का होगा निर्माण

इंदौर  मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में जल्द ही रोजगार के नए अवसर खुलने वाले हैं। ये तीन नए इंडस्ट्रियल एरिया पीथमपुर, धार और बदनावर में बनने वाले हैं। इससे मालवा क्षेत्र में रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही पीथमपुर में पहले से मौजूद सेक्टरों का भी विकास किया जाएगा। इन प्रोजेक्ट्स के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी डीपीआर भी तैयार की जा रही है। धार जिले में धामनोद के पास जैतापुरा में भी जमीनों का आवंटन लगभग पूरा हो चुका है। इसके अलावा तारापुर और लालबाग-बसवी में भी नए प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। इन जगहों पर जमीन उद्योग विभाग के पास ही है, जिससे प्रोजेक्ट्स शुरू करने में आसानी होगी। पुरानी जमीन का नए सिरे से विकास होगा पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में खाली पड़ी जमीन को भी नए सिरे से विकसित करने की योजना है। अभी तक कुल 1716 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की जा चुकी है। इन्वेस्टर्स समिट से पहले इनसे जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। ऐसा होगा धार इंडस्ट्रियल एरिया धार जिले के तारापुर में करीब 256 हेक्टेयर में नया औद्योगिक क्षेत्र बनाया जाएगा। वहीं लालबाग-बसवी में करीब 216 हेक्टेयर जमीन पर नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित होगा। पीथमपुर इंडस्ट्रियल एरिया पीथमपुर सेक्टर 8 यानि बरदारी में 450 हेक्टेयर और सेक्टर-9 यानि भाटखेड़ी में 538 हेक्टेयर में नए प्रोजेक्ट विकसित किए जाएंगे। इन प्रोजेक्ट्स पर अनुमानित लागत 1000 करोड़ रुपये आएगी। इन प्रोजेक्ट्स से करीब 3500 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। पीथमपुर सेक्टर 6 के फेज-2 का भी विस्तार होगा, जिसके लिए 74.853 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है। इस प्रोजेक्ट पर करीब 80 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इससे करीब 2500 लोगों को रोजगार मिल सकेगा। बदनावर औद्योगिक क्षेत्र बदनावर के भेंसोला में 205 हेक्टेयर में नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 207 करोड़ रुपये है और इससे लगभग 3000 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। माचल में 23.35 हेक्टेयर में एक लॉजिस्टिक पार्क बनाने का प्रस्ताव है, जिसकी लागत करीब 25 करोड़ रुपये आएगी। इस प्रोजेक्ट से करीब 1 हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। एमपीआईडीसी भी कर रही मदद एमपीआईडीसी भी कंपनियों की मदद के लिए तत्परता से काम कर रही है। ताकि उन्हे अपना काम शुरू करने में दिक्कतों का सामना न करना पड़े। इस विषय पर बात करते हुए एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि इंदौर-धार रीजन में पहले से ही कई बड़े इन्वेस्टर अपने प्रोजेक्ट को लेकर जुड़ रहे हैं। उन्हे जमीन से लेकर अन्य चीजों में समस्या न हो इसके लिए काम किया जा रहा है।

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