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वीडियो बनाकर कहा-‘हिंसा खत्म होनी चाहिए’, छत्तीसगढ़-जगदलपुर में नक्सलियों से शांतिवार्ता करने गया जवान लापता

जगदलपुर। नक्सलियों के संगठन में रहकर नक्सलियों के लिए काम करने वाले नक्सली ने आत्मसमर्पण कर पुलिस विभाग में अपनी सेवा देनी शुरू कर दी लेकिन रोजाना हो रहे मुठभेड़ और मारे जा रहे नक्सलियों से शांतिवार्ता करने के लिए नक्सलियों के गढ़ में गया जवान लापता हो गया। जाने से पहले जवान ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर करते हुए नक्सलियों से शांतिवार्ता करने की बात कही है। नक्सलियों से वार्ता करने गया जवान पहले नक्सली था, आत्मसमर्पण के बाद फोर्स में शामिल हो गया था। नारायणपुर जिले से जुड़ने वाली अबूझमाड़ की सीमा में दाखिल होने से पहले जवान ने एक मिनट और कुछ सेकेंड का वीडियो बनाते हुए उसे सोसल मीडिया पर शेयर करते हुए अपनी बात कही है। जवान को गए हुए कई दिन बीत गए हैं, लेकिन अब तक जवान की कोई भी जानकारी पुलिस के हाथ नही लग पाई है। जवान ने जाने से पहले वीडियो बनाते हुए कहा कि नक्सलियों से शांतिवार्ता की पहल करने के लिए जा रहा हूं। नक्सलवाद खत्म हो न हो पर हिंसा खत्म होनी चाहिए। वहीं जवान के गायब होने के बाद से ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा हैं कि जंगल गया जवान नक्सलियों के कब्जे में है, पुलिस जल्द ही जवान की रिहाई की कोशिश करने के लिए नक्सलियों से वार्ता भी करेगी।

बीजेपी बोली-कांग्रेस अब गुंडागर्दी पर उतारू, छत्तीसगढ़-विधानसभा में पत्रकार से धक्कामुक्की और दुर्व्यहार

रायपुर। बीते दिनों हाथ में अंबेडकर की छायाचित्र लेकर संसद के लोकसभा में बवाल काटने वाले कांग्रेसियों ने आज शुक्रवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में एक पत्रकार के साथ जमकर धक्कामुक्की की। इतना ही नहीं उसके साथ अभद्र दुर्व्यहार भी किया गया। हद तो तब हो गई जब कांग्रेस नेताओं ने निचले स्तर की घटिया मानसिकता पर उतर कर दलाली करने तक की बात कह डाली। कांग्रेस नेताओं ने उस पत्रकार को धमकाते हुए कहा कि तुम अपनी औकात में रहो। बताया जाता है कि एक पत्रकार ने पूर्व सीएम भूपेश बघेल से उनके कार्यकाल में हुए कथित भ्रष्टचार को लेकर सवाल कर रहा था। पहले तो कांग्रेस नेता सवाल का जवाब देने से बचते रहे, लेकिन पत्रकार के बार-बार सवाल किये जाने पर तिलमिला गये। पत्रकार की तरफ पलटवार पहुंचे पूर्व सीएम भूपेश ने खुद कहा दिया कि ये क्या बद्तमिजी है। फिर क्या था अन्य कांग्रेस नेताओं को बल मिल गया। राशन-पानी सब लेकर उस पत्रकार पर चढ़ाई कर दिये। सब मिलकर उस पत्रकार पर आग बबूला हो गये और जमकर अपनी भड़ास निकाली। उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। इतना ही नहीं उसका कैमरा भी छीन लिया गया। वह कैमरा वापस करने के लिये गुहार लगाते रहा। सियासी गलियारे में खूब चर्चा है कि पांच साल बाद सत्ता हाथ से चले जाने के बाद कांग्रेस नेता ऐसे ही गुस्से में हैं। दूसरी ओर उनसे इस तरह के सवाल करने पर आग में घी डालने जैसा है। वे बुरी तरह से भड़क जा रहे हैं। बड़ा सवाल ये है कि लोकतंत्र में सवाल-जवाब करने का सबको हक है पर हर किसी व्यक्ति को गरिमा का ख्याल रखकर बात करनी चाहिये। इस मामले में छत्तीसगढ़ बीजेपी के मीडिया इंजार्च अमित चिमनानी के ट्वीट कर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने लिखा कि ‘कल लोकसभा में राहुल गांधी द्वारा भाजपा सांसदों को धक्का ?और आज छ: ग़ विधानसभा में कांग्रेस विधायक मिलकर एक पत्रकार को धक्का मुक्की कर उसकी औकात बताने में तुले है? संविधान हाथ में लेकर घूमने वाले कांग्रेसी बताएंगे ,क्या ये संवैधानिक है? अब कांग्रेस क्या गुंडागर्दी ही करेगी?’ “””कल लोकसभा में राहुल गांधी द्वारा भाजपा सांसदों को धक्का ?और आज छ: ग़ विधानसभा में कांग्रेस विधायक मिलकर एक पत्रकार को धक्का मुक्की कर उसकी औकात बताने में तुले है?संविधान हाथ में लेकर घूमने वाले कांग्रेसी बताएंगे ,क्या ये संवैधानिक है?अब कांग्रेस क्या गुंडागर्दी ही करेगी?”” — CA AMIT CHIMNANI (@caamitchimnani) December 20, 2024

आदेश जारी, छत्तीसगढ़- केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे आईएएस सुबोध कुमार सिंह बने मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव

छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल किया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) 1997 बैंच के ऑफिसर सुबोध कुमार सिंह को मुख्यमंत्री सचिवालय में प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। सिंह पिछले पांच साल से डेपुटेशन पर दिल्ली में कार्यरत थे। केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस लौटने के बाद इस पद पर पदस्थ किया गया है। सुबोध कुमार सिंह भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1997 बैच के अफसर हैं। वो छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईएएस हैं। रायपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में कलेक्टर रह चुके हैं। हाल ही में केंद्र सरकार में स्टील मिनिस्ट्री में एडिशनल सेक्रेटरी और वित्तीय सलाहकार के पद पर थे। राज्य सरकार के अनुरोध पर वो केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस छत्तीसगढ़ लौटे हैं।

सड़क निर्माण कार्य की सुरक्षा में लगे थे, छत्तीसगढ़-नारायणपुर में आईईडी ब्लास्ट में दो जवान घायल

नारायणपुर. नारायणपुर में नक्सलियों द्वारा लगाई आईईडी ब्लास्ट में दो जवान घायल होने की खबर है। बताया जा रहा है कि जवान कच्चपाल से तोके सड़क निर्माण कार्य की सुरक्षा में लगे थे। घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल नारायणपुर लाया गया है। कोहकामेटा थाना इलाके की घटना है। एसपी प्रभात कुमार ने इसकी पुष्टी की है। जानकारी के मुताबिक, नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ के कच्चापाल में पुलिस ने बेस कैंप दो दिन पूर्व खोला था और कैंप तक पहुंच मार्ग बनाने में डीआरजी के जवान लगे हुए थे। इसी बीच नक्सलियों ने आईईडी बम लगा दिया, सड़क निर्माण की सुरक्षा में लगे जवान इसकी चपेट में आ गए। जिसमें दो जवान घायल हो गए। एक जवान के पैर में गंभीर चोट आई है। जिन्हें कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच नारायणपुर जिला अस्पताल में लाया गया। जहां जवानों को प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है, जिसके बाद बेहतर इलाज के लिए बाहर भेजा जाएगा । घटना की पुष्टि एसपी प्रभात कुमार ने की है। घायल जवानों के नाम घासीराम और जनक पटेल है।

नई उम्मीदें और नए अवसर लेकर आता है नया साल

नया साल हर व्यक्ति के जीवन में नई खुशियां, नई उम्मीद और नए सपने लेकर आता है। उम्मीदों का यह कारवां हर साल बनता और बिगड़ता है। यह वह समय होता है, जब हर व्यक्ति अपनी पुरानी गलतियों से सीख लेकर नए साल में सफलता हासिल करने के लिए अपने लिए कुछ अलग न्यू ईयर रेजोल्यूशन बनाने की कोशिश करता है। अगर आप भी चाहते हैं कि आने वाले नए साल में आपका सामना कभी भी निराशा से ना हो तो ये न्यू ईयर रेजोल्यूशन आइडियाज आपकी मदद कर सकते हैं। डिजिटल डिटॉक्स इस साल के रेजोल्यूशन में खुद से यह वादा करें कि आप दिनभर में कुछ तय घंटे अपने स्मार्टफोन से दूर रहेंगे। अपने दिनभर के सभी जरूरी काम निपटाने के बाद थोड़ा समय किताबों और अपनी हॉबी को दें। जरूरत से ज्यादा फोन यूज करने से मानसिक थकावट के साथ कई तरह की बीमारियां भी घेर सकती हैं। बचत इस साल फिजूलखर्ची को छोड़कर अपनी आय और खर्चों का हिसाब रखने की कोशिश करें। अगर आपको बचत की आदत नहीं है तो इस नए साल उसे प्राथमिकता देते हुए हर महीने अपनी आय का एक हिस्सा बचत के लिए अलग रख दें। यात्रा घर से ऑफिस और ऑफिस से घर के अपने रूटीन को बदलकर, इस साल नई जगहों को एक्सप्लोर करने का नियम बनाएं। अलग-अलग जगह की यात्रा करने से ना सिर्फ आपका मूड अच्छा बना रहता है बल्कि आपको नई संस्कृति और परंपराओं के बारे में जानकारी मिलती है। पॉजिटिव बने रहे नए साल में नेगेटिव सोच को छोड़कर खुद को पॉजिटिव बनाए रखने का प्रयास करें। हर परिस्थिति या विचार का सकारात्मक पहलू देखने की भी कोशिश करें। जब भी नेगेटिव विचार आएं, तो खुद को व्यस्त रखने की कोशिश करें। परिवार के साथ समय बिताएं भागदौड़ भरी जिंदगी में आज व्यक्ति के पास अपने परिवार को देने के लिए भी उचित समय नहीं है। जिसकी वजह से लोगों के बीच दूरियां आने लगती हैं। ऐसे में इस साल अपने करियर के साथ परिवार को भी साथ लेकर चलें। ऐसा करने से ना सिर्फ आपका परिवार और दोस्त बल्कि आप खुद भी खुश रहने लगेंगे। याद रखें एक प्रसन्न मन ही सफलता की नींव रख सकता है। खुद के लिए समय निकालें इस साल परिवार, ऑफिस और बच्चों के साथ खुद के लिए भी थोड़ा सा समय निकालने की कोशिश करें। अपने इस मी-टाइम के दौरान खुद को बेहतर बनाने के तरीकों के बारे में सोचें। अगर आप अपने पेंटिंग, डांसिंग, सिंगिंग, गार्डनिंग जैसे शौक भूल चुके हैं तो इस साल एक बार फिर उन्हें दोबारा याद करके जिंदा करने की कोशिश करें। आपकी ये कोशिश आपके मन को खुशी और संतोष से भर देगी। योग का लें संकल्प अपने दिन की शुरुआत योग और ध्यान के साथ करने का संकल्प लें। सुबह-सुबह योग और ध्यान करने से शरीर में दिन भर ऊर्जा बनी रहने के साथ दिमागी सेहत भी अच्छी बनी रहती है। जिससे व्यक्ति किसी भी काम को करने में आलस महसूस नहीं करता है।

सोमवती अमावस्या पर दीपक जलाने से मिलेगी मां लक्ष्मी की कृपा

हिंदू धर्म मे पूर्णिमा और अमावस्या तिथि को बहुत महत्व दिया जाता है. सोमवार के दिन अमावस्या तिथि होने पर उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं. इस दिन व्रत, पूजन और स्नान-दान का विशेष महत्व है. इस दिन स्नान और दान के साथ पितृ पूजा भी की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसके अलावा ग्रह दोष और पितृ दोष आदि से भी छुटकारा मिलता है. इसके अलावा सोमवती अमावस्या को कुछ विशेष स्थानों पर दीपक जलाने से पितर प्रसन्न होता है साथ ही मां लक्ष्मी की हमेशा कृपा बनी रहती है. कब है सोमवती अमावस्या? साल की आखिरी सोमवती अमावस्या तिथि 30 दिसंबर सोमवार को है. उस दिन पौष अमावस्या होगी. तीसरी सोमवती अमावस्या 30 दिसंबर को सुबह 04 बजकर 01 से लेकर 31 दिसंबर को सुबह 03 बजकर 56 मिनट तक है. यहां जलाएं दीपक सोमवती अमावस्या पर पितरों को प्रसन्न करने के लिए तर्पण और पिंडदान किया जाता है. ऐसे में इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए. क्योकि यह पितरों की दिशा मानी जाती है, तो ऐसा करने से पितर प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं. पीपल का पेड़ अमावस्या तिथि पर पीपल के पेड़ की पूजा करना शुभ फलदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार पीपल के पेड़ पर देवी-देवताओं के साथ पितरों का भी वास होता है. इसलिए सोमवती अमावस्या पर पीपल के पेड़ के पास सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाने से शुभ फलों के प्राप्ति होती है. घर के मुख्य द्वार पर वैसे तो लोग रोजाना घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाते हैं. लेकिन सोमवती अमावस्या के दिन मुख्य द्वार पर सरसों या तिल के तेल का दीपक जरूर लगाना चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं. जिससे घर में सकारात्मकता ऊर्जा आती है. इसके अलावा व्यक्ति को आर्थिक तंगी से भी छुटकारा मिलता है.

जंगल घूमने ले जाकर की हत्या, छत्तीसगढ़-कोरबा में पत्नी को बेरहमी से पीटकर घाटी में फेंका

कोरबा। कोरबा के बांगो थाना अंतर्गत पतोड़ियाडांड निवासी 28 वर्षीय विशाल आरमो और 24 वर्षीय उसकी पत्नी गनपति अपने 3 साल के लड़के और ढाई माह की बच्ची के साथ पैदल गांव से लगे अरसिया गांव के जंगल घूमने गए हुए थे। जहां घूमने के बाद शाम होने से पहले घर वापस लौट रहे थे। गनपति बाई घाटी चढ़ते समय थक गई थी, वो चल नहीं पा रही थी। इस बीच विशाल आरमो को गुस्सा आ गया और अपनी पत्नी गनपति को मुक्का से मारपीट करने लगा डर में वो फिर से चलने लगी। थोड़ी दूर चलने के बाद वो फिर थककर बैठ गई, उसके पति विशाल को फिर गुस्सा आया और उसने डंटे और मुक्के से बेरहमी जमकर पिटाई कर दी और उसे घाटी में फेंक दिया। उसके बाद दोनों बच्चों को लेकर घर चला आया। और घर वालों को बताया कि वह घाटी में अचानक गिर गई। रात में मृतका घाटी में ही पड़ी रही। इसकी सूचना उसने बांगो थाना पुलिस को मौके पर पहुंचे। जांच की गई तो गनपति की मौत हो चुकी थी।  मृतका के पिता को उसके दामाद पर शक हुआ। वही आरोपी पति से जब पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की तो उसने अपना गुनाह कबूल किया। बताया जा रहा है कि आरोपी विशाल शराब के नशे में था और उसने अपनी पत्नी को लात-डंडे और मुक्के से बेरहमी से पिटा था।  बताया जा रहा है कि विशाल आरमो शराब पीने की आदत थी, उसकी पहली पत्नी भी इसके हरकतों के चलते इसे छोड़कर भाग गई है विशाल मृतिका गनपति बाई से दूसरी शादी की थी।

इंदौर में होगी आईटी समिट, नेहरू स्टेडियम का होगा पुनर्निर्माण :मुख्यमंत्री डॉ. यादव

नदी जोड़ो परियोजनाएं प्रदेश में विकास की लिखेगी नयी इबारत:मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर को हर क्षेत्र में बनाया जायेगा नम्बर-वन इंदौर में होगी आईटी समिट, नेहरू स्टेडियम का होगा पुनर्निर्माण नगर निगम का बनेगा नया भव्य भवन मुख्यमंत्री ने इंदौर को दी 1249 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंदौर, माँ देवी अहिल्या की नगरी है, जो विकास का पर्याय रहीं है। उनके कार्यकाल में देव स्थानों का पूरे देश में अद्भुत विकास हुआ है। इंदौर वर्तमान में देश का सबसे स्वच्छ शहर है। यह आईटी, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्मार्ट सिटी के कार्यों आदि में देश में भी अव्वल है। अब इंदौर को हर क्षेत्र में अव्वल बनाने के कार्य तेजी से होंगे। इंदौर का संर्वागीण विकास कर इंदौर को देश के प्रमुख महानगरों के समकक्ष खड़ा किया जायेगा। उन्होंने कहा कि इंदौर के नेहरू स्टेडियम का पुनर्निर्माण किया जायेगा। यहाँ आईटी के विकास की अपार संभावनाएं है, इसको देखते हुए इंदौर में जल्द ही आईटी समिट आयोजित की जायेगी। इंदौर नगर निगम का नया भव्य भवन भी बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को इंदौर में जनकल्याण पर्व के तहत आयोजित लोकार्पण एवं भूमि-पूजन समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर के लिये 1249 करोड़ रूपये से अधिक की लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि नदी जोड़ो परियोजना प्रदेश में विकास की नयी इबारत लिखेंगी। मध्यप्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य है जहां 2 नदी जोड़ो परियोजनाओं पर एक साथ कार्य हो रहा है। यह परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मूर्तरूप ले रही हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से नदियों को आपस में जोड़कर पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों को साकार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर में हो रहे विकास की सराहना करते हुए कहा कि इंदौर को अब हर क्षेत्र में नम्बर-वन बनाया जायेगा। इंदौर को देश के प्रमुख महानगरों की तरह विकसित किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर का स्मरण करते हुए कहा कि उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। वे हमेशा से सम्मानीय है। उनका सम्मान हमेशा कायम रहेगा। बाबा साहेब की स्मृतियों को चिरस्थाई बनाने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिये पंच तीर्थ विकसित किये गये है। उनके जीवन से जुड़े 5 प्रमुख स्थलों को तीर्थ-स्थल का दर्जा दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनकल्याण पर्व और मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान में की जा रही गतिविधियों की जानकारी देते हुए नागरिकों से उनका लाभ लेने का आहवान किया। उन्होंने बताया कि जनकल्याण अभियान के माध्यम से शासन की 76 योजनाओं और सेवाओं का लाभ आमजन तक घर-घर जाकर पहुंचाया जा रहा है। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव हमारे इंदौर जिले के प्रभारी भी है। उनके नेतृत्व में इंदौर शहर हर क्षेत्र में नंबर वन होगा। सफाई में नंबर वन है, जल-संरक्षण में हम नंबर वन है। अब पर्यावरण में भी इंदौर को नंबर वन बनाने के प्रयास शुरू किये गये है। इंदौर में 51 लाख पौधे लगाये गये है। साथ ही यह संकल्प भी लिया गया है कि आगामी 5 साल तक हर साल 51 लाख पौधें लगाये जायेंगे। हम सब मिलकर प्रयास करेंगे कि शहर के तापमान को 5 डिग्री तक कम करें। उन्होंने कहा कि इंदौर को ट्रैफिक समस्या से भी निजात दिलाने के लिए प्लानिंग की जा रही है। इंदौर के ट्रैफिक में सुधार कर नंबर वन बनायेंगे। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि इंदौर जो भी करता है अद्भुत करता है। इंदौर में यह पहली बार हो रहा जब एक ही दिन में एक साथ मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा 1249 करोड़ रूपये के विकास की सौगात दी गई है। इंदौर, विकास का मॉडल बन गया है। यहां विकास एवं प्रगति की नयी बुनियाद रखी जा रही है। नदी जोड़ो परियोजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में अब सिचाई और पेयजल की सुविधा में आशातित वृद्धि होगी। इन परियेाजनाओं को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मूर्तरूप देकर पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेई के संकल्पों को पूरा किया जा रहा है। कार्यक्रम में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने स्वागत भाषण देते हुए इंदौर शहर के विकास के लिये किये जा रहे कार्यों की जानकारी दी। सांसद शंकर लालवानी, विधायक रमेश मेंदोला, श्रीमती मालिनी गौड़, महेन्द्र हार्डिया, मनोज पटेल, गोलू शुक्ला, मधु वर्मा, अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के अध्यक्ष सावन सोनकर, सफाई कामगार आयोग के अध्यक्ष प्रताप करोसिया, गौरव रणदिवे, चिंटू वर्मा, नगर निगम के सभापति मुन्नालाल यादव सहित महापौर परिषद के सदस्य, पार्षदगण व बडी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। इंदौर को मिली 1249 करोड़ रूपये के विकास कार्यों की सौगात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर को 1249 करोड़ रूपये लागत के विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने इंदौर शहर में 511.12 करोड़ रूपये लागत के एसटीपी निर्माण एवं सीवर लाइन डालने के कार्य का भूमि-पूजन किया। साथ ही इंदौर शहर में 442 करोड़ रूपये लागत से बनने वाली मास्टर प्लान की 22 नवीन सड़कों, 43 करोड़ रूपये लागत से बनने वाली एमआर-10 से एमआर-12 लिंक रोड़ विकास कार्य, लगभग 8 करोड़ रूपये लागत से बनने वाले कस्तूरबा गार्डन के पीछे स्पोटर्स कॉम्पलेक्स, प्रतीक सेतु के नीचे 1.20 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाले शहीद स्मारक, वार्ड क्रमांक-34 में 1.15 करोड़ रूपये लागत के चौराहे के सौंदर्यीकरण एवं चौड़ीकरण कार्य का भूमिपूजन किया। उन्होंने 21 करोड़ रूपये लागत के नवीन जल वितरण पाइप लाइन, 5.50 करोड़ रूपये लागत के स्मार्ट सिटी एबीडी एरिये में नवीन सीवर लाइन और 100 टन क्षमता के ग्रीन वेस्ट प्लांट सहित शहर के विकास से जुड़े अनेक विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगर निगम इंदौर के डॉक्युमेंट डिजिटाइजेशन का लोकार्पण कर विभिन्न शासकीय योजनाओं में चयनित हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किये।  

विश्व ध्यान दिवस 21 दिसम्बर-2024 का हुआ आयोजन ।

World Meditation Day was organized on 21 December-2024. हरिप्रसाद गोहेआमला । डॉ भीमराव अम्बेडकर शासकीय महाविद्यालय आमला में डॉ सुजाता सिंग, स्वामी कविराज ओशो केन्द्र आमला आचार्य उमेश चौकीकर, योगाचार्य भूपेन्द्र माथनकर, डॉली सोनी एवं मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद कि विकास खण्ड आमला के समन्वयक अरविंद माथन कर रवि सोनपूरे के अतिथ्य एवं महाविद्यालय प्राचार्य प्रो गुलाबराव डोंगरे की अध्यक्षता में विश्व ध्यान दिवस के अवसर पर व्याख्यान एवं ध्यान सत्रकी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ सुजाता सिंग ने ध्यान लगाने से मानव तन, मन, व्यवहार पर सकारात्मक प्रभाव पूर्वक वर्णन दिया । योगाचार्य उमेश चौकीकर ने सहन तरीके ध्यान लगाने की विपश्यना विधि का वर्णन करते हुए उपस्थित सभी विद्यार्थियों से ध्यान लगाव लगाकर ध्यान लगाने का अभ्यास करवाया । योगाचार्य भूपेन्द्र माथनकर ने श्वास पर नियंत्रण रखकर ध्यान पर लगाने के विषय पर विचार व्यक्त किये। स्वामी कविराज ने उपस्थित विधार्थि से एवं अतिथियों से ध्यान एवं योग आभ्यास करवाया। अरविन्द मायनकर ने विश्व ध्यान दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कार्यक्रम को सम्बोधित किया। प्राचार्य प्रो गुलाबराव डोंगरे ने ध्यान के माध्यम से तनाव एवं अवसाद मुक्त होकार अपने व्यक्तित्व को सवारने के लिये प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन डा. राजेन्द्र गिरि गोस्वामी ने किया तथा कार्यक्रम प्रभारी जे. लोकेश झरबडे में उपस्थित सभी अतिथीयो के प्रति आभार व्यक्त किया इस अवसर की डॉ. जगदेश पटैया डॉ. पंचम सिंह कवड़े, सतीश बागडे डो. उमेश डोंगरे डॉ. रामेश आर्य डा ज्योति दातीर, डॉ आलम, प्रो अनिता मानकर प्रो देविका देशमुख, शीला दवांडे यश्वी कहर अभय रवि भटकर दीपक कार्ले, हजारीलाल मन मैं सजीत भारती, महेन्द्र सिंघले सहित बहुसंख्यक विद्यार्थी उपस्थित रहे।

केन्द्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत को बढ़ाया जाये – उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में लाने के लिए म.प्र. प्रतिबद्ध – उप मुख्यमंत्री देवड़ा सिंहस्थ महापर्व आयोजन के लिए प्रावधान का अनुरोध – उप मुख्यमंत्री देवड़ा केन्द्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत को बढ़ाया जाये – उप मुख्यमंत्री देवड़ा केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमन की अध्यक्षता में राज्यों के साथ हुई प्री-बजट मीटिंग भोपाल उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत को समग्र रूप से विकसित करने तथा विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी में लाने के लिए समर्पित और प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में कुशल वित्तीय प्रबंधन के परिणामस्वरूप प्रदेश राजस्व आधिक्य की स्थिति में है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने उज्जैन में 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व की चर्चा करते हुए प्रदेश सरकार द्वारा सिंहस्थ क्षेत्र में सुनियोजित रूप से विकास व जन-सुविधाओं की व्यापक व्यवस्था के लिए आगामी बजट में ‘सिंहस्थ’ आयोजन के लिए विशेष प्रावधान का अनुरोध किया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन की अध्यक्षता में शुक्रवार को राजस्थान के जैसलमेर में राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों के साथ हुई प्री-बजट मीटिंग में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि विशेष पूंजीगत सहायता योजना के संबंध में आम जनता के जीवन-यापन में सकारात्मक परिवर्तन भी हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में प्रदेश का कुल पूंजीगत व्यय रूपये 46 हजार 798 करोड़ था जो लगभग 23 प्रतिशत वृद्धि के साथ वर्ष 2023-24 में रूपये 57 हजार 348 करोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में लगभग रूपये 64 हजार 738 करोड़ का पूंजीगत व्यय अनुमानित है। वर्ष 2024-25 के लिए रूपये 6 हजार 187 करोड़ 73 लाख की राशि प्रदान करने के लिए केन्द्र सरकार को धन्यवाद दिया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने राज्य की ओर से बजट की तैयारी से संबंधित सुझाव देते हुए कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा सामाजिक सुरक्षा पेंशन के अंतर्गत वित्त पोषित राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन, राष्ट्रीय विधवा पेंशन एंव राष्ट्रीय नि:शक्त पेंशन योजनाओं में वित्त पोषण की वर्तमान व्यवस्था पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से 2024 के मध्य प्रतिवर्ष 0.29 प्रतिशत से लेकर 0.44 प्रतिशत तक की जीवन-प्रत्याशा में वृद्धि हुई है। योजनान्तर्गत हितग्राहियों की वर्तमान पंजीबद्ध संख्या 24 लाख 14 हजार से बढ़कर 29 लाख 43 हजार होना अनुमानित है। केन्द्र सरकार द्वारा मात्र 15 लाख 75 हजार हितग्राहियों के मान से ही वित्त पोषण किए जाने से राज्य सरकार को अतिरिक्त व्यय वहन करना पड़ रहा है। वर्ष 2013-14 में योजना के हितग्राहियों की संख्या की अधिकतम सीमा के पुनरीक्षण पर विचार किया जाना चाहिए। जल जीवन मिशन की शेष राशि जारी करने का आग्रह जल जीवन मिशन योजना के लिये उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि केन्द्र से मिशन की दूसरी किश्त की द्वितीय व तृतीय ट्रेंच की राशि रूपये 1 हजा़र 422 करोड़ की राशि प्राप्त नहीं होने से राज्य सरकार ने स्वयं के स्त्रोतों से योजनाओं के कार्यों को जारी रखा है। वर्ष 2024-25 में इन कार्यों के लिए रूपये 17 हजा़र करोड़ की आवश्यकता अनुमानित है, जिसमें केन्द्र की सहभागिता के अनुसार प्रदेश को रूपये 8 हजा़र 500 करोड़ की राशि भारत सरकार से अपेक्षित है। उन्होंने केन्द्रांश के लिए रूपये 4 हजा़र 456 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान करने और द्वितीय किश्त की शेष राशि रूपये 1 हजा़र 422 करोड़ उपलब्ध कराने का आग्रह किया। खाद्यान्न उपार्जन की लागत के व्ययों की प्रतिपूर्ति दरों का पुनर्निर्धारण उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि उपार्जन में विभिन्न मदों जैसे निराश्रित शुल्क, मण्डी लेबर व्यय, परिवहन व्यय, सोसायटी को कमीशन, ब्याज, भण्डारण व्यय, मिलर्स को प्रोत्साहन, बारदाना लागत आदि में किए जा रहे व्ययों तथा केन्द्र द्वारा निर्धारित दरों में अन्तर है। केन्द्र के स्तर पर दरों का पुनरीक्षण नहीं होने से सभी मदों में राज्य सरकार पर अतिरिक्त व्यय भार आ गया है। इस परिप्रेक्ष्य में केन्द्र से दरों के शीघ्र पुनरीक्षण अनुरोध है। ग्रामीण सड़कों के निर्माण, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना एवं स्वच्छ भारत मिशन जैसे जन-सुविधाओं के कार्यक्रमों में मध्यप्रदेश के निरन्तर सराहनीय प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उपमुख्यमंत्री देवड़ा ने ग्रामीण सड़कों की लम्बाई के मान से सड़कों के संधारण व रख-रखाव के लिए 60 व 40 प्रतिशत के अनुपात में केन्द्र से वित्तीय सहभागिता का अनुरोध किया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना में केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित मजदूरी दर, कृषि श्रमिकों के लिए अधिसूचित मजदूरी दर से कम है। इसके परिणामस्वरूप मजदूरी नियोजन में कमी आई है। केन्द्र सरकार से प्रशासनिक मद में व्यय की 6 प्रतिशत राशि की सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अनुसूचित जनजाति वर्ग के उत्थान एवं जीवन सुधार के मद्देनजर एक वर्ष में 100 दिवस के रोजगार की बजाय 150 दिवस के रोजगार की गारण्टी का प्रावधान करने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों और भू-जल स्तर की गिरावट वाले क्षेत्रों में जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए वाटर शेड विकास परियोजनाओं के विकास के लिए बजट में विशेष रूप से प्रावधान करने का अनुरोध किया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने मध्यप्रदेश द्वारा आर्थिक दायित्वों के सराहनीय निर्वहन का उल्लेख करते हुए केन्द्रीय करों में राज्य सरकार की वर्तमान हिस्सेदारी 41 प्रतिशत को बढ़ाये जाने की बात कही।  

क्या है न्यायसंगत गुजारा भत्ता? सुप्रीम कोर्ट ने तय किए नए पैमाने, पति-पत्नी दोनों के लिए राहत

What is equitable alimony? Supreme Court sets new standards, relief for both husband and wife सुप्रीम कोर्ट के नए दिशानिर्देश के अनुसार, गुजारा भत्ता तय करते समय पहले ये देखा जाना चाहिए कि पति-पत्नी दोनों का समाज में क्या स्थान है, उनकी पृष्ठभूमि क्या है, उनके परिवार का क्या रुतबा है. नई दिल्ली ! यह बेहद दुखद है कि बेंगलुरू में 34 साल के अतुल सुभाष ने अपनी पत्नी के साथ तलाक, गुजारा भत्ता और अन्य मामलों को लेकर चल रहे कानूनी विवाद के चलते अपनी जान दे दी. उन्होंने मरने से पहले अपनी पत्नी पर झूठे मुकदमे दर्ज कराने, पैसे ऐंठने और प्रताड़ित करने के आरोप लगाए. अतुल सुभाष ने अपने 24 पेज के सुसाइड नोट और 81 मिनट के वीडियो में आरोप लगाया कि वह पत्नी निकिता सिंघानिया को 40 हजार रुपये महीना गुजारा भत्ता के तौर पर दे रहे थे. फिर भी, पत्नी और उसके परिवार वाले सभी केस खत्म करने के लिए 3 करोड़ रुपये की रकम मांग रहे थे. इतना ही नहीं, बच्चे से मिलने के लिए 30 लाख रुपये की डिमांड की जा रही थी. अतुल सुभाष की आत्महत्या ने यह दिखाया है कि तलाक-गुजारा भत्ता के मामलों में कानूनी प्रक्रिया कितनी मुश्किल और तनावपूर्ण हो सकती है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक मामले में गुजारा भत्ता को लेकर अहम फैसला सुनाया है. यह मामला दुबई के एक बैंकर, उनकी पत्नी और बच्चे के बीच कानूनी विवाद से जुड़ा था. इस मामले में कोर्ट ने गुजारा भत्ता तय करते समय 8 बातों का ध्यान रखने के लिए कहा है. अब भारत की अदालतें गुजारा भत्ता के मामलों में इसी फैसले को आधार मानकर काम करेंगी. पहले जानिए क्या है पूरा विवाद यह मामला दुबई के एक बैंक के सीईओ का है जिनकी साल 1998 में शादी हुई और 2004 में उनका पत्नी से विवाद हो गया. इसके बाद शुरू हुई कानूनी लड़ाई, जिसमें 20 साल तक यह बैंकर पारिवारिक अदालत से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक घूमता रहा. 2004 में बैंकर ने क्रूरता के आधार पर पत्नी से तलाक की अर्जी दायर की. इसके बाद पत्नी ने भी गुजारा भत्ता पाने के लिए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत याचिका दायर कर दी. यह केस 20 साल से अदालतों में घूम रहा है. परिवारिक अदालत से शुरू हुआ ये मामला पहले हाईकोर्ट में पहुंचा और फिर सुप्रीम कोर्ट. मुख्य सवाल यही है कि पत्नी को कितना गुजारा भत्ता मिलना चाहिए. फिर सुप्रीम कोर्ट कैसे पहुंचा मामला? 2015 में बैंकर ने सभी अदालती फैसलों का पालन करते हुए खुद से गुजारा भत्ता बढ़ा दिया. हालांकि, जब उनकी पत्नी ने और भी ज्यादा गुजारा भत्ता मांगना शुरू किया, तो उन्होंने विरोध किया. पति को यह मंजूर नहीं था कि यह रकम बार-बार बढ़ती रहे, खासकर जब उसकी अपनी भी आर्थिक स्थिति ठीक न हो और उसे अपने बच्चों की जिम्मेदारी भी निभानी हो. बैंकर के वकीलों के अनुसार, हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 26 एक वयस्क बच्चे को गुजारा भत्ता देने की अनुमति नहीं देती है. मगर, पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 26 को चुनौती दी और अदालत से अपने और अपने वयस्क बेटे को स्थायी गुजारा भत्ता देने का समाधान मांगा. पत्नी का कहना था कि इस कानून के हिसाब से बच्चों के बड़े होने पर ज्यादा पैसे मिलने चाहिए. उनके बेटा हाल ही में ग्रेजुएट हुआ है और अभी भी उन पर निर्भर है, इसलिए और उन्हें भी ज्यादा पैसे चाहिए. बैंकर को इस बात पर सबसे ज्यादा एतराज था कि उसकी पत्नी हिन्दू मैरिज एक्ट के सेक्शन 26 का गलत इस्तेमाल करके ज्यादा पैसे मांग रही है. हालांकि वो पहले के फैसलों को मानता रहा था और गुजारा भत्ता बढ़ाने को भी तैयार था. यह पारिवारिक विवाद जब कानून का सवाल बन गया, तो माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले ने केस के सभी तथ्यों को ध्यान से समझा. उन्होंने मौजूदा कानून को भी ध्यान में रखा. सुप्रीम कोर्ट ने रजनेश बनाम नेहा (2021) और उसके बाद के फैसलों में दिए गए सिद्धांतों को दोहराया है. फिर कोर्ट ने कुछ बातें बताईं जिनके आधार पर यह तय किया जा सकता है कि गुजारा भत्ता देना जरूरी है या नहीं और अगर जरूरी है तो कितना. सुप्रीम कोर्ट के नए दिशानिर्देश के अनुसार, गुजारा भत्ता तय करते समय पहले ये देखा जाना चाहिए कि पति-पत्नी दोनों का समाज में क्या स्थान है, उनकी पृष्ठभूमि क्या है, उनके परिवार का क्या रुतबा है, ये सारी बातें शामिल हैं. कई बार सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण भी गुजारा भत्ता की राशि प्रभावित हो सकती है. साथ ही दोनों कितना कमाते हैं और उनकी कितनी संपत्ति है. अगर पति आर्थिक रूप से मजबूत होता है, तो उसे ज्यादा गुजारा भत्ता देने के लिए कहा जा सकता है. अगर पति-पत्नी दोनों कामकाजी हैं और उनकी आय लगभग बराबर है, तो गुजारा भत्ता की राशि कम हो सकती है या फिर शायद किसी को गुजारा भत्ता देने की जरूरत ही नहीं पड़े. लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह सिर्फ एक कारक है. गुजारा भत्ता तय करते समय अदालत बाकी 7 कारकों पर भी विचार करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने गुजारा भत्ता तय करते समय पति-पत्नी के जीवन स्तर को भी एक अहम कारक बताया है. गुजारा भत्ता तय करते समय अदालत यह भी देखेगी कि पति-पत्नी का समाज में क्या रुतबा है और वे कैसा जीवन जीते थे. उनके पास कितने मकान और गाड़ियां हैं, उनकी कीमत क्या है? उनका घर कितना बड़ा है, उसमें कितने एसी और स्विमिंग पूल जैसी सुविधाएं हैं? उनके घर में कितने नौकर-चाकर काम करते हैं? वे कितनी बार छुट्टियां मनाने जाते थे, भारत में या विदेश में? अगर पति-पत्नी अमीर थे और ऐशो-आराम की जिंदगी जीते थे, तो पत्नी को ज्यादा गुजारा भत्ता मिल सकता है ताकि वो भी वैसी ही जिंदगी जी सके. अदालत यह भी देखेगी कि पत्नी की उम्र क्या है, उसने कितनी पढ़ाई की है और क्या वो खुद कमा सकती है. अगर वह बेरोजगार है, तो उसे ज्यादा गुजारा भत्ता मिल सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा … Read more

जिन किसानों ने अपनी कृषि और आजीविका में सुधार किए हैं, उनकी कहानी प्रकाश में आना चाहिए : मंत्री लखन पटेल

भोपाल पशुपालन एवं डेयरी मंत्री लखन पटेल ने कहा है कि किसान नवीन तकनीकों का लाभ लेकर स्वाबलंबी बनें। नवीन तकनीकी एवं योजनाओं का उद्देश्य किसानों को रोजगार दिलाने एवं आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने अपनी कृषि और आजीविका में सुधार किए हैं, उनकी कहानी प्रकाश में आना चाहिए। मंत्री पटेल शुक्रवार को केंद्रीय कृषि अभियान अभियांत्रिकी संस्थान भोपाल में आयोजित विशाल कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं अभियांत्रिकी मेले को संबोधित कर रहे थे। जिले की भोज आत्मा समिति एवं राइजिंग मध्य प्रदेश के सहयोग से आयोजित इस मेले में देश भर की लगभग 100 से अधिक कंपनियों ने कृषि यंत्रों एवं तकनीक का सजीव प्रदर्शन किया। यह तीन दिवसीय आयोजन दिनांक 21 व 22 दिसंबर को भी जारी रहेगा। इस अवसर पर आयोजित कृषि संगोष्ठी में प्रमुख रूप से डॉ. एस एस सिंधु, वैज्ञानिक आईएआरआई नई दिल्ली, डॉ. वाई सी गुप्ता, डॉ. पी बी भदोरिया आईआईटी खड़गपुर,प्रोफेसर डॉ. सी के गुप्ता सोलन, हिमाचल प्रदेश, डॉ. सी आर मेहता निदेशक कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, डॉ. सुरेश कौशिक आई. ए. आर. आई. नई दिल्ली, डॉ. प्रकाश नेपाल आदि वैज्ञानिको ने भाग लेकर विभिन्न विषयों पर किसानों को उपयोगी जानकारी दी। किसानो की समस्याओं और जिज्ञासाओं का स्थल निराकरण भी किया था। आयोजन के विस्तृत रूप रेखा भरत बालियान ने प्रस्तुत की।  

पन्ना के जुगल किशोर मंदिर को मिला ‘ईट राइट भोग स्थल’ प्रमाण पत्र

भोपाल भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI), नई दिल्ली द्वारा पन्ना के जुगल किशोर मंदिर को ‘ईट राइट भोग स्थल’ प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है। यह प्रमाणन मंदिर परिसर के प्रसाद और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रदान किया गया है। क्या है ‘ईट राइट भोग स्थल’ प्रमाण पत्र ‘ईट राइट भोग स्थल’ प्रमाण पत्र भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की एक पहल है, जो पूजा स्थलों पर उच्च गुणवत्ता वाले और सुरक्षित खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करता है। इसका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और पोषण संबंधी जागरूकता को बढ़ावा देना है। यह प्रमाण पत्र सुनिश्चित करता है कि धार्मिक स्थलों पर परोसे जाने वाले प्रसाद व भोजन सभी मानकों का पालन करते हुए तैयार किए गए हों। पर्यटन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रमाण पत्र जुगल किशोर मंदिर, जो अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता के लिए प्रसिद्ध है, अब इस प्रमाण पत्र के साथ स्वच्छता और गुणवत्ता के प्रतीक के रूप में उभरेगा। यह प्रमाणन न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं बल्कि धार्मिक पर्यटकों के बीच भी मंदिर की साख को बढ़ाएगा। स्वच्छ और सुरक्षित भोजन की उपलब्धता अंतरराष्ट्रीय और घरेलू पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाएगी, जिससे पन्ना जिले में धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा।  

प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान पट्टिका से किया जायेगा अलंकृत, तीन श्रेणियों में दिया जायेगा शिखर सम्मान

भोपाल  सम्राट विक्रमादित्य के नाम से मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सम्राट विक्रमादित्य राष्ट्रीय सम्मान और शिखर सम्मान दिया जायेगा। सम्राट विक्रमादित्य राष्ट्रीय सम्मान की सम्मान राशि 11 लाख रूपये होगी। वहीं सम्राट विक्रमादित्य शिखर सम्मान में 2 लाख रूपये की राशि प्रदान की जाएगी। शिखर सम्मान प्रादेशिक होगा। शिखर सम्मान प्रतिवर्ष तीन प्रतिष्ठित संस्था एवं व्यक्तियों को प्रदान किये जायेंगे। पहली श्रेणी न्याय, दानशीलता, वीरता, सुशासन, राजनय, शौर्य होगी। दूसरी श्रेणी में खगोल विज्ञान, ज्योतिष विज्ञान तथा प्राच्य वांग्मय विषय को सम्मिलित किया गया है और तीसरी श्रेणी में रचनात्मक एवं जनकल्याणकारी कार्य करने वाली संस्था या व्यक्ति को सम्‌मान से अलंकृत किया जायेगा। साथ ही प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान पट्टिका भी प्रदान की जायेगी। महाराजा विक्रादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि सम्राट विक्रमादित्य राष्ट्रीय सम्मान सम्राट विक्रमादित्य के बहुविध गुणों न्याय, दानशीलता, वीरता, सुशासन, खगोल एवं ज्योतिष विज्ञान, कला, शौर्य, प्राच्य वांग्मय, राजनय, आध्यात्मिक क्षेत्र, रचनात्मक एवं जनकल्याणकारी कार्य के क्षेत्र में श्रेष्ठतम उपलब्धियों एवं उल्लेखनीय योगदान के लिए  दिया जायेगा।  यह अलंकरण मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा स्थापित किया गया है। विभिन्न व्यक्तियों, संस्थाओं, समाजशास्त्रियों, बुद्धिजीवियों, लेखकों, समीक्षकों, पत्रकारों से सम्मान के लिए अनुशंसा/नामांकन की प्रविष्टियाँ आमंत्रित की जायेगी। सम्मान का चयन प्रतिवर्ष उच्च स्तरीय निर्णायक समिति के माध्यम से किया जायेगा। चयन समिति में देश-प्रदेश के प्रतिष्ठित समाजसेवी, बुद्धिजीवियों, समाजशास्त्रियों, लेखकों, पत्रकारों एवं विशेषज्ञों को शामिल किया जायेगा।  

बेसहारा भटकती विक्षिप्त नवयुवती को रेस्क्यू कर कोतवाली पुलिस ने दिया सहारा स्टेट मेन्टल हेल्थ हॉस्पिटल, बिलासपुर में कराया दाखिल

बिलासपुर     दिनांक 16.12.2024 की रात्रि को थाना कोतवाली, अनूपपुर अंतर्गत ग्राम किरर ( अमरकंटक रोड ) से सूचना प्राप्त हुई कि एक 20 वर्षीय विक्षिप्त नवयुवती, जो केवल अपना नाम “आशा” बता पा रही थी, बेसहारा अवस्था में भटकते हुए ग्राम में पहुंची है। इस जानकारी पर पुलिस अधीक्षक अनूपपुर मोती उर रहमान ने तत्काल कार्रवाई करते हुए महिला पुलिस बल को घटनास्थल पर भेजा। महिला पुलिस टीम ने नवयुवती को सहारा देकर वन स्टॉप सेंटर, जिला चिकित्सालय परिसर, अनूपपुर में दाखिल कराया और उसके रहने व भोजन-पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की। टी.आई. कोतवाली निरीक्षक अरविंद जैन के नेतृत्व में सहायक उपनिरीक्षक संतोष पाण्डेय, महिला आरक्षक कुंती शर्मा एवं जानकी बैगा ने मिलकर विक्षिप्त नवयुवती का मेडिकल परीक्षण कराया। इसके पश्चात माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अनूपपुर के समक्ष प्रकरण पेश किया गया। निर्देशानुसार, नवयुवती को शुक्रवार को स्टेट मेन्टल हेल्थ हॉस्पिटल, बिलासपुर (छ.ग.) में दाखिल कराया गया, जहां उसकी देखभाल सुनिश्चित की जा रही है। पुलिस अधीक्षक अनूपपुर ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी बेसहारा महिला की जानकारी मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें, ताकि उन्हें सुरक्षित आश्रय एवं आवश्यक मदद दी जा सके। यह भी उल्लेखनीय है कि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिला चिकित्सालय अनूपपुर परिसर में वन स्टॉप सेंटर (सखी) संचालित किया जा रहा है। यह सेंटर महिलाओं और बालिकाओं को अस्थाई आश्रय, पुलिस सहायता, विधिक सहायता, चिकित्सा सेवाएं और काउंसलिंग जैसी निःशुल्क सुविधाएं प्रदान करता है। वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को एकीकृत रूप से सहायता और सुरक्षा देना है। यहां पीड़िताओं को आपातकालीन और गैर-आपातकालीन सहायता एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाती है।

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