Questions raised about private schools operating from homes and shops in Jabalpur, demand for investigation and action from the Collector

विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव ,अर्पिता श्रीवास्तव
जबलपुर। जिले के विभिन्न ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में घरों, दुकानों और अनुपयुक्त भवनों में संचालित निजी (प्राइवेट) स्कूलों को लेकर एक गंभीर शिकायत कलेक्टर जबलपुर को सौंपी गई है। शिकायतकर्ता घनश्याम सिंह लोधी ने आरोप लगाया है कि जिले के कई निजी विद्यालय शिक्षा विभाग के निर्धारित मानकों का पालन किए बिना संचालित हो रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं।

शिकायत पत्र में कहा गया है कि शाहपुरा (भिटौनी), बरगी, सिहोरा, तेंदूखेड़ा, मझौली, मनकड़ी, बरेला सहित विभिन्न क्षेत्रों में कई स्कूल किराए के मकानों, दुकानों अथवा छोटे परिसरों में संचालित किए जा रहे हैं। आरोप है कि इन विद्यालयों में न तो पर्याप्त खेल मैदान हैं और न ही विद्यार्थियों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
शिकायत में लगाए गए प्रमुख आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार—
कई विद्यालय घनी आबादी वाले क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं, जहां पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
स्कूल परिसरों में निर्धारित मानकों के अनुरूप खेल मैदान उपलब्ध नहीं हैं।
कई भवनों में पर्याप्त हवा और प्रकाश की व्यवस्था नहीं है।
कुछ विद्यालयों में बी.एड. और डी.एड. जैसी आवश्यक योग्यता वाले शिक्षकों की कमी है।
विद्यार्थियों के परिवहन में उपयोग किए जा रहे वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं।
कुछ स्कूल संचालकों द्वारा स्कूल परिसर से अलग स्थानों को खेल मैदान बताकर मान्यता लेने का आरोप लगाया गया है।
22 विद्यालयों की सूची भी सौंपी
शिकायत के साथ 22 निजी विद्यालयों की सूची भी संलग्न की गई है, जिनके संबंध में जांच की मांग की गई है। इनमें शाहपुरा, बरगी, गांगई, भेड़ाघाट और आसपास के क्षेत्रों के कई निजी विद्यालय शामिल हैं।
जांच कर कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से मांग की है कि जिले में संचालित निजी विद्यालयों की मान्यता संबंधी सभी आवश्यक मापदंडों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि किसी विद्यालय में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
यह मामला सामने आने के बाद जिले में निजी स्कूलों की मान्यता, सुरक्षा मानकों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर बहस तेज होने की संभावना है। अब निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
नोट: शिकायत में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के हैं। इनकी पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी।









