10 major changes in the income tax return form; overlooking them could lead to a tax notice and a penalty.
भोपाल। अगर आप असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए अपना इनकम टैक्स रिटर्न यानि आइटीआर फाइल करने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। आयकर विभाग ने इस साल आइटीआर फॉर्म्स में कई बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन नए नियमों को नजरअंदाज करना आपको भारी पड़ सकता है और इसके कारण आपको टैक्स नोटिस, भारी जुर्माना यानि पेनल्टी या रिफंड अटकने जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
आइटीआर फार्म में हुए 10 सबसे बड़े बदलाव
- एफ एंड ओ ट्रेडिंग की पूरी कुंडली: शेयर बाजार के फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस सेगमेंट में ट्रेडिंग करने वालों के लिए अब ट्रांजैक्शन की एक-एक डिटेल देना अनिवार्य कर दिया गया है।
- एमएसएमई पेमेंट्स पर कड़ाई: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को किए गए भुगतान और उन पर देय ब्याज की रिपोर्टिंग को अब पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है।
- पार्टनरशिप फर्म के नए नियम: किसी भी फर्म के पार्टनर्स को अब अपनी व्यक्तिगत इनकम के साथ-साथ फर्म में अपनी हिस्सेदारी की भी बारीक जानकारियां साझा करनी होंगी।
- रिवाइज्ड आइटीआर फीस का नया कॉलम: यदि आपसे रिटर्न भरने में कोई गलती होती है और आप रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करते हैं, तो लगने वाली फीस को अब एक नए विशेष कॉलम में डिक्लेयर करना होगा।
- डोनेशन के लिए आईएफएससी अनिवार्य: यदि आप किसी संस्था को दान देकर टैक्स छूट का क्लेम करना चाहते हैं, तो अब उस संस्था के बैंक खाते का आईएफएससी कोड देना अनिवार्य होगा।
- प्रिजम्प्टिव टैक्स स्कीम में नया पेंच: प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम का लाभ लेने वाले व्यापारियों और प्रोफेशनल्स को अब अपने वित्तीय निवेशों की भी पूरी जानकारी देनी होगी।
- एनबीएफसी और कंपनियों से ब्याज: गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों या अन्य निजी कंपनियों से मिलने वाले ब्याज की आय को अब अलग से प्रदर्शित करना होगा।
- एनआरआइ टैक्सपेयर्स के लिए कड़े नियम: नॉन-रेसिडेंट इंडियंस के लिए रिपोर्टिंग के नियमों और आवश्यक दस्तावेजों की सूची में बदलाव कर इसे और सख्त बनाया गया है।
- चैरिटेबल ट्रस्टों पर पैनी नजर: चैरिटेबल ट्रस्ट और सामाजिक संस्थाओं को अब अपने फंड्स और खर्चों को लेकर अत्यधिक पारदर्शिता के साथ ब्योरा देना होगा।
- नया डिक्लेरेशन कॉलम: विशेषकर विदेशी कंपनियों से होने वाली आय को दर्शाने के लिए फॉर्म में एक नया स्व-घोषणा कॉलम जोड़ा गया है।
अन्य महत्वपूर्ण बदलाव जो जानना है जरूरी
- कैपिटल गेन का नया फॉर्मेट: प्रॉपर्टी, शेयर्स या म्यूचुअल फंड बेचने से होने वाले मुनाफे की रिपोर्टिंग का पूरा ढांचा बदल दिया गया है।
- क्रिप्टो इनकम की घोषणा: डिजिटल एसेट्स या क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली हर छोटी-बड़ी कमाई की जानकारी देना अब पूरी तरह अनिवार्य है।
- एसेट्स और लायबिलिटीज का ब्योरा: करदाताओं को अपनी संपत्ति और देनदारियों का विवरण अब और अधिक विस्तार से देना होगा।
- प्री-फिल्ड डेटा का वेरिफिकेशन: हालांकि विभाग द्वारा फॉर्म में पहले से भरी हुई जानकारियां बढ़ाई गई हैं, लेकिन दाखिल करने से पहले इसका खुद मिलान और वेरिफिकेशन करना बेहद जरूरी है।
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