LATEST NEWS

क्यों करना चाहिए सुंदरकांड का पाठ, जानें इसका सही तरीका और महत्व

— जो भी व्यक्ति नियमित अंतराल में घर पर सुंदरकांड का पाठ करता है उसे बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त होता है. — मान्यता है कि सुंदरकांड (Sundarkand) का पाठ करने से व्यक्ति को जीवन में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं. हनुमान जी (Hanuman Ji) अपने भक्तों पर आने वाले तमाम तरह के कष्टों (Pains) और परेशानियों (Problems) को दूर करते हैं. ऐसी मान्यता है कि भगवान हनुमान (Lord Hanuman) बहुत जल्द प्रसन्न होने वाले देवता हैं. उनकी पूजा पाठ में ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं होती. हिंदू धर्म में सुंदरकांड पाठ का विशेष महत्व होता है. सुंदरकांठ पाठ में भगवान हनुमान के बारे में विस्तार से बताया गया है. तुलसीदास द्वारा रचित सुंदरकांड सबसे ज्यादा लोकप्रिय और महत्वपूर्ण माना गया है. मान्यताओं के अनुसार जो भी व्यक्ति नियमित अंतराल में घर पर सुंदरकांड का पाठ करता है उसे बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त होता है. आइए जानते हैं सुंदरकांड के पाठ का इतना महत्व क्यों हैं और इसको करने की क्या है पूजा विधि… सुंदरकांड का महत्व हनुमान जी जल्द प्रसन्न होने वाले देवता हैं. वह बल, बुद्धि और कृपा प्रदान करने वाले माने जाते हैं. मान्यता है कि सुंदरकांड का पाठ करने से व्यक्ति को जीवन में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं. जो भी जातक प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करता है उसकी एकाग्रता और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है. सुंदरकांड का पाठ करने से व्यक्ति के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. ऐसे में उसके द्वारा किए जाने वाले किसी भी काम का परिणाम हमेशा सकारात्मक ही मिलता है. इसलिए हर घर में सुंदरकांड का पाठ अवश्य करने को बताया गया है. सुंदरकांड का नियमित पाठ करने से व्यक्ति के अंदर से नकारात्मक शक्तियां दूर चली जाती है. जानें सुंदरकांड पाठ करने का सही तरीका -अगर आप विशेष फल की प्राप्ति के लिए सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं तो इसकी शुरुआत मंगलवार या शनिवार के दिन से ही करें. -सुंदरकांड का पाठ शुरू करने से पहले स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए. -सुंदरकांड का पाठ करने से पहले पूजा स्थल पर रखी हनुमानजी की मूर्ति की विशेष रूप से पूजा करनी चाहिए. साथ ही सीता-राम की मूर्तियां भी हनुमान जी पास जरूर रखें. -हनुमानजी की पूजा फल-फूल, मिठाई और सिंदूर से करें. -सुंदरकांड का पाठ शुरू करने से पहले गणेश वंदना जरूर करें. -सुंदरकांड करते समय तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस की भी पूजा करनी चाहिए.

इंदौर में पुलिस पर पथराव, हवाई फायर: आधा दर्जन पुलिसकर्मी घायल

इंदौर। बड़गोंदा में बुधवार को जमीनी विवाद को लेकर दो पक्ष आपस में भिड़ गए। सूचना के बाद मौके पर पुलिस पहुंची। एक पक्ष के लोगों ने पुलिस पर ही हमला कर दिया। यहां डायल-100 पर पथराव भी किया गया, जिसमें कांच फूट गए। इस दौरान SDOP, TI व बल पर भी पत्थर बरसाए गए। इसमें 6 पुलिसकर्मी घायल हो गए। काबू पाने के लिए पुलिस को हवाई फायर भी करना पड़े। मामला दोपहर महू तहसील मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर मेढ़ के समीप आदिवासी बाहुल्य मार्ग रसानिया माल मोगरा घाटी का है। यहां ग्रामीण जितेंद्र कटारे और छोटेलाल भील के परिवार आमने-सामने हो गए। सूचना के बाद बड़गोंदा थाना क्षेत्र की डायल 100 मौके पर पहुंची। पुलिस वाहन में मौजूद पुलिसकर्मी कुछ समझते, उसके पूर्व ही डायल 100 पर एक पक्ष ने पथराव कर दिया। पायलेट ने समझदारी दिखाते हुए वाहन को रिवर्स मोड़ लिया। बावजूद, पथराव से ना सिर्फ डायल 100 के कांच फूट गए, बल्कि ASI व 3 जवानों को भी चोटें आईं। इसके बाद SDOP विनोद शर्मा, किशनगंज थाना प्रभारी शशिकांत चौरसिया व एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी पहुंचे। इस दौरान 300 से अधिक लोग यहां इकट्‌ठा हो गए। इन लोगों ने पुलिस पर कार्रवाई के दौरान पथराव कर दिया। इसके बाद किशनगंज TI ने हवाई फायर किए, जबकि मौजूद पुलिसकर्मी भागे। बाद में यहां ASP पुनीत गेहलोत, SDOP विनोद शर्मा सहित अन्य थाना प्रभारी व भारी पुलिस बल पहुंचा, तब कहीं स्थिति को काबू किया गया। इन पर हुई कार्रवाई रीना बाई पति जितेंद्र की रिपोर्ट पर करण पिता सुखराम, मेघु पिता सुखराम, विजय पिता सुखराम और राजू बाई सहित अन्य पर केस दर्ज किया गया है, जबकि राजू बाई पति छोटेलाल भील की रिपोर्ट पर जिरावर, ईश्वर, जितेद्र, जादूसिंह आदि पर केस दर्ज किया गया है। ये पुलिसकर्मी घायल हुए घटना में ASI ओमप्रकाश स्वामी, प्रधान आरक्षक सुरेश परमार, प्रधान आरक्षक बाबूलाल पटेल, आरक्षक विजय चौहान व 100 डायल पायलेट विपिन पारवे सहित अन्य पुलिसकर्मी। हालांकि सभी कही स्थिति ठीक बताई जा रही है। विवाद का कारण सूत्रों के मुताबिक दोनों पक्षों में पिछले कई दिनों से जमीन विवाद को लेकर चला आ रहा है। दोनों ही पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ बड़गोंदा थाना में लिखित शिकायतें की है। बताया जाता है कि उक्त गांव में आदिवासियों ने करीब 75 बीघा वन भूमि पर कब्जा किया है।

चयनित शिक्षकों का आंदोलन, भोपाल में BJP दफ्तर का घेराव, पुलिस ने धमकाया, रोने लगी महिलाएं

भोपाल. भोपाल में 10 घंटे से चल रहा चयनित शिक्षकों का आंदोलन शाम को खत्म हो गया। वे सुबह 9 बजे से BJP दफ्तर का घेराव कर धरने पर डटे थे। शाम को कलेक्टर अविनाश लवानिया और डीआईजी इरशाद वली पहुंचे और चयनित शिक्षकों से हटने को कहा, लेकिन जब वे नहीं माने तो कुछ समय की मोहलत दी और फिर एफआईआर दर्ज करने के लिए नाम-पते लिखे जाने लगे। साथ ही मोबाइल पर वीडियो भी बनाए गए। एफआईजार की चेतावनी के बाद अधिकांश महिला-पुरुष हट गए। कुछ तो पुलिस ने जबरदस्ती हटा दिया। कार्रवाई से चलते कई महिलाएं रोने लगी तो एफआईआर की बात सुनकर कई पुलिसकर्मियों के सामने हाथ जोड़ने लगी। इस दौरान बारिश भी होने लगी। कई महिलाएं छाता लेकर डटी रहीं, लेकिन जब प्रदर्शनकारियों की भीड़ कम हुई तो उनके हौंसले भी पस्त हो गए। इन्हें चेतावनी दी गई कि यदि नहीं हटे तो एफआईआर दर्ज कर ली जाएगी और फिर कहीं भी नौकरी नहीं मिलेगी। यह सुनकर महिलाएं डर गईं और आखिरकर वे हट गईं। हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाई महिलाएं पुलिस कार्रवाई के डर से कई महिलाएं पुलिसकर्मियों के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाने लगी। वे रोने भी लगी। दूसरी ओर कई महिलाएं कार्रवाई का विरोध कर रही थी। उनका कहना था कि नियुक्ति के लिए धरना देने पर ही कोरोना का खतरा है, लेकिन राजनीतिक कार्यक्रमों से कोरोना नहीं फैलेगा? हालांकि, पुलिस की सख्ती से उनकी एक न चली। कई महिलाओं ने जब वीडयो-फोटो से इनकार किया तो जबरदस्ती की गई। हालांकि, डीआईजी ने जवानों को साफ तौर पर कहा कि मारपीट या अन्य तरीके से न हटाया जाए। बरसते पानी में कार्रवाई पुलिस बरसते पानी में कार्रवाई करती रही। शाम 7.30 बजे से सभी को मौके से हटा दिया गया था। वहीं धरनास्थल पर बेरिकेडिंग की गई। कार्रवाई के दौरान सड़क पर ट्रैफिक रोक दिया गया। इस कारण हबीबगंज रेलवे स्टेशन से एमपी नगर तक दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। सैकड़ों वाहन जाम में फंस गए। इससे पहले सुबह 9 बजे प्रदेशभर से आए सैकड़ों चयनित शिक्षकों ने BJP ऑफिस का घेराव कर दिया। CM शिवराज सिंह चौहान से उनकी मांग थी कि उन्हें जल्द नियुक्ति दी जाए, ताकि वे परिवार का भरण-पोषण कर सकें। नारेबाजी के दौरान कई महिलाएं रो पड़ीं और कुछ बेहोश भी हो गईं। चयनित महिला शिक्षक ‘हम होंगे कामयाब’ का नारा लगाती रही। महिलाओं ने मुख्यमंत्री से नियुक्ति की मांग को लेकर उठक-बैठक की तो कई महिलाएं सड़क पर नतमस्तक भी हो गईं। इस दौरान कुछ महिलाएं हाथों में राखी की थालियां सजाकर पहुंची। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री को राखी बांधकर नियुक्ति पत्र तोहफे में लेकर जाऊंगी। हालांकि, उन्हें शाम को हटा दिया गया। 3 साल पहले चयन, अब तक नियुक्ति नहीं सुबह नारेबाजी के दौरान इंदौर की विनीता शर्मा की तबीयत बिगड़ गई। अन्य महिला साथियों ने विनीता को संभाला। विनीता का कहना है कि 3 साल पहले उसका संविदा शाला शिक्षक वर्ग-1 के पद पर चयन हो गया था, लेकिन स्कूल में अब तक नियुक्ति नहीं मिली है। इंदौर से आई एक अन्य चयनित शिक्षिका का कहना है कि नियुक्ति का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार सोई हुई है, हमारी मांग पूरी नहीं हो रही है। प्रदेशभर से आए चयनित शिक्षक सुबह 9 बजे से ही प्रदेशभर से चयनित शिक्षकों ने BJP दफ्तर के बाहर डेरा डाल दिया। कुल 3 हजार चयनित शिक्षकों में करीब एक हजार महिलाएं हैं। कई महिलाएं ऐसी थीं, जो अपने दुधमुंहे बच्चों को साथ लाई थी। किसी की गोद में बच्चा बैठा था तो किसी को उसके पिता संभाल रहे थे।

MP में नौकरी मांगने पर बरसाए लट्‌ठ, बेरोजगारों पर टूट पड़ी पुलिस, कई युवक घायल

भोपाल। सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर लंबे समय से भर्तियां नहीं होने से बुधवार को भोपाल में प्रदर्शन करने आए बेरोजगारों को रोजगार के बदले लाठी मिली। प्रदर्शन से पहले ही पुलिस ने कई युवाओं को खदेड़ दिया। युवाओं का दावा है कि इसमें 24 से ज्यादा युवक घायल हो गए। आरोप है कि पुलिस ने जबर्दस्ती एक वैन में बैठाया और भोपाल से करीब 25 किमी दूर छोड़ आई। MP के बेरोजगार युवाओं के साझा मंच मूवमेंट अगेंस्ट अनएम्प्लॉयमेंट ने 18 अगस्त को प्रदेशभर के युवाओं को भोपाल में एकजुट होने का आह्वान किया था। इसके चलते बुधवार सुबह से ही कई युवा रोशनपुरा चौराहे पर जुटने लगे, लेकिन पुलिस ने यहां पर चारों ओर से बैरिकेडिंग कर रखी थी, इसलिए संगठन ने लोकेशन बदली। इसके बाद वे नीलम पार्क में पहुंचने लगे, लेकिन आगे जाने से रोक दिया और लाठी भी बरसाई। जंगल में छोड़ा, कई साथियों को इलाज की जरूरत संगठन के मनोज रजक ने बताया कि नीलम पार्क पर पुलिस ने पकड़ लिया। संगठन के पदाधिकारी प्रमोद नामदेव, सुमेरसिंह बड़ोले, दिनेश ठाकुर, गोपाल प्रजापति समेत करीब 25 लोगों को पुलिस अपने वाहन में बैठाकर भोपाल से काफी दूर एक जंगल में लाई है। हमें गाड़ी में ही बंद कर रखा है। लाठी लगने से कई साथियों को चोट आई हैं, जिन्हें इलाज की जरूरत है। एक महिला साथी भी साथ है। रोजगार के लिए प्रदर्शन संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि मध्यप्रदेश में पिछले कई सालों से कोई भी सरकारी भर्तियां नहीं निकाली गई हैं, जिसके कारण योग्य उम्मीदवार ओवरएज होकर परीक्षा से बाहर हो रहे हैं। यहां तक कि विभागों में तमाम पद खाली पड़े हुए हैं और लगातार सरकारी कर्मचारियों के रिटायर होने से निरंतर पद खाली होते जा रहे हैं। इसकी वजह से जो कार्यरत सरकारी कर्मचारी हैं उन पर काम का दबाव बहुत ज्यादा है। साथ ही सरकारी कार्यालयों की कार्यशैली पर भी गलत प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को सभी विभागों में खाली पड़े पदों पर तुरंत स्थाई भर्ती करनी चाहिए। प्रदेश में पिछले 11 साल से शिक्षक भर्ती नहीं हुई है, जो अभ्यर्थी शिक्षक पात्रता परीक्षा में पास हो चुके हैं, अपने डॉक्युमेंट सत्यापित करवा चुके हैं उन्हें भी पिछले 3 साल से अपनी नियुक्ति का इंतजार है। चाहे पुलिस, नर्सिंग या पैरामेडिकल स्टाफ की समस्याएं हो, किसी भी विभाग में भर्ती प्रक्रिया सुचारु रूप से नहीं चल रही है। इसे ध्यान में रखते हुए मांग उठा रहे हैं, पर कोई हल नहीं निकल रहा है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा के नाम पर किसानों से लूट, उतना पैसा दिया नहीं जितना ले लिया

नई दिल्ली . कृषि पर संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट कहती है कि निजी बीमा कंपनियों को प्रीमियम के तौर पर जितनी राशि मिली और कंपनियों द्वारा नुकसान के एवज में जो राशि किसानों को दी गई, अगर इसकी तुलना की जाए तो बीमा कंपनियों ने 30 फीसदी से अधिक की बचत की है। भारत को किसानों का देश कहकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल में 13 जनवरी 2016 से एक नई योजना ”प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई)” के नाम पर शुरू की थी. इसे उन्होंने सभी किसानों के लिए बाध्यकारी भी बनाया। अगर इस योजना की पृष्ठभूमि पर गौर करें, तो साफ समझ में आता है, कि निजी बीमा कंपनियों को लाभ पहुंचाना ही इस योजना का मुख्य उद्देश्य था। प्रधानमंत्री ने इस योजना से कृषि पर आश्रित गरीब किसानों को फायदा तो नहीं पहुंचाया, बल्कि अपनी आंखों के सामने उन्हें खूब लूटवाया। गरज यह कि पांच साल पहले शुरू की गई इस योजना से किसानों को तो फायदा नहीं हुआ। किंतु निजी बीमा कंपनियों ने जमकर इससे मुनाफा कमाया। कृषि पर संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट भी यही कहती है, कि इन वर्षों में निजी बीमा कंपनियों को प्रीमियम के तौर पर जितनी राशि मिली और कंपनियों द्वारा नुकसान के एवज में जो राशि किसानों को दी गई, इसकी तुलना की जाए, तो कंपनियों ने 30 फीसदी से अधिक की बचत की है। कृषि एवं कल्याण मंत्रालय की ओर से समिति को उपलब्ध कराये गये आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2016 से लेकर 14 दिसम्बर 2020 के दौरान, निजी बीमा कंपनियों ने किसानों से प्रीमियम के तौर पर 1,26, 521 करोड़ रुपए जमा कराए, जबकि बीमा कंपनियों ने नुकसान के एवज में किसानों को 87,320 करोड़ रुपए का भुगतान किया। यानी कंपनियों ने 69 फीसदी मुआवजे का भुगतान किया है। रिपोर्ट के अनुसार फसल का नुकसान होने पर किसानों ने 92,954 करोड़ रुपए का क्लेम किया था, लेकिन उन्हें 87,320 करोड़ रुपए का ही भुगतान किया गया। आंकड़ों के मुताबिक इन सालों में सवा 9 करोड़ किसानों को ही मुआवजा दिया गया है। दिसम्बर 2020 तक किसानों को क्लेम का 5924 करोड़ रुपए नहीं दिया गया। रिपोर्ट पर गौर करें, तो साफ समझ में आता है, कि इस योजना का लाभ किसानों को कम और निजी बीमा कंपनियों को ज्यादा हुआ है। निजी बीमा कंपनियों ने कमाया 60 फीसदी से अधिक मुनाफा स्थायी समिति की रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक निजी बीमा कंपनियों ने वर्ष 2016 से 2020 के दौरान करीब 31फीसदी मुनाफा कमाया है। कई कंपनियों ने 50 से 60 फीसदी तक मुनाफा कमाया है। भारती एक्स 2017-18 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल हुई और तीन साल के दौरान कंपनी ने करीब 1576 करोड़ रुपए का प्रीमियम वसूला और क्लेम का करीब 439 करोड़ रुपए भुगतान किया’। इसी तरह रिलायंस जीआईसी लिमिटेड ने प्रीमियम के तौर पर 6150 करोड़ रुपए वसूला और किसानों को 2580 करोड़ रुपए का ही भुगतान किया। जनरल इंडिया इंश्योरेंस को करीब 62 फीसदी, इफको को ने 52 और एचडीएफसी एग्रो ने करीब 32 फीसदी मुनाफा कमाया है। जबकि इस योजना की आत्मा में यह बताया गया था बीमा दावे के निपटान की प्रक्रिया को तेज और आसान बनाने के लिए यह निर्णय लिया गया है, ताकि किसानों को फसल बीमा योजना के संबंध में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े । मध्यप्रदेश में ऐसे लाखों किसान हैं, जिन्हें तीन साल से प्रधानमंत्री फसल बीमा का लाभ नहीं मिला है। जिसकी वजह से उनके खेत सूने पड़े हैं और कृषि विभाग के अधिकारी इसे बकवास बताते हैं और बैंक जवाब देने को तैयार नहीं है। दरअसल प्रदेश के किसान बैंक और बीमा कंपनियों के बीच फुटबॉल बनकर रह गये हैं। मध्यप्रदेश में ऐसे दो लाख से अधिक किसान हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ पिछले तीन साल से नहीं मिला है। न ही कहीं उनकी सुनवाई हो रही है। बीमा न मिलने के कारण सिवनी- मालवा के किसानों ने खरीफ की बुवाई बंद कर दी सिवनी-मालवा जिले के हिरण खेड़ा गांव के किसान ओमप्रकाश बताते हैं कि उनकी पुश्तैनी 52 एकड़ कृषि भूमि खरीफ सीजन में खाली पड़ी रहती है। ओमप्रकाश ने बताया, वर्ष 2013 में सोयाबीन की फसल खराब होने पर पहली बार फसल बीमा का लाभ मिला था। तब केंद्र में यूपीए की सरकार थी। उसके बाद फसल बर्बाद होने पर कभी भी बीमा का लाभ नहीं मिला। लिहाजा परिवार ने निर्णय लिया कि खरीफ की बुवाई ही नहीं करनी क्योंकि इस मौसम में धान नहीं बो सकते, उसके लिए बहुत पानी की जरूरत है, जो सरकार से हमें नहीं मिलती। सरकार हमें तवा बांध से अक्टूबर से फरवरी तक ही पानी देती है। इसलिए इस दौरान हम लोग रबी के लिए पूरी तैयारी करते हैं। ताकि उसका पूरा लाभ लिया जा सके। रबी में हम लोग गेहूं बोते हैं। ओमप्रकाश का कहना है कि अगर खरीफ में सोयाबीन बोते हैं तो बारिश से पूरा सड़ जाती है। बहुत नुकसान होता है। फिर रबी की फसल के लिए पैसे ही नहीं बचते। इसी तरह होशंगाबाद के भी लाखों किसानों ने खरीफ के सीजन में खेतों को खाली छोड़ देते हैं। सीहोर जिले के लाखों हेक्टेअर में सोयाबीन फसल की बर्बादी इसी बरसात में हुई है, सीहोर जिले के करीब सवा तीन लाख हेक्टेअर में सोयाबीन की फसल बर्बाद हो चुकी है। अतिवृष्टि, इल्ली और अफलन के कारण दर्जनों गांव में फसल खराब हो चुकी है। अब इन किसानों को कर्ज चुकाने के साथ ही पूरा साल बिताने की चिंता भी सताने लगी है। इस जिले के सेवनिया गांव की महिला किसानों ने खेत की खड़ी फसल को काटकर बाहर फेंक दिया। कुछ गांवों के किसानों ने तो अपनी खड़ी फसल को काटकर गाय-भैंस मवेशी को खिला दिया, तो कहीं -कहीं किसान ट्रैक्टर से बखर चलाकर फसल को हांक रहे हैं। सीहोर किसानों का कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किसान एमएस मेवाड़ा ने बताया कि पिछले तीन सालों से सीहोर जिले के किसानों की फसलें खराब होती चली आ रही हैं, जिससे किसान कर्ज के बोझ में डूब गये हैं। उन्होंने कहा कि इस बार 10 हजार रुपए प्रति क्विंटल से सोयाबीन का … Read more

PM मोदी की लोकप्रियता तेजी से घटी,अब सिर्फ 24% की पसंद,योगी टॉप-5 में नहीं-सर्वे

Mood of the Nation survey : यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ समेत कोई बीजेपी सीएम टॉप 5 में नहीं नई दिल्ली। इंडिया टुडे के हालिया सर्वे देश का मूड (MOOD OF THE NATION) जारी किया गया है. सर्वे में कई सवालों के जवाब देशवासियों ने दिए हैं. इस सर्वे में मोदी की लोकप्रियता, एनडीए की विकफला, गांधी परिवार के बिना कांग्रेस, देश के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री समेत कई सवाल पूछे गए थे जिनके जवाब आ चुके हैं. आइए जानते हैं क्या कहता है सर्वे…. योगी टॉप-5 में नहीं-सर्वे देश के अगले प्रधानमंत्री के तौर पीएम मोदी की लोकप्रियता में गिरावट देखने को मिली है. पिछले साल 2020 में 66 फीसदी लोग नरेन्द्र मोदी को देश के अगले पीएम के तौर पर देख रहे थे. लेकिन इस बार 24 फीसदी लोगों ने ही मोदी के नाम पर मुहर लगाई है. वहीं योगी आदित्यनाथ पिछले साल 3 फीसदी से इस बार 11 फीसदी पर आ गए उन्हें जनता पीएम के दूसरे विकल्प के तौर पर देखती है. जबकि राहुल गांधी 10 फीसदी लोगों की पसंद के साथ तीसरे स्थान पर हैं. पिछले साल राहुल को 8 फीसदी लोगों ने पीएम के तौर पर पसंद किया था. इस लिस्ट में अरविंद केजरीवाल ,ममता बनर्जी, अमित शाह, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी का नाम भी है.

पीएम मोदी के टोक्यो यानी बनारस शहर की सड़कों पर चल रही हैं नावें

वाराणसी। “बनारस में बाढ़ नहीं आई, बल्कि ये उस कराहती गंगा के आंसू हैं, जिसके प्रवाह, गहराई और दिशा के साथ भाजपा सरकार लगातार मनमानी कर रही है। इसी सरकार के मुखिया नरेंद्र मोदी ने बनारसियों को भरमाने के लिए कहा था, ‘मैं आया नहीं, मां गंगा ने मुझे बुलाया है।’ सच यह है कि गंगा को लेकर पीएम मोदी के पास कोई नजरिया नहीं है। अगर कुछ है तो सिर्फ स्लोगन और जुमले। इनकी नीति और नीयत दोनों गलत है। बनारस की गंगा के साथ मनमाने ढंग से जो छेड़छाड़ किया जा रहा है, उसी का नतीजा है जलप्लावन।” यह बेबाक राय है चंचल की, जो बनारस के काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे और जन-सरोकारों के प्रति स्पष्ट नजरिया रखने वाले मुखर समाजवादी चिंतक हैं। चंचल बेबाकी के साथ कहते हैं, ” नमामि गंगे” बेवकूफ बनाने वाली योजना है। हर नदी का अपना एक अलग स्वभाव होता है। सभी नदियों को बचाने का कोई एक तय तरीका नहीं होता। बारिश के दिनों में गंगा समेत दुनिया भर की नदियां बाढ़ लाकर खुद को साफ करती हैं। इनसे छेड़छाड़ करोगे तो डिजास्टर होगा ही। बनारस में इन दिनों बिना बारिश के बाढ़ इसलिए विकराल है कि सरकार ने गंगा का रुख बदलने और वाहवाही लूटने के लिए रेत पर “मोदी नहर” बनवा दी। विश्वनाथ कारिडोर का सारा मलबा गंगा में डालवा दिया। मणिकर्णिका घाट के सामने गंगा में प्लेटफार्म बनाकर उसके वेग को रोकने की गंदली कोशिश की गई। ऐसे में बनारस के लोगों को खतरनाक नतीजे तो भुगतने ही पड़ेंगे।” ‘स्मार्ट सिटी’ में चल रहीं नौकाएं बनारस में गंगा ने सचमुच खतरे का अलार्म बजा दिया है। नदी का जल लाल निशान पार कर चुका है। इसका असर वरुणा और गोमती पर भी है। ‘स्मार्ट सिटी’ की गलियों में नावें चलाई जा रही हैं। सामने घाट इलाके के लोग योगी सरकार का मुंह देख रहे हैं, लेकिन इनके पास जो कुछ पहुंच रहा है वह सरकार नहीं, सामाजिक संस्थाएं दे रही हैं। बनारस में गंगा के साथ वरुणा ने इस कदर तबाही मचाई है कि बनारसी साड़ियों का ताना-बाना डूब गया है। करघों की खटर-पटर बंद है। हजारों बुनकरों के सामने रोजी-रोटी की भीषण समस्या है। बाढ़ से घिरे लोगों की नजरें प्रशासन से मिलने वाली मदद की ओर गड़ी हुई हैं। ऐसे लोगों की संख्या हजारों में है जो अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर हो गए हैं। गंगा में उफान के कारण इसके तटवर्ती इलाकों के साथ-साथ वरुणा के मुहाने पर बसे रिहायशी इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है। शहर के दर्जनों इलाकों में जन-जीवन अस्त-व्यस्त है। वाराणसी शहर के दशाश्वमेध घाट पर स्थित जल पुलिस थाना भी बाढ़ के पानी से घिर गया है। मणिकर्णिका घाट पर शवदाह स्थल डूब गया है। हरिश्चंद्र घाट की सबसे ऊपरी सीढ़ी पर शवदाह किया जा रहा है। यही स्थिति सामने घाट, रमना, डोमरी, रामनगर आदि शवदाह स्थलों की है। बनारस का सीन यह है कि गंगा घाटों का आपसी संपर्क भी पूरी तरह टूट गया है। बलिया-गाजीपुर मार्ग पर आवागमन ठप है। चंदौली जिले में बलुआ घाट पार कर गंगा का पानी बाजार में पहुंच गया है। कोनिया, सामने घाट, सरैया, डोमरी, नगवा, रमना, बनपुरवा, शूलटंकेश्वर के कुछ गांव, फुलवरिया, सुअरबड़वा, नक्खीघाट, सरैया समेत कई इलाकों में बाढ़ ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया है। सभी इलाकों में लोगों के घरों में पानी घुस गया है। आवागमन पूरी तरह से ठप है। बड़ी संख्या में लोग घर छोड़ने के लिए मजबूर हो गए हैं। पिछले दो-तीन दिनों से पलायन का सिलसिला तेज हो गया है। कुछ लोग अपने घरों का सामान लेकर रिश्तेदारों और परिचितों के यहां जा रहे हैं। बुनकरों के हिस्से में आई बाढ़ की तबाही गंगा और वरुणा नदी में आई बाढ़ की वजह से शहर के दर्जन भर मोहल्लों में लूम और करघों की धड़कन बंद हो गई हैं। हालत यह है कि बुनकरों को अब दो वक्त की रोटी जुटा पाना मुहाल हो गया है। घरों में पानी घुसने से बिजली की सप्लाई के साथ-साथ करघे और लूम खामोश हो गए हैं। नक्खीघाट की शकीला के घर में करीब एक फीट तक पानी भर गया है। शकीला के घर में जाने के लिए कोई भी रास्ता नहीं बचा है। करीब पांच फीट पानी भर जाने की वजह से आसपास के कुछ लोग यहां से पलायन कर चुके हैं। शकीला बताती हैं, “घर में पानी भर जाने की वजह से रोजी-रोटी के लाले पड़ गए हैं। पेट के लिए उधार लेकर काम चला रहे हैं।” वरुणा नदी के किनारे किराये के मकान में रहने वाली सबीना अपने चार बच्चों को लेकर खुले आसमान के नीचे रहने पर विवश है। सबीना का पति बुनकर है। आश्रय की तलाश में भटक रही इस महिला की मदद के लिए न प्रशासन आगे आ रहा है, न सियासी दल। दरअसल वह वोट बैंक नहीं है। वह कहती है, “हम बिहारी हैं। बनारस की वोटरलिस्ट में हमारा नाम नहीं है, इसलिए हमारी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। कोई मदद के लिए आगे नहीं आ रहा है।” नक्खीघाट पुल पर कई दिनों से मेला लग रहा है। सैकड़ों लोगों का हुजूम बाढ़ से होने वाली तबाही का मंजर देखने के लिए जुट रहा है। एनडीआरएफ की टीम वरुणा नदी में लगातार गश्त कर लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दे रही है। हिदायतनगर के जावेद अख्तर बताते हैं, “हर तीन साल में ऐसी भीषण बाढ़ आती है। इससे पहले साल 2013, 2016 और 2019 में ऐसी ही भयानक बाढ़ आई थी। पिछली मर्तबा बाढ़ की वजह से करीब एक महीने तक कारख़ाना बंद रहा, जिसकी वजह से हमारी बरसों की बनाई गृहस्थी उजड़ गई थी।” सिधवा इलाके के नवाब अंसारी बताते हैं, “गंगा ने रौद्र रूप धारण किया तो अचानक वरुणा भी फुंफकार मारने लगी। कुछ ही घंटों में हमारे साथ-साथ पड़ोसियों की सारी गृहस्थी डूब गई। लूम और करघों पर चढ़ीं साड़ियां काली पड़ गई हैं। यह बात हमारी समझ में नहीं आ रही है कि नुकसान की भरपाई कैसे हो पाएगी?” नक्खीघाट पर प्रशासन ने तीन नावों की व्यवस्था की है। लोग इन्हीं नावों से अपने घर आ-जा रहे हैं, लेकिन … Read more

महाकाल मंदिर में खुदाई में निकला शिवलिंग

उज्जैन. उज्जैन के महाकाल मंदिर के विस्तारीकरण के लिए चल रही खुदाई के दौरान मंगलवार को शिवलिंग निकला है. फिलहाल प्रशासन ने इस शिवलिंग (Shivling) को चादर से ढांक दिया है. आगे की खुदाई पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में शुरू की जाएगी. उसके बाद शिवलिंग बाहर निकाला जाएगा. महाकाल मंदिर कैंपस के विस्तारीकरण के लिए एक साल से चल रही खुदाई में 11 वीं शताब्दी के 1000 साल पुराने परमार कालीन मंदिर का ढांचा सामने आया था. उसके बाद भोपाल से आयी पुरातत्व विभाग की टीम की देख रेख में खुदाई चल रही है. काम आगे बढ़ा तो उसमें परमार कालीन वास्तुकला का बेहद खूबसूरत मंदिर निकला था. शिवलिंग निकला आगे की तरफ चल रही खुदाई के दौरान एक बड़े शिवलिंग का भाग भूगर्भ में दिखाई दिया. धीरे-धीरे खोदा गया तो शिवलिंग की पूरी जिलहरी बाहर आ गई. इसकी सूचना मंदिर प्रशासन के अधिकारियों को मिली तो उन्होंने खुदाई वाले स्थान पर पहुंच कर फिलहाल शिवलिंग को चादर से ढांक दिया. इसकी जानकारी पुरातत्व विभाग के शोध अधिकारी दुर्गेंद्र सिंह जोधा को दी गयी है. इस स्थान पर अब आगे पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में खुदाई कर शिवलिंग निकाला जाएगा. लगातार मिल रहे हैं अवशेष पुरातत्व अधिकारी रमेश यादव ने बताया कि आज टीम के सदस्य उज्जैन पहुचंगे उसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा. 30 मई को महाकाल मंदिर के आगे के भाग में खुदाई के दौरान माता की प्रतिमा और स्थापत्य खंड सहित कई पुरातत्व अवशेष मिले थे. उन पर पुरातत्व विभाग का शोध जारी है. महाकाल मंदिर विस्तारीकरण खुदाई में निकले 11 वीं शताब्दी के 1000 वर्ष पुराने परमार कालीन मंदिर का ढांचा पूरा साफ़ साफ बाहर दिखाई देने लगा था. माता की प्रतिमा और स्थापत्य खंड मिलने की जानकारी जैसे ही संस्कृति विभाग को लगी थी उन्होंने तुरंत पुरातत्व विभाग भोपाल की एक चार सस्दय टीम को उज्जैन महाकाल मंदिर में अवलोकन के लिए भेजा था. टीम ने बारीकी से मंदिर के उत्तर भाग और दक्षिण भाग का निरक्षण किया. टीम को लीड कर रहे पुरातत्वीय अधिकारी डॉ रमेश यादव ने बताया था कि ग्यारहवीं-बारहवीं शताब्दी का मंदिर नीचे दबा हुआ है जो उत्तर वाले भाग में है. दक्षिण की तरफ चार मीटर नीचे एक दीवार मिली है जो करीब करीब 2100 साल पुरानी हो सकती है

शिवराज सरकार का दावा- ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई एक भी मौत, HC हैरान

भोपाल. मध्य प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर (Second wave of Corona) में ऑक्सीजन (Oxygen) की कमी से एक भी मरीज की मौत ना होने के सरकारी दावे पर अब हाईकोर्ट ने भी हैरानी जताई है. जबलपुर हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि ये मानना आसान नहीं है कि प्रदेश में एक भी मरीज की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई. हाईकोर्ट ने ये टिप्पणी उन याचिकाओं की सुनवाई करते हुए की जिनमें ऑक्सीजन की कमी से कोरोना मरीजों की मौत पर सरकार से मुआवजा मांगा गया है. जबलपुर हाईकोर्ट इसी साल अप्रैल महीने में अपने एक आदेश में प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी से 77 मरीजों की जिले वार मौतें गिनवा चुका था. लेकिन बाद में राज्य सरकार ने कोर्ट में हलफनामा पेश करते हुए दावा किया था कि प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी से कोरोना के किसी मरीज की मौत नहीं हुई. ऐसे में आज जब ऑक्सीजन की कमी से मौतों पर मुआवजा देने का मुद्दा कोर्ट में उठा तो हाईकोर्ट ने सरकारी दावे पर हैरानी जताई है. HC ने पूछा-सरकार अब क्या करेगी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की डिवीजन बैंच ने राज्य सरकार से मामले पर जवाब मांगा है. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि जब वो ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत ना होने का दावा कर चुकी है तो ऐसी मौतों पर मुआवज़े के आवेदनों पर वो क्या कदम उठाएगी. सुनवाई के दौरान यचिकाकर्ताओं की ओर से मांग की गयी कि ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की मौतों की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी या कमेटी से करवाई जाए. हाईकोर्ट ने जवाब मांगा बहरहाल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मामले पर जवाब मांगा है. ताकि इन मांगों पर कोर्ट आगे कोई फैसला ले सके. जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब देने के लिए 3 हफ्ते का समय दिया है. मामले पर अगली सुनवाई 6 सितंबर को की जाएगी.

BJP के 3 संगठन मंत्रियों को मिलेगी निगम-मंडलों की कमान

भोपाल। मध्यप्रदेश में निगम-मंडलों में जल्द नियुक्तियों के संकेत मिले हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक (RSS) की पृष्ठभूमि से आने वाले भाजपा के 3 संभागीय संगठन मंत्रियों को निगम-मंडलों की कमान देने की तैयारी है। इसमें जितेंद्र लिटोरिया (उज्जैन संभाग), शैलेंद्र बरुआ (जबलपुर व होशंगाबाद संभाग) और आशुतोष तिवारी (भोपाल व ग्वालियर संभाग) के नाम सामने आए हैं। इन नामों को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के बीच सहमति बन गई है। बीजेपी सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से भाजपा में आए इन नेताओं को प्रदेश में बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने के कयास कई दिनों से लगाए जा रहे थे, क्योंकि बीजेपी संभाग और जिलों में संगठन को नया स्वरूप देना चाहती है। ऐसा पहली बार हो रहा है, जब बीजेपी के जिलों में तैनात संगठन मंत्रियों को भी हटाया जा रहा है। इन्हें प्रदेश कार्यकारिणी या अन्य पदों पर एडजस्ट करने की तैयारी है। नई व्यवस्था के तहत संभागीय मुख्यालयों में संगठन मंत्री रहेंगे। सरकार के सूत्रों ने बताया कि निगम-मंडलों के खाली राजनीतिक पदों को भरने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने 1 अगस्त को कोलार डैम रेस्ट हाउस में बैठक की थी। यह बैठक करीब 10 घंटे चली थी। इसमें संगठन मंत्रियों को नई जिम्मेदारी देने पर भी मंथन हुआ था। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष के अलावा प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत और सह संगठन मंत्री हितानंद के बीच प्रदेश के 6 संभागीय संगठन मंत्रियों में से 3 जितेंद्र लिटोरिया, शैलेंद्र बरुआ और आशुतोष तिवारी को निगम-मंडल में पद देने पर सहमति बन गई है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मुख्य रूप से निगम-मंडलों, प्राधिकरणों में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष व अन्य पदों के लिए नाम तय हो चुके हैं। अगले 5-7 दिनों में विभागवार आदेश जारी कर दिए जाएंगे। कमलनाथ सरकार में हुई थीं नियुक्तियां निगम-मंडलों में 2018 से नियुक्तियां नहीं हुई हैं। कमलनाथ ने अपनी सरकार जाते-जाते कुछ जगहों पर नियुक्तियां कर दी थीं। 23 मार्च 2020 में शिवराज सरकार आने के बाद बाकी की जगहों पर नियुक्तियां अटकी हैं। अब नगरीय निकाय व पंचायत चुनाव से पहले इन पदों को भरना चाहती है। यह नियुक्तियां नहीं हो पाने के कारण पार्टी नेताओं में असंतोष बढ़ता रहा है। सिंधिया के 4 समर्थकों को जगह देने पक सहमति सूत्रों के मुताबिक ज्योतिरादित्य सिंधिया के 4 समर्थक नेताओं को निगम-मंडल में जगह दिए जाने पर मुख्यमंत्री ने सहमति दे दी है। माना जा रहा है कि इमरती देवी, ऐदल सिंह कंषाना, मुन्नालाल गोयल और गिर्राज दंडोतिया को इसमें शामिल किया जाएगा। इन्हें निगम-मंडल में अध्यक्ष बनाया जा सकता है। पिछले भोपाल प्रवास के दौरान सिंधिया की शिवराज और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के साथ हुई बैठक में इन 4 नामों को लेकर चर्चा हुई थी।

क्रिमिनल केस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त :MP-MLA के क्रिमिनल केस वापस नहीं ले सकेंगी राज्य सरकारें

नई दिल्ली. अब राज्य सरकारें सांसदों और विधायकों पर चल रहे क्रिमिनल केस वापस नहीं ले सकेंगी। इसके लिए संबंधित राज्य के हाईकोर्ट की मंजूरी जरूरी होगी। आपराधिक मामलों में सजा पाने वाले सांसदों और विधायकों को हमेशा के लिए चुनाव लड़ने से रोकने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह बात कही। कोर्ट ने सितंबर 2020 के बाद सांसदों-विधायकों के वापस लिए गए केस दोबारा खोलने को भी कहा है। सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने यह पिटीशन दाखिल की थी। इसमें सांसदों-विधायकों के केस के जल्दी निपटारे के लिए स्पेशल कोर्ट बनाने की भी मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में 3 जजों की बेंच ने इस मामले में सुनवाई की। इसमें चीफ जस्टिस एवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विनीत सरन शामिल थे। MP-MLA के बंद मामले फिर खोलने के निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने के अजीत बनाम केरल सरकार केस में आए फैसले का हवाला देते हुए सभी स्टेट हाईकोर्ट से अपील की है कि वे सितंबर 2020 और उसके बाद सांसदों-विधायकों के खिलाफ वापस लिए गए सभी मामलों की फिर से जांच करें। CJI ने सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पेंडिंग केस और निपटाए गए केस का चार्ट पेश करने का आदेश भी दिया। चीफ जस्टिस ने CBI को फटकार लगाई मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के सहयोगी वकील विजय हंसरिया ने कोर्ट को बताया कि उन्हें इस तरह के केसों को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) से स्टेटस रिपोर्ट मिल चुकी है, लेकिन CBI ने अभी तक स्टेटस रिपोर्ट सब्मिट नहीं की है। इस पर चीफ जस्टिस ने CBI को फटकार लगाते हुए कहा, ‘हम आश्वस्त हैं कि सरकार इस मुद्दे पर बहुत गंभीर है और कुछ करना चाहती है, लेकिन अब तक कोई प्रोग्रेस नहीं हुई है। जब आप (CBI) स्टेटस रिपोर्ट भी फाइल नहीं करना चाहते, तो हमसे क्या उम्मीद कर सकते हैं?’ सरकार की तरफ से मौका देने की अपील इसके जवाब में CBI का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से स्टेटस रिपोर्ट सब्मिट करने के लिए और समय की मांग की। मेहता ने कहा, ‘हमने कल ED की ओर से एक रिपोर्ट दायर की थी। CBI के डायरेक्टर को भी जल्द से जल्द स्टेटस रिपोर्ट सब्मिट करने को कहा है।’ सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट से इस केस में एक आखिरी मौका देने की अपील की। कर्नाटक ने 61 MP-MLA के केस वापस लिए इससे पहले, कोर्ट के सहयोगी वकील हंसरिया ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने 61 सांसदों-विधायकों के खिलाफ केस वापस ले लिए हैं। इस पर भी कोर्ट को विचार करना चाहिए। UP-उत्तराखंड में भी क्रिमिनल केस वापस हुए हंसरिया ने कहा कि यूपी और उत्तराखंड समेत कई राज्य सरकारों ने अपने आदेश के जरिए दोषी जनप्रतिनिधियों के खिलाफ क्रिमिनल केस वापस ले लिए हैं। कोर्ट मित्र ने सुप्रीम कोर्ट से दखल की अपील की हंसरिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में ऑर्डर पास करना चाहिए कि संबंधित राज्य के हाईकोर्ट के आदेश के बिना राज्य सरकारें दोषी सांसदों-विधायकों के क्रिमिनल केस वापस नहीं ले सकें। CBI और स्पेशल कोर्ट सुनवाई जारी रखेंगे सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CBI कोर्ट और स्पेशल कोर्ट में MP-MLA के खिलाफ ऐसे केस की सुनवाई करने वाले जज अगले आदेश तक सुनवाई जारी रखेंगे। केस की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी चीफ जस्टिस ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के निवेदन पर मामले की सुनवाई 2 हफ्ते के लिए टाल दी। अब कोर्ट 25 अगस्त को इस मामले में सुनवाई करेगा।

इंग्लैंड टेस्ट सीरीज पर संकट:पंत समेत 2 खिलाड़ियों के बाद एक कोचिंग स्टाफ भी कोरोना पॉजिटिव

लंदन। इंग्लैंड दौरे पर गई टीम इंडिया कोरोना के चपेट में आ गई है। विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत समेत 2 खिलाड़ियों का टेस्ट पॉजिटिव पाया गया था। अब टीम इंडिया का एक सपोर्टिंग स्टाफ भी संक्रमित मिला है। थ्रो-डाउन एक्सपर्ट दयानंद गरानी की बुधवार को टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। दयानंद के संपर्क में आए विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋद्धिमान साहा, बॉलिंग कोच भरत अरुण और अभिमन्यु ईश्वरन को आइसोलेट कर दिया गया है। भारतीय खिलाड़ियों और स्टाफ को गुरुवार को ही डरहम में क्वारैंटाइन होना है। पर पंत, दयानंद, साहा, अरुण और ईश्वरन लंदन में ही क्वारैंटाइन रहेंगे। साहा IPL 2021 के दौरान एक बार कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। 10 दिन के आइसोलेशन पीरियड से गुजरना होगा आइसोलेट हुए किसी भी खिलाड़ी या स्टाफ को डरहम नहीं भेजा जाएगा। इन सभी को 10 दिन के आइसोलेशन पीरियड से गुजारना होगा। इस दौरान इनकी कोरोना जांच भी की जाएगी। 10 दिन के बाद ही ये टीम को जॉइन कर पाएंगे। BCCI की मेडिकल टीम इनका ध्यान रख रही है। वहीं, पंत को आइसोलेशन में 8 दिन हो चुके हैं। उन्हें 2 निगेटिव RT-PCR टेस्ट लाने के बाद ही डरहम भेजा जाएगा। पंत का 18 जुलाई को दूसरा टेस्ट किया जाएगा। हालांकि, पंत में कोई लक्षण नहीं हैं। उनके अलावा दूसरे खिलाड़ी की कोरोना टेस्ट रिपोर्ट 10 जुलाई को निगेटिव आ चुकी है। टीम इंडिया को 20 जुलाई से काउंटी-XI के खिलाफ डरहम में ही 3 दिन का प्रैक्टिस मैच भी खेलना है। 8 जुलाई को कोरोना पॉजिटिव आए थे पंत BCCI के एक अधिकारी ने भास्कर को बताया कि ऋषभ पंत 10 जुलाई से पहले कोरोना पॉजिटिव आए थे। पंत 29 जून को यूरो कप के राउंड ऑफ 16 (इंग्लैंड vs जर्मनी) का मैच देखने पहुंचे थे। पंत के अलावा हनुमा विहारी और जसप्रीत बुमराह भी मैच देखने पहुंचे थे। अब सवाल उठ रहे हैं कि पंत की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के इतने दिन बाद भी मैनेजमेंट ने सख्त कदम क्यों नहीं उठाए। पंत के पॉजिटिव आने के बाद टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री 11 जुलाई को विम्बलडन फाइनल देखने पहुंचे थे। बाकी खिलाड़ी भी परिवार के साथ घूमते दिखे थे। किसी को रोका नहीं गया और न ही कोई सुरक्षात्मक कदम उठाए गए। सभी खिलाड़ियों को कोरोना वैक्सीन कोवीशील्ड का पहला डोज ही लगा है। सभी खिलाड़ियों को दूसरा डोज इंग्लैंड में ही लगना है। इनमें से कुछ को दूसरा डोज लग चुका है। लंदन के आसपास फैमिली के साथ छुट्टी मना रहे थे खिलाड़ी कप्तान विराट कोहली और रोहित शर्मा समेत कई खिलाड़ी फैमिली के साथ ही इंग्लैंड पहुंचे हैं। 23 जून को साउथैम्पटन में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल खेलने के बाद वे फैमिली के साथ छुट्टी मना रहे थे। BCCI अधिकारी के मुताबिक, भारतीय टीम के ज्यादातर खिलाड़ी लंदन के आस-पास ही रहे। कुछ खिलाड़ी इंग्लैंड के अलग-अलग हिस्सों में भी घूमने पहुंचे थे। इंग्लैंड के भी 3 खिलाड़ी पॉजिटिव वनडे सीरीज से ठीक 2 दिन पहले यानी, 6 जुलाई को इंग्लैंड के 3 खिलाड़ी समेत 7 लोग पॉजिटिव आए थे। इसके बाद सभी को आइसोलेट किया गया और पाकिस्तान के खिलाफ पहले मैच में पूरी नई टीम उतारी गई थी। हालांकि, सभी खिलाड़ी अब ठीक हैं। इसके बाद BCCI ने कहा था कि इंडियन टीम मैनेजमेंट कोरोना को लेकर इंग्लिश टीम में बनी स्थिति से अवगत है। अगर इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB) हमें अपने कार्यक्रम में बदलाव करने को कहता है, या कोई नया प्रोटोकोल देता है तो हम उसका पालन करेंगे। फिलहाल पहले से तय कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 4 अगस्त से शुरू होगी 5 टेस्ट मैचों की सीरीज टीम इंडिया को इंग्लैंड के खिलाफ अगस्त-सितंबर में 5 टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है। पहला मैच 4 अगस्त से नॉटिंघम में शुरू होगा। भारत को इससे पहले इंग्लैंड में लगातार तीन टेस्ट सीरीज में हार का सामना करना पड़ा है।

तालिबान के हाथ लगा खजाना: की पर कब्जा किया तो मिले 300 करोड़ रुपए

काबुल। अफगानिस्तान की 85% जमीन कब्जा चुका अफगान तालिबान दिन-ब-दिन अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। तालिबान के लड़ाके रोजाना अफगानिस्तान की सेना की चौकियों पर कब्जा कर रहे हैं। पाकिस्तान से सटी ऐसी ही एक चौकी पर कब्जा करने जब तालिबान के आतंकी पहुंचे तो उनकी किस्मत खुल गई। यहां उन्हें 3 अरब पाकिस्तानी रुपए (300 करोड़) मिले। पाकिस्तानी मीडिया जियो न्यूज के मुताबिक तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने स्टेटमेंट जारी कर ये बात कबूली है। घटना कंधार जिले के बोल्डाक में पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर क्रॉसिंग पर बनी चेक पोस्ट की है। जियो न्यूज के अनुसार तालिबानियों को अपनी तरफ आता देख अफगानिस्तान की सेना चेक पोस्ट छोड़कर भाग गई। अफगानिस्तान का झंडा हटाकर तालिबानी झंडा लगाया चौकी पर कब्जा करते ही तालिबानी लड़ाकों ने सबसे पहले अफगानिस्तान का झंडा हटाया और अपना झंडा लगा दिया। इस चौकी को रणनीतिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां से अफगानिस्तान और पाकिस्तान की बॉर्डर को आसानी से क्रॉस किया जा सकता है। इसे बोल्डाक-चमन-कंधार रोड कहा जाता है। अब इस पर तालिबान का कब्जा हो गया है। तालिबान ने लूटा स्मगलर्स से लिया पैसा पाकिस्तान की सेना ने भी कंफर्म कर दिया है कि चौकी पर तालिबान काबिज हो चुका है। अफगानिस्तान ने रक्षा मंत्रालय ने भी इस घटना पर बयान जारी किया है। उनका कहना है कि वे मामले पर नजर बनाए हैं। पाकिस्तानी जियो न्यूज का कहना है कि आतंकियों के हाथ जो पैसा लगा है, वह स्मगलर्स से लिया गया है। जब भी इस रूट पर कोई स्मगलर पकड़ा जाता था तो अफगानिस्तान के सैनिक उससे रिश्वत ले लेते थे। भारत ने कंधार दूतावास से 50 डिप्लोमेट्स बुला लिए थे इससे पहले 11 जुलाई को भारत के 50 डिप्लोमेट्स और कर्मचारियों ने कंधार का दूतावास खाली कर दिया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था कि दूतावास को बंद नहीं किया गया है। कंधार में तालिबान और अफगानिस्तान की आर्मी में चल रही लड़ाई को देखते हुए स्टाफ को कुछ दिनों के लिए बुलाया है। इसके बाद दूतावास के स्टाफ को एयरफोर्स के विमान से भारत लाया गया था। वहां जाने और वापस आने के लिए पाकिस्तान के रूट का इस्तेमाल नहीं किया गया था।

Gayatri Mantra : गायत्री मंत्र का जाप कब और कैसे करें, जानिए अर्थ और आश्चर्यजनक फायदे

भोपाल। मंत्र जप एक ऐसा उपाय है, जिससे सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं। शास्त्रों में मंत्रों को बहुत शक्तिशाली और चमत्कारी बताया गया है। सबसे ज्यादा प्रभावी मंत्रों में से एक मंत्र है गायत्री मंत्र। इसके जप से बहुत जल्दी शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं। गायत्री मंत्र जप का समय : गायत्री मंत्र जप के लिए 3 समय बताए गए हैं, जप के समय को संध्याकाल भी कहा जाता है। * गायत्री मंत्र के जप का पहला समय है सुबह का। सूर्योदय से थोड़ी देर पहले मंत्र जप शुरू किया जाना चाहिए। जप सूर्योदय के बाद तक करना चाहिए। * मंत्र जप के लिए दूसरा समय है दोपहर का। दोपहर में भी इस मंत्र का जप किया जाता है। * इसके बाद तीसरा समय है शाम को सूर्यास्त से कुछ देर पहले। सूर्यास्त से पहले मंत्र जप शुरू करके सूर्यास्त के कुछ देर बाद तक जप करना चाहिए। यदि संध्याकाल के अतिरिक्त गायत्री मंत्र का जप करना हो तो मौन रहकर या मानसिक रूप से करना चाहिए। मंत्र जप अधिक तेज आवाज में नहीं करना चाहिए। पवित्र और चमत्कारी गायत्री मंत्र : ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।। गायत्री मंत्र का अर्थ : – सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परामात्मा के तेज का हम ध्यान करते हैं, परमात्मा का वह तेज हमारी बुद्धि को सद्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करें। गायत्री मंत्र जप की विधि : * इस मंत्र के जप करने के लिए रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करना श्रेष्ठ होता है। * जप से पहले स्नान आदि कर्मों से खुद को पवित्र कर लेना चाहिए। * मंत्र जप की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए। * घर के मंदिर में या किसी पवित्र स्थान पर गायत्री माता का ध्यान करते हुए मंत्र का जप करना चाहिए। गायत्री मंत्र जप के 8 फायदे * उत्साह एवं सकारात्मकता बढ़ती है। * धर्म और सेवा कार्यों में मन लगता है। * पूर्वाभास होने लगता है। * आशीर्वाद देने की शक्ति बढ़ती है। * स्वप्न सिद्धि प्राप्त होती है। * क्रोध शांत होता है। * त्वचा में चमक आती है। * बुराइयों से मन दूर होता है।

जमीन विवाद में जेठ और बहू को ट्रैक्टर से रौंद कर मार डाला

होशंगाबाद। होशंगाबाद में जमीन विवाद में बहू और जेठ की ट्रैक्टर से कुचल कर हत्या कर दी गई। एक को रॉड मारकर घायल कर दिया। हत्या करने वाले दूर के रिश्तेदार हैं। चार दिन पहले ही कोर्ट ने मृतकों के पक्ष में फैसला दिया था। मंगलवार को आरोपी पक्ष खेत जोतने पहुंच गया, जिसका जेठ और बहू विरोध कर रहे थे। आरोपियों ने खेत में ही ट्रैक्टर से कुचल दिया। मौके पर बहू की मौत हो गई, जबकि जेठ ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। घटना मंगलवार सुबह आदिवासी केसला में ब्लाॅक के ग्राम भगरदा की है। श्रीराम यादव (70) और दिनेश पुत्र हल्का यादव उम्र (42) दूर के रिश्तेदार हैं। दोनों के बीच जमीन को लेकर कमिश्नर कोर्ट में विवाद चल रहा था। चार दिन पहले ही श्रीराम के पक्ष में फैसला हुआ। बावजूद मंगलवार सुबह दिनेश यादव, उसका भाई सुंदरलाल यादव और दो अन्य लोग खेत जोतने पहुंच गए। इसकी जानकारी लगते ही श्रीराम अपने छोटे भाई की पत्नी (बहू) भागवती पति रमेश यादव (55) और पोते रोहित यादव के साथ खेत पहुंचे। उन्होंने दिनेश यादव, सुंदरलाल यादव को खेत जाेतने से रोका। इसे लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो गया। दिनेश यादव ने श्रीराम और भागवती बाई को ट्रैक्टर से कुचल दिया। रोहित को लोहे की रॉड मारकर घायल कर दिया। हादसे में भगवती बाई ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। श्रीराम घायल हो गया। सूचना मिलने पर केसला पुलिस थाने से डायल 100 का स्टाफ और थाना प्रभारी कैलाश पांसे टीम के साथ मौके पर पहुंचे। एंबुलेंस 108 से पायलट शिवशंकर, ईएमटी ब्रजकुमार साहू ने घटना स्थल से बुजुर्ग को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुखतवा ले गए। यहां इलाज के दौरान मौत हो गई। एएसपी अवधेश प्रताप सिंह ने बताया केसला के भरगदा में जमीन विवाद को लेकर दो लोगों पर ट्रैक्टर चढ़ा दिया। हादसे में दोनों की मौत हुई। हत्या का अपराध दर्ज किया है। आगे कार्रवाई जारी है।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet