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अब 21 साल बाद वापस अबूझमाड़ लौटेंगे 25 परिवार, छत्तीसगढ़-नारायणपुर में नक्सलियों के डर से छोड़े गांव

रायपुर. नक्सलियों के डर से अपना गांव छोड़ने के दो दशक से अधिक समय बाद लगभग 25 आदिवासी परिवार छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में अपने मूल स्थान पर लौटने की योजना बना रहे हैं। इन परिवारों के लगभग 100 सदस्यों ने 2003 में अबूझमाड़ स्थित गारपा गांव में घर छोड़ दिया था। 2003 में अबूझमाड़ स्थित गारपा गांव छोड़ने के बाद इन 25 परिवारों को नारायणपुर शहर के बाहरी इलाके में सरकारी भूमि पर बसाया गया। यहां उन्होंने आजीविका के लिए खेती करना शुरू कर दिया। अब 21 साल बाद ये परिवार हाल ही में अपने मूल स्थान को देखने गए। विकास कार्यों और स्थानीय आबादी के लिए पुलिस द्वारा वहां एक शिविर स्थापित करने के बाद अब ये परिवार वहां पुनर्वास की योजना बना रहे हैं। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले की सीमा से लगा अबूझमाड़ हाल तक नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। 4 अक्टूबर को सुरक्षाबलों ने इलाके में एक मुठभेड़ के दौरान 31 नक्सलियों को मार गिराया था। नक्सलियों की धमकी के बाद गांव छोड़ने वाले 60 साल के सुक्कुराम नुरेटी ने पीटीआई को बताया कि पैतृक जमीन छोड़ना कभी आसान नहीं था। हमारे पास अपनी जान बचाने के लिए भागने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। नुरेटी का परिवार उन 25 परिवारों में से एक था, जिन्होंने अप्रैल 2003 में गारपा छोड़ दिया था। नुरेटी अबूझमारिया समुदाय से हैं, जो विशेष रूप से कमजोर एक आदिवासी समूह है। उन्होंने कहा कि गांव के 80 परिवारों में से लगभग 25 लोग ‘गायत्री परिवार’ के अनुयायी थे। नक्सलियों ने इस पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने हमें धमकी दी कि अगर हमने ‘गायत्री परिवार’ का अनुसरण नहीं छोड़ा तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इसलिए हमने गांव छोड़ने का फैसला किया। नुरेटी ने कहा कि वे हमेशा वापस लौटना चाहते थे। पूर्व में जनपद पंचायत के सदस्य रह चुके नुरेटी ने कहा कि अब ऐसा लगता है कि हमारा सपना सच हो जाएगा। वहां एक पुलिस शिविर स्थापित किया गया है और चीजें बेहतर होने लगी हैं। नुरेटी और गांव छोड़ने वाले अन्य लोगों ने पिछले सप्ताह गारपा का दौरा किया। इन लोगों ने भगवान शिव का मंदिर खोला जो 2003 से बंद था। उन्होंने कहा कि हम गांव में फिर से बसने की योजना बना रहे हैं क्योंकि वहां हमारे खेत और घर हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस ने पिछले आठ महीनों में गारपा, कस्तूरमेटा, मस्तूर, इरकभट्टी, मोहंती और होराडी गांवों में सुरक्षा शिविर स्थापित किए हैं। पुलिस के अनुसार, इन शिविरों की स्थापना ने नक्सलियों को क्षेत्र में बहुत सीमित एरिया में धकेल दिया है। नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने कहा कि दूरदराज और नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा शिविर हजारों ग्रामीणों को नियाद नेल्लानार योजनाओं के माध्यम से विकास कार्यों और कल्याणकारी उपायों का लाभ उठाने में मदद करेंगे। नियाद नेल्लानार के तहत राज्य सरकार सुरक्षा शिविरों के 5 किलोमीटर के दायरे में आंतरिक गांवों में विकास कार्य कर रही है। एसपी ने कहा कि नव स्थापित शिविरों के आसपास के गांवों से नक्सलियों द्वारा बेदखल किए गए आदिवासी अपने घरों को लौटने लगे हैं। ग्रामीणों पर पहले विकास परियोजनाओं का विरोध करने के लिए नक्सलियों का दबाव था। लेकिन, वे अब सड़क, मोबाइल टावर, स्वास्थ्य सुविधा और स्कूलों की मांग कर रहे हैं। पुलिस और प्रशासन के प्रयासों से आने वाले दिनों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। बता दें कि लगभग 4,000 वर्ग किमी में फैला अबूझमाड़ प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का गढ़ रहा है। इसके घने जंगल इस संगठन के नेताओं के लिए छिपने का ठिकाना थे। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा बलों की बढ़ती उपस्थिति और क्षेत्र में किए जा रहे विकास कार्यों के कारण हाल के वर्षों में अबूझमाड़ में नक्सलियों की गतिविधियों में कमी आई है।

सुरक्षाबलों के दो जवान भी घायल, छत्तीसगढ़-नारायणपुर में मुठभेड़ में 4 नक्सली ढेर

नारायणपुर. छत्तीसगढ़ के नारायणपुर के अबुझमाड़ में नक्सलियों से जवानों की जबरदस्त मुठभेड़ जारी है। इस मुठभेड़ में अब तक 5 नक्सलियों को जवानों द्वारा मार गिराने की खबर सामने आई है। इस एनकाउंटर में सुरक्षाबलों के दो जवान भी घायल हुए हैं। जवान घायल हुए है जिनकी स्थिति सामान्य व खतरे से बाहर है। दोनों घायल जवानों को बेहतर ईलाज के लिए आवश्यक व्यवस्था की जा रही है। छत्तीसगढ़ में 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में सरकार ने अपने कदम तेज़ी से बढ़ाना शुरू कर दिया है। दक्षिण बस्तर जो नक्सलियों का अब तक का सबसे मजबूत इलाका माना जाता है। यहाँ दो कैम्प लगा सुरक्षाबलों ने नक्सलवाद के समापन का बिगुल फूंक दिया है। वहीं बस्तर के दूसरे छोर पर कांकेर, नारायणपुर के अबुझमाड़ में जवानों का नक्सलियों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन जारी है। इस मामले की जानकारी देते हुए बताया गया है कि मुठभेड़ अब भी जारी है। अबूझमाड़ में चल रही इस मुठभेड़ के पूरे मामले पर बस्तर आईजी पी. सुंदरराज खुद ऑपरेशन में अधिकारियों से सम्पर्क साधे हुए हैं। नक्सलियों के बटालियन के इलाके में दो नए कैम्प छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलियों के सबसे मजबूत माने जाने वाले सुकमा के तुमलपाड़ और बीजापुर के कोंडापल्ली में सुरक्षाबलों ने दो नए कैम्प खोला है। यहां कई बार नक्सलियों और जवानों के बीच मुठभेड़ हो चुकी है। कैम्प खोलने से पहले जवानों ने पूरे इलाके को अपने कब्जे में लिया। इसी बीच 14 नवम्बर की पूरी रात साम साढ़े 6 बजे से लेकर सुबह तक नक्सलियों और जवानों के बीच मुठभेड़ चलती रही। इधर मुठभेड़ के बाद से हालात सामान्य जवानों के काबू में हैं। इस घटना से पहले 9 नवंबर को बीजापुर में जवानों ने 8 लाख के इनामी प्लाटून कमांडर समेत तीन नक्सलियों का शव बरामद किया था। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक पी सुंदरराज ने बताया कि जवानों ने इलाके से भारी मात्रा में हथियार भी बरामद किए हैं। बीते दिनों सीआरपीएफ, एसटीेफ और डीआरजी के जवानों के बीच मुठभेड़ हुई थी। मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों का शव बरामद कर लिया गया है।

शिनाख्त में जुटी पुलिस, छत्तीसगढ़-कोरबा में स्वामी आत्मानंद स्कूल के पास शव मिलने से मचा हड़कंप

कोरबा. कोरबा के कटघोरा मुख्य मार्ग पर संचालित स्वामी आत्मानंद स्कूल के पास एक व्यक्ति का शव मिलने से हड़कंप मच गया। मृतक कौन है और कहां का रहने वाला है इस संबंध में किसी तरह की जानकारी नहीं मिल सकी है। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरु कर दी है। कटघोरा थानाक्षेत्र के तहत स्वामी आत्मानंद स्कूल के पास उस वक्त सनसनी फैल गई जब मॉनिंग वॉक पर निकले लोगों ने एक व्यक्ति का शव देखा। मामले की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच में जुटी है। वहीं पुलिस ने बतााया कि आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच की जारी है।

फसल गिरदावरी में लापरवाही पर गिरी गाज, छत्तीसगढ़-बेमेतरा के एसडीएम ने पटवारी को किया निलंबित

बेमेतरा. बेमेतरा जिले में गिरदावरी (फसल मूल्यांकन) कार्य में लापरवाही बरतने वाले पटवारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई। शासन के निर्देश पर पटवारियों द्वारा किए फसल गिरदावरी का जिला स्तरीय और ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों द्वारा सत्यापन कराया गया। गिरदावरी सत्यापन में ग्राम कठिया, पेंड्री, झलमला, रांका व कुरुद के विभिन्न खसरा नंबर में हल्का पटवारी अश्विनी भास्कर द्वारा गड़बड़ी पाई गई। लापरवाही मिलने पर बेरला एसडीएम (राजस्व) पिंकी मनहर ने अश्विनी भास्कर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। जवाब संतोषप्रद नहीं होने के कारण अब सस्पेंड कर दिया गया है। सस्पेंड अवधि में मुख्यालय तहसील कार्यालय बेरला नियत की गई। इन्हें नियमानुसार निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी। वहीं नवरतन साहू पटवारी ग्राम भिंभौरी को उनके कार्य के साथ-साथ हल्का नंबर 19,20,21 का अतिरिक्त प्रभार अस्थायी रूप से सौंपा गया है। बता दें कि धान खरीदी से पहले गिरदावरी सर्वे किया गया था। इस सर्वे के बाद जिले के अफसरों ने मौके पर जाकर सत्यापन किया था। इसी माह में कलेक्टर रणबीर शर्मा ने बेरला ब्लॉक के ग्राम आनंदगांव में धान फसल के गिरदावरी का सत्यापन भी किया था। गिरदावरी सत्यापन का मुख्य उद्देश्य फसल की स्थिति का वास्तविक आंकलन करना है।

परिजनों में पसरा मातम, छत्तीसगढ़-कबीरधाम में थ्रेसिंग के दौरान कटकर महिला की मौत

कबीरधाम. कबीरधाम में आज तड़के थ्रेशर से धान की कटाई के दौरान चपेट में आने से सुनैना चन्द्रवंशी पति चितरंजन चन्द्रवंशी उम्र 45 वर्ष निवासी ग्राम नेऊरगांव कला की मौत हो गई। काम के दौरान महिला थ्रेशर में फंस गई। इससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। मामला बोड़ला थाना क्षेत्र का है। हादसे के बाद घायल महिला को बोड़ला के सरकारी अस्पताल ले जाया जा रहा था तभी रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। वहीं हादसे के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है। दरअसल वर्तमान में कबीरधाम जिले के सभी केन्द्रों में धान की खरीदी हो रही है। किसानों द्वारा धान को केन्द्रों में बेचा जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में मध्यम वर्ग को बड़ी राहत, अब गाइड लाइन मूल्य पर ही लगेगा संपत्ति रजिस्ट्री शुल्क

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने संपत्ति खरीदने वाले मध्यम वर्ग के लोगों को बड़ी राहत दी है। अब किसी भी प्रापर्टी की खरीद-बिक्री में गाइड लाइन दर से सौदे की रकम अधिक होने पर भी रजिस्ट्री शुल्क गाइड लाइन दर के अनुसार ही लिया जाएगा। इससे बैंक लोन पर निर्भर मध्यम वर्गीय परिवार को वास्तविक मूल्य के आधार पर ऋण मिल सकेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में पिछले दिनों कैबिनेट की बैठक में लिए गए इस फैसले से विशेषकर उन नागरिकों को लाभ होगा, जो बैंक ऋण के माध्यम से संपत्ति खरीदते हैं। पूर्व में संपत्ति की खरीद-बिक्री में गाइड लाइन दर और सौदे की राशि में जो भी अधिक होता था, उस पर रजिस्ट्री शुल्क देना आवश्यक था। उदाहरण के लिए यदि किसी संपत्ति का गाइड लाइन मूल्य 10 लाख रुपये है और उसका सौदा 15 लाख में हुआ, तो रजिस्ट्री शुल्क 15 लाख पर 4 प्रतिशत के हिसाब से 60 हजार रुपये देना पड़ता था। इस नियम में संशोधन के बाद संपत्ति खरीदने वाले अब सौदे की रकम गाइड लाइन दर से अधिक होने पर भी वास्तविक मूल्य को अंकित कर सकते हैं और इसके लिए उन्हें कोई रजिस्ट्री शुल्क नहीं देना होगा। 10 लाख रुपये की गाइड लाइन मूल्य वाली प्रॉपर्टी का सौदा 15 लाख में होता है, तो भी रजिस्ट्री शुल्क 10 लाख के 4 प्रतिशत के हिसाब से 40 हजार रुपये देय होगा। इस तरह 20 हजार रुपये की बचत होगी। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि इस संशोधन से मध्यम वर्गीय परिवारों को वास्तविक मूल्य के आधार पर अधिक बैंक ऋण प्राप्त करने में सहूलियत होगी। इसके अलावा यह निर्णय संपत्ति बाजार में पारदर्शिता व स्पष्टता को बढ़ाने में भी सहायक होगा और इससे वास्तविक मूल्य दर्शाने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा। देश के अन्य राज्यों में जमीन की गाइडलाइन कीमत या सौदा मूल्य दोनों में से जो ज्यादा हो उस पर पंजीयन शुल्क लगता है। केवल मध्य प्रदेश में गाइडलाइन कीमत से अधिक सौदा मूल्य दर्शाने पर उसमें पंजीयन शुल्क में छूट दी गई है। इसके कारण वहां लोगों में वास्तविक सौदा मूल्य को रजिस्ट्री पेपर में लिखने की प्रवृत्ति में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। वर्तमान में किसी संपत्ति का सौदा मूल्य सामान्यतः गाइडलाइन मूल्य से बहुत ज्यादा होता है। लेकिन लोग गाइडलाइन मूल्य या इसके आसपास का ही सौदा मूल्य अंकित करते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि अगर वास्तविक सौदा राशि अंकित कर देंगे, तो पंजीयन शुल्क गाइडलाइन मूल्य या वास्तविक सौदा राशि दोनों में से जो ज्यादा हो उस पर लगेगा। अधिक पंजीयन शुल्क से बचने के लिए लोग गाइडलाइन कीमत या इसके आसपास पूर्णांकित करते हुए सौदा मूल्य डाल देते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की इस पहल का सीधा लाभ राज्य के सभी मध्यमवर्गीय परिवारों को मिलेगा क्योंकि अधिकांश मध्यमवर्गीय परिवार संपत्ति खरीदने के लिए बैंक लोन पर निर्भर रहते हैं। बैंक लोन रजिस्ट्री पेपर में दिखाए गए सौदे के रकम के आधार पर मिलता है, लोग पंजीयन शुल्क से बचने के लिए गाइडलाइन कीमत के बराबर सौदा मूल्य दिखाते हैं। कम सौदा कीमत दिखाएं जाने से बैंक लोन भी कम मिलता है। इस नीति से आमजनों को न्यायिक प्रकरणों में भी संपत्ति का वास्तविक मूल्य प्राप्त होगा। यदि कभी संपत्ति में कुछ धोखाधड़ी पायी गई तो व्यक्ति विक्रेता से वही मुआवजा पाने का हकदार होता है, जो रजिस्ट्री पेपर में लिखा हुआ। संपत्ति का सही मूल्य रजिस्ट्री में अंकित होने से प्रभावित व्यक्ति को उसका सही मुआवजा प्राप्त हो पायेगा।

हादसे के बाद चक्का जाम, छत्तीसगढ़-कोरबा में लोडिंग वाहन की चपेट में आने से एक की मौत

कोरबा. करतला थाना क्षेत्र अंतर्गत रामपुर  नोनबिर्रा मुख्य मार्ग पर शनिवार रात्रि लगभग 10 बजे डीबीएल कंपनी के भारी वाहन की चपेट में आने से मोटर साइकिल सवार एक युवक की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे के बाद देखते ही देखते राहगीरों की भीड़ एकत्रित हो गई। घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने चक्का जाम कर दिया। परिजनों सहित स्थानीय लोगों ने सड़क पर बैठकर चक्का जाम कर दिया और मुवावजे की मांग करने लगे। वहीं घटना की सूचना मिलते ही 112 और करतला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझने का प्रयास किया। मृतक युवक सरवन राठिया पिता छेदुराम उम्र लगभग 25 वर्षीय मुढुनारा का रहने वाला था। स्थानी लोगों की मानें तो भारी वाहन की रफ्तार काफी तेज थी। युवक को अपनी चपेट में लेने के बाद चालक मौके से फरार हो गया। वहीं मोटर साइकिल के परखच्चे उड़ गए जानकारी के अनुसार, स्थानीय लोगों ने कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुवावजे की मांग पर अड़े रहे। बताया जा रहा है कि मृतक युवक बाइक पर सवार होकर शनिवार की सुबह दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने के लिए निकला हुआ था। जहां किसी रिश्तेदार के यहां मुलाकात करने के बाद रात आठ बजे अपने घर वापस लौट रहा था। इस दौरान यह हादसा हो गया। पुलिस ने ग्रामीणों को समझाया और तीन घंटे की मशक्कत के बाद चक्का जाम खत्म हुआ। मृतक के परिजन को तत्काल 50000 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई।

अतिक्रमण पर सरपंच के खिलाफ अब होगी जांच, कलेक्टर-एसडीएम का आदेश कमिश्नर ने पलटा

रायपुर सरपंच और उसके परिजनों के विरुद्ध उपसरपंच और पंचों ने अतिक्रमण की शिकायत की थी. मामले में संभागायुक्त महादेव कावरे ने धमतरी कलेक्टर और एसडीएम के आदेश को पलटते हुए कुरुद एसडीएम को शिकायत की सूक्ष्म जांच कर एक माह में विधिसम्मत निर्णय देने के आदेश दिए हैं. बता दें कि धमतरी ज़िले की कुर्रा ग्राम पंचायत के सरपंच खम्हन लाल साहू और उनके परिजनों द्वारा चार स्थानों पर गाँव की शासकीय भूमि पर अतिक्रमण,अतिक्रमित ज़मीन पर पक्का मकान और दुकान बनाकर लाभ लेने की शिकायत उप सरपंच और पंचों ने की थी. शिकायत की जाँच करते हुए भखारा के तहसीलदार ने सरपंच के परिजनों पर अर्थदंड लगाया था. शिकायतकर्ताओं ने इस पर आगे कार्रवाई के लिए कुरुद के एसडीएम न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया, परंतु एसडीएम ने प्रकरण नस्तीबद्ध कर दिया था. एसडीएम के फैसले के विरुद्ध शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर न्यायालय में अपील की थी. धमतरी कलेक्टर ने भी एसडीएम के फ़ैसले को सही मानते हुए प्रकरण में अपील की मांग ख़ारिज कर दी थी. इसके बाद शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर और एसडीएम के फैसले के विरुद्ध रायपुर संभागायुक्त न्यायालय में अपील की थी. कमिश्नर कावरे ने पूरे प्रकरण में दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर जिरह के लिए बुलाया और प्रस्तुत साक्ष्यों का प्रतिपरीक्षण किया. प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर संभागायुक्त ने एसडीएम के आदेश और कलेक्टर के अपील ख़ारिज करने के फ़ैसले को पलट दिया. संभागायुक्त ने प्रकरण की सुनवाई के बाद उसे पंचायत राज अधिनियम की धारा 36 और धारा 40 के तहत कार्रवाई योग्य माना. उन्होंने प्रकरण में उपलब्ध साक्ष्यों, अवैध अतिक्रमण पर भखारा तहसीलदार के प्रतिवेदन, सरपंच पर शासकीय विकास कार्यों के प्रति लापरवाही और उदासीनता सहित सरपंच के परिजनों द्वारा शासकीय भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण की भी सूक्ष्म जाँच कर एक माह में पूरी कर विधिसम्मत निर्णय देने के भी आदेश दिए है.

छत्तीसगढ़ सरकार ने दी संपत्ति खरीद पर मध्यम वर्ग को मिली राहत, अब 15 लाख के सौदे में रजिस्ट्री शुल्क 40 हजार

रायपुर छत्‍तीसगढ़ सरकार ने संपत्ति खरीदी में मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी है। इसके तहत अब किसी भी प्रापर्टी की खरीदी-बिक्री गाइड लाइन दर के अनुसार ही होगी। अगर आप 15 लाख की प्रापर्टी खरीदते है तो भी रजिस्ट्री शुल्क 10 लाख के अनुसार चार प्रतिशत यानि 40 हजार रुपये लगेगा। यानि प्रापर्टी खरीद-बिक्री की सौदे की राशि अधिक भी है तो भी रजिस्ट्री शुल्क गाइडलाइन दर के अनुसार होगी। इससे बैंक लोन पर निर्भर मध्यम वर्गीय परिवार को वास्तविक मूल्य के आधार पर ऋण मिल सकेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में पिछले दिनों कैबिनेट की बैठक में लिए गए इस फैसले से उन नागरिकों को लाभ होगा, जो बैंक लोन लेकर संपत्ति खरीदते हैं। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि इस संशोधन से मध्यम वर्गीय परिवारों को वास्तविक मूल्य के आधार पर अधिक बैंक लोन लेने में सहूलियत होगी। साथ ही यह निर्णय संपत्ति बाजार में पारदर्शिता व स्पष्टता को बढ़ाने में भी सहायक होगा और इससे वास्तविक मूल्य दर्शाने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा। मध्यप्रदेश में भी है छूट देश के अन्य राज्यों में जमीन की गाइडलाइन कीमत या सौदा मूल्य दोनों में से जो ज्यादा हो उस पर पंजीयन शुल्क लगता है। मध्य प्रदेश में गाइडलाइन कीमत से अधिक सौदा मूल्य दर्शाने पर उसमें पंजीयन शुल्क में छूट दी गई है। इसके कारण वहां लोगों में वास्तविक सौदा मूल्य को रजिस्ट्री पेपर में लिखने की प्रवृत्ति में बढ़ोतरी हुई है।   अब तक ऐसा था वर्तमान में किसी संपत्ति का गाइड लाइन मूल्य 10 लाख रुपये है और उसका सौदा 15 लाख रुपये में हुआ। इस पर रजिस्ट्री शुल्क 15 लाख का चार प्रतिशत यानि 60 हजार रुपये लगते थे। अब राज्य सरकार के इस फैसले के बाद 20 हजार रुपये की बचत होगी। यह होगा फायदा, अब नहीं डालेंगे गलत कीमत वर्तमान में किसी संपत्ति का सौदा मूल्य गाइडलाइन मूल्य से बहुत ज्यादा होता है। लेकिन लोग गाइडलाइन मूल्य या इसके आसपास का ही सौदा मूल्य अंकित करते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि अगर वास्तविक सौदा राशि अंकित कर देंगे, तो पंजीयन शुल्क गाइडलाइन मूल्य या वास्तविक सौदा राशि दोनों में से जो ज्यादा हो उस पर लगेगा। अधिक पंजीयन शुल्क से बचने के लिए लोग गाइडलाइन कीमत या इसके आसपास पूर्णांकित करते हुए सौदा मूल्य डाल देते हैं।अब नियम बदलने के बाद ऐसा नहीं होगा।कम सौदा कीमत दिखाएं जाने से बैंक लोन भी कम मिलता है। इस नीति से आमजनों को न्यायिक प्रकरणों में भी संपत्ति का वास्तविक मूल्य प्राप्त होगा। यदि कभी संपत्ति में कुछ धोखाधड़ी पाई गई तो व्यक्ति विक्रेता से वही मुआवजा पाने का हकदार होता है, जो रजिस्ट्री पेपर में लिखा हुआ।

वास्तविक मूल्य पर मिल सकेगा बैंक लोन, गाइड लाइन मूल्य पर ही लगेगा रजिस्ट्री शुल्क

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के पहल पर छत्तीसगढ़ सरकार ने संपत्ति खरीदने वाले मध्यम वर्ग के लोगों को बड़ी राहत दी है। अब किसी भी प्रापर्टी की खरीद-बिक्री में गाइड लाइन दर से सौदे की रकम अधिक होने पर भी रजिस्ट्री शुल्क गाइड लाइन दर के अनुसार ही लिया जाएगा। इससे बैंक लोन पर निर्भर मध्यम वर्गीय परिवार को वास्तविक मूल्य के आधार पर ऋण मिल सकेगा।   उल्लखेनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी की अध्यक्षता में पिछले दिनों कैबिनेट की बैठक में लिए गए इस फैसले से विशेषकर उन नागरिकों को लाभ होगा, जो बैंक ऋण के माध्यम से संपत्ति खरीदते हैं। पूर्व में संपत्ति की खरीद-बिक्री में गाइड लाइन दर और सौदे की राशि में जो भी अधिक होता था, उस पर रजिस्ट्री शुल्क देना आवश्यक था। उदाहरण के लिए यदि किसी संपत्ति का गाइड लाइन मूल्य 10 लाख रुपये है और उसका सौदा 15 लाख में हुआ, तो रजिस्ट्री शुल्क 15 लाख पर 4 प्रतिशत के हिसाब से 60 हजार रुपये देना पड़ता था। इस नियम में संशोधन के बाद संपत्ति खरीदने वाले अब सौदे की रकम गाइड लाइन दर से अधिक होने पर भी वास्तविक मूल्य को अंकित कर सकते हैं और इसके लिए उन्हें कोई रजिस्ट्री शुल्क नहीं देना होगा। 10 लाख रुपये की गाइड लाइन मूल्य वाली प्रॉपर्टी का सौदा 15 लाख में होता है, तो भी रजिस्ट्री शुल्क 10 लाख के 4 प्रतिशत के हिसाब से 40 हजार रुपये देय होगा। इस तरह 20 हजार रुपये की बचत होगी। वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने बताया कि इस संशोधन से मध्यम वर्गीय परिवारों को वास्तविक मूल्य के आधार पर अधिक बैंक ऋण प्राप्त करने में सहूलियत होगी। इसके अलावा यह निर्णय संपत्ति बाजार में पारदर्शिता व स्पष्टता को बढ़ाने में भी सहायक होगा और इससे वास्तविक मूल्य दर्शाने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा।    देश के अन्य राज्यों में जमीन की गाइडलाइन कीमत या सौदा मूल्य दोनों में से जो ज्यादा हो उस पर पंजीयन शुल्क लगता है। केवल मध्य प्रदेश में गाइडलाइन कीमत से अधिक सौदा मूल्य दर्शाने पर उसमें पंजीयन शुल्क में छूट दी गई है। इसके कारण वहां लोगों में वास्तविक सौदा मूल्य को रजिस्ट्री पेपर में लिखने की प्रवृत्ति में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।   वर्तमान में किसी संपत्ति का सौदा मूल्य सामान्यतः गाइडलाइन मूल्य से बहुत ज्यादा होता है। लेकिन लोग गाइडलाइन मूल्य या इसके आसपास का ही सौदा मूल्य अंकित करते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि अगर वास्तविक सौदा राशि अंकित कर देंगे, तो पंजीयन शुल्क गाइडलाइन मूल्य या वास्तविक सौदा राशि दोनों में से जो ज्यादा हो उस पर लगेगा। अधिक पंजीयन शुल्क से बचने के लिए लोग गाइडलाइन कीमत या इसके आसपास पूर्णांकित करते हुए सौदा मूल्य डाल देते हैं। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार की इस पहल का सीधा लाभ राज्य के सभी मध्यमवर्गीय परिवारों को मिलेगा क्योंकि अधिकांश मध्यमवर्गीय परिवार संपत्ति खरीदने के लिए बैंक लोन पर निर्भर रहते हैं। बैंक लोन रजिस्ट्री पेपर में दिखाए गए सौदे के रकम के आधार पर मिलता है, लोग पंजीयन शुल्क से बचने के लिए गाइडलाइन कीमत के बराबर सौदा मूल्य दिखाते हैं।कम सौदा कीमत दिखाएं जाने से बैंक लोन भी कम मिलता है।इस नीति से आमजनों को न्यायिक प्रकरणों में भी संपत्ति का वास्तविक मूल्य प्राप्त होगा। यदि कभी संपत्ति में कुछ धोखाधड़ी पायी गई तो व्यक्ति विक्रेता से वही मुआवजा पाने का हकदार होता है, जो रजिस्ट्री पेपर में लिखा हुआ। संपत्ति का सही मूल्य रजिस्ट्री में अंकित होने से प्रभावित व्यक्ति को उसका सही मुआवजा प्राप्त हो पायेगा।

साहसिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध बस्तर के धुड़मारास गांव की पहचान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हुई स्थापित

रायपुर छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के छोटे से गांव धुड़मारास ने देश और दुनिया में अपनी अनोखी पहचान बनाई है। बस्तर जिले के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव के उन्नयन कार्यक्रम के लिए चयनित किया गया है। संयुक्त राष्ट्र के पर्यटन ग्राम उन्नयन कार्यक्रम के लिए 60 देशों से चयनित 20 गांवों में भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के धुड़मारास ने भी अपनी जगह बनाई है।   मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि के लिए पर्यटन विभाग की टीम के साथ ही बस्तर जिला प्रशासन तथा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियों व कर्मचारियों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि धुड़मारास की सफलता का मुख्य श्रेय यहां के स्थानीय निवासियों को जाता है, जिन्होंने अपने पारंपरिक ज्ञान और संसाधनों को संरक्षित रखते हुए इसे आकर्षक पर्यटक स्थल में बदल दिया है। धुड़मारास प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। बस्तर के अदभुत आदिवासी जीवनशैली, पारम्परिक व्यंजन, हरियाली और जैव विविधता से समृद्ध यह गांव पर्यटकों के लिए एक आकर्षक ही नहीं बल्कि रोमांचक स्थल है। धुड़मारास गांव दुनिया भर के उन 20 गांवों में से एक है जिसे सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव उन्नयन कार्यक्रम में भाग लेने के लिए चुना गया है। धुड़मारास को इसकी अनूठी सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संुदरता और सतत पर्यटन विकास की क्षमता के कारण चुना गया है। उन्नयन कार्यक्रम में शामिल होने से गांव को उन संसाधनों तक पहंुंच प्राप्त होगी जो इसके पर्यटन बुनियादी ढांचे को बढ़ाने, सांस्कृतिक संपत्तियों को बढ़ावा देने और ग्रामवासियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार में मदद करेंगे। विश्व स्तर पर पर्यटन गांव के रूप में इस गांव की पहचान स्थापित होने का तात्पर्य यह भी है कि लंबे समय के बाद बस्तर में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है। उल्लेखनीय है कि धुड़मारास तथा बस्तर के ही चित्रकोट गांव को इस वर्ष 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव का पुरस्कार मिला था।       प्रकृति की गोद में बसा धुड़मारास गांव घने जंगलों से घिरा हुआ है। गांव के बीच से बहती कांगेर नदी इसे मनमोहक बना देती है। बस्तर के लोग मेहमाननवाजी के लिए जाने जाते हैं। यही वजह है कि स्थानीय लोग अपने घरों को पर्यटकों के लिए उपलब्ध करवा रहे हैं, ठहरने की सुविधा उपलब्ध करवाने से उन्हें रोजगार मिल रहा है। गांव के युवा पर्यटकों को आसपास के क्षेत्रों की सैर कराते हैं। स्थानीय खानपान के अंतर्गत पर्यटकों को बस्तर के पारम्परिक व्यंजन परोसे जाते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर में पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नए ट्रैकिंग ट्रेल और कैंपिंग साइट विकसित करने सहित होम-स्टे की सुलभता हेतु पहल कर रही है। साथ ही स्थानीय शिल्पकारों और कलाकारों को प्रोत्साहन दे रही है, जिससे ईलाके के रहवासी ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार की उपलब्धता होने के साथ आय संवृद्धि हो सके। राज्य सरकार पर्यटकों को आकर्षित करने हेतु क्षेत्र में सड़कों और परिवहन सुविधाओं का विकास पर भी ध्यान दे रही है। बस्तर के पर्यटन स्थलों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में देश के पर्यटकों सहित अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए व्यापक प्रचार- प्रसार किया जा रहा है। वहीं स्थानीय हस्तशिल्प और कला को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।     छत्तीसगढ़ सरकार के वन एवं पर्यटन विभाग ने धुड़मारास को ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब जिले के नागलसर और नेतानार में भी स्थानीय युवाओं की ईको पर्यटन विकास समिति द्वारा गांव में बहने वाली शबरी एवं कांगेर नदी में कयाकिंग एवं बम्बू राफ्टिंग की सुविधा पर्यटकों को मुहैया कराई जा रही है। साथ ही स्थानीय व्यंजन से पर्यटकों को बस्तर के पारम्परिक खान-पान का स्वाद मिल रहा है। गांव के युवाओं की ईको पर्यटन विकास समिति कांगेर नदी में कयाकिंग और बम्बू राफ्टिंग की सुविधाएं पर्यटकों को उपलब्ध करवाती है, जिससे इस समिति को अच्छी आमदनी हो रही है। यह पर्यटन समिति अब अपनी आय से गांव में पर्यटकों के लिए प्रतीक्षालय और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित कर रहे हैं।           बेस्ट टूरिज्म विलेज धुड़मारास की कहानी यह साबित करती है कि जब सामुदायिक भागीदारी और शासन का सहयोग मिलता है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक और सांस्कृतिक विकास संभव है। यह गांव अब बस्तर के अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन गया है। यही वजह है कि कांगेर घाटी नेशनल पार्क के नागलसर और नेतानार में भी ईको-टूरिज्म को बढ़ावा मिल रहा है।

छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाओं को सींच रहे, मजदूर पिता की बेटी रितिका के जज़्बे को मुख्यमंत्री ने सराहा

रायपुर धमतरी की रहने वाली मजदूर पिता की बैडमिंटन प्लेयर बेटी रितिका ध्रुव ने कभी नहीं सोचा था कि उसका अपने खेल के प्रति जुनून एक दिन उसे मुख्यमंत्री से रूबरू करवा देगा। आज जब रितिका को मोबाइल पर वीडियो कॉल में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का स्नेहमयी चेहरा नजर आया तो उसे विश्वास नहीं हुआ कि उसकी बात प्रदेश की मुखिया से हो रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने रितिका से बात करते हुए उसके बैडमिंटन के हुनर को सराहा और उसका हौसला बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आप इसी तरह अपने बैडमिंटन के हुनर को निखारिये। खूब आगे बढ़िये और अपने माता-पिता के साथ पूरे छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाइये। हम आपके साथ हैं, आपको बैडमिंटन के लिए जो भी सहायता व सुविधाएं चाहिए उसे हम आपको देंगे। मुख्यमंत्री की ये बात सुनकर रितिका का चेहरा खिल उठा। मुख्यमंत्री श्री साय ने रितिका से वीडियो-कॉल में बड़ी आत्मीयता से बात की और उसके बैकग्राउंड के विषय में जाना। रितिका ने बताया कि उसके पिता जीवनयापन के लिए मजदूरी का कार्य करते हैं और माता आंगनबाड़ी सहायिका हैं। उसे बचपन से ही बैडमिंटन के खेल में रुचि थी। समय के साथ उसका ये शौक जुनून में बदल गया और वह पूरे तरह से इस खेल के प्रति समर्पित हो गयी। मगर परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि बड़े स्तर के टूर्नामेंट के लिए वह अपने टैलेंट को तराश सके। मुख्यमंत्री ने संघर्षों के बावजूद बैडमिंटन में शानदार प्रदर्शन के लिए रितिका की खूब सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय को रितिका ने वीडियो कॉल पर बताया कि उसने बंगलुरू में खेलो-इंडिया यूनवर्सिटी लेवल गेम्स और हाल ही में ओडीसा में नेशनल टूर्नामेंट में हिस्सा लिया है। वह आगे नेशनल-इंटरनेशनल स्तर पर खेलना चाहती है और ओलम्पिक में मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करना चाहती है। मुख्यमंत्री श्री साय ने रितिका से कहा कि आपका ओलम्पिक का सपना भी पूरा होगा। मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ वे राज्य ओलंपिक संघ के अध्यक्ष भी हैं। आपकी तरह छत्तीसगढ़ की बेटियां जो अपने खेल में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं, उन्हें सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा। मुख्यमंत्री को रितिका ने बताया कि वो अभी बीए अंतिम वर्ष में पढ़ाई भी कर रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने रितिका को खेल के साथ अपनी पढ़ाई भी पूरे मन से करने प्रोत्साहित किया। उन्होंने बिटिया को खूब आशीर्वाद देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री से बात कर के रितिका के चेहरे पर खुशी की मुस्कान छा गयी। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री साय लगातार प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं। उनका प्रयास है कि राज्य में खेल का मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर बनने के साथ-साथ यहां के टैलेंट को आगे बढ़ने का पूरा मौका मिले। इसी क्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने विगत दिनों छत्तीसगढ़ की पर्वतारोही निशा को किलिमंजारो पर्वत फतह करने कॉल कर पूरी मदद का आश्वासन दिया था। आज जब मुख्यमंत्री ने रितिका के संघर्ष और उसकी बैडमिंटन की प्रतिभा को जाना तो वीडियो कॉल पर बिटिया का हौसला बढ़ाया।

युग कवि मुक्ति बोध के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रसंग मुक्तिबोध का आयोजन सम्पन्न

बिलासपुर जीवन मूल्यों के प्रयोगधर्मी कवि और नई कविता को विशिष्ट स्वरूप प्रदान करने वाले युग कवि मुक्ति बोध के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रसंग मुक्तिबोध का आयोजन डीपी चौबे स्मृति ट्रष्ट भवन बिलासपुर के सभागार में सम्पन्न हुआ ।दो दिवसीय (16,17 नवम्बर ) आयोजन के प्रथम दिवस 16 नवम्बर के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध आलोचक वीरेंद्र यादव ने की ।मुख्य वक्ता वरिष्ठ,कवि, कथाकार रणेंद्र थे ।आलोचक जयप्रकाश द्वारा मुक्तिबोध की जीवनी पर लिखी कृति एक अधूरी दीर्घ कविता पर आधारित यह आयोजन था । इस वैचारिक आयोजन के वक्ता डॉ कल्याणी वर्मा, नन्द कुमार कंसारी, थे ।बिलासपुर प्रलेसं के अध्यक्ष हबीब खान इस अवसर पर प्रमुखता से उपस्थित थे ।आधार वक्तव्य प्रलेसं सचिव रफीक खान ने दिया ।  इस अवसर पर मुख्य वक्ता रणेंद्र ने विस्तार से व्याख्या करते हुए कहा मुक्ति बोध संस्कृति के विरुद्ध कभी नही रहे। वे यथास्थितिवाद के खिलाफ थे जो हमें परिवर्तन करने से रोकता है । प्रेमचंद को पढ़कर उनकी मां ने मुक्तिबोध को साहित्य की पहली शिक्षा दी । अध्यक्षता कर रहे प्रखर आलोचक वीरेंद्र यादव ने कहा कि आज के भयावह दौर में प्रतिरोध की बात करना बड़ी बात है ।मुक्तिबोध की सारी रचना समाज को बेहतरी की ओर ले जाने वाली है उनकी सोच कबीर की सोच थी ।       इस अवसर पर जयप्रकाश ने अपनी कृति में उल्लेखित मुक्तिबोध के संघर्षपूर्ण जीवनी को रेखांकित किया ।कुसुम माधुरी टोप्पो ने मुक्तिबोध की कविताओं का पाठ किया। आरम्भ में संरक्षक राजेश्वर सक्सेना के शुभकामना संदेश को प्रोजेक्टर में प्रसारित किया गया । इप्टा बिलासपुर के अध्यक्ष अरुण दाभड़कर ने आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला । आयोजन का संचालन छत्तीसगढ़ प्रलेसं के महासचिव परमेश्वर वैष्णव ने किया । आभार प्रदर्शन प्रलेसं बिलासपुर सचिव अशोक शिरोडे करते हुए नथमल शर्मा के शुभकामना संदेश की सूचना दी।  इस आयोजन में सत्यभामा अवस्थी, लोकबाबू ,नरेश अग्रवाल,हबीब खान, आर के सक्सेना,मंगला देवरस,सचिन शर्मा,मधुकर गोरख,मुस्ताक मकवाना,लखन सिंह,कोमल सिंह शारवा,श्याम बिहारी बनाफर,विमल झा,साक्षी शर्मा,प्रमिथियस ठाकुर संकल्प यदु मांझी अनन्त,पोषल वर्मा,विश्वासी एक्का, मृदुला सिंह आशा शर्मा,आदि साहित्यकार उपस्थित थे आयोजन के अंत मे राजकमल नायक के निर्देशन में मुक्तिबोध की कविताओं पर आधारित नाट्य मंचन इप्टा बिलासपुर द्वारा किया गया । वरिष्ठ कवि वेद प्रकाश अग्रवाल, और डॉ आलोक वर्मा की अध्यक्षता में और संजय शाम के संचालन में काव्य पाठ का आयोजन किया गया ।जिसमें छत्तीसगढ़ प्रलेसं की विभिन्न जिला इकाइयों से आये कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया ।

मंत्री केदार कश्यप ने नारायणपुर के वासियों को दी करोड़ों की सौगते

नारायणपुर, राज्य सरकार के वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, कौशल विकास, सहकारिता और संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप ने नारायणपुर के एक दिवसीय भ्रमण के दौरान 2 करोड़ 12 लाख रूपये का लोकार्पण एवं 65 करोड़ 5 लाख रूपये का भूमिपूजन कर जिले वासियों को सौगत दिया। उन्होंने राहत शिविर भवन निर्माण हेतु 1 करोड़ 50 लाख रूपये, शबरी एम्पोरियम का नवनीकरण कार्य हेतु 24 लाख 52 हजार रूपये, कस्तुरबा गांधी आवासीय विद्यालय 100 सीटर हेतु 37 लाख 70 हजार रूपये से निर्मित भवनों का लोकापर्ण किया। उन्होंने कस्तुरमेटा से इकपाड़ सड़क निर्माण हेतु 2 करोड़ 19 लाख 94 हजार रूपये, कस्तुरमेटा कुतुल रोड से तोके सड़क निर्माण हेतु 10 करोड़ 32 लाख 38 हजार रूपये, सोनपुर मसपुर रोड से तुमेरादि सड़क निर्माण हेतु 14 करोड़ 58 लाख 98 हजार रूपये, सोनपुर से ऐहनार सड़क निर्माण हेतु 4 करोड़ 32 लाख 60 हजार रूपये, कड़ेमेटा से कोडोली सड़क निर्माण हेतु 18 करोड़ 78 लाख 64 हजार रूपये और कस्तुरमेटा से मकसोली सड़क निर्माण हेतु 18 करोड़ 67 लाख 41 हजार रूपये से निर्माण हेतु भूमिपूजन किया गया। इस अवसर पर इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक रूपसाय सलाम, जिला पंचायत सदस्य प्रताप मण्डावी, पार्षद जैकी कश्यप, सरपंच कानागांव मगंड़ूराम नुरेटी, बृजमोहन देवांगन, नरेंद्र मेश्राम, प्रीतेश जैन, नारायण मरकाम, रीता मण्डल, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत वासु जैन, अपर कलेक्टर बीरेंद्र बहादुर पंचभाई, एसडीएम अभयजीत मण्डावी, सहायक आयुक्त राजेंद्र सिंह सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री आवास योजना : पिछले 11 माह में लगभग 50 हजार आवासों का निर्माण पूर्ण

रायपुर, छत्तीसगढ़ में पिछले साल दिसम्बर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद से शहरों में प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यों में तेजी आई है। दिसम्बर-2023 से अक्टूबर-2024 के बीच पिछले 11 महीनों में ही करीब 50 हजार आवासों के निर्माण पूर्ण किए गए हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के हर गरीब के लिए आशियाने के सपने को पूरा करने का काम छत्तीसगढ़ में तेजी से हो रहा है। दिसम्बर-2023 में राज्य में नई सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के कार्यों में तेजी लाते हुए 49 हजार 834 आवासों का काम पूर्ण किया गया है। इनमें विभिन्न शहरों के हितग्राहियों द्वारा अपनी खुद की जमीन पर बनाए गए 44 हजार 419 और योजना के साथ भागीदारी में किफायती आवासीय परियोजनाओं के माध्यम से निर्मित 5415 आवास शामिल हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने बताया कि बीते 11 महीनों में योजना की भौतिक और वित्तीय प्रगति में अच्छी तेजी आई है। सभी नगरीय निकायों में बनाए जा रहे आवासों और निर्माण एजेंसियों के कार्यों की नियमित समीक्षा की जा रही है और उन्हें गरीबों के आशियाने के सपने को जल्द पूरा करने के लिए तेजी से काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 11 महीनों के दौरान हर माह औसतन हितग्राहियों द्वारा अपनी खुद की भूमि में बनाए जा रहे 4002 मकानों के काम पूर्ण किए गए हैं, जबकि वर्ष 2018 से 2023 के बीच यह औसत केवल 1592 थी। योजना के साथ भागीदारी में बनाए जा रहे किफायती आवासीय परियोजनाओं के निर्माण और आबंटन में भी तेजी लाते हुए विगत 11 महीनों में 7348 परिवारों को आवास आबंटित कर 5855 हितग्राहियों को पूर्ण आवासों में व्यवस्थापित किया गया है। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के लिए भी प्रदेश में सर्वेक्षण शुरू हो गया है। इसके अंतर्गत ऐसे शहरी पात्र परिवार जिन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के पहले चरण में आवास नहीं मिल पाए थे, उन्हें पक्का मकान उपलब्ध कराया जाएगा। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 में हितग्राहियों की सुविधा के लिए आवास हेतु आवेदन की प्रक्रिया का सरलीकरण किया गया है। आवास के आवेदन सरलतापूर्वक ऑनलाईन माध्यम से भारत सरकार के अधिकृत पोर्टल पर स्वयं हितग्राही द्वारा दर्ज किया जा सकता है। इसके साथ ही प्रदेश की सभी 189 अधिसूचित नगरीय निकायों में हेल्पडेस्क के माध्यम से भी आवेदन की प्रक्रिया संपादित की जा सकती है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत राज्य के विभिन्न नगरीय निकायों में कुल दो लाख 49 हजार 166 आवास स्वीकृत हैं। इनमें लाभार्थियों द्वारा अपनी खुद की भूमि पर बनाए जाने वाले दो लाख 11 हजार 069 और किफायती आवासीय परियोजनाओं के तहत बनने वाले 38 हजार 097 आवास शामिल हैं। शहरी गरीबों के स्वयं के पक्के मकान का सपना जल्द से जल्द पूरा करने के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा तेजी से इन आवासों का निर्माण किया जा रहा है। योजना के तहत राज्य में अब तक कुल एक लाख 96 हजार 967 आवास पूर्ण किए जा चुके हैं, जिनमें से एक लाख 74 हजार 967 आवास हितग्राहियों द्वारा बनाए गए हैं। वहीं किफायती आवासीय परियोजनाओं के तहत 21 हजार 600 आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत प्रदेश के नगरीय निकायों में अभी कुल 48 हजार 346 आवासों का काम प्रगति पर है, जिन्हें तेजी से पूरा किया जा रहा है।

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