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जिला न्यायालय के सामने दो पक्षों में लाठी-डंडों से मारपीट, आठ लोग घायल

Fighting with sticks between two parties in front of the District Court, eight people injured मुरैना ! जिला न्यायालय के बाहर हुई एक गंभीर घटना ने सभी को चौंका दिया। जिला न्यायालय के सामने दो पक्षों के बीच जमकर लाठी-डंडों से मारपीट हुई, जिसमें आठ लोग घायल हो गए। यह बवाल पति-पत्नी के बीच चल रहे विवाद को लेकर पेशी के दौरान शुरू हुआ। घटना का विवरण घटना उस समय हुई जब दोनों पक्ष न्यायालय में उपस्थित हुए थे। पेशी खत्म होने के बाद, अचानक दोनों पक्षों का आमना-सामना हो गया। एक पल में स्थिति बिगड़ गई, और समर्थकों ने एक-दूसरे पर लाठी-डंडे से हमला कर दिया। इस दौरान अदालत परिसर में अफरातफरी मच गई, और कई लोग केवल तमाशाई बनकर देखते रहे। घायलों की स्थिति मारपीट में घायल हुए लोगों को तुरंत स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। घायलों में से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है, और चिकित्सक उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। पुलिस कार्रवाई कोतवाली थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू की। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दोनों पक्षों के लोग एक-दूसरे पर लाठी-डंडों से हमला करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में पुलिसकर्मी भी मौजूद थे, लेकिन वे स्थिति को नियंत्रित करने में असफल रहे। पुलिस ने बताया कि घटना के बाद दोनों पक्ष थाने पहुंचे और एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए। अधिकारियों ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और सभी घायलों के बयान दर्ज किए जाएंगे। न्यायालय परिसर की सुरक्षा पर सवाल इस घटना ने न्यायालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। कई लोगों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए बेहतर सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है। न्यायालय परिसर में उपस्थित लोगों ने कहा कि अगर पुलिस सक्रिय होती, तो यह मारपीट इतनी गंभीर नहीं होती। इस घटना ने मुरैना में एक बार फिर से कानून-व्यवस्था के मुद्दे को उजागर किया है। सभी की निगाहें अब पुलिस की कार्रवाई और न्यायालय परिसर में सुरक्षा उपायों पर हैं। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि वह मामले की गहराई से जांच करेगी और सभी संबंधित लोगों को सजा दिलाने का प्रयास करेगी।

जमीनी विवाद में छोटे भाई की हत्या करने वाला आरोपी गिरफ्तार, मोरवा पुलिस ने धर दबोचा

जमीनी विवाद में छोटे भाई की हत्या करने वाला आरोपी गिरफ्तार, मोरवा पुलिस ने धर दबोचा सिंगरौली मोरवा थाना क्षेत्र के ग्राम धौरहवा में जमीनी विवाद में छोटे भाई को मौत के घाट उतारने वाला आरोपी विश्वनाथ सिंह गोड़ को आज मोरवा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, उसे आज पुलिस अभिरक्षा में न्यायालय में पेश किया गया है। गौरतलब है कि शुक्रवार शाम पुरवा थाना क्षेत्र के ग्राम धौरहवा में पिता की जमीन को लेकर दो भाइयों में खूनी झड़प हो गई थी। जिसमें बड़े भाई विश्वनाथ ने छोटे भाई राम प्रसाद की गर्दन मरोड़ कर हत्या कर दी थी। इस घटना की सूचना लगते ही सिंगरौली पुलिस अधीक्षक श्रीमती निवेदिता गुप्ता के निर्देशन एवं एसडीओपी कृष्ण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन में निरीक्षक कपूर त्रिपाठी द्वारा इस हत्या के मामले में अपराध क्रमांक 487/24 धारा 103(1) बीएनएस कायम कर एक टीम गठित की। जिसके द्वारा घटना की सूक्ष्म तरीके से जांच समेत आरोपी की धरपकड़ के लिए जगह-जगह दबिश दी जा रही थी। मोरवा पुलिस ने आरोपी विश्वनाथ सिंह गोड़ को आज दोपहर ग्राम धौरहवा से गिरफ्तार कर लिया है। जिससे न्यायालय में पेश किया गया। उक्त कार्यवाही में निरीक्षक कपूर त्रिपाठी की निगरानी में उपनिरीक्षक रामनरेश शुक्ला, रुद्र प्रताप सिंह, सहायक उपनिरीक्षक डी एन सिंह, प्रवीण मरावी, प्रधान आरक्षक अजीत सिंह, अर्जुन सिंह, सुबोध तोमर, आरक्षक सुरेश परस्ते, सौरभ सिंह की अहम भूमिका रही।

भोपाल: मध्यप्रदेश में निगम-मंडलों में नियुक्तियों की चर्चाएं तेज, नेता नियुक्तियों की राह देख रहे

Bhopal: Discussions on appointments in corporations and boards intensify in Madhya Pradesh, leaders are waiting for appointments. भोपाल: मध्यप्रदेश में जल्द ही निगम-मंडलों में नियुक्तियां हो सकती हैं, जिसको लेकर सियासी गलियारों में खूब चर्चा हो रही है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के कई नेता इन पदों के लिए इंतजार कर रहे हैं। इंतजार करें भी क्यों न टिकट कटने के बाद पार्टी उन्हें ‘जरूरी’ मानते हुए किसी न किसी पद पर तो स्थान देगी ही। बस इसी उम्मीद में ‘नेता जी’ आस लगाए बैठे हैं। और पार्टी के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। वैसे इसे लेकर पार्टी से भी संकेत मिलने लगे हैं। एमपी के सियासी गलियारों में यह चर्चा पिछले दो तीन महीनों से जोरों शोरों पर है। जब दो महीने पहले सीएम मोहन यादव का दिल्ली दौरा हुआ था तब भी मामले ने जमकर तूल पकड़ा था। कयास लगाए जा रहे थे कि दिल्ली में आलाकमान से मिलने के बाद नेताओं के नाम फाइनल किए जा रहे हैं। इन नेताओं के नाम रेस मेंबीजेपी के विनोद गोटिया, हेमंत खंडेलवाल और राजेंद्र सिंह राजपूत जैसे दिग्गज नेता इन पदों की कतार में आगे हैं। वहीं कांग्रेस से दीपक सक्सेना और गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी का नाम भी चर्चा में है। हालांकि, पार्टियों के द्वारा कोई भी निर्णय पब्लिक नहीं किया गया है। इसके कारण कई नेताओं के सब्र का बांध भी भरता जा रहा है। विरोधाभासी रहा इतिहासदिलचस्प बात यह है कि शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली पिछली बीजेपी सरकार ने इन पदों पर नियुक्तियां की थी। बाद में फरवरी 2024 के समय मोहन सरकार ने निगम मंडल की नियुक्तियां को निरस्त कर दिया था। अब देखना होगा कि किन-किन नेताओं को इन पदों पर जगह मिलती है।

छठ घाट मेंटेनेंस के नाम पर ठेकेदार का गोलमाल

छठ घाट मेंटेनेंस के नाम पर ठेकेदार का गोलमाल आस्था में भी लाभ का अवसर तलाश रहा एनसीएल खड़िया परियोजना अंतर्गत कार्यरत सिविल ठेकेदार शक्तिनगर  एनसीएल खड़िया परियोजना चैतन्य मंदिर वाटिका परिसर स्थित छठ घाट पूजा स्थल मेंटेनेंस के नाम पर कार्यदायी संस्था महज खाना पूर्ति कर रही है। घटिया सामग्री का प्रयोग कर बस ऊपर से घाट को चमकाकर अपनी चोरी को छुपाने का कार्य किया जा रहा है और देखरेख कर रहे विभाग व अधिकारी धृतराष्ट्र बनकर सारे गोलमाल को देख रहे हैं। मिट्टी को बालू में मिलाकर कार्य करने से सीमेंट किए गए अधिकांश सीढ़ी कमजोर व जर्जर हैं। पानी धुलाई के हल्के प्रेशर से सीमेंट का झरना और साफ-साफ प्लास्टर के अंदर से झांकता ईंट दिखाता है कि आस्था में भी लाभ के अवसर ठेकेदार व जिम्मेदार विभाग तलाशते नजर आ रहे हैं। छठ घाट मेंटेनेंस कार्य में लगे मजदूरों को सुरक्षा उपकरण के साथ डस्ट मस्क की वितरण नहीं किए जाने से मजदूरों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यह हाल तब है जब सेफ्टी विभाग के आला अधिकारी अपनी देखरेख में कार्य करा रहे हैं।  छठ घाट के बगल में निर्मित सीढ़ी वह गड्ढों को भरने हेतु खानापूर्ति का कार्य जोरों पर जारी है। प्रत्येक वर्ष छठ घाट सफाई के नाम पर ऐसे ही खाना पूर्ति कर आस्था में लाभ के अवसर विभाग और ठेकेदार तलाशते रहते हैं। परियोजना मुख्य महाप्रबंधक यदि मौके का मुआयना सही तरीके से करें तो ठेकेदार, विभाग व अधिकारियों की साठगांठ की कलई खुल जाएगी। सरकार के पैसे को कैसे पलीता लगाया जाता है छठ घाट मेंटेनेंस व सिविल मेंटेनेंस के कार्य महज एक बानगी भर है।

महीनों से बंद पड़ा बरगवां का चीरघर, शवों के पोस्टमार्टम के लिए लोगों को करना पड़ रहा बैढन का रुख

महीनों से बंद पड़ा बरगवां का चीरघर, शवों के पोस्टमार्टम के लिए लोगों को करना पड़ रहा बैढन का रुख सिंगरौली बरगवां का चीरघर बरसात से ही बंद पड़ा है, ऐसे में पोस्टमार्टम कराने के लिए गरीब लोगों समेत आम लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि दूर दराज गांवों से आए लोगों को भी पीएम के लिए जिला मुख्यालय का रुख करना पड़ रहा है। बताया जाता है की बरैनिया स्थित चीरघर रखरखाव के अभाव में जर्जर स्थिति में हो गया था, वहीं सड़क निर्माण के बाद यह सड़क के काफी नीचे पड़ गया, जिससे बरसात के समय में जल जमाव की भी समस्या रहने लगी। ऐसी स्थिति में चिकित्सक द्वारा दूसरे चीरघर के निर्माण के लिए भी सीएमओ को पत्र लिखने की बात सामने आई। परंतु अभी तक ना ही इसके लिए कोई जमीन आवंटित हुई और न ही इस विषय में जिम्मेदारों द्वारा कोई पहल की जाने की सूचना है। गौरतलब है कि करीब एक सैकड़ा से ऊपर बरगवां थाना क्षेत्र के लोगों को पोस्टमार्टम कराने के लिए बैढ़न जाने को मजबूर होना पड़ता है। एक तो आकस्मिक मृत्यु में अपनों को खोने का गम दूसरा उनके पोस्टमार्टम के लिए किसी तरह व्यवस्था करके दूर दराज ले जाने से गरीब तबके के लोगों के लिए खासी परेशानी का सबब है।

बड़वारा में रेत कम्पनी और ग्रामीणों में विवाद, पथराव और फायरिंग के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव

बड़वारा में  रेत कम्पनी और ग्रामीणों में विवाद, पथराव और फायरिंग के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव  कटनी  बड़वारा थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम बसाडी में आज रविवार की शाम मामूली सी बात लेकर हुए विवाद को लेकर रेत कम्पनी और ग्रामीणों के बीच जमकर पत्थरबाजी हुई। विवाद के चलते पूरा क्षेत्र पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है और कई थानों की पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया है। हालांकि अब स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक ग्राम बसाडी में एक समोसा की दुकान पर महिला और रेत कम्पनी के गुर्गों के बीच मामूली विवाद ने उग्र रूप धारण कर लिया। बताया जाता है कि मारपीट और झड़प के बाद ग्रामीणों ने रेत कम्पनी की बोलेरो को आग के हवाले कर दिया। ग्रामीणों ने जमकर पथराव भी किया। ग्रामीणों का कहना था कि रेत कम्पनी के गुर्गों ने पहले मारपीट की। इस दौरान फ़ायरिंग भी किए जाने की बात स्थानीय ग्रामीण बता रहे हैं। जिससे पूरे इलाके में सनाका खिंच गया। फायरिंग के बाद ग्रामीण आक्रोशित हो गए और रेत कम्पनी पर पथराव कर दिया। विवाद की सूचना मिलने पर कटनी से पुलिस फोर्स मोके पर पहुंच गया और स्थिति को नियंत्रित किया। इनका कहना है घटना के संबंध में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ संतोष डेहरिया ने बताया कि महिला और रेत कम्पनी के कर्मचारियों के बीच दुकान से समोसा लेने की मामूली बात को लेकर विवाद हो गया। जिसके बात ग्रामीण आक्रोशित हो गए और पथराव कर दिया। सूचना मिलने पर फोर्स मोके पर पहुंच गया है और स्थिति को काबू कर लिया है।

मेट्रो रेल लाइन पुराने भोपाल शहर में आसान नहीं, अड़चनों को दूर करने की जद्दोजहद जारी

भोपाल मेट्रो रेल लाइन के दूसरे चरण का काम पुराने शहर में शुरू हो चुका है। बैरसिया रोड पर करोंद चौराहे से लेकर सिंधी कालोनी तक मृदा परीक्षण का काम किया जा रहा है, जिससे जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जा सके। वहीं कई जगहों पर बड़ी-बड़ी अड़चनें बरकरार हैं, जिनकी वजह से मेट्रो रेल लाइन की राह आसान नजर नहीं आ रही है। इन्हें हटाने के लिए मेट्रो रेल कार्पोरेशन प्रबंधन को, जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों को जद्दोजहद करना पड़ रही है। बताया जा रहा है कि भोपाल रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म छह के पास के दुकानदारों और लोगों ने वहां से हटने के लिए सहमति पत्र दे दिए हैं। जबकि पुट्ठा मिल को हटाने पर सहमति बनाने का काम जारी है। असल में पुट्ठा मिल के स्थानीय प्रबंधन का कहना है कि इस मामले में सहमति देने का अधिकार दिल्ली स्थित उच्च प्रबंधन को है, क्योंकि मिल का मामला कोर्ट में लंबित है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के निर्देश पर जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मेट्रो प्रोजेक्ट में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए ईरानी डेरा, नर्मदा आइस फैक्ट्री और पुट्ठा मिल वालों के साथ बैठक की थी, लेकिन कोई रास्ता नहीं निकल सका। इस क्षेत्र में मेट्रो के भूमिगत मार्ग और स्टेशन के लिए ढाई एकड़ जमीन का अधिग्रहण होना है। इसमें अधिकांश जमीन सरकारी है। ईरानी डेरा, नर्मदा आइस फैक्ट्री के पास 28-28 दुकानदारों ने विस्थापन के लिए सहमति तो दी थी, लेकिन अब तक प्रक्रिया शुरू नहीं की है। वहीं होटल्स और दुकानदारों को रेलवे माल गोदाम के पास समानांतर रोड पर बसाया जाएगा। जबकि बड़ा बाग और पीजीबीटी के पास की जमीन के अधिग्रहण मामला फिलहाल अटका हुआ है। जब तक यह मामले सुलझ नहीं जाते हैं तब तक मेट्रो का काम रफ्तार नहीं पकड़ पाएगा। मेट्रो के लिए इन जमीनों का होना है अधिग्रहण     -पुल बोगदा पर मेन जंक्शन के लिए सर्वाधिक जगह की जरूरत। सिर्फ जंक्शन के लिए 0.48 एकड़।     -शहर सर्किल में एक तरफ 1.49 एकड़ पातरा नाले से पहले 0.53 एकड़, इससे आगे 0.54 एकड़ जमीन की आवश्यकता।     -आरा मिल के पास अलग-अलग टुकड़ों में 0.008, 0.184, 0.12, 0.10 एकड़ जमीन की जरूरत।     -ग्रांड होटल के आगे 0.13 और 0.092 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। निजी जमीन हैं।     -भोपाल रेलवे स्टेशन के पास 1.15 एकड़ जमीन नर्मदा आइस फैक्टरी की जमीन ली जाएगी, यहां पार्किंग और स्टेशन बनाया जाएगा।     -भोपाल रेलवे स्टेशन के पास एंट्री एग्जिट प्लाजा के लिए 0.18 एकड़ जमीन चाहिए, यहां ईरानी डेरा है। इनका कहना है मेट्रो रेल लाइन के दूसरे चरण का काम शुरू हो गया है। पुराने शहर में भोपाल रेलवे स्टेशन, पुट्ठा मिल सहित अन्य जगह पर जमीनों का अधिग्रहण किया जाना है। कुछ जगह पर सहमति बनी है, तो कुछ जगह पर मामला अटका हुआ है। जल्द ही इसे भी सुलझा लिया जाएगा। मेट्रो रेल लाइन बिछाने का काम नियमित रूप से जारी रहेगा।- कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर, भोपाल

हाथी- मानव सहअस्तित्व सुनिश्चित करने बनेंगे “हाथी मित्र”, फसलों को बचाने के लिए सोलर फेंसिंग की होगी व्यवस्था

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उमरिया में हाथियों की मृत्यु की घटना पर उठाए सख्त कदम राज्य स्तरीय हाथी टास्क फोर्स होगा गठित वन क्षेत्र में निगरानी की कमी के लिए फील्ड डायरेक्टर और प्रभारी एसीएफ का निलंबन हाथी- मानव सहअस्तित्व सुनिश्चित करने बनेंगे “हाथी मित्र” जिन जिलों के वन क्षेत्रों में हाथी अधिक, वहां चलेगा जन-जागरूकता अभियान फसलों को बचाने के लिए सोलर फेंसिंग की होगी व्यवस्था केंद्र सरकार का सहयोग लेंगे, राज्यों की बेस्ट प्रेक्टिसेस अपनाएंगे जनहानि प्रकरण में 8 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रूपये देने का लिया निर्णय किसानों को कृषि के अलावा वैकल्पिक कार्यों से भी जोड़ने के होंगे प्रयास भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में राज्य स्तरीय हाथी टास्ट फोर्स गठित किया जाएगा। हाथी- मानव सह अस्तित्व सुनिश्चित करने के लिए हाथी मित्र बनाए जाएंगे। जिन क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही अधिक है, वहां किसानों की फसलों को बचाने के लिए सोलर फेंसिंग की व्यवस्था होगी। साथ ही किसानों को कृषि के अलावा कृषि वानिकी एवं अन्य वैकल्पिक कार्यों से भी जोड़ने के प्रयास होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में आने वाले समय में ऐसे वन क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, जिसमें हाथियों की बसाहट के साथ सहअस्तित्व की भावना मजबूत हो सके। केंद्रीय वन मंत्री से भी इस संबंध में चर्चा हुई है। वे मार्ग दर्शन करेंगे जिससे वन विभाग इस क्षेत्र में ठोस कार्यवाही कर सके। जिन जिलों में हाथी वन क्षेत्रों में रह रहे हैं वहां हाथी मित्र जन-जागरूकता के लिए कार्य करेंगे। घटना दुखद और दर्दनाक, वन अधिकारी सतर्क और सजग रहें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रदेश में उमरिया जिले के वन क्षेत्र में पिछले दिनों 10 हाथियों की अलग-अलग दिन हुई मृत्यु की घटना दुखद एवं दर्दनाक है, जिसे राज्य शासन ने गंभीरता से लिया है। वन राज्य मंत्री सहित वरिष्ठ अधिकारियों के दल ने क्षेत्र का भ्रमण किया है। प्रारंभिक रिपोर्ट में कोई कीटनाशक नहीं पाया गया है। पोस्ट मार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आना शेष है। हाथियों के बड़े दल के रूप में आने की घटना गत दो तीन वर्ष में एक नया अनुभव भी है। उमरिया और सीधी जिले में बड़ी संख्या में हाथियों की मौजूदगी दिख रही है। ऐसे में फील्ड डॉयरेक्टर एवं अन्य अधिकारियों को सतर्क और सजग रहने की जरूरत है। दोषी अधिकारियों का निलंबन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हाथियों की मृत्यु की इतनी बड़ी घटना के समय फील्ड डॉयरेक्टर का अवकाश से वापस न आना और पूर्व में हाथियों के दल आने के संदर्भ में जो आवश्यक चिंता की जाना चाहिए, वह नहीं की गई। इस लापरवाही के लिए फील्ड डॉयरेक्टर गौरव चौधरी को सस्पेंड किया गया है। साथ ही प्रभारी एसीएफ फतेह सिंह निनामा को भी निलंबित किया गया है। प्रदेश के अधिकारी कर्नाटक, केरल और असम जाकर करेंगे अध्ययन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बांधवगढ़ क्षेत्र एवं अन्य वन क्षेत्रों में हाथियों के रहने की अनुकूल और आकर्षक स्थिति है। वन क्षेत्रों का प्रबंधन उत्तम होने से हाथियों के दल जो छत्तीसगढ़ एवं अन्य राज्यों से आया करते थे और वापस चले जाते थे वे अब वापस नहीं जा रहे हैं। यहां बड़े पैमाने पर हाथियों द्वारा डेरा डालने की स्थिति देखी जा रही है। यह मध्यप्रदेश की वन विभाग की गतिविधियों का हिस्सा बन गए हैं। ऐसे में हाथियों की आवाजाही को देखते हुए स्वाभाविक रूप से स्थाई प्रबंधन के लिए शासन के स्तर पर हाथी टास्क फोर्स बनाने का निर्णय लिया जा रहा है। हाथियों को अन्य वन्य-प्राणियों के साथ किस तरह रहवास की सावधानियां रखना चाहिए, इसके लिए योजना बनाई जा रही है। इसमें कर्नाटक, केरल और असम राज्यों की बेस्ट प्रेक्टिसेस को शामिल किया जाएगा। इन राज्यों में बड़ी संख्या में हाथी रहते हैं। इन राज्यों में मध्यप्रदेश के अधिकारियों को भेजा जाएगा, जिससे सहअस्तित्व की भावना के आधार पर हाथियों के साथ बफर एरिया, कोर एरिया में बाकी का जन जीवन प्रभावित न हो, इसका अध्ययन किया जाएगा। हाथियों की सुरक्षा को भी खतरा न हो। इस पर हमने गंभीरता से विचार किया है। एक बात हमने और अनुभव की है। नजदीक के बफर एरिया के बाहर के जो मैदानी इलाके हैं वहां की फसलें उसमें सोलर फेंसिंग या सोलर पैनल द्वारा व्यवस्था कर फसलों को सुरक्षित किया जाएगा। यह मनुष्यों के लिए भी सुरक्षा का साधन होगा। वन विभाग को कहा गया है ऐसे क्षेत्रों में कहां-कहां कृषि हो रही है, उसे कैसे बचा सकते हैं। हाथी फसल नष्ट न कर पाएं, यह सुनिश्चित करना होगा। यह चिंता के साथ जागरूकता का भी विषय है। बफर क्षेत्र में ग्रामीण समुदाय की भागीदारी हाथियों और मानव के सहअस्तित्व को सुनिश्चित कर सके, जिससे यह एक दूसरे के साथ जीना सीख सकें। जनहानि पर 25 लाख रूपये प्रति व्यक्ति देने का निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उमरिया जिले में जो घटना घटी है इसमें जनहानि को लेकर 8 लाख रुपए प्रति व्यक्ति के परिजन को दिया जाता था, उसको बढ़ाकर अब 25 लाख रुपए प्रति व्यक्ति करने का निर्णय लिया है। इस घटना में दो व्यक्तियों की मृत्यु हुई है उनके परिवारों को भी इससे जोड़ा है। कृषि वानिकी में अन्य प्रकार से वन क्षेत्र के प्राइवेट सेक्टर को जोड़कर पम्परागत खेती के अलावा अन्य कार्यों के लिए किसानों को प्रोत्साहित करेंगे। इससे किसान सामान्य फसल लेने के बजाए वन क्षेत्र की व्यवस्थाओं से जुड़ें और उसका लाभ लें। महत्वपूर्ण उपाय लागू करने विशेषज्ञों को आमंत्रित करेंगे मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि वन क्षेत्र में जो अकेले हाथी घूमते हैं और अपने दल से अलग हो जाते हैं, इनको रेडियो ट्रेकिंग का निर्णय लिया गया है। ट्रेकिंग कर उन पर नजर रखी जा सकेगी। आने वाले समय में ऐसी घटना न हो, भविष्य में इसका ध्यान रखा जा सकेगा। यह इस दिशा में ठोस कार्यवाही होगी। ऐसे अन्य महत्वपूर्ण उपायों को लागू करने के लिए विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के प्रयास किए जाएंगे। हाथियों का दल स्थाई रूप से मध्यप्रदेश में रहने लगा है अत: आमजन से भी सहयोग की अपेक्षा है। जिन जिलों में हाथियों की बसाहट है … Read more

ब्यूटी के साथ जॉब भी

खूबसूरत दिखना हर किसी को अच्छा लगता हैं। खास तौर पर महिलाओ को। सुंदरता आपके करियर के लिए भी बेहद जरूरी होती हैं। आपकी खूबसूरती आपके अंदर के कॉन्फिडेंस को भी बढ़ाती हैं। लोगो में जैसे जैसे इसके लिए जागरूकता बढ़ती जा रही हैं। इस फील्ड में करियर के क्षेत्र भी बढ़ रहे हैं। यह क्षेत्र व्यापार और जॉब दोनों ही तरह से काफी महत्वपूर्ण हैं। यही नही इसकी मांग बॉलीवुड और फैशन के इस दौर में बढ़ती ही जा रही हैं। इससे आप अपने करियर को एक नई दिशा दे सकते हैं… जॉब के अवसर:- इस क्षेत्र में जॉब के कई अवसर हैं। अगर आपको पढ़ाने में भी थोड़ा इंट्रेस्ट हैं तो आप किसी भी ब्यूटी इंस्टिट्यूट में टीचिंग की जॉब कर सकती हैं। अगर आपके पास विशेष योग्यता हैं तो आप किसी बड़े इंस्टिट्यूट में भी जॉब कर सकती हैं। इससे आप 10 से 15 हजार रूपए आसानी से कमा सकती हैं। जिसमे आपके एक्सपीरियंस के साथ आपकी सैलेरी में भी बढ़ोतरी होगी। आप ब्यूटी ट्रीट्मेंट्स भी दे सकती हैं जिससे आपकी अच्छी खासी इनकम भी होगी। कोर्स:- इससे सम्बंधित भी कई कोर्सेस उपलब्ध होते हैं। आपको इस फील्ड से रिलेटेड कोई न कोई स्पेशलाइस्ड कोर्स जरूर करना चाहिए। फील्ड से जुडी कुछ खास बातें:- इस फील्ड में अधिकतर खूबसूरत महिलाये और लडकिया ही काम करती हैं। उन्हें इस फील्ड में काम करते समय इस बात का भी जरूर ध्यान रखना चाहिए की वे कभी भी गलत लोगो के सम्पर्क में न आये साथ ही ऐसे लोगो से दूर रहे जो उनकी योग्यता से ज्यादा महत्व उनकी खूबसूरती को देते हो। किसी भी जगह आप इंटरव्यू देने जाये तो उस आर्गेनाईजेशन के बारे में जानकारी निकाल कर ही जाये।  

भैंसाखेड़ी स्थित पं. दीनदयाल कृषि उपज मंडी में सन्नाटा, गेहूं की अपेक्षित नीलामी भी नहीं हो सकी थी

भोपाल किसानों की फसल बाजार में आने के बावजूद ग्राम भैंसाखेड़ी स्थित पं. दीनदयाल कृषि उपज मंडी में सन्नाटा है। इससे पहले यहां गेहूं की अपेक्षित नीलामी भी नहीं हो सकी थी। अब सोयाबीन, मक्का एवं धान की नीलामी नहीं हो पा रही है। किसान सीधे करोंद मंडी जा रहे हैं। अनाज व्यापारियों की भी नीलामी में रुचि नहीं है। इस बार गेंहूं की फसल लेकर कम ही किसान मंडी तक पहुंचे। मंडी समिति ने सोसायटियों के माध्यम से समर्थन मूल्य पर खरीदी की। व्यापारियों की घटती रुचि के कारण मंडी सुनसान होती जा रही है। अनाज व्यापारी संघ के अध्यक्ष जगदीश आसवानी के अनुसार बैरागढ़ एवं आसपास के इलाके में कृषि भूमि कम बची है। अधिकांश किसान फसल बेचने सीहोर एवं करोंद मंडी जा रहे हैं। इस कारण मंडी में कारोबार कम हो गया है। सोयाबीन की खरीदी की उम्मीद भी पूरी नहीं हो पा रही है। उधर, मंडी में धर्मकांटा लगाने के प्रस्ताव पर अमल नहीं हो पा रहा है। धर्मकांटा नहीं होने के कारण अनाज की तुलाई धीमी गति से होती है। पिछले दिनों किसानों ने अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया था, लेकिन धर्मकांटा नहीं लग सका। दाल एवं आटा मिल शिफ्ट करने का सुझाव यहां पर कृषि उपज मंडी का निर्माण लंबे संघर्ष के बाद हुआ था। पहले मंडी को मुबारकपुर में बनाया जा रहा था। व्यापारिक संगठनों के संघर्ष और कांग्रेस एवं भाजपा नेताओं के बीच आपसी सहमति के बाद मंडी भैंसाखेड़ी में ही बनी। लेकिन इस मंडी में कारोबार बहुत कम हो गया है। मंडी समिति एवं व्यापारी संघ के बीच कई बैठकें हो चुकी हैं। व्यापारी कहते हैं कि हम खरीद करना चाहते हैं, पर किसान ही नहीं आते। अनाज व्यापारी संघ के संस्थापक सदस्य नरेश पारदासानी का कहना है कि मंडी समिति को दाल एवं आटा मिलों को मंडी के अंदर जगह देनी चाहिए। इससे मंडी की रौनक बढ़ेगी। किसान भी आएंगे।

बहुप्रतीक्षित इंदौर-मनमाड़ नई रेल लाइन परियोजना का जमीनी स्तर पर काम शुरू, पांच वर्ष में काम होगा पूरा

इंदौर बहुप्रतीक्षित इंदौर-मनमाड़ नई रेल लाइन परियोजना का जमीनी स्तर पर काम शुरू हो गया है। पांच वर्ष में तैयार होने वाली इस परियोजना में टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस नई रेल लाइन से धार, खरगोन और बड़वानी के आदिवासी अंचल से पहली बार रेल लाइन गुजरेगी। परियोजना से लगभग एक हजार गांवों और 30 लाख आबादी का रेल सेवा से सीधा संपर्क जुड़ेगा। परियोजना से पीथमपुर के औद्योगिक क्षेत्र को गति मिलेगी। प्रोजेक्ट पूरा होने पर 16 जोड़ी पैसेंजर ट्रेन का संचालन होगा, जिसमें 50 लाख यात्री शुरुआती वर्षों में सफर करेंगे। हर साल इस प्रोजेक्ट से रेलवे को 900 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिलेगा। इंदौर से मुंबई की दूरी भी 830 किमी से घटकर 568 किमी रह जाएगी। संघर्ष समिति के मनोज मराठे ने बताया कि हाल ही में रेलवे ने जो जानकारी दी है, उसके अनुसार रेलवे ने प्रोजेक्ट में भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य की टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रोजेक्ट पूरा होने से 24 मालगाड़ियों का संचालन होगा। टेंडर प्रक्रिया शुरू 16 हजार करोड़ रुपये से बनेगी 309 किमी लंबी नई रेल लाइन। इंदौर से मुंबई की दूरी घटकर 568 किमी रह जाएगी। पीथमपुर के औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगी गति।   यहां से गुजरेगी रेल लाइन नई रेल लाइन महू से धार होते हुए धरमपुरी, ठीकरी, राजपुर, सेंधवा, सिरपुर, शिखंडी, धुले, मालेगांव होकर मनमाड़ पहुंचेगी। पूरी परियोजना में 30 नए रेलवे स्टेशन भी बनाए जाएंगे। ये भी जानें 309 किमी लंबी लाइन लाइन बिछेगी। इंदौर-मुंबई के बीच सबसे छोटा रेल मार्ग बनेगा। मप्र के चार जिलों से होकर गुजरेगी रेल लाइन। 2028-29 तक पूरी होगी परियोजना।  

पुलिस के वाणिज्यिक संस्थान जैसे पेट्रोल पंप, गैस रिफिलिंग केंद्र, सुपर बाजार, कैंटीन आदि में नकद होगा बंद

भोपाल पुलिस के वाणिज्यिक संस्थान जैसे पेट्रोल पंप, गैस रिफिलिंग केंद्र, सुपर बाजार, कैंटीन आदि में नकद लेन-देन एक जनवरी 2025 से बंद हो जाएगा। 15 नवंबर से यह व्यवस्था आंशिक रूप से लागू की जाएगी। इसमें ग्राहकों से नकद में भुगतान करने के बजाय कैशलेस भुगतान के लिए कहा जाएगा। यदि वह नगद राशि देते हैं तो केंद्र संचालक को ग्राहक का नाम और मोबाइल नंबर लिखकर रखना होगा, जिससे जरूरत पड़ने पर जांच में यह पता किया जा सके कि उसने भुगतान किया था या नहीं। यह है वजह पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि एक पेट्रोल पंप में वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी की शिकायत मिली थी। लेनदेन में पारदर्शिता रहे, इसलिए कैशलेस भुगतान को अनिवार्य कर दिया गया है। संभवत: मध्य प्रदेश पुलिस पहला सरकारी विभाग है, जिसमें नकद भुगतान पूरी तरह से बंद किया जा रहा है। अभी बड़े शापिंग मॉल में ऐसी अनिवार्यता नहीं है। अधिकतर सरकारी विभागों में बिल भुगतान भी नगद और कैशलेस दोनों तरह से हो रहा है। डीजीपी कांफ्रेंस में उठा था मुद्दा पुलिस मुख्यालय के एडीजी कल्याण एवं लेखा अनिल कुमार ने बताया कि इस संबंध में इंदौर और भोपाल के पुलिस आयुक्त, सभी पुलिस अधीक्षक और पुलिस इकाइयों के प्रमुखों को आदेश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि डीजीपी कांफ्रेंस में यह विषय आया था। दो वर्ष से यह व्यवस्था लागू करने की कोशिश चल रही थी। कैशलेस भुगतान से एक-एक पैसे का हिसाब रहेगा, जिससे गड़बड़ी की आशंका नहीं रहेगी।

बांधवगढ़ में हाथियों की मौत: मुख्यमंत्री ने लिया एक्शन, फील्ड डायरेक्टर-प्रभारी एसीएफ निलंबित

Death of elephants in Bandhavgarh: Chief Minister took action, field director-in-charge ACF suspended बांधवगढ़ में हुई हाथियों की मौत के मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक्शन में हैं. सीएम ने बैठक आयोजित की, जिसमें राज्य स्तरीय ‘हाथी टास्क फोर्स’ गठित करने का निर्णय लिया गया. साथ ही सीएम ने बांधवगढ़ फील्ड डायरेक्टर और प्रभारी एसीएफ को निलंबित करने के निर्देश दिए. सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में उमरिया जिले के वन क्षेत्र में पिछले दिनों 10 हाथियों की अलग-अलग दिन हुई मृत्यु की घटना दुखद एवं दर्दनाक है, जिसे राज्य शासन ने गंभीरता से लिया है. वन राज्य मंत्री सहित वरिष्ठ अधिकारियों के दल ने क्षेत्र का भ्रमण किया है. प्रारंभिक रिपोर्ट में कोई कीटनाशक नहीं पाया गया है. पोस्ट मार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आना शेष है. हाथियों के बड़े दल के रूप में आने की घटना गत दो तीन वर्ष में एक नया अनुभव भी है. उमरिया और सीधी जिले में बड़ी संख्या में हाथियों की मौजूदगी दिख रही है. ऐसे में फील्ड डायरेक्टर एवं अन्य अधिकारियों को सतर्क और सजग रहने की जरूरत है. अवकाश पर जाना पड़ा महंगा सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हाथियों की मृत्यु की इतनी बड़ी घटना के समय फील्ड डायरेक्टर का अवकाश से वापस न आना और पूर्व में हाथियों के दल के संदर्भ में जो आवश्यक चिंता की जानी चाहिए, वह नहीं की गई. इस लापरवाही के लिए फील्ड डायरेक्टर गौरव चौधरी को सस्पेंड किया गया. साथ ही प्रभारी एसीएफ फतेह सिंह निनामा को भी निलंबित किया गया. केरल-कर्नाटक-असम जाकर करे अध्ययन सीएम ने कहा कि बांधवगढ़ क्षेत्र एवं अन्य वन क्षेत्रों में हाथियों की रहने की अनुकूल और आकर्षक स्थिति हे. वन क्षेत्रों का प्रबंधन उत्तम होने से हाथियों के दल जो छत्तीसगढ़ एवं अन्य राज्यों से आया करते थे और वापस चले जाते थे वह अब वापस नहीं जा रहे हैं. यहां बड़े पैमाने पर हाथियों द्वारा डेरा डालने की स्थिति देखी जा रही है. यह मध्यप्रदेश की वन विभाग की गतिविधियों का हिस्सा बन गए हैं. ऐसे में हाथियों की आवाजाही को देखते हुए स्वाभाविक रूप से स्थाई प्रबंधन के लिए शासन के स्तर पर हाथी टास्क फोर्स बनाने का निर्णय लिया जा रहा है. हाथियों को अन्य वन्य प्राणियों के साथ किस तरह रहवास की सावधानियां रखना चाहिए, इसके लिए योजना बनाई जा रही है. इसमें कर्नाटक, केरल और असम राज्यों की बेस्ट प्रेक्टिसेस को शामिल किया जाएगा. इन राज्यों में बड़ी संख्या में हाथी रहते हैं. इन राज्यों में मध्यप्रदेश के अधिकारियों को भेजा जाएगा, जिससे सहअस्तित्व की भावना के आधार पर हाथियों के साथ बफर एरिया, कोर एरिया में बाकी का जन जीवन प्रभावित न हो, इसका अध्ययन किया जाएगा. हाथियों की सुरक्षा को खतरा न हो. इस पर हमने गंभीरता से विचार किया है.

उप मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन ओपीडी भवन का किया निरीक्षण

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने रविवार को जिला चिकित्सालय रीवा के सभागार में अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला अस्पताल में उपचार की आधुनिकतम सुविधाएं उपलब्ध हैं। नए ओपीडी भवन का निर्माण पूरा होने के बाद सुविधाओं में और वृद्धि होगी। अस्पताल की सुविधाओं का पूरा उपयोग करके श्रेष्ठ उपचार का केन्द्र बनाएं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा सिविल सर्जन शासन के निर्देशों के अनुरूप 70 साल से अधिक आयु के सभी व्यक्तियों के आयुष्मान कार्ड बनाएं। इससे बुजुर्ग रोगियों को हर साल पाँच लाख रुपए के उपचार की सुविधा मिलेगी। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले में दो चरणों में स्वास्थ्य जाँच शिविर लगाए गए। इनमें चिन्हित गंभीर रोगियों के उपचार का लगातार फालोअप करें। प्रत्येक चिन्हित रोगी को उपचार की पूरी सुविधा दें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बाल ह्रदय उपचार योजना के तहत ह्रदय रोग से पीड़ित बच्चों का चिन्हांकन करने के लिए जिले में अभियान चलाएं। ऑपरेशन योग्य बच्चों को राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत ऑपरेशन की नि:शुल्क सुविधा दी जा रही है। उप मुख्यमंत्री ने संचारी रोगों के नियंत्रण तथा सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की उपचार सुविधाएं बेहतर करने के भी निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टर्स सहित चिकित्सा-कर्मियों के पद बड़ी संख्या में भरे जा रहे हैं। हर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में विशेषज्ञ डॉक्टर्स की तैनाती की जाएगी। नवीन अस्पतालों में डॉक्टर्स और स्टाफ नर्स के पदों की पूर्ति सुनिश्चित करें। उप मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन ओपीडी भवन का किया निरीक्षण उप मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद जिला अस्पताल परिसर में निर्माणाधीन नवीन ओपीडी भवन का निरीक्षण किया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण कार्य तय समय-सीमा में पूरा करें, जिससे आमजन को समय पर उपचार सुविधाओं का लाभ दिया जा सके। सिविल सर्जन निर्माण कार्यों की प्रगति की नियमित रूप से रिपोर्ट प्रस्तुत करें। सभी ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर भी अपने क्षेत्र में निर्माणाधीन स्वास्थ्य संस्था के भवनों की प्रगति की नियमित जानकारी दें। लापरवाही करने वाली निर्माण एजेंसी के विरूद्ध कार्रवाई करें। इस अवसर पर नगर निगम अध्यक्ष श्री व्यंकटेश पाण्डेय, कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजीव शुक्ला, सिविल सर्जन डॉ. एम.एल. गुप्ता, डॉ. बी.के. अग्निहोत्री, कार्यपालन यंत्री अनामिका सिंह, कार्यपालन यंत्री हाउसिंग बोर्ड श्री अनुज प्रताप सिंह, निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि, सभी मेडिकल ऑफिसर तथा बीएमओ उपस्थित रहे।  

अच्छा रिफंड दिलवाने वाले से अपना आयकर रिटर्न भरवाना भारी पड़ सकता है, अटक सकता है इस वर्ष का रिटर्न

इंदौर अच्छा रिफंड दिलवाने वाले से अपना आयकर रिटर्न भरवाना भारी पड़ सकता है। इस वर्ष का रिफंड तो अटकने के आसार हैं ही, बीते वर्षों के गलत रिफंड की भी वसूली हो सकती है। आयकर विभाग ने सूक्ष्म जांच और निगरानी शुरू की है। बड़े रिफंड वाले और ऐसे नौकरीपेशा जो किसी एक से सामूहिक रूप से रिटर्न दाखिल करवा रहे हैं, वे भी जांच के दायरे में हैं। बीते वर्षों में जम्मू-कश्मीर और आंध्र प्रदेश में कई सरकारी विभागों के कर्मचारियों द्वारा फर्जी दान की रसीद, खर्च आदि अपने रिटर्न में दिखाकर रिफंड हासिल करने के मामले पकड़ में आए थे। इसके बाद देशभर में रिफंडों के मामले में सख्ती शुरू हुई। उज्जैन में भी ऐसे गलत रिफंड पकड़े गए। अब केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने विभाग को इस बारे में निर्देश दिए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से ऐसे रिटर्न और रिफंड को चिह्नित कर जांच की जा रही है। ऑनलाइन रिटर्न सिस्टम लागू होने के बाद से विभाग फटाफट रिफंड भी जारी करता रहा है। आयकर विभाग आमतौर पर कुछ सप्ताह में रिफंड जारी कर देता है। लेकिन तमाम बड़े रिफंड महीनों बाद भी अटके हैं। ये हैं निगरानी में सीए कीर्ति जोशी के अनुसार सीबीडीटी ने जो एसओपी विभाग के अधिकारियों के लिए जारी की है, उसमें निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे करदाता जिनके रिटर्न बीते आठ वर्षों में कभी भी स्क्रूटनी में गए हों, उन पर टैक्स की मांग निकली हो। इनकी विशेष जांच की जाए। बड़ा रिफंड क्लेम करने वाले वेतनभोगी जिनके रिफंड का मैच उनके नियोक्ता द्वारा जारी फार्म-16 से मिलान नहीं हो रहा है। जिन्होंने रिटर्न में रिफंड रिवाइज किया है। 80 (जी), विकलांगता, मेडिक्लेम से लेकर हर तरह की छूट रिटर्न में हासिल करते हैं, वे भी दायरे में हैं।

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