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कभी सोचा नहीं था कि मेरी दुकान में चाय पीने.. आयेंगे मुख्यमंत्री

जबलपुर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर के बेलखेड़ा में सोमवार को राज्य स्तरीय लाड़ली बहना एवं महिला सम्मेलन में शामिल होने के बाद सड़क मार्ग से डुमना विमानतल के रास्ते में काफिला रूकवाकर अंध-मूक चौराहा स्थित शंकर चाट भंडार के स्टॉल पर चाय का आनंद लिया। इस अवसर पर सांसद आशीष दुबे, विधायक अशोक रोहाणी, जिला अध्यक्ष राजकुमार पटेल, नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर एवं अखिलेश जैन भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने दुकानदार ब्रजेश लोधी से कुशलक्षेम पूछीं और उनके परिवार और व्यवसाय के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री को अकस्मात् अपनी दुकान में पाकर ब्रजेश प्रफुल्लित हो उठे, उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि उसकी छोटी सी दुकान में स्वयं मुख्यमंत्री चाय पीने आए हैं। ब्रजेश ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उसके जैसे छोटे दुकानदार से भी बड़ी ही आत्मीयता से मिले। ब्रजेश ने कहा कि मुख्यमंत्री से मिलकर बहुत खुशी हुई, हमारे मुख्यमंत्री बड़े सहज और सरल स्वभाव के हैं।।  

कुछ मिनटों में समझ सकेंगे गंभीर बीमारियों की जड़, कम टाइम में होंगे ऑपरेशन, एक बूंद खून से चुटकियों में पता चलेगी जानलेवा बिमारी

भोपाल जब शरीर में संक्रमण का स्तर बहुत ज्यादा हो जाता है, तो मरीज का इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर हो जाता है. जब शरीर के सभी अंग प्रभावित होते हैं. तो मरीज की मौत भी हो सकती है. रोग की इसी स्थिति को सेप्सिस कहा जाता है. हालांकि इस दुर्लभ बीमारी सेप्सिस के दौरान मरीज के शरीर में स्थित संक्रमण का जल्द से जल्द पता लगाने की जरुरत होती है. जिससे मरीज की जान बचाई जा सके, लेकिन अब तक कोई ऐसी तकनीकी नहीं थी, जिससे 15 से 20 मिनट में संक्रमण का पता लगाया जा सके. जिससे इस बीमारी से पीड़ित अधिकतर मरीजों की मृत्यु हो जाती है. पहले टेस्ट रिपोर्ट आने में 3 दिन का लगता था समय बता दें कि ऑटोप्सी के दौरान पहले कल्चर रिपोर्ट आने में 3 से 4 दिन का समय लगता था, लेकिन अब प्रोकैल्सिटोनिन टेस्ट से 15 से 20 मिनट में डॉक्टर मरीज के शरीर में संक्रमण का पता लगा सकेंगे. इस शोध को अमेरिका के बाल्टीमोर में हाल में ही आयोजित 77वें अमेरिकन एकेडमी ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया. इस शोध के जरिए जो टूल बनाया गया है, उससे मरीज के शरीर में संक्रमण के स्तर का पता बहुत ही कम समय में लगाया जा सकता है. एम्स भोपाल में पारिसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी विभाग की हेड डॉ. अरनीत अरोरा ने बताया कि “पॉइंट ऑफ केयर टूल मरीजों के इलाज में भी क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है. इस शोध में ऑटोप्सी के दौरान सेप्सिस का पता लगाने के लिए प्रोकैल्सिटोनिन (पीसीटी) बायोमार्कर का उपयोग किया गया है. यह टूल 15 से 30 मिनट में बता देता है संक्रमण बता दें कि यह टूल एक सरल विधि पर कार्य करता है, इसके लिए पोस्टमार्टम के दौरान मृतक के शरीर से केवल एक बूंद खून और अंग का नमूना लिया जाता है. प्रोकैल्सिटोनिन टेस्ट के जरिए 10 से 15 मिनट में परिणाम मिल जाते हैं. इसकी ग्रेडिंग होती है. जो 05 से 50 के पार तक होती है. यदि अंक 10 से ऊपर हैं, तो यह संकेत देता है कि मृतक के शरीर में संक्रमण का स्तर बहुत अधिक था. यह टेस्ट मरीज के जीवित रहते भी किया जा सकता है, जैसे कल्बर टेस्ट. यह 15 से 30 मिनट में बता देता है कि शरीर में संक्रमण किस स्तर तक फैल चुका है, इससे पहले कल्बर टेस्ट (जिसकी रिपोर्ट दिन में आती है) पर ही निर्भर रहना पड़ता था. भारत में अभी केवल एम्स भोपाल में हुआ शोध दरअसल, कल्चर टेस्ट की रिपोर्ट में 3 दिन लगते थे, जिससे इलाज में देरी होती थी. बॉयोकेमिस्ट्री की मशीनों से प्रोकैल्सिटोनिन टेस्ट में 3 घंटे लगते थे, जो ऑटोप्सी के लिए उपयुक्त नहीं था. भारत में अभी यह शोध केवल एम्स भोपाल में हुआ है. विदेशों में जर्मनी और फ्रांस जैसे कुछ देशों में ही सीमित संस्थान इसका उपयोग करते हैं. देश में ऐसी तकनीक अभी व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है. बैक्टीरिया, वायरस के संक्रमण से शुरू होता है सेप्सिस यह टूल मरीजों को तुरंत सही इलाज दिलाने में मदद करेगा. सेप्सिस की जल्द पहचान से जान बचाने की संभावना बढ़ेगी. अस्पताल में भर्ती मरीजों का समय पर यह टेस्ट हो गया तो, संक्रमण के स्तर का पता लगाकर जरूरी दवाएं समय पर देकर उसकी जान बचाई जा सकती है. सेप्सिस एक जानलेवा स्थिति है, जो शरीर में बैक्टीरिया, वायरस या फंगस के कारण होने वाले गंभीर संक्रमण से शुरू होती है. यह तब होता है, जब शरीर का इम्यून सिस्टम संक्रमण से लड़ते हुए खुद के ऊतकों और अंगों को नुकसान पहुंचाने लगता है. यह आमतौर पर फेफड़े, मूत्र मार्ग या पेट के रास्ते से शुरू हो सकता है. यदि समय पर इलाज न हो तो यह मल्टी-ऑर्गन फेलियर होने से मौत का कारण बन सकता है. अभी 1000 से 1300 रुपये में होती हैं जांच एम्स भोपाल के डायरेक्टर प्रो. अजय सिंह ने बताया कि “अभी तक डॉक्टरों को यह पता नहीं चल पाता था कि मरीज में संक्रमण कितना गंभीर है. प्रोकैल्सिटोनिन टेस्ट से नंबर के आधार पर तुरंत स्थिति स्पष्ट हो जाती है, जिससे सही समय पर सटीक इलाज शुरू हो सकता है. यह चिकित्सा क्षेत्र में तेज और प्रभावी निदान को दिशा में इनोवेशन ला सकता है. अभी तक 100 केस पर टेस्ट किए गए हैं, 300 और केस के बाद निष्कर्ष निकाले जाएंगे. यह टूल सेप्सिस की त्वरित पहचान कर इलाज को आसान बनाएगा. इसकी लागत करीब 1000 रुपए से 1300 तक प्रति टेस्ट है.”

गर्मी में कूनो नेशनल पार्क में चीता शावकों के लिए एक नई जीवन रेखा मिली, लगाया सौर ऊर्जा से चलने वाला वाटर लिफ्ट सिस्टम

श्योपुर  इस गर्मी में कूनो नेशनल पार्क में चीता शावकों के लिए एक नई जीवन रेखा मिली है। यह है सौर ऊर्जा से चलने वाला वाटर लिफ्ट सिस्टम। इसने उन्हें भीषण गर्मी और कठोर परिस्थितियों से बचने में मदद की है। जून में उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया था। इससे पानी के स्रोतों पर बहुत दबाव पड़ा। मई 2023 में, नामीबियाई चीता ज्वाला के तीन शावकों की अत्यधिक गर्मी के कारण राष्ट्रीय उद्यान, मध्य प्रदेश में मौत हो गई थी। उस अनुभव से सीख लेकर, अधिकारियों ने एक सौर ऊर्जा से चलने वाला सिस्टम लगाया है। यह सिस्टम कूनो नदी से पानी पंप करता है और इसे 8.6 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से पार्क के अंदर 15 से अधिक स्थानों पर स्प्रिंकलर और पानी की तश्तरियों तक पहुंचाता है। कूनो नदी से पानी निकालकर जंगल में ला रहे अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक और चीता परियोजना निदेशक, उत्तम कुमार शर्मा ने X पर एक वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि कूनो नदी से पानी निकालकर, इसे किलोमीटर दूर ले जाकर, स्प्रिंकलर का उपयोग करके हरे-भरे स्थान बनाना, और पानी की उपलब्धता में सुधार करना, खासकर मां और नवजात शावकों के लिए, एक नियोजित तरीके से, काफी सफल रहा है। उन्होंने आगे कहा कि पानी का महत्व केवल इसकी अनुपस्थिति में महसूस होता है और यह कूनो में गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा महसूस होता है… ‘लू’ नामक गर्म हवाओं और 48 डिग्री सेल्सियस के आसपास के तापमान में, वन्यजीवों, विशेष रूप से युवाओं के लिए जीवन बहुत कठिन हो जाता है। 17 शावक हैं जीवित 2022-23 में, 20 अफ्रीकी चीतों को कूनो लाया गया था। तब से, भारत में 26 शावक पैदा हुए हैं। इनमें से 17 जीवित बचे हैं। दक्षिण अफ्रीकी चीता वीरा ने फरवरी 2025 में दो शावकों को जन्म दिया। एक अन्य दक्षिण अफ्रीकी चीता, निर्वा ने अप्रैल में पांच शावकों को जन्म दिया। निर्वा के दो शावकों की मौत हो गई, लेकिन अधिकारियों ने कहा कि बाकी ठीक हैं। उन्होंने कहा कि शावक पहली बार ऐसी कठोर परिस्थितियों का सामना कर रहे थे। मां और उनके बच्चे दोनों नियमित रूप से पानी के बिंदुओं का उपयोग कर रहे थे, जो इस पहल की सफलता का संकेत है। शावकों को गर्मी से राहत पहले, गर्मी के कारण शावकों की मौत हो जाती थी। इसलिए, इस बार अधिकारियों ने पहले से ही तैयारी कर ली थी। उन्होंने कूनो नदी से पानी निकालने के लिए सोलर पंप लगाए। फिर पाइपलाइन से पानी को जंगल में अलग-अलग जगहों पर पहुंचाया गया। इससे शावकों और उनकी मां को गर्मी से राहत मिली। उत्तम कुमार शर्मा ने कहा कि पानी की कमी होने पर ही इसका महत्व पता चलता है। कूनो में गर्मी के मौसम में यह बात सच साबित होती है। लू चलने और तापमान 48 डिग्री तक पहुंचने पर जानवरों के लिए जीना मुश्किल हो जाता है। खासकर छोटे शावकों के लिए। अधिकारियों ने बताया कि वीरा और निर्वा के शावक पहली बार इतनी गर्मी देख रहे हैं। लेकिन वे पानी के लिए बनाए गए पॉइंट्स पर जा रहे हैं। इससे पता चलता है कि यह योजना सफल हो रही है।

छिंदवाड़ा से सिवनी तक फोरलेन के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ प्रयासों की आवश्कता, किसान और उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा

छिंदवाड़ा नेशनल हाइवे 347 को छिंदवाड़ा से सिवनी तक फोरलेन में तब्दील करने के लिए मांग उठने लगी है. एनएचएआई (National Highways Authority of India) के तय मानकों के अनुकूल टू लेन हाइवे को फोरलेन में अपग्रेड करने के लिए सभी खूबियां मौजूद हैं. सबसे ज्यादा जरूरी ट्रैफिक की स्थिति होती है. यहां पीसीयू (पैसेंजर कार यूनिट) का 10 हजार से अधिक का आंकलन किया गया है. एनएचएआई के मानकों के अनुकूल 10 हजार पीसीयू में फोरलेन का निर्माण किया जा सकता है. छिंदवाड़ा से सावनेर तक फोरलेन बनाने का गडकरी ने किया था वादा छिंदवाड़ा से सावनेर तक एनएच 547 को फोरलेन में तब्दील करने की मांग स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जताई है. सौंसर के बजाज तिराहे से राजना जोड़ तक फोरलेन की मांग पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी पूर्व में आश्वासन दे चुके हैं. छिंदवाड़ा से सिवनी तक फोरलेन के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ प्रयासों की आवश्कता है. अभी छिंदवाड़ा-सिवनी 2 लेन हाइवे की ये स्थिति छिंदवाड़ा से सिवनी तक टू लेन हाइवे की लंबाई 70 किलोमीटर है. चौड़ाई 24 से 36 मीटर तक है. फोरलेन में 45 से 60 मीटर तक चौड़ाई की आवश्कता होगी. छिंदवाड़ा से सिवनी के बीच सिर्फ दो नदियां पड़ती हैं. पहली झिलमिली के पास पेंच नदी पर बड़ा पुल बना हुआ है. दूसरी लखनवाड़ा में बैनगंगा नदी, जहां नए सिरे से पुल निर्माण की आवश्कता होगी. किसान और उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा चौरई विधायक सुजीत सिंह चौधरी ने बताया कि, ”जिला महानगरों की तर्ज पर विकसित हो रहा है. यहां वेस्टर्न कोल फील्ड्स की कोयला खदानें पहले से संचालित हैं. बड़ी औद्योगिक इकाइयां भी जिले में स्थापित हैं. कृषि आधारित उद्योग भी छिंदवाड़ा-पांढुर्ना में स्थापित किए जाने हैं. ढाई हजार करोड़ की पेंच व्यपवर्तन सिंचाई परियोजना लगभग पूरी हो गई है. कन्हान नदी पर 4 हजार करोड़ लागत वाले छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स पर काम जारी है. फोरलेन बनने से इनको बढ़ावा मिलेगा.” सिवनी मंडी में सब्जी बेच सकेंगे किसान इस नेशनल हाईवे के बन जाने से किसानों को भी फायदा पहुंचेगा. क्योंकि छिंदवाड़ा जिले में सबसे ज्यादा सब्जी उत्पादक किसान हैं, जो सिवनी सब्जी मंडी से जुड़ जाएंगे. क्योंकि सिवनी की सब्जी मंडी में महाराष्ट्र के गोंदिया और छत्तीसगढ़ के रायपुर से व्यापारी पहुंचते हैं, ताकि किसानों को अपनी सब्जियों के अच्छे दाम मिल जाते हैं. इस नेशनल हाईवे के बन जाने से छिंदवाड़ा का किसान भी सिवनी सब्जी मंडी में अपनी फसल लेकर जा सकता है. हाइवे पर हादसों को रोकने में मिलेगी मदद यातायात विभाग द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, टू लेन हाइवे को फोरलेन में बदलकर सड़क दुर्घटनाओं को भी कम किया जा सकेगा. जिले में हाइवे पर हादसों के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2024 में 550 से ज्यादा दुर्घटनाएं हुई थीं, जिसमें 200 से ज्यादा जाने गई थीं. वहीं, इस साल जनवरी से 31 मई तक कुल 556 हादसे हुए हैं. जिनमें 718 घायल हुए, जबकि 218 की जान गई. इनमें अधिकांश हादसे हाईवे पर ही हुए. फोरलेन बनाने के लिए जरूरी मापदंड पूरे करता है हाईवे सबसे जरूरी पैसेंजर कार यूनिट 10 हजार से ज्यादा है, जो फोरलेन के लिए तय मानकों के अनुसार है. पहाड़ी या घाटी वाला क्षेत्र नहीं है, फॉरेस्ट भी बहुत कम मात्रा में है. मैदानी या समतल हिस्सा ज्यादा है. छिंदवाड़ा से सिवनी के बीच रोड अलाइ‌मेट के बदलने की आवश्यकता नहीं है. टू लेन को आसानी से फोरलेन में तब्दील किया जा सकता है. मेजर रोड कनेक्टिविटी भी पर्याप्त है. हाईवे नागपुर और जबलपुर से जुड़ेगा, सिवनी से बालाघाट के लिए भी आसानी होगी. बंडोल से चौरई व चौरई से रेमंड चौक तक स्टेट हाइवे कनेक्ट है. चौरई में बायपास पहले ही बना हुआ है. 70 किमी के हाइवे पर दूसरी बड़ी बसाहटें नहीं है. तीन बसाहटों ईसरा उमरिया, झिलमिली और लखनवाड़ा में पहले ही फोरलेन के अनुसार चौड़ी सड़क बनी हुई है.

सर्पदंश की घटनाओं के नियंत्रण के लिए जिलों के कलेक्टर को आवश्यक तैयारी एवं जन जागरूकता सुनिश्चित करने के लिये निर्देश जारी

भोपाल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण गृह विभाग ने वर्षाकाल के दृष्टिगत सर्पदंश की घटनाओं के नियंत्रण एवं बेहतर प्रबंधन के लिए सभी जिलों के कलेक्टर को आवश्यक तैयारी एवं जन जागरूकता सुनिश्चित करने के लिये निर्देश जारी किये हैं। सर्प-दंश स्थानीय आपदा घोषित है, इसके प्रभावी प्रबंधन के लिए हर ज़िले के लिए 23.17 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इस राशि का उपयोग प्रशिक्षण, जन-जागरूकता, मॉक ड्रिल, उपकरण की व्यवस्था और प्रचार-प्रसार जैसे कार्यों में किया जाएगा। वर्षाकाल में सर्पदंश की संवेदनशीलता वर्षा ऋतु में सांपों के प्राकृतिक आवासों में जलभराव हो जाने से वे मानव बस्तियों की ओर आ जाते हैं, जिससे सर्प-दंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, खेतों, नदी किनारे एवं बस्तियों की परिधियों में यह खतरा अधिक होता है। उक्त के प्रति लोगों में जागरूकता लाना, तथा प्रशासनिक सतर्कता बढ़ाना अति आवश्यक है। सभी जिलों को निर्देशित किया गया है कि वे पंचायत एवं शहरी वार्ड स्तर पर जागरूकता अभियान संचालित करें। स्कूलों, आंगनबाड़ियों और सामुदायिक स्थलों पर जागरूकता सत्र आयोजित हों। सोशल मीडिया, रेडियो, दीवार लेखन, बैनर-पोस्टर एवं लोक-प्रदर्शन (नुक्कड़ नाटक आदि) के माध्यम से सूचना का व्यापक प्रसार किया जाए। निर्देशों में कहा गया है कि सर्पदंश के प्रति संवेदनशील इलाकों में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर ‘सर्प मित्र’, सिविल डिफेंस वालंटियर्स एवं स्नेक-कैचर्स की टीम बनाई जाए। स्नेक-कैचर्स का डाटाबेस करें तैयार, हेल्पलाइन नंबर करें जारी शासन द्वारा यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि सभी जिलों में ‘स्नेक-कैचर्स’ और ‘सर्प मित्रों’ का विस्तृत डाटाबेस तैयार कर, उन्हें पंचायत/वार्ड स्तर पर नियुक्त किया जाए। सर्प मित्रों के हेल्पलाइन नंबर जारी कर व्यापक प्रचार भी किया जाए। इन मित्रों को स्नेक रेस्क्यू किट, फर्स्ट एड किट एवं आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, जिससे वे सर्पदंश की स्थिति में त्वरित और सुरक्षित बचाव कार्य कर सकें। अस्पतालों में एंटी-वेनम व उपचार की समुचित व्यवस्था के निर्देश शासकीय चिकित्सा संस्थानों में सर्पदंश के उपचार के लिए आवश्यक दवाइयाँ, उपकरण और पर्याप्त मात्रा में एंटी-वेनम स्टॉक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं जिला अस्पतालों में नागरिकों को प्राथमिक उपचार, चेतावनी संकेत, तथा सर्पदंश से संबंधित संपूर्ण प्रक्रिया की जानकारी देने वाले सूचना बोर्ड प्रदर्शित करने के लिए कहा गया है। आपदा प्रबंधन योजना में सर्प-दंश को शामिल कर बनायें योजना जिलों को निर्देशित किया गया है कि वे जिला आपदा प्रबंधन योजना में सर्प-दंश को स्थानीय आपदा के रूप में शामिल करें। इसके तहत पूर्व वर्षों की घटनाओं का जोखिम मूल्यांकन, प्रभाव क्षेत्र और प्रभावित वर्गों की पहचान कर एसओपी तैयार किया जाए। जीआईएस आधारित मैपिंग करते हुए डिजिटल डाटाबेस बनाया जाए, जिसमें घटनाओं की संख्या, स्थान, सांप की प्रजाति, एवं मृत्यु/रोगी की जानकारी सहेजी जाए। सर्पदंश से बचाव के लिए सावधानियाँ एवं सलाह जन सामान्य को सलाह दी गई है कि वे वर्षा ऋतु में विशेष सतर्कता बरतें। खेतों में कार्य करते समय जूते-मोज़े पहनें, गहरे रंग के कपड़े पहनें और हाथों में दस्ताने लगाएं। झाड़ियों, पुआल के ढेर, लकड़ी के गट्ठर आदि स्थानों में काम करने से पहले वहां डंडे या लाठी से हल्का प्रहार करें। अंधेरे में टॉर्च का उपयोग करें और बच्चों को बिना देखरेख खुले स्थानों पर न भेजें। घर के आसपास साफ-सफाई रखें, झाड़ियाँ काटें और कूड़ा-कचरा हटाएं। घरों की दीवारों में मौजूद दरारें बंद करें और खुले में सोने से परहेज़ करें। यदि किसी को सर्प ने डस लिया हो तो घबराएं नहीं, शरीर को शांत रखें और तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुँचें। घाव को चाकू से काटना, चूसना या उस पर कोई रसायन लगाना अत्यंत हानिकारक है। झाड़-फूंक, टोना-टोटका या तांत्रिक क्रियाओं में समय न गंवाएं। यह समय जीवन रक्षक हो सकता है, इसलिए हर क्षण अमूल्य है। सर्पदंश ग्रसित व्यक्ति को यथाशीघ्र अस्पताल ले जाएं। यदि संभव हो तो सांप का रंग, लंबाई या कोई चित्र याद रखें लेकिन उसे मारने या पकड़ने का प्रयास न करें, क्योंकि इससे और खतरा हो सकता है। कई बार सांप विषैला नहीं भी होता, पर उपचार में देर जानलेवा साबित हो सकती है। सभी नागरिकों से अपील की गई है कि वे सर्प-दंश से संबंधित इस आपदा को गंभीरता से लें। शासन एवं जिला प्रशासन द्वारा किए गए प्रबंध तभी प्रभावी होंगे जब नागरिक स्वयं भी सावधानी बरतेंगे, समय पर उपचार लेंगे और जागरूकता फैलाने में सहयोग करेंगे। संयुक्त प्रयासों से ही सर्पदंश से होने वाली जनहानि को नियंत्रित किया जा सकता है।  

जनजागरूकता के लिए सिकल सेल मित्र पहल की होगी शुरुआत, सिकल सेल रोगियों के लिए 33 जिलों में लगाये जाएँगे विशेष शिविर

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु की उपस्थिति में विश्व सिकल सेल दिवस 19 जून को बड़वानी में होगा राज्य स्तरीय कार्यक्रम राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु बड़वानी में उत्कृष्ट कार्य करने वाली पंचायतें होंगी सम्मानित जनजागरूकता के लिए सिकल सेल मित्र पहल की होगी शुरुआत, सिकल सेल रोगियों के लिए 33 जिलों में लगाये जाएँगे विशेष शिविर भोपाल  राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन-2047 के अंतर्गत विश्व सिकल सेल दिवस 19 जून को बड़वानी में ग्राम पंचायत तलून के खेल स्टेडियम में राज्य स्तरीय कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि रहेंगी। राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल सहित अन्य मंत्रीगण कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस अवसर पर कई नवाचारों का शुभारंभ किया जाएगा जिनमें जेनेटिक काउंसलिंग जागरूकता वीडियो और प्रभावित गर्भवती महिलाओं के लिए व्यापक दिशानिर्देश/मॉड्यूल शामिल हैं। लक्षित आयु वर्ग की शत-प्रतिशत स्क्रीनिंग पूर्ण करने वाली पंचायतों को सम्मानित किया जाएगा। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के एनसीसी निदेशॉलय के सहयोग से “सिकल सेल मित्र” पहल की शुरुआत भी की जायेगी। सिकल सेल मित्र युवा आबादी में जागरूकता के लिए सेवा प्रदाताओं के बीच लिंक के रूप में कार्य करेंगे। इस अवसर पर संपूर्ण प्रदेश में सिकल सेल रोग के प्रति जागरूकता लाने की गतिविधियाँ आयोजित की जायेंगी। सिकल सेल प्रभावित 33 जिलों में विशेष परामर्श शिविर लगाए जाएंगे, जहाँ उन्हें आनुवंशिक परामर्श, रोग प्रबंधन, भावी पीढ़ी के लिए संभावनाओं और आवश्यक चिकित्सकीय सेवाओं की जानकारी दी जाएगी। उप-केन्द्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक सभी प्राथमिक एवं माध्यमिक स्वास्थ्य संस्थानों में विशेष शिविर लगाकर रोगियों की पहचान, स्क्रीनिंग तथा परिवार के अन्य सदस्यों की भी जांच की जायेगी। सिकल सेल रोगियों और उनके देखभाल कर्ताओं को पेन क्राइसिस जैसी तीव्र स्थितियों में प्रबंधन के तरीकों से अवगत कराया जाएगा। प्रभावित जिले की विशेष रूप से प्रभावित जनजातीय एवं ग्रामीण पंचायतों में स्क्रीनिंग और परामर्श के लिए अभियान चलाया जाएगा। राज्य स्तर पर विकसित जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड का वितरण किया जाएगा, जिससे लोगों को आनुवंशिक जानकारी समझने में सुविधा होगी। दिव्यांगता योजनाओं और वित्तीय सहायता से सिकल-सेल रोगियों को जोड़ने की प्रक्रिया सरल करने के लिए यूडीआईडी कार्ड निर्माण के लिए मेगा शिविर भी लगाए जाएगे। प्रदेश में राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन के अंतर्गत अब तक 1 करोड़ 6 लाख से अधिक नागरिकों की सिकल सेल स्क्रीनिंग की जा चुकी है और इनमें से 2 लाख से अधिक वाहक चिन्हित हुए और 29 हज़ार 277 लोग सिकल सेल रोग से ग्रसित पाए गए। इन मरीजों का उपचार जारी है। अब तक 80 लाख 9 हज़ार से अधिक सिकल सेल कार्ड वितरित किए जा चुके हैं जिनसे प्रभावित नागरिक अपनी स्वास्थ्य स्थिति को समझ कर उचित उपचार प्राप्त कर रहे हैं। नेशनल सिकल सेल पोर्टल के माध्यम से स्क्रीनिंग व उपचार की सतत मॉनीटरिंग की जा रही है। रोगियों को नि:शुल्क उपचार, जेनेटिक काउंसलिंग, औषधियां, वैक्सीनेशन एवं ब्लड ट्रांस्फ्यूजन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब तक 26,115 रोगियों को हाइड्रॉक्सीयूरिया दवा से उपचार मिला है। विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर जनजातीय स्कूलों, कॉलेजों व छात्रावासों में स्क्रीनिंग शिविर भी सतत आयोजित किए जा रहे हैं। प्रदेश में मिशन की शुरुआत 15 नवंबर 2021 को राज्य हिमोग्लोबिनोपैथी मिशन के रूप में अलीराजपुर और झाबुआ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मिशन को 1 जुलाई 2023 को राष्ट्रीय स्तर पर शहडोल से लॉन्च किया था। वर्तमान में प्रदेश के 33 जिलों में स्क्रीनिंग जारी है, जिसमें 20 जिलों के 89 विकासखंड एवं 13 अतिरिक्त जिले (पीएम जनमन योजना) शामिल हैं। सिकल सेल उन्मूलन के लिए एम्स भोपाल में नवजात शिशुओं की 72 घंटे में जाँच के लिए विशेष लैब स्थापित है। सभी चिन्हित मरीजों को हाइड्रॉक्सीयूरिया, फॉलिक एसिड और निःशुल्क रक्ताधान की सुविधा प्रदान की जा रही है। गंभीर मरीजों के लिए इंदौर मेडिकल कॉलेज में बोनमेरो ट्रांसप्लांट यूनिट स्थापित की गई है, जहाँ 100 से अधिक ट्रांसप्लांट हो चुके हैं। रीवा में सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस स्थापित किया गया है। मध्यप्रदेश में मिशन के तहत 2047 तक सिकल सेल को पूरी तरह समाप्त करने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में सतत और सशक्त प्रयास किये जा रहे है।  

राम वन गमन पथ के लिए सरकार का बड़ा प्रोजेक्ट, अक्टूबर तक चिह्नित हो जाएंगे राम वन गमन पथ के सभी स्थल

भोपाल  मध्य प्रदेश में राम वन गमन पथ के कम ज्ञात स्थलों को चिह्नित करने के लिए राज्य सरकार ने इस क्षेत्र में लंबे समय से शोध कर रहे डॉ. राम अवतार शर्मा के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। उन्होंने बताया कि चार माह में प्रदेश के कम ज्ञात स्थलों को चिह्नित कर शासन को रिपोर्ट सौंप देंगे। उनके साथ चार से पांच लोगों का दल भ्रमण कर प्रदेश में ऐसे स्थलों को चिह्नित और प्रमाणित करने की कोशिश करेगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर मध्य प्रदेश में राम वन गमन पथ का पूरा मार्ग तय हो जाएगा। उन्होंने मंडला और बालाघाट के कुछ स्थलों को भी नए सिरे से इसमें जोड़ा है। सभी स्थलों का पर्यटन, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से विकास किया जाएगा। अभी तक प्रदेश के 11 जिलों के 25 स्थलों को राम वन गमन पथ से जोड़ा गया है। ये वे स्थान हैं जहां वनवास के समय भगवान श्रीराम गए थे। इनमें सतना में चित्रकूट सहित कई स्थल पहले से श्रीराम के प्रवास के लिए जाने जाते हैं। कुछ ऐसी जगहें भी हैं जहां माना जाता है भगवान राम गुजरे थे या रुके थे पर वे प्रसिद्ध नहीं हैं यानी कम ज्ञात हैं। उनसे जुड़े प्रमाण भी कम मिलते हैं, इस कारण उन्हें खोजा जा रहा है। बता दें, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राम वन गमन पथ निर्माण को लेकर सक्रिय हैं। वह इसके लिए बनाए गए न्यास के अध्यक्ष भी हैं। बजट में राम वन गमन पथ के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रविधान इस वर्ष किया गया है। अभी तक इन स्थलों को किया चिह्नित सतना जिले के चित्रकूट में स्फटिक शिला, गुप्त गोदावरी, अत्रि आश्रम, शरभंग आश्रम, अश्वमुनि आश्रम, सिलहा गांव में सुतीक्ष्ण आश्रम, सिद्धा पहाड़, रक्सेला गांव में सीता रसोई और रामसेल। पन्ना में पहाड़ी खेरा गांव में बृहस्पति कुंड, सारंगधर गांव में सुतीक्ष्ण आश्रम, बड़े गांव में अग्निजिह्वा आश्रम और सलेहा में अगस्त्य आश्रम, मैहर जिले में राम जानकी मंदिर, कटनी जिले के भरभरा में शिव मंदिर, जबलपुर जिले में पिपरिया के पास रामघाट, नर्मदापुरम में पासी घाट और माच्छा के राम मंदिर, बालाघाट जिले में राम पायली, मंडला में सीता रपटन, उमरिया जिले में राम मंदिर दशरथ घाट और मार्कंडेय आश्रम, शहडोल के गंधिया और अनूपपुर के कनवाई में स्थित सीतामढ़ी। 48 वर्षों से श्रीराम से जुड़े तीर्थों पर शोध कर रहे डॉ. राम अवतार शर्मा आयकर विभाग में वरिष्ठ अधिकारी रह चुके डॉ. राम अवतार शर्मा 48 वर्षों से श्रीराम से जुड़े तीर्थों पर शोध कर रहे हैं। उन्होंने 290 स्थलों को राम तीर्थ के रूप में खोजा है। इनकी अनुशंसा पर केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों के पर्यटन विभाग ने अपने मानचित्र पर इन स्थलों को दिखाया और विकास योजनाएं बनाईं। सीएम ने कहा कि मार्गों का विकास तो होगा ही उससे ज्यादा जरूरी है कि पहले मार्ग पर आने वाले श्रीराम से जुड़े स्थलों को विकसित किया जाए। पहले चित्रकूट का समग्र विकास अयोध्या की तर्ज पर किया जाए। कनेक्टिविटी बढ़ाने पर भी जोर दिया। समग्र विकास की कार्ययोजना तैयार कर अगली बैठक में पेश करने को कहा। न्यास की बैठक हर तीन माह में होगी। सीएम ने कहा कि राम से जुड़ी स्मृतियों का सालभर प्रचार किया जाएगा। जिला पर्यटन परिषद और अन्य विभागों को इसके लिए कार्ययोजना बनाने को कहा। ऐसे जुटाएंगे राशि इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट प्लान के तहत पहले चित्रकूट सहित चार नगरों को नामांकित किया। 500 करोड़ की योजना में पहले फेज में चित्रकूट नहीं था। एशियन डेवलपमेंट बैंक से मिली राशि में अभी 100 करोड़ रुपए बचे हैं। सीएम ने प्रपोजल को रिवाइज करने को कहा। एडीबी से राशि मांगेंगे। पुरानी शेष राशि और नई राशि मिलाकर 400 करोड़ से चित्रकूट का विकास होगा। मप्र में राम वन गमन पथ के चार रूट प्रदेश में राम वन गमन पथ के लिए 1450 किमी लंबो चार रूट प्रस्तुत किए। इनमें 632 किमी नेशनल हाइवे, 493 किमी म.प्र. सड़क विकास निगम, 47 किमी लोनिवि, 184 किमी प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना और 93 किमी की क्षेत्रीय सड़क शामिल होंगी। इनका उन्नयन होगा। तैयार करें स्थल विकास के प्रस्ताव बैठक में श्रीराम से जुड़े 23 स्थलों की जानकारी रखी गई। सीएम ने कहा कि राम पर शोध करने वाले विद्वानों की समिति बनाकर पहले स्थल का निर्धारण करवा लें, ताकि स्थलों को लेकर विवाद की स्थिति न बने। अगली बैठक में इन स्थलों को विकसित करने के प्रोजेट रखे जाएं, लेकिन सबसे पहले चित्रकूट के समग्र विकास का रोड मैप तैयार किया जाए।

इंदौर में पश्चिमी आउटर रिंग रोड का निर्माण होने जा रहा, प्रोजेक्ट में 750 करोड़ रुपए का मुआवजा घोषित

इंदौर   एमपी के इंदौर शहर में पश्चिमी आउटर रिंग रोड का निर्माण होने जा रहा है। इस रोड के बनने से 26 गांव प्रभावित हो रहे हैं, जिसका अवॉर्ड घोषित हो गया है। पूरे प्रोजेक्ट में करीब 750 करोड़ रुपए का मुआवजा घोषित किया गया है। इसकी ग्राम वार फेहरिस्त भी तैयार हो गई है। किसानों के नाम की भी सूची बनी हुई है, जैसे ही एनएचएआइ की तरफ से राशि सरकारी खजाने में जमा होगी, वैसे ही किसानों के खातों में ऑनलाइन पैसे जमा होने लगेंगे। गौरतलब है कि एनएचएआइ 64 किमी लंबे और 80 मीटर चौड़ा यह रोड बनाने जा रहा है, जो एनएच-52 में नेट्रेक्स के पास से शुरू होकर शिप्रा नदी के नजदीक खत्म होगा। इसमें इंदौर जिले की देपालपुर तहसील के 5, हातोद के 12 और सांवेर के 9 गांवों की करीब 600 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित हो रही है। ये जमीन प्रोजेक्ट में शामिल हो रही देपालपुर तहसील के पांच गांव इस प्रोजेक्ट में हैं। इनमें किशनपुरा, बेटमाखुर्द, मोहना, ललेंडीपुरा और रोलाय है। इसमें निजी रकबा 66.68 हेक्टेयर और 14.36 हेक्टेयर सरकारी जमीन है। सांवेर तहसील के 9 गांवों में 160 हेक्टेयर जमीन आ रही है। इसमें धतूरिया, बालोदा टाकून, सोलसिंदा, कटक्या, ब्राह्मण पीपल्या, मुंडला हुसैन, जैतपुरा, पीर कराड़िया और बरलाई जागीर शामिल है। ये भी जानिए 160 किमी का होगा आउटर रिंग रोड 64 किमी इसमें पश्चिमी हिस्सा 30 किमी हातोद का हिस्सा 23.60 किमी सांवेर का हिस्सा 10.40 किमी देपालपुर का हिस्सा  

मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के नेतृत्व में गांव-गांव में जल चौपाल का शुभारंभ पौधरोपण से किया गया

भोपाल  प्रदेश में 30 मार्च से शुरू हुए जल गंगा संवर्धन अभियान के कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच गये हैं। जिलों में अब इन कार्यों की समीक्षा की जा रही है। इसी के साथ तालाब गहरीकरण, सोखता गड्ढ़ों का निर्माण सहित अन्य कार्य जनभागीदारी से तेज गति से किये जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जल संचयन के कामों के प्रति जनसामान्य को दीवार लेखन सहित अन्य गतिविधियों से जागरूक किया जा रहा है। प्रदेश में आगामी वर्षा के मौसम को देखते हुए जल स्रोतों के आस-पास व्यापक पौधरोपण की योजना भी तैयार की गई है। दीवार लेखन से किया जा रहा है जागरूक पांढुरना जिले में कलेक्टर अजय देव शर्मा के निर्देश पर मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के नेतृत्व में गांव-गांव में जल चौपाल का शुभारंभ पौधरोपण से किया गया एवं पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई गई। दीवार लेखन का कार्य भी किया गया। जल चौपाल में ग्रामीणों के बीच बैठकर कार्यकर्ताओं द्वारा उनको जल स्रोतों के आस-पास निरंतर साफ-सफाई रखने की समझाइश दी गई। जिले में तैयार की गई पौधरोपण की कार्ययोजना पर भी जानकारी दी गई। जनसमुदाय को क्षेत्र के आस-पास की ऐतिहासिक बावड़ी की जानकारी भी दी गई। वाटर बॉडी को करें जियो टैग रतलाम जिले में कलेक्टर कार्यालय में जल संवर्धन अभियान में अब तक किये गये कार्यों की समीक्षा की गई। कलेक्टर राजेश बाथम ने अभियान में चल रहे कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि जल संवर्धन एवं संरक्षण के लिए अब तक जो भी काम किए गए हैं उनकी जानकारी गूगल सीट में अपडेट करें। जिले में जल संवर्धन के लिए अब तक बनाई गई सभी वाटर बॉडी की जियो टैगिंग अनिवार्य रूप से की जाये। बैठक में स्कूल भवनों, अस्पताल, हेल्थ एण्ड वेलनेस सेन्टर, आँगनबाड़ी भवनों, पंचायत भवनों में बनाये गए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की जानकारी दी गई। जल संवर्धन अभियान की समीक्षा के दौरान जल संसाधन विभाग को निर्देशित किया कि जलशक्ति केन्द्रों का निरीक्षण कर जानकारी उपलब्ध करवाई जाये। पीएचई विभाग को निर्देश दिये गये कि आँगनबाड़ी केंद्र एवं स्कूलों में हैण्डपम्प के पास जल संवर्धन के लिए बनाये जा रहे रीचार्ज पिट को शीघ्र पूरा किया जाये। जल संरक्षण के सभी कार्य बरसात के पहले पूरे हों शहडोल कमिश्नर श्रीमती सुरभि गुप्ता ने संभाग के तीनों जिलों में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के सभी कार्य बरसात के पहले पूरा करने के निर्देश दिये हैं। उन्होने कहा कि जल संरचनाएं, पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार, नए अमृत सरोवरों का निर्माण, निर्मल नीर, खेत तालाब, कुओं की सफाई एवं रिचार्ज की व्यवस्था हैण्डपंपों के पास जल संरक्षण कार्य, पुरानी बावड़ियों का जीर्णोद्धार सहित सभी कार्य 20 जून तक पूरे किए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि तालाबों के कैचमेंट एरिया के अवरोधों को हटाया जाए जिससे तालाबों में वर्षा का पानी पहुंच सके। जल संरचनाओं को राजस्व रिकार्ड में दर्ज किया जाए। बावड़ी उत्सव देवास जिले में जन अभियान परिषद ने कमलापुर में जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत बावड़ी उत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया। कमलापुर की हाथी बावड़ी ऐतिहासिक धरोहर है। बावड़ी उत्सव जल संरचना के सांस्कृतिक मूल्यों, ऐतिहासिक धरोहरों के संवर्धन एवं सहेजने का उत्सव है। कमलापुर का बावड़ी उत्सव लोकमाता अहिल्याबाई की त्रि शताब्दी के अवसर पर किया गया। जिले की तीन ऐतिहासिक धरोहरों में कमलापुर की हाथी बावड़ी भी शामिल है। कार्यक्रम में हुकुम पटेल द्वारा हाथी बावड़ी के संरक्षण के कार्यों की जानकारी दी गई। जिले में प्राचीन बावड़ियां को जन सहयोग से साफ स्वच्छ करने का कार्य किया जा रहा है। जल स्रोतों की साफ-सफाई रीवा और मऊगंज जिले में वर्षा जल को संचित करने के लिए जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में पुराने जल स्त्रोतों की साफ-सफाई के साथ-साथ नई जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। वर्षाकाल में पौधरोपण की भी तैयारी की जा रही है। इस संबंध में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मेहताब सिंह गुर्जर ने बताया कि पीएचई विभाग द्वारा नल जल योजनाओं को दोबारा शुरू करने तथा पाइप लाइन की मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। अभियान में जिले भर में बड़ी संख्या में खेत तालाबों का निर्माण भी किया जा रहा है। ग्राम पंचायत धोपखरी में दो खेत तालाब बनाये जा रहे हैं। इसके साथ ही आस-पास के क्षेत्र में बनाये जा रहे खेत-तालाब की प्रगति की जानकारी भी ली गई। आगामी वर्षा के मौसम को देखते हुए औद्योगिक विकास निगम द्वारा पौधरोपण के लिए गड्ढे तैयार किये जा रहे हैं। जिले में प्राचीन जल स्त्रोतों की सफाई तथा अमृत सरोवरों का निर्माण किया जा रहा है। स्वच्छ पानी के लिये ग्रामों में क्लोरिनेशन कार्य मंडला जिले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी कार्यालय द्वारा जिले के ग्रामीण इलाकों में जनसामान्य को जागरुक करने के लिये प्रचार रथ द्वारा वर्षा काल में पानी को साफ करने के तरीके, पानी जांच प्रक्रिया से समुदाय को अवगत कराया जा रहा है। विभाग द्वारा समुदाय को जल शुद्धिकरण की सामग्री भी प्रदान की जा रही है। इस सिलसिले में प्रचार रथ ने अनेक गांव का भ्रमण भी किया है।  

जनभागीदारी से जल संरक्षण के तेजी से हो रहे है काम

भोपाल. प्रदेश में 30 मार्च से शुरू हुए जल गंगा संवर्धन अभियान के कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच गये हैं। जिलों में अब इन कार्यों की समीक्षा की जा रही है। इसी के साथ तालाब गहरीकरण, सोखता गड्ढ़ों का निर्माण सहित अन्य कार्य जनभागीदारी से तेज गति से किये जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जल संचयन के कामों के प्रति जनसामान्य को दीवार लेखन सहित अन्य गतिविधियों से जागरूक किया जा रहा है। प्रदेश में आगामी वर्षा के मौसम को देखते हुए जल स्रोतों के आस-पास व्यापक पौधरोपण की योजना भी तैयार की गई है। दीवार लेखन से किया जा रहा है जागरूक पांढुरना जिले में कलेक्टर श्री अजय देव शर्मा के निर्देश पर मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के नेतृत्व में गांव-गांव में जल चौपाल का शुभारंभ पौधरोपण से किया गया एवं पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई गई। दीवार लेखन का कार्य भी किया गया। जल चौपाल में ग्रामीणों के बीच बैठकर कार्यकर्ताओं द्वारा उनको जल स्रोतों के आस-पास निरंतर साफ-सफाई रखने की समझाइश दी गई। जिले में तैयार की गई पौधरोपण की कार्ययोजना पर भी जानकारी दी गई। जनसमुदाय को क्षेत्र के आस-पास की ऐतिहासिक बावड़ी की जानकारी भी दी गई। वाटर बॉडी को करें जियो टैग रतलाम जिले में कलेक्टर कार्यालय में जल संवर्धन अभियान में अब तक किये गये कार्यों की समीक्षा की गई। कलेक्टर श्री राजेश बाथम ने अभियान में चल रहे कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि जल संवर्धन एवं संरक्षण के लिए अब तक जो भी काम किए गए हैं उनकी जानकारी गूगल सीट में अपडेट करें। जिले में जल संवर्धन के लिए अब तक बनाई गई सभी वाटर बॉडी की जियो टैगिंग अनिवार्य रूप से की जाये। बैठक में स्कूल भवनों, अस्पताल, हेल्थ एण्ड वेलनेस सेन्टर, आँगनबाड़ी भवनों, पंचायत भवनों में बनाये गए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की जानकारी दी गई। जल संवर्धन अभियान की समीक्षा के दौरान जल संसाधन विभाग को निर्देशित किया कि जलशक्ति केन्द्रों का निरीक्षण कर जानकारी उपलब्ध करवाई जाये। पीएचई विभाग को निर्देश दिये गये कि आँगनबाड़ी केंद्र एवं स्कूलों में हैण्डपम्प के पास जल संवर्धन के लिए बनाये जा रहे रीचार्ज पिट को शीघ्र पूरा किया जाये। जल संरक्षण के सभी कार्य बरसात के पहले पूरे हों शहडोल कमिश्नर श्रीमती सुरभि गुप्ता ने संभाग के तीनों जिलों में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के सभी कार्य बरसात के पहले पूरा करने के निर्देश दिये हैं। उन्होने कहा कि जल संरचनाएं, पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार, नए अमृत सरोवरों का निर्माण, निर्मल नीर, खेत तालाब, कुओं की सफाई एवं रिचार्ज की व्यवस्था हैण्डपंपों के पास जल संरक्षण कार्य, पुरानी बावड़ियों का जीर्णोद्धार सहित सभी कार्य 20 जून तक पूरे किए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि तालाबों के कैचमेंट एरिया के अवरोधों को हटाया जाए जिससे तालाबों में वर्षा का पानी पहुंच सके। जल संरचनाओं को राजस्व रिकार्ड में दर्ज किया जाए। बावड़ी उत्सव देवास जिले में जन अभियान परिषद ने कमलापुर में जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत बावड़ी उत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया। कमलापुर की हाथी बावड़ी ऐतिहासिक धरोहर है। बावड़ी उत्सव जल संरचना के सांस्कृतिक मूल्यों, ऐतिहासिक धरोहरों के संवर्धन एवं सहेजने का उत्सव है। कमलापुर का बावड़ी उत्सव लोकमाता अहिल्याबाई की त्रि शताब्दी के अवसर पर किया गया। जिले की तीन ऐतिहासिक धरोहरों में कमलापुर की हाथी बावड़ी भी शामिल है। कार्यक्रम में श्री हुकुम पटेल द्वारा हाथी बावड़ी के संरक्षण के कार्यों की जानकारी दी गई। जिले में प्राचीन बावड़ियां को जन सहयोग से साफ स्वच्छ करने का कार्य किया जा रहा है। जल स्रोतों की साफ-सफाई रीवा और मऊगंज जिले में वर्षा जल को संचित करने के लिए जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में पुराने जल स्त्रोतों की साफ-सफाई के साथ-साथ नई जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। वर्षाकाल में पौधरोपण की भी तैयारी की जा रही है। इस संबंध में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मेहताब सिंह गुर्जर ने बताया कि पीएचई विभाग द्वारा नल जल योजनाओं को दोबारा शुरू करने तथा पाइप लाइन की मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। अभियान में जिले भर में बड़ी संख्या में खेत तालाबों का निर्माण भी किया जा रहा है। ग्राम पंचायत धोपखरी में दो खेत तालाब बनाये जा रहे हैं। इसके साथ ही आस-पास के क्षेत्र में बनाये जा रहे खेत-तालाब की प्रगति की जानकारी भी ली गई। आगामी वर्षा के मौसम को देखते हुए औद्योगिक विकास निगम द्वारा पौधरोपण के लिए गड्ढे तैयार किये जा रहे हैं। जिले में प्राचीन जल स्त्रोतों की सफाई तथा अमृत सरोवरों का निर्माण किया जा रहा है। स्वच्छ पानी के लिये ग्रामों में क्लोरिनेशन कार्य मंडला जिले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी कार्यालय द्वारा जिले के ग्रामीण इलाकों में जनसामान्य को जागरुक करने के लिये प्रचार रथ द्वारा वर्षा काल में पानी को साफ करने के तरीके, पानी जांच प्रक्रिया से समुदाय को अवगत कराया जा रहा है। विभाग द्वारा समुदाय को जल शुद्धिकरण की सामग्री भी प्रदान की जा रही है। इस सिलसिले में प्रचार रथ ने अनेक गांव का भ्रमण भी किया है।

के-10 नेशनल कराते चैम्पियनशिप देहरादून-2025: कराते अकादमी के खिलाड़ियों ने जीते 3 स्वर्ण पदक

भोपाल. देहरादून में 11 से 15 जून तक आयोजित के-10 नेशनल कराते चैम्पियनशिप में राज्य कराते अकादमी के खिलाड़ियों ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 3 स्वर्ण पदक अर्जित है। चैम्पियनशिप के जूनियर एवं सब-जूनियर वर्ग में अकादमी के 7 खिलाड़ियों ने भागीदारी की। प्रतियोगिता में अकादमी की खिलाड़ी धरकन शाह, कल्याणी कोडोपे एवं रूशा तांबत ने स्वर्ण पदक अर्जित कर प्रदेश को गौरन्वित किया। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने तीनों खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनकी सराहना की है। परिणाम प्रतियोगिता के 53 किलोग्राम भार वर्ग की जूनियर स्पर्धा में अकादमी के खिलाड़ी धरकन शाह ने स्वर्ण पदक अर्जित किया। धरकन ने पहले राउंड में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी को 8-0 शिकस्त दी। दूसरे राउंड में राजस्थान के खिलाड़ी से 7-3 के अंतर से मुकाबला जीता। तीसरे एवं चौथे राउंड में क्रमशः हरियाणा एवं अरूणाचल प्रदेश के खिलाड़ियों को 8-0 के अंतर से परास्त कर फायनल में प्रवेश किया। फायनल राउंड में धरकन शाह ने बिहार के खिलाड़ी को 8-0 से एकतरफा परास्त कर स्वर्ण पदक अर्जित किया। चैम्पियनशिप के 66 किलोग्राम भार वर्ग की जूनियर स्पर्धा में अकादमी की खिलाड़ी कल्याणी कोडोपे ने स्वर्ण पदक अर्जित किया। कल्याणी ने पहले राउंड में महाराष्ट्र की खिलाड़ी को 9-0 से परास्त किया। दूसरे राउंड में राजस्थान की खिलाड़ी को 8-0 एवं तीसरे राउंड में दिल्ली की खिलाड़ी को 8-0 से शिकस्त दी। चौथे राउंड में कल्याणी ने छत्तीसगढ़ की खिलाड़ी को 8-2 से परास्त कर स्पर्धा का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। चैम्पियनशिप के 59 किलोग्राम भार वर्ग की जूनियर स्पर्धा में अकादमी की खिलाड़ी रूशा तांबत ने स्वर्ण पदक अर्जित किया। स्पर्धा में रूशा ने पहले राउंड में राजस्थान की खिलाड़ी को 8-0 तथा दूसरे राउंड में नागालैण्ड की खिलाड़ी को 5-0 से शिकस्त देकर क्वार्टर फायनल में प्रवेश किया। क्वार्टर फायनल में रूशा ने कर्नाटक की खिलाड़ी को 8-2 से एवं सेमी फायनल मुकाबले में हरियाणा की खिलाड़ी को 6-1 से परास्त कर फायनल में प्रवेश किया। फायनल मुकाबले में रूशा तांबत ने उत्तराखण्ड की खिलाड़ी को मुकाबले में 9-0 से परास्त कर स्वर्ण पदक जीता।

इंस्पायर अवार्ड मानक योजना: प्रदेश के 62 हजार से अधिक बच्चों के विचार पोर्टल पर अपलोड किये गये

भोपाल. केन्द्र सरकार के प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा संचालित इंस्पायर अवार्ड मानक योजना के माध्यम से स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करने के मकसद से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश में इंस्पायर अवार्ड मानक योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के जरिये बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण उत्पन्न करने के प्रयास किये जा रहे हैं। पिछले वर्ष स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित इस योजना में शासकीय विद्यालयों के अलावा अशासकीय विद्यालय के साथ केन्द्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और अन्य विद्यालयों के बच्चे शामिल हुए। प्रतियोगिता में 62 हजार 124 बच्चों के विज्ञान से जुड़े आइडियाज भारत सरकार के पोर्टल पर अपलोड किये गये। प्रदेश की छात्रा को मिला जापान जाने का मौका केन्द्र सरकार की इस प्रतियोगिता में नई दिल्ली में आयोजित विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश में स्थान प्राप्त विदिशा जिले की रूपाली लोधी को एक्सचेंज प्रोग्राम में वर्ष 2024 में जापान जाने का मौका मिल चुका है। योजना में कक्षा-6 से कक्षा-10 तक नियमित अध्ययनरत विद्यार्थी इस प्रतियोगिता में शामिल हो सकते हैं। केन्द्र सरकार द्वारा यह कार्यक्रम देशभर के 5 लाख विद्यालयों में संचालित किया जा रहा है। योजना के माध्यम से प्रत्येक विद्यालय से 2 सर्वश्रेष्ठ विचार के मान से लगभग 10 लाख नवाचारों को प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

16वीं मानसून रिगाटा-2025 चैम्पियनशिप: सेलिंग अकादमी के खिलाड़ियों ने जीते 1 स्वर्ण, 1 रजत एवं 3 कांस्य सहित कुल 5 पदक

भोपाल. हैदराबाद, तेलंगाना में 8 से 14 जून तक आयोजित 16वीं मानसून रिगाटा-2025 नेशनल रैंकिंग जूनियर इवेंट में मध्यप्रदेश सेलिंग स्कूल, भोपाल सहित कुल 9 राज्यों/क्लब के 96 खिलाड़ियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में 7 रैंकिंग एवं 5 नॉन रैंकिग स्पर्धाएं की गई। प्रतियोगिता में अकादमी के 15 खिलाड़ियों ने 12 गोल्ड मेडल्स की केटगरी (7 रैंकिंग एवं 5 नॉन रैंकिग) में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ठ प्रदर्शन करते हुए 1 स्वर्ण, 1 रजत एवं 3 कांस्य सहित कुल 5 पदक अर्जित किये। खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सभी पदक विजेता खिलाड़ियों को बधाई दी है। उल्लेखनीय है कि सभी खिलाड़ी मध्यप्रदेश राज्य खेल अकादमी में प्रशिक्षक नरेन्द्र सिंह राजपूत के मार्गदर्शन में अकादमी में प्रशिक्षणरत है। परिणाम प्रतियोगिता की 29 बालिका वर्ग स्पर्धा में अकादमी की बालिका खिलाड़ी शगुन झा एवं अपर्णा चौधरी की जोड़ी ने स्वर्ण पदक अर्जित किया। प्रतियोगिता की आई एल सी ए 4 बालिका वर्ग स्पर्धा में अकादमी की खिलाड़ी आस्था पाण्डे ने रजत एवं माहि वर्मा ने कांस्य पदक अर्जित किया। इसी वर्ग की बालक वर्ग स्पर्धा में अकादमी के खिलाड़ी वासु चंद्रवंशी ने कांस्य पदक जीता। प्रतियोगिता के 420 मिक्सड कैटेगरी में अकादमी के पार्थ सिंह चौहान एवं समृद्धि बाथम की जोड़ी ने कांस्य पदक अर्जित किया।a

मुख्यमंत्री ने बरेली में किया 138.96 करोड़ के 45 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारा मध्यप्रदेश अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। विकास की यह गति हम थमने नहीं देंगे। विकास की हर बात पर सरकार नागरिकों से कदम से कदम मिलाकर काम करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगामी रक्षाबंधन के अवसर पर प्रदेश की सभी लाड़ली बहनों के खाते में 1500 रूपये की राशि अंतरित की जायेगी। जिसमें योजना की तय राशि 1250 रूपये के अलावा 250 रूपये रक्षाबंधन पर उपहार के रूप में दिये जायेंगे। उन्होंने कहा कि सबके सहयोग से अगले पांच साल में हम मध्यप्रदेश की तस्वीर बदल देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को रायसेन जिले की बरेली में विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वास्थ्य विभाग के निर्माण कार्यों सहित कुल 138.96 करोड़ की लागत वाले विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री ने चयनित हितग्राहियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं के हितलाभ भी वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल गंगा संवर्द्धन अभियान के तहत स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ पौधरोपण भी किया। बरेली विकास के पथ पर है अग्रसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास के नए-नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। मध्यप्रदेश के साथ बरेली क्षेत्र पर छींद वाले हनुमान जी महाराज की असीम कृपा है। कृषि संपन्न बरेली क्षेत्र भी विकास के पथ पर अग्रसर है। गांव-गांव को सड़क से जोड़ने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरू की थी। तब विरोधी लोग कहते थे कि गांव में सड़क की क्या जरूरत है, वहां तो बैलगाड़ी चलती है। दूरदर्शी नेतृत्व के धनी स्व. अटलजी ने देश को स्वर्णिम चतुर्भुज योजना की भी सौगात दी, जिसका लाभ आज पूरे देश और नर्मदांचल को भी मिल रहा है। अगले तीन सालों में किसानों को बिजली बिल से कर देंगे मुक्त मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों को 5 रुपए में बिजली कनेक्शन देने का निर्णय लिया है। हमारी सरकार की कोशिश है कि अगले 3 सालों में हम किसानों को बिजली बिल से पूरी तरह मुक्त कर देंगे। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने किसानों के लिए सोलर पंप योजना की शुरुआत की है। किसान अपनी बिजली बनाएं, उपयोग करें और उनकी जरूरत से ज्यादा/अतिरिक्त बिजली सरकार खरीदेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर खेत तक पानी पहुंचाने के लिए मध्यप्रदेश में केन-बेतवा लिंक, पार्वती-कालीसिंध-चंबल और तापी मेगा रीचार्ज परियोजना की शुरुआत की गई है। उन्होंने बताया कि पहले मध्यप्रदेश में केवल 7 लाख हेक्टेयर रकबे में सिंचाई होती थी, अभी 55 लाख हेक्टेयर रकबे में सिंचाई हो रही है। अगले 5 साल में हम प्रदेश का सिंचाई रकबा 100 लाख हेक्टेयर तक लेकर जाएंगे। युवाओं के लिए इंटर्नशिप में सहायता देगी सरकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने किसान परिवार के बेरोजगार युवाओं को इंटर्नशिप दिलाने की अभिनव योजना की शुरुआत की है। इससे जुड़े युवाओं को कौशल उन्नयन के साथ ही 3000 रुपए प्रति महीना आर्थिक लाभ भी दिया जा रहा है। हम इस की सराहना करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि ऐसी योजना में इंटर्नशिप की सहायता राशि अब राज्य सरकार प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार युवाओं के विकास के लिए पूरी तरह संकल्पित है। हम युवाओं को काम दिलाएंगे। तीन साल में मेडिकल कॉलेज की संख्या 50 करने का लक्ष्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार मेडिकल के साथ नर्सिंग कॉलेज की संख्या बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रही है। अगले 3 साल में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 50 करने का लक्ष्य है। प्रदेश के गांवों की बेटियों को भी नर्सिंग कॉलेजों में पढ़ाई और रोजगार का अवसर मिलेगा। प्रदेश की लाड़ली बहनों को आगामी रक्षाबंधन पर 1500 रुपए मिलेंगे। तय राशि 1250 के अलावा 250 रुपए रक्षाबंधन का तोहफा अलग से दिया जाएगा। पंजाब और हरियाणा को पीछे छोड़कर मध्य प्रदेश बनेगा नंबर-1 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने 4 लाख 21 हजार करोड़ का बजट पेश किया था। प्रदेश में 8 एयरपोर्ट बनकर तैयार हो चुके हैं। प्रदेश के विकास के लिए औद्योगीकरण को बढ़ावा दे रहे हैं। मेट्रोपोलिटन क्षेत्र विकसित होने से बरेली, औबेदुल्लागंज सहित पूरा क्षेत्र जगमगायेगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार किसानों की समृद्धि के लिए कार्य कर रही है। पंजाब और हरियाणा को पीछे छोड़कर मध्यप्रदेश देश का नंबर 1 राज्य बनेगा। सरकार कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा दे रही है। प्रदेश को दूध की राजधानी बनाने के लिए योजनाएं शुरू की गई हैं। स्व-सहायता समूह की महिलाएं और किसान गाय पालना शुरू करें। उन्हें 25 फीसदी सब्सिडी मिलेगी। सरकार दूध खरीदेगी। नगर निगमों में 10-10 गौशालाएं खोली जा रही हैं। हमने प्रति गाय दिए जा रहे अनुदान को 20 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए कर दिये हैं। अगर कोई गौशालाएं शुरू करना चाहता है, तो सरकार उसे हर संभव मदद देगी। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी पूरी करने का संकल्प मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों के हित में समर्थन मूल्य पर मूंग और उड़द उपार्जन का जो निर्णय लिया उसके लिये मैं सभी की ओर से आभार व्यक्त करता हूँ। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस वर्ष में 2600 रूपये प्रति क्विंटल गेहूँ का उपार्जन किसानों से किया जा रहा है। किसानों के हित में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में सिंचाई का रकबा बढ़ाया जा रहा है। इस दिशा में अनेक बड़ी परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। राज्य मंत्री पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा शुरू की गई पीएमएम्बुलेंस योजना के माध्यम से बरेली और उदयपुरा के मरीजों को भी उच्च स्तरीय उपचार के लिये सुविधा मिली है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में किये जा रहे विकास कार्यों का उल्लेख भी किया। मुख्यमंत्री की घोषणाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्यमंत्री पटेल एवं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर घोषणा करते हुए कहा कि बरेली में स्टेडियम का निर्माण किया जाएगा। उदयपुरा विधानसभा में बारना और जामगढ़ सिंचाई परियोजना का क्रियान्वयन शीघ्र शुरू होगा। बरेली नगर परिषद को … Read more

सेवा भाव के साथ जनसेवा ही लोक सेवक की पहचान : राज्यपाल पटेल

भोपाल. राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि लोक सेवक बनकर राष्ट्र के विकास और मानव कल्याण का अवसर बिरले लोगों को ही मिलता है। सेवाभाव के साथ जनसेवा ही सच्चे लोक सेवक की पहचान है। राज्यपाल पटेल पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के नवनियुक्त जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और विकासखंड अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। राजभवन के स्वर्ण जयंती सभागार में सौजन्य भेंट कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता भी मौजूद थे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रशिक्षण में मिलने वाली सीख और वरिष्ठ अधिकारियों के कार्य अनुभवों का उपयोग प्रशासनिक जीवन की चुनौतियों के समाधान में करें। उन्होंने कहा कि आप जब भी मैदानी भ्रमण पर जाए, जनता से आत्मीय व्यवहार करें उनकी समस्याओं को विनम्रता से सुनें और प्राथमिकता के साथ निराकरण करें। आमजनों की बुनियादी जरूरतों जैसे- रोटी, कपड़ा, मकान के साथ पानी और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का तत्काल निराकरण किया जाए। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि विगत वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार के कल्याणकारी कार्यक्रमों से मध्यप्रदेश के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ है। अब दूरस्थ इलाकों तक विकास दिखाई देता है। गरीब, वंचित और जरूरतमंदों के जीवन को बेहतर बनाने के सरकार के लक्ष्य को सफल बनाने की मूल जिम्मेदारी आप अधिकारियों की है। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों को दूरस्थ अंचलों के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना आपके पद का परम दायित्व है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल का जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान भोपाल की संचालक श्रीमती सरिता बाला ने पौधा भेंटकर स्वागत और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। श्रीमती बाला ने स्वागत उद्बोधन दिया। प्रशिक्षु अधिकारी सुआस्था जैन और रवि ने प्रशिक्षण अनुभवों को साझा किया। आभार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर सचिव दिनेश जैन ने व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन संयुक्त आयुक्त अनिल कोचर ने किया।

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