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किसान आंदोलन पर ISI की बुरी नजर, खुफिया एजेंसियों ने जारी किया अलर्ट

नई दिल्ली। कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान पिछले 7 माह से दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। देश की खुफिया एजेंसियों ने दिल्ली पुलिस समेत सुरक्षा एजेंसियों को इस मामले में अलर्ट जारी किया है। मीडिया खबरों के अनुसार, खुफिया एजेंसियों ने दिल्ली पुलिस और सीआईएसएफ को अलर्ट रहने के लिए कहा है। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, 26 जून किसान प्रदर्शन करने वाले हैं, जिसमें तैनात जवानों के खिलाफ आईएसआई के एजेंट हिंसा भड़का सकते हैं। इस संबंध में दिल्ली पुलिस को पत्र भी भेजा गया है। इसके बाद दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था चुस्त कर दी गई है। दिल्ली में 3 मेट्रो स्टेशन बंद : दिल्ली मेट्रो ने किसान आंदोलन की आशंका के मद्देनजर येलो लाइन पर शनिवार चार घंटे के लिए 3 मुख्य स्टेशन बंद रखने का निर्णय लिया है। शनिवार को किसानों के आंदोलन को 7 महीने पूरे हो जाएंगे। डीएमआरसी ने शुक्रवार रात को ट्वीट किया, ‘दिल्ली पुलिस के सुझाव पर, सुरक्षा कारणों से, येलो लाइन पर तीन मेट्रो स्टेशन- विश्वविद्यालय, सिविल लाइन्स और विधानसभा, शनिवार को जनता के लिए सुबह10 बजे से दोपहर दो बजे तक बंद रहेंगे। उल्लेखनीय है कि दिल्ली और हरियाणा के बीच सिंघू बॉर्डर के अलावा टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर भी किसान पिछले 7 माह से आंदोलन कर रहे हैं।

MP : BJP विधायक अजय विश्नोई ने कहा- मेनका गांधी निहायत ही घटिया महिला हैं

जबलपुर । नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के वेटनरी डॉक्टर विकास शर्मा से बातचीत में जिस तरह से बीजेपी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने पूरे वेटनरी कॉलेज को घटिया कहा, उससे जबलपुर में उनके खिलाफ जमकर आक्रोश दिख रहा है। अब बीजेपी विधायक अजय विश्नोई ने तल्खी के साथ सांसद के खिलाफ टिप्पणी की है। अपने बेबाक बोल के लिए प्रसिद्ध विधायक विश्नोई ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि सांसद मेनका गांधी घटिया महिला है। मैं शर्मिंदा हूं कि ये मेरी पार्टी की सांसद (नेता नहीं) है। विधायक अजय विश्नोई ने 26 जून शनिवार सुबह 8.25 बजे अपनी ये पोस्ट की। इस पोस्ट पर 399 लोगों ने जहां रि-पोस्ट किया। वहीं 443 लोगाें ने उनकी बेबाक टिप्पणी को पसंद किया है। विधायक ने लिखा है कि विगत दिवस सांसद मेनका गांधी ने पशुचिकित्सक डॉक्टर विकास शर्मा से जिन शब्दों में बात की, उससे वेटरनरी कॉलेज जबलपुर घटिया सिद्ध नही हो जाता है। परंतु यह जरूर सिद्ध हो जाता है कि मेनका गांधी निहायत ही घटिया महिला हैं। पूरे देश में वेटनरी डॉक्टर कर रहे विरोध प्रदर्शन बीजेपी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के खिलाफ पूरे देश में वेटनरी डॉक्टर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जबलपुर के नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के वेटनरी डॉक्टर्स और छात्रों भी उनके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। जबलपुर के नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय है, जिसे मेनका गांधी ने हाल ही में कथित रूप से घटिया बताया था और उनका ऑडियो वायरल हो गया था। बीजेपी सांसद मेनका गांधी पर FIR दर्ज करने की मांग वेटनरी डॉक्टर्स ने मेनका गांधी को लीगल नोटिस भेजने की बात करते हुए उनके खिलाफ सिविल लाइंस थाने में शिकायत दी है। डॉक्टरों ने एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उनका दावा है कि जब तक अपने शब्दों पर वो माफी नहीं मांगती हैं, उनका विरोध जारी रहेगा। गुरुवार से उनके खिलाफ डॉक्टर प्रदर्शन कर रहे हैं। शुक्रवार को छात्राओं और महिला अध्यापकों ने प्रदर्शन किया। डॉक्टर अपरा शाही, डॉक्टर अंजू नायक, डॉक्टर कविता राय ने कहा कि पशु चिकित्सकों की पढ़ाई पर बिना सोचे-समझे टिप्पणी करना सांसद मेनका गांधी को शोभा नहीं देता। उन्हें दुख है कि एक महिला होते हुए वह बयान देकर दूसरी महिला को अपमानित कर रही हैं। ऑडियो वायरल होने के बाद आक्राेश हाल ही में मेनका गांधी और वेटनरी डॉक्टर के बीच हुई बातचीत का कथित ऑडियो वायरल हुआ है। इस ऑडियो में साफ सुनाई दे रहा है कि किस तरह मेनका गांधी वेटरनरी डॉक्टर को न केवल गालियां दे रही हैं, बल्कि उसकी काबिलियत पर भी सवाल उठा रही हैं। यहां तक कि मेनका गांधी ने जबलपुर के नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय को भी घटिया बता दिया। जबकि जबलपुर के वेटनरी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र ना केवल देश बल्कि विदेशों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ये है पूरा मामला 21 जून को एक कथित ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें चंडीगढ़ में प्रैक्टिस कर रहे जबलपुर वेटनरी विवि में पढ़े डॉक्टर विकास शर्मा से मेनका गांधी की फोन पर बात हुई थी। दरअसल चंडीगढ़ निवासी अंजली चौधरी अपना डॉग इलाज के लिए डॉक्टर शर्मा के पास लाई थी। उन्होंने उसका ऑपरेशन किया। मालिक उसे अपने घर ले गईं। जहां टांका टूट गया। बाद में इस डॉग का पैर काटना पड़ा। इसके बाद अंजली चौधरी ने इस मामले में मेनका गांधी से शिकायत की। इसी शिकायत पर मेनका गांधी ने फोन पर डॉक्टर के खिलाफ अपशब्द कहे और फिर कहां से डिग्री ली, पूछ कर वेटनरी विवि को देश का सबसे घटिया विश्वविद्यालय बता दिया।

MP BJP में बदलेंगे ‘मीडिया’ के चेहरे:सोशल मीडिया प्रभारी और प्रवक्ताओं से खुश नहीं हैं

मध्य प्रदेश। भाजपा के सोशल मीडिया प्रभारी शिवराज डाबी को हटाया जा सकता है। इतना ही नहीं, कई प्रवक्ताओं की छुट्‌टी भी करने की तैयारी है। वजह है, प्रदेश प्रभारी पी. मुरलीधर राव सोशल मीडिया टीम से नाराज हैं। प्रदेश संगठन के ऑफिशियल सोशल मीडिया ग्रुप में फाॅलोअर की संख्या एमपी कांग्रेस से कम है। इतना ही नहीं, मीडिया में पार्टी का पक्ष रखने वाले प्रवक्ताओं में आक्रामकता दिखाई नहीं दे रही है। राव ने बैठक में मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के समक्ष एक बार फिर नाराजगी व्यक्त की। आक्रामक नहीं होंगे तो कैसे बढ़ेंगे फाॅलोअर प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव ने 22 जून को भोपाल प्रदेश मुख्यालय में आईटी सोशल मीडिया टीम की बैठक ली थी। टीम के सदस्यों के साथ सीएम शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा भी मौजूद थे। इसमें राव ने सोशल मीडिया में और ज्यादा आक्रामक रुख अख्तियार करने के साथ ही फॉलोअर बढ़ाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कांग्रेस के सोशल मीडिया में फॉलोअर ज्यादा होने का मुद्दा भी उठाया। कहा- इस अंतर को दूर करें। आरोपों का मुंहतोड़ जवाब देने का निर्देश मुरलीधर राव ने कहा कि IT सेल को कांग्रेस के आरोपों का जवाब देने के लिए और मुस्तैद होना चाहिए, ताकि पार्टी कार्यकर्ता देश की प्रतिष्ठा के विरोध में काम करने वाली ताकतों को मुंहतोड़ जवाब तत्परता से दे सके। मंत्रियों को जिलों का प्रभार जल्द मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी एक-दो दिन में मंत्रियों को जिलों का प्रभार दे सकते हैं। इसके साथ ही निगम-मंडलों में नियुक्तियां भी जल्दी होने के संकेत मिले हैं। ऐसे अन्य मुद्दों को लेकर भाजपा के प्रदेश प्रभारी पी. मुरलीधर राव के साथ शुक्रवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की बंद कमरे में बैठक हुई है। इसमें मंत्रियों को जिलों का प्रभार देने और निगम-मंडल में नियुक्तियां करने के लिए नामों पर चर्चा हुई है। बैठक में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी मौजूद रहे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि निगम-मंडलों में नियुक्तियां पिछले साल नवंबर से टलती आ रही हैं। राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 23 जून को मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष से अलग-अलग बैठक की थी। बैठक में सिंधिया ने निगम-मंडलों में नियुक्तियों को लेकर मंथन हुआ था। इससे पहले मुख्यमंत्री ने निगम-मंडलों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व अन्य पदों की जानकारी ली थी। माना जा रहा है कि प्रदेश प्रभारी के साथ बैठक होने के बाद अब सरकार जल्दी ही आदेश जारी करेगी।

MP ……. ABVP के पूर्व महानगर मंत्री ने किया रेप

जबलपुर. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के पूर्व महानगर मंत्री शुभांग गोटिया के खिलाफ महिला थाने में सोमवार को 23 वर्षीय छात्रा ने रेप का केस दर्ज कराया है। आरोपी पिछले 3 साल से उसका शारीरिक शोषण कर रहा था। उसने छात्रा की मांग में सिंदूर भरकर बोला था- हिंदू धर्म के मुताबिक वह उसकी पत्नी है। जब समाज के सामने शादी की बात आई, तो बोला- वो तो ढोंग था। जबलपुर की रहने वाली पीड़िता पुणे से पढ़ाई कर चुकी है। 2018 में उसकी मुलाकात राइट टाउन निवासी शुभांग गोटिया (25) से हुई थी। शुभांग तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का महानगर मंत्री हुआ करता था। उसने छात्र को प्यार के झांसे में फंसाया। फिर एक दिन उसकी मांग में सिंदूर भरते हुए बोला- हिंदू धर्म के मुताबिक आज से दोनों पति-पत्नी हैं। पुणे भी आरोपी जाता रहता था मिलने छात्रा ने जबलपुर की महिला थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि जब वह पुणे में पढ़ाई कर रही थी, तो आरोपी भी वहां उससे मिलने जाता था। आरोपी पुणे, गोवा, कान्हा-किसली समेत कई जगह उसे घुमाने के बहाने ले जाकर शोषण करता रहा। जब भी छात्रा उससे शादी करने की बात करती, तो बोलता कि हम तो शादी कर ही चुके हैं, बस समाज के सामने होनी है, वो भी हो जाएगी। जनवरी में मुकर गया आरोपी छात्रा ने आरोपी शुभांग से शादी करने की जिद पकड़ी, तो वह जनवरी 2021 में साफ मुकर गया। छात्रा को बताया कि उसकी शादी तय हो गई है। सौ एकड़ जमीन दहेज में मिल रही है। छात्रा ने विरोध किया तो उसकी निजी तस्वीरें वायरल कर बदनाम करने की धमकी दी। शुभांग के इस तरह धाेखे का सदमा वह बर्दाश्त नहीं कर पाई। बड़ी मुश्किल से हिम्मत कर छात्रा ने अपने साथ हुई आपबीती घरवालों को बताया, तो वे भी परेशान हो गए। पिता समेत अन्य परिजनों ने महीनों उससे बात नहीं की। पांच महीने तक ये परिवार इसी कश्मकश में रहा कि आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराया

MP में BJP की पहली बार प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों की जाति के साथ लिस्ट जारी

भोपाल. मध्यप्रदेश भाजपा ने मंगलवार देर रात अपनी प्रदेश कार्यसमिति घोषित कर दी। इसमें पहली बार पदाधिकारियों के नाम के आगे उनकी जाति लिख दी गई। लिस्ट सोशल मीडिया पर जारी की गई थी, लेकिन विवाद होते ही 10 मिनट बाद इसे हटा लिया गया। इसके बाद रात 12:45 बजे पदाधिकारियों की जाति हटाकर संशोधित लिस्ट जारी की गई। इसमें सिंधिया के कुछ समर्थकों को भी एंट्री दी गई है। ऐसा पहली बार हुआ, जब किसी पदाधिकारी के नाम के आगे उसका वर्ग, जाति का उल्लेख किया गया। इसमें कुछ नेताओं की जाति ही गलत लिख दी गई। जैसे- भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय वैश्य हैं, लेकिन उनके नाम के आगे ब्राह्मण लिखा हुआ था। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और सिंधिया की भी जाति गलत लिखी गई थी। बताया गया है कि भाजपा के राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया बुधवार को भोपाल आ रहे हैं। इसी को लेकर आनन-फानन में कार्यसमिति तय कर लिस्ट जारी कर दी गई। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता लोकेंद्र पाराशर का कहना है कि पहली लिस्ट गलती से जारी हो गई थी, उसे सुधार कर दोबारा जारी किया गया है। ऐसी है प्रदेश कार्यसमिति प्रदेश कार्यसमिति में 162 सदस्य, 218 विशेष आमंत्रित सदस्य, 23 स्थाई आमंत्रित सदस्य हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का नाम नहीं है। स्थाई आमंत्रित सदस्यों में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री थावरचंद गेहलोत, केंद्रीय मंत्री नरेद्र सिंह तोमर, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, सुमित्रा महाजन, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद प्रधान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय राज्यमंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, केंद्रीय राज्य मंत्री प्रह्लाद पटेल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे विक्रम वर्मा, सत्यनारायण जटिया और प्रभात झा को शामिल किया गया है। इसके साथ ही लिस्ट में सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह, गृह एवं संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा​​​​ और लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव समेत पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य, ओमप्रकाश ध्रुवे, सांसद सुधीर गुप्ता, पूर्व मंत्री माया सिंह, जयभान सिंह पवैया, कृष्ण मुरारी मोघे, माखन सिंह और भगवत शरण माथुर को शामिल किया गया है। पिछली कार्य समिति में सदस्य रहे पूर्व जिला अध्यक्ष सुरेंद्रनाथ सिंह को इस बार इस लिस्ट में जगह नहीं मिली है, जबकि भोपाल के पूर्व जिलाध्यक्षों को शामिल कर लिया गया है। पहले जारी की गई लिस्ट में CM शिवराज सिंह चौहान की जाति धाकड़, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की जाति राजपूत और कैलाश विजयवर्गीय की जाति ब्राह्मण लिखी गई थी। जातियों के साथ लिस्ट जारी करने पर भाजपा घिरती नजर आई। इसके बाद इस लिस्ट को डिलीट कर दिया गया। लिस्ट में नेताओं की गलत जाति लिखी होने पर भाजपा बैकफुट पर नजर आई यह लिस्ट मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर ने जारी की थी। बीजेपी कार्यकारिणी की संशोधित लिस्ट रात 12:45 बजे के बाद फिर से जारी हुई। इस बार लिस्ट से जाति हटा दी गई।

MP कैबिनेट बैठक में CM के सामने गृहमंत्री नरोत्त भड़के

भोपाल। कोरोना की दूसरी लहर के बाद पहली प्रत्यक्ष कैबिनेट बैठक में गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा नाराज हो गए। बैठक में उन्होंने नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) के 3 सिंचाई प्रोजेक्ट के लिए 10 हजार करोड़ के टेंडर करने पर आपत्ति ली। कोरोनाकाल का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वित्तीय स्थिति को देखते हुए निविदा बुलानी चाहिए। संक्रमण में अन्य विभाग के बजट में कटौती कर दी गई, तो फिर इन प्राेजेक्ट पर इतना बजट क्यों? उन्होंने इसे लेकर मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस से सवाल किए और नाराजगी जताई। मुख्य सचिव ने जवाब दिया कि चूंकि नर्मदा जल बंटवारे के तहत 2024 तक ज्यादा से ज्यादा पानी मप्र को मिले, इसके लिए पाइप लाइन डालकर पानी को लिफ्ट करना जरूरी है। हालांकि, गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। गौरतलब है कि नर्मदा घाटी विकास मंत्रालय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास है, उनके सामने ही पूरा घटनाक्रम हुआ। मंत्रालय सूत्रों ने बताया, मुख्य सचिव के जवाब के बाद भी नरोत्तम मिश्रा नहीं रुके। वह दो-तीन सवाल करते गए। इस बीच, लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव मामला की नजाकत भांप गए। चूंकि यह प्रस्ताव अनुसमर्थन के लिए कैबिनेट में लाया गया था। यदि इसे स्वीकृत नहीं करते, तो मुख्यमंत्री की मानहानि हो जाती। भार्गव ने यह कह कर मामला शांत कराया कि चूंकि एनवीडीए टेंडर जारी कर चुका है, इसलिए अब इस प्रस्ताव को स्वीकृत किया जाना उचित होगा। नाराजगी के कारण सात प्रोजेक्ट को लौटाना पड़ा सूत्रों ने बताया कि मध्य प्रदेश को आवंटित नर्मदा जल का उपयोग करने के लिए 3 सिंचाई परियोजनाओं को कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिल गई। नर्मदा घाटी विकास विभाग इन परियोजनाओं के लिए निविदा आमंत्रित कर चुका है। वहीं, सात अन्य परियोजनाओं पर निर्णय नर्मदा नियंत्रण मंडल से प्रशासकीय स्वीकृति के बाद लिया जाएगा। कुल मिलाकर उन्हें नरोत्तम मिश्रा की नाराजगी के चलते टालना पड़ा। कैबिनेट की प्रेस ब्रीफिंग नहीं की सूत्रों का कहना है, बैठक में मुख्य सचिव के साथ हुई नोकझोंक के बाद गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा नाराज हो गए थे। यही वजह है कि उन्होंने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देने के लिए प्रेस ब्रीफिंग नहीं की। बैठक से निकलकर गृहमंत्री सीधे आवास पर चले गए। अब भाजपा संगठन मनाने में जुटा पार्टी के अंतर्कलह को खत्म करने के लिए अब BJP संगठन अपनों की नाराजगी दूर करने की कोशिश में जुट गया है। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा बैठक में मुख्य सचिव के साथ हुई नोक-झोंक के बाद नाराज हो गए थे, अब पार्टी उन्हें मनाने की जद्दोजहद में जुट गई है। इससे जुड़ा है टेंडर का मामला NVDA ने वर्ष 2024 में नर्मदा जल बंटवारे संबंधी निर्णय के पुनरीक्षण की संभावना को देखते हुए निविदा आमंत्रित करने के लिए वित्त विभाग द्वारा तय सूचकांक (उपलब्ध राशि के हिसाब से निविदा बुलाने की सीमा) से छूट मांगी थी। जिस पर वित्त विभाग की भी राय थी कि विभाग को आवंटित बजट और भुगतान की क्षमता को देखते हुए ही निविदा आमंत्रित की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इससे सहमति जताई। कहा कि नर्मदा जल के उपयोग को लेकर समय सीमा का ध्यान रखा जाना भी जरूरी है, इसलिए विचार करके फिर से प्रस्ताव रखा जाए। बता दें कि नर्मदा घाटी विकास विभाग ने चिंकी-बोरास बैराज संयुक्त बहुउद्देश्यीय, सांवेर लघु सिंचाई और अपर नर्मदा परियोजना के लिए निविदा आमंत्रित करने के निर्णय का अनुमोदन किया गया। तीनों परियोजना की लागत 10 हजार 369 करोड़ रुपए है। इसके अलावा 7 अन्य सिंचाई परियोजनाओं की लागत भी 10 हजार रुपए के आसपास है।

UP : सरकार का फीडबैक लेकर वापस लौटे BJP के राष्ट्रीय महामंत्री, नहीं होती नेताओं की सुनवाई!

लखनऊ. संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने लखनऊ में बीजेपी के बड़े नेताओं और मंत्रियों से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने नेताओं और संगठन के लोगों से सरकार के कामकाज के बारे में चर्चा की. बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री बी एल संतोष(BL Santosh) के उत्तर प्रदेश दौरे से लौटने के बाद स्टेट बीजेपी(BJP) यूनिट समेत मंत्रियों की भी निगाहें अब दिल्ली पर लगी हुई है. बी एल संतोष ने लखनऊ में तीन दिन तक बैठक की. राष्ट्रीय महामंत्री और यूपी बीजेपी प्रभारी राधामोहन सिंह ने मंत्रियों, संगठन के पदाधिकारियों, कुछ विधायकों और मीडिया टीम से मुलाकात की थी. यूपी बीजेपी के लखनऊ कार्यालय में संगठन के राष्ट्रीय महामंत्री बी एल संतोष ने तीन दिन बैठक की. बैठक के हर नेता या मंत्री ने यही कहा कि कोरोना प्रबंधन और जमीनी काम पर बात हुई. पदाधिकारियों ने कहा कि सेवा ही संगठन कार्यक्रम पर चर्चा हुई, लेकिन बात सिर्फ इतनी ही नहीं हुई. केंद्रीय संगठन मंत्री ने लगभग सोलह मंत्रियों से मुलाकात की जिसमें जयादातर ऐसे थे जो मुखर और नाराज रहते हैं. दोनों डिप्टी सीएम से मुलाकात हुई. डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या की सरकार से नाराजगी यूपी की सियासत में केशव प्रसाद मौर्या योगी सरकार के कई फैसलों में रज़ामंद नहीं माने जाते रहे हैं. वहीं डिप्टी सीएम होने के बावजूद दिनेश शर्मा को उतना महत्व कभी नहीं मिला जितना केशव को मिलता है. सिद्धार्थनाथ सिंह पहले से कम महत्वपूर्ण विभाग मिलने की टीस और बयानबाज़ी दोनों से चर्चा में रहते हैं. स्वाति सिंह भी अक्सर विवादों में रहती है. जानकारी के मुताबिक कानून मंत्री बृजेश पाठक ने कोरोना काल में जिस तरह कार्यक्रम चलाये और लोगों की मदद की उसकी सबने तारीफ़ की. संगठन की शिकायत- नहीं होती सरकार में सुनवाई परिवहन मंत्री अशोक कटारिया ने मुद्दा रखा की अधिकारी मनमानी करते हैं. श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या भी कम महत्व वाल मंत्रिमंडल पाकर खुश हैं. जबकि चर्चा में रहने वाले बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री सतीश द्विवेदी को भी लगता है कई फैसलों में उनको तवज्जों नहीं मिलती है. बैठक में संगठन की तरफ से भी शिकायत की गई. कार्यकर्ता और दर्जाधारियों ने कहा कि बड़े अधिकारियों की बात छोड़िये लेखपाल और थानेदार भी उनकी नहीं सुनता है. सरकार की तो बात ही अलग है. कई प्रकोष्ठ खाली है यहां तक की नए प्रवक्ताओं की नियुक्ति तक नहीं की गई. केंद्रीय नेतृत्व को सौपेंगे फीडबैक राजनीति के गलियारों में तो यहां तक चर्चा है की प्रदेश में जनता से जुड़े सीधे महकमों का फीडबैक ही लेना होता तो कृषि मंत्री, पंचायती राज मंत्री, ग्रामविकास मंत्री, गन्ना मंत्री, नगर विकास मंत्री से मुलाकात नहीं की. सिर्फ उन्ही मंत्रियों से मुलाकात की जो सरकार के रवैय्ये या तवज्जो न मिलने से नाराज़ थे.माना जा रहा है कि दिल्ली लौटने पर केंद्रीय नेतृत्व को फीडबैक सौपेंगे, जिस पर एक दो दिन में कुछ कार्यवाही हो सकती है. जिसके बाद कई नेताओं और मंत्रियों की नजरें अब दिल्ली पर लगी हुई है.

बंगाल में दल-बदल की राजनीति:एक-दो नहीं बीजेपी के 33 विधायक TMC के संपर्क में

कोलकाता।  BJP के एक, दो नहीं बल्कि 33 विधायक ऐसे हैं, जो दोबारा सत्तासीन तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जाना चाहते हैं। चुनाव के पहले TMC से भी 33 विधायक ऐसे थे, जो BJP में शामिल हो गए थे। इनमें से 13 को पार्टी ने टिकट दिया था। दावा किया जा रहा है कि 33 विधायक तो TMC के संपर्क में हैं ही, इसके अलावा बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय के बेटे सुभ्रांशु भी तृणमूल जॉइन करना चाहते हैं। हालांकि BJP प्रवक्ता शमिक भट्टाचार्य ने इसे कोरी अफवाह करार दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग मुझे 33 का आंकड़ा दे रहे हैं, मैं उन्हें 72 की संख्या बता रहा हूं, क्योंकि यह दावा झूठा है। सुभ्रांशु के BJP में जाने की चर्चाएं तब शुरू हुईं थीं, जब उन्होंने अपनी एक पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार को ही कठघरे में खड़ा कर दिया था। उन्होंने फेसबुक पर लिखा था कि जनता द्वारा चुनी गई सरकार की आलोचना करने के बजाय आत्मनिरीक्षण करना बेहतर है। हालांकि भट्टाचार्य का कहना है कि सुभ्रांशु ने आवेश में आकर यह पोस्ट लिख दी थी। सुभ्रांशु रॉय को BJP ने बीजपुर से टिकट दिया था, लेकिन वे जीत नहीं सके। TMC जल्दबाजी में नहीं, विधायकों को रुकने का कहा ऐसी चर्चा है कि TMC भाजपा विधायकों को दोबारा पार्टी में शामिल करने के मामले में जल्दबाजी नहीं करना चाहती। TMC सांसद शुखेंदु शेखर राय ने कहा कि शनिवार को दोपहर 3 बजे पार्टी ऑफिस में हमारी मीटिंग है। उसमें इस मुद्दे पर भी बात हो सकती है। उन्होंने कहा कि अब किसी को भी शामिल करने से पहले बहुत सारे सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे। जैसे, जो आना चाहता है, वह पार्टी छोड़कर क्यों गया था। वह वापसी क्यों चाहता है। ये भी देखेंगे कि कहीं ये BJP की साजिश तो नहीं। घुसपैठ की कोशिश तो नहीं। ऐसे तमाम सवालों के जवाब मिलने के बाद ही पार्टी निर्णय लेगी कि किसी को शामिल करना है या नहीं। राय कहते हैं- सांसदों-विधायकों में से कई के नाम अभी सामने नहीं आए हैं, जबकि वे भी TMC में शामिल होना चाहते हैं। जो माहौल बना है, वही रहा तो बंगाल में BJP का पत्ता भी साफ हो सकता है। सरला मुर्मु, सोनाली गुहा खुलकर सामने आईं सरला मुर्मु, पूर्व विधायक सोनाली गुहा और फुटबॉलर से राजनेता बने दीपेंदू विश्वास ने साफ कर दिया है कि वे दोबारा TMC में शामिल होना चाहते हैं। सरला मुर्मु को TMC ने हबीबपुर से टिकट दिया था। इसके बावजूद उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। अब वे TMC में वापसी चाहती हैं। इसी तरह पूर्व विधायक सोनाली गुहा भी घर वापसी के इंतजार में हैं। उन्होंने ममता बनर्जी को पत्र लिखकर कहा है, ‘जिस तरह मछली पानी से बाहर नहीं रह सकती, वैसे ही मैं आपके बिना नहीं रह पाऊंगी, दीदी’। फुटबॉलर से राजनेता बने दीपेंदु विश्वास ने भी दीदी को पत्र लिखकर TMC में शामिल होने की इच्छा जताई है। जो BJP की जीत को लेकर आश्वस्त थे, वही गए बंगाल की 294 में से 213 सीटें TMC ने जीती हैं। 77 सीटों पर BJP को जीत मिली है। चुनाव के चंद महीनों पहले TMC के 50 से ज्यादा नेताओं ने BJP का दामन थाम लिया था। इसमें 33 तो विधायक थे। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि इस बार BJP ही जीतेगी। कई की आस BJP में आने के बाद भी पूरी नहीं हो पाई थी, क्योंकि पार्टी ने उन्हें टिकट ही नहीं दिया। नेताओं की TMC से दूरी बनाने की तीन बड़ी वजहें थीं। पहली वजह, उनका टिकट काटा या बदला गया था। दूसरी, वे पार्टी जिस ढंग से चल रही थी, उससे खुश नहीं थे। तीसरी, वे BJP की जीत को लेकर आश्वस्त थे और उन्हें BJP से टिकट मिलने की भी उम्मीद थी। पर नतीजों ने दल-बदलुओं को बड़ा झटका दिया। इसलिए अब ये नेता घर वापसी चाहते हैं। बंगाल में पॉलिटिक्स से जुड़े बिना जीवन मुश्किल रवींद्र भारती यूनिवर्सिटी में डिपार्टमेंट ऑफ पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर विश्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं कि बंगाल देश का इकलौता ऐसा राज्य है जहां लोगों का जीवन पूरी तरह से राजनीति से जुड़ा है। पॉवर पॉलिटिक्स से यहां जीवन-यापन होता है। सामाजिक सुरक्षा मिलती है। जन्म से मृत्यु तक पॉवर पॉलिटिक्स का असर होता है। यही कारण है कि जो लोग चुनाव के पहले BJP में शामिल हुए, अब वे कुछ भी करके TMC की तरफ लौटना चाहते हैं। बंगाल में हर जगह सत्ता में रहने वाली पार्टी का इन्वॉल्वमेंट होता है। बिना पार्टी की सहमति के कोई कुछ नहीं कर सकता। अपोजिशन का कोई रोल यहां नहीं होता। यह कल्चर शुरू से है, जो आगे भी बनता दिख रहा है।

बिहार में पूर्व सांसद पप्‍पू यादव गिरफ्तार! BJP सांसद रूडी पर उठाया था सवाल

पटना। बिहार में जन अधिकार पार्टी के संयोजक और मधेपुरा के पूर्व सांसद राजेश रंजन यादव उर्फ पप्‍पू यादव को पटना की पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। सांसद ने खुद ट्वीट कर बताया है कि उन्‍हें गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि पटना के एएसपी स्‍वर्ण प्रभात का कहना है कि उन्‍हें हिरासत में लिया गया है। उन्‍होंने पिछले दिनों सारण से भाजपा के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी की सांसद निधि से खरीदी गई करीब 30 से 40 एंबुलेंस के बेकार पड़े रहने का मसला उठाया था। इस मामले में उन पर दो प्राथमिकियां भी दर्ज की गई हैं। पूर्व सांसद पर हाल के दिनों में अस्‍पतालों में अनधिकृत प्रवेश को लेकर कुछ और जगहों पर भी प्राथमिकी दर्ज हुई है। शुरू में आ रही थी हाउस अरेस्‍ट की खबरें पटना के मंदिरी स्थित आवास से पूर्व सांसद को हिरासत में लेने के लिए पांच थानों की पुलिस को लगाया गया था। यह इलाका बुद्धा कॉलोनी थाने में पड़ता है। पुलिस मंगलवार की सुबह से ही उनके आवास के बाहर जुटने लगी थी। शुरू में कहा जा रहा था कि शायद उन्‍हें हाउस अरेस्‍ट किया गया है। लेकिन अब जो खबर मिल रही है, उसके अनुसार उन्‍हें लेकर पुलिस गांधी मैदान थाने में पहुंच गई है। पप्‍पू यादव अपनी ही गाड़ी में सवार होकर थाने तक पहुंचे, लेकिन उनके साथ पटना पुलिस की गाडि़यां भी थीं। खुद ट्वीट कर दी गिरफ्तार किए जाने की जानकारी पूर्व सांसद पप्‍पू यादव ने थोड़ी ही देर पहले ट्वीट कर खुद को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी है। उन्‍होंने बताया है कि उन्‍हें गिरफ्तार कर गांधी मैदान थाने में ले जाया गया है। अभी यह सामने नहीं आया है कि उन्‍हें किस मामले में हिरासत में लिया गया है। बोले- उठाता रहूंगा आवाज, चाहे दे दो फांसी पूर्व सांसद ने एक और ट्वीट कर कहा है कि उन्‍हें कोरोना काल में जिंदगियां बचाने की सजा दी जा रही है। उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार को चुनौती देते हुए कहा है कि वे अपना मिशन बंद नहीं करेंगे, भले सरकार उन्‍हें फांसी दे दे। उन्‍होंने कहा है कि खुद की जान को हथेली पर रखकर वे कोरोना के मरीजों के बीच गए हैं और उनकी मदद की है।

MP : जयचंदों..छलचंदों के दम पर ही तो सरकार बनी

….गोपाल वाजपेयी, वरिष्ठ पत्रकार…. जनभावनाओं, जनता की जरूरतों को कुचलकर सिर्फ सत्ताप्राप्ति व चुनाव जीतने को जन्मसिद्ध अधिकार समझने वाली बीजेपी बंगाल में अप्रत्याशित हार से सदमे में है। केंद्रीय स्तर पर बीजेपी खेमे में गम का साया है। इधर , मध्यप्रदेश बीजेपी में बंगाल हार का गम कम है। इधर असली गम दमोह का है। दमोह में मिली करारी शिकस्त को सीएम शिवराज, शिवराज समर्थक मंत्री और प्रदेश संगठन पचा नहीं पा रहा है। दमोह में मिली हार के असली कारण सामान्य जानकारी रखने वाला भी समझ रहा है। लेकिन एमपी बीजेपी के बड़े नेता इससे इतर बयानों के तीर चलाकर अपने समीकरण मजबूत करने में लगे हैं। बीजेपी नेता दमोह हार का कारण जयचंदों ..छलचंदों को बता रहे हैं। दरअसल, बीजेपी नेताओं के साथ दिक्कत ये भी है कि इन्हें बोलने की बीमारी होती है। कैमरे के फ़्लैश ऑन होते ही ये शुरू हो जाते हैं। कई बार ऐसे शब्दों का प्रयोग कर देते हैं, जिनका न तो अर्थ, मतलब जानते हैं और न उन शब्दों का इतिहास। दमोह हार को लेकर बीजेपी नेता कथित रूप से जयचंदों..छलचंदों को तलाश रही है। वे शायद भूल रहे हैं कि एक साल पहले मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार का गठन इन्हीं जयचंदों..छलचंदों के दम पर हुआ था। अगर एक साल से पहले का इतिहास देखें तो हम पाएंगे कि जब से बीजेपी को सत्ता रोग लगा तब से ही इस पार्टी में जयचंदों की मौज हुई है। ये बीजेपी वो नहीं जब चाल, चरित्र और चेहरा इनका नारा था। अब पार्टी में जयचंदों का राज चलता है। ये दर्द उन बीजेपी नेताओं व कार्यकर्ताओं से बेहतर कौन समझ सकता है जो बीते 30 साल से ज्यादा समय से निःस्वार्थ भाव से आज भी लगे हैं लेकिन उन्हें न चुनाव में मौक़ा मिलता और न लाभ या सुविधा वाला कोई पद । मैं ऐसे कई नेताओं को व्यक्तिगत रूप से जानता हूँ जिन्होंने पार्टी के लिए तन, मन , धन से सेवा की, ये 30 साल से लेकर आज भी उम्मीद के साये में ही काम कर रहे हैं । वहीं पार्टी में 5 से 7 पहले आये नेता बल्ले बल्ले कर रहे हैं। बहरहाल, जयचंदों.. छलचंदों को अगर बीजेपी नेता तलाशेंगे और उन्हें बाहर करेंगे तो पाएंगे कि आधी पार्टी ही साफ हो गयी। लेकिन आधी पार्टी साफ होने बाद जो बचेगा वही असली बीजेपी होगी, जिस पार्टी को संघर्ष के लिए जाना जाता था।

भाजपा की दमोह में करारी शिकस्त के बाद सुलगते सवाल

गोपाल स्वरूप वाजपेयी आसमान में उडऩे की मनाही नहीं है किसी को, शर्त इतनी है कि जमीन को नजरअंदाज ना करो । एक शायर की ये पंक्तियां मध्यप्रदेश के दमोह उपचुनाव में भाजपा की अप्रत्याशित हार के बाद प्रासंगिक हो रही हैं। वैसे विधानसभा की किसी भी एक सीट पर हार-जीत होना अमूनन सामान्य घटना मानी जाती है। लेकिन दमोह उपचुनाव में भाजपा की करारी शिकस्त को सामान्य घटना नहीं माना जा सकता। एक तरफ सर्वसुविधा संपन्न चतुरंगिणी सेना, दूसरी तरफ हताश-निराश व बेमन से मैदान में उतरी सेना। एक तरफ सत्ताबल, धनबल, प्रशासन का बल और दूसरी तरफ सिर्फ चुनाव लडऩे की औपचारिकता। इसके बाद भी जो चुनाव नतीजा सामने आया, उससे भाजपा खेमे में खलबली मच गई। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मुख्यमंत्री उमाभारती, प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा सहित प्रदेश के 20 से ज्यादा कैबिनेट मंत्री, 4 केंद्रीय मंत्री, भाजपा संगठन ने पूरा दमखम लगाया। सीएम शिवराज का एक पैर भोपाल में तो दूसरा पैर दमोह में रहा, प्रदेश के अधिकांश कैबिनेट मंत्री, वीडी शर्मा अपनी फौज के साथ 15 दिन डेरा डाले रहे। फिर भी करारी शिकस्त! कांग्रेस प्रत्याशी अजय टंडन ने भाजपा प्रत्याशी राहुल लोधी को 17 हजार से ज्यादा वोटों से हरा दिया। अब भाजपा झेंप मिटाने के लिए चाहे कुछ भी तर्क दे, बहाने बनाए, लेकिन सवाल सुलगने लगे हैं। आने वाले समय में ये सुलगते सवाल भाजपा के लिए नासूर बनेंगे अगर सही जवाब नहीं तलाशे गए और उन पर ईमानदारी से काम नहीं किया तो…! क्या दमोह की करारी शिकस्त के बाद भाजपा कुछ सबक लेगी? क्या भाजपा जनभावनाओं से खिलवाड़ कर सत्ताप्राप्ति व चुनाव में फतह की सनक व नशा दूर करेगी? क्या भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं में सत्ता का दंभ सार्वजनिक नहीं होने लगा? सत्ता के दंभ का इस्तेमाल केवल निजी स्वार्थों को पूरा करने के लिए हो रहा है, क्या इसे जनता नहीं समझ रही? क्या मध्यप्रदेश में सीएम शिवराज की लोकप्रियता का सूर्यास्त हो चुका है? क्या सीएम शिवराज के खिलाफ पार्टी में कई लॉबी काम कर रही हैं? क्या दमोह की हार शिवराज की कुर्सी छिनने की वजह बनेगी? क्या सत्ता व संगठन में तालमेल सिर्फ दिखावे के लिए है? क्या सत्ता में सिंधिया गुट की ज्यादा दखलदांजी से पार्टी में असंतोष पनप रहा है? क्या प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा जिला इकाइयों को सक्रिय तरीके से संगठित करने में नाकाम साबित हो रहे हैं? वीडी शर्मा को काम करने का फ्रीहैंड नहीं है? क्या दमोह की हार निकट भविष्य में होने वाले निकाय चुनाव में असर दिखाएगी? कोरोना की दूसरी लहर के दौरान लाशों का अंबार लगने से जनता में शिवराज सरकार के खिलाफ आक्रोश नहीं है? क्या दमोह चुनाव की कीमत पर शिवराज सरकार ने प्रदेश को मौत के मुंह में धकेला? सिर्फ अप्रैल माह में प्रदेश के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से सौ से ज्यादा लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन है? कोरोना से हो रही मौत के आंकड़ों को छिपाने से जनता के बीच शिवराज सरकार की छवि धूमिल नहीं हो रही है? अस्पतालों से लेकर श्मशान घाटों तक जिंदा इंसानों व मृतकों की दुर्दशा के लिए किसे जिम्मेदार माना जाए? कोरोना कफ्र्यू के दौरान जरूरी काम से घर से निकले लोगों पर अफसरों ने जमकर गुंडागर्दी की, क्या इन घटनाओं से राज्य सरकार व भाजपा के प्रति लोगों में आक्रोश नहीं बढ़ा? दमोह में शिवराज सरकार और संगठन ने पूरा दम लगाया। यहां तक कि दमोह से लगे आठ-दस जिलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं को बुला लिया गया। उन्हें बूथ व सेक्टर तक जिम्मेदारी दी गई। धन तो पानी की तरह बहाया गया। सरकार व संगठन लगभग अपनी जीत के प्रति पूरा आश्वस्त था। लेकिन सत्ता के नशे में चूर भाजपा नेताओं को यह सुध नहीं रही कि जनता के बीच असल में चल क्या रहा है? वे यह सब देखकर भी आंखें बंद किए रहे कि कोरोनाकाल में इलाज के लिए लोग अस्पतालों में तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे हैं। श्मशान घाटों में शवों का अंबार लगा है। घर-अस्पतालों से निकल रहीं चीत्कारों की आग पर चुनावी जुमलों ने जैसे घी डाल दिया। पूरे प्रदेश में हाहाकार है और दमोह में कोरोना से पीडि़त व मृतकों के आंकड़ों को कम दिखाया गया, जबकि दमोह की हकीकत मध्यप्रदेश के अन्य जिलों से जुदा नहीं थी। मुख्यमंत्री समेत भाजपा नेताओं के काफिले के सामने ही कोरोना में रैली-सभाओं को छूट दिए जाने पर पोस्टर दिखा दिए गए। बावजूद पार्टी इससे निश्चिंत बनी रहीं। दमोह की जनता सब देख रही थी। वह देख रही थी कि पूरे देश के साथ ही मध्यप्रदेश महामारी से जूझ रहा है। बीमारी से मरने वालों की लाशों के अंबार लग रहे हैं। अस्पतालों में ऑक्सीजन से लेकर दवाओं तक के लिए चीख-पुकार मची है। जनता सब समझ रही थी कि जब वो महामारी से कराह रही है, उसे सरकार की मदद और साथ की जरूरत है, जो नहीं मिली। उसी वक्त मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री समेत दर्जन भर से ज्यादा मंत्री दमोह में रैलियां करवाते हुए अपनी और अपनी पार्टी, अपने प्रत्याशी की ब्रांडिंग करते रहे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा पूरे समय दमोह में डेरा डाले नेताओं, कार्यकर्ताओं की बैठकें, सभाएं ले रहे थे। जनता सब देख रही थी कि और बखूभी समझ रही थी कि सरकार को जनता से ज्यादा सत्ता और चुनाव की पड़ी है। पूरे प्रदेश में लॉकडाउन, लेकिन दमोह में सब खुल्लमखुल्ला, चुनावी रैलियां और सभाएं बेहिसाब। प्रचार खत्म होते ही अगले दिन दमोह में कोरोना कफ्र्यू लगा दिया गया। दमोह की जनता सब देख रही थी और इंतजार कर रही थी मतदान का और भाजपा को सबक सिखाने का। और भाजपा को ऐसा सबक सिखाया, जिसका दर्द रह-रहकर तड़पाएगा, सताएगा। क्योंकि … एहसासों की नमी बेहद जरूरी है हर रिश्ते में, रेत भी सूखी हो तो हाथों से फिसल जाती है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार और विशेषज्ञ सोशल मीडिया एंड शेयर मार्केट हैं)

MP : BJP नेता हुए बेलगाम, ​​​​​​​रीवा में समारोह में 300 लोग, मंच पर भाजपा के 2 विधायक

रीवा। बीजेपी नेता बेलगाम हो रहे हैं। दमोह में उपचुनाव के दौरान जगह जगह भीड़ जमा करने पर सोशल मीडिया पर जमकर किरकिरी हो रही है लेकिन कोई असर देखने को नहीं मिल रहा। रीवा के भाजपा नेताओं तक नहीं पहुंच पाया है। नहीं, तो लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू में रात 10 बजे 300 लोगों की भीड़ एक जगह नहीं जुटाते। कार्यक्रम में भाजपा के दो विधायक भी मंच की शोभा बढ़ा रहे थे। पास में ही गायन मंडली भी बैठी थी। विवाद बढ़ा तो कलेक्टर और एसपी ने अपने स्टाफ को भेजा। खानापूर्ति के लिए आयोजक पर FIR दर्ज की गई। शनिवार रात रीवा शहर के भाजपा नेता हीरेंद्र प्रताप सिंह मझियार हाउस ने मैरिज गार्डन स्वयंवर में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। यह आयोजन विंध्य की गायिका मणि माला सिंह के जन्मदिन पर पुस्तक विमोचन का कार्यक्रम रखा गया था।कार्यक्रम की अनुमति नहीं ली गई थी। ऊपर से 50 की जगह 300 लोग कार्यक्रम में शिरकत किए। मंच पर भाजपा के सेमरिया विधायक केपी त्रिपाठी और सिरमौर विधायक दिव्य राज सिंह मंचासीन रहे। यह हाल तब है, जब रीवा में शनिवार को 95 संक्रमित मिले। एक सप्ताह के अंदर 500 मरीज मिले चुके हैं। शनिवार की रात 10 बजे कलेक्टर इलैया राजा टी और एसपी राकेश सिंह को कार्यक्रम की जानकारी मिली। अफसरों ने तहसीलदार को मौके पर भेजा। मौके पर गीत-संगीत चल रहा था। तहसीलदार को कई लोग बिना मास्क के दिखे। सोशल डिस्टेंसिंग के तार तार दिखी। पैलेस में थर्मल स्क्रीनिंग तक की व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में एसपी के निर्देश पर अमहिया थाना प्रभारी उप निरीक्षक शिवा अग्रवाल ने कार्यक्रम आयोजक हीरेन्द्र प्रताप सिंह पर धारा 188 महामारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। साथ ही एसपी ने कहा है कि पैलेस संचालक के पर भी मामला दर्ज किया जाएगा। ऐसे लगी कार्यक्रम की भनक सबसे पहले आम आदमी पार्टी के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी प्रमोद शर्मा ने इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी। इसके बाद प्रशासन कार्रवाई के लिए आगे आया। रविवार को सोशल मीडिया पर भाजपा नेताओं के खिलाफ लोगों ने अपनी भड़ास निकाली। इस संबंध में भाजपा के दोनों विधायकों से बात करने की कोशिश की गई तो दोनों के मोबाइल स्वीच ऑफ थे।

उज्जैन बीजेपी नेता की ऑक्सीजन न मिलने मौत, हमदर्दी जताने पहुंचे सांसद तो भड़के परिजन

उज्जैन. उज्जैन में माधव नगर अस्पताल के बाहर एक अजीबो-गरीब वाकया हुआ. बीजेपी नेता की मौत के बाद के बाद पार्टी के ही सांसद अनिल फिरोजिया परिजनों से मिलने पुहंचे. लेकिन, परिजनों ने मिलना तो दूर, उन्हें देखना तक मुनासिब नहीं समझा. मृतक की पत्नी और बहन ने सांसद को इतनी खरीखोटी सुनाई कि उनकी हिम्मत ही नहीं हुई उनसे बात करने की. दरअसल, मृतक जितेंद्र शीरे की कल माधव नगर अस्पताल में मौत हो गई. बताया जाता है कि उसकी मौत ऑक्सीजन की कमी की वजह से हुई. इसके बाद बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने वहां जमकर तोड़फोड़ की. इधर जैसे ही सांसद अनिल फिरोजिया जितेंद्र के परिजनों से मिलने पहुंचे तो मृतक की पत्नी और बहन ने उन्हें जमकर खरीखोटी सुनाई. इसके बाद वे परिवारवालों से बिना मिले ही चल दिए. सांसद को इस तरह सुनाई खरी-खोटी इस घटना का वीडियो भी वायरल हो गया. वीडियो दिखाई दे रहा है कि सांसद अनिल फिरोजिया की हिम्मत नहीं हुई कि मृतक की पत्नी और बहन के पास चले जाएं. दो मिनट सुनने के बाद सांसद उलटे पैर वहां से चल दिए. पत्नी ने सांसद से कहा- आपके पास और आपके एक-एक कार्यकर्ता के पास मैसेज गया था. बताओ आया था कि नहीं आया था. आप लोगों के लिए वो हमेशा खड़ा रहता था. उस वक्त नहीं आए तो अब क्यों आए हो. आप चले जाओं. वहीं, बहन ने सांसद से कहा- आप लोगों के पीछे मेरा भाई गया है. बीजेपी ने की तोड़फोड़, कांग्रेस ने दिया धरना गौरतलब है कि बीजेपी नेता की मौत के बाद कल कार्यकर्ताओं ने न सिर्फ अस्पताल में तोड़फोड़ की थी, बल्कि पुलिस अधिकारियों के साथ भी धक्का-मुक्की की थी. कार्यकर्ता अपर कलेक्टर सुजान सिंह रावत के साथ मारपीट करने पर उतर आए थे. इस मामले को लेकर माधव नगर थाने में बीजेपी के कार्यकर्ता पर शासकीय कार्य में बाधा डालने और शासकीय संम्पति को 188 नुकसान पंहुचाने में एफआईआर की गई है. दूसरी ओर, अस्पताल में ही 5 मरीजों की मौत की सूचना के बाद युवक कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ताओं ने भी अस्पताल के बाहर बैठकर धरना दिया. इनके खिलाफ धारा 188 में मामला दर्ज किया गया.

MP : भाजपा के पूर्व विधायक के बेटे की संदिग्ध हालात में मौत, रेलवे ट्रैक पर मिली लाश

अशोकनगर. भाजपा (bjp) के पूर्व विधायक श्यामलाल पंथी के बेटे की संदिग्ध हालात में मौत (Death) हो गयी. उनकी लाश रेलवे ट्रैक पर पड़ी मिली. पुलिस मामले की जांच कर रही है. पंथी के बेटे की मौत से सनसनी फैल गयी. पंथी के सबसे छोटे बेटे मुकेश पंथी की लाश रेलवे ट्रैक के बीच में पड़ी मिली. पिपरई के आगे रेलवे ट्रैक पर ये लाश मिली. मुकेश के सिर और हाथ पर चोट के निशान हैं. ससुराल के पास मिली लाश श्यामलाल पंथी तीन बार कुरवाई से भाजपा के विधायक रह चुके हैं. मुकेश उनका सबसे छोटा बेटा था. मुकेश की लाश सबसे पिपरई के आगे रेलवे ट्रैक पर पड़ी थी. रविवार को वो आखिरी बार कुरवाई में देखे गए थे. मृतक मुकेश की ससुराल पिपरई के पास मुड़रा कलां गांव में है. पुलिस ने शुरू की जांच मुकेश की मौत हत्या है या आत्महत्या या फिर कोई हादसा पुलिस इसकी जांच कर रही है. इतने सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं क्योंकि मुकेश ने अगर खुदकुशी की होती को शव क्षत-विक्षत हो चुका होता. लेकिन उनका शव सही सलामत है. सिर और हाथ पर चोट के निशान हैं.

MP : अपनी ही सरकार पर फूटा BJP विधायक का गुस्सा, बोले – मेरे 3 लड़के हैं, तीनों ही बेरोजगार

सतनाः मध्य प्रदेश में मैहर से BJP विधायक अक्सर अपनी बयानबाजी के चलते सुर्खियों में रहते हैं. इस बार फिर वे बयान की वजह से चर्चा में आ गए. सतना जिले के रामस्थान में आयोजित एक सभा के दौरान उन्होंने कहा कि मैहर में 25 मार्च को विंध्य प्रदेश बनाने के लिए एक आयोजन होना है. उसी से डर कर प्रदेश सरकार लोगों को कोरोना का भय दिखा रही है. सरकार को खुलेआम ललकारा सतना जिले के रामस्थान में विंध्य प्रदेश बनाने के लिए एक जनसभा आयोजित की गई. जिसमें मैहर से बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी भी पहुंचे. इस सभा में प्रदेश की शिवराज सरकार के खिलाफ बगावती अंदाज में भाषण देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अगले चुनाव में किसी भी राजनीतिक दल से टिकट मिलने की चिंता नहीं है. उन्हें यहां की जनता ने चुनाव जिताया है, किसी पार्टी ने नहीं. सब कोई समझा रहा, सत्ता के सुख भोगें बगावत न करें विधायक ने भाषण के दौरान कहा कि मध्य प्रदेश से अलग होकर विंध्य प्रदेश बनाने की मांग वे पिछले कई सालों से कर रहे हैं. लेकिन अब लोग कह रहे हैं कि अभी सत्ता में दो ही साल हुए, आराम से सत्ता का सुख भोगें, बगावत न करें. विधायक ने कहा कि उनके पास कोई धंधा, व्यापार नहीं है, 3 लड़के हैं, तीनों ही बेरोजगार, उन्हें पता ही नहीं सरकार के सुख क्या होते हैं. मैहर की जनता ने उन्हें चार बार चुना बीजेपी विधायक ने कहा कि जब वे कोई ट्रक नहीं चलाते, कोई धंधा नहीं करते तो सरकार उनका कुछ कर भी नहीं सकती. वह बोले, “हमारा विंध्य प्रदेश हमें नहीं देना न दें, लेकिन हम तुम्हारा भी खेल खत्म कर देंगे.” उन्होंने कहा कि यहां कोरोना की नाटक नौटंकी नहीं चलने वाली. मैहर की जनता ने उन्हें चार बार अलग-अलग दल से विधायक बनाया. इसलिए उन्हें किसी भी दल की चिंता नहीं कि वे उन्हें अगले चुनाव में टिकट देंगे या नहीं. 25 की मार्च की सभा को रोकना है, इसीलिए बढ़ा कोरोना सतना के BTI ग्राउंड पर 25 मार्च को विंध्य प्रदेश बनाने के लिए जनसभा होना है. सभा से सरकार हिल रही है, सरकार घबराने लगी है, उनकी ओर से कहा जा रहा है कि बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी. इस सभा को रोकने के लिए ही अब सतना में कोरोना के मरीज बढ़ने लगे हैं. सरकार पूरी ताकत लगाकर 25 मार्च की सभा को रोकने के प्रयास कर रही है. काम आते ही कोरोना आ जाता है विधायक ने बगावती अंदाज जारी रखते हुए कहा कि सरकार कब तक कोरोना का डर बताकर लोगों का खून चूसते रहेगी. ये कब तक बचेंगे? इन्हें जहां कोई काम करना होता है, वहीं कोरोना आ जाता है. कोरोना का भय दिखाकर आंदोलन को कुचलने के प्रयास किए जा रहे हैं. सरकार अब लोगों को डराकर उन्हें घर में रखना चाह रही है. लेकिन मैहर की जनता उनके साथ है, सरकार को इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा.

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