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MP : दमोह उपचुनाव: मलैया फैमिली का सरेंडर, बीजेपी ने ली राहत की सांस

दमोह. दमोह विधानसभा उपचुनाव के लिए बीजेपी ने राहुल सिंह लोधी को अपना अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया है. बीजेपी की ओर से राहुल लोधी का नाम पहले से ही तय था. हालांकि अधिकृत तौर पर भी उनके नाम का ऐलान कर दिया गया है. कांग्रेस ने दमोह विधानसभा उपचुनाव के लिए अजय टंडन को अपना प्रत्याशी घोषित किया है. राहुल का नाम बीजेपी की ओर से घोषित होने से पहले मलैया फैमिली का दमोह में सरेंडर हो गया. पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया के बेटे सिद्धार्थ ने दमोह में मीडिया से बात करते हुए साफ किया कि वह विधानसभा का उपचुनाव नहीं लड़ेंगे और बीजेपी प्रत्याशी राहुल लोधी के समर्थन में प्रचार करेंगे. सिद्धार्थ मलैया ने साफ किया कि उन्होंने यह फैसला उनके पिता के आदेश के बाद लिया है. हालांकि इससे पहले लगातार यह अटकलें चल रही थी कि अगर उपचुनाव में मलैया फैमिली के सदस्य को टिकट नहीं मिलता है तो फिर वह बागी होकर चुनाव मैदान में उतर सकते हैं. प्रदेश संगठन की समझाइश के बाद ऐसी संभावना खारिज हो गई. दमोह में राहुल लोधी का मुकाबला अब अजय टंडन से होगा.  

शिव के राज में हावी माफिया, माफिया ने वन अमले को घेरा, गोलियां चलायीं

ग्वालियर। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चाहे जितने दावे कर लें, लेकिन माफियाराज हावी है। तिघरा के जंगल में पत्थर के अवैध उत्खनन को रोकने पहुंचा वन अमला खुद ही घिर गया। अचानक झाड़ियों से गोलियां बरसने लगीं। माफिया ने 20 मिनट तक रुक-रुक कर गोलियां चलाईं। वन विभाग और SAF के जवानों ने बमुश्किल छिपकर जान बचाई। इस दौरान पत्थर माफिया JCB मशीन के साथ बंधक बने अपने साथी को भी छुड़ा ले गए। घटना गुरुवार-शुक्रवार दरमियानी रात 1.40 बजे की है। बताया जा रहा है कि जवान से कार्बाइन छीन ली गई थी। बाद में वह घटनास्थल पर ही पड़ी मिल गई तो पुलिस ने राहत की सांस ली। आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। SDO घाटीगाव सर्किल संजीव कुमार ने बताया कि रात को करीब 12.50 बजे सूचना मिली थी कि तिघरा थाना क्षेत्र के लखनपुरा इलाके में खनन माफिया द्वारा पत्थर का अवैध खनन किया जा रहा है। सूचना पर रेंजर विकास मिश्रा के साथ ही तिघरा चौकी प्रभारी सुनील जेवियर, गेमरेंज सुपरवाइजर शंकर खलको के साथ ही वन विभाग का अमला निकला। साथ में SAF का बल भी था। यह सभी लखनपुरा के जंगल में पहुंचे, जहां एक JCB मशीन से पत्थर का उत्खनन करती मिला। वन विभाग व SAF के बल ने JCB मशीन को घेर लिया और JCB चला रहे ऑपरेटर को अपनी निगरानी में ले लिया। झाड़ियों से बरसने लगीं गोलियां, छिपकर बचाई जान वन अमले ने मशीन जब्त कर एक ऑपरेटर को पकड़ा ही था कि तभी अचानक जंगल की झाड़ियों से फायरिंग शुरू हो गई। वन अमले को संभलने का मौका ही नहीं मिला। जवान अपनी राइफल तक नहीं निकाल पाए। किसी तरह छिपकर अपनी जान बचाई। रुक-रुक माफिया गोली चला रहे थे। इसी दौरान वे अपनी JCB मशीन और ऑपरेटर को छुड़ा ले गए। गोलीबारी की सूचना पुलिस को दी गई। जब तक पुलिस पहुंची माफिया सामान समेटकर भाग चुके थे। कार्बाइन गन लूटने की खबर माफिया ने हमला करने के बाद एक SAF जवान से कार्बाइन लूट ली है। यह खबर पुलिस के पास पहुंची थी। पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल पर छानबीन की तो कार्बाइन वहीं पड़ी मिल गई है। पुलिस को आशंका है कि अचानक हमले से जवान छिपने के लिए भागे होंगे तो गन छूट गई होगी। लगातार हमले कर रहे माफिया तिघरा के जंगल में लखनपुरा के पास 15 दिन में दूसरी बार वन विभाग के अमले पर हमला हुआ है। इससे पहले पत्थर से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली छुड़ा ले गए थे। इससे पहले घाटीगांव में भी वन अमले पर हमला हुआ था। एक महीने पहले पुरानी छावनी में रेत माफिया ने TI पुरानी छावनी को कुचलने का प्रयास किया था।

MP : मंत्री बंगलों की सजावट पर 10 महीने में खर्च हुई ‌4.58 करोड़ की राशि

भोपाल। मंत्रियों के बंगले सजाने में 10 महीने में 4.58 करोड़ से ज्यादा खर्च किए गए हैं। सबसे ज्यादा एक करोड़ रुपए सीएम हाउस पर खर्च हुए हैं। इसके बाद सबसे अधिक 56 लाख रुपए पीडब्ल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव के बंगले की साज-सज्जा में लगे हैं। यह जानकारी विस में पांचीलाल मेड़ा के एक प्रश्न के उत्तर में सामने आई है। पीडब्ल्यूडी मंत्री भार्गव ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित मंत्रिमंडल के सदस्यों के बंगलों में 1 अप्रैल 2020 से 31 जनवरी 2021 तक साज-सज्जा में किए गए खर्च का ब्यौरा दिया। सीएम हाउस में बिजली के काम में 81 लाख से ज्यादा खर्च किए गए। वहां 18.52 लाख का सिविल वर्क हुआ है। मुख्यमंत्री के 74 बंगला स्थित एक अन्य बंगले बी-8 में 13.41 लाख का काम हुआ है। केवल सिविल वर्क देखा जाए तो मुख्यमंत्री निवास से ज्यादा काम गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह, स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी, सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया और परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के बंगले पर हुआ है। इस दौरान सबसे कम मात्र 1495 रुपए का व्यय खेल एवं युवा कल्याण मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया व पूर्व मंत्री इमरती देवी के बंगलों पर हुआ।

MP : कोरोना के इलाज पर 724 करोड़ रुपए खर्च:173 करोड़ प्राइवेट अस्पतालों को दिए

भोपाल। मध्यप्रदेश में कोरोना के इलाज पर 724 करोड़ रुपए खर्च हुए, जिसमें 173 करोड़ रुपए की राशि 8 प्राइवेट अस्पतालों में बंटी। इसमें खास यह है कि निजी अस्पतालों में बंटी राशि का 70 फीसदी से ज्यादा हिस्सा (125 करोड़ रुपए) भोपाल और इंदौर के दो अस्पतालों को मिला। इसमें भोपाल के चिरायु चैरिटेबल फाउंडेशन को 70 करोड़ रुपए और इंदौर के सर अरविन्दो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस को 55 करोड़ रुपए दिए। बकाया बची 53 करोड़ रुपए की राशि इंडेक्स, अमलतास, RD गार्डी, LN मेडिकल काॅलेज, पीपुल्स मेडिकल काॅलेज में बंटी। यह जानकारी बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी ने दी है। प्रदेश के आठ निजी अस्पतालों को 173 करोड़ रुपए की राशि 28964 कोरोना मरीजों के इलाज के एवज में दी गई। इलाज के दौरान इन अस्पतालों में 956 लोगों की मौत हो गई। काढ़े की पैंकिंग में ही लग गए 8 करोड़ रुपए सरकार द्वारा दी गई खर्च की जानकारी से यह भी साफ हो गया कि प्रत्येक मरीज के इलाज पर करीब 61 हजार रुपए का खर्चा आया। इधर, 30 करोड़ रुपए के त्रिकटू काढ़े की पैकिंग पर 8 करोड़ रुपए खर्च होने की जानकारी सामने आई। कोरोना इलाज में खर्च हुई राशि के बारे में कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी, जीतू पटवारी, मनोज चावला और हर्ष गहलोत ने सवाल पूछे थे। जनता इलाज के लिए भटकती रही, सरकार ने चहेतों को रेवड़िया बांटी कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार कोरोना जैसी आपदा में भी अवसर तलाशने में पीछे नहीं रही। व्यापमं कांड के दो कर्ताधर्ताओं चिरायु और अरविंदो को 70% से ज्यादा राशि बांट दी गई। जब जनता इलाज के लिए भटक रही थी तब सरकार चहेतों को रेवड़ियां बांटने में लगी थी। पैसा मरीजों के इलाज पर खर्च हुआ जरूरत हुई तो आगे भी जारी रखेंगे संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस के पास कोई मुद्दे है नहीं, इसलिए बेवजह आरोप लगाती रहती है। कोरोना के मरीजों को इलाज की जरूरत थी तब क्या सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती। हमने मरीजों के इलाज में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। मरीजों के इलाज पर खर्च हुआ है। आगे भी जारी रहेगा। कांग्रेस की सरकार तो जैकलीन के ठुमकों और फोटोशूट में व्यस्त थी चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि प्रदेश में जब कोरोना पैर पसार रहा था, तब तत्कालीन कांग्रेस सरकार तो जैकलीन के ठुमकों में व्यस्त थी। कमलनाथ, सलमान खान और जैकलीन के साथ फोटो सूट में व्यस्त थे। भाजपा की सरकार बनते ही हमने कोरोना के मरीजों के इलाज की व्यवस्था की।

उमा भारती बोलीं- राजस्व गया भाड़ में, शराबी भले ही भूखे मर जाएं लेकिन MP में शराबबंदी हो

ग्वालियर. मध्‍य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती (Uma Bharti) ने फिर दोहराया है कि वो शराबबंदी नशामुक्ति अभियान चलाएंगी. यह मेरा सपना है जो जल्द पूरा भी होगा. वो यहां तक कह गयीं कि शराबी भले ही भूखा मर जाए लेकिन शराब बंद होना चाहिए. ग्वालियर आयी उमा भारती बोलीं, ‘मैंने कहा था यह आंदोलन नहीं अभियान है. मैंने कभी नहीं कहा कि 8 मार्च से अभियान शुरू करेंगे. बल्कि मैंने कहा था कि 8 मार्च को छोटी बैठक होगी जिसमें आगे की रणनीति बनाई जाएगी.’ उन्होंने कहा कि शराबबंदी में स्वचेतना का जागरण होना चाहिए. मैं शिवराज और वीडी शर्मा से सहमत हूं और वह मुझसे सहमत हैं. अवैध शराब बंद हो प्रदेश में शराबबंदी ही नहीं नशाबंदी होनी चाहिए जो जागरण अभियान से भी अच्छा है. उमा ने सलाह देते हुए कहा कि सरकार को यह करना है नियम विरुद्ध दुकानें न खोली जाएं. आबकारी नियमों का पालन किया जाए, क्योंकि दो नम्बर की जो शराब बनती है वही अधिकतर जहरीली होती है. वह पूरी तरह से बंद हो. शराब से सख्त नफरत- भले ही शराबी भूखा मर जाए उमा भारती यहां तक कह गयीं कि मैंने शिवराजजी से कहा है जैसे ही राजस्व का रास्ता निकल आये आप शराबबंदी और नशाबंदी दोनों की तरफ आइए.मुझे शराब से इतनी नफरत है कि मेरा बस चले तो लोग भूखों मरते हैं तो मर जाएं राजस्व गया भाड़ में बस शराब बंद करो. उमा भारती ने दलील दी कि कोरोना में साबित हो गया शराब नहीं पीने से एक भी आदमी नहीं मरा.जैसे ही दुकानें खुलीं लोग मरना शुरू हो गए. इसका मतलब है कि शराब मृत्यु की कारक है शराब बंद करना मृत्यु का कारण नहीं है. शराब बंदी मेरी आस्था का विषय ये सपना जल्द पूरा होगा उमा भारती ने कहा मैं यह अभियान जरूर चलाऊंगी. यह मेरी आस्था है कि शराबबंदी हो. राममंदिर निर्माण में भी मेरी आस्था थी, हालांकि उसमें 30 साल लग गए थे. लेकिम शराब बंदी में सभी का समर्थन है और कम समय लगेगा. उमा का मानना है शराबखोरी से महिलाएं ज्यादा पीड़ित होती हैं.शराब पीकर मारपीट-अत्याचार और ज़ुल्म उन्हीं पर ढाए जाते हैं.दूसरी विचारणीय बात ये है कि गरीब वर्ग के लोग ही दो नंबर यानि अवैध शराब पीते हैं.अवैध शराब से राजस्व भी नहीं मिलता. राजस्व सिर्फ एक नंबर की शराब से मिलता है. उमा भारती ने कहा-वो शराबबंदी के बारे में इसलिए बोल पा रही हैं क्योंकि सीएम शिवराज और VD शर्मा संस्कारशील और संस्कृतिवान व्यक्ति हैं.दोनों ही बहुत अनुशासित व्यक्ति हैं.

मध्य प्रदेश तीन रैलियां करने आएंगे किसान नेता राकेश टिकैत

भोपाल। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत 8 मार्च को मध्य प्रदेश आएंगे। केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदेश के किसानों का समर्थन हासिल करने के लिए टिकैत यहां आ रहे हैं। इधर, मध्य प्रदेश पुलिस टिकैत के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है। टिकैत के खिलाफ 2016 में ही एमपी का एक अदालत ने अरेस्ट वारंट जारी किया था। दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन का खास असर अब तक एमपी में देखने को नहीं मिला है। ऐसे में टिकैत श्योपुर, रीवा और देवास में रैलियों को संबोधित करेंगे। मध्य प्रदेश भारतीय किसान यूनियन के महासचिव अनिल यादव ने बताया कि महिला दिवस के दिन टिकैत राज्य के किसानों से मिलेंगे। वे उन्हें नए कानूनों से होने वाले नुकसान के बारे में बताएंगे। रोचक है कि टिकैत के खिलाफ एमपी में एक मामला पहले से लंबित है। 2012 में अनूपपुर जिले में उनके खिलाफ हत्या की कोशिश और अव्यवस्था फैलाने के मामले में अरेस्ट वारंट जारी हो चुका है। अनूपपुर के जैतहरी इलाके में पावर प्लांट के खिलाफ प्रदर्शन का नेतृत्व करने 2012 में टिकैत यहां आए थे। प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। प्रदर्शनकारियों ने कई वाहनों में आग लगा दी थी जिसमें कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। पुलिस ने इस मामले में टिकैत सहित 100 से ज्यादा लोगों के खिलाफ अव्यवस्था फैलाने, हथियारों के साथ अवैध रूप से प्रदर्शन करने और हिंसा फैलाने तथा हत्या की कोशिश करने का मामला दर्ज किया गया था। टिकैत को 2012 में ही इस मामले में जमानत मिल गई थी, लेकिन इसके बाद वे अदालत के सामने कभी पेश नहीं हुए। कई सुनवाइयों में अनुपस्थित रहने के बाद 2016 में इनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट अदालत ने जारी किया था। अनुपपुर के एसपी मांगीलाल सोलंकी ने बताया कि पुलिस टिकैत के खिलाफ जरूरी कार्रवाई करेगी। ऐसे में टिकैत एमपी में आने पर गिरफ्तार किए जा सकते हैं।

MP : विधायक से मांगी एक करोड़ की रंगदारी, दोनों बेटों को जान से मारने की धमकी

रायसेन: उदयपुरा से कांग्रेस विधायक देवेंद्र पटेल को एक करोड़ रुपए की फिरौती देने की धमकी मिली है. यह धमकी उन्हें एक युवक द्वारा पत्र के जरिए दी गई है. साथ ही नहीं देने पर उनके दोनों बेटों को जान से मारने की धमकी दी गई है. जानकारी के मुताबिक इसी तरह की धमकी पूर्व विधायक भगवान सिंह राजपूत और बरेली स्थित गुरुकुल स्कूल के संचालक को भी दी गई है. फिलहाल विधायक की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. 29 जनवरी को दी गई थी धमकी 29 जनवरी को शाम 4 बजे के लगभग कांग्रेस विधायक देवेंद्र पटेल के उदयपुरा विधानसभा के बरेली स्थित घर के बाहर एक अज्ञात व्यक्ति चिट्टी रख गया था. विधायक निवास पर उस समय कर्मचारी दिनेश व्यास उपस्थित थे, उन्होंने उस व्यक्ति से पूछा किस काम के लिए आए हो उसने बताया मुझे विधायक जी से मिलना है. इस पर दिनेश व्यास ने बोला कि विधायक जी इस समय बाहर गए हुए हैं. जिस पर व्यक्ति वहां पर एक चिट्टी छोड़कर चला गया. मामले के संबंध में बरेली एसडीओपी अशोक घनघोरिया का कहना है कि विधायक के घर के बाहर धमकी भरा पत्र रखने वाले आरोपी की तलाश की जा रही है. युवक की गिरफ्तारी जल्द से जल्द की जा सके, इसलिए आसपास के इलाकों में फोटो भी चस्पा कर दी गई है. वहीं, आरोपी युवक के बारे में जानकारी देने वाले को 5000 रुपए इनाम देने की भी घोषणा की गई है.

MP : सीधी बस हादसे 47 मौत … हादसे के बाद मंत्री भोज पर सवाल

भोपाल। सीधी बस हादसे के बाद मौके पर जाने के बजाय परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के सहकारिता मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया के भोज में शामिल होने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री केके मिश्रा ने राजपूत की एक फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की है, जिसमें वह भदौरिया के निवास में भोजन करते दिखाई दे रहे हैं। जवाब में गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि मैं सुबह से मुख्यमंत्री के साथ हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन की मॉनिटरिंग कर रहा था। मंत्री भदौरिया ने बसंत पंचमी पर भोज रखा था, लेकिन यह सादा कार्यक्रम था। जहां मेरे अलावा कई मंत्री पहुंचे थे। मैं वहां कुछ देर ही रुक कर दाल-रोटी खाकर वापस आ गया था। कांग्रेेस के आरोप पर उन्होंने कहा, जो लोग हादसे के बहाने राजनीति करते हैं, मैँ उनकी निंदा करता हूं। बस हादसे में 47 लोगों की मौत होने पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शोक संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1 लाख 10 हजार हितग्राहियों के आवासों का लोकापर्ण कार्यक्रम रद्द कर दिया। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को दोपहर 12:30 बजे होने वाली कैबिनेट की बैठक को स्थगित कर दिया था। हालांकि देर शाम औपचारिक बैठक मंत्रालय में हुई। कांग्रेस ने सवाल इसलिए भी उठाए, क्योंकि हादसे का सीधे तौर पर वास्ता परिवहन मंत्री का है। वह मंगलवार को भोपाल में ही मौजूद रहे, लेकिन मुख्यमंत्री के निर्देश पर जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और राज्य मंत्री राम खिलेवान पटेल को घटना स्थल पर भेजा था। हालांकि राजपूत इस हादसे को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल हुए थे। बता दें, सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया का भोज पूर्व निर्धारित था, जिसमें सभी मंत्रियों को बुलाया गया था। इसमें मंत्री मोहन यादव, हरदीप सिंह डंग, ओमप्रकाश सकलेचा, ऊषा ठाकुर के अलावा प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, संगठन महामंत्री सुहास भगत भी भोज में शामिल हुए थे, लेकिन कांग्रेस ने परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को सीधी बस हादसे के लिए नैतिक रूप से जिम्मेदार मानते हुए भोज में शामिल होने पर सवाल खड़े किए हैं।

उमा भारती के शराबबंदी कैंपेन से सरकार बैकफुट पर

भोपाल. पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के शराबबंदी को लेकर अभियान शुरू करने के ऐलान का असर नई आबकारी नीति पर पड़ता दिखाई दे रहा है. अब सरकार इसे 3 माह के लिए टालने पर विचार कर रही है. प्रदेश में नई आबकारी नीति 1 अप्रैल की बजाय अब 1 जुलाई से लागू करने की तैयारी है. तब तक प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव भी संपन्न हो जाएंगे. आबकारी विभाग ने नई आबकारी नीति का प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को पिछले सप्ताह भेज दिया था। हर साल 15 मार्च तक टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है, ताकि आगामी वित्तीय वर्ष (1अप्रैल से 31 मार्च) में शराब के ठेके 1 अप्रैल से शुरू हो सकें, लेकिन वर्ष 2020-21 के लिए प्रस्ताव तैयार होने से पहले ही नई शराब दुकानों को लेकर विवाद शुरू हो गया। उमा भारती के तेवर के बाद कांग्रेस के साथ भाजपा के अंदर भी नई चर्चा छिड़ गई है। आर्थिक संकट से जूझ रही राज्य सरकार आय बढ़ाने के लिए शराब दुकानों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रही थी, लेकिन राजनीतिक बवाल खड़ा होने के कारण उसे बैकफुट पर जाना पड़ा। बता दें कि मध्य प्रदेश में सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष 2019-20 में 8,321 करोड़ रुपए की कमाई की थी, जबकि इस साल यानि 2020-21 में 10 हजार 318 करोड़ रुपए की कमाई की उम्मीद थी. प्रदेश में इस समय 3605 शराब की दुकानें है, जबकि 10 साल पहले 2770 दुकानें थीं. आबकारी विभाग नई आबकारी नीति का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज चुका है. हर साल 15 मार्च तक टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है, ताकि आगामी वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) में शराब के ठेके 1 अप्रैल से शुरू हो सकें, लेकिन वर्ष 2020-21 के लिए प्रस्ताव तैयार होने से पहले ही नई शराब दुकानों को लेकर विवाद शुरू हो गया. उमा भारती के तेवर के बाद कांग्रेस के साथ भाजपा के अंदर भी नई चर्चा छिड़ गई है. आर्थिक संकट से जूझ रही राज्य सरकार आय बढ़ाने के लिए शराब दुकानों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रही थी, लेकिन राजनीतिक बवाल खड़ा होने के कारण उसे बैकफुट पर जाना पड़ सकता है. नरोत्तम मिश्रा ने कहा था बढ़ाई जाए दुकानों की संख्या गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने पिछले महीने दिए एक बयान में कहा था, अवैध शराब की रोकथाम के लिए प्रदेश में शराब दुकानों की संख्या बढ़ाई जाना चाहिए. इसको लेकर विपक्ष ने सरकार को आड़े हाथों लिया था. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बीच में बोलना पड़ा था कि नई शराब दुकानें खोलने का फिलहाल कोई विचार नहीं है. बावजूद इसके आबकारी विभाग ने नई दुकानें खोलने के प्रस्ताव कलेक्टरों से मांगने के लिए पत्र भेज दिया था, बाद में इसे वापस ले लिया था. निकाय चुनाव में नुकसान होने का भी डर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने प्रदेश में शराबबंदी को लेकर अभियान शुरू करने का ऐलान किया तो सीएम शिवराज घिरते नजर आए। यही कारण है कि मुख्यमंत्री ने 4 फरवरी से रतलाम में नशाबंदी के खिलाफ अभियान चलाने की शुरुआत कर दी। जानकारों का मानना है कि नगरीय निकाय चुनाव से पहले उमा भारती के अभियान का असर भाजपा को नुकसान पहुंंचा सकता है। नई नीति को तीन महीने के लिए होल्ड करने की एक वजह यह भी मानी जा रही है। सरकार को राजस्व की चिंता दरअसल, मध्य प्रदेश में उमा भारती अकेली राजनेता नहीं हैं, जिन्होंने शराबबंदी की मांग की है। यदा-कदा इसे लेकर आवाजें उठती रही हैं। कभी सामाजिक संगठनों की तरफ से मांग उठती है तो कभी राजनीतिक दलों के भीतर ही बातें होती रही हैं। शराब बंदी की मांग के बीच सरकार आज तक इस सवाल का जवाब नहीं खोज पाई कि यदि शराब को पूरे प्रदेश में प्रतिबंधित कर दिया तो इससे मिलने वाले राजस्व की भरपाई कहां से होगी?

कृषि मंत्री पर दिग्विजय सिंह का तंज, कहा- ‘तोमर के पास खेती नहीं, वो क्या जानें किसानी

भोपाल/नई दिल्‍ली. नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर जहां किसान आंदोलन ने केन्द्र सरकार की नींद उड़ा रखी है, वहीं अब राजनीतिक घेरेबंदी भी सरकार की परेशानी बढ़ा रही है. शुक्रवार को राज्यसभा में कृषि कानूनों को लेकर भाजपा और कांग्रेस में आमने सामने तीखी बहस हुई. राज्यसभा सांसद और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर (Agriculture Minister Narendra Singh Tomar) को लेकर कहा कि उन्हें किसानी की जानकारी ही नहीं है. दिग्विजय ने कहा,’प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों के साथ बात करने के लिए दो मंत्री लगाए हैं. नरेंद्र सिंह तोमर जिनके पास खेती ही नहीं तो वो किसानी क्या जानते होंगे. दूसरे पीयूष गोयल जो कॉर्पोरेट सेक्टर के प्रवक्ता हैं. दोनों ही मंत्री किसानी को लेकर अनुभवहीन हैं और यह कृषि कानून पर कैसे किसानों को संतुष्ट कर सकते हैं.’ किसान आंदोलन के मसले पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्यसभा में कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह खून से खेती कर सकती है. इस पर जवाब देते हुए दिग्विजय सिंह ने भाजपा पर आरोप लगा दिया कि वह हमेशा दंगे कराना चाहती है. जबकि कृषि कानून की पुरजोर खिलाफत करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि खून से खेती करना कांग्रेस का इतिहास नहीं रहा है. जो गोधरा में हुआ वो पानी की खेती थी या खून की खेती थी. भाजपा हमेशा नफरत और हिंसा की राजनीति करती आई है. कांग्रेस सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलती आई है. राज्यसभा में दोनों ही नेताओं के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई. दिग्विजय सिंह ने खून से खेती वाले तोमर के बयान के जवाब में यह तक कह दिया कि अगर ये सांप्रदायिक दंगे कराएंगे तभी इनको फायदा होगा. यही कारण है कि ओवैसी और भाजपा के बीच अच्छी दोस्ती है. कृषि कानून पर हमलावर है कांग्रेस केन्द्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानू को लेकर किसानों से लेकर राजनीतिक घेरा बंदी जारी है. कांग्रेस भी सरकार को कृषि कानून पर लगातार घेर रही है. पंजाब से शुरू हुए इस आंदोलन ने जब से दिल्ली के बॉर्डर सील कर रखे है, तब से कांग्रेस ने खुद किसानों के साथ खड़े होने की घोषणा की है. राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर किसान विरोधी होने का आरोप लगा रहे हैं. एक दिन पहले ही प्रियंका गांधी 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड में ट्रैक्टर पलटने से किसान की मौत के बाद उसके घर पहुंची थीं. इससे उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल देखी गई. अब कृषि कानून को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने सामने खड़ी हो गई है.

MP : अवैध रेत खनन करने वाले लोग विधायक, मंत्रियों को हिस्सा देते हैं; हमले तो करेंगे ही : दिग्विजय सिंह

ग्वालियर . अवैध रेत उत्खनन करने वाले लोग शासन, प्रशासन, विधायक, मंत्रियों व मुख्यमंत्री को हिस्सा देते हैं। क्योंकि यह उनका ‘काम’ है। पैसे भी लेते हो और कार्रवाई भी करते हो। ऐसे में हमला होना तो तय है। सब मिली भगत है। यह बात एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस से राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने शनिवार को ग्वालियर में मीडिया से बात करते हुए कही है। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की सरकार पर कई सवाल खड़े किए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह शनिवार को ग्वालियर प्रवास पर आए हैं। स्टेशन के बाहर उन्होंने मीडिया से चर्चा की है। उन्होंने एक दिन पहले ग्वालियर पुलिस पर रेत माफिया के हमले पर भी अपनी बात कही है। उनका कहना है कि प्रशासन चाहे तो एक दिन में अवैध उत्खनन को बंद करा सकता है। पर अवैध रेत का उत्खनन करने वालों का हिस्सा प्रशासन, शासन, विधायक, मंत्री व मुख्यमंत्री तक जाता है। उनका कहना था कि यह भी ठीक है कि आप हिस्सा लेते हो और उसके बाद कार्रवाई करते हो। यह उनका रोजगार है और पैसा लेकर कार्रवाई करोगे तो वो हमला भी करेंगे। यह हुई थी घटना शुक्रवार सुबह ग्वालियर के पुरानी छावनी थाना पुलिस ने चंबल से अवैध उत्खनन कर रेत का परिवहन करने वालों पर पुलिस ने कार्रवाई के लिए घेराबंदी की थी। इस घेराबंदी के दौरान पुलिस का दांव उल्टा पड़ गया था जब रेत माफिया ने पुलिस पर पथराव व फायरिंग शुरू कर दी। टीआई पुरानी छावनी सुधीर सिंह को रेत माफिया ने घेर लिया था। उनको ट्रैक्टर से कुचलने का भी प्रयास किया, लेकिन वह समय रहते नाले में कूद गए। इस दौरान टीआई सुधीर सिंह घायल भी हैं। इस मामले में 8 लोगों को पुलिस ने पकड़ा है जिनसे दो कट्‌टे व कारतूस भी मिले हैं। 10 लोगों पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है। इसी हमले के विरोध में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने शिवराज सिंह के खिलाफ कड़ा बयान देकर हमला बोला है।

राम मंदिर के नाम पर ठगी:भोपाल में फर्जी रसीद काटकर चंदा लिया

भोपाल . अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के नाम पर फर्जी रसीद देकर चंदा लेने का एक मामला भोपाल में सामने आया है। अशोका गार्डन पुलिस ने विश्व हिंदू परिषद की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी से दो लोगों से चंदा लिए जाने की रसीद भी जब्त की गई हैं। आरोपी अब तक 202 रुपए चंदा भी ले चुका था। अशोका गार्डन थाना प्रभारी आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि मूलत: बिलासपुर का रहने वाला 28 साल का मनीष राजपूत अशोका गार्डन की फ्रेंड कॉलोनी में अपने मामा के यहां रहता है। वह प्राइवेट जॉब करता है। उसके खिलाफ विश्व हिंदू परिषद के जिला सहमंत्री यतेंद्र पाल सिंह जादौन ने धोखाधड़ी की शिकायत की थी। उनका कहना था कि मनीष राम जन्म भूमि संकल्प सोसायटी के नाम पर लोगों से चंदा ले रहा था। इसके लिए वह फर्जी रसीद काट रहा है। पुलिस ने मनीष को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के पकड़ते ही वह माफी मांगने लगा। उसके खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। दो लोगों से ले चुका था चंदा मनीष ने बताया कि वह अब तक सिर्फ दो ही लोगों से चंदा ले पाया है। एक दुकान संचालक से उसने 151 रुपए और एक अन्य से 51 रुपए लिए हैं। उसने उन्हें रसीद भी दी है। पुलिस ने आरोपी के पास से दोनों रसीद भी जब्त कर ली हैं। टीआई श्रीवास्तव के अनुसार इस मामले में कुछ और लोग भी सामने आ सकते हैं। खुद को पत्रकार बताता है टीआई ने बताया कि आरोपी खुद को पत्रकार बताता है। उसका कहना है कि यह यू-ट्यूब पर चलने वाले एक चैनल में जॉब करता है। उसके बताए अनुसार उसके चैनल की भी जांच की जा रही है। मनीष का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

महंगे पेट्रोल पर सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा राम के राज में पेट्रोल 93 और लंका में 51 रुपए

भोपाल . देश में पेट्रोल के बढ़ते दामों को लेकर भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी ही सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि राम के भारत में पेट्रोल 93 रुपए, सीता के नेपाल में 53 रुपए और रावण की लंका में पेट्रोल 51 है। इसके बाद मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने निशाना साधते हुए केंद्र सरकार को आड़े हाथ लिया। उन्होंने स्वामी के सोशल मीडिया पोस्ट पर रिप्लाई किया “आप ने ठीक कहा स्वामी जी, घोर कलियुग है। देश में लगातार पेट्रोल के दाम बढ़ने के कारण अब इसके 100 के पार पहुंचने की अटकलें तेज हो गई हैं। कई राज्यों में यह 94 रुपए के पार पहुंच चुका है।

मध्यप्रदेश में एक बड़ा राशन घोटाला, कैग की रिपोर्ट पर केस दर्ज

भोपाल . प्रदेश में स्कूल नहीं जाने वाली किशोरवय बच्चियों को दिए जाने वाले टेकहोम राशन में बड़ा घोटाला सामने आया है। जिन 2 लाख 8 हजार 531 बच्चियों का कोई अस्तित्व ही नहीं हैं, उनमें से करीब 1.71 लाख से अधिक को कागजों में ही हर साल करीब 60 करोड़ रुपए का टेकहोम राशन बांटे जाने का खुलासा हुआ है। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (एनसीपीसी) ने कैग की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर मप्र आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) को इस मामले में केस दर्ज कर जांच के आदेश दिए हैं। आयोग की रजिस्ट्रार अनु चौधरी ने 1 फरवरी को ईओडब्ल्यू को जांच के आदेश के साथ बैतूल, ग्वालियर, डिंडोरी और सिंगरौली जिलों की कैग द्वारा की गई जांच रिपोर्ट भी भेजी है। कैग ने इन चार जिलों में पकड़ा है 4.27 करोड़ का घोटाला एनसीपीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने डेढ़ साल पहले विदिशा जिले के स्कूल और आंगनवाड़ियों का दौरा किया था। यहां बच्चियों के रजिस्ट्रेशन और उपस्थित में अंतर मिला था। इसके बाद आयोग ने मप्र के महिला बाल विकास विभाग से प्रदेशभर 11 से 14 साल की बच्चियों की ऐसी बच्चियों की जानकारी मांगी, जो स्कूल नहीं जाती हैं। महिला बाल विकास ने आयोग को बताया कि ऐसी 2 लाख 17 हजार 211 बच्चियां हैं, जो स्कूल नहीं जाती, उनमें से 1 लाख 71 हजार 365 को आंगनवाड़ियों के जरिए टेकहोम राशन दिया जाता है। आयोग ने इस जानकारी के बाद मप्र स्कूल शिक्षा विभाग को इन बच्चियों को स्कूली शिक्षा में दायरे में लाने के निर्देश देकर आउट ऑफ स्कूल (ड्रापआउट) बच्चों की जानकारी मांगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने आयोग को भेजी अपनी रिपोर्ट में बताया कि प्रदेश में सिर्फ 23 हजार 491 बच्चे ही ऐसे हैं जो स्कूल के दायरे से बाहर हैं, इनमें 11 से 14 साल की बच्चियों की संख्या सिर्फ 8680 है। दोनों विभागों द्वारा उपलब्ध कराए दस्तावेजों में बच्चियों के आंकड़ों में भारी अंतर को देखते हुए आयोग ने इन्हें कैग यानी अकाउंटेंट जनरल को परीक्षण के लिए भेज दिया। कैग ने सच्चाई पता लगाने के लिए रैंडमली प्रदेश के चार जिलों में प्रारंभिक जांच की। जांच के बाद यह सही पाया गया कि स्कूल शिक्षा विभाग के आंकड़े एकदम सही हैं, जबकि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा उपलब्ध कराए आंकड़े गलत हैं। यानी जिन बच्चियों को कागजों में टेकहोम राशन दिया जा रहा है, उनका अस्तित्व ही नहीं हैं। इसके बाद कैग ने सभी 52 जिलों में इसकी जांच शुरू कर दी है।

सड़क हादसे में घायल युवक को देख मंत्री सिलावट ने रोका काफिला, अस्पताल पहुंचवाया

इंदौर . रविवार रात करीब पौने 9 बजे शिप्रा बरलई ब्रिज के समीप एक युवक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गया। इसी दौरान वहां से गुजर रहे जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट की नजर सड़क पर लगी भीड़ पर पड़ी। उन्होंने गाड़ियां रुकवाई और घटनास्थल पर पहुंच गए। मंत्री ने देखा कि युवक की हालत गंभीर है और उसे इलाज की जरूरत है। उन्होंने तत्काल अपने फॉलो वाहन के जरिए घायल को अस्पताल पहुंचवाया। सिलावट ने खुद ना केवल घायल को उठाया बल्कि वाहन का गेट भी खुद ही खोला। घर पहुंचने के बाद भी उन्होंने फोन पर युवक के संबंध में जानकारी ली। दरअसल वे अपनी विधानसभा से वापस इंदौर लौट रहे थे। तभी सड़क पर भीड़ देखकर अचानक रुके और लोगों की मदद से घायल को अस्पताल पहुंचाया।

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