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MP में किसानों के समर्थन में कांग्रेस का प्रदर्शन:कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठियां भांजीं

BHOPAL : किसान आंदोलन के समर्थन में शनिवार को भोपाल में कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की अगुआई में कार्यकर्ता भोपाल के जवाहर चौक पर जुटे। उन्हें राजभवन तक मार्च निकालना था।रोशनपुरा के पास ही कांग्रेसियों को रोक लिया गया। पुलिस ने लाठियां भांजी और वॉटर कैनन भी चलाई। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, उनके बेटे जयवर्धन समेत 20 नेताओं को गिरफ्तार किया गया। कमलनाथ ने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हजारों किसान भाइयों और कांग्रेसजनों पर शिवराज सरकार के इशारे पर बर्बर लाठीचार्ज किया गया। आंसू गैस के गोले छोड़े और वॉटर कैनन भी चलाई।’  प्रदर्शन में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं समेत प्रदेश के कई हिस्सों से आए कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। कमलनाथ ने कहा कि मोदी सरकार किसानों को मजबूर बनाना चाहती है और नए कृषि बिलों के जरिए उन्हें बिजनेसमैनों के हवाले करना चाहती है। इंदौर के कांग्रेस अध्यक्ष विनय बाकलीवाल ने बताया कि हम लोग जवाहर चौक पर जुटे थे। यहां से शांतिपूर्वक प्रदर्शन करते हुए राजभवन की ओर बढ़े। हमें रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस तैनात थी। जवानों ने रोशनपुरा से आगे जाने से रोक दिया। हम कुछ समझ पाते इससे पहले ही पानी की बौछार पड़ने लगी। आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। इसी दौरान पुलिस ने डंडा बरसाना शुरू कर दिया। बचने के लिए मैं पीछे हटा, तो तीन लाठी पीठ पर और एक लाठी कलाई में लगी। यहां से बचकर निकला तो एक व्यक्ति ने मुझे अपनी दुकान में बैठाया।

MP : एक तरफ बेटियों से दरिंदगी की वारदातें, दूसरी तरफ मार दूंगा, टांग दूंगा जैसे बयान

भोपाल। मार दूंगा, टांग दूंगा, माफिया व अपराधी एमपी छोड़कर चलें जाएँ, मामा अब पूरे फॉर्म में है। इस प्रकार की फर्जी बातें करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के बयानों का प्रदेश के लोग उपहास उड़ा रहे हैं। क्योंकि शिवराज के राज में बेटियों से दरिन्दगीं की वारदात लगातार बढ़ रही हैं। किसान आत्महत्या किये जा रहे हैं। जहरीली शराब से लोग मर रहे हैं। लेकिन सीएम शिवराज इस बारे में कुछ नहीं बोल रहे। सरकार सूबे में लगातार एंटी माफिया मुहिम चलाने का ढिंढोरा पीट रही है। लेकिन दूसरी और मध्यप्रदेश में बहन और बेटियों की अस्मत तार-तार हो रही है। पिछले एक हफ्ते के दौरान प्रदेश के अलग-अलग जिले में 5 से ज्यादा बलात्कार और हत्या की वारदात हुई हैं। ज्यादातर मामलों में नाबालिग बच्चियों को शिकार बनाया गया है। हर नई घटना पुरानी से ज्यादा डरावनी होती है।ऐसे में सवाल है। अब क्या करें बेटियां।? 11 जनवरी, खंडवा 13 साल की बच्ची के साथ रेप बच्ची की हत्या कर शव को छत पर रखा 17 जनवरी, उमरिया 14 साल की नाबालिग के साथ गैंगरेप 24 घंटे के अंदर पीड़िता के साथ 9 बार गैंगरेप 18 जनवरी, बैतूल 14 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म रेप के बाद बच्ची को पत्थर के नीचे दफनाया 20 जनवरी, मुरैना 22 वर्षीय युवती के साथ दरिंदगी परिचित के युवक और उसके दोस्तों ने किया दुष्कर्म 22 जनवरी, इंदौर इंदौर में गैंगरेप : 15 साल की छात्रा को ड्रग्स और शराब की लत लगाई, नशा देकर 2 महीने तक करते रहे रेप ये केवल चंद घटनाएं नहीं बल्कि उन तमाम घटनाओँ की कड़ी हैं, जो मध्यप्रदेश में बीते कुछ दिनों में घटी है। ये घटनाएं बताती हैं कि मध्यप्रदेश में बेटियां सुरक्षित नहीं है। लगातार बढ़ती हुई बलात्कार की घटना बताती है, कि हैवानों के हौसले कितने बुलंद हो चुके है। उनके आगे कानून व्यवस्था भी बौनी साबित हो रही है। महज एक हफ्ते के दौरान उमरिया जैसे छोटे शहर से लेकर इंदौर जैसे मेट्रो शहर में मासूम बच्चियों पर शैतानी इरादों का कहर टूटा। कुछ साल पहले हुए निर्भया कांड के बाद रेप से जुड़े कानून को और सख्त किया गया है, पर इसके बाद भी बलात्कार के मामले कम नहीं, बल्कि बढ़े ही हैं। महज एक हफ्ते के दौरान सूबे में लगातार हुए बलात्कार और हत्या की घटनाओं ने कानून व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। वहीं, पुलिस अधिकारियों के पास एक ही जवाब है, कि जांच की जा रही है। प्रदेश में हत्या और बलात्कार की घटना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी ट्वीट के जरिए शिवराज सरकार पर जमकर हमला बोला है। कमलनाथ ने आरोप लगाया है, कि प्रदेश में बहन-बेटियों को लगातार गुमराह किया जा रहा है। अलग-अलग जिले में हुए विभत्स घटनाओं ने प्रदेश को शर्मसार किया है.. तो उसे लेकर सियासी बयानबाजी भी हो रही है। बहरहाल बच्चियों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार बढ़-चढ़कर दावे तो जरूर करती है। पर रेप की हर नई घटना उसके दावे की पोल खोल देती है और सवाल खड़ी करती है। क्या यही है मध्यप्रदेश के चुस्त कानून-व्यवस्था की मिसाल।

फिर कर्ज लेगी शिवराज सरकार, 10 माह के कार्यकाल में 17,500 करोड़ रुपए कर्ज लिया

भोपाल. कर्ज में डूबी शिवराज सरकार फिर एक हजार करोड़ का कर्ज़ लेने जा रही है. यह इस नए साल का पहला कर्ज़ होगा. वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि कर्ज़ लेना एक निरंतर प्रक्रिया है क्योंकि चिकित्सा, शिक्षा, कृषि, आपदा जैसी चीजों पर खर्च होता है. हमारी सरकार किसानों , गरीबों और आम आदमी सभी का ध्यान रखती है. कई जन हितैषी योजना हम चला रहे हैं. बजट में सभी का ध्यान रखा जाएगा. संबल जन हितैषी योजना है. इससे समाज के अंतिम व्यक्ति तक को लाभ पहुंचेगा. 2 लाख 8 हजार करोड़ का कर्ज़ कर्ज़ लेने का ये पिछले साल अप्रैल से लेकर अब तक 18वां मौका है. इससे पहले 20 दिसंबर को 2 हजार करोड़ रुपए का कर्ज खुले बाजार से लिया गया था. बीजेपी सरकार अपने 10 माह के कार्यकाल में 17,500 करोड़ रुपए कर्ज ले चुकी है. इस तरह मप्र सरकार पर कुल कर्ज का बोझ 2 लाख 8 हजार करोड़ रुपए हो चुका है. सरकार मार्च 2021 तक 1373 करोड़ रुपए का कर्ज और ले सकती है. वित्त विभाग ने 1 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेने के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. मध्य प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार ने एक माह पहले खुले बाजार से 2,373 करोड़ का अतिरिक्त कर्ज लेने की अनुमति दे दी है. हर साल राजस्व में 10 से 12% की वृद्धि की जाती है, लेकिन मौजूदा वित्तीय वर्ष में राज्य को करीब 7 हजार करोड़ रुपए कम राजस्व मिला है. इसी तरह केंद्र से जीएसटी में राज्य की हिस्सेदारी का 6900 करोड़ रुपए कम मिला है.

MP : BJP की नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा, सिंधिया समर्थक दरकिनार

भोपाल. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा ने अपनी नई टीम की घोषणा कर दी है. हालांकि बीजेपी की घोषित इस नई प्रदेश कार्यकारिणी में सिंधिया समर्थकों को जगह नहीं मिली है. लेकिन महाकौशल का खास ध्यान रखा गया है. इसमें जबलपुर से 4 चेहरे शामिल किए गए हैं. नयी टीम में 7 मोर्चा अध्यक्ष,12 नये उपाध्यक्ष, 12 मंत्री और कोषाध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारी नियुक्त किए गए हैं. अखिलेश जैन को नड्डा ने कोषाध्यक्ष नियुक्त किया है.प्रदेश मीडिया प्रभारी के पद पर लोकेंद्र पाराशर को बरकरार रखा गया है.रजनीश अग्रवाल प्रदेश मंत्री बनाए गए हैं. ये है नयी टीम -अखिलेश जैन प्रदेश कोषाध्यक्ष -अनिल जैन कालूहेड़ा प्रदेश सह कोषाध्यक्ष -राघवेंद्र शर्मा प्रदेश कार्यालय मंत्री -लोकेंद्र पाराशर प्रदेश मीडिया प्रभारी 7 नये मोर्चा अध्यक्ष -माया नारोलिया महिला मोर्चा की अध्यक्ष बनाई गयीं. -दर्शन सिंह चौधरी किसान मोर्चा अध्यक्ष -भगत सिंह कुशवाहा पिछड़ा वर्ग मोर्चा अध्यक्ष -वैभव पवार युवा मोर्चा अध्यक्ष -कैलाश जाटव अनुसूचित जाति मोर्चा अध्यक्ष -कल सिंह भाबर अनुसूचित जनजाति मोर्चा अध्यक्ष -रफत वारसी अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष टीम वीडी में नये उपाध्यक्ष -सांसद संध्या राय – पूर्व विधायक मुकेश चौधरी – कांत देव सिंह – योगेश ताम्रकार – सुमित्रा वाल्मिकी – आलोक शर्मा – सीमा सिंह – जीतू जिराती -गजेंद्र पटेल – बहादुर सिंह सोंधिया – चिंतामणि मालवीय – पंकज जोशी ये बने प्रदेश मंत्री मदन कुशवाहा, ललिता यादव, रजनीश अग्रवाल, लता वानखेड़े, प्रभु दयाल कुशवाहा, राजेश पांडे, मनीषा सिंह, आशीष दुबे, नंदनी मरावी, राहुल कोठारी, संगीता सोनी, जयदीप पटेल.

BHOPAL : सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति हटाने पर भिड़ गए मंत्री और पूर्व मंत्री

भोपाल . भोपाल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति दूसरी जगह शिफ्ट करने पर विवाद खड़ा हो गया. बीजेपी (BJP) सरकार इसे हटवा रही थी और कांग्रेसी विरोध कर रहे थे. बात इतनी बढ़ी कि चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग और पूर्व मंत्री पी सी शर्मा भिड़ गए. दरअसल मामला सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति दूसरी जगह शिफ्ट की जा रही थी. मंत्री विश्वास सारंग का कहना था कि मूर्ति को दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा है. रोटरी छोटी होने से यहां ट्रैफिक जाम हो जाता था. मूर्ति हटाने से रोटरी बड़ी की जा सकेगी और ट्रैफिक व्यवस्था ठीक की जाएगी. इससे ट्रैफिक जाम से निजात मिलेगी और ओवर ब्रिज के ट्रैफिक को भी मदद मिलेगी. मूर्ति शिफ्टिंग रास नहीं आयी मूर्ति दूसरी जगह शिफ्ट करना कांग्रेस को पसंद नहीं आया. पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति हटाने का विरोध किया. उनका कहना था कि बीजेपी के नेता क्रांतिकारियों का अपमान कर रहे हैं.बात और विवाद बढ़ा तो बहस होने लगी.पीसी शर्मा के समर्थन में कांग्रेस नेता महेंद्र सिंह चौहान और मनोज शुक्ला सामने आ गए. कांग्रेसियों ने जमकर मौके पर नारेबाजी की. । आपस में काफी देर तक गहमागहमी के बाद मामला शांत हुआ और पीसी शर्मा के साथ दूसरे नेता मौके से रवाना हुए. हालात की नज़ाकत को देखते हुए मौके पर पहले ही काफी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था. अब अर्जुन सिंह की मूर्ति हटेगी मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस पर क्रांतिकारियों का अपमान करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा नानके पेट्रोल पंप चौराहे से चंद्रशेखर आजाद की मूर्ति हटाकर अर्जुन सिंह की मूर्ति लगा दी गई. यह मामला कोर्ट में भी गया था और इसके बाद विवाद खड़ा होने पर कांग्रेस सरकार में इस मूर्ति का अनावरण नहीं हो सका.

किसान आंदोलन : केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट बेहद खफा, कृषि कानूनों पर पर स्टे देने के संकेत

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सरकार से काफी खफा नजर आ रहे हैं। किसान यूनियनों में से एक के वकील दुष्यंत दवे ने सुझाव दिया कि मामले को कल के लिए स्थगित कर दिया जाए। कोर्ट ने अब सरकार और पक्षकारों से कुछ नाम देने को कहा है। इन्‍हें कमेटी में शामिल किया जा सके। कोर्ट ने कहा कि अब कमेटी ही बताएगी कि कानून लोगों के हित में हैं या नहीं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में टुकड़ों मे भी आदेश दे सकता है। इससे पहले सीजेआइ ने कहा कि कोर्ट को ऐसा लगता है केंद्र सरकार इस मुद्दे को सही से संभाल नहीं पा रही है। इसलिए हमें इस बारे में कोई कार्रवाई करनी पड़ेगी। यह बेहद गंभीर मामला है। सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि केंद्र सरकार और किसान संगठनों में हाल ही में मुलाकात हुई, जिसमें तय हुआ है कि चर्चा चलती रहेगी और इसके जरिए ही समाधान निकाला जाएगा। मुख्‍य न्‍यायाधीश ने इसपर नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस तरह से सरकार इस मुद्दे को हल करने की कोशिश कर रही है, हम उससे खुश नहीं हैं। हमें नहीं पता कि आपने कानून पास करने से पहले क्या किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम प्रस्ताव करते हैं कि किसानों के मुद्दों के समाधान के लिए कमिटी बने। हम ये भी प्रस्ताव करते हैं कि कानून के अमल पर रोक लगे। इस पर जिसे दलील पेश करना है कर सकता है। इस पर एटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि अदालत तब तक कानून पर रोक नहीं लगा सकती, जब तक कि यह नहीं पता चलता कि कानून विधायी क्षमता के बिना पारित हो गया है और कानून मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। कोर्ट ने कहा कि आपने (केंद्र) इसे ठीक से नहीं संभाला है, हमें आज कुछ कार्रवाई करनी होगी। इसके बाद CJI ने पूछा कि क्या कुछ समय के लिए कानूनों को लागू करने से रोका नहीं जा सकता है? इस पर सीजेआइ ने कहा कि हम ये नहीं कह रहे किसी भी कानून को तोड़ने वाले को सुरक्षित करेंगे। अगर कोई कानून तोड़ता है, तो उसके खिलाफ कानून के हिसाब से कारवाई होनी चाहिए। हमारा मकसद हिंसा होने से रोकना है। इसके बाद एटॉर्नी जनरल ने कहा कि किसान गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजपथ पर ट्रैक्टर मार्च निकालने की योजना बना चुके हैं। इसका मकसद गणतंत्र दिवस की परेड में खलल डालना है। इससे देश की छवि को नुकसान होगा। हालांकि, किसानों के वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि ऐसा कुछ भी होने नहीं जा रहा है। गणतंत्र दिवस के दिन राजपथ पर कोई ट्रैक्टर नहीं चलेगा। हम किसी भी तरह की हिंसा के पक्ष में नहीं हैं। हमें सिर्फ रामलीला ग्राउंड जाने की अनुमति दी जाए। CJI ने कहा कि इस आंदोलन के दौरन कुछ लोगों ने आत्महत्या भी की है, बूढ़े और महिलाएं प्रदर्शन का हिस्सा हैं। ये आखिर क्या हो रहा है? अभी तक एक भी याचिका दायर नहीं की गई है, जो कहे कि ये कृषि कानून अच्छे हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि हम सरकार से कानून वापस लेने के बारे में नहीं कह रहे हैं। हम सिर्फ इतना जानना चाह रहे हैं कि इसे कैसे संभाल रहे हैं। कानून के अमल पर ज़ोर मत दीजिए। फिर बात शुरू कीजिए। हमने भी रिसर्च किया है। एक कमिटी बनाना चाहते हैं। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को कहा कि 41 किसान संगठन कानून वापसी की मांग कर रहे हैं, वरना आंदोलन जारी करने को कह रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर कुछ गलत हुआ, तो हममें से हर एक जिम्मेदार होगा। हम नहीं चाहते हैं कि हमारे हाथों किसी का खून बहे। चाहिए। सीजेआइ ने कहा कि अगर केंद्र कृषि कानूनों के क्रियान्वयन को रोकना नहीं चाहता है, तो हम इस पर रोक लगाएंगे। कोर्ट ने आंदोलनकारियों के वकील से पूछा कि आप आंदोलन को खत्म नहीं करना चाह रहे हैं, आप इसे जारी रख सकते हैं। इस स्थिति में हम ये जानना चाहते हैं कि अगर कानून रुक जाता है, तो क्या आप आंदोलन की जगह बदलेंगे जब तक रिपोर्ट ना आए या फिर जहां हैं, वहीं पर प्रदर्शन करते रहेंगे? बता दें कि पिछली सुनवाई में शीर्ष अदालत ने कानूनों को कुछ समय के लिए ठंडे बस्ते में डालने का सुझाव दिया था। इसके अलावा सरकार और आंदोलनकारी किसानों के बीच मतभेद दूर करने के लिए समिति बनाने की भी तजबीज पेश की थी। किसान संगठनों और सरकार के बीच हुई बातचीत का अभी तक कोई हल नहीं निकल पाया है। किसान कृषि कानूनों को रद करने की मांग पर अड़े हुए हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी तक बातचीत के जरिए समाधान निकलने की उम्‍मीद नहीं छोड़ी है। 15 जनवरी को किसान संगठनों और सरकार के बीच 9वें दौर की बैठक है। दरअसल, कानून खत्म किए बिना किसान संगठन धरना-प्रदर्शन खत्म करने के लिए तैयार नहीं हैं। सरकार कानूनों में सुधार करने के पक्ष में है, इन्‍हें रद करने के नहीं। यहीं पेंच फंसा हुआ है। आज प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। यह सुनवाई इसलिए और अहम हो जाती है, क्योंकि सरकार और किसान संगठनों के बीच 15 जनवरी को अगले दौर की बातचीत होनी है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान कहा था कि किसानों के प्रदर्शन को खत्म कराने के लिए जमीनी स्तर पर कोई प्रगति नहीं हुई है। जबकि, केंद्र ने अदालत को बताया था कि मामले को सुलझाने के लिए किसानों के साथ उसकी सकारात्मक बातचीत चल रही है। सरकार ने यह भी कहा था कि दोनों पक्षों के बीच जल्द ही सभी मसलों पर आम सहमति बनने की उम्मीद है। इसके बाद ही शीर्ष अदालत ने मामले में सुनवाई 11 जनवरी तक स्थगित कर दी थी।

हरियाणा में प्रदर्शनकारी किसानों पर आंसू गैस के गोले दागे, CM की रैली रद्द

नई दिल्ली। दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसान अब भी केंद्र सरकार से दूरी बनाए हुए हैं। इस बीच, हरियाणा के करनाल में उस समय हंगामा हो गया, जब कैमला गांव में किसानों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल की रैली का विरोध किया। पुलिस ने किसानों को रोका तो दोनों के बीच झड़प शुरू हो गई। हंगामा इस कदर बढ़ा कि किसानों को रोकने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े और वॉटर कैनन भी चलानी पड़ी। दरअसल, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्‌टर करनाल के कैमला गांव में किसान महापंचायत रैली करने वाले हैं। प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। यहां गढ़ी सुल्तान के पास पुलिस ने नाका लगा रखा था। यहां आगे बढ़ रहे किसानों को रोका गया। जब वे नहीं माने तो पुलिस ने लाठियां भी चलाईं। बेकाबू आंदोलनकारी हेलीपैड और रैली स्थल तक पहुंच गए। हेलीपैड को भी तोड़ दिया। प्रदेश भाजपा प्रमुख ओम प्रकाश धनखड़ के साथ बहस भी हुई। खराब मौसम का हवाला देकर मुख्यमंत्री का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है। दिल्ली में किसानों की बैठक दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे किसानों का संयुक्त मोर्चा एक अहम बैठक करेगा। बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। किसान 26 जनवरी की तैयारियों का ऐलान भी कर सकते हैं। वहीं, कल यानी 11 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में कृषि कानूनों को रद्द करने की अर्जी पर सुनवाई होनी है। इससे पहले भी बुधवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि स्थिति में कोई सुधार नहीं है। हम किसानों की हालत समझते हैं।

वाराणसी: छेड़खानी के आरोप में पिटे बीजेपी के पूर्व MLA, कान पकड़कर माफी मांगी

वाराणसी। यूपी के वाराणसी में छेड़खानी के आरोप में बीजेपी के एक पूर्व विधायक को लोगों ने पीटा और कान पकड़कर माफी मंगवाई. इससे जुड़ा वीडियो वायरल हो रहा है. ये मामला वाराणसी के चौबेपुर थाना क्षेत्र के भगतुआ गांव का है. जहां एक इंटर कॉलेज के चेयरमैन और पूर्व बीजेपी विधायक माया शंकर पाठक पर एक छात्रा ने अश्लील हरकत करने का आरोप लगाया. पीड़ित छात्रा के आरोपों की जानकारी मिलते ही उसके परिजन गुस्से में आ गए. परिजनों ने कॉलेज में पूर्व बीजेपी विधायक माया शंकर पाठक की पिटाई कर दी और इसका वीडियो भी बनाया. वाराणसी पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. माया शंकर पाठक वाराणसी में कभी बीजेपी के विधायक हुआ करते थे और अभी एमपी इंस्टीट्यूट एंड कंप्यूटर कॉलेज के नाम से इंटर कॉलेज भगतुआ गांव में चला रहे हैं. बताया जा रहा है कि वीडियो 2 दिनों पहले का है. आरोप है कि पूर्व भाजपा विधायक और स्कूल के चेयरमैन माया शंकर पाठक ने अपने ऑफिस में बुलाकर एक छात्रा के साथ अश्लील हरकत की थी. इसके बाद छात्रा ने घर पहुंचकर आपबीती अपने परिजनों को बताई, गुस्से में आग बबूला परिजन स्कूल पहुंचे और पहले तो माया शंकर पाठक की पिटाई उनके ऑफिस में ही की और फिर बाहर मैदान में कुर्सी पर बिठाकर भी उन्हें पीटा. पिटाई के दौरान पूर्व बीजेपी विधायक बार-बार अपनी गलती के लिए कान पकड़कर माफी भी मांगते दिख रहे हैं. हालांकि दोनों ही पक्षों में से किसी ने इसकी शिकायत पुलिस से नहीं की, लेकिन वीडियो बहुत तेजी से वायरल होने और हाई प्रोफाइल मामला होने के चलते पुलिस ने खुद मामला संज्ञान में लेते हुए इसकी जांच शुरू कर दी है. इस बारे में क्षेत्राधिकारी पिंडरा अभिषेक कुमार पांडे ने बताया कि अभी दोनों ही पक्षों में से किसी ने भी शिकायत नही की है, लेकिन वीडियो की जांच करके सत्यता का पता लगाया जा रहा है और हर संभव कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी. माया शंकर पाठक 1991 में वाराणसी के चिरईगांव विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीते थे.

बीजेपी के वरिष्ठ विधायक अजय विश्नोई ने अब सीधे मुख्यमंत्री शिवराज पर साधा निशाना

जबलपुर। बीजेपी के वरिष्ठ विधायक अजय विश्नोई ने अब सीधे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधा है। विश्नोई ने मंत्रियों को जिलों के प्रभार अब तक नहीं दिए जाने पर तंज कसा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है- प्रदेश के सभी जिलों में अनेक समस्याएं समाधान के लिए प्रभारी मंत्री की बाट जो रहे हैं। कैबिनेट विस्तार के बाद भी विश्नोई का दर्द सोशल मीडिया पर झलका था। लेकिन इस बार उन्होंने मुख्यमंत्री की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार मंत्रियों और मैदानी अफसरों के साथ बैठक कर संदेश दे रहे हैं कि आम आदमी को किसी तरह की परेशानी नहीं होना चाहिए। दूसरी तरफ विश्नोई स्पष्ट सवाल उठा रहे हैं कि जिलों में समस्याएं हैं। विश्नोई ने आगे लिखा- चौथी बार मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने की पहली वर्षगांठ के अवसर पर यह उपहार देने की कृपा करें और वायदे के अनुसार जबलपुर और रीवा का प्रभार स्वयं ग्रहण करें। पहले लिखा था- महाकौशल और विंध्य अब फड़फड़ा सकते हैं उड़ नहीं सकते इससे पहले कैबिनेट विस्तार के अगले दिन 4 जनवरी को भी विश्नोई ने सोशल मीडिया पर लिखा था- महाकौशल के 13 भाजपा विधायकों में से एक को तथा विंध्य में 18 भाजपा विधायकों में से एक को राज्य मंत्री बनने का सौभाग्य मिला है। महाकौशल और विंध्य अब फड़फड़ा सकते हैं उड़ नहीं सकते। महाकौशल और विंध्य को अब खुश रहना होगा… खुशामद करते रहना होगा। उन्होंने आगे लिखा था कि मध्यप्रदेश में सरकार का पूर्ण विस्तार हो गया है। ग्वालियर, चंबल, भोपाल, मालवा क्षेत्र का हर दूसरा भाजपा विधायक मंत्री है। सागर, शहडोल संभाग का हर तीसरा भाजपा विधायक मंत्री है। विश्नोई ने इशारा किया है कि कैबिनेट में जगह देने के मामले में महाकौशल और विंध्य क्षेत्र की उपेक्षा की जा रही है। बता दें कि विश्नोई शिवराज सरकार के पहले कार्यकाल में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं। दूसरे कैबिनेट विस्तार के बाद से इंतजार शिवराज कैबिनेट का दूसरा विस्तार 2 जुलाई 2020 में हुआ था। छह माह बीत जाने के बाद भी मुख्यमंत्री, मंत्रियों को जिलों का प्रभार नहीं दे पाए। शिवराज सिंह ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, इसके एक माह बाद 5 मंत्रियों को 2-2 संभागों का प्रभार सौंपा था। पिछले माह 26-27 दिसंबर को बीजेपी के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव भोपाल प्रवास पर थे, उस दौरान तय हुआ था कि कैबिनेट विस्तार के साथ ही मंत्रियों को जिलों के प्रभार सौंप दिए जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के मंथन के लिए सीएम ने बैठक की थी, तब भी कयास लगाए गए कि अब मंत्रियों के बीच जिलों का बंटवारा हो जाएगा, लेकिन आदेश अब तक जारी नहीं हुआ।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणव द की मोदी को नसीहत, जो असहमत हैं उन्हें भी सुनें

नई दिल्ली . पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत प्रणब मुखर्जी की किताब ‘द प्रेसिडेंशियल इयर्स’ मंगलवार काे बाजार में आ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सलाह देते हुए उन्होंने लिखा कि उन्हें असहमति के स्वर भी सुनना चाहिए। विपक्ष काे राजी करने और देश के सामने अपनी बात रखने के लिए संसद में और ज्यादा बाेलना चाहिए। मोदी की केवल माैजूदगी ही संसद के काम में बहुत बदलाव ला सकती है। प्रणब ने लिखा, ‘पूर्व प्रधानमंत्रियाें- जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी या मनमाेहन सिंह, इन सभी ने संसद में उपस्थिति महसूस कराई है। प्रधानमंत्री माेदी काे अपने दूसरे कार्यकाल में इनसे प्रेरणा लेकर संसद में माैजूदगी बढ़ानी चाहिए।’ किताब के मुताबिक, ‘मोदी सरकार अपने पहले कार्यकाल में संसद को सुचारू रूप से नहीं चला सकी। इसकी वजह उसका अहंकार और अकुशलता है।’ ‘नोटबंदी के बारे में नहीं बताया’ इसी क्रम में आगे लिखा है, ‘मोदी ने 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा की, लेकिन इससे पहले मुझसे (तब प्रणब राष्ट्रपति थे) ही इस मुद्दे पर चर्चा नहीं की। हालांकि, इससे मुझे कोई हैरानी नहीं हुई, क्योंकि ऐसी घोषणा के लिए आकस्मिकता जरूरी है।’ पूर्व राष्ट्रपति ने इस बारे में अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा है, ‘मैं UPA सरकार के समय विपक्ष के साथ लगातार संपर्क में रहता था। संसद चलाने का प्रयास करता था। सदनों में पूरे वक्त माैजूद रहता था।’ ‘नेपाल की भारत में शामिल होने की ख्वाहिश थी’ प्रणब ने एक और चौंकाने वाला दावा किया है। इसके मुताबिक, ‘नेपाल भारत का राज्य बनना चाहता था, लेकिन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने नेपाल के राजा त्रिभुवन बीर बिक्रम शाह के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। इस पर नेहरू की प्रतिक्रिया थी कि नेपाल एक स्वतंत्र राष्ट्र है। उसे हमेशा ऐसे ही रहना चाहिए।’ प्रणब आगे लिखते हैं, ‘अगर पंडित नेहरू की जगह इंदिरा गांधी होतीं, तो शायद वे अवसर का फायदा उठातीं, जैसा उन्होंने सिक्किम के साथ किया।’ उनकी इस किताब में देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली के बारे में भी तमाम बातें हैं। ‘कांग्रेस जान नहीं पाई कि करिश्माई नेतृत्व खत्म हो चुका’ प्रणब के मुताबिक, ‘मुझे लगता है कि मेरे राष्ट्रपति बनने के बाद कांग्रेस ने पॉलिटिकल फोकस खो दिया। पार्टी ये पहचान नहीं पाई कि उसका करिश्माई नेतृत्व खत्म हो चुका है। यही 2014 के लोकसभा में उसकी हार के कारणों में से एक रहा होगा। उन नतीजों से मुझे यह राहत मिली कि निर्णायक जनादेश आया। लेकिन मेरी पार्टी रही कांग्रेस के प्रदर्शन से निराशा हुई।’

एमपी अजब है एमपी गजब है ….. स्वास्थ्य मंत्री ने 1000 डॉक्टर को दरकिनार कर अपनी पत्नी का किया प्रमोशन

भोपाल . स्वास्थ्य विभाग में पदोन्नति में परिवारवाद का मामला सामने आया है। मंगलवार को स्वास्थ्य संचालनालय से एक आदेश जारी हुआ। इसमें बताया गया कि भोपाल की जिला स्वास्थ्य अधिकारी नीरा चौधरी को क्षेत्रीय कार्यालय में संयुक्त संचालक बनाया गया है। बता दें कि नीरा चौधरी प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी की पत्नी हैं और उन्हें पदोन्नत कर जो पद दिया गया है, वरिष्ठता सूची के आधार पर उस पद के लिए नीरा से पहले 1000 अन्य डॉक्टर दावेदार थे। स्वास्थ्य विभाग ने 2017 में प्रथम श्रेणी डॉक्टराें की अंतिम वरिष्ठता सूची जारी की थी। इसमें 1042 डॉक्टरों के नाम थे, लेकिन नीरा का नाम नहीं था। नीरा की नई नियुक्ति से डॉक्टरों में भी नाराजगी है। इस मामले में जब स्वास्थ्य मंत्री से संपर्क किया गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से मना कर दिया। 34 जिलों में सीनियर को दरकिनार कर जूनियर को बनाया सीएमएचओ प्रदेश के 52 जिलों में से 34 ऐसे जिलें है, जहां पिछले एक साल में सीनियर डाॅक्टरों के बजाय जूनियर को सीएमएचओ बनाया गया है। इनमें शाजापुर में डाॅ. राजू निदारिया को सीएमएचओ बनाया गया है, जबकि वहां उनसे सीनियर तीन अन्य डाॅक्टर एसडी जायसवाल, सुनील सोनी और आलोक सक्सेना पदस्थ हैं। खरगोन में रजनी डाबर को सीएमएचओ बनाया गया है, जबकि वहां एसएस चौहान, विजय फूलोरिया, राजेंद्र जोशी, डाॅ. कानूनगो, वंदना कानूनगो, इंदिरा गुप्ता और संजय भट्‌ट सीनियर हैं। बड़वानी में डॉ. अनिता सिंगारे को सीएमएचओ बनाया है, जबकि वहां तीन डाॅक्टर उनसे सीनियर हैं। इसी तरह रतलाम में डाॅ प्रभाकर नानावरे से 6 डाॅक्टर सीनियर हैं। धार, छतरपुर, दमोह, कटनी, रीवा, शहडोल समेत अन्य जिलों में पदस्थ सीएमएचओ से वरिष्ठ चिकित्सक पदस्थ हैं। इसी तरह अन्य जिलों में भी यही स्थिति हैं। वरिष्ठता क्रम में दो पद पीछे थीं नीरा नियमानुसार संयुक्त संचालक पद पर सिर्फ प्रथम श्रेणी अधिकारी को ही पदस्थ किया जा सकता है। इनमें वरिष्ठता क्रम में उप संचालक और उससे नीचे मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमएचओ) आते हैं। नीरा जिला स्वास्थ्य अधिकारी थीं और अकेले भोपाल में ही 70 से ज्यादा प्रथम श्रेणी डॉक्टर हैं। ये सभी डिप्टी डायरेक्टर पद पर हैं। इनमें अर्चना मिश्रा, प्रज्ञा तिवारी, दुर्गेश गौर, दिलीप हेड़ाऊ, हिमांशु जायसवाल, मनीष सिंह, राजीव श्रीवास्तव, अलका परगनिया, पद्माकर त्रिपाठी, इंद्रजीत सिकरवार और वीरेंद्र गौर समेत अन्य चिकित्सकों के नाम हैं। ये सभी पिछले 15 साल से संचालनालय में प्रशासनिक पदों पर हैं और ट्रांसफर की वजह से पदोन्नति नहीं चाहते हैं।

ताजमहल में शिव चालीसा पाठ कर रहे 4 युवकों ने भगवा झंडा लहराया

आगरा। आगरा में ताजमहल के अंदर भगवा झंडा लहराने और शिव चालीसा का पाठ करने का मामला सामने आया है। मामले में हिंदू जागरण मंच के जिलाध्यक्ष और उसके साथ तीन युवकों को गिरफ्तार किया गया है। CISF ने धार्मिक भावनाओं को भड़काने का केस दर्ज कराया है। 4 जनवरी को चार युवक गौरव ठाकुर, सोनू बघेल, ऋषि लवानिया और विष्णु कुमार ताजमहल के अंदर पहुंचे। उन्होंने भगवा झंडा लहराया, शिव चालीसा का पाठ भी किया और वीडियो भी बनाया। सोशल मीडिया पर किया पोस्ट आरोपियों ने ताजमहल से ही वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया। जानकारी मिलने के बाद CISF के जवानों ने उन्हें पकड़ लिया और ताजगंज थाना पुलिस को सौंप दिया। वहीं, थानाप्रभारी उमेश चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि पूछताछ में एक आरोपी गौरव ठाकुर ने बताया कि उन लोगों ने दूसरी बार ताज परिसर के अंदर भगवा झंडा लहराया है। इसके पहले अक्टूबर में दशहरे के दिन लहराया था। अक्टूबर में विजयादशमी के दिन भी गौरव ठाकुर ने ताजमहल परिसर में भगवा झंडा लहराकर शिव चालीसा का पाठ किया था। तब भी CISF जवानों ने गौरव को पकड़ लिया था। हालांकि, पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया था। उस दौरान गौरव ने कहा था कि यह शिव मंदिर तेजोमहालय है, इसलिए शिव चालीसा का पाठ कर भगवा ध्वज फहराया। ताजमहल में भगवा ध्वज लहराने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व अब तक 5 बार हिंदू संगठनों ने भगवा ध्वज लहराया। पिछले साथ एक महिला ने ताजमहल में प्रवेश में कर पूजा-अर्चना करने का दावा किया था।

MP : कमलनाथ ने बैठक बताया निकाय चुनाव में टिकट देने का फॉर्मूला

भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि नगरीय निकाय चुनाव में घरेलू महिलाओं और राजनीति से दूर नेताओं की पत्नियों को टिकट नहीं दिया जाएगा। उन्हीं महिलाओं को टिकट में प्राथमिकता मिलेगी जो समाज में, राजनीति में मैदानी स्तर पर सक्रिय होगीं। कमलनाथ ने यह ऐलान अपने निवास पर बुलाई गई नगरीय निकाय चुनाव के प्रभारियों-सह प्रभारियों की बैठक में किया। उन्होंने प्रभारियों को निर्देश दिया कि अपने-अपने क्षेत्रों में निष्पक्ष तरीके से योग्य उम्मीदवारों का चयन करें और योग्य उम्मीदवारों के नाम प्रदेश कांग्रेस कमेटी को तय समय सीमा में सौंपें। कांग्रेस की पेठ वार्ड स्तर व पंचायत स्तर तक है। उन्होंने कहा कि वार्ड के परिणाम यदि अच्छे होंगे तो महापौर व अध्यक्षों के परिणाम भी अच्छे मिलेंगे। इसीलिए हमें वार्ड स्तर तक पार्टी की जीत के लिए कार्य करना है। कमलनाथ ने कहा कि आज की राजनीति व समय परिवर्तित हो चुका है, जिसने परिवर्तन को अपना लिया वही सफल।अब वह समय गया कि जब एक व्यक्ति हजारों मतदाताओं को किसी एक के पक्ष में करने की गारंटी ले लिया करता था। आज तो वह समय है, जिसमें एक व्यक्ति अपने घर के व घर के आसपास के वोटों की भी गारंटी नहीं ले सकता है। नगरीय निकाय चुनाव को छोटा चुनाव ना समझें। इसे हल्के में ना लें, इसे बेहद गंभीरता से लें। यह चुनाव विधानसभा चुनाव का आधार है। किसान आंदोलन का समर्थन, 20 जनवरी को सम्मेलन इस अवसर पर कमलनाथ ने दिल्ली की सीमा पर पिछले 40 दिन से चल रहे किसान आंदोलन व तीन नए किसान विरोधी कानूनों के बारे में अवगत कराते हुए कहा कि 20 जनवरी को किसानों के समर्थन में व काले कानूनों के विरोध में भोपाल में बड़ा किसान सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। बैठक के पूर्व दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसान आंदोलन के दौरान 60 किसानों की मौत पर 2 मिनिट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।

मंत्रियों से सीएम शिवराज बोले – कार्य ऐसा हो कि एक साल बाद लोग मध्य प्रदेश को दें बधाई

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज भोपाल के पास कोलार वन विश्राम गृह में मंत्रिपरिषद के सदस्यों के साथ प्रदेश का विकास के संबंध में विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के नागरिकों के कल्याण के लिए ऐसा कार्य हो कि 1 वर्ष पश्चात मध्य प्रदेश को बधाइयां मिलें। उन्होंने आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के निर्माण के लिए विभाग वार एक्सरसाइज कर अच्छे कार्यों को संपादित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते 9-10 माह में प्रदेश के विकास प्रदेश की तस्वीर बदलने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। आम जनता से भी सरकार के अनेक कार्यों के प्रति समर्थन प्रतिक्रिया मिली है। माफिया के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई और नशे से युवा वर्ग को बचाने के ठोस प्रयासों का अच्छा संदेश गया है । मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि जब मार्च के आखिरी सप्ताह में सरकार बनी तब कोरोना की बड़ी चुनौती सामने थी ।इससे नागरिकों को बचाने का कार्य तत्परता से किया गया ।प्रभावी कदम उठाए गए। वायरस के नियंत्रण के साथ ही सबसे पहले मध्य प्रदेश में आत्म निर्भर मध्य प्रदेश का रोड मैप बनाया गया। आत्मनिर्भर भारत की लक्ष्य प्राप्ति में मध्य प्रदेश ने पहले पहल बनाया रोडमेप मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे ही प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत की बात कही उनके चिंतन की प्रक्रिया शुरू हो गई। आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के लिए ठोस पहल की गई। सभी मंत्रियों, अर्थशास्त्रियों, नीति आयोग के पदाधिकारियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने विचार मंथन कर मध्य प्रदेश रोड मैप की तैयारी की।प्रयास सार्थक हुए ।मध्य प्रदेश सबसे पहले यह रोड मैप बनाने में सफल हुआ। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि अर्थव्यवस्था, रोजगार सुशासन ,स्वास्थ्य एवं शिक्षा के मुद्दों पर रोड मैप में विस्तार से कार्य का निर्धारण किया गया है। राजस्व बढ़ाने का कार्य तेज हो प्रदेश में अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए अच्छी राजस्व वसूली का कार्य कुछ प्रयासों से ही संभव है।इस दिशा में अच्छी उपलब्धि मिल रही है। विशेषकर जीएसटी कलेक्शन में मध्य प्रदेश अन्य राज्यों से आगे है। राजस्व वृद्धि के प्रयास तेज किए जाएं। मिली हैं उपलब्धियां मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की बात हो या ग्रामीण विकास के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों की सक्रियता, मध्यप्रदेश ने कुछ कार्यों में रिकॉर्ड बनाया है। देश में सबसे अधिक गेहूं उपार्जन किए जाने के बाद किसानों के खातों में राशि पहुंचाने का कार्य हुआ। प्रदेश में दो एक्सप्रेस वे प्रगति पर हैं।भोपाल के ग्लोबल स्किल पार्क से व्यापक पैमाने पर रोजगार की संभावनाओं को साकार किया जाएगा। बफर में सफर शुरू हो चुका है। जाति प्रमाण पत्र ,आय प्रमाण पत्र तत्काल देने की व्यवस्था, किसानों को बिना चक्कर लगाए विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करने का कार्य प्रदेश में बखूबी किया जा रहा है ।इसे और गति देना है। पत्थर बाजी पर प्रतिबंध के लिए कड़ा कानून बनाया जा रहा।धर्म स्वातंत्र्य कानून की प्रशंसा हुई है।अन्य नवाचार भी किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश बने उदाहरण मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मंत्री गण चिंतन कर विभाग की योजनाओं को तेजी से क्रियान्वित करवाएं। क्षमता का पूरा उपयोग कर बेहतर परिणाम दे सकते हैं। प्रयास होना चाहिए कि आने वाले 1 वर्ष में हम बहुत सी उपलब्धियां अर्जित कर लें और सभी राज्य मप्र की बधाई दें। हम ऐसी स्थिति में आ जाएं कि मध्य प्रदेश अग्रणी स्थिति में आकर एक उदाहरण माना जाए।मुख्यमंत्री श्री चौहान ने विकास के विभिन्न क्षेत्रों में श्रेष्ठ परिणाम लाने की अपेक्षा की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने रेत उत्खनन के संबंध में लागू की जा रही नई व्यवस्था की भी जानकारी दी जिससे राजस्व आय बढ़ेगी साथ ही अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा। नव चिंतन कर कार्य योजना पर अमल हो मुख्यमंत्री ने प्रारंभ में सभी मंत्री गण को नववर्ष की बधाई दी और नवचिंतन के साथ नवीन कल्पनाओं को साकार कर मध्य प्रदेश को समृद्ध बनाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की उम्मीद की।

किसान आंदोलन में अब तक 54 मौतें, 4 और किसानों की जान गई

नई दिल्ली। किसान कृषि कानूनों के खिलाफ 39 दिन से आंदोलन कर रहे हैं। इस आंदोलन के दौरान अब तक 54 किसानों की मौत हो चुकी है। इनमें से कुछ ने सुसाइड कर लिया और कइयों की जान बीमारियों, ठंड और हार्ट अटैक के चलते गई है। सिंघु और टीकरी बॉर्डर पर रविवार को 4 किसानों की मौत हो गई। इनमें से दो हरियाणा और दो पंजाब के रहने वाले थे। मौत की वजह हार्ट अटैक बताई जा रही है। एक अन्य किसान की हालत गंभीर है, जिसे रोहतक के PGI रेफर किया गया है। किसी की बॉडी ट्राली में तो किसी की टेंट में मिली जानकारी के मुताबिक, बहादुरगढ़ के करीब टीकरी बॉर्डर पर धरना दे रहे बठिंडा के 18 साल के जश्नप्रीत सिंह की शनिवार देर रात अचानक तबीयत बिगड़ गई। उसे सिविल अस्पताल और फिर PGI ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हरियाणा के जींद के जगबीर का शव ट्राली में मिला। वो भी टीकरी बॉर्डर पर ही धरना दे रहे थे। उनकी उम्र 66 साल थी। सिंघु बॉर्डर पर सोनीपत के बलवीर सिंह और पंजाब के लिदवां निवासी निर्भय सिंह शनिवार रात को पार्कर मॉल के टेंट में सोए थे। सुबह जब साथियों ने जगाने की कोशिश की, तो उनके शरीर में कोई हलचल नहीं हुई। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने दोनों मृत घोषित कर दिया। इसके अलावा एक अन्य किसान को हार्ट अटैक आया है। उनकी हालत गंभीर होने के चलते उन्हें PGI रेफर किया गया है। 39 दिन में 54 मौतों के बाद उठी मुआवजे की मांग 26 नवंबर से दिल्ली बॉर्डर पर हजारों की तादाद में किसान धरना दे रहे हैं। इस दौरान 54 किसानों की जान जा चुकी है। परिवार और किसान संगठन इन किसानों के परिवारों को मुआवजा और नौकरी देने की मांग कर रहे हैं। मौसम ने मुश्किल बढ़ाई, तंबुओं में पानी भरा दिल्ली और NCR के इलाके में शनिवार सुबह से रह-रहकर बारिश जारी है। रविवार को दूसरे दिन बारिश के बाद ठंड बढ़ती जा रही है। बारिश की वजह से कई किसानों के टेंट में पानी घुस गया, लेकिन किसान अपने मोर्चे पर डटे हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक मांगें नहीं मानी जाती हैं, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें… 7वें दौर की बातचीत में 2 मांगों पर सहमति बनी किसान संगठनों और केंद्र के बीच 4 जनवरी को 8वें दौर की बातचीत होनी है। किसानों के 4 बड़े मुद्दे हैं। पहला- सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस ले। दूसरा- सरकार यह लीगल गारंटी दे कि वह मिनिमम सपोर्ट प्राइस यानी MSP जारी रखेगी। तीसरा- बिजली बिल वापस लिया जाएगा। चौथा- पराली जलाने पर सजा का प्रावधान वापस लिया जाए। 30 दिसंबर को 7वें दौर की बातचीत पांच घंटे की बातचीत के बाद बिजली बिल और पराली से जुड़े दो मुद्दों पर सहमति बन गई थी। सरकार किसानों की चिंताओं को दूर करने पर राजी है। इसके बाद किसान नेताओं ने भी नरमी दिखाई। कृषि कानून और MSP पर अभी भी मतभेद बरकरार हैं।

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