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नायब सिंह सैनी का ही मुख्यमंत्री बनना तय, बनेगा एक दलित डेप्युटी सीएम

नई दिल्ली  हरियाणा में बीजेपी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। बुधवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के सीनियर नेताओं से मुलाकात की। पार्टी के हरियाणा अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने कहा कि सैनी और उनकी पार्टी के सीनियर नेताओं से मुलाकात शिष्टाचार मुलाकात है। सरकार बनाने को लेकर दशहरे के बाद बात होगी। मुख्यमंत्री और शपथ ग्रहण के साथ ही मंत्रिमंडल को लेकर तभी बात होगी। उधर, सैनी ने कहा कि केंद्रीय पर्यवेक्षक जल्द ही राज्य का दौरा करेंगे और विधायक दल के नेता का चयन करेंगे। इसके बाद संसदीय बोर्ड फैसला लेगा कि कौन सीएम होगा। क्या बनेगा दलित डेप्युटी सीएम? नायब सिंह सैनी का ही मुख्यमंत्री बनना तय माना जा रहा है। बीजेपी ने चुनाव सैनी को ही सामने रखकर लड़ा था। लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने मनोहर लाल खट्टर की जगह सैनी को मुख्यमंत्री बनाया था। मंगलवार को हरियाणा जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया था तब भी खट्टर और सैनी का जिक्र किया था। चर्चा चल रही है कि बीजेपी हरियाणा में डेप्युटी सीएम भी बना सकती है। बीजेपी सर्कल में यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी दो डिप्टी सीएम बना सकती है और एक डेप्युटी सीएम दलित समाज से होगा। 2019 में दुष्यंत चौटाला का बनाना पड़ा था डेप्युटी सीएम 2014 में जब पहली बार बीजेपी हरियाणा में सत्ता में आई थी तब कोई डेप्युटी सीएम नहीं बनाया था। 2019 में जब जेजीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई तब जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला को डेप्युटी सीएम बनाया था। हरियाणा में मुख्यमंत्री समेत कुल 14 मंत्री हो सकते हैं। पिछली सरकार के 8 मंत्री चुनाव हार चुके हैं। 3 मंत्रियों को इस बार टिकट ही नहीं मिला था और दो मंत्री चुनाव नहीं जीत पाए। पीएम से मिले सैनी नायब सिंह सैनी बुधवार को दिल्ली पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मोदी ने सैनी को बीजेपी की जीत के लिए बधाई दी और विश्वास जताया कि विकसित भारत के संकल्प में हरियाणा की भूमिका और अहम होने जा रही है। सैनी ने प्रधानमंत्री मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा से भी मुलाकात की। मोदी ने सोशल मीडिया मंच X पर मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए पोस्ट किया, ‘हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जी से मिला और विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली ऐतिहासिक जीत के लिए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुझे विश्वास है कि विकसित भारत के संकल्प में हरियाणा की भूमिका और अहम होने जा रही है।’ नायब सैनी ने जीत का श्रेय़ पीएम मोदी की नीतियों को दिया प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सैनी ने पार्टी की सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों को दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव विश्लेषकों ने भले ही कांग्रेस के चुनाव जीतने की संभावनाओं का दावा किया हो लेकिन उन्होंने हमेशा जोर दिया कि लोग बीजेपी सरकार की नीतियों के कारण उस पर भरोसा करेंगे। EVM पर कांग्रेस की ओर से संदेह जताए जाने के मसले पर उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टी झूठ का बवंडर खड़ा कर रही है।

हरियाणा-जम्मू में चला योगी का जादू, जहां-जहां किया प्रचार, खिल गया कमल

चंडीगढ़  हरियाणा विधानसभा चुनाव के कुछ महीनों पहले तक दुष्यंत डिप्टी सीएम पद पर काबिज थे, लेकिन भाजपा में हुई हलचल ने सारे समीकरण बदल दिए। जेजेपी और भाजपा का गठबंधन टूटा। इसके बाद उनकी पार्टी के कई विधायक भी टूट गए। उनकी वापसी की उम्मीद कहे जा रहे 2024 विधानसभा चुनाव भी बड़ा जेजेपी और दुष्यंत के लिए बड़े झटके की तरह रहे। हरियाणा की उचाना कलां सीट से मैदान में उतरे दुष्यंत 5वें स्थान पर रहे। उन्हें 5 फीसदी से भी कम वोट मिले। वह दल के उन नेताओं में शामिल थे, जिनकी जमानत जब्त हो गई थी। सीट पर भाजपा के देवेंद्र चतुर्भुज अत्तरी ने महज 32 वोट के अंतर से कांग्रेस के बृजेंद्र सिंह को हराया है। दुष्यंत इस सीट पर दो निर्दलीय उम्मीदवारों विकास और वीरेंद्र घोघारियां से भी पिछड़ गए। उन्होंने सीट 41 हजार से ज्यादा वोट से गंवाई।विधानसभा चुनाव में जेजेपी का एक भी उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सका। यहां तक कि पार्टी का वोट शेयर भी 15 प्रतिशत से घटकर 1 फीसदी से भी कम पर आ गया था। दुष्यंत पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला के पोते और पूर्व उप प्रधानमंत्री देवी लाल के परपोता हैं। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री देवी लाल, बंसी लाल और भजन लाल के परिवार के सदस्य जीतने में कामयाब रहे। पूर्व सीएम भजन लाल के बेटे चंद्र मोहन पंचकूला से जीते, पूर्व उप प्रधानमंत्री देवी लाल के पोते आदित्य देवी लाल डबवाली से जीते, अर्जुन चौटाला रनिया से विजयी रहे। पूर्व सीएम बंसी लाल की परपोती श्रुति चौधरी तोषाम से जीतीं। हालांकि, भजन लाल के परिवार से भव्य बिश्नोई बड़ा झटका साबित हुआ। शुरुआती राउंड्स में आदमपुर सीट से आगे चल रहे भव्य को हार का सामना करना पड़ा। खास बात है कि आदमपुर सीट पर 50 सालों से ज्यादा समय तक भजन लाल परिवार का कब्जा रहा। हरियाणा-जम्मू में चला योगी का जादू, जहां-जहां किया प्रचार, खिल गया कमल  यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता ने हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में हालिया विधानसभा चुनावों में भी अपना प्रभाव दिखाया है। उनकी रैलियों की मांग हमेशा बनी रही और उम्मीदवारों के बीच उनकी उपस्थिति जीत की पक्की गारंटी मानी जाती है। योगी ने हरियाणा में 14 रैलियां और जम्मू में 4 रैलियां की थी। जम्मू में उन्होंने जिन विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार किया, वहां बीजेपी ने जीत हासिल की। हरियाणा में भी एंटी-इन्कंबेंसी माहौल के बावजूद योगी की रैलियों ने बीजेपी को 14 में से 9 सीटें जीतने में मदद की। क्योंकि पार्टी को पिछले दस सालों में सत्ता के खिलाफ जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ा था। योगी की रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ और उनका बोलने का अंदाज चुनावी नतीजों में सीधे तौर पर परिवर्तित होता है। उनकी लोकप्रियता के चलते बीजेपी ने दोनों राज्यों में उनकी रैलियों को एक प्रमुख रणनीति का हिस्सा बनाया था। इन चुनावों के परिणाम ने यह साबित कर दिया कि सीएम योगी, पीएम मोदी के बाद, बीजेपी के सबसे लोकप्रिय चेहरे हैं। उनके प्रभावी प्रचार से न केवल बीजेपी की स्थिति मजबूत हुई, बल्कि उन्होंने पार्टी की जीत तय करने में भी अहम भूमिका निभाई है। इस प्रकार योगी की रैलियों की सफलता ने साबित किया है कि उनकी रणनीतियां अन्य राज्यों के चुनावों में भी बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं।    

केजरीवाल आज मेहराज मलिक के साथ ‘धन्यवाद रैली’ को संबोधित करेंगे

नई दिल्ली  आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज  गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के डोडा में धन्यवाद रैली को संबोधित करेंगे। डोडा विधानसभा सीट पर आम आदमी पार्टी के मेहराज मलिक ने भाजपा के गजय सिंह राणा को चार हजार से अधिक मतों से हार का मुंह दिखाकर जीत का परचम लहराया है। केजरीवाल मेहराज मलिक के साथ इस रैली को संबोधित करेंगे। आम आदमी पार्टी द्वारा जम्मू-कश्मीर में खाता खोलना राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। ‘आप’ के लिए जम्मू-कश्मीर पांचवा ऐसा राज्य है, जहां यह पार्टी जीत का परचम लहराने में सफल हुई है। इससे पहले आम आदमी पार्टी दिल्ली के अलावा पंजाब, गुजरात और गोवा में भी अपने प्रत्याशियों को उतारकर जीत का परचम लहरा चुकी है। पार्टी अब धीरे-धीरे देशभर में अपनी सियासी जमीन को दुरूस्त करने में जुटी है। अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर मेहराज मलिक को जीत की बधाई। उन्हेंने कहा, “डोडा विधानसभा सीट से आप उम्मीदवार मेहराज मलिक को बीजेपी को हराने के लिए बधाई। आपने अच्छा चुनाव लड़ा।” मेहराज मलिक ने अपनी इस जीत को जनता की जीत बताया। उन्होंने कहा कि हमने सभी सीटों पर चुनाव न लड़कर बड़ी गलती कर दी। अगर हम सभी सीटों पर चुनाव लड़ते, तो निश्चित तौर पर और सीटों पर जीत का परचम लहराने में सफल होते। हमारी पार्टी हमेशा से ही जनता के हितों को तवज्जो देती हुई आई है और यह उसी का नतीजा है कि आज हम जम्मू-कश्मीर में भी अपना खाता खोलने में सफल हुए हैं। उन्होंने कहा, “जो लोग भ्रष्ट हैं, लूटपाट करते हैं, लोगों के हितों पर कुठाराघात करते हैं, मुझे लगता है कि अब ऐसे लोगों का समय समाप्त हो चुका है। ऐसे लोगों को रुक जाना चाहिए। ऐसे लोगों को जनता ने आईना दिखाकर लोकतंत्र की ताकत का एहसास दिला दिया है। घाटी की जनता ने इन लोगों को बता दिया है कि लोकतंत्र में कुछ भी मुमकिन है। इसके अलावा, जो लोग लोकतंत्र के सिद्धांतों पर कुठाराघात कर रहे हैं, ऐसे लोगों को ब्रेक ले लेना चाहिए।” वहीं, बात अगर जम्मू-कश्मीर के चुनावी नतीजों की करें, तो नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के गठबंधन ने मिलकर 49 सीटों पर जीत का परचम लहराया है, जबकि बीजेपी 29 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही है। उधर, पीडीपी की बात करें, तो यह महज ती तीनों सीटों पर ही जीत दर्ज करने में सफल रही है। उधर, भाजपा की बात करें, तो यह 29 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही है, लेकिन वो इस जीत को अपने लिए अहम मान रही है। भाजपा का दावा है कि जम्मू-कश्मीर में हुए सफलतापूर्वक चुनाव लोकतंत्र की जीत है।  

बहुजन समाज के आत्म सम्मान की ‘सच्ची मंजिल’ है बसपा : मायावती

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) को बहुजन समाज के आत्म सम्मान और स्वाभिमान के आंदोलन की राह में बाधा करार देते हुए दावा किया कि बसपा ही उनकी ‘सच्ची मंजिल’ है जो उन्हें ‘शासक वर्ग’ का हिस्सा बनाने के लिए संघर्ष कर रही है। मायावती ने बसपा संस्थापक कांशीराम के 18वें परिनिर्वाण दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट किया। उन्होंने कहा, ‘‘बामसेफ, डीएस4 व बसपा के जन्मदाता एवं संस्थापक बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम जी को आज उनके परिनिर्वाण दिवस पर शत-शत नमन व अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित तथा उत्तर प्रदेश एवं देश भर में उन्हें विभिन्न रूपों में श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले पार्टी के सभी लोगों व अनुयाइयों का तहेदिल से आभार।’’ बसपा प्रमुख ने विरोधी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘गांधीवादी कांग्रेस व आरएसएसवादी (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) भाजपा व सपा आदि उनकी (बहुजन समाज) हितैषी नहीं बल्कि उनके आत्म-सम्मान व स्वाभिमान आंदोलन की राह में बाधा हैं, जबकि अम्बेडकरवादी बसपा उनकी सही-सच्ची मंजिल है, जो उन्हें मांगने वालों से देने वाला शासक वर्ग बनाने के लिए संघर्षरत है। यही आज के दिन का संदेश है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘देश में करोड़ों लोगों के लिए गरीबी, बेरोजगारी व जातिवादी द्वेष, अन्याय-अत्याचार का लगातार तंग व लाचार जीवन जीने को मजबूर होने से यह साबित है कि सत्ता पर अधिकतर समय काबिज रहने वाली कांग्रेस व भाजपा आदि की सरकारें न तो सही से संविधानवादी रही हैं और न ही उस नाते सच्ची देशभक्त हैं।’’  भाजपा की हार सुनिश्चित करने के लिए जाटों ने कांग्रेस को वोट दिया, लेकिन बसपा को छोड़ दिया : मायावती  बसपा नेता मायावती ने  इस बात पर अफसोस जताया कि हरियाणा में जाट समुदाय ने विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को वोट नहीं दिया। उन्हें लगता है कि दलितों के बारे में उनकी (जाटों की) मानसिकता बदलने की जरूरत है। पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि मनाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में आईं मायावती ने इस बात पर अफसोस जताया कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के साथ गठबंधन उनकी पार्टी के लिए लाभदायक नहीं रहा। मायावती ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने और उसे सत्ता से बाहर रखने के लिए हरियाणा में जाट समुदाय ने कांग्रेस को वोट दिया, लेकिन इस प्रक्रिया में उन्होंने बसपा को छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि दलित वोट जहां इनेलो की ओर चले गए, वहीं जाटों के मत उनकी पार्टी को नहीं मिले। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “बसपा उम्मीदवारों को केवल दलित वोट मिले। अगर हमें दो से तीन प्रतिशत जाट वोट भी मिल जाते तो हम कुछ सीटें जीत सकते थे।” उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में दलितों के प्रति जाट समुदाय की मानसिकता में बदलाव आया है, लेकिन हरियाणा में ऐसा होना अभी बाकी है। इनेलो ने राज्य में दो सीटें जीतीं, जबकि बसपा को एक भी सीट नहीं मिली। सत्ता विरोधी लहर के बावजूद सत्तारूढ़ भाजपा ने हरियाणा में जीत की हैट्रिक लगाई और सत्ता बरकरार रखी तथा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की वापसी की कोशिशों को विफल कर दिया। भाजपा ने 48 सीटें जीतकर अपनी अब तक की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि हासिल की। उसकी सीटों का आंकड़ा कांग्रेस से 11 अधिक था, जबकि जननायक जनता पार्टी (जजपा) और आम आदमी पार्टी जैसे दलों का सफाया हो गया और इनेलो को सिर्फ दो सीटें ही मिल पाईं। आप ने अकेले चुनाव लड़ा था। अगले वर्ष फरवरी में दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए मायावती ने उम्मीद जताई कि उनकी पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ आप, भाजपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला बसपा को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगा। मायावती ने स्वीकार किया कि उत्तर प्रदेश से इतर अन्य राज्यों में बसपा को प्रत्यक्ष मुकाबलों में नुकसान उठाना पड़ता है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बसपा अगले महीने महाराष्ट्र और झारखंड में होने वाले चुनाव भी लड़ेगी।  

जम्मू कश्मीर में भी नेशनल कांफ्रेंस के गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन कांग्रेस पार्टी अकेले अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई : रविंद्र शर्मा

नई दिल्ली हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में हुए विधानसभा चुनावों में हर एग्जिट पोल को धता बताते हुए भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया। साथ ही कांग्रेस पार्टी दोनों ही राज्यों में उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाई। जम्मू कश्मीर में भी नेशनल कांफ्रेंस के गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन कांग्रेस पार्टी अकेले अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। जम्मू कश्मीर की 90 सीटों में से कांग्रेस 6 सीटें ही जीत पाई, जबकि नेशनल कांफ्रेंस की 42 सीटों को मिलाकर गठबंधन ने 48 सीटों पर जीत दर्ज की। राज्य में गठबंधन के मिली जीत के बाद कांग्रेस और एनसी सरकार बनाने की प्रक्रिया में हैं। राज्य में सरकार के गठन पर कांग्रेस प्रवक्ता रविंद्र शर्मा ने जानकारी दी। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह तो स्पष्ट है कि सरकार बनाने की प्रक्रिया चल रही है, और सरकार को शपथ दिलाई जाएगी। जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्‍य का दर्जा द‍िलाने के ल‍िए प्रयास जारी रहेगा। हम प्रयास तब तक करते रहेंगे, जब तक जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा मिल नहीं जाता।” उन्होंने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग करते हुए कहा, “ यह जम्मू-कश्मीर की जनता का अधिकार है और वो राज्‍य व केंद्र सरकार से अपना अधिकार मांगें। कांग्रेस ने भी कहा है कि यहां सुरक्षा का होना जरूरी है। यह महत्वपूर्ण है कि जम्मू-कश्मीर के लोग अपनी जमीन और नौकरियों के अधिकार सुरक्षित रखें। कांग्रेस पार्टी का मानना है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को उनकी संपत्ति की रक्षा के लिए एक संवैधानिक गारंटी होनी चाहिए। र‍व‍िंद्र शर्मा ने कहा क‍ि कांग्रेस ने कश्मीर में अच्छा प्रदर्शन किया है, जहां हमने आठ में से पांच सीटें जीती हैं, लेक‍िन जम्मू में स्थिति थोड़ी अलग रही है। प्रशासन और भाजपा ने चुनाव में दुरुपयोग किया है, इसकी कई शिकायतें मिली हैं। हमें यह देखना होगा कि क्या हमारे भीतर भी कोई कमी थी।” उन्होंने कहा, “आपको लगता है कि भाजपा की इतनी बड़ी जीत जम्मू में हुई है, जबकि हमें तो ऐसा नहीं लग रहा था। चुनावी माहौल ऐसा था कि लोग बदलाव चाहते थे, लेकिन परिणाम कुछ और ही दिखा रहे हैं। हम इस पर चर्चा करेंगे और फीडबैक लेंगे। मेरा मानना है कि कुछ न कुछ गड़बड़ तो जरूर है। लोग कांग्रेस के साथ थे, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अवैध गतिविधियों को नहीं रोका गया। इसलिए हमें यह देखना होगा कि क्या वजह थी और क्यों ऐसा हुआ। जनता की आवाज़ सुननी होगी और उन पर ध्यान देना होगा।”

हरियाणा को इस बार 13 महिला विधायक मिलीं, पांच महिला विधायक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से और सात कांग्रेस से हैं

चंडीगढ़ हरियाणा में 90 सदस्यीय विधानसभा में इस बार 13 महिला प्रत्याशी निर्वाचित हुई हैं। राज्य के लिए घोषित किए गए चुनावी नतीजों से यह जानकारी मिली है। हरियाणा में 2019 के विधानसभा चुनाव में आठ महिला उम्मीदवार विधायक बनी थीं। राज्य में पांच अक्टूबर को हुए चुनाव में 464 निर्दलीय और 101 महिलाओं समेत कुल 1,031 उम्मीदवार मैदान में थे। राज्य विधानसभा में निर्वाचित हुईं पांच महिला विधायक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से और सात कांग्रेस से हैं। निर्दलीय प्रत्याशी सावित्री जिंदल ने हिसार विधानसभा सीट से जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के राम निवास राड़ा को 18,941 मतों के अंतर से हराया। जिंदल कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद एवं उद्योगपति नवीन जिंदल की मां हैं। भाजपा प्रत्याशी शक्ति रानी शर्मा ने कालका सीट से जीत दर्ज की जबकि कृष्णा गहलावत ने राई विधानसभा सीट से जीत दर्ज की। भाजपा उम्मीदवार ऋुति चौधरी ने तोशाम से विजयी परचम लहराया जबकि पार्टी उम्मीदवार एवं केंद्रीय मंत्री राव इंदरजीत सिंह की बेटी आरती सिंह ने अटेली सीट से जीत हासिल की। ऋुति चौधरी भी भाजपा सांसद किरण चौधरी की बेटी हैं। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री बंसी लाल की बहू किरण चौधरी इस साल जून में कांग्रेस से भाजपा में शामिल हो गयी थीं। भाजपा की बिमला चौधरी ने पटौदी विधानसभा सीट से जीत दर्ज की। कांग्रेस प्रत्याशियों में विनेश फोगाट ने जुलाना विधानसभा सीट से जबकि पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस प्रत्याशी गीता भुक्कल ने झज्जर सीट से जीत हासिल की। कांग्रेस की शैली चौधरी ने नारायणगढ़ सीट से जबकि शकुंतला खटक ने कलानौर सीट से जीत दर्ज की। पूजा ने मुलाना विधानसभा सीट और रेनू बाला ने सढौरा सीट से जीत हासिल की। कांग्रेस प्रत्याशी मंजू चौधरी ने नांगल चौधरी सीट से विजयी परचम लहराया।  

पूर्व राज्यपाल मार्गरेट अल्वा ने चुनाव परिणामों को लेकर प्रतिक्रिया जाहिर की, कहा- परिणाम निराशाजनक रहा

नई दिल्ली हरियाणा विधानसभा चुनाव के परिणाम ने एक बार फिर राजनीतिक समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी को मिली असफलता ने पार्टी के भीतर और बाहर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व राज्यपाल मार्गरेट अल्वा ने इस संदर्भ में अपनी चिंता और निराशा व्यक्त की है। उन्होंने चुनाव परिणामों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की मार्गरेट अल्वा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “हरियाणा के परिणाम निराशाजनक हैं। मैं 2004 से 2009 तक हरियाणा की जिम्मेदारी संभालने वाली एआईसीसी महासचिव थी, जब कांग्रेस ने राज्य में दो बार जीत हासिल की थी।” मार्गरेट अल्वा ने लिखा कि जीत के लिए पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखना और व्यक्तिगत आकांक्षाओं के साथ-साथ पार्टी के भले के लिए एकजुटता आवश्यक है। इस चुनाव में हम उस संतुलन को बनाने में असफल रहे। बड़े पैमाने पर विद्रोही उम्मीदवारों की संख्या पार्टी के खराब प्रबंधन को दर्शाती है। छोटी-छोटी सार्वजनिक लड़ाइयां, झूठा आत्मविश्वास और एक ऐसा अभियान ज‍िसने निश्चित जीत को हार में बदल दिया। हालांकि, उन्होंने इस बात पर सकारात्मकता भी व्यक्त की कि यह परिणाम हरियाणा में भाजपा के 10 साल के खराब शासन के खिलाफ आक्रोश को कम नहीं करेंगे, बल्कि इसे और बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि हमें उस आक्रोश को सही दिशा में चैनलाइज करने की आवश्यकता है और 2025 के हरियाणा पंचायत और नगरपालिका चुनावों में जीत हासिल करनी होगी, ताकि हम एक मजबूत और एकजुट विपक्ष के रूप में काम कर सकें। आपको बताते चलें, हरियाणा व‍िधानसभा की 90 में से 48 सीटें भाजपा के खाते में, 37 सीटें कांग्रेस के खाते में, 2 सीटें आईएनएलडी के खाते में और 3 सीटें अन्य के खाते में गई हैं। जेजेपी का इस बार खाता भी नहीं खुल पाया है। सरकार बनाने के लिए किसी भी दल के पास 46 विधायक होने चाहिए। इस लिहाज से भाजपा प्रदेश में सरकार बना सकती है।  

उमंग सिंघार ने कहा- हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों पर भरोसा नहीं किया जा सकता, यह BJP की नहीं, EVM की जीत

भोपाल  हरियाणा में बीजेपी ने 48 सीटों पर जीत दर्ज कर पूर्ण बहुमत से सरकार बना ली है। वहीं सत्ता परिवर्तन की उम्मीद लगाए और जलेबी बांटने से लेकर ढोल नंगाड़ों को वापस भेजने वाली कांग्रेस का सपना एक बार फिर चकनाचूर हो गया। लेकिन एक बार फिर विपक्ष ने EVM पर हार का ठीकरा फोड़ा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि बैलेट पेपर से मतदान होता तो नतीजा कुछ और होता। बीजेपी कैसे जीती आश्चर्य की बात मध्य प्रदेश नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हार के बाद ईवीएम पर फिर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, हरियाणा_विधानसभा चुनाव के नतीजों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। यह BJP की नहीं, EVM की जीत है। पूरे चुनाव के दौरान साफ लग रहा था कि मतदाता का चुनाव Congress ही थी। आश्चर्य की बात यह कि BJP कैसे जीती? चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर उठाए सवाल उमंग सिंघार ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मतदाता पहले ही EVM से संतुष्ट नहीं था। अब हरियाणा के चुनाव नतीजों ने इसे सच साबित कर दिया चुनाव आयोग रुझानों को बहुत धीमी गति से आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर रहा था। इससे स्पष्ट लग रहा था कि प्रशासन पर दबाव बनाया गया है। बैलेट से मतदान होता तो नतीजा कुछ और होता! उन्होंने कहा कि ये जीत जनता के वोट से नहीं हुई, बल्कि EVM से की गई प्रायोजित जीत है। यदि बैलेट से मतदान होता तो नतीजा कुछ और होता। Congress और हरियाणा की जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी। गौरतलब है कि हरियाणा की 90 सीटों में से 48 पर बीजेपी तो 37 पर कांग्रेस को जीत मिली है। वहीं INLD के खाते में 2 और अन्य के खाते में 3 सीट आई है। 37 सीटों पर कांग्रेस कैसे जीती- बीजेपी भारतीय जनता पार्टी के विधायक अनिल जैन ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बयान को हास्यास्पद बताया है. उनका कहना है कि जब भी भारतीय जनता पार्टी की जीत होती है तो कांग्रेस ऐसे ही बेतुके के बयान देती है. उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से सवाल किया है कि हरियाणा में जो 37 सीट कांग्रेस के उम्मीदवारों ने जीते हैं उनको लेकर कांग्रेस क्या सोचती है ? विधायक अनिल जैन ने यह भी कहा कि कांग्रेस को आरोप लगाने की बजाय धरातल पर जाकर अपनी नींव मजबूत करने की आवश्यकता है.

राउत बोले लाडली बहनों के खाते में नहीं आ रहे रुपए, सीएम मोहन यादव का पलटवार, कहा कि हार के डर से वह बोल रहे हैं झूठ

भोपाल  मध्य प्रदेश में लाडली बहनों के खाते में हर महीने राशि आती है। इस महीने भी सरकार ने पांच अक्टूबर को राशि उनके खाते में डाल दिए हैं। वहीं, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि लाडली बहना योजना बंद हो जाएगी। वहां बहनों के खाते में रुपए नहीं आ रहे हैं। राउत के आरोपों पर सीएम मोहन यादव ने मुंहतोड़ जवाब दिया है। साथ ही कहा है कि हर महीने लाडली बहनों के खाते में रुपए आ रहे हैं। सबसे पहले जानिए संजय राउत ने क्या कहा- संजय राउत ने मीडिया से चर्चा में कहा- ये योजना पूरे देश में कहीं भी सफल नहीं हैं। ये पूरा राजनैतिक खेल है। आप मप्र जाकर देखिए योजना शुरू है या नहीं। वहां के वित्त सचिव का आदेश क्या है। ये बहुत ही इनवैलिड योजना है, जो फलदायी नहीं होगी। पूरी अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी। हर महीने आ रही है राशि लाडली बहना योजना बंद होने को लेकर शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत के बयान पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि जब से हमने लाडली बहना योजना शुरू की है लगातार हर महीने, निश्चित समय पर बहनों को पैसे देने का काम किया है। वीरांगना रानी दुर्गावती की जयंती के अवसर पर एक साथ पूरे प्रदेश की बहनों के खातों में राशि डाली है। कोई ऐसा महीना नहीं जा रहा है जिसमें यह राशि नहीं डाली गई है। हार के डर से फैला रही है भ्रम सीएम मोहन यादव ने कहा कि लेकिन हार के डर से शिवसेना (UBT) के लोग महाराष्ट्र के चुनाव में मतदाताओं को बरगलाने का प्रयास कर रहे हैं। मैं एक बार फिर अपने सारे मतदाताओं से कहना चाहूंगा कि ऐसे झूठे षड्यंत्रों पर विश्वास न करें। यह नारी सशक्तिकरण की राशि है जिसे हम बंद करने हु हुई के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि हमारी योजना के तहत बहनों के जीवन में बेहतरी हो। लाडली बहना के कारण कर्मचारियों को दीवाली पर वेतन नहीं मिलेगा राउत ने महाराष्ट्र सरकार को घेरते हुए कहा- आज ठेकेदारों का आंदोलन चल रहा है। काम करवा लिया कमीशन 40%, 20% लिया। उनका भुगतान नहीं हो रहा है। वो सभी ठेकेदार मंत्रालय में आंदोलन करने वाले हैं। ये लाड़ली बहन योजना और एक महीना चलाएंगे, बाद में बंद कर देंगे। दीवाली के समय हमारे सरकारी कर्मचारी, पुलिस, टीचर्स का वेतन नहीं होगा। ये सब लाड़ली बहन योजना के चक्कर में हो रहा है। CM बोले- हर महीने तय समय पर पैसे दे रही सरकार सीएम डॉ मोहन यादव ने लाडली बहना योजना बंद होने को लेकर राउत के बयान पर कहा, ” जब से हमने लाडली बहना योजना शुरू की है लगातार हर महीने, निश्चित समय पर प्रदेश की 1 करोड़ 29 लाख बहनों को पैसे देने का काम किया है। हमने हमारी 500 साल पूर्व की सम्राज्ञी वीरांगना रानी दुर्गावती की जयंती के अवसर पर एक साथ पूरे प्रदेश की बहनों के खातों में 5-5 हजार की राशि डाली है। कोई ऐसा महीना नहीं जा रहा है, जिसमें यह राशि नहीं डाली गई है। लेकिन, हार के डर से शिवसेना (UBT) के लोग महाराष्ट्र के चुनाव में मतदाताओं को बरगलाने का प्रयास कर रहे हैं। मैं एक बार फिर अपने सारे मतदाताओं से कहना चाहूंगा कि ऐसे झूठे षड्यंत्र पर विश्वास न करें। लाडली बहनें करेंगी शिकायत मोहन यादव ने कहा कि इन आरोपों के बाद लाडली बहनें खुद हमारे पास आई हैं। उनलोगों ने कहा है कि मुझे अपमानित किया गया है। लाडली बहनें खुद ही थाने में शिकायत करने जाएंगी। मैंने कहा कि आपको राशि मिल रही है तो शिकायत करने के लिए स्वतंत्र हैं। जून 2023 से लगातार मिल रही है राशि गौरतलब है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 5 मार्च 2023 को यह योजना शुरू की थी। जून 2023 से लाडली बहनों के खाते में प्रतिमाह 1000/- रुपए की राशि आने लगी थी। 2023 में रक्षाबंधन के मौके पर ही यह राशि 1250 रुपए कर दी गई। इसके बाद से लगातार बहनों के खाते में 1250 रुपए आ रहे हैं।

कांग्रेस को हार का गहराई से आत्मचिंतन करना चाहिए: नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला

श्रीनगर नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को कहा कि कांग्रेस को हरियाणा में अपनी हार के कारणों का पता लगाने के लिए गहराई से आत्मचिंतन करना चाहिए। हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करने जा रही है। नेकां और कांग्रेस ने जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव गठबंधन में लड़ा था। नेकां नेता ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘मैंने पहले ही कहा था कि हम इन ‘एग्जिट पोल’ (चुनाव बाद के सर्वेक्षणों) से सिर्फ अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। लेकिन किसी ने नहीं सोचा होगा कि ‘एग्जिट पोल’ इतने गलत साबित होंगे। अगर 18 की जगह 20 या 20 की जगह 22 होता तो हम समझ सकते थे, लेकिन हुआ ये कि 30 की जगह 60 हो गया और 60 की जगह 30 हो गया।’’ हरियाणा में अधिकतर ‘एक्जिट पोल’ में कांग्रेस को बहुमत मिलता दिखाया गया था। अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘कांग्रेस को गहराई से मंथन करना चाहिए और अपनी हार के कारण का विश्लेषण करना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरा काम नेकां को संचालित करना है और यहां गठबंधन की मदद करना है, जो मैं करूंगा।’’ नेकां और कांग्रेस जम्मू कश्मीर में गठबंधन सरकार बनाने वाली हैं। वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू कश्मीर में यह पहला चुनाव है।  

राहुल गांधी के भाषणों का असर कांग्रेस को मिली जम्मू और हरियाणा में हार!

नई दिल्ली आजकल मीडिया में इस बात के बहुत चर्चे थे कि कांग्रेस नेता राहुल का मेकओवर हो गया है. राहुल गांधी की बातें देश की जनता प्रधानमंत्री से भी अधिक सुन रही है. काग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने तो बकायदा सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी हैंडल के आंकड़ों की तुलना करते हुए इसे साबित भी किया था. इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि राहुल गांधी आजकल कुछ भी बोलते हैं सभी नैशनल टीवी चैनल उनको कवर करते हैं क्योंकि जनता उन्हें सुनना चाह रही है. पर जब आप बेवजह की बातें करने लगते हैं तो जनता के लिए वे बातें ओवरडोज हो जातीं हैं. क्या ऐसा ही कुछ राहुल गांधी के साथ भी हुआ है? क्योंकि जम्मू में नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसा एक मजबूत साथी का समर्थन होने के बावजूद कांग्रेस का वहां से सफाया हो गया है.कांग्रेस को जम्मू में केवल एक मुस्लिम प्रत्याशी वाली सीट ही मिल सकी है. जबकि नेशनल कान्फ्रेंस ने जम्मू की कई सीटें हिंदू प्रत्याशी खडे़ कर भी जीत लिए हैं. यहां तक कि जम्मू कश्मीर बीजेपी प्रेसिडेंट रविंद्र रैना को भी हराने वाला नेशनल कॉन्फेंस का एक हिंदू प्रत्याशी ही है. यहां हिंदू प्रत्याशी और मुस्लिम प्रत्याशी का नाम इसलिए लिया जा रहा है ताकि यह बताया जा सके वोटों का ध्रुवीकरण कम से कम जम्मू में हिंदू मुस्लिम के नाम पर नहीं हुआ है. इसके बावजूद जम्मू में कांग्रेस की दाल नहीं गली है. 1- हरियाणा और जम्मू में नहीं चला राहुल गांधी की बातों का जोर राहुल गांधी ने इस बार के चुनावों में बीजेपी में चुनाव प्रचार के महारथी कहे जाने वाले प्रधानमंत्री मोदी से भी कहीं अधिक रैलियां , सभाएं और रोड शो किया. पर जाट बेल्ट तक में कांग्रेस की हालत खराब रही. कांग्रेस की लहर के बावजूद बीजेपी अगर हरियाणा में तीसरी बार पूरे बहुमत के साथ अगर सरकार बनाने जा रही है तो इसका मतलब है कि राहुल गांधी का करिष्मा काम नहीं किया है. उनके साथ उनकी बहन प्रियंका भी पूरी तरह लगी हुईं थीं. जम्मू में भी अब तक की सबसे बड़ी हार कांग्रेस को देखने को मिली है. कांग्रेस जम्मू कश्मीर में 32 सीटों पर चुनाव लड़ी, जिनमें से 10 सीटों पर मुस्लिम कैंडिडट उतारे और 22 हिंदुओं को टिकट दिया.पर जम्मू में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली. जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस को कुल 42 सीटों पर जीत मिली है जिसमें कुछ सीटें उसने जम्मू में हिंदू कैंडिडेट खडा़ कर भी जीत लिया है. पर कांग्रेस जम्मू से साफ हो गई है. कश्मीर में उसे 6 सीटें मिलीं हैं पर वो सभी मु्स्लिम कैंडिडेट वाली सीटें आईं हैं.मतलब साफ है कि कांग्रेस की स्थिति बीजेपी से तो खराब रही है नेशनल कॉन्फ्रेंस से भी खराब रहीं. इसका एक और मतलब निकलता है कि जम्मू कश्मीर में कांग्रेस को मिली सीटें भी नेशनल कॉन्फ्रेंस की बदौलत ही आईं हैं. जाहिर है कि हरियाणा और जम्मू में कांग्रेस को मिली हार से राहुल गांधी के भाषणों और मुद्दों को तो टार्गेट किया जाएगा. 2-जाति जनगणना का मुद्दा क्या उल्टा पड़ गया हरियाणा में हरियाणा में जिस तरह कांग्रेस को हार मिली है और जिस तरह बीजेपी के प्रत्य़ाशियों को जाट सीटों पर वोट मिले हैं उसका सीधा मतलब है कि जाति जनगणना का मुद्दा नहीं चला है. हरियाणा में ओबीसी वोटर्स ने बीजेपी का साथ पूरी ईमानदारी के साथ दिया है.विनेश फोगाट का मुकाबला बीजेपी के एक ओबीसी कैंडिडेट से था. बीजेपी को भी ऐसा लग रहा था कि योगेश बैरागी कहीं विनेश के सामने टिक नहीं रहे हैं. इसलिए ही शायद बीजेपी ने यहां कम ध्यान दिया. पर विनेश के मुकाबले योगेश को केवल 6 हजार वोट कम मिले हैं. ये बताता है कि विनेश को पिछड़ी जातियों के वोट नहीं मिले.मतलबा साफ है कि राहुल गांधी के सामाजिक न्याय की बातें हरियाणा की जनता को हजम नहीं हुईं. 3-जिसकी जितनी हिस्सेदारी उसकी उतनी भागीदारी कभी नहीं भाएगी कांग्रेस के कोर वोटर्स को राहुल गांधी अपने गुरु ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा की इच्छानुसार कई बार देश की संपत्तियों के बंटवारे की बात करते रहे हैं. इसके साथ ही जाति जनगणना के पीछे उनका इरादा है कि देश में अमीरों की संपत्ति का बंटवारा किया जा सके. वैसे तो हरियाणा में उन्होंने इस मुद्दे पर जोर नहीं दिया नहीं तो जाटों का वोट भी कांग्रेस को नहीं मिलता . क्योंकि हरियाणा में जाटों के पास सबसे अधिक जमीन है.वह कभी नहीं चाहेंगे कि उनकी जमीन का बंदरबांट हो.दरअसल राहुल गांधी की ये विचारधारा उन्हें वामपंथ के नजदीक ले जाती है. जबकि वामपंथी विचारधार अब पूरी दुनिया से खत्म हो चुकी है. 4-संविधान बचाओ- आरक्षण बचाओ नारे की हवा निकली हरियाणा में जिस तरह दलितों ने बीजेपी या अन्य को वोट दिया है उससे नहीं लगता है कि अब संविधान बचाओ-आरक्षण बचाओ का मुद्दा रह गया है. हो सकता है कि दलितों का वोट बीजेपी को नहीं मिला हो. पर यह भी तय है कि कम से कम कांग्रेस को नहीं मिला है. लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में दलित वोटों जरूर विपक्ष को गए थे. हरियाणा के विश्वेषण से ऐसा लगता है कि दलित वोटों पर प्रभाव इस नारे का नहीं था. इसके लिए यूपी चुनावों की फिर से विश्लेषण करना होगा. 5-अडानी और अंबानी के खिलाफ एजेंडा राहुल गांधी के भाषणों में अब भी अडानी और अंबानी छाए रहते हैं. बार-बार वो याद दिलाते हैं कि राम मंदिर के उद्घाटन के समय अडानी-अंबानी और अमिताभ बच्चन दिखे. गरीब , दलित और पिछड़े नहीं दिखे. वो अपने भाषणों में साबित करते हैं कि पीएम मोदी जो भी करते हैं वो अपने दोस्तों अडानी और अंबानी के लिए करते हैं. दूसरी तरफ कांग्रेस सरकारें अडानी- अंबानी के साथ मधुर रिश्ते रखती हैं इसका जवाब वो नहीं देते. हरियाणा में चुनाव के दौरान उन्होंने एक दिन कहा कि अंबानी के घर शादी में कौन गया था. आपने देखा वहां मोदी गए थे पर मैं नहीं गया था.जाहिर है कि अडानी-अंबानी की बातें लोगों को अब ओवरडोज हो रही हैं.    

हरियाणा में और मजबूत हुई भाजपा, दो निर्दलीयों ने थामा बीजेपी का हाथ

नई दिल्ली हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद पार्टी का उत्साह बना हुआ है. इस बीच चुनाव में जीत दर्ज कर चुके दो निर्दलीय बीजेपी में शामिल हो गए हैं. चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज कर चुके राजेश जून और देवेंद्र कादियान बीजेपी में शामिल हो गए हैं. हरियाणा चुनाव के प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान और अन्य बीजेपी नेताओं के साथ बैठक के बाद दोनों विधायक बीजेपी में शामिल हो गए. देवेंद्र कादियान ने सोनीपत जिले में पड़ने वाली गन्नौर सीट से जीत दर्ज की है. उन्होंने कांग्रेस के कुलदीप शर्मा को 35,209 वोटों के अंतर से हराया है. इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार देवेंद्र कौशिक तीसरे नंबर पर रहे. बीजेपी से टिकट नहीं मिलने के कारण देवेंद्र कादियान ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया था. गन्नौर सीट से कादियान ने निर्दलीय ही यह चुनाव जीत लिया. कादियान ने 10 सितंबर को वीडियो जारी कर बीजेपी को अलविदा कह दिया था. उन्होंने काफी भावुक होकर दावा किया था कि वह गन्नौर सीट से टिकट चाहते थे, लेकिन उन्हें बीजेपी ने टिकट नहीं दिया. इससे नाराज होकर उन्होंने पार्टी छोड़ दी. वहीं, राजेश जून कांग्रेस से टिकट न मिलने के कारण निर्दलीय ही बहादुरगढ़ सीट से खड़े हो गए थे. राजेश जून ने बीजेपी उम्मीदवार दिनेश कौशिक को 41,999 वोटों के अंतर से चुनाव हराया. हरियाणा में बीजेपी की हैट्रिक हरियाणा में बीजेपी ने हैट्रिक लगा दी है. ये अपने आप में रिकॉर्ड है, क्योंकि हरियाणा में कभी भी कोई पार्टी लगातार तीसरी बार चुनाव नहीं जीती है. इतना ही नहीं, हरियाणा के इतिहास में बीजेपी का ये अब तक की सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंस भी हैं. बीजेपी इससे पहले कभी भी इतनी ज्यादा सीटें नहीं जी सकी है. हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 48, कांग्रेस 37, आईएनएलडी 2 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 3 सीटें जीती. इस बार बीजेपी ने 2014 और 2019 से भी बड़ी जीत हासिल करते हुए 48 सीटें जीत ली हैं. 2014 में बीजेपी ने 47 और 2019 में 40 सीटें जीती थीं. वहीं, नतीजों से पहले तक कांग्रेस की वापसी का अनुमान लगाया जा रहा था. लेकिन कांग्रेस इस बार 37 सीटें ही जीत सकी. 2 सीटें इनेलो को मिली हैं. वहीं, तीन निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं.  

चुनाव में कांग्रेस की विनेश फोगाट ने शानदार जीत की दर्ज, दीपक हुड्डा को मेहम सीट हार मिली है

 जुलाना/मेहम/ नई दिल्ली  हर‍ियाणा विधानसभा चुनाव 2024 की बात की जाए तो इसमें 3 ख‍िलाड़ी भी मैदान में थे. इनमें कांग्रेस की सीट से उम्मीदवार रहे विनेश फोगाट ने शानदार जीत की. वहीं बीजेपी के उम्मीदवार कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान दीपक हुड्डा को मेहम सीट हार मिली है. इसी तरह विनेश फोगाट के सामने WWE (वर्ल्ड रेसल‍िंग इंटरटेनमेंट) की पहलवान जुलाना में सामने थीं. आम आदमी पार्टी (AAP) के टिकट पर उतरीं कव‍िता रानी (कव‍िता दलाल) की जमानत जब्त हो गई. विनेश फोगाट को जुलाना में 65,080 वोट मिले. वहीं उनके निकटतम प्रत‍िद्वंद्वी योगेश कुमार को 59,065 वोट मिले, इस तरह व‍िनेश को 6015 वोटों से जीत मिली. WWE रेसलर कव‍िता रानी को जुलाना से महज 1280  मिल सके. इस तरह उनकी जमानत जब्त हो गई. तीसरे नंबर पर यहां इंड‍ियन नेशनल लोकदल के सुरेंद्र लाठेर रहे, उन्हें 10158 वोट मिले, उनकी भी जमानत जब्त हो गई. विधानसभा चुनाव के हिसाब से देखें तो अगर किसी उम्मीदवार को कुल वोटों का 1/6 फीसदी भी नहीं मिले तो उसकी जमानत जब्त हो जाती है. जुलाना विधानसभा चुनाव में कुल वोट 1,38,871 पड़े. ऐसे में हर उम्मीदवार को 1/6 या 16.66 प्रत‍िशत के हिसाब से 23,145 जमानत जब्त होने से बचने के लिए चाहिए थे. इसी कारण WWE की रेसलर कव‍िता रानी की जमानत जब्त हो गई.   दीपक हुड्डा की करारी हार… हर‍ियाणा में BJP के टिकट पर मेहम सीट से चुनाव लड़ने वाला स्टार ख‍िलाड़ी दीपक हुड्डा को हार मिली है. इस सीट से कांग्रेस के बलराम डांगी को जीत मिली है. उनको 56865 से वोट मिले, उन्होंने अपने निकटम प्रतिद्वंद्वी बलराज कुंडु को 18060 वोटों से हराया. हर‍ियाणा जनसेवक पार्टी के बलराम को 38805 वोट मिले. नंबर 3 पर न‍िर्दलीय राधा अहलावत रहीं, ज‍िनको 29211  वोट मिले. वहीं दीपक हुड्डा को करीब 8929 वोट मिले. इस तरह बड़े अंतर से हार गए. दीपक हुड्डा भारतीय कबड्डी के जाने-माने नाम हैं. वह भारतीय टीम के कप्तान भी रह चुके हैं. साल 2016 में जब भारतीय टीम ने कबड्डी का वर्ल्ड कप जीता था, तो उनकी टीम में अहम भूमिका रही थी. 30 साल के दीपक 2016 और 2019 में साउथ एश‍ियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम का हिस्सा रह चुके हैं. दीपक हुड्डा प्रो कबड्डी लीग की हिस्ट्री में बेस्ट ऑलराउंडर माने जाते हैं. उन्होंने 7 जुलाई 2022 को स्वीटी बूरा से शादी रचाई थी.  

इल्तिजा मुफ्ती को 9770 वोटों से हार का सामना करना पड़ा, उन्होंने जनादेश को स्वीकार किया

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती अपने परिवार के गढ़ माने जाने वाले श्रीगुफवारा-बिजबेहरा विधानसभा सीट से चुनाव हार गई हैं। जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव की वोटों की गिनती में इल्तिजा को 9770 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। इस पर इल्तिजा मुफ्ती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि मैं जनादेश को स्वीकार करती हूं। बिजबेहरा में सभी से मुझे जो प्रेम और स्नेह मिला। वह हमेशा मेरे साथ रहेगा। इस अभियान के दौरान कड़ी मेहनत करने वाले पीडीपी कार्यकर्ताओं का आभार। मुफ्ती परिवार का गढ़ है सीट दरअसल 37 साल की इल्तिजा दक्षिण कश्मीर में पीडीपी का चेहरा थीं। इस बार महबूबा मुफ्ती ने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था। इल्तिजा को उस समय पहचान मिली थी। क्योंकि अनुच्छेद 370 को रद्द किए जाने के बाद उनकी मां को हिरासत में लिया गया था। 1996 में महबूबा मुफ्ती ने भी बिजबेहरा से ही अपनी चुनावी शुरुआत की थी, जिसे मुफ्ती परिवार का गढ़ माना जाता है। श्रीगुफवारा-बिजबेहरा सीट पर किसे कितने वोट प्रत्याशी पार्टी कुल वोट बशीर अहमद शाह वीरी J&KNC 33299 इल्तिजा मुफ्ती JKPDP 23529 सोफी यूसुफ BJP 3716 NOTA   1552 दादा मुफ्ती मुहम्मद सईद को याद किया चुनाव परिणामों का इंतजार करते हुए मंगलवार को इल्तिजा ने अपने दादा मुफ्ती मुहम्मद सईद को याद करते हुए एक भावनात्मक एक्स पोस्ट लिखा। उन्होंने एक पुरानी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, सन्नी यहां आइएं फोटो के लिए। 2015 में जब आपने ताज के सामने तस्वीर लेने के लिए जोर दिया तो मैं झिझकते हुए मान गई थी। मुझे खुशी है कि आपने हार नहीं मानी क्योंकि यही हमारी आखिरी तस्वीर बनकर रह गई। आप ज्ञान, गरिमा और उदारता की मिसाल थे। मैं जो कुछ भी जानती हूं, जो कुछ भी हूं, आपकी वजह से हूं। काश आज आप यहां होते। दुनिया के सबसे अच्छे दादा। हम आपको याद करते हैं। कैसे बनी सुर्खियां अगस्त 2019 में इंटरनेट ब्लैकआउट और लॉकडाउन के बीच इल्तिजा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने अपने श्रीनगर आवास पर नजरबंदी के कारणों पर सवाल उठाए थे। बाद में इल्तिजा को घाटी छोड़ने की अनुमति दी गई थी। उन्होंने अपनी मां से मिलने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था, जिसे अंततः मंजूरी दे दी गई। महबूबा की रिहाई के बाद से इल्तिजा नियमित रूप से मीडिया इंटरैक्शन और बैठकों के दौरान उनके साथ रहीं। जून 2022 में उन्होंने एक्स पर “आपकी बात इल्तिजा के साथ” नामक एक पाक्षिक वीडियो श्रृंखला शुरू की, जिसका मकसद जम्मू-कश्मीर के लोगों को प्रभावित करने वाले मुद्दों और फैसलों पर चर्चा करना था। कश्मीर में नई दिल्ली की नीतियों के कड़े विरोध में इल्तिजादिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक इल्तिजा ने यूके में वारविक विश्वविद्यालय से अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में मास्टर डिग्री हासिल की है। इल्तिजा मुफ्ती कश्मीर में नई दिल्ली की नीतियों के कड़े विरोध के लिए भी जानी जाती हैं। वह केंद्र शासित प्रदेश में नागरिक स्वतंत्रता और राजनीतिक अधिकारों की सक्रिय रूप से वकालत करती हैं। एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में इल्तिजा ने कहा था कि मुझे अपनी मां से विरासत में सिर्फ़ खूबसूरती ही नहीं बल्कि जिद भी मिली है। मैं रणनीतिक हूं। वह भावुक हैं। यही मेरा व्यक्तित्व है और मुझे उम्मीद है कि समय के साथ लोग इसे जानेंगे। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव 18 सितंबर, 25 सितंबर और 1 अक्टूबर को हुए थे।

हरियाणा विधानसभा चुनाव में AAP पार्टी सिर्फ डेढ़ प्रतिशत वोट शेयर हासिल करती दिख रही

नई दिल्ली  वजूद में आने के एक दशक के भीतर ही राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा। नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का चरम पर उत्साह। इसी बीच पार्टी मुखिया के गृह राज्य में चुनाव। चुनाव से ठीक पहले पार्टी सुप्रीमो का जेल से बाहर आना। लोकलुभावन वादों की झड़ी। उम्मीदों का पंख लगना, लेकिन नतीजे आए बिल्कुल उलट। अबतक तो आप समझ ही गए होंगे कि यहां बात हो रही है हरियाणा विधानसभा चुनाव और आम आदमी पार्टी की। दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस में जेल में बंद अरविंद केजरीवाल अपने गृह राज्य हरियाणा में वोटिंग से कुछ दिन पहले ही जेल से बाहर आए तो पार्टी को उम्मीदें थीं कि इस बार न सिर्फ खाता खोलेगी बल्कि किंगमेकर बनेगी। लेकिन ऐसा हो न सका। पार्टी 2 प्रतिशत वोट शेयर के आंकड़े तक को नहीं छूती दिख रही। आम आदमी पार्टी हरियाणा को एक ऐसे राज्य के तौर पर देखती आई है जहां उसके लिए मौका हो सकता है। एक तो ये दिल्ली और पंजाब से सटा हुआ है जहां आम आदमी पार्टी की सरकारें हैं, और दूसरा ये कि हरियाणा आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल का गृह राज्य है। AAP इसी आत्मविश्वास के साथ कांग्रेस के साथ चुनाव पूर्व समझौते की कोशिश की लेकिन सीट शेयरिंग पर बात फंस गई। आम आदमी पार्टी ने भी ज्यादा इंतजार नहीं किया और अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करना शुरू कर दिया। हरियाणा की 90 में से 89 सीटों पर चुनाव लड़ी लेकिन इस बार भी खाता नहीं खोल पाई। पार्टी के लिए संतोष की बात सिर्फ ये हो सकती है कि हरियाणा में पिछली बार आम आदमी पार्टी NOTA तक से कम वोट हासिल कर पाई थी लेकिन इस बार NOTA से ज्यादा वोट मिलते दिख रहे हैं। हरियाणा में आम आदमी पार्टी का वोट शेयर डेढ़ प्रतिशत के आस-पास दिख रहा है। चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया जैसे आम आदमी पार्टी के दिग्गजों ने हरियाणा में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। धुआंधार रोड शो और चुनावी रैलियां हुईं लेकिन पार्टी खाता तक खोलने में नाकाम दिख रही है। वैसे तो काउंटिंग अभी चल ही रही है लेकिन गिनती पूरी होने के बाद सभी सीटों पर आम आदमी पार्टी की अगर जमानत जब्त होती है तो इसमें ताज्जुब जैसी कोई बात नहीं होगी। इस पर 89 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली आम आदमी पार्टी ने 2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में 46 सीटों पर ताल ठोकी थी। तब भी पार्टी खाता खोलने में नाकाम रही थी, अब भी खाता खोलती नहीं दिख रही।

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