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एसआई भर्ती परीक्षा में शामिल होंगे 15.75 लाख अभ्यर्थी, परीक्षा की शुचिता से कोई समझौता नहीं: मुख्यमंत्री

त्योहारों और पुलिस भर्ती परीक्षा के दृष्टिगत मुख्यमंत्री सख्त, कानून-व्यवस्था व व्यवस्थाओं पर विशेष सतर्कता के निर्देश त्योहार सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हों, समाज विरोधी गतिविधियों व नई परंपरा की अनुमति नहीं: मुख्यमंत्री एसआई भर्ती परीक्षा में शामिल होंगे 15.75 लाख अभ्यर्थी, परीक्षा की शुचिता से कोई समझौता नहीं: मुख्यमंत्री बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के आवागमन को देखते हुए सुचारु रहे ट्रैफिक व्यवस्था, कहीं जाम या अव्यवस्था न हो: मुख्यमंत्री प्रत्येक परीक्षा केंद्र के बाहर पीआरवी-112 की तैनाती सुनिश्चित हो, सोशल मीडिया पर सतत निगरानी रखी जाए: मुख्यमंत्री नवरात्र के दौरान प्रमुख शक्तिपीठों में सुगम दर्शन, सुरक्षा, स्वच्छता व पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित हो: मुख्यमंत्री प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति और वितरण सामान्य, कहीं भी अभाव नहीं कहीं भी किसी प्रकार की घबराहट या कृत्रिम संकट की स्थिति न बने, जमाखोरी व कालाबाजारी पर होगी सख्त कार्रवाई: मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को आगामी पर्व-त्योहारों, उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा तथा अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों के दृष्टिगत कानून-व्यवस्था एवं प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सतर्कता और समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 13 मार्च को अलविदा की नमाज, 14-15 मार्च को उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा सब-इंस्पेक्टर एवं समकक्ष पदों की लिखित परीक्षा, 19 मार्च से चैत्र नवरात्र तथा 20-21 मार्च को ईद-उल-फितर मनाए जाने की संभावना है। ऐसे में यह अवधि कानून-व्यवस्था की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। सभी अधिकारी पूरी सतर्कता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हों। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की नई परंपरा शुरू करने की अनुमति न दी जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी धार्मिक कार्यक्रम के कारण आमजन को असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि समाज-विरोधी अथवा राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए। एसआई भर्ती परीक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 14 और 15 मार्च को प्रदेश के 1090 परीक्षा केंद्रों पर चार पालियों में परीक्षा आयोजित होगी, जिसमें 15 लाख 75 हजार से अधिक अभ्यर्थी पंजीकृत हैं। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के अन्य जिलों से आने की संभावना को देखते हुए प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए, ताकि कहीं भी जाम या अव्यवस्था की स्थिति न बने। उन्होंने कहा कि परीक्षा की शुचिता, और गोपनीयता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। सेक्टर मजिस्ट्रेट और स्टेटिक मजिस्ट्रेट पूरी जिम्मेदारी के साथ तैनात रहें तथा इंटेलिजेंस तंत्र पूरी तरह सक्रिय और सतर्क रहे। परीक्षा से पूर्व सभी जिलों में व्यवस्थाओं का पूर्वाभ्यास कराया जाए तथा सोशल मीडिया पर सतत निगरानी रखी जाए, ताकि किसी भी अफवाह या भ्रामक सूचना का तत्काल खंडन किया जा सके। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक परीक्षा केंद्र के बाहर पीआरवी-112 की गाड़ी अनिवार्य रूप से तैनात रहे और जिला प्रशासन भर्ती बोर्ड के साथ समन्वय बनाकर परीक्षा को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराए। चैत्र नवरात्र की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देवीपाटन मंदिर (बलरामपुर), शाकुम्भरी देवी (सहारनपुर), मां विंध्यवासिनी धाम (मीरजापुर), ललिता देवी (सीतापुर) सहित प्रमुख शक्तिपीठों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है। अयोध्या में 27 मार्च को रामनवमी के अवसर पर देशभर से श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम दर्शन, पेयजल, स्वच्छता और भीड़ प्रबंधन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नवरात्र के अवसर पर नगरों और गांवों में मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों के आसपास विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाए तथा आवश्यकतानुसार अतिरिक्त स्वच्छताकर्मी तैनात किए जाएं। पुलिस स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी भीड़ प्रबंधन और फुट पेट्रोलिंग की कार्ययोजना लागू करे। मुख्यमंत्री ने मीरजापुर, बलरामपुर, सीतापुर, अयोध्या, मथुरा और सहारनपुर के जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान से तैयारियों की जानकारी भी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 19 मार्च को ही माननीय राष्ट्रपति जी का अयोध्या और मथुरा आगमन प्रस्तावित है। इसके दृष्टिगत सभी आवश्यक प्रोटोकॉल व्यवस्थाएं समय से सुनिश्चित कर ली जाएं। मुख्यमंत्री ने हालिया वैश्विक परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में पेट्रोल- डीजल की उपलब्धता की समीक्षा भी की। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि वर्तमान में प्रदेश में कहीं भी पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। आपूर्ति और वितरण सामान्य है। मुख्यमंत्री ने खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो। कहीं भी किसी प्रकार की घबराहट या कृत्रिम संकट की स्थिति न बनने पाए। खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारी फील्ड में उतर कर निरीक्षण करते रहें। मुख्यमंत्री ने जमाखोरी और कालाबाजारी पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, अपर पुलिस महानिदेशक (जोन), पुलिस आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक (रेंज), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक सहित शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

उत्तर प्रदेश को एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च और इंजीनियरिंग का प्रमुख हब बनाने की संभावनाओं पर हुई चर्चा

मुख्यमंत्री से मिले नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव लोहम कंपनी के सीईओ व चीफ ऑफ स्टाफ ने भी की मुलाकात  उत्तर प्रदेश को एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च और इंजीनियरिंग का प्रमुख हब बनाने की संभावनाओं पर हुई चर्चा  लखनऊ  नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव ने बुधवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस दौरान लोहम कंपनी के सीईओ रजत वर्मा और कंपनी के चीफ ऑफ स्टॉफ आयुष सबात भी मौजूद रहे। तीनों अतिथियों ने निवेश के लिए उत्तर प्रदेश के सकारात्मक माहौल की सराहना की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव, लोहम के सीईओ रजत वर्मा और चीफ ऑफ स्टाफ आयुष सबात का उत्तर प्रदेश में स्वागत किया। बैठक में उत्तर प्रदेश को देश में एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च और इंजीनियरिंग का प्रमुख हब बनाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इस क्रम में लोहम द्वारा प्रदेश में भारत की पहली “रेयर अर्थ टू मैग्नेट” इंटीग्रेटेड फैसिलिटी स्थापित करने की योजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इस फैसिलिटी के स्थापित होने से देश में उच्च तकनीक आधारित मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा। नोबेल पुरस्कार विजेता कोंस्टेंटिन नोवोसेलोव, जो ग्रैफीन की खोज के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं, लोहम कंपनी के साथ स्ट्रैटेजिक एडवाइजर और सहयोगी के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनका उद्देश्य उन्नत मटेरियल साइंस को औद्योगिक स्तर पर बैटरी तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र में लागू करना है। लोहम और नोवोसेलोव के सहयोग का मुख्य फोकस दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर है। पहला, 2D मटेरियल (जैसे ग्रैफीन) का उपयोग कर अगली पीढ़ी की लिथियम-आयन बैटरियों की क्षमता, सुरक्षा व लाइफ को बढ़ाना। दूसरा, बैटरियों और परमानेंट मैग्नेट का उन्नत रीसाइक्लिंग सिस्टम विकसित कर महत्वपूर्ण खनिजों की बेहतर रिकवरी सुनिश्चित करना, जिससे सर्कुलर इकॉनमी को मजबूती मिलेगी। यह सहयोग भारत के “मेक इन इंडिया” और ग्रीन एनर्जी विजन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गुणवत्तापूर्ण टेक होम राशन की आपूर्ति के लिए 301.19 करोड़ रुपये का फंड मंजूर

रेसिपी आधारित पुष्टाहार व्यवस्था लागू करने वाला पहला राज्य बनेगा उत्तर प्रदेश बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को मिलेगा पौष्टिक आहार, कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को मिलेगी मजबूती गुणवत्तापूर्ण टेक होम राशन की आपूर्ति के लिए 301.19 करोड़ रुपये का फंड मंजूर पुष्‍टाहार वितरण हेतु चेहरा पहचान प्रणाली (फेस रिकग्निशन सिस्टम) होगा लागू, धांधली पर लगेगी रोक लखनऊ  योगी सरकार ने बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं के बेहतर पोषण के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में अप्रैल से रेसिपी आधारित अनुपूरक पुष्टाहार की नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। भारत सरकार की गाइडलाइन और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत लागू की जा रही इस व्यवस्था के साथ उत्तर प्रदेश ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा। अनुपूरक पुष्‍टाहार वितरण हेतु चेहरा पहचान प्रणाली (फेस रिकग्निशन सिस्टम) लागू की जाएगी जिसके क्रम में प्रदेश में अनुपूरक पोषाहार का ऑफलाइन वितरण अमान्य कर केवल एफआरएस प्रणाली से ही वितरण मान्य किया गया है। इससे पुष्टाहार वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।  पौष्टिक भोजन से खिलेंगे नौनिहाल नई व्यवस्था के तहत प्रदेश में सात श्रेणी के लाभार्थियों को ध्यान में रखकर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से रेसिपी आधारित पुष्टाहार तैयार कर सीधे आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। जिन जिलों या परियोजनाओं में इसकी व्यवस्था नहीं होगी, वहां नैफेड के जरिए आंगनबाड़ी केंद्रों तक आपूर्ति की जाएगी। सरकार ने अलग अलग आयु वर्ग के बच्चों और महिलाओं के लिए अलग भोजन तय किया है। छह माह से एक वर्ष तक के बच्चों को आटा-बेसन का हलवा (मीठा) दिया जाएगा। एक से तीन वर्ष तक के बच्चों को भी आटा-बेसन हलवा (मीठा) मिलेगा, जबकि तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को आटा-बेसन बर्फी (मीठा) और दलिया-मूंग-सोया खिचड़ी (नमकीन) दी जाएगी। गर्भवती और धात्री महिलाओं को आटा-बेसन-सोया बर्फी और दलिया-मूंग-दाल खिचड़ी उपलब्ध कराई जाएगी। अतिकुपोषित बच्चों को विशेष आहार  अतिकुपोषित बच्चों के लिए पौष्टिक आहार का प्रावधान रखा गया है। इसके अंतर्गत 06 माह से 01 वर्ष तक के बच्चों को पौष्टिक हलवा, 01 वर्ष से 03 वर्ष तक के बच्चों को पौष्टिक हलवा “बाल संजीवनी” तथा 03 वर्ष से 06 वर्ष तक के बच्चों को पौष्टिक हलवा एवं पौष्टिक दलिया उपलब्ध कराया जाएगा। यह रेसिपी आधारित व्यवस्था बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को संतुलित और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। रेसिपी के पोषण मानकों में भारत सरकार के मानकों के अनुरूप कैलोरी और प्रोटीन के साथ-साथ 11 अन्य आवश्यक माइक्रोन्यूट्रिएंट्स को भी शामिल किया गया है। सरकार ने 301.19 करोड़ रुपये का फंड किया स्वीकृत इस व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने वायबिलिटी गैप फंड भी मंजूर किया है। प्रदेश में अनुपूरक पुष्टाहार की आपूर्ति वर्ष 2017 के कॉस्ट नॉर्म्स पर की जा रही है। इसके कारण राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) के अंतर्गत रेसिपी आधारित पुष्टाहार का उत्पादन करने वाली इकाइयों को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा था। लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण टेक होम राशन (टीएचआर) उपलब्ध कराते हुए इसकी गुणवत्ता पर किसी प्रकार का समझौता न हो, इसे ध्यान में रखते हुए इन इकाइयों को होने वाली संभावित हानि की प्रतिपूर्ति के लिए वायबिलिटी गैप फंड (वीजीएफ) की आवश्यकता पाई गई। इसी क्रम में राज्य सरकार ने एसआरएलएम के माध्यम से संचालित उत्पादन इकाइयों को वित्तीय सहयोग प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में मंत्रिपरिषद ने कुल 301.19 करोड़ रुपये की वीजीएफ स्वीकृत की है। इससे उत्पादन इकाइयों के संचालन को मजबूती मिलेगी और लाभार्थियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण अनुपूरक पुष्टाहार की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

आम जनता के लिए राहत: विवादित जमीन की रजिस्ट्री पर रोक, मुकदमेबाजी कम करने का योगी सरकार का फैसला

लखनऊ यूपी में जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े विवाद लंबे समय से आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बने हुए हैं. कई मामलों में यह सामने आता रहा है कि किसी जमीन की रजिस्ट्री ऐसा व्यक्ति अपने नाम से कर देता है जो उसका वास्तविक मालिक ही नहीं होता. कभी प्रतिबंधित जमीन की बिक्री हो जाती है, तो कहीं सरकारी या कुर्क संपत्ति भी रजिस्ट्री के जरिए दूसरे के नाम दर्ज हो जाती है. ऐसे मामलों का नतीजा अक्सर वर्षों तक चलने वाले कोर्ट केस और आर्थिक-मानसिक परेशानियों के रूप में सामने आता है। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए अब योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने से जुड़ा अहम प्रस्ताव मंजूर किया गया है. सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद फर्जी और विवादित जमीन की रजिस्ट्री पर प्रभावी रोक लग सकेगी और आम लोगों को अनावश्यक मुकदमेबाजी से राहत मिलेगी। रजिस्ट्री से पहले होगी दस्तावेजों की सख्त जांच नई व्यवस्था के तहत अब जमीन की रजिस्ट्री कराने से पहले उससे जुड़े दस्तावेजों की विस्तृत जांच अनिवार्य होगी. विशेष रूप से खतौनी, स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य जरूरी दस्तावेजों का परीक्षण किया जाएगा. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जो व्यक्ति जमीन बेच रहा है, वही उसका वास्तविक मालिक हो और संपत्ति पर किसी तरह का कानूनी विवाद या प्रतिबंध न हो. राज्य सरकार का मानना है कि यदि रजिस्ट्री से पहले ही दस्तावेजों की सख्ती से जांच कर ली जाए तो बाद में पैदा होने वाले कई विवादों को रोका जा सकता है। क्यों जरूरी हुआ यह फैसला राज्य के स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जयसवाल ने बताया कि हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें संपत्ति का वास्तविक मालिक कोई और होता है लेकिन रजिस्ट्री किसी दूसरे व्यक्ति के नाम हो जाती है. कई बार ऐसा भी होता है कि प्रतिबंधित या विवादित जमीन को भी बेच दिया जाता है. कुछ मामलों में तो कुर्क की गई संपत्ति या सरकारी जमीन का भी विक्रय विलेख तैयार कराकर उसका पंजीकरण करा लिया जाता है. ऐसे मामलों का पता तब चलता है जब बाद में कोई पक्ष अदालत का दरवाजा खटखटाता है. तब तक जमीन की खरीद-फरोख्त कई हाथों में जा चुकी होती है और विवाद और जटिल हो जाता है. सीमित अधिकार के कारण हो जाती थी रजिस्ट्री वर्तमान में जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के तहत संचालित होती है. इस कानून के अनुसार उप-निबंधक के पास किसी दस्तावेज के पंजीकरण से इनकार करने के अधिकार बहुत सीमित हैं. कानून की धारा 35 के तहत उप-निबंधक केवल कुछ परिस्थितियों में ही रजिस्ट्री रोक सकता है. यही वजह है कि कई बार संदिग्ध मामलों में भी रजिस्ट्री हो जाती है और बाद में विवाद खड़ा हो जाता है. सरकार का कहना है कि इसी खामी को दूर करने के लिए कानून में संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई। कानून में जोड़ी जाएंगी नई धाराएं सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन के तहत रजिस्ट्रेशन अधिनियम में नई धाराएं जोड़ी जाएंगी. इनमें प्रमुख रूप से धारा 22-A, 22-B और 35-A शामिल होंगी. धारा 22-A के तहत कुछ श्रेणियों की संपत्तियों के दस्तावेजों के पंजीकरण पर रोक लगाने का प्रावधान होगा. धारा 22-B के तहत पंजीकरण से पहले अचल संपत्ति की पहचान सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जाएगी. धारा 35-A के अंतर्गत यदि रजिस्ट्री के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों के साथ स्वामित्व, अधिकार, कब्जा या हस्तांतरण से जुड़े आवश्यक कागजात संलग्न नहीं होंगे, तो पंजीकरण अधिकारी को रजिस्ट्री से इनकार करने का अधिकार होगा. सरकार इन दस्तावेजों की सूची राजपत्र में अधिसूचना जारी कर तय करेगी। विवादित जमीन की बिक्री पर लगेगी रोक सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था के लागू होने से कई तरह की समस्याओं पर रोक लग सकेगी. उदाहरण के तौर पर- प्रतिबंधित जमीन की बिक्री, सरकारी भूमि की रजिस्ट्री, कुर्क संपत्ति का विक्रय, वास्तविक स्वामी के अलावा किसी और द्वारा जमीन बेच देना जैसे मामलों को शुरुआत में ही रोका जा सकेगा. इससे जमीन से जुड़े विवादों में कमी आने की उम्मीद है। आम लोगों को मिलेगी बड़ी राहत राज्य सरकार का कहना है कि इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा आम लोगों को मिलेगा. अक्सर देखा जाता है कि लोग अपनी जीवन भर की जमा पूंजी लगाकर जमीन या मकान खरीदते हैं. बाद में यदि पता चलता है कि संपत्ति विवादित है या किसी और की है, तो उन्हें वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. नई व्यवस्था लागू होने से ऐसे मामलों की संभावना काफी कम हो सकती है। अन्य राज्यों में भी लागू हैं ऐसे प्रावधान सरकारी अधिकारियों के मुताबिक देश के कई राज्यों में इसी तरह के प्रावधान पहले से लागू हैं, जहां संदिग्ध या विवादित संपत्तियों की रजिस्ट्री पर रोक लगाने की व्यवस्था की गई है. उत्तर प्रदेश में भी अब इसी दिशा में कदम उठाया गया है, ताकि जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ाई जा सके. यह प्रस्ताव भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची की प्रविष्टि-6 के अंतर्गत लाया गया है. इसका मतलब यह है कि जमीन और संपत्ति के पंजीकरण से जुड़े मामलों में राज्य सरकार को कानून बनाने का अधिकार है, बशर्ते वह संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप हो। आगे क्या होगा कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव से संबंधित विधेयक को राज्य विधानमंडल में पेश किया जाएगा. विधानमंडल से स्वीकृति मिलने के बाद इसे कानून का रूप दिया जाएगा और फिर पूरे प्रदेश में नई व्यवस्था लागू की जाएगी. सरकार का मानना है कि यह कदम जमीन से जुड़े विवादों को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रजिस्ट्री से पहले स्वामित्व और दस्तावेजों की जांच अनिवार्य हो जाती है, तो इससे संपत्ति लेन-देन की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित हो जाएगी. इससे न केवल धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी बल्कि जमीन खरीदने वाले लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा।

निगम कमिश्नर फंसीं 2 घंटे, पार्षद के बेटे की शादी का होर्डिंग हटाने पर स्थानीय नेताओं का हंगामा

झांसी यूपी के झांसी में पार्षद के बेटे की शादी की होर्डिंग हटाने का मामला देर शाम उस समय गरमा गया जब पार्षदों ने हंगामा करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया. उन्होंने नगर निगम ऑफिस गेट पर कब्जा कर अधिकारियों व कर्मचारियों को अंदर जाने व बाहर आने से रोक दिया। इसके चलते नगर आयुक्त भी ऑफिस में लगभग दो घंटे तक फंसी रहीं, बाद में पुलिस की मदद से उन्हें सुरक्षा घेरे में निकाला गया. पार्षदों ने चेतावनी दी है कि अगर समस्याओं का समाधान न हुआ तो कल से अधिकारियों को फिर ऑफिस अरेस्ट किया जाएगा। झांसी के नवाबाद थाना क्षेत्र के बीकेडी चौराहे के पास एक पार्षद के बेटे की शादी की होडिंग अवैध रूप से लगी थी. जिसको नगर निगम ने 9 मार्च को हटवा दिया. जब इसकी जानकारी पार्षदों को हुई तो वह आक्रोशित हो गए। गेट पर कब्जा और नगर आयुक्त को घेरा भाजपा व अन्य दलों के दो दर्जन से ज्यादा पार्षद दोपहर 4 बजे नगर निगम गेट पर धरने पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी. इस दौरान उन्होंने किसी को गेट के अंदर-बाहर नहीं जाने दिया। पार्षदों ने छीनी गाड़ी की चाबी ऑफिस पहुंचे सहायक नगर आयुक्त गौरव कुमार को पार्षदों ने वापस लौटा दिया और उनकी सरकारी गाड़ी की चाबी निकाल ली. अपने चेम्बर में मौजूद नगर आयुक्त आकांक्षा राणा भी वहीं फंस गईं। पुलिस ने सुरक्षा घेरे में बाहर निकाला शाम 6 बजे के बाद भी ब पार्षद हटने को तैयार नहीं हुए तो पुलिस बुलाई गयी और पुलिस की मदद से नगर आयुक्त को ऑफिस से कड़ी सुरक्षा के बीच बाहर निकाला गया। प्रस्तावों पर काम न होने से नाराज हैं पार्षद भाजपा पार्षद दिनेश प्रताप बुंदेला ने आरोप लगाया कि पार्षदों के प्रस्तावों पर काम न होने से जनता में उनकी छबि खराब हो रही है. नगर आयुक्त मनमानी कर रहीं हैं. वहीं जब नगर निगम आयुक्त आकांक्षा राणा से बात की तो उन्होंने कहा सभी काम कराये जा रहे हैं, अगर कोई समस्या है तो आएं और बात करें।

आगरा का नौसेना जवान पकड़ा गया ISI के साथ, लांस नायक आदर्श कुमार गिरफ्तार

आगरा आगरा में उत्तर प्रदेश एटीएस को बड़ी सफलता हासिल हुई है. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए कथित जासूसी करने के आरोप में यूपी एटीएस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है. आरोपी की पहचान आदर्श कुमार उर्फ लकी के रूप में हुई है, जो भारतीय नौसेना में लांस नायक के पद पर केरल में तैनात था. एटीएस ने 10 मार्च 2026 को उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।    कैसे सामने आया जासूसी का मामला? एटीएस के अनुसार उन्हें लगातार आसूचना मिल रही थी कि एक व्यक्ति पाकिस्तान बेस्ड ISI एजेंट के संपर्क में रहकर भारत से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा कर रहा है. इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए देश की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले को पकड़ने के लिए एटीएस ने इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक सर्विलांस के जरिए जांच शुरू की. जांच के दौरान आगरा निवासी आदर्श कुमार उर्फ लकी का नाम सामने आया।  सर्विलांस में यह भी सामने आया कि आरोपी भारतीय नौसेना में लांस नायक के पद पर दक्षिणी नेवल कमांड, कोच्चि, केरल में तैनात था. जांच में संकेत मिले कि वह पाकिस्तान स्थित एजेंटों के संपर्क में था और उन्हें संवेदनशील सूचनाएं उपलब्ध करा रहा था।  संवेदनशील जानकारी और पैसों के लेनदेन के आरोप एटीएस की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर रणनीतिक महत्व की सूचनाएं साझा कीं. आरोप है कि उसने युद्धक पोतों और अन्य सैन्य गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील तस्वीरें और जानकारी पाकिस्तान बेस्ड एजेंटों को भेजी।  एटीएस का कहना है कि जांच के दौरान इस तरह के कई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सामने आए, जिससे आरोपी की गतिविधियों पर संदेह गहराया. अधिकारियों के मुताबिक, मामले की जांच आगे भी जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी किन-किन लोगों के संपर्क में था।  आरोपी को भेजा गया न्यायिक अभिरक्षा में एटीएस ने पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आदर्श कुमार उर्फ लकी को 10 मार्च 2026 को गिरफ्तार किया. गिरफ्तारी के बाद उसे नियमानुसार माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया. अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश दिया. आरोपी का नाम आदर्श कुमार उर्फ लकी, उम्र 24 वर्ष बताया जा रहा है. उसके पिता का नाम बलवीर सिंह है जो कि ग्राम चीतापुर, पोस्ट व थाना कागारौल, जिला आगरा के निवासी है।  एटीएस की प्रेस नोट के अनुसार आरोपी की गतिविधियां देश विरोधी पाई गईं और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के नेटवर्क से उसके आपराधिक संबंधों के संकेत मिले हैं. मामले में आगे की विवेचना जारी है और एजेंसी पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। 

ईरान युद्ध की आंच अयोध्या तक पहुँची, गैस की कमी से राम रसोई बंद, हनुमानगढ़ी प्रसाद पर संकट

  अयोध्या   ईरान-इजरायल युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव ने अयोध्या में एलपीजी गैस की आपूर्ति बाधित कर दी है, जिससे स्थानीय मठ-मंदिरों की सामूहिक रसोइयां और प्रसाद निर्माण बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. अमावा मंदिर प्रशासन ने गैस उपलब्ध न होने के कारण प्रतिदिन 10 हजार श्रद्धालुओं को भोजन कराने वाली ‘श्रीराम रसोई’ को फिलहाल स्थगित कर दिया है. हनुमानगढ़ी के करीब 150 दुकानदारों के सामने लड्डू बनाने का संकट खड़ा हो गया है क्योंकि कारखानों में उत्पादन बंद है. यह स्थिति गैस की कमी के कारण पैदा हुई है, जिससे होटल-रेस्टोरेंट कारोबार और श्रद्धालुओं की भोजन व्यवस्था चरमरा गई है।  राम रसोई पर लटका नोटिस राम मंदिर के पास स्थित अमावा मंदिर की ‘श्रीराम रसोई’ के बाहर प्रशासन ने सूचना चस्पा कर दी है. मंदिर के मैनेजर पंकज कुमार के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय युद्ध के तनाव से देश में पैदा हुए गैस संकट के कारण रसोई को समय से पहले बंद करना पड़ा है. अब यह सेवा तभी दोबारा शुरू हो पाएगी जब गैस की आपूर्ति सामान्य होगी. इस फैसले से दूर-दराज से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को निःशुल्क भोजन मिलना बंद हो गया है, जो एक गंभीर आपातकालीन स्थिति है।  हनुमानगढ़ी के लड्डू प्रसाद पर संकट संकट की आंच सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी तक भी पहुंच गई है. प्रसाद विक्रेता नंद कुमार गुप्ता ने बताया कि गैस न मिलने से लड्डू का उत्पादन लगभग ठप है और केवल पुराना स्टॉक ही बेचा जा रहा है. यहां हर दुकानदार रोजाना 30 से 40 किलो लड्डू तैयार करता है, लेकिन अब बजरंगबली के भोग की व्यवस्था प्रभावित होने का डर सता रहा है. व्यापारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालातों के कारण यदि यही स्थिति रही, तो अयोध्या का प्रसिद्ध प्रसाद उद्योग पूरी तरह बंद हो सकता है।  बेपटरी होता पर्यटन और कारोबार गैस किल्लत का सीधा असर अयोध्या के होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर पर भी पड़ा है. रेस्टोरेंट संचालक अमित के मुताबिक, पिछले दो दिनों से सिलेंडर मिलना मुश्किल हो गया है और घरेलू बुकिंग भी प्रभावित है. स्थानीय व्यापारियों और संतों का मानना है कि यदि जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो लागत बढ़ने के साथ-साथ पर्यटकों को भोजन के लिए भटकना पड़ेगा. अंतरराष्ट्रीय तनाव की यह आंच अब आम लोगों की रसोई से लेकर अयोध्या की सेवा परंपरा तक महसूस की जा रही है। 

गर्मी की जल्दी दस्तक: गाजियाबाद में प्रदूषण और बिजली कटौती से लोग बेहाल

गाजियाबाद मार्च का महीना अभी आधा भी नहीं बीता है, लेकिन शहर में मई जैसी गर्मी का एहसास होने लगा है। तेज धूप, बढ़ते प्रदूषण और लगातार हो रही बिजली कटौती ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। सोमवार को अधिकतम तापमान 34.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि रात का तापमान भी करीब 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। गर्मी के बढ़ते असर के कारण अब तक बंद पड़े पंखे और एसी भी चलने लगे हैं। वहीं, प्रदूषण का स्तर भी चिंताजनक बना हुआ है। सोमवार को शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 246 दर्ज किया गया जो खराब श्रेणी में आता है। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है, हालांकि 15 मार्च के आसपास पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिससे मौसम में कुछ राहत मिल सकती है। गर्मी और प्रदूषण से बढ़ीं स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती गर्मी और खराब हवा की गुणवत्ता का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ने लगा है। दोपहर के समय बाजारों में भीड़ कम दिखाई दे रही है। धूल और धुएं के कारण लोगों को आंखों में जलन और गले में खराश की शिकायत हो रही है। फील्ड में काम करने वाले लोगों को डिहाइड्रेशन और थकान जल्दी महसूस हो रही है। वहीं, मॉर्निंग वॉक करने वालों को भी सांस लेने में भारीपन महसूस हो रहा है। मौसम में बदलाव की उम्मीद मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले दो-तीन दिनों तक गर्मी का असर बना रहेगा। हालांकि 15 मार्च के आसपास एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिससे पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में ठंडी हवाएं चल सकती हैं। इससे तापमान में कुछ गिरावट आ सकती है। खोड़ा में 17 घंटे बिजली गुल, लोग रहे परेशान गाजियाबाद के ट्रांस हिंडन क्षेत्र के खोड़ा इलाके में गंगाजल की समस्या के बाद अब बिजली संकट ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रविवार को करीब 17 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही, जिससे लाखों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर बिजली विभाग के प्रति नाराजगी जताई। रविवार सुबह करीब 11 बजे बिजली आपूर्ति अचानक बंद हो गई, जिसके बाद देर रात तक स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। मामले में चीफ इंजीनियर पवन अग्रवाल ने कहा कि संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट ली जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि इतनी देर तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने की वजह क्या रही। कई इलाकों में बिजली ट्रिपिंग की समस्या गर्मी बढ़ने के साथ ही शहर के कई इलाकों में बिजली ट्रिपिंग और कटौती की समस्या भी बढ़ने लगी है। सोमवार को मानसरोवर पार्क, राज कंपाउंड, शंकर विहार, शनि विहार और हरपाल एन्क्लेव में एलटी लाइन में फॉल्ट के कारण करीब तीन घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रही। इसके अलावा सेन विहार, शांति नगर, बहरामपुर, अकबरपुर और बुद्ध विहार में करीब चार घंटे तक बिजली नहीं आने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं प्रताप विहार, राहुल विहार, चिपियाना बुजुर्ग, नंदग्राम, केला भट्टा, इस्लामनगर, दौलतपुर, भाटिया मोड़, पंचवटी कॉलोनी और पंचकूला कॉलोनी में भी दिनभर बिजली का आना-जाना लगा रहा। अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार ने बताया कि जहां-जहां फॉल्ट की शिकायतें मिली हैं, वहां टीम भेजकर मरम्मत कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री का निर्देश, जून तक पूरा कर लें बीडा के लिए भूमि अधिग्रहण: मुख्यमंत्री

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा विभाग से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। प्रस्ताव के तहत योगी सरकार ने उच्च शिक्षा के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में जानकारी देते हुए प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं। शिक्षकों का समाज निर्माण और शिक्षण व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान होता है, लेकिन अब तक उन्हें चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने 5 सितम्बर 2025 (शिक्षक दिवस) के अवसर पर उच्च शिक्षा के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने की घोषणा की थी। उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में कार्यरत नियमित एवं स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों, स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों तथा राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत नियमित एवं स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों को इस योजना के अंतर्गत लाया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री के निर्देश पर शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत शिक्षकों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ संबद्ध निजी अस्पतालों में भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। मंत्री ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत प्रति शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी  2479.70 रुपये का प्रीमियम व्यय होगा। प्रदेश में लगभग 2 लाख से अधिक शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी इस योजना से लाभान्वित होंगे और इस पर सरकार को लगभग 50 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का व्यय वहन करना पड़ेगा। इस व्यय की व्यवस्था उच्च शिक्षा विभाग के बजट से की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस योजना का संचालन राज्य समग्र स्वास्थ्य एवं एकीकृत सेवा एजेंसी (साचीज) के माध्यम से किया जाएगा। योजना के तहत लाभार्थियों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी, जिसकी दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार होंगी। उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस योजना के लाभार्थियों और उनके आश्रितों का विवरण उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रतिवर्ष 30 जून तक साचीज को उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही जो व्यक्ति पहले से केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य स्वास्थ्य योजना (जैसे प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आरोग्य योजना) से आच्छादित होंगे, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि योगी सरकार शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के सम्मान और उनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए लगातार संवेदनशील निर्णय ले रही है। यह योजना शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में प्रस्तावित विभिन्न एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को प्रगति समीक्षा बैठक में निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे, फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे तथा जेवर लिंक एक्सप्रेसवे की प्रगति पर चर्चा करते हुए सम्बंधित जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि इन परियोजनाओं के लिए भूमि क्रय की प्रक्रिया को अविलम्ब गति देते हुए सभी बाधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए, ताकि एक्सप्रेसवे परियोजनाओं का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जा सके। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार प्रदेश में निवेश, औद्योगिक गतिविधियों और क्षेत्रीय संतुलित विकास को नई गति देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की तीव्र आर्थिक प्रगति के लिए मजबूत अवसंरचना आधार अत्यंत आवश्यक है और किसी भी परियोजना में अनावश्यक विलंब या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया कि निर्माणाधीन परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा, उच्च गुणवत्ता और पूर्ण पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाए। समीक्षा में बताया गया कि गंगा एक्सप्रेसवे का मुख्य कैरिजवे निर्माण पूरा हो चुका है और शेष कार्य तेजी से पूर्ण किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सभी शेष कार्य समयबद्ध ढंग से पूरे कर एक्सप्रेसवे को शीघ्र संचालन के लिए तैयार किया जाए। मुख्यमंत्री को बताया गया कि गंगा एक्सप्रेसवे को मेरठ से हरिद्वार तक विस्तारित करने के प्रस्ताव पर भी कार्य प्रगति पर है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि एयरपोर्ट को हाल ही में प्रोविजनल एरोड्रम लाइसेंस प्राप्त हुआ है और भूमि अधिग्रहण व अन्य विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि एयरपोर्ट परियोजना से जुड़े सभी कार्यों को समन्वित ढंग से शीघ्र पूर्ण किया जाए।ग्रेटर नोएडा में विकसित किए जा रहे मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक हब और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्यों को समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। वहीं नोएडा के चिल्ला एलिवेटेड फ्लाईओवर परियोजना के संबंध में उन्होंने निर्माण गुणवत्ता और अनुबंध शर्तों के कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा। सिंचाई क्षेत्र की समीक्षा में मध्य गंगा नहर परियोजना (स्टेज-2) तथा एरच सिंचाई परियोजना की प्रगति पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई परियोजनाएं किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, इसलिए इनके कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए। ऊर्जा क्षेत्र में रिहंद-ओबरा क्षेत्र में प्रस्तावित पंप स्टोरेज परियोजना, तापीय विद्युत परियोजनाओं में पर्यावरणीय उन्नयन तथा झांसी में प्रस्तावित 100 मेगावाट सौर ऊर्जा संयंत्र की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।लखनऊ में वृंदावन योजना के अंतर्गत प्रस्तावित एग्ज़ीबिशन-कम-कन्वेंशन सेंटर तथा कुकरेल क्षेत्र में प्रस्तावित नाइट सफारी परियोजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से पर्यटन और सेवा क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, इन्हें प्राथमिकता दी जाए। बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण की प्रगति की समीक्षा करते हुए जून तक यह कार्य पूरा कर लेने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आवश्यकतानुरूप अतिरिक्त मैनपॉवर लगाया जाए। बैठक में अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े मार्गों के चौड़ीकरण तथा बस्ती जनपद में घाघरा नदी के तटबंध सुरक्षा परियोजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने नोडल अधिकारियों की तैनाती करते हुए … Read more

सिखों के आनंद विवाह रजिस्ट्रेशन के लिए नई नियमावली को कैबिनेट ने दी मंजूरी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में निर्माणाधीन दो महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं में उत्तर प्रदेश की वित्तीय हिस्सेदारी को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने लखवार मल्टीपरपज प्रोजेक्ट और रेणुकाजी डैम प्रोजेक्ट के लिए राज्य के हिस्से की धनराशि खर्च करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। लखवार बहुउद्देशीय परियोजना कैबिनेट ने उत्तराखंड के देहरादून और टिहरी गढ़वाल जिले के लोहारी गांव के पास यमुना नदी पर निर्माणाधीन लखवार बहुउद्देशीय परियोजना में उत्तर प्रदेश के हिस्से के रूप में 356.07 करोड़ रुपये खर्च करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस परियोजना की पुनरीक्षित लागत 5747.17 करोड़ रुपये (प्राइस लेवल 2018) है। परियोजना के तहत 204 मीटर ऊंचा बांध, 300 मेगावाट क्षमता का भूमिगत बिजलीघर और एक बैराज के साथ संतुलन जलाशय (Balancing Reservoir) का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना में लाभार्थी राज्यों द्वारा वहन की जाने वाली कुल लागत 1146.69 करोड़ रुपये है, जिसमें उत्तर प्रदेश का जल उपभोग शेयर 31.05 प्रतिशत है। इस परियोजना से हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित लाभार्थी राज्यों के लगभग 33,780 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए 78.83 एमसीएम जल तथा 300 मेगावाट (572.54 मिलियन यूनिट) आकस्मिक विद्युत उत्पादन का भी प्रावधान है। इस परियोजना को वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था और इसे दिसंबर 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रेणुकाजी बांध परियोजना कैबिनेट ने हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में गिरी नदी पर निर्माणाधीन रेणुकाजी बांध परियोजना में भी उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी के रूप में 361.04 करोड़ रुपये खर्च करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस परियोजना की कुल लागत 6946.99 करोड़ रुपये (प्राइस लेवल 2018) है, जबकि जल घटक की लागत 6647.46 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के तहत 148 मीटर ऊंचा और 430 मीटर लंबा बांध बनाया जा रहा है, जिसकी कुल जल संचयन क्षमता 498 एमसीएम और लाइव स्टोरेज क्षमता 330 एमसीएम होगी। इसके अलावा परियोजना से 40 मेगावाट बिजली उत्पादन भी प्रस्तावित है। लाभार्थी राज्यों द्वारा वहन की जाने वाली कुल लागत 1162.66 करोड़ रुपये है, जिसमें उत्तर प्रदेश का जल उपभोग शेयर 31.05 प्रतिशत है। इस परियोजना के माध्यम से संग्रहित जल का उपयोग हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों में सिंचाई के लिए किया जाएगा। इस परियोजना को वर्ष 2009 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था और इसे दिसंबर 2032 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उत्तर प्रदेश को मिलेगा अतिरिक्त जल इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने के बाद उत्तर प्रदेश को कुल 3.721 बीसीएम (31.05 प्रतिशत) जल प्राप्त होगा। इस अतिरिक्त जल का उपयोग पूर्वी यमुना नहर प्रणाली और आगरा नहर प्रणाली के माध्यम से सिंचाई के लिए किया जाएगा। साथ ही इससे यमुना नदी में जल प्रवाह बढ़ेगा और नदी की तनुता में भी सुधार होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश भिक्षावृत्ति प्रतिषेध अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के 7 मई 2025 के आदेश के अनुपालन में लिया गया है। प्रस्तावित संशोधन के तहत अधिनियम की धारा 21 से कुष्ठ रोग से संबंधित प्रावधानों को हटाया जा रहा है। साथ ही इन प्रावधानों को मेंटल हेल्थकेयर एक्ट 2017 के अनुरूप बनाया जाएगा, ताकि कानून आधुनिक स्वास्थ्य और मानवाधिकार मानकों के अनुरूप हो सके। इस संशोधन से कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त करने में मदद मिलेगी और उन्हें समाज में सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिलेगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रस्तावित उत्तर प्रदेश भिक्षावृत्ति प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक, 2026 को आगे की प्रक्रिया के लिए राज्य विधानमंडल में प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सिख समुदाय के विवाह पंजीकरण को आसान बनाने के लिए “उत्तर प्रदेश आनंद विवाह रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2026” को प्रख्यापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सिख धर्म में प्रचलित ‘आनंद कारज’ विवाह के पंजीकरण को सुगम बनाने के लिए यह नियमावली लागू की जा रही है। यह व्यवस्था आनंद मैरिज एक्ट, 1909 (संशोधित 2012) की धारा-6 के तहत राज्य सरकार को प्राप्त अधिकारों के आधार पर बनाई गई है। साथ ही यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट में दायर रिट याचिका अमनजोत सिंह चड्ढा बनाम भारत संघ व अन्य में 4 सितम्बर 2025 को दिए गए निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है। नई नियमावली के तहत आनंद विवाह के पंजीकरण के लिए तहसील स्तर पर उप जिलाधिकारी (एसडीएम) को रजिस्ट्रार, जनपद स्तर पर जिलाधिकारी को जिला रजिस्ट्रार, मंडल स्तर पर मंडलायुक्त को मंडलीय रजिस्ट्रार तथा राज्य मुख्यालय पर निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ को मुख्य रजिस्ट्रार नामित किया जाएगा। नियमावली के अनुसार विवाह के पक्षकार या उनके रिश्तेदार विवाह संपन्न होने की तिथि से तीन महीने के भीतर निर्धारित प्रारूप में 1500 रुपये के न्यायालय शुल्क स्टाम्प के साथ विवाह पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकेंगे। निर्धारित समय के बाद भी आवेदन देने की व्यवस्था होगी, लेकिन इसके लिए नियमानुसार विलंब शुल्क देना होगा। इसके साथ ही यदि कोई पक्ष रजिस्ट्रार के आदेश से असंतुष्ट होता है तो वह जिला रजिस्ट्रार के समक्ष अपील कर सकेगा। जिला रजिस्ट्रार के आदेश के खिलाफ मंडलीय रजिस्ट्रार के पास अपील की व्यवस्था भी की गई है। नियमावली में विवाह रजिस्टर के रख-रखाव और उसकी प्रमाणित प्रति प्राप्त करने से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। नियमावली के लागू होने से प्रदेश में सिख समुदाय के आनंद विवाह का विधिवत पंजीकरण आसान होगा और विवाह से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ेगी।

सरकारी कर्मचारियों के आचरण नियमों में बदलाव, निवेश और संपत्ति की जानकारी देना होगा अनिवार्य

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत जनपद मेरठ में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) के लिए अवस्थापना विकास कार्यों को मंजूरी दी गई है। इन कार्यों पर लगभग ₹213.81 करोड़ खर्च किए जाएंगे। प्रदेश में उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) द्वारा विकसित एक्सप्रेसवे (आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे) के किनारे 29 स्थानों पर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना के तहत इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मेरठ नोड में सड़क निर्माण, आरसीसी नालियां, आरसीसी कल्वर्ट, फायर स्टेशन, भूमिगत जलाशय, जलापूर्ति लाइन, फेंसिंग, बिजली व्यवस्था और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। इन सभी कार्यों को ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) मोड पर कराया जाएगा। व्यय-वित्त समिति द्वारा इन कार्यों के लिए लगभग ₹21381.93 लाख की लागत का आकलन किया गया था, जिसे अब कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इस क्लस्टर के बनने से मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जनपद कानपुर में ट्रांसगंगा सिटी को शहर से जोड़ने के लिए गंगा नदी पर नया सेतु बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। यह कार्य अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत कराया जाएगा। इस परियोजना के अंतर्गत गंगा नदी पर चार लेन का उच्च स्तरीय सेतु और उससे जुड़े पहुंच मार्ग का निर्माण किया जाना है। प्रस्तावित स्थल पर उत्तर प्रदेश स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीसीडा) द्वारा ट्रांसगंगा सिटी विकसित की जा रही है, जहां कानपुर और आसपास की औद्योगिक इकाइयों को स्थानांतरित करने की योजना है। सरकार के अनुसार ट्रांसगंगा सिटी के विकसित होने के बाद गंगा नदी पार करने के लिए भारी और हल्के वाहनों का यातायात काफी बढ़ेगा। इससे मौजूदा गंगा बैराज मार्ग पर जाम की समस्या और बढ़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए गंगा नदी पर नए सेतु के निर्माण का निर्णय लिया गया है। यातायात दबाव को देखते हुए चार लेन के एक पुल के बजाय दो-दो लेन के दो अलग-अलग सेतु बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि एक ही स्थान पर वाहनों का अत्यधिक दबाव न पड़े और आवागमन सुचारु बना रहे। इस परियोजना की कुल स्वीकृत लागत लगभग ₹753.13 करोड़ है। इसमें से ₹460 करोड़ की धनराशि अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत दी जाएगी, जबकि शेष राशि संबंधित प्राधिकरण अपने संसाधनों से खर्च करेगा। इस परियोजना से कानपुर क्षेत्र में औद्योगिक विकास और यातायात व्यवस्था को बड़ा लाभ मिलेगा। ख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली, 1956 के नियम-21 एवं नियम 24 में संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस बदलाव का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के निवेश और संपत्ति से जुड़े मामलों में अधिक पारदर्शिता लाना है। इन संशोधनों से सरकारी कर्मचारियों की वित्तीय गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ेगी और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। संशोधन के तहत नियम-21 में यह व्यवस्था की जा रही है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में अपने मूल वेतन के छह महीने से अधिक की राशि स्टॉक, शेयर या अन्य निवेश में लगाता है, तो उसे इसकी सूचना अपने समुचित प्राधिकारी को देनी होगी। इसी तरह नियम-24 में भी बदलाव किया गया है। अब यदि कोई कर्मचारी दो महीने के मूल वेतन से अधिक मूल्य की कोई चल संपत्ति खरीदता है, तो उसे इसकी जानकारी संबंधित प्राधिकारी को देनी होगी। पहले यह सीमा एक महीने के मूल वेतन के बराबर थी। इसके अलावा अचल संपत्ति की घोषणा से संबंधित नियम में भी संशोधन किया गया है। पहले सरकारी कर्मचारियों को हर पांच वर्ष में अपनी अचल संपत्ति की जानकारी देनी होती थी, लेकिन अब यह जानकारी हर वर्ष देना अनिवार्य किया जाएगा

एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) 2026 को योगी कैबिनेट की मंजूरी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत किफायती आवास (एएचपी) और किफायती किराया आवास (एआरएच) घटकों के क्रियान्वयन के लिए नई नीति जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में वर्ष 2026 के लिए इन दोनों घटकों के संचालन हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। योजना के तहत मध्यम और दुर्बल आय वर्ग के लोगों के लिए किफायती दरों पर आवास उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इस योजना के अंतर्गत आवास निर्माण के लिए प्रत्येक लाभार्थी को केंद्र सरकार की ओर से 1.50 लाख रुपये और राज्य सरकार की ओर से 1 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। इसके अलावा व्हाइटलिस्टेड परियोजनाओं में काम करने वाले डेवलपर्स को भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क, मानचित्र स्वीकृति शुल्क, बाह्य विकास शुल्क में छूट दी जाएगी, वहीं लाभार्थियों को स्टाम्प शुल्क में भी राहत मिलेगी। किफायती किराया आवास (एआरएच) मॉडल-2 के तहत शहरी गरीबों, कामकाजी महिलाओं, औद्योगिक इकाइयों के कर्मचारियों तथा ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्ग के परिवारों के लिए निजी और सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा किराये के आवास बनाए जाएंगे, जिनका संचालन और रखरखाव भी वही संस्थाएं करेंगी। सरकार का उद्देश्य इस योजना के माध्यम से शहरों में सस्ती और सुलभ आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है। अनधिकृत लोगों से कांशीराम आवास खाली करवाकर पात्र दलितों को आवंटित किए जाएंगे निर्णय की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि बैठक के दौरान कांशीराम आवासों को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में बने कांशीराम आवास योजना के कई आवासों पर अनधिकृत कब्जे की शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे आवासों की पहचान कर उन्हें खाली कराया जाएगा और उनकी रंगाई-पुताई व मरम्मत कराकर पुनः पात्र दलित परिवारों को आवंटित किया जाएगा। इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया। सरकार का उद्देश्य इन आवासों को फिर से जरूरतमंद दलित परिवारों को उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके तहत रजिस्ट्री से पहले खतौनी और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण अनिवार्य किया जाएगा, ताकि फर्जी और विवादित जमीन की रजिस्ट्री को रोका जा सके। निर्णय की जानकारी देते हुए स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने बताया कि वर्तमान समय में कई मामलों में यह देखा गया है कि संपत्ति के वास्तविक स्वामी के अलावा अन्य व्यक्ति द्वारा संपत्ति का विक्रय कर दिया जाता है। इसके अलावा निषेधित या प्रतिबंधित संपत्ति का विक्रय, अपने अधिकार से अधिक संपत्ति का विक्रय, कुर्क संपत्ति का विक्रय तथा केंद्र या राज्य सरकार के स्वामित्व वाली भूमि के विक्रय विलेख का भी पंजीकरण करा लिया जाता है। ऐसे मामलों के कारण बाद में विवाद उत्पन्न होते हैं और लोगों को लंबे समय तक मुकदमेबाजी और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वर्तमान में रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के अंतर्गत किसी भी विलेख के पंजीकरण से इनकार करने के संबंध में उप-निबंधक को धारा 35 के तहत बहुत सीमित अधिकार प्राप्त हैं। इसी कारण कई बार संदिग्ध मामलों में भी रजिस्ट्री हो जाती है। इन समस्याओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश में रजिस्ट्रेशन अधिनियम और नियमावली में संशोधन करने का निर्णय लिया गया है। प्रस्तावित संशोधन के तहत अधिनियम में धारा 22 और धारा 35 के बाद नई धारा 22-A, 22-B और 35-A जोड़ी जाएंगी। धारा 22-A के तहत कुछ श्रेणियों के दस्तावेजों के पंजीकरण पर रोक लगाई जा सकेगी। धारा 22-B के तहत पंजीकरण से पहले अचल संपत्ति की पहचान सुनिश्चित करने के प्रावधान किए गए हैं। वहीं धारा 35-A(1) के अनुसार यदि धारा 17(1) के अंतर्गत आने वाली अचल संपत्ति के पंजीकरण के लिए प्रस्तुत लिखतों के साथ स्वामित्व, अधिकार, पहचान, विधिपूर्ण कब्जा या अंतरण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज संलग्न नहीं होंगे, जिन्हें राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से निर्धारित करेगी, तो पंजीकरण अधिकारी उस दस्तावेज को पंजीकृत करने से इनकार कर सकेगा। इस व्यवस्था के लागू होने से फर्जी और विवादित संपत्तियों की रजिस्ट्री पर प्रभावी रोक लगेगी और आम लोगों को अनावश्यक कोर्ट केस तथा अन्य परेशानियों से राहत मिलेगी। उल्लेखनीय है कि अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार के संशोधन कर ऐसे मामलों पर नियंत्रण का प्रयास किया गया है। यह प्रस्ताव भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची की प्रविष्टि-6 के अंतर्गत लाया गया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इससे संबंधित विधेयक को विधानमंडल में प्रस्तुत कर उसकी स्वीकृति प्राप्त की जाएगी।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में विकास प्राधिकरणों, आवास एवं विकास परिषद तथा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों की संपत्तियों के डिफॉल्टरों के लिए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) 2026 लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस योजना का उद्देश्य लंबे समय से बकाया धनराशि की वसूली करना और डिफॉल्टर आवंटियों को राहत देना है। वित्त मंत्री ने बताया कि विकास प्राधिकरणों और संबंधित संस्थाओं में संपत्तियों से जुड़े कुल 18,982 डिफॉल्टर प्रकरण हैं, जिनमें करीब 11,848.21 करोड़ रुपये की धनराशि बकाया है। इसी तरह मानचित्र स्वीकृति से जुड़े 545 डिफॉल्टर मामलों में लगभग 1,482.10 करोड़ रुपये की राशि लंबित है। इन बकाया रकम की वसूली के लिए ओटीएस योजना लाई जा रही है। योजना के तहत सभी प्रकार की संपत्तियों (आवासीय, व्यावसायिक तथा अन्य आवंटित संपत्तियों) पर यह योजना लागू होगी। इसमें नीलामी या आवंटन पद्धति से दी गई संपत्तियां भी शामिल होंगी। साथ ही सरकारी संस्थानों, स्कूलों, चैरिटेबल संस्थाओं और अन्य संगठनों को आवंटित संपत्तियों पर भी यह योजना लागू होगी। मानचित्र स्वीकृति से जुड़े डिफॉल्टर मामलों को भी इसमें शामिल किया गया है। ओटीएस योजना के तहत डिफॉल्टर आवंटियों से केवल साधारण ब्याज लिया जाएगा और दंड ब्याज पूरी तरह माफ किया जाएगा। योजना के लिए आवेदन करने की अवधि तीन माह होगी। प्राप्त आवेदनों का निस्तारण भी तीन माह के भीतर किया जाएगा। योजना की जानकारी सभी डिफॉल्टरों को ईमेल, एसएमएस और पत्र के माध्यम से दी जाएगी। भुगतान की व्यवस्था भी तय की गई है। यदि ओटीएस के बाद देय राशि 50 लाख रुपये तक … Read more

नए शहरों के विकास को रफ्तार, 8 शहरों को पहले चरण के लिए ₹425 करोड़

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत प्रदेश के आठ शहरों के विकास के लिए ₹425 करोड़ की धनराशि स्वीकृत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस योजना का उद्देश्य तेजी से बढ़ रही शहरी आबादी को ध्यान में रखते हुए नए शहरों का सुनियोजित और सुव्यवस्थित विकास करना तथा लोगों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार बरेली, वाराणसी, उरई, चित्रकूट, बांदा, प्रतापगढ़, गाजीपुर और मऊ में नए शहरों के समग्र विकास के लिए सीड कैपिटल के रूप में यह धनराशि जारी की जाएगी। योजना के तहत भूमि अर्जन में आने वाले खर्च का अधिकतम 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार सीड कैपिटल के रूप में उपलब्ध कराती है, जिसे अधिकतम 20 वर्ष की अवधि के लिए दिया जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के लिए कुल ₹3000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें से पहले चरण में ₹425 करोड़ जारी किए जाएंगे।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट शुरू होने की ओर एक और कदम, एयरोड्रम लाइसेंस सीएम योगी को सौंपा गया

लखनऊ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर भारत सरकार की ओर से जारी एयरोड्रम लाइसेंस प्रस्तुत किया। इसके साथ ही जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम पूरा हो गया है। इस लाइसेंस के बाद अब एयरपोर्ट के उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन समेत वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री को परियोजना की प्रगति और आगामी चरणों की जानकारी भी दी। अधिकारियों के अनुसार एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद अब नियामकीय स्वीकृतियों की अंतिम प्रक्रिया जारी है। एयरपोर्ट का एयरोड्रम सिक्योरिटी प्रोग्राम इस समय ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी के पास समीक्षा के लिए लंबित है। सुरक्षा से जुड़ी यह मंजूरी मिलते ही एयरपोर्ट प्रबंधन सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर औपचारिक उद्घाटन और वाणिज्यिक संचालन की तिथि तय करेगा। गौतमबुद्ध नगर के जेवर में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा है। इस एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है, जहां स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का समन्वय देखने को मिलेगा। एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन हैं। एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में एक रनवे और एक यात्री टर्मिनल भवन बनाया गया है, जिसकी क्षमता प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ 20 लाख यात्रियों की होगी। दूसरे चरण में क्षमता बढ़ाकर 3 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाई जाएगी। तीसरे और चौथे चरण में विस्तार के बाद कुल क्षमता 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल लगभग 1.38 लाख वर्गमीटर है, जिसमें 48 चेक इन काउंटर, 9 सुरक्षा जांच लेन और 9 इमिग्रेशन काउंटर बनाए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय लाउंज भी विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा यहां 10 एयरोब्रिज और 28 विमान पार्किंग स्टैंड की व्यवस्था की गई है। रनवे पर प्रति घंटे लगभग 30 उड़ानों के संचालन की क्षमता विकसित की गई है। एयरपोर्ट परिसर में आधुनिक कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब भी तैयार किया जा रहा है। प्रारंभिक चरण में इसकी क्षमता लगभग 2.5 लाख टन कार्गो प्रतिवर्ष होगी, जिसे आगे चलकर 15 लाख टन तक बढ़ाया जाएगा। तकनीकी दृष्टि से भी यह एयरपोर्ट अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। यहां डिजीयात्रा आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और डिजिटल पैसेंजर प्रोसेसिंग सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रहीं हैं ताकि यात्रियों को तेज और सहज यात्रा का अनुभव मिल सके। सतत विकास को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट को नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है। परिसर में सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर में हवाई यातायात का दबाव कम होगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

Yogi Adityanath कैबिनेट का बड़ा निर्णय: यूपी में अब रजिस्ट्रेशन के बिना नहीं चलेंगी Ola-Uber सेवाएं

लखनऊ  योगी सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा व सुविधा को देखते हुए परिवहन से जुड़ा बड़ा फैसला लिया है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में बताया कि यूपी में अब ओला व उबर को भी पंजीकरण कराना होगा। परिवहन मंत्री ने मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 93 का जिक्र किया और बताया कि भारत सरकार ने 1 जुलाई 2025 को नियमावली में संशोधन किया है। भारत सरकार के नियम को उत्तर प्रदेश भी अपनाएगा। ओला-उबर पर पहले नियंत्रण नहीं था, लेकिन अब इन्हें भी पंजीकरण कराना पड़ेगा। आवेदन, लाइसेंस और रिन्युअल शुल्क भी देना होगा। कौन गाड़ी चला रहा है, यह अभी तक हम नहीं जान पाते थे। इनका ड्राइवर का मेडिकल, पुलिस वेरिफिकेशन तथा फिटनेस टेस्ट आदि भी कराएंगे। परिवहन मंत्री ने बताया कि अब यूपी में बिना पंजीकरण शुल्क, फिटनेस, मेडिकल टेस्ट, पुलिस वेरिफिकेशन के गाड़ी नहीं चला पाएंगे। अधिसूचना जारी होने के बाद यह लागू हो जाएगी। आवेदन की फीस 25 हजार रुपये होगी, जबकि 50-100 या इससे अधिक गाड़ी चलाने वाली कंपनी की लाइसेंसिंग फीस पांच लाख रुपये होगी। रिन्युअल हर पांच साल पर होता रहेगा। रिन्युअल के लिए पांच हजार रुपये देना होगा। परिवहन मंत्री ने बताया कि ऐसा ऐप भी विकसित करेंगे, जिससे समस्त जानकारी पब्लिक डोमेन में रहे। इसके तहत ड्राइवर आदि की समस्त जानकारी भी प्राप्त होगी। अब प्रदेश के हर गांव तक पहुंचेगी बस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोकभवन में कैबिनेट बैठक हुई। वित्त व संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने पत्रकार वार्ता में बताया कि बैठक में कुल 31 प्रस्ताव आए, जिसमें से 30 प्रस्तावों पर कैबिनेट ने स्वीकृति दी। योगी सरकार ने ग्रामीणों के हित को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने ‘मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026’ को स्वीकृति दी। इस योजना के माध्यम से अब उत्तर प्रदेश के हर गांव तक बस पहुंचेगी। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 के संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अभी तक 12,200 गांवों तक बसें नहीं पहुंच रही थीं, लेकिन नई पॉलिसी के तहत उत्तर प्रदेश की सभी 59,163 ग्राम सभाओं तक बसें पहुंचेंगी। इन बसों को परमिट व टैक्स से मुक्त रखा गया है। बड़ी ग्रामीण आबादी लाभान्वित इससे प्रदेश की बड़ी ग्रामीण आबादी लाभान्वित होगी। ये बसें चलाने की अनुमति निजी लोगों को मिलेगी। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित होगी, जिसमें सीडीओ, एसपी, एआरटीओ, एआरएम सदस्य होंगे। ये बसें रात में गांव में ही रुकेंगी। सुबह ब्लॉक व तहसील होते हुए ये बसें सुबह 10 बजे तक जनपद मुख्यालय तक पहुंचेंगी। इस सेवा का लाभ विद्यार्थियों के अलावा कचहरी, ऑफिस या अपना उत्पाद शहर में बेचने जाने वाले लोगों को भी मिलेगा। कई गांवों में ऐसी सड़कें हैं, जहां बड़ी बसें टर्न होने में परेशानी होती है। 12,200 में से 5000 ऐसे गांव हैं, जहां बड़ी बसें टर्न नहीं हो सकतीं। इसलिए ये छोटी बसें होंगी, जिनकी अधिकतम लंबाई सात मीटर और अधिकतम सीट क्षमता 28 होगी।  

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