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मध्य प्रदेश में कांग्रेस बनाएगी मोहल्ला समितियां, 35-40 घरों के लिए तैनात होगा एक कार्यकर्ता

भोपाल मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी संगठन को विस्तार और मजबूती देने के लिए अब मोहल्ला समितियां बनाएगी। 35 से 40 घरों के लिए एक कार्यकर्ता की तैनाती की जाएगी। पार्टी की प्राथमिक इकाइयां वार्ड, पंचायत, बूथ कमेटियां होंगी। मप्र विधानसभा के 16 दिसंबर से प्रारंभ होने वाले शीतकालीन सत्र के दौरान भोपाल में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। पार्टी संगठन की मजबूती और आगामी कार्यक्रमों को तय करने के लिए गठित समिति की पहली बैठक में यह निर्णय लिया गया। संगठन को मजबूत करने की कवायद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने संगठन को मैदानी स्तर पर मजबूती देने और बैठकों, धरना, प्रदर्शन, आंदोलनों का एजेंडा तय करने के लिए वरिष्ठ नेताओं की समिति बनाई है। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में इसकी मंगलवार को पहली बैठक हुई। नए लोगों को जोड़ने पर जोर प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक, समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह और अशोक सिंह ने बताया कि 21 और 22 नवंबर को प्रदेश कार्यसमिति की बैठक होगी। इसमें संगठन के विस्तार को चर्चा की जाएगी। जितने भी पदाधिकारी बनाए गए हैं, उन सभी को जिला, ब्लॉक और विधानसभा क्षेत्र का प्रभार दिया जाएगा। नए लोगों को पार्टी से जोड़ने की रूपरेखा तैयार की जाएगी। जनहित के मुद्दों पर प्रदर्शन की तैयारी उन्होंने बताया कि पार्टी की प्राथमिक इकाई वार्ड, पंचायत और बूथ कमेटियां होंगी। मोहल्ला कमेटी का गठन किया जाएगा। 35-40 घरों के बीच एक कार्यकर्ता तैनात किया जाएगा जो पार्टी की रीति-नीति और कार्यक्रमों को जनता के बीज पहुंचाने का काम करेगा। प्रदेश में महिलाओं, बच्चियों, अनुसूचित जाति-जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ हो रहे अन्याय, किसानों से वादाखिलाफी, कानून व्यवस्था की बदतर स्थिति, बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।

प्रदेश में जैविक खेती के लिए तीन हजार से अधिक क्लस्टर बने, एक लाख से अधिक किसानों द्वारा organic farming की जा रही

भोपाल  देश में कुल जैविक उत्पाद का 40 प्रतिशत हिस्सा देने वाला मध्य प्रदेश जैविक खेती के मामले में नए कीर्तिमान की ओर है। इसका रकबा 17 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 20 लाख हेक्टेयर करने की तैयारी चल रही है। जैविक खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने प्रति हेक्टेयर पांच-पांच हजार रुपये दिए जाएंगे। इसमें भारत सरकार से भी मदद मिलेगी। साथ ही जैविक उत्पादों की बिक्री के लिए बाजारों में स्टाल लगाने के साथ खुदरा व्यापारियों से जोड़ने की पहल भी की जाएगी। बता दें, देश में कुल 65 लाख हेक्टेयर में जैविक खेती होती है। मध्य प्रदेश के मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल, सिंगरौली सहित अन्य कई जिलों में परंपरागत रूप से जैविक खेती होती है। खेतों में डाले जा रहे रासायनिक उवर्रक और कीटनाशकों के कारण खाद्यान्न और भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है। यही कारण है कि जैविक उत्पादों की मांग बढ़ती जा रही है। किसानों के लिए फायदेमंद जैविक खेती किसानों के लिए आर्थिक तौर पर लाभदायक भी है, इसलिए इसे प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए वर्ष 2011 में जैविक खेती नीति बनाई गई। जैविक उत्पाद प्रमाणीकरण के साथ अन्य व्यवस्थाएं बनाई गईं। अब इसे प्राकृतिक खेती से जोड़कर और आगे बढ़ाने की कार्ययोजना बनाई गई है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में जैविक खेती के लिए तीन हजार से अधिक क्लस्टर बने हैं। अब इसे और विस्तार दिया जाएगा। जैविक उत्पादों का कराया जाएगा प्रमाणीकरण जैविक खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने प्रति हेक्टेयर पांच-पांच हजार रुपये तीन वर्ष तक दिए जाएंगे। उन्हें कहीं से भी सामग्री लेने की छूट रहेगी। तीन वर्ष तक किसान द्वारा की जाने वाली खेती का पूरा रिकार्ड रखा जाएगा। जैविक उत्पाद का प्रमाणीकरण भी करवाया जाएगा, ताकि उपज का अच्छा मूल्य मिले। साथ ही उपज विक्रय के लिए अन्य राज्यों के बाजारों में स्टाल लगाने के साथ खुदरा व्यापारियों से किसानों को जोड़ने की पहल की जाएगी। जैविक खाद की आवश्यकता की पूर्ति के लिए सहकारी स्तर पर समिति बनाना भी प्रस्तावित है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें गोपालन से जोड़ने की भी तैयारी है। प्राकृतिक खेती करने पर देसी गाय पालन के लिए 900 रुपये प्रतिमाह देने की योजना बनाई गई है। ये फसलें उगाई जा रहीं प्रदेश में अभी एक लाख से अधिक किसानों द्वारा जैविक खेती की जा रही है। प्रमुख उपज में सोयाबीन, गेहूं, धान, चना, मसूर, अरहद, उड़द, बाजरा, रामतिल, मूंग, कपास, कोदो-कुटकी आदि शामिल हैं। इन जिलों में अधिक जैविक खेती मंडला, डिंडौरी, शहडोल, सिंगरौली, बालाघाट, छिंदवाड़ा, बैतूल, कटनी, उमरिया, अनूपपुर, उमरिया, दमोह, सागर, आलीराजपुर, झाबुआ, खंडवा, सीहोर, श्योपुर और भोपाल

वन सुरक्षा श्रमिकों ने वन परिक्षेत्र अधिकारी टिकरिया को ब्याज की राशि एवं नियमित कार्य पर रखने हेतु दिये लिखित आवेदन

मंडला मंडला के जिले अंतर्गत वन परिक्षेत्र टिकरिया फड़की बीट सिवनी माल के वन सुरक्षा श्रमिकों ने वन विभाग को ब्याज की राशि एवं नियमित कार्य पर रखने हेतु 22/10/2024 को पोस्ट आफिस निवास द्वारा रजिस्ट्री के माध्यम से लिखित आवेदन दिए हैं।  लिखित आवेदन के माध्यम से उन्होंने साफ-साफ कहा हम आवेदकगणों की विनम्र पूर्वक निवेदन है कि हमारे द्वारा किए गए वन सुरक्षा श्रमिक  के कार्य पर वर्ष 2007 में नियोजित किए गए थे,और हमने अक्टूबर 2011 तक निरंतर कार्य किया है। जिसमें फरवरी 2009 से अक्टूबर 2011 तक की अवधि में लंबित समय से मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया, जिससे कई बार विभाग के जिम्मेदारों को आवेदन निवेदन किया गया। परंतु भुगतान न किए जाने पर व्यथित होकर माननीय श्रम न्यायालय जबलपुर के समक्ष याचिका क्रमांक 40/पी. डब्ल्यू एक्ट/2014 प्रस्तुत की गई। जिस पर माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 28/10/ 2015 को राशि 2.69.280 रू. का भुगतान हेतु आदेशित किया गया था।        जिसके बाद भी उक्त आदेश का पालन न किए जाने पर माननीय उच्च न्यायालय मुख्य खंडपीठ जबलपुर में याचिका MP/3561/2023 प्रस्तुत किए जाने पर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 18/07/2023 को आदेशित किया गया। उक्त भुगतान हेतु जिस पर अक्टूबर 2024 में सिर्फ राशि 2.69.280/- रू. का भुगतान किया गया है। जबकि उच्च न्यायालय जबलपुर जानकारी के मुताबिक अक्टूबर 2011 से अक्टूबर 2024 तक की ब्याज 12% प्रतिवर्ष के हिसाब से राशि 4 लाख 52,390/-रू. का भुगतान होना था जिसे नहीं किया गया है। अतः माननीय महोदय जी से विनम्र निवेदन है कि ब्याज की राशि 4 लाख  52,390/-रू. का भुगतान अति शीघ्र हम वन सुरक्षा श्रमिकों को किया जाए तथा साथ ही पुनः कार्य में रखते हुए वर्ष 2007 से निरंतर कार्य सेवा मानी जाए, अन्यथा हमें विवश होकर माननीय न्यायालय के शरण में न्याय हेतु जाना पड़ेगा। आवेदकगण……. 1. संजय चौधरी/पिता उत्तम लाल चौधरी 2. सुवेंद्र कुमार/ पिता बजरू तेकाम 3. सगनी बाई बेवा/पति जगत सिंह मरावी 4. सिंधी सिंह/पिता बुद्धू सिंह कुशराम

आयुष मंत्री परमार की अध्यक्षता में हुई “पुरस्कार चयन समिति” की बैठक

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय में आयुष विभाग अंतर्गत “पुरस्कार चयन समिति” की बैठक हुई। बैठक में पंडित उद्धवदास मेहता वैद्यशास्त्री आयुर्वेद सेवा सम्मान पुरस्कार वर्ष-2022 के लिए “पुरस्कार चयन समिति” ने व्यापक विचार मंथन किया। बैठक में सर्वसम्मति से वर्ष-2022 के पुरस्कार के लिए नाम का चयन किया गया। आयुष मंत्री परमार ने पंडित उद्धवदास मेहता वैद्यशास्त्री आयुर्वेद सेवा सम्मान पुरस्कार वर्ष-2023 के लिए अनुशंसा समिति की बैठक शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। ज्ञातव्य है कि उक्त पुरस्कार वर्ष-2023 के लिए भी विज्ञापन जारी किया जा चुका है। बैठक में प्रमुख सचिव आयुष डी.पी. आहूजा एवं आयुक्त आयुष श्रीमति आर. उमा माहेश्वरी सहित समिति के सदस्य डॉ. एस.एन. पांडे (उज्जैन) एवं वैद्य प्रभाकर चतुर्वेदी सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।  

बीयू के ज्ञान-विज्ञान भवन की बाहरी लोगों को विवाह समारोह की पार्टी हो रही बुकिंग के चलते परिसर में आए दिन गंदगी का अंबार लगा

भोपाल राजधानी में स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय(बीयू) में ज्ञान-विज्ञान भवन का निर्माण किया गया था। इसके पीछे उद्देश्य यही था कि विवि के होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगोष्ठी,कार्यशाला और दीक्षा समारोह का आयोजन ज्ञान-विज्ञान भवन में किया जा सके। साथ ही विवि में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों के यहां होने वाले समारोह के लिए जगह उपलब्ध हो सके, लेकिन विवि प्रबंधन इस उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रहा है। आलम यह है कि विवि के दीक्षा समारोह से लेकर अन्य कार्यक्रम कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कंवेंशन सेंटर या अन्य किसी सभागृह में किए जाते हैं। इसकी वजह से ऐसे कार्यक्रमों में लाखों रुपये खर्च होते हैं। वहीं, बीयू के ज्ञान-विज्ञान भवन की बाहरी लोगों को विवाह समारोह और जन्मदिन की पार्टी के लिए बुकिंग की जाती है। इस कारण विवि परिसर में आए दिन गंदगी का अंबार लग जाता है। बता दें, कि दो दिन पहले ज्ञान-विज्ञान भवन के खुले जगह पर जन्मदिन की पार्टी हुई थी। मगर, अब तक वहां कचरा फैला हुआ है। इसके लिए नगर निगम विवि प्रबंधन को नोटिस भी जारी किया है। वहीं, विवि के अधिकारियों का कहना है कि ज्ञान-विज्ञान भवन में निर्माण कार्य जारी है। इस कारण वहां विवि का कोई भी समारोह आयोजित नहीं किया जाता है। ज्ञान-विज्ञान भवन में निर्माण कार्य जारी है। इस कारण वहां विवि का कोई भी समारोह या कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाता है। – आईके मंसूरी, कुलसचिव, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल सुरक्षा निधि जमा होती है विवि प्रबंधन का कहना है कि ज्ञान-विज्ञान भवन के रख-रखाव के लिए किराये पर दिया जाता है। इसके लिए आयोजक से सुरक्षा निधि 15 हजार रुपये ली जाती है और साफ-सफाई की जिम्मेदारी भी उनकी ही होती है। विवि के कर्मचारियों को रियायती दरों पर देते हैं ज्ञान-विज्ञान के अंदर के हॉल को एकेडमिक कार्य के लिए दिया जाता है। इसके लिए करीब 90 हजार रुपये शुल्क लिया जाता है और सुरक्षा निधि के तौर पर 15 हजार रुपये जमा कराए जाते हैं। साथ ही ज्ञान-विज्ञान भवन के खुले मैदान को कर्मचारियों को 29 हजार रुपये में और बाहरी लोगों को 70 हजार रुपये में विवाह समारोह के लिए दिया जाता है।

फिल्म “द साबरमती रिपोर्ट” टैक्स फ्री : आदेश जारी

भोपालT राज्य शासन ने धीरज सरना द्वारा निर्देशित हिन्दी फीचर फिल्म “द साबरमती रिपोर्ट” को मध्यप्रदेश में ट्रैक्स फ्री कर दिया है। इस संबंध में आदेश जारी कर दिये गये हैं। मध्यप्रदेश में फिल्म को प्रदर्शन की अवधि 21 नवम्बर से 20 दिसम्बर 2024 तक के लिये राज्य माल और सेवा कर (एसजीसएसटी) के समतुल्य राशि की प्रतिपूर्ति करते हुए दर्शकों को इस राशि की छूट प्रदान की है। फिल्म के प्रदर्शन के लिए संबंधित सिनेमाघरों/मल्टीफ्लेक्स में फिल्म के लिए राज्य माल और सेवा कर (एसजीएसटी) की धन राशि को घटाकर दर्शकों को टिकट विक्रय किया जाएगा। फिल्म प्रदर्शन के लिए संबंधित सिनेमाघरों / मल्टीफ्लेक्स के प्रचलित सामान्य प्रवेश शुल्क में वृद्धि नहीं की जा सकेगी। सेवा प्रदाय पर देय एवं भुगतान किए गए राज्य माल और सेवा कर (एसजीएसटी) के अंश के बराबर की राशि की राज्य शासन द्वारा प्रतिपूर्ति की जाएगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले “द साबरमती रिपोर्ट” फिल्म के कलाकार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आज मुख्यमंत्री निवास में “द साबरमती रिपोर्ट” फिल्म के कलाकार विक्रांत मैसी, सुराशि खन्ना एवं फिल्म निर्माण से जुड़े अन्य सदस्यों ने भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फिल्म के कलाकारों को एक उत्कृष्ट फिल्म में अभिनय के लिए बधाई दी। इस अवसर पर फिल्म कलाकारों के दल द्वारा गत वर्ष प्रारंभ हुए फिल्मांकन के बाद से अब तक के अनुभव और संस्करण भी साझा किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलाकारों का अंगवस्त्रम् भेंट करने के साथ मिठाई खिलाकर स्वागत किया। फिल्म के कलाकारों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को उनके द्वारा “जाणता राजा” और अन्य नाटकों में किए गए अभिनय का उल्लेख करते हुए कला जगत से जुड़े रहने के लिए बधाई दी।  

नक्सली मुठभेड़ में घायल जवान को पीएमयोजना में किया एयर लिफ्ट

नक्सली मुठभेड़ में घायल जवान को पीएमयोजना में किया एयर लिफ्ट सीएम डॉ. यादव के निर्देशानुसार दिल्ली के मेदांता हॉस्पिटल में होगा उपचार भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार रविवार को बालाघाट जिले के रूपझर क्षेत्र में नक्सलियों से हुई मुठभेड़ में हॉक फोर्स के घायल जवान शिवकुमार शर्मा का अब दिल्ली में होगा उपचार। बुधवार दोपहर में जवान शर्मा को पीएमउपचार योजना के तहत गोंदिया से एयर लिफ्ट किया गया। सीएमएचओ डॉ. मनोज पाण्डे ने बताया कि आरक्षक शर्मा का उपचार दिल्ली में कराया जायेगा जिससे वे यथाशीघ्र स्वस्थ हो सके।  

ग्रेजुएशन में अब नहीं लगेंगे 3 साल, यूजीसी अध्यक्ष ने दी जानकारी

नई दिल्ली ग्रेजुएशन पूरा करने के लिए छात्र-छात्राओं को अब पूरे तीन साल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। स्टूडेंट्स चाहें तो इसे ढाई साल में भी पूरा कर सकते हैं।विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष जगदेश कुमार ने चेन्नई के एक कॉलेज में इस संबंध में हाल ही में आयोजित हुए एक दिवसीय सम्मलेन में यह जानकारी दी है। यूजीसी अध्यक्ष ने कहा कि, शिक्षा निकाय स्टूडेंट्स के लिए तेजी से डिग्री को पूरा करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। इसी क्रम में स्टूडेंट्स को तीन साल का पाठ्यक्रम ढाई में और चार साल का पाठ्यक्रम तीन में पूरा करने की अनुमति दी जाएगी। साथ ही इसे अगले शैक्षणिक सत्र से लागू करने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि, ‘आने वाले वर्षों में, जो छात्र सक्षम हैं, वे कम अवधि में डिग्री कार्यक्रम पूरा कर सकते हैं। हमारा अनुमान है कि ऐसे स्टूडेंट्स को छह महीने से एक साल तक का फायदा हो सकता है। हालांकि, यूजीसी अध्यक्ष ने यह भी बताया कि, जो छात्र- छात्राएं अपनी पढ़ाई पूरी करने में अधिक समय लेना चाहते हैं तो उन्हें वह भी दिया जाएगा। साथ ही उन्हें अपने पाठ्यक्रमों के दौरान ब्रेक लेने की अनुमति दी जाएगी। आईआईटी मद्रास के निदेशक ने दिया है यह सुझाव यह योजना आईआईटी मद्रास के निदेशक वी कामाकोटी द्वारा की गई सिफारिश पर आधारित है। यूजीसी अध्यक्ष ने कहा कि इस संबंध में जल्द डिटेल में दिशानिर्देश जल्द ही जारी किये जाएंगे। बता दें कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को लागू करने के लिए आईआईटी मद्रास में एक दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में यूजीसी अध्यक्ष समेत कई संस्थानों के शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया। न्यू एजुकेशन पॉलिसी के बारे में बात करते हुए यूजीसी अध्यक्ष जगदीश कुमार ने कहा कि, इससे शिक्षा प्रणाली में बदलाव आएगा जिससे छात्रों को लाभ होगा। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा को अर्फोडेबल बनाने की जिम्मेदारी उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) पर है। इससे इतर बात करें तो यूजीसी नेट दिसंबर परीक्षा के लिए जल्द ही नोटिफिकेशन जारी हो सकता है। संभावना जताई जा रही है कि आगामी कुछ दिनों के भीतर ही एग्जाम की अधिसूचना जारी करके आवेदन प्रक्रिया शुरू हो सकती है। हालांकि, सटीक अपडेट तो अभ्यर्थी ऑफिशियल वेबसाइट पर सूचना जारी होने के बाद ही मालूम कर पाएंगे।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट की तैयारियां शुरू, आमजन से सुझाव आमंत्रित : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप प्रदेश के चहुँमुखी विकास और जन-कल्याण को दृष्टिगत रखते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट की तैयारियां शुरू कर दी गई है। बजट को अधिक लोक कल्याणकारी बनाने के लिये आमजन के सुझाव आमंत्रित किये जा रहे हैं। प्रदेश का आम नागरिक राज्य के बजट को प्रभावी बनाने अपने सुझाव साझा कर सकेंगे। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत @2047 के लक्ष्य में मध्यप्रदेश भी अपना योगदान देने के लिये अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में विकसित मध्यप्रदेश @2047 का विजन तैयार किया जा रहा है। निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के आगामी वित्तीय वर्ष 2025-26 का लोक कल्याणकारी बजट तैयार किया जायेगा। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया कि राज्य का बजट प्रदेश के सर्वांगीण विकास व आम नागरिकों के खुशहाल जीवन को साकार करने, सतत् विकास की गति बनाये रखने, आधारभूत सुविधाओं का विकास व सभी वर्गों के कल्याण में महत्वपूर्ण साधन रहा है। समाज के सभी वर्गों से प्राप्त सुझावों, मार्गदर्शन, प्राथमिकताओं आदि से प्रदेश का बजट, सर्वांगीण विकास की दिशा में बढ़ाया गया एक और महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। प्रदेश की राजस्व आय में वृध्दि के सुझाव भी बजट को और अधिक लोक कल्याणकारी स्वरूप देने में सहयोगी होगे। MPMYGov पर सुझाव एवं मार्गदर्शन आमंत्रित किये गये हैं। सुझाव 15 जनवरी, 2025 तक लिये जायेंगे। सुझावों के साथ आम नागरिक अपना नाम, शहर, जिला, पिनकोड एवं मोबाइल नम्बर भी अंकित करे। “आमजन निम्न मुख्य क्षेत्रों पर दे सकेंगे सुझाव”     हरित ऊर्जा जैसे बायो गैस, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा एवं सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने हेतु संभावित स्थलों के संबंध में।     विद्युत ऊर्जा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार जैसे-स्मार्ट मीटर, एव्हरेज बिल की जगह एक्च्युअल बिल, विद्युत के पुराने तारों के स्थान पर केबल तार स्थापित करने, सडकों के मध्य आने वाले पोल को प्रतिस्थापित करने, अस्थाई विद्युत कनेक्शनों को स्थाई विद्युत कनेक्शनों में परिवर्तित करने हेतु तथ्यात्मक सुझाव।     परिवहन के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार हेतु सडकों (जिला मार्ग, राज्य मार्ग एवं अन्तर्राज्यीय मार्ग) के विकास हेतु तथ्यात्मक सुझाव एवं ई-परिवहन को बढावा देने हेतु सुझाव/विचार/प्रस्ताव।     ग्रामीण विकास हेतु परंपरागत व्यवसायों के पुनर्रुध्दार, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता, पेयजल एवं अधोसंरचनात्मक विकास हेतु तथ्यात्मक सुझाव।     गौ-वंश के संवर्धन, सरंक्षण एवं गौचारण भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने हेतु सुझाव।     मत्स्य विकास, मुर्गीपालन, दुग्ध उत्पादन, कृषि विकास, उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण को बढावा देने हेतु उत्पादन एवं निर्यात के संबंध में सुझाव।     प्रदेश में प्रवाहित समस्त नदियों एवं जल स्त्रोतों के संरक्षण, संवर्धन एवं पुनर्रुध्दार हेतु सुझाव।     प्रदेश के वनों, वन्य जीवों तथा जैव-विविधता के संरक्षण, संवर्धन एवं पुनर्रुध्दार तथा वन ग्रामों में निवासरत जन जीवन की मूलभूत सुविधाओं के विकास हेतु सुझाव।     स्थानीय पर्यटन को बढावा दिये जाने हेतु मध्यप्रदेश में स्थित धार्मिक, नैसर्गिक (प्राकृतिक), ऐतिहासिक धरोहरों/स्थलों के विकास हेतु तथ्यात्मक सुझाव।     शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर अधोसंरचनात्मक विकास हेतु सरकार के अतिरिक्त आमजनों के द्वारा आर्थिक सहयोग प्राप्त किये जाने हेतु सुझाव।     रोजगार एवं उद्योग के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार हेतु क्षेत्र विशेष जैसे- जिला, ब्लॉक, नगर, ग्राम आदि में स्थापित किये जा सकने वाले उद्योग (निर्माण उद्योग, खाद्य प्र-संस्करण, कृषि उद्योग एवं फर्नीचर उद्योग, कुटीर एवं हथकरघा, टेक्सटाईल, खिलौना, स्टेशनरी, गृह निर्माण सामग्री, वनोपज प्र-संस्करण, औषधि निर्माण आदि)।     वोकल फॉर लोकल के अंतर्गत “एक जिला-एक उत्पाद” के लिए स्थानीय उत्पादों के उत्पादन एवं निर्यात हेतु सुझाव।     प्रदेश के पुराने शहरों में सड़को/गलियारों के चौड़ीकरण, ऐतिहासिक व पुरानें बाजारों के पुनर्विकास एवं अतिक्रमण/झुग्गी मुक्त शहरों की परिकल्पना हेतु सुझाव।     सड़क, पुल, पार्कों एवं अन्य अधोसंरचनात्मक विकास हेतु सुझाव।     जन स्वास्थ्य से संबंधित क्षेत्रों पर सुझाव।     महिला एवं बाल विकास से संबंधित क्षेत्रों पर सुझाव।     सामाजिक सुधार जैसे- दिव्यांगजन/भिखारियों/आवासहीन/बेसहारा जनों आदि के कल्याण हेतु सुझाव।     राजस्व संग्रहण को बढावा देने हेतु सुझाव।     प्रशासनिक सुधार से संबंधित सुझाव।     अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संबंधित सुझाव। यहां दिए जा सकेंगे सुझाव     MPMyGov Portal     Toll free no.: 0755-2700800     Email id: budget.mp@mp.gov.in     डाक से पत्राचार: संचालक (बजट) वित्तीय प्रबंध सूचना प्रणाली 218-एच, द्वितीय तल, वित्त विभाग, मंत्रालय, भोपाल, मध्यप्रदेश 462004  

आयुष्मान भारत योजना ने जरूरतमंद परिवारों को बीमारी के उपचार का एक मजबूत सहारा दिया, पुष्पा का भी बना आयुष्मान कार्ड

भोपाल सिंगरौली जिले के बैगा जनजाति के सभी परिवारों के लिए प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) किसी वरदान से कम नहीं है। केन्द्र सरकार द्वारा शुरू की गई इस कल्याणकारी योजना ने जरूरतमंद परिवारों को बीमारी के उपचार का एक मजबूत सहारा दे दिया है। इसी योजना के तहत एक छोटी बच्ची पुष्पा पुत्री कुमरशाह बैगा के परिजन के चेहरे पर आज राहत, संतोष और खुशियों की मुस्कान आ गई है। बैगा जनजाति प्रदेश की विशेष रूप से पिछड़ी जनजातीय समूह (पीवीटीजी) में आती है। पुष्पा बैगा के परिवार की माली हालत बेहद कमजोर है। बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने में उन्हें कई बाधाओं और दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इस महती योजना के कारण पुष्पा का परिवार अब निश्चिंत महसूस कर रहा है। सबके समर्पित प्रयासों से इस योजना का लाभ सभी बैगा परिवारों तक पहुंच रहा है। इसी दिशा में सिंगरौली में हुए एक शिविर में पुष्पा का भी आयुष्मान कार्ड बनाया गया। आयुष्मान कार्ड बनने से अब पुष्पा का परिवार उसकी चिकित्सा के खर्च को लेकर चिंतामुक्त हो चुका है। किसी भी गंभीर बीमारी या छोटी-बड़ी शारीरिक परेशानी में पुष्पा का इलाज अब 5 लाख रुपये तक सीमा में नि:शुल्क हो सकेगा। यह न केवल पुष्पा के परिवार के लिए, वरन् समाज के पिछड़े व कमजोर आय वर्ग के सभी परिवारों के लिए भी एक बड़ी राहत है। आयुष्मान कार्ड से मिले इस आर्थिक सुरक्षा कवर के कारण अब पुष्पा के माता-पिता अपने बच्चों के शारीरिक विकास एवं उनके भविष्य को लेकर अधिक आत्मनिर्भर महसूस कर रहे हैं। यह योजना उनके जीवन में स्थायित्व और सामाजिक सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में उभरकर सामने आयी है।  

राष्ट्रीय कैडेट कोर का 76वां स्थापना दिवस आज शौर्य स्मारक पर प्रात: 9:15 बजे आयोजित होगा

भोपाल राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) का 76वां स्थापना दिवस आज 21 नवम्बर गुरूवार को भोपाल के शौर्य स्मारक पर प्रात: 9:15 बजे आयोजित होगा। स्थापना दिवस पर स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। एनसीसी सशस्त्र बलों की युवा शाखा एनसीसी भारत के सशस्त्र बलों की युवा शाखा है। इसका राष्ट्रीय मुख्यालय नई दिल्ली में है। यह एक स्वैच्छिक संगठन है। इसमें सेना, नौसेना और वायुसेना शामिल है। एनसीसी का उद्देश्य देश के युवाओं को अनुशासित और देशभक्त नागरिक बनाना है। एनसीसी में हाई स्कूल, कॉलेज और विश्व विद्यालयों के विद्यार्थियों को शामिल कर परेड, छोटे हथियार और बुनियादी सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है। एनसीसी में शामिल होने के बाद कैडेटस् पर सक्रिय सैन्य सेवा में शामिल होने की कोई बाध्यता नहीं है। एनसीसी का आदर्श वाक्य है, एकता और अनुशासन। एनसीसी द्वारा प्रदेश में मुख्य रूप से एक भारत श्रेष्ठ भारत, थल सेना, वायु सेना, नौ सेना केम्प, रॉक क्लाईमिंग ट्रेनिंग केम्प और नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस शिविर 2024 का आयोजन किया गया है।  

मध्य प्रदेश के नए डीजीपी के लिए ये नाम हुए फाइनल! कौन है रेस में सबसे आगे?

भोपाल  मध्य प्रदेश को नया मुख्य सचिव मिलने के बाद अब प्रदेश में नए पुलिस महानिदेशक (New DGP Appointment) को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं हैं, क्योंकि वर्तमान डीजीपी सुधीर सक्सेना 30 नवंबर को सेवानिवृत हो रहे हैं. प्रदेश में नए डीजीपी पद पर नियुक्ति के लिए कई दावेदारों के नाम चर्चाओं में हैं, इनमें अरविंद कुमार रेस में सबसे आगे हैं. राज्य के 30वें डीजीपी के तौर पर सुधीर सक्सेना का कार्यकाल 30 नवंबर को समाप्त हो रहा है. 30 नवबर को सुधीर सक्सेना की विदाई तय है. लगभग ढाई साल से डीजीपी पद पर तैनात रहे सक्सेना के विदा होने के बाद प्रदेश का नया डीजीपी कौन होगा, इसकी चर्चाएं जोरों पर हैं.  रेस में आगे हैं अरविंद कुमार और कैलाश मकवाना गौरतलब है सेवानिवृत हो रहे पुलिस महानिदेशक सक्सेना का स्थान लेने वालों में कई नाम चर्चा में हैं. इनमें सबसे ऊपर होमगार्ड डीजी अरविंद कुमार और हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष कैलाश मकवाना का नाम है. इसके अलावा ईओडब्ल्यू के डीजी अजय शर्मा और प्रतिनियुक्ति पर गए आलोक रंजन, योगेश मुद्गल और पवन श्रीवास्तव भी रेस में है. 1988 और 1989 बैच के आईपीएस ही बन सकेंगे डीजीपी डीजीपी के रेस में शामिल सभी अधिकारी वर्ष 1988 और 1989 बैच के आईपीएस है. माना जा रहा है कि वरिष्ठता के आधार पर उनमें से कोई एक ही डीजीपी बनेगा, लेकिन शेष के सपने अधूरे रहने की संभावना ज्यादा है, ऐसा इसलिए क्योंकि सभी का सेवाकाल उस अवधि में पूरा हो जाएगा. राज्य को अक्टूबर माह में ही नया मुख्य सचिव मिला है. यह जिम्मेदारी अनुराग जैन के हाथ में है और अब राज्य को नया पुलिस महानिदेशक मिलने वाला है. इस तरह राज्य की सरकारी मशीनरी की कमान नए लोगों के हाथ में रहने वाली है. सक्सेना की विदाई परेड की कमांडर होगी डीजीपी की बेटी मौजूदी डीजीपी सुधीर सक्सेना 30 नवंबर को रिटायर होंगे. इस मौके पर होने वाली परेड की कमांडर सक्सेना की पुत्री आईपीएस सोनाक्षी होंगी. संभवत मध्य प्रदेश के पुलिस इतिहास में पहला ऐसा मौका होगा जब डीजीपी को विदाई देने वाली परेड की कमांडर उनकी ही बेटी होगी. इस आयोजन को भव्य रूप दिए जाने की तैयारी जारी है. अक्टूबर महीने में मध्य प्रदेश को मिला नया मुख्य सचिव उल्लेखनीय है राज्य को अक्टूबर माह में ही नया मुख्य सचिव मिला है. यह जिम्मेदारी अनुराग जैन के हाथ में है और अब राज्य को नया पुलिस महानिदेशक मिलने वाला है. इस तरह राज्य की सरकारी मशीनरी की कमान नए लोगों के हाथ में रहने वाली है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एमपी की मोहन सरकार ने केंद्र की भाजपा सरकार को नौ नामों का पैनल भेजा है. इसमें पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन अध्यक्ष से लेकर एडीजी लेवल के अधिकारियों के नाम शामिल हैं. इन नामों में से केंद्र सरकार तीन नामों को फाइनल करेगी. फिर उन तीन नामों में से एक नाम को राज्य सरकार डीजीपी के पद पर नियुक्त करेगी.

करंट से बचने विद्युत कर्मियों को बांटे गए हॉट सूट, बिजली लाइन पर काम करने वाले के लिए मददगार बनेगा

 जबलपुर  अब मप्र पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने ऐसा सूट बनाया है जिसे पहनकर बिजली कंपनी चालू लाइन पर भी काम कर लेंगे लेकिन उन्हें करंट नहीं लगेगा। इस सूट को कंपनी ने ‘हॉट सूट’ नाम दिया है। मप्र पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने प्रदेश भर के 100 से ज्यादा कर्मचारियों को हॉट सूट पहनकर चालू लाइन में काम करने की ट्रेनिंग दिलाई है। ये कर्मचारी बेंगलुरु से ट्रेनिंग लेकर आए हैं। हॉट सूट को पहनने वाले लाइनमैन को ‘हॉट मैन’ भी कहा जाता है। हाई वोल्टेज करंट में काम करना मुश्किल मप्र पावर ट्रांसमिशन कंपनी की लाइनों पर उच्च क्षमता का विद्युत प्रवाह होता है। बिजली उत्पादन इकाई से सीधे ग्रिड के माध्यम से ट्रांसमिशन लाइन पर 400 केव्ही, 220 केव्ही और 132 केव्ही वोल्टेज पर लाइन में करंट दौड़ता है। बिजली कर्मी उच्च दाब क्षमता की लाइनों पर काम कर पाएंगे     कई बार बिजली आपूर्ति बंद होने के बावजूद करंट दौड़ने लगता।     वजह से बिजली कर्मी करंट लगने की हादसे का शिकार हुए थे।     हॉट सूट पहनकर उच्च दाब क्षमता की लाइनों पर काम कर पाएंगे। 132 केवी से लेकन 400 केवी की लाइन पर बिना शटडाउन लिए काम कर सकते हैं बेंगलुरु में 20 दिन तक चली ट्रेनिंग अब तक प्रदेश के करीब 100 बिजली कर्मचारियों को हॉट सूट दिए गए हैं। पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के चीफ इंजीनियर (सीई) संदीप गायकवाड़ के मुताबिक- हॉट सूट पहनकर लाइनमैन 132 केवी से लेकन 400 केवी (किलो वोल्ट) तक की लाइन पर बिना शटडाउन लिए काम कर सकते हैं। बेंगलुरु से आए कर्मचारियों को ट्रेनिंग करीब 20 दिन तक चली अभी जो कर्मचारी बेंगलुरु से आए हैं, उनकी ट्रेनिंग करीब 20 दिन तक चली थी। आगे अब और भी कर्मचारियों को फिर से बेंगलुरु भेजने की तैयारी की जा रही है। हॉट लाइन सूट बना आकर्षण का केंद्र विज्ञान मेला में विशेष तकनीक और मटेरियल से बना इंसूलेटेड सूट के साथ प्रदर्शित एक मॉडल बेहद आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जिसे पहनकर बेयर हैंड तकनीक के द्वारा ट्रांसमिशन लाइनों के 400 के व्ही, 220 के व्ही ,132 के व्ही वोल्टेज लेवल पर चालू लाइन में सुधार कार्य किया जा सकता है। इसके अलावा सब स्टेशन में उपयोग आने वाले विभिन्न उपकरणों के माडल भी प्रदर्शित किए गए हैं ।

Railway का बड़ा ऐलान, 650 ट्रेनों में जोड़े जाएंगे 1000 डिब्बे, 1 लाख यात्रियों को होगा फायदा

भोपाल  रेलवे ने बीते तीन माह में ही विभिन्न ट्रेनों में सामान्य श्रेणी (जीएस) के लगभग छह सौ नए अतिरिक्त कोच जोड़े हैं। ये सभी कोच नियमित ट्रेनों में जोड़े गए हैं। नवंबर माह में जीएस श्रेणी के एक हजार से ज्यादा कोच लगभग साढ़े छह सौ नियमित ट्रेनों में जोड़े जाएंगे। रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (सूचना व प्रचार) दिलीप कुमार ने बताया कि सामान्य श्रेणी के यात्री रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं। इस श्रेणी के यात्रियों को अधिकतम सुविधा मुहैया कराने की दिशा में रेलवे विभिन्न दिशाओं में कार्य कर रहा है। इसके तहत जुलाई से अक्टूबर के तीन माह के दौरान जीएस श्रेणी के कुल 583 नए कोचों का निर्माण किया गया। साथ ही इन नवनिर्मित कोचों को 229 नियमित ट्रेनों में जोड़ा गया है। इससे रोजाना हजारों अतिरिक्त यात्रियों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि इस नवंबर माह तक जीएस श्रेणी के कुल एक हजार से ज्यादा नए कोच तैयार होकर रेलवे के बेड़े में जुड़ जाएंगे। इन्हें 647 नियमित ट्रेनों में जोड़ा जाएगा। इन डिब्बों के शामिल होने से रोजाना करीब एक लाख अतिरिक्त सवारी रेल यात्रा के सफर का लाभ उठा पाएंगे। नए जीएस कोचों का निर्माण तेजी से चल रहा कार्यकारी निदेशक ने बताया कि सामान्य श्रेणी के यात्रियों की सुविधाओं के मद्देनजर नए जीएस कोचों का निर्माण तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि अगले दो वर्षों में रेलवे के बेड़े में ऐसे गैर-वातानुकूलित सामान्य श्रेणी के दस हजार से ज्यादा जीएस कोचों को शामिल कर लिया जाएगा। इनमें छह हजार से ज्यादा जीएस कोच होंगे, जबकि बाकी डिब्बे स्लीपर श्रेणी के होंगे। इतनी बड़ी संख्या में नान एसी कोचों के शामिल होने से सामान्य श्रेणी के करीब आठ लाख अतिरिक्त यात्री रोजाना रेल यात्रा का सफर कर पाएंगे। जीएस श्रेणी के ये नवनिर्मित तमाम कोच एलएचबी के होंगे। हादसे की स्थिति में इन कोचों में नुकसान भी कम से कम होगा। यात्रियों की सुविधाओं में विस्तार सर्वोच्च प्राथमिकता रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (सूचना और प्रचार) दिलीप कुमार ने सामान्य श्रेणी के यात्रियों की नई सुविधाओं को लेकर जानकारी दी है। कार्यकारी निदेशक दिलीप कुमार ने बताया कि सामान्य कोच में यात्रा करने वाले यात्री रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल हैं। यात्रियों को ज्यादा से ज्यादा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में रेलवे लगातार कार्य कर रहा है। इसके तहत जुलाई से अक्टूबर तीन महीने में 583 नए जनरल कोच का निर्माण किया गया। इन कोचों को नियमित 229 ट्रेनों में जोड़ा गया है। ट्रेनों में जनरल कोच की संख्या बढ़ने से यात्रियों का सफर आसान हुआ है। साथ ही हर दिन अतिरिक्त यात्रियों की यात्रा सुखद हो रही है। एक हजार से ज्यादा नए सामान्य कोच होंगे तैयार     रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (सूचना और प्रचार) दिलीप कुमार ने आगे योजनाओं को लेकर बताया कि बताया कि नवंबर तक सामान्य श्रेणी के एक हजार से ज्यादा नए कोच तैयार होंगे। ये नए कोट जल्द रेलवे के बेड़े में शामिल हो जाएंगे। इन कोचों को नियमित 647 ट्रेनों में लगाया जाएगा। इन कोच के ट्रेनों में लगने से रोजाना करीब 1 लाख अतिरिक्त यात्री सफर का लाभ उठा पाएंगे। सामान्य कोच के यात्रियों का सफर होगा आसान कार्यकारी निदेशक ने आगे बताया कि सामान्य कोच से सफर करने वाले यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए नए जनरल कोच का निर्माण तेजी से किया रहा है। अगले दो साल में रेलवे के बेड़े में गैर-वातानुकूलित सामान्य श्रेणी के 10 हजार से ज्यादा जनरल कोच शामिल होंगे। इनमें छह हजार से ज्यादा सामान्य कोच और बाकी डिब्बे स्लीपर श्रेणी के होंगे। इतनी बड़ी संख्या में नॉन एसी कोचों के शामिल होने से सामान्य श्रेणी के करीब आठ लाख अतिरिक्त यात्री रोजाना रेल यात्रा का सफर कर पाएंगे। LHB डिजाइन के नए जनरल कोच रेलवे के बेड़े में शामिल नए जनरल कोच LHB डिजाइन के होंगे। इन डिब्बों से सफर आरामदायक और सुविधाजनक बनाने के साथ-साथ सुरक्षित बनाने में भी मदद करेगी। पारंपरिक आईसीएफ रेल बोगी के मुकाबले ये नए LHB कोच हल्के और बेहद मजबूत हैं। हादसे की स्थिति में इन बोगियों को नुकसान कम होगा।

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