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केंद्र में शिवराज सिंह चौहान की सफलता, मध्यप्रदेश के लिए घोषित हुआ सबसे बड़ा बजट

भोपाल   केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को 9वां बजट पेश किया। इस बजट में कई राज्यों को बड़ी सौगातें दी गई हैं। इसमें के टू और थ्री टियर शहरों के इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 12 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। जिसमें मध्यप्रदेश के 10 शहरों को फायदा मिल सकता है। वहीं, मोदी सरकार की कैबिनेट में शामिल प्रदेश के 6 मंत्रियों में सबसे अधिक बजट शिवराज सिंह चौहान के विभाग को मिला है। केंद्र में शिवराज का जलवा कायम मध्यप्रदेश कोटे से मोदी सरकार की कैबिनेट में 6 मंत्री शामिल हैं। जिसमें शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, डीडी उइके, वीरेंद्र कुमार खटीक और सावित्री ठाकुर लोकसभा सदस्य हैं। वहीं, एल मुरुगन एमपी से राज्यसभा के सदस्य हैं। सभी मंत्रियों के विभाग की तुलना करें तो उसमें शिवराज के कृषि और ग्रामीण को सबसे ज्यादा बजट मिला है। शिवराज के दो विभागों को इतना बजट केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को कृषि एवं किसान कल्याण के लिए 130561.38 करोड़ और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग को 9967.40 करोड़। यानी कुल मिलाकर देखें तो कृषि विभाग 140528.78 करोड़ रूपये दिए गए हैं। वहीं, ग्रामीण विकास मंत्रालय का कुल बजट 197023.14 करोड़ है। जिसमें ग्रामीण विकास विभाग को 194368.81 करोड़ और भूमि संसाधन विभाग को 2654.33 करोड़ रूपये दिए जाएंगे। सिंधिया के विभाग पर मेहरबान हुई केंद्र सरकार केंद्रीय संचार और नार्थ ईस्ट मामलों के मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के डाक और संचार विभाग को 102267.02 करोड़ रूपये दिए गए हैं। जिसमें डाक विभाग को 130561.38 करोड़ और दूरसंचार विभाग को 73990.94 करोड़ रूपये दिए गए हैं। वहीं, पूर्वोतर क्षेत्र विकास मंत्रालय को 6812.30 करोड़ रूपये दिए जाएंगे। वीरेंद्र कुमार खटीक के विभाग को मिला इतना बजट सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक के विभागों को कुल 15357.31 करोड़ दिए गए हैं। जिसमें सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग को 13687.59 करोड़ रूपये मिले और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग को 1669.72 करोड़ की राशि दी गई है। यह भी पीछे नहीं एमपी कोटे से राज्यसभा सांसद और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल मुरुगन के विभाग को कुल 4551.94 करोड़ का बजट मिला। जनजातीय कार्य मंत्रालय डीडी उइके को कुल 15421.97 करोड़ का बजट मिला। वहीं, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर को 28183.06 करोड़ का बजट मिला है।

जबलपुर में रैकेट का खुलासा: उज़्बेकिस्तान की महिला और उसके पति को हिरासत में लिया, मुख्य आरोपी फरार

जबलपुर  शहर में एक घर में पुलिस ने दबिश दी. यहां उज़्बेकिस्तान की एक महिला मिली. उससे देह व्यापार करवाया जा रहा था. पुलिस की दबिश के दौरान मुख्य आरोपी फरार हो गया. पुलिस ने उसकी पत्नी को हिरासत में लिया है. पुलिस जांच में जुटी है. जांच में पता चला कि उज्बेकिस्तान की इस महिला की शादी मुंबई में हुई थी. वह दिल्ली में ब्यूटी पार्लर की एक लड़की के माध्यम से जबलपुर पहुंची. जबलपुर में इसके पहले भी विदेशी महिलाओं से देह व्यापार करवाने के मामले सामने आ चुके हैं. मुखबिर ने 11 महिलाओं की दी सूचना महिला अपराध शाखा की नगर पुलिस अधीक्षक आशीष जैन ने बताया “जबलपुर के माढोताल थाने में पुलिस को मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि शिव चौधरी नाम का व्यक्ति देह व्यापार का अड्डा चला रहा है और इस बार उसने विदेशी महिलाओं को बुलाया है. जबलपुर में 11 महिलाओं की पहुंचने की सूचना पुलिस को मिली. पुलिस ने जब शिव चौधरी के ठिकाने पर छापा मारा तो वहां उज़्बेकिस्तान की रहने वाली महिला मिली.” मुख्य आरोपी की पत्नी हिरासत में देह व्यापार चलाने का आरोपी शिव चौधरी मौके से फरार हो गया. पुलिस ने उसकी पत्नी और विदेशी महिला को हिरासत में ले लिया. सीएसपी आशीष जैन ने बताया “उज़्बेकिस्तान की महिला ने पूछताछ में जानकारी दी है कि 2011 में उसकी शादी मुंबई में हुई थी. 2023 में उसके पति की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई. इसके बाद से ही वह दिल्ली में एक पार्लर में काम करती थी.” स्पा सेंटर के नाम पर देह व्यापार उज्बेकिस्तान की महिला ने पुलिस को बताया “दिल्ली में एक लड़की ने शिव चौधरी से मेरी मुलाकात करवाई थी और उसी के माध्यम से मैं जबलपुर आई.” सीएसपी आशीष जैन का कहना “उज़्बेकिस्तान की महिला पर क्या कार्रवाई की जाएगी, इसकी जांच की जा रही है.” जबलपुर में इसकी पहले भी विजयनगर में इसी तरह का मामला सामने आया था, जहां कुछ विदेशी महिलाएं मिली थीं. जबलपुर में देह व्यापार कराने वाले लोग इन महिलाओं को रहने की जगह उपलब्ध करवाते हैं. मोबाइल पर ग्राहकों को फोटो और नंबर उपलब्ध करवाए जाते हैं. स्पा सेंटर की आड़ में भी कई जगहों पर इसी तरह के गलत काम चल रहे हैं. 

MP को केंद्रीय बजट में 7500 करोड़ का झटका, सिंहस्थ पैकेज की उम्मीदें टूटीं, 10 शहरों के लिए 5000 करोड़ मंजूर

भोपाल  मध्य प्रदेश की केंद्रीय करों में हिस्सेदारी बढ़ने की बजाय कम हो गई है। अब अगले पांच साल( अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक) तक एमपी को हर साल करीब 7500 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। साथ ही इस वित्तीय वर्ष यानी 31 मार्च 2026 तक एमपी को 2,314 करोड़ रुपए कम मिलेंगे।  हालांकि एक्सपर्ट का मानना है कि भले ही केंद्रीय करों में हिस्सेदार कम हो गई लेकिन कैपिटल एक्सपेंडिचर में जो प्रावधान किया है उससे मप्र को फायदा मिल सकता है। केंद्रीय करों की हिस्सेदारी के रुप में इस बार 1.12 लाख करोड़ रु. मिल सकते हैं। साथ ही इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 2 हजार करोड़ रु. मिलने का अनुमान है। बता दें कि रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 9वां बजट पेश किया। इस बजट में टू और थ्री टियर शहरों के इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 12 लाख करोड़ का प्रावधान किया है। इसका फायदा इस कैटेगरी में आने वाले एमपी के 10 शहरों को मिल सकता है। वहीं देश में बनने वाली पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप में एक भोपाल को मिल सकती है। हालांकि, मप्र ने इस बजट में सिंहस्थ 2028 के आयोजन के लिए 20 हजार करोड़ रु. के स्पेशल पैकेज की मांग की थी, लेकिन केंद्र ने इस संबंध में ऐसी कोई कोई घोषणा नहीं की। प्रदेश को 7500 करोड़ रुपए कम मिलेंगे केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को मान लिया है। ऐसे में अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक की अवधि के लिए केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी 7.86% से घटाकर 7.34% कर दी गई है। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस 0.503% की कटौती का सीधा मतलब है कि राज्य को हर साल लगभग 7500 करोड़ रुपए कम मिलेंगे। यह नुकसान सिर्फ भविष्य तक सीमित नहीं है। मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए भी अनुमानों को संशोधित किया गया है। पहले जहां राज्य को 1,11,662 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान था, वह अब घटकर 1,09,348 करोड़ रुपए रह गया है। यानी इसी साल प्रदेश को 2,314 करोड़ रुपए का तत्काल नुकसान होगा। यह कटौती ऐसे समय में हुई है जब राज्य सरकार जी राम जी जैसी योजना के लिए अपने हिस्से को 10% से बढ़ाकर 30% करने की तैयारी कर रही है, जिससे उस पर वित्तीय बोझ और बढ़ेगा। 10 शहरों के डेवलपमेंट के लिए मिल सकते हैं 5,000 करोड़ केंद्र ने टियर-2 और टियर-3 श्रेणी के शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 12 लाख करोड़ रुपए की विशेष पूंजीगत सहायता का प्रावधान किया है। वित्तीय जानकारों का मानना है कि मध्य प्रदेश के लगभग 10 शहर इस कैटेगरी में आते हैं, इस फंड से भोपाल, इंदौर जैसे बड़े शहरों को 7 हजार करोड़ तो बाकी शहरों को 5 हजार करोड़ तक मिल सकते हैं। इस राशि का उपयोग इन शहरों में सड़क नेटवर्क, जल आपूर्ति, सीवेज प्रबंधन, और अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए किया जाएगा, जिससे जीवन स्तर में सुधार होगा और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। वहीं देश में बनने वाली पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप में एक भोपाल को मिल सकती है। यहां एयरपोर्ट के पास भौंरी में राज्य सरकार एआई और नॉलेज सिटी विकसित कर रही है। इसे यूनिवर्सिटी टाउनशिप में बदला जाता है तो केंद्र को पहली यूनिवर्सिटी टाउनशिप का प्रस्ताव तुरंत भेजा जा सकेगा। नगर निगम जारी कर सकेंगे अमृत बॉन्ड एमपी के बड़े नगर निगम भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन 1 हजार करोड़ का बॉन्ड जारी कर केंद्र से 100 करोड़ तक का फायदा ले सकेंगे। बॉन्ड की पहले से जारी व्यवस्था भी प्रभावी है, जिसमें 200 करोड़ तक के बॉन्ड जारी करने पर केंद्र सरकार 18 फीसदी पैसा देती है। अटल नवीनीकरण व शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) 2.0 के तहत केंद्र ने 2025-26 के लिए 7,022 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जिनका मुख्य फोकस जल आपूर्ति और सीवरेज प्रबंधन पर है। भोपाल में 194 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की शुरुआत हो चुकी है, जिसमें कोलार और बैरागढ़ में 155 करोड़ की लागत से नया सीवेज नेटवर्क बनाना शामिल है। इस योजना का एक अहम पहलू ‘महिला अमृत मित्र’ की तैनाती है। इंदौर के भागीरथपुरा कांड जैसी घटनाओं से सबक लेते हुए, जहां दूषित पानी से कई लोगों की जान चली गई थी, अब सरकार ने पेयजल की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए एक जमीनी पहल की है। मध्य प्रदेश शहरी विकास निगम (MPUDC) के जरिए 10,000 ‘महिला अमृत मित्र’ को तैनात किया जाएगा। ये महिलाएं सामुदायिक स्तर पर जल की गुणवत्ता की जांच करेंगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पीने के पानी की लाइनें किसी भी हाल में सीवरेज लाइनों के संपर्क में न आएं। उमंग सिंघार ने केंद्र सरकार के बजट को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट से यह साफ हो गया है कि भाजपा की “डबल इंजन सरकार” ने मध्य प्रदेश की जनता की पीठ में छुरा घोंपा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एक ओर भाजपा विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय करों में मध्य प्रदेश का हिस्सा लगभग 7,500 करोड़ रुपये कम कर दिया गया है। बता दें कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर इस बजट में राज्यों की कुल कर हिस्सेदारी (Vertical devolution) 41 प्रतिशत बरकरार रखी गई है। लेकिन हॉरिजॉन्टल फॉर्मूला (राज्यों के बीच बंटवारा) में बदलाव से मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 7.85 प्रतिशत से घटकर लगभग 7.35 प्रतिशत हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कारण सालाना करीब 7500 करोड़ का नुकसान हो सकता है। वहीं, सिंहस्थ के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्र से 20,000 करोड़ के विशेष पैकेज की मांग की थी, लेकिन बजट में इसका कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं दिखा है जिसपर विपक्ष हमलावर है।

कोहेफिजा में 11वीं की छात्रा के साथ कार में रेप, युवक ने अश्लील वीडियो बनाया, ब्लैकमेल कर मांगे एक लाख रुपए

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी में भी बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं। जाल में फंसाकर छात्राओं को लव जिहाद का शिकार बनाया जा रहा है। भोपाल के कोहेफिजा क्षेत्र में एक 11वीं कक्षा की छात्रा के साथ रेप का मामला सामने आया है। मामले में नाबालिग से ब्लैकमेलिंग और जबरन वसूली की बात भी सामने आई है। आरोपी ने पहले नाबालिग छात्रा को प्रेम जाल में फंसाकर उससे कार में रेप किया और उसका अश्लील वीडियो बना लिया। शिकायत के बाद कोहेफिजा पुलिस ने आरोपी ओसाफ अली खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता कोहेफिजा थाना क्षेत्र की 11वीं की छात्रा है। वह शाहपुरा क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ती है। पुलिस ने आरोपी ओसाफ अली खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है। सहेली के जरिए दोस्ती और फिर रेप कोहेफिजा थाना टीआई कृष्ण गोपाल शुक्ला के अनुसार, आरोपी ओसाफ अक्सर छात्रा की सहेली से मिलने स्कूल के आसपास आता था। इसी सहेली के माध्यम से उसकी पहचान पीड़िता से हुई। पिछले साल जुलाई में आरोपी ने पीड़िता को भोपाल घुमाने के बहाने बुलाया और खानूगांव के सुनसान इलाके में ले गया। वहां कार के अंदर आरोपी ने छात्रा के साथ रेप किया। विरोध करने पर उसने शादी का झांसा देकर उसे चुप करा दिया। सहेली के जरिए दोस्ती और फिर रेप कोहेफिजा थाना टीआई कृष्ण गोपाल शुक्ला के अनुसार, आरोपी ओसाफ अक्सर छात्रा की सहेली से मिलने स्कूल के आसपास आता था। इसी सहेली के माध्यम से उसकी पहचान पीड़िता से हुई। पिछले साल जुलाई में आरोपी ने पीड़िता को भोपाल घुमाने के बहाने बुलाया और खानूगांव के सुनसान इलाके में ले गया। वहां कार के अंदर आरोपी ने छात्रा के साथ रेप किया। विरोध करने पर उसने शादी का झांसा देकर उसे चुप करा दिया। पीड़िता ने आरोपी को 40 हजार दिए आरोपी ने पीड़िता को पता चले बिना रेप के दौरान उसका अश्लील वीडियो बना लिया था। कुछ समय बाद उसने वीडियो वायरल करने की धमकी देकर छात्रा से 1 लाख रुपए की मांग की। बदनामी के डर से घबराई छात्रा ने किसी तरह 40 हजार रुपए का इंतजाम कर आरोपी को दिए। पैसे लेने बाद दोस्तों को दिखाया वीडियो पैसे लेने के बाद भी आरोपी की मांग जारी रही और वह बार-बार रेप करने का दबाव बनाता रहा। तंग आकर जब छात्रा ने उसे सोशल मीडिया और फोन पर ब्लॉक कर दिया, तो आरोपी ने अलग-अलग नंबरों से कॉल कर परेशान किया। जब छात्रा नहीं मानी, तो आरोपी ने वह निजी वीडियो छात्रा के दोस्तों को दिखा दिया। इसके बाद छात्रा ने अपने मौसेरे भाई की मदद से थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। धर्म परिवर्तन और नमाज का दबाव पीड़िता ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि आरोपी उस पर धर्म बदलने का दबाव डालता था। इतना ही नहीं, दबाव बनाकर उससे कई बार जबरन धार्मिक दुआएं भी पढ़वाई गईं। पुलिस ने आरोपी ओसाफ अली खान को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी का मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया है, जिसकी फोरेंसिक जांच कराई जाएगी।  धर्म परिवर्तन और नमाज का दबाव पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी उस पर धर्म बदलने का दबाव डालता था। इतना ही नहीं, दबाव बनाकर उससे कई बार जबरन धार्मिक दुआएं भी पढ़वाई गईं। पुलिस ने आरोपी ओसाफ अली खान को हिरासत में ले लिया है। आरोपी का मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया है, जिसकी फोरेंसिक जांच कराई जाएगी।

कागज़ों में सुधार, ज़मीन पर भ्रष्टाचार?

मंत्री का रिश्तेदार बताने वाले अफसर की दबंगई, RTI आदेशों की खुलेआम अवहेलना बड़वानी मध्यप्रदेश का शिक्षा विभाग कागज़ों में भले ही सुधारों के दावे करता हो, नई-नई योजनाओं का ढोल पीटता हो, मगर ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नज़र आती है। योजनाएँ बनती हैं, मॉनिटरिंग के दावे होते हैं, पीठ थपथपाई जाती है, पर स्कूलों और दफ्तरों की सच्चाई बदहाल ही बनी हुई है। सरकार अपनी ही योजनाओं की जमीनी सच्चाई देखने में नाकाम साबित हो रही है। इसका ताज़ा उदाहरण बड़वानी जिले में पदस्थ जिला परियोजना समन्वयक प्रमोद शर्मा हैं, जो स्वयं को मंत्री का रिश्तेदार बताकर पत्रकारों,जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों पर रोब जमाते फिरते हैं। मामला सिर्फ दबंगई तक सीमित नहीं है, बल्कि सूचना के अधिकार कानून की खुली अवहेलना का है। RTI के तहत मांगी गई जानकारी आज तक आवेदक को नहीं दी गई, जबकि उसी कार्यालय से राशि जमा कराने के पत्र भी जारी हुए और आवेदक द्वारा राशि जमा भी कर दी गई। इसके बावजूद जानकारी रोकना साफ तौर पर कानून का मज़ाक उड़ाना है। जब आईटीआई के कार्यकर्ता ने मजबूर होकर प्रथम अपील जिला पंचायत बड़वानी में की, तो प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेशों को भी जिला परियोजना अधिकारी प्रमोद शर्मा ने हवा में उड़ा दिया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी काजल चावला के आदेश कि आपको 30/1 /2026 को जिला पंचायत कार्यालय मे मेरे समक्ष 4:00 बजेजानकारी लेकर प्रस्तुत होवे उसके बावजूदउनके आदेशों कि धजिया उड़ा दी गई और उपस्थिति भी नहीं हुए! हद तो तब हो गई जब आवेदक स्वयं प्रथम अपीलीय अधिकारी के कार्यालय पहुँचा, वहाँ भी सिर्फ अगली तारीख का झुनझुना थमाकर मामला टाल दिया गया। जिला पंचायत सीईओ काजल चावला सवालों के घेरे में बड़ा सवाल यह है कि— क्या जिला पंचायत सीईओ काजल चावला आवेदक को निशुल्क जानकारी दिला पाएंगी? क्या जमा किया गया शुल्क वापस करने का आदेश जारी होगा? यदि आदेश जारी हुआ, तो क्या उसका पालन भी कराया जाएगा या वह भी फाइलों में दफन हो जाएगा? अगर जिला प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो यह मामला सिर्फ RTI उल्लंघन नहीं बल्कि अफसरशाही की तानाशाही का उदाहरण बन जाएगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला पंचायत प्रशासन अपने ही आदेशों की इज्जत बचा पाता है या फिर दबंग अफसरों के सामने व्यवस्था फिर बेबस नजर आएगी।  

मध्यप्रदेश में बारिश और कोहरे का प्रभाव, 25 जिलों में अलर्ट, ग्वालियर में बूंदाबांदी, सीहोर-मुरैना में 50 मीटर विजिबिलिटी

भोपाल  मध्य प्रदेश में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। प्रदेश में अगले तीन दिन तक मावठे की बारिश सक्रिय रहने के आसार हैं। मौसम विभाग ने सोमवार को ग्वालियर से लेकर विंध्य क्षेत्र तक 25 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। सुबह के समय कई इलाकों में घना कोहरा भी देखने को मिला, जिससे ठंड और बढ़ गई है। रविवार को भी मौसम ने जमकर रंग दिखाया। नीमच और मंदसौर में तेज आंधी-बारिश के साथ ओले गिरे, वहीं ग्वालियर, धार, मुरैना और उज्जैन सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। मध्य प्रदेश में एक बार फिर से आंधी, ओले और बारिश वाला मौसम है। सोमवार सुबह अशोकनगर, आगर-मालवा, टीकमगढ़ में बारिश हुई। वहीं, कई जिलों में घना कोहरा छाया रहा। हालांकि, ठंड का असर कम है और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से ऊपर ही चल रहा है। मौसम विभाग ने सोमवार को 25 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें ग्वालियर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, विदिशा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, श्योपुर, मुरैना, भिंड, सागर, दमोह, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली शामिल हैं। इससे पहले दतिया, ग्वालियर, नर्मदापुरम, उज्जैन, खजुराहो, रीवा, सतना, भोपाल, गुना, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, श्योपुर, जबलपुर, दमोह, मंडला, नरसिंहपुर, नौगांव, मलाजखंड, टीकमगढ़ समेत कई जिलों में कोहरे का असर भी देखा गया। अगले 3 दिन ऐसा रहेगा मौसम     3 फरवरी– ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में बारिश होने के आसार है।     4 फरवरी- ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है।     5 फरवरी- आंधी-बारिश का अलर्ट नहीं है। ठंड का असर बढ़ सकता है। कई जिलों में बारिश का दौर, कोहरा भी छाया इससे पहले रविवार को प्रदेश में बारिश, आंधी और घने कोहरे वाला मौसम रहा। ग्वालियर, उज्जैन, धार और मुरैना में रात और सुबह बारिश हुई। वहीं, सुबह कई शहरों में घना कोहरा छाया रहा। दतिया और खजुराहो में विजिबिलिटी 50 से 200 मीटर तक रही। खजुराहो, राजगढ़ और नौगांव में ही पारा 10 डिग्री से नीचे रहा। भोपाल में सुबह 9 बजे तक कोहरे का असर देखा गया। शाम को नीमच और मंदसौर में मौसम बदल गया। तेज आंधी-बारिश के साथ ओले गिरने लगे। इससे कई गांवों में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। बारिश की वजह से गेहूं की फसलें आड़ी हो गई। इससे नुकसान होने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार, दतिया, खजुराहो, ग्वालियर, नौगांव, सतना, ग्वालियर, रीवा, उज्जैन, श्योपुर, राजगढ़, रतलाम, गुना, दमोह, मंडला, टीकमगढ़, मलाजखंड में कोहरे का असर अधिक रहा। बड़े शहरों में रात का तापमान 12 डिग्री से ऊपर ही रहा।  

इंदौर: दूषित पानी से 32वीं मौत, भागीरथपुरा की महिला पहले से थी दूसरी बीमारियों से पीड़ित

इंदौर इंदौर की भागीरथपुरा बस्ती में दूषित पानी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक महीना बीत जाने के बाद भी यहां मौतों का सिलसिला जारी है। रविवार को बस्ती में 32वीं मौत दर्ज की गई, जिसने इलाके में दहशत और बढ़ा दी है। ताज़ा मामला 65 वर्षीय अनिता कुशवाह का है, जिन्होंने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इलाज के दौरान बिगड़ी हालत अनिता को कुछ दिन पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया था। शुरुआत में इसे सामान्य संक्रमण माना जा रहा था, लेकिन धीरे-धीरे उनकी दोनों किडनियां खराब हो गईं। उनकी हालत इतनी नाजुक हो गई कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। इलाज के दौरान उन्हें दिल का दौरा भी पड़ा, जिसके बाद उनकी स्थिति और बिगड़ती चली गई और आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया। बेटे नीलेश ने बताया कि उन्हें पहले से कोई बीमारी नहीं थी। 28 दिसंबर को उल्टी-दस्त के कारण भाग्यश्री हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। दो दिन बाद डिस्चार्ज होकर घर पर लाया गया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद फिर हालत बिगड़ी। उन्हें 1 जनवरी को अरबिंदो हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। अरबिंदो हॉस्पिटल से उन्हें 4 जनवरी को बॉम्बे हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया था। इसके बाद उनकी हालत बिगड़ती गई। हालत गंभीर होने पर किडनी फेल हो गई, जिसके चलते लगातार हेमोडायलिसिस किया जा रहा था। फिर वेंटिलेटर पर भी लिया गया। इलाज के दौरान उन्हें कार्डियक अरेस्ट भी आया। सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने बताया कि शासन की ओर से हायर सेंटर पर इलाज करवाया गया, लेकिन दुर्भाग्य से मरीज को बचाया नहीं जा सका। महिला के पति मिल से रिटायर्ड हैं। परिवार में एक बेटा और दो बेटियां हैं। अनिता कुशवाह का अंतिम संस्कार आज होगा। भागीरथपुरा दूषित पानी हादसे में अब तक 32 मौतें हो चुकी हैं। इस मामले में 450 से ज्यादा मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज किए जा चुके हैं, लेकिन दूसरी ओर तीन मरीज अब भी एडमिट हैं। इनमें से 2 आईसीयू में हैं। उनकी हालत काफी क्रिटिकल बनी हुई है। हैरानी की बात यह है कि बस्ती में अब तक 32 लोग जान गंवा चुके हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में सिर्फ 16 मौतें ही दर्ज हैं। विभाग इन मौतों की मुख्य वजह डायरिया (उल्टी-दस्त) मान रहा है। बाकी की अन्य मौतों का अभी तक कोई डेथ ऑडिट नहीं किया गया है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल बस्ती के दो और मरीज अस्पताल में भर्ती हैं जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है। राहत की बात बस इतनी है कि अब नए मरीजों के मिलने की रफ्तार कम हुई है और मामूली लक्षण वाले लोगों का घर पर ही इलाज चल रहा है। बस्ती में पानी का संकट अभी भी गहराया हुआ है। नगर निगम अब तक केवल 30 प्रतिशत इलाके में ही नई नर्मदा लाइन बिछा पाया है। बाकी पूरी बस्ती अब भी टैंकरों के भरोसे है। दूषित पानी के खौफ की वजह से लोग नल या टैंकर का पानी पीने से डर रहे हैं। जो लोग सक्षम हैं, वे पीने के लिए बाहर से पानी खरीद रहे हैं। 24 घंटे चालू हैं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर अभी मरीज आ रहे हैं, लेकिन डायरिया के मरीजों की संख्या एकदम कम हो गई है। रोज एक-दो मरीज आते हैं, लेकिन उन्हें एडमिट करने की जरूरत नहीं पड़ रही है। हालांकि यह केंद्र 24 घंटे खुला है और क्षेत्र में दो एम्बुलेंस भी तैनात हैं। 30 प्रतिशत हिस्से में की जा रही पानी की सप्लाई उधर, इलाके में एक दिन छोड़कर 30% हिस्से में पानी का सप्लाय जारी है। निगम का कहना है कि पानी अब साफ आ रहा है लेकिन रहवासी अभी भी आरओ और टैंकर का पानी ही उपयोग कर रहे हैं। दूसरी ओर बचे हुए 70% हिस्से की मेन पाइप लाइन का काम अंतिम दौर में है। इसके बाद यहां लीकेज टेस्ट करने के साथ सैंपल लिए जाएंगे।

विकसित भारत की ओर केंद्रीय बजट 2026-27: क्या हैं सरकार की नई रणनीतियां?

केंद्रीय बजट 2026–27: ‘विकसित भारत’ की ओर एक रणनीतिक कदम केंद्रीय बजट 2026–27 पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सीए आयुष गर्ग ने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि Ease of Doing Business और Tax Simplification की दिशा में एक संरचनात्मक सुधार को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह बजट “कर्तव्य” की भावना से प्रेरित है, जिसमें राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए मध्यम वर्ग और उद्योग जगत को संतुलित राहत देने का प्रयास किया गया है। प्रत्यक्ष कर: अनुपालन में सुगमता की दिशा में बड़ा कदम सीए आयुष गर्ग ने कहा कि बजट का सबसे बड़ा आकर्षण नया आयकर अधिनियम, 2025 है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। उनके अनुसार, इस नए कानून का उद्देश्य कर प्रणाली को सरल, संक्षिप्त और करदाता-अनुकूल बनाना है। उन्होंने बताया कि नई कर व्यवस्था के तहत ₹4 लाख तक की आय को कर-मुक्त रखा गया है, जबकि स्टैंडर्ड डिडक्शन सहित ₹12.75 लाख तक की आय पर कर देयता शून्य होगी, जिससे मध्यम वर्ग की डिस्पोजेबल आय में वृद्धि होगी। सीए गर्ग ने यह भी कहा कि संशोधित रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा को 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च किया जाना करदाताओं और प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट्स दोनों के लिए एक व्यावहारिक राहत है, हालांकि विलंब शुल्क की व्यवस्था जारी रहेगी। उन्होंने विदेश यात्रा (LRS), शिक्षा एवं चिकित्सा खर्च पर टीसीएस की दर को 5%/20% से घटाकर 2% किए जाने को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि इससे करदाताओं के नकदी प्रवाह पर दबाव कम होगा। इसके अलावा, शेयर बायबैक से प्राप्त आय को अब शेयरधारकों के हाथों कैपिटल गेन के रूप में करयोग्य बनाना कर ढांचे को अधिक तार्किक बनाता है। एमएसएमई और कॉर्पोरेट सेक्टर: विकास को नई गति एमएसएमई सेक्टर पर बोलते हुए सीए आयुष गर्ग ने कहा कि सरकार ने छोटे उद्योगों को अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानते हुए ₹10,000 करोड़ के एसएमई ग्रोथ फंड की घोषणा की है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘कॉर्पोरेट मित्र’ योजना के माध्यम से टियर-2 और टियर-3 शहरों में एमएसएमई को मार्गदर्शन देने हेतु पैरा-प्रोफेशनल्स तैयार किए जाएंगे, जिनके प्रशिक्षण में आईसीएआई की प्रमुख भूमिका होगी। सीए गर्ग के अनुसार, आईटी सेवाओं के लिए सेफ हार्बर सीमा को ₹300 करोड़ से बढ़ाकर ₹2000 करोड़ करना बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए अनुपालन को सरल बनाएगा। उन्होंने बुनियादी ढांचे के लिए ₹12.2 लाख करोड़ के पूंजीगत व्यय आवंटन को स्टील, सीमेंट और कोर सेक्टर के लिए दीर्घकालिक रूप से लाभकारी बताया। राजकोषीय अनुशासन पर सरकार की प्रतिबद्धता राजकोषीय स्थिति पर टिप्पणी करते हुए सीए आयुष गर्ग ने कहा कि वित्त वर्ष 2026–27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4.3% रखना सरकार की वित्तीय अनुशासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के लिए एक सकारात्मक संकेत है। शेयर बाजार और निवेशक शेयर बाजार पर बजट के प्रभाव को लेकर सीए गर्ग ने कहा कि फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में वृद्धि से अल्पकालिक और अत्यधिक सट्टा गतिविधियों पर कुछ नियंत्रण आएगा। उन्होंने बताया कि फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% तथा ऑप्शंस पर 0.1% से बढ़ाकर 0.15% किया गया है। निष्कर्ष अंत में सीए आयुष गर्ग ने कहा कि बजट 2026–27 Simplification और Standardization की स्पष्ट दिशा तय करता है। उन्होंने यह भी कहा कि कर कानूनों की जटिलताओं को कम कर डिजिटल और ऑटोमेटेड प्रक्रियाओं को बढ़ावा देना सरकार की Trust-based Compliance नीति को दर्शाता है। उनके अनुसार, यह बजट चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए एक अवसर है, जिसमें उनकी भूमिका केवल कर अनुपालन तक सीमित न रहकर रणनीतिक सलाहकार के रूप में विकसित हो सकती है। विशेषज्ञ राय सीए आयुष गर्ग (FCA, CS, CMA, M.Com)

खेल महाकुंभ बना मेगा शो: रविंद्र जडेजा–शिवराज सिंह की एंट्री, रोमांचक मुकाबलों के लिए तैयार हजारों दर्शक

रायसेन मध्य प्रदेश के रायसेन में खेल बार भव्य ‘सांसद खेल महोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। जिसकी शुरूआत 1 फरवरी से हो चुकी है। इस खेल महाकुंभ में 600 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और भारतीय टीम से स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा मुख्य अतिथि होंगे। ग्राउंड में लगभग 10 हजार से दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है। प्राप्त जानकारी अनुसार, 2 फरवरी को दोपहर तीन बजे भोपाल से रवींद्र जडेजा का काफिला गोपालपुर से रायसेन पहुंचेगा। स्टेडियम में बनाए गए 8 अस्थायी स्टैंड दर्शकों के बैठने की सुविधा के लिए 8 अस्थायी स्टैंड बनाए गए हैं। हर स्टैंड में 5 कतारें हैं। एक स्टैंड में लगभग 250 दर्शकों के बैठने की व्यवस्था बनाई गई है। साथ ही मैदान के अलग-अलग दिशाओं में स्टैंड बनाए गए हैं। जिसमें दर्शक आराम से बैठकर मैच देख सकेंगे। वीवीआईपी के लिए अलग व्यवस्था स्टेडियम की उत्तर दिशा में एक मुख्य डोम तैयार किया गया है। जिसके दोनों ओर दो छोटे-छोटे डोम बनाए गए हैं। जिसमें मुख्य अतिथि और वीवीआईपी लोगों के व्यवस्था रहेगी।   428 खिलाड़ी पहुंचे आज खेल महाकुंभ में बतौर मुख्य अतिथि में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय चौहान ने शिरकत की और खिलाड़ियों के उत्साहवर्धन करते हुए क्रिकेट खेला। इस दौरान विदिशा संसदीय क्षेत्र के आठों विधानसभा की टीमों के 428 खिलाड़ी पहुंचे। इस शिवराज के पुत्र कार्तिकेय चौहान भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि समापन समारोह में भारतीय क्रिकेट के स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा बतौर मुख्य अतिथि होंगे। खेल महाकुंभ के आगाज के दौरान क्षेत्रीय विधायक प्रभु राम चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश शर्मा, विदिशा विधायक मुकेश टंडन समेत कई अन्य स्थानीय नेता शामिल हुए।

MP HC का बड़ा आदेश: सरकारी दफ्तरों में अब खुद सुलझेंगे कर्मचारियों के सर्विस विवाद, सीधे लाभ में आएंगे 6 लाख कर्मचारी

इंदौर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के सेवा संबंधी विवादों (Service Matters) को लेकर राज्य सरकार को एक बेहद अहम और कड़ा सुझाव दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ट्रांसफर, प्रमोशन, इंक्रीमेंट और वरिष्ठता जैसे छोटे-छोटे मामलों के लिए कर्मचारियों को अदालत आने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए। जस्टिस विनय सराफ की एकल पीठ ने सरकार को ‘इन-हाउस डिस्प्यूट रिसोल्यूशन सिस्टम’ (विवाद समाधान प्रणाली) विकसित करने के निर्देश दिए हैं। चीफ सेक्रेटरी को आदेश: 50 हजार मामलों का बोझ होगा कम हाई कोर्ट में वर्तमान में कर्मचारियों से जुड़े 50,000 से अधिक मामले लंबित हैं। जस्टिस सराफ ने मंडला के वन रक्षकों की वरिष्ठता से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इस आदेश की प्रति मुख्य सचिव (Chief Secretary) को भेजने के निर्देश दिए हैं।     याचिकाकर्ता 30 दिन के भीतर सक्षम अधिकारी को अपना आवेदन दें।     सरकार और संबंधित विभाग इस पर 45 दिन के भीतर अनिवार्य रूप से फैसला लें। 6 लाख कर्मचारियों के लिए ‘राहत’ का फॉर्मूला यदि सरकार इस सुझाव पर अमल करती है, तो प्रदेश के करीब 6 लाख नियमित अधिकारी-कर्मचारियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। कोर्ट के सुझाव के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं…     डेजिग्नेटेड ऑफिसर: हर विभाग में एक नामित अधिकारी हो जो विवादों को सुने।     निष्पक्षता: पारदर्शिता के लिए जरूरत पड़ने पर रिटायर्ड जिला जजों की सेवाएं भी ली जा सकती हैं।     बचत: इससे न केवल अदालतों का बोझ कम होगा, बल्कि सरकार और कर्मचारियों का समय व पैसा भी बचेगा। ‘अदालतों में आ गई है सर्विस मामलों की बाढ़’ सुनवाई के दौरान जस्टिस सराफ ने चिंता जताते हुए कहा कि हाई कोर्ट में इन दिनों सर्विस मामलों की बाढ़ आ गई है। उन्होंने कहा, “अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच सीधे संवाद की कमी के कारण छोटे-छोटे विवाद भी कोर्ट तक पहुंच रहे हैं। यह सरकार पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ाता है और कर्मचारियों को मानसिक पीड़ा देता है।” कोर्ट का मानना है कि आपसी संवाद और विभागीय स्तर पर सशक्त प्रणाली से अधिकांश केसों का समाधान बिना मुकदमेबाजी के संभव है।

मतदाता डेटा में चौंकाने वाली विसंगतियाँ: कभी पिता से छोटा बेटा, कभी 6 संतानों का रिकॉर्ड!

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान डेटा में ऐसी विसंगतियां सामने आई हैं, जिन्होंने निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। जिले में करीब 7 लाख मतदाताओं के डिजिटल रिकॉर्ड में तार्किक त्रुटियां (Logical Errors) पाई गई हैं। इनमें सबसे चौंकाने वाले मामले वे हैं जहां तकनीकी गड़बड़ी के कारण माता-पिता की उम्र उनकी संतान से भी कम दर्ज हो गई है। डेटा में मिलीं ये 6 बड़ी विसंगतियां बीएलओ (BLO) एप के जरिए की गई छंटनी में भोपाल और मध्यप्रदेश स्तर पर लाखों गड़बड़ियां पकड़ी गई हैं:     उम्र का गणित फेल: भोपाल में 1.19 लाख और प्रदेश में 39 लाख ऐसे मतदाता मिले हैं, जिनकी उम्र उनके माता-पिता से महज 15 साल कम या उससे भी कम दर्ज है।     असंभव आयु अंतर: करीब 18 हजार मामलों में माता-पिता की उम्र मतदाता से 50 साल से भी ज्यादा बड़ी दिखाई गई है।     रिश्तों में उलझन: दादा-दादी की उम्र पोते-पोतियों से 40 साल कम दर्ज होने के 15 हजार से ज्यादा मामले भोपाल में मिले हैं।     संतानों का रिकॉर्ड: जिले के 46 हजार मतदाताओं के रिकॉर्ड में 6 या उससे अधिक संतानें दर्ज पाई गई हैं।     नाम और जेंडर: पिता के नाम में मिसमैच और जेंडर की गड़बड़ी के भी लाखों मामले सामने आए हैं। क्यों हुई इतनी बड़ी गड़बड़ी? डिजिटलाइजेशन के दौरान पुराने रिकॉर्ड को नए सॉफ्टवेयर से जोड़ने पर ये चार प्रमुख कारण सामने आए हैं:     शॉर्ट नाम का उपयोग: पुराने रिकॉर्ड में ‘डीके’ लिखा था, जिसे सॉफ्टवेयर ने नए नाम ‘देवेंद्र कुमार’ से मैच नहीं किया।     उपनाम (सरनेम) का छूटना: सरनेम न होने पर एप ने उसे अलग व्यक्ति मानकर सूची से बाहर कर दिया।     लिंक की समस्या: एक मामले में पिता ने बेटों का लिंक खुद से और बेटियों का लिंक दादा के रिकॉर्ड से जोड़ दिया, जिससे डेटा मिसमैच हो गया।     अधूरा डेटा: पिता या माता का नाम गलत टाइप होने से सॉफ्टवेयर ने रिकॉर्ड रिजेक्ट कर दिया। अब क्या होगा? 14 फरवरी तक का अल्टीमेटम     इन विसंगतियों के कारण चुनाव आयोग को डेटा जमा करने की समय-सीमा कई बार बढ़ानी पड़ी है। अब भोपाल कलेक्टर ने 14 फरवरी तक सभी त्रुटियों को सुधारने का लक्ष्य दिया है।     2 लाख मतदाताओं को नोटिस: जिले के 181 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO) को जिम्मेदारी सौंपी गई है। शेष बचे 2 लाख मतदाताओं को नोटिस देकर सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है।     घर बैठे सुधार: यदि बीएलओ आपके घर आता है और मौके पर ही दस्तावेजों के आधार पर सुधार हो जाता है, तो आपको दफ्तर जाने की जरूरत नहीं होगी।

एमपी का बड़ा कदम, 300 एकड़ में होगा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का निर्माण

उज्जैन मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में अब इंटरनेशनल लेवल का एयरपोर्ट बनेगा। अभी तक यहां पर एटीआर 72 सीटर विमान के हिसाब से निर्माण की तैयारी चल रही थी, लेकिन जिला प्रशासन के द्वारा शासन को रिवाइज प्रस्ताव भेजा है। जिसे अगर स्वीकृति मिलती है तो जल्द काम शुरू किया जा सकेगा। इस एयरपोर्ट को सिंहस्थ के पहले शुरू करने की तैयारी है। दरअसल, उज्जैन-देवास मार्ग पर स्थित दताना-मताना की हवाई पट्टी को सरकार एयरपोर्ट की तर्ज पर निर्माण कर रही है। साल 2025 को 1 नवंबर को मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस पर मध्यप्रदेश सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के बीच एयरपोर्ट निर्माण के लिए एमओयू साइन हुए थे। इसके बाद निर्माण प्रक्रिया में तेजी आई। जिसके बाद मिट्टी का परीक्षण किया गया। तब एटीआर-72 श्रेणी के विमानों के संचालन के प्रंबधन के हिसाब से निर्माण की योजना था, लेकिन इसे अब नया विस्तार दिया जाएगा। शासन क द्वारा बोइंग सी-20 के संचालन का प्रस्ताव भेजा गया है। सिंहस्थ के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर का एयरपोर्ट बनाने की तैयारी सिंहस्थ-2028 को देखते हुए एयरपोर्ट का विस्तार करने की योजना है। जिससे आने वाले समय से इस क्षेत्र को व्यावसायिक स्तर पर भी फायदा होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर का एयरपोर्ट बनने के बाद इंदौर से निर्भरता खत्म होगी। अधिग्रहण में होगा बदलाव वर्तमान में उज्जैन एयरपोर्ट के लिए 241 एकड़ जमीन की जरूरत थी। जिसका दायरा बढ़ाकर अब 300 से अधिक किया जा सकता है। वहीं, पहले रनवे 1800 मीटर में बनाने की योजना थी। अब इसे 3600 मीटर तक विस्तारित किया जाएगा। रनवे को मिलाकर कुल 4100 मीटर जमीन चाहिए। केंद्र सरकार की ओर से 45 करोड़ रूपये की प्रारंभिक राशि स्वीकृत की गई थी। इस लागत को बढ़ाया जा सकता है।

अब इलाज के लिए नहीं करनी पड़ेगी लंबी यात्रा, 184 करोड़ से होंगे अस्पतालों का नवीनीकरण

ग्वालियर स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक, सुदृढ़ और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने लगभग 184 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को मंजूरी के लिए भोपाल भेज दिया है। यह प्रस्ताव वर्ष 2026-27 के एन्युअल प्लान के अंतर्गत तैयार किया गया है, जिसके लागू होने से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के मरीजों को उन्नत सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बाहर के शहरों दिल्ली-मुबंई की यात्रा काफी हद तक कम हो जाएगी। डिजिटल क्रांति से बढ़ेगी पारदर्शिता और दक्षता प्रस्ताव में डिजिटल गवर्नेंस को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। जिला अस्पताल सहित प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में अत्याधुनिक कंम्प्यूटर लैब स्थापित की जाएंगी। मरीजों का पंजीकरण, इलाज का रिकॉर्ड, रिपोर्टिंग और रेफरल सिस्टम पूरी तरह डिजिटल हो जाएगा। इससे समय की बचत के साथ पारदर्शिता बढ़ेगी।   डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को तकनीक- आधारित प्रशिक्षण भी मिलेगा। सीएमएचओ कार्यालय में 20 कंम्प्यूटरों वाली विशेष कंम्प्यूटर लैब बनाई जाएगी, जहां स्वास्थ्य कार्यक्रमों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और डेटा एंट्री होगी। जननी सुरक्षा योजना और प्रसूता सहायता जैसी योजनाओं के भुगतान में गति और पारदर्शिता आएगी। बुनियादी ढांचे का मजबूत उन्नयन प्रस्ताव में अस्पतालों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर है। आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, वार्डों का विस्तार, साफ-सफाई व्यवस्था में सुधार और मरीजों की अन्य सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। डॉ. सचिन श्रीवास्तव, सीएमएचओ, ग्वालियर ने बताया कि यह प्रस्ताव स्वास्थ्य सेवाओं के समग्र सुधार के लिए तैयार किया गया है। स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू हो जाएगा, जिससे जिले की स्वास्थ्य तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।   नए एनआरसी केंद्र स्थापित होंगे जिले में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए विशेष फोकस किया गया है। भितरवार और बरई में दो नए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) स्थापित करने का प्रस्ताव शामिल है। इन केंद्रों में कुपोषित बच्चों को विशेषज्ञ देखरेख, पोषण आहार और उचित इलाज मिलेगा। यह पहल ग्रामीण एवं पिछड़े इलाकों के लिए विशेष रूप से लाभदायक साबित होगी।

MP कॉलेजों में परीक्षा सुरक्षा बढ़ेगी, CCTV न होने पर शिक्षण संस्थानों को चेतावनी

भोपाल मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर के सरकारी और निजी कॉलेजों में होने वाली बी.कॉम, बी.एससी, एम.कॉम और एम.एससी की परीक्षाएं सीसीटीवी की निगरानी में कराने के निर्देश दिए हैं। जिससे नकल और अनियमितताओं पर रोक लग सके। विभाग के इस फैसले ने कॉलेज प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी है, क्योंकि प्रदेश के 70 फीसद कॉलेजों में सीसीटीवी लगे ही नहीं है, जबकि फरवरी से परीक्षाएं शुरू होनी है। ऐसे में सीसीटीवी में परीक्षाएं कराने की संभावना कम ही है। बीयू ने भी संबंध कॉलेजों में सीसीटीवी की निगरानी में परीक्षा कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभी तक कहीं भी व्यवस्था नहीं है।   राजधानी के कॉलेजों का हाल राजधानी में 13 पारंपरिक सरकारी कॉलेज है। इसके अलावा 50 से अधिक निजी कॉलेज भी हैं। इनमें से कई सरकारी कॉलेजों में सीमित संख्या में कैमरे लगे हैं, जो केवल मुख्य प्रवेश द्वार या कार्यालय तक ही सीमित है। वहीं, निजी प्राइवेट कॉलेजों में सीसीटीवी की व्यवस्था नहीं है। बता दें कि उच्च शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, 1300 से अधिक सरकारी एवं निजी कॉलेज में 14 लाख से अधिक स्नातक और स्नातकोत्तर के विद्यार्थी पढ़ते हैं। कॉलेज प्रबंधन का तर्क है कि जल्द ही सीसीटीवी की व्यवस्था की जाएगी। सीसीटीवी की करनी होगी व्यवस्था उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि सीसीटीवी निगरानी से परीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी होगी और विद्यार्थियों में अनुशासन बढ़ेगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कालेजों को जल्द कैमरे लगाने के निर्देश निर्देश दिए गए है और इसकी निगरानी भी की जाएगी।

चंबल का सर्वे कराएगी सरकार, घड़ियालों के घोंसलों को संरक्षण का संदेश

भोपाल राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में गंभीर रूप से संकटग्रस्त घड़ियालों के घोंसलों की सुरक्षा और उनकी संख्या बढ़ाने के लिए राज्य सरकार चंबल नदी का विशेष सर्वेक्षण शुरू करने जा रही है। चंबल नदी में 2,462 घड़ियाल हैं और कई दुर्लभ प्रजातियों के कछुए भी पाए जाते हैं। घड़ियालों के घोंसलों को संरक्षित करने के लिए वन विभाग फरवरी से चंबल नदी में सर्वे शुरु कराएगा। नदी की बाढ़ के कारण केवल तीन प्रतिशत बच्चे जीवित बच पाते हैं, जिसे देखते हुए यह सर्वे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   घड़ियाल भी अंडे देने के लिए घोंसला बनाते हैं बता दें कि घड़ियाल भी अंडे देने के लिए घोंसला बनाते हैं। इसके लिए वह नदी के किनारे रेत में गहरा गड्डा खोदते हैं। खनन और अन्य मानवीय गतिविधियों से घड़ियालों के घोंसलों को हमेशा खतरा बना रहता है। नदी में बाढ़ आने पर भी घोंसले नष्ट हो जाते हैं। इनकी रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखते हुए वन विभाग सर्वेक्षण का कार्य करेगा। चंबल में व्यापक शोध और निगरानी कार्य हो रहा है इसमें घड़ियालों की नए सिरे से गणना के साथ उनके घोंसलों को चिह्नित कर उनकी रक्षा सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए नमामि गंगे परियोजना के तहत चंबल में व्यापक शोध और निगरानी कार्य हो रहा है। चंबल नदी में डॉल्फिन भी हैं। इनके संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देने के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है। मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक सुभरंजन सेन ने बताया कि नमामि गंगे परियोजना के तहत चंबल में व्यापक शोध और निगरानी कार्य जारी है। त्रिराज्यीय निगम बनाने का भी प्रयास त्रिराज्यीय निगम बनाने का भी प्रयास है ताकि पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर घड़ियालों का संरक्षण किया जा सके। घड़ियालों की नेस्टिंग साइट को संरक्षित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। चंबल नदी के तटीय इलाकों में सर्वेक्षण कर घड़ियालों के घोंसलों को चिह्नित किया जाएगा, ताकि उन्हें संरक्षित किया जा सके।   चंबल नदी दुनिया के 80 % से अधिक घड़ियालों का घर घड़ियालों के बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रतिवर्ष लगभग 200 अंडे एकत्र कर देवरी पुनर्वास केंद्र में लाए जाते हैं, जहां उन्हें तीन साल तक सुरक्षित पालने के बाद नदी में छोड़ दिया जाता है। चंबल नदी दुनिया के 80 प्रतिशत से अधिक वयस्क घड़ियालों का घर है। सरकार ने घड़ियालों की घटती संख्या को देखते हुए 10 नए घड़ियाल भी हाल ही में छोड़े हैं और नई घड़ियाल संरक्षण परियोजना शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

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