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Raja Raghuvanshi की हत्या के बाद आरोपी विशाल ने Indore में किराए पर लिया था किराए पर फ्लैट

इंदौर  राजा रघुवंशी हत्या मामले में लगातार कई खुलासे होते जा रहे हैं. अब मध्य प्रदेश इंदौर में संपत्ति प्रबंधन कारोबार से जुड़े एक व्यक्ति ने शुक्रवार को दावा किया कि मेघालय के राजा रघुवंशी हत्याकांड के एक आरोपी ने वारदात के हफ्ते भर बाद मध्यप्रदेश के इस शहर में उससे एक फ्लैट किराये पर लिया था.  मेघालय में हनीमून मनाने गए राजा रघुवंशी (29) की साजिशन हत्या में शामिल होने के आरोप में उनकी पत्नी सोनम (25) (Sonam Raghuvanshi) और उसके कथित प्रेमी राज कुशवाह (20) (Raj Kushwaha) समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है. रघुवंशी पूर्वोत्तर के इस सूबे में 23 मई को लापता हो गए थे और ऐसा माना जा रहा है कि इसी तारीख को उनकी हत्या कर दी गई थी.  भाड़े के हत्यारे नहीं… दोस्त?  राजा रघुवंशी हत्याकांड में गिरफ्तार तीन अन्य आरोपियों-विशाल चौहान, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी पर शुरुआत में ‘भाड़े के हत्यारे’ होने का संदेह जताया गया था, लेकिन मेघालय पुलिस अब इन्हें कुशवाह के दोस्त बता रही है. देश भर में चर्चा का केंद्र बने हत्याकांड के पांचों आरोपी फिलहाल मेघालय पुलिस की हिरासत में हैं. विशाल ने किराए पर लिया था फ्लैट फ्लैट किराए पर देने वाले सिलोम जैम्स ने मीडिया से बातचीत में बताया कि 20 मई की रात विशाल फ्लैट लेने पहुंचा था। युवक के एक्शन से सब कुछ सामान्य लगा, इसलिए चाबी सौंप दी गई। बाद में विशाल ने देर रात फ्लैट में प्रवेश करने की बात कही, लेकिन उसके बाद कई दिनों तक उसने संपर्क नहीं किया। फ्लैट में कौन रुका जानकारी नहीं सिलोम जैम्स ने कहा कि इसके बाद फ्लैट में सोनम रघुवंशी या कोई अन्य रूका की नहीं, इसकी जानकारी नहीं है। सिलोम ने कहा कि काम में व्यस्त रहने पर इस तरफ ध्यान नहीं गया। लेकिन जब किसी दोस्त ने जानकारी दी कि आपके किराए पर दिए फ्लैट में सोनम के रहने की बात सामने आ रही है। तब मैंने जाकर एग्रीमेंट देखा तो पता चला कि उसके (सोनम) साथी विशाल सिंह के नाम पर फ्लैट है। सिलोम ने कहा कि ना तो वह सोनम से मिले है ना उसको देखा है। ना मुझे मालूम है कि वह यहां रह के गई है की नहीं गई है। शिलांग पुलिस कर रही आरोपियों से पूछताछ इस हत्याकांड में अब तक की जांच में सोनम रघुवंशी (राजा की पत्नी), राज कुशवाहा, विशाल चौहान, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी की संलिप्तता सामने आई है। 2 जून को मेघालय के शिलांग स्थित घाटी में राजा रघुवंशी का शव बरामद होने के बाद यह मामला उजागर हुआ। 9 जून को पुलिस ने सोनम को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार किया। सभी आरोपियों को फिलहाल शिलांग पुलिस की कस्टडी में भेजा गया है, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस का मानना है कि यह हत्या पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा थी। फ्लैट बुकिंग, किराया भुगतान, और शिलांग जाने से पहले की गतिविधियां इस ओर इशारा करती हैं कि घटना को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने महीनों पहले तैयारी की थी। पुलिस अब तकनीकी सबूतों और कॉल डिटेल्स के आधार पर पूरे नेटवर्क की तह तक जाने की कोशिश कर रही है।   30 मई को किराए पर लिया फ्लैट इंदौर में संपत्ति प्रबंधन की एक फर्म चलाने वाले कारोबारी शिलोम जेम्स ने संवाददाताओं को बताया कि राजा रघुवंशी की हत्या के आरोपियों में शामिल चौहान ने 30 मई को उनसे मुलाकात करके शहर के देवास नाका क्षेत्र में 17,000 रुपये प्रति माह पर एक फ्लैट किराए पर लिया था और इसके लिए अनुबंध पर दस्तखत भी किए थे.  जिस इमारत में फ्लैट है वह नई है और उसमें अभी तक सीसीटीवी नहीं लगे हैं. मैंने पुलिस को चौहान द्वारा इस फ्लैट को किराए पर लेने के बारे में सूचित किया था. आपको बता दें कि राजा और सोनम की शादी 11 मई को हुई थी और वे 20 मई को अपने हनीमून के लिए मेघालय चले गए थे.  वहीं, मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले में राजा के लापता होने के बाद 23 मई को शुरू हुई जांच में उसकी पत्नी सोनम पर ध्यान केंद्रीत किया गया. जिसके बाद उसे उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार कर लिया गया. रघुवंशी हत्याकांड में सोनम के प्रेमी राज कुशवाह, विशाल चौहान, आनंद कुर्मी और आकाश राजपूत को भी गिरफ्तार किया गया है. फिलहाल इस वक्त सभी पांचों आरोपी मेघालय पुलिस की गिरफ्त में हैं. पूछताछ में सोनम ने कबूल लिया है कि वह राजा रघुवंशी हत्याकांड में शामिल थी. आपको बता दें कि पति राजा की हत्या के बाद सोनम इंदौर भी पहुंची थी और इसी फ्लैट में रुकी थी. 

इंदौर में पर्यावरण प्रबंधन समिति की बैठक में एयरपोर्ट प्रबंधन और इंदौर जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मंथन किया

इंदौर अहमदाबाद में एयर इंडिया का प्लेन क्रेश होने के बाद पूरे देश के एयरपोर्ट और इसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था का सख्त तरीके से जायजा लिया जा रहा है. मध्य प्रदेश के एयरपोर्ट और खासकर इंदौर एयरपोर्ट क्षेत्र में विमानों की सुरक्षा के मद्देनजर विशेष सतर्कता और व्यापक तैयारी के निर्देश दिए गए हैं. विमान से पक्षियों के टकराने की आशंका रोकने के लिए जनजागरण अभियान चलाने के साथ ही रनवे के आसपास से वन्यजीवों को रीलोकेट करने के निर्देश दिए गए हैं. वन विभाग और नगर निगम को मिले दिशा-निर्देश इंदौर में पर्यावरण प्रबंधन समिति की बैठक में एयरपोर्ट प्रबंधन और इंदौर जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मंथन किया. एयरपोर्ट प्रबंधन ने संभाग आयुक्त दीपक सिंह के समक्ष कुछ सवाल रखे. इसके बाद संभाग आयुक्त द्वारा वन विभाग और नगर निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया. पंछियों के हवाई जहाज से टकराने के कारण होने वाले हादसे के संबंध में 10 किलोमीटर की परिधि में आने वाले क्षेत्र में सोशल मीडिया के माध्यम से अवेयरनेस का काम किया जाए. इसके अलावा नगर निगम के अधिकारियों को बिजासन टेकरी के मेला क्षेत्र के सफाई को लेकर विशेष ध्यान देने हेतु निर्देश दिए गए. एयरपोर्ट के आसपास से वन्य जीवों को रिलोकेट करेंगे संभाग आयुक्त ने दीपक सिंह ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा “एयरपोर्ट के रनवे क्षेत्र में मिलने वाले सियार, जंगली बिल्ली जैसे वन्य जीवों के नियंत्रण हेतु विमानतल प्रबंधन की सहायता करें और इन जीवों को एयरपोर्ट से अन्य स्थानों पर रिलोकेट किया जाए.” बता दें कि एयरपोर्ट पर सुरक्षा के मद्देनजर नगर निगम द्वारा मानसून के पूर्व ही विमानतल क्षेत्र में पेड़ों की छंटाई की गई है, जिसे समय-समय पर जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं. इंदौर एयरपोर्ट से कितनी फ्लाइट गौरतलब है इंदौर एयरपोर्ट के आसपास घनी आबादी बस्ती है. वहीं आसपास के इलाकों में पेड़-पौधे और वन्यजीवों के आश्रय क्षेत्र भी हैं. इस कारण एयरपोर्ट प्रबंधन को इस विषय पर सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं. एयरपोर्ट डायरेक्टर विपिन कांत सेठ का कहना है “इंदौर एयरपोर्ट से करीब 90 फ्लाइट की लैंडिंग और टेकऑफ होता है. सुरक्षा की दृष्टि से भी सभी प्रोटोकॉल का पालन जरूरी है.” 

हैदराबाद से जबलपुर लाए गए 10वें घोड़े की मौत, अब एक घोड़े की रिपोर्ट ग्लैंडर पॉजिटिव आई, अलर्ट जारी

जबलपुर  हैदराबाद से जबलपुर लाए गए 10 घोड़े की मौत के बाद अब एक घोड़े की रिपोर्ट ग्लैंडर पॉजिटिव आई है। हालांकि इससे इस घोड़े को कोई खतरा नहीं है, क्योंकि रिपोर्ट जीरो पॉजिटिव है, लेकिन अन्य घोड़ों के लिए यह चिंता का विषय जरूर है। पशु चिकित्सा विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों की एक घोड़े की रिपोर्ट ग्लैंडर पॉजिटिव आने की सूचना दी है। लिहाजा एक बार फिर भोपाल से डॉक्टरों की टीम जबलपुर आ सकती है। सचिन तिवारी 27 अप्रैल से 5 मई के बीच हैदराबाद से 57 घोड़े ट्रक में लोड कर जबलपुर के रैपुरा गांव लेकर आए हैं। इनमें से 8 घोड़ों की मौत 7 से 13 मई के बीच होते ही जिला प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग अलर्ट हुआ। सभी घोड़ों के सेंपल राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र हिसार (हरियाणा) भेजे गए थे। जिसमें से दो घोड़ों को छोड़कर सभी की ग्लैंडर रिपोर्ट निगेटिव आई थी। संक्रामक बीमारी है ग्लैंडर ग्लैंडर्स संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से घोड़ों, गधों और खच्चरों को प्रभावित करती है, लेकिन यह मनुष्यों और अन्य जानवरों में भी फैल सकती है। यह बीमारी बर्क होल्डरिया मैलेई नामक जीवाणु के कारण होती है। यही वजह है कि रैपुरा के अस्तबल में घोड़ों की मौत की खबर लगते ही पशु चिकित्सा विभाग ने अलर्ट हुआ और सभी घोड़ों के सैंपल ग्लैंडर की जांच के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र हिसार भेजे गए। जिला प्रशासन ने सभी घोड़ों को अलग-अलग रखने के निर्देश दिए थे और उनकी देखरेख के लिए डॉक्टरों की टीम को भी तैनात किया था। HPSL चलाने वाले सुरेश पलादुगू के हैं ये घोड़े जयपुर (राजस्थान) की लवान्या शेखावत ने ग्लैंडर को लेकर कराई गई घोड़ों की पिछली जांच रिपोर्ट पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि डाक्टरों ने 20 दिन के भीतर क्या जांच की है, ये समझ से परे है। लवान्या ही हैं जिन्होंने हैदराबाद रेसकोर्स में घोड़ों पर अत्याचार का खुलासा करते हुए जानकारी पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) को दी थी, जिसके बाद तेलंगाना सरकार हरकत में आई और सुरेश पलादुगू के हेथा नेट इंडिया पर छापा मारा। लवान्या का कहना है कि ये घोड़े हैदराबाद में हॉर्स पावर सुपर लीग चलाने वाले सुरेश पलादुगू और उनके सहयोगियों के हैं। हैदराबाद रेसकोर्स में घोड़ों की दौड़ के नाम पर फिलीपींस में ऑनलाइन सट्टा खिलवाया जा रहा था। इसका खुलासा होने पर छापे से पहले सबूत मिटाने के लिए हैदराबाद से ये घोड़े अवैध रूप से जबलपुर भेज दिए गए। 100 से अधिक घोड़ों को गायब करवा दिया है। उनका कहना है कि रैपुरा गांव के अस्तबल में रखे गए घोड़े बहुत नाजुक और महंगे हैं। इन्हें समय पर खाना-पीना, दवाइयां दी जाती हैं। इन्हें बांधकर रखने की वजह खुला रखा जाता है, लेकिन वहां पर ऐसी कोई सुविधा नहीं है। 24 अप्रैल से 3 जून तक मेनका गांधी थीं संपर्क में लवान्या ने कहा कि जब से ये घटनाक्रम हुआ है, तब से लेकर आज तक लगातार मेनका गांधी हमारे संपर्क में थीं, एक-एक घटना, पल-पल की जांच रिपोर्ट पर वह स्वयं नजर बनाए हुए थीं और आखिरकार जब जांच रिपोर्ट तैयार हुई तो, उसमें कुछ संदेह जरूर खड़ा हो रहा है। उन्होंने मेनका गांधी से मांग की है कि घोड़ों की मौत को लेकर जो जांच रिपोर्ट तैयार की है, उस पर एक बार फिर से विचार किया जाए। क्योंकि उस रिपोर्ट में सब कुछ ठीक पाते हुए सही बताया गया है।

मध्यप्रदेश में तेजी से बढ़ रहे कोरोना के मामले, अब तक तीन की मौत; इंदौर में सबसे ज्यादा संक्रमित

भोपाल / ग्वालियर / जबलपुर  मध्यप्रदेश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इनमें इंदौर और दमोह और भोपाल के मामले शामिल हैं। बढ़ते कोरोना मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन राहत की बात ये है कि ज्यादातर मरीजों में JN.1. सबवेरिएंट के हल्के लक्षण देखने को मिले हैँ। कई मरीज अस्पतालों में इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर भी पहुंचे हैं इंदौर में 52 साल की महिला की मौत एक दिन पहले ही इंदौर में 12 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। जबलपुर में पहला कोरोना केस मिला। गुरुवार को इंदौर में भर्ती रतलाम की कोरोना संक्रमित 52 वर्षीय महिला की मौत हो गई। महिला 8 जून को टीबी के इलाज के लिए भर्ती हुई थी, जिसे बाद में एमआरटीबी शिफ्ट किया गया। सीएमएचओ डॉ संध्या बेलसरे के अनुसार, महिला को पहले से गंभीर बीमारियां थीं। टीबी, अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित थी, जिससे उनकी हालत और जटिल हो गई थी। जबलपुर में मिला एक और मरीज मध्यप्रदेश में कोरोना का कहर थम नहीं रहा है। प्रदेश के विभिन्न शहर कोरोना संक्रमण की चपेट में है। रोज-रोज नए एक्टिव केस सामने आ रहे हैं। प्रदेश की राजधानी भोपाल और ग्वालियर के बाद अब जबलपुर में कोरोना का एक और मरीज मिला है। अब जिले में कोरोना पॉजिटिव की संख्या दो हो गई है।  जानकारी के अनुसार नए कोरोना मरीज को उसके ही घर में आइसोलेट किया गया है। कोरोना पॉजिटिव युवक किसी अन्य शहर से यात्रा (ट्रैवल हिस्टी) करके लौटा था। इसके पहले मंगलवार को कोरोना का पहला मरीज मिला था। 80 साल के एक बुजुर्ग कोरोना पॉजिटिव हुए थे। सभी निजी अस्पतालों को भी कोरोना के इलाज के लिए तैयारी रखने के निर्देश दिए गए। जिला अस्पताल में भी सेपरेट वार्ड बनाया गया है। पहले से गंभीर समस्या 6 दिन पहले खरगोन से इंदौर रेफर 44 वर्षीय महिला की कोरोना पॉजिटिव होने के बाद मौत हो गई थी। इससे पहले कोरोना संक्रमित 74 वर्षीय महिला की अरबिंदो अस्पताल में मौत हुई थी। दोनों को गंभीर समस्याएं थीं। इसकी पुष्टि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के कोविड-19 डैशबोर्ड पर की गई है, जिसमें बताया गया कि प्रदेश में कोरोना से एक और महिला की जान गई है। मृतक 52 वर्षीय महिला थीं, जिन्हें ब्रोंकियल अस्थमा था। उन्हें 25 साल पहले टीबी हो चुकी थी और वे मधुमेह (HbA1C 7.4%) से भी पीड़ित थीं। एमपी में 11 जून को कुल 21 कस दर्ज किए गए। जो इस साल एक दिन में सबसे ज्यादा मामले हैं। इसके साथ ही 2025 में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या एमपी में 123 हो गई है। इनमें 86 केस एक्टिव हैं और 34 मरीज रिकवर होकर घर जा चुके हैं। इन तीन जिलो में हुई मौत     – रतलाम में 52 साल की महिला की मौत हुी है। गंभीर बीमारियों से पीड़ित थी महिला।     – खरगोन में 44 साल की महिला की मौत हुई है, महिला ने हाल ही में एमटीएच अस्पताल में शिशु को जन्म दिया था।     – इंदौर में 74 साल की महिला को किडनी की बीमारी थी। 27 अप्रेल को अरबिंदो अस्पताल में कोरोना के इलाज के दौरान इनकी मौत हो गई थी। राजधानी भोपाल में 13 मरीज राजधानी भोपाल में कोरोना के अब तक 13 मरीज सामने आए हैं। सरकारी अस्पतालों में RT-PCR जांच के लिए किट तक उपलब्ध नहीं है यहां मरीज निजी लैबों के भरोसे हैं। बता दें कि बीते दिन गुरुवार 12 जून को भोपाल के नए सीएमएचओ डॉ. मनीश शर्मा ने जेपी अस्पताल का दौरा किया। औचक निरीक्षण में सामने आया कि वहां पीएस प्लांट ही ठीक नहीं है। इसके बाद जल्द ही प्लांट को ठीक करने के निर्देश भी दिए। इंदौर में 51 से ज्यादा एक्टिव केस अकेले इंदौर में अब तक 88 मरीज कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें 76 इंदौर के शेष सभी बाहर के नागरिक हैं। इन सभी की हिस्ट्री चेक की जा रही है। 11 जून को 12 नए मामले 11 जून को भी 12 नए कोरोना मरीज सामने आए। इनमें सभी इंदौर के ही रहवासी हैं। इनकी ट्रेवल हिस्ट्री खंगाली जा रही है। एक्टिव केस 51 से ज्यादा हैं। जानें क्या है सब वेरिएंट JN.1, ओमिक्रॉन के BA.2.86 का एक स्ट्रेन है। इसे पिरोला भी कहा जाता है। अगस्त 2023 में इस वेरिएंट का पहला मामला सामने आया था। इसमें भी करीब 30 म्यूटेशन्स हैं, जो इम्यूनिटी को कमजोर करते हैं। JN.1 के लक्षण -सिरदर्द -बुखार -सूखी खासी -आंखों में जलन -स्वाद न आना -गंध न आना देशभर में जनवरी से अब तक करीब 77 मौतें जबकि देश की बात करें तो जनवरी 2025 से अब तक करीब 77 मौतों की पुष्टि हुई है। इनमें एमपी की 3 मौतों को शामिल किया गया है। 

एमपी की चौखट पर पहुंचा मानसून, शनिवार को लू और गर्मी का आखिरी दिन, इंदौर संभाग में आज भारी बारिश का अलर्ट

भोपाल मध्य प्रदेश में मानसून 16-17 जून को प्रवेश कर सकता है, जिससे पहले प्रदेश में तेज गर्मी और आंधी-बारिश का दौर जारी रहेगा। मौसम विभाग ने भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर समेत कई जिलों में आंधी, गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना जताई है, जबकि ग्वालियर-चंबल में लू चलने की आशंका है। इन जिलों में आंधी-बारिश से हाल बेहाल शुक्रवार को गुना और अशोकनगर समेत कई जिलों में बारिश हुई, वहीं मुरैना में आंधी से पेड़ उखड़ गए और रतलाम में रेलवे ट्रैक पर पेड़ गिरने से ट्रेनें प्रभावित हुईं। इस बार मानसून के समय पर आने की उम्मीद है, क्योंकि यह देश में 8 दिन पहले ही आ गया था और महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ में भी तय समय से पहले पहुंच गया था। कुछ दिनों अटकने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने फिर से रफ्तार पकड़ी है। ऐसे में उम्मीद है कि अगले 3 दिन यानी, 15-16 जून को मानसून मध्यप्रदेश में प्रवेश कर लेना। शनिवार के लिए IMD का इन जिलों में अलर्ट शनिवार को भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, आगर-मालवा, धार, बड़वानी, खरगोन, राजगढ़, शाजापुर, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, सीहोर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, सागर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, दमोह, पन्ना, सतना, मऊगंज, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट में भी तेज आंधी, गरज-चमक और हल्की बारिश होने की संभावना है। मानसून से पहले हीट वेव का आखिरी दिन मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि शुक्रवार को रतलाम, धार, श्योपुर, मुरैना, ग्वालियर, भिंड, दतिया, गुना, अशोक नगर, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में हीट वेव का अलर्ट जारी किया गया था. शनिवार को भी गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, रतलाम और धार को छोड़कर लू चलेगी. हालांकि 14 जून को मध्य प्रदेश में हीट वेव का आखिरी दिन होगा. इसके बाद पूरे मध्य प्रदेश में जोरदार बारिश का दौर शुरू होगा. यहां तक पहुंचा मानसून, मध्य प्रदेश पहुंचने की देर मौसम वैज्ञानिक दिव्या ई सुरेंद्रन ने बताया कि “मानसून की उत्तरी सीमा मुंबई, अहिल्यानगर, आदिलाबाद, भवानीपटना, पुरी और सैंडहेड द्वीप से होकर गुजर रही है. अगले 2 दिनों के दौरान विदर्भ, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के कुछ और हिस्सों में और उसके बाद गुजरात, पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने की संभावना है.” दिव्या ई सुरेंद्रन ने बताया कि “मध्य प्रदेश में मानसून की सामान्य तिथि 15 जून है. इस बार भी मानसून 15 या 16 जून तक मध्य प्रदेश में प्रवेश कर सकता है.” शुक्रवार को कई जिलों में पारा 40 के पार शुक्रवार को कई शहरों में पारा 40 डिग्री के पार रहा। छतरपुर जिले का खजुराहो सबसे गर्म रहा। यहां दिन का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। ग्वालियर में 44.5 डिग्री, नर्मदापुरम में 44.4 डिग्री और नौगांव में 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भोपाल में 40 डिग्री, इंदौर में 38.2 डिग्री, उज्जैन में 41.8 डिग्री और जबलपुर में 40.8 डिग्री सेल्सियस रहा। इसी तरह टीकमगढ़, नरसिंहपुर, गुना, सतना, रीवा, सीधी, शिवपुरी, उमरिया, सागर, रतलाम, शाजापुर, खरगोन और खंडवा में तापमान 40 डिग्री या इससे अधिक दर्ज किया गया। तय समय से पहले आया मानसून बीच में अटका इस बार देश में मानसून 8 दिन पहले ही आ गया था। वहीं, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में यह तय समय से पहले पहुंच गया। ऐसे में अनुमान था कि मध्यप्रदेश में यह जून के पहले सप्ताह में ही आ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पिछले 15 दिन से मानसून महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ में एक ही जगह पर ठहरा रहा। इस वजह से एमपी में इसकी एंट्री नहीं हो पाई। हालांकि, अब मानसून आगे बढ़ने लगा है। इसलिए अब यह प्रदेश में 15-16 जून तक पहुंच सकता है। बता दें कि एमपी में मानसून के प्रवेश की सामान्य तारीख 15 जून ही है। पिछले साल यह 21 जून को एंटर हुआ था।   बिजली गिरने से 2 की मौत, कई पेड़ उखड़े, ट्रैक पर ट्रेनें थमी इससे पहले शुक्रवार को प्रदेश के कई जिलों में तेज आंधी और बारिश का दौर रहा। शिवपुरी के ककरवाया गांव के पास भूसा से गट्टा बनाने वाली दो फैक्ट्री को भारी नुकसान पहुंचा। आंधी में दोनों फैक्ट्रियों के जमीन में गढ़े पिलर और शेड उखड़कर हवा में उड़ गए। जिससे शेड के नीचे रखा भूसा और भूसे से बनी ब्रिक बारिश में धुल गई। गुना में तेज आंधी चली। शिवपुरी में धूलभरी आंधी चलने के साथ बारिश हुई। कोलारस में तेज पानी गिरा। खंडवा में भीषण गर्मी के बीच तेज बारिश का दौर रहा। मुरैना में तेज आंधी से कई पेड़ उखड़ गए और झोपड़ियों को नुकसान पहुंचा। रतलाम रेल मंडल के गौतमपुरा बड़नगर रेलवे ट्रैक के बीच आंधी-तूफान के साथ हुई तेज बारिश से पेड़ ट्रैक पर आ गिरा। इससे महू से रतलाम आने वाली पैसेंजर ट्रेन गौतमपुरा में खड़ी हो गई। रतलाम के मोयाखेड़ा में बिजली गिरने से एक 15 वर्षीय बालिका और तंबोलिया में एक युवती की मौत हो गई। एक अन्य युवती घायल हो गई। गुना में एक इंच से ज्यादा पानी गिरा। आलोट में ग्राम जोयन में महिला श्यामू बाई पर पेड़ गिर गया। जिससे उसकी की मौत हो गई। खजुराहो में पारा 45 डिग्री, ग्वालियर, नर्मदापुरम-नौगांव भी गर्म रहे शुक्रवार को कई शहरों में पारा 40 डिग्री के पार रहा। छतरपुर जिले का खजुराहो सबसे गर्म रहा। यहां दिन का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। ग्वालियर में 44.5 डिग्री, नर्मदापुरम में 44.4 डिग्री और नौगांव में 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भोपाल में 40 डिग्री, इंदौर में 38.2 डिग्री, उज्जैन में 41.8 डिग्री और जबलपुर में 40.8 डिग्री सेल्सियस रहा। इसी तरह टीकमगढ़, नरसिंहपुर, गुना, सतना, रीवा, सीधी, शिवपुरी, उमरिया, सागर, रतलाम, शाजापुर, खरगोन और खंडवा में तापमान 40 डिग्री या इससे अधिक दर्ज किया गया। गुना में आज सवा इंच से ज्यादा पानी गिर गया। इस बार समय पर ही एंट्री करेगा मानसून इस बार देश में मानसून 8 दिन पहले ही आ गया था। वहीं, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में यह तय समय से पहले पहुंच गया। ऐसे में अनुमान था कि मध्यप्रदेश में यह जून के पहले सप्ताह में ही आ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पिछले 15 दिन से मानसून महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ में एक ही जगह पर ठहरा रहा। इस वजह से एमपी में … Read more

एनआईए ने भोपाल और राजस्थान में आतंकी साजिश के आरोप में की छापेमारी

भोपाल  आतंकी संगठन हिज्ब-उत-तहरीर (HUT) को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) और राजस्थान के झालावाड़ में छापा मारा है. एनआईए की टीमों ने तलाशी के दौरान डिजिटल डिवाइस जब्त कीं, जिसे फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा. भोपाल में तीन स्थानों पर NIA का छापा एनआईए ने आतंकी साजिश को लेकर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में तीन स्थानों पर और राजस्थान के झालवाड़ में दो स्थानों पर छापे मारे हैं. यह कार्रवाई हिज्ब-उत-तहरीरसंगठन से जुड़े लोगों पर लिया गया है. इस दौरान डिजिटल डिवाइस भी जब्त किए जाने की सूचना है. एनआईए की यह कार्रवाई HUT को लेकर है.  कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी बता दें कि राजधानी भोपाल में कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े HUT के सदस्यों के होने की सूचना पर पहले भी जांच एजेंसियां इन पर कार्रवाई कर चुकी हैं. इस दौरान इस संगठन से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. ये लोग भोपाल में युवाओं का ब्रैनवॉश करते हुए पकड़े गए थे. इन आतंकियों के तार बांग्लादेश से जुड़े हुए मिले थे. एक मामले का हिस्सा थी छापामारी जांच एजेंसी द्वारा जारी बयान के अनुसार, तलाशी एनआईए द्वारा दर्ज किए गए एक मामले का हिस्सा थी, जो भारत में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे विभिन्न आतंकवादी और कट्टरपंथी नेटवर्क और संगठनों को नष्ट करने के प्रयासों का हिस्सा था। ये कमजोर मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और भर्ती करने की एचयूटी की साजिश से संबंधित है। फॉरेंसिक लेब जाएगी डिजिटल डिवाइस इसमें कहा गया है कि, युवाओं को भारत की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को उखाड़ फेंकने और शरिया कानून द्वारा शासित एक इस्लामिक राज्य स्थापित करने के लिए हिंसा फैलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था।’ बयान में ये भी कहा गया कि, एनआईए की टीमों ने तलाशी के दौरान डिजिटल डिवाइस जब्त की, जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजने की दस्सावेजी कार्रवाई की जा रही है। पहले भी हो चुका है एक्शन ये कोई पहली बार नहीं, बल्कि पहले भी कट्टरपंथी संगठनों द्वारा यहां छापामारी कर कई गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं। ये लोग भोपाल में युवाओं का ब्रैनवॉश करते हुए पकड़े गए थे। पहले हुई गिरफ्तारियों में आतंकियों के तार बांग्लादेश से जुड़े हुए मिले थे। हिज्ब-उत-तहरीर के बारे में जानें हिज्ब-उत-तहरीर एक कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन है, जिसकी स्थापना 1953 में यरुशलम में हुई थी। इसका मकसद वैश्विक इस्लामी खलीफा (इस्लामिक स्टेट) की स्थापना करना है, जो उनके विचार में मुस्लिम दुनिया पर शरिया कानून लागू करेगा। संगठन का मुख्यालय मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय है। भारत में संगठन की गतिविधियां भारत में हाल के वर्षों में हिज्ब-उत-तहरीर की गतिविधियों को लेकर चिंता जताई गई है। मोदी सरकार ने इस संगठन को एक ‘खतरा’ मानते हुए इस संगठन को प्रतिबंधित किया है। सरकारी अधिकारियों की मानें तो हिज्ब-उत-तहरीर भारत में इस्लामिक स्टेट की स्थापना की दिशा में काम कर रहा है और यहां के सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने में जुटा है। प्रतिबंधित संगठन की विचारधारा इस संगठन की विचारधारा इस्लामिक कट्टरता पर आधारित है। ये लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को स्वीकार नहीं करता और एक एकीकृत इस्लामिक राज्य की स्थापना पर जोर देता है। संगठन का दावा है कि वह गैर-हिंसात्मक तरीके से काम करता है, लेकिन इसके समर्थक कई बार सरकार विरोधी और अशांत गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं। HuT को आतंकवादी संगठन घोषित कर लगाया गया प्रतिबंध दरअसल, साल 2024 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 1953 में यरूशलम में बने वैश्विक इस्लामी कट्टरपंथी संगठन हिज्ब-उत-तहरीर (HuT) को आतंकवादी संगठन घोषित कर इसके उपर प्रतिबंध लगा दिया था. यह संगठन देश में शरिया कानून लागू करने की साजिश रच रहा था.  सरकार का कहना था कि यह संगठन आतंकवादी गतिविधियों में शामिल है, जो की देश के भोले-भाले नागरिकों को जिहाद की आड़ लेकर उन्हें बैन आतंकवादी संगठन आईएसआईएस में शामिल करने के लिए उकसाता है.

अहमदाबाद में विमान क्रैश के बाद भोपाल में सख्ती, 10 किमी दायरे के 27 मैरिज गार्डन को नोटिस

भोपाल  गुजरात के अहमदाबाद में हुए विमान हादसे के बाद भोपाल में सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। राजा भोज एयरपोर्ट के 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 27 मैरिज गार्डनों को नोटिस थमाए गए हैं। आरोप है कि ये गार्डन शादी समारोहों में लेजर लाइट और तेज रोशनी का इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे विमान लैंडिंग के समय पायलटों को दिक्कत हो रही थी। बैरागढ़ एसडीएम रविशंकर राय ने यह नोटिस जारी किए। नोटिस में बताया गया कि कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह द्वारा 9 अप्रैल 2025 को भारतीय नागरिक सुरक्षा अधिनियम की धारा 163 के तहत आदेश जारी किया गया था, जिसमें मुबारकपुर चौराहा से संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) तक के क्षेत्र में लेजर बीम, हाई इंटेंसिटी लाइट और स्काई फायर वर्क्स के उपयोग पर रोक लगाई गई थी। इसके बावजूद ये गतिविधियां की जा रही थीं।  पांच अवैध मांस दुकानें सील कलेक्टर कौशलेंद्र सिंह ने नगर निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण को निर्देश दिए कि नियमित निरीक्षण कर दोषियों पर तत्काल कार्रवाई हो। नगर निगम की टीमों ने  कार्रवाई करते हुए एयरपोर्ट क्षेत्र, सीटीओ और बैरागढ़ इलाके में पांच अवैध मांस दुकानों को सील किया। निगम कमिश्नर ने सभी अमलों को निर्देश दिए हैं कि निरीक्षण और कार्रवाई लगातार की जाए। नहीं माने तो होगी सख्त कार्रवाई एयरपोर्ट डायरेक्टर रामजी अवस्थी बताया कि लेजर बीम और तेज लाइट के कारण विमानों की लैंडिंग में दिक्कतें आ रही हैं। एसडीएम राय ने गार्डन संचालकों से मुलाकात कर उन्हें सख्त हिदायत दी। उन्होंने कहा कि यदि नियमों का उल्लंघन दोहराया गया तो गार्डनों को सील कर दिया जाएगा। इसके लिए नियमित रूप से जांच टीमें तैनात रहेंगी।  नियम तोड़ने पर गार्डन होगा सील राजा भोज एयरपोर्ट के डायरेक्टर रामजी अवस्थी ने एयरपोर्ट के आसपास मैरिज गार्डन से लेज बीम और सारपी लाइट से पायलटों को विमान लैंडिंग में परेशानी की बात कही थी. बैरागढ़ एसडीएम रविशंकर राय ने बताया कि शुक्रवार को गार्डन संचालकों से बात की गई है, उन्हें नियमों के पालन करने की हिदायत दी गई है. इसके बावजूद में अगर संचालक नहीं माने तो गार्डन को सील करने की कार्रवाई की जाएगी. इसकी जांच नियमित रूप से टीमें मैदान में उतकर कर करेंगी.  एसडीएम बोले- नियम तोड़े तो गार्डन होगा सील एयरपोर्ट डायरेक्टर रामजी अवस्थी ने भी एयरपोर्ट के आसपास मैरिज गार्डन से लेजर बीम और सारपी लाइट से पायलटों को विमान लैंडिंग में परेशानी होने की बात कही थी। एसडीएम राय ने बताया, शुक्रवार को गार्डन संचालकों से बात भी की। उन्हें नियमों का पालन करने की सख्त हिदायत दी गई है। बावजूद वे नहीं माने तो गार्डन को सील करने की कार्रवाई की जाएगी। नियमित रूप से टीमें मैदान में उतरकर जांच करेगी। अवैध निर्माण की जांच करने उतरेगी टीम एसडीएम राय, सिटी प्लानर अनूप गोयल समेत कई अधिकारी राजा भोज एयरपोर्ट पहुंचे और निरीक्षण किया। उन्होंने सड़क किनारे अवैध तरीके से लग रही मीट दुकानों का भी जायजा लिया। इन पर तत्काल एक्शन लेने की बात कही। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण को निर्देश दिए हैं कि टीमें नियमित रूप से दौरा करें। कोई दोषी पाया जाता है तो तुरंत कार्रवाई हो। दूसरी ओर, निगम की बिल्डिंग परमिशन समेत अन्य टीमें भी अवैध निर्माण की जांच करने मैदान में उतरेगी। 5 मीट दुकानों को सील किया नगर निगम ने  एयरपोर्ट के आसपास, सीटीओ, बैरागढ़ आदि क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से संचालक 5 दुकानों को सील कर दिया। निगम कमिश्नर नारायण ने अमले को नियमित रूप से निरीक्षण कर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं। जांच करने उतरेगी टीम शुकर्वार को एसडीएम, सिटी प्लान अनूप गोयल समेत कई अधिकारी एयरपोर्ट पहुंचे और निरीक्षण किया. साथ ही सड़क किनारे अवैध तरीके से लगी मीट की दुकानों का जायजा भी लिया, दुकानों पर तत्काल एक्शन लेने की बात कही. कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण को निर्देश दिए हैं कि टीमें नियमित रूप से दौरा करें. अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसपर कार्रवाई हो.  

प्रदेश में मेट्रो रेल परियोजना के कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से समय-सीमा का ध्यान रखते हुए पूरे किए जाएं :मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में मेट्रो रेल परियोजना के कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से समय-सीमा का ध्यान रखते हुए पूरे किए जाएं। भोपाल और इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के कार्य प्राथमिकता से पूरे किए जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण और अन्य संबंधित विभागों से समन्वय बनाकर कार्य करें, जिससे कार्य के दौरान कोई कठिनाई नहीं आए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में मध्यप्रदेश मेट्रो रेल परियोजना की समीक्षा कर रहे थे। भोपाल मेट्रो रेल परियोजना भोपाल मेट्रो रेल परियोजना को नवंबर 2018 में मंजूरी दी गई। भोपाल मेट्रो की दोनों लाइन की कुल वास्तविक लंबाई लगभग 30 किलोमीटर है और इसके 30 स्टेशनों में ये 2 भूमिगत स्टेशन शामिल हैं। जिसकी लागत 10 हजार 033 करोड़ रूपए अनुमानित है। शुरुआत में यहां 3 कार वाली कुल 27 ट्रेन संचालित होंगी। भविष्य में मेट्रो की कार संख्या बढ़ाकर 6 की जा सकती है। ऑरेंज लाइन-करोंद चौराहा से एम्स साकेत नगर तक और ब्लू लाइन- भदभदा चौराहा से रत्नागिरी तिराहा तक होगी। मेट्रो डिपो सुभाष नगर में स्थापित होगा। भोपाल मेट्रो के पहले फेज (पुल बोगदा से एम्स तक) का कार्य अगस्त 2025 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसकी लंबाई 7 किलोमीटर और स्टेशनों की संख्या 8 है। वहीं, दूसरे फेज में करोंद चौराहा से पुल बोगदा तक 9 किलोमीटर में 6 स्टेशन बनाए जाएंगे इनमें से 2 स्टेशन जमीन के नीचे बनाए जाएंगे। भोपाल मेट्रो के तीसरे फेज में भदभदा चौराहा से रत्नागिरी तिराहा तक 14.16 किलोमीटर में मेट्रो ट्रैक बनाया जाएगा, जिसमें कुल 14 एलिवेटेड स्टेशन निर्मित किए जाएंगे। भोपाल मेट्रो के दूसरे और तीसरे फेज का निर्माण कार्य जून 2028 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। यहां पुल बोगदा ऑरेंज और ब्लू लाइन का इंटरचेंज स्टेशन होगा। पूर्व में सुभाष नगर से रानी कमलापति स्टेशन के बीच मेट्रो की टेस्टिंग अक्टूबर 2023 में की जा चुकी है। इंदौर मेट्रो रेल परियोजना राज्य सरकार ने इंदौर मेट्रो ट्रेन परियोजना को नवंबर 2018 में स्वीकृति प्रदान की थी। इस परियोजना की कुल लंबाई 31 किलोमीटर से अधिक है, 7 भूमिगत सहित जिसमें कुल 28 स्टेशन बनाए गए हैं। यहां पहले फेज में 3 कार वाली ट्रेन की शुरुआत हो चुकी है। आगामी वर्षों में मेट्रो ट्रेन बढ़ाकर 25 और मेट्रो कार संख्या आवश्यकतानुसार 6 तक बढ़ाई जा सकती है। इंदौर मेट्रो परियोजना की कुल लागत 12 हजार 088 करोड़ रूपए अनुमानित है। यलो लाइन के प्रमुख स्टेशन- गांधी नगर, आईएसबीटी, विजय नगर चौराहा, पत्रकार कॉलोनी, रेलवे स्टेशन, राजवाड़ा, बड़ा गणपति, एयरपोर्ट हैं। मेट्रो डिपो गांधी नगर में स्थापित होगा। इंदौर मेट्रो के पहले फेज (रीच 1) में गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर 3 के बीच 6.3 किलोमीटर में मेट्रो का संचालन शुरू हो चुका है, जिसका उद्घाटन 31 मई 2025 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया। इस फेज में मेट्रो स्टेशनों की संख्या 5 है। पहले फेज के रीच 2 में सुपर कॉरिडोर से मालवीय नगर चौराहा के बीच लगभग 11 किलोमीटर लंबाई में 11 स्टेशन बनकर तैयार होंगे। इस कार्य की डेडलाइन अक्टूबर 2025 रखी गई है। इसी प्रकार इंदौर मेट्रो के दूसरे फेज में मालवीय नगर चौराहा से पलासिया चौराहा तक 5.34 किलोमीटर ट्रैक बनाया जाएगा इसमें 5 एडिवेटेड स्टेशन होंगे। इस फेज में कार्य पूर्ण होने का लक्ष्य दिसंबर 2027 रखा गया है। तीसरे फेज में पलासिया चौराहा से गांधीनगर तक 8.70 किलोमीटर भूमिगत ट्रैक निर्माण किया जाएगा। यहां अंडरग्राउंड स्टेशनों की संख्या 7 होगी। इस फेज का निर्माण कार्य दिसंबर 2028 में पूर्ण करने का लक्ष्य है। व्यापक गतिशीलता योजना और वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट की वर्तमान स्थिति मेट्रो परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में मध्यप्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन एवं जबलपुर शहरों के लिए व्यापक गतिशीलता योजना और वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें बताया गया कि परियोजनाएं अनुमोदन के विभिन्न चरणों में हैं। भोपाल-सीएमपी और एएआर प्रस्तुत एमआरटीएस कॉरिडोर प्रस्तावित हितधारकों को प्रस्तुत किया जाना है। इंदौर- सीएमपी और एएआर एमआरटीएस मेट्रो कॉरिडोर भी प्रस्तावित किए गए हैं। ग्वालियर- सीएमपी और एएआर और हितधारकों द्वारा अनुमोदित एमआरटीएस लाइट मेट्रो कॉरिडोर भी प्रस्तावित किए गए हैं। उज्जैन और जबलपुर- सीएमपी और एएआर हितधारकों को प्रस्तुत किया जाना है। राज्य शासन के अनुमोदन के बाद प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडर के डीपीआर तैयार किए जाने के प्रक्रिया की जाएगी। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय कुमार शुक्ला, अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी तथा अन्य संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

उमरिया के पाली जनपद में दो पंचायत सचिव निलंबित, लापरवाही और मनमानी के चलते हुई कार्रवाई

उमरिया  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं में घोर लापरवाही बरतने, मनमानी करने और शासकीय कार्यों से अनुपस्थित रहने के आरोपों के चलते जनपद पंचायत पाली अंतर्गत दो पंचायत सचिवों को निलंबित कर दिया गया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभय सिंह ने यह कार्रवाई मध्यप्रदेश पंचायत सेवा (अनुशासन तथा अपील) नियम 1999 के नियम 4 के तहत तत्काल प्रभाव से की है। पहला निलंबन – विजय सिंह, सचिव, ग्राम पंचायत गोयरा मुख्य कार्यपालन अधिकारी की ओर से जारी आदेश के अनुसार ग्राम पंचायत गोयरा के पंचायत सचिव विजय सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जनपद पंचायत पाली कार्यालय निर्धारित किया गया है। इस अवधि में वे नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते के पात्र रहेंगे। निलंबन का कारण ग्राम पंचायत गोयरा में चल रही प्रधानमंत्री आवास योजना, समग्र सीडिंग तथा जल गंगा संवर्धन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में अत्यंत धीमी प्रगति पाया जाना रहा। समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट हुआ कि संबंधित सचिव योजनाओं के क्रियान्वयन में न केवल लापरवाह हैं, बल्कि अक्सर पंचायत में अनुपस्थित भी रहते हैं। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों द्वारा बार-बार उनके विरुद्ध शिकायतें की गई थीं, जिनमें शासकीय कार्यों से दूरी, स्वेच्छाचारिता और जनहित की उपेक्षा जैसे आरोप शामिल थे। दूसरा निलंबन – छोटेलाल सिंह, सचिव, ग्राम पंचायत मालाचुआ इसी तरह ग्राम पंचायत मालाचुआ के पंचायत सचिव छोटेलाल सिंह को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उनके निलंबन का आदेश भी उन्हीं नियमों के अंतर्गत पारित किया गया है। मुख्यालय के रूप में उन्हें भी जनपद पंचायत पाली कार्यालय में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है और उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। छोटेलाल सिंह पर भी गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं। समीक्षा बैठक में यह सामने आया कि जल गंगा संवर्धन, प्रधानमंत्री आवास, समग्र सीडिंग और सीएम हेल्पलाइन जैसे प्राथमिक महत्व की योजनाओं में नगण्य प्रगति हुई है। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से प्राप्त शिकायतों के अनुसार वे प्रायः पंचायत कार्य से दूर रहते हैं और मनमाने तरीके से काम करते हैं। उनका आचरण मध्यप्रदेश पंचायत सेवा (आचरण) नियम 1998 के नियम 3 के स्पष्ट उल्लंघन की श्रेणी में पाया गया। प्रशासन की ओर से सख्त संदेश जिला पंचायत उमरिया के सीईओ द्वारा की गई इस त्वरित कार्रवाई से यह संदेश स्पष्ट है कि शासकीय योजनाओं और जनहित कार्यों में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं के समुचित क्रियान्वयन हेतु जवाबदेही तय करना प्रशासन की प्राथमिकता है। पंचायत सचिवों को यह स्पष्ट संकेत है कि यदि वे निर्धारित कर्तव्यों से विमुख होते हैं तो प्रशासनिक कार्रवाई अवश्य की जाएगी। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से अन्य पंचायत सचिवों और ग्रामीण विकास से जुड़े कर्मचारियों को भी चेतावनी मिलती है कि शासन की योजनाओं में लापरवाही करने वालों को अब पद पर बने रहना संभव नहीं होगा।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि रक्तदान केवल रक्त नहीं, बल्कि आशा, विश्वास और जीवन का प्रतीक होता

भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि रक्तदान महादान है। रक्तदान से कई ज़िंदगियों को बचाया जा सकता है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे अधिकाधिक संख्या में स्वैच्छिक रक्तदान कर इस मानवीय अभियान को सशक्त बनाएं। रक्तदान किसी व्यक्ति को जीवनदान देने जैसा है। उन्होंने आह्वान किया कि रक्तदान को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं और नियमित रूप से रक्तदान करके मानवता के इस यज्ञ में भागीदार बनें। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि रक्तदान केवल रक्त नहीं, बल्कि आशा, विश्वास और जीवन का प्रतीक होता है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने अलीराजपुर ब्लड बैंक में कार्यरत टेक्नीशियन श्री परमल सिंह राठौड़ के रक्तदान को जन-आंदोलन बनाने में सक्रिय भूमिका की सराहना की है। उन्होंने कहा कि श्री राठौड़ जैसे समर्पित स्वास्थ्यकर्मी हमारे समाज के सच्चे नायक हैं। जिन्होंने रक्तदान को जन आंदोलन बनाया। उन्होंने कार्य-निष्ठा, पारदर्शिता और सेवाभाव का जो आदर्श प्रस्तुत किया है, वह सम्पूर्ण स्वास्थ्य तंत्र के लिए प्रेरणास्रोत है। 5 वर्षों में 18 हज़ार से अधिक यूनिट रक्त की पूर्ति से अलीराजपुर रक्तदान में बना आत्मनिर्भर उल्लेखनीय है कि टेक्नीशियन श्री राठौड़ ने अलीराजपुर ब्लड बैंक में समर्पण और अनुकरणीय सेवा से जिले में रक्तदान को जनआंदोलन बनाया। आर्मी की नौकरी छोड़कर स्वास्थ्य विभाग में आए श्री राठौड़ ने बीते 5 वर्षों में 18 हज़ार से अधिक यूनिट रक्त की पूर्ति कर, पूरे जिले को रक्तदान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने ब्लड बैंक के लाइसेंस को रिन्यू कराया साथ ही 10 वर्षों से अधिक का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में व्यवस्थित किया। चाहे आधी रात हो या दूरस्थ क्षेत्र, उनका पहला कर्तव्य मरीजों को जीवनरक्षक रक्त उपलब्ध कराना रहा। उनके प्रयासों से एक ही छत के नीचे 700 से अधिक रक्तदाताओं का सफल पंजीकरण और 2 हजार यूनिट से अधिक रक्त संग्रह किया गया। इस उपलब्धि से अलीराजपुर ज़िला पूरे प्रदेश में जनहित का उत्कृष्ट उदाहरण बना। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में 7 लाख 61 हज़ार यूनिट रक्त किया गया संग्रहित मध्यप्रदेश में वर्तमान में 67 शासकीय सहित कुल 174 ब्लड सेंटर संचालित हैं। वर्ष 2024-25 में प्रदेश भर में 5 हजार 283 रक्तदान शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 7 लाख 61 हज़ार यूनिट रक्त संग्रहित किया गया। इसमें 7 लाख 41 हजार 460 पुरुषों और 20 हजार 323 महिलाओं ने स्वैच्छिक रक्तदान कर समाज को नई ऊर्जा दी। यह संग्रहण गत वर्षों की तुलना में लगभग 2 लाख यूनिट अधिक है, जो प्रदेश की जनजागरूकता और सेवा भावना का प्रमाण है। प्रदेश में गर्भवती महिलाओं, सिकल सेल एनीमिया, थैलीसिमिया, हिमोफिलिया, कैंसर तथा अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को रिप्लेसमेंट फ्री और नि:शुल्क रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है। दूरस्थ क्षेत्रों में भी रक्त की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 118 ब्लड स्टोरेज यूनिट्स को चिन्हित कर ब्लॉक स्तर पर क्रियाशील किया गया है। साथ ही, संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए एनएटी तकनीक द्वारा वर्ष 2024-25 में 84 हजार 074 यूनिट रक्त की जांच कर सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराया गया। प्रदेश के ब्लड सेंटरों में 25 ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट्स का संचालन भी प्रारंभ किया गया है।  

मध्यप्रदेश मत्स्य पालन के क्षेत्र में देश में अग्रणी भूमिका निभायेगा : राज्य मंत्री पंवार

मत्स्य उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिये किये जाये समन्वित प्रयास विश्व में मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में भारत दूसरे स्थान पर मध्यप्रदेश मत्स्य पालन के क्षेत्र में देश में अग्रणी भूमिका निभायेगा : राज्य मंत्री पंवार ब्रिलियंट कन्वेशन सेंटर में इनलैंड फिशरीज़ एण्ड एक्वाकल्चर मीट आयोजित मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार सहित विभिन्न राज्यों के मंत्री हुए शामिल भोपाल  केन्द्रीय मछुआ पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा है कि दुनिया में मछली उत्पादन में भारत का स्थान दूसरा है। मछली उत्पादन मुनाफे का व्यवसाय है जिसमें मछली उत्पादक अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा सकता है। इसके लिए मत्स्य उत्पादकों को शिक्षण और प्रशिक्षण के साथ तकनीकी जानकारी भी देना होगी। साथ ही उन्हें अच्छा बीज भी उपलब्ध कराना होगा। यदि हमें विटामिन और प्रोटीन उत्पादन के क्षेत्र में आगे बढ़ना है, तो हमें मछली उत्पादन को अधिक बढ़ावा देने की जरूरत है। देश में मछली उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र सरकार की कई ऐसी योजनाएं है, जिसका लाभ उठाकर मछली उत्पादक अपने व्यवसाय को एक नई ऊँचाई दे सकता है। बीते 10 वर्षों में भारत में मछली का उत्पादन 61 लाख टन से बढ़कर 147 लाख टन हुआ है। इसी अवधि में भारत ने मत्स्य उत्पाद का निर्यात 30 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 60 हजार करोड़ रुपये का हो गया है। केन्द्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह आज इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेशन सेंटर में इनलैंड फिशरीज़ एण्ड एक्वाकल्चर मीट के उदघाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम के प्रारंभ में अहमदाबाद में हुई विमान त्रासदी में मृत यात्रियों एवं अन्य को मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। केन्द्रीय मंत्री रंजन ने कहा कि असंगठित क्षेत्रों में जो मछली उत्पादक है, उन्हें संगठित क्षेत्रों में लाना है। मत्स्य सहकारी समितियों को और मजबूत करना होगा। सभी मत्स्य उत्पादकों को किसान क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ लेना चाहिए। केन्द्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना सहित विभिन्न राज्य सरकार की योजनाएं जैसे मुख्यमंत्री मीनाक्षी योजना, गंभीर बीमारी सहायता योजना, अनुगृह सहायता योजना, शिक्षा प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ मत्स्य उत्पादक उठायें। इन योजनाओं के माध्यम से मत्स्य उत्पादक अपने व्यवसाय को कई गुना आगे बढ़ा सकते हैं। मंत्री राजीव रंजन ने कहा कि हर राज्य मत्स्य किसानों को एक विस्तृत कार्य योजना बनाकर एनएफडीबी द्वारा प्रदाय नि:शुल्क प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध करायें ताकि मत्स्य उत्पादन और उत्पादकता में बढ़ोतरी हो। उन्होंने आगे कहा कि मत्स्य सहकारी समिति को मजबूत करना हमारा लक्ष्य है। इस हेतु नेशनल फिश डिजिटल पोर्टल में किसानों का पंजीयन करायें। मत्स्य किसानों में जागरूकता फैलाये तथा राज्य सरकार मछली उत्पादन-उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष जोर दें तथा अच्छी गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। केन्द्रीय पशुपालन एवं मछली पालन विभाग के मंत्री जार्ज कुरियन ने कहा कि देश में तीन करोड़ लोग मछली उत्पादन से जुड़े है। विश्व के कुल मत्स्य उत्पादन में भारत का 8 प्रतिशत योगदान है, जो कम नहीं है। मछली उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र सरकार सतत प्रयासरत है। मंत्री कुरियन ने आगे कहा कि मछली उत्पादकों को बेहतर से बेहतर सुविधाएं मिलना चाहिए। केन्द्र सरकार प्रतिवर्ष मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। मछुआरों के बच्चों को शिक्षा के लिए भी सुविधाओं में और बढ़ोतरी होनी चाहिए। केन्द्रीय पशुपालन एवं मछली पालन विभाग के राज्यमंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि यदि हमें कृषि के क्षेत्र में किसानों की आय दुगुनी करना है तो हमें मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, पशुपालन को बढ़ावा देना होगा। मछली उत्पादन के लिए हमें हर जिले में अमृत सरोवर की संख्या को बढ़ानी होगी। केन्द्रीय मंत्री बघेल ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि देश में छोटी-छोटी नदियां विलुप्त की कगार पर है, इस ओर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। मत्स्य पालन एवं मछुआ कल्याण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार नारायण सिंह पंवार ने कहा कि राज्य सरकार मत्स्य उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिये निरंतर प्रयासरत है। इसके लिये अनेक कारगर प्रयास किये जा रहे हैं। भोपाल में हलाली क्लस्टर की स्थापना की जा रही है। इससे मत्स्य पालन को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने मछुआरों के कल्याण और मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिये संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी। मीट का उद्देश्य उन इनलैंड राज्यों में मत्स्य उत्पादन बढ़ाना है, जिनकी सीमाएं समुद्र से नहीं जुड़ती हैं। इस मीट में सिर्फ उन राज्यों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं जो समुद्र से मत्स्य उत्पादन गतिविधियाँ नहीं करते हैं। कार्यक्रम में उत्तरप्रदेश के मत्स्य पालन विभाग मंत्री संजय कुमार निषाद, बिहार की मछुआ पालन और पशुपालन मंत्री सुरेणु देवी, हरियाणा के पशुपालन, डेरी और मत्स्य पालन मंत्री श्याम सिंह राणा, केन्द्र सरकार के पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी और संयुक्त सचिव सागर मेहरा सहित छतीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड आदि राज्यों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। इस मौके पर अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और मत्स्य उत्पादकों से संवाद भी किया। प्रदर्शनी में मछली उत्पादन से जुड़े विभिन्न चित्रों एवं ऑडियो-वीडियो के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।  

मुख्यमंत्री ने किसानों के हित में लिया निर्णय, मूंग एवं उड़द का 19 जून से प्रारंभ होगा पंजीयन का कार्य

किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम दिलाने राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा 19 जून से प्रारंभ होगा पंजीयन का कार्य मुख्यमंत्री ने किसानों के हित में लिया निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की बेहतरी के लिये सभी क्षेत्रों में कार्य कर रही है। सरकार ने किसानों के हित में निर्णय लेते हुए ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन किये जाने संबंधी निर्णय लेकर प्रस्ताव केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को भेजा है। किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग एवं उड़द के उपार्जन के लिये किसानों का पंजीयन 19 जून से प्रारंभ होगा। इस संबंध में संबंधित विभाग एवं एजेंसियों को निर्देश जारी कर दिये गये हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिये कृषि आधारित उद्योग लगाने में भी मदद कर रही है। किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम दिलाने के लिये प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान संघों से हुई चर्चा में आश्वस्त किया कि हम सब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य की बेहतरी के लिये डबल इंजन की सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि सरकार किसानों को अगली फसल के लिये भी आवश्यक सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को उन्नत बीज और उन्नत कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के लिये प्रदेश में निरंतर कृषि मेलों का आयोजन कर रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य कृ‍षि लागत एवं मूल्य आयोग भारत सरकार द्वारा ग्रीष्मकालीन मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8682 रूपये प्रति क्विंटल और उड़द का न्यूनतम समर्थन मूल्य 7400 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। राज्य किसान कल्याण एवं कृषि विभाग द्वारा केन्द्र को भेजे गये प्रस्ताव में किसानों का पंजीयन, उपार्जित फसल की गुणवत्ता, परिवहन, भुगतान के साथ प्रचार-प्रसार की कार्य-योजना भी प्रेषित की गई है। 36 जिलों में मूंग और 13 जिलों में उड़द प्रदेश के 36 जिलों में मई माह के तृतीय सप्ताह से जून माह के प्रथम सप्ताह तक मूंग फसल कटाई और प्रदेश के 13 जिलों में मई माह के तृतीय सप्ताह से जून माह के प्रथम सप्ताह तक उड़द फसल की कटाई की जाती है। प्रदेश में मूंग का संभावित क्षेत्राच्छादन 14.35 लाख हेक्टेयर, संभावित उत्पादन 20.23 लाख मीट्रिक टन है। इसी प्रकार उड़द का संभावित क्षेत्राच्छादन 0.95 लाख हेक्टेयर, संभावित उत्पादन 1.24 लाख मीट्रिक टन है। एमएसपी पर पंजीयन प्रक्रिया न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जित की जाने वाली मूंग एवं उड़द के लिये संबंधित किसानों को पंजीयन के लिये किसान की फसल का नाम, आधार नंबर, बैंक खाता नंबर, आईएफसी कोड सहित भूअधिकार ऋण पुस्तिका की स्व-प्रमाणित छायाप्रति संलग्न करना होगी। बैंक खाता राष्ट्रीयकृत बैंक एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक की शाखा का होना अनिवार्य है। सिकमी/बटाई काश्तकार को पंजीयन के लिये आवेदन के साथ सिकमी के अनुबंध की स्व-प्रमाणित प्रति संलग्न करना होगी। किसानों से ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द की उपार्जित मात्रा के भुगतान के लिये कम्प्यूटराईज प्रिंटेड रसीर उपार्जन करने वाली संस्था द्वारा प्रदाय की जायेगी जिसमें किसान का नाम, बैंक खाता क्रमांक तथा भुगतान योग्य राशि का विवरण होगा। इस रसीद पर उपार्जन केन्द्र प्रभारी के हस्ताक्षर भी किये जायेंगे। समर्थन मूल्य पर उपार्जित मूंग-उड़द की एक समान विनिर्दिष्टियां भारत सरकार, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा रबी विपणन वर्ष 2025-26 के लिये केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित एक समान विनिर्दिष्टियां के अनुरूप किया जायेगा। इसके अनुसार ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द के उपार्जन करने की जिम्मेदारी संबंधित उपार्जन करने वाली सहकारी संस्थाओं की होगी। निर्धारित मापदण्ड अनुसार उपार्जन सुनिश्चित करने के लिये सहकारी संस्थाओं/मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपण संघ मर्यादित भोपाल/म.प्र. वेयर हाउसिंग एवं लॉजिस्टिक कार्पोरेशन, खाद्य, कृषि, सहकारिता एवं राजस्व विभाग के मैदानी अमले को ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द की गुणवत्त हेतु जिला स्तर पर प्रशिक्षित किया जायेगा। साथ ही किसानों के हित में समर्थन मूल्य पर ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द उपार्जन की कीमत एवं समान विनिर्दिष्टियां का व्यापार प्रचार-प्रसार किया जाएगा, जिससे किसानों का ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द विचौलियों द्वारा कम दाम पर खरीदा न जा सके। उपार्जित फसल का परिवहन उपार्जन केन्द्र से गोदाम तक मूंग-उड़द परिवहन करने के लिये परिवहनकर्ताओं की नियुक्ति एवं अनुबंध की कार्रवाई की जायेगी। उपार्जन केन्द्र पर प्रतिदिन उपार्जन मात्रा की समीक्षा भी होगी। ई-उपार्जन साफ्टवेयर के माध्यम से ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द के परिवहन के लिये जारी रसीद पर परिवहनकर्ता की प्राप्ति कर उसे मूंग-उड़द सौंपा जायेगा। किसी कारणों से एजेंसियों द्वारा नियुक्त परिवहनकर्ता परिवहन करने में विफल होता है तो वैकल्पिक व्यवस्था जिला स्तरीय समितियों द्वारा की जायेगी। परिवहनकर्ता द्वारा विलम्ब से परिवहन करने पर उसके विरूद्ध नियमानुसार उपार्जन एजेंसियों द्वारा पेनाल्टी लगाई जायेगी। उपार्जन केन्द्रों पर किसानों के‍लिये सुविधाएं उपार्जन केन्द्रों पर किसानों की सुविधा के लिये व्यवस्था उपार्जन समिति होगी, जो केन्द्र पर किसानों के बैठने के लिये छायादार स्थान, साफ पीने के पानी, शौचालय एवं फर्स्ट बॉक्स सुविधा उपलब्ध करायेगी। उपार्जन किये जाने वाले खाद्यान की गुणवत्ता परीक्षण के लिये आवश्यक उपकरण की व्यवस्था भी होगी। इसके लिये विस्तृत परीक्षण भी दिया जायेगा। उपार्जन केन्द्र पर एक बैनर लगाया जायेगा, जिसमें केन्द्र का नाम, एफएक्यू गुणवत्ता का मापदण्ड और भुगतान का उल्लेख होगा। जिन उपार्जन केन्द्रों पर अत्यधिक खरीदी की संभावना होगी, उन केन्द्रों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था की जायेगी। साथ ही निर्धारित केन्द्रों पर लैपटॉप, प्रिन्टर, बैटरी आदि को चालू अवस्था में रखा जायेगा।  

सर्प-दंश से जन-सामान्य के बचाव के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा एडवाइजरी जारी

सर्पदंश रोकथाम अभियान सर्प-दंश से जन-सामान्य के बचाव के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा एडवाइजरी जारी भोपाल मध्यप्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सर्पदंश के मामलों को गंभीरता से लेते हुए इसे स्थानीय आपदा घोषित किया है। पिछले वर्ष सर्प-दंश से 2,500 से अधिक मौत हुई थी जिससे व्यापक जनहानि हुई थी। बारिश के मौसम में बढ़ने वाली इन घटनाओं की रोकथाम के लिए एक बहुआयामी रणनीति तैयार की है, जिसमें जनजागरूकता, आपातकालीन सेवाओं का सुदृढ़ीकरण और निवारण संबंधी उपाय शामिल किए गए हैं। जनजागरूकता और प्रशिक्षण पर विशेष जोर इस अभियान के तहत ग्राम पंचायत और शहरी वार्ड स्तर पर स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सोशल मीडिया, रेडियो, होर्डिंग्स और प्रिंट मीडिया के जरिए सर्पदंश से बचाव और प्राथमिक उपचार की जानकारी प्रसारित की जाएगी। स्कूलों और कॉलेजों में विशेष सत्र आयोजित कर विद्यार्थियों को इस खतरे और उससे बचाव के उपायों के बारे में शिक्षित किया जाएगा। आपातकालीन सेवाओं को मजबूत बनाने की पहल प्रत्येक जिले में प्रशिक्षित ‘सर्प मित्र’ और ‘स्नेक-कैचर्स’ की तैनाती की जाएगी, जिनके हेल्पलाइन नंबर जनता को उपलब्ध कराए जाएंगे। सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी-वेनम (विषनाशक दवा) का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया जाएगा। पीड़ितों को निकटतम चिकित्सा केन्द्र तक पहुँचाने की व्यवस्था को और सुचारू बनाया जाएगा, ताकि आपात स्थिति में त्वरित सहायता मिल सके। निवारक उपायों पर सामुदायिक भागीदारी जनजागरूकता गतिविधि में ग्रामीणों को खेतों और जंगलों में काम करते समय मोटे जूते और दस्ताने पहनने की सलाह दी जाएगी। घरों के आसपास सफाई रखने, झाड़ियों को काटने और कूड़े के उचित निपटान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पशुपालकों को पशुशालाओं के आसपास बाड़ लगाने और पर्याप्त रोशनी का प्रबंध करने की सलाह दी गई है। पर्यटन स्थलों पर सर्प अधिकता क्षेत्रों को चिह्नित करने और चेतावनी बोर्ड लगाने का भी प्रावधान किया गया है। बजट आवंटन और जनता से अपील राज्य सरकार ने इस अभियान के लिए प्रत्येक जिले को 23.17 लाख रुपये आवंटित किए हैं। बजट का उपयोग प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल और जनजागरूकता कार्यक्रमों में किया जाएगा। जनता से अपील की गई है कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या देसी उपचार की बजाय तुरंत निकटतम अस्पताल पहुँचें, क्योंकि पहला एक घंटा ‘गोल्डन आवर’ यानि जीवनरक्षक होता है। साथ ही, सांपों को मारने या परेशान करने के बजाय उन्हें दूर भगाने के उपाय करने पर जोर दिया गया है। इस व्यापक अभियान से उम्मीद की जा रही है कि राज्य में सर्पदंश से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी आएगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने माना आभार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने सौजन्य भेंट की। उन्होंने राज्य सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की खरीदी करने के निर्णय का स्वागत किया और मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार माना। इस अवसर पर भारतीय किसान संघ के महेश चौधरी तथा अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 19 जून से मूंग खरीदी के लिए पंजीयन शुरू होंगे।उन्होंने मुख्यमंत्री जी की किसानों के प्रति संवेदनशीलता की तारीफ की और आभार व्यक्त किया।  

सिंहस्थ में भीड़, यातायात और पार्किंग प्रबंधन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी उपयोग किया जाएगा

 भोपाल  उज्जैन में वर्ष 2028 में होने जा रहे सिंहस्थ में भीड़, यातायात और पार्किंग प्रबंधन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का भी उपयोग किया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था और अन्य प्रबंध के लिए ड्रोन से निगरानी की जाएगी। इसी वर्ष प्रयागराज महाकुंभ में इन तकनीकों के सफल प्रयोग के बाद इन्हें यहां भी अपनाया जाएगा। सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों को लेकर पुलिस मुख्यालय में डीजीपी कैलाश मकवाणा ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें प्रयागराज कुंभ की व्यवस्थाओं में बड़ी भूमिका निभाने वाले उत्तर प्रदेश पुलिस के आइपीएस अधिकारी प्रेम कुमार गौतम ने वहां किए गए प्रबंध के बारे में प्रस्तुतीकरण दिया। रीयल-टाइम ट्रैफिक मानीटरिंग की जाएगी गौतम ने बताया कि स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण के लिए एआइ आधारित ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर की स्थापना, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आइटीएस) द्वारा रीयल-टाइम ट्रैफिक मानीटरिंग की गई। ड्रोन से प्रमुख मार्गों और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में सटीक पर्यवेक्षण किया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रूट डायवर्सन मोबाइल एप बनाकर लाइव ट्रैफिक अपडेट उपलब्ध कराए गए। आंतकवाद से निपटने की भी तैयारी साथ ही उन्होंने बताया कि आतंकवाद विरोधी गतिविधियों से निपटने के लिए डाग स्क्वाड, बम डिस्पोजल यूनिट को तैनात किया। डार्कवेब से साइबर खतरों और फेस रिकग्नीशन ट्रैकिंग सिस्टम से संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखी गई। वीवीआइपी मूवमेंट और श्रद्धालु सुविधाओं के बारे में भी उन्होंने बताया। प्रयागराज की तुलना में जगह कम उज्जैन सिंहस्थ में भी प्रदेश पुलिस इन व्यवस्थाओं को अपनाने की तैयारी कर रही है। सिंहस्थ के लिए अभी लगभग तीन वर्ष होने के कारण पुलिस के पास तैयारी के लिए पर्याप्त अवसर भी है। इसमें लगभग तीन करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है, पर बड़ी चुनौती यह है कि प्रयागराज की तुलना में उज्जैन में जगह बहुत कम है, गलियां संकरी हैं।

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