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कर्नाटक सरकार ने मुस्लिम के लिए उठाया ये बड़ा कदम, बीजेपी ने लगाया तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप

बेंगलूरू कर्नाटक सरकार ने हाल ही में एक बड़ा निर्णय लिया है, जिससे राजनीतिक माहौल में हड़कंप मच गया है। राज्य सरकार ने मुस्लिम ठेकेदारों को सरकारी निविदाओं में 4 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव पारित किया है। यह फैसला राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता में हुई एक कैबिनेट बैठक में लिया गया। इसके साथ ही कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक ग्राम स्वराज और पंचायत राज (संशोधन) विधेयक को भी मंजूरी दी। इस फैसले से जहां एक तरफ मुस्लिम ठेकेदारों में खुशी की लहर है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है। कर्नाटक सरकार का बड़ा कदम कर्नाटक सरकार ने अब सरकारी निविदाओं में मुस्लिम ठेकेदारों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को कर्नाटक ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक प्रोक्योर्मेंट (KTPP) एक्ट में बदलाव का प्रस्ताव पेश किया, जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। इस बदलाव के बाद, अब एक करोड़ रुपये तक की निविदाओं में मुस्लिम ठेकेदारों को 4 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। यह निर्णय कर्नाटक के मुस्लिम ठेकेदारों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उन्हें सरकारी टेंडर हासिल करने में कुछ हद तक सहूलियत हो सकती है। हालांकि, इस फैसले के राजनीतिक और कानूनी पहलू भी हैं, जिन पर बहस हो रही है। भाजपा का तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप कर्नाटक सरकार के इस फैसले के बाद, भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में कहा कि कर्नाटक सरकार का यह कदम राहुल गांधी के पूर्ण समर्थन से लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम राहुल गांधी की “मानसिकता” को दर्शाता है और कांग्रेस केवल एक समुदाय को खुश करने के लिए ऐसे फैसले ले रही है। रविशंकर प्रसाद ने कहा, “कर्नाटक सरकार ने इस फैसले को पारित करने से पहले यह सुनिश्चित किया कि राहुल गांधी का पूरा समर्थन हो।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता ऐसे निर्णयों के माध्यम से देश में धार्मिक असंतुलन को बढ़ावा दे रहे हैं। मुस्लिम ठेकेदारों के लिए 4% आरक्षण कर्नाटक सरकार द्वारा पारित इस प्रस्ताव के बाद, एक करोड़ रुपये तक की सरकारी निविदाओं में मुस्लिम ठेकेदारों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण का रास्ता साफ हो गया है। इसका मुख्य उद्देश्य मुस्लिम समुदाय के ठेकेदारों को सरकारी ठेकों में समान अवसर प्रदान करना है। कर्नाटक सरकार का कहना है कि इस निर्णय से मुस्लिम ठेकेदारों को सार्वजनिक कार्यों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। वहीं, विपक्षी पार्टी भाजपा का कहना है कि यह कदम असंवैधानिक है और धर्म आधारित आरक्षण संविधान के खिलाफ है।   भाजपा ने दी संविधान का हवाला भा.ज.पा. नेता रविशंकर प्रसाद ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकारी ठेकेों में धर्म आधारित आरक्षण पूरी तरह से असंवैधानिक है। उनका कहना है कि भारतीय संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण की अनुमति दी जा सकती है, न कि किसी विशेष धार्मिक समुदाय के लिए सीधे आरक्षण दिया जा सकता है। रविशंकर प्रसाद ने इस फैसले को राष्ट्रीय स्तर पर एक खतरनाक कदम बताया और कहा कि इस तरह के निर्णय राष्ट्र की एकता और अखंडता को खतरे में डाल सकते हैं। उनका कहना था, “स्वतंत्रता संग्राम के दौरान छोटे-छोटे मुद्दों के आधार पर विभाजन हुआ था। इस प्रकार की नीतियां भी भविष्य में किसी बड़े विभाजन का कारण बन सकती हैं।”  

महाराष्ट्र विधान परिषद उपचुनाव के लिए बीजेपी ने अपने जारी की उम्मीदवारों सूची

मुंबई महाराष्ट्र विधान परिषद उपचुनाव के लिए भाजपा ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में तीन नामों को जगह दी गई है। जिनमें संदीप दिवाकरराव जोशी, संजय किशनराव केनेकर और दादाराव यादवराव केचे का नाम शामिल है। महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों पर उपचुनाव होने हैं। सत्ताधारी गठबंधन महायुति में सीट शेयरिंग के अनुसार, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट) इस उपचुनाव में एक-एक उम्मीदवार को मैदान में उतारेंगी, जबकि बीजेपी तीन सीटों पर चुनाव लड़ेगी। पांच सीटों के लिए होना है मतदान महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटें खाली हैं, जिन पर उपचुनाव होना है। उपचुनाव में नामांकन की आखिरी तारीख 17 मार्च है और 27 मार्च को मतदान होगा। एनसीपी के नेता अजित पवार ने भी रविवार को दोपहर एक बजे अपने सरकारी आवास पर पार्टी के कोर ग्रुप की बैठक बुलाई है। इस बैठक में विधान परिषद उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवार के नाम पर फैसला लिया जा सकता है। एनसीपी की तरफ से जिन नेताओं को टिकट दिया जा सकता है, उनमें जीशान सिद्दीकी, उमेश पाटील और संजय दौंड का नाम शामिल बताया जा रहा है। विधानसभा चुनाव के दौरान महायुति ने विधान परिषद के अपने पांच सदस्यों को विधानसभा चुनाव में भी उम्मीदवार बनाया था, जिसके चलते विधान परिषद की पांच सीटें खाली हुईं थी। विधान परिषद उपचुनाव के लिए अधिसूचना 10 मार्च को जारी की गई थी। जिसके मुताबिक नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तारीख 17 मार्च है। 18 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी और 20 मार्च तक नाम वापस लिया जा सकता है। इन सीटों से निर्वाचित होने वाले एमएलसी का कार्यकाल 13 महीने का होगा। 

जेपी नड्डा के बाद किसे मिलेगी BJP की बागडोर ? कप्तान बनने की रेस में ये 7 नाम

  नईदिल्ली   भारतीय जनता पार्टी अपना अगला अध्यक्ष चुनने जा रही है। हालांकि, पार्टी शीर्ष पद के लिए किसे चुनेगी, कैसे चुनेगी और कब चुनेगी, यह अब तक साफ नहीं हो सका है। फिलहाल, भाजपा की कमान केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के हाथों में है। अटकलें हैं कि पार्टी इन 7 नेताओं में से किसी के नाम पर मुहर लगा सकती है। 4 आधार: पहला- क्षेत्र पार्टी तमिलनाडु और केरल में विस्तार की कोशिश में लंबे समय से जुटी हुई है। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा दक्षिण भारत से ही किसी नेता को यह पद सौंप सकती है। कर्नाटक में पार्टी दोबारा सरकार बनाने में असफल रही थी, लेकिन लोकसभा में केरल से खाता खोलने में सफल रही है। दूसरा- जेंडर भाजपा के इतिहास में हमेशा कप्तान पुरुष रहा है। अब हाल ही में रेखा गुप्ता के रूप में दिल्ली को महिला मुख्यमंत्री देने वाली पार्टी रुख में बदलाव कर सकती है और महिला प्रमुख का चुनाव कर सकती है। वहीं, पार्टी हाल के कई चुनावों में महिलाओं से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखती नजर आई है। तीसरा- वफादारी और अनुभव संगठन का तजुर्बा भी अध्यक्ष के चुनाव में बड़ा फैक्टर साबित हो सकता है। ऐसे में पार्टी किसी युवा चेहरे के बजाए वरिष्ठ नेता का चुनाव कर सकती है। चौथा- संघ की मुहर महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव की बड़ी जीत में राष्ट्रीय स्वयं सेवक की भूमिका अहम मानी जा रही है। कहा जा रहा है कि पार्टी के शीर्ष पद पर नेता चुनने के लिए संघ की मुहर भी अहम साबित होगी। जी किशन रेड्डी 4 दशक से ज्यादा समय से भाजपा का हिस्सा केंद्रीय मंत्री रेड्डी को इस दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है। दक्षिण भारत से भाजपा को आखिरी अध्यक्ष एम वेंकैया नायडू के रूप में मिला था। वह तेलंगाना भाजपा के अध्यक्ष भी हैं। उनके साथ ही बंडी संजय कुमार का नाम भी चर्चा में है। वनथि श्रीनिवासन और डी पुरंदेश्वरी श्रीनिवासन तमिलनाडु से आती हैं और वह भाजपा की महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्होंने 2021 विधानसभा चुनाव में कोयंबटूर दक्षिण से कमल हासन को मात दी थी। खास बात है कि राज्य में 2026 में चुनाव होने हैं। वहीं, आंध्र प्रदेश भाजपा की चीफ और सांसद पुरंदेश्वरी को ‘दक्षिण की सुषमा स्वराज’ कहा जाता है। वह राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की रिश्तेदार हैं। धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव भाजपा के अहम रणनीतिकारों में शुमार प्रधान और यादव को इस रेस में गिना जा रहा है। 2024 में ही भाजपा ने ओडिशा में जीत हासिल की है और इससे पहले पूर्व से कभी कोई नेता संगठन के शीर्ष पद तक नहीं पहुंचा। महाराष्ट्र चुनाव के प्रभारी के तौर पर यादव ने भाजपा को बड़ी जीत दिलाई थी। साथ ही वह 2017 में उत्तर प्रदेश के प्रभारी भी थे। मनोहर लाल खट्टर और शिवराज सिंह चौहान दोनों ही नेता पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं और माना जाता है कि उन्हें आरएसएस का समर्थन भी हासिल है। एक ओर जहां हरियाणा के पूर्व सीएम खट्टर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी माना जाता है। वहीं, मुख्यमंत्री के तौर पर कई बार मध्य प्रदेश की कमान संभाल चुके शिवराज सिंह चौहान का लंबा अनुभव है।

तमिलनाडु सरकार ने बजट 2025 से आधिकारिक रुपया प्रतीक ‘₹’ हटाया

चेन्नई भाषा को लेकर तमिलनाडु और केंद्र सरकार के बीच जारी विवाद में एक नया मोड़ आ गया है। तमिलनाडु की स्टालिन सरकार ने राज्य के बजट से आधिकारिक रुपये (₹) का सिंबल बदलकर तमिल भाषा में कर दिया है। स्टालिन सरकार ने तमिलनाडु के बजट से ‘₹’ का सिंबल हटाकर उसे ‘ரூ’ सिंबल से रिप्लेस कर दिया है। वह सिंबल तमिल लिपि का अक्षर ‘रु’ है। यह पहली बार है जब किसी राज्य ने नेशनल करेंसी सिंबल को अस्वीकार कर दिया है। पूरे देश में रुपये को सिंबल ₹ को आधिकारिक तौर पर अपनाया जाता है। लेकिन तमिलनाडु सरकार अलग सिंबल लेकर आ गई है।  DMK नेता सरवनन अन्नादुरई ने कहा, “हमने रुपये के लिए तमिल शब्द रखा है। यह कोई टकराव नहीं है। इसमें कुछ भी अवैध नहीं है। हम तमिल को प्राथमिकता देंगे, इसीलिए सरकार ने यह कदम उठाया।” उन्होंने आगे कहा, “मैंने उनसे सिर्फ़ तमिल को उचित रूप से बढ़ावा देने के लिए कहा है। तमिलनाडु शिक्षा के क्षेत्र में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। लोग यहां से उत्तर भारत की ओर नहीं जा रहे हैं। वे अमेरिका और ब्रिटेन जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी इसे पचा नहीं पा रही है।” सिंबल बदलने पर बीजेपी नेता अमित मालवीय ने तमिलनाडु सरकार पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख मालवीय ने गुरुवार को कहा, “उदय कुमार धर्मलिंगम एक भारतीय शिक्षाविद और डिजाइनर हैं, जो डीएमके के एक पूर्व विधायक के बेटे हैं, जिन्होंने भारतीय रुपये (₹) का चिह्न डिजाइन किया था, जिसे भारत ने स्वीकार किया था। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन तमिलनाडु बजट 2025-26 दस्तावेज से ₹ ​​चिह्न हटाकर तमिलों का अपमान कर रहे हैं। कोई कितना हास्यास्पद हो सकता है?” आपको जानकारी के लिए बता दें कि रुपये (₹) के सिंबल का डिजाइन उदय कुमार धर्मलिंगम ने बनाया था। वह पेशे से एक शिक्षाविद और डिजाइनर हैं। उनका डिजाइन पांच शॉर्ट लिस्टेड सिंबल में से चुना गया था। भारत सरकार ने 15 जुलाई 2010 को इस सिंबल को आधिकारिक तौर पर अपनाया था।   DMK नेता के बेटे ने ही गढ़ा था रुपये का सिंबल ‘₹’ हालांकि भाषा की राजनीति करते हुए ‘₹’ को बजट से हटाने वाली तमिलनाडु सरकार ने ये ध्यान देना जरूरी नहीं समझा कि रुपये के इस सिंबल को एक तमिल ने ही डिजाइन किया था. खास बात यह है कि इस सिंबल को डिजाइन करने वाले उदय कुमार धर्मलिंगम के पिता भी DMK के नेता थे. उदयकुमार धर्मलिंगम (Udayakumar Dharmalingam) एक भारतीय शिक्षाविद् और डिज़ाइनर हैं, जिन्होंने भारतीय रुपये के प्रतीक चिह्न (₹) को डिज़ाइन किया था. उनका जन्म 10 अक्टूबर 1978 को तमिलनाडु के कल्लाकुरिची में हुआ था वे चेन्नई, तमिलनाडु के निवासी हैं और आईआईटी गुवाहाटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं. DMK सरकार ने बदला रुपये का सिंबल. उदयकुमार धर्मलिंगम के पिता एन धर्मलिंगम डीएमके के विधायक रह चुके हैं. उदयकुमार धर्मलिंगम देश के नामी डिजाइनर हैं. जब उदय ने ये प्रतियोगिता जीती थी तो एन धर्मलिंगम ने कहा था कि ये उनके लिए बेहद गर्व का क्षण है. मेरे बेटे ने तमिलनाडु के लिए गौरव लाया है. उदयकुमार धर्मलिंगम ने रुपये के प्रतीक ₹ का डिजाइन देवनागरी के ‘र’ और रोमन अक्षर ‘R’ को मिलाकर बनाया, जो भारतीय तिरंगे से प्रेरित है और इसे अन्य मुद्राओं से अलग दिखाने के लिए डिज़ाइन किया गया था. इस डिजाइन को 15 जुलाई 2010 को भारत सरकार द्वारा जनता के सामने प्रस्तुत किया गया. यह प्रतीक एक खुली प्रतियोगिता के माध्यम से चुना गया था, इसके लिए वित्त मंत्रालय ने प्रतियोगिता आयोजित की थी. इसके लिए 3,331 आवेदन आए थे.जिसमें उदयकुमार का डिज़ाइन पांच फाइनलिस्ट डिज़ाइनों में से विजेता रहा. उन्होंने बताया था कि यह डिज़ाइन भारतीय तिरंगे से प्रेरित है और इसमें देवनागरी लिपि के ‘र’ और रोमन लिपि के ‘R’ को मिलाकर बनाया गया है, साथ ही एक क्षैतिज रेखा भी शामिल है जो समानता और राष्ट्रध्वज को दर्शाती है. उदयकुमार का यह योगदान भारतीय मुद्रा को वैश्विक स्तर पर एक विशिष्ट पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण रहा. तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष अन्नामलाई ने कहा कि 2025-26 के लिए डीएमके सरकार के बजट में रुपये के चिह्न बदल दिया गया है. इस डिजाइन को एक तमिल ने डिजाइन किया गया था.जिसे पूरे भारत ने अपनाया और हमारी मुद्रा में शामिल किया. इस प्रतीक को डिजाइन करने वाले थिरु उदयकुमार, डीएमके के एक पूर्व विधायक के बेटे हैं. आप कितने मूर्ख हो सकते हैं, थिरु स्टालिन.” बीजेपी नेता तमिलिसाई ने कहा कि रुपये का चिह्न बदलने वाले स्टालिन साहब को सबसे पहले अपना नाम बदलकर स्टालिन में करना चाहिए.  

पीएम मोदी ने हरियाणा निकाय चुनाव में भाजपा की शानदार जीत को सराहा

नई दिल्ली पीएम मोदी ने हरियाणा के लोगों को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा स्थानीय निकाय चुनावों में भारी जीत पर बधाई देते हुए कहा कि यह जीत राज्य में नायब सिंह सैनी सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों में “लोगों के अटूट विश्वास” की अभिव्यक्ति है। पीएम मोदी ने जताया आभार पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, “हरियाणा निकाय चुनावों में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के लिए मैं हरियाणा में अपने परिवार के सदस्यों का बहुत आभारी हूं।” उन्होंने आगे कहा कि हरियाणा सरकार लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए “कोई कसर नहीं छोड़ेगी”। पीएम ने कहा, “यह जीत राज्य में नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों में लोगों के अटूट विश्वास की अभिव्यक्ति है। मैं राज्य के लोगों को आश्वस्त करता हूं कि हम उनकी आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।” उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं को भी धन्यवाद दिया और कहा, “पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत ने इस महान जीत में बड़ी भूमिका निभाई है, जिसके लिए मैं उनका तहे दिल से आभार व्यक्त करता हूं।” सीएम ने कहा कि ट्रिपल इंजन वाली सरकार पर “मंजूरी” इस बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि स्थानीय निकाय सरकार और राज्य स्तर पर ट्रिपल इंजन वाली सरकार विकसित भारत के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी। सीएम सैनी ने कहा, “हमारी स्थानीय निकाय सरकार और यह ट्रिपल इंजन वाली सरकार पीएम मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी।” उन्होंने राज्य की जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजे हरियाणा की ट्रिपल इंजन वाली सरकार पर “मंजूरी” हैं। सीएम सैनी ने कहा, “आज आए स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजों में हरियाणा की जनता ने ट्रिपल इंजन वाली सरकार पर अपनी मुहर लगाई है। मैं हरियाणा की जनता का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं। मैं चुनाव आयोग और सभी अधिकारियों का चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए शुक्रिया अदा करता हूं।” गृह मंत्री ने हरियाणा की जनता का जताया आभार बुधवार को संपन्न हुए हरियाणा स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा की भारी जीत के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आभार व्यक्त किया। गृह मंत्री शाह ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि हरियाणा को केवल मोदी जी पर भरोसा है। उन्होंने एक्स पर कहा, “हरियाणा विधानसभा चुनावों में मिली भारी जीत के बाद मैं नगर निगम और नगर निकाय चुनावों में भी भाजपा को अपना आशीर्वाद देने के लिए हरियाणा की जनता का बहुत आभारी हूं। मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा वार्ड से लेकर विधानसभा और पंचायत से लेकर संसद तक लोगों की पहली पसंद बन गई है।” शाह ने कहा, “मैं इस जीत के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी जी, प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बडौली और सभी कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई देता हूं।” बता दें कि हरियाणा शहरी निकाय चुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया है। प्रदेश के 10 में से नौ नगर निगमों में भाजपा ने जीत का परचम लहराया है। मानेसर नगर निगम में निर्दलीय उम्मीदवार डॉ इंदरजीत यादव ने जीत दर्ज की है। कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल पाया। बीजेपी के उम्मीदवारों ने रोहतक, सोनीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत, यमुनानगर, अंबाला, हिसार और करनाल सहित नौ स्थानों पर महापौर पद पर जीत हासिल की है। मतदान 2 मार्च को हुआ था। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में लड़े गए शहरी निकाय चुनाव में भाजपा उम्मीदवारों ने कांग्रेस उम्मीदवारों को हराकर नगर निगमों और नगर परिषदों में कमल का फूल खिलाया है। पिछले साल 12 मार्च को ही नायब सैनी ने प्रदेश में बतौर मुख्यमंत्री कमान संभाली थी। राज्य के किसी भी शहरी निकाय में कांग्रेस जीत के करीब तक भी नहीं पहुंच पाई। पांचों नगर परिषदों पर भी भाजपा का कब्जा रहा। 23 नगर पालिकाओं में आठ उम्मीदवार भाजपा के जीते, जबकि 15 निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। राज्य के फरीदाबाद में प्रवीण बत्रा जोशी तीन लाख 16 हजार 852 मतों से चुनाव जीती हैं, जो कि सबसे बड़ी जीत का अंतर है। पहले यह रिकॉर्ड गाजियाबाद की भाजपा की मेयर सुनीता दयाल के नाम था। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रभाव वाले रोहतक नगर निगम में भाजपा के राम अवतार चुनाव जीते हैं। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा यहां अपनी पार्टी के सूरजमल किलोई को चुनाव नहीं जितवा सके। नगर निगमः विजेता उम्मीदवार – पराजित उम्मीदवार – जीत का अंतर अंबालाः सैलजा सचदेवा – अमीषा चावला – 020487 फरीदाबादः प्रवीन जोशी – लता रानी – 316852 गुरुग्रामः राज रानी – सीमा पाहुजा – 179485 मानेसरः इंद्रजीत यादव – सुंदर लाल सरपंच – 002293 यमुनानगरः सुमन बहमनी – किरणा देवी – 063266 सोनीपतः राजीव जैन – कमल दीवान – 034749 रोहतकः राव अवतार – सूरजमल किलोई- 045198 हिसारः प्रवीण पोपली- कृष्ण टीटू सिंगला- 064456 करनालः रेणु बाला गुप्ता – मनोज वधवा – 025359 पानीपतः कोमल सैनी – सविता संजय गर्ग – 123170 ———————————— नगर परिषदः विजेता उम्मीदवार – पराजित उम्मीदवार – जीत का अंतर अंबालाः सदर स्वर्ण कौर – मनदीप कौर बबयाल – 26923 पटौदीः प्रवीण ठाकरिया – राजरानी सुधीर चौधरी – 01891 थानेसरः माफी देवी – सुनीता कुमारी – 32577 सिरसाः शांति स्वरूप – जसविंंद्र कौर – 12379 सोहनाः प्रीति ललिता – 04504  

शुभेंदु अधिकारी की टिप्पणी की आलोचना की, लोकतंत्र स्थायी है, लेकिन कुर्सी नहीं, कुर्सी का सम्मान करें: ममता बनर्जी

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह रमजान के पवित्र महीने में मुसलमानों को निशाना बना रही है ताकि आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके। विधानसभा में बोलते हुए सीएम बनर्जी ने कहा, “लोकतंत्र स्थायी है, लेकिन कुर्सी नहीं। कुर्सी का सम्मान करें। आप मुस्लिम विधायकों को बाहर निकालने के बारे में कैसे सोच सकते हैं? वे (भाजपा) मुसलमानों को निशाना बना रहे हैं क्योंकि यह रोजा का महीना है और उन्हें यह पसंद नहीं है। वे सांप्रदायिक बयान देकर देश का ध्यान आर्थिक और व्यापारिक पतन से भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। मैं एक हिंदू हूं और मुझे भाजपा से सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है।” ‘मुस्लिम विधायकों को सड़क पर फेंक देंगे’ मीडिया के अनुसार, अधिकारी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने आगे कहा, “हमें संकल्प लेना चाहिए और एक धर्म को नीचा दिखाने वाले बयान की निंदा करनी चाहिए।” पश्चिम बंगाल की सीएम ने कहा, “हिंदुओं की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है, सिर्फ आपकी नहीं। यह इस कुर्सी की जिम्मेदारी है।” यह टिप्पणी राज्य में चल रहे राजनीतिक तनाव के बीच आई है, जिसमें भाजपा और टीएमसी धार्मिक और शासन के मुद्दों पर तीखी नोकझोंक कर रहे हैं। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को कहा था, “सबसे पहले मैं बिमान बंधोपाध्याय (स्पीकर) को हराऊंगा, फिर ममता बनर्जी को। उसके बाद, जब भाजपा सरकार आएगी तो टीएमसी के उन मुस्लिम विधायकों को इस सड़क पर फेंक दिया जाएगा।” ‘हिंदू विरोधी सरकार है टीएमसी’ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए अधिकारी ने कहा, “ममता ने समाज को बांट दिया है… राम मंदिर उद्घाटन के दिन ममता ने बंगाल में मार्च निकाला… टीएमसी हिंदू विरोधी सरकार है। हिंदू हितों के लिए जो भी जरूरी होगा, मैं करूंगा। अगर एक शुभेंदु मरता है, तो एक करोड़ शुभेंदु पैदा होंगे। ममता हटाओ… चोर ममता हटाओ!” इससे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के हर जिले में मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक समिति बनाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने महाराष्ट्र और दिल्ली में चुनावों में हेराफेरी करने के लिए मतदाता सूची में फर्जी मतदाताओं को जोड़ा है और पश्चिम बंगाल में भी यही चाल चल रही है।

मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता विष्णु राजोरिया का निजी अस्पताल में निधन

भोपाल  मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता विष्णु राजोरिया का मंगलवार शाम निजी अस्पताल में निधन हो गया है। उनकी इच्छानुसार नेत्रदान किया गया है। वे कई संस्थाओं के अध्यक्ष रहे। वे कुछ दिन से बीमार थे। बुधवार सुबह 11 बजे सुभाष नगर विश्राम घाट में अंतिम संस्कार होगा।  पूर्व मंत्री विष्णु राजोरिया मंगलवार शाम भोपाल के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 83 साल के थे। उन्होंने’ करीब 6 दशक पहले मासिक पत्रिका शिखर वार्ता के साथ करियर महाविद्यालय, कैरियर अस्पताल और आदर्श प्रायवेट लिमिटेड की स्थापना की थी। वे प्रदेश की अनेक शैक्षणिक एवं सामाजिक, सांस्कृतिक संस्थाओं के अध्यक्ष एवं सदस्य भी रहे है। परिजन ने किया नेत्रदान राजोरिया के बड़े पुत्र आशीष राजोरिया ने बताया कि, वे कुछ समय से बीमार थे। छोटे बेटे मनीष राजोरिया नें बताया कि, पिताजी की इच्छानुसार परिजन ने उनके नेत्रदान का संकल्प पूरा किया। उनकी अंतिम यात्रा निज निवास बी-244, ‘शाहपुरा से सुबह- 11 बजे सुभाष नगर स्थित विश्राम गृह के लिए प्रस्थान करेगी। देशभर में शोक की लहर पूर्व मंत्री के निधन पर कांग्रेस, भाजपा एवं अन्य राजनीतिक दलों के अनेक, वर्तमान मंत्री, पूर्व मंत्री, सांसद, विधायक, पूर्व विधायक समेत तमाम नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शोक प्रकट किया।

जेपी नड्डा ने राज्यसभा में खड़गे की टिप्पणी पर जताया कड़ा विरोध, नेता प्रतिपक्ष ने मांगी माफी

नई दिल्ली राज्यसभा में मंगलवार को एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा संवाद देखने को मिला। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की एक टिप्पणी पर सदन के नेता जे.पी. नड्डा ने कड़ा विरोध जताया और माफी की मांग की। इसके तुरंत बाद खड़गे ने स्पष्ट किया कि उनकी यह टिप्पणी उपसभापति हरिवंश के प्रति नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों के प्रति थी। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें इससे ठेस पहुंची है तो वह माफी मांगते हैं। कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह द्वारा शिक्षा मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा शुरू की जानी थी। दिग्विजय सिंह के बोलने से पहले राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सदन में हो रहे शोर-शराबे के बीच बोलने के लिए खड़े हुए। उन्होंने कहा, “हमने इस पर बोलने के लिए तैयारी भी की है।” इसके बाद उन्होंने कुछ ऐसी बात कही जिस पर सत्ता पक्ष की तरफ से आपत्ति की गई। नेता सदन जे.पी. नड्डा ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा, “यह बहुत ही दुख की बात है। नेता प्रतिपक्ष जो इतने अनुभवी हैं, लंबे समय तक प्रदेश और संसद में रहे हैं, लोकसभा में और राज्यसभा में नेता और सदस्य के रूप में भी काम किया, उन्होंने यहां जिस भाषा का उपयोग किया वह निंदनीय है।” उन्होंने कहा नेता प्रतिपक्ष को अपनी इस टिप्पणी के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने आसन के प्रति जिस प्रकार के शब्द का उपयोग किया है, वह अस्वीकार्य है। जेपी नड्डा ने कहा कि यह भाषा माफी के योग्य नहीं है, फिर भी नेता प्रतिपक्ष को माफी मांगनी चाहिए। उन्हें अपने शब्दों को वापस लेना चाहिए, नहीं तो उनके शब्दों को सदन की कार्यवाही से बाहर निकालना चाहिए। मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस पर सफाई देते हुए कहा, “मैं माफी चाहता हूं। सर, मैंने आपके लिए कुछ नहीं बोला।” उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने सरकार की नीतियों के प्रति यह बात कही थी। नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “यदि आपको मेरी बातों से ठेस लगी तो मैं आपसे माफी मांगता हूं, लेकिन सरकार से नहीं।” इसके बाद उन्होंने अपनी बात रखनी शुरू की। जेपी नड्डा ने कहा कि खड़गे ने अपने वक्तव्य के लिए आसन से माफी मांगी है जो सराहनीय है, लेकिन “उन्होंने सरकार के बारे में जो शब्दावली कही है वह भी निंदनीय है” और वह भी कार्यवाही से बाहर निकाली जानी चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष को अहंकारी बताते हुए कहा कि वह लालू यादव के बेटे हैं और यही उनकी ख्याति है: मंत्री गिरिराज सिंह

नई दिल्ली केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव के बयान को लेकर उन पर हमला बोला है। उन्होंने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष को अहंकारी बताते हुए कहा कि वह लालू यादव के बेटे हैं और यही उनकी ख्याति है। केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने मंगलवार को संसद भवन परिसर में मीडिया से कहा, “तेजस्वी यादव अहंकार में हैं, उन्हें लगता है कि यहां ‘लोकतंत्र’ नहीं बल्कि ‘राजतंत्र’ है। वह संघर्ष करके राजनीति में नहीं आए हैं बल्कि वह लालू यादव के बेटे हैं और यही उनकी ख्याति है। मैं उनसे यही कहूंगा कि वह अहंकार न करें, क्योंकि रावण का अहंकार भी नहीं चला है तो तेजस्वी और लालू का अहंकार क्या चलेगा।” दरअसल, भाजपा के विधायक हरिभूषण ठाकुर ने होली के दिन मुसलमानों से घरों से नहीं निकलने की अपील की थी, जिसके बाद आरजेडी ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। तेजस्वी यादव ने भाजपा विधायक के बयान पर कहा था कि इस तरह का बयान कोई कैसे दे सकता है? मुख्यमंत्री कहां हैं? महिला विधायक जमीन से जुड़े मामलों पर सवाल करती हैं तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सदन में फटकार लगाते देर नहीं करते हैं, तो क्या भाजपा विधायक के बयान पर मुख्यमंत्री उन्हें फटकार लगाएंगे? भाजपा के रंग में जदयू पूरी तरह आ चुकी है। उन्होंने कहा कि जो लोग समाज में जहर फैला रहे हैं, उन्हें रोकने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हिम्मत दिखाएं और सदन में माफी मंगवाएं। उनके बयान पर अपनी चुप्पी तोड़ें, सिर्फ कुर्सी के जुगाड़ में ही मत रहिए। उल्लेखनीय है कि इस बार होली का पर्व 14 मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन जुमा है और रमजान का पवित्र महीना भी चल रहा है। इसी कारण देश में होली और जुमे को लेकर जमकर सियासत हो रही है।

नेट सज्जन सिंह वर्मा को अपने नेताओं पर नहीं भरोसा! इन लोगों को बाहर करने की मांग, कहा- कोई भाईचारा-दोस्ती नहीं होनी चाहिए

भोपाल मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा ने अपनी ही पार्टी के नेताओं पर धोखेबाजी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के अंदर कई नेता ऐसे हैं जो भाजपा के बड़े नेताओं के साथ मिलकर गठजोड़ करते हैं। ऐसे लोग कांग्रेस के लिए घातक हैं। कांग्रेस के लिए ऐसे लोग घातक सज्जन वर्मा ने कहा कि मध्य प्रदेश में भी रिस्ट्रक्चरिंग की जा रही है। कांग्रेस के कई लोगों ने पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में आघात पहुंचाया है। साथ ही कांग्रेस के पोर्टफोलियो में रहकर बीजेपी से हाथ मिलाकर अपने ही उम्मीदवारों को हराने की कोशिश की है। ऐसे लोगों की शिकायत मिली है। ऐसे लोग कांग्रेस के लिए घातक हैं। पूर्व मंत्री ने कहा- ईमानदार नेता की नियुक्ति होगी पूर्व मंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों को तत्काल मीटिंग करके बाहर करना चाहिए। जो जगह खाली होगी, उसमें ईमानदार नेता की नियुक्ति होगी। जल्द ही अनुशासन समिति की बैठक बुलानी चाहिए। 500 शिकायतें आई है। वहां पर भी तत्काल बैठक बुलाकर एक्शन लेना चाहिए। जिन लोगों ने कुठाराघात किया है उनको तत्काल बाहर करना चाहिए. कहा- जिनके खिलाफ शिकायत मिली, वह पदाधिकारी बने हुए उन्होंने आगे कहा, जिनके खिलाफ शिकायत मिली, वह पदाधिकारी बने हुए हैं। हरीश चौधरी इंदौर आए हुए थे, वहां चर्चा हुई है। विधानसभा सत्र के बाद अनुशासन समिति की बैठक होगी। जो गंभीर शिकायत है, उन पर एक्शन लेना चाहिए। कोई भाईचारा-दोस्ती नहीं होनी चाहिए। कितना बड़ा भी नेता हो, उस पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

मुझे निर्देश दिए गए थे कि मैं आरएसएस के खिलाफ न बोलूं, क्योंकि इससे हिंदू नाराज हो सकते हैं:दिग्विजय सिंह

भोपाल कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने पर्दे के पीछे से भाजपा का समर्थन करने वाले कांग्रेस नेताओं पर राहुल गांधी द्वारा एक दिन पहले की गई सख्त टिप्पणी की सराहना की है। उन्होंने कहा कि गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें हिंदुओं के नाराज होने के डर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ कुछ नहीं बोलने को कहा गया था। अहमदाबाद में  कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए गांधी ने कहा था कि पार्टी का पहला काम कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं के दो समूहों को अलग करना है – पहला जो पार्टी की विचारधारा को अपने दिल में रखते हैं और जनता के साथ खड़े हैं और दूसरे वो जो जनता से कटे हुए हैं, ‘जिनमें से आधे भाजपा के साथ हैं।’ उन्होंने ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं की छंटनी करने की आवश्यकता पर बल दिया था तथा सख्त कार्रवाई यहां तक ​​कि निष्कासन की भी चेतावनी दी थी। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दिग्विजय सिंह ने गांधी को उनके बयान के लिए बधाई दी और कहा, “मुझे याद है कि जब मैं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में चुनाव प्रचार करने गुजरात गया था, तब मुझे निर्देश दिए गए थे कि मैं आरएसएस के खिलाफ न बोलूं, क्योंकि इससे हिंदू नाराज हो सकते हैं।” दिग्विजय सिंह ने कहा कि आरएसएस के नेतृत्व वाला संघ परिवार हिंदुओं का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। उन्होंने कहा कि वह केवल धर्म के नाम पर समुदाय को गुमराह करता है और उनका शोषण करता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक संदेश में कहा, “हिंदू धर्म गुरु शंकराचार्य जी की परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है और यह आज भी चलन में है। उनमें से कौन सा शंकराचार्य आज भाजपा, आरएसएस का समर्थक है? भाजपा शोषक तत्वों का एक समूह है जिसका एकमात्र उद्देश्य धर्म के नाम पर लोगों को लूटना और सत्ता हासिल करना है।”

कांग्रेस भोपाल में अपना हाईटेक स्टेट हेडक्वार्टर बनाएगा, 5 मंजिला हाईटेक बिल्डिंग, राष्ट्रीय नेताओं के ठहरने की विशेष व्यवस्था

भोपाल बीजेपी के बाद अब कांग्रेस भी अपना हाईटेक स्टेट हेडक्वार्टर बनाने की तैयारी कर रही है। भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर स्थित वर्तमान कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स को तोड़कर नया प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) कार्यालय बनाने की योजना तैयार कर ली गई है। इस परियोजना के तहत 5 मंजिला आधुनिक भवन बनाया जाएगा, जिसमें पार्टी के विभिन्न संगठनों के लिए अलग-अलग कार्यालय होंगे। रोशनपुरा चौराहे पर है दो एकड़ जमीन कांग्रेस सूत्रों के अनुसार रोशनपुरा चौराहे पर पार्टी की करीब दो एकड़ जमीन है। भोपाल की सबसे प्राइम लोकेशन पर कांग्रेस की जमीन और कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स है। हालांकि, कई किराएदार ऐसे हैं जो सालों से किराया ही नहीं दे रहे हैं। ऐसे में पार्टी ने अब अपनी जमीन पर मुख्यालय बनाने की कवायद शुरू कर दी है। नए ऑफिस में किसी भी प्रकार की व्यवसायिक गतिविधि संचालित नहीं होगी। यानि अब कांग्रेस अपने ऑफिस परिसर में किसी दुकान या शोरुम को किराए पर स्पेस नहीं देगी। पूरे एमपी में कांग्रेस की संपत्तियों की कराई मैपिंग पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने भोपाल सहित पूरे मप्र में कांग्रेस की संपत्तियों की मैपिंग कराई है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर जैसे बड़े शहरों के साथ ही किस जिले में कांग्रेस की कितनी संपत्ति है। इसकी मैपिंग कराकर जानकारी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) को दिल्ली भेजी गई है। माना जा रहा है कि पीसीसी के बाद जिलों में भी कांग्रेस कार्यालयों का कायाकल्प कराया जा सकता है। नए भवन में राष्ट्रीय नेताओं के ठहरने की होगी व्यवस्था नए कांग्रेस स्टेट हेडक्वार्टर में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के साथ ही यूथ कांग्रेस, एनएसयूआई, महिला कांग्रेस, सेवादल, किसान कांग्रेस, आदिवासी कांग्रेस, एससी, एसटी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्षों और टीम के बैठने के लिए कक्ष बनाए जाएंगे। राष्ट्रीय नेताओं के रुकने के लिए भी रुम बनाए जाएंगे। अभी बाहर से आने वाले नेताओं के लिए होटलों में कमरे किराए पर लेने पड़ते हैं। कई बार बड़े आयोजन होने के चलते नेताओं के लिए होटलों में कमरे बड़ी मशक्कत से मिल पाते हैं। अब ऑफिस में ही ठहरने की व्यवस्था होगी। दिल्ली से ग्रीन सिग्नल मिलते ही शुरू होगा काम एमपी कांग्रेस की ओर से नया ऑफिस बनाने का खाका तैयार कर लिया गया है। प्रॉपर्टी की मैपिंग के साथ ही नए प्रदेश कार्यालय की बिल्डिंग के निर्माण को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। एआईसीसी से ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद इसका काम शुरू हो जाएगा। पटवारी ने अध्यक्ष बनते ही कांग्रेस मुख्यालय का कराया रेनोवेशन जीतू पटवारी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान संभालने के बाद भोपाल में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय की पूरी बिल्डिंग का रेनोवेशन कराया है। पीसीसी में कांग्रेस के विभाग, प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों के चेंबर्स से लेकर स्टाफ के बैठने की व्यवस्था और इंटीरियर डेकोरेशन कराया गया है। सालों पुरानी लिफ्ट बदलकर नई लिफ्ट लगाई गई है। नए स्टेट हेडक्वार्टर की खासियतें         5 मंजिला हाईटेक बिल्डिंग         राजनीतिक संगठनों के लिए अलग-अलग कार्यालय         राष्ट्रीय नेताओं के ठहरने की विशेष व्यवस्था         कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं होगी         पूरे मध्यप्रदेश में कांग्रेस की संपत्तियों की मैपिंग पूरी कहां बनेगा कांग्रेस का नया स्टेट हेडक्वार्टर? रोशनपुरा चौराहे पर स्थित दो एकड़ भूमि पर यह भवन बनेगा। वर्तमान में यहां एक कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स है, जिसमें ग्राउंड फ्लोर पर 35 दुकानें और पार्किंग स्पेस है। वर्तमान पीसीसी भवन का क्या होगा? अभी कांग्रेस का प्रदेश कार्यालय भोपाल में एक पुराने भवन में संचालित हो रहा है। नया कार्यालय बनने के बाद मौजूदा भवन का उपयोग प्रकोष्ठ, सामाजिक संगठनों और जिला कांग्रेस कार्यालयों के लिए किया जाएगा। पूरे प्रदेश में कांग्रेस की संपत्तियों की मैपिंग पूरी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी (Jitu Patwari) ने भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर सहित पूरे मध्यप्रदेश में कांग्रेस की संपत्तियों की मैपिंग कराई है। इस रिपोर्ट को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) को भेजा गया है। इस प्रक्रिया के तहत यह देखा गया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में कांग्रेस के कितने कार्यालय और संपत्तियां हैं। क्या जिलों में भी बनेंगे नए कांग्रेस कार्यालय? ऐसा माना जा रहा है कि भोपाल के बाद विभिन्न जिलों में भी कांग्रेस कार्यालयों के कायाकल्प की योजना बनाई जा सकती है। इसके तहत कांग्रेस की पुरानी संपत्तियों का पुनरुद्धार किया जाएगा और नए कार्यालयों का निर्माण किया जाएगा। नए भवन में क्या सुविधाएं होंगी?     नए कांग्रेस मुख्यालय में विभिन्न कांग्रेस संगठनों के लिए विशेष कार्यालय बनाए जाएंगे:     प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का कार्यालय     यूथ कांग्रेस (Youth Congress) का कार्यालय     एनएसयूआई (NSUI), महिला कांग्रेस, किसान कांग्रेस, आदिवासी कांग्रेस, एससी-एसटी कांग्रेस के लिए विशेष कक्ष     राष्ट्रीय नेताओं के लिए ठहरने की सुविधा     कैंटीन और बैठक हॉल राष्ट्रीय नेताओं के लिए ठहरने की सुविधा अभी जब बड़े नेता भोपाल आते हैं, तो उन्हें होटलों में ठहरना पड़ता है। कई बार बड़े आयोजनों के चलते होटलों में कमरे मिलना मुश्किल हो जाता है। नया कांग्रेस मुख्यालय बनने के बाद पार्टी कार्यालय में ही उनके ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। निर्माण कार्य कब शुरू होगा?     कांग्रेस हाईकमान (AICC) से मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।     जीतू पटवारी के अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी कार्यालय के नवीनीकरण का काम पहले ही पूरा हो चुका है।     नई लिफ्ट और मॉडर्न इंटीरियर डेकोरेशन किया गया है।     क्या कांग्रेस किराए पर कोई दुकान नहीं देगी?     नए भवन में कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं होगी। पार्टी का उद्देश्य केवल राजनीतिक कार्यों के लिए कार्यालय का उपयोग करना है।  

ट्रंप ने कहा कि भारत अमेरिका पर काफी टैरिफ लगाता है, इस बयान से राजनीति तेज, कांग्रेस ने सरकार को घेरा

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ के मामले में भारत पर दिए बयान से राजनीति तेज हो गई है। शनिवार को कांग्रेस की तरफ से कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मामले में बयान देना चाहिए और 10 मार्च से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान संसद को विश्वास में लेना चाहिए। यह पूरा मामला ट्रंप के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत अमेरिका पर काफी टैरिफ लगाता है। लेकिन हमारे कहने के बाद भारत सरकार टैरिफ में काफी कटौती करेन पर सहमत हो गया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्रंप के बयान का हवाला देते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल इस समय अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता करने क लिए वाशिंगटन डीसी गए हुए हैं। इसी दौरान राष्ट्रपति ट्रंप यह बयान देते हैं कि भारत शुल्क कटौती के लिए तैयार हो गया है। आखिर भारत ने यह सहमति क्यों दी है? क्या भारतीय किसानों और उद्योग क्षेत्र के हितों के साथ समझौता किया जा रहा है? वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि इस मामले पर देश की जनता को जानकारी होनी चाहिए। जब संसद का सत्र 10 मार्च को फिर से शुरू होगा, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस पूरे मामले के संबंध में संसद को विश्वास में लेना चाहिए। आपको बता दें कि अमेरिका में राष्ट्रपति पद पर बैठने के बाद ट्रंप लगातार दूसरे देशों में अमेरिकी सामानों के ऊपर लगाए जाने वाले टैरिफ की आलोचना कर रहे हैं। वह कई बार भारत का नाम लेते हुए कह चुके हैं कि भारत हमारे सामानों के ऊपर बहुत ज्यादा टैक्स लगाता है। यह इतना ज्यादा है कि हमारा भारत के बाजार में व्यापार कर पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। शुक्रवार को दिए ताजा बयान में ट्रंप ने कहा कि भारत सरकार टैरिफ घटाने के लिए तैयार हो गई है। यह तब हुआ है जब किसी (हमने) उनसे इसके बारे में सवाल पूछा।

गुजरात में कांग्रेस के कुछ नेता भाजपा से मिले हुए हैं, 30-40 को निकालना पड़ेगा: राहुल गांधी

अहमदाबाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को गुजरात में वर्कर्स डायलॉग कार्यक्रेम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि गुजरात में कांग्रेस के कुछ नेता भाजपा से मिले हुए हैं। इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि इन लोगों को निकालना पड़ेगा। उन्होंने कहा, गुजरात कांग्रेस में दो तरह के लोग हैं। एक जो जनता के साथ खड़े हैं, जनता के लिए लड़ते हैं और जिसके दिल में कांग्रेस की विचारधारा है। दूसरे वे हैं जो जनता से कटे हुए हैं, जनता से दूर बैठता है, जनता की इज्जत नहीं करता और उसमें से आधे बीजेपी से मिले हुए हैं। राहुल गांधी ने कहा, जब तक हम इन दोनों को अलग नहीं करेंगे तब तक गुजरात की जनता हम पर विश्वास नहीं करेगी। उन्होंने कहा, गुजरात के व्यापारी से लेकर छात्र तक विकल्प चाहते हैं, बी टीम नहीं चाहते। मेरी जिम्मेदारी इन दोनों समुहों को छानने की है। कांग्रेस पार्टी में नेताओं की कमी नहीं है। पार्टी में बब्बरशेर हैं लेकिन पीछे से चेन लगी हुई है। राहुल गांधी ने आगे कहा, गुजरात की जनता देख रही है कि कांग्रेस ने रेस में बारात का घोड़ा डाल दिया। अगर में जनता से रिश्ता बनाना है तो दो काम करने हैं। पहला काम यह कि दो ग्रुप को अलग करना है। अगर हमें सख्त कार्रवाई करनीपड़ी, 10, 20, 30 , 30 लोगों को निकालना पड़ा तो निकाल दीजिए। बीजेपी के लिए अंदर से काम कर रहे हो, चलो जाकर देखते हैं बाहर से करो। राहुल गांधी ने कहा, कांग्रेस के जितने भी नेता है उनके दिल में कांग्रेस होनी चाहिए। जीतने हारने की बात छोड़ दीजिए। अगर हाथ भी कटे तो उसमें से कांग्रेस का खून निकलना चाहिए।

प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की सरगर्मी तेज, आगामी दिनों में निर्वाचन अधिकारी धर्मेंद्र प्रधान का भोपाल दौरा

भोपाल भारतीय जनता पार्टी की मध्य प्रदेश इकाई के नए प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव कभी भी हो सकता है. ऐसे में हर किसी की नजर नए अध्यक्ष पर है क्योंकि चर्चाओं में एक नहीं, कई नाम हैं. राज्य में बीजेपी के संगठन पर्व के तहत बूथ समिति, मंडल अध्यक्ष और जिला अध्यक्षों की निर्वाचन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. वहीं अब संभावना जताई जा रही थी कि जनवरी या फरवरी में प्रदेश अध्यक्ष का भी निर्वाचन हो जाएगा. हालांकि, दिल्ली के विधानसभा चुनाव के चलते निर्वाचन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी और निर्वाचन अधिकारी केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का दौरा तय नहीं हो पाया. राज्य में बीते एक पखवाड़े से प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की सरगर्मी तेज है और संभावना इस बात की जताई जा रही है कि आगामी दिनों में निर्वाचन अधिकारी धर्मेंद्र प्रधान का भोपाल दौरा हो सकता है. इस प्रवास के दौरान ही निर्वाचन प्रक्रिया भी पूरी कराई जा सकती है. राज्य के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा को अध्यक्ष पद पर रहते हुए पांच साल से ज्यादा का समय हो गया है. शर्मा के नेतृत्व में विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़े गए जिनमें बीजेपी को बड़ी सफलताएं मिलीं. इन नामों की चर्चा वहीं बूथ विस्तारक अभियान सहित कई अभियान देश के अन्य राज्यों के लिए नजीर बने हैं. राज्य की बीजेपी इकाई का नया अध्यक्ष कौन होगा? इसके लिए कई दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं. वर्तमान में मुख्यमंत्री मोहन यादव पिछड़े वर्ग से आते हैं, इसलिए संभावना इस बात की जताई जा रही है कि पार्टी सामान्य वर्ग के व्यक्ति को यह जिम्मेदारी सौंप सकती है. राज्य में सामान्य वर्ग से पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, अरविंद भदौरिया, उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला और विधायक हेमंत खंडेलवाल के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं. क्या कहते हैं जानकार? वहीं पार्टी का जोर अनुसूचित जनजाति वर्ग के वोट बैंक पर भी है और इसके लिए प्रमुख तौर पर सांसद सुमेर सिंह सोलंकी, फग्गन सिंह कुलस्ते और गजेंद्र पटेल के नाम चर्चा में हैं. इसके अलावा अनुसूचित जाति वर्ग से लाल सिंह आर्य का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में वर्तमान में सत्ता और संगठन में बेहतर तालमेल चल रहा है. आगामी चार साल तक कोई चुनाव नहीं है, लिहाजा पार्टी की कोशिश सत्ता और संगठन में समन्वय रहे, यह प्रयास किए जा रहे हैं. इसलिए ऐसे नाम पर मुहर लगने की ज्यादा संभावना है जो संगठन को बेहतर तरीके से चला सके, सभी में समन्वय रखे और उसका सत्ता से भी टकराव न हो.

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