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राशिफल बुधवार 02 अक्टूबर 2024

मेष (Aries) कार्य क्षेत्र में कोई विश्वास पात्र व्यक्ति छल कर सकता है. अतः सजग एवं सावधान रहे. नौकरी में आपकी बौद्धिक क्षमता के कारण कुछ साथी जलन का अनुभव करेंगे. व्यापार में विस्तार की योजना सफल होगी. यात्रा में किसी अनजान व्यक्ति से कुछ भी लेकर खाना आपके लिए घातक सिद्ध हो सकता है. मार्ग में किसी जानवर के कारण दुर्घटना हो सकती है. परिवार में किसी वरिष्ठ प्रियजन के कारण वाद हो सकता है. बेरोजगार को भी सिर्फ आश्वासन ही मिलेगा. जेल से मुक्त होंगे. आध्यात्मिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भागीदारी करेंगे. समाज में मान बढ़ेगा. कैसी रहेगी आर्थिक स्थिति? आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. किसी व्यापारीक अनुबंध से बड़ा लाभ हो सकता है. सही निर्णय लेने का प्रयास करें. किसी मित्र से धन प्राप्त होगा. नौकरी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के साथ आमदनी भी बढ़ेगी. कोई गुम हुई कीमती वस्तु पुनः मिल सकती है. कैसा रहेगा निजी जीवन? प्रेम प्रसंग में विघ्न आने से मन अशांत रहेगा. किसी पुराने मित्र से पुनः मुलाकात होगी. शत्रुओं का नाश होगा. दुख और चिंताएं दूर होगी. परिवार में आपकी बातों को महत्व मिलेगा. कार्य क्षेत्र में आपके प्रति लोगों के मन में सम्मान का भाव रहेगा. जिससे आपके मन को सुकून, शांति मिलेगी. कैसी रहेगी आपकी सेहत? बुखार से कष्ट होगा. अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत एवं सावधान रहें. किसी प्रियजन के खराब स्वास्थ्य की चिंता रहेगी. स्वास्थ्य में सुधार होगा. मानसिक तनाव अधिक न लें. अन्यथा सर दर्द अथवा चक्कर आदि आ सकते हैं. जिन लोगों को हृदय रोग है. वह अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष सावधानी बरतें. उपाय :- ॐ भूमि पुत्राय नमः मंत्र का अधिक से अधिक जाप करें. वृषभ (Taurus) कोई शुभ समाचार प्राप्त होगा. विचार योजना को कार्य रूप देने में सफलता मिलेगी. अतीत के संदर्भ में कोई लाभ मिलेगा. घनिष्ठ साथी पदोन्नति में बाधक बन सकता है. गुप्त शत्रु ईर्ष्या का भाव रखेगा. कोई नया काम करने में आप समक्ष बनेंगे. कृषकों को खेती में लाभ होगा. घूमने फिरने का कार्यक्रम बनेगा. समय के स्वरूप को देखते हुए कार्य करें. व्यवसाय में उन्नति होगी. राजनीति के क्षेत्र में वर्चस्व कायम होगा. कैसी रहेगी आर्थिक स्थिति? महत्वपूर्ण कार्य संपन्न होगा. योजना पूर्ति का पूरा लाभ मिलेगा. जन समुदाय में संपर्क बढ़ेगा. धन लाभ के योग बनेंगे. सम्मान, उपहार का लाभ मिलेगा. चिरस्थाई योजना में धन खर्च होगा. भ्रम एवं भय की चिंता की स्थिति में अनावश्यक व्यय संभव है. दान, पुण्य ,सत्कर्म में अभीष्ट सिद्धि के योग हैं. आय एवं व्यय में सामान्यता रहेगी. कैसा रहेगा निजी जीवन? बंधु विरोध से बचे रहे. किसी अनजान व्यक्ति से मित्रता ना करें. दूर देश से शुभ समाचार प्राप्त होगा. दांपत्य जीवन में परस्पर वाद विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. इस दिशा में अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है. कहीं प्रेम प्रसंग का चक्कर चलेगा. विवाह कार्य में आ रही बाधा दूर होगी. कैसी रहेगी आपकी सेहत? प्रकृति के सानिध्य में रहने का मौका मिलेगा. पुराने रोगोपद्रव से छुटकारा मिल जाएगा. उदर विकार से बचें. जीवनसाथी का भरपूर सहयोग मिलेगा. मानसिक परेशानी एवं लंबी बीमारी से राहत मिलेगी. यात्रा में अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष सावधानी बरतें. चोट आदि की संभावना है. उपाय :- निम्न मंत्र का 108 बार जाप करें. ॐ अमृतलक्ष्मयै नमः. मिथुन (Gemini) माता से अकारण मतभेद हो सकते हैं. भूमि संबंधित कार्य में हानि होने की संभावना है. अन्यथा झगड़ा हो सकता है. कोई भी नया कार्य करने से बचें. अन्यथा हानि हो सकती है. पेट दर्द होने से कार्य क्षेत्र में असुविधा होगी. राजनीति में विरोधी प्रबल सिद्ध हो सकते हैं. परिवार में कोई अत्यधिक तनाव एवं का सामना करना पड़ सकता है. व्यापार में विघ्न बाधा आने से आपका मूड खराब हो जाएगा. कोई कीमती वस्तु अथवा धन चोरी हो सकता है. शराब पीकर बात करने पर हवालात की हवा खानी पड़ सकती है. कैसी रहेगी आर्थिक स्थिति? आर्थिक स्थिति चिंताजनक रहेगी. व्यापार में आय की अपेक्षा व्यय अधिक होगा. नौकरी में आपको बिना कारण बताएं निकाल दिया जाएगा. जिससे आपको आर्थिक कमजोरी का सामना करना पड़ेगा. परिवार में प्रियजनों द्वारा धन अधिक हस्तक्षेप किया जाएगा. जिससे विवाद योग बन सकता है. कैसा रहेगा निजी जीवन? किसी परिजन से दूर जाना पड़ सकता है. नए मित्रों को अपने पारिवारिक बातों को बताने से बचना चाहिए. प्रेम संबंधों में धोखा मिल सकता है. निर्माण संबंधी कार्य में अकारण विघ्न बाधा आने से आपकी भावनाएं आहत हो सकती है. कार्य क्षेत्र में अधीनस्थ कोई षड्यंत्र खर्च कर आपको फसा सकता है. कैसी रहेगी आपकी सेहत? मानसिक एवं शारीरिक रूप से बेहद कष्ट होगा. त्वचा संबंधी रोग गंभीर रूप ले सकता है. आपके मन में नकारात्मक विचारों की अधिकता रहेगी. परिवार में एक साथ कई प्रियजन बीमार होने से आपकी हिम्मत टूटने लगेगी. उपाय :- ॐ शुं शुक्राय नमः मंत्र का स्फटिक की माला पर जाप करें. कर्क (Cancer) कार्य क्षेत्र में आने वाली बाधाएं कम होगी. किसी महत्वपूर्ण कार्य के सिद्ध होने से मन में प्रशंसा बढ़ेगी. किसी अनचाही लंबी दूरी बनेंगे अथवा किसी पर्यटक स्थल की आदि की यात्रा पर जाने की योग बनेंगे. कार्यक्षेत्र में चली आ रही विघ्न बाधा समाप्त होगी. व्यवसाय के क्षेत्र में कार्यरत लोगों का नवीन व्यवसाय के प्रति अभिरुचि बढ़ेगी. मजदूर वर्ग को रोजगार के लिए दर दर भटकना पड़ सकता है. कोर्ट कचहरी के मामले में पैरवी ठीक से करें. अन्यथा कोई बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है. कैसी रहेगी आर्थिक स्थिति? आर्थिक क्षेत्र में किए गए प्रयास सफल होंगे. पारिवारिक सदस्यों के साथ कार्य करने से लाभ होने की संभावना रहेगी. पूंजी निवेश के संबंध में अपने परिस्थितियों को ध्यान में रखकर अंतिम निर्णय ले. नवीन संपत्ति के क्रय विक्रय के लिए समय स्थिति अनुकूल रहेगी. कैसा रहेगा निजी जीवन? माता-पिता की ओर से सुख सहयोग प्राप्त होगा. जीवनसाथी के साथ किसी पर्यटक स्थल की यात्रा पर जाने के योग बन सकते हैं. अपनी भावनाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान करें. प्रेम संबंधों में अनुकूल परिस्थितियां कम रहेगी. परस्पर एक दूसरे के प्रति विश्वास की भावना बनाए रखें. प्रेम विवाह की योजना बन जाएगी. कैसी रहेगी आपकी सेहत? स्वास्थ्य की दृष्टि से समय थोड़ा कष्ट कारक हो सकता है. खाने पीने की वस्तुओं में अधिक … Read more

दिवाली 31 अक्टूबर या 1 नवंबर इस दिन मनेगी, ये है अपडेट

दिवाली को लेकर बहस चल पड़ी है। कुछ पंडित 1 नवंबर को दिवाली मनाने की बात कह रहे हैं, तो कई ने 31 अक्टूबर को सही माना। उज्जैन के ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि 31 अक्टूबर को ही दिवाली मनाना विधि सम्मत है। 1 नवंबर को प्रदोष काल में मां लक्ष्मी की पूजा होती है। इस दौरान अमावस्या नहीं रहेगी। इसलिए 31 अक्टूबर को ही दिवाली मनाना ठीक होगा। ज्योतिर्विद पं. आनंदशंकर व्यास ने बताया, चौदस और अमावस 31 अक्टूबर को रहेगी। 1 नवंबर को दोपहर 3.45 बजे तक अमावस्या मानी जाएगी। इसके बाद एकम तिथि शुरू होगी। तिथि बदलने के बाद लक्ष्मी पूजन ठीक नहीं होगा। कालगणना में 31 को अमावस्या ज्योतिषाचार्य  ने बताया, 31 अक्टूबर को लक्ष्मी पूजन सही है। कालगणना के अनुसार 31 को अमावस्या है। 1 नवंबर को शाम से पहले अमावस्या खत्म होगी। ज्योतिषाचार्य अजयशंकर व्यास कहते हैं, सनातन में 5 दिन दीपोत्सव की परंपरा है। 31 को दिवाली मनाएं। इंदौर में अलग राय वहीं इंदौर के ज्योतिषाचार्यों ने दिवाली मनाए जाने को लेकर बैठक आयोजित की। सभी की राय में 1 नवंबर को दिवाली मनाना ठीक रहेगा। बद्रीप्रसाद पुजारी ज्योतिष संस्थान के पं. राजाराम शर्मा ने बताया, अमावस्या का आरंभ 31 अक्टूबर को होगा। 1 नवंबर को पूर्ण होगा। तिथितत्व के अनुसार 1 नवंबर को दिवाली मनाना शास्त्र सम्मत है। यहां जानें कब मनाया जाएगा कौन सा त्योहार (Diwali 2024) 29 अक्टूबर – धनतेरस 31 अक्टूबर- रूप चतुर्दशी 01 नवंबर- दिवाली 02 नवंबर- गोवर्धन पूजा 03 नवंबर- भाईदूज दो प्रकार के है पंचाग बता दें कि देश में दो प्रकार के पंचांग प्रकाशित होते हैं। एक दृश्य गणित पर आधारित पंचांग और दूसरा लाघव पद्धति पर आधारित पंचांग। एक ट्रेडिशनल तो दूसरा कम्प्यूटराइज्ड है, इस वजह से दीपावली की तारीखों को लेकर तय नहीं हो पा रहा था कि आखिर किस दिन दीपावली मनाई जानी चाहिए!

मैहर के मां शारदा मंदिर में इस वर्ष नवरात्रि के लिए नई व्‍यवस्‍था

New arrangements for Navratri this year in Maa Sharda Temple of Maihar

New arrangements for Navratri this year in Maa Sharda Temple of Maihar मैहर ! 3 अक्टूबर से शुरू होने वाले नवरात्रि मेले के दौरान भक्तों को मातारानी के दर्शन के लिए वीआईपी व्यवस्था नहीं मिल सकेगी। नवरात्र मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मां शारदा मंदिर के गर्भगृह के अंदर से वीआईपी दर्शन की व्यवस्था पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। वीआईपी सुविधा की मांग न करें मां शारदा देवी मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार एसडीएम और प्रशासक मां शारदा देवी मंदिर प्रबंध समिति ने इस संबंध में सार्वजनिक सूचना जारी की है। इस दौरान प्रशासक ने बुद्धिजीवियों और गणमान्य नागरिकों से भी अनुरोध किया है कि वे मां शारदा देवी के दर्शन और व्यवस्था के लिए वीआईपी सुविधा की मांग न करें। मांस-मछली की बिक्री पर पाबंदी एक अन्य आदेश में नवरात्रि मेले के मद्देनजर एसडीएम मैहर विकास सिंह ने दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के तहत 3 अक्टूबर से 12 अक्टूबर की मध्यरात्रि तक संपूर्ण नगर पालिका क्षेत्र में मांस, मछली और अंडे की खरीद-बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। आदेश का उल्लंघन भारतीय दण्ड विधान की धारा 188 के तहत दण्डनीय होगा। बता दें कि मध्य प्रदेश शासन पर्यटन विभाग द्वारा घोषित धार्मिक नगरी मैहर में देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु मां शारदा देवी के दर्शन के लिए आते हैं।

गणेश पंडालों में सजाई झांकी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी , कही संत तुकाराम तो कही दगडू सेठ हलवाई वाले के रूप में विराजे गजानन ।

The tableau decorated in Ganesh pandals became the center of attraction for the people

The tableau decorated in Ganesh pandals became the center of attraction for the people, in some places Gajanan was present in the form of Saint Tukaram and in some places Dagdu Seth confectioner. हरिप्रसाद गोहेआमला। आमला शहर में गणेश उत्सव की चहुं ओर धूम मची है। शहर में गणेश उत्सव पर जगह जगह आकर्षक झांकियां सजी है।अलग अलग जगह पर अलग अलग थीम पर झांकी सजी है।सार्वजनिक पंडालों के साथ साथ घरों में भी सुंदर सुंदर झांकियां सजी है।आमला के वार्ड क्रमांक 12 स्थित रेलवे कर्मी पीयूष यादव के निवास स्थान पर प्रसिद्ध संत तुकाराम के प्रतिरूप में गणेश जी विराजमान है यहां पर उनके निवास की सुंदर झांकी बनी है जिसमे निवास के दालान में संत की वेशभूषा में गणेश जी विराजमान है। साथी ही आंगन में तुलसी का वृंदावन की प्रतिकृति भी दर्शनीय है।वही दूसरी ओर मनोज,संजय विश्वकर्मा के निवास पर पुणे के प्रसिद्ध दगडू सेठ हलवाई वाले गणपति की सुंदर झांकी सजाई है।इस झांकी को देखने रोज बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे है।उल्लेखनीय है की इन सुंदर झांकियों को आमला के प्रसिद्ध कलाकार संजय विश्वकर्मा ने बनाई है संजय विश्वकर्मा जो की प्रसिद्ध चित्रकार और कलाकार है।

डाफने निवास पर विराजी महालक्ष्मी, धूमधाम से की जा रही पूजा अर्चना ।

Mahalaxmi is enthroned at Daphne residence, worship is being done with great pomp and show.

Mahalaxmi is enthroned at Daphne residence, worship is being done with great pomp and show. हरिप्रसाद गोहे  आमला । नगर के रविंद्रनाथ टैगोर वार्ड स्थित आमवाले बाबा इलाके में पंडित श्रीकांत डाफने के निज निवास पर महालक्ष्मी जी की भव्य प्रतिमा की स्थापना कर मनमोहक झांकी सजाई गई है जो आकर्षण का केंद्र लग रही है । पंडित श्रीकांत डाफने ने बताया गणेश उत्सव के दौरान महालक्ष्मी की स्थापना कर विधिविधान से पूजा अर्चना की जाती है । यों प्रचलन में तो ‘लक्ष्मी’ शब्द सम्पत्ति के लिए प्रयुक्त होता है, पर वस्तुतः वह चेतना का एक गुण है, जिसके आधार पर निरुपयोगी वस्तुओं को भी उपयोगी बनाया जा सकता है। मात्रा में स्वल्प होते हुए भी उनका भरपूर लाभ सत्प्रयोजनों के लिए उठा लेना एक विशिष्ट कला है। वह जिसे आती है उसे लक्ष्मीवान्, श्रीमान् कहते हैं। शेष अमीर लोगों को धनवान् भर कहा जाता है। गायत्री की एक किरण लक्ष्मी भी है। जो इसे प्राप्त करता है, उसे स्वल्प साधनों में भी अथर् उपयोग की कला आने के कारण सदा सुसम्पन्नों जैसी प्रसन्नता बनी रहती है।

गणेश चतुर्थी पर चढ़ाएं नारियल की बर्फी, ये रही फटाफट बनने वाली रेसिपी

Offer coconut barfi on Ganesh Chaturthi, here is the quick recipe

Offer coconut barfi on Ganesh Chaturthi, here is the quick recipe गणेश चतुर्थी के दिन लोग अपने घरों में ढोल नगाड़ों के साथ बप्पा का स्वागत करते हैं और फिर उनकी पूजा में कई तरह के व्यंजन अर्पित करते हैं. मोदक के अलावा मोतीचूर के लड्डू, बेसन के लड्डू, और नारियल की बर्फी आदि मिठाइयां भगवान गणेश की पसंदीदा मानी गई हैं. गणेश चतुर्थी पर मोदक का भोग तो लगाया ही जाता है, इसके साथ ही आप बप्पा को प्रसन्न करने के लिए नारियल की बर्फी अर्पित कर सकते हैं. इसे बनाने में भी ज्यादा समय नहीं लगता है. इस बार गणेश चतुर्थी 6 सितंबर को है और यह उत्सव पूरे दस दिनों तक चलेगा जिसके बाद 17 सितंबर को गणपति विसर्जन किया जाएगा. इस दौरान लोग हर दिन बप्पा को अलग-अलग व्यंजनों के भोग लगाते हैं. फिलहाल जान लेते हैं नारियल की बर्फी की रेसिपी. नारियल की बर्फी बनाने के लिए इनग्रेडिएंट्सनारियल की बर्फी बनाने के लिए आप सूखा गोला या फिर एक नारियल ले सकते हैं. इसके साथ ही आपको चाहिए होगा कम से कम दो से तीन चम्मच देसी घी, दो से तीन हरी इलायची का पाउडर, गार्निश करने के लिए पिस्ता, बादाम, काजू जैसे नट्स ले सकते हैं. चाशनी के लिए चीनी, करीब एक से डेढ़ कप पानी, बर्फी जमाने के लिए एक प्लेट. बर्फी बनाने का पहला स्टेपसबसे पहले नारियल का छिलका हटाकर इसे कद्दूकस कर लें और फिर एक पैन में घी डालकर नारियल को हल्का भून लें, बस ध्यान रखें कि ये क्रिस्प न हो और न ही जलने पाए. इसके बाद खोया को भी सुनहरा भून लें और ठंडा होने के लिए रख दें. इस तरह तैयार करें चाशनीएक मोटे तले के पैन में नारियल और खोया के हिसाब से कम से कम एक या डेढ़ कप पानी लें और फिर उसमें चीनी डालें. चीनी जब पूरी तरह से घुल जाए और चाशनी चिपचिपी लगने लगे तो इसे पानी में या फिर थाली में एक बूंद डालकर देंखें, अगर चाशनी सही से सेट हो रही है तो इसमें खोया और नारियल डालकर अच्छी तरह से मिक्स कर लें, साथ में चुटकीभर इलायची पाउडर भी डाल दें. बर्फी तैयार करने का फाइनल स्टेपमिश्रण तेजी से सेट होता है, इसलिए इसे गर्म रहते हुए ही घी लगी हुई प्लेट में मोटी लेयर में फैला दें. इसके बाद पिस्ता, बादाम और काजू जैसे नट्स से सजा लें या फिर ताजे नारियल को महीन काटकर ऊपर से फैला दें. 15 से 20 मिनट में बर्फी अच्छी तरह से सेट हो जाएगी फिर इसे चाकू से काट लें.

2 अक्टूबर को साल का दूसरा सूर्य ग्रहण, पढ़ें पूरी डिटेल्स

Second solar eclipse of the year on October 2, read complete details

Second solar eclipse of the year on October 2, read complete detailsसाल का दूसरा सूर्य ग्रहण 2 अक्टूबर को लगेगा। इससे पहले 8 अप्रैल को सूर्यग्रहण लगा था, जो अमेरिका, कनाडा, मेक्सिको, अटलांटिक, इंग्लैंड के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र और आयरलैंड में देखा गया था। भारत में ग्रहण प्रभावी नहीं था। 2 अक्टूबर को लगने वाला सूर्य ग्रहण वलयाकार ग्रहण होगा। इस दौरान रिंग ऑफ फायर नजर आएगा, जो सात मिनट 25 सेकंड तक दिखाई देगा। कहां दिखाई देगा 2024 का दूसरा सूर्य ग्रहण2 अक्टूबर 2024 का सूर्य ग्रहण की शुरुआत उत्तरी प्रशांत महासागर में हवाई के दक्षिण से होगी। यह दक्षिणी अटलांटिक महासागर में दक्षिण जॉर्जिया में खत्म होगा। सूर्य ग्रहण जिस इलाके से शुरू होगा और खत्म होगा। वह यात्रा 14 हजार 163 किमी की होगी। रिंग ऑफ फायर की घटना साउथ अमेरिका में चिली और अर्जेंटीना के दक्षिण एरिया में दिखाई देगी। स्पेस डॉटकॉम के अनुसा, रिंग ऑफ फायर का सबसे अच्छा नजारा रापा नुई नाम के सुदूर वोल्केनो द्वीप से दिखेगा। क्या भारत में दिखेगा साल 2024 का दूसरा सूर्यग्रहण?अप्रैल में लगा पहला सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आया था। अब दूसरा ग्रहण भी दिखाई नहीं देगा, क्योंकि जिस वक्त सूर्य ग्रहण शुरू होगा, तब भारत में रात होगी। अमेरिकी अंतरिक्ष स्पेस एजेंसी नासा के यूट्यूब चैनल पर इस ग्रहण को लाइव स्ट्रीम किया जाएगा। सूर्य ग्रहण के सूतक काल का समयसूतक काल उस अवधि को कहा जाता है जब सूर्य ग्रहण लगता है। शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण लगने के 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। साल का दूसरा सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा। इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा।

सृष्टि स्कूल जंबबाड़ा में धूमधाम से मनाया गया श्री कृष्ण जन्म उत्सव ।

Shri Krishna's birth anniversary was celebrated with great pomp at Srishti School Jambada.

Shri Krishna’s birth anniversary was celebrated with great pomp at Srishti School Jambada. हरिप्रसाद गोहेआमला । भगवान श्री कृष्ण जन्म उत्सव की धूम शहर सहित अंचल के विभिन्न ग्रामों में देखी गई। वहीं इस बार निजी स्कूलों में अध्यनरत नोनिहालो का उत्साह श्री कृष्ण जन्म उत्सव पर देखते ही बन रहा था। राधा और कृष्ण की वेशभूषा धारण किए बच्चे लोगो का मन मोह रहे थे साथ ही बच्चों द्वारा सजाई गई झांकी लोगो के आकर्षण का केंद्र रही । इधर अंचल के ग्राम जंबबाड़ा स्थित सृष्टि स्कूल में दिनांक 26 /08/2024 को श्री कृष्ण भगवान का जन्म दिन धूम ,,धाम से मनाया गया । इस शुभ अवसर पर श्री कृष्ण भगवान की पूजा अर्चना के बाद नन्हे,,मुन्ने स्कूल के छात्रों ने राधा कृष्ण बनकर कृष्ण लीला का मंचन किया । श्री कृष्ण के सभी अवतारों के स्वरूप बच्चो के द्वारा आज अवतरित किए गए । इस दौरान भगवान श्री कृष्ण की झाकी निकाली गई बाद मटकी फोड का भी आयोजन आयोजित किया गया। कार्य कर्म का समापन श्री कृष्ण भगवान की आरती के साथ हुआ । इस मौके पर स्कूल के सभी छात्र,शिक्षक,शिक्षिका, उपस्थित थे। शाला संचालक श्री विजय सोलंकी की उपस्थित में सभी बालक,बालिका शिक्षक,शिक्षिका को श्री कृष्ण जन्म अष्टमी की बधाई प्रेषित की गई । बाद श्री कृष्ण भगवान के जय कारे लगाकर, छात्रों और नगर बंधुओ ने भगवान श्री कृष्ण के प्रति भक्ति भावना का जोश हर उल्लास नजर आया ।

धूमधाम से मनाया गया भुजारिया का पर्व, चंद्रभागा नदी में किया गया विसर्जन

Bhujariya festival celebrated with pomp, immersion in Chandrabhaga river.

Bhujariya festival celebrated with pomp, immersion in Chandrabhaga river. हरिप्रसाद गोहेआमला। प्राकृति के स्वागत उपासना से जुड़ा पारंपरिक पर्व भुजारिया आमला सहित अंचल के विभिन्न ग्रामों में हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया वहीं आमला के इतवारी चौक स्थित श्री कृष्ण मंदिर में बड़ी संख्या में महिलाओं ने एकत्रित होकर भुजारिया का पर्व माना भुजारिया का विसर्जन स्थानीय चंद्रभागा नदी में किया गया इस मौके पर बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रही । भाजपा महिला मोर्चा मीडिया प्रभारी सपना सोनी से प्राप्त जानकारी अनुसार प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी कृष्ण मंदिर में भुजरिया एकत्रित हुए और पूंजा की गयी!!सुबह से इस पर्व को लेकर उल्लास का माहोल था । इस दौरान भुजरियों को एक जगह एकत्रित कर पूरे परिवार के साथ बैठकर लोगों ने पूजा-अर्चना की । बाद भुजरियों को चंद्रभागा नदी पर जाकर विसर्जन कर प्रसाद का वितरण किया गया। साथ मे बचे भुजरिया को सर्व प्रथम भगवान को भेंट किया गया। इसके बाद लोगों ने एक दूसरे से भुजरियां बदलकर अपने गिले-सिकवे भुलाकर गले मिले । यह है भुजरियां पर्व भुजरियां का पर्व सौभाग्य और भाईचारे का प्रतीक भी माना जाता है। पारंपरिक त्योहार प्रकृति के स्वागत और उसकी उपासना से जुड़ा है। माना जाता है कि मैहर में विराजित मां शारदा देवी के वरदान से अमर हुए आल्हा-ऊदल की बहन से भी इस पर्व का गहरा संबंध है। आल्हा की मुंह बोली बहन चंदा के सुरक्षित बचने पर लोगों ने एक-दूसरे को हरित तृण देकर खुशियां मनाईं थीं। हालांकि, यह पर्व भारत की कृषि आधारित परंपरा से जुड़ा है । इसमें बारिश के बाद खेतों में लहलहाती खरीफ की फसल से आनंदित किसान एक-दूसरे को हरित तृण यानी कजलियां भेंट करके सुख और सौभाग्य की कामना करते हैं। यही कजलियां सबसे पहले कुलदेवता व अन्य देवताओं को अर्पित कर सुख-सौभाग्य की कामना की जाती है। एक-दूसरे का सुख-दुख बांटकर जीवन की खुशहाली की कामना करते है

वरिष्ठ नागरिकों को तीर्थ दर्शन कराने 14 सितम्बर से शुरू होंगी ट्रेनें

Trains will start from September 14 to take senior citizens on pilgrimage

Trains will start from September 14 to take senior citizens on pilgrimage भोपाल ! मध्यप्रदेश सरकार की अनूठी “मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन” योजना का आगामी शयड्यूल जारी कर दिया गया है। आगामी 14 सितम्बर से 26 फरवरी 2025 तक प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों को विभिन्न शहरों में धार्मिक यात्रा कराई जाएगी। धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा तीर्थ दर्शन योजना में इस बार नागरिकों को वाराणसी (काशी), रामेश्वरम, मथुरा-वृंदावन, कामाख्या, अमृतसर, अयोध्या, द्वारका, जगन्नाथपुरी, शिर्डी और नागपुर जैसे धार्मिक स्थल निर्धारित किये गये हैं। उक्त अवधि में 15 हजार से ज्यादा तीर्थ यात्री विभिन्न तीर्थ-स्थलों की यात्रा करेंगे। योजना का लाभ प्रदेश के ऐसे वरिष्ठ नागरिक जो आयकरदाता नहीं है और 60 वर्ष या इससे अधिक आयु के हैं। योजना का लाभ ले सकेंगे। महिला तीर्थ-यात्रियों के मामले में आयु वर्ग में 2 वर्ष की छूट दी गई है। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना में पहली ट्रेन 14 सितम्बर को उज्जैन से वाराणसी (काशी)- अयोध्या के लिये रवाना होगी। इसमें उज्जैन जिले के 300, सीहोर के 200 और विदिशा के 279 श्रद्धालु यात्रा करेंगे। यह ट्रेन 19 सितम्बर को लौटेगी। दूसरी ट्रेन 21 सितम्बर को रामेश्वरम के लिये रवाना होगी। इसमें इंदौर से 300, उज्जैन 200 और सीहोर से 279 तीर्थ यात्री रवाना होंगे। यह ट्रेन 26 सितम्बर को लौटेगी। मथुरा-वृदावन तीर्थ के लिये 19 सितम्बर को मेघनगर से तीसरी ट्रेन रवाना होगी और 2 अक्टूबर को वापस लौटेगी। इसमें झाबुआ से 200, रतलाम से 279 और उज्जैन से 300 दर्शनार्थी यात्रा करेंगे। तीर्थ दर्शन के लिये जाने वाली चौथी ट्रेन उज्जैन से 13 अक्टूबर को कामाख्या तीर्थदर्शन के लिये रवाना होगी। इसमें उज्जैन से 300, शाजापुर से 200 और सीहोर से 279 यात्री रवाना होगें। यह ट्रेन 18 अक्टूबर को वापस लौटेगी। योजना के तहत 5वीं ट्रेन इंदौर से अमृतसर के लिये 21 अक्टूबर को रवाना होगी। इसमें इंदौर से 200, धार से 100, उज्जैन से 200 और शिवपुरी से 279 यात्री रवाना होगें। यह ट्रेन 24 अक्टूबर को वापस लौटेगी। वाराणसी (काशी)-अयोध्या तीर्थ स्थल के लिये 5 नवम्बर को विदिशा से छटवी ट्रेन 300 यात्रियों के साथ रवाना होगी। इसमें सागर से 279 और दमोह से 200 यात्री शामिल होगें। यह ट्रेन 10 नवम्बर को लौटेगी। सातवीं ट्रेन से भोपाल से 13 नवम्बर को रामेश्वरम के लिये 300 यात्री, सीहोर से 200 और नर्मदापुरम से 279 तीर्थ यात्री रवाना होगें। यह ट्रेन 18 नवम्बर को वापस लौटेगी। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत 21 नवम्बर को आठवीं ट्रेन रीवा से द्वारका के लिये रवाना होगी। इसमें रीवा से 279, सतना से 300 और दमोह से 200 यात्री रवाना होगें जो 26 नवम्बर को वापस लौटेगे। दमोह से 29 नवम्बर को नौवीं ट्रेन वाराणसी (काशी)-अयोध्या तीर्थ स्थल के लिये यात्री रवाना होगी। जिसमें दमोह से 279, मैहर से 200 और सतना से 300 यात्री जायेंगे। यह ट्रेन 4 दिसम्बर को लौटेगी। दसवीं ट्रेन कटनी से 7 दिसम्बर को द्वारका तीर्थ स्थल के लिये 200 तीर्थ यात्री के साथ रवाना होगी। इसमें दमोह से 279 और सागर से 300 यात्री शामिल रहेंगे। यह ट्रेन 12 दिसम्बर को लौटेगी। योजना के तहत 15 दिसम्बर को सतना से ग्यारहवीं ट्रेन में रामेश्वरम तीर्थ स्थल के लिये 279 यात्री रवाना होगें। इसमें कटनी से 200 और जबलपुर से 300 यात्री शामिल होगें। यह ट्रेन 30 दिसम्बर को वापस लौटेगी। बारहवीं ट्रेन में उडीसा स्थित जगन्नाथपूरी तीर्थ स्थल की यात्रा 23 दिसम्बर को खण्डवा से रवाना होगी जो 28 दिसम्बर को लौटेगी इसमें खंडवा से 279, नरसिंहपुर से 200 और जबलपुर से 300 यात्री रवाना होगी। तेहरवीं ट्रेन 31 दिसम्बर को बैतूल से 279 यात्री कामाख्या तीर्थ स्थल के लिये ट्रेन रवाना होगी। इसमें विदिशा से 300 और दमोह से 200 तीर्थ यात्री रवाना होगें। यह ट्रेन 5 जनवरी को वापस लौटेगी। वाराणसी (काशी)-अयोध्या तीर्थ स्थल के लिये चौदवीं ट्रेन सिवनी से 8 जनवरी को रवाना होगी। जिसमें सिवनी से 279, छिंदवाड़ा से 300 और बैतूल से 200 यात्री रवाना होगें। यह ट्रेन 13 जनवरी को वापस लौटेगी। छिंदवाड़ा से 16 जनवरी को 200 यात्री के साथ रामेश्वरम के लिये पंद्रहवीं ट्रेन रवाना होगी । जिसमें सिवनी-बैतूल से 200 और पंढुर्णा से 179 तीर्थ यात्री रवाना होगें। यह ट्रेन 21 जनवरी को वापस लौटेगी। वाराणसी (काशी)-अयोध्या तीर्थ स्थल के लिये अनूपपुर से सोलहवीं ट्रेन 279 यात्रियों के साथ 24 जनवरी को रवाना होगी। जिसमें शहडोल से 300 और उमरिया से 200 यात्री रवाना होगें। यह ट्रेन 29 जनवरी को वापस लौटेगी। सत्रवीं ट्रेन उमरिया से शिर्डी के लिये 279 तीर्थ यात्री को लेकर 1 फरवरी को रवाना होगी। जिसमें कटनी से 200 और जबलपुर से 300 तीर्थ यात्री रवाना होगें। यह ट्रेन 4 फरवरी को वापस लौटेगी। रामेश्वरम तीर्थ स्थल के लिये 7 फरवरी को अठ्ठारवीं ट्रेन मुरैना से रवाना होगी, जिसमें मुरैना से 279, ग्वालियर से 300 और दतिया से 200 तीर्थ यात्री रवाना होगें। यह ट्रेन 12 फरवरी को लौटेगी। छतरपुर से द्वारका के लिये 15 फरवरी को उन्नीसवीं ट्रेन रवाना होगी। जिसमें छतरपुर से 279, टीकमगढ़ से 200 और उज्जैन से 300 तीर्थ यात्री रवाना होगें। यह ट्रेन 20 फरवरी को वापस लौटेगी। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना की 20वीं ट्रेन नागपुर के लिये भिंड से 279 तीर्थ यात्रियों के साथ 23 फरवरी को रवाना होगी। जिसमें ग्वालियर से 300 और दतिया से 200 तीर्थ यात्री शामिल होगें। यह ट्रेन 26 फरवरी को लौटेगी।

श्रावण माह की आखिरी सवारी में भगवान महाकाल पांच रूप में दर्शन देंगे

Lord Mahakaal will appear in five forms in the last ride of Shravan month.

Lord Mahakaal will appear in five forms in the last ride of Shravan month. सावन माह में निकलने वाली अंतिम सवारी में भगवान महाकाल पांच रूपों में दर्शन देंगे. सावन की अंतिम सवारी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे. सवारी को भव्य रूप देने के लिए इसमें सीआरपीएफ का बैंड भी शामिल होगा. महाकालेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष और कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि महाकालेश्वर भगवान की श्रावण माह में निकलने वाली सवारी के क्रम श्रावण माह की आखिरी सवारी 19 जुलाई रक्षाबंधन के पर्व पर निकलेगी. इस दौरान पालकी में श्री चन्द्रमौलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, गरुड़ रथ पर श्री शिवतांडव, नन्दी रथ पर श्री उमा-महेश और डोल रथ पर श्री होल्कर स्टेट के मुखारविंद सम्मिलित रहेगा. पालकी में विराजित भगवान को दी जाएगी सलामीमहाकालेश्वर भगवान की सवारी निकलने के पूर्व श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर का विधिवत पूजन-अर्चन होगा. उसके पश्चात भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे. मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में विराजित भगवान को सलामी दी जाएगी. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बताया कि सावन माह की अंतिम सवारी में सीआरपीएफ का बैंड शामिल होगा. वह खुद भी सवारी में शामिल होंगे. गोण्ड जनजातीय का दल सवारी में सम्मिलित होगाश्री महाकालेश्वर की सवारी में जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद के माध्यम से कलाकारों का दल भी सहभागिता करेगा. सवारी में शामिल होने वाले दल के प्रमुख प्रताप सिंह धुर्वे ने बताया कि आदिवासी गोड़ जनजाति का मैला करमा नृत्य कर्म की प्रेरणा देने वाला नृत्य है. ग्राम वासियों में श्रम का महत्व है, श्रम को ही कर्मदेवता के रूप में मानते है..पूर्वी मध्यप्रदेश में कर्मपूजा का उत्सव मनाया जाता है. उसमें करमा नृत्य किया जाता है. इस नृत्य में युवक-युवतियाँ दोनों भाग लेते है और उनके बीच गीत रचना होड़ लग जाती है.

भारत दर्शन: मां वैष्णो देवी घूमने से पहले जाने कहां कहां घूमे सम्पूर्ण यात्रा विडियो के माध्यम से

Bharat Darshan: Before visiting Maa Vaishno Devi, know where to visit through complete journey video.

Bharat Darshan: Before visiting Maa Vaishno Devi, know where to visit through complete journey video. क्या आप अपने व्यस्त दैनिक जीवन से आराम करने के लिए अद्भुत यात्रा अनुभवों की तलाश करते हैं? उसके बाद वैष्णो देवी की यात्रा की योजना बनाएं। यह भारत के सबसे प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों में से एक है। यह आपको अस्थायी रूप से अपनी सभी चिंताओं और कठिनाइयों को एक तरफ रखने की अनुमति देता है और आपको माता वैष्णो देवी के पवित्र मंदिर की शांति में डुबो देता है। वैष्णो देवी के पास घूमने के लिए कई तरह की जगहें हैं। जम्मू-कश्मीर में यह क्षेत्र त्रिकुटा पर्वत की तलहटी में स्थित है। यदि आप इस स्थान की यात्रा करने का निर्णय लेते हैं तो नीचे वैष्णो देवी के पास घूमने के स्थानों की जाँच करें। आप अपने यात्रा कार्यक्रम की योजना बना सकते हैं और उसके आधार पर एक शानदार यात्रा कर सकते हैं। आप वैष्णो देवी पहुँच सकते हैं: ट्रेन से: वैष्णो देवी तक पहुँचने के कई रास्ते हैं। श्री माता वैष्णो देवी कटरा रेलवे स्टेशन वैष्णो देवी का मुख्य रेलवे स्टेशन है, और त्रिची और इसके आसपास के क्षेत्रों में कार्य करता है। यह वैष्णो देवी से 16.5 किमी दूर स्थित है। हवाई मार्ग से: यदि आप हवाई मार्ग से वैष्णो देवी पहुंचना चाहते हैं, तो आप जम्मू हवाई अड्डे के लिए उड़ान भर सकते हैं। यह हवाई अड्डा शहर से 50 किमी दूर स्थित है। सड़क मार्ग से : यदि आप जम्मू और कश्मीर में रहते हैं, तो आप कार या सार्वजनिक परिवहन द्वारा वैष्णो देवी पहुँच सकते हैं। दुनिया में सबसे प्रसिद्ध तीर्थ मार्गों में से एक वैष्णो देवी यात्रा है, जो यात्रा करती है कटरा से वैष्णो देवी मंदिर। 13 किमी यात्रा का प्रारंभिक स्थान बाणगंगा है, जो कटरा के प्रमुख शहर से लगभग 2 किमी दूर है। माता वैष्णो देवी के दर्शन के साथ, यह पवित्र गुफा का समापन करता है। कटरा से वैष्णो देवी पहुंचने के लिए आप पालकी, पिठू, पोनी या पैदल भी जा सकते हैं। यदि आप पैसा खर्च करना चाहते हैं, तो आप नियमित रूप से निर्धारित रोपवे या हेलीकॉप्टर सेवा ले सकते हैं। रोपवे और हेलीकॉप्टर प्रस्थान समय की जाँच के बाद अपनी यात्रा की योजना बनाएं। आपको किसी भी चीज़ की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि रोपवे टिकट भवन में आसानी से उपलब्ध हैं। भले ही वैष्णो देवी जाने के लिए कभी भी बुरा समय न हो, लेकिन उत्सव के समय जाना सबसे अच्छा है। यह आपको देवी दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने और शहर को एक अलग दृष्टिकोण से देखने में सक्षम बनाता है। आप वैष्णो देवी यात्रा पर एक स्थान ऑनलाइन आरक्षित कर सकते हैं क्योंकि यात्रा में भाग लेने से पहले पंजीकरण आवश्यक है। घूमने का समय: सारा दिन दूरी: वैष्णो देवी से 13 किमी माता वैष्णो देवी की यात्रा में सबसे पहले बस स्टैंड के पास स्थित कार्यालय से रजिस्ट्रेशन करवा कर आरएफआईडी प्राप्त कर ले। पैदल चलने के लिए लाठी या डंडा खरीदकर पैदल चलते हुए बाणगंगा के मुख्य द्वार पर पहुंच जाएं। बाणगंगा द्वार से ही यात्रा की शुरुआत होती है। गेट पर चेक करने के बाद पैदल चलते हुए आगे बढ़ाते जाना है। आगे जानें पर दो रास्ते विभाजित हो जाते हैं जो माता के दरबार तक जाते हैं। एक रास्ता है अर्धकुवारी से जो KM लंबा है और दूसरा रास्ता हिमकोटी मार्ग का है जो 5.5 किमी लंबा है। अधिकतर भक्त अर्धकुवारी के रास्ते हाथीमाता मार्ग से होकर जाते हैं। हाथीमाता मार्ग के रास्ते में बहुत ही लुभावने दृश्य देखने को मिलते हैं। बाणगंगा से पैदल रास्ता 12 किमी का है। रास्ते में अनेकों होटल, खानें पीने की अनेकों दुकानें देखने को मिलती हैं। वैष्णो देवी यात्रा करने का सबसे अच्छा मौसम | Vaishno Devi Kab Jaye वैष्णो माता की यात्रा करने का सबसे अच्छा मौसम मार्च से जून तक माना जाता है। मार्च से जून के बीच दर्शन करने के लिए मौसम अनुकूल रहता। सर्दियों के मौसम में यहां बहुत ठंडी पड़ती है और बर्फबारी होती रहती है। जिस कारण सर्दियों के मौसम में यहां का तापमान माइनस में पहुंच जाता है और ठंडी के कारण यात्रियों के आवागमन की संख्या कम हो जाती है। माता वैष्णो देवी के द्वार भक्तो के लिए हमेशा खुले रहते हैं। भक्त साल में किसी भी मौसम में घूमने जा सकते है।

जबलपुर : बोल बम के जय करो से गुजा शहर

Jabalpur: City passes through Bol Bam Ke Jai Karo

Jabalpur: City passes through Bol Bam Ke Jai Karo जीतेन्द्र श्रीवास्तव ( विशेष संवाददाता ) जबलपुर ! समाज सेवक श्री रतन यादव ओर सभी बम बम बोले के भक्त गण विगत 30 सालों से नाग पंचमी के दिन यह पताका आज गोरखपुर से गुप्तेश्वर महादेव के मन्दिर में जाकर चढ़ाया जाता है बोल-बम के उद्घोष से शहर गूंज उठा। शिवभक्त बोल-बम, बम-बम के जयकारे लगाते हुए गंतव्य की ओर रवाना होते गए। भगवान शिव की भक्ति को समर्पित श्रावण मास में पूरा शहर शिवमय होने लगा है। ज्यों-ज्यों शिवरात्रि के आगमन की तिथि निकट आ रही है त्यों-त्यों शहर में भक्ति की लहरें उफान पर पहुंच रही हैं।

खूबसूरत पहाड़ियों और मंदिरों से घिरा हुआ मध्यप्रदेश का अमरकंटक, जानिये यहां के बारे में सबकुछ

Amarkantak of Madhya Pradesh is surrounded by beautiful hills and temples

Amarkantak of Madhya Pradesh is surrounded by beautiful hills and temples, know everything about it अमरकंटक नाम की उत्पत्ति को लेकर कई सारी कहानियां प्रचलित हैं. प्रसिद्ध संस्कृत कवि कालिदास ने इस स्थान का नाम अमरकूट बताया है क्योंकि यहां आम (अमरा) के बहुत सारे पेड़ थे. कहा जाता है किबाद में अमरकूट अमरकंटक बन गया. Amarkantak Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश स्थित अमरकंटक हिंदुओं का प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है जो अनूपपुर और शहडोल के तहसील पुष्पराजगढ़ में मेकल की पहाड़ियों के बीच बसा हुआ शहर है. यहां सुप्रसिद्ध अमरकंटक मंदिर है जो 1065 मीटर की ऊंचाई पर बसा है. पहाड़ों और घने जंगलों मे बीच इस मंदिर की खूबसूरती अलग ही प्रतीत होती है. यह छत्तीसगढ़ की सीमा से सटा है. यह जगह विंध्य, सतपुड़ा और मैदार की पहाड़ियों का मिलन स्थल है, जिसका दृश्य मन मोह लेने वाला होता है. अमरकंटक तीर्थराज के रूप में भी काफी प्रसिद्ध है. यही वजह है कि इस मंदिर को देखने के लिए देशभर से श्रद्धालु आते हैं. अमरकंटक नाम की उत्पत्ति को लेकर कई सारी कहानियां प्रचलित हैं. प्रसिद्ध संस्कृत कवि कालिदास ने इस स्थान का नाम अमरकूट बताया है क्योंकि यहां आम (अमरा) के बहुत सारे पेड़ थे. कहा जाता है किबाद में अमरकूट अमरकंटक बन गया. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, जब भगवान शिव ने आग से त्रिपुरा को नष्ट कर दिया तो तीन में से एक राख अमरकंटक पर गिर गई, जो हजारों शिवलिंगों में बदल गई. ऐसा ही एक लिंग ज्वलेश्वर में आज भी पूजा जाता है. संस्कृत में अमरकंटक का अर्थ है अनंत स्त्रोत, जो भारत कि सबसे पवित्र नदी नर्मदा नदी से जुड़ा हुआ है. यहां कई सारे मंदिर हैं जो कि विभिन्न शासकों के युग का वर्णन करते हैं. अमरकंटक में प्रमुख आकर्षण नर्मदाकुंड और कलचुरी काल के प्राचीन मंदिर हैं. नर्मदाकुंड के मंदिर परिसर के भीतर 16 छोटे मंदिर हैं, जो शहर के मध्य में स्थित हैं. अमरकंटक के प्रसिद्ध पर्यटक स्थलअमरकंटक में कई प्रसिद्ध पर्यटक स्थल हैं. यहां टूरिस्ट नर्मदा नदी का उद्गम स्थल देख सकते हैं. कलचुरी का प्राचीन कालीन मंदिर देख सकते हैं. इसके अलावा, कर्ण मंदिर, पातालेश्वर मंदिर,सोनमुडा अमरकंटक, दूधधारा प्रपात अमरकंटक, कपिल धारा प्रपात अमरकंटक इत्यादि जगहों पर पर्यटक घूम सकते हैं. नर्मदा नदी का उद्गम स्थलअमरकंटक में नर्मदा नदी और सोनभद्रा नदियों का उद्गम स्थल है. यह आदिकाल से ही ऋषि और मुनियों की तपोभूमि रही है. नर्मदा का उद्गम यहां के एक कुंड से और सोनभद्रा के पर्वत शिखर से हुआ है. नर्मदा नदी यहां पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है. इस नदी को “मध्यप्रदेश और गुजरात की जीवनदायनी नदी” भी कहा जाता है. ऐसे में आप यहां नर्मदा नदी का उद्गम स्थल घूम सकते हैं.

Hariyali Teej 2024: हरियाली तीज पर खीरे की क्यों करते हैं पूजा, जानें रहस्य

Why cucumber is worshiped on Hariyali Teej, know the secret

Why cucumber is worshiped on Hariyali Teej, know the secret Hariyali Teej 2024: हरियाली तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं (Married Women) के लिए बहुत ही खास होता है. सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए यह पर्व रखती हैं. वैसे तो साल भर में तीन प्रकार की तीज होती हैं, जिसमें हरियाली तीज सबसे पहले पड़ता है. हरियाली तीज का पर्व सावन महीने (Sawan Month 2024) की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को होती है, जोकि आज बुधवार 7 अगस्त 2024 को है. आज विवाहिताएं हरियाली तीज का व्रत रखेंगी और शिव-पार्वती (Shiv Parvati) की पूजा करेंगी. पूजा में कई तरह की सामग्रियों (Puja Samagri) की जरूरत पड़ती है, जिसमें खीरा (Kheera) भी शामिल है. हरियाली तीज की पूजा (Hariyali Teej ki Puja) में खीरा का होना बहुत जरूरी होता है, इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है. आइये जानते हैं आखिर क्यों हरियाली तीज में होती है खीरा की जरूरत और क्या है तीज में खीरा पूजन का रहस्य. हरियाली तीज की पूजा में खीरा का महत्व (Cucumber Importance of Hariyali Teej Puja) ज्योतिष शास्त्र (Jyotish Shastra) में खीरा का संबंध चंद्रमा (Chandrama) से बताया गया है. दरअसल जितने भी तरल पदार्थ होते हैं, उनका संबंध चंद्र ग्रह से होता है. हरियाली तीज में शिव शक्ति के साथ ही चंद्रमा पूजन का भी महत्व है. इसलिए पूजा के दौरान खीरा रखना अनिवार्य माना जाता है. एक अन्य कारण यह भी है कि, चंद्रमा शिव को अधिक प्रिय है. इसे शिवजी (Shiv ji) ने अपने माथे पर इसे सुशोभित किया है. चंद्रमा से खीरे का संबंध है और चंद्र का शिव से. इसलिए हरियाली तीज की पूजा में खीरा को चंद्रमा का प्रतीक मानकर पूजा जाता है, जिससे कि चंद्रमा के शुभ फल से मन के विकार दूर हों, शुभता प्राप्त हो और व्रत में किसी तरह का दोष न रहे.

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