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हर जिले में साइबर थाना, हर थाने में हेल्प डेस्क… फ्रॉड करने वालों की खैर नहीं

CM Mohan Yadav’s action plan: Cyber ​​police station in every district, help desk in every police station… fraudsters are in trouble मध्य प्रदेश के हर जिले में अब साइबर पुलिस स्टेशन खुलेंगे और हर थाने में हेल्प डेस्क बनेगी। अब तक यह सुविधा सिर्फ भोपाल में थी। अन्य जिलों में पुलिस थानों में साइबर ठगी की शिकायतें लिखी जाती थीं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के आदेश के बाद यह फैसला लिया गया है। भोपाल ! मध्य प्रदेश में साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब हर जिले में एक साइबर थाना और हर थाने में एक साइबर हेल्प डेस्क होगी।यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि इस साल जनवरी से अब तक 250 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हो चुकी है। अभी तक सिर्फ भोपाल में ही एक साइबर थाना था, बाकी जिलों में साइबर क्राइम के मामले क्राइम ब्रांच में दर्ज होते थे। एक साल पहले आ गया था प्रपोजल साइबर हेल्प डेस्क बनाने का प्रस्ताव तो एक साल पहले ही आ गया था, लेकिन बजट नहीं होने की वजह से इस पर काम नहीं हो पाया था। अब राज्य साइबर मुख्यालय ने इसके लिए शासन से बजट की मांग की है और उम्मीद है कि जल्द ही यह सुविधा सभी जिलों में शुरू हो जाएगी। पुलिसकर्मियों को मिलेगी ट्रेनिंग पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि साइबर हेल्प डेस्क में एक पुलिसकर्मी को साइबर क्राइम की जांच के लिए ट्रेनिंग देकर तैनात किया जाएगा। यह पुलिसकर्मी लोगों की शिकायतें सुनेगा और जरूरत पड़ने पर उन्हें साइबर थाने भेजेगा। इस साल में 250 करोड़ की ठगी साइबर क्राइम के मामलों में पिछले कुछ सालों में काफी तेजी आई है। पिछले पांच सालों में साइबर क्राइम की शिकायतें पांच हजार से बढ़कर तीन लाख से ज़्यादा हो गई हैं। साइबर पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के मुताबिक, इस साल जनवरी से अब तक 250 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हो चुकी है। दूसरे देशों से ठगी कर लेते हैं लोग साइबर पुलिस के मुताबिक, दूसरे देशों में बैठे लोग भी इस तरह के अपराध में शामिल हैं। साइबर थाने बनने से साइबर कानून के जानकार पुलिसकर्मी तैनात किए जा सकेंगे। इससे अपराध की घटनाओं पर कार्यवाई में तेजी आएगी। जांच से लेकर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल करने तक का काम समय पर और अच्छी तरह से हो सकेगा। मध्य प्रदेश में बढ़े हैं ऐसे मामले मध्य प्रदेश में साइबर अपराध के मामलों में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है, इसलिए हर जिले में एक अलग साइबर थाने की सख्त ज़रूरत है। उम्मीद है कि इससे साइबर अपराध पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी और लोग साइबर ठगी से बच सकेंगे।

भोपाल बस स्टैंड से 16 क्विंटल मावा जब्त, ग्वालियर से भोपाल लाया जा रहा था मावा

16 quintal mawa seized from Bhopal bus stand, mawa was being brought from Gwalior to Bhopal. राजधानी भोपाल के आईएसबीटी बस स्टैंड से खाद्य विभाग की टीम ने 16 क्विंटल मावा जब्त किया है. बताया जा रहा है यह मावा ग्वालियर से लाया गया था. बता दें कि दीपावली पर्व के चलते बड़ी संख्या में राजधानी भोपाल में ग्वालियर-चंबल के रास्ते मिलावटी मावा लाया जा रहा है. दो दिन पहले भी भोपाल रेलवे स्टेशन से 9 क्विंटल मावा जब्त किया गया था. दीपावली पर्व के दौरान बड़ी संख्या में मिठाईयों की खपत होती है. इसके लिए भोपाल में आगरा-ग्वालियर सहित अन्य शहरों से नकली मावा मंगाया जाता है. भोपाल में मिलावटी नकली मावा को लेकर पुलिस व खाद्य विभाग की टीम भी अलर्ट है. रेलवे स्टेशन व बस स्टेशनों पर विशेष नजर रखी जा रही है. महज चार दिन में ही पुलिस व खाद्य विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए 25 क्वीटंल मावा जब्त किया है. दुकानों से जांच के लिए सैंपल रविवार (27 अक्टूबर) को राजधानी भोपाल में खाद्य विभाग की टीम ने 9 दुकानों से सैंपल लिए. वरिष्ठ अधिकारी देवेन्द्र वर्मा के अनुसार टीम द्वारा हमीदिया रोड, न्यू मार्केट और बैरागढ़ सहित नेहरू नगर स्थित मंगलम स्वीट्स से पिस्ता बर्फी तथा मिल्क केक, मंगलम रेस्टोरेंट से काजू कतली, आशा फूड जोन से मलाई टिकिया तथा मलाई बर्फी के सैंपल लिए गए. 14 दिन में आएगी जांच की रिपोर्ट न्यू मार्केट स्थित बृजवासी स्वीट्स से मिल्क केक तथा मलाई बर्फी और भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक-1 के सामने स्थित मां शारदा स्वाद संसार से मिल्क रोल तथा मलाई बर्फी के सैंपल लिए गए हैं. पंजाब डेयरी उद्योग से मावा तथा घी के सैंपल लिए गए हैं. खाद्य अधिकारियों के अनुसार लिए गए सैंपल प्रयोगशाला भेजे गए, जिनकी रिपोर्ट 14 दिन में आएगी, अनियमितताएं मिलने पर प्रकरण दर्ज किए जाएंगे. दो दिन पहले भी जब्त हुआ था मावा दीपावली पर्व को लेकर राजधानी भोपाल में अन्य शहरों से बड़ी संख्या में दूषित मावा आ रहा है. दो दिन पहले भी भोपाल रेलवे स्टेशन के बाहर लोडिंग ऑटो में 9.20 क्विंटल मावा जब्त किया गया था. बताया जा रहा है कि यह मावा आगरा स्टेशन से लाया गया था. वहीं 6 दिन पहले नर्मदापुरम से भी 300 क्विंटल मावा जब्त किया गया था. खाद्य अधिकारी देवेंद्र सिंह ने कहा कि “हमें सूचना मिली थी ग्वालियर से मिलावटी मावा बस से भोपाल लाया जा रहा है हमारी टीम ने सुबह बस स्टैंड पहुंचकर बस में रखा मावा को जव्त कर लिया है बस ड्राइवर से पूछताछ की जा रही है साथ ही मावे के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जाएगा.”

ओवरब्रिज निर्माण में तेजी, बैरागढ़ की दुकानें सर्विस रोड बनने के साथ हटने की तैयारी में

Acceleration in overbridge construction, Bairagarh shops preparing to move out with construction of service road आरओबी की डिजाइन में बदलाव के बाद लोगों के लिए संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन पहुंचने में भी सुविधा होगी। इसका एक हिस्सा स्टेशन पहुंचकर समाप्त होगा। इससे स्टेशन के दूसरे छोर से बैरागढ़ तरफ आने वालों को आसानी होगी। भोपाल। संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) के रेलवे फाटक क्रमांक 115 को फाटक मुक्त करने के लिए लोक निर्माण विभाग यहां ओवरब्रिज का निर्माण करा रहा है। फाटक के पास के कुछ हिस्से का काम रेल प्रशासन कर रहा है। रेलवे ने अपने हिस्से का काम तेज कर दिया है। मार्च 2025 तक यहां से आवाजाही शुरू हो सकती है। यहां पर यह बता दें कि आरओबी की डिजाइन में बदलाव के बाद लोगों के लिए संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन पहुंचने में भी सुविधा होगी। इसका एक हिस्सा स्टेशन पहुंचकर समाप्त होगा। इससे स्टेशन के दूसरे छोर से बैरागढ़ तरफ आने वालों को आसानी होगी। थर्ड लेग के लिए अतिरिक्त आठ करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। क्षेत्रीय विधायक रामेश्वर शर्मा की पहल पर हो रहे इस काम को रेल प्रशासन ने भी स्वीकृति दे दी है। अब नई डिजाइन के अनुसार ही काम किया जा रहा है।स्टेशन से जोड़ने की इसलिए पड़ी जरूरतभविष्य में संत हिरदाराम नगर स्टेशन का विस्तार होगा। ट्रेनों के स्टॉपेज बढ़ेंगे। ऐसे में आरओबी को स्टेशन से जोड़ने की जरूरत महसूस की जा रही थी। रेल प्रशासन ने फरवरी 2025 तक अपने हिस्से का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है। फरवरी माह में ही थर्ड लेग का काम पूरा होगा।सर्विस रोड बना तो होगी तोड़फोड़ओवरब्रिज का कुछ हिस्सा दुकानों तक पहुंच रहा है। ब्रिज के नीचे दोनों तरफ सर्विस रोड बनाने का प्रस्ताव है। रोड बना तो कई दुकानों का बड़ा हिस्सा टूट सकता है। पिछले दो साल से काम चल रहा है। इस कारण यहां का बाजार सुनसान हो चुका है। कारोबार पूरी तरह ठप है। व्यापारी कारोबार को लेकर चिंतित हैं। व्यवसायी राजकुमार आसूदानी, गुरमीतसिंह आदि ने लोक निर्माण विभाग से व्यापारियों को दूसरे स्थान पर जगह आवंटित करने की गुहार की है।

भोपाल : बड़े तालाब पर रोपैक्स सेवा शुरू करने का नितिन गडकरी का प्रस्ताव

Nitin Gadkari proposes to start Ro-Pax service on Bada Talab in Bhopal भोपाल । केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अपने भोपाल दौरे के दौरान बड़े तालाब में रोपैक्स (रो-रो फेरी) सेवा शुरू करने का प्रस्ताव रखा। यह योजना मुंबई, गुजरात और ओडिशा जैसे शहरों की तर्ज पर तैयार की गई है, जहां पहले से ही रोपैक्स सेवा सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। इस नई सेवा का उद्देश्य भोपाल के यातायात को सुगम बनाना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और शहर के पर्यटन को एक नई दिशा देना है। रोपैक्स सेवा: एक क्रांतिकारी कदम भोपाल के बड़े तालाब में प्रस्तावित रोपैक्स सेवा से भदभदा से बैरागढ़ तक का सफर बेहद आसान हो जाएगा। वर्तमान में यह दूरी सड़क मार्ग से तय करने में 30 मिनट से अधिक समय लेती है, जबकि रोपैक्स सेवा के माध्यम से यह यात्रा महज 5 से 10 मिनट में पूरी की जा सकेगी। इस परियोजना पर 15 से 20 करोड़ रुपये का निवेश करने का प्रस्ताव है। इससे सड़कों पर वाहनों की संख्या में कमी आएगी, जो यातायात के दबाव को कम करने में मदद करेगा। परियोजना के प्रमुख लाभ: 1. यातायात का सुधार और समय की बचत: मौजूदा समय में भदभदा से बैरागढ़ तक सड़क मार्ग से यात्रा करने में लगभग 17 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। रोपैक्स सेवा शुरू होने के बाद यह दूरी तालाब के जरिए सीधा तय की जा सकेगी, जिससे यात्रियों का कीमती समय बचेगा। 2. पर्यावरण अनुकूल समाधान: इस सेवा से सड़क यातायात पर निर्भरता कम होगी, जिससे वाहनों द्वारा उत्पन्न ध्वनि और वायु प्रदूषण में कमी आएगी। साथ ही, डीजल और पेट्रोल के उपयोग में भी कमी आएगी, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 3. पर्यटन को मिलेगा प्रोत्साहन: बड़ा तालाब भोपाल का एक प्रमुख आकर्षण है, और रोपैक्स सेवा शुरू होने से इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटक न केवल स्थानीय सुंदरता का आनंद ले सकेंगे, बल्कि तालाब के माध्यम से यात्रा का एक नया अनुभव भी प्राप्त करेंगे। 4. आर्थिक और सामाजिक विकास: इस परियोजना से न केवल स्थानीय निवासियों को लाभ मिलेगा, बल्कि नए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। इसके अलावा, स्थानीय व्यापार और होटल उद्योग में भी वृद्धि होने की संभावना है। अन्य शहरों के अनुभव: एक सीख गडकरी ने बताया कि मुंबई, ओडिशा और गुजरात में पहले से ही रोपैक्स सेवा सफलतापूर्वक चलाई जा रही है। इन शहरों में इस सेवा ने न केवल यातायात का दबाव कम किया है, बल्कि लोगों को जल परिवहन के प्रति जागरूक भी किया है। इन स्थानों पर रोपैक्स सेवा के माध्यम से न केवल स्थानीय यातायात का संचालन आसान हुआ है, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी इसके सकारात्मक परिणाम मिले हैं। भोपाल में इस सेवा को शुरू करने से ऐसे ही लाभ की अपेक्षा की जा रही है। परियोजना की प्रमुख चुनौतियाँ हालांकि रोपैक्स सेवा के कई फायदे हैं, लेकिन इसके कार्यान्वयन में कुछ चुनौतियाँ भी सामने आ सकती हैं: तालाब के जल स्तर का प्रबंधन: रोपैक्स सेवा को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए बड़े तालाब का जल स्तर पर्याप्त होना आवश्यक है। सूखे के मौसम में तालाब का जल स्तर कम होने पर सेवा में रुकावट आ सकती है। पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन: जलमार्ग में चलने वाली फेरी सेवाओं से मछलियों और अन्य जलजीवों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका गहन अध्ययन आवश्यक है ताकि पर्यावरण संतुलन बनाए रखा जा सके। सुरक्षा व्यवस्था: यात्रियों और वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फेरी सेवाओं के संचालन में उच्चतम सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा। अधिकारियों पर तंज और काम की गति अपने भाषण में नितिन गडकरी ने परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने में लगने वाले समय पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि डीपीआर तैयार करने वाले अधिकारियों को पद्मश्री और पद्म विभूषण जैसे सम्मान दिए जाने चाहिए क्योंकि उनकी धीमी गति काम में देरी का कारण बनती है। उनका इशारा इस ओर था कि अगर योजनाओं को समय पर लागू किया जाए, तो लोगों को जल्द ही इसका लाभ मिल सकता है। रोपैक्स सेवा क्या है? रोपैक्स (रो-ऑन/रो-ऑफ) एक प्रकार की फेरी सेवा है जिसमें यात्रियों के साथ-साथ वाहन भी यात्रा कर सकते हैं। यह सेवा उन क्षेत्रों में विशेष रूप से उपयोगी होती है जहां जलमार्ग के जरिए यातायात का संचालन संभव है। वाहन सवार यात्री अपनी गाड़ी के साथ फेरी पर सवार हो सकते हैं और दूसरे किनारे पर उतर सकते हैं, जिससे सड़क यात्रा की तुलना में समय और ईंधन की बचत होती है। भोपाल में रोपैक्स की संभावनाएँ भोपाल के बड़े तालाब में रोपैक्स सेवा शुरू होने से शहर की यातायात व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आ सकते हैं। यह सेवा न केवल सड़क यातायात को कम करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके अलावा, यह भोपाल को एक स्मार्ट और आधुनिक शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है।

राष्ट्रीय सरपंच संघ : 02 अक्टूबर 2024 को मध्यप्रदेश के प्रत्येक सरपंच महामहिम राष्ट्रपति को लिखेंगे पत्र : राजवीर सिंह तोमर

National Sarpanch Sangh: On 02 October 2024

National Sarpanch Sangh: On 02 October 2024, every Sarpanch of Madhya Pradesh will write a letter to His Excellency the President  भोपाल। मध्यप्रदेश के समस्त सरपंच त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के निर्वाचित प्रतिनिधि अपने अधिकारों को लेकर भोपाल में आयोजित पूर्व आन्दोलन 23 जुलाई 2024 को आन्दोलन किया गया था। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 15 दिवस का आश्वासन दिया था। आज दिनांक तक मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सरपंचों की जनहित मांगों पर कोई आदेश निराकरण नहीं किया गया। 02 अक्टूबर 2024 को मध्यप्रदेश के प्रत्येक ग्राम पंचायतों के सरपंचों द्वारा ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति महोदय भारत सरकार के नाम देना है। जिसमें रजिस्ट्रर्ड पोस्ट के माध्यम से ग्राम पंचायत सचिव द्वारा डाक के माध्यम से भेजा जाएगा। जिसकी रसीद सचिव से प्राप्त करें। उसकी कॉपी वाटस अप पर क्षेत्रीय जिला अध्यक्ष एवं जिला प्रभारी राष्ट्रीय सरपंच संघ पदाधिकारियों को भेजें। ज्ञापन की कॉपी पर ग्राम पंचायत सचिव की सील एवं हस्ताक्षर सहित प्राप्ति लें। महामहिम राष्ट्रपति महोदय का ज्ञापन का प्रारूप आपको भेजा जा रहा है इसके साथ ही माननीय प्रधानमंत्री, नेताप्रतिपक्ष लोकसभा, नेतासदन राज्यसभा, राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं नेताप्रतिपक्ष मध्यप्रदेश को प्रतिलिपि अवश्य भेजें। समस्त मांगों का त्वरित निराकरण नहीं होता है जो दिनांक 18.10.2024 को गांव के मुख्य मार्गों पर ग्रामवासियों के साथ दोपहर 12:00 से 2:00 तक शांतिपूर्ण धरना एवं चक्काजाम करना है एवं पूर्ववत् में दिया गया ज्ञापन का पुनः स्मरणपत्र दिया जाए। इसके बाद भी यदि समस्या का निराकरण नहीं होता है तो राष्ट्रीय सरपंच संघ आगे की रणनिति तय करेगा।

आरोपों में फंसी मेसर्स मेंटना इन्फ्रासेल को दिया 5 हजार करोड़ से ज्यादा का ठेका

M/s Mentana Infracell, which is embroiled in allegations, was given a contract worth more than Rs 5000 crore

M/s Mentana Infracell, which is embroiled in allegations, was given a contract worth more than Rs 5000 crore  उदित नारायण  भोपाल। छिंदवाड़ा कॉम्लेक्स निर्माण में ठेका लेने वाली मेसर्स मेंटना इन्फ्रासेल हैदराबाद की कंपनी को करीब 1500 करोड़ का एडवांस में भुगतान करने सहित रीवा आदि कार्याें में 3 हजार करोड़ से अधिक का पेमेंट लेने के बाद भी काम शुरू नहीं करने पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया। बाद में अफसरों की मिलीभगत के चलते कंपनी को क्लीनचिट दे दी गई और अब उसे चितावन तथा सीतापुर हनुमना प्रोजेक्ट 5 हजार करोड़ से अधिक में कराने का ठेका दे दिया गया है।   सूत्र बताते है कि हैदराबाद की मेंटना इन्फ्रासेल प्रायवेट लिमिटेड ने मप्र में तीन कंपनियां रजिस्टर्ड  करवा रखी हैं। यदि एक कंपनी किसी मामले में फंसती है तो दूसरी कंपनी के नाम पर ठेका ले लिया जाता है और ऐसा ही उसने पार्टनरशिप में काम लेकर किया है। जल संसाधन विभाग ने 11 सितंबर को जारी आदेश में टर्न-की पद्धति पर शिप्रा नदी पर चितावन परियोजना के तहत बांध निर्माण एवं प्रेशराइज्ड प्रणाली का ठेका मेसर्स एचईएस इंफ्रा हैदराबाद, इसमें कंपनी की 55 प्रतिशत भागीदारी तथा मेंटना इन्फ्रासेल की 45 प्रतिशत भागीदारी का काम 1335 करोड़ 82 लाख रुपए में आवंटित किया है। इन्हीं दोनों कंपनियों को सीतापुर हनुमना सिंचाई परियोजना अंतर्गत बीरबल बैराज एवं दाबयुक्त सिंचाई प्रणाली विकसित करने का ठेका 3 हजार 979 करोड़ में दिया गया है। यानि मप्र में घोटालों में शामिल कंपनी को बडे-बडे प्रोजेक्ट धड़ल्ले से दिए जा रहे हैं। पहले ब्लैकलिस्ट किया फिर दे दिया क्लीनचिट  तत्कालीन कमलनाथ सरकार के समय छिंदवाड़ा कॉम्लेक्स प्रोजेक्ट मंजूर किया गया था। यह कार्य करीब 6 हजार करोड़ में पूरा कराया जाना है। इसका ठेका जल संसाधन विभाग ने तत्कालीन समय में मेंटना इन्फ्रासेल को दिया था। अफसरों की मिलीभगत के चलते काम शुरू किए बिना ही कंपनी को 500 करोड़ रुपए एडवांस भुगतान कर दिया गया। इस गडबड़झाले को उठाने वाले छिदवाड़ा के भाजपा जिला अध्यक्ष एवं वर्तमान सांसद बंटी साहू के आरोपों के बाद सरकार ने मेंटना कंपनी को क्लैकलिस्ट कर दिया। बाद में इसे क्लीनिचट देकर एक हजार करोड़ का फिर एडवांस भुगतान कर दिया गया। वहीं, इस मामले को विधायक दिनेश राय मुनमुन ने विधानसभा में 15 मार्च 2021 को उठाया था। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि हैदराबाद की मेंटना कंस्ट्रक्शन कंपनी को ज्वाइंट वैंचर में जल संसाधन विभाग द्वारा भुगतान में अनियमितता की शिकायतों की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।    ईओडब्ल्यू में दर्ज है मामला   जानकारी के अनुसार, जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता रहे राजीव कुमार सुकलीकर के कार्यकाल में 7 सिंचाई परियोजनों के लिए मेंटना सहित अन्य ठेकेदारों को 3333 करोड़ रुपए का कार्य पूर्व भुगतान कर दिया था। बाद में सरकार बदलने पर इस मामले में ईओडब्यू में शिकायत दर्ज की गई। ईओडब्ल्यू ने शिकायत की जांच के आधार पर ठेकेदारों को 3333 करोड़ रुपए का कार्य पूर्व भुगतान करने के मामले में तत्कालीन प्रमुख अभियंता राजीव सुकलीकर, मुख्य अभियंता शरद श्रीवास्तव और तत्कालीन अधीक्षण यंत्री एवं प्रभारी मुख्य अभियंता शिरीष मिश्रा के खिलाफ जालसाजी एवं धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया था। ईओडब्ल्यू ने शुरूआती जांच में तीनों को आरोपी बनाया और ठेकेदारों को समयपूर्व भुगतान करने के मामले में संलिप्तता पाई। जांच एजेंसी ने प्रकरण से अचानक शिरीष मिश्रा का नाम हटा दिया। मोहन सरकार ने करीब छह महीने पहले सेवानिवृत्त हो चुके अधीक्षण यंत्री शिरीष मिश्रा को संविदा नियुक्ति देकर प्रमुख अभियंता बना दिया है। इधर, सरकार ने राजीव सुकलीकर के खिलाफ अभियोजन की अनुमति भी दे दी है।

नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के अनूठे उदाहरण प्रस्तुत किये मध्यप्रदेश ने : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

Madhya Pradesh has presented unique examples of cleanliness in urban and rural areas: Chief Minister Dr. Yadav

Madhya Pradesh has presented unique examples of cleanliness in urban and rural areas: Chief Minister Dr. Yadav भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन को देश भर में व्यापक आंदोलन शुरू कर स्वच्छ भारत की परिकल्पना को साकार करने के जो लक्ष्य निर्धारित किये उन्हें प्राप्त करने में मध्यप्रदेश ने देश में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। स्वच्छता को सर्वोपरि मानते हुए इंदौर ने सफाई की जो अलख जगाई है, वह पूरे देश में उदाहरण बन चुकी है। इंदौर के नाम लगातार 7 बार देश को स्वच्छतम शहर बने रहने का रिकार्ड है। इंदौर ही देश का पहला वाटर प्लस शहर भी बना है और भोपाल देश की सबसे स्वच्छ राजधानी है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव का प्रदेशवासियों से आहवान मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने प्रदेशवासियों से आहवान किया है कि सभी नागरिक संकल्प लें की न तो वे गंदगी फैलाएंगे और न किसी को फैलाने देंगे। अपने आसपास सफाई रखेंगे और लोगों को भी सफाई के लिए प्रेरित करेंगे, तभी सच्चे अर्थों में स्वच्छता ही सेवा अभियान सफल होगा। उन्होंने कहा कि हम सबको सफाई मित्र बनकर अभियान को सफल बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के जन्म दिन 17 सितम्बर से प्रांरभ हुए स्वच्छता ही सेवा अभियान में एक बार फिर मध्यप्रदेश पूरे जुनून के साथ जूट गया है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के प्रति मंत्रीगण, जन-प्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, समाजसेवी और सामाजिक संगठनों के साथ नागरिक भी सजग होकर महती भूमिका निभा रहे हैं। प्रदेशवासियों और हमारे सफाई मित्रों के मनोबल बढ़ाने के लिये राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने भी अपने उज्जैन प्रवास के दौरान सफाई मित्रों से संवाद कर उन्हें सम्मानित किया और श्री महाकाल लोक परिसर में झाडू लगाकर स्वच्छता का संदेश दिया। यह मध्यप्रदेश के लिये गर्व की बात है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि स्वच्छता के सभी आयामों पर मध्यप्रदेश खरा उतर रहा है। राज्य सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक एवं खुले में मांस-मछली के विक्रय पर प्रतिबंध लगाया है। प्रदेश में जीरो वेस्ट को प्रोत्साहन देने के लिये नगरीय निकायों में जीरो वेस्ट इवेंट भी जारी किये जा रहे हैं। प्रदेश में 401 नगरीय निकायों में सूखे एवं गीले कचरे के प्र-संस्करण के लिये सेंट्रल कम्पोस्टिंग और मटेरियल रिकवरी के लिये इकाइयों की स्थापना की गयी है, जिनसे कम्पोस्ट खाद बनायी जा रही है। प्रदेश में 324 शहरों को सफाई मित्र सुरक्षित शहर घोषित किया गया है। साथ ही सफाई मित्रों की कार्यक्षमता संवर्धन के लिये समय-समय प्रशिक्षण भी आयोजित किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि हाल ही में रीवा नगरपालिका निगम में 158 करोड़ 67 लाख रूपये की लागत से वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित किया गया है। इस प्लांट से प्रतिदिन 340 टन कचरे का ट्रीटमेंट किया जा रहा है। साथ एक दिन में 6 मेगावाट बिजली भी उत्पन्न की जा रही है। सात हजार से अधिक कचरा संग्रहण वाहन प्रतिदिन घर-घर जाकर कचरा संग्रहित कर रहे हैं। प्रदेश के सभी गांव ओडीएफ हैं और अब तक 78 लाख 31 हजार व्यक्तिगत शौचालय और 16 हजार 900 से अधिक सामुदायिक स्वच्छता परिसरों का निर्माण किया जा चुका है। प्रदेश के 44 हजार से अधिक गांवों को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, 48 हजार से अधिक ग्रामों को लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट और 41 हजार से अधिक ग्रामों को आडीएफ प्लस मॉडल बनाया गया है। स्वच्छता अभियान में हो रहे हैं अभिनव नवाचार प्रदेश में 17 सितम्बर से प्रारंभ हुए स्वच्छता ही सेवा अभियान में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता की अलख जगाई जा रही है। हर स्तर पर नागरिकों को स्वच्छता संबंधी शपथ दिलाने के साथ प्रेरित भी किया जा रहा है। स्वच्छता-मित्रों को सम्मानित कर उनके हौंसले को बढ़ाना और उनके साथ सफाई कार्य करने के लिये मंत्रीगण और जन-प्रतिनिधि भी अपने-अपने क्षेत्रों में सफाई कार्य में जुटे हुए हैं। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा नगर निगम क्षेत्र में सैनिक कैंटीन से नीम चौराहा तक बोडाबाग रोड पर श्रमदान कर स्वच्छता का संदेश दिया और सफाई-मित्रों को सम्मानित किया। रीवा के शासकीय एवं निजी शालाओं में स्वच्छता व्यवहार पर केन्द्रित कार्यक्रमों का आयोजन कर नागरिकों में स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता लाई गई। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने ग्वालियर नगर के लक्ष्मण तलैया क्षेत्र और मोनी बाबा आश्रम में झाडू लगाकर साफ-सफाई की और सफाई मित्रों को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया। केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर में बीएसएनएल कार्यालय परिसर में अधिकारी-कर्मचारी और नागरिकों को स्वच्छता की शपथ दिलवाई। ग्वालियर सांसद श्री भारत सिंह कुशवाह ने जन-प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ जिला चिकित्सालय परिसर में साफ-सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया। ग्वालियर कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान ने अधिकारी कर्मचारियों के साथ कलेक्ट्रेट एवं अन्य कार्यालयों में झाडू लगाकर साफ-सफाई की। सागर में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने स्वच्छता पखवाड़े अंतर्गत सभी को स्वच्छता के लिये प्रेरित किया और जीरो वेस्ट थीम पर अभियान में सहयोग देने की अपील की। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को वर्ष में 100 घंटे स्वच्छता के कार्य करने की शपथ भी दिलवाई। जबलपुर में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने सरपंचों के साथ स्वच्छता संवाद कर ग्राम पंचायतों को स्वच्छ बनाने में सक्रिय रूप से कार्य करने की शपथ दिलाई। उन्होंने स्वच्छता कर्मियों का सम्मान कर उन्हें सेफ्टी किट प्रदान की। जबलपुर शहर में मोहल्ला सभाओं का आयोजन कर स्वच्छता का संदेश दिया गया। इसी प्रकार प्रदेश के सभी जिलों में जन-भागीदारी के साथ स्वच्छता पखवाड़ा निरंतर जारी है। स्थानीय नागरिकों को अभियान से जोड़ने के लिये जन-प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी अपने स्तर पर अनेक नवाचार भी कर रहे हैं, जिसके सफल परिणाम मानव जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा। साथ ही स्वच्छता के प्रति जागी अलख से प्रदेश के नगरीय और ग्रामीण क्षेत्र आगामी स्वच्छता सर्वेक्षण-24 में बेहतर उपलब्धियां हासिल करेंगे।

मध्यप्रदेश, सौर ऊर्जा प्रदेश बनने की ओर अग्रसर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

Madhya Pradesh is moving towards becoming a solar energy state: Chief Minister Dr. Yadav

रीवा सौर परियोजना को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने केस स्टडी के रूप में किया शामिल Madhya Pradesh is moving towards becoming a solar energy state: Chief Minister Dr. Yadav भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में जहाँ एक ओर विश्व की सबसे बड़ी रीवा सौर परियोजना स्थापित होकर शुरू हो चुकी है। इस परियोजना को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने केस स्टडी के रूप में शामिल किया है। वहीं दूसरी ओर ओंकारेश्वर में प्रदेश की जीवनदायिनी नर्मदा नदी पर दुनिया की सबसे बड़ी 600 मेगावाट क्षमता की फ्लोटिंग सोलर परियोजना भी विकसित की जा रही है। इसके अलावा प्रदेश के विभिन्न अंचलों में भी सौर ऊर्जा की कई छोटी-बड़ी परियोजनाएँ निर्माणाधीन हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हाल ही में गुजरात के गांधी नगर में नवकरणीय ऊर्जा को लेकर हुई राष्ट्रीय समिट में अनेक उद्योगपतियों ने मध्यप्रदेश में सोलर प्लांट लगाने की इच्छा जाहिर की है। राजधानी भोपाल में सरकारी भवनों और नागरिकों को अपने घर की छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिये अभियान चलाया जायेगा। इन सभी प्रयासों से मध्यप्रदेश, सौर ऊर्जा प्रदेश बनने की अग्रसर हो गया है। आदर्श उदाहरण के रूप में पढ़ाया जा रहा है हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में दुनिया की सबसे प्रसिद्ध हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में मध्यप्रदेश स्थित विश्व के सबसे बड़े रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पॉवर पार्क और प्लांट के उत्कृष्ट प्रबंधन, संचालन और सौर ऊर्जा उत्पादन को आदर्श उदाहरण के रूप में पढ़ाया जा रहा है। रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पॉवर प्लांट न सिर्फ़ विश्व का सबसे बड़ा प्लांट है, बल्कि विश्व में सबसे सस्ती दर पर व्यावसायिक उर्जा उत्पादन करने वाला प्लांट भी है। यहां से 3 रूपये 30 पैसे प्रति यूनिट बिजली अगले 25 सालों के लिए उपलब्ध हो सकेगी। मध्यप्रदेश में भरपूर सौर ऊर्जा है। यहां 300 से ज्यादा दिनों तक सूर्य का प्रकाश रहता है। विश्व बैंक के क्लीन टेक्नालॉजी फंड के माध्यम से वित्त पोषित देश की पहली सौर परियोजना है। आज विश्व के 10 सर्वाधिक बड़ी सोलर परियोजनाओं में से आधी भारत में है। रीवा सोलर पॉवर प्लांट इनमें से एक है। कैसे हुई शुरूआत भारत सरकार ने वर्ष 2014 में सोलर पार्क योजना की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य सोलर पॉवर को बढ़ावा देना था। इस योजना में 500 मेगावाट क्षमता से ज्यादा की सोलर परियोजनाओं को सोलर पार्क में शामिल किया गया और उन्हें अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क कहा गया। केस स्टडी में बताया गया कि भारत में 4 लाख 67 हजार वर्ग मीटर बंजर भूमि आंकी गई है। इसका उपयोग सोलर प्लांट लगाने में किया जा सकता है। मध्यप्रदेश में 1579 हेक्टेयर जमीन का आंकलन किया गया, जिसमें 1255 हेक्टेयर बंजर जमीन सरकारी और 384 हेक्टेयर प्राइवेट जमीन शामिल है। इस प्रकार रीवा सोलर अल्ट्रा मेगा सोलर प्लांट बनने की शुरुआत हुई। रीवा सोलर पॉवर प्लांट की यात्रा दिलचस्प है। इसकी शुरुआत जून 2014 में बड़वार गांव में 275 हेक्टेयर जमीन आवंटन के साथ शुरू हुई। राज्य सरकार ने अप्रैल 2015 में रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर प्लांट की स्थापना का अनुमोदन किया। दो महीने बाद रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड की स्थापना हुई, जिसमें म.प्र. ऊर्जा विकास निगम और एसईसीआई के साथ 50 -50 प्रतिशत का जॉइंट वेंचर स्थापित हुआ। इसके बाद बड़वार, बरसेटा देश, बरसेटा पहाड़, इतर पहाड़, रामनगर पहाड़ गांवों में 981 हेक्टेयर जमीन का आवंटन हुआ। वर्ष 2018-19 तक और भी गांव में उपलब्ध बंजर जमीन को परियोजना के लिए आवंटित किया गया। अप्रैल 2019 में दिल्ली मेट्रो रेलवे कॉर्पोरेशन को पॉवर सप्लाई देना शुरू हुआ। जनवरी 2020 से पूरी तरह से व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो गया।

भोपाल सांसद ने 110 पटवारी और राजस्व निरीक्षकों को हटाने की मांग, कलेक्टर को सौंपी सूची

Bhopal MP demands removal of 110 Patwari and Revenue Inspectors, submits list to Collector

Bhopal MP demands removal of 110 Patwari and Revenue Inspectors, submits list to Collector भोपाल ! भाजपा सांसद आलोक शर्मा ने भोपाल जिले में 110 पटवारी और राजस्व निरीक्षकों को उनके पद से हटाने की सिफारिश की है। उन्होंने यह आरोप लगाया कि इन अधिकारियों की लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनाती के कारण कार्यालय की बदनामी हो रही है। इस मामले में उन्होंने भोपाल के कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को एक विस्तृत सूची सौंपी है। सांसद ने की सख्त कार्रवाई की मांग सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि इन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि कार्यालय की छवि सुधर सके और जनता को बेहतर सेवाएं मिल सकें। इस मांग को लेकर प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है और अब देखना होगा कि कलेक्टर इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। क्या है मामला? सांसद आलोक शर्मा ने आरोप लगाया है कि कई पटवारी और राजस्व निरीक्षक (RI) 8 से 15 साल से एक ही हल्के में तैनात हैं, जबकि नियमानुसार तीन साल में उनका हल्का बदल दिया जाना चाहिए। सांसद ने कहा कि इन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगते रहे हैं, लेकिन इन्हें वल्लभ भवन के वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण मिला हुआ है, जिससे इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। दी गई है हटाने की मांग की गई पटवारियों और राजस्व निरीक्षकों की सूची

भोपाल कलेक्टर ने संबल योजना के नाम पर मांगी रिश्वत , जानें मामला

Exemption in the name of Sambal Yojana in Bhopal, know the matter

Collector in the name of Sambal Yojana in Bhopal, know the matter भोपाल ! वाट्सएप पर एक कॉल आता है। स्क्रीन पर लिखा है- कौशलेंद्र विक्रम सिंह। कॉल उठाते ही सामने से आवाज आई, हैलो, मैं कलेक्टर बोल रहा हूं, संबल योजना का फायदा चाहिए तो मेरे इस नंबर पर रुपए भेज दो। यह सुनकर कुछ लोग पैसे भेज भी देते हैं। एमपी की राजधानी भोपाल में साइबर ठगों ने कलेक्टर के नाम से लोगों से ठगी की। दरअसल, लोगों को भरोसा भी इसलिए हो गया क्योंकि यह कॉल उन ग्रामीणों को आए जो योजना के लाभार्थी हैं। भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के नाम पर कुछ इसी तरह से साइबर ठग जालसाजी कर रहे हैं। कुछ ठगों ने कलेक्टर की फोटो की फर्जी आईडी बनाई है, ताकि लोगों को लगे कि वह सही में कलेक्टर ही हैं। कलेक्टर की फोटो आईडी लगा कर रहे ठगीसाइबर ठग संबल योजना की राशि डालने के नाम पर 3 हजार से 10 हजार रुपए तक मांग रहे हैं। भोपाल के फंदा जनपद क्षेत्र में ही 2-3 लोगों ने 10 हजार रुपए अकाउंट में ट्रांसफर भी कर दिए हैं। पैसे भेजने के बाद उन्हें अपनी गलती का पता चला। यह जानकारी कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के पास भी पहुंची, जिसके बाद क्राइम ब्रांच के अफसरों को सूचित किया गया है। क्राइम ब्रांच कर रही मामले की जांचक्राइम ब्रांच इस मामले की जांच में जुटी है। बताया जा रहा है कि पिछले हफ्ते से कलेक्टर की फर्जी आईडी से लोगों को कॉल के साथ मैसेज भेजे जा रहे हैं। हितग्राहियों को कॉल के अलावा मैसेज भी किए जा रहे हैं। बैरसिया जनपद क्षेत्र में भी फर्जी कॉल पहुंचे हैं। ऐसे हुआ खुलासाठगी के इस मामले का खुलासा जब हुआ तो जनपद स्तर पर ग्राम पंचायत सचिव और रोजगार सहायकों को मैसेज किए गए हैं। जिसमें लिखा है- ‘सभी सचिव और जीआरएस मेरे भेजे गए इन नंबरों को देख लें। यह फर्जी आईडी से संबल योजना की राशि डालने के लिए फोन करता है। कृपया कोई भी इस पर ध्यान न दें। तत्काल रिपोर्ट करने को कहें या पास के थाने में रिपोर्ट करें। किसी भी परिस्थिति में कोई राशि न डालें। यह कलेक्टर के नाम से फर्जी फोन करता है।

भोपाल: हाईकोर्ट ने पटवारी पवन कुशवाहा की बर्खास्तगी पर लगाई रोक, ग्रामीणों में थी गहरी नाराजगी

Bhopal: High Court stayed the dismissal of Patwari Pawan Kushwaha, there was deep resentment among the villagers

Bhopal: High Court stayed the dismissal of Patwari Pawan Kushwaha, there was deep resentment among the villagers भोपाल । मध्यप्रदेश (20 सितंबर 2024) — मध्यप्रदेश के आगर-मालवा जिले में प्राकृतिक आपदा राहत राशि में कथित वित्तीय अनियमितताओं के चलते बर्खास्त किए गए पटवारी पवन कुशवाहा को बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनकी सेवा समाप्ति के आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद कुशवाहा के समर्थकों और उनके गांव के किसानों में खुशी की लहर है। क्या है मामला? पटवारी पवन कुशवाहा पर आरोप था कि उन्होंने वर्ष 2019, 2020 और 2021 में प्राकृतिक आपदा राहत राशि के वितरण में अनियमितताएं की थीं। कलेक्टर आगर ने इस मामले में जांच के बाद पवन कुशवाहा सहित तीन पटवारियों को दोषी ठहराते हुए सेवा से बर्खास्त कर दिया था।हालांकि, कुशवाहा ने अपनी याचिका में दावा किया कि उन्होंने सभी काम नियमानुसार और RBC 6.4 के तहत किए थे। कुशवाहा के वकील ने कोर्ट में यह तर्क दिया कि राहत राशि का वितरण किसानों की सहमति से किया गया था और इसमें कोई अनियमितता नहीं थी। ग्रामीणों का विरोध और धरना प्रदर्शन पवन कुशवाहा की बर्खास्तगी के बाद उनके गांव के किसानों में गहरी नाराजगी देखी गई थी। जब उन्हें पहले निलंबित किया गया था, तो किसानों ने नालखेड़ा तहसील कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन किया था। किसानों ने तहसीलदार को पवन कुशवाहा के समर्थन में ज्ञापन सौंपा था, जिसमें उनके कार्यों की सराहना की गई थी। किसानों का कहना था कि पवन कुशवाहा ने हमेशा नियमों का पालन किया और उनके हित में काम किया। हाईकोर्ट का हस्तक्षेप पवन कुशवाहा की बर्खास्तगी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है और आगामी सुनवाई तक सेवा समाप्ति के आदेश पर रोक लगा दी है। इस फैसले से पवन कुशवाहा को राहत मिली है, साथ ही उनके समर्थक और गांव के किसान भी इसे न्याय की दिशा में एक सही कदम मान रहे हैं।आगे की सुनवाई का इंतजार अब इस मामले की अगली सुनवाई का इंतजार किया जा रहा है, जिसमें यह तय होगा कि पवन कुशवाहा को पूरी तरह से बहाल किया जाएगा या नहीं। उनके साथ बर्खास्त किए गए बाकी दो पटवारियों के मामले भी हाईकोर्ट में लंबित हैं, जिनकी सुनवाई जल्द होने की उम्मीद है।इस मामले ने आगर-मालवा जिले में सरकारी तंत्र और स्थानीय प्रशासन के कामकाज पर भी सवाल उठाए हैं, खासकर तब, जब पवन कुशवाहा के काम से गांव के किसान पूरी तरह से संतुष्ट हैं।

जाति प्रमाण पत्र बनाने की व्यवस्था का हो सरलीकरण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

The system of making caste certificate should be simplified: Chief Minister Dr. Yadav

पिछड़ा वर्ग पोस्ट मेट्रिक बालिका छात्रावासों में आंरभ होगा मैस का संचालन और बनेंगी बाउण्ड्रीवॉलछात्रवृत्ति प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों की शाला में नियमित उपस्थिति का हो परीक्षणमुख्यमंत्री ने की पिछड़ा वर्ग-अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्धघुमन्तु कल्याण विभाग की समीक्षा The system of making caste certificate should be simplified: Chief Minister Dr. Yadav भोपाल ! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में जाति प्रमाण पत्र बनाने की व्यवस्था का सरलीकरण करने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा है कि जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की व्यवस्था को भी जन-सुलभ बनाया जाए। इसके लिए संबंधित विभागों में परस्पर समन्वय सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछड़ा वर्ग पोस्ट मेट्रिक बालिका छात्रावासों में मैस का संचालन आरंभ करने तथा बालिका छात्रावासों की सुरक्षा के लिए बाउण्ड्रीवॉल बनाने के निर्देश दिए। इन छात्रावासों में सोलर पैनल भी लगाए जाएंगे। उन्होंने वर्ष 2024-25 में पिछड़ा वर्ग पोस्ट मेट्रिक छात्रवृत्ति भुगतान के लिए वर्तमान बजट प्रावधान के अतिरिक्त 560 करोड़ रूपए बजट के साथ ही छात्रवृत्ति के लिए पृथक पोर्टल को भी स्वीकृति प्रदान की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में पिछड़ा वर्ग-अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध-घुमन्तु कल्याण विभाग की समीक्षा में यह निर्देश दिए। बैठक में विभाग की मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर, मुख्य सचिव श्रीमती वीरा राणा, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। युवाओं को बाजार की मांग के अनुरूप उद्यमिता और व्यवसायों का दिया जाए प्रशिक्षण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जा रही है, उनकी शाला में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रबंध किए जाएं। उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति के अंतर्गत लाभान्वित हुए विद्यार्थियों के प्रदेश को योगदान का भी आंकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्ग के बेरोजगार युवाओं को विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए संचालित योजना के अंतर्गत संबंधित देश की भाषा में दक्षता के लिए प्रदेश के चयनित संभागों में आवश्यक व्यवस्था कर सघन प्रयास किए जाएं। इसके साथ ही सरदार पटेल रोजगार प्रशिक्षण योजना और पिछड़ा वर्ग के परम्परागत व्यवसायों पर आधारित उत्कृष्टता केन्द्रों की स्थापना में बाजार की मांग के अनुरूप व्यवसायों और उत्पादों पर फोकस किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग तथा अल्प-संख्यक उद्यम एवं स्व-रोजगार योजना के अंतर्गत गतिविधियों को विस्तार देने की आवश्यकता बताई। कंजर, सांसी, पारधी समुदायों के संबंध में पुलिस अधिकारियों की काउंसलिंग की जाए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध-घुमन्तु कल्याण विभाग की समीक्षा के दौरान कहा कि कंजर, सांसी, पारधी तथा अन्य समुदायों के युवाओं और अगली पीढ़ी को शिक्षा, उद्यमिता और विकास से जोड़ने के लिए शासकीय प्रयासों के साथ-साथ सामाजिक संस्थाओं को भी पहल करने के लिए प्रेरित किया जाए। पुलिस, होमगार्ड तथा सुरक्षा संबंधी सेवाओं में चयन के लिए इन समुदायों के युवाओं को आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कंजर, सांसी, पारधी समुदायों के लिए औपनिवेशिक प्रभाव के परिणामस्वरूप उपयोग में लाए जाने वाले संबोधनों को त्यागने के लिए पुलिस अधिकारियों व मीडिया की काउंसलिंग की जाएं। विमुक्त, घुमन्तु अर्द्ध घुमन्तु जातियों को सांस्कृतिक और समुदाय की गतिविधियों के लिए सामुदायिक भवनों के निर्माण की स्वीकृति भी दी गई। बैठक में बताया गया कि विमुक्त घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु जातियों के सर्वे का कार्य भी शुरू किया गया है।

भोपाल में भारत बंद का मिला-जुला असर, कुछ दुकानें खुलीं, पुलिस भी हाई अलर्ट पर

Mixed effect of Bharat Bandh in Bhopal, some shops opened, police also on high alert

Mixed effect of Bharat Bandh in Bhopal, some shops opened, police also on high alert भोपाल ! सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी/एसटी के आरक्षण में वर्गीकरण का आदेश दिया गया है. उसके विरोध में आज 21 अगस्त को भारत के सभी अनुसूचित जाति एवं जनजाति संगठनों द्वारा भारत बंद का अव्हान किया गया था. हालांकि एमपी के ज्यादातर शहरों में भारत बंद का मिला जुला असर ही देखा जा रहा है. ज्यादातर दुकानें खुली हैं तो कुछ दुकानें ही बंद हैं. इधर भारत बंद के आव्हान के बाद पुलिस भी अलर्ट है. पुलिस सोशल मीडिया पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं तो वहीं आमजनों से अफवाहों से बचने की अपील भी की गई. कांग्रेस विधायक बंद के समर्थन मेंग्वालियर में कलेक्टर ने मंगलवार की रात से ही धारा 144 लागू कर दी थी. वहीं ग्वालियर में कई स्कूलों ने आज छुट्टी घोषित कर दी थी. बता दें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के संगठनों का जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन भी समर्थन कर रहा है. कांग्रेस विधायक और जयस के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ. हीरालाल अलावा और भांडेर से कांग्रेस विधायक फूलसिंह बरैया इस बंद के समर्थन में हैं. हालांकि कांग्रेस की स्थिति स्पष्ट नहीं दिख रही है. पुलिस की आमजनों से अपील

आदिवासी युवक की पिटाई के मामले पर कांग्रेस ने मोहन सरकार सरकार को घेरा

Congress cornered Mohan Sarkar government on the issue of beating of tribal youth

Congress cornered Mohan Sarkar government on the issue of beating of tribal youth भोपाल ! ट्रेनी अग्निवीर लूट का मास्टरमाइंड निकला और 50 लाख की लूट की वारदात को अंजाम दिया. वहीं, इंदौर में आदिवासी युवक के साथ हुई मारपीट की घटना सामने आई. इसको लेकर अब कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार पर निशाना साधा है. एमपी कांग्रेस चीफ जीतू पटवारी ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए बीजेपी सरकार पर सवाल खड़े किए हैं. दूसरी तरफ, बीजेपी दोनों ही मामलों में कड़ी कार्रवाई की बात कह रही है. इंदौर में आदिवासी युवक के साथ मारपीटइंदौर के भंवर कुवा थाना क्षेत्र में आदिवासी युवक के साथ बाइक को कट करने की बात को लेकर मारपीट की घटना हुई. आरोपी रितेश राजपूत के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है. वह इलाके का लिस्टेड गुंडा है. उसके एक साथी के खिलाफ भी कार्रवाई हुई है. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जारी करते हुए प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार मध्य प्रदेश में आदिवासियों पर अत्याचार की घटनाएं नहीं रोक पा रही है. उन्होंने एक बार फिर कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए. इंदौर में आदिवासी युवक के साथ मारपीट करने और जूते के फीते बँधवाने के मामले पर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार को घेरा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि इंदौर में पुलिस कमिश्नरी लागू के होने के बाद आपराधिक मामले लगातार बढ़ रहे हैं। वहीं उन्होंने ज़िले के प्रभारी मंत्री होने के नाते मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर भी सवाल उठाए हैं। उमंग सिंघार ने लगाए आरोपये पूरी घटना सीसीटीवी में क़ैद हो गई सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल हो गया। अब इस मामले को लेकर कांग्रेस ने आदिवासी उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक्स पर लिखा है कि ‘इंदौर के भंवरकुआं इलाके में सड़क पर ठीक से न चलने की बात पर एक आदिवासी युवक के साथ अकारण मारपीट की गई। बदमाश ने आदिवासी युवक की पिटाई करने के साथ उससे अपने जूते के लेस भी बंधवाए। आश्चर्य है कि इस बदमाश पर दर्जनभर मुकदमें दर्ज हैं, फिर भी वो खुला घूम रहा था। इंदौर में पुलिस कमिश्नरी लागू होने के बाद शहर में आपराधिक मामले लगातार बढ़ रहे हैं। एमपी के गृहमंत्री का प्रभार सीएम के पास है और अब तो वे इंदौर के प्रभारी मंत्री भी हैं। इसके बाद भी शहर में कानून व्यवस्था की हालत कैसी है, इसे समझा जा सकता है!

एमएफपी पार्क की दुर्दशा पर एएमडी अग्रवाल भड़के, बोले, पार्क वालों को…. संघ से बाहर कर दो

AMD Agrawal got angry on the plight of MFP park

AMD Agrawal got angry on the plight of MFP park, said, expel the park people from the union उदित नारायण भोपाल। लघुवनोपज संघ के प्रसंस्करण केंद्र (एमएफपी पार्क) की दुर्दशा, घटती उत्पादन और व्याप्त गड़बड़झाला के चलते अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मनोज अग्रवाल अत्यंत दुखी और व्यथित हैं। यही वजह रही कि शुक्रवार को एक बैठक में एमएफपी पार्क के सीईओ, उत्पादन प्रभारी प्रबंधक और अन्य अधिकारी- कर्मचारी  को देखकर भड़क गए। उन्होंने गुस्से में बोल गए कि एमएसपी पार्क वालों को…. संघ से बाहर कर दो। गनीमत यह रही कि दूसरी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। अग्रवाल के व्यवहार को लेकर सोमवार को पार्क के अधिकारी-कर्मचारी ज्ञापन रोकने की तैयारी कर रहे हैं।  अंतर्राष्ट्रीय वन मेले की तैयारी को लेकर लघु वनोपज सहकारी संघ के एएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने शुक्रवार को एक बैठक बुलाई। इस बैठक में पीजी फूलझेले, कार्यकारी संचालक, अर्चना पटेल, मुख्य कार्यपालन अधिकारी,  केके द्विवेदी सचिव, संजय मौर्य प्रबंधक वित्त, व्ही.एस. पिल्लई प्रबंधक,  सुनीता अहिवार उप प्रबंधक, प्रियंका बाथम उप प्रबंधक समेत 17 अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित है। बैठक में अग्रवाल ने वन मेले की तैयारी संबंधित एजेंडा को दरकिनार करते हुए एसपी पार्क की दुर्दशा पर चर्चा करते हुए कहा कि अधिकारियों ने 20 साल की कड़ी मेहनत करके एमएफपी पार्क को यहां लाकर खड़ा किया कि उसकी पूरे देश में साख है। आप सभी ने उसे बर्बाद कर दिया कोई काम- धाम नहीं करते हो। बस इधर-उधर घूमते दिखाई देते हो। आज एक करोड़ का वर्क आर्डर मिला है लेकिन अभी तक उत्पादन शुरू नहीं हो पाया। इसके बाद एएमडी अग्रवाल ने एमएफपी के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए जो कहा उसको अक्षरश: लिखा नहीं जा सकता। यहां यह उल्लेख करना उचित होगा कि मनोज अग्रवाल की गुस्से में भाषा शैली जरूर अनुचित थी किन्तु बात शत-प्रतिशत सही है। कभी एमएसपी पार्क देश के 17 राज्यों में अपने आयुर्वेदिक उत्पाद विक्रय करता था। लेकिन गत 2 वर्षों में अनुभवहीन अफसर के हाथों में एमएफपी का संचालन, प्रशासनिक उदासीनता, उत्पादन मैनेजर की स्वेच्छाचारिता और गड़बड़ियों के चलते केंद्र को बहुत नुक़सान हुआ वर्ष 2023-24 में केवल 18 करोड़ का ही ऑर्डर मिला और अभी 2024-25 के वित्तीय वर्ष में केवल 1.8 करोड़ का आर्डर मिला है।  अग्रवाल को घेरने की तैयारी में पार्क के अधिकारी आईएफएस अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल, लघु वनोपज सहकारी संघ द्वारा बरखेड़ा पठानी की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमति अर्चना पटेल और श्रीमति अर्चना पटेल, रेंजर सुनीता अहिरवार, रेंजर प्रियंका बाथम, डॉ अनिल कुमार को भरी मीटिंग में सबके सामने दुर्व्यहार किए जाने के विरोध में सोमवार को ज्ञापन सौंपने जा रहे हैं। इस ज्ञापन के मजमून को जातिसूचक रंग देने की कवायत चल रही है। इसके पहले भी वो ऐसा कारनामा कर चुके हैं, अर्चना पटेल को इतना प्रताड़ित किया गया था की वो अस्वस्थ हो गई थी और उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ा। ओबीसी संगठन मनोज अग्रवाल के कृत्य की घोर निन्दा करता है और मांग करता है कि इन्हें तत्काल यहां से हटाया जाए । अग्रवाल लघु वनोपज संघ में प्रतिनियुक्ति पर है। अनुभवहीनों के भरोसे विंध्या हर्बल्स की कमान लघुवनोपज संघ की इकाई लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र एमएसपी पार्क बरखेड़ा पठानी विगत 20 वर्षों से विंध्या हर्बल नाम से आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्माण करता आ रहा है। विगत वर्षों में एमएसपी पार्क निरंतर प्रगतिशील रहा। एक समय था, जब एमएसपी पार्क देश के 17 राज्यों में अपने आयुर्वेदिक उत्पाद विक्रय करता था। लेकिन गत 2 वर्षों में अनुभवहीन अफसर के हाथों में एमएसपी का संचालन, प्रशासनिक उदासीनता, उत्पादन मैनेजर की स्वेच्छाचारिता और गड़बड़ियों के चलते केंद्र को बहुत नुक़सान हुआ वर्ष 2023-24 में केवल 18 करोड़ का ही ऑर्डर मिला और अभी 2024-25 के वित्तीय वर्ष में केवल 1.8 करोड़ का आर्डर मिला है जिसकी सप्लाई करना संस्थान को असंभव लग रहा है। अभी तक उत्पादन ही नहीं शुरू हो पाया है। इसकी वजह उत्पादन प्रभारी एसडीओ सुनीता अहीरवार का अधिकारियों के साथ समन्वय का न होना है। बताया जाता है कि सुनीता अहीरवार पार्क की सीईओ अर्चना पटेल को रिपोर्ट नहीं करती। वे सीधे एमडी बिभाष ठाकुर को रिपोर्टिंग करती है।  पिछले सीईओ प्रफुल्ल फ़ुलझेले से सुनीता की भ्रष्ट नीतिओं की जांच शुरू करने के वाद-विवाद के बाद हटा दिया गया था और अहिरवार के खिलाफ शुरू होने वाली जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

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