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मध्य प्रदेश कांग्रेस का प्रदर्शन: रोशनपुरा चौराहे पर पुलिस की बैरिकेडिंग, आ रहे कांग्रेस नेताओं को रोका

Demonstration of Madhya Pradesh Congress: Police barricading at Roshanpura intersection, stopped the coming Congress leaders. राजधानी भोपाल में कांग्रेस का प्रदर्शन जारी, महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा भी पहुंची MP Congress Protest: मध्य प्रदेश कांग्रेस का विधानसभा का घेराव का प्रदर्शन जारी है। सोमवार को एमपी कांग्रेस के इस प्रदर्शन में प्रदेशभर के हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए हैं। अभी भोपाल के जवाहर चौक इलाके में सभा चल रही है। इसके बाद कांग्रेस के नेता हजारों कार्यकर्ताओं के साथ विधानसभा की ओर कूच करेंगे। उनको रोकने के लिए पुलिस ने रोशनपुरा चौराहे पर बैरिकेडिंग कर रखी है। यहां वाटर कैनन भी मौजूद है। वहीं दूसरे जिलों से आ रहे कांग्रेस नेताओं को रोकने के लिए पुलिस ने भोपाल से लगी सड़कों पर भी बैरिकेड्स लगा रखे हैं। राजगढ़ जिले से आए कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका तो जिला पंचायत अध्यक्ष चन्दर सिंह राजगढ़ की अधिकारियों से बहस हो गई। प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, विधायक और कार्यकर्ता शामिल हुए हैं। मनोज परमार के बच्चों की करेंगे मदद: सज्जन कांग्रेस की सभा में सज्जन सिंह वर्मा ने कहा- मणिपुर जल रहा है। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में सुरक्षित हैं लेकिन वहां हिंदू मारे जा रहे हैं। वर्मा ने कहा कि मनोज परमार और उनकी पत्नी नेहा ने बीजेपी और ईडी के दबाव में आत्महत्या कर ली। आज बीजेपी के लोग उन बच्चों को लेकर तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। मैं कल अपने पार्टी के तमाम साथियों से मदद लेकर एक बड़ी गुल्लक उन बच्चों को देने जाऊंगा। ताकि उन्हें पढ़ाई के लिए और भविष्य में तकलीफ न हो। रावत को लेकर जयवर्धन का तंज पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि बीजेपी सरकार ने लाड़ली बहन योजना की राशि 1250 रुपए में एक रुपया भी नहीं बढ़ाया। चुनाव जीतने के बाद बीजेपी ने लाड़ला नेता योजना शुरू की। उस लाड़ला योजना के सबसे पहले लाभार्थी बने रामनिवास रावत। रामनिवास बीजेपी में गए लेकिन विजयपुर की जनता ने, माताओं-बहनों ने गरीब आदिवासी मुकेश मल्होत्रा को विधानसभा पहुंचा दिया। बीजेपी के लाड़ले नेता रामनिवास जी को घर बैठा दिया। बीजेपी सरकार चीन का लहसुन खिला रही कांग्रेस की सभा में पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह ने कहा- आज बांग्लादेश के जरिये चीन का लहसुन हमारे यहां आ रहा है। बीजेपी सरकार के राज में हमें चीन का लहसुन खिलाया जा रहा है। किसानों को फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा। मैं जब ऊर्जा मंत्री था, कांग्रेस की सरकार 100 रुपए में 100 यूनिट बिजली देती थी। आज 1500 रुपए में 100 यूनिट बिजली मिल रही है। किसानों पर फर्जी केस लगाए जा रहे हैं। आज एकजुट होकर इस भाजपा सरकार के खिलाफ लड़ना है। अलका लांबा बोलीं- सरकार को घुटने पर लाएंगे महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा भी प्रदर्शन स्थल पहुंची हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को बने हुए एक साल के ऊपर हो गया है। आधी आबादी यानी महिलाओं से सुरक्षा का वायदा था। एक साल में कितनी बहनें सुरक्षित हुईं? रीवा में इनको जिंदा गाड़ने की हिम्मत दबंगों ने दिखाई है। उज्जैन में नाबालिग बेटी को लहूलुहान हमने देखा है। बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। कौन सी बहन को साढ़े 400 रुपए में गैस सिलेंडर मिल रहा है, जिसकी गारंटी मोदी जी ने दी थी। महंगाई, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा इन मुद्दों पर हम सरकार को घुटनों पर लाएंगे। अपना समय भी आएगा : कमलनाथ कमलनाथ ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि बहुत बड़ा राजनीतिक परिवर्तन हुआ है। नौजवानों, समझ लो। आज आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि इस राजनीतिक परिवर्तन को आप पहचानिए। जब तक आप घर-घर नहीं जाएंगे, हम बीजेपी से कभी मुकाबला नहीं कर पाएंगे। हमारा कर्तव्य है कि इस राजनीतिक परिवर्तन को पहचानें और उस हिसाब से काम करें। मुझे विश्वास है कि आप निराश नहीं होंगे। कमर ठाने रखिएगा। अपना समय भी आएगा। पूर्व सीएम कमलनाथ ने कहा- प्रदेश की तस्वीर आप सभी के सामने है। आज बड़े दुख के साथ मुझे कहना पड़ता है कि मध्य प्रदेश की पहचान घोटाला प्रदेश की है। हर क्षेत्र में घोटाला। नौजवानों के रोजगार में घोटाला। किसानों के बीज-खाद में घोटाला। जहां देखो घोटाला-घोटाला। आज हमारे कृषि क्षेत्र में कितनी समस्या है। एक बात याद रखिएगा कि मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था 70 प्रतिशत कृषि क्षेत्र पर आधारित है। अगर कृषि क्षेत्र डूबता है तो पूरा प्रदेश डूबता है। रात में हटाए गए होर्डिंग शहर में कांग्रेस के प्रदर्शन के जगह जगह होर्डिंग भी लगाए गए हैं। 15 दिसंबर, रविवार रात को नगर निगम के अमले ने कुछ जगहों से होर्डिंग भी हटाए हैं। इसे लेकर विवाद की छुटपुट घटनाएं भी हुई। कांग्रेस ने इसे लेकर कड़ा ऐतराज जताया है। कांग्रेस की हैं ये मांगें?

मध्य प्रदेश विधानसभा सत्र 2024 रहेगा हंगामेदार , सरकार को घेरने कांग्रेस ने की तगड़ी तैयारी

Madhya Pradesh Assembly session will be noisy, Congress made strong preparations to corner the government भोपाल ! मध्यप्रदेश विधानसभा का सोमवार से शुरू होने जा रहे शीतकालीन सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं. 5 दिन चलने वाले इस शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन सरकार सदन में वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए पहला अनुपूरक बजट पेश करेगी. यह अनुपूरक बजट करीबन 20 हजार करोड़ का हो सकता है. उधर सत्र के पहले दिन कांग्रेस ने विधानसभा घेराव का ऐलान किया है. सदन के अंदर सरकार को घेरने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधायक दल की बैठक बुलाई है. कांग्रेस ने बनाई सत्ता पक्ष को घेरने की रणनीति कांग्रेस ने सत्ता पक्ष को घेरने के लिए भरपूर तैयारियां की हैं. कांग्रेस विधायकों ने किसान, बिगड़ती कानून व्यवस्था, जल जीवन मिशन में गड़बड़ी, अधिकारियों के तबादलों जैसे कई मुद्दों को लेकर कई सवाल उठाए हैं. कांग्रेस आष्टा आत्महत्या मामले और विधायक निर्मला सप्रे के इस्तीफे को लेकर भी सरकार को घेरेगी. शीतकालीन सत्र के लिए विधायकों ने कुल 1766 सवाल लगाए हैं. इसमें 1070 सवाल ऑनलाइन और 696 ऑफलाइन सवाल पूछे गए हैं. इनमें तारांकित प्रश्न 888 और अतारांकित सवाल 878 हैं. सत्र में करीबन एक दर्जन विधेयक पेश होंगे विधानसभा सत्र के दौरान सरकार करीबन एक दर्जन विधेयक पेश करेगी. विधानसभा सत्र के लिए जारी कार्ययोजना के अनुसार 16 दिसंबर के पहले दिन सत्र शुरू होने पर प्रश्नोत्तर काल होगा और इसके बाद अलग-अलग विभागों के आधा दर्जन विधेयक पेश किए जाएंगे. 17 दिसंबर को प्रश्नकाल के बाद प्रथम अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा. इस पर चर्चा 18 दिसंबर को होगी और इसी दिन विनियोग विधेयक 2024 पेश किया जाएगा. कांग्रेस ने रणनीति बनाने बुलाई बैठक उधर, कांग्रेस ने विधानसभा सत्र में सरकार को घेरने कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई है. इसमें विधानसभा सत्र की रणनीति के अलावा विधानसभा घेराव को लेकर भी चर्चा होगी. बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित सभी कांग्रेस विधायक मौजूद होंगे. निर्मला सप्रे के शामिल होने पर संशय विधानसभा में बीना विधायक निर्मला सप्रे के शामिल होने पर संशय है. कांग्रेस ने विधायक सप्रे को कांग्रेस खेमे में बैठाने से इंकार किया है. कांग्रेस ने मान लिया है कि निर्मला सप्रे अब पार्टी में नहीं हैं. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने निर्मला सप्रे की विधानसभा की सदस्यता निरस्त को लेकर जुलाई में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर को आवेदन दिया था, लेकिन उनकी सदस्यता समाप्त करने को लेकर स्पीकर ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है. कांग्रेस ने इसको लेकर हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की है.

मध्य प्रदेश की सड़कों पर फिर दिखेंगी जल्द सरकारी बसें फर्राटे भरते

Government buses will soon be seen again on the roads of Madhya Pradesh. मध्य प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था एकदम से चरमरा गई है। दो दशक पहले जहां सड़कों पर राज्य परिवहन निगम की बसें फर्राटे भरती दिखाई देती थी वहीं अब निजी बसों का बोलबाला है। तनाकुलित तथा स्लीपर कोच बसें तक प्रदेश की सड़कों पर दौड़ रही है। राज्य परिवहन की बसें प्रदेश के विभिन्न शहरों को जोड़ने के अलावा दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक यात्रियों को लाती ले जाती थी। भोपाल। राज्य परिवहन निगम की इन बसों में जहां किराया वाजिब था तो वहीं विशिष्ट जनों व पत्रकारों के लिए पास की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती थी। राज्य परिवहन निगम के संचालक मंडल में पहले नेताओं को रखा जाता था और अध्यक्ष का पद नौकरशाहों के जिम्में में होता था। एक बार का दिलचस्प वाकया है तब राज्य परिवहन निगम के अध्यक्ष एक नौकरशाह थे किसी पत्रकार ने अनौपचारिक चर्चा में उनसे पूछ लिया कि आपने बसों में यात्रा कब से नहीं की तो उन्होंने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया था की आखिरी बस यात्रा 15 साल पहले की थी, इस चर्चा के बाद अध्यक्ष महोदय ने समस्त डिपो प्रबंधकों को यह निर्देश दिया कि वह महीने में दो बार बसों में यात्रा करें और यात्रियों से फीडबैक ले कर व्यवस्था सुचारू करें। इसके साथ ही अध्यक्ष ने स्वयं भी हर महीने बस में सफर करना शुरू कर दिया बाद में राज्य परिवहन निगम के अध्यक्ष पद पर नेताओं को पदस्थ किया जाने लगा और यही से पूरे सिस्टम में दीमक लगना शुरू हो गया। जिन डिपो प्रबंधकों को राज्य परिवहन निगम अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष से अच्छी सेटिंग होती थी वहां मनमानियां करने लगे। दूसरे राज्यों में जाने वाली बसों में उन्ही ड्राइवर व कंडक्टरों को भेजा जाने लगा जो वापसी पर अच्छी खासी रकम उनको भेंट कर सके क्योंकि राज्य की सीमा पार करने के बाद टिकट चेकिंग का कोई डर नहीं, लोकल सवारियों लो और अपनी जेब गर्म करो वाला सिद्धांत चलता था। दूसरे राज्यों में स्थित राज्य परिवहन निगम के डिपो प्रबंधकों के रोस्टर पर अपने नाते रिश्तेदारों को रख लिया जो केवल वेतन लेते थे काम नहीं करते थे। राज्य परिवहन निगम के एक उपाध्यक्ष ने जब विधानसभा का चुनाव लड़ा तो डिपो प्रबंधकों ने उनके चुनावी खर्च में हिस्सेदारी की, किसी डिपो प्रबंधक ने पोस्टर का खर्च उठाया तो किसी ने विज्ञापनों के लिये भुगतान किया। इस तरह की व्यवस्था ने तथा भ्रष्टाचार ने राज्य परिवहन निगम को खोखला करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और आखिरकार 2005 में राज्य परिवहन निगम को बंद करना पड़ा हालांकि इसकी अधिसूचना जारी नहीं की गई थी। राज्य परिवहन निगम बंद होने का फायदा निजी बस मालिकों ने उठाना शुरू किया यह वह समय था जब दिग्विजय सिंह की सरकार का दूसरा कार्यकाल चल रहा था। दिग्गी सरकार घाटा बताती रही और भाजपा सरकार ने राज्य परिवहन निगम पर ही ताला लगा दिया और कुछ कर्मचारियों को वीआरएस देकर घर बैठा दिया तो कुछ कर्मचारियों को दूसरे विभागों में स्थानांतरित कर दिया गया। खैर यह तो राज्य परिवहन निगम का हाल हुआ उधर निजी बस ऑपरेटर की मनमानी बढ़ने लगी। बस में क्षमता से अधिक यात्री भरना निर्धारित किराए से ज्यादा वसूलना, सवाल करने पर यात्रियों से बदसलूकी करना, यहां तक की मारपीट की नौबत आना इत्यादि। शहरी इलाकों में तो फिर भी ठीक-ठाक मगर ग्रामीण क्षेत्रों में हालत ज्यादा खराब हो गए और लोग परेशान हो गए। राज्य परिवहन निगम बंद हो जाने के बाद भी जिन राज्यों से अंतर राज्य समझौता था उनकी बसे एमपी में आती रही। निजी ऑपरेटर इनका भी विरोध करने लगे। बहरहाल अब मोहन यादव की सरकार ने लोगों की परेशानियों को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को 19 साल बाद फिर से शुरू करने का संकेत दिया है तदनुसार लोक परिवहन सेवा का प्रारूप तैयार कर कैबिनेट में पेश किया जाएगा फिर उस पर अमल होना शुरू होगा वैसे अभी यह तय नहीं है कि लोक परिवहन का संचालन किस तरह होगा महाराष्ट्र का मॉडल अपनाया जाए या पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर अमल किया जाए यह फैसला भी हो जाएगा।

फार्मर आईडी बनाने जिलों में लगाए जाएंगे शिविर, दस रुपए देगी सरकार

Camps will be organized in the districts for making Farmer ID, the government will give ten rupees भोपाल। राज्यों में कैंप लगाकर किसान आईडी बनाने के लिए केंद्र सरकार राज्यों को इनसेंटिव देगी। इसमें प्रति कैंप 15,000 रुपये तक दिए जाएंगे। इसके अलावा हर आईडी बनाने पर केंद्र की ओर से राज्य सरकार को 10 रुपये दिए जाएंगे। दरअसल कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने राज्यों से किसान पहचान पत्र को तेजी से बनवाने के लिए कैंप लगाने को कहा है। किसान पहचान पत्र या किसान आईडी एक आधार से जुड़ी अनूठी डिजिटल पहचान है, जो राज्य के लैंड रिकॉर्ड से जुड़ी हुई है। इसके अलावा इसमें डेमोग्राफी, बोई गई फसल और जमीन के मालिकाना हक जैसी जानकारी भी होती है। किसान आईडी के माध्यम से बनाए गए डेटाबेस को किसान रजिस्ट्री के रूप में जाना जाएगा। यही वजह है कि केंद्र ने अब राज्यों से किसान आईडी देने के लिए कैंप-मोड अपनाने को कहा है।केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने 27 नवंबर को इस संबंध में मध्यप्रदेश सराकर को एक पत्र भेजा था। केंद्र के पत्र के बाद आयुक्त भू-अभिलेख ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को इस संबंध में मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान के तहत शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि राजधानी सहित प्रदेश भर में करीब 87 लाख 90 हजार किसानों की आईडी जनरेट होनी हैं, जबकि अकेले भोपाल में करीब 65 हजार किसानों की फार्मर आईडी बननी है। आयुक्त भू-अभिलेख अनुभा श्रीवास्तव द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि फार्मर आईडी क्रियेशन के लिए राज्यों को इंसेंटिवाइज करने के लिए भारत सरकार द्वारा स्पेशल सेंट्रल असिस्टेंस स्कीम घोषित की गई है।फार्मर आईडी क्रियेशन कार्य यथाशीघ्र पूर्ण करने की दृष्टि से इसे राजस्व महाअभियान 3.0 में भी शामिल किया गया है। फार्मर आईडी जनरेट करने की कार्रवाई अभियान के रूप में पूर्ण करने के लिए कैम्प आयोजित कर शीघ्र कार्रवाई पूर्ण करने के निर्देश भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने दिए हैं। भारत सरकार द्वारा प्रति कैप राशि 15000 रुपए तीन किश्तों में प्रदान की जाएगी। इसकी प्रक्रिया भी केंद्र सरकार के निर्देश में विहित की गई है। इन कागजों की होगी जरूरत जरूरत इसके लिए आपको आधार कार्ड की कॉपी, जमीन की जानकारी के लिए नकल की कॉपी, फसल के नाम, किस्में, बोनी का समय, बैंक पासबुक की डिटेल देनी होगी। हमेशा ध्यान रखें कि आधार नंबर और मोबाइल नंबर देते समय उसे चेक कर लें। आधार नंबर 12 अंकों का और मोबाइल नंबर 10 अंकों का होना चाहिए। इस तरह से मुहैया कराई जाएगी राशि प्रदेश में फार्मर आईडी बनाने के लिए केंद्र सरकार राज्यों को इनसेंटिव देगी। इसमें प्रति कैंप 15,000 रुपये तक दिए जाएंगे। इसमें गांवों में क्लस्टर से पीएम किसान डाटाबेस अनुसार कम-से-कम 50 फीसदी किसानों को रजिस्टर करना होगा। पहली किश्त 5000 रुपए प्रथम 15 फीसदी किसान आईडी जनरेट करने पर, दूसरी किश्त 5000 रुपए आगामी 15 प्रतिशत आईडी जनरेट करने पर और तीसरी किश्त 5000 आगामी 20 फीसदी फार्मर आईडी जनरेट करने पर प्राप्त होगी। प्रति फार्मर आईडी जनरेशन पर राशि 10 रुपए राज्य को प्राप्त होगी। यह राशि राजस्व महाअभियान 3.0 में फार्मर आईडी व खसरा आधार लिकिंग के लिए नियत कर्मचारी को दी जाएगी। ऐसे बनेंगे किसान आईडी इसके लिए किसानों को खुद का रजिस्ट्रेशन कराना होगा। रजिस्ट्रेशन में गांव के पटवारी या सर्वेयर से किसान संपर्क कर सकते हैं। राजस्व का मैदानी अमला किसानों की किसान पहचान पत्र के लिए रजिस्ट्रेशन में मदद करेंगे। आप चाहें तो यह काम खुद भी कर सकते हैं। यह काम मोबाइल से कम्प्यूटर से भी किया जा सकता है। इसमें दी गई लिंक पर क्लिक करते ही आपके मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा। ओटीपी दर्ज करें और कैप्चा कोड भरना होगा। इसके बाद आपको नया यूजर अकाउंट बनाना होगा। अकाउंट बनने के बाद आपका किसान आईडी के लिए रजिस्ट्रेशन हो जाएगा।

रातापानी टाइगर रिजर्व के संरक्षण के लिए निकाली बाइक रैली, CM ने की शुरुआत, रणदीप हुड्डा भी रहे शामिल

Bike rally taken out for the conservation of Ratapani Tiger Reserve, CM started it, Randeep Hooda also participated रातापानी जंगल के संरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के तहत एक विशेष बाइक रैली का आयोजन किया गया। “विरासत से विकास” अभियान के अंतर्गत यह रैली कोलार रोड स्थित गोल जोड़ चौराहे से शुरू हुई। रैली में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ अभिनेता रणदीप हुड्डा ने भी भाग लिया और अभियान की सराहना की। अभियान के दौरान अभिनेता रणदीप हुड्डा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को उनके कार्यकाल के एक साल पूरे होने पर बधाई दी और कहा कि मैं कुरुक्षेत्र की धरती से आता हूं, जहां भगवान श्री कृष्ण ने अन्याय के खिलाफ संदेश दिया। आज मैं उस प्रदेश में हूं, जहां भगवान ने शिक्षा पाई और जहां जल, जंगल और गायों की सुरक्षा का संदेश दिया गया। रणदीप हुड्डा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि श्री कृष्ण के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने जो कार्य किए हैं, वह सराहनीय हैं। विशेषकर जंगलों और वन्य जीवों के संरक्षण के लिए उनकी प्रतिबद्धता प्रशंसा योग्य है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर वीर सावरकर की तारीफ करते हुए कहा कि वीर सावरकर को दो बार कालापानी की सजा हुई, लेकिन वे कभी नहीं झुके। उनका आदर्श आज भी हमें प्रेरणा देता है। रातापानी टाइगर रिजर्व से एक नई इबारत लिखी जाएगी, जहां टाइगर का संरक्षण किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा, “जंगल का राजा टाइगर ही होता है, क्योंकि टाइगर अपने पराक्रम से शिकार करता है। टाइगर रिजर्व की स्थापना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह न केवल प्रदेश के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस टाइगर रिजर्व के उद्घाटन के लिए बाइक रैली का आयोजन रोजगार और प्रदेश को गौरव देने का एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भोपाल और आसपास के क्षेत्र में भूगर्भीय परिवर्तन के कारण प्राचीन चित्रकला और अन्य ऐतिहासिक धरोहरें भी पाई जाती हैं। सीएम ने कहा कि भोपाल एक ऐसी राजधानी जिसके आंगन ने अपना टाइगर रिजर्व बना है।

भोपाल, छतरपुर समेत 28 जिलों में शीतलहर: एमपी में अगले 4 दिन कड़ाके की सर्दी

Cold wave in 28 districts including Bhopal, Chhatarpur: Severe cold in MP for next 4 days भोपाल । मध्यप्रदेश में अगले 4 दिन तक कड़ाके की सर्दी पड़ने का अलर्ट है। शुक्रवार को भोपाल, जबलपुर समेत 28 जिलों में कोल्ड वेव (शीतलहर) चलेगी। रात के साथ दिन भी ठंडे रहेंगे। पहाड़ों में बर्फबारी और वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह से सर्द हवा चलना इसकी वजह है। इंदौर और उज्जैन में थोड़ी राहत रहेगी। मौसम विभाग के अनुसार, ‘शुक्रवार को जबलपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, सिवनी, नर्मदापुरम में सर्द हवा चलेगी। भोपाल, राजगढ़, शाजापुर, नीमच, विदिशा, सीहोर, रायसेन, कटनी, सीधी में कोल्ड-डे और सर्द हवाएं दोनों का असर रहेगा। मंडला, मंदसौर, रतलाम, बैतूल, नरसिंहपुर में कोल्ड डे यानी ठंडा दिन रहेगा।’ उधर, कड़ाके की ठंड पड़ने से भोपाल, इंदौर समेत कई जिलों में स्कूलों की टाइमिंग बदल गई है। स्कूल 1 घंटे बाद 9 बजे से लग रहे हैं। भोपाल के वन विहार, इंदौर, ग्वालियर के जू में जानवरों को सर्दी से बचाने के लिए हीटर लगाए गए हैं। मंदिरों में भगवान को भी ठंड से बचाने के जतन हो रहे हैं। इस बार पहले पखवाड़े में ही कड़ाके की ठंड इस साल दिसंबर की सर्दी ने ट्रेंड बदल दिया है। पिछले 10 साल का रिकॉर्ड और ट्रेंड देखें, तो दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में कड़ाके की ठंड पड़ती रही है, लेकिन इस बार पहले ही पखवाड़े में तेज सर्दी का असर है। भोपाल और इंदौर की रात तो पिछले 2 साल में सबसे ठंडी रही है, यानी दिसंबर की ठंड का रिकॉर्ड टूट गया है। नवंबर में भी सर्दी तोड़ चुकी रिकॉर्ड नवंबर में भी सर्दी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। भोपाल में तो 36 साल का रिकॉर्ड टूटा है। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर में भी पारा सामान्य से 7 डिग्री तक नीचे रहा। अब दिसंबर में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है।

चुनावी प्रक्रिया पर शिवराज सिंह ने उठाए सवाल, बोले- चुनावों से देश हो रहा बर्बाद

Shivraj Singh raised questions on the electoral process, said – the country is being ruined by elections. विदिशा ! केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार को विदिशा पहुंचे. जहां उन्होंने विदिशा को कृषि और बागवानी का मॉडल बनाने की बात कही. वहीं देश में बार-बार होने वाले चुनावों को लेकर शिवराज सिंह ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि देश में लगातार चुनाव होने के कारण समय, ऊर्जा और धन की बर्बादी होती है. देश में एक चुनाव खत्म होता है, तो दूसरा शुरू हो जाता है. प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री सभी चुनाव प्रचार में व्यस्त हो जाते हैं, जिससे विकास कार्य प्रभावित होता है. विदिशा की जनता ने दिया समर्थन शिवराज सिंह ने “एक देश एक चुनाव” अभियान की शुरुआत करते हुए विदिशा की जनता से इस विचार का समर्थन करने की अपील. कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने उनके साथ हाथ उठाकर इस अभियान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई. चौहान ने संविधान में संशोधन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि एक बार में चुनाव हो ताकि बाकी समय देश के विकास पर ध्यान दिया जा सके. प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में प्राकृतिक खेती को अपनाने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने कहा, “केमिकल फर्टिलाइजर और पेस्टिसाइड्स के अत्यधिक उपयोग ने जमीन की उपजाऊ क्षमता को खत्म कर दिया है. इससे न केवल इंसान बल्कि पशु-पक्षी भी प्रभावित हो रहे हैं. कई उपयोगी कीट-पतंगे जैसे केंचुए, जो धरती के डॉक्टर कहे जाते थे आज विलुप्त होने की कगार पर हैं.” शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वे विदिशा जिले से प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए एक विशेष अभियान शुरू करेंगे. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्राकृतिक खेती नहीं अपनाई गई, तो आने वाली पीढ़ियां धरती पर रहने लायक परिस्थितियां नहीं पाएंगी.”

हर जिले में साइबर थाना, हर थाने में हेल्प डेस्क… फ्रॉड करने वालों की खैर नहीं

CM Mohan Yadav’s action plan: Cyber ​​police station in every district, help desk in every police station… fraudsters are in trouble मध्य प्रदेश के हर जिले में अब साइबर पुलिस स्टेशन खुलेंगे और हर थाने में हेल्प डेस्क बनेगी। अब तक यह सुविधा सिर्फ भोपाल में थी। अन्य जिलों में पुलिस थानों में साइबर ठगी की शिकायतें लिखी जाती थीं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के आदेश के बाद यह फैसला लिया गया है। भोपाल ! मध्य प्रदेश में साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब हर जिले में एक साइबर थाना और हर थाने में एक साइबर हेल्प डेस्क होगी।यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि इस साल जनवरी से अब तक 250 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हो चुकी है। अभी तक सिर्फ भोपाल में ही एक साइबर थाना था, बाकी जिलों में साइबर क्राइम के मामले क्राइम ब्रांच में दर्ज होते थे। एक साल पहले आ गया था प्रपोजल साइबर हेल्प डेस्क बनाने का प्रस्ताव तो एक साल पहले ही आ गया था, लेकिन बजट नहीं होने की वजह से इस पर काम नहीं हो पाया था। अब राज्य साइबर मुख्यालय ने इसके लिए शासन से बजट की मांग की है और उम्मीद है कि जल्द ही यह सुविधा सभी जिलों में शुरू हो जाएगी। पुलिसकर्मियों को मिलेगी ट्रेनिंग पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि साइबर हेल्प डेस्क में एक पुलिसकर्मी को साइबर क्राइम की जांच के लिए ट्रेनिंग देकर तैनात किया जाएगा। यह पुलिसकर्मी लोगों की शिकायतें सुनेगा और जरूरत पड़ने पर उन्हें साइबर थाने भेजेगा। इस साल में 250 करोड़ की ठगी साइबर क्राइम के मामलों में पिछले कुछ सालों में काफी तेजी आई है। पिछले पांच सालों में साइबर क्राइम की शिकायतें पांच हजार से बढ़कर तीन लाख से ज़्यादा हो गई हैं। साइबर पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के मुताबिक, इस साल जनवरी से अब तक 250 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हो चुकी है। दूसरे देशों से ठगी कर लेते हैं लोग साइबर पुलिस के मुताबिक, दूसरे देशों में बैठे लोग भी इस तरह के अपराध में शामिल हैं। साइबर थाने बनने से साइबर कानून के जानकार पुलिसकर्मी तैनात किए जा सकेंगे। इससे अपराध की घटनाओं पर कार्यवाई में तेजी आएगी। जांच से लेकर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल करने तक का काम समय पर और अच्छी तरह से हो सकेगा। मध्य प्रदेश में बढ़े हैं ऐसे मामले मध्य प्रदेश में साइबर अपराध के मामलों में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है, इसलिए हर जिले में एक अलग साइबर थाने की सख्त ज़रूरत है। उम्मीद है कि इससे साइबर अपराध पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी और लोग साइबर ठगी से बच सकेंगे।

भोपाल बस स्टैंड से 16 क्विंटल मावा जब्त, ग्वालियर से भोपाल लाया जा रहा था मावा

16 quintal mawa seized from Bhopal bus stand, mawa was being brought from Gwalior to Bhopal. राजधानी भोपाल के आईएसबीटी बस स्टैंड से खाद्य विभाग की टीम ने 16 क्विंटल मावा जब्त किया है. बताया जा रहा है यह मावा ग्वालियर से लाया गया था. बता दें कि दीपावली पर्व के चलते बड़ी संख्या में राजधानी भोपाल में ग्वालियर-चंबल के रास्ते मिलावटी मावा लाया जा रहा है. दो दिन पहले भी भोपाल रेलवे स्टेशन से 9 क्विंटल मावा जब्त किया गया था. दीपावली पर्व के दौरान बड़ी संख्या में मिठाईयों की खपत होती है. इसके लिए भोपाल में आगरा-ग्वालियर सहित अन्य शहरों से नकली मावा मंगाया जाता है. भोपाल में मिलावटी नकली मावा को लेकर पुलिस व खाद्य विभाग की टीम भी अलर्ट है. रेलवे स्टेशन व बस स्टेशनों पर विशेष नजर रखी जा रही है. महज चार दिन में ही पुलिस व खाद्य विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए 25 क्वीटंल मावा जब्त किया है. दुकानों से जांच के लिए सैंपल रविवार (27 अक्टूबर) को राजधानी भोपाल में खाद्य विभाग की टीम ने 9 दुकानों से सैंपल लिए. वरिष्ठ अधिकारी देवेन्द्र वर्मा के अनुसार टीम द्वारा हमीदिया रोड, न्यू मार्केट और बैरागढ़ सहित नेहरू नगर स्थित मंगलम स्वीट्स से पिस्ता बर्फी तथा मिल्क केक, मंगलम रेस्टोरेंट से काजू कतली, आशा फूड जोन से मलाई टिकिया तथा मलाई बर्फी के सैंपल लिए गए. 14 दिन में आएगी जांच की रिपोर्ट न्यू मार्केट स्थित बृजवासी स्वीट्स से मिल्क केक तथा मलाई बर्फी और भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक-1 के सामने स्थित मां शारदा स्वाद संसार से मिल्क रोल तथा मलाई बर्फी के सैंपल लिए गए हैं. पंजाब डेयरी उद्योग से मावा तथा घी के सैंपल लिए गए हैं. खाद्य अधिकारियों के अनुसार लिए गए सैंपल प्रयोगशाला भेजे गए, जिनकी रिपोर्ट 14 दिन में आएगी, अनियमितताएं मिलने पर प्रकरण दर्ज किए जाएंगे. दो दिन पहले भी जब्त हुआ था मावा दीपावली पर्व को लेकर राजधानी भोपाल में अन्य शहरों से बड़ी संख्या में दूषित मावा आ रहा है. दो दिन पहले भी भोपाल रेलवे स्टेशन के बाहर लोडिंग ऑटो में 9.20 क्विंटल मावा जब्त किया गया था. बताया जा रहा है कि यह मावा आगरा स्टेशन से लाया गया था. वहीं 6 दिन पहले नर्मदापुरम से भी 300 क्विंटल मावा जब्त किया गया था. खाद्य अधिकारी देवेंद्र सिंह ने कहा कि “हमें सूचना मिली थी ग्वालियर से मिलावटी मावा बस से भोपाल लाया जा रहा है हमारी टीम ने सुबह बस स्टैंड पहुंचकर बस में रखा मावा को जव्त कर लिया है बस ड्राइवर से पूछताछ की जा रही है साथ ही मावे के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जाएगा.”

ओवरब्रिज निर्माण में तेजी, बैरागढ़ की दुकानें सर्विस रोड बनने के साथ हटने की तैयारी में

Acceleration in overbridge construction, Bairagarh shops preparing to move out with construction of service road आरओबी की डिजाइन में बदलाव के बाद लोगों के लिए संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन पहुंचने में भी सुविधा होगी। इसका एक हिस्सा स्टेशन पहुंचकर समाप्त होगा। इससे स्टेशन के दूसरे छोर से बैरागढ़ तरफ आने वालों को आसानी होगी। भोपाल। संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) के रेलवे फाटक क्रमांक 115 को फाटक मुक्त करने के लिए लोक निर्माण विभाग यहां ओवरब्रिज का निर्माण करा रहा है। फाटक के पास के कुछ हिस्से का काम रेल प्रशासन कर रहा है। रेलवे ने अपने हिस्से का काम तेज कर दिया है। मार्च 2025 तक यहां से आवाजाही शुरू हो सकती है। यहां पर यह बता दें कि आरओबी की डिजाइन में बदलाव के बाद लोगों के लिए संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन पहुंचने में भी सुविधा होगी। इसका एक हिस्सा स्टेशन पहुंचकर समाप्त होगा। इससे स्टेशन के दूसरे छोर से बैरागढ़ तरफ आने वालों को आसानी होगी। थर्ड लेग के लिए अतिरिक्त आठ करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। क्षेत्रीय विधायक रामेश्वर शर्मा की पहल पर हो रहे इस काम को रेल प्रशासन ने भी स्वीकृति दे दी है। अब नई डिजाइन के अनुसार ही काम किया जा रहा है।स्टेशन से जोड़ने की इसलिए पड़ी जरूरतभविष्य में संत हिरदाराम नगर स्टेशन का विस्तार होगा। ट्रेनों के स्टॉपेज बढ़ेंगे। ऐसे में आरओबी को स्टेशन से जोड़ने की जरूरत महसूस की जा रही थी। रेल प्रशासन ने फरवरी 2025 तक अपने हिस्से का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है। फरवरी माह में ही थर्ड लेग का काम पूरा होगा।सर्विस रोड बना तो होगी तोड़फोड़ओवरब्रिज का कुछ हिस्सा दुकानों तक पहुंच रहा है। ब्रिज के नीचे दोनों तरफ सर्विस रोड बनाने का प्रस्ताव है। रोड बना तो कई दुकानों का बड़ा हिस्सा टूट सकता है। पिछले दो साल से काम चल रहा है। इस कारण यहां का बाजार सुनसान हो चुका है। कारोबार पूरी तरह ठप है। व्यापारी कारोबार को लेकर चिंतित हैं। व्यवसायी राजकुमार आसूदानी, गुरमीतसिंह आदि ने लोक निर्माण विभाग से व्यापारियों को दूसरे स्थान पर जगह आवंटित करने की गुहार की है।

भोपाल : बड़े तालाब पर रोपैक्स सेवा शुरू करने का नितिन गडकरी का प्रस्ताव

Nitin Gadkari proposes to start Ro-Pax service on Bada Talab in Bhopal भोपाल । केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अपने भोपाल दौरे के दौरान बड़े तालाब में रोपैक्स (रो-रो फेरी) सेवा शुरू करने का प्रस्ताव रखा। यह योजना मुंबई, गुजरात और ओडिशा जैसे शहरों की तर्ज पर तैयार की गई है, जहां पहले से ही रोपैक्स सेवा सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। इस नई सेवा का उद्देश्य भोपाल के यातायात को सुगम बनाना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और शहर के पर्यटन को एक नई दिशा देना है। रोपैक्स सेवा: एक क्रांतिकारी कदम भोपाल के बड़े तालाब में प्रस्तावित रोपैक्स सेवा से भदभदा से बैरागढ़ तक का सफर बेहद आसान हो जाएगा। वर्तमान में यह दूरी सड़क मार्ग से तय करने में 30 मिनट से अधिक समय लेती है, जबकि रोपैक्स सेवा के माध्यम से यह यात्रा महज 5 से 10 मिनट में पूरी की जा सकेगी। इस परियोजना पर 15 से 20 करोड़ रुपये का निवेश करने का प्रस्ताव है। इससे सड़कों पर वाहनों की संख्या में कमी आएगी, जो यातायात के दबाव को कम करने में मदद करेगा। परियोजना के प्रमुख लाभ: 1. यातायात का सुधार और समय की बचत: मौजूदा समय में भदभदा से बैरागढ़ तक सड़क मार्ग से यात्रा करने में लगभग 17 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। रोपैक्स सेवा शुरू होने के बाद यह दूरी तालाब के जरिए सीधा तय की जा सकेगी, जिससे यात्रियों का कीमती समय बचेगा। 2. पर्यावरण अनुकूल समाधान: इस सेवा से सड़क यातायात पर निर्भरता कम होगी, जिससे वाहनों द्वारा उत्पन्न ध्वनि और वायु प्रदूषण में कमी आएगी। साथ ही, डीजल और पेट्रोल के उपयोग में भी कमी आएगी, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 3. पर्यटन को मिलेगा प्रोत्साहन: बड़ा तालाब भोपाल का एक प्रमुख आकर्षण है, और रोपैक्स सेवा शुरू होने से इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटक न केवल स्थानीय सुंदरता का आनंद ले सकेंगे, बल्कि तालाब के माध्यम से यात्रा का एक नया अनुभव भी प्राप्त करेंगे। 4. आर्थिक और सामाजिक विकास: इस परियोजना से न केवल स्थानीय निवासियों को लाभ मिलेगा, बल्कि नए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। इसके अलावा, स्थानीय व्यापार और होटल उद्योग में भी वृद्धि होने की संभावना है। अन्य शहरों के अनुभव: एक सीख गडकरी ने बताया कि मुंबई, ओडिशा और गुजरात में पहले से ही रोपैक्स सेवा सफलतापूर्वक चलाई जा रही है। इन शहरों में इस सेवा ने न केवल यातायात का दबाव कम किया है, बल्कि लोगों को जल परिवहन के प्रति जागरूक भी किया है। इन स्थानों पर रोपैक्स सेवा के माध्यम से न केवल स्थानीय यातायात का संचालन आसान हुआ है, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी इसके सकारात्मक परिणाम मिले हैं। भोपाल में इस सेवा को शुरू करने से ऐसे ही लाभ की अपेक्षा की जा रही है। परियोजना की प्रमुख चुनौतियाँ हालांकि रोपैक्स सेवा के कई फायदे हैं, लेकिन इसके कार्यान्वयन में कुछ चुनौतियाँ भी सामने आ सकती हैं: तालाब के जल स्तर का प्रबंधन: रोपैक्स सेवा को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए बड़े तालाब का जल स्तर पर्याप्त होना आवश्यक है। सूखे के मौसम में तालाब का जल स्तर कम होने पर सेवा में रुकावट आ सकती है। पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन: जलमार्ग में चलने वाली फेरी सेवाओं से मछलियों और अन्य जलजीवों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका गहन अध्ययन आवश्यक है ताकि पर्यावरण संतुलन बनाए रखा जा सके। सुरक्षा व्यवस्था: यात्रियों और वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फेरी सेवाओं के संचालन में उच्चतम सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा। अधिकारियों पर तंज और काम की गति अपने भाषण में नितिन गडकरी ने परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने में लगने वाले समय पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि डीपीआर तैयार करने वाले अधिकारियों को पद्मश्री और पद्म विभूषण जैसे सम्मान दिए जाने चाहिए क्योंकि उनकी धीमी गति काम में देरी का कारण बनती है। उनका इशारा इस ओर था कि अगर योजनाओं को समय पर लागू किया जाए, तो लोगों को जल्द ही इसका लाभ मिल सकता है। रोपैक्स सेवा क्या है? रोपैक्स (रो-ऑन/रो-ऑफ) एक प्रकार की फेरी सेवा है जिसमें यात्रियों के साथ-साथ वाहन भी यात्रा कर सकते हैं। यह सेवा उन क्षेत्रों में विशेष रूप से उपयोगी होती है जहां जलमार्ग के जरिए यातायात का संचालन संभव है। वाहन सवार यात्री अपनी गाड़ी के साथ फेरी पर सवार हो सकते हैं और दूसरे किनारे पर उतर सकते हैं, जिससे सड़क यात्रा की तुलना में समय और ईंधन की बचत होती है। भोपाल में रोपैक्स की संभावनाएँ भोपाल के बड़े तालाब में रोपैक्स सेवा शुरू होने से शहर की यातायात व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आ सकते हैं। यह सेवा न केवल सड़क यातायात को कम करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके अलावा, यह भोपाल को एक स्मार्ट और आधुनिक शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है।

राष्ट्रीय सरपंच संघ : 02 अक्टूबर 2024 को मध्यप्रदेश के प्रत्येक सरपंच महामहिम राष्ट्रपति को लिखेंगे पत्र : राजवीर सिंह तोमर

National Sarpanch Sangh: On 02 October 2024

National Sarpanch Sangh: On 02 October 2024, every Sarpanch of Madhya Pradesh will write a letter to His Excellency the President  भोपाल। मध्यप्रदेश के समस्त सरपंच त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के निर्वाचित प्रतिनिधि अपने अधिकारों को लेकर भोपाल में आयोजित पूर्व आन्दोलन 23 जुलाई 2024 को आन्दोलन किया गया था। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 15 दिवस का आश्वासन दिया था। आज दिनांक तक मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सरपंचों की जनहित मांगों पर कोई आदेश निराकरण नहीं किया गया। 02 अक्टूबर 2024 को मध्यप्रदेश के प्रत्येक ग्राम पंचायतों के सरपंचों द्वारा ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति महोदय भारत सरकार के नाम देना है। जिसमें रजिस्ट्रर्ड पोस्ट के माध्यम से ग्राम पंचायत सचिव द्वारा डाक के माध्यम से भेजा जाएगा। जिसकी रसीद सचिव से प्राप्त करें। उसकी कॉपी वाटस अप पर क्षेत्रीय जिला अध्यक्ष एवं जिला प्रभारी राष्ट्रीय सरपंच संघ पदाधिकारियों को भेजें। ज्ञापन की कॉपी पर ग्राम पंचायत सचिव की सील एवं हस्ताक्षर सहित प्राप्ति लें। महामहिम राष्ट्रपति महोदय का ज्ञापन का प्रारूप आपको भेजा जा रहा है इसके साथ ही माननीय प्रधानमंत्री, नेताप्रतिपक्ष लोकसभा, नेतासदन राज्यसभा, राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं नेताप्रतिपक्ष मध्यप्रदेश को प्रतिलिपि अवश्य भेजें। समस्त मांगों का त्वरित निराकरण नहीं होता है जो दिनांक 18.10.2024 को गांव के मुख्य मार्गों पर ग्रामवासियों के साथ दोपहर 12:00 से 2:00 तक शांतिपूर्ण धरना एवं चक्काजाम करना है एवं पूर्ववत् में दिया गया ज्ञापन का पुनः स्मरणपत्र दिया जाए। इसके बाद भी यदि समस्या का निराकरण नहीं होता है तो राष्ट्रीय सरपंच संघ आगे की रणनिति तय करेगा।

आरोपों में फंसी मेसर्स मेंटना इन्फ्रासेल को दिया 5 हजार करोड़ से ज्यादा का ठेका

M/s Mentana Infracell, which is embroiled in allegations, was given a contract worth more than Rs 5000 crore

M/s Mentana Infracell, which is embroiled in allegations, was given a contract worth more than Rs 5000 crore  उदित नारायण  भोपाल। छिंदवाड़ा कॉम्लेक्स निर्माण में ठेका लेने वाली मेसर्स मेंटना इन्फ्रासेल हैदराबाद की कंपनी को करीब 1500 करोड़ का एडवांस में भुगतान करने सहित रीवा आदि कार्याें में 3 हजार करोड़ से अधिक का पेमेंट लेने के बाद भी काम शुरू नहीं करने पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया। बाद में अफसरों की मिलीभगत के चलते कंपनी को क्लीनचिट दे दी गई और अब उसे चितावन तथा सीतापुर हनुमना प्रोजेक्ट 5 हजार करोड़ से अधिक में कराने का ठेका दे दिया गया है।   सूत्र बताते है कि हैदराबाद की मेंटना इन्फ्रासेल प्रायवेट लिमिटेड ने मप्र में तीन कंपनियां रजिस्टर्ड  करवा रखी हैं। यदि एक कंपनी किसी मामले में फंसती है तो दूसरी कंपनी के नाम पर ठेका ले लिया जाता है और ऐसा ही उसने पार्टनरशिप में काम लेकर किया है। जल संसाधन विभाग ने 11 सितंबर को जारी आदेश में टर्न-की पद्धति पर शिप्रा नदी पर चितावन परियोजना के तहत बांध निर्माण एवं प्रेशराइज्ड प्रणाली का ठेका मेसर्स एचईएस इंफ्रा हैदराबाद, इसमें कंपनी की 55 प्रतिशत भागीदारी तथा मेंटना इन्फ्रासेल की 45 प्रतिशत भागीदारी का काम 1335 करोड़ 82 लाख रुपए में आवंटित किया है। इन्हीं दोनों कंपनियों को सीतापुर हनुमना सिंचाई परियोजना अंतर्गत बीरबल बैराज एवं दाबयुक्त सिंचाई प्रणाली विकसित करने का ठेका 3 हजार 979 करोड़ में दिया गया है। यानि मप्र में घोटालों में शामिल कंपनी को बडे-बडे प्रोजेक्ट धड़ल्ले से दिए जा रहे हैं। पहले ब्लैकलिस्ट किया फिर दे दिया क्लीनचिट  तत्कालीन कमलनाथ सरकार के समय छिंदवाड़ा कॉम्लेक्स प्रोजेक्ट मंजूर किया गया था। यह कार्य करीब 6 हजार करोड़ में पूरा कराया जाना है। इसका ठेका जल संसाधन विभाग ने तत्कालीन समय में मेंटना इन्फ्रासेल को दिया था। अफसरों की मिलीभगत के चलते काम शुरू किए बिना ही कंपनी को 500 करोड़ रुपए एडवांस भुगतान कर दिया गया। इस गडबड़झाले को उठाने वाले छिदवाड़ा के भाजपा जिला अध्यक्ष एवं वर्तमान सांसद बंटी साहू के आरोपों के बाद सरकार ने मेंटना कंपनी को क्लैकलिस्ट कर दिया। बाद में इसे क्लीनिचट देकर एक हजार करोड़ का फिर एडवांस भुगतान कर दिया गया। वहीं, इस मामले को विधायक दिनेश राय मुनमुन ने विधानसभा में 15 मार्च 2021 को उठाया था। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि हैदराबाद की मेंटना कंस्ट्रक्शन कंपनी को ज्वाइंट वैंचर में जल संसाधन विभाग द्वारा भुगतान में अनियमितता की शिकायतों की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।    ईओडब्ल्यू में दर्ज है मामला   जानकारी के अनुसार, जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता रहे राजीव कुमार सुकलीकर के कार्यकाल में 7 सिंचाई परियोजनों के लिए मेंटना सहित अन्य ठेकेदारों को 3333 करोड़ रुपए का कार्य पूर्व भुगतान कर दिया था। बाद में सरकार बदलने पर इस मामले में ईओडब्यू में शिकायत दर्ज की गई। ईओडब्ल्यू ने शिकायत की जांच के आधार पर ठेकेदारों को 3333 करोड़ रुपए का कार्य पूर्व भुगतान करने के मामले में तत्कालीन प्रमुख अभियंता राजीव सुकलीकर, मुख्य अभियंता शरद श्रीवास्तव और तत्कालीन अधीक्षण यंत्री एवं प्रभारी मुख्य अभियंता शिरीष मिश्रा के खिलाफ जालसाजी एवं धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया था। ईओडब्ल्यू ने शुरूआती जांच में तीनों को आरोपी बनाया और ठेकेदारों को समयपूर्व भुगतान करने के मामले में संलिप्तता पाई। जांच एजेंसी ने प्रकरण से अचानक शिरीष मिश्रा का नाम हटा दिया। मोहन सरकार ने करीब छह महीने पहले सेवानिवृत्त हो चुके अधीक्षण यंत्री शिरीष मिश्रा को संविदा नियुक्ति देकर प्रमुख अभियंता बना दिया है। इधर, सरकार ने राजीव सुकलीकर के खिलाफ अभियोजन की अनुमति भी दे दी है।

नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के अनूठे उदाहरण प्रस्तुत किये मध्यप्रदेश ने : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

Madhya Pradesh has presented unique examples of cleanliness in urban and rural areas: Chief Minister Dr. Yadav

Madhya Pradesh has presented unique examples of cleanliness in urban and rural areas: Chief Minister Dr. Yadav भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन को देश भर में व्यापक आंदोलन शुरू कर स्वच्छ भारत की परिकल्पना को साकार करने के जो लक्ष्य निर्धारित किये उन्हें प्राप्त करने में मध्यप्रदेश ने देश में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। स्वच्छता को सर्वोपरि मानते हुए इंदौर ने सफाई की जो अलख जगाई है, वह पूरे देश में उदाहरण बन चुकी है। इंदौर के नाम लगातार 7 बार देश को स्वच्छतम शहर बने रहने का रिकार्ड है। इंदौर ही देश का पहला वाटर प्लस शहर भी बना है और भोपाल देश की सबसे स्वच्छ राजधानी है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव का प्रदेशवासियों से आहवान मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने प्रदेशवासियों से आहवान किया है कि सभी नागरिक संकल्प लें की न तो वे गंदगी फैलाएंगे और न किसी को फैलाने देंगे। अपने आसपास सफाई रखेंगे और लोगों को भी सफाई के लिए प्रेरित करेंगे, तभी सच्चे अर्थों में स्वच्छता ही सेवा अभियान सफल होगा। उन्होंने कहा कि हम सबको सफाई मित्र बनकर अभियान को सफल बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के जन्म दिन 17 सितम्बर से प्रांरभ हुए स्वच्छता ही सेवा अभियान में एक बार फिर मध्यप्रदेश पूरे जुनून के साथ जूट गया है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के प्रति मंत्रीगण, जन-प्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, समाजसेवी और सामाजिक संगठनों के साथ नागरिक भी सजग होकर महती भूमिका निभा रहे हैं। प्रदेशवासियों और हमारे सफाई मित्रों के मनोबल बढ़ाने के लिये राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने भी अपने उज्जैन प्रवास के दौरान सफाई मित्रों से संवाद कर उन्हें सम्मानित किया और श्री महाकाल लोक परिसर में झाडू लगाकर स्वच्छता का संदेश दिया। यह मध्यप्रदेश के लिये गर्व की बात है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि स्वच्छता के सभी आयामों पर मध्यप्रदेश खरा उतर रहा है। राज्य सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक एवं खुले में मांस-मछली के विक्रय पर प्रतिबंध लगाया है। प्रदेश में जीरो वेस्ट को प्रोत्साहन देने के लिये नगरीय निकायों में जीरो वेस्ट इवेंट भी जारी किये जा रहे हैं। प्रदेश में 401 नगरीय निकायों में सूखे एवं गीले कचरे के प्र-संस्करण के लिये सेंट्रल कम्पोस्टिंग और मटेरियल रिकवरी के लिये इकाइयों की स्थापना की गयी है, जिनसे कम्पोस्ट खाद बनायी जा रही है। प्रदेश में 324 शहरों को सफाई मित्र सुरक्षित शहर घोषित किया गया है। साथ ही सफाई मित्रों की कार्यक्षमता संवर्धन के लिये समय-समय प्रशिक्षण भी आयोजित किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि हाल ही में रीवा नगरपालिका निगम में 158 करोड़ 67 लाख रूपये की लागत से वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित किया गया है। इस प्लांट से प्रतिदिन 340 टन कचरे का ट्रीटमेंट किया जा रहा है। साथ एक दिन में 6 मेगावाट बिजली भी उत्पन्न की जा रही है। सात हजार से अधिक कचरा संग्रहण वाहन प्रतिदिन घर-घर जाकर कचरा संग्रहित कर रहे हैं। प्रदेश के सभी गांव ओडीएफ हैं और अब तक 78 लाख 31 हजार व्यक्तिगत शौचालय और 16 हजार 900 से अधिक सामुदायिक स्वच्छता परिसरों का निर्माण किया जा चुका है। प्रदेश के 44 हजार से अधिक गांवों को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, 48 हजार से अधिक ग्रामों को लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट और 41 हजार से अधिक ग्रामों को आडीएफ प्लस मॉडल बनाया गया है। स्वच्छता अभियान में हो रहे हैं अभिनव नवाचार प्रदेश में 17 सितम्बर से प्रारंभ हुए स्वच्छता ही सेवा अभियान में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता की अलख जगाई जा रही है। हर स्तर पर नागरिकों को स्वच्छता संबंधी शपथ दिलाने के साथ प्रेरित भी किया जा रहा है। स्वच्छता-मित्रों को सम्मानित कर उनके हौंसले को बढ़ाना और उनके साथ सफाई कार्य करने के लिये मंत्रीगण और जन-प्रतिनिधि भी अपने-अपने क्षेत्रों में सफाई कार्य में जुटे हुए हैं। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा नगर निगम क्षेत्र में सैनिक कैंटीन से नीम चौराहा तक बोडाबाग रोड पर श्रमदान कर स्वच्छता का संदेश दिया और सफाई-मित्रों को सम्मानित किया। रीवा के शासकीय एवं निजी शालाओं में स्वच्छता व्यवहार पर केन्द्रित कार्यक्रमों का आयोजन कर नागरिकों में स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता लाई गई। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने ग्वालियर नगर के लक्ष्मण तलैया क्षेत्र और मोनी बाबा आश्रम में झाडू लगाकर साफ-सफाई की और सफाई मित्रों को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया। केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर में बीएसएनएल कार्यालय परिसर में अधिकारी-कर्मचारी और नागरिकों को स्वच्छता की शपथ दिलवाई। ग्वालियर सांसद श्री भारत सिंह कुशवाह ने जन-प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ जिला चिकित्सालय परिसर में साफ-सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया। ग्वालियर कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान ने अधिकारी कर्मचारियों के साथ कलेक्ट्रेट एवं अन्य कार्यालयों में झाडू लगाकर साफ-सफाई की। सागर में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने स्वच्छता पखवाड़े अंतर्गत सभी को स्वच्छता के लिये प्रेरित किया और जीरो वेस्ट थीम पर अभियान में सहयोग देने की अपील की। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को वर्ष में 100 घंटे स्वच्छता के कार्य करने की शपथ भी दिलवाई। जबलपुर में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने सरपंचों के साथ स्वच्छता संवाद कर ग्राम पंचायतों को स्वच्छ बनाने में सक्रिय रूप से कार्य करने की शपथ दिलाई। उन्होंने स्वच्छता कर्मियों का सम्मान कर उन्हें सेफ्टी किट प्रदान की। जबलपुर शहर में मोहल्ला सभाओं का आयोजन कर स्वच्छता का संदेश दिया गया। इसी प्रकार प्रदेश के सभी जिलों में जन-भागीदारी के साथ स्वच्छता पखवाड़ा निरंतर जारी है। स्थानीय नागरिकों को अभियान से जोड़ने के लिये जन-प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी अपने स्तर पर अनेक नवाचार भी कर रहे हैं, जिसके सफल परिणाम मानव जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा। साथ ही स्वच्छता के प्रति जागी अलख से प्रदेश के नगरीय और ग्रामीण क्षेत्र आगामी स्वच्छता सर्वेक्षण-24 में बेहतर उपलब्धियां हासिल करेंगे।

मध्यप्रदेश, सौर ऊर्जा प्रदेश बनने की ओर अग्रसर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

Madhya Pradesh is moving towards becoming a solar energy state: Chief Minister Dr. Yadav

रीवा सौर परियोजना को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने केस स्टडी के रूप में किया शामिल Madhya Pradesh is moving towards becoming a solar energy state: Chief Minister Dr. Yadav भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में जहाँ एक ओर विश्व की सबसे बड़ी रीवा सौर परियोजना स्थापित होकर शुरू हो चुकी है। इस परियोजना को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने केस स्टडी के रूप में शामिल किया है। वहीं दूसरी ओर ओंकारेश्वर में प्रदेश की जीवनदायिनी नर्मदा नदी पर दुनिया की सबसे बड़ी 600 मेगावाट क्षमता की फ्लोटिंग सोलर परियोजना भी विकसित की जा रही है। इसके अलावा प्रदेश के विभिन्न अंचलों में भी सौर ऊर्जा की कई छोटी-बड़ी परियोजनाएँ निर्माणाधीन हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हाल ही में गुजरात के गांधी नगर में नवकरणीय ऊर्जा को लेकर हुई राष्ट्रीय समिट में अनेक उद्योगपतियों ने मध्यप्रदेश में सोलर प्लांट लगाने की इच्छा जाहिर की है। राजधानी भोपाल में सरकारी भवनों और नागरिकों को अपने घर की छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिये अभियान चलाया जायेगा। इन सभी प्रयासों से मध्यप्रदेश, सौर ऊर्जा प्रदेश बनने की अग्रसर हो गया है। आदर्श उदाहरण के रूप में पढ़ाया जा रहा है हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में दुनिया की सबसे प्रसिद्ध हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में मध्यप्रदेश स्थित विश्व के सबसे बड़े रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पॉवर पार्क और प्लांट के उत्कृष्ट प्रबंधन, संचालन और सौर ऊर्जा उत्पादन को आदर्श उदाहरण के रूप में पढ़ाया जा रहा है। रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पॉवर प्लांट न सिर्फ़ विश्व का सबसे बड़ा प्लांट है, बल्कि विश्व में सबसे सस्ती दर पर व्यावसायिक उर्जा उत्पादन करने वाला प्लांट भी है। यहां से 3 रूपये 30 पैसे प्रति यूनिट बिजली अगले 25 सालों के लिए उपलब्ध हो सकेगी। मध्यप्रदेश में भरपूर सौर ऊर्जा है। यहां 300 से ज्यादा दिनों तक सूर्य का प्रकाश रहता है। विश्व बैंक के क्लीन टेक्नालॉजी फंड के माध्यम से वित्त पोषित देश की पहली सौर परियोजना है। आज विश्व के 10 सर्वाधिक बड़ी सोलर परियोजनाओं में से आधी भारत में है। रीवा सोलर पॉवर प्लांट इनमें से एक है। कैसे हुई शुरूआत भारत सरकार ने वर्ष 2014 में सोलर पार्क योजना की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य सोलर पॉवर को बढ़ावा देना था। इस योजना में 500 मेगावाट क्षमता से ज्यादा की सोलर परियोजनाओं को सोलर पार्क में शामिल किया गया और उन्हें अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क कहा गया। केस स्टडी में बताया गया कि भारत में 4 लाख 67 हजार वर्ग मीटर बंजर भूमि आंकी गई है। इसका उपयोग सोलर प्लांट लगाने में किया जा सकता है। मध्यप्रदेश में 1579 हेक्टेयर जमीन का आंकलन किया गया, जिसमें 1255 हेक्टेयर बंजर जमीन सरकारी और 384 हेक्टेयर प्राइवेट जमीन शामिल है। इस प्रकार रीवा सोलर अल्ट्रा मेगा सोलर प्लांट बनने की शुरुआत हुई। रीवा सोलर पॉवर प्लांट की यात्रा दिलचस्प है। इसकी शुरुआत जून 2014 में बड़वार गांव में 275 हेक्टेयर जमीन आवंटन के साथ शुरू हुई। राज्य सरकार ने अप्रैल 2015 में रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर प्लांट की स्थापना का अनुमोदन किया। दो महीने बाद रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड की स्थापना हुई, जिसमें म.प्र. ऊर्जा विकास निगम और एसईसीआई के साथ 50 -50 प्रतिशत का जॉइंट वेंचर स्थापित हुआ। इसके बाद बड़वार, बरसेटा देश, बरसेटा पहाड़, इतर पहाड़, रामनगर पहाड़ गांवों में 981 हेक्टेयर जमीन का आवंटन हुआ। वर्ष 2018-19 तक और भी गांव में उपलब्ध बंजर जमीन को परियोजना के लिए आवंटित किया गया। अप्रैल 2019 में दिल्ली मेट्रो रेलवे कॉर्पोरेशन को पॉवर सप्लाई देना शुरू हुआ। जनवरी 2020 से पूरी तरह से व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो गया।

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