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भोपाल, व्यावसायिक शिक्षा के विस्तार में और गति लायें – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

Bhopal should bring more momentum in the expansion of vocational education – Chief Minister Dr. Yadav मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर दिए निर्देश भोपाल ! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर देश में लागू की गई “नई शिक्षा नीति-2020″में व्यावसायिक शिक्षा (वोकेशनल स्टडीज) पर विशेष जोर दिया गया है। इसी के अनुरूप मध्यप्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा के विस्तार के लिये किए जा रहे प्रयासों में और गति लाई जाए। विद्यार्थी द्वारा स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद उच्च शिक्षा के लिये प्रवेश लेने के दौरान ही उन्हें वोकेशनल स्टडीज से जोड़कर रोजगार और स्वरोजगार के लिये प्रेरित किया जाए। इससे संपूर्ण शिक्षा प्रणाली को और सार्थक बनाया जा सकता है। नये सीएम राइज विद्यालयों के लिए चयन में व्यावहारिक आधार पर निर्णय लिया जाये और विद्यालयों के निर्माण में डिजाइन और अन्य सभी व्यवस्थाओं को भी बेहतर तरीके से पूर्ण किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादवआज मंत्रालय में स्कूल शिक्षा विभाग की कार्य गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्कूल शिक्षा की वर्तमान व्यवस्थाओं, विद्यार्थियों को उपलब्ध करवाई जा रही सुविधाओं, नियमित पाठ्यक्रमों के संचालन, सीएम राइज स्कूलों के प्रबंधन और शिक्षा विभाग द्वारा अन्य विभागों के समन्वय से विद्यार्थियों के कल्याण के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने विभाग द्वारा राज्य शासन की प्राथमिकताओं और संकल्प पत्र के बिन्दुओं के अनुरूप कार्ययोजना तैयार कर शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने विभाग के कार्यों और योजनाओं के संबंध मेंप्रस्तुतिकरण दिया। बैठक में विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा दिए गए प्रमुख निर्देश

धान उपार्जन में लापरवाही एक और अफसर पर पड़ी भारी: जबलपुर के प्रभारी फूड कंट्रोलर के बाद अब प्रबंधक व जिला विपणन अधिकारी भी सस्पेंड

Negligence in paddy procurement fell heavily on another officer: After the food controller in-charge of Jabalpur, now the manager and district marketing officer are also suspended. सहाकारिता उपायुक्त डॉ. अखिलेश निगम पिक्चर से ही गायब हैं जबकि उपार्जन समिति में वे जिम्मेदार पद पर हैं। उदित नारायण भोपाल ! राज्य शासन ने जिला विपणन अधिकारी और मंडल प्रबंधक जबलपुर रोहित सिंह बघेल को भी सस्पेंड कर दिया है। यह कार्यवाही मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ के प्रबंध संचालक आलोक कुमार सिंह ने की है। प्रबंध संचालक द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि विपणन वर्ष 2023-24 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए जारी नीति के अनुसार धान उपार्जन का कार्य नहीं कराया गया है। अधिकारी की लापरवाही के चलते शासन के समक्ष संघ की छवि धूमिल हुई है। इसलिए बघेल को जिम्मेदार मानते हुए उन्हें सस्पेंड किया गया है। निलंबन अवधि में बघेल का मुख्यालय विपणन संघ भोपाल तय किया गया है। मंगलवार को प्रभारी फूड कंट्रोलर हुए थे सस्पेंड इससे पहले मंगलवार को खाद्य, नागरिक और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने जबलपुर में पदस्थ प्रभारी जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश टांडेकर को धान उपार्जन केंद्रों के मामले में गंभीर लापरवाही पर सस्पेंड किया था। निलंबन अवधि में टांडेकर का मुख्यालय खाद्य विभाग संचालनालय भोपाल तय किया है। आदेश में कहा था कि जबलपुर जिले में कुल 121 केंद्रों के विरुद्ध 85 उपार्जन केंद्र स्थापित किए हैं। बाकी 36 उपार्जन केंद्र महिला स्व सहायता समूहों को देने का प्रस्ताव 21 दिसंबर को भेजा गया जो काफी देरी से भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों को उपज बेचने में परेशानी हुई है। साथ ही महिला स्व सहायता समूह उपार्जन केंद्र के लिए तय गोदामों का सत्यापन प्रक्रिया का पालन किए बगैर किया गया। सहकारी सेवा समितियों को दो-दो उपार्जन केंद्रों की जिम्मेदारी दिए जाने के विपरीत उपार्जन नीति का पालन नहीं करते हुए 27 सहकारी समितियों को केवल एक-एक उपार्जन केंद्र का जिम्मा सौंपा है। इसलिए जिले में आवश्यक उपार्जन केंद्र स्थापित नहीं किए जा सके। इसे व्यापक लापरवाही मानते हुए विभाग ने टांडेकर को सस्पेंड कर दिया है। राज्य शासन ने जबलपुर के फूड कंट्रोलर को सस्पेंड कर दिया है। मोहन यादव कैबिनेट के गठन के बाद शासकीय काम में लापरवाही के मामले में की गई यह पहली कार्रवाई है। खाद्य, नागरिक और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने जबलपुर में पदस्थ प्रभारी जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश टांडेकर को धान उपार्जन केंद्रों के मामले में गंभीर लापरवाही पर सस्पेंड किया है। निलंबन अवधि में टांडेकर का मुख्यालय खाद्य विभाग संचालनालय भोपाल तय किया है।विभाग के अनुसार खरीफ सीजन में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी करने के लिए जारी की गई नीति के मुताबिक ई-उपार्जन पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसानों से एक दिसंबर 2023 तक उपार्जन कार्य कराया जाना था। इसके लिए सहकारी समितियों के साथ एनआरएलएम में रजिस्टर्ड महिला स्व सहायता समूहों को भी उपार्जन केंद्र के संचालन का काम देने के निर्देश 29 नवंबर को जारी किए गए थे। इसमें जिला उपार्जन समिति के माध्यम से महिला स्व सहायता समूहों को उपार्जन केंद्र की अनुमति का प्रस्ताव खाद्य संचालनालय को भेजा जाना था। जबलपुर जिले में कुल 121 केंद्रों के विरुद्ध 85 उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए हैं। बाकी 36 उपार्जन केंद्र महिला स्व सहायता समूहों को देने का प्रस्ताव 21 दिसंबर को भेजा गया जो काफी देरी से भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों को उपज बेचने में परेशानी हुई है। साथ ही महिला स्व सहायता समूह उपार्जन केंद्र के लिए तय गोदामों का सत्यापन प्रक्रिया का पालन किए बगैर किया गया। इस संबंध में न तो प्रभारी फूड कंट्रोलर द्वारा संचालनालय को जानकारी दी गई और न ही स्थानीय स्तर पर जनहित का काम किया गया। सहकारी सेवा समितियों को दो-दो उपार्जन केंद्रों की जिम्मेदारी दिए जाने के विपरीत उपार्जन नीति का पालन नहीं करते हुए 27 सहकारी समितियों को केवल एक-एक उपार्जन केंद्र का जिम्मा सौंपा है। इसलिए जिले में आवश्यक उपार्जन केंद्र स्थापित नहीं किए जा सके। इसे व्यापक लापरवाही मानते हुए विभाग ने टांडेकर को सस्पेंड कर दिया है। आजीविका समिति की जाँच कराने की माँग कांग्रेस सहकारिता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष शित्रकुमार चौबे ने जिले में कुछ आजीविका समितियों का फर्जी तरह से कार्य करने का आरोप लगाया है। इनका कहना है कि पंजीयन के 6 माह के अंदर समितियों के निर्वाचन के प्रस्ताव चले जाने चाहिए मगर पिछले 2 साल से किसी भी एक समिति का चुनाव प्रस्ताव कार्यालय उपायुक्त सहकारिता से नहीं गया है। नियम तो यह भी है कि यदि निर्वाचन नहीं होता है तो तत्काल विभाग को किसी शासकीय कर्मचारी को प्रशासक बना देना चाहिए, मगर कार्यालय के स्तर पर इस तरह की भी कार्रवाई नहीं हो रही है। इन्हें क्यों छोड़ा गया धान खरीदी की जाँच का जिम्मा तमाम एसडीएम को दिया गया था, खाद्य विभाग के अधिकारी भी इसमें शामिल थे, वहीं वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन और मार्कफेड के अधिकारियों का कहीं जिक्र तक नहीं किया जा रहा है। डिप्टी कलेक्टर, अपर कलेक्टर और सीईओ जिला पंचायत भी खरीदी केन्द्र की जाँच के लिए जिम्मेदार हैं लेकिन 1 दिसम्बर से अभी तक केवल लोकायुक्त ने ईमानदारी से कार्य किया और रिश्वत लेते कम्प्यूटर ऑपरेटर को पकड़ा, बाकी किसी ने भी किसी केन्द्र में कोई जाँच नहीं की। सहाकारिता उपायुक्त डॉ. अखिलेश निगम पिक्चर से ही गायब हैं जबकि उपार्जन समिति में वे जिम्मेदार पद पर हैं। रातों-रात गायब हुई धान जानकारों का कहना है कि जैसे ही वेयरहाउस संचालकों को यह पता चला कि जाँच दल आ रहा है तत्काल ही बिना अनुमति खरीदी करने वाले वेयरहाउसों से धान को गायब करवाया गया। यहाँ तक की कई वेयरहाउसों में जाँच दल पहुँच भी गया था लेकिन एप्रोच लगाकर जाँच दल को रोका गया और उनकी मौजूदगी में ही धान गायब करवाई गई। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि सरकारी बारदानों यानी बोरों में बिना अनुमति खरीदी हुई, यह कैसे हुआ कोई बताने तैयार नहीं। रातभर बाहर किया धान, फिर भी अंदर रखा मिला 30 हजार क्विंटल प्रमुख सचिव … Read more

प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में मंगलवार को जनसुनवाई करने के आदेश जारी किया

The state government issued orders to hold public hearing in all the districts on Tuesday. उपरोक्त विषयांतर्गत संदर्भित परिपत्र का अवलोकन करें, जिसके ‌द्वारा मध्यप्रदेश विधान सभा चुनाव वर्ष 2023 की “आदर्श आचार संहिता प्रभावशील होने के कारण, आदर्श आचार संहिता अवधि के दौरान “जनसुनवाई कार्यक्रम स्थगित करने के निर्देश दिए गए थे। आदर्श आचार संहिता दिनांक 04.12.2023 से समाप्त हो चुकी है। अत “जन सुनवाई कार्यक्रम पूर्व की भांति पुनः प्रारम्भ किया जावे।

मध्य प्रदेश पुलिस ने किया डिजिटल क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन

Madhya Pradesh Police performed excellently in the digital field. एनसीआरबी, गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया गया सम्मान, पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर डीजीपी श्री सक्सेना ने पुलिस टीम को दी बधाई भोपाल ! पुलिसिंग में तकनीकी पहल करने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस की एससीआरबी टीम ने नई दिल्ली में पुरस्कार प्राप्त करने के बाद आज मप्र पुलिस के मुखिया डीजीपी श्री सुधीर कुमार सक्सेना से सौजन्य भेंट की। यह उपलब्धि प्राप्त करने पर डीजीपी श्री सक्सेना ने प्रसन्नता व्यक्त की और इसके लिए पूरी टीम को बधाई दी व उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि अपराधों की रोकथाम के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग कर मध्य प्रदेश पुलिस को नवीन ऊंचाइयों तक पहुंचाएं। जिन्हें प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है, वे इसे कायम रखें और जो दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं, वे आगामी वर्ष प्रथम स्थान प्राप्त करने का प्रयास करें।इस अवसर पर भोपाल के पुलिस मुख्यालय, एससीआरबी में पदस्थ एडीजी श्री चंचल शेखर, एआईजी प्रांजलि शुक्ला, निरीक्षक डॉली गोस्वामी, प्रधान आरक्षक (कम्प्यूटर) अंकुश सोनी और अर्शदीप सिंह सहित पूरी टीम को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। मध्य प्रदेश पुलिस को मिला प्रथम पुरस्कार :-उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली में 21-22 दिसंबर 2023 को आयोजित “Conference on Good Practices in CCTNS/ICJS, 2023 ” में राष्‍ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्‍यूरो (एनसीआरबी), गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा मध्य प्रदेश पुलिस को डिजिटल क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन एवं आईसीजेएस का उपयोग करते हुए अपराधों की रोकथाम करने के लिए प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया है। आईसीजेएस (इन्टर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम) के क्रियान्वयन में सराहनीय कार्य के लिए संपूर्ण देश में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर मध्य प्रदेश पुलिस को यह ट्रॉफी प्रदान की गई। इसके साथ ही प्रदेश की फॉरेंसिक शाखा को देशभर में द्वितीय स्थान और मध्य प्रदेश पुलिस को e-Rakshak Mobile App की नई पहल के लिए भी तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है। शीघ्र एवं पारदर्शी विवेचना के लिए महत्वपूर्ण तकनीक है आईसीजेएस :-एडीजी एससीआरबी श्री चंचल शेखर ने बताया कि मध्यप्रदेश में आईसीजेएस के क्रियान्वयन में राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो (एससीआरबी) नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है। एससीआरबी सभी पिलर्स के नोडल अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करता है ताकि आईसीजेएस का सुचारू रूप से संचालन, अपराधों की शीघ्रता से विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। एससीआरबी द्वारा सभी पिलर्स की मासिक बैठक लेकर समस्याओं का समाधान करने के साथ ही इनकी रिपोर्ट माननीय उच्च न्यायालय की ई-कमेटी को प्रेषित की जाती है।इन्टर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) माननीय सर्वाेच्च न्यायालय की ई-कमेटी की एक पहल है। यह आपराधिक एवं न्यायिक प्रणाली को त्वरित एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आईसीजेएस मुख्यत: एक एकीकृत पोर्टल है, जो पुलिस, जेल, फॉरेंसिक, प्रॉसिक्यूशन और न्यायिक विभागों को संयुक्त स्थानीय न्यायिक प्रणाली से जोड़ता है और अपराधों की विवेचना व कार्रवाई में सुधार करने में सहायता करता है। इस प्रणाली का उद्देश्य अपराधों की रोकथाम, जांच और न्यायिक प्रक्रिया में सुधार लाना है ताकि विभिन्न संगठनों और विभागों के बीच समन्वय बढ़े और कार्यप्रणाली में सुधार हो सके। पैन इंडिया क्रिमिनल रिकॉर्ड सर्च, आइडेंटिफिकेशन ऑफ क्रिमिनल नेटवर्क, 360 डिग्री प्रोफाइलिंग ऑफ सस्पेक्ट आदि इसकी विशेषताएं हैं। अपराधों पर नियंत्रण का मापदंड होता है चयन का आधार :-एडीजी एससीआरबी श्री चंचल शेखर ने बताया कि आईसीजेएस पोर्टल में उत्कृष्ट प्रदर्शन मुख्यत: चार बिंदुओं पर आधारित है, जिन पर मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा सफलता पूर्वक कार्य किया गया है।प्रदेश में घटित होने वाली घटनाओं में संलिप्त लोगों की आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच, जो कि जनवरी 2023 तक 3 लाख 50 हजार थीं, जो नवंबर में बढ़कर 56 लाख हो गई हैं।आपराधिक न्याय प्रणाली के सभी स्तंभों में जानकारी का अधिक से अधिक आदान-प्रदान होना – एफएसएल की जांचों की जानकारियों का आदान-प्रदान देश में पहली बार मध्य प्रदेश में व्यवस्थित रूप से किया गया।आईसीजेएस के उपयोग से अपराधियों तक पहुंचनामध्य प्रदेश में पहली बार जिले एवं तहसील स्तर के न्यायाधीशों का आईसीजेएस में प्रशिक्षण एवं उपयोग किया गया।

सामाजिक जनजागरण है, राहुल गांधी की “भारत न्‍याय यात्रा “- जीतू पटवारी

Rahul Gandhi’s “Bharat Nyay Yatra” is social awareness – Jitu Patwari मध्‍य प्रदेश कांग्रेस के अध्‍यक्ष जीतू पटवारी ने मीडिया में बातचीत में कहा कि भारत न्‍याय यात्रा का मध्‍य प्रदेश में स्‍वागत है। अब राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ‘भारत न्याय यात्रा’ निकालने वाली है।मध्‍य प्रदेश कांग्रेस के अध्‍यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि भारत न्‍याय यात्रा का मध्‍य प्रदेश में स्‍वागत है।राहुल गांधी ने इससे पहले देश में भारत जोड़ो यात्रा की थी। भोपाल। भारत जोड़ो यात्रा’ के बाद अब राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ‘भारत न्याय यात्रा’ निकालने वाली है।मणिपुर से मुंबई तक क़रीब 6200 किलोमीटर की यह लंबी यात्रा 14 जनवरी से लेकर 20 मार्च तक निकाली जाएगी। यह यात्रा 14 राज्यों से होकर निकलेगी। इनमें मध्‍य प्रदेश और छत्‍तीसगढ़ भी शा‍म‍िल है। भारत न्याय यात्रा का मुद्दा आर्थिक न्याय, सामाजिक न्याय और राजनीतिक न्याय रखा गया है।मध्‍य प्रदेश कांग्रेस के अध्‍यक्ष जीतू पटवारी ने मीडिया में बातचीत में कहा कि भारत न्‍याय यात्रा का मध्‍य प्रदेश में स्‍वागत है। उन्‍होंने कहा कि राहुल जी ने इससे पहले देश में भारत जोड़ो यात्रा की थी। आधुनिक भारत के पहले शख्‍स थे जिन्‍होंने देश में भाईचारे के लिए, प्रेम के लिए, प्‍यार के लिए भगवान राम-कृष्‍ण और भारत वर्ष के जो मूल विचार हैं, इंसानियत की रक्षा के लिए, प्राणियों में सद्भावना हो इस विश्‍वास के लिए यात्रा निकाली थी। पूरे देश ने उसे आत्‍मसात किया था। अब न्‍याय यात्रा निकाली जा रही है।पटवारी बोले-वोट की ताकत को कम किया जा रहा पटवारी ने यह भी कहा कि राजनीतिक रूप से जो तानाशाही देश में चल रही है, लोकतंत्र की हत्‍या करने का जो दुष्‍चक्र चल रहा है। विधायकों और सांसदों को अपने अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। वोट की ताकत को कम किया जा रहा है। व्‍यापक रूप से दलबदल किया गया। इसके खिलाफ और सामाजिक जनजागरण के लिए न्‍याय यात्रा है।

चेतन्य कश्यप, सरकार को वेतन वापिस करने के बजाय उस राशि को अभावग्रस्त लड़कियाँ की शिक्षा पर खर्च करें : उमा

Instead of returning the salary to the Government, the amount should be spent on the education of underprivileged girls, according to Uma Bharti. भोपाल। उमा भारती ने लिखा है कि हाल ही में मंत्री बने रतलाम के एक संपन्न जैन व्यवसायी चेतन्य काश्यप ने अपनी संपत्ति 296 करोड़ घोषित की हैं। अभी कुछ दिनों पहले मध्यप्रदेश के अखबारों में उनकी तारीफ़ लिखी गई थी कि वो अपना विधायक का वेतन नहीं लेते जोकि साल भर का क़रीब 12 लाख होता हैं । 296 करोड़ वाला व्यक्ति अगर सरकार के 12 लाख छोड़ देता है तो इसमें कौनसी बड़ी बात हैं । उन्होंने लिखा है कि चेतन्य काश्यप सरकार को वेतन वापिस करने के बजाय वह राशि अभावग्रस्त लड़कियों की शिक्षा पर खर्च करें ।उमा ने आगे लिखा है कि हमें यह याद रखना पड़ेगा कि सभी विधायक बड़े व्यवसायी नहीं होते और न वो राजनीति से अपना व्यवसाय बढ़ाते हैं।एक बार सांसद वरुण गांधी ने कहा था कि सांसदों को तनखा एवं पेंशन नहीं लेना चाहिए। वरुण गांधी ऐसा कर सकते है क्यूँकि वो हज़ारों-करोड़ों की पैतृक संपत्ति के मालिक है । अपना सर्वस्व त्यागकर राजनीति के माध्यम से जनसेवा करने वाले जनप्रतिनिधियों को हर तरह की सहूलियत सरकार से मिलनी चाहिए ।अगर विधायकों और सांसदों को ईमानदारी की राह पर चलना आसान बनाना है तो चेतन्य काश्यप जैसे पूंजीपति विधायकों को छोड़कर सभी विधायक की तनखा एवं अन्य भत्ते आज की सभी परिस्थितियों को देखकर मिलना चाहिए

वन विभाग ने वनों की सुरक्षा के लिए मांगी एस.ए.एफ की तीन अतिरिक्त कंपनियां

The Forest Department requested three additional companies of the Special Armed Forces (S.A.F.) for the protection of forests. उदित नारायण भोपाल। राज्य के वन विभाग ने मंत्रालय में दिये एक उच्च स्तरीय प्रेजेन्टेशन में एसएएफ की तीन अतिरित कंपनियां मांगी हैं। वर्तमान में एसएएफ की तीन कंपनियां क्रमशः आठवीं वाहिनी छिन्दवाड़ा, 15 वीं वाहिनी इंदौर एवं 26 वीं वाहिनी गुना के 221 सशस्त्र अधिकारी एवं कर्मचारी वन क्षेत्र में पदस्थ हैं जिन्हें 14 संवेदनशील वनमंडलों में संलग्न किया गया है। चूंकि वनकर्मियों को बंदूक चलाने का अधिकार नहीं दिया गया है, इसलिये वन विभाग ने एसएएफ की तीन अतिरिक्त कंपनियों को देने की और मांग की है। इसी प्रकार, प्रेजेन्टेशन में वन अधिकारियों को पुलिस की तरह वाहनों में बीकन लाईन लाइट लगाने, वन्य प्राणी के हमले में जनहानि होने पर 12 लाख रुपये हर्जाना देने, वन कर्मचारियों को पुलिस की तरह 13 माह का वेतन देने, पौष्टिक आहार भत्ता देने एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पदस्थी पर पुलिस की तरह नक्सल भत्ता देने की भी मांग की है जिससे वन कर्मियों का मनोबल बढ़ सके।

श‍िवराज सिंह चौहान ने सीएम आवास खाली किया, खाली करने से पहले पूजा अर्चना की

Shivraj Singh Chouhan vacated the Chief Minister’s residence, performing a puja and ritual before the evacuation. सीएम आवास खाली करने से पहले श‍िवराज ने किए गौ माता के दर्शन, सुरक्षाकर्मियों ने दी विदाई श‍िवराज सिंह चौहान ने परिवार सहित सीएम हाउस स्थित मंदिर में की पूजा .भोपाल। मध्‍य प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री श‍िवराज सिंह चौहान सीएम आवास खाली कर रहे हैं। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान कुछ देर में सीएम हाउस छोड़कर B8 74 बंगले में शिफ्ट हो गए।इससे पहले श‍िवराज सिंह चौहान ने परिवार सहित सीएम हाउस स्थित मंदिर में पूजा अर्चना की और गौशाला में गौ माता के दर्शन किए । इस अवसर पर सीएम हाउस में पदस्थ सुरक्षा कर्मियों ने उन्हे विदाई भी दी। धर्मपत्‍नी साधना सिंह ने भी श‍िवराज को तिलक कर और आरती उतारकर स्‍वागत किया।इस दौरान श‍िवराज ने मीडिया के सवालों के जवाब भी दिए। उन्‍होंने नए दायित्‍व के बारे में पूछे गए सवाल पर कहा कि पार्टी उन्‍हें जो भी जिम्‍मेदारी देगी वे उसे निभाएंगे।उल्‍लेखनीय है कि दिल्‍ली में श‍िवराज भाजपा के वरिष्‍ठ नेताओं से मुलाकात के बाद यह स्‍पष्‍ट हो गया है कि पार्टी उन्‍हें लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राष्‍ट्रीय स्‍तर पर कोई महत्‍वपूर्ण दायित्‍व सौंपेगी। श‍िवराज ने भी यह कहा है कि वे फ‍िलहाल दक्षिण के राज्‍यों का दौरा करेंगे।

फर्जी उपार्जन केंद्रों पर बड़ी कार्यवाही, फूड कंट्रोलर सस्पेंड, सीएम मोहन यादव ने लिया संज्ञान.

Major crackdown on fake purchasing centers, Food Controller suspended; CM Mohan Yadav takes cognizance. Special Correspondent, Sahara Samachaar, Jabalpur. जबलपुर । नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग मंत्रालय भोपाल द्वारा मंगलवार की शाम जबलपुर के फूड कंट्रोलर कमलेश टांडेकर को सस्पेंड कर दिया गया है। उन्हें उपार्जन केंद्रों की स्थापना में हुई देरी और अनियमियता का दोषी पाया गया है। जिसके बाद यह कार्रवाई की गई है। इसके अलावा जो 20 सदस्य जांच दल जबलपुर आया हुआ था उसने भी अपनी रिपोर्ट मेल के माध्यम से मुख्यालय में भेज दी है जिसके बाद मंगलवार देर रात या बुधवार को और भी बड़ी कार्यवाहियां हो सकती हैं। जिसमें कुछ गोदाम को ब्लैकलिस्टेड करने की बात सामने आ रही है। इस पूरे मामले की गंभीरता को इस बात से भी समझा जा सकता है कि वल्लभ भवन से मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा इस पूरे मामले की रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों से मांगी गई है जबकि जबलपुर आई टीम के द्वारा अपनी रिपोर्ट दे दी गई है। ऐसे में सीएम को वास्तुस्थिति से अवगत कराया जाएगा।

मंत्री बनने के बाद अब मोहन सरकार को विभाग बंटवारे में आ रहा पसीना.

After becoming a minister, Mohan Sarkar is now breaking a sweat over the departmental allocations. भोपाल। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मोहन कैबिनेट की पहली बैठक मंत्रालय में हुई। बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सभी वरिष्ठ और अनुभवी हैं। हमें मिलकर काम करना है। संकल्प पत्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी है। अधिकारियों को संकल्प पत्र की प्रक्रिया की जा चुकी है और सबसे कार्य योजना बनाने के लिए दे दिया है। सोमवार को 28 मंत्रियों की शपथ के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने कैबिनेट के सहयोगियों के साथ मंगलवार को मंत्रालय में बैठक की। हालांकि यह बैठक बिना एजेंडे की भी, इसमें सभी ने एक दूसरे को बधाई दी। इस बैठक के साथ ही यह सुगबुगाहट तेज हो गई है कि मंत्रियों के विभागों को बंटवारा मंगलवार शाम तक हो सकता है। सीनियर मंत्रियों को नहत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी दिए जाने की भी चर्चा जोरों पर हैं।जानकारी के मुताबिक बैठक में प्रदेश के विकास और विकसित भारत संकल्प यात्रा पर चर्चा हुई। विकसित भारत संकल्प यात्रा प्रदेशभर में शुरू हो चुकी है। अब मंत्रयों की जिम्मेदारी तय होगी कि वे जिलों में विकसित भारत संकल्प यात्रा को सफल बनाने के लिए काम करें। इसके लिए लोगों से संवाद और उनको केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए कहा जाएगा, ताकि चुनाव के पहले सभी लोकसभा क्षेत्रों में शतप्रतिशत हितग्राहियों को लाभ मिल सके।

बदलाव की राह पर भाजपा ने लगाई मुहर

On the path of change, the BJP has stamped its approval. उदित नारायण भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंत्रिमंडल में जिस तरह लगभग दो तिहाई नए चेहरों को पहली बार शामिल किया, वह भाजपा द्वारा बदलाव की राह लाने जैसा है। विजय शाह, विश्वास सारंग प्रदुम्न तोमर तुलसी सिलावट ,करण सिंह वर्मा को छोड़कर किसी ऐसे मंत्री को मौका नहीं दिया गया है, जो लंबे समय तक मंत्रिमंडल में रहा हो। भाजपा का यह बदलाव नए नेतृत्व को उभारने का प्रयोग है। जिसका प्रभाव आने वाले वर्षों में देखने को मिलेगा। इस बदलाव से कुछ अनुभवी और वरिष्ठ मंत्री मौका पाने से चूक गए, तो डेढ़ दर्जन नए चेहरों को मौका मिला। परंपरागत राजनीति करने और देखने वालों को इससे हैरत हुई होगी, लेकिन यथास्थिति में बदलाव किसी भी राजनीतिक दल के जीवंत रहने के लिए आवश्यक होता है। भाजपा ने 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ व राजस्थान में जिस तरह नेतृत्व परिवर्तन और मंत्रिमंडल में जो बदलाव किया, वह नए तरह की राजनीति है। बदलाव तो हार के बाद किया जाता रहा है और बंपर जीत के बाद यथास्थितिऔर मजबूत होती आई है। भाजपा ने जीत के बाद बदलाव कर भविष्य में हार की आशंका को खारिज करने का प्रयास किया है। मध्यप्रदेश में भाजपा थोड़े अंतराल से दो दशक लगातार सत्ता में है और अगले पांच साल का सफर जारी है। मंत्रिमंडल में लगातार लंबे समय तक मंत्री रहने वालों को बदलकर नए चेहरों को मौका देने से एकतरफ जहां एकरसता टूटती है, वहीं पार्टी कैडर में यह विश्वास जागता है कि उन्हे भी आने वाले समय में मौका मिल सकेगा।

मंत्रिमंडल में जगह न मिलने पर गोपाल भार्गव की प्रतिक्रिया

Gopal Bhargav’s reaction to not getting a place in the cabinet. भोपाल। गोपाल भार्गव को मोहन यादव मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है। जिसके बाद उन्होंने पोस्‍ट कर प्रतिक्रिया दी। हालांकि बाद में यह पोस्ट उन्होंने डिलीट कर दी। सोमवार को हुए मंत्रिमंडल गठन में 18 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। हालांकि इसमें नौवीं बार विधायक बनने वाले गोपाल भार्गव को जगह नहीं मिली है। वे रहली सीट से विधायक हैं। इससे पहले गोपाल भार्गव शिवराज सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वहीं गोपाल भार्गव को मंत्री न बनाए जाने को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही है। इसी बीच गोपाल भार्गव ने सोशल मीडिया पर पोस्‍ट कर अपना पक्ष रखा है। हालांकि गोपाल भार्गव ने यह पोस्‍ट बाद में डिलीट कर दी। अब इस पोस्‍ट का स्‍क्रीन शॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। क्‍या लिखा था पोस्‍ट मेंवायरल हो रही पोस्‍ट में गोपाल भार्गव ने लिखा कि, ‘आज मप्र राज्य के मंत्री परिषद् का पूर्ण रूपेण गठन हो गया है, मैं नवनियुक्त मंत्रीगणों को अपनी ओर से शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं। प्रदेश भर से मेरे समर्थक मुझसे पूछ रहे हैं कि ऐसा क्या हुआ है कि आपको मंत्री मंडल में नहीं लिया गया? मैंने उनसे कहा 40 वर्षों के लंबे राजनीतिक जीवन में अब तक पार्टी ने जो भी जिम्मेदारियां दी है उनको समर्पित भाव से पूर्ण किया है और आगे भी करते रहने के लिए संकल्पित हूं इसलिए आज मंत्रिपरिषद के गठन में पार्टी द्वारा लिए गए निर्णय का मैं स्वागत करता हूं। पद आते-जाते रहते हैं, पद अस्थायी हैं, पर जन विश्वास स्थाई है, इतने वर्षों तक मैंने अपने क्षेत्र और प्रदेश की जो सेवा की है वह मेरी पूंजी और धरोहर है। मेरे क्षेत्र ने मुझे प्रदेश का सबसे वरिष्ठ 9वीं बार विधायक बनाया जो देश में दुर्लभ एवं अपवाद है, मुझे 70% वोट देकर 73000 वोटों से जिताया यह ऋण मेरे ऊपर है। मैं जब तक इस क्षेत्र का विधायक रहूँगा कोई कमी या अभाव नहीं रहने दूंगा। राजनीतिक दलों के अपने-अपने फार्मूले हैं। सामाजिक, क्षेत्रीय कारण हैं जिनके आधार पर पद दिए जाते हैं, उसके भीतर जाने या जानने में मेरी कोई रुचि नहीं है इसलिए मैं मौन हूं। खाली समय में अब में प्रदेश में समाज को संगठित कर समाज उत्थान के लिए कार्य करूंगा।’

शिक्षा में विभाग में शासकीय राशि का भारी मात्रा में गबन, 15 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज, जांच जारी.

Embezzlement of amount of government funds in the Education Department, cases filed against 15 individuals, investigation underway. बालाघाट, में शिक्षा विभाग में लाखों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। जिला शिक्षा अधिकारी की शिकायत पर पुलिस ने 15 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। बालाघाट। जिला शिक्षा में विभाग में शासकीय राशि का भारी मात्रा में गबन करने का मामला प्रकाश में आया है। जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी अश्विनी कुमार उपाध्याय ने कोतवाली थाना पहुंचकर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। उक्त मामले में पुलिस ने करीब 15 लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किया है।2018 से 2019 तक हुआ गोलमालकोतवाली थाना से मिली जानकारी के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी अश्विनी कुमार उपाध्याय ने कोतवाली थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि, 29 सितंबर 2018 से 19 दिसंबर 2023 के बीच उत्कृष्ट विद्यालय बालाघाट कार्यालय के प्राचार्य सहायक ग्रेड 3 दुर्गेश कुमार द्वारा योजनाबद्ध तरीके से शासकीय दस्तावेजों में कूटरचित कर धोखाधड़ी पूर्वक राशि निकाली गई और इस राशि को करीब 15 शासकीय और अशासकीय व्यक्तियों के खातों में बालाघाट के कोषालय के माध्यम से भुगतान कराया गया है। इनके विरुद्ध किया अपराध दर्जशिकायत मिलने के बाद लिखित शिकायत के आधार पर बालाघाट उत्कृष्ट विद्यालय के बीओ कार्यालय के प्राचार्य दुर्गेश कुमार, अंबेश, लक्ष्मी, देवी चरण पटले, परेश कुंभारे, मुकेश डिब्बे, शैलेंद्र खरखटे, अभिषेक शुक्ला, अबीर खटोले, सुरेश, तीरेश कुमार अग्रवाल, भक्ति दोहरे, कल्याणी, नरेश फुंदे, और रूपाली वामनकर के विरुद्ध कोतवाली थाने में भारतीय दंड विधान की धारा 420,467,468,471 और 120 बी के तहत अपराध दर्ज कर मामले को विवेचना में लिया है। इनका कहना कूटरचित दस्तावेज तैयार कर शासकीय राशि का दुरुपयोग करने से संबंधित कार्रवाई के लिए कलेक्टर महोदय से आदेश प्राप्त होने पर उक्त मामले में कोतवाली थाना में शिकायत दर्ज करवाई गई है। जिसकी विवेचना की जा रही है। विवेचना में जो भी तथ्य सामने आएंगे उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी। -अश्विनी कुमार उपाध्याय, जिला शिक्षा अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा की गई शिकायत के आधार पर 15 लोगों के विरुद्ध शासकीय राशि 86 लाख 44 हजार 323 रुपये गबन किए जाने के संबंध में धोखाधड़ी की संबंधित धारा के तहत अपराध दर्ज कर मामले को विवेचना में लिया गया है, मामले की विवेचना की जा रही है। -प्रकाश वास्कले, निरीक्षक, कोतवाली.

मंत्रिमंडल विस्तार में सभी को साधने की कोशिश

Efforts to accommodate everyone in cabinet expansion मंत्रिमंडल विस्तार में सभी को साधने की कोशिश, 50 फीसदी नए विधायकों को मिला मौका— प्रथम पेज मंत्रिमंडल विस्तार में सात सामान्य, 12 ओबीसी व बाकी एससी-एसटी विधायक बने मंत्री भोपाल। माेहन कैबिनेट में आज से 28 मंत्री और जुड़ गए। मंत्रिमंडल विस्तार में 18 कैबिनेट, 6 स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री व 4 राज्य मंत्री बनाए गए हैं। इन मंत्रियों में 11 ऐसे हैं, जो मंत्री रह चुके हैं। इसमें से 6 मंत्री ऐसे हैं, जो पिछली भाजपा सरकार में भी मंत्री थे। मंत्रियों की कुल संख्या के हिसाब से 50 फीसदी नए विधायकों को मंत्री बनाया गया है। करीब 20 फीसदी यानी कुल 5 महिलाएं कैबिनेट व राज्य मंत्री बनी है। तीन ऐसे मंत्री भी हैं, जो लोकसभा सांसद या केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। ग्वालियर, भोपाल, इंदौर व दमोह से दो-दो मंत्री व बाकी जिलों से एक-एक मंत्री बने हैं।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय, जातीय व जिलेवार संतुलन को साधने की पुरजोर कोशिश की है। मंत्रिमंडल विस्तार में 7 सामान्य, 12 ओबीसी व बाकी एससी-एसटी विधायकों को मंत्री बनाया गया है। इसके लिए हालांकि स्थानीय संगठन व संघ पदाधिकारियों से लेकर नई दिल्ल्ाी में राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्रियों से चर्चा की गई। इस विस्तार में मप्र से मुख्यमंत्री यादव के अलावा किसी की नहीं चली। पुराने मंत्रियों को दरकिनार करने की मुख्य वजह क्षेत्रीय संतुलन व उनके पुराने परफारमेंस व अंदरूनी रिपोर्ट को देखा गया। इसमें भी क्षेत्रीय संतुलन भारी रहा। सूची फायनल करने में तीन बार दिल्ली के चक्कर लगाने पड़े-मंत्रियों के नाम फायनल करने में मुख्यमंत्री को पिछले 12 दिनों में तीन बार दिल्ल्ाी के चक्कर लगाने पड़े। कैबिनेट, स्वतंत्र प्रभार व राज्यमंत्रियों के चयन में दोनों उप मुख्यमंत्रियों के साथ ही संघ नेताओं व प्रदेश अध्यक्ष को तवज्ज्ाों दी गई। सूत्रों के मुताबिक पिछले 48 घंटे में ही कई तरह के बदलाव करने पड़े। कुछ मामलों में तो वरिष्ठ नेताओं के दबाव को भी दरकिनार कर दिया गया। संगठन का स्पष्ट कहना था कि चूंकि सभी को मंत्री नहीं बनाया जा सकता। ऐसे में नए विधायकों पर ज्यादा भरोसा जताया गया।  कई मामलों में चौकानें वाले निर्णय लिए गए-भोपाल जिले से चार दावेदार थे। किंतु दो को ही मंत्री बनाया जा सकता था। मुख्यमंत्री ने वही निर्णय लिया। रायसेन जिले से पिछली बार डॉ. प्रभुराम चौधरी मंत्री थे, इस बार उन्हें मौका नहीं दिया गया। जबकि पुराने भाजपाई, पहली बार के विधायक नरेंद्र शिवाजी पटेल को मंत्री बनाया गया। नरेंद्र के पिता शिवा जी पटेल करीब 20 वर्ष पहले भाजपा के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। वे अब हालांकि नहीं हैं, किंतु उन्ाके बेटे को मौका दिया गया। सागर जिले में दो कद्दावर मंत्रियों गोपाल भार्गव व भूपेंद्र सिंह को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला, जबकि इनमें से भूपेंद्र सिंह को मंत्री बनाने की पूरी संभावना थी। हो सकता है लोकसभा चुनाव में इस पर ध्यान दिया जाए। इसीतरह बैतूल जिला पूरी तरह से अछूता रहा। यहां से एक भी विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया। नए विधायकों पर बड़ी जवाबदारी -मंत्रिमंडल में 50 फीसदी नए विधायकों को मंत्री पद दिया गया है। इस हिसाब से मुख्यमंत्री यादव ने पुरानाें के साथ ही नए विधायकों पर भरोसा जताया है। हालांकि इनमें से कई ऐसे हैं, जो दो-दो बार के विधायक हैं। कैबिनेट मंत्रियों में चार विधायक ऐसे हैं, जो पहली बार मप्र विधानसभा का टिकट लेकर चुनाव लड़े और विधायक बने। हालांकि यह सभी केंद्र में जरूर सांसद और मंत्री थे। अब उन्हें प्रदेश में भी बड़ी जिम्म्ोदारी दी गई है। अभी भी हालांकि विधानसभा की कुल संख्या के हिसाब से 15 फीसदी यानी कुल 34 मंत्री बनाए जा रहे हैं। इस तरह से तीन मंत्री और बनाए जा सकते हैं। मंत्रिमंडल में यह बने कैबिनेट, स्वतंत्र प्रभार व राज्य मंत्री बने-राजभवन में आज सोमवार को गरिमामय माहौल में दोपहर बाद 3.30 बजे राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने मंत्रियों को शपथ दिलाई। मंत्रिमंडल शपथ ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन राजभवन के सांदीपनि सभागार में किया गया था। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व वरिष्ठ भाजपा व संघ के नेता मौजूद थे। शपथ विधि का संचालन मुख्य सचिव श्रीमती वीरा राणा ने किया। शपथ ग्रहण समारोह को काफी सीमित रखा गया था। इसीलिए काफी लोगों को आमंत्रण नहीं दिया गया। इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, सांसद एवं प्रदेश अध्यक्ष भाजपा वीडी शर्मा एवं अन्य जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।कैबिनेट मंत्री -1-प्रदुम्न सिंह तोमर, ग्वालियर2-तुलसी सिलावट, इंदौर3- एंदल सिंह कसाना, मुरैना4-नारायण सिंह कुशवाह, ग्वालियर5-विजय शाह, खंडवा6-राकेश सिंह, जबलपुर7-प्रह्लाद पटेल, नरसिंहपुर8-कैलाश विजयवर्गीय, इंदौर-19-करण सिंह वर्मा, इछावर, सीहोर10-संपतिया उईके, मंडला11-राव उदय प्रताप सिंह, गाडरवारा, नर्मदापुरम12-निर्मला भूरिया, पेटलावद झाबुआ13-विश्वास सारंग, नरेला भोपाल14-गोविंद सिंह राजपूत, सुरखी सागर15-इंदर सिंह परमार, शाजापुर16-नागर सिंह चौहान, अलीराजपुर17-चैतन्य कश्यप, रतलाम18-राकेश शुक्ला, मेहगांव भिंड। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार )19-कृष्णा गौर, गोविंदपुरा भोपाल20-धर्मेंद्र लोधी, जबेरा दमोह21-दिलीप जायसवाल22-गौतम टेटवाल23- लखन पटेल, दमोह24- नारायण पवार, राजगढ़। राज्यमंत्री -25–राधा सिंह, चितरंगी सीधी26-प्रतिमा बागरी, रैगांव सतना27-दिलीप अहिरवार, चंदला छतरपुर28-नरेन्द्र शिवाजी पटेल, उदयपुरा, रायसेन।

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