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हिनौती गौधाम में अव्यवस्थित निर्माण पर रोक, मास्टर प्लान के मुताबिक काम कराने के निर्देश: उपमुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा के हिनौती गौधाम में आयोजित बैठक में कहा कि मास्टर प्लान के अनुसार ही सभी निर्माण कार्य कराये जांय। उन्होंने निर्माण एजेंसियों को निर्देशित किया कि गौधाम में प्रस्तावित गौशेड, भूसा शेड सहित अन्य कार्य व्यवस्थित ढंग से लेआउट देकर प्रारंभ करायें। उन्होंने गौधाम के निर्माणाधीन गौशेड एवं गेस्ट हाउस का कार्य 30 मार्च तक पूर्ण कराकर लोकार्पण कराने के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने विधायक मनगवां द्वारा प्रदत्त की गयी 3 करोड़ 60 लाख रूपये की राशि से गोपाल, सुरभि एवं नंदिनी गौशेड निर्माण कार्य की प्रगति जानकारी ली। उन्होंने सभी कार्य 30 मार्च तक पूर्ण करने के निर्देश दिये। कामधेनु गौशेड के साथ भूसा शेड का कार्य भी नियत समय तक पूर्ण किये जाने का निर्देश दिया। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने उनके स्वयं की विधायक निधि से स्वीकृत 3 करोड़ 60 लाख रूपये की राशि से मास्टर प्लान के अनुसार व्यवस्थित ढंग से निर्माण कार्य कराने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि गौधाम से लगी किसानों की निजी भूमि में गौवंश न जाएँ यह व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने गौशाला संचालन समिति में क्रियाशील सदस्यों को शामिल करने के भी निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि गौधाम से लगे नाले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा की गयी घोषणा के अनुसार शीघ्र कार्य प्रारंभ करायें। उन्होंने गौधाम में जल निगम एवं पीएचई द्वारा निर्मित की गयी जन भागीदारी से टंकी व नेटवर्क पाइप लाइन कार्य के लिए विभागीय अधिकारियों की प्रशंसा की। इस अवसर पर बताया गया कि सभी गौशेड में पानी का कनेक्शन कर दिया गया है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने गौधाम के लिए शासकीय भूमि का शेष सीमांकन कराने के निर्देश बैठक में अधिकारियों को दिये। उन्होंने गौधाम के लिए सड़क निर्माण व अन्य प्रयोजन के लिए निजी भूमि दाताओं का द्वारा प्रदत्त भूमिदान के लिये सम्मान किया। उन्होंने पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को निर्देशित किया कि मुख्यमार्ग से गौधाम तक प्रस्तावित सड़क निर्माण का कार्य शीघ्र प्रारंभ करायें। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने गौपूजन कर गाय को गुड खिलाया। विधायक मनगवां इंजी. नरेन्द्र प्रजापति, जिला पंचायत अध्यक्ष मती नीता कोल, पूर्व विधायक  श्यामलाल द्विवेदी सहित विभागीय अधिकारी एवं स्थानीय जन उपस्थित रहे।    

संस्कृति और परंपराओं का उल्लास आने वाली पीढ़ी को समझाएगा उनका महत्व : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि हम अपनी संस्कृति और परंपराओं को जितना उल्लास के साथ मनायेंगे आने वाली पीढ़ी उसके महत्व को समझेगी और वह भी इस परंपरा को आजीवन काल तक चिर स्थाई बनाकर रख सकेगी। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल रीवा में माँ कर्मा जयंती महोत्सव में शामिल हुए। राजकपूर आडिटोरियम में साहू युवा संगठन के संयोजकत्व में आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ने माँ कर्मा की विधि विधान से आरती की। उन्होंने कहा कि माँ कर्मा कृष्ण भक्त थीं और भगवान  कृष्ण उनकों साक्षात दर्शन देते थे और उनकी मनोकामनाओं की पूर्ति करते थे। माँ कर्मा भक्ति की प्रतीक थी। माँ कर्मा जयंती का आयोजन महान आत्माओं को याद दिलाने का आयोजन है। इस आयोजन के लिए आयोजनकर्ता बधाई के पात्र हैं। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि मैं कल भी माँ कर्मा शोभा यात्रा का साक्षी बना था और आज इस आयोजन में भी उपस्थिति हुआ हूं। मैं सौभाग्यशाली हूं कि इन आयोजनों में शामिल हुआ। माँ कर्मा जयंती महोत्सव में विधायक सिंगरौली  रामनिवास शाह, पूर्व मंत्री  रविकरण साहू, करण साहू, नगर परिषद अध्यक्ष रामपुर नैकिन  रामकुमार साहू सहित समाज के अन्य गणमान्य नागरिकों ने अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर रायपुर छत्तीसगढ़ की भजन गायिका हीना सिंह ने शानदार प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में नगर निगम अध्यक्ष  व्यंकटेश पाण्डेय,  वंशीलाल साहू सहित बड़ी संख्या में साहू समाज के पदाधिकारी एवं आयोजक उपस्थित रहे।  

ग्वालियर अस्पताल में लिफ्ट बंद होने से परेशानी, 20 दिनों से मरीजों को सीढ़ियों के सहारे पहुंचाया जा रहा वार्ड तक

ग्वालियर ग्वालियर के हजार बिस्तर अस्पताल में पिछले करीब 20 दिनों से कई लिफ्ट बंद होने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के कई ब्लॉकों में छह से अधिक लिफ्टें बंद हैं, जबकि सी ब्लॉक में मरीजों को केवल एक लिफ्ट के भरोसे रहना पड़ रहा है। ऐसे में दूसरी, तीसरी और छठी मंजिल पर भर्ती मरीजों को जांच के लिए नीचे लाने और फिर ऊपर ले जाने में काफी मुश्किल हो रही है। लिफ्ट बंद होने के कारण गंभीर और ऑपरेशन वाले मरीजों को सीढ़ियों के सहारे या स्ट्रेचर खींचकर ऊपर-नीचे ले जाना पड़ रहा है। इस दौरान मरीजों के परिजन भी काफी परेशान हो रहे हैं। कई बार मरीज दर्द से कराहते हुए सीढ़ियों पर ही रुकने को मजबूर हो जाते हैं। प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप अस्पताल की स्थिति को लेकर गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय (जीआरएमसी) प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि लिफ्टों की मरम्मत को लेकर डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ को पत्र लिखकर जानकारी दी गई है, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। करोड़ों का बजट, फिर भी परेशानी अस्पताल के रखरखाव और सुविधाओं के लिए हर साल करोड़ों रुपये का बजट आवंटित किया जाता है, इसके बावजूद बार-बार तकनीकी खराबी और लिफ्ट बंद होने की समस्या सामने आ रही है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों ने जताई नाराजगी अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि लिफ्ट बंद होने के कारण उन्हें काफी दिक्कत हो रही है। पेट दर्द से पीड़ित सविता को परिजन सी ब्लॉक में लिफ्ट तक लेकर पहुंचे, लेकिन वहां लिफ्ट खराब मिली। गार्ड ने दूसरी लिफ्ट की जानकारी दी, जिसके लिए काफी देर इंतजार करना पड़ा। वहीं मरीज जय नारायण को उनके बेटे सीढ़ियों के सहारे नीचे लेकर आए। उनका कहना है कि लिफ्ट बंद होने से अस्पताल में इलाज के साथ-साथ आवागमन भी मुश्किल हो गया है। मरीजों ने प्रशासन से जल्द लिफ्ट ठीक कराने की मांग की है।

डॉक्टर सेवाभाव से मरीज का करें इलाज : उप मुख्यमंत्री शुक्ल जी मीडिया समूह के कार्यक्रम में रीवा शहर के डॉक्टर्स का किया सम्मान

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि डॉक्टर को संवेदनशीलता के साथ मरीज का इलाज करना चाहिए। उन्होंने कहा कि धरती में डॉक्टर भगवान के सामान हैं डॉक्टर भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन सेवाभाव से करें। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने पत्रिका समूह द्वारा आयोजित चिकित्सकों के सम्मान समारोह में शहर के डॉक्टर्स का सम्मान किया। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि किसी मीडिया समूह द्वारा चिकित्सकों का रीवा में पहली बार इस तरह का सम्मान किया गया है। यह आयोजन सिद्ध करता है कि रीवा में डॉक्टर्स बेहतर कार्य कर रहे हैं। रीवा को मेडिकल हब बनाने का सपना सही दिशा में जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब जीवन संकट में आता है तो केवल डॉक्टर के पास ही लोग जाते हैं। मेहनत से किये गये कार्य की जब बड़े सामाजिक स्तर पर सराहना मिलती है तो उत्साह भी बढ़ता है। सांसद  जनार्दन मिश्र ने कहा कि विचारहीन समाज स्थाई नहीं होता किसी भी क्षेत्र में विचार के ऊपर व्यावसायिकता नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रिका समूह द्वारा डॉक्टर्स का किया गया सम्मान प्रशंसनीय है। उन्होंने आयोजन से कहा कि सकारात्मक कार्यो के लिए केवल प्रेरित ही नहीं किया जा रहा बल्कि सामने आकर कार्य भी किया जा रहा है। उन्होंने सम्मानित होने वाले डॉक्टर्स को शुभकामनाएं दी तथा उनके द्वारा कोरोनाकाल सहित अन्य समय में किये गये सेवाभाव की प्रशंसा भी की। नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पाण्डेय सहित चिकित्सक व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।  

अब जमीन के नीचे चलेगी भोपाल मेट्रो, 15 मीटर गहराई में TBM; पुराने शहर में सुरंग का काम शुरू

भोपाल राजधानी में मेट्रो रेल परियोजना अब अपने सबसे चुनौतीपूर्ण और रोमांचक चरण में प्रवेश कर रही है। भोपाल मेट्रो की आरेंज लाइन के तहत भोपाल रेलवे स्टेशन से नादरा बस स्टैंड तक 3.39 किलोमीटर लंबे भूमिगत कॉरिडोर के निर्माण की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस ट्विन टनल को बनाने के लिए टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का पहला पार्ट क्रेन के जरिए करीब 15 मीटर जमीन की गहराई में उतारा जा चुका है। तकनीकी इंस्टालेशन और जांच के बाद मार्च के अंतिम सप्ताह या अप्रैल के पहले सप्ताह से जमीन के अंदर सुरंग बनाने के लिए जमीन की खोदाई का काम शुरू हो सकता है। पुल पातरा और सिंधी कालोनी में एक अंडरग्राउंड रैंप बनाया जाएगा, जिसके जरिए मेट्रो ट्रेन भूमिगत स्टेशन तक पहुंचेगी। दिसंबर में बेंगलुरु से आई थी टीबीएम मशीन यह टीबीएम मशीन दिसंबर 2025 में बेंगलुरु से भोपाल पहुंची थी। टीबीएम के कुल तीन से चार बड़े हिस्से हैं, जिन्हें एक-एक कर जमीन के नीचे उतारा जाएगा। पूरी तरह असेंबल होने के बाद यह मशीन 19 से 20 मीटर की गहराई पर जाकर सुरंग के लिए जमीन की खोदाई करेगी। यह टनल भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड जैसे शहर के सबसे घने और व्यस्त इलाकों के नीचे से गुजरेगी। हालांकि मेट्रो प्रबंधन का दावा है कि टीबीएम से खोदाई के दौरान किसी भी प्रकार का कंपन नहीं होगा और ऊपर रहने वाले लोगों को इसका आभास भी नहीं होगा। पुरानी इमारतों की सुरक्षा और विरासत की चुनौती सुरक्षा के लिहाज से प्रबंधन उन पुरानी इमारतों और होटलों को लेकर सतर्क है जो पुल पातरा से सिंधी कालोनी के बीच स्थित हैं। इनमें से कई इमारतें काफी जर्जर और पुरानी हैं। इस भूमिगत तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि शहर के व्यस्ततम रास्तों के नीचे काम चलने के बावजूद ऊपर का ट्रैफिक और ऐतिहासिक विरासतें पूरी तरह अप्रभावित रहेंगी। यह पूरा प्रोजेक्ट पैकेज बीएच-04 के तहत संचालित किया जा रहा है। एक नजर में भूमिगत कॉरिडोर (ऑरेंज लाइन)     क्षेत्र: भोपाल रेलवे स्टेशन से नादरा बस स्टैंड तक     टनल की लंबाई: लगभग 3.39 किलोमीटर     संरचना: 02 समानांतर सुरंगें     गहराई: 20 मीटर की गहराई में सुरंग बनाएगी मशीन मशीन की तकनीकी क्षमता     नाम: टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम)     आगमन: दिसंबर 2025 (बेंगलुरु से भोपाल लाई गई)     व्यास: 5.8 मीटर     क्षमता: एक मशीन की प्रतिदिन 15 मीटर खोदाई की क्षमता     स्थिति: 15 मीटर गहराई पर उतारा गया मशीन का पहला पार्ट  

विदेशों में निवेश की तलाश: सिंगापुर और लंदन में रोड शो, MP को सौर ऊर्जा हब बनाने की तैयारी

भोपाल मध्य प्रदेश ने 2030 तक अपनी ऊर्जा खपत के 50 प्रतिशत हिस्से की पूर्ति सौर ऊर्जा से करने की कार्य योजना बनाई है। इसके लिए प्रदेश में कई परियोजनाओं पर काम भी चल रहा है। इसे और गति देने के लिए निवेश बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में इस साल दिल्ली, मुंबई, सिंगापुर और लंदन में रोड शो आयोजित कर मुरैना-2 सौर सहित ऊर्जा भंडारण परियोजना का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। मुरैना-2 परियोजना में छह माह बिजली उत्तर प्रदेश और छह माह मध्य प्रदेश को मिलेगी। वैश्विक स्तर पर निवेशकों को लुभाने की तैयारी रोड शो में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सौर ऊर्जा से जुड़े उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ बैठक कर प्रदेश में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं से अवगत कराएंगे। बता दें कि 24 और 25 फरवरी 2025 को भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में 5.72 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले थे। इससे 1.4 लाख रोजगार सृजन संभावित हैं। मध्य प्रदेश अपनी आवश्यकता की 50 फीसदी विद्युत आपूर्ति सौर ऊर्जा से करेगा। वर्ष 2030 तक लगभग 40 हजार मेगावाट बिजली की आवश्यकता होगी। इसमें से आधी यानी 20 हजार मेगावाट बिजली सौर ऊर्जा से बनाई जाएगी। इसके लिए सरकार कार्ययोजना बनाकर काम कर रही है। प्रदेश में अभी 26 हजार मेगावाट बिजली की खपत है, जिसमें सात हजार मेगावाट बिजली की पूर्ति सौर ऊर्जा से हो रही है। मुरैना और अन्य जिलों में प्रस्तावित बड़ी परियोजनाएं आठ हजार मेगावाट की दो सौर ऊर्जा की परियोजनाएं मुरैना में स्थापित की जाएंगी। वहीं साढ़े सात हजार मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं छह जिलों (आगर, धार, अशोकनगर, भिंड, शिवपुरी और सागर) में प्रस्तावित की गई हैं। 15 हजार हेक्टेयर भूमि भी चिन्हित कर ली गई है। गांधीनगर में चौथी ग्लोबल रिन्यूएबल एनर्जी इन्वेस्टर समिट में अवाडा ग्रुप ने पांच हजार करोड़ और रिन्यू पावर ने छह हजार करोड़ रुपये निवेश करने की रुचि दिखाई। इसके अलावा जल संसाधन विभाग भी 100 मेगावाट की परियोजना पर काम कर रहा है। नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य की विशेष उपलब्धियां सांची मप्र की पहली सोलर-सिटी है। देश के सौर ऊर्जा उत्पादन में मध्य प्रदेश 8.2 प्रतिशत के योगदान के साथ चौथे स्थान पर है। ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्लांट भारत का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्लांट है। रीवा स्थित दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट सोलर प्लांट (750 मेगावाट) दिल्ली मेट्रो को बिजली प्रदान करता है। नीमच जिले में भारत की सबसे बड़ी पंप स्टोरेज परियोजना 7,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को एकीकृत करती है। पावर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग जोन नर्मदापुरम के मोहासा बाबई में 884 एकड़ में विकसित किया जा रहा है।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा ने घरेलू गैस आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा जिले में घरेलू गैस आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा करते हुए निर्देश दिये कि नियमित घरेलू गैस सिलेण्डर आपूर्ति की व्यवस्थाएँ सुनिश्चित कराई जाय। बुकिंग के आधार पर गैस लेने वाले उपभोक्ताओं को सुगमता से गैस सिलेण्डर मिले। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने केन्द्रीय व प्रदेश स्तर के अधिकारियों से फोन से रीवा जिले में नियमित गैस सिलेण्डर आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि इस बात के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं कि जिले में नियमित गैस सिलेण्डर की आपूर्ति होती रहे और बुकिंग का बैकलाग समाप्त हो जाय और लोगों को बिना किसी परेशानी के गैस सिलेण्डर मिलता रहे। कलेक्टर मती प्रतिभा पाल ने बताया कि सर्वर के ठीक ढंग से कार्य करने से गैस की आनलाइन बुकिंग हो रही है। रीवा शहर में गैस की उपलब्धता के अनुसार वितरण किया जा रहा है। नियमित आपूर्ति के सभी प्रयास जारी हैं, जिससे बैकलाग को पूरा करते हुए लोगों को सुगमता से गैस सिलेण्डर का वितरण हो सके। बैठक में गैस एजेंसी संचालकों ने गैस वितरण में प्रशासन द्वारा दिये गये सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि गैस वितरण की सुगम व्यवस्था के लिए एजेंसियों द्वारा कार्य किया जा रहा है। बैठक में अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय, अपर कलेक्टर मती सपना त्रिपाठी, जिला आपूर्ति नियंत्रक  कमलेश ताण्डेकर सहित गैस एजेंसी के संचालक उपस्थित रहे।  

कुत्ते की तलाश में 8 दिन की छुट्टी! MP में भेल कर्मचारी के अनोखे कदम से अफसर भी हैरान

भोपाल राजधानी के अवधपुरी क्षेत्र की एक कवर्ड कॉलोनी में इन दिनों एक ”आवारा कुत्ते” चर्चा का केंद्र बनी हुई है। यह मामला किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जहां कालोनी से श्वानों को बाहर निकालने का फैसला ”भेल” के जिम्मेदार कर्मचारियों पर इतना भारी पड़ा कि उन्हें अपनी होली और रंगपंचमी सड़कों पर खाक छानते हुए बितानी पड़ी। मामले में मेनका गांधी की सक्रियता और प्रशासन के कड़े रुख ने कॉलोनी के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारियों की रातों की नींद उड़ा दी। पदाधिकारी जिन सरकारी और निजी संस्थानों में ऊंचे पदों पर कार्यरत थे, वहां भी शिकायतें पहुंचने लगीं। दबाव इतना बढ़ा कि इन जिम्मेदार पदाधिकारियों को अपने दफ्तरों से छुट्टी लेनी पड़ी। मेनका गांधी और पीएमओ तक पहुंची शिकायत दरअसल, भोपाल स्थित नवरत्न कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिक लिमिटेड (भेल) के कर्मचारी आठ दिनों तक एक कुत्ते को खोजते रहे। हुआ यह कि ये कर्मचारी अवधपुरी क्षेत्र की जिस सोसाइटी में रहते हैं, वहां एक कुत्ता प्रेमी महिला एक आवारा कुतिया को रोज खाना खिलाती थी। कालोनी में घूमने वाले आवारा कुत्तों को हटाने के क्रम में रहवासियों ने उसे भी भगा दिया। इससे दुखी होकर उस महिला ने भेल प्रबंधन, पुलिस आयुक्त, नगर आयुक्त, प्रधानमंत्री कार्यालय और पेटा जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं तक रहवासी कालोनी की सोसायटी के पदाधिकारियों की शिकायत कर दी। साथ ही पूर्व केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी कुत्ते के गायब होने को लेकर पत्र लिख दिया। छुट्टियों में कुत्ते पकड़ने का अनूठा ‘ऑपरेशन’ वहीं, भेल के जो कर्मचारी हैं, वे सोसायटी के पदाधिकारी थे। मामला बढ़ता देख भेल प्रबंधन ने भी कर्मचारियों को कुत्ते को खोजकर देने को कहा। ऐसे में भेल के कर्मचारी सहित सोसायटी के सभी पदाधिकारी अपनी होली और रंगपंचमी सहित आठ दिन तक खेतों में कुत्ते को पकड़ने के लिए उसके पीछे-पीछे घूमते रहे। कुत्ते की तलाश का ”आपरेशन” कुछ यूं चला – पदाधिकारियों ने शहर की गली-गली में कुत्ते को ढूंढा। सातवें दिन वह एक सुदूर इलाके में खेतों में मिली, लेकिन हाथ नहीं आई। कुत्ते को पकड़ने के लिए पदाधिकारी अगले दो दिनों तक बिस्कुट, ब्रेड और मछली-मुर्गे का मांस लेकर उसके पीछे घूमते रहे, ताकि उसे लालच देकर काबू किया जा सके। ‘नॉन-वेज’ डिप्लोमेसी से मिली कामयाबी जहां पूरा शहर होली, भाईदूज और रंगपंचमी के जश्न में डूबा था, वहीं ये पदाधिकारी कुत्ते पकड़ने वालों की भूमिका निभा रहे थे। आखिरकार भारी मशक्कत और ”नान-वेज” डिप्लोमेसी के बाद आठवें दिन कुत्ते को सुरक्षित पकड़कर वापस कालोनी लाया गया। तब जाकर महिला डाक्टर का गुस्सा शांत हुआ और प्रशासन ने अपनी फाइलें बंद कीं। कालोनी के लोग अब दबी जुबान में कह रहे हैं कि श्वानों को कालोनी से बाहर निकालना तो आसान था, लेकिन कानून और रसूख के शिकंजे से बाहर निकलना नामुमकिन हो गया था।

326 सफाईकर्मी ड्यूटी पर, बावजूद इसके भोपाल के कई बाजारों में साफ-सफाई नदारद

भोपाल स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 की तैयारियों को लेकर नगर निगम भले ही बड़े-बड़े दावे कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। शहर के कई हिस्सों में रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था ठप पड़ी हुई है। पुराने शहर के व्यापारिक केंद्रों में सफाई व्यवस्था के हाल बेहाल हैं। जहांगीराबाद चौराहा, जो शहर का एक प्रमुख व्यस्त केंद्र है, वहां देर रात तक सड़कों का कचरा नहीं उठने से सुबह सड़कों के किनारे कचरा पसरा रहता है। यही स्थिति अशोका गार्डन क्षेत्र के परिक्रमा मार्ग की है। रात में यहां सफाई टीम के न पहुंचने के कारण कचरे का अंबार लग जाता है, जिससे यहां से गुजरने वाले राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कागजों पर तैनात फौज, धरातल पर कर्मचारी गायब इसकी वजह यह है कि निगम के रिकॉर्ड में शहर के 85 वार्डों की सड़कों और बाजारों को चमकाने के लिए 326 सफाईकर्मियों की फौज तैनात है, लेकिन धरातल पर इनमें से बमुश्किल 50 कर्मचारी ही काम करते नजर आते हैं। नतीजा यह है कि सुबह होते ही पुराने शहर के प्रमुख बाजारों और मुख्य सड़कों पर कचरे के ढेर स्वच्छता अभियान को मुंह चिढ़ाते मिलते हैं। अशोका गार्डन के परिक्रमा मार्ग के आसपास रात 11:57 बजे फल, सब्जी सहित अन्य सामान के हाथ ठेले लग जाते हैं, जो सड़क किनारे ही कचरा फैलाते रहते हैं। ऐसे में सड़क किनारे कचरे का ढेर लग जाता है। वहीं, रात में सफाई के लिए तैनात अमले की अनुपस्थिति के कारण सड़क के दोनों ओर कचरा फैला रहता है। इससे रहवासी क्षेत्रों की सफाई भी प्रभावित हो रही है। जहांगीराबाद चौराहा: मुख्य मार्ग पर कचरे का अंबार पुराने शहर का हृदय कहे जाने वाले जहांगीराबाद चौराहा पर रात 12:38 बजे रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था का बुरा हाल मिला। चौराहे के पास ही मुख्य मार्ग किनारे कचरा फैला हुआ था। स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि रात दुकानों का कचरा लेने के लिए गाड़ी तो आती है, लेकिन सड़कों की सफाई के लिए कर्मचारी नहीं आते। आलम यह है कि सुबह व्यापारिक गतिविधियां शुरू होने से पहले ही मुख्य सड़क और चौराहे के किनारों पर कचरे का अंबार लग जाता है। स्वच्छ सर्वेक्षण के दावों के बीच यह व्यस्ततम इलाका नगर निगम की मॉनिटरिंग पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था में शहर की मुख्य सड़कों और बाजार क्षेत्रों की सफाई कराई जाती है। रोजाना करीब 25 से 30 टन कचरा रात में उठाया जाता है और कर्मचारियों की मॉनिटरिंग जीपीएस युक्त फोटो के जरिए की जा रही है। सुपरवाइजर द्वारा निगरानी की जाती है। बाजार क्षेत्र में रात में जहां सफाई नहीं हो पाती है, वहां सुबह जल्दी सफाई करा दी जाती है। – नितेश मिश्रा, एचओ, रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था  

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस पर आयोजित प्रदर्शनी का किया शुभारंभ

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने सभी को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज का दिन हमें यह याद दिलाता है कि एक सशक्त और जागरूक उपभोक्ता ही मजबूत अर्थव्यवस्था की नींव होता है।  राजपूत ने कहा कि खाद्य पदार्थों के रूप में धीमा जहर देने वाले के विरूद्ध कठोर कार्रवाई करें, तभी इस दिवस की सार्थकता सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि राज्य का प्रत्येक नागरिक किसी न किसी रूप में उपभोक्ता है इसलिए उसके अधिकारों की रक्षा करना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में है। उपभोक्ताओं को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और उचित मूल्य पर वस्तुएं एवं सेवाएं उपलब्ध हो, यह हमारा दायित्व भी है और संकल्प भी है। मंत्री  राजपूत ने कहा कि खरीददारी करते समय बिल लेना, उत्पाद की गुणवत्ता और समाप्ति की तिथि अवश्य देखना, किसी भी प्रकार की अनियमितता होने पर तुरंत शिकायत दर्ज कराना, यह सभी जागरूक उपभोक्ता को मजबूत बनाते हैं। उपभोक्ताओं के हित में भारत सरकार ने वर्ष 2019 में नया उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम बनाया। यह कानून उपभोक्ताओं के रक्षा की गारंटी देता है। इसमें 06 प्रकार के अधिकार चुनने का अधिकार, सूचित होने का अधिकार, उपभोक्ताओं की सुरक्षा का अधिकार, सुनवाई का अधिकार, उपभोक्ता की समस्याओं के निराकरण का अधिकार और उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार (जागरूक बने रहने का अधिकार) बताये गये हैं।  राजपूत ने कहा कि प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोलियम पदार्थ उपलब्ध हैं। भ्रामक खबरों से सावधान रहें। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वर्तमान परिस्थितियों में बड़े आयोजनों से बचें। जिद्दी उपभोक्ता बनें मंत्री  राजपूत ने कहा कि अपने अधिकारों के लिये उपभोक्ताओं को जिद करना चाहिये। ठगी होने पर उपभोक्ताओं को उपभोक्ता न्यायालयों की मदद लेनी चाहिए और इस संबंध में दूसरों को भी जागरूक करना चाहिये। उन्होंने इस संबंध में एक घटना का उल्लेख करते हुए सागर के डॉक्टर हरिसिंह गौर को भी याद किया।  राजपूत ने कहा कि मेरा आग्रह है कि हम सभी उपभोक्ता हैं तथा हम सभी का यह कर्तव्य है कि अनुचित व्यापार को रोकने में अपनी जागरूकता का परिचय दें एवं ठगे जाने से बचें। उपभोक्ता कानून में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने का प्रावधान है। सुनवाई वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से भी की जाती है। जिला आयोग/फोरम के निर्णय से असंतुष्ट होने पर राज्य आयोग में अपील का भी प्रावधान है। नापतौल में कमी मिलने पर कोई भी उपभोक्ता नापतौल कार्यालय एवं आयोग में शिकायत कर सकता है। जिला उपभोक्ता आयोग में 14 हजार से अधिक मामले निराकृत मंत्री  राजपूत ने बताया कि राज्य उपभोक्ता आयोग में वर्ष 2025-26 तक लगभग 3 हजार मामलों का निराकरण किया गया। इसी प्रकार जिला उपभोक्ता आयोग में 14 हजार से अधिक मामलों का निराकरण किया गया। राज्य उपभोक्ता आयोग में दिसंबर, 2020 से अभी तक 7 हजार 5 सौ से अधिक मामले ऑनलाईन दर्ज किये गये। जिला उपभोक्ता आयोगों में 26 हजार से अधिक मामले ऑनलाईन दर्ज हुये। सदस्य राज्य उपभोक्ता आयोग डॉ. मोनिका मलिक ने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य “सुरक्षित उत्पाद-सशक्त उपभोक्ता” है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष कुल 2574 मामले निराकृत हुए जबकि 2285 नये मामले दर्ज किये गये। आयुक्त खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण  कर्मवीर शर्मा ने कहा कि उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों से अवगत कराने के लिये यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों ने उपभोक्ता अधिकारों के बारे में जानकारी दी। पुरस्कार कार्यक्रम में वर्ष 2025 में बेहतर कार्य करने वाले स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनों, पोस्टर एवं निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। संस्थाओं में 1 लाख 11 हजार रूपये का प्रथम पुरस्कार अखिल भारतीय उपभोक्ता उत्थान संगठन कटनी को तथा 51 हजार रूपये का द्वितीय पुरस्कर प्राकृतिक चिकित्सालय महाविद्यालय समिति ग्वालियर को दिया गया। पोस्टर प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार उज्जैन की कु. अश्विता पोरवाल, द्वितीय इंदौर की कु. रानी चौधरी तथा तृतीय पुरस्कार छतरपुर की कु. खुसबू रैकवार को मिला। निबंध प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार छतरपुर की कु. शुभि सेन, द्वितीय छतरपुर की ही कु. तपस्या कुशवाह और तृतीय पुरस्कार धार की कु. पलक सिसोदिया को दिया‍गया। सर्वश्रेष्ठ स्टॉल का पुरस्कार भारतीय खाद्य निगम, द्वितीय पुरस्कार म.प्र. वेयर हाउसिंग और तृतीय खाद्य एवं औषधि प्रशासन को मिला। कार्यक्रम में प्रदर्शनी के माध्यम से उपभोक्ताओं को मिलावट की पहचान, उपभोक्ताओं के अधिकार, औषधि क्रय एवं उपयोग में सावधानियां आदि विषय पर विशेषज्ञों द्वारा जानकारी दी गई। आभार प्रदर्शन संयुक्त संचालक  हरेन्द्र सिंह द्वारा किया गया। इस दौरान आयुक्त नागरिक आपूर्ति निगम  अनुराग वर्मा, नियंत्रक नापतौल  बृजेश सक्सेना, आयोग के सदस्य  नेमी जैन और सुखदेव मिश्रा सहित उपभोक्ता एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।  

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धूलकोट अब बनेगा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्ती नदी पर बनेगा उच्च स्तरीय पुल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नेपानगर अद्भुत नगरी है। यह कृषि और उद्योग का बेजोड़ संगम है। बुरहानपुर जिला मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विविधता का जीवंत उदाहरण है। हम बुरहानपुर के एग्री एक्सपोर्ट और प्रोसेसिंग का हब बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। प्रदेश के जनजातीय वर्ग का समग्र विकास हमेशा से ही हमारी पहली प्राथमिकता रही है। जनजातीय समाज के समग्र कल्याण के लिए नए वित्त वर्ष 2026-27 के सालाना बजट में 26 प्रतिशत की वृद्धि कर 47 हजार 428 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान रखा है, जिससे जनजातीय वर्ग के चहुंमुखी विकास और कल्याण में कोई कमी न रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय पीएम जन-मन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत कराए जा रहे कार्य प्रदेश में जनजातीय कल्याण का नया अध्याय लिख रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को बुरहानपुर जिले के जनजातीय बहुल नेपानगर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित जनजातीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा क्षेत्र को 363 करोड़ 82 लाख रुपए के 127 विकास कार्यों की सौगात दी। इसमें 191 करोड़ 62 लाख रुपए लागत के 81 विकास कार्यों का भूमिपूजन (30.59 करोड़ से सातपायरी में औद्योगिक प्रक्षेत्र के भूमिपूजन सहित) और 172 करोड़ 20 लाख रुपए लागत के 46 विकास कार्यों का लोकार्पण शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास तभी सार्थक है, जब इसके प्रकाश का पूरा लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जिन विकास कार्यों की सौगात मिली है, यह इस क्षेत्र के जनजातीय बंधुओं के कल्याण में मील का पत्थर साबित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इतिहास के पन्नों में नेपानगर दक्षिण के द्वार के रूप में अंकित है। कभी खानदेश और दक्षिण की काशी के रूप में पहचाने जाने वाले नेपानगर को हमारी सरकार महाराष्ट्र के छोर पर मध्यप्रदेश के विकास के प्रमुख द्वार के रूप में विकसित करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेपानगर विधानसभा क्षेत्र में दो प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं (झिरमिट्टी मध्यम सिंचाई परियोजना एवं नावथा वृहद सिंचाई परियोजना) को शासकीय मंजूरी मिलने की जानकारी देते हुए कहा कि ये सिंचाई परियोजनाएं इस क्षेत्र के 34 हजार 400 किसान परिवारों की तकदीर और तस्वीर बदल देंगी। उन्होंने बताया कि कुल 2598.97 करोड़ रुपये की इन दोनों परियोजनाओं से जनजातीय बहुल क्षेत्र में 51800 हेक्टेयर कृषि रकबे में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। इन परियोजनाओं से 132 गांव लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री ने क्षेत्रीय किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे किसी के भी अनर्गल प्रलाप से कतई प्रभावित न हों। इन परियोजनाओं के निर्माण में हमारी सरकार किसी भी व्यक्ति या किसान को घर से बेघर नहीं होने देगी। हम सबके हितों का बराबर ध्यान रखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नेपानगर पेपर मिल इस क्षेत्र की पहचान है। यह मिल हमेशा की तरह चलती रहेगी। इस चलाए रखने के लिए हम सभी व्यवस्थाएं और समुचित प्रबंधन करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार इस मिल के कागज भी खरीदेगी और श्रमिक को उसके रोजगार से जोडे़ रखेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रमुख घोषणाएँ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बीते एक माह के दौरान ही दो कार्यक्रमों में बुरहानपुर जिले को करीब 1100 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों की सौगातें मिली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुरहानपुर के शासकीय महाविद्यालय में कृषि संकाय की पढ़ाई प्रारंभ कराने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेपानगर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की स्मृति में एक आकर्षक उद्यान बनाया जाएगा। धूलकोट के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रोन्नत किया जाएगा। लोखंडिया से हसीनाबाद मार्ग के चौड़ीकरण के साथ ताप्ती नदी पर वर्तमान रपटे के स्थान पर एक उच्च स्तरीय पुल बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र की पहचान असीरगढ़ के किले को भव्य पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रदेश के वनवासियों को दिए गए वन अधिकार पट्टों को अब राजस्व विभाग के माध्यम से संपत्ति की रजिस्ट्री के रूप में बदला जाएगा, इसकी रजिस्ट्री शुल्क का खर्चा राज्य सरकार उठाएगी। क्षेत्रीय जनजातीय बन्धुओं को वनाधिकार पट्टों का लाभ देने के लिए जल्द ही पुन: सर्वे कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि, बागवानी और मसाला उत्पादन के लिए मशहूर निमाड़ क्षेत्र में सभी प्रकार की फसलों का बीमा कराने और इस क्षेत्र में शीघ्र ही रीजनल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित करने की बात कही। सिंचाई क्षमता में लगातार हो रही वृद्धि : मंत्री  सिलावट जल संसाधन मंत्री एवं बुरहानपुर जिले के प्रभारी मंत्री  तुलसीराम सिलावट ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में सिंचाई क्षमता में लगातार दिन दूनी-रात चौगुनी वृद्धि हो रही है। उन्होंने इस क्षेत्र के लिए मंजूर दो सिंचाई परियोजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह परियोजना जनजातीय क्षेत्र के विकास की नई इबारत लिखेंगी। उन्होंने कहा कि ताप्ती बेसिन मेगा ग्राउंड वाटर रिचार्ज परियोजना भी मंजूर हो चुकी है। इससे नेपानगर सहित बुरहानपुर जिले की सिंचाई क्षमता में भारी वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 54 लाख हैक्टेयर कृषि क्षेत्र में सिंचाई हो रही है, जिसे वर्ष 2029 तक बढ़कर 100 लाख हेक्टेयर तक किया जाएगा। सांसद  ज्ञानेश्वर पाटिल ने कहा कि नेपानगर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में यहां की नेपा मिल का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से अनुरोध किया कि यह नेपा मिल किसी भी स्थिति में बंद न हो, बल्कि हमेशा की तरह संचालित होती रहे, ऐसे सभी प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसान, मजदूर, विद्यार्थी और महिला सहित समाज के सभी वर्गों की भलाई के लिए पूरी शिद्धत से काम कर रही है। विधायक बुरहानपुर एवं पूर्व मंत्री  अर्चना चिटनिस ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश लगातार विकास कर रहा है। उन्होंने वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाए जाने एवं 19 मार्च से प्रारंभ हो रहे राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि यह सरकार, सामाजिक सरोकारों से जुड़ी सरकार है। सरकार के प्रयासों से प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय भी निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से बुरहानपुर में “सम्राट विक्रमादित्य” महानाट्य का मंचन कराने का अनुरोध किया। नेपानगर विधानसभा क्षेत्र की … Read more

100 निकायों में भूमि उपलब्ध, 4 शहरों में ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंदौर और जबलपुर की तर्ज पर प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में गीता भवन बनाएँ जा रहे हैं। गीता भवन के माध्यम से दार्शनिक वातावरण निर्मित करने का प्रयास है। इन केन्द्रों में युवा पीढ़ी को गीता के निष्काम कर्म और भारतीय मूल्यों से जोड़ने और शोधार्थियों के लिए विशेष संसाधन उपलब्ध कराना गीता भवन का मुख्य उद्देश्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को विस्तार देने के लिए ‘गीता भवन’ परियोजना को अब वृहद स्वरूप प्रदान किया जा रहा है। प्रदेश के सभी 413 शहरों में गीता भवन निर्माण की योजना के लिए 5 वर्षीय कार्ययोजना के वर्ष 2026-27 के लिए 60 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य नगरीय क्षेत्रों में भारतीय दर्शन, कला और साहित्यिक विमर्श के लिए एक आधुनिक अवसंरचना तैयार करना है। इंदौर और जबलपुर में निर्मित गीता भवन की सफलता को आधार मानते हुए अब इस मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है। 4 शहरों में प्रोजेक्ट्स स्वीकृत, 100 निकायों में भूमि चिन्हांकित योजना के क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए विभाग ने चार प्रमुख शहरों में ब्राउनफील्ड (Brownfield) प्रोजेक्ट्स को तकनीकी स्वीकृति प्रदान कर दी है। इनमें रीवा (5 करोड़ रुपये), छिंदवाड़ा (2.5 करोड़ रुपये), कटनी (2.4 करोड़ रुपये) तथा खंडवा (2 करोड़ रुपये) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 6 नगर निगमों सहित 100 नगर पालिकाओं में ‘ग्रीनफील्ड’ प्रोजेक्ट्स के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित हो चुकी है, जिनकी डीपीआर (DPR) को अंतिम रूप दिया जा रहा है। शेष 313 नगरीय निकायों में भी भूमि का चिन्हांकन कर लिया गया है और जिला कलेक्टरों के माध्यम से आवंटन की प्रक्रिया प्रचलन में है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होंगे सांस्कृतिक केंद्र प्रत्येक ‘गीता भवन’ को एक बहुउद्देश्यीय केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके प्रमुख घटकों में अत्याधुनिक ऑडिटोरियम: वृहद स्तर पर सांस्कृतिक एवं वैचारिक आयोजनों के लिये ज्ञान का केंद्र: ज्ञानार्जन के लिए समृद्ध लाइब्रेरी एवं हाई-टेक ई-लाइब्रेरी। व्यावसायिक एवं जन-सुविधाएं: कैफेटेरिया और विशेष रूप से पुस्तकों एवं आध्यात्मिक सामग्री के लिए समर्पित विक्रय केंद्र शामिल हैं। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 16 मार्च को अभिमुखीकरण कार्यक्रम में होंगे शामिल

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा 16 मार्च को सुबह 11 बजे से कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में जनप्रतिनिधियों एवं प्रबुद्धजनों का अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री एवं मंत्रीगण सहित जनप्रतिनिधि एवं प्रबुद्धजनों को आमंत्रित किया गया है। यह कार्यक्रम कृषि वर्ष में सक्रिय सहभागिता के लिए आयोजित किया जा रहा है। किसानों की समृद्धि और खुशहाली राज्य सरकार का उद्देश्य है। कार्यक्रम में किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग सहित उद्यानिकी, मत्स्य पालन, सहकारिता एवं पशुपालन विभाग अंतर्गत क्रियान्वित योजनाओं एवं गतिविधियों की जानकारी से अवगत कराया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान सुबह 11 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक कृषि, उद्यानिकी एवं मत्स्य विभाग का विशेष सत्र का आयोजन होगा। इसके बाद दोपहर 2 बजे मुख्यमंत्री डॉ. यादव शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव अपने उद्बोधन के माध्यम से किसान कल्याण की विभिन्न योजनाओं और गतिविधियों की जानकारी जनप्रतिनिधियों एवं प्रबुद्धजनों से साझा करेंगे। संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा विभागीय प्रस्तुतिकरण और प्रश्नों का समाधान भी किया जाएगा।  

राज्यपाल की राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के अध्ययनरत अधिकारियों से सौजन्य भेंट

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि अध्ययन भ्रमण आपदा प्रबंधन, प्रशासनिक समन्वय और संसाधन प्रबंधन के विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने का अवसर होता है। अधिकारियों से अपेक्षा की है कि वे भ्रमण के दौरान समझने और सीखने का प्रयास करें। प्रतिदिन भ्रमण के अंत में दिनभर की गतिविधियों और अनुभवों का चिंतन करें। भ्रमण टीप का अभिलेखन करें। राज्यपाल  पटेल रविवार को लोकभवन में आयोजित राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय, नई दिल्ली में अध्ययनरत वरिष्ठ सैन्य एवं सिविल अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। दल 15 से 21 मार्च तक मध्यप्रदेश के अध्ययन भ्रमण आया है। कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे। राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि भ्रमण नये अनुभवों, सामाजिक विशिष्टताओं, आध्यात्मिक आस्था और विकास के विभिन्न आयामों को देखने और उनसे प्रेरणा प्राप्त करने का सुअवसर होता है। विगत दिनों बौद्ध अवशेषों को कोलंबो, लंका से वापस भारत लाने की उनकी यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि लंका में 7 दिवस की अवधि के लिए प्रदर्शित पवित्र अवशेषों का 14 लाख लोगों ने दर्शन किया। प्रदर्शन के आखिरी दिन सारी रात लाखोंश्रद्धालुओं ने लाइन लगाकर दर्शन किए। आस्था के प्रति समर्पण और आध्यात्मिकता का उनके लिए यह अद्भुत अनुभव रहा है।उन्होंने अधिकारियों से कहा कि भारत में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और सामरिक क्षेत्रों में आई क्रांतिकारी प्रगति, वास्तव में ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के विराट स्वरूप को समझने का सुअवसर है।जरूरी है कि आप प्रशासनिक ढांचे, विकास योजनाओं तथा सामाजिक-आर्थिक प्रगति के विभिन्न आयामों को नजदीक से देखे उनमें लोकतांत्रिक मूल्यों, की महत्ता का अनुभव करें।उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य की धरती आदिम सभ्यता, प्राचीन भारत की ऐतिहासिक, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत स्वरूप है।यहां कि विश्व धरोहर सांची स्तूप, भीमबेटका और खजुराहों, उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग जैसे पवित्र स्थल हमारे गौरवशाली इतिहास के साक्षी है। भ्रमण अवसर पर ग्रामीण विकास, शहरी प्रबंधन, पर्यटन संवर्धन तथा औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के मॉडल में जन सहभागिता की भूमिका और महत्व को भी जानने का प्रयास करें। उज्जैन और इंदौर जैसे शहरों में बड़े आयोजनों में प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और औद्योगिक विकास के मॉडल का गहन अध्ययन जरूर करें।कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल को प्रशासन अकादमी और राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। राज्यपाल ने भ्रमण दल के प्रमुख मेजर जनरल पवन पाल सिंह को गोंड कला की पेटिंग भेंट की। आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के संचालक  मुजीबुर्रहमान खान ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय में 47 सप्ताह के पाठ्यक्रम में भाग लेने वाले अधिकारियों में से 16 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल प्रदेश प्रवास पर आया है।उन्होंने बताया कि अध्ययन दल प्रदेश के विभिन्न स्थानों का भ्रमण करेगा। उनको राज्य के आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, स्थलों औद्योगिक प्रगति, विभिन्न नवाचारों और प्रबंधकीय व्यवस्थाओं से रू-ब-रू कराया जाएगा। कोमोडोर सुमीत शिदौरे ने महाविद्यालय द्वारा संचालित प्रशिक्षण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में प्रशिक्षण में 122 अधिकारी भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण को 6 मॉड्यूल में संयोजित किया गया है। अध्ययन भ्रमण के लिए प्रशिक्षणाधीन अधिकारियों के 8 बैच बनाकर देश के अलग-अलग राज्यों में भेजे गए हैं। आभार प्रदर्शन प्रशिक्षण संचालक डॉ. अनुपमा रावत ने किया। इस अवसर पर उप सचिव  सुनील दुबे एवं लोक भवन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

उत्तर प्रदेश में बेटियां अब नाइट शिफ्ट में भी काम करके सकुशल घर वापस आती हैः योगी

चित्तौड़गढ़/लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जातिवाद फैलाने वालों को चित्तौड़गढ़ की धरती से दो टूक संदेश दिया। उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियां सुनाईं – “मूल जानना बड़ा कठिन है नदियों का-वीरों का  धनुष छोड़कर और गोत्र क्या होता रणधीरों का  पाते हैं सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर  जाति-जाति का शेर मचाते केवल कायर, क्रूर”  मुख्यमंत्री ने कहा, जिन्हें कुछ नहीं करना है, वे जातिवाद के आधार पर सामाजिक एकता को छिन्न-भिन्न करने का पाप कर रहे हैं। जातिवाद ने समाज की नींव को दरका दिया था, इसलिए देश कमजोर हुआ। जातिवाद की राजनीति भारत की नींव को कमजोर कर रही है। बांटने की राजनीति फिर से हम सबको गुलामी की तरफ धकेल रही है। इससे बचने के लिए हमें एकजुटता के भाव से बढ़ना होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को ईनाणी सिटी सेंटर, चित्तौड़गढ़ में जौहर श्रद्धांजलि समारोह में जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने सराहनीय कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया। उन्होंने पंजाब के पूर्व राज्यपाल वीपी सिंह की पुस्तक का विमोचन भी किया।  रामसेतु तोड़ने को उतावले लोग राम मंदिर निर्माण का विरोध करते रहे सीएम योगी ने जनसमूह से पूछा कि वे कौन लोग हैं, जो जातिवाद के आधार पर समाज को बांट रहे हैं। अफवाह के आधार पर विश्वास का संकट खड़ा कर रहे हैं। भारत-भारत न बना रहे, इसके लिए दुष्चक्र कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये वही लोग हैं, जिन्होंने कहा था कि राम-कृष्ण हुए ही नहीं। राम मंदिर आंदोलन में विरोधी पक्ष के साथ मिले और फैसला न होने देने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया था। ये लोग रामसेतु तोड़ने के लिए उतावले दिखाई देते हैं, राम मंदिर निर्माण का विरोध करते हैं। ये लोग देश में अविश्वास का वातावरण पैदा कर रहे हैं और संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। इनका मकसद भारत को कठघरे में खड़ा करके अविश्वसनीय बना देना है। इन्हें देश की चिंता नहीं है। इनके अपने अस्तित्व पर संकट है, इसलिए भारत की अस्मिता से खिलवाड़ करने पर उतारू हैं।  वीरभूमि ने दी भारत को पहचान सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में परिवर्तन के पीछे प्रधानमंत्री मोदी जी का मार्गदर्शन है तो तेज राजस्थान, चित्तौड़गढ़ का है। इसके पीछे राजस्थान की वीरभूमि का भी योगदान है, क्योंकि मेरे पूज्य दादा गुरु इसी भूमि से गोरखपुर गए थे। राजस्थान, चित्तौड़गढ़, मेवाड़ के वीरों के शौर्य-पराक्रम, वीरांगनाओं के जौहर और मीराबाई की भक्ति की धुन से भारत अभिभूत होता है। नारी अस्मिता, सम्मान, स्वावलंबन की अमर गाथा हमें प्रेरणा प्रदान कर रही है। वीरभूमि ने भारत को पहचान दी है। चित्तौड़गढ़ का किला केवल पत्थरों से बना दुर्ग नहीं, बल्कि भारत की अस्मिता का प्रहरी है। हर सच्चे भारतीय के मन में इस वीरभूमि और यहां के राणाओं के शौर्य व राष्ट्र के लिए उनके बलिदान के प्रति श्रद्धा का भाव है।  देश-धर्म के लिए था महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी व गुरु गोबिंद सिंह का संघर्ष सीएम योगी ने महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज व गुरु गोविंद सिंह जैसे राष्ट्रनायकों को याद किया। उन्होंने कहा, इन लोगों ने अपने, परिवार या सत्ता के लिए बलिदान नहीं दिया था, बल्कि इनका संघर्ष देश-धर्म और भारत की स्वाधीनता के लिए था। हर संघर्ष में चट्टान की तरह सामने खड़े हुए और उसे नेस्तनाबूद भी किया। गुरु गोविंद सिंह के चार पुत्र बलिदान हुए, लेकिन उन्होंने उफ नहीं किया। महाराणा प्रताप, महाराणा सांगा, महारानी पद्मिनी, महाराणा कुंभा, बप्पा रावल के लिए मन में श्रद्धा का भाव है, क्योंकि जो भी राष्ट्र के प्रति योगदान देगा, उसका स्मरण सदैव होता है।  माता सीता का जो संकल्प था, वही संकल्प महारानी पद्मिनी ने दिखाया  सीएम योगी ने कहा कि यह श्रद्धांजलि समारोह प्रेरित कर रहा है कि आने वाले समय में किसी बेटी-बहन को उस दौर से न गुजरना पड़े। 1303, 1535 और 1568 में तीन बड़े जौहर यहां देखने को मिले। भारत का इतिहास वीरांगनाओं के जौहर से भरा पड़ा है। शत्रु हमेशा धोखे से ही वीरों का मुकाबला कर पाए। आमने-सामने की लड़ाई में वे कहीं नहीं टिके। अलाउद्दीन खिलजी के धोखे से महाराणा रत्न सिंह वीरगति को प्राप्त हुए। उनके सेनापति गोरा-बादल भी लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए तो महारानी पद्मिनी के नेतृत्व में हजारों वीरांगनाओं ने नारी अस्मिता की रक्षा के लिए जौहर व्रत लिया था, क्योंकि वह उस समय की परिस्थिति थी। माता सीता ने धरती मां से कहा था कि अगर मेरा सतीत्व अखंड है तो मुझे अपनी गोद में समाहित करो। माता सीता का जो संकल्प था, वही संकल्प धर्म जौहर के नाम पर महारानी पद्मिनी ने यहां दिखाया था। यह संकल्प नारी गरिमा का प्रतीक था। यह भारत माता को विधर्मियों से मुक्त करने का संकल्प था। 25 करोड़ के उत्तर प्रदेश में बेटियां अब नाइट शिफ्ट में भी काम करके सकुशल घर वापस आती हैं मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में जब हमारी सरकार बनी तो प्रदेशवासियों से कहा कि अपराध-अपराधियों, नारी गरिमा-सुरक्षा के मामले में सरकार जीरो टॉलरेंस के तहत काम करेगी। किसी ने बहन-बेटी की सुरक्षा पर हाथ डाला तो अगले चौराहे पर यमराज उसका इंतजार कर रहे होंगे। 25 करोड़ वाले उत्तर प्रदेश में बेटियां अब स्कूल भी जाती हैं, नाइट शिफ्ट में काम भी करती हैं और सकुशल घर आती हैं। हर नारी को सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन की गारंटी हर भारतीय नारी का अधिकार होना चाहिए। महाराणा सांगा ने घाव पर घाव सहे, लेकिन विधर्मियों को घुसने नहीं दिया  सीएम योगी ने भारत की अस्मिता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए महाराणा सांगा के शौर्य का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, महाराणा सांगा के शरीर पर 80 घाव थे। लेकिन, उन्हें स्वयं की नहीं, बल्कि राष्ट्र की अस्मिता की चिंता थी। घाव पर घाव सहते गए पर विधर्मियों को घुसने नहीं दिया। महाराणा प्रताप ने महज 27 वर्ष की आयु में ही अकबर के खिलाफ युद्ध लड़ा था। उन्होंने अकबर को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया था। भारत के इतिहास ने हमेशा उनके शौर्य का स्मरण किया है।  अयोध्या में राम मंदिर भी बना और गुलामी का कोई चिह्न भी नहीं बचा  सीएम योगी ने कहा कि श्रीराम परमपिता परमेश्वर हैं, … Read more

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