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MP के 27 उत्पादों को मिला प्रतिष्ठित GI टैग, देश-दुनिया में बढ़ी ब्रांड वैल्यू

भोपाल मध्यप्रदेश की अनेक शिल्प कलाओं और कृषि, उद्यानिकी उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर “जीआई टैग” प्राप्त होना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वोकल फॉर लोकल के स्वप्न को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के उन्नत किसानों, खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों, शिल्पकारों और उन्हें प्रोत्साहित करने वाले विभागों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है। इन्हें मिल चुका है जीआई टैग बैतूल जिले की पारंपरिक शिल्प कला भरेवा कला को यह राष्ट्रीय पहचान मिली है। क्राफ्ट विलेज टिगरिया की भरेवा व कला को जीआई टैग मिला है। राष्ट्रपतिमती द्रौपदी मुर्मु ने हाल ही में (दिसंबर 2025 में) भरेवा शिल्प के कलाकार बलदेव वाघमारे को राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से भी सम्मानित किया। बैतूल के अलावा छतरपुर जिले के खजुराहो के स्टोन क्राफ्ट, छतरपुर जिले के ही पारंपरिक काष्ठ शिल्प, ग्वालियर के पत्थर शिल्प, ग्वालियर की पेपर मैश कला जीआई टैग प्राप्त करने में सफल रही है। प्रदेश के अन्य जीआई टैग उत्पाद इस प्रकार हैं: चंदेरी साड़ी, महेश्वरी साड़ी और फैब्रिक, धार का बाग प्रिंट, इंदौर के लेदर के खिलौने, दतिया और टीकमगढ़ के बेल मेटल वेयर, उज्जैन का बटीक प्रिंट, जबलपुर का संगमरमर शिल्प, डिंडोरी की गोंड पेंटिंग, वारासिवनी की हैंडलूम साड़ी, ग्वालियर की ज्यामितीय पैटर्न की कालीन, पन्ना का हीरा, डिंडोरी का लोहा शिल्प, बालाघाट का चिन्नौर चावल, रीवा का सुंदरजा आम, सीहोर और विदिशा का शरबती गेहूं, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश का संयुक्त रूप से महोबा देशावरी पान, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा क्षेत्र का नागपुरी संतरा, झाबुआ जिले का कड़कनाथ मुर्गा, रतलाम का सेव, मुरैना की गजक, बुंदेलखंड क्षेत्र का कठिया गेहूं और जावरा का लहसुन शामिल है। मध्यप्रदेश के अन्य अनेक उत्पाद भी जीआई टैग प्राप्त होने की श्रृंखला में शीघ्र शामिल होंगे। इसके लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार के स्तर पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा आवश्यक प्रयास किये जा रहे हैं। वर्ष 2024 और 2025 में विशेष उपलब्धि मध्यप्रदेश में वर्ष 2024 में बुंदेलखंड के कठिया गेहूं और रतलाम जिले के जावरा के लहसुन को जीआई टैग प्राप्त हुआ। इसी तरह वर्ष 2025 में प्रदेश के पांच उत्पाद को जीआई टैग मिला। इनमें छतरपुर जिले के खजुराहो का स्टोन क्राफ्ट, छतरपुर का ही पारंपरिक फर्नीचर, बैतूल का भरेवा मेटल क्राफ्ट, ग्वालियर का पत्थर शिल्प और ग्वालियर का ही पेपर मैश क्राफ्ट शामिल है। जीआई टैग प्रदान करने का कार्य उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में है। पंजीकरण की प्रक्रिया के बाद जीआई टैग की वैधता 10 वर्ष के लिए होती है, जिसे नवीनीकरण का लाभ भी मिलता है। जीआई टैग भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री अर्थात (ज्योग्राफिकल इंडिकेशंस रजिस्ट्री) केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रदान किया जाता है। किसी उत्पाद की प्रामाणिकता की दृष्टि से जीआई टैग मिलना बहुत महत्व रखता है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2004 में दार्जिलिंग की चाय को भारत के प्रथम जीआई टैग प्राप्त होने का गौरव मिला था।  

स्वास्थ्य अधोसंरचना एवं सेवाओं के सुदृढ़ीकरण का सुनियोजित प्रावधान

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वस्थ प्रदेश ही समृद्ध प्रदेश की आधारशिला है। स्वास्थ्य अधोसंरचना के व्यापक विस्तार, गुणवत्तापूर्ण उपचार सुविधाओं की उपलब्धता और चिकित्सा शिक्षा के सुदृढ़ीकरण के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में सुनियोजित प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक, चाहे वह शहरी क्षेत्र में निवास करता हो या दूरस्थ ग्रामीण अंचल में, उसे समयबद्ध और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हों। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुल 23 हजार 747 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान है, जो राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। राज्य सरकार का संकल्प है कि स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन और सुदृढ़ अधोसंरचना के माध्यम से नए आयाम दिए जाएँ। प्रदेश को सशक्त, स्वस्थ और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा में तेजी से अग्रसर करने लिए सतत और सशक्त प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत 4,600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, रोग नियंत्रण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना एवं संचालन के लिए 1,934 करोड़ रुपये तथा उप स्वास्थ्य केन्द्रों के लिए 782 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। सामुदायिक, उप एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के भवन निर्माण के लिए 580 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और बेहतर होगी। आशा कार्यकर्ताओं को अतिरिक्त प्रोत्साहन के लिये 550 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना के लिए 750 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जिससे जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। अस्पतालों एवं चिकित्सा महाविद्यालयों का विस्तार प्रदेश में विगत दो वर्षों में पाँच नए शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय प्रारंभ किए गए हैं। एमबीबीएस सीटों की संख्या 2,275 से बढ़कर 2,850 तथा स्नातकोत्तर सीटें 1,262 से बढ़कर 1,468 हो गई हैं। इंदौर, रीवा एवं सतना के चिकित्सा महाविद्यालयों के उन्नयन के साथ ही भोपाल, इंदौर, रीवा, जबलपुर, सागर एवं ग्वालियर में उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ विकसित की गई हैं। पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए धार, बैतूल, पन्ना और कटनी में एलओए जारी किया जा चुका है। अन्य 9 जिलों में प्रक्रिया प्रगतिरत है। चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालयों के लिए 3,056 करोड़ रुपये और जिला एवं सिविल अस्पतालों के लिए 2,049 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अस्पतालों एवं औषधालयों के भवन निर्माण के लिये 527 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। नवीन चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण (राज्य सहायित) के लिए 580 करोड़ रुपये तथा चिकित्सा महाविद्यालयों में उन्नयन कार्यों के लिए 650 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही नवीन नर्सिंग कॉलेजों के निर्माण के लिए 80 करोड़ रुपये एवं पी.जी. पाठ्यक्रमों के सुदृढ़ीकरण हेतु 79 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। आयुष्मान योजना क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश शीर्ष पर प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के तहत प्रदेश में 4 करोड़ 46 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए आयुष्मान वय वंदना योजना के अंतर्गत 15 लाख 48 हजार कार्ड बनाकर मध्यप्रदेश शीर्ष पर है। इस योजना से 1,118 शासकीय एवं 720 निजी चिकित्सालय संबद्ध हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में आयुष्मान भारत योजना के लिए 2,139 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त नॉन-एसईसीसी हितग्राहियों के लिए 863 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। विशेष कार्यक्रम एवं अधोसंरचना मिशन बहुउद्देशीय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के लिए 408 करोड़ रुपये तथा प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के अंतर्गत 401 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना अंतर्गत सुपरस्पेशलिटी अस्पताल स्थापना के लिए 148 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। प्रदेश में डिजिटल स्वास्थ्य पहल को भी निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है। वर्तमान में 55 जिला चिकित्सालय, 158 सिविल चिकित्सालय, 348 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, 1,442 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा 10,256 उप स्वास्थ्य केन्द्रों में कुल 48 हजार बिस्तर उपलब्ध हैं। मैहर, मऊगंज एवं पांढुर्णा में नए जिला चिकित्सालयों की स्थापना की कार्यवाही प्रचलन में है। उच्च जोखिम वाले दूरस्थ क्षेत्रों में निवासरत गर्भवती महिलाओं के लिए 228 बर्थ वेटिंग रूम स्थापित किए गए हैं, जो मातृ मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। चिकित्सा शिक्षा एवं मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण प्रदेश में 3,850 चिकित्सक पदों एवं 1,256 नर्सिंग अधिकारी पदों पर भर्ती की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। परिचारिकाओं के प्रशिक्षण के लिए 67 करोड़ रुपये तथा एएनएम एवं हेल्थ विजिटर्स को परिवार कल्याण प्रशिक्षण हेतु 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार भारतीय चिकित्सा पद्धति को भी बढ़ावा दे रही है। प्रदेश में 8 नवीन आयुर्वेद महाविद्यालय सह चिकित्सालय स्थापित किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है। अधोसंरचना विस्तार, चिकित्सा शिक्षा सुदृढ़ीकरण, मानव संसाधन भर्ती और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य सुलभ, किफायती और सर्वसमावेशी स्वास्थ्य व्यवस्था स्थापित कर आत्मनिर्भर, सशक्त एवं स्वस्थ मध्यप्रदेश का निर्माण करना है।

आदिवासी क्षेत्रों में पकड़ बढ़ाने की रणनीति, भाजपा का फोकस मालवा-निमाड़ अंचल पर

भोपाल आदिवासी बहुल बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में कैबिनेट की बैठक कर भाजपा ने यह संदेश दे दिया है कि वह आदिवासियों में पार्टी के आधार को और मजबूत करना चाहती है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने मालवा- निमाड़ से इसकी शुरुआत कर यह भी बता दिया है कि इसके केंद्र में मालवा- निमाड़ अंचल रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कैबिनेट को मंत्रालय के बंद कमरों से निकालकर सीधे आदिवासी अंचल और खेतों के बीच ले जाकर यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता ग्रामीण और किसान मतदाता हैं। बैठक के अलावा आदिवासियों की आस्था के केंद्र भीलट देव मंदिर में कैबिनेट के सदस्यों द्वारा माथा टेकना इस समुदाय को भावनात्मक रूप से पार्टी से जोड़ने का प्रयास भी रहा। बता दें, आदिवासी मतदाताओं के झुकाव से ही मध्य प्रदेश में सरकार बनती है। इन दिनों नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी आदिवासियों को साधने के लिए निरंतर प्रवास कर रहे हैं। मालवा-निमाड़ अंचल में कांग्रेस के 12, भाजपा के आठ और एक सीट पर भारतीय आदिवासी पार्टी (बीएपी) का विधायक है। इस संख्या को देखते हुए भी भाजपा को यहां विशेष प्रयास करने की आवश्यकता है। मिशन-2028 की तैयारी  भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनाव यानी मिशन 2028 की तैयारी नागलवाड़ी में कैबिनेट कर आरंभ कर दी है। उसका पहला लक्ष्य आदिवासी वर्ग का भरोसा जीतना है। दरअसल, वर्ष 2013 तक भाजपा के पास प्रदेश की कुल 47 एसटी आरक्षित सीटों में से दो- तिहाई सीटें हुआ करती थी लेकिन वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का जनाधार खिसक गया था। खासतौर से आदिवासी वर्ग ने भाजपा का साथ छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। इस कारण प्रदेश में कमल नाथ सरकार बन गई थी। वर्ष 2018 में राज्य की 47 एसटी आरक्षित सीटों में से भाजपा केवल 16 सीटें जीत पाई थी, जबकि कांग्रेस ने 30 सीटों पर कब्जा किया था। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव की तुलना में यह भाजपा के लिए 15 सीटों का बड़ा नुकसान था। हालांकि भाजपा को कुल वोट शेयर (41.6%) कांग्रेस (41.5%) से थोड़ा अधिक मिला था, लेकिन आदिवासी अंचल में सीटों के नुकसान ने उसे बहुमत से दूर कर दिया। वर्ष 2018 के झटके के बाद भाजपा ने अपनी रणनीति बदली, जिसके परिणाम 2023 के चुनावों में दिखे। पार्टी ने एसटी सीटों पर अपनी संख्या 16 से बढ़ाकर 24 कर ली। यही कारण है कि नागलवाड़ी जैसी बैठकें केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि गहरी सुधारात्मक रणनीति का हिस्सा हैं। ‘प्रयोगधर्मी’ नेता की पहचान बना रहे डॉ. मोहन यादव नागलवाड़ी में आयोजित बैठक को ‘कृषि कैबिनेट’ नाम भी दिया गया। इससे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की राजनीतिक छवि में सुधार और मजबूती आने की पूरी संभावना है। इसके पीछे कई रणनीतिक कारण हैं। कैबिनेट को सुदूर गांव तक ले जाना डॉ. मोहन यादव को एक इनोवेटिव और ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ सोचने वाले मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित करता है। यह छवि उन्हें पिछली सरकारों के पारंपरिक ढर्रे से अलग करती है। मुख्यमंत्री का आदिवासी अंचल में जाकर उन्हीं के बीच बैठना और भीलट देव जैसे स्थानीय लोक-देवताओं को सम्मान देना, उन्हें आदिवासियों के बीच ‘अपना व्यक्ति’ के रूप में प्रस्तुत करता है। यह छवि 2018 के ‘आदिवासी विरोधी यानी एंटी-ट्राइबल’ नैरेटिव को काटने में मददगार होगी। एक ही बैठक में 27,746 करोड़ रुपये के भारी-भरकम प्रस्तावों को मंजूरी देना उन्हें एक अच्छा प्रशासक के रूप में प्रस्तुत करता है। इससे यह संदेश जाता है कि वह केवल घोषणाएं नहीं करते, बल्कि बजट का प्रविधान भी साथ रखते हैं। भाजपा की मौजूदा सक्रियता बताती है कि वह 21 प्रतिशत आदिवासी आबादी के महत्व को समझ चुकी है और इसे लेकर वर्ष 2028 में किसी भी प्रकार की जोखिम नहीं लेना चाहती।  

आदिवासी वोटरों को लुभाने की तैयारी में मोहन सरकार, बड़वानी बैठक से निकाय चुनावों को लेकर मिले संकेत

भोपाल  सोमवार को बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में हुई प्रदेश की पहली किसान कैबिनेट बैठक को मोहन सरकार का आदिवासी वोटर पर सीधा फोकस माना जा रहा है। 2027 के निकाय चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा सरकार ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनजातीय बहुल जिले बड़वानी के नागलवाड़ी में पहली किसान कैबिनेट आयोजित की। यह बैठक भीलट देव मंदिर परिसर में टेंट-तंबू में हुई और मंत्रिमंडल ने आदिवासी संस्कृति के प्रमुख पर्व भगोरिया में भी सहभागिता की। इसने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम किसानों के साथ-साथ आदिवासी वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा है। आदिवासी वर्ग पर परंपरागत रूप से कांग्रेस की मजबूत पकड़ मानी जाती रही है, लेकिन पिछले एक दशक में भाजपा ने इस वर्ग में अपना आधार बढ़ाया है।  47 विस सीटें एसटी के लिए आरक्षित प्रदेश की कुल 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित हैं। 2023 के चुनाव में भाजपा ने 24 और कांग्रेस ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि रतलाम जिले की सैलाना सीट पर भारत आदिवासी पार्टी को सफलता मिली। मालवा–निमाड़ अंचल में आदिवासी वर्ग की 22 सीटें हैं, जहां कांग्रेस ने 11, भाजपा ने 10 और एक भारत आदिवासी पार्टी ने जीत दर्ज की। यह क्षेत्र आदिवासी राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।  22% आबादी, 84 सीटों पर असर प्रदेश की कुल आबादी में लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा आदिवासी समुदाय का है। 47 सीटें आरक्षित होने के बावजूद यह वर्ग करीब 80 से अधिक सीटों पर जीत-हार तय करने की स्थिति में माना जाता है।  2023 में कांग्रेस ने दिखाई मजबूती  2018 के चुनाव में कांग्रेस ने 30 आदिवासी सीटें जीतकर भाजपा को बड़ा झटका दिया था, जबकि भाजपा 16 सीटों तक सीमित रह गई थी। मालवा–निमाड़ में भी भाजपा को 22 सीटों में से केवल 6 सीटें मिली थीं। वहीं, 2023 में भाजपा ने वापसी करते हुए 24 सीटें जीतींं। हालांकि, इस चुनाव में कांग्रेस 66 सीटों पर सिमट गई, इसके बावजूद  उसने आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 22 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, मालवा निमाड़ में दोनों ही पार्टियों ने आधी आधी सीटों पर जीत दर्ज की।  आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित प्रदेश की सीटों का गणित  – 2013 में आरक्षित 47 सीटों में से 31 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। कांग्रेस को 15 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा, वहीं एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी जीता। वहीं, मालवा निमाण की 22 सीटों में से 15 भाजपा, 6 कांग्रेस और 1 सीट निर्दलीय को मिली।  – 2018 में आरक्षित 47 सीटों में से 16 सीटों पर भाजपा सिमट गई। वहीं, कांग्रेस ने 30 सीटों पर जीत दर्ज की। एक सीट निर्दलीय के खाते में गई। वहीं, मालवा-निर्माण की 22 सीटों में से 6 भाजपा, 15 कांग्रेस और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई।  – 2023 में आरक्षित 47 सीटों में से 24 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। वहीं, कांग्रेस ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की। एक सीट पर निर्दलीय के खाते में आई। वहीं, मालवा- निर्माण की 22 सीटों में से 11 पर कांग्रेस, 10 पर भाजपा और एक सीट पर भारत आदिवासी पार्टी ने जीत दर्ज की।  2027 में सेमीफाइनल और 2028 में फाइनल बता दें, अगले दो साल मोहन सरकार के लिए अग्नि परीक्षा के हैं, इसलिए अब उसे तमाम वो काम करके दिखाना होंगे, जिनका वादा भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में किया है। इनमें सबसे बड़ा वादा लाडली बहना योजना में शामिल बहनों को हर माह 3000 रुपये देने का है। अभी इसकी आधी राशि दी जा रही है। अगले तीन साल में इसे दोगुना करना है। यदि भाजपा यह करने में सफल रही तो 2027 के निकाय चुनाव और इसके बाद 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उसकी सत्ता में वापसी की राह कोई नहीं रोक सकेगा।  आदिवासी किसानों को आखिर क्या मिला नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि दो दशक से सत्ता में काबिज भाजपा सरकार ने ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ के अंतर्गत भोपाल से करीब 350 किलोमीटर दूर आदिवासी बहुल बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में पहली “कृषि कैबिनेट” की बैठक आयोजित की। दावा किया गया था कि इससे किसानों को सीधा फायदा पहुंचेगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए नई योजनाए लाई जाएंगी, ताकि आय दोगुनी हो सके। लेकिन बड़वानी और निमाड़ क्षेत्र के किसानों को आखिर क्या मिला?   

त्योहार पर सख्ती: भोपाल में होली के दौरान हर प्रमुख चौराहे पर 108 एंबुलेंस तैनात

भोपाल होली और रंगपंचमी के उल्लास के बीच किसी भी अप्रिय स्थिति या चिकित्सीय आपातकाल से निपटने के लिए राजधानी का स्वास्थ्य अमला पूरी तरह अलर्ट हो गया है। शहर के प्रमुख अस्पतालों के साथ-साथ हर थाना क्षेत्र और भीड़भाड़ वाले इलाकों में 108 एंबुलेंस की विशेष तैनाती की गई है। सीएमएचओ ने सभी अस्पतालों को आकस्मिक चिकित्सा व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखने के निर्देश जारी किए हैं। थाना क्षेत्रों और प्रमुख केंद्रों पर एंबुलेंस की तैनाती 108 एंबुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने बताया कि एम्स, हमीदिया, जेपी अस्पताल, काटजू अस्पताल और बैरागढ़ जैसे प्रमुख केंद्रों के साथ-साथ शहर के सभी 22 थाना क्षेत्रों में एंबुलेंस तैनात रहेगी। ये वाहन जीवन रक्षक उपकरणों और प्रशिक्षित स्टाफ (ईएमटी) से सुसज्जित होंगे, ताकि सड़क दुर्घटना, आगजनी या विवाद की स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके। 104 हेल्पलाइन से घर बैठे लें डॉक्टरी सलाह त्योहार के दौरान यदि किसी को सामान्य स्वास्थ्य समस्या होती है, तो उसे अस्पताल जाने की जरूरत नहीं है। प्रदेश सरकार की 104 हेल्थ हेल्पलाइन सुबह आठ से रात आठ बजे तक सक्रिय रहेगी। इसके माध्यम से अनुभवी डॉक्टरों से मुफ्त परामर्श, मानसिक तनाव की स्थिति में काउंसलिंग और नजदीकी ब्लड बैंक या अस्पताल की जानकारी ली जा सकती है। सेहतमंद होली के लिए विशेषज्ञों की सलाह सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि शहरवासी केमिकल युक्त रंगों से बचें। रंगों में लेड ऑक्साइड और कॉपर सल्फेट जैसे तत्व होते हैं, जो आंखों और त्वचा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। रंग खेलने से पहले शरीर पर तेल या मॉइस्चराइजर लगाएं और पूरी बांह के कपड़े पहनें। शराब या अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहें। आंखों में धुंधलापन, खुजली या सांस लेने में दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। यहाँ उपलब्ध रहेगी तुरंत सहायता प्रमुख केंद्र – एम्स भोपाल, जेपी अस्पताल, हमीदिया, आनंद नगर, कोलार, बैरागढ़। थाना क्षेत्र – एमपी नगर, हबीबगंज, टीटी नगर, अशोका गार्डन, निशातपुरा सहित जिले के सभी ग्रामीण व शहरी थाना क्षेत्र। आपातकालीन नंबर – 108 (एंबुलेंस), 104 (स्वास्थ्य परामर्श)।

त्वरित कार्रवाई से बचीं दो घायलों की ज़िंदगियाँ, सड़क दुर्घटना में गंभीर घायलों को समय पर पहुँचाया अस्पताल

भोपाल  मऊगंज जिले के थाना मऊगंज क्षेत्र में डायल-112 जवानों की त्वरित, सजग एवं संवेदनशील कार्यवाही से सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए एक पुरुष एवं एक महिला को समय पर उपचार उपलब्ध कराया गया। संकट की इस घड़ी में डायल-112 टीम ने जिस तत्परता और जिम्मेदारी का परिचय दिया, वह सेवा एवं कर्तव्यनिष्ठा की सराहनीय मिसाल है। 02 मार्च को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम, डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना मऊगंज क्षेत्र अंतर्गत मऊगंज बाईपास के पास एक मोटर साइकिल को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी है, जिससे मोटर साइकिल सवार पुरुष एवं एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए थाना मऊगंज में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तुरंत मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री रजनीश यादव एवं पायलट श्री प्रवेश चतुर्वेदी शीघ्र घटनास्थल पर पहुँचे और स्थिति का त्वरित आकलन करते हुए राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ किया। दुर्घटना में मोटर साइकिल सवार पुरुष एवं साथ में बैठी महिला घायल अवस्था में पाए गए। डायल-112 जवानों ने बिना समय गंवाए दोनों घायलों को एफआरव्ही वाहन की सहायता से सुरक्षित रूप से सिविल चिकित्सालय मऊगंज पहुँचाया, जहाँ उनका तत्काल उपचार प्रारंभ कराया गया। डायल-112 की इस त्वरित, संवेदनशील एवं समर्पित कार्यवाही के कारण घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो सकी, जिससे संभावित गंभीर परिणामों को टाला जा सका। डायल 112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना सिद्ध करती है कि मध्यप्रदेश पुलिस हर आपात स्थिति में आमजन की सुरक्षा और जीवन रक्षा के लिए सदैव तत्पर, सजग और समर्पित है।  

साइबर विश्लेषण और त्वरित कार्रवाई से मिली सफलता

भोपाल रंगों के पावन पर्व होली के अवसर पर आमजन की खुशियों को सुरक्षित एवं सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में गुम एवं चोरी हुए मोबाइल फोन की शीघ्र बरामदगी हेतु विशेष प्राथमिकता के साथ प्रभावी कार्यवाही की गई है। आमजन की संपत्ति की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा आधुनिक तकनीकी संसाधनों, सायबर विश्लेषण, CEIR एवं NCRP पोर्टल के समन्वित उपयोग तथा थाना स्तर पर गठित विशेष टीमों के माध्यम से उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त किए गए हैं। विगत तीन सप्ताह में विभिन्न जिलों में कुल 1835 गुम/चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके वैध स्वामियों को सुपुर्द किए गए हैं, जिनकी अनुमानित कुल कीमत 3 करोड़ रुपए से अधिक है। कई जिलों में स्थानीय स्तर पर विशेष अभियान संचालित कर होली के अवसर पर मोबाइल वितरण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिससे नागरिकों के चेहरे पर मुस्कान लौटी और पुलिस के प्रति विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ। प्रमुख कार्यवाहियां ग्‍वा‍लियर होली के पावन पर्व पर आमजन को विशेष उपहार स्वरूप ग्वालियर पुलिस द्वारा गुम हुए मोबाइलों की बड़ी रिकवरी कर उल्लेखनीय सफलता अर्जित की गई है। सायबर सेल ने CEIR पोर्टल के माध्यम से विभिन्न कंपनियों के कुल 551 गुम मोबाइल फोन देश के अलग-अलग राज्यों एवं शहरों से ट्रेस कर बरामद किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 1 करोड़ 33 लाख रुपए है। बरामद मोबाइलों में दृष्टिबाधित कर्मचारी, चिकित्सक, मजदूर दंपत्ति, फूलमाला विक्रेता, किस्तों पर मोबाइल लेने वाली श्रमिक महिला, सेना में भर्ती की तैयारी कर रहा छात्र के मोबाइल शामिल थे, जिनके लिए यह उपकरण उनके जीवनयापन, शिक्षा अथवा दैनिक कार्य का प्रमुख साधन था। छतरपुर सायबर सेल एवं विभिन्न थानों की संयुक्त टीमों ने “ऑपरेशन विश्वास” के अंतर्गत 90 गुम मोबाइल फोन को ट्रेस कर उनके वास्तविक मालिकों को वापस किए। इन मोबाइल फोन की अनुमानित कीमत लगभग 14 लाख रुपए है। एक अन्य कार्यवाही में पुलिस ने 110 गुम मोबाइल फोन बरामद किए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 15 लाख रुपए है। ये सभी मोबाइल केवल जिले से ही नहीं, बल्कि आंध्रप्रदेश, दिल्ली, महोबा, झांसी (उ.प्र.), सागर, पन्ना एवं निवाड़ी सहित विभिन्न स्थानों से तकनीकी ट्रैकिंग के माध्यम से प्राप्त किए गए। उज्जैन उज्जैन पुलिस ने CEIR पोर्टल एवं साइबर सेल की सहायता से दो अलग-अलग कार्यवाहियों में 409 गुम मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाए है।लौटाये गये मोबाइल फोन की अनुमानित कीमत 73 लाख 50 हजार रुपए है। सिंगरौली सिंगरौली में “संचार साथी (CEIR) पोर्टल” के माध्यम से सायबर सेल एवं थाना/चौकी टीमों द्वारा तकनीकी कार्यवाही कर 172 गुम मोबाइल फोन बरामद किए है, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 42 लाख रुपए है। बरामद मोबाइल मध्यप्रदेश के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, दिल्ली, गुजरात एवं महाराष्ट्र जैसे विभिन्न राज्यों से ट्रैक किए गए है। मंडला पुलिस द्वारा सायबर डेस्क की सक्रियता एवं CEIR/NCRP पोर्टल के प्रभावी उपयोग से कुल 253 गुम मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 38 लाख रुपए है। पुलिस द्वारा मोबाइल वितरण की विकेंद्रीकृत व्यवस्था लागू की गई, जिसके अंतर्गत जिला मुख्यालय के अतिरिक्त थाना स्तर पर भी सुपुर्दगी सुनिश्चित की गई। विशेष रूप से कान्हा नेशनल पार्क से लगे दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में माइक्रोबीट अधिकारियों द्वारा हितग्राहियों के घर पहुंचकर मोबाइल सुपुर्द किए गए, जिससे नागरिकों को आवागमन की असुविधा से राहत मिली। इस मानवीय पहल ने पुलिस-जन संवाद को और सशक्त किया। कटनी कटनी के थाना कोतवाली पुलिस ने सब्जी मंडी स्थित एक मोबाइल स्टोर में हुई चोरी की घटना का त्वरित खुलासा किया। प्रकरण में सक्रिय अंतर्राज्यीय गिरोह के 03 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 20 मोबाइल फोन (अनुमानित कीमत लगभग 3 लाख 50 हजार रुपए) बरामद किए गए । गुना गुना पुलिस द्वारा गुम एवं चोरी हुए मोबाइल फोन की खोज हेतु विशेष अभियान संचालित किया गया है। तकनीकी टीम एवं CEIR पोर्टल के माध्यम से कुल 213 मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत 50 लाख रुपए से अधिक है। बरामद मोबाइल उनके वास्तविक स्वामियों को सुपुर्द किए गए है। जबलपुर (जीआरपी) जबलपुर जीआरपी इकाई के थाना गाडरवारा पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 06 चोरी के मोबाइल फोन (अनुमानित कीमत लगभग 1 लाख 50 हजार रुपए) जप्त किए है। रतलाम जावरा थाना औद्योगिक क्षेत्र पुलिस द्वारा 11 गुम मोबाइल फोन (अनुमानित कीमत लगभग 2 लाख 50 हजार रुपए) बरामद किए गए। जनविश्वास सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर प्रयास प्रदेश के विभिन्न जिलों में की गई इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश पुलिस आधुनिक तकनीकी संसाधनों एवं संवेदनशील पुलिसिंग के माध्यम से आमजन की संपत्ति की सुरक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। गुम एवं चोरी हुए मोबाइलों की निरंतर रिकवरी से नागरिकों में होली पर्व की खुशियों को दोगुना करने के साथ-साथ पुलिस के प्रति सुरक्षा एवं विश्वास की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया।

‘शतक’ को बढ़ावा: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म पर नहीं लगेगा टैक्स, सीएम की घोषणा

भोपाल आरएसएस पर बनी फिल्म ‘शतक’ को मध्य प्रदेश में टैक्स फ्री कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद इस फिल्म को टैक्स फ्री करने की घोषणा करते हुए अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर इसकी जानकारी दी है। सीएम मोहन ने लिखा कि, हिंदी फिल्‍म ‘शतक’ को सम्पूर्ण मध्य प्रदेश में टैक्स फ्री किया है। ये फिल्म राष्ट्रसेवा और संस्कारों की उस परंपरा को सशक्त रूप में प्रस्तुत करती है, जिसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने दशकों से जीवित रखा है। फिल्म ‘शतक’ संदेश देती है कि संगठित विचार, चरित्र और सेवा भाव से ही एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण संभव है। फिल्म 20 फरवरी 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हुई है, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (2155) के 100 साल की यात्रा दिखाई है। फिल्‍म की शुरुआत 1925 में नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार (डॉक्टरजी) द्वारा संघ की स्थापना से होती है। इसमें दिखाया है कि, कैसे एक छोटे से समूह से शुरू हुआ ये संगठन आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है।   -प्रमुख व्यक्तित्व फिल्म में संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार और उनके उत्तराधिकारी गुरुजी (माधव सदाशिव गोलवलकर) के जीवन और उनके संघर्षों को प्रमुखता से दिखाया है। फिल्म में भारत के स्वतंत्रता संग्राम में संघ के योगदान, विभाजन के समय की स्थिति, दादरा और नगर हवेली की मुक्ति, कश्मीर का मुद्दा और 1975 के आपातकाल के दौरान संगठन के संघर्षों का चित्रण किया गया है। -AI से बनाए गए ग्राफिक्स इस फिल्म की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि, इसमें 1 (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और उन्नत ग्राफिक्स का इस्तेमाल कर वीर सावरकर, महात्मा गांधी, सरदार पटेल और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को पर्दे पर जीवंत किया गया है। फिल्म की कहानी को बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन ने अपनी आवाज़ दी है।

किसानों की सम्बृद्धि के लिए हो रहे हैं चौतरफा प्रयास

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारे अन्नदाता ही मध्यप्रदेश के भाग्य विधाता हैं। हम सब प्रदेश के कृषि परिदृश्य में आये ऐतिहासिक परिवर्तन के साक्षी हैं। भारत की आत्मा गांवों में बसती है और गांवों की आत्मा किसानों में। जिस प्रदेश का किसान सशक्त होता है, वही प्रदेश समृद्धि के शिखर को छूता है। मध्यप्रदेश आज इसी सर्वकालिक सत्य का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है। किसी दौर में सिंचाई, बिजली और संसाधनों के अभावों से जूझने वाला मध्यप्रदेश आज कृषि क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति में खड़ा है। इस परिवर्तन के मूल केंद्र में राज्य सरकार किसानों का संबल बनी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष 2026 किसान कल्याण वर्ष के साथ रोजगार आधारित कृषि उद्योगों के विकास वर्ष के रूप में भी मनाया जा रहा है। इसका एकमात्र लक्ष्य है हर संभव तरीके से किसानों की आय बढ़ाकर उनके जीवन में समृद्धि लाना। राज्य सरकार किसानों को परम्परागत खेती-किसानी के बजाय अब वैज्ञानिक, उन्नत और परिष्कृत कृषि पद्धति अपनाने के लिये प्रेरित कर रही है। किसानों की वर्षा जल के संरक्षण, खेती की मिट्टी की सेहत और सीरत पर विशेष ध्यान, उन्नत बीज और जैविक-प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही अधिकाधिक पशुपालन से दुग्धोत्पादन, उद्यानिकी फसलों का क्रमिक विस्तार कर फूड प्रोसेसिंग में आगे आयें और क्राप वैल्यू एडिशन भी अपनाएं। कृषि : प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मध्यप्रदेश की राज्य जीडीपी में कृषि का हमेशा ही उल्लेखनीय योगदान रहा है। किसानों की अथक मेहनत और राज्य सरकार की कृषि विकास नीति की सफलता की कहानी अब पूरे देश की जुबान पर है। प्रमुख उपलब्धियों में खाद्यान्न उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है, श्रीअन्न (मिलेट्स) उत्पादन में भी दूसररे स्थान के साथ लगातार 7 बार कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त करने वाला राज्य भी मध्यप्रदेश ही है। दलहन, तिलहन, फल-सब्जी उत्पादन में अव्वल मध्यप्रदेश अव्बल है और प्लांट बेस्ड प्रोटीन जनरेशन फील्ड में भी मध्यप्रदेश मजबूत स्थिति में है। न्यू फूड बास्केट ऑफ इंडिया मध्यप्रदेश को अब “देश का न्यू फूड बास्केट” कहा जाने लगा है, क्योंकि विविध कृषिगत उत्पादों में मध्यप्रदेश देश में शीर्ष स्थानों पर है। ग्लोबल फूड मार्केट में भी मध्यप्रदेश के कृषि एवं इससे जुड़े उत्पादों की बड़ी धूम है। संतरा, मसाले, लहसुन, अदरक और धनिया उत्पादन में देश में नंबर वन, मटर, प्याज, मिर्च और अमरूद उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर और फूल, औषधीय एवं सुगंधित पौधों के उत्पादन में तीसरे स्थान पर है। यह राष्ट्रीय उपलब्धियां केवल आंकड़ों की नहीं, मध्यप्रदेश के किसानों की प्रगतिशीलता, परिश्रम, नवाचार और निरंतर प्रयासों की जीत है। बीज से बाजार तक : किसानों के साथ सरकार प्रदेश के किसानों के समग्र कल्याण के लिए राज्य सरकार ने कृषक कल्याण मिशन की शुरुआत की है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य किसानों को खेती के हर हिस्से में हम्बली संबल देना है, जिसमें सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी, बिजली की निर्बाध आपूर्ति, शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर फसल ऋण, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फ़सल खरीदी, फसल बीमा राशि का समय पर भुगतान और सोयाबीन एवं सरसों उत्पादक किसानों के लिये भावान्तर योजना काफी हितकारी बनी है। इन सभी प्रयासों से किसानों में नया उत्साह और आत्मविश्वास भी पैदा हुआ है। बदल रही है खेती की तस्वीर करीब 20 साल पहले तक मध्यप्रदेश का किसान सिंचाई और कमाई, दोनों के लिए संघर्ष करते थे। लेकिन अब समय बदल गया है। सरकार ने ‘हर खेत तक पानी’ पहुंचाने का बीड़ा उठाया। सिंचाई परियोजनाओं का विस्तार हुआ, बिजली गांव-गांव तक पहुंची और किसानों को सरकार से संसाधनों का संबल मिला। किसानों ने भी परिश्रम और आत्मविश्वास के साथ नई शुरुआत की। परिणाम सामने है। आज मध्यप्रदेश कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों में नई पहचान बना चुका है। सिंचाई क्रांति : हर बूंद से समृद्धि प्रदेश में कभी सिंचाई का रकबा 7 हैक्टेयर हुआ करता था, जो आज बढ़कर करीब 65 लाख हैक्टेयर हो गया है। इसे वित्त वर्ष 2028-29 के अंत तक 100 लाख हैक्टेयर तक विकास बढ़ाने के लक्ष्य के साथ राज्य सरकार कार्य कर हरी है। केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना पर काम जारी है। ताप्ती बेसिन ग्राउंड वाटर रिचार्ज मेगा प्रोजेक्ट भी प्रारंभ होने जा रहा है। ये तीनों मल्टीपर्पज इरीगेशन प्रोजेक्ट्स प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार की नई कहानी रचेंगे। कृषक कल्याण वर्ष में पहली कृषि कैबिनेट वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया गया हैं। इसके अंतर्गत कृषि संबंधी विभिन्न गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। हाल ही में जनजातीय बहुल जिला बड़वानी में प्रदेश की पहली कृषि कैबिनेट आयोजित कर किसानों के हित में 27 हजार 746 करोड़ के कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई। इसके पहले हुई मंत्रि-परिषद की बैठक भी किसानों के नाम सर्पित रही। इस बैठक में किसानों से संबंधित विभिन्न योजनाओं को आगामी 5 साल तक निरंतर बनाये रखने का निर्णय लिया गया। किसानों के हित में ठोस कदम राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए अनेक निर्णय लिए हैं। गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बोनस वितरण, वर्ष 2024 में धान उपार्जन करने वाले 6.69 लाख किसानों को 337.12 करोड़ रुपये का बोनस वितरण, प्राकृतिक आपदा प्रभावित 24 लाख से अधिक किसानों को 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदाय, सहकारी बैंकों के जरिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर फसल ऋण की योजना को निरंतर रखने का निर्णय भी किसानों के लिए एक बड़ी राहत है। श्रीअन्न और दाल मिशन : पोषण और समृद्धि की दिशा में भी हितकारी कदम उठाए गए हैं। राज्य सरकार द्वारा संचालित रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत खरीफ सीजन 2025 में 15,000 मीट्रिक टन से अधिक कोदो-कुटकी का उपार्जन किया गया। कुटकी : 3500 रुपये प्रति क्विंटल और कोदो : 2500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी गई। वहीं, दाल मिशन (2025-26 से 2030-31) के तहत दाल का उत्पादन 350 लाख टन से अधिक तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बहुत बड़ा कदम है। ऊर्जा क्रांति: सस्ती और स्वच्छ बिजली प्रदेश के किसानों को मात्र 5 रुपये में स्थायी बिजली कनेक्शन दिया जा रहा है। … Read more

बरसात से पहले तैयारी के आदेश: सरकारी भवनों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग लागू करने का फरमान

इंदौर जिले में नए और पुराने तालाबों से आजीविका गतिविधियां जोड़ने के लिए यूजर ग्रुप बनाए जाएंगे, जिनमें महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित कर रोजगार के अवसर विकसित किए जाएंगे। सभी शासकीय भवनों और प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत बनने वाले घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य होगी। श्मशान घाटों के जीर्णोद्धार कार्यों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। जल संरक्षण और संवर्धन की व्यापक रणनीति जिले में जल संरक्षण और संवर्धन को लेकर प्रशासन ने व्यापक रणनीति बनाई है। कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में जल गंगा संवर्धन अभियान सहित विभिन्न जल संरचनाओं के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिद्धार्थ जैन तथा वन मंडलाधिकारी लाल सुधाकर सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। अमृत सरोवर और जल संरचनाओं की प्रगति बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025-26 के दौरान जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। अमृत सरोवर अभियान के तहत 101 तालाबों का निर्माण पूर्ण किया गया, जबकि इस वर्ष 12 नए तालाबों के निर्माण का लक्ष्य तय किया गया है। इसके अलावा विभिन्न अभियानों के माध्यम से सैकड़ों सोख पिट, रिचार्ज पिट, वर्षा जल संचयन संरचनाएं, खेत तालाब तथा पारंपरिक जल स्रोतों का नवीनीकरण कराया गया है। बरसात से पहले कार्य पूर्ण करने के निर्देश बैठक के दौरान बताया गया कि इस वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों में करीब 800 नए कार्य प्रस्तावित हैं, जिनमें चेक डैम, पुलिया, कूप, डगवेल रिचार्ज और अन्य जल संरचनाएं शामिल हैं। कलेक्टर ने सभी कार्य बरसात से पहले हर हाल में पूरे करने के निर्देश दिए हैं।

सोनम रघुवंशी की फेरों वाली साड़ी होली में जलाकर, परिवार ने लिया राजा रघुवंशी हत्याकांड पर बड़ा फैसला

इंदौर  मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में अब होलिका दहन के मौके पर एक भावुक और प्रतीकात्मक फैसला सामने आया है। राजा रघुवंशी के परिवार ने सोनम द्वारा शादी में फेरों के समय पहनी गई साड़ी को होलिका दहन के दौरान आग के हवाले कर दिया। राजा के परिवार का कहना है कि यह कदम बुराई, धोखे और दर्दनाक यादों के अंत का प्रतीक है। राजा की मां उमा रघुवंशी ने सोमवार को मीडिया को बताया था कि होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। सोनम फिलहाल जेल में है और कानून उसे सजा देगा, लेकिन उससे जुड़ी बुरी यादों को आज खत्म कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस साड़ी को सोनम ने शादी के समय पहना था, उसे को होलिका की अग्नि में जलाया जाएगा, ताकि उस धोखे और पीड़ा की यादों का अंत हो सके। परिवार का मानना है कि यह प्रतीकात्मक कदम उनके बेटे के साथ हुए विश्वासघात और दर्द को खत्म करने की एक कोशिश की है। पिछले साल साथ खेली थी होली, अब सिर्फ यादें इस दौरान राजा की मां बेटे की पुरानी होली की वीडियो देखकर भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि पिछले साल सोनम ने खुद राजा को रंग लगाने के लिए बुलाया था। दोनों ने साथ में गुलाल से होली खेली थी और परिवार के साथ त्योहार मनाया था। उमा रघुवंशी ने भावुक होकर कहा कि उस समय किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह राजा की आखिरी होली होगी। अब वही यादें परिवार को बार-बार झकझोर रही हैं। मां बोलीं- हमारे लिए होली अब पहले जैसी नहीं रही राजा की मां ने कहा कि हमारे लिए होली अब पहले जैसी नहीं रही, लेकिन हमें विश्वास है कि सच जरूर सामने आएगा और हमारे बेटे को न्याय मिलेगा। उन्होंने बताया कि परिवार के सदस्य होलिका दहन के दिन राजा रघुवंशी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करेंगे और साथ ही न्याय की मांग को लेकर अपनी आवाज भी उठाएंगे। हनीमून के बहाने ले जाकर की गई थी हत्या यह मामला मई 2025 का है। आरोप है कि सोनम रघुवंशी अपने पति राजा रघुवंशी को हनीमून के बहाने धोखे से शिलॉन्ग लेकर गई थी। वहीं उसने अपने प्रेमी राज कुशवाहा और उसके साथियों के साथ मिलकर साजिश रची और राजा की हत्या करवा दी थी। इस मामले में सोनम और उसके प्रेमी राज फिलहाल जेल में बंद है। हाल ही में इसी प्रकरण में दो आरोपियों को कोर्ट ने बरी भी किया है। वहीं, कई अन्य आरोपियों की इंदौर से शिलॉन्ग की अदालत में ऑनलाइन पेशी करवाई जा रही है। राजा रघुवंशी हत्याकांड ने पूरे शहर को झकझोर दिया था और अब होलिका दहन के मौके पर परिवार का यह कदम एक बार फिर उस दर्दनाक घटना की यादें ताजा कर रहा है।

एक अप्रैल से लागू होगा प्रतिबंध, जबलपुर के स्कूली वाहनों में एलपीजी किट का इस्तेमाल नहीं होगा

जबलपुर  शहर की सड़कों पर स्कूली बच्चों को एलपीजी (LPG) किट लगे असुरक्षित वाहनों में ढोना अब स्कूल प्रबंधकों और वाहन स्वामियों को भारी पड़ेगा। जिला प्रशासन ने छात्र सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए एक बड़ा निर्णय लिया है। कलेक्टर कार्यालय सभागार में आयोजित इस बैठक में जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गेहलोत, आरटीओ संतोष पॉल और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) अंजना तिवारी सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी व स्कूलों के प्राचार्य मौजूद रहे। एलपीजी वाहनों से छात्रों का परिवहन पूर्णतः प्रतिबंधित कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक में यह तय किया गया है कि एक अप्रैल से जिले के किसी भी शासकीय या अशासकीय विद्यालय में एलपीजी संचालित वाहनों से विद्यार्थियों का परिवहन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। गैस किट वाले वाहन बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बैठक में स्कूली परिवहन की सुरक्षा समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि गैस किट वाले वाहन बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। सड़कों पर होगा औचक निरीक्षण: आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुलिस अधीक्षक और यातायात पुलिस को स्कूल समय के दौरान औचक निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी को जिले के समस्त सीबीएसई, आइसीएसई और माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्ध स्कूलों को इस आदेश से अवगत कराने और उनसे अनुपालन प्रतिवेदन लेने को कहा गया है। डेडलाइन तय एक अप्रैल के बाद यदि कोई स्कूल एलपीजी वाहन का उपयोग करता पाया गया, तो उसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और संबंधित संस्था व वाहन स्वामी पर दंडात्मक कार्रवाई होगी। वैकल्पिक व्यवस्था स्कूल प्रबंधकों को निर्देशित किया गया है कि वे समय रहते इन वाहनों के स्थान पर वैधानिक रूप से अनुमन्य और फिटनेस प्रमाणित (पेट्रोल/डीजल/सीएनजी) वाहनों की व्यवस्था सुनिश्चित करें। सत्यापन अभियान आरटीओ को जिम्मेदारी दी गई है कि वे स्कूली वाहनों का भौतिक सत्यापन कर गैस किट वाले वाहनों की पहचान करें।     विद्यार्थियों का सुरक्षित परिवहन हमारी प्राथमिकता है। एक अप्रैल के बाद अवैध गैस किट वाले वाहन सड़कों पर नहीं दिखने चाहिए। उल्लंघन करने वाले स्कूलों और वाहन मालिकों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।     – राघवेंद्र सिंह, कलेक्टर  

उज्जैन के राघौ पिपलिया में बड़ा हादसा, तालाब में डूबे दो नाबालिग; इलाके में शोक की लहर

उज्जैन नाखेड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम राघौ पिपलिया में सोमवार को हादसा हो गया। तालाब में नहाने गए दो किशोरों की डूबने से मौत हो गई। थाना प्रभारी नरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि रितेश पुत्र पवन राजोरिया उम्र 14 वर्ष तथा रोहित पुत्र गोवर्धन डोरिया उम्र 15 वर्ष दोनों निवासी ग्राम राघौ पिपलिया सोमवार को गांव में स्थित तालाब में नहाने गए थे। गहरे पानी में जाने से दोनों किशोर की डूबने से मौत हो गई। तालाब के बाहर खड़े एक अन्य किशोर ने दोनों को डूबते हुए देखा था। उसने ग्रामीणों को किशोरों के डूबने की सूचना दी। ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद दोनों नाबालिग को बाहर निकाला और अस्पताल ले गए थे। यहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम किया है।  

सेंट्रल यूनिवर्सिटी के 2 रिसर्चर्स को MPCST अवॉर्ड, विकसित की डायबिटीज और स्तन कैंसर की दवा प्रणाली

सागर  डॉ हरीसिंह गौर यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. मध्य प्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की 41वीं एमपी यंग साइंटिस्ट कांग्रेस में फार्मास्युटिकल साइंसेज श्रेणी में सागर यूनिवर्सिटी के फार्मेसी डिपार्टमेंट के 2 शोध छात्रों को यह अवॉर्ड मिला है. प्रियांशु नेमा और हर्षिता सिंघई को एमपीसीएसटी यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद ने यह सम्मान उनके शोध कार्यों के लिए प्रदान किया है| डायबिटीज के इलाज के लिए मिला अवॉर्ड प्रियांशु नेमा को शोध विषय मधुमेह-रोधी चिकित्सीय विकास के लिए एकीकृत ट्रांसक्रिप्टोमिक्स और कम्प्यूटेशनल ड्रग डिस्कवरी के लिए एमपीसीएसटी यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है. जिसमें डायबिटीज के इलाज के लिए आधुनिक ट्रांसक्रिप्टोमिक्स और कम्प्यूटेशनल तकनीकों के समन्वय से नई औषधीय संभावनाओं का विकास किया जा रहा है |  स्तन कैंसर की दवा प्रणाली विकसित करने पर मिला अवॉर्ड हर्षिता सिंघई को उनकी रिसर्च स्तन कैंसर के उपचार के लिए उत्तेजना-प्रतिक्रियाशील सह-युक्त लिपोसोमल दवा वितरण प्रणाली के लिए अवॉर्ड प्रदान किया गया. शोध में स्तन कैंसर के उपचार के लिए उन्नत लिपोसोमल ड्रग डिलीवरी सिस्टम विकसित करने पर कार्य किया जा रहा है, जो लक्षित (टारगेटेड) और प्रभावी इलाज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है |  रिसर्च वर्क के लिए नई दिशा एमपीसीएसटी द्वारा आयोजित सम्मेलन का उद्देश्य नवीन और उपयोगी शोध को प्रोत्साहित करना और युवा वैज्ञानिकों को रिसर्च वर्क के लिए मंच प्रदान करना है. इस उपलब्धि पर शोधार्थियों के मार्गदर्शक डॉ. उमेश के. पाटिल, डॉ. सुशील काशव और डॉ. अश्मिता गजभिये ने विभाग और विश्ववि‌द्यालय के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया|   एमपीसीएसटी द्वारा युवा वैज्ञानिकों को उनकी रिसर्च के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है. इसी के तहत प्रियांशु नेमा फिलहाल आईएलएस, भुवनेश्वर में डॉ. अंशुमान दीक्षित के मार्गदर्शन में रिसर्च को आगे बढ़ा रहे हैं. यह प्रदेश में वैज्ञानिक शोध को नई दिशा देने का कार्य करेगी |   

होली से पहले एमपी का पारा 35 डिग्री तक, मार्च में 40 डिग्री तक बढ़ने की संभावना

भोपाल मध्यप्रदेश में गर्मी ने मार्च की शुरुआत के साथ ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। मौसम आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के कई शहरों में अधिकतम तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया। मौसम फिलहाल पूरी तरह शुष्क बना हुआ है और कहीं भी वर्षा दर्ज नहीं की गई है। पूर्वी मध्यप्रदेश के नौगांव में 35.2 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश में सबसे अधिक तापमान रिकॉर्ड किया गया। पश्चिमी क्षेत्र के खरगोन में 35.0 डिग्री, धार में 34.9 डिग्री और खंडवा में 34.5 डिग्री तापमान रहा। राजधानी भोपाल में अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री और न्यूनतम 15.0 डिग्री दर्ज किया गया। इंदौर में पारा 33.6 डिग्री, ग्वालियर में 33.8 डिग्री और जबलपुर में 33.3 डिग्री सेल्सियस रहा।  रात में अभी हल्की ठंडक  रात के समय अभी हल्की ठंडक बनी हुई है। पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 12.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इंदौर में न्यूनतम 13.4 डिग्री और उमरिया में 13.9 डिग्री तापमान दर्ज हुआ। सुबह के समय कई शहरों में आर्द्रता 70 से 90 प्रतिशत तक रही, जो शाम तक घटकर 20 से 40 प्रतिशत के बीच पहुंच गई। होली पर रहेगा साफ मौसम सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्र ने बताया कि आने वाले सात दिनों तक प्रदेश में मौसम पूरी तरह साफ रहेगा। होली के दौरान बारिश या बादल की कोई संभावना नहीं है। हालांकि तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि मार्च के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच सकता है। अप्रैल-मई में लू के आसार डॉ. सुरेंद्र के मुताबिक अप्रैल और मई में लू चलने की पूरी संभावना है। विशेष रूप से पूर्वी मध्यप्रदेश में इस बार ज्यादा तेज और लंबे समय तक लू चलने के संकेत हैं। उन्होंने लोगों को दोपहर के समय धूप से बचने, पर्याप्त पानी पीने और बुजुर्गों व बच्चों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है।कुल मिलाकर प्रदेश में अब सर्दी की विदाई और गर्मी की दस्तक साफ तौर पर महसूस की जा रही है, और आने वाले दिनों में तापमान में और तेजी आने के संकेत हैं। 

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