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कमलनाथ बोले- बहन, बेटियां ही सबसे ज्यादा असुरक्षित, क्या सिर्फ कन्या पूजन करना ही काफी है

भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश में बढ़ते महिला अपराध को लेकर सरकार पर हमला बोला है। कमलनाथ ने मुख्यमंत्री शिवराज के हर कार्यक्रम से पहले कन्या पूजन के फैसले को लेकर ट्वीट किया है। कमलनाथ ने कहा कि हमारे समाज में बेटियों की सर्वत्र पूजा होती है। उनका सम्मान किया जाता है, यह हमारे सामाजिक संस्कार भी है। लेकिन क्या सिर्फ़ कन्या पूजन करना ही काफ़ी है। क्या उन्हें सुरक्षा देने का दायित्व सरकार का नहीं है? आंकड़ें ख़ुद स्थिति बया कर रहे है कि आपकी पूर्व की सरकार की बात करे या वर्तमान सरकार की। बहन-बेटियां ही सबसे ज़्यादा असुरक्षित रही है। प्रदेश में प्रतिदिन मासूम बच्चियां दरिंदगी का शिकार हो रही है। उन्हें आज सुरक्षा की सबसे ज़्यादा आवश्यकता है। एक तरफ़ आपकी सरकार हर कार्यक्रम से पहले कन्या पूजन का आदेश निकाल रही है। वहीं दूसरी तरफ़ शहडोल में एक माह में 30 मासूम बच्चे मौत की आग़ोश में समा चुके है। आपकी सरकार इस दिशा में गंभीर लापरवाह बनी हुई है। ऐसा लग रहा है कि स्थिति सरकार के नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। मौत का आंकड़ा निरंतर बढ़ता जा रहा है। एक समीक्षा बैठक के बाद आप भी ग़ायब है। ज़रा उन मासूमों को सुरक्षा व समुचित इलाज देने का अपना दायित्व भी निभाइये। शिवराज जी आप प्रदेश में हर कार्यक्रम के पूर्व कन्या पूजन का निर्णय लीजिये , उसका सदैव स्वागत है क्योंकि हमारे समाज में बेटियों की सर्वत्र पूजा होती है , उनका सम्मान किया जाता है ,यह हमारे सामाजिक संस्कार भी है।

शिवराज सरकार खुले बाजार से लेगी 2,373 करोड़ का कर्ज 9 माह में लिया 16,500 करोड़ का कर्ज

भोपाल। मध्यप्रदेश में आर्थिक संकट बढ़ता जा रहा है। 9 माह में 16,500 करोड़ का कर्ज ले चुकी है शिवराज सरकार। मध्य प्रदेश पर बाजार का कुल 2 लाख 11 हजार 89 करोड़ से ज्यादा का कर्ज हो चुका है। साल 2018 के अंत में यह कर्ज 1 लाख 80 हजार करोड़ था। शिवराज सरकार द्वारा हाल ही में लिए गए 2000 करोड़ रुपए के कर्ज बाजार से लिया है। इसके बाद मौजूदा वित्त वर्ष में शिवराज सरकार 9 माह में 16,500 करोड़ रुपए कर्ज ले चुकी है। इस बीच केंद्र सरकार ने मप्र सरकार को खुले बाजार से 2,373 करोड़ का अतिरिक्त लेने कीअनुमति दे दी है। इस राशि का 50% नागरिकों की सुविधाओं में खर्च किया जाएगा। केंद्र की शर्त के मुताबिक राज्य सरकार को कर्ज की राशि का 50% नागरिक सुविधाओं में खर्च करना होगी। केंद्र ने कहा है कि नगरीय निकायों से जुड़े सुधारों के साथ वन नेशन-वन राशन कार्ड स्कीम काे लागू करने में भी इस राशि का उपयोग किया जाए। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की मंशा के अनुरूप मध्य प्रदेश ने अपने स्थानीय निकायों के कामकाज में काफी सुधार किया है। इस दिशा में आगे प्रोत्साहित करने के लिए वित्त मंत्रालय ने मप्र को खुले बाजार से अतिरिक्त पूंजी जुटाने की अनुमति दे दी है। मध्य प्रदेश के अलावा आंध्र प्रदेश को भी यह अनुमति दी गई है। इसलिए मिली सुविधा दोनों राज्यों को यह सुविधा स्वास्थ्य और साफ-सफाई जन सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए दी गई है। शहरी स्थानीय निकायों में सुधार का उद्देश्य राज्य में यूएलबी की वित्तीय स्थिति बेहतर करना है ताकि वह सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता सेवाएं प्रदान करने में सक्षम हो सके। जिन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सुधार किए गए हैं।

अटल जी के जन्मदिवस पर मध्य प्रदेश में CM सिटीजन केयर योजना शुरू

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस पर CM सिटीजन केयर योजना की शुरुआत की है। होशंगाबाद के बाबई में CM शिवराज ने योजना शुरू करते हुए कहा, ‘ये योजना लाखों छात्र-छात्राओं एवं युवाओं के लिए वरदान साबित होगी, जो प्रतिदिन इन सेवाओं के लिए हजारों की संख्या में आवेदन देते हैं। एक फोन कॉल पर अपने नागरिकों को सेवाएं प्रदान करने वाला मध्यप्रदेश, देश का पहला राज्य बन गया है। इससे पहले बाबई में कार्यक्रम की शुरुआत में सीएम शिवराज ने कन्या पूजन किया। गुरुवार को पूरे प्रदेश के लिए ये आदेश जारी कर दिया गया है। अब प्रदेश में सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत बेटियों के पूजन से होगा। CM शिवराज ने कहा कि ‘मात्र आधार कार्ड की जानकारी देकर अब नागरिक मात्र एक दिन में प्रमाण-पत्र घर बैठे whatsApp के माध्यम से हासिल कर सकते हैं। आज से हम इस योजना को दो सर्वाधिक जन उपयोगी सेवाएं- आय प्रमाण-पत्र एवं मूल निवासी प्रमाण-पत्र के जरिए प्रारंभ कर रहे हैं।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘अब सुशासन की दृष्टि से क्रांतिकारी पहल करते हुए आज अटलजी के जन्मदिवस पर पीएम मोदी की उपस्थिति में सीएम सिटीजन केयर योजना का शुभारंभ किया जा रहा है। अटल जी के जन्मदिन को हम सुशासन दिवस के रूप में मना रहे हैं। प्रदेश की 8 करोड़ जनता को सुशासन की सौगात मिलेगी। अभी तक CM हेल्पलाइन 181 केवल शिकायतें दर्ज करने का काम करती थी। आज से 181 पर आधार नंबर से जाति प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र वॉट्सऐप पर मिलेगा।’ जमीन डायवर्सन के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे चक्कर ‘ऑनलाइन आवेदन करो और गैर विवादित नामांतरण के निपटान की सूचना आपके मोबाइल पर दी जाएगी। पटवारी को अब केवल 7 पंजिका रखनी है, उनको लैपटॉप दे रहे हैं। अब जमीन के डायवर्सन के लिए विभागों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। अब सीधे पोर्टल पर जाकर शुल्क जमा करा दो, किसान एप के माध्यम से स्वतः जमीन के उपयोग के परिवर्तन की जानकारी खसरे में दर्ज हो जाएगी

अरुणाचल में बीजेपी ने जेडीयू को तोड़ा : बिहार की राजनीति पर क्या होगा असर ?

नई दिल्ली/ पटना। अरुणाचल प्रदेश में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के 6 विधायकों ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। बिहार में बीजेपी के साथ सरकार चला रही जेडीयू के लिए यह अरुणाचल में एक बड़े झटके की तरह है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बिहार की राजनीति पर भी इसका असर होगा? हालांकि, बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार से शुक्रवार को जब सवाल पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार दिया है। शुक्रवार को पटना में नीतीश कुमार ने सिर्फ इतना ही कहा कि कल से हम लोगों का कॉन्फ्रेंस (राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक) है। इसके अलावा उन्होंने कुछ भी नहीं कहा। बीजेपी के साथ जेडीयू सिर्फ बिहार में ही नहीं बल्कि केंद्र की मोदी सरकार में भी शामिल है। नीतीश कुमार के बयान से स्पष्ट है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जेडीयू इस मुद्दे पर चर्चा करेगी। गौरतलब है कि बिहार में बीजेपी और जेडीयू ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा और बहुमत के साथ सरकार बनाई है, लेकिन पहले लोक जनशक्ति पार्टी की ओर से नुकसान पहुंचाए जाने को लेकर जेडीयू के कुछ नेताओं के मन में बीजेपी के प्रति नाराजगी दिखी तो अब कैबिनेट विस्तार को लेकर भी काफी दिनों से बात अटकी हुई है। बिहार में इस बार नीतीश कुमार की पार्टी बीजेपी से पिछड़ गई है। ऐसे में तोलमोल की शक्ति जेडीयू की कुछ कम हो सकती है। लेकिन राजनीतिक जानकार मानते हैं कि नीतीश को यह बात चुभी जरूर होगी और वह इसका बदला भी लेना चाहेंगे। अरुणाचल प्रदेश में जेडीयू के 7 विधायक थे। 6 विधायकों के पाला बदलने से सिर्फ एक विधायक ही पार्टी में बचा है। अरुणाचल विधानसभा द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार रमगोंग विधानसभा क्षेत्र के तालीम तबोह, चायांग्ताजो के हेयेंग मंग्फी, ताली के जिकके ताको, कलाक्तंग के दोरजी वांग्दी खर्मा, बोमडिला के डोंगरू सियनग्जू और मारियांग-गेकु निर्वाचन क्षेत्र के कांगगोंग टाकू भाजपा में शामिल हो गए हैं। जेडीयू ने 26 नवंबर को सियनग्जू, खर्मा और टाकू को पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया था और उन्हें निलंबित कर दिया था। इन छह विधायकों ने इससे पहले पार्टी के परिष्ठ सदस्यों को कथित तौर पर बताए बिना तालीम तबोह को विधायक दल का नया नेता चुन लिया था। अरुणाचल प्रदेश के प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बीआर वाघे ने कहा कि हमने पार्टी में शामिल होने के उनके पत्रों को स्वीकार कर लिया है।

RSS प्रमुख मोहन भागवत खिलाफ हो जाएं तो मोदी सरकार उनको भी आतंकी बता देगीः राहुल गांधी

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कृषि कानूनों के मसले पर एक बार फिर सरकार को जमकर घेरा है. गुरुवार को राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर इन मसलों को उठाया. इसी दौरान मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि जो भी मोदी सरकार के खिलाफ बोलता है, ये उन्हें आतंकी बताना शुरू कर देते हैं. राहुल ने इसी दौरान कहा कि अगर कल को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत खिलाफ हो जाएंगे, तो उन्हें भी आतंकी बता दिया जाएगा. भारतीय जनता पार्टी के नेताओं द्वारा लगाए गए किसान आंदोलन में खालिस्तानी समर्थकों का हाथ होने के आरोप पर राहुल गांधी ने जवाब दिया. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा, ‘बीजेपी, नरेंद्र मोदी जी का एक ही लक्ष्य है और वो किसान-मजदूर समझ गया है. उनका लक्ष्य अपने अमीर दोस्तों को फायदा पहुंचाना है, जो भी नरेंद्र मोदी के खिलाफ खड़े होते हैं वो उनके बारे में कुछ ना कुछ गलत बोलते रहते हैं.’ राहुल गांधी ने आगे कहा, ‘किसान खड़े हो जाएंगे तो उसे आतंकवादी बोलेंगे, मजदूर खड़े हो जाएंगे तो उन्हें आतंकवादी बोलेंगे और एक दिन अगर मोहन भागवत खड़े हो जाएंगे तो कहेंगे ये भी आतंकवादी हैं. जो भी नरेंद्र मोदी जी से सवाल पूछने की कोशिश करेगा वो आतंकवादी है और नरेंद्र मोदी सिर्फ अपने दो-तीन लोगों के लिए काम कर रहे हैं जिनको वो पूरा हिंदुस्तान पकड़ा रहे हैं.’ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को राष्ट्रपति से मुलाकात कर कृषि कानून के खिलाफ ज्ञापन सौंपा. इससे पहले भी राहुल गांधी विपक्ष के नेताओं के साथ मिलकर राष्ट्रपति से मुलाकात कर चुके हैं. राहुल ने गुरुवार को अपने बयान में कहा कि देश का किसान तबतक पीछे नहीं हटेगा, जबतक तीनों कृषि कानून वापस नहीं होंगे. आज किसानों को पता है कि ये कानून उनके लिए नहीं हैं, ऐसे में कांग्रेस पार्टी किसानों की लड़ाई में उनके साथ है. केंद्र सरकार को तुरंत संसद का सत्र बुलाकर तीनों कानूनों को रद्द करना चाहिए. बता दें कि एक तरफ राहुल गांधी ने गुरुवार को राष्ट्रपति से मुलाकात की, तो वहीं राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकालने जा रहे कांग्रेसी नेताओं को हिरासत में भी लिया गया, इनमें कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल थीं.

हरियाणा: किसानों ने खोद डाला दुष्यंत चौटाला के लिए बनाया गया हेलीपैड

चंडीगढ़। हरियाणा के जींद में किसानों का उग्र प्रदर्शनदुष्यंत चौटाला के लिए बनाया गया हेलीपैड खोदामुख्यमंत्री के काफिले के आगे दिखाए थे काले झंडे हरियाणा के जींद जिले के उचाना में किसानों ने उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के आने से पहले बनाए गए हेलीपैड को फावड़े से खोद डाला. इतना ही नहीं किसानों ने दुष्यंत चौटाला गो बैक के नारे भी लगाए. दरअसल दुष्यंत चौटाला के हेलिकॉप्टर को आज इस हेलीपेड पर लैंड करना था. किसानों के विरोध को देखते हुए दुष्यंत चौटाला का दौरा रद्द कर दिया गया. किसानों का कहना है कि जब तक दुष्यंत चौटाला किसानों का समर्थन नहीं करते तब तक उन्हें इस क्षेत्र में घुसने नहीं देंगे. किसानों का कहना था कि डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला इस्तीफा देकर किसानों के बीच में आएं. उन्होंने कहा कि यहां जो भी नेता आएगा उसका इसी तरह विरोध किया जायगा. हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर को दिखाए थे काले झंडे किसानों ने एक दिन पहले ही केंद्र सरकार के नए कृषि कानून का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के काफिले को रोक कर काले झंडे दिखाए थे और लाठियां भी चलाई थीं. इस मामले में हरियाणा पुलिस ने 13 किसानों के खिलाफ हत्या और दंगे के प्रयास का मामला दर्ज किया है. किसानों के खिलाफ अंबाला में ही मामला दर्ज किया गया है. जहां मंगलवार को प्रदर्शनकारी किसानों के एक समूह ने मुख्यमंत्री खट्टर को उस वक्त काले झंडे दिखाए थे, जब उनका काफिला अंबाला शहर से गुजर रहा था. खट्टर आगामी निकाय चुनावों के लिए पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में जनसभा को संबोधित करने के लिए शहर में आए थे. ठीक उसी वक्त अग्रसेन चौक पर किसानों ने मुख्यमंत्री के काफिले को देखकर काले झंडे लहराए थे. उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की थी. पुलिस ने बुधवार को कहा कि कुछ किसानों ने काफिले की ओर बढ़ने की कोशिश की और कुछ समय के लिए रास्ता अवरुद्ध कर दिया था. पुलिस के मुताबिक उनमें से कुछ प्रदर्शनकारियों ने कुछ वाहनों पर लाठियां भी बरसाईं.

इंदौर मेयर पद को लेकर भाई-ताई के अलावा दो गुट बढ़ने से बीजेपी का सिरदर्द बढ़ा

इंदौर. इंदौर में मेयर पद अब तक भाजपा के दो वरिष्ठ नेताओं कैलाश विजयवर्गीय और सुमित्रा महाजन के बीच बंटा हुआ होता था. लेकिन, अब दो और गुटों के उभरने से पार्टी की मुश्किल बढ़ गई है. एक गुट सांसद शंकर लालवानी का और दूसरा सिंधिया गुट के नेताओं का. इन दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं ने भी मेयर पद के टिकट की उम्मीद लगा रखी है. भाजपा को अब इन चार गुटों के नेताओं को साधकर मेयर पद का उम्मीदवार खड़ा करना है. इस स्थिति पर कांग्रेस ने भाजपा पर गुटबाजी का तंज कसा है. इंदौर में मेयर पद के टिकट के लिए भाजपा में घमासान दिखाई देने लगा है. दरअसल तीनों वरिष्ठ नेताओं कैलाश विजयवर्गीय, सुमित्रा महाजन और शंकर लालवानी अपनी-अपनी बात पार्टी के सामने रख रहे हैं. पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन जहां पूर्व विधायक गोपीकृष्ण नेमा, सुदर्शन गुप्ता और मधु वर्मा की पैरवी कर रही हैं, तो वहीं पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय रमेश मेंदोला और जीतू जिराती के लिए मेयर का टिकट चाहते हैं. जानकारी के मुताबिक, इस बीच शंकर लालवानी ने किसी नए चेहरे को टिकट देने की वकालत कर दी है. इन तीनों नेताओं के अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक भी टिकट की आस लगाए बैठे हैं. शहर में सिंधिया समर्थक मोहन सेंगर भी मेयर पद के लिए अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं. बता दें, वे विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं. कांग्रेस ने कसा ये तंज बीजेपी में चल रहे इस कोल्डवॉर पर कांग्रेस चुटकी ले रही है. कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला का कहना है कि शहर की बीजेपी त्रिशंकु स्थिति में पहुंच गई है. ताई-भाई और सांई, तीनों गुट शहर पर अपना कब्जा करना चाहते हैं, जिससे नगर सरकार उनके हिसाब से चल सके. वहीं अब सिंधिया गुट भी सक्रिय दिखाई दे रहा है, ऐसे में बीजेपी में गुटबाजी साफ दिख रही है. कांग्रेस पर गुटबाजी का आरोप लगाने वालों को अब अपने गिरेबां में झांकना चाहिए. सांसद ने किया खींचतान से इनकार उधर बीजेपी किसी भी तरह की खींचतान से इनकार कर रही है. बीजेपी के सांसद शंकर लालवानी का साफ कहना है कि पार्टी में खींचतान जैसी कोई स्थिति नहीं है. बीजेपी ही एक ऐसी पार्टी है जिसमें आंतरिक लोकतंत्र में परिवार का भाव है. पार्टी में किसी भी बात को लेकर रस्सा-कशी नहीं है. पार्टी में बहुत सारे अच्छे कार्यकर्ता हैं जो महापौर पद के उम्मीदवार हो सकते हैं. इसलिए पार्टी सभी की रायशुमारी से और विचार करके ही टिकट तय करेगी और जिसको भी टिकट मिलेगा उसे सभी वरिष्ठ नेता अपना समर्थन देंगे गैर गुट वाले को मिल सकता है टिकट बहरहाल ये बात किसी से छिपी नहीं हैं कि कैलाश विजयवर्गीय और सुमित्रा महाजन के बीच की तनातनी पार्टी के अंदर ही नहीं बल्कि पार्टी के बाहर भी दिखाई देती रही है. ताई और भाई की इसी लड़ाई में कई विधायक मंत्री तक नहीं बन पाए. इस बार भी कैलाश विजयवर्गीय के राइट हैंड रमेश मेंदौला का नाम मंत्री पद की दौड़ में शामिल रहा, लेकिन मंत्री पद दीदी यानि उषा ठाकुर को मिला, जो दोनों गुटों से दूर है. ऐसे में मेयर पद के लिए बीजेपी ऐसे उम्मीदवार का चयन कर सकती है जो किसी गुट से ताल्लुक न रखता हो.

किसानों ने सरकार के बातचीत के न्यौते को किया खारिज, कहा- आग से न खेलें

नई दिल्ली। नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन पर बैठे किसानों ने बुधवार को कहा है कि केंद्र सरकार सरकार आग से ना खेलें। आंदोलन को हल्के में ना लें। संयुक्त किसान मोर्चा का प्रेस कांफ्रेस कहा कि वो सरकार की ओर से मिले बातचीत के न्योते को खारिज करते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर कोई बातचीत संभव नहीं है। बता दें कि किसान सरकार के प्रस्ताव को पहले भी खारिज कर चुके हैं। किसानों का कहना है कि सरकार तीनों कृषि कानूनों में संशोधन नहीं, रद्द करे। किसान नेताओं ने कहा कि हम तीनों कानून को रद्द करने के नीचे हम तैयार नहीं है। सरकार इस तरह के प्रस्ताव भेजकर सिर्फ साजिश रच रही है। हम पहले ही भी इसे खारिज कर चुके है। किसान सिर्फ अन्न पैदा नहीं करता है। उनके बेटे देश की सीमा पर सुरक्षा घेरा बनाते है। सीमा पर तैनात बेटों का भी मनोबल गिर रहा है। उनके मां-बाप सड़कों पर है। हम सरकार को चेतावनी देते है कि वह आग से ना खेलें। किसान जो कि सड़कों पर आया है उसे सम्मान पूर्वक मान ले। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार गुमराह कर रही है कि किसानों की हमने सारी बात मान ली है। किसान कभी भी बातचीत के लिए मना नहीं कर रहा है। मगर सरकार असल मुद्दे पर बात करें। किसान नेता शिवकुमार ने कहा कि केंद्र को प्रदर्शनकारी किसानों के साथ वार्ता के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम गृह मंत्री अमित शाह को पहले ही बता चुके हैं कि प्रदर्शनकारी किसान संशोधनों को स्वीकार नहीं करेंगे। किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा कि सरकार को अपना हठी रवैया छोड़ देना चाहिए और किसानों की मांगों को मान लेना चाहिए। ऑल इंडिया किसान सभा के नेता हन्नन मोल्ला ने कहा कि सरकार हमें थकाना चाहती है ताकि किसानों का आंदोलन खत्म हो जाए।

MP : गृहमंत्री के PA वीरेंद्र पांडेय की गाड़ी समेत आधा दर्जन गाड़ियों में तोड़फोड़

भोपाल। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के PA वीरेंद्र पांडेय और इंजीनियर के वाहन समेत आधा दर्जन रहवासियों की गाड़ियों में मंगलवार को देर रात बदमाशों ने तोड़फोड़ कर दी और फरार हो गए। सुबह होने पर गाड़ियों में तोड़फोड़ की खबर मिलने से हड़कंप मच गया। पुलिस के आला अफसर मौके पर पहुंच गए और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने मे लगे हुए हैं। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है। सीएसपी टीटी नगर उमेश तिवारी के मुताबिक, जवाहर चौक स्थित सिंचाई कॉलोनी में रहने वाले वीरेंद्र पांडेय गृहमंत्री के पीए हैं। बीती रात उन्होंने अपनी गाड़ी को घर के बाहर खड़ा किया था। उनकी गाड़ी के साथ कॉलोनी में रहने वाले दूसरे लोगों के वाहन भी खड़े हुए थे। सुबह जब लोगों ने उठकर देखा तो पाया कि गाड़ियों के कांच टूटे हुए हैं और उसमें तोड़फोड़ की गई है। खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है। पुलिस का अनुमान है कि रात में बदमाशों ने कॉलोनी में जमकर उत्पात मचाने के बाद तोड़फोड़ की है। इस वारदात को किन लोगों ने अंजाम दिया है, जल्द ही पुलिस उन्हें पकड़ लेगी। संदेह के आधार पर कॉलोनी में रहने वाले आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों से पूछताछ कर रही है।

महाराष्ट्र के 3000 किसान 100 से ज्यादा वाहनों से निकले दिल्ली की ओर

नासिक। महाराष्ट्र के नासिक से करीब 3000 हजार किसान 100 से ज्यादा वाहनों से दिल्ली कूच कर गए हैं। ये किसान 21 दिसंबर को निकले थे। ये लोग 25 दिसंबर को दिल्ली पहुंचकर कृषि कानून का विरोध कर रहे किसान आंदोलन में शामिल होंगे। बुधवार को इन किसानों का मध्यप्रदेश की सीमा नेशनल हाइवे क्रमांक 3 पर सेंधवा में बड़ी बिजासन में नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर और उनके समर्थकों ने स्वागत किया। अखिल भारतीय किसान महासभा के डॉक्टर अजीत नवले ने बताया कि करीब 3000 किसान अलग-अलग रूट से दिल्ली गए हैं। सभी 25 दिसंबर को पहुंचकर किसान आंदोलन में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का कृषि कानून किसान विरोधी है। इसमें कई खामियां हैं। सभी किसान राशन का सामान साथ लेकर निकले हैं। जगह-जगह यात्रा का स्वागत भी किया जा रहा है। यात्रा के यहां पहुंचते ही सड़क पर वाहनों की कतार लग गई। स्वागत के बाद मेधा पाटकर भी उनके साथ हो लीं।

किसान दिवस पर प्रदर्शन करने आ रहे किसानों को जेल में बंद किया

भोपाल। दिल्ली में अन्नदाता भूख हड़ताल पर हैं। उनके आंदोलन के समर्थन में राजधानी के नीलम पार्क आ रहे किसानों को पुलिस ने रोक दिया। तीन किसान नेताओं को रात में ही हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद सुबह भोपाल आ रहे किसानों को शहर की सीमाओं पर रोक दिया गया। साथ ही, जो किसान नेता नीलम पार्क में शांतिपूर्ण सत्याग्रह करने आ रहे थे, उन्हें पहले पार्क में नहीं घुसने दिया, इसके बाद जब वो सड़क पर आ गए और नारेबाजी करने लगे, तो उन्हें हिरासत में लेकर बसों से पुरानी जेल ले जाकर बंद कर दिया। छुप-छुपाकर नीलम पार्क पहुंचे कुछ किसानों ने कहा कि तीन नेताओं को सरकार ने गिरफ्तार कर लिया। मध्य प्रदेश सरकार ने जिस हिटलरशाही के तहत शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने आ रहे किसानों को रोक दिया है। शिवराज सरकार वही है, जिनके रहते हुए मंदसौर में किसानों पर गोली चलाई गई थी। किसान नेताओं ने कहा कि किसान अपनी जायज मांगें भी नहीं रख सकते हैं। किसान नेता प्रह्लाद बैरागी ने कहा कि MP सरकार ने किसानों को उनका हक नहीं दिया, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। हम CM शिवराज सिंह से पूछते हैं कि किसानों से खरीदे गए गेहूं का बोनस 2019-20 का दिया है। PM फसल बीमा के नाम पर किसानों को ठगा जा रहा है। ऑल इंडिया किसान को-ऑर्डिनेशन कमेटी के राहुल राज किसानों के समर्थन में यहां आए थे। MP की शिवराज सरकार किसानों के इस लोकतांत्रिक अधिकार को भी छीन रही है। नीलम पार्क में प्रदर्शन नहीं होने दिया गया गया और यहां पुलिस तैनात कर दी गई है। जो किसान आ रहे थे, उन किसानों को रोक दिया गया है। तीन किसानों को हिरासत में लिया MP सरकार हिटलरशाही के तहत किसानों को शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन के लिए भोपाल आ रहे सामाजिक कार्यकर्ता विजय कुमार और किसान नेता बाबू सिंह राजपूत और इरफान जाफरी को भानपुर पुलिस ने हिरासत में लिया है। ये तीनों संयुक्त किसान मोर्चा की भोपाल इकाई के सदस्य हैं। संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से 23 दिसंबर को भोपाल के नीलम पार्क में एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके चलते विजय, बाबू सिंह और इरफान जाफरी को हिरासत में लिया गया है।

मध्यप्रदेश में 344 निकायों में वोटिंग 2 फेज में होगी, पंचायत चुनाव फरवरी से अप्रैल के बीच

भोपाल। मध्य प्रदेश चुनाव आयोग ने नगरीय निकाय चुनाव की तैयारी पूरी कर ली है। प्रदेश के 344 निकायों में वोटिंग 2 फेज में होगी। आयोग 25 दिसंबर के बाद चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। हालांकि, विधानसभा के शीतकालीन सत्र को ध्यान में रखते हुए जनवरी के पहले सप्ताह तक इसे टाला जा सकता है। पहली बार पार्षद प्रत्याशियों के लिए चुनाव खर्च की सीमा तय कर दी गई है। उन्हें अपने चुनाव खर्च की डिटेल भी बतानी होगी। महानगर में 8.75 लाख, नगर पंचायत में 75 हजार रुपए ही खर्च कर पाएंगे नगरीय निकाय के चुनावों में आबादी के हिसाब से खर्च की अलग-अलग सीमा तय की गई है। महानगर में पार्षद कैंडिडेट 8 लाख 75 हजार रुपए खर्च सकेंगे। जबकि नगर पंचायत चुनाव में खर्च की लिमिट 75 हजार रुपए तक की गई है। पंचायत चुनाव फरवरी से अप्रैल के बीच सूत्रों के मुताबिक चुनाव आयोग की मंशा 30 जनवरी तक नतीजे घोषित करने की है। इसकी वजह यह है कि निकाय चुनाव के बाद पंचायत के चुनाव भी कराने हैं। आयोग पंचायत चुनाव 3 फेज में फरवरी से अप्रैल के बीच में कराने की तैयारी में जुट गया है। एक बूथ पर 1000 वोटर की लिमिट होगी आयोग के एक अधिकारी का कहना है कि कोरोना संक्रमण के चलते पोलिंग बूथ पर वोटर की मैक्सिमम लिमिट एक हजार तय कर दी गई है। इस वजह से प्रदेश में 2,387 पोलिंग बूथ बढ़ गए हैं। इस बार ऑनलाइन नॉमिनेशन की सुविधा आयोग के मुताबिक निकाय चुनाव में पहली बार ऑफलाइन के अलावा ऑनलाइन नॉमिनेशन फॉर्म जमा करने की सुविधा दी जाएगी। MP ऑनलाइन पर नॉमिनेशन किया जा सकेगा। फॉर्म जमा करने की फीस 40 रुपए तय की गई है। पहली बार पार्षद कैंडिडेट्स को देनी होगी चुनाव खर्च का डिटेल पार्षद के चुनाव में धनबल का उपयोग रोकने के लिए चुनाव आयोग ने खर्च की लिमिट तय करने के साथ खर्च का ब्योरा बताने के नियम बना दिए हैं। चुनाव की तारीख से 30 दिन के अंदर प्रत्याशी या उसके एजेंट को खर्च की डिटेल देनी होगी। गलत जानकारी दी तो चुनाव रद्द करने के साथ कैंडिडेट को अयोग्य भी घोषित किया जा सकता है। ये जानकारियां देनी होंगी पार्षद प्रत्याशी को खर्च की गई राशि का सोर्स, सार्वजनिक सभा, रैली, जुलूस, प्रचार सामग्री, केबल नेटवर्क, थोक SMS या इंटरनेट, सोशल मीडिया के जरिए प्रचार, वाहन, कार्यकर्ता और एजेंट पर खर्च, चुनाव अभियान में लगाई खुद की रकम, पार्टियों से मिला कैश- चेक, कर्ज, गिफ्ट और दान की रकम की डिटेल बतानी होगी। चुनाव 1 जनवरी 2020 की वोटर लिस्ट से होंगे। इसमें 1 करोड़ 51 लाख 89 हजार 400 वोटर्स के नाम हैं। प्रदेश में 407 में से 344 निकायों में चुनाव होगा। इसमें 16 नगर निगम, 75 नगर पालिका और 253 नगर परिषद शामिल हैं।

CM शिवराज का बदमाशों को अल्टीमेटम- MP छोड़ दो नहीं तो ‘मामा’ मसलकर रख देगा

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को अपने गृह जिले सीहोर से बदमाशों को कड़ी चेतावनी दी. सीएम शिवराज ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि बदमाशों मध्य प्रदेश छोड़ देना. बदमाशों सावधान हो जाओ, मामा धूल में मिलाकर रख देगा. मसलकर रख देगा. उन्होंने कहा कि गरीबों का पैसा खा रहे, गरीबों का धन लूट रहे बदमाशों, आजकल मामा खतरनाक हो गया है. कई बेईमानो की बिल्डिंग तुड़वाकर फेंकवा दी. साफ कह दिया है कि गड़बड़ करने वाले अपराधियों को तबाह और बर्बाद करो. सीएम शिवराज धर्म परिवर्तन को लेकर भी बोले. उन्होंने कहा कि कोई लोभ-लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की तो उसे भी नहीं छोड़ा जाएगा. उन्होंने महिला सुरक्षा को लेकर कहा कि किसी ने बेटियों पर बुरी नजर डाली तो मामा से बुरा कोई नहीं होगा. इसके लिए भी कानून बना रहे. सीएम शिवराज पूरी रौ में नजर आ रहे थे. उन्होंने गरीबों की गाढ़ी कमाई लेकर चंपत हुई चिटफंड कंपनियों को लेकर कहा कि आदिवासियों का पैसा लेकर जो कंपनियां भाग गईं, चिंता मत करना. सीएम ने कहा कि उन सबकी प्रॉपर्टी नीलामी में लगवा दी है. नीलामी कराके पैसा दिलवाऊंगा. गले में हाथ डालकर गरीबों का पैसा लाऊंगा. जहां रहेंगे, वहां से उठवाकर जेल भिजवाऊंगा. सीएम शिवराज ने आश्वासन दिया कि कोई बेईमान बचेगा नहीं. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति के जो लोग जमीन पर कई साल से काबिज थे, उन्हें पट्टा देकर उस भूभाग का मालिक बनाया जा रहा है. सीएम ने कहा कि गरीब का कल्याण, किसानों का उत्थान और सबको रोटी, कपड़ा, मकान भारतीय जनता पार्टी की सरकार की प्राथमिकता है. पूर्ववर्ती कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पिछले सवा साल में जनजातीय भाई-बहनों पर अत्याचार किया गया. उनकी जमीन छीनने की कोशिश हो रही थी. उनको मुकदमों में फंसाया गया. ट्रैक्टर छीने गए. बीजेपी ने उस अन्याय को दूर किया है.

MP : चुनाव में कालेधन के इस्तेमाल से सियासी उफान, 124 करोड़ का लेनदेन

भोपाल। चुनाव में कालेधन के इस्तेमाल से उठे सियासी उफान के बीच आयकर के दस्तावेजों में नया खुलासा हुआ है। विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले हुए लेन-देन से जुड़ी आयकर विभाग की अप्रेजल रिपोर्ट में आठ विभागों के नाम के आगे 124 करोड़ 20 लाख रुपए का जिक्र किया गया है। इसमें सर्वाधिक राशि परिवहन विभाग और आबकारी विभाग के आगे लिखी है। चुनाव आयोग के निर्देश के बाद राज्य सरकार द्वारा आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) को केस सुपुर्द करते ही जांच का दायरा तीन आईपीएस अधिकारियों और एक राज्य पुलिस सेवा के अफसर के साथ इन विभागों तक भी पहुंचेगा। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस केस के बारे में जानकारी दे दी गई है। एक-दो दिन बाद ईओडब्ल्यू को केस सौंपा जा सकता है। इस बीच रविवार को भाजपा दफ्तर पहुंचे मुख्यमंत्री से मीडिया ने इस केस के संबंध में सवाल किया कि सरकार में शामिल कुछ मंत्रियों और विधायकों के साथ नेताओं के नाम भी शामिल हैं, इस पर उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगा। आयकर दस्तावेज में कंप्यूटर बाबा के नाम के आगे लिखा 25 लाख आम चुनाव में दिग्विजय सिंह भोपाल संसदीय सीट से प्रत्याशी रहे। आयकर के दस्तावेजों में उन्हें 90 लाख दिए जाने के साथ कंप्यूटर बाबा का भी जिक्र है। बाबा उस समय भोपाल में दिग्विजय के लिए ही प्रचार कर रहे थे। बाबाे नाम के आगे 25 लाख लिखा है। प्रतीक जोशी की डायरी में कई नाम अप्रैल 2019 में पड़े आयकर छापे के दौरान प्रतीक जोशी के घर से एक डायरी भी मिली, जिसमें चुनाव के लिए पैसा देने और लेने वालों के नाम लिखे हैं। इसी में कुछ विभागों के भी नाम हैं। साथ ही बैलेंस शीट व खर्च का भी उल्लेख है। इस सूची का मिलान ललित छजलानी घर से लैपटॉप में मिली सूची से किया गया, जो तकरीबन मिल रही है। छजलानी के घर से मिली सूची की एक्सएल फाइल को लोकसभा लिखा गया है। संजीव सिंह-रामबाई के नाम के आगे 50 लाख से अधिक का जिक्र अप्रेजल रिपोर्ट में बसपा विधायकों से जुड़ी जानकारी का भी जिक्र है। एक रसीद है, जिसमें बसपा विधायक संजीव सिंह के द्वारा 25 लाख लेने का जिक्र है। एक जगह सूची में संजीव सिंह के नाम के आगे 10 लाख लिखा है। इसी तरह बसपा की दूसरी विधायक रामबाई के नाम के आगे 36 लाख 50 हजार लिखा है। परिवहन, आबकारी, पीएचई सहित 8 विभागों से लेन-देन का जिक्र आयकर दस्तावेजों में परिवहन (फंड ऑफ ट्रांसपोर्ट) के सामने 58 करोड़ और एम. सिखरवार से 3 करोड़, आबकारी (फंड ऑफ एक्साइज) 38.8 करोड़, पीडब्ल्यूडी-नगरीय विकास से 7.2 – 7.2 करोड़, इरीगेशन-खनिज से छह-छह करोड़, ऊर्जा से 1.5 और पीएचई से 1.3 करोड़ लिखा है।

MP : कालेधन मामले में मंत्रियों के नाम आने से शिवराज सरकार में हड़कंप, कांग्रेस हमलावर

भोपाल। लोकसभा चुनाव 2029 में कालेधन का लेनदेन में सियासत गरमा गई है। जिन विधायकों के नाम केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की रिपोर्ट में आए हैं, वे कांग्रेस के हों या बीजेपी के सभी के स्वर एक समान ही हैं। उनका कहना है कि हमें बदनाम करने की साजिश हुई है। सत्ता दल और विपक्ष दोनों के नेताओं का नाम होने से सरकार कार्रवाई पर फैसला नहीं ले पा रही है। पहले एक्शन को भाजपा नगरीय निकाय चुनाव में मुद्दा बनाने जा रही थी, उससे पहले ही कांग्रेस ने पुरानी रिपोर्ट उछालकर मामला फिफ्टी-50 बनाने की कोशिश तेज कर दी है। बीजेपी-कांग्रेस के संदेही नेताओं ने ही आरोप से बचने के लिए एक स्वर में कहा कि यदि हमने चुनाव में पैसा लिया है तो जांच एजेंसियों ने अब तक नोटिस क्यों नही दिया? पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का बयान भी कुछ इसी लाइन पर आया है। इसको लेकर सरकार भी सांसत में है। दरअसल, इस मामले में शिवराज सरकार के 2 मंत्री और 11 विधायक भी फंस रहे हैं, जो कांग्रेस से बीजेपी में आए हैं। सीबीडीटी की रिपोर्ट में तत्कालीन कमलनाथ सरकार के मंत्री सहित 64 विधायकों के नाम हैं। इनमें से 13 विधायक रिपोर्ट आने से पहले बीजेपी का दामन थाम चुके हैं। पार्टी बदलने के बाद भी उनके स्वर रिपोर्ट पर कांग्रेस जैसे ही हैं। इस मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का बयान आ चुका है, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रतिक्रिया नहीं आई। जबकि बीजेपी के 13 में से 8 विधायक (इसमें से दो प्रद्युमन सिंह तोमर और राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव मंत्री हैं) सिंधिया समर्थक हैं। इस रिपोर्ट में सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम नहीं है, लेकिन दिग्विजय सिंह पर लोकसभा चुनाव में 90 लाख रुपए मिलने के आरोप हैं। इस पर सफाई देने दिग्विजय सिंह ने शनिवार को प्रेस कान्फ्रेंस बुलाई थी। उन्होंने कहा कि हर तरह की जांच के लिए तैयार हूं। साथ ही, सवाल खड़ा किया – यह कैसी जांच है, अभी तक मुझे एक भी नोटिस देकर बयान नहीं लिए गए। दिग्विजय जैसा ही बयान सिंधिया के कट्टर समर्थक शिवराज सरकार के मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने दिया है। तोमर ने कहा -यदि लेन-देन में हम शामिल हैं तो अब तक नोटिस क्यों नहीं दिया गया? शिवराज सरकार में उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव ने भी कहा कि आरोप झूठे हैं। हर तरह की जांच के लिए तैयार हूं। क्या वे बीजेपी में आने के बाद पवित्र हो गए? कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने इसको लेकर आगे की जांच की निष्पक्षता को लेकर बीजेपी से सवाल किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है – कमलनाथ को बदनाम करने की साजिश लोकसभा चुनाव के पहले रची गई थी। सीबीडीटी की कपोल-कल्पित रिपोर्ट में शिवराज सरकार में सिंधिया समर्थक दो मंत्रियों और कई विधायकों के भी नाम आए हैं। क्या उन पर भी एफआईआर होगी? वे बीजेपी में आने के बाद पवित्र हो गए हैं? CM की मुख्यसचिव से हो चुकी चर्चा मंत्रालय सूत्रों ने दावा किया है कि सीबीडीटी की रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस तथा प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी के साथ बैठक हो चुकी है। इसमें तय किया गया है कि विधि विभाग की राय लेने के बाद रिपोर्ट ईओडब्ल्यू को सौंपने का निर्णय लिया जाएगा। शिवराज ने कहा था – दोषी कोई भी हो, कार्रवाई होगी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मामले में कहा है कि रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर दोषी कोई भी हो, वैधानिकता के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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