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जो औरंगजेब की तारीफ करेगा उसे कब्रिस्तान पहुंचा दिया जाएगा: विधायक रामेश्वर शर्मा

भोपाल  समाजवादी पार्टी के सांसद अबू आजमी के औरंगजेब पर दिए बयान के बाद लगातार सियासत जारी है. वहीं, अब मध्य प्रदेश की राजनीति में भी तूफान आ गया है. यहां भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने एक विवादित बयान दिया है. उन्होंने कहा कि जो औरंगजेब की तारीफ करेगा उसे कब्रिस्तान पहुंचा दिया जाएगा. बता दें, भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा भोपाल के एक शिक्षण संस्थान के कार्यक्रम में पहुंचे हुए थे. यहां उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में एक मूर्ख पाठ पढ़ा रहा था कि औरंगजेब महान है. वो औरंगजेब महान कैसे हो सकता है, जिसने गुरु तेग बहादुर का शीश कटवाया था, जिनकी स्मृति में दिल्ली में शीशगंज गुरुद्वारा है. औरंगजेब लुटेरा था… उन्होंने यह भी कहा कि इसी औरंगजेब ने गुरु गोविंद सिंह के दो बेटों को दीवार में चुनवा दिया था, यह आक्रांता महान कैसे हो सकता है? लाखों हिंदुओं के जनेऊ तुड़वाने वाला यही लुटेरा औरंगजेब था यह महान कैसे हो सकता है? औरंगजेब लुटेरा था, बाबर लुटेरा था, अकबर लुटेरा था, हिमांयू लूटेरा था. उन्होंने कहा कि जो औरंगजेब की तारीफ करेगा उसे कब्रिस्तान भेज दिया जाएगा. मुगलों के आगे झुके नहीं उन्होंने आगे कहा कि महान तो हमारे छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप गुरु तेग बहादुर और गुरु गोविंद सिंह थे है और सदैव रहेंगे जिन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया लेकिन इन लुटेरे मुगलों के आगे झुके नहीं. बता दें कि यह बवाल समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी की बयान के बाद शुरू हुआ था. अबू आजमी ने औरंगजेब को महान शासक बताया था.

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की पत्नी प्रतिभा ने सिंघार के खिलाफ कोर्ट में लगाए आरोप, महिला मित्र से जुड़ा मामला

भोपाल  विपक्ष के नेता उमंग सिंघार पर उनकी पत्नी प्रतिभा मुदगल ने गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रतिभा ने सुप्रीम कोर्ट में 142 पन्नों की याचिका दायर की है। इसमें उन्होंने सिंघार पर अपनी कथित महिला मित्र सोनिया भारद्वाज की जान लेने का आरोप लगाया है। प्रतिभा का दावा है कि एक आईपीएस अधिकारी की मदद से सिंघार ने इस घटना दूसरा रूप दे दिया। यह मामला 2021 का है, जब सोनिया का शरीर सिंघार के बेडरूम में मिला था। पुलिस जांच पर भी प्रतिभा ने सवाल उठाए हैं। प्रतिभा मुदगल ने सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की है, उसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हैं। याचिका में बताया गया है कि सोनिया के बेटे आर्यन ने 18 मई 2021 को डीजीपी को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में आर्यन ने साफ तौर पर लिखा था कि उनकी मम्मी की जान ली गई है। लेकिन सिंघार ने अपने रिश्तेदार और पुलिस अधिकारियों की मदद से मामले को दूसरा रूप दे दिया। सिंघार पर वकील के गंभीर आरोप प्रतिभा के वकील वीवी गौतम ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि उमंग सिंघार और उनके कुछ साथी नेताओं का एक गिरोह है। यह गिरोह हाई-प्रोफाइल महिलाओं को फंसाकर उनका शोषण करता है। वकील के मुताबिक सोनिया भी इसी गिरोह का शिकार हुईं। 2021 में गई सोनिया भारद्वाज की जान सोनिया भारद्वाज की मौत 2021 में हुई थी। उनका शव उमंग सिंघार के बेडरूम में मिला था। पुलिस ने शुरुआती जांच में इसे अपनी जान लेना बताया, लेकिन सोनिया के बेटे आर्यन द्वारा डीजीपी को लिखे पत्र में मामला कुछ और निकला। 142 पेज की याचिका में प्रतिमा ने 2022 में जबलपुर हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत उमंग सिंघार को क्लीन चिट दी गई थी। इस मामले को लेकर दैनिक भास्कर ने सिंघार की पत्नी प्रतिमा मुद्गल और उनके वकील वकुल गौतम से बात की। प्रतिमा ने कहा- मुझे भी मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया गया था। यहां तक कि जान से मारने की कोशिश की गई थी। मैं सुप्रीम कोर्ट के सामने सारे सबूत रखूंगी। अब जानिए, सिंघार की पत्नी ने क्या कहा… मुझे भी जान से मारने की कोशिश की भास्कर ने जब सिंघार की पत्नी प्रतिमा मुद्गल से बात की तो उन्होंने बताया- सिंघार ने मुझसे 16 अप्रैल 2022 को भोपाल में शादी की थी। शादी के बाद सिंघार का बर्ताव बदल गया। वे मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे। मुझे धक्का देते थे और कई बार जान से मारने की धमकी भी देते थे। 26 अक्टूबर 2022 को मेरे पति ने शराब पीकर मुझे कई बार बोला कि जमीन में जो कट्टा गढ़ा है, उसे लेकर आओ। आज तुम्हारा काम खत्म कर देते हैं। उसके बाद मेरा हाथ पकड़ा और मुझे जबरदस्ती बालकनी से लटका दिया था। मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाई थी। इस पूरे मामले की शिकायत मैंने धार थाने में की थी। सोनिया केस में निष्पक्ष जांच हो इस सवाल का जवाब देते हुए प्रतिमा के वकील वकुल गौतम ने तर्क दिया- प्रतिमा मुद्गल को फरवरी के दूसरे हफ्ते में पता लगा कि सोनिया भारद्वाज के मामले में दर्ज एफआईआर रद्द हो गई है। प्रतिमा चाहती हैं कि सोनिया केस में निष्पक्ष जांच हो। जांच भी सीबीआई या दूसरी ऐसी एजेंसी करें, जिसमें सरकार का दखल न हो। सभी तथ्य सामने आना चाहिए। जिससे पता लगे कि ये हत्या है या आत्महत्या। सभी सबूतों का अच्छे से इन्वेस्टिगेशन हो। क्यों लग रहा है कि सोनिया ने खुदकुशी नहीं की, ये हत्या है प्रतिमा के वकील वकुल गौतम का कहना है कि उमंग सिंघार के घर पर लिव-इन-पार्टनर सोनिया भारद्वाज का शव मिला था। परिस्थितिजन्य सबूत इस तरफ इशारा कर रहे थे कि ये एक मर्डर था। मगर, पुलिस ने आईपीसी की धारा 306 में मामला दर्ज किया था, जो सुसाइड की धारा थी। अब आईपीसी की जगह बीएनएस लागू हो गया है। उस समय उमंग सिंघार के रिश्तेदार एमपी पुलिस में बड़े ओहदे पर तैनात थे। ऐसा लगता है कि उनकी मदद से हत्या के केस को आत्महत्या में कन्वर्ट कर दिया गया। वकुल गौतम ने आरोप लगाया- सिंघार का अतीत ये है कि सिंघार और उनके करीबी नेताओं का एक संगठित गिरोह है, जो हाई प्रोफाइल महिलाओं को अपने जाल में फंसाकर उनका शोषण करता है। उसके बाद या तो शादी करते हैं या लिव-इन-रिलेशन में रखते हैं। इसके बाद उस महिला को टॉर्चर किया जाता है। इसी क्रम में सोनिया भारद्वाज की हत्या की गई है।   सोनिया ने पहले पति को छोड़ा, दूसरी शादी भी नहीं चली सोनिया की जिंदगी की कहानी में ऊंचे ख्वाब और निजी जिंदगी की परेशानियां शामिल थीं। वह एक ऐसी महिला थी, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए हमेशा तैयार रहती थी लेकिन उसकी निजी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए। सोनिया ने अपने पहले पति संजीव को छोड़कर दूसरी शादी एक बंगाली शख्स से की थी, लेकिन यह रिश्ता भी ज्यादा दिन तक नहीं चला। वह अपने बेटे आर्यन से बहुत प्यार करती थी और उसकी परवरिश में कोई कमी नहीं छोड़ी। आर्यन तब शिमला में होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर रहा था। बेटे की पढ़ाई का पूरा जिम्मा सोनिया ने अकेले ही उठाया था। सोनिया और उमंग सिंघार की पहचान एक मैट्रिमोनियल साइट के जरिए हुई थी। एक दिन मार्केटिंग कंपनी के काम के सिलसिले में सोनिया भोपाल आई थी। यहां वह कांग्रेस नेता उमंग सिंघार से मिली। इसके बाद दोनों दो साल तक एक दूसरे के संपर्क में रहे। साल 2020 में उमंग सिंघार और सोनिया भारद्वाज की सगाई हुई थी। क्या है मामला नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के घर के बेडरूम में एक महिला का शव मिला। 16 मई 2021 को मिले इस शव की पहचान सोनिया भारद्वाज के रूप में की गई। वे उमंग सिंघार की लिव इन पार्टनर Umang Singhar live in partner थीं। पुलिस ने तब आईपीसी की धारा 306 के तहत आत्महत्या का केस दर्ज किया गया था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि तब उमंग सिंघार के एक ​​परिचित अधिकारी ने हत्या को सुसाइड का केस बनाने में सहायता की थी। पुलिस में मामला दर्ज होने … Read more

राजीव शुक्ला भगवान राम के पुत्र लव के मंदिर पहुंचे , इस कट्टर इस्लामिक देश में है मौजूद

इस्लामाबाद  बीसीसीआई के उपाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला पाकिस्तान पहुंचे हैं। उनका यह दौरा पाकिस्तान में आयोजित चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान हुआ है। इस दौरान उन्होंने लाहौर में स्थित भगवान राम के पुत्र लव की समाधि पर भी पहुंचे। राजीव शुक्ला ने उनकी समाधि पर पूरा-अर्चना करते हुए तस्वीर भी पोस्ट की है। इसमें उन्होंने कहा कि भगवान राम के दूसरे पुत्र कुश ने कसूर शहर को बसाया था, जो पाकिस्तान का एक बड़ा शहर है। राजीव शुक्ला ने क्या कहा राजीव शुक्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, लाहौर के प्राचीन क़िले में प्रभु राम के पुत्र लव की प्राचीन समाधि है लाहौर नाम भी उन्ही के नाम से है। वहां प्रार्थना का अवसर मिला। साथ में पाकिस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी जो इस समाधि का जीर्णोद्धार करवा रहे हैं । मोहसिन ने मुख्यमंत्री रहते यह काम शुरू करवाया था।” ‘कुश ने बसाया था कसूर शहर’ उन्होंने आगे लिखा, “लाहौर के म्युनिसिपल रिकॉर्ड में दर्ज है कि यह नगर भगवान राम के पुत्र लव के नाम से बसाया गया था और कसूर शहर उनके दूसरे पुत्र कुश के नाम से। पाकिस्तान सरकार भी यह बात मानती है।” कौन हैं राजीव शुक्ला राजीव शुक्ला भारतीय राजनेता, पूर्व पत्रकार और इंडियन प्रीमियर लीग के पूर्व अध्यक्ष हैं। आईपीएल में कथित भ्रष्टाचार और स्पॉट फिक्सिंग का मामला सामने आने के बाद राजीव शुक्ला ने 1 जून 2013 को इसके अध्यक्ष के रूप में इस्तीफा दे दिया। 2015 में राजीव शुक्ला को फिर से सर्वसम्मति से बीसीसीआई द्वारा आईपीएल के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया। 18 दिसंबर 2020 को उन्हें निर्विरोध बीसीसीआई का उपाध्यक्ष चुना गया था।

भैयाजी जोशी बोले मुंबई में मराठी सीखने की जरूरत नहीं, गुजराती से भी काम चल जाएगा

 मुंबई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता सुरेश भैयाजी जोशी के हालिया बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है. भैयाजी जोशी ने कहा कि “मुंबई की कोई एक भाषा नहीं है, इसलिए यहां आने के लिए मराठी सीखने की जरूरत नहीं है. यहां गुजराती से भी काम चल जाएगा.” इस बयान पर शिवसेना (UBT) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. गुजराती को बताया घाटकोपर की भाषा आरएसएस नेता के इस बयान का शिवसेना (UBT) नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने विरोध किया है. ठाकरे ने कहा,’मुंबई हो या महाराष्ट्र, हमारी जमीन की पहली भाषा मराठी है. तमिलनाडु या किसी दूसरे राज्य में तमिल की तरह मराठी भी हमारा गौरव है. भैयाजी जोशी ने गुजराती को घाटकोपर की भाषा बताया है. लेकिन यह अस्वीकार्य है. मराठी हमारी मुंबई की भाषा है.’ मुंबई को तोड़ने की कोशिश: आव्हाड आरएसएस नेता के बयान पर एनसीपी विधायक जीतेंद्र आव्हाड की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा,’केम छो, केम छो’ ऐसा लगता है कि अब मुंबई में सिर्फ यही सुनने को मिलेगा. भैयाजी जोशी भाषा के मुद्दे पर मुंबई को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.’ मराठी संस्कृति-पहचान का हिस्सा: फडणवीस मराठी भाषा को लेकर छिड़ी बहस के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का भी इस मुद्दे पर बयान आ गया है. उन्होंने विधानसभा में कहा,’मुंबई, महाराष्ट्र और राज्य सरकार की भाषा मराठी है. यहां रहने वालों को इसे सीखना चाहिए. मराठी भाषा राज्य की संस्कृति और पहचान का हिस्सा है और इसे सीखना हर नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए.’ विधानसभा में भिड़े बीजेपी और शिवसेना हालांकि, मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सदन में शिवसेना (UBT) और बीजेपी के सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई. यह बहस इस कदर बढ़ गई कि कामकाज 5 मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया. भैयाजी जोशी का बयान भैयाजी जोशी ने अपने बयान में कहा, “मुंबई में एक नहीं, कई भाषाएं बोली जाती हैं. मुंबई के हर हिस्से की अपनी अलग भाषा है. घाटकोपर इलाके में गुजराती भाषा प्रमुख रूप से बोली जाती है. इसलिए यदि कोई व्यक्ति मुंबई में रहना चाहता है या यहां आना चाहता है, तो उसे मराठी सीखने की अनिवार्यता नहीं है.” शिवसेना (UBT) का विरोध शिवसेना (UBT) नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने इस बयान का कड़ा विरोध किया है. उन्होंने कहा, “मुंबई हो या महाराष्ट्र, हमारी जमीन की पहली भाषा मराठी है. जिस तरह तमिलनाडु में तमिल को प्राथमिकता दी जाती है, वैसे ही महाराष्ट्र में मराठी हमारी पहचान और गौरव है. भैयाजी जोशी ने गुजराती को घाटकोपर की भाषा बताया है, लेकिन यह पूरी तरह अस्वीकार्य है. मुंबई की भाषा मराठी है.” NCP की प्रतिक्रिया राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने भी इस बयान की निंदा की है. पार्टी नेताओं ने कहा कि मुंबई महाराष्ट्र की राजधानी है और मराठी यहां की मूल भाषा है. किसी भी भाषा को महत्व देना गलत नहीं है, लेकिन मराठी को दरकिनार करना मराठियों के स्वाभिमान के खिलाफ है. मराठी अस्मिता का मुद्दा महाराष्ट्र में मराठी अस्मिता (पहचान) हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है. शिवसेना और एनसीपी जैसे दलों ने हमेशा से मराठी भाषा और संस्कृति की रक्षा को अपने एजेंडे में रखा है. इस बयान के बाद राज्य में मराठी भाषा को लेकर नई बहस छिड़ गई है. भैयाजी जोशी के बयान ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है और मराठी अस्मिता के मुद्दे को फिर से केंद्र में ला दिया है. शिवसेना और एनसीपी जैसे दल इसे मराठी संस्कृति पर हमला मान रहे हैं, जबकि आरएसएस नेता का कहना है कि मुंबई बहुभाषी शहर है और हर भाषा का सम्मान किया जाना चाहिए. यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है.

2026 तमिलनाडुचुनाव से पहले बीजेपी और एआईएडीएमके के बीच तल्खी कम होती नजर आ रही

चेन्नई 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और एआईएडीएमके के बीच तल्खी कम होती नजर आ रही है। दोनों पार्टियों के बड़े नेताओं ने गठबंधन के संकेत दिए हैं। एआईडीएमके के प्रमुख ई के पलानीस्वामी से जब बीजेपी से गठबंधन की संभावनाओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 6 महीने इंतजार करिए। उन्होंने मेलमिलाप की संभावनाओं को खारिज नहीं किया। दूसरी ओर, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के.अन्नामलाई ने भी ऐसे ही एक सवाल के जवाब में डिप्लोमैटिक बयान देते हुए कहा कि राजनीति में कोई किसी का स्थायी दुश्मन नहीं होता है। हमारा लक्ष्य एक ही है, डीएमके को हराना। दिसंबर में भी उन्होंने संकेत देते हुए कहा था कि गठबंधन पर फैसला करने के लिए पर्याप्त समय है। देखते हैं कि 2025 में यह कैसे आगे बढ़ता है। अकेले लड़कर अन्नामलाई ने बढ़ाया बीजेपी का वोट प्रतिशत बीजेपी और एआईएडीएमके कई चुनाव साथ लड़ चुकी है, हालांकि 1998 के बाद कई बार दोनों के रिश्ते जुड़े और टूटे भी। सितंबर 2023 में बीजेपी नेता अन्नामलाई ने द्रविड़ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुरई को लेकर बयान दिया। अपने बयान में उन्होंने दावा किया कि अन्नादुरई ने 1956 में मदुरै में एक कार्यक्रम में हिंदू धर्म का अपमान किया था, इस कारण उन्हें छिपना पड़ा और माफी मांगनी पड़ी। उनके इस बयान के बाद दोनों पार्टियों के रिश्ते तल्ख हो गए। एआईडीएमके अन्नामलाई के इस्तीफे और माफीनामे पर अड़ गई, फिर गठबंधन टूट गया। 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले नजदीक आने की चर्चा चली मगर बीजेपी नेता अन्नामलाई ने एआईडीएमके से गठबंधन का विरोध किया था। लोकसभा चुनाव में अन्नामलाई ने की मेहनत रंग लाई और तमिलनाडु में बीजेपी का वोट प्रतिशत बढ़ गया। बीजेपी से अलग होने पर एआईएडीएमके का नुकसान 2021 के विधानसभा चुनाव में डीएमके को 37.70 फीसदी और एआईएडीएमके को 33.29 फीसदी वोट मिले थे। एआईएडीएमके के साथ चुनाव लड़ने वाली बीजेपी को 2.62 प्रतिशत वोट मिले थे और 4 विधानसभा सीटों पर जीत मिली थी। लोकसभा चुनाव में बीजेपी क्षेत्रीय पार्टी पीएमके, डीएमडीके और आईजेके साथ चुनाव लड़ी। लोकसभा चुनाव में बीजेपी को तमिलनाडु में एक भी नहीं मिली, मगर वोट प्रतिशत 11.24 हो गया। एनडीए गठबंधन को 18.28 प्रतिशत वोट मिला जबकि गठबंधन तोड़ने के बाद एआईएडीएमके का वोट प्रतिशत खिसककर 20.46 प्रतिशत पर पहुंच गया। विधानसभा चुनाव के मुकाबले एआईडीएमके के वोट में करीब 12.5 फीसदी की गिरावट हुई। बीजेपी ने पैर पसारे तो डीएमके का वोट भी घटा दूसरी ओर, लोकसभा चुनाव में 22 सीट जीतने के बाद भी डीएमके के वोट 6.59 फीसदी की गिरावट हुई। 2021 के विधानसभा के मुकाबले पार्टी को करीब 11 फीसदी का नुकसान हुआ। उसे 26.93 फीसदी वोट मिले जबकि सात पार्टियों वाले इंडिया गठबंधन को 46.97 प्रतिशत वोट मिले। डीएमके को गठबंधन में चुनाव लड़ने का तगड़ा फायदा मिला। तीन बड़ी पार्टियों के बीच गठबंधन की संभावना बढ़ी अब विधानसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना बन रही है। फिल्म स्टार थलापति विजय अपनी नई पार्टी तमिलग वेट्री कषगम (टीवीके) के साथ मैदान में कूद चुके हैं और सियासी जमीन की तलाश में जुटे हैं। बीजेपी ने अपनी ताकत बढ़ाई है और पैर मजबूत करने की तैयारी कर रही है। जयललिता के निधन के बाद अंतर्कलह से जूझ रही एआईएडीएमके दोबारा सत्ता हासिल करने के लिए तत्पर है। अगर तीनों पार्टियां गठबंधन करती हैं तो राज्य में उलटफेर की संभावना बढ़ जाएगी।

कर्नाटक में मुस्लिम ठेकेदारों को 4% आरक्षण लाने की तैयारी, सिद्धारमैया का कदम अल्पसंख्यक समर्थन जुटाने का

बेंगलुरु कर्नाटक सरकार मुस्लिम ठेकेदारों को सरकारी निर्माण कार्यों में 4% आरक्षण देने का प्रस्ताव फिर से लाने वाली है। लगभग एक साल पहले इसी तरह का प्रस्ताव विवादों और तुष्टिकरण की राजनीति के आरोपों के बीच वापस ले लिया गया था। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया इस कदम से अहिंदा (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित) का समर्थन जुटाना चाहते हैं। अहिंदा कांग्रेस का मुख्य वोट बैंक है। इधर सिद्धारमैया के इस प्रस्ताव पर सियासत गरमाने लगी है। बीजेपी ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। सरकार कर्नाटक ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक प्रोक्योरमेंट्स एक्ट, 1999 में संशोधन करने की योजना बना रही है। यह संशोधन विधानसभा के मौजूदा बजट सत्र में लाया जाएगा। इसके जरिए आरक्षण लागू किया जाएगा। वित्त विभाग ने इसका खाका तैयार कर लिया है। कानून और संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल ने कथित तौर पर संशोधन को मंजूरी दे दी है। कर्नाटक में ठेकेदारों को कितना कोटा? कर्नाटक में अभी एससी और एसटी ठेकेदारों के लिए 24%, ओबीसी वर्ग-1 के लिए 4% और ओबीसी वर्ग-2A के लिए 15% आरक्षण है। इन सबको मिलाकर कुल 43% कांट्रेक्ट आरक्षित होते हैं। अगर प्रस्तावित 4% मुस्लिम कोटा वर्ग-2B के तहत लागू होता है, तो सरकारी ठेकों में कुल आरक्षण 47% हो जाएगा। साथ ही, कांट्रेक्ट की अधिकतम सीमा दोगुनी होकर 2 करोड़ रुपये हो जाएगी। 2013-18 के कार्यकाल में सिद्धारमैया ने शुरू किया था आरक्षण अपने पहले कार्यकाल (2013-18) में, सिद्धारमैया ने सरकारी ठेकों में एससी/एसटी ठेकेदारों के लिए आरक्षण शुरू किया था। इस साल की शुरुआत में, दो ओबीसी वर्गों को भी ऐसा ही लाभ दिया गया था। बेस्टा, उप्पारा और दलित ईसाई जैसे समुदाय वर्ग-1 में आते हैं, जबकि कुरुबा, इडिगा और 100 से अधिक अन्य समुदाय वर्ग-2A का हिस्सा हैं। सिद्धारमैया खुद कुरुबा समुदाय से आते हैं। बीवाई विजयेंद्र ने साधा निशाना कर्नाटक सरकार के इस फैसले से वोक्कालिगा और लिंगायत समुदाय के ठेकेदार नाराज हैं। उन्हें ऐसा कोई आरक्षण नहीं मिलता। भाजपा ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है। उसने इसे असंवैधानिक और तुष्टिकरण की राजनीति का उदाहरण बताया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र ने कहा, ‘हम धर्म के आधार पर समाज को बांटने वाली कांग्रेस सरकार की नीति का विरोध करते हैं। कांग्रेस सिर्फ मुसलमानों को ही अल्पसंख्यक मानती है, और अन्य वास्तव में हाशिए पर रहने वाले समुदायों को नजरअंदाज करती है। मुसलमानों के पास पहले से ही शिक्षा और रोजगार में आरक्षण है, जो संविधान के खिलाफ है। अब, उन्हें सरकारी ठेकों में 4% आरक्षण देना तुष्टिकरण की राजनीति का चरम है। अगर यह सभी अल्पसंख्यकों के लिए होता, तो हमें कोई आपत्ति नहीं होती।’ कर्नाटक विधानसभा में उठेगा मुद्दा विजयपुरा के विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पूरी तरह से अल्पसंख्यक तुष्टिकरण पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इस तरह का आरक्षण संविधान विरोधी है। उन्होंने दावा किया कि भारतीय संविधान के निर्माता बीआर आंबेडकर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के खिलाफ थे। यतनाल ने आरोप लगाया कि सरकार संविधान और उसके बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ जा रही है। भाजपा नेताओं ने कहा कि वे इस मुद्दे को कर्नाटक विधानसभा के मौजूदा सत्र में उठाएंगे। इसको लेकर सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी। ‘सत्ता का दुरुपयोग’ कर भाजपा विधायक वाई. भरत शेट्टी ने कहा कि यह कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा है। पार्टी अपने वोट बैंक को खुश करने की कोशिश कर रही है। उनकी तुष्टिकरण की राजनीति के कारण ही राज्य की कानून-व्यवस्था की बलि चढ़ गई है। अब वे एक कदम और आगे बढ़ गए हैं। अल्पसंख्यक ठेकेदारों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण की नीति तुष्टिकरण की राजनीति का एक उच्च स्तर है, साथ ही यह सत्ता का दुरुपयोग है। इस प्रस्ताव पर बहस जारी है और आगे क्या होता है यह देखना होगा। क्या यह प्रस्ताव विधानसभा में पास हो पाएगा? क्या कोर्ट में इसकी चुनौती दी जाएगी? इन सब सवालों के जवाब आने वाले समय में ही मिलेंगे। लेकिन इतना तय है कि कर्नाटक की राजनीति में यह एक गरमागरम मुद्दा बना रहेगा।

औरंगजेब का महिमामंडन करने वाले अबु आजमी जाएंगे जेल,देवेंद्र फडणवीस का बड़ा ऐलान

मुंबई  महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अबु आजमी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने विधान परिषद में कहा कि समाजवादी पार्टी के विधायक अबु आसिम आजमी को सौ फीसदी जेल में डाला जाएगा। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कहा कि औरंगजेब की प्रशंसा मराठा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज और उनके योद्धा-पुत्र छत्रपति संभाजी महाराज का अपमान है। अबु आजमी को मुगल शासक औरंगजेब की प्रशंसा करने पर महाराष्ट्र विधानसभा से निलंबित किया गया है। बजट सत्र के समाप्त होने तक विधानसभा से निलंबित किए गए आजमी ने कार्रवाई का विरोध किया। उन्होंने कहा कि उन्हें विवादास्पद टिप्पणी वापस लेने के बावजूद दंडित किया गया है। बजट सत्र 26 मार्च को समाप्त होगा। अंबादास दानवे ने उठाया सवाल विधान परिषद में विपक्ष के नेता और उद्धव ठाकरे शिवसेना के सदस्य अंबादास दानवे ने फडणवीस से पूछा कि आजमी को उनकी टिप्पणी के लिए जेल क्यों नहीं भेजा गया? इस पर देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मुंबई के मानखुर्द-शिवाजी नगर से विधायक आजमी को शत प्रतिशत जेल में डाला जाएगा। उद्धव ठाकरे भी अबु आजमी के खिलाफ शिवसेना के अध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य उद्धव ठाकरे ने कहा कि किसी को भी राष्ट्रीय नायकों के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं करनी चाहिए। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। ठाकरे ने मांग की कि उन्हें (आजमी को) स्थायी रूप से (विधानसभा से) निलंबित किया जाना चाहिए। अबु आजमी ने जारी किया वीडियो इधर अबु आजमी के कार्यालय से एक वीडियो बयान में समाजवादी पार्टी के नेता ने दावा किया कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा है, लेकिन सदन में सुचारू कामकाज सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने विधानसभा के बाहर की गई टिप्पणियों को वापस ले लिया। उन्होंने कहा, ‘फिर भी मुझे निलंबित कर दिया गया।’ अबु आजमी ने औरंगजेब पर क्या कहा? अबु आजमी ने कहा था कि औरंगजेब के शासनकाल में भारत की सीमा अफगानिस्तान और बर्मा (म्यांमा) तक फैली हुई थी। हमारी जीडीपी (विश्व जीडीपी का) 24 प्रतिशत थी और भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। औरंगजेब और मराठा शासक छत्रपति संभाजी महाराज के बीच लड़ाई के बारे में पूछे जाने पर आजमी ने इसे राजनीतिक लड़ाई करार दिया। ऐसे बढ़ा विवाद सपा विधायक की टिप्पणियों के चलते मंगलवार को राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों में भारी हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने उनके निलंबन और देशद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग की। बुधवार को यह मुद्दा विधान परिषद में भी उठा, जहां विपक्ष ने अभिनेता राहुल सोलापुरकर और पूर्व पत्रकार प्रशांत कोराटकर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जो राष्ट्रीय नायकों पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के लिए आलोचना का सामना कर रहे हैं।

जो आदमी दो-दो बार फेल हुआ, मैंने सोचा था कि ऐसा आदमी प्रधानमंत्री कैसे बन सकता :मणिशंकर अय्यर

नई दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने एक बार फिर विवादित बयान देकर अपनी ही पार्टी को असहज स्थिति में डाल दिया है। इस बार उनका बयान पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर है। उनके इस बयान वाले वीडियो को भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर शेयर किया। वीडियो में अय्यर को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि ऐसे आदमी को कैसे देश का प्रधानमंत्री बना दिया गया, जो दो बार फेल हो चुका था। वीडियो पर भाजपा हमलावर, कांग्रेस का बचाव अमित मालवीय ने इस वीडियो को एक्स पर शेयर करते हुए लिखा, “राजीव गांधी अकादमिक रूप से कमजोर थे। वह कैम्ब्रिज में फेल हुए, जहां पास होना आसान माना जाता है। इसके बाद उन्होंने इम्पीरियल कॉलेज लंदन में प्रवेश लिया लेकिन वहां भी फेल हो गए। ऐसे में सवाल उठता है कि इस अकादमिक रिकॉर्ड वाले व्यक्ति को प्रधानमंत्री कैसे बना दिया गया?” दो बार फेल होने वाले को क्यों प्रधानमंत्री बनाया? राजीव गांधी फेल होने के बाद वो इंपीरियल कॉलेज लंदन गए और हैरान करने वाली बात ये है कि वो वहां पर भी दोबारा फेल हो गए. इसके बाद मणिशंकर अय्यर ने कहा कि मैंने सोचा कि जो शख्स दो बार फेल हो गया, ऐसे व्यक्ति को क्या देश का प्रधानमंत्री बनाया गया है. मणिशंकर के इस बयान के बाद कांग्रेस पार्टी के दूसरे नेता उन्हें भाजपा का स्लीपर सेल बता रहे हैं. मणिशंकर के इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस का घेराव करने का एक नया टॉपिक मिल गया है. अमित मालवीय ने कहा पर्दा हटाओ भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर मणिशंकर अय्यर की बातचीत की एक क्लिप शेयर की है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि एकेडमिक रिकॉर्ड में फेल होने वाला कोई शख्स देश का प्रधानमंत्री कैसे बन सकता है? इस विषय पर पर्दा हटाया जाना चाहिए. अय्यर ने क्या कहा वीडियो में मणिशंकर अय्यर कहते हैं, “जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने, तो लोगों ने सोचा, मैंने भी सोचा कि वह एक एयरलाइन पायलट थे, जो दो बार फेल हो चुके थे। मैं उनके साथ कैम्ब्रिज में पढ़ता था… वह वहां भी फेल हो गए, जहां पास होना आसान माना जाता है। फिर उन्होंने इम्पीरियल कॉलेज लंदन में प्रवेश लिया, लेकिन वहां भी फेल हो गए। तो मुझे आश्चर्य हुआ कि ऐसा व्यक्ति प्रधानमंत्री कैसे बन सकता है?” कांग्रेस का बचाव मणिशंकर अय्यर के इस बयान पर कांग्रेस ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इसे निराधार और अप्रासंगिक बताया। कांग्रेस नेता अजय सिंह यादव ने कहा, “मणिशंकर अय्यर की पार्टी में कोई प्रासंगिकता नहीं है। वह कोई महत्वपूर्ण पद नहीं रखते, इसलिए उनके बयान को अधिक तवज्जो देने की जरूरत नहीं है।” वहीं, कांग्रेस सांसद तारीक अनवर ने अय्यर के बयान को खारिज करते हुए कहा, “असफल होना कोई बड़ी बात नहीं है, दुनिया में कई प्रतिभाशाली लोग पढ़ाई में फेल होते हैं। लेकिन राजीव गांधी राजनीति में कभी असफल नहीं हुए। जब उन्हें प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई, तो उन्होंने सिर्फ पांच साल में वह उपलब्धियां हासिल कीं, जो बहुत कम प्रधानमंत्री कर सके हैं।” राजीव गांधी की विरासत कांग्रेस राजीव गांधी को ‘सूचना क्रांति के जनक’ के रूप में प्रचारित करती रही है। उनके कार्यकाल में आईटी और टेलीकॉम सेक्टर में बड़े बदलाव हुए थे। ऐसे में मणिशंकर अय्यर के इस बयान से कांग्रेस को रक्षात्मक स्थिति में आना पड़ा है। यह पहली बार नहीं है जब अय्यर के बयान से कांग्रेस को असहज होना पड़ा है। इससे पहले भी उनके विवादित बयानों को लेकर पार्टी को सफाई देनी पड़ी है।

भाजपा केरल में आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व वाम दलों की चुनौतियां बढ़ा सकती, प्रवेश से सियासत बदली

 तिरुवनन्तपुरम केरल विधानसभा चुनाव में अभी एक वर्ष बाकी है, लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ और लेफ्ट की अगुवाई वाले एलडीएफ ने चुनाव की तैयारियां अभी से शुरू कर दी है। दोनों गठबंधन जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ को मजबूत बनाने के साथ चुनावी रणनीति को अमलीजामा पहना रहे हैं। इनके बीच मतदाताओं में पैठ बना रही भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व वाम दलों की चुनौतियां बढ़ा सकती है। केरल में पिछले दस वर्षों से वाम दल सत्ता में है। हालांकि वर्ष 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में यूडीएफ ने बेहतर प्रदर्शन किया है। यह कहना मुश्किल है कि लोकसभा का असर विधानसभा में दिखाई देगा। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद वर्ष 2021 विधानसभा चुनाव में एलडीएफ ने सरकार बनाई थी। नायर और मछुआरा समुदायों पर भाजपा की नजर चुनावी रणनीतिकार मानते हैं कि पहले मतदाताओं के सामने यूडीएफ और एलडीएफ दो ही विकल्प थे। अब आहिस्ता-आहिस्ता दोनों गठबंधनों के वोट बैंक में सेंध लगाते हुए भाजपा अपनी जगह बना रही है। नायर और मछुआरा समुदायों पर भाजपा की नजर है। दोनों समुदाय अमूमन चुनाव में एलडीएफ का समर्थन करते रहे हैं। भाजपा के प्रवेश से सियासत बदली केरल में राजनीति दो ध्रुवीय रही है, लेकिन भाजपा के प्रवेश के बाद सियासत बदल गई है। अगर भाजपा सभी सीट पर चुनाव लड़ती है तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। भाजपा अपने प्रदर्शन से बिगाड़ सकती है चुनावी गणित प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि भाजपा विधानसभा चुनाव में अभी अपना प्रदर्शन बरकरार रखती है तो यह यूडीएफ और एलडीएफ दोनों का गणित बिगाड़ सकती है। क्योंकि, भाजपा का वोट बैंक लगातार बढ़ रहा है। लोकसभा में एनडीए को 19 फीसदी वोट मिले। जबकि 2021 विधानसभा में यह 12 प्रतिशत था। हिंदू मतदाताओं का भरोसा जीतने में सफल रही भाजपा कांग्रेस रणनीतिकार मानते हैं कि एलडीएफ सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी है। पर क्या यूडीएफ मतदाताओं की इस नाराजगी को अपने पक्ष में बदल पाएगी। वहीं, एलडीएफ के लिए भी अपना पुराना प्रदर्शन दोहराना आसान नहीं है। इसकी बड़ी वजह लोकसभा चुनाव में त्रिशूर सीट से भाजपा की जीत है। भाजपा ने केरल में सिर्फ त्रिशूर सीट से जीत दर्ज नहीं की है, करीब एक दर्जन विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट मिले हैं। भाजपा के इस प्रदर्शन से साफ है कि वह हिंदू मतदाताओं को भरोसा जीतने में सफल रही है। वहीं, ईसाई मतदाताओं के लिए भी भारतीय जनता पार्टी अब दूर नहीं है।

आउटर रिंग रोड प्रोजेक्ट के तहत भूमि अधिग्रहण को लेकर विरोध तेज, कांग्रेस ने की पदयात्रा शुरू

इंदौर आउटर रिंग रोड के लिए किए जा रहे सर्वे का विरोध करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े भारतीय किसान संघ ने इसे रुकवा दिया था। अब कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रभावित गांवों के किसानों तक पहुंचने के लिए पदयात्रा निकालने की योजना बनाई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी खुद इस यात्रा का नेतृत्व करेंगे और आठ दिनों तक इंदौर के प्रभावित क्षेत्रों में पदयात्रा करेंगे।   सर्वे को लेकर क्यों हुआ विरोध?   जब आउटर रिंग रोड का सर्वे किया जा रहा था, तब प्रभावित गांवों के किसानों ने इसका जबरदस्त विरोध किया। भारतीय किसान संघ ने किसानों के साथ मिलकर नेशनल हाईवे के अधिकारियों को किसी भी गांव में सर्वे करने से रोक दिया। यहां तक कि प्रशासन को कलेक्टर कार्यालय पर हुए धरने के बाद यह आश्वासन देना पड़ा कि जब तक मुख्यमंत्री से बातचीत नहीं हो जाती, तब तक सर्वे नहीं होगा। इस आश्वासन के बाद सर्वे कार्य पूरी तरह रोक दिया गया। अब कांग्रेस इस मुद्दे पर सक्रिय हो गई है और किसानों के बीच जाकर सरकार की नीतियों का विरोध कर रही है।  आउटर रिंग रोड और पूर्वी रिंग रोड के प्रभावित गांव   आउटर रिंग रोड प्रोजेक्ट के तहत धार जिले के पांच गांव, देपालपुर तहसील के 16 गांव और सांवेर तहसील के 18 गांव प्रभावित हो रहे हैं। इनमें से देपालपुर तहसील का 35 किलोमीटर और सांवेर तहसील का 37 किलोमीटर का हिस्सा इस परियोजना में शामिल है। जीतू पटवारी इन सभी गांवों में पदयात्रा करेंगे। इसके अलावा, पूर्वी रिंग रोड भी इस पदयात्रा का हिस्सा होगी। यह रोड पीर कराड़िया गांव से शुरू होकर नेटरेक्स तक फैली हुई है। इस क्षेत्र में चार केंद्र बनाए गए हैं, जहां हर सेंटर से 200 बीघा जमीन अधिग्रहित की जानी है। बेटमा खुर्द को भी एक केंद्र बनाया गया है। इस पूरे क्षेत्र की कुल लंबाई 77 किलोमीटर है, जिसे चार दिन में कवर किया जाएगा।   कैसा रहेगा पदयात्रा का कार्यक्रम? पदयात्रा को लेकर कांग्रेस ने विस्तृत शेड्यूल तैयार किया है।   – हर दिन सुबह नाश्ते के बाद पदयात्रा शुरू होगी।   – दिन में किसी गांव में रुककर भोजन किया जाएगा।   – शाम को जिस स्थान पर यात्रा रुकेगी, वहां पर सभा का आयोजन होगा।   – इस दौरान कांग्रेस के नेता किसानों से मिलकर सरकार के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाएंगे।   – जिला कांग्रेस अध्यक्ष सदाशिव यादव के अनुसार, यह यात्रा 10 मार्च तक तय की गई है और होली के बाद इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।   किसानों को 15 गुना कम मुआवजा देने का आरोप कांग्रेस का आरोप है कि सरकार किसानों को उनकी जमीन की वास्तविक कीमत से 15 गुना कम मुआवजा देने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस नेता सदाशिव यादव का कहना है कि जिस गांव में सरकारी गाइडलाइन के अनुसार जमीन की कीमत 10 लाख रुपए प्रति एकड़ है, वहां की वास्तविक कीमत 1.5 करोड़ रुपए प्रति एकड़ है। इसके बावजूद सरकार केवल दोगुना मुआवजा देने की योजना बना रही है, जबकि भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए।   किसानों को पक्ष में लेने का प्रयास कांग्रेस इस पदयात्रा के जरिए किसानों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। पार्टी इस अभियान के जरिए सरकार पर दबाव बनाकर किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग करेगी।   समय बताएगा पदयात्रा का कितना असर होगा आउटर रिंग रोड प्रोजेक्ट को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। पहले भारतीय किसान संघ ने इसका विरोध करके सर्वे रुकवा दिया, और अब कांग्रेस ने पदयात्रा निकालकर इस मुद्दे को और गरमा दिया है। जीतू पटवारी की यह यात्रा किसानों को जागरूक करने और सरकार पर दबाव बनाने के लिए की जा रही है। अब देखना होगा कि इस पदयात्रा का कितना असर पड़ता है और क्या किसानों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा मिल पाता है या नहीं।

भाजपा ऐसे बयानों को तोड़-मरोड़कर मीडिया के सामने पेश करती है, ताकि हमारी छवि खराब की जा सके: राशिद अल्वी

नई दिल्ली कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने बुधवार को शमा मोहम्मद द्वारा रोहित शर्मा को लेकर दिए बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी उनके बयान से बिल्कुल भी इत्तेफाक नहीं रखती है। लेकिन, इस बात को भी खारिज नहीं किया जा सकता है कि भाजपा इस बात के इंतजार में बैठी रहती है कि कांग्रेस और ममता बनर्जी की पार्टी का कोई नेता ऐसा बयान दे, जिससे उन्हें विरोध का मौका मिले। राशिद अल्वी ने बुधवार को कहा कि भाजपा ऐसे बयानों को तोड़-मरोड़कर मीडिया के सामने पेश करती है, ताकि हमारी छवि खराब की जा सके। मेरे साथ भी कई बार ऐसा हो चुका है। उन्होंने भाजपा को मुस्लिम विरोधी पार्टी बताते हुए कहा कि वह अपने वोट बैंक को खुश करने में लगी हुई है। यह अपने-आप में तुष्टिकरण की राजनीति है। कांग्रेस नेता ने स्वीकार किया कि मौजूदा समय में देश में मुसलमान पूरी तरह से सुरक्षित हैं, उन्हें किसी भी प्रकार का खतरा नहीं है। लेकिन, “कुछ जगह ऐसे जरूर हैं, जहां पर मुसलमानों को परेशान किया जा रहा है”। कहीं पर उन्हें गाय की वजह से हमलों का सामना करना पड़ रहा है, तो कहीं जबरन “जय श्री राम” बोलने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि देश का मुसलमान मौजूदा समय में भाजपा के खिलाफ है। ऐसी स्थिति में अगर मुसलमानों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय होगा, तो सबसे पहले हिंदू समुदाय के लोग आगे आएंगे। वही अपनी आवाज बुलंद करेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रमजान की बधाई दिए जाने पर कहा कि प्रधानमंत्री हमें रमजान की बधाई दें या न दें, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। मैं उन्हें सुझाव देना चाहूंगा कि अगर वह मुसलमानों के लिए कुछ अच्छा करना चाहते हैं, तो सबसे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की भाषा में सुधारवाएं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक सूची देनी चाहिए, जिसमें यह स्पष्ट हो कि किस-किस मस्जिद के नीचे मंदिर है। आज से 600 साल पहले क्या हुआ था, उसे अब कैसे साबित किया जाएगा। देश में वर्शिप एक्ट है, उसका पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ अगर एक योगी की तरह व्यवहार करना चाहते हैं, तो सबसे पहले मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दें। इसके बाद वह योगी की तरह व्यवहार करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। मुजफ्फरनगर का नाम लक्ष्मी नगर किए जाने को लेकर भी राशिद अल्वी ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग नाम बदलने को ही सबसे बड़े काम के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश करते हैं, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भाजपा को लगता है कि किसी भी शहर का नाम बदलने से वहां विकास हो जाएगा। लेकिन, यह विकास नहीं है।

अभिनेता बने कमल हासन ने कहा- देश को इंडिया की बजाय हिंदिया बनाने की कोशिश की जा रही है

चेन्नै नेता से अभिनेता बने कमल हासन भी भाषा पर राजनीति करने में जुट गए हैं। उन्होंने बुधवार को कहा कि देश को इंडिया की बजाय हिंदिया बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु समेत कई राज्यों पर हिंदी थोपने का प्रयास केंद्र सरकार द्वारा किया जा रहा है, जिसमें भाजपा का नेतृत्व है। एमके स्टालिन की ओर से परिसीमन और हिंदी भाषा थोपने को लेकर बुलाई गई मीटिंग के दौरान कमल हासन ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार चाहती है कि सभी राज्यों में हिंदी बोली जाए और वह बहुमत से चुनाव जीतें। हमारा सपना इंडिया का है, लेकिन उनका हिंदिया का है। इस मीटिंग में परिसीमन को लेकर प्रस्ताव पारित हुआ है, जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी को भेजा जाएगा। हिंदिया शब्द पहली बार एमके स्टालिन ने ही इस्तेमाल किया था। 2019 में होम मिनिस्टर अमित शाह ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में हिंदी दिवस की बधाई दी थी। इसमें उन्होंने कहा था कि हिंदी वह भाषा है, जिससे दुनिया में भारत की पहचान होती है। इस पर एमके स्टालिन बिफर गए थे। उनका कहना था कि यह इंडिया है, हिंदिया नहीं। कई अन्य तमिल राजनेताओं की तरह कमल हासन भी हिंदी भाषा थोपने का आरोप केंद्र सरकार पर लगाते रहे हैं। तमिलनाडु में 1960 के दशक में भाषा को लेकर लंबा आंदोलन चला था। अब लंबे समय बाद एक बार फिर से वहां भाषा को लेकर विवाद पैदा करने की कोशिश की जा रही है। तमिलनाडु में इस बार पूरा विवाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बयान को लेकर शुरू हुआ है। उन्होंने कहा था कि यदि किसी प्रदेश में त्रिभाषा फॉर्मूले के लागू नहीं किया जाता तो फिर केंद्र सरकार फंड रोक लेगी। एमके स्टालिन ने शिक्षा मंत्री के बयान पर आपत्ति जताते हुए पीएम मोदी को पत्र लिखा था। उनका कहना कि यह तो राज्यों को ब्लैकमेल करने जैसा है। वहीं उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि यदि जरूरत हुई तो तमिलनाडु एक और भाषा युद्ध के लिए तैयार है। कमल हासन ने भी ऐसी ही बात करते हुए कहा कि तमिलों ने भाषा के लिए अपनी जिंदगी भी दी है। इसलिए इस मामले में उनसे खेलने की कोशिश न करें। कमल हासन ने अपने भाषण में परिसीमन को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि यह तय किया जाए कि दक्षिण भारत और तमिलनाडु का सीटों के मामले में नुकसान नहीं होना चाहिए। दरअसल तमिलनाडु समेत कई राज्यों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि परिसीमन में यदि नई जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया तो उनकी लोकसभा सीटों में कमी आएगी। ऐसे में 1971 के आंकड़ों को आधार बनाकर ही परिसीमन किया जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को सभी राज्यों के विधायकों की संख्या भी बढ़ा देनी चाहिए। तमिलनाडु में फिलहाल 234 विधायक ही हैं। ऐसे में देखना होगा कि यदि राज्य में असेंबली सीटों में इजाफा हुआ तो वह कितने का होगा।

राहुल गांधी 7 और 8 मार्च को दो दिवसीय गुजरात दौरे पर रहेंगे, इस दौरान बैठक कर आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा करेंगे

नई दिल्ली लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी 7 और 8 मार्च को दो दिवसीय गुजरात दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे अहमदाबाद में पार्टी पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा करेंगे। राहुल गांधी का यह दौरा आगामी 2027 के गुजरात विधानसभा चुनावों की तैयारियों को मजबूती देने के लिए हो रहा है। वे पार्टी संगठन को पुनर्गठित करने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर जोर देंगे। इसके अलावा, वे कांग्रेस के प्रदेशभर के कार्यकर्ताओं को संबोधित कर उनका मनोबल बढ़ाएंगे। कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन 8-9 अप्रैल को अहमदाबाद में आयोजित किया जाएगा। इससे पहले राहुल गांधी का दौरा यह संकेत देता है कि पार्टी गुजरात चुनावों को लेकर गंभीर है और रणनीति में बदलाव की संभावना है। राजनीतिक सरगर्मियां तेज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 7-8 मार्च को गुजरात के सूरत और नवसारी जिलों के दौरे पर रहेंगे, जिससे प्रदेश में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। कांग्रेस और बीजेपी, दोनों ही आगामी चुनावों को लेकर अपनी रणनीति को धार देने में जुटी हैं।  

अबू आजमी को औरंगजेब से जुड़ी टिप्पणी करनी पड़ी महंगी, विधानसभा से किया निलंबित

मुंबई महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी पर बड़ी कार्रवाई की गई है। औरंगजेब से जुड़ी टिप्पणी मामले में उन्हें विधानसभा के मौजूदा सत्र से निलंबित कर दिया गया है। महाराष्ट्र के संसदीय कार्य मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने सदन में उनके खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। सदन ने प्रस्ताव को पारित कर दिया। इससे पहले अबु आसिम आजमी के मुगल बादशाह औरंगजेब की तारीफ वाले बयान का मुद्दा मंगलवार को महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदनों में छाया रहा था। सत्तारूढ़ गठबंधन ‘महायुति’ के सदस्यों ने आजमी को महाराष्ट्र विधानसभा से निलंबित करने और उनके खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग की, जिसके बाद वह अपने बयान से पलट गए थे। मुंबई पुलिस ने अबू आजमी के खिलाफ मुगल बादशाह औरंगजेब की तारीफ करने वाली टिप्पणी के मामले की जांच शुरू कर दी थी। लोकसभा में शिवसेना सांसद नरेश म्हास्के की शिकायत पर पड़ोसी ठाणे में पुलिस ने कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के प्रयास के आरोप में आजमी के खिलाफ सोमवार को एफआईआर दर्ज की थी। इस बीच उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एक बार फिर आजमी पर निशाना साधते हुए उन्हें देशद्रोही करार दिया था। अबू आजमी ने औरंगजेब को बताया था ‘महान प्रशासक’ आजमी ने मुंबई में मीडिया से बात करते हुए कहा था, ‘सारा गलत इतिहास दिखाया जा रहा है। औरंगजेब ने कई मंदिर बनवाए…औरंगजेब क्रूर नहीं था।’ एक समाचार चैनल के साथ इंटरव्यू में सपा नेता ने कहा था, ‘मैंने औरंगजेब के बारे में जितना पढ़ा है, उसने कभी भी जनता का पैसा अपने लिए नहीं लिया, उसका शासन बर्मा (वर्तमान म्यांमार) तक फैला हुआ था, उस समय देश को सोने की चिड़िया कहा जाता था।’ उन्होंने कहा था कि मुझे लगता है कि वह एक महान प्रशासक थे, उसकी सेना में कई हिंदू कमांडर थे। इस बीच अबू ने अपनी टिप्पणी पर सफाई भी दी थी। उन्होंने लिखा, ‘मेरे शब्दों को तोड़-मरोड़ कर दिखाया गया है। औरंगज़ेब रहमतुल्लाह अलेह के बारे में मैंने वही कहा है, जो इतिहासकरों और लेखकों ने कहा है। मैंने छत्रपति शिवाजी महाराज, संभाजी महाराज या अन्य किसी भी महापुरषों के बारे में कोई अपमानजनक टिपण्णी नहीं की है, लेकिन फिर भी मेरी इस बात से कोई आहत हुआ है तो मैं अपने शब्द, अपना स्टेटमेंट वापस लेता हूं। इस बात को राजनितिक मुद्दा बनाया जा रहा है और इसकी वजह से महाराष्ट्र  विधानसभा के बजट सत्र को बंद करना मैं समझता हूं कि यह महाराष्ट्र की जनता का नुक्सान करना है।’ कहां से शुरू हुआ विवाद? यह ताजा विवाद मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के सबसे बड़े बेटे छत्रपति संभाजी महाराज पर केंद्रित एक बॉलीवुड फिल्म छावा से पैदा हुआ है। इस फिल्म का निर्देशन लक्ष्मण उतेरकर ने किया है। इसमें संभाजी के जीवन, राज्याभिषेक और मुगल साम्राज्य, खासकर औरंगजेब के खिलाफ संघर्ष को दिखाया गया है। विकी कौशल ने फिल्म में संभाजी की भूमिका निभाई है, जबकि रश्मि मंदाना ने उनकी पत्नी येसुबाई भोंसले की भूमिका निभाई है। फिल्म में अक्षय खन्ना ने औरंगजेब की भूमिका निभाई है। पहले भी औरंगजेब का समर्थन कर चुके आजमी अबू आजमी ने पहली बार औरंगजेब का समर्थन नहीं किया है, बल्कि पहले भी वह उनकी प्रशंसा करते रहे हैं। साल 2023 में उन्होंने ऐसा ही बयान दिया था, जिसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकी मिली थी। उस समय में मुंबई के कोलाबा थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी।  

कांग्रेस विधायक बोले-: कमलनाथ को हाथ लगाया तो लाशें बिछेंगी…

छिंदवाड़ा मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कांग्रेस विधायक विजय चौरे के एक बयान ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है. सौसर विधानसभा क्षेत्र के विधायक चौरे ने प्रदर्शन के दौरान कहा, “कलेक्टर-SP कान खोलकर सुन लें, अगर कमलनाथ जी पर उंगली उठी तो सबसे पहले छिंदवाड़ा में लाखों लोगों की लाशें बिछेंगी.” यह बयान भाजपा सांसद विवेक ‘बंटी’ साहू के उस पलटवार के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जनता ने कमलनाथ की धुलाई कर दी, अब पुलिस करेगी तो कैसा लगेगा. दरअसल, हाल ही में हर्रई सभा में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक TI पर भाजपा के लिए काम करने का आरोप लगाया था. इसके जवाब में सांसद बंटी साहू ने तंज कसा था. इस पर भड़की कांग्रेस ने छिंदवाड़ा में प्रदर्शन किया. इसी दौरान विधायक चौरे ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “कमलनाथ ने लाखों मरीजों का इलाज करवाया, बच्चों की फीस माफ की, रोजगार दिया. छिंदवाड़ा मॉडल उनके कारण बना. बंटी साहू को कम उम्र में सब मिल गया, जैसे बंदर के हाथ में उस्तरा. उन्हें कमलनाथ से माफी मांगनी चाहिए.” पुलिस और सरकार पर हमला विधायक चौरे ने पुलिस पर जनता के साथ अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “थाने में रिपोर्ट लिखवाने जाओ तो पुलिस गाली देती है, पैसे मांगती है. यही मध्य प्रदेश की पुलिस है, और बंटी साहू इसकी तारीफ करते हैं.” बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “25 साल से गुंडा राज, माफिया राज, सट्टा, जुआ, शराब और रेत का अवैध धंधा चल रहा है. बंटी साहू और नाना भाऊ एक सिक्के के दो पहलू हैं, जिन्होंने कलेक्टर और SP को जेब में रखा है.” कांग्रेस का प्रदर्शन कांग्रेस विधायक चौरे ने कार्यकर्ताओं से कहा, “डरने की जरूरत नहीं. कमलनाथ, नकुलनाथ, सभी विधायक और जनता आपके साथ हैं. अगर कमलनाथ पर उंगली उठी तो लाखों लाशें बिछेंगी.” यह बयान कांग्रेस के आक्रामक रुख को दर्शाता है, जिसने साहू के बयान के खिलाफ प्रदर्शन तेज कर दिया है. सियासी हलचल इस बयान ने मध्य प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया है. BJP इसे कांग्रेस की बौखलाहट बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे अपने नेता के सम्मान की लड़ाई करार दे रही है. विजय चौरे के इस बिगड़े बोल से छिंदवाड़ा का माहौल और गरमा गया है.  

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