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सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि दिल्ली में वित्तीय आपदा है, हमें दिल्ली को बचाना है, आम आदमी पार्टी ने 10 साल में किया बर्बाद

नई दिल्ली दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आम आदमी पार्टी पर दिल्ली को बर्बाद करने का आरोप लगाया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि दिल्ली में वित्तीय आपदा है। हमें दिल्ली को बचाना है। इतने सालों में दिल्ली घाटे में चल रही है। आंकड़े बता रहे हैं कि दस साल निरंतर नीचे जाते जाते ये आज घाटे की तरफ आगे बढ़ गए हैं। पिछले 10 सालों में दिल्ली की वित्तीय स्थिति लगातार खराब होती गई है, जिससे घाटा बढ़ता गया है। आम आदमी पार्टी ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए राष्ट्रीय लघु बचत कोष (एनएसएसएफ) से 10,000 करोड़ रुपये उधार लेने की मांग की है। यह चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण दोनों है। आम आदमी पार्टी ने धीरे-धीरे दिल्ली की वित्तीय स्थिरता को बर्बाद कर दिया है। इसने दिल्ली के खजाने को लूटने में कई रिकॉर्ड बनाए हैं। दिल्ली में रेवेन्यू कलेक्शन भी काम हो रहा है। पंजाब में आम आदमी पार्टी के खिलाफ महिलाएं विरोध कर रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि गरीबों के लिए कैसे काम करना है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीखिए। सिर्फ फ्री बांटने से सरकार नहीं बनती। दिल्ली को इस आपदा से भारतीय जनता पार्टी बचाएगी। केजरीवाल सरकार ने जितने भी कर्ज छोड़कर जाएगी, वह भाजपा की दिल्ली में बनी सरकार को चुकाना पड़ेगा। केजरीवाल सरकार की इस तरह की आपदाओं का सामना हमें करना पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि मंदिर, गुरुद्वारों में पैसे बांटने से कुछ नहीं होगा। यह सब बस चुनावी स्टंट हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि वित्तीय दृष्टि से राष्ट्ररीय राजधानी को सबसे बेहतर आर्थिक स्थितियों वाला राज्य माना जाता है। जहां, लोगों की आय बेहतर होती है। जब आम आदमी पार्टी को ये सत्ता मिली, तब दिल्ली मुनाफे वाला बजट हुआ करता था। 2024-25 पहला साल होने जा रहा है। जब दिल्ली घाटे की तरफ बढ़ रही है। साल 2014-15 और साल 2015-16 में दिल्ली का राजस्व लाभ 1.56 फीसदी का था। फिर वे 2016-17 से गिरना शुरू होता है। जो 0.85 फीसदी पर आता है और गिरता जाता है। इस साल वे घाटे में जाता दिख रहा है।

राहुल ने कहा- एमपीपीएससी की परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पार्टी देश के युवाओं का भविष्य मिटा रही है

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पार्टी देश के युवाओं का भविष्य मिटा रही है। राहुल ने यह दावा भी किया कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने छात्रों के भरोसे को तोड़ने के साथ ही लोकतांत्रिक प्रणाली का गला घोंटा है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, ‘भाजपा भारत के युवाओं का बिल्कुल एकलव्य जैसा अंगूठा काट रही है, उनका भविष्य मिटा रही है।’ उन्होंने दावा किया कि सरकारी भर्ती में विफलता बड़ा अन्याय है। राहुल गांधी ने कहा, ‘पहले तो भर्ती नहीं निकलती। भर्ती निकल जाए तो परीक्षा समय पर नहीं होती। परीक्षा हो तो पेपर लीक करवा दिए जाते हैं। जब युवा न्याय मांगते हैं तब उनकी आवाज को बेरहमी से कुचला जाता है। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि हाल ही में उत्तर प्रदेश और बिहार की घटनाओं के बाद अब मध्यप्रदेश में एमपीपीएससी में हुई गड़बड़ी का विरोध कर रहे 2 छात्रों को जेल में डाल दिया गया है। वो भी तब जब मुख्यमंत्री ने खुद छात्रों से मुलाकात कर उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकार ने छात्रों के भरोसे को तोड़ा है और लोकतांत्रिक प्रणाली का गला घोंटा है। ‘अधिकार की लड़ाई में हम छात्रों के साथ’ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘छात्रों के अधिकार की लड़ाई में हम उनके साथ हैं। भाजपा को किसी कीमत पर देश के युवाओं के हक की आवाज दबाने नहीं देंगे।’ मध्य प्रदेश में आंदोलन करने वाले अभ्यर्थियों का दावा है कि एमपीपीएससी के 700 पदों की भर्ती निकालने के वादे के विपरीत केवल 158 पदों के लिए अधिसूचना जारी की गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पिछले दिनों लोक सेवा परीक्षाओं में धांधली का आरोप भी लगाया था। एमपीपीएससी उनके आरोपों को खारिज कर चुकी है। वहीं, बिहार लोक सेवा आयोग की 13 दिसंबर को आयोजित 70वीं संयुक्त प्रारंभिक प्रतियोगी परीक्षा को रद्द करने की मांग हो रही है। इसे लेकर जन स्वराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर का गांधी मैदान में आमरण अनशन जारी है। शुक्रवार को पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ ​​पप्पू यादव ने अपने समर्थकों के साथ पटना सचिवालय हाल्ट पर रेल पटरियों पर धरना दिया।

राज्य सरकार द्वारा किए गए अच्छे कार्यों के लिए सीएम फडणवीस की संजय राउत ने प्रशंसा की, करीब आना चाहते हैं उद्धव?

मुंबई महाराष्ट्र की सियासत में एक दिलचस्प तस्वीर देखने को मिली है। पानी पी-पीकर भाजपा को कोसने वाले शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा किए गए अच्छे कार्यों के लिए सीएम की उन्होंने प्रशंसा की है। राउत ने विशेष रूप से गढ़चिरौली जिले का उल्लेख करते हुए कहा कि यह जिला नक्सलवाद से प्रभावित है, लेकिन अगर नक्सलवादी आत्मसमर्पण करके संविधान के रास्ते पर चलते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा। राउत ने आगे कहा कि गढ़चिरौली में बेरोजगारी और गरीबी एक गंभीर समस्या है। देवेंद्र फडणवीस इसे सुधारने की दिशा में काम कर रहे हैं। फडणवीस ने वहां एक “स्टील सिटी” बनाने का प्रस्ताव रखा है, जिससे महाराष्ट्र की प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। संजय राउत ने इस पहल का स्वागत किया और कहा कि यह राज्य के विकास में फडणवीस का यह कदम सहायक होगा। इससे पहले शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय के जरिए इसी मुद्दे पर देवेंद्र फडणवीस की सराहना की गई थी। सामना ने लिखा था- ‘सामना ने लिखा था- जब मंत्रिमंडल के कई मंत्री मलाईदार महकमों और विशेष जिले के ही पालकमंत्री पद के लिए अड़े बैठे हुए थे, मुख्यमंत्री फडणवीस गढ़चिरौली पहुंचे और उस नक्सल प्रभावित जिले में विकास के एक नए पर्व की शुरुआत की। जब पूरा देश नए साल के स्वागत और जश्न में मगन था तब मुख्यमंत्री फडणवीस ने नए साल का पहला दिन गढ़चिरौली में बिताया। सिर्फ बिताया ही नहीं, बल्कि कई विकास परियोजनाओं का भूमिपूजन, उद्घाटन किया। यदि मुख्यमंत्री ने जो कहा वह सच है तो यह न केवल गढ़चिरौली, बल्कि कहना होगा कि यह पूरे महाराष्ट्र के लिए सकारात्मक होगा। यदि मुख्यमंत्री फडणवीस ने इसे करके दिखाने का निर्णय लिया है तो यह खुशी की बात है। नक्सलवाद भारतीय समाज पर एक कलंक है।’   केंद्र सरकार दो साल तक नहीं चलेगी: संजय राउत आपको बता दें कि आज से सिर्फ एक ही दिन पहले शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर कटाक्ष किया और कहा कि उन्हें संदेह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार 2026 तक दो साल भी चल पाएगी या नहीं। एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए संजय राउत ने कहा कि अगर उनका संदेह हकीकत में बदल गया तो महाराष्ट्र भी प्रभावित होगा और महाराष्ट्र के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी बदलाव होने की संभावना है। संजय राउत ने कहा, “मुझे संदेह है कि केंद्र सरकार 2026 के बाद बचेगी या नहीं। मुझे लगता है कि मोदी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे और एक बार केंद्र सरकार अस्थिर हो गई, तो इसका असर महाराष्ट्र पर भी पड़ेगा।”

धर्मेंद्र प्रधान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चुनाव के लिए प्रभारी नियुक्त

भोपाल  केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान मध्य प्रदेश के चुनाव अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। वे मध्य प्रदेश के नए प्रदेश अध्यक्ष का चयन करेंगे। 15 जनवरी तक भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का चयन कर लिया जाएगा। इसको लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं प्रदेश प्रभारी डॉ महेंद्र सिंह और सह प्रभारी सतीश उपाध्याय की भूमिका भी नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन में महत्वपूर्ण होगी। पांच जनवरी तक जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा के बाद मध्य प्रदेश के नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। धर्मेंद्र प्रधान मध्य प्रदेश से राज्य सभा सदस्य रहे हैं। अब वे ओडिशा की संबलपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं। मध्य प्रदेश से राज्य सभा रहने के कारण उनका प्रदेश से जुड़ाव रहा है । जिला अध्यक्ष के लिए पांच-पांच नामों का पैनल तैयार भाजपा संगठन चुनाव के तहत नए जिला अध्यक्षों के नामों के चयन की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गई है। गुरुवार को दिनभर चली बैठकों में प्रदेश के चुनाव अधिकारियों के साथ अलग-अलग जिलों के जिला चुनाव अधिकारी और पर्यवेक्षकों से साथ वन-टू-वन चर्चा की गई। नामों का पैनल फाइनल कर केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष दिल्ली भेजा जाएगा प्रत्येक जिले के लिए प्रस्तावित पांच नामों का पैनल तैयार किया गया है। इनमें दो नामों के अलावा एससी, एसटी और महिला का एक-एक नाम शामिल हैं। कुल पांच नामों का पैनल तैयार किया गया है। शुक्रवार को इन नामों का पैनल फाइनल कर केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष दिल्ली भेजा जाएगा। दिल्ली से नामों पर अंतिम निर्णय के बाद पांच जनवरी को जिला अध्यक्षों की घोषणा की जा सकती है। दिनभर चली बैठक गुरुवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में दिनभर चली बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व संगठन पर्व की केंद्रीय पर्यवेक्षक सरोज पांडेय, प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद एवं प्रदेश चुनाव अधिकारी विवेक नारायण शेजवलकर ने जिला अध्यक्ष के नामों पर विचार विमर्श कर फाइनल पैनल तैयार किया। बताया जा रहा है कि 15 मौजूदा युवा जिला अध्यक्षों को रिपीट किया जा सकता है। हालांकि पार्टी यह भी सुनिश्चित करेगी कि इन जिला अध्यक्षों का कार्यकाल निर्विवाद रहा हो। चार साल से अधिक समय से जिला अध्यक्ष रहने वाले रिपीट नहीं किए जाएंगे। पार्टी ने इस बार जिला अध्यक्ष के महिलाओं को भी प्राथमिकता में रखा है। पैनल में महिला नेत्रियों का नाम शामिल है।

मध्य प्रदेश में अध्यक्ष पद को लेकर बीजेपी के सवर्ण दांव की चर्चा फिर से तेज

भोपाल नए साल की शुरुआत के साथ ही मध्य प्रदेश में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 15 जनवरी तक मध्य प्रदेश में नए अध्यक्ष की ताजपोशी हो सकती है, क्योंकि दिल्ली से लेकर भोपाल तक कई संगठनात्मक बैठकें हो चुकी हैं, जिसमें अध्यक्ष पद को लेकर रायशुमारी हुई है. फिलहाल खजुराहो से सांसद वीडी शर्मा मध्य प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, वह 2020 से लेकर 2025 तक की पारी खेल चुके हैं. अध्यक्ष पद को लेकर कई तरह की अटकलें लग रही है, क्योंकि इस पद के लिए कई नेता दावेदार नजर आ रहे हैं. वीडी शर्मा को मिला था विस्तार वीडी शर्मा को बीजेपी ने 2020 में मध्य प्रदेश का अध्यक्ष बनाया था, जिसके बाद 2023 में उनका कार्यकाल पूरा हो गया था, क्योंकि बीजेपी में अध्यक्ष पद का कार्यकाल तीन साल का होता है, लेकिन विधानसभा चुनाव नजदीक होने की वजह से उनके कार्यकाल को विस्तार दिया गया था, जिसके बाद से वह चार साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं. हालांकि वीडी शर्मा अब भी अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल माने जा रहे हैं, क्योंकि उनके नेतृत्व में विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया है. हालांकि चर्चा यह भी है कि वीडी शर्मा को पार्टी कोई दूसरी जिम्मेदारी सौंप सकती है, ऐसे में उनकी जगह कोई और नेता ले सकता है. क्या मध्य प्रदेश फिर दिखेगा बीजेपी का सवर्ण दांव मध्य प्रदेश में अध्यक्ष पद को लेकर बीजेपी के सवर्ण दांव की चर्चा फिर से तेज हो गई है. क्योंकि फिलहाल प्रदेश में बीजेपी की राजनीतिक व्यवस्था को देखा जाए तो पार्टी ने सभी वर्गों को साधने का काम किया है. बीजेपी ने ओबीसी से आने वाले डॉ. मोहन यादव को सीएम बनाया है, जबकि डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा एससी वर्ग से आते हैं. ये दोनों ही नेता मालवा जोन से आते हैं, इसी तरह राजेंद्र शुक्ला को भी डिप्टी सीएम बनाया गया है जो ब्राह्राण हैं और विंध्य अंचल से आते हैं. जबकि सवर्ण वर्ग के नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया है जो चंबल रीजन से आते हैं. सवर्ण वर्ग से आने वाले वर्तमान अध्यक्ष वीडी शर्मा बुंदेलखंड रीजन से सांसद हैं, ऐसे में उनकी जगह बीजेपी किसी सवर्ण वर्ग के नेता पर ही दांव लगा सकती है. नरोत्तम मिश्रा के साथ ये नेता दावेदार मध्य प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में सूबे के पूर्व गृहमंत्री और बीजेपी के सीनियर नेता नरोत्तम मिश्रा के नाम की चर्चा सबसे ज्यादा है, वह पिछले कुछ दिनों में तेजी से राज्य की राजनीति में एक्टिव भी दिख रहे हैं, जबकि हाल में उन्होंने कई बार वीडी शर्मा से मुलाकात भी की है. मिश्रा के दिल्ली दौरे की भी चर्चा है. इसके अलावा भोपाल की हुजूर सीट से तीन के बार के विधायक रामेश्वर शर्मा के नाम की चर्चा भी चल रही है. शर्मा इस बार मंत्री पद के भी दावेदार थे, लेकिन उन्हें जगह नहीं मिली थी, जिसके बाद उनके नाम की चर्चा अध्यक्ष पद के लिए भी चल रही है. वहीं पूर्व मंत्री अरविंद सिंह भदोरिया का नाम भी इस रेस में शामिल हैं, भदोरिया को संगठन का कुशल रणनीतिकार माना जाता है. ये नाम भी चौंका सकते हैं बीजेपी राजनीतिक अपने सरप्राइज के लिए भी जानी जाती है. 2014 के बाद से ही बीजेपी ने अब तक कई चौंकाने वाले फैसले किए हैं, ऐसे में इस बात की भी पूरी संभावना है कि किसी अनजाने चेहरे की एंट्री भी हो सकती है. पन्ना से विधायक और पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह, बैतूल से विधायक हेमंत खंडेलवाल का नाम भी तेजी से अध्यक्ष पद की रेस में शामिल हुआ है. माना जा रहा है कि बीजेपी आलाकमान की दिल्ली में हुई बैठक में भी इन दोनों की चर्चा हुई है. वहीं भोपाल से पार्टी सांसद आलोक शर्मा भी अध्यक्ष की दौड़ में शामिल माने जा रहे हैं. आदिवासी वर्ग की भी चर्चा बीजेपी का फोकस हमेशा आदिवासी वर्ग पर भी रहा है. मोहन सरकार में आदिवासी वर्ग से आने वाले मंत्रियों की संख्या अच्छी खासी है, जिनके पास बड़े विभागों की जिम्मेदारियां हैं. ऐसे में अगर बीजेपी आदिवासी वर्ग से आने वाले नेता पर दांव लगाती है तो इस लिस्ट में मंडला से आठ बार के सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते का नाम भी रेस में शामिल हैं. वह अटल और मोदी सरकार में मंत्री रह चुके हैं. इसके अलावा राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी के नाम की चर्चा भी कई बार हो चुकी है. जबकि अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले नेता पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य के नाम की चर्चा भी तेज है. 15 जनवरी तक मिल सकता है नया अध्यक्ष मध्य प्रदेश में फिलहाल बीजेपी के संगठन चुनावों की प्रक्रिया जारी है, जिसके तहत मंडल अध्यक्षों की नियुक्तियां हो चुकी हैं, जबकि जिला अध्यक्षों के लिए रायशुमारी का दौर जारी है. वहीं माना जा रहा है कि 15 जनवरी तक प्रदेश में नए अध्यक्ष की ताजपोशी भी हो सकती है. क्योंकि जिला अध्यक्षों के चुनाव की प्रक्रिया इस हफ्ते में पूरी होने की उम्मीद है, ऐसे में फिर नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति हो सकती है.

ममता बनर्जी का बड़ा आरोप- बीएसएफ बांग्लादेश से आतंकवादियों और घुसपैठियों को बंगाल में प्रवेश कराने में मदद कर रहा है

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) बांग्लादेश से आतंकवादियों और घुसपैठियों को बंगाल में प्रवेश कराने में मदद कर रहा है। इसके कारण राज्य में शांति और सुरक्षा की स्थिति बिगड़ रही है। मुख्यमंत्री ने यह टिप्पणी कोलकाता में नबान्न सभागार में राज्य प्रशासनिक समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए की। ममता ने यह भी कहा कि अगर बीएसएफ ने ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देना जारी रखा तो तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेगी। BSF की भूमिका पर खड़े किए सवाल ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बीएसएफ, जो सीमा सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है, वह इस्लामपुर, सीताई, और चोपड़ा जैसे क्षेत्रों से लोगों को भारत में घुसने की अनुमति दे रहा है। मुख्यमंत्री ने इसे केंद्र सरकार की “खाका” बताते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार की संलिप्तता नहीं होती, तो यह स्थिति संभव नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बीएसएफ इस्लामपुर और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों से घुसपैठियों को प्रवेश करवा रहा है, और यह सब केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत हो रहा है। TMC पर लगाए गए आरोपों से किया इनकार ममता बनर्जी ने टीएमसी पर लगाए गए आरोपों को नकारते हुए कहा कि पार्टी का इन घुसपैठियों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि टीएमसी जिम्मेदार नहीं है, बल्कि बीएसएफ की जिम्मेदारी है जो सीमा पर सुरक्षा की स्थिति बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है। ममता ने बीएसएफ पर महिलाओं के खिलाफ अत्याचार करने का भी आरोप लगाया और कहा कि यह सब केंद्र सरकार के खाके के तहत हो रहा है। केंद्र सरकार को विरोध पत्र भेजेंगे ममता ने केंद्र सरकार को अपनी चिंताओं से अवगत कराते हुए कहा कि टीएमसी सरकार केंद्र के फैसले का पालन करेगी, लेकिन वे ऐसी किसी भी कार्रवाई का विरोध करेंगी जो राज्य में आतंकवादियों को शांति और सुरक्षा को बाधित करने का मौका दे। ममता ने कहा, “हम केंद्र सरकार को विरोध पत्र भेजेंगे, अगर वे घुसपैठियों को बंगाल में आने देंगे और राज्य की शांति और स्थिरता को बिगाड़ने की अनुमति देंगे।”

भाजपा के कद्दावर नेता नकवी ने कहा, जेब में कौड़ी नहीं और चुनाव आते ही करोड़ों के वादे करते हैं

नई दिल्ली भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर फिजूलखर्ची का आरोप लगाया है। तंज कसा कि जेब में कौड़ी नहीं है लेकिन वादे करोड़ों के किए जा रहे हैं। भाजपा के कद्दावर नेता ने कहा, “जेब में कौड़ी नहीं और चुनाव आते ही करोड़ों के वादे करते हैं। अब वो अपनी नाकामी छिपाने के लिए अब लव लेटर की जगह वह हेट लेटर लिखेंगे। दिल्ली की सत्ता में काबिज हुए केजरीवाल को 10 साल बीत गए हैं। 10 सालों में कई वादे किए, वादे करके लोगों के सामने यह हीरो बन गए। हकीकत में यह जीरो हैं।” दरअसल, भाजपा नेता केजरीवाल के उस पत्र का जवाब दे रहे थे। जिसे केजरीवाल ने आरएसएस चीफ मोहन भागवत को लिखा था। एक जनवरी को लिखे इस पत्र में केजरीवाल ने आरएसएस प्रमुख से चार सवाल पूछे। अरविंद केजरीवाल ने आरएसएस प्रमुख भागवत को चिट्ठी में लिखा,” मैं आशा करता हूं कि आप स्वस्थ होंगे। मीडिया में खबरें चल रहीं हैं कि आरएसएस दिल्ली चुनावों में भाजपा के लिए वोट मांगेगी। क्या ये सही है? इसके पहले लोग आपसे जानना चाहते हैं कि पिछले दिनों भाजपा ने जो गलत हरकतें की हैं, क्या आरएसएस उनका समर्थन करती है? भाजपा के नेता खुलकर पैसे बांटकर वोट खरीद रहे हैं। क्या आरएसएस वोट खरीदने का समर्थन करती है? बड़े स्तर पर गरीब, दलित, पूर्वांचली और झुग्गी में रहने वालों के वोट कटवाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि ये लोग कई कई सालों से यहां रह रहे हैं। उन्होंने भागवत से पूछा, ”क्या आरएसएस को लगता है कि ऐसा करना भारतीय जनतंत्र के लिए सही है? क्या आपको नहीं लगता कि भाजपा इस तरह भारतीय जनतंत्र को कमजोर कर रही है?  

संजय सिंह और उनकी पत्नी का एक से तीन जगहों पर वोटर लिस्ट में नाम, इस मामले को लेकर बीजेपी ऐक्शन मोड में आई नजर

नई दिल्ली दिल्ली चुनावों से पहले संजय सिंह और उनकी पत्नी के वोटर लिस्ट में नाम लेकर रार छिड़ गई है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि संजय सिंह और उनकी पत्नी का एक से तीन जगहों पर वोटर लिस्ट में नाम है। अब इस मामले को लेकर भगवा पार्टी ऐक्शन मोड में नजर आ रही है। गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आप राज्यसभा सांसद पर आरोप लगाते हुए बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने संजय सिंह पर ऐक्शन की डिमांड की है। इस मामले पर संजय सिंह का बयान भी है। गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी दिल्ली के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह का दिल्ली के दो विधानसभा क्षेत्रों में वोटर लिस्ट में नाम है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में भी वोटर लिस्ट में भी संजय सिंह के नाम होने का दावा किया है। इस दौरान वीरेंद्र सचदेवा ने संजय सिंह की पत्नी पर भी वोटर लिस्ट में दो जगहों पर नाम दर्ज होने का दावा किया। वीरेंद्र सचदेवा ने दावा किया है कि राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एफिडेविट में बताया है कि वो दिल्ली की हरिनगर विधानसभा सीट क्षेत्र के रहने वाले हैं। बीजेपी का कहना है कि एक राज्यसभा सांसद जब अपने शपथ पत्र में खुद को हरिनगर विधानसभा क्षेत्र का रहने वाला बताया है, उसी समय उनका नाम सुल्तानपुर की नगर पालिका परिषद की वोटर लिस्ट में भी दर्ज है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वीरेंद्र सचदेवा ने वोटर लिस्ट में दर्ज संजय सिंह के पिता का नाम, पता और वोटर आईडी कार्ड भी बताया है।

केंद्र सरकार उन तीन कृषि कानूनों को ‘पॉलिसी’ कहकर पिछले दरवाजे से लागू करने की कोशिश कर रही है: अरविंद केजरीवाल

नई दिल्ली दिल्ली में विधानसभा चुनाव से पहले अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच किसानों के मुद्दे पर ठन गई है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के खत को लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी से लेकर आप के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने जोरदार पलटवार किया है। पूर्व सीएम केजरीवाल ने तो यहां तक दावा किया है कि केंद्र सरकार उन तीन कृषि कानूनों को ‘पॉलिसी’ कहकर पिछले दरवाजे से लागू करने की कोशिश कर रही है, जिन्हें विरोध के बाद वापस ले लिया गया था। शिवराज का लेटर सामने आने के कुछ देर बाद अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर आरोप लगाया कि भाजपा सरकार किसानों की अनदेखी कर रही है और उनके साथ किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया। केजरीवाल ने लिखा, ‘पंजाब में किसान कई दिनों से धरने और अनिश्चित अनशन पर बैठे हैं। इनकी वही मांगे हैं जो केंद्र सरकार ने तीन साल पहले मान ली थी, लेकिन अभी तक लागू नहीं की। बीजेपी सरकार अब अपने वादे से मुकर गई। बीजेपी सरकार किसानों से बात तक नहीं कर रही। उनसे बात तो करो। हमारे ही देश के किसान हैं। बीजेपी को इतना ज्यादा अहंकार क्यों है कि किसी से बात भी नहीं करते? पंजाब में जो किसान अनिश्चित अनशन पर बैठे हैं, भगवान उन्हें सलामत रखें लेकिन यदि उन्हें कुछ होता है तो इसके लिए बीजेपी जिम्मेदार होगी।’ इसी के साथ ‘आप’ प्रमुख ने दावा किया कि केंद्र सरकार वापस लिए गए कृषि कानूनों को ‘पॉलिसी’ के रूप में फिर से लागू करना चाहती है। उन्होंने कहा, ‘देशभर के किसानों की जानकारी के लिए मैं बता दूं कि जो तीन काले कानून केंद्र ने 3 साल पहले किसानों के आंदोलन की वजह से वापिस लिए थे, उन्हें ‘पालिसी’ कहकर केंद्र सरकार पिछले दरवाजे से दोबारा लागू करने की तैयारी कर रही है। इस पॉलिसी की कॉपी उनके विचार जानने के लिए केंद्र ने सभी राज्यों को भेजी है।’ केजरीवाल ने यह दावा ऐसे समय पर किया है जब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में किसानों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि ‘आप’ की सरकार को केंद्र की योजनाओं को लागू कर किसानों को राहत प्रदान करनी चाहिए। शिवराज ने मुख्यमंत्री आतिशी लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि दिल्ली में आप पार्टी की सरकार किसानों के प्रति बेहद उदासीन है और किसानों के लिए आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार में कोई संवेदना नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आतिशी ने कभी किसानों के हित में उचित निर्णय नहीं लिए। चौहान ने कहा कि 10 साल से दिल्ली में आप की सरकार है लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री ने हमेशा किसानों के साथ केवल धोखा किया है। केंद्र सरकार की किसान हितैषी योजनाओं को आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली में लागू नहीं किया। इस कारण से दिल्ली के किसान केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आप पार्टी सरकार का किसानों के प्रति गैर जिम्मेदाराना रवैया है। शिवराज ने कहा कि दिल्ली के किसान एकीकृत बागवानी मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, बीज ग्राम कार्यक्रम सहित अनेक योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। केंद्र की कृषि योजनाएं लागू नहीं होने से किसान नर्सरी और टिशू कल्चर की स्थापना, रोपण सामग्री की आपूर्ति, फसल उपरांत प्रबंधन के इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण, नए बाग, पाली हाउस एवं कोल्ड चैन की सब्सिडी सहित अनेक योजनाओं के लाभ नहीं ले पाए। किसानों को कृषि विकास योजना को लागू नहीं होने से कृषि मशीनीकरण, सूक्ष्म सिंचाई, मृदा स्वास्थ्य, फसल अवशेष प्रबंधन, परंपरागत कृषि विकास योजना, कृषि वानिकी और फसल विविधीकरण के लिए सब्सिडी जैसी योजनाओं का लाभ नहीं मिला। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दिल्ली में ट्रैक्टर, हार्वेस्टर सहित किसान उपकरण का पंजीकरण कमर्शियल व्हीकल श्रेणी में किया जा रहा है, जिससे किसानों को अधिक दाम देना पड़ रहा है। दिल्ली में किसानों के लिए बिजली की उच्च दरें निर्धारित कर रखी है। यमुना से लगे गांवों में सिंचाई उपकरणों के बिजली कनेक्शन काटे जा रहे हैं, जिससे किसानों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। कृषि मंत्री ने पत्र में कहा कि राजनैतिक प्रतिस्पर्धा किसान कल्याण में बाधा नहीं बननी चाहिए। किसान कल्याण सभी सरकारों का कर्तव्य हैं। इसलिए दलगत राजनीति से उठकर आप पार्टी की सरकार को किसानों के हित में निर्णय लेने चाहिए।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दिल्ली में स्मारक बनाने से जुड़े कांग्रेस के आरोपों पर बृजभूषण सिंह ने किया पलटवार

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दिल्ली में स्मारक बनाने से जुड़े कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया। पूर्व सांसद ने आम आदमी पार्टी (आप) के दिल्ली के एलजी विनय कुमार सक्सेना पर धार्मिक स्थल से जुड़े फैसले लेने के आरोप पर भी तंज कसा। पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की दिल्ली में समाधि बनाने में अड़ंगा डाले जाने के कांग्रेस के आरोपों पर कहा कि ये बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है। भगवान करें कि कांग्रेस और राहुल गांधी 2025 में सीरियस हो जाएं। देश को उनकी जरूरत है। प्रधानमंत्री का वचन ही मंजूरी है, गृह मंत्री ने भी कह दिया और मंजूरी भी प्रदान कर दी। जब कह दिया तो कह दिया। इसके बाद इन लोगों को राजनीति नहीं करनी चाहिए। कांग्रेस और राहुल गांधी पर जुबानी हमला करते हुए पूर्व सांसद ने कहा कि लगातार, राहुल गांधी और कांग्रेस ऐसे मुद्दे उठा रही है, जिससे जनता का कोई सरोकार नहीं है। इनको जनता से जुड़े मुद्दे उठाने चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस अपमान का आरोप लगा रही है। मेरा सवाल है कि क्या अपमान कर रही है? आपने पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव का अपमान नहीं किया। नरसिम्हा राव की डेथ बॉडी कांग्रेस कार्यालय में नहीं ले जाने दिया। क्या आपको याद नहीं है? पूर्व भाजपा सांसद ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि आप तो चाहते थे कि आपके परिवार के अलावा किसी की समाधि दिल्ली में नहीं बने। आपको ये बचकानी हरकत छोड़नी चाहिए। मैं चाहूंगा कि अयोध्या आएं, भगवान राम, भगवान हनुमान का दर्शन करें, सद्बुद्धि प्राप्त करें और देश के लिए जो जरूरी मुद्दे हों, उसे उठाएं। ऐसा इसीलिए, क्योंकि, विपक्ष और राहुल गांधी का राजनीति में सक्रिय रहना जरूरी है। वहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी और आम आदमी पार्टी (आप) के एलजी विनय कुमार सक्सेना पर धार्मिक स्थलों को तोड़ने के आरोपों से जुड़े सवाल पर बृजभूषण सिंह ने कहा कि उन्हें उस (आप) पार्टी के बारे में कुछ नहीं बोलना है। आम आदमी पार्टी (आप) ड्रामा पार्टी है।

भाजपा को लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता जरूर मिल गई, लेकिन अहम होगा 2025, बिहार चुनाव तय करेगा

नई दिल्ली भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार 2024 में सत्ता में आई थी, लेकिन अब उसके लिए नया साल 2025 बहुत कुछ तय करने वाला होगा। भाजपा को लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता जरूर मिल गई, लेकिन अपने दम पर 240 सीटें ही मिल पाने के चलते वह सत्ता से चूक गई। ऐसी स्थिति में उसके लिए जेडीयू की 12 और लोजपा की 5 सीटें अहम हैं। वहीं आंध्र की सत्ताधारी पार्टी टीडीपी की 14 और एकनाथ शिंदे गुट की 9 सीटें 272 के आंकड़े को बनाए रखने के लिए अहम हैं। भाजपा ने लोकसभा चुनाव के बाद आई अपेक्षाकृत निराशा को हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव में बड़ी जीत हासिल करके दूर किया है, लेकिन अभी बिहार चुनाव में उसकी परीक्षा होगी। खासतौर पर बिहार की राजनीति के पल-पल बदलते मिजाज को देखते हुए यदि साल के अंत तक कोई उलटफेर हो जाए तो वह भी हैरानी भरा नहीं होगा। बिहार में नीतीश कुमार करीब दो दशक से ऐसी ताकत बने हुए हैं, सत्ता जिनके इर्द-गिर्द ही घूमती है। चाहे आरजेडी के सहयोग से बने या फिर भाजपा के साथ, सीएम नीतीश कुमार ही होते हैं। ऐसे में जब अटल जी की जयंती पर डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि भाजपा की बिहार में अपने दम पर सरकार होना ही अटल जी के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगा तो यह बात जेडीयू को चुभ गई। फिर जो पोस्टर जेडीयू ने लगाए थे, उसने भी साफ कर दिया कि बिहार में नीतीश कुमार के नाम पर कोई समझौता नहीं होगा। जेडीयू ने साफ लिखा- ‘बात जब बिहार की हो तो चेहरा सिर्फ नीतीश कुमार का हो।’ इस तरह बिहार चुनाव से महीनों पहले ही रस्साकशी शुरू हो चुकी है। इस रस्साकशी के बीच भी भाजपा पर दबाव होगा कि वह बिहार यूनिट के नेताओं को साधे रखे और नीतीश कुमार से हार्ड बारगेनिंग भी कर ले। दोनों दलों के लिए सीट बंटवारा भी आसान नहीं होगा। इसके अलावा चिराग पासवान, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा जैसे नेताओं को भी भाजपा साधे रखना चाहेगी। दरअसल बिहार का चुनाव नतीजा दिल्ली तक असर डाल सकता है। यदि यहां एनडीए को चुनाव में पराजय झेलनी पड़ी तो फिर भाजपा और जेडीयू में खींचतान दिख सकती है और इसका सीधा असर दिल्ली तक दिखेगा। इसलिए भाजपा के लिए बिहार का चुनाव महाराष्ट्र और हरियाणा से कम महत्व नहीं रखता। अगले ही महीने दिल्ली में भी विधानसभा चुनाव हैं। यहां का नतीजा भाजपा के लिए अहम जरूर है, लेकिन इसका असर केंद्र की सरकार पर नहीं दिखेगा। यहां भाजपा के ही 7 सांसद हैं और विधानसभा के नतीजों से इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा। ऐसे में सभी की नजर बिहार और नीतीश कुमार पर होगी।

कैसे हैं आपके प्रदेश के मुख्यमंत्री; किस पर कितने हैं केस दर्ज, कितनी है संपत्ति

how chief minister of your state how many cases registered against whom how much property there भारत के राजनीति में मुख्यमंत्री की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। वे न केवल राज्य के सबसे प्रभावशाली नेता होते हैं, बल्कि उनके खिलाफ चल रहे मामलों और उनकी संपत्ति भी चर्चा का विषय बनते हैं। how chief minister of your state हाल ही में लोकतांत्रिक सुधार संघ (ADR) और राष्ट्रीय चुनाव निगरानी (NEW) ने देशभर के 31 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों और उनकी संपत्ति का विश्लेषण किया है। इस रिपोर्ट में यह सामने आया है कि कई मुख्यमंत्री गंभीर आपराधिक मामलों में घिरे हुए हैं, जबकि कुछ अपनी संपत्ति के मामले में काफी संपन्न हैं। क्या आपके राज्य के मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई आपराधिक मामले दर्ज हैं? भारत में 31 मुख्यमंत्रियों में से 13 (42%) के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 10 (32%) मुख्यमंत्रियों पर गंभीर आपराधिक मामले हैं। यह आंकड़े यह दर्शाते हैं कि भारतीय राजनीति में कई मुख्यमंत्री ऐसे हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मामले हैं, फिर भी वे सत्ता में बने रहते हैं। किन मुख्यमंत्रियों के खिलाफ कितने गंभीर आरोप हैं? तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंथ रेड्डी: इनके खिलाफ कुल 89 मामले दर्ज हैं, जिनमें से 72 गंभीर आपराधिक मामले हैं। ये मामले भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दर्ज किए गए हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन: इनके खिलाफ 47 मामले हैं, जिनमें से 11 गंभीर आपराधिक मामले हैं। आरोपों में भ्रष्टाचार और जमीन कब्जाने के मामले शामिल हैं। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू: इन पर कुल 19 मामले हैं, जिनमें 32 गंभीर IPC मामले हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते नायडू अक्सर विवादों में रहते हैं। कर्नाटका के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया: इन पर 13 मामले हैं, जिनमें 6 गंभीर IPC मामले शामिल हैं। भारत के मुख्यमंत्रियों की संपत्ति कितनी है? भारत के 31 मुख्यमंत्रियों की औसत संपत्ति 52.59 करोड़ रुपये है। कुछ मुख्यमंत्री अरबों की संपत्ति के मालिक भी हैं। चंद्रबाबू नायडू (आंध्र प्रदेश): उनकी संपत्ति 931.83 करोड़ रुपये है।-पेमा खांडू (अरुणाचल प्रदेश): उनकी संपत्ति 332 करोड़ रुपये से अधिक है।सिद्धारमैया (कर्नाटका): उनकी संपत्ति 51 करोड़ रुपये से अधिक है। क्या मुख्यमंत्री की संपत्ति आम नागरिक से कहीं अधिक होती है?मुख्यमंत्री की संपत्ति और आय आम नागरिक की तुलना में काफी अधिक होती है। उदाहरण के लिए, भारत में औसत राष्ट्रीय आय लगभग 1.85 लाख रुपये सालाना है, जबकि मुख्यमंत्री की औसत आय 13.64 लाख रुपये सालाना होती है, यानी उनकी आय लगभग सात गुना अधिक होती है। क्या मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई फाइनैंशियल स्कैंडल या कर्ज है? कुछ मुख्यमंत्री ऐसे हैं जिनके पास बड़ी संपत्ति के साथ-साथ कर्ज भी है। उदाहरण के लिए: पेमा खांडू (अरुणाचल प्रदेश): उनकी संपत्ति 332.56 करोड़ रुपये है, लेकिन उन्होंने 180.28 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। सिद्धारमैया (कर्नाटका): उनकी संपत्ति 51.94 करोड़ रुपये है, और उन्होंने 23.77 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। चंद्रबाबू नायडू (आंध्र प्रदेश): उनकी संपत्ति 931.83 करोड़ रुपये है, लेकिन उन्होंने 10.32 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। भारत में कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं? भारत में महिला मुख्यमंत्री की संख्या बहुत कम है। रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मुख्यमंत्रियों में से सिर्फ 2 महिला मुख्यमंत्री हैं, जो केवल 6% हैं। यह आंकड़ा भारतीय राजनीति में महिला नेतृत्व की कमी को दर्शाता है। भारत के मुख्यमंत्रियों की संपत्ति और उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले दर्शाते हैं कि राजनीति में बहुत सी जटिलताएँ होती हैं। हालांकि कुछ मुख्यमंत्री अपनी संपत्ति और पारदर्शिता के मामले में काफी अग्रणी हैं, वहीं कई ऐसे भी हैं जिनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं।

प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में आलोक शर्मा के नाम की सिफारिश शिवराज सिंह चौहान ने की ….

भोपाल  मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी इकाई को अगले साल 15 जनवरी तक नए अध्यक्ष के मिलने की संभावना है. रविवार को दिल्ली में हुई एक संगठनात्मक बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसकी अध्यक्षता भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और पार्टी के राष्ट्रीय संगठनात्मक महासचिव बीएल संतोष ने की. बैठक में शामिल होने वालों में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा, प्रदेश पार्टी के संगठन महासचिव हितानंद शर्मा और मध्य प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक चुनाव प्रमुख विवेक शेजवलकर शामिल थे. एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष बन सकते हैं वीडी शर्मा? वीडी शर्मा ने फरवरी 2020 में राज्य इकाई की कमान संभाली और फरवरी 2023 में अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा किया. लेकिन विधानसभा चुनाव नौ महीने दूर होने के कारण, पार्टी ने उन्हें विस्तार दिया, और वह इस पद पर चार साल पूरे करने के करीब हैं. हालांकि वीडी शर्मा अभी भी प्रदेश अध्यक्ष के पद की दौड़ में हैं, लेकिन यह संभावना नहीं है कि उन्हें राज्य भाजपा प्रमुख के रूप में एक और कार्यकाल मिल सकता है. क्योंकि उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा कर लिया है. वीडी शर्मा पर भी लागू होगा पार्टी का नियम पार्टी के सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय नेतृत्व ने निर्देश दिया है कि जिन जिला अध्यक्षों ने अपना कार्यकाल पूरा कर लिया है, उन्हें दोहराया नहीं जाना चाहिए. यही फॉर्मूला वीडी शर्मा पर भी लागू हो सकता है और इसकी बहुत कम संभावना है कि आरएसएस के पसंदीदा होने और प्रभावशाली संगठनात्मक रिकॉर्ड होने के बावजूद उन्हें दूसरा कार्यकाल मिलेगा. आलोक शर्मा के नाम की सिफारिश शिवराज सिंह चौहान ने की प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में तीन पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, बृजेंद्र प्रताप सिंह और अरविंद सिंह भदोरिया बताए जा रहे हैं. इसके अलावा भोपाल से पार्टी सांसद आलोक शर्मा भी दौड़ में हैं, जिनके नाम की सिफारिश केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और बैतूल विधानसभा सीट से विधायक हेमंत खंडेलवाल ने की है, जिन्हें तीन विधानसभा चुनावों के दौरान यूपी में 15 जिलों के समन्वय का प्रभार दिया गया था. बृजेंद्र प्रताप सिंह की भी एंट्री कहा जा रहा है कि भोपाल की हुजूर सीट से स्थानीय विधायक रामेश्वर शर्मा भी इस पद पर नजर गड़ाए हुए हैं और उनके समर्थक उनकी उम्मीदवारी के लिए जोर लगा रहे हैं. प्रस्तावित राज्य भाजपा अध्यक्षों की सूची में सबसे हालिया प्रविष्टि बृजेंद्र प्रताप सिंह की है, जिनका नाम रविवार को दिल्ली में बैठक के दौरान सामने आया था. राज्य पार्टी के पदाधिकारियों का दावा है कि दौड़ में अंतिम नाम के रूप में एक छुपा रुस्तम उभर सकता है. कब होगी नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति राज्य भाजपा प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा, “मध्य प्रदेश में पार्टी संगठन ने सदस्यता अभियान के लिए बहुत अच्छा काम किया है. हमारे पास 1.5 करोड़ से अधिक सदस्य और एक लाख सक्रिय सदस्य हैं. बूथ से लेकर मंडल स्तर तक चुनाव हुए हैं. अगला जिला अध्यक्षों का चुनाव है, जो अगले सप्ताह के भीतर पूरा हो जाएगा और फिर नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की जाएगी. भाजपा के लिए संगठन ही लोगों की सेवा का मार्ग है, जिसे भी राज्य इकाई का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी जाएगी वह पार्टी के आदर्शों के लिए काम करेगा.” मप्र में बूथ और मंडल स्तर पर चुनाव हुए और सदस्यों की नियुक्ति की गई. पार्टी का संगठन के चुनाव पर जोर 5 जनवरी तक 60 संगठनात्मक जिला अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी जायेगी. रविवार को मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर हुई बैठक में उनकी सूची को अंतिम रूप भी दे दिया गया. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा और हितानंद शर्मा के साथ जिला अध्यक्षों की अंतिम सूची पर निर्णय लेने के लिए अन्य सभी बैठकें रद्द कर दीं. पार्टी के सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि जिला अध्यक्षों की नियुक्तियां 5 जनवरी तक पूरी हो जाएं. हालांकि, अगर नामों की पसंद पर मतभेद हुआ तो सूची में 10 जनवरी तक की देरी हो सकती है. 431 सदस्य चुनेंगे पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष पार्टी कार्यालय के सूत्रों ने कहा, “लेकिन राज्य पार्टी अध्यक्ष की नियुक्ति 15 जनवरी तक कर दी जाएगी. नए राज्य अध्यक्ष के चुनाव के लिए 60 जिला अध्यक्षों, 230 प्रतिनिधियों (प्रत्येक विधानसभा सीट से एक) और 141 अन्य प्रतिनिधियों सहित 431 सदस्यों का एक निर्वाचक मंडल मतदाता है. इन 431 सदस्यों को बुलाया जाएगा और एक उपयुक्त राज्य पार्टी प्रमुख के नाम की सिफारिश करने के लिए कहा जाएगा.”

‘आप’ सरकार ने फायदे की बजाय और उनका नुकसान ही किया, कटोरा ही हाथ में आया: एआईएमआईएम प्रमुख

नई दिल्ली दिल्ली में विधानसभा चुनाव से पहले इमाम, पंडित और ग्रंथियों के वेतन के मुद्दे पर राजनीति तेज हो गई है। एक तरफ जहां आम आदमी पार्टी (आप) ने पुजारियों और ग्रंथियों को चौथी बार सरकार बनने पर हर महीने 18 हजार रुपए सम्मान राशि देने का वादा किया तो दूसरी तरफ पिछले कई दिनों से वक्फ बोर्ड के करीब 250 इमाम 17 महीनों से लंबित अपने वेतन को लेकर अरविंद केजरीवाल के घर का चक्कर काट रहे हैं। इस बीच ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन (एआईएमआईएम) के प्रमुख साजिद रशिदी ने कहा है कि ‘आप’ सरकार ने फायदे की बजाय और उनका नुकसान ही किया और अब कटोरा लेकर घूमने को मजबूर कर दिया है। साजिद रशिदी ने न्यूज 24 से बातचीत में विस्तार से बताया कि किस तरह शुरुआत में उन्हें फायदा दिखाया गया, लेकिन बाद में यह उनके लिए नुकसानदायक साबित हुआ। रशिदी ने कहा, ‘जब से केजरीवाल सरकार आई है एक बार फिर छह महीने लगातार वेतन नहीं मिला। जब भी मिली है 5-6 महीने रुककर मिली है, जबकि पैसों की कमी नहीं है इनके पास।’ रशिदी ने कहा कि मुसलमानों और पादरियों को छूने से केजरीवाल बच रहे हैं, क्योंकि इनकी राजनीति कमजोर होगी। तीन दिन केजरीवाल से मुलाकात का प्रयास कर चुके रशिदी ने कहा, ‘ईसाइयों को ना देकर और हमसें ना मिलकर वह यह दिखाना चाहते हैं कि देखो मुसलमानों को हम इस हद तक ले जा सकते हैं कि उनके इमामों को घर पर खड़ा रखकर जलील कर सकते हैं। वह यह दिखाना और बताना चाहते हैं।’ राशिदी का आरोप है कि दिल्ली के सभी इमामों को वेतन देने का ऐलान करने के बहाने वक्फ बोर्ड के स्थायी इमामों के साथ ठगी की गई। रशिदी ने कहा, ‘केजरीवाल जी ने 2020 में एक शिगूफा छोड़ा, दिल्ली के सभी इमामों को वेतन देने का ऐलान किया। जो हम परमानेंट लोग हैं, मैं भी 96 से इमाम हूं, उससे पहले से भी लोग हैं, लेकिन इन्होंने कहा कि प्राइवेट मस्जिदों के इमामों को भी वेतन देंगे। अमानतुल्लाह जब चेयरमैन थे, 37 करोड़ का ग्रांट मंजूर कर दिया गया। हमने साथ दिया यह सोचकर कि किसी का फायदा हो जाए। लेकिन इनके (निजी) के बहाने हम परमानेंट को भी खराब कर दिया। दो तीन बार वेतन दिया। 100 करोड़ का बजट दिया, उसका क्या हुआ वह तो चेयरमैन, सरकार जानें। उसके बाद उन्हें भी वेतन नहीं मिला। हम जो वक्फ बोर्ड के राजस्व से वेतन पाते थे, ग्रांट पर कर दिया। यानी हमें पक्के से कच्चा कर दिया। यह कमाल केजरीवाल जी ने किया। आप हमें 10 हजार ही देते, कमजोर तो ना करते।’ रशिदी ने कहा कि यह ग्रंथियों, पुजारियों या इमामों का सम्मान नहीं गुगली है। उन्होंने कहा कि एक इमाम के पास सैकड़ों-हजारों लोग नमाज पढ़ते हैं। लेकिन लोगों को जब पता चलेगा कि इमाम को पैसा नहीं मिला तो उन पर असर तो होगा। उन्होंने कहा कि ग्रंथियों को सरकार की मदद की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि गुरुद्वारे सक्षम हैं, लेकिन पुजारी झांसे में आ सकते हैं। पुजारियों को पैसे का वादा करके शिगूफा छोड़ा गया है ताकि उनके अनुयायी प्रभावित हों। देंगे या नहीं देंगे यह तो चुनाव बाद होगा, जैसे अभी महिलाओं से रजिस्ट्रेशन करा लिया और इनके विभाग ने कह दिया कि ऐसी कोई स्कीम ही नहीं है।

मध्य प्रदेश में बीजेपी ने परिवारवाद पर लगाम लगा दी, एक परिवार से एक ही व्यक्ति को मौका, अधर में लटका है नेतापुत्रों का भविष्य

भोपाल मध्य प्रदेश में बीजेपी ने परिवारवाद पर लगाम लगा दी है। कई नेतापुत्रों के राजनीतिक सपने टूट गए हैं। बुधनी उपचुनाव में शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय को टिकट नहीं मिला। इसके बाद से दूसरे नेता निराश हो गए। अब भाजपा संगठन चुनाव में भी इन नेता पुत्रों की कोई पूछपरख नहीं हुई। बीजेपी का परिवारवाद विरोधी रुख नेताओं के बच्चों के लिए मुसीबत बन गया है। विधानसभा और लोकसभा जाने की उनकी राह मुश्किल हो गई है। कई नेता अपने बच्चों को राजनीति में आगे बढ़ाना चाहते थे। लेकिन पार्टी के नए नियमों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। क्या है पार्टी का स्टैंड भाजपा ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अपनी जीत का श्रेय परिवारवाद न फैलाने को दिया है। पार्टी का मानना है कि परिवारवाद से प्रतिभा दब जाती है। इसलिए पार्टी ने एक परिवार से एक ही व्यक्ति को टिकट देने का फैसला किया है। इससे कई नेता पुत्रों का राजनीतिक करियर खतरे में पड़ गया है। पहले ये नेता पुत्र राजनीति में काफी सक्रिय थे। अब वे कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। नए नियमों के बाद से गायब हैं नेतापुत्र ऐसे नेता पुत्रों में पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के बेटे अभिषेक भार्गव भी शामिल हैं। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे देवेंद्र सिंह तोमर भी इसी सूची में हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय भी राजनीति में सक्रिय थे। पूर्व मंत्री जयंत मलैया के बेटे सिद्धार्थ, पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन की बेटी मौसम और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के बेटे तुष्मुल भी इसी श्रेणी में आते हैं। बीजेपी ने पहले इन पर की कार्रवाई भाजपा ने आकाश विजयवर्गीय और जालम सिंह पटेल के टिकट पहले ही काट दिए थे। कार्तिकेय सिंह चौहान 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले से बुधनी में सक्रिय थे। उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें उपचुनाव में टिकट मिलेगा। प्रदेश भाजपा चुनाव समिति ने उनका नाम दूसरे नंबर पर भेजा भी था। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें टिकट नहीं दिया। नरेंद्र तोमर के बेटे भी थे एक्टिव पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे देवेंद्र सिंह तोमर लगभग 10 साल से राजनीति में सक्रिय हैं। उन्हें 2023 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलने की उम्मीद थी। लेकिन पार्टी ने नरेंद्र सिंह तोमर को ही मैदान में उतार दिया। इससे देवेंद्र का सपना टूट गया। सागर जिले की रहली सीट से नौ बार विधायक रहे गोपाल भार्गव अपने बेटे अभिषेक को राजनीति में स्थापित करना चाहते थे। अभिषेक दमोह या खजुराहो से लोकसभा टिकट के लिए भी कोशिश कर रहे थे। जयंत मलैया भी खाली हाथ दमोह से सात बार विधायक रहे जयंत मलैया के बेटे सिद्धार्थ भी टिकट की दौड़ में थे। उन्होंने विधानसभा चुनाव का टिकट भी मांगा था। लेकिन पार्टी ने उन्हें तवज्जो नहीं दी। 2021 के उपचुनाव में सिद्धार्थ ने दमोह से टिकट मांगा था। लेकिन पार्टी ने कांग्रेस से आए राहुल लोधी को टिकट दे दिया। राहुल हार गए तो मलैया परिवार पर भितरघात का आरोप लगा। सिद्धार्थ को पार्टी से निकाल दिया गया। बाद में वे वापस पार्टी में आ गए। बालाघाट में भी यही हाल बालाघाट से विधायक रहे गौरीशंकर बिसेन अपनी बेटी मौसम को राजनीति में आगे बढ़ाना चाहते थे। मौसम को विधानसभा का टिकट भी मिला था। लेकिन उन्होंने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। इसलिए गौरीशंकर बिसेन को ही चुनाव लड़ना पड़ा। अब गौरीशंकर बिसेन अपनी बेटी को जिलाध्यक्ष बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

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