LATEST NEWS

आज जो संसद में हुआ उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है, गुंडागर्दी से भरा व्यवहार किया गया: शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से बाबा आंबेडकर पर की गई टिप्पणी को लेकर संसद में घमासान जारी है। गुरुवार को संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसद आपस में ही भिड़ पड़े। इस धक्कामुक्की में भाजपा के दो सांसद घायल हो गए। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भाजपा सासंदों के साथ धक्कामुक्की की। इस घटना के बाद दोनों दलों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किए। राहुल गांधी ने कुकृत्य के लिए क्षमा नहीं मांगी: भाजपा कांग्रेस की ओर से आयोजित की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा सांसद मीडिया के सामने आए। उन्होंने कहा,अभी-अभी कांग्रेस अध्यक्ष खरगे जी ने और राहुल गांधी जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। हम सोच रहे थे कि वो संसद में उनके द्वारा किए गए कुकृत्य की क्षमा मांगेंगे, लेकिन उन्होंने क्षमा नहीं मांगी। मुझे तो समझ ही नहीं आया कि उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों की। उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उनका अहंकार झलक रहा था। आज जो भी हुआ कल्पना के परे: शिवराज सिंह चौहान उन्होंने आगे कहा कि आज मेरा मन भारी है, व्यथित है, पीड़ा से भरा हुआ है। मैं एक दर्जन बार लोकसभा और विधानसभा का सदस्य रहा हूं। मैंने सांसदों और विधायकों के व्यवहार और आचरण को देखा है, लेकिन आज जो संसद में हुआ उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। अशालीन, अशोभनीय और गुंडागर्दी से भरा व्यवहार किया गया। जिसकी सभ्य समाज कल्पना भी नहीं कर सकता। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “हमारी एक आदिवासी सांसद बहन श्रीमती कोन्याक ने जो कुछ कहा है, वो सुनकर व्यथा से हम भर जाते हैं। उन्होंने सभापति जी को शिकायत की है कि उनके साथ अशालीन, असभ्य, अमर्यादित व्यवहार किया गया। सभापति कह रहे हैं कि वह उनके पास रोती हुई आई थी।” उन्होंने आगे कहा कि क्या महिला आदिवासी सांसद के साथ ऐसा व्यवहार किया जाएगा, क्या उनके इतने निकट पहुंचे कि वो असहज हो जाएं। मां-बहन-बेटी का सम्मान भारत की प्राथमिकता रही है, लेकिन महिला आदिवासी सांसद के साथ ऐसे व्यवहार की कोई कल्पना कर सकता है क्या? क्या हो गया है राहुल गांधी और कांग्रेस को? प्रताप सारंगी ने राहुल गांधी पर लगाए गंभीर आरोप बीजेपी सांसद प्रताप सारंगी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाया है। प्रताप सारंगी को संसद में चोट लगी है। उन्होंने राहुल गांधी पर धक्का देने का आरोप लगाया है। धक्कामुक्की में बीजेपी सांसद मुकेश राजपूत भी घायल हुए हैं। फर्रुखाबाद से सांसद राजपूत आईसीयू में भर्ती हैं।

जेपी नड्डा ने अंबेडकर पर पलटवार किया, कहा-कांग्रेस को अब झूठ बोलना बंद करना चाहिए

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार को बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर पर जारी राजनीति के बीच कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, “कल से, सत्य, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय में विश्वास करने वाले सभी लोगों द्वारा कांग्रेस और उसके सड़े हुए इकोसिस्टम को बेनकाब किया गया है। इसलिए, मैंने डॉ. अम्बेडकर के प्रति कांग्रेस की गहरी नफरत को दर्शाने के लिए कुछ तथ्य साझा करने के बारे में सोचा।” उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर आगे कहा, “पंडित नेहरू डॉ. अम्बेडकर से नफरत करते थे। हां, यह विशुद्ध नफरत थी। इसीलिए पंडित नेहरू ने डॉ. अम्बेडकर को दो बार हराया। और, वह गर्व से विदेशों में लोगों को पत्र लिख रहे थे, इस बात पर खुशी व्यक्त कर रहे थे कि आदरणीय बाबासाहेब अब कैबिनेट में नहीं हैं।” उन्होंने आगे कहा, “26, अलीपुर रोड को बहुत पहले ही एक भव्य स्मारक में बदल दिया जाना चाहिए था जो लोगों को प्रेरित करता। लेकिन, डॉ. अंबेडकर से नफरत करने वाली कांग्रेस ने कुछ नहीं किया। यह हमारी एनडीए सरकार थी जिसे 26, अलीपुर रोड को एक प्रतिष्ठित स्थान के रूप में विकसित करने का सम्मान मिला। मुंबई में चैत्य भूमि… दशकों तक कांग्रेस में सामाजिक न्याय के स्वयंभू संरक्षकों ने वहां एक भव्य स्मारक बनाने के खोखले वादे किए। 2015 में, हमने सुनिश्चित किया कि भूमि हस्तांतरण किया जाए। ये नरेंद्र मोदी ही हैं, जिन्होंने हाल के वर्षों में वहां दो बार प्रार्थना की।” नड्डा ने सैम पित्रोदा की तस्वीर साझा करते हुए कहा, “राजवंश के सबसे वफादार दरबारी ने बताया कि कांग्रेस वास्तव में डॉ. अम्बेडकर के बारे में क्या सोचती है, कि हमारे संविधान के निर्माण में बाबासाहेब की कोई भूमिका नहीं थी। कुछ स्क्रीनशॉट वास्तव में हजारों शब्द बोलते हैं। एक्स पोस्ट को हटाया जा सकता है लेकिन उनकी वास्तविक भावनाएं कभी नहीं जाएंगी।” उन्होंने आगे अपने पोस्ट में कहा, “15, जनपथ पर डॉ. अंबेडकर की स्मृति में एक विश्व स्तरीय केंद्र बनाया जाना था। दुख की बात है कि कांग्रेस उस सड़क पर एक घर से आगे नहीं देख सकती थी, इसलिए उन्होंने यह काम अधूरा छोड़ दिया। आख़िरकार 2017 में डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर का उद्घाटन पीएम मोदी ने किया। कांग्रेस नेताओं को विदेशी धरती पर भारत के बारे में झूठ फैलाना पसंद है। लेकिन, उन्होंने लंदन में उस जगह की कभी परवाह नहीं की, जहां खुद डॉ. अंबेडकर रहते थे। पीएम नरेंद्र मोदी 2015 की यूके यात्रा के दौरान वहां गए, और बाद में इसे महाराष्ट्र सरकार द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया।” जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “मैं कांग्रेस और उनके सड़े हुए इको-सिस्टम को बताना चाहता हूं कि जून में आप लगातार तीसरी बार लोकसभा चुनाव हारे। इसके साथ ही आपने आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम में निराशाजनक प्रदर्शन किया। अक्टूबर में आप हरियाणा में हार गए। वहीं, नवंबर में आप महाराष्ट्र में बुरी तरह हारे। कम से कम अब तो झूठ बोलना बंद कर दीजिए, क्योंकि आपका झूठ अनियंत्रित नहीं होगा। सत्य की हमेशा जीत होगी… जय भीम।” बता दें कि संविधान पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि अभी अंबेडकर, अंबेडकर , अंबेडकर का नाम लेना फैशन बन चुका है। अगर इन लोगों ने इतना भगवान का नाम लिया होता, तो अब इन्हें भगवान प्राप्त हो चुके होते। इसी बयान को लेकर कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियां भाजपा और अमित शाह पर हमलावर हैं। कांग्रेस का आरोप है कि अमित शाह ने अपने इस बयान से भीमराव अंबेडकर का अपमान किया है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह को बचाने के लिए साजिश हुई , साधा भाजपा पर निशाना

नई दिल्ली संसद परिसर में हुए धक्का-मुक्की कांड को लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा। प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह को बचाने के लिए साजिश हुई है। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा के सांसदों को चुनौती देते हुए कहा कि वह यहां खड़े होकर ‘जय भीम’ के नारे लगाकर दिखाएं। दरअसल, संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन के दौरान भाजपा के दो सांसद प्रताप सारंगी और मुकेश राजपूत को चोट लग गई। भाजपा ने दावा किया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के धक्का देने से दोनों सांसदों को चोट लगी है। हालांकि, कांग्रेस ने भाजपा को इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और भाजपा पर ही आरोप लगा दिया। धक्का-मुक्की कांड पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, “राहुल गांधी बीआर अंबेडकर की फोटो लेकर शांति पूर्वक ‘जय भीम’ के नारे को बोलते हुए संसद में जा रहे थे। संसद में जाने से किसने रोका? हम इतने दिनों से साइड में प्रदर्शन कर रहे हैं। जो भी आ रहा है, जा रहा है, उसके लिए पूरा रास्ता है। इन्होंने पहली बार प्रदर्शन किया और सबको रोक दिया, धक्का-मुक्की और गुंडागर्दी की। अमित शाह को बचाने के लिए ये साजिश हुई है।” उन्होंने कहा, ”मेरे सामने मल्लिकार्जुन खड़गे को जमीन पर गिराया गया। उसके बाद सीपीएम के सांसद को धक्का मारा, वो खड़गे के ऊपर गिरे। मुझे लगा उनकी टांग टूट गई होगी या कुछ और हुआ होगा। चेहरे से दिख रहा था कि उनको चोट लगी, फिर कहीं से उनके लिए कुर्सी ढूंढकर लाए। हम यहां पर रोज प्रदर्शन कर रहे हैं, आज तक कुछ नहीं हुआ है, ये सब साजिश है। इनसे हमने पूछा अगर आप अंबेडकर जी को चाहते हैं तो ‘जय भीम’ बोलें। इनके मुंह से ‘जय भीम’ का नारा क्यों नहीं निकल सकता? हम लोग अपने संविधान के लिए लड़ते रहे। मैं भाजपा सांसदों को चैलेंज करती हूं, यहां खड़े होकर ‘जय भीम’ बोलें।”

अब मायावती ने होम मिनिस्टर अमित शाह को माफी मांगने और अपने शब्दों को वापस लेने की नसीहत दी

नई दिल्ली बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर को लेकर अमित शाह के भाषण के एक हिस्से पर मचे बवाल के बीच मायावती ने भी मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने होम मिनिस्टर अमित शाह को माफी मांगने और अपने शब्दों को वापस लेने की नसीहत दी है। मायावती ने गुरुवार को लखनऊ में कहा कि यदि अमित शाह ने माफी नहीं मांगी तो फिर दलित समाज भूल नहीं सकेगा। यही नहीं उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अमित शाह के बयान से पूरे देश के दलितों में गुस्सा है। वह उन्हें भगवान की मानते हैं। ऐसे में अमित शाह के बयान का बड़ा असर हो सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि माफी न मांगने पर भाजपा का हाल भी कांग्रेस जैसा हो सकता है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा, ‘अमित शाह के बयान से बाबासाहेब आंबेडकर के अनुयायियों में जबरदस्त गुस्सा व्याप्त है। अमित शाह को अपने कहे शब्दों को वापस ले लेना चाहिए और पश्चाताप भी करना चाहिए। ऐसा नहीं किया तो फिर आंबेडकर के अनुयायी कभी इसे भूला नहीं पाएंगे और माफ नहीं कर सकेंगे। यह ऐसा ही होगा, जैसे कांग्रेस के तमाम पापों को आज भी बाबासाहेब आंबेडकर के अनुयायी भुला नहीं सकेंगे। कांग्रेस कितने ही रंग और ढंग बदल ले, लेकिन लोग उस पर भरोसा नहीं कर सके हैं। मायावती ने कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस ने बाबासाहेब के देहांत के बाद उनके नाम को और संविधान निर्माण में रहे उनके योगदान को मिटाने की भी पूरी-पूरी कोशिश की है। यह पार्टी अपने मकसद में कामयाब हो जाती, लेकिन मान्यवर कांशीराम के आगे आने से ऐसा नहीं हो सका। यही नहीं इस मिशन को मंजिल तक पहुंचाने के लिए मुझे भी अपनी जिंदगी समर्पित करनी पड़ी। लेकिन आज अलग-अलग पार्टियां तमाम हथकंडे अपनाकर उनकी विरासत को खत्म करना चाहती हैं।’ उन्होंने कहा कि बसपा की सरकार 4 बार यूपी में रही और लखनऊ एवं नोएडा में हमने उनके नाम पर कई भव्य स्मारक बनाए। उनके नाम पर हमने किए जिले भी बनाए, लेकिन समाजवादी पार्टी ने नामों को बदल दिया। मायावती ने कहा कि दलित समाज के तमाम संतों, गुरुओं को बसपा ने हमेशा सम्मान दिया है। अब कांग्रेस और भाजपा आदि की नींद उड़ी हुई है। मायावती ने कहा कि भाजपा जैसे दल तो अब मजबूर होकर कुछ कदम उठा रहे हैं। अब कांग्रेस भी दलित वर्ग को लुभाने के लिए किस्म-किस्म के हथकंडे अपना रही है। अब कांग्रेस भी यही कोशिश कर रही है कि अमित शाह के बयान के आधार पर वोट बटोर लिए जाएं।

संसद परिसर विवाद मामले में किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी और राहुल गांधी के व्यवहार को लेकर सवाल उठाए

नई दिल्ली संसद परिसर में हाल ही में हुए विवाद ने राजनीति को गरमा दिया है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनके दो सांसदों, प्रताप चंद्र सारंगी और मुकेश राजपूत, को धक्का दिया। इस घटना के बाद भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी को निशाने पर लिया, जबकि कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से नकारा। इस बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी और राहुल गांधी के व्यवहार को लेकर सवाल उठाए। क्या हुआ था घटनाक्रम? बीजेपी सांसदों का कहना है कि राहुल गांधी ने उनके दो सांसदों को शारीरिक रूप से धक्का दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रताप सारंगी और मुकेश राजपूत को धक्का देने के बाद भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी की आलोचना की और कहा कि अगर भाजपा सांसद भी इस तरह की शारीरिक ताकत का इस्तेमाल करते, तो स्थिति और बिगड़ सकती थी। भाजपा नेताओं का आरोप था कि राहुल गांधी ने संसद में एक अस्वीकार्य व्यवहार का प्रदर्शन किया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का बयान इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “संसद कोई कुश्ती का अखाड़ा नहीं है, जहां शारीरिक ताकत दिखाई जाए। राहुल गांधी ने दो सांसदों को धक्का दिया, क्या आपने (राहुल गांधी) कराटे और कंफू सीखा है ताकि आप दूसरे सांसदों को मार सकें?” उन्होंने कहा कि यह संसद की मर्यादा के खिलाफ है, और सवाल उठाया कि राहुल गांधी को कौन से कानून ने यह अधिकार दिया कि वे किसी सांसद को धक्का देकर चोट पहुंचाएं। रिजिजू ने यह भी कहा कि अगर सभी सांसद अपनी ताकत दिखाकर संसद में मारपीट करने लगेंगे, तो संसद की कार्यवाही कैसे चलेगी? उन्होंने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि वे लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं और उन्हें अपने आचरण के प्रति जिम्मेदार रहना चाहिए। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन का विरोध प्रदर्शन रिजिजू ने यह भी बताया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के सदस्य संसद में लगातार प्रदर्शन करते हैं, जबकि एनडीए के सांसदों का यह विरोध प्रदर्शन एक विशेष कारण से था। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन इसलिए हुआ क्योंकि कांग्रेस पार्टी ने बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का अपमान किया है। केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने झूठ फैलाया और गृह मंत्री अमित शाह के वीडियो को तोड़-मरोड़कर दिखाया, जिससे गलत संदेश गया। बीजेपी सांसदों का संयम केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि भाजपा सांसदों ने पूरी घटना के दौरान संयम दिखाया है। उन्होंने कहा, “हमने कभी शारीरिक हिंसा का सहारा नहीं लिया। हम हमेशा अपनी बात को शांति से रखते हैं।” रिजिजू ने यह भी कहा कि भाजपा-एनडीए के सांसद धक्का-मुक्की या किसी प्रकार की हिंसा में शामिल नहीं होते हैं, बल्कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपने विचार व्यक्त करते हैं। कांग्रेस का जवाब कांग्रेस ने भाजपा द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह से नकारा और इसे भाजपा की राजनीति का हिस्सा बताया। कांग्रेस ने कहा कि भाजपा हमेशा ऐसे मुद्दों को उठाकर असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश करती है। कांग्रेस का कहना था कि राहुल गांधी ने कभी किसी सांसद को जानबूझकर धक्का नहीं दिया और यह आरोप पूरी तरह से झूठे हैं।

राहुल गांधी ने अपनी सफाई में कहा- बीजेपी के लोग हमें अंदर जाने से रोक रहे थे

नई दिल्ली गुरुवार को संसद परिसर में एक बड़ा विवाद हुआ, जिसमें दोनों प्रमुख दलों बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बन गई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी के सांसदों ने उनके नेताओं के साथ धक्का-मुक्की की, जबकि बीजेपी ने पलटवार करते हुए राहुल गांधी पर धक्का देने का आरोप लगाया। बीजेपी के लोग हमें अंदर जाने से रोक रहे थे- राहुल गांधी राहुल गांधी ने अपनी सफाई में कहा कि जब वह और उनके साथी संसद के मकर द्वार से अंदर जा रहे थे, तब बीजेपी के सांसदों ने उन्हें रोक लिया। उन्होंने कहा, “बीजेपी के लोग हमें अंदर जाने से रोक रहे थे और इस दौरान धक्का-मुक्की हुई। कुछ लोग गिर भी गए।” राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी संविधान पर हमला कर रही है और अंबेडकर का अपमान कर रही है। उन्होंने कहा, “मुख्य मुद्दा यह है कि ये लोग संविधान पर हमला कर रहे हैं।” खरगे जी के साथ धक्का-मुक्की की राहुल ने आगे कहा कि मकर द्वार पर बीजेपी के सांसदों ने उन्हें और मल्लिकार्जुन खरगे जैसे नेताओं को रोकने की कोशिश की और उनके साथ धक्का-मुक्की की। उन्होंने कहा कि कैमरे में सब कुछ रिकॉर्ड हो गया है और बीजेपी सांसद उन्हें संसद में जाने से रोक नहीं सकते हैं। राहुल गांधी ने धक्का दिया- प्रताप सारंगी वहीं, बीजेपी सांसद प्रताप चंद्र सारंगी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने एक सांसद को धक्का दिया, जिससे वह सांसद गिरकर उनके ऊपर आ गिरा और उनके सिर में चोट लग गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया और बीजेपी के नेता उन्हें देखने पहुंचे। कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने भी कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे के साथ भी धक्का-मुक्की हुई थी और यह सब कैमरे में रिकॉर्ड हो गया है। विपक्षी सांसद संसद में निकाल रहे थे प्रोटेस्ट मार्च इस विवाद के बीच, इंडिया ब्लॉक के सांसद संसद में प्रोटेस्ट मार्च निकाल रहे थे। यह मार्च बीते दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के खिलाफ निकाला जा रहा था। शाह ने बीआर आंबेडकर को लेकर कुछ टिप्पणी की थी, जिसे विपक्ष ने आंबेडकर का अपमान करार दिया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने शाह के इस्तीफे और माफी की मांग की है। विरोध के दौरान इंडिया ब्लॉक के नेता आंबेडकर की प्रतिमा से लेकर मकर द्वार तक मार्च कर रहे थे। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अमित शाह ने जानबूझकर आंबेडकर का अपमान किया और उनका यह अपराध माफ नहीं किया जा सकता। कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी पूरे तंत्र के जरिए शाह को बचाने में लगी है, जबकि वे माफी मांगने के बजाय धमकियां दे रहे हैं।

भाजपा सांसदों की धक्का मुक्की में घुटने में लगी चोट, कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाए

नई दिल्ली कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाए हैं कि भारतीय जनता पार्टी के सांसदों की धक्का मुक्की में उनके घुटने में चोट लगी है। इस संबंध में उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भी लिखा है। यह ऐसे समय पर हुआ, जब भाजपा ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर एमपी प्रताप सारंगी को धक्का देकर गिराने के आरोप लगाए। सामने आए वीडियो में नजर आ रहा है कि सारंगी के सिर से खून बह रहा है। खरगे का आरोप है कि मकर द्वार पर भाजपा सांसदों ने उन्हें धक्का दिया है। उन्होंने पत्र में लिखा, ‘आज सुबह INDIA पार्टी के सांसद प्रेरणा स्थल पर डॉक्टर आंबेडकर की प्रतिमा से मकर द्वार तक मार्च निकाल रहे थे। यह प्रदर्शन केंद्रीय गृहमंत्री की तरफ से 17 दिसंबर 2024 को राज्यसभा में दिए भाषण के दौरान डॉक्टर आंबेडकर के अपमान के खिलाफ किया गया था।’ उन्होंने लिखा, ‘जब मैं INDIA दलों के सांसदों के साथ मकर द्वार पहुंचा, तो मुझे भाजपा सांसदों ने धक्का मारा। इसके चलते मेरा संतुलन बिगड़ गया और मकर द्वार के सामने जमीन पर बैठना पड़ा। इसके कारण मेरे घुटनों में चोट लग गई है, जिसकी पहले ही सर्जरी हो चुकी है। घटना के बाद कांग्रेस सांसद कुर्सी लेकर आए और मुझे उसपर बिठाया गया।’ कांग्रेस चीफ ने लिखा, ‘बड़ी मुश्किल और साथियों की मदद से मैं सुबह 11 बजे लड़खड़ाता हुआ सदन पहुंचा। मैं अपील करता हूं कि इस घटना की जांच कराए, जो कि न सिर्फ मुझपर बल्की राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष पर हमला है।’ भाजपा सांसद के सिर से बहा खून संसद परिसर में प्रदर्शन के दौरान भाजपा सांसद प्रताप सारंगी घायल हो गए थे। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के धक्के की वजह से चोट लगी है। एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें सारंगी को घायल हालत में लेकर जा रहे थे। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी ने एक सांसद को धक्का मारा था, जो मेरे ऊपर गिर पड़े और इसके बाद मैं गिरा…। जब मैं सीढ़ियों के पास खड़ा था और राहुल गांधी ने एक एमपी को धक्का लगाया, जो मेरे ऊपर गिर पड़ा।’

प्रकाश आंबेडकर ने कहा-वही पुरानी सोच, ये लोग तब भी सफल नहीं हुए थे और आज भी सफल नहीं हो सकेंगे

मुंबई होम मिनिस्टर अमित शाह के बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर पर दिए बयान को लेकर हंगामा मचा हुआ है। कांग्रेस ने पूरे देश में ऐलान किया है तो वहीं संसद में हंगामा बरपा है। इस बीच भीमराव आंबेडकर के पोते और बहुजन वंचित अघाड़ी के नेता प्रकाश आंबेडकर का भी बयान सामने आया है। उन्होंने अमित शाह के बयान को लेकर कहा कि यह तो इन लोगों की पुरानी मानसिकता है। उन्होंने कहा, ‘भाजपा के अस्तित्व में आने से पहले भी जनसंघ और आरएसएस ने बाबासाहेब का विरोध किया था। ऐसा तब किया गया, जब संविधान को अपनाया जा रहा था।’ प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि ये लोग तब भी सफल नहीं हुए थे और आज भी सफल नहीं हो सकेंगे। उन्होंने कहा, ‘यह कोई नई बात नहीं है। वे अपने पुराने प्लान लागू नहीं कर पाए हैं। इसकी वजह कांग्रेस नहीं बल्कि बाबासाहेब आंबेडकर हैं। आगे भी ये लोग सफल नहीं पाएंगे।’ बता दें कि भीमराव आंबेडकर पर अमित शाह के बयान पर विवाद थमा नहीं है। कांग्रेस उनके इस्तीफे की मांग कर रही है तो वहीं लालू यादव का कहना है कि शाह को राजनीति से ही इस्तीफा दे देना चाहिए। अमित शाह ने कहा था कि इन दिनों आंबेडकर-आंबेडकर कहना फैशन बन गया है। इतना यदि ये भगवान का नाम लेते तो 7 जन्मों तक के लिए स्वर्ग मिल जाता। इस पर भी प्रकाश आंबेडकर ने खासतौर पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम लेना तो फिर एक तरह से मनुवाद को ही स्वीकार करना हुआ। प्रकाश आंबेडकर ने इस बीच महाराष्ट्र के परभणी में हुई हिंसा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वहां मारे गए सोमनाथ सूर्यवंशी के परिजनों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस समेत महाविकास अघाड़ी पर भी निशाना साधा। प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि ये लोग नाम बहुत लेते हैं, लेकिन परभणी कोई नहीं गया। ये लोग सिर्फ बाबासाहेब के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि परभणी में तो गोधरा जैसे हालात पैदा करने की कोशिश की गई थी।

पीएम मोदी ने कांग्रेस के दोनों नेताओं से मुलाकात की, अमित शाह और खरगे भी थे मौजूद

नई दिल्ली बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के द्वारा दिए गए बयान पर संसद के अंदर और बाहर विपक्ष का विरोध-प्रदर्शन जारी है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार दोपहर को कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की है। इस दौरान अमित शाह और लोकसभा के स्पीकर ओम बिड़ला भी मौजूद रहे। सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अगले अध्यक्ष के चयन पर चर्चा करने के लिए पीएम मोदी ने कांग्रेस के दोनों नेताओं से मुलाकात की है। आपको बता दें कि राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं वहीं खरगे राज्यसभा में कांग्रेस सहित पूरे विपश्र की अगुवाई करते हैं। दोनों ही नेता प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली उस समिति का भी हिस्सा हैं, जो इस महत्वपूर्ण नियुक्ति की निगरानी करती है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को ही बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के अपमान के आरोप का सामना कर रहे अमित शाह का जोरदार बचाव करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने संविधान निर्माता का अपमान करने के कांग्रेस के काले इतिहास की पोल खोल दी, जिससे मुख्य विपक्षी पार्टी स्तब्ध है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके ‘दूषित इकोसिस्टम’ को लगता है कि उसके ‘दुर्भावनापूर्ण झूठ’ संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर के प्रति उसके कई वर्षों के ‘कुकर्मों’ को छिपा सकते हैं तो वह ‘गंभीर भूल’ कर रही है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत के लोगों ने बार-बार देखा है कि किस प्रकार एक ‘परिवार’ के नेतृत्व में एक पार्टी, डॉ आंबेडकर की विरासत को मिटाने और अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति समुदायों को अपमानित करने के लिए हरसंभव ‘गंदी चाल’ चलने में लिप्त रही है। प्रधानमंत्री मोदी की यह टिप्पणी कांग्रेस के उस आरोप के मद्देनजर आई है, जिसमें कहा गया है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में ‘भारत के संविधान की 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा’ विषय पर दो दिन तक चली चर्चा का जवाब देते हुए मंगलवार को अपने संबोधन के दौरान बाबासाहेब का अपमान किया। मुख्य विपक्षी दल ने शाह के संबोधन का एक वीडियो अंश भी जारी किया जिसमें गृह मंत्री विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए यह कहते सुने जा सकते हैं कि , ‘‘अभी एक फैशन हो गया है- आंबेडकर, आंबेडकर…। इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता।’’

BJP ने बताया क्यों लाए एक देश एक चुनाव बिल, कहा-कांग्रेस ने अनुच्छेद-356 के बार-बार दुरुपयोग किया था

नई दिल्ली राज्यसभा में नेता सदन और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जे पी नड्डा ने मंगलवार को कहा कि कांग्रेस की पूववर्ती सरकारों द्वारा अनुच्छेद-356 के बार-बार किए गए दुरुपयोग के इतिहास को देखते हुए सरकार ने ‘एक देश, एक चुनाव’ विधेयक लाने का फैसला किया है। ‘भारत के संविधान की 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा’ पर राज्यसभा में हो रही चर्चा के दूसरे दिन बहस को आगे बढ़ाते हुए नड्डा ने कांग्रेस पर संविधान की भावना को बदलने और उसे दोबारा लिखने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रमुख विपक्षी पार्टी से भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में काले अध्याय के रूप में दर्ज आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर इस साल 25 जून को आयोजित होने वाले ‘संविधान हत्या दिवस’ कार्यक्रम में प्रायश्चित स्वरूप शामिल होने का आह्वान किया। नड्डा ने कहा, ‘आज आप ‘एक देश, एक चुनाव’ के विरोध में खड़े हो रहे हैं। आपके कारण ही ‘एक देश, एक चुनाव’ लाना पड़ रहा है। क्योंकि 1952 से 1967 तक देश में एक साथ ही चुनाव होते थे। आपने (कांग्रेस) अनुच्छेद 356 के इस्तेमाल से राज्यों की चुनी हुई सरकारों को बार-बार गिराया और ऐसा करके आपने कई राज्यों में अलग-अलग चुनाव की स्थिति लाकर खड़ी कर दी।’ भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस की सरकारों ने अनुच्छेद 356 का 90 बार इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आठ बार, इंदिरा गांधी ने 50 बार, राजीव गांधी ने नौ बार और मनमोहन सिंह ने 10 बार अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा, ‘संविधान की 75 साल की गौरवशाली यात्रा में इन बातों का भी जिक्र होना चाहिए। (लोगों को) पता चलना चाहिए कि आपने किस तरीके से चुनी हुई सरकारों को एक बार नहीं बारम्बार गिराया और देश को मुसीबत में डालने का काम किया।’ कांग्रेस की सरकारों द्वारा किए गए संविधान संशोधनों का उल्लेख करते हुए नेता सदन ने कहा कि क्या देश को कोई खतरा था कि देश पर आपातकाल थोपा गया। उन्होंने कहा, ‘नहीं… देश को खतरा नहीं था, कुर्सी को खतरा था। किस्सा कुर्सी का था, जिसके लिए पूरे देश को अंधकार में डाल दिया गया।’ नड्डा ने कहा कि कांग्रेस के सदस्य कहते हैं कि उनके नेताओं ने आपातकाल को एक गलती के रूप में स्वीकार कर लिया है, लिहाजा बार-बार इसका जिक्र नहीं किया जाना चाहिए। भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘आपातकाल के दौरान प्रजातंत्र का गला घोंटने का प्रयास हुआ। अगर आपके दिल में कहीं भी प्रायश्चित है तो मैं आह्वान करता हूं…और आपको समय से पहले बताता हूं… 25 जून 2025 को लोकतंत्र विरोधी दिवस कार्यक्रम में आप शामिल हों।’ उल्लेखनीय है कि पिछले साल सरकार ने 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में घोषित किया था। देश में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक की अवधि आपातकाल की अवधि थी, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने महत्त्वपूर्ण कार्यपालिका और विधायी परिवर्तन लागू करने के लिये संविधान में विशेष प्रावधानों का उपयोग किया था। नड्डा ने संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर का हवाला करते हुए कहा कि उन्होंने कहा है कि संविधान चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि संविधान को मानने वाले लोग खराब निकले तो निश्चित रूप से संविधान खराब सिद्ध होगा और दूसरी तरफ अगर संविधान को मानने वाले लोग अच्छे हुए तो संविधान अच्छा सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि वह चाहे आपातकाल हो या अनुच्छेद 370 हो, कांग्रेस ने संविधान से छेड़छाड़ का कोई मौका नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के आदेश से संसदीय प्रक्रियाओं को नजरअंदाज करते हुए पिछले दरवाजे से 35 ए लाया गया। उन्होंने कहा कि इसका नतीजा यह निकला कि भारतीय संसद द्वारा पारित 106 कानून जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं हो सके और इनमें पोक्सो, मानवाधिकार के खिलाफ अत्याचार और महिलाओं की संपत्ति के अधिकार जैसे कानून थे। उन्होंने कहा कि पश्चिमी पाकिस्तान से आए हुए मनमोहन सिंह, इन्द्र कुमार गुजराल भारत के प्रधानमंत्री बने तथा लालकृष्ण आडवाणी भी पश्चिमी पाकिस्तान से आए थे और वह भारत के उप-प्रधानमंत्री बने। उन्होंने कहा, ‘लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पीओके से आया हुआ व्यक्ति जम्मू कश्मीर की विधानसभा का सदस्य नहीं बन सकता था, वह पंचायत का चुनाव नहीं लड़ सकता था। यहां तक कि उस व्यक्ति को वोट देने की भी अनु​मति नहीं थी।’ नड्डा ने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सूझबूझ के कारण जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बन गया।’ भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस ने संविधान की प्रस्तावना के साथ भी छेड़ छाड़ कर दी और उसमें पंथनिरपेक्ष और समाजवाद शब्द जोड़ दिए। उन्होंने कहा, ‘अगर आपने (कांग्रेस) संविधान पढ़ा होता और संविधान निर्माताओं की आकांक्षाओं को समझा होता तो आपने (इन शब्दो को) नहीं जोड़ा होता। क्योंकि डॉ. आंबेडकर ने लिखा है कि भारत का संविधान पूरी तरह पंथनिरपेक्ष है, इसमें ‘सेक्युलर’ शब्द जोड़ने की कोई जरूरत नहीं है।’ नड्डा ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए संविधान निर्माताओं को याद किया और कहा कि इसके लिए देश हमेशा उनका कृतज्ञ रहेगा।

एक देश एक चुनाव’: अल्ट्रा वायरस, संविधान पर हमला, देश को ‘तानाशाही’ की तरफ ले जाने वाला कदम है: विपक्ष

नई दिल्ली लोकसभा में मंगलवार को ‘एक देश, एक चुनाव’ संविधान संशोधन विधेयक पेश कर दिया गया। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस विधेयक को सदन में पेश किया। विपक्ष ने विधेयक का जमकर विरोध किया। कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने मंगलवार को लोकसभा में एक साथ चुनाव कराने से संबंधित विधेयक का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि यह संविधान के मूल ढांचे पर हमला है तथा देश को ‘तानाशाही’ की तरफ ले जाने वाला कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा जाना चाहिए। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मंगलवार को देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रावधान वाले ‘संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024’ और उससे जुड़े ‘संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024’ को पुर:स्थापित करने के लिए संसद के निचले सदन में रखा। विधेयक का विरोध करते हुए कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि संविधान के बुनियादी पहलू हैं जिसमें संशोधन इस सदन के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक बुनियादी ढांचे पर हमला है और इस सदन के विधायी अधिकार क्षेत्र से परे है। न्होंने कहा कि भारत राज्यों का संघ है और ऐसे में केंद्रीकरण का यह प्रयास पूरी तरह संविधान विरोधी है। उन्होंने आग्रह किया कि इस विधेयक को वापस लिया जाना चाहिए। क्या बोली समाजवादी पार्टी विधेयक का विरोध करते हुए समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव ने कहा कि दो दिन पहले सत्तापक्ष ने संविधान पर चर्चा के दौरान बड़ी-बड़ी कसमें खाईं और अब दो ही दिन के अंदर संविधान के मूल ढांचे और संघीय ढांचे को खत्म करने के लिए यह विधेयक लाए हैं। उन्होंने दावा किया, ‘यह संविधान की मूल भावना को खत्म करने का प्रयास है और तानाशाही की तरफ ले जाने वाला कदम है।’ समाजवादी पार्टी सदस्य ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग दो राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ नहीं करा पाते हैं, वे पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने की बात कर रहे हैं। यादव ने कहा कि इस विधेयक को वापस लिया जाना चाहिए। टीएमसी ने बताया अल्ट्रा वायरस तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि यह प्रस्तावित विधेयक संविधान के मूल ढांचे पर हमला है और यह ‘अल्टा वायरस’ है। उन्होंने दावा किया कि इस विधेयक को स्वीकार नहीं किया जा सकता। बनर्जी ने कहा कि राज्य विधानसभाएं केंद्र और संसद के अधीनस्थ नहीं होती हैं, यह बात समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से संसद को कानून बनाने का अधिकार है, उसी तरह विधानसभाओं को भी कानून बनाने का अधिकार है। तृणमूल कांग्रेस सांसद ने कहा कि यह राज्य विधानसभाओं की स्वायत्ता छीनने का प्रयास है। उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि कोई भी दल हमेशा सत्ता में नहीं रहेगा, एक दिन सत्ता बदल जाएगी। बनर्जी ने कहा, ‘‘यह चुनावी सुधार नहीं है, एक व्यक्ति की महत्वाकांक्षाओं और सपनों को पूरा करने के लिए लाया गया है।’’ डीएमके ने विधेयक को अनुमति देने पर उठाए सवाल डीएमके नेता टीआर बालू ने सवाल किया कि जब सरकार के पास दो- तिहाई बहुमत नहीं है तो फिर इस विधेयक को लाने की अनुमति आपने कैसे दी? इस पर बिरला ने कहा, ‘मैं अनुमति नहीं देता, सदन अनुमति देता है।’ बालू ने कहा, ‘मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि इस विधेयक को जेपीसी के पास भेजा जाए और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद इसे सदन में लाया जाए।’ आईयूएमएल के नेता ईटी मोहम्मद बशीर ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र, संविधान और संघवाद पर हमले का प्रयास है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अनिल देसाई ने भी विधेयक का विरोध किया और कहा कि यह विधेयक संघवाद पर सीधा हमला है और राज्यों के अस्तित्व को कमतर करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के कामकाज की भी जांच-परख होनी चाहिए और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में जो हुआ, उसे देखते हुए यह जरूरी हो गया है। लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने कहा कि ये दोनों विधेयक संविधान और नागरिकों के वोट देने के अधिकार पर आक्रमण हैं। उनका कहना था कि निर्वाचन आयोग की सीमाएं अनुच्छेद 324 में निर्धारित हैं और अब उसे बेतहाशा ताकत दी जा रही है। गोगोई ने कहा कि इस विधेयक से निर्वाचन आयोग को असंवैधानिक ताकत मिलेगी।

बैग का जवाब बैग से दिया, प्रियंका गांधी ने अब उठाया बांग्लादेश के हिंदुओं के लिए झोला

नई दिल्ली कांग्रेस की वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी सोमवार को संसद में फिलिस्तीन लिखा बैग लेकर पहुंची थीं। इसे लेकर उनकी भाजपा सांसदों ने आलोचना की थी और कहा था कि वह मुस्लिम तुष्टीकरण में जुटी हैं। लेकिन बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को लेकर वह चुप रहती हैं। माना जा रहा था कि प्रियंका गांधी इस बैग से घिर सकती हैं और इसकी तारीफ पाकिस्तान तक में हुई तो भाजपा और हमलावर हुई थी। लेकिन अब प्रियंका गांधी ने खुद ही बैग का जवाब बैग से दिया है। आज वह एक ऐसा बैग लेकर संसद पहुंचीं, जिसमें लिखा था- ‘बांग्लादेश के हिंदुओं और ईसाइयों के साथ खड़े हों।’ इस बैग को लेकर माना जा रहा है कि प्रियंका गांधी और कांग्रेस ने भाजपा का जवाब देने की कोशिश की है। भाजपा लगातार आरोप लगाती रही है कि कांग्रेस मुस्लिम तुष्टीकरण करती है, जबकि हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार पर वह चुप रहती है। विपक्ष के सांसदों ने परिसर के बाहर मंगलवार को प्रदर्शन किया। इन सांसदों ने सरकार से मांग की कि वे पड़ोसी मुल्क में हिंदुओं और ईसाइयों के खिलाफ किए जा रहे अत्याचारों को लेकर कदम उठाएं। इन लोगों ने बांग्लादेश के हिंदुओं का साथ दें लिखी तख्यियां हाथों में ले रखे थे और वह सरकार से ऐक्शन की मांग को लेकर नारे लगा रहे थे। प्रियंका गांधी के साथ कांग्रेस के सांसद प्रियंका गांधी के अलावा कांग्रेस कई सांसद ‘बांग्लादेश के हिंदुओं और ईसाइयों के साथ खड़े हों’ लिखे बैग लेकर आए थे। माना जा रहा है कि तुष्टीकरण के आरोप का जवाब देने के लिए प्रियंका गांधी और कांग्रेस ने यह सवाल उठाया है। खासतौर पर मुस्लिमों और फिलिस्तीन का ही मुद्दा उठाने पर उन्हें घेरा जा रहा था। ऐसी स्थिति में कांग्रेस का यह कदम संदेश देने के लिए है कि हम सभी के साथ हैं और कोई भेदभाव की राजनीति नहीं करते। यदि कांग्रेस फिलिस्तीन का मुद्दा उठाती है तो वह बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार का भी मुद्दा मसला उठाती है।

मुझे आठ दिन पहले राज्यसभा की सदस्यता की पेशकश की गई थी, जिसे मैंने अस्वीकार कर दिया: छगन भुजबल

मुंबई महाराष्ट्र में नई महायुति सरकार में शामिल नहीं किए जाने से निराश राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने दावा किया है कि आठ दिन पहले उन्हें राज्यसभा की सदस्यता की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया। नासिक जिले के येवला से विधायक भुजबल ने नागपुर में संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने राज्यसभा सीट के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया क्योंकि यह उनके विधानसभा क्षेत्र के साथ विश्वासघात होगा, जहां से उन्होंने पिछले महीने राज्य के चुनाव में जीत हासिल की थी। राज्य के पूर्व मंत्री ने कहा, ‘जब मैं इस वर्ष की शुरुआत में राज्यसभा में जाना चाहता था, तो मुझसे कहा गया कि मुझे विधानसभा चुनाव लड़ना चाहिए। मुझे आठ दिन पहले राज्यसभा की सदस्यता की पेशकश की गई थी, जिसे मैंने अस्वीकार कर दिया। मैंने कहा कि मैं एक या दो साल बाद राज्यसभा के विकल्प पर विचार कर सकता हूं, लेकिन तुरंत नहीं।’ भुजबल ने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने के बाद उन्होंने राकांपा प्रमुख और उपमुख्यमंत्री अजित पवार से बात नहीं की है। प्रमुख ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) नेता भुजबल ने दावा किया कि उन्हें मंत्रिमंडल से इसलिए बाहर रखा गया क्योंकि उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे का विरोध किया था, जो नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘जब मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने की मांग कर रहे थे तो मैंने अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय के पक्ष में आवाज उठाई थी। लाडकी बहिन योजना और ओबीसी ने महायुति को चुनाव जीतने में मदद की।’ सोमवार को नागपुर में विधानसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित होने के बाद नासिक के लिए रवाना हुए भुजबल से जब उनके भविष्य के कदम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘देखते हैं। जहां नहीं चैना, वहां नहीं रहना।’ पिछली महायुति सरकार में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रहे भुजबल ने कहा कि नए मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए जाने से वह निराश हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं एक साधारण राजनीतिक कार्यकर्ता हूं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मुझे दरकिनार किया जाता है या पुरस्कृत किया जाता है।’ राकांपा नेता ने कहा, ‘मंत्रिपद आते-जाते रहते हैं, लेकिन मुझे मिटाया नहीं किया जा सकता।’ देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में रविवार को महायुति के सहयोगी दलों – भाजपा (भारतीय जनता पार्टी), शिवसेना और राकांपा के कुल 39 विधायकों ने शपथ ली। मंत्रिमंडल से 10 पूर्व मंत्रियों को हटा दिया गया और 16 नए चेहरे शामिल किए गए। पूर्व मंत्री राकांपा के भुजबल और दिलीप वाल्से पाटिल तथा भाजपा के सुधीर मुनगंटीवार एवं विजयकुमार गावित कुछ प्रमुख नेता हैं, जो मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए गए।

राजस्थान के सांसद राजकुमार रोत ने शीतकालीन सत्र के दौरान गृहमंत्री अमित शाह से की मुलाकात

जयपुर  लोकसभा के शीतकालीन सत्र के बीच बांसवाड़ा सांसद राजकुमार रोत की एक तस्वीर ने सियासत का पारा चढ़ा दिया है। इस दौरान बांसवाड़ा सांसद ने विभिन्न मुद्दों को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। उन्होंने साल 2020 के दंगे के केस वापस लेने, भील प्रदेश के गठन समेत कई मुद्दे उठाए। इस मुलाकात को लेकर बांसवाड़ा सांसद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केंद्रीय गृहमंत्री के साथ मुलाकात की तस्वीर साझा की है। साल 2020 के दंगों पर बातचीत बांसवाड़ा सांसद राजकुमार रोत ने 2020 में डूंगरपुर जिले में नेशनल हाइवे 48 पर कांकरी डूंगरी दंगों का मुद्दा उठाया। इसको लेकर रोत ने दंगे के मामले को वापस लेने के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी की मांग उठाई। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के अधीन केस में राहत मिल गई है, लेकिन नेशनल हाइवे के केस अभी भी केंद्र सरकार के पास लंबित हैं। सांसद रोत ने यह भी बताया कि झारखंड और छत्तीसगढ़ राज्यों में जमीन अधिग्रहण के दौरान आदिवासियों को बेवजह परेशान किया जा रहा है और अतिरिक्त आर्मी लगाकर अत्याचार किया जा रहा है। अमित शाह से अलग से आदिवासी रेजीमेंट बनाने की मांग केंद्रीय गृहमंत्री से मुलाकात के दौरान सांसद ने आदिवासी रेजिमेंट की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि जाट और सिख रेजिमेंट की तरह आदिवासी रेजिमेंट भी शुरु की जाए। इस पर गृहमंत्री ने सकारात्मक विचार करने की बात कही। बीएपी के सांसद राजकुमार रोत की गृह मंत्री अमित शाह से पार्लियामेंट ऑफिस में तीन मिनट की मुलाकात हुई। इसमें उन्होंने आदिवासी क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। रोत ने भील प्रदेश को लेकर फिर उठाई मांग अमित शाह से मुलाकात के दौरान बांसवाड़ा सांसद ने एक बार फिर भील प्रदेश के गठन का मुद्दा उठाया। बता दें कि लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद संसद में शपथ लेने के दौरान भी बांसवाड़ा सांसद राजकुमार रोत ने भील प्रदेश की मांग की थी। इसके अलावा राजस्थान उपचुनाव में चैरासी से विधायक बने अनिल कटारा ने भी शपथ के बाद कहा कि उनकी पार्टी की भील प्रदेश की मांग हमेशा कायम रहेगी।

फडणवीस के मंत्रिमंडल में पीएम मोदी के विजन की झलक, 19 नए चेहरों को शामिल कर दिए बड़ा संदेश

मुंबई महाराष्ट्र में आज देवेंद्र फडणवीस की सरकार का कैबिनेट विस्तार हो गया है। बीते दिन ही नागपुर में हुए शपथ ग्रहण समारोह में 39 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। वही जानकारी के अनुसार, गृह विभाग बीजेपी के पास रहेगा, जबकि शिक्षा, सिंचाई और राजस्व विभाग भी बीजेपी को सौंपे गए हैं। शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने आगे की योजनाओं पर चर्चा की और बताया कि मंत्रियों का कार्यकाल ढाई साल का होगा। मंत्रियों के विभागों पर बनी सहमति शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि छह राज्य मंत्रियों समेत सभी 39 मंत्रियों के विभाग अगले दो दिनों में तय कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि विभागों के बंटवारे पर सहमति बन चुकी है और जल्द इसकी घोषणा की जाएगी। कुल 39 मंत्रियों को अपनी टीम में शामिल किया है। इसमें 19 बीजेपी, 11 शिवसेना और 9 विधायक मंत्री बने। आशा के अनुरुप फडणवीस अपनी दूसरे कार्यकाल की टीम में तमाद न चेहरों को बाहर करने के कामयाब रहे है, जिनकी छवि ठीक नहीं मानी जा रही थी। फडणवीस द्वारा मंत्रिमंडल में 19 फ्रेश चेहरों को शामिल करने के फैसले को पीएम मोदी के हलिया संबोधन से जोड़कर देखा जा रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में संविधान पर बहस के दौरान 11 संकल्प का जिक्र किया था। इसमें करप्शन रोकने का मुद्दा भी शामिल था। महाराष्ट्र सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार पर नजर दौड़ाएं तो फडणवीस ने शिवसेना और एनसीपी के दागी नेताओं की छुट्टी कर दी। उन्होंने बीजेपी से कई नए चेहरों को मौका दिया है। भारी पड़े भ्रष्टाचार के आरोप! महायुति सरकार में 25 मंत्रियों में 12 को जगह नहीं मिली है। इनमें कई बड़े नाम हैं। सबसे चौंकाने वाला नाम छगन भुजबल का है। इसके बाद दिलीप वलसे पाटिल है। शिवसेना के खेमे में देखें तो अब्दुल सत्तार, तानाजी सावंत और दीपक केसरकर मंत्री नहीं बन पाए, हालांकि संजय राठोड जगह पानेमें सफल रहे। ऐसा माना जा रहा है फडणवीस इन नेताओं के ऊपर लगे आरोपों के साथ इनके काम से खुश नहीं थे। इससे पहले चुनावों में जब अजित पवार ने जब नवाब मलिक को टिकट दिया था तो उन्होंने दूरी बनाते हुए साफ कर दिया था बीजेपी प्रचार नहीं करेगी। फडणवीस ने कुल 12 मंत्रियों को ड्रॉप किया है। मंत्रियों के काम का होगा ऑडिट फडणवीस ने मंत्रिमंडल के विस्तार के साथ साफ कर दिया है कि सभी मंत्रियों के प्रदर्शन का ऑडिट किया जाएगा। इसी के बाद वे सभी कन्टीन्यू कर पाएंगे। ऐसे में फडणवीस ने मंत्रियों पर बेहतर परफॉर्म करने का दबाव बढ़ा दिया है। यह ऑडिट 2.5 साल पूरे होने पर होगा। यह भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ही फॉर्मूला है। जिसे फडणवीस ने लागू किया है। पीएम मोदी गुजरात में बतौर सीएम और अब पीएम के तौर पर अपनी टीम में परफॉरमेंस पर फोकस किए हुए हैं। मंत्रिमंडल विस्तार में जिस तरह से कई बड़े नेताओं की छुट्‌टी हुई है उसके बाद चर्चा है कि फडणवीस ने सफाई शुरू कर दी है। कैसी है फडणवीस की नई टीम? महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री फडणवीस की टीम में दो डिप्टी सीएम के अलावा 36 मंत्री हैं। इनमें 19 नए चेहरे हैं। जो पहली बार मंत्री बने हैं। इनमें सात विधायक बीजेपी, छह शिवसेना और पांच एनसीपी से हैं। फडणवीस ने साफ किया है कि ढाई साल के काम के आंकलन के बाद आगे मंत्री रहने पर फैसला होगा। ऐसे में फडणवीस की टीम में अब 2027 से पहले बदलाव की उम्मीद नहीं है। राजनीतिक हलकों में प्रधानमंत्री के संदेश के अनुसार जिस तरीके से फडणवीस ने अपनी टीम में बड़बोले और दागी नेताओं से दूरी बनाई है। उससे उन्होंने संदेश दिए हैं कि साफ टीम लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं। विधानसभा सत्र की तैयारियां विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पहले हुए इस विस्तार में फडणवीस, अजित पवार, और एकनाथ शिंदे ने साझा रूप से प्रेस से बातचीत की। फडणवीस ने बताया कि सत्र में 20 बिल पेश किए जाएंगे, जो राज्य के विकास और जनकल्याण के लिए महत्वपूर्ण होंगे। विपक्ष का बहिष्कार और EVM पर विवाद विपक्षी दलों ने सत्र के पहले दिन की हाई टी पार्टी का बहिष्कार किया। विपक्ष ने EVM के दुरुपयोग का आरोप लगाया। इस पर फडणवीस ने जवाब दिया कि EVM का मतलब है “हर वोट महाराष्ट्र के लिए”। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी सरकार जनता के हित में काम कर रही है और अगले चुनावों में बड़ी जीत हासिल करेगी। डिप्टी सीएम शिंदे का बयान डिप्टी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मंत्रियों के लिए रोटेशनल फॉर्मूला पर कहा कि हर मंत्री को ढाई साल का कार्यकाल मिलेगा। उन्होंने साफ किया, “या तो अच्छा काम करें, या फिर पद छोड़ दें।” इस नियम के तहत अधिक विधायकों को अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिलेगा और पार्टी में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet