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बैठक के दौरान पार्टी अध्यक्ष खड़गे ने दो-टूक कहा अब जवाबदेही तय की जाएगी तथा कठोर निर्णय लिए जाएंगे

नई दिल्ली महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद अब बीते दिन ही नई दिल्ली में कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक हुई। जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष ने नेताओं को फटकार लगाई। इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अब जवाबदेही तय की जाएगी और सख्त फैसले लिए जाएंगे। इतना ही नहीं उन्होंने ईवीएम पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर समझौता हो रहा है। कांग्रेस इस मुद्दे पर जल्द ही देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। बैठक में खड़गे ने कहा कि ईवीएम ने चुनावी प्रक्रिया को संदिग्ध बना दिया है, और स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कराना निर्वाचन आयोग का कर्तव्य है। बैठक में नेताओं ने महाराष्ट्र और हरियाणा में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के कारणों पर चर्चा की। कई नेताओं ने चुनाव में गड़बड़ियों का आरोप लगाया। ‘हमें कठोर निर्णय लेने होंगे’ पार्टी प्रमुख खड़गे ने कहा कि चुनावी हार के मद्देनजर “कठोर निर्णय” लेने होंगे और जवाबदेही तय करनी होगी. उन्होंने कहा कि नेताओं को चुनाव परिणामों से सबक लेना होगा. हालांकि, उन्होंने माना कि ईवीएम ने चुनावी प्रक्रिया को “संदिग्ध” बना दिया है. कांग्रेस प्रमुख ने यह भी पूछा कि पार्टी के राज्य नेता विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय मुद्दों और राष्ट्रीय नेताओं पर कब तक निर्भर रहेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस प्रतिरोध का संगठन है और पार्टी नेताओं को इस पर भरोसा रखना चाहिए. करीब साढ़े चार घंटे तक चली मैराथन बैठक में 81 नेताओं ने हिस्सा लिया. राहुल बोले- एक्शन लीजिए वहीं राहुल गांधी ने खड़गे से पार्टी के खराब परिणामों के मद्देनजर “सख्ती से काम लेने” का आग्रह किया. पीटीआई के मुताबिक, जब चुनावों को लेकर जवाबदेही तय करने की बात हो रही थी तो राहुल गांधी ने कहा, ‘‘खरगे जी, एक्शन लीजिए.’’ आपसी बयानबाजी से हुआ नुकसान- खड़गे खड़गे ने कांग्रेस के भीतर कलह पर निशाना साधते हुए कहा, “सबसे अहम बात जो मैं बार-बार कहता हूं कि आपसी एकता की कमी और एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी हमें काफी नुकसान पहुंचाती है. जब तक हम एक होकर चुनाव नहीं लड़ेंगे, आपस में एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी का सिलसिला बंद नहीं करेंगे, तो अपने विरोधियों को राजनीतिक शिकस्त कैसे दे सकेंगे?” उन्होंने कहा कि पार्टी को अपने प्रतिद्वंद्वियों के “प्रचार और गलत सूचना” का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए एक रणनीति विकसित करनी होगी.  खड़गे ने कहा, “यह महत्वपूर्ण है कि हम अनुशासन का सख्ती से पालन करें… पार्टी के पास अनुशासन का हथियार भी है. लेकिन हम अपने कार्यकर्ताओं को किसी बंधन में नहीं डालना चाहते.” महाराष्ट्र चुनाव के बारे में उन्होंने कहा, “छह महीने पहले लोकसभा चुनावों में माहौल हमारे पक्ष में था. लेकिन केवल माहौल पक्ष में होने भर से जीत की गारंटी नहीं मिल जाती/ हमें माहौल को नतीजों में बदलना सीखना होगा. क्या कारण है कि हम माहौल का फायदा नहीं उठा पाते?” उन्होंने जोर देते हुए कहा, ‘‘हमें पर्याप्त मेहनत करने के साथ समयबद्ध तरीके से रणनीति बनानी होगी. हमें अपने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना होगा। हमें मतदाता सूची बनाने से लेकर वोट की गिनती तक रात-दिन सजग, सचेत और सावधान रहना होगा। हमारी तैयारी आरंभ से मतगणना तक ऐसी होनी चाहिए कि हमारे कार्यकर्ता और ‘सिस्टम’ मुस्तैदी से काम करें.’ EVM के पक्ष में चिदंबरम विचार-विमर्श के दौरान, कुछ नेताओं ने ईवीएम के खिलाफ पार्टी प्रमुख के रुख के खिलाफ जाने वालों की आलोचना की और कहा कि इससे नेतृत्व और उठाए गए मुद्दों की छवि खराब होती है. खड़गे द्वारा ईवीएम और चुनाव प्रक्रिया पर संदेह जताए जाने के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने ईवीएम के पक्ष में बात की. पार्टी महासचिव संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पर चिंताओं को लेकर आंदोलन और रैलियां होंगी और इंडिया ब्लॉक के दल इसमें शामिल होंगे.पार्टी महासचिव जयराम रमेश और पवन खेड़ा के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पार्टी महासचिव, संगठन के सी वेणुगोपाल ने कहा कि सीडब्ल्यूसी ने चुनावी प्रदर्शन और संगठनात्मक मामलों पर विचार करने के लिए आंतरिक समितियों का गठन करने का फैसला किया है. चुनावी परिणामों पर जताई हैरानी  उन्होंने कहा कि हरियाणा के बाद, पैनल के सदस्य महाराष्ट्र का भी दौरा करेंगे और वहां के नेताओं और कार्यकर्ताओं से बात करेंगे और नुकसान का आकलन करेंगे. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों के बारे में, वेणुगोपाल ने कहा कि राज्य में चुनावी नतीजे “सामान्य समझ से परे हैं और यह लक्षित हेरफेर का एक स्पष्ट मामला प्रतीत होता है.” सीडब्ल्यूसी के प्रस्ताव में कहा गया है कि हरियाणा में कांग्रेस का प्रदर्शन सभी अपेक्षाओं के विपरीत रहा है. प्रस्ताव में कहा गया कि “चुनावी गड़बड़ियां हुई हैं, जिन्होंने राज्य में परिणाम को प्रभावित किया है, जिन्हें अनदेखा किया गया है.” सीडब्ल्यूसी ने “स्वीकार किया” कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और उसके महा विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन का प्रदर्शन हैरान करने वाला रहा है. कांग्रेस कार्यसमिति ने कहा, “पार्टी को अपने नैरेटिव को मजबूत करते रहना चाहिए. इसमें पूर्ण सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए जाति जनगणना, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और ओबीसी के लिए आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा को हटाना, राजनीतिक संरक्षण के माध्यम से अर्थव्यवस्था में बढ़ते एकाधिकार पर नियंत्रण और निरंतर मूल्य वृद्धि और बढ़ती बेरोजगारी शामिल है.” राष्ट्रीय आंदोलन की तैयारी कार्यसमिति ने फैसला किया कि चुनावी प्रक्रिया में हो रही अनियमितताओं को राष्ट्रीय आंदोलन का मुद्दा बनाया जाएगा। कांग्रेस का कहना है कि वह इस मुद्दे पर ‘इंडिया’ गठबंधन के सहयोगी दलों को भी साथ लेगी। जवाबदेही और सख्त फैसले खड़गे ने कहा कि हार से सबक लेते हुए कठोर निर्णय लेने होंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी के नेताओं को सिर्फ राष्ट्रीय मुद्दों और नेताओं पर निर्भर रहने के बजाय जमीनी स्तर पर काम करना होगा। अनुशासन और एकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि आपसी कलह और बयानबाजी से पार्टी को नुकसान हो रहा है। राहुल गांधी का आग्रह राहुल गांधी ने खड़गे से खराब प्रदर्शन के मद्देनजर सख्त कार्रवाई की अपील करते हुए कहा, “खड़गे जी, अब एक्शन लीजिए।” चिदंबरम का ईवीएम समर्थन बैठक के दौरान वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने ईवीएम के खिलाफ खड़गे के बयान से असहमति जताई और इसका … Read more

महाराष्ट्र में फरवरी में बीएमसी समेत 14 नगर निगमों में चुनाव, अलग होने पर निकाय चुनाव में अलग-थलग पड़ सकते हैं उद्धव

मुंबई  शिवसेना (यूबीटी) महाविकास अघाड़ी से बाहर नहीं जाएगी। पार्टी के सांसद संजय राउत ने इस बयान से यूबीटी के कई नेता नाराज हैं। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद शिवसेना (यूबीटी) के नेता अंबादास दानवे ने उद्धव ठाकरे से महाविकास अघाड़ी से निकलने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि बीएमसी समेत निकाय चुनाव यूबीटी को अकेले लड़ना चाहिए। अब इस मुद्दे पर उद्धव ठाकरे की पार्टी में मतभेद सामने आ गए हैं। संजय राउत ने कहा कि विधानसभा की हार की समीक्षा अघाड़ी की तीनों पार्टियां मिलकर करेंगी। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव से जुड़े फैसले बाद में लिए जाएंगे। पार्टी के कई नेताओं का कहना है कि अकेले चुनाव लड़ने से उद्धव ठाकरे राजनीति में अलग-थलग पड़ सकते हैं। ऐसे में नया चुनावी प्रयोग करना जोखिम भरा हो सकता है। अंबादास दानवे ने की थी एमवीए से एग्जिट करने की बात विधानसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) को सिर्फ 20 सीटें मिलीं। मुंबई में भी पार्टी को तगड़ा नुकसान हुआ। इस हार पर उद्धव ठाकरे तो चुप रहे, मगर उनकी पार्टी के कई नेताओं ने कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। एमएलसी अंबादास दानवे ने बताया कि जीत की उम्मीद में कांग्रेस नेताओं ने प्रचार में कोताही की। वह मंत्री बनने के लिए सूट-बूट सिलाने में व्यस्त रहे। रणनीतिक तौर पर सीएम कैंडिडेट घोषित नहीं कर कांग्रेस ने अघाड़ी का नुकसान किया। उन्होंने कहा कि अब निकाय चुनाव में पार्टी को एमवीए से अलग चुनाव लड़ना चाहिए। राज्य की सभी 288 सीटों पर खड़ा करने की जरूरत है। उनके इस बयान के बाद संजय राउत ने सिरे से इस सलाह को खारिज कर दिया। माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे अभी जल्दीबाजी में नहीं हैं बल्कि वह निकाय चुनाव का इंतजार कर रहे हैं। अघाड़ी से बाहर निकले तो नहीं मिलेगा दलित-मुस्लिम वोट उद्धव ठाकरे महाविकास अघाड़ी के साथ लोकसभा चुनाव भी लड़े थे और उन्हें 9 सीटों पर जीत मिली थी। पार्टी में बंटवारे के बाद यह जीत बड़ी थी। अघाड़ी के साथ होने के कारण उसे परंपरागत मराठा वोटरों के अलावा दलित और मुसलमानों का वोट मिला था। विधानसभा चुनाव में भी मुस्लिम वोटरों ने खुलकर शिवसेना को वोट किया। फरवरी में मुंबई समेत राज्य की 14 म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के चुनाव होने हैं। अगले तीन महीनों में राजनीति हालात बदल सकते हैं और महायुति की लहर भी सुस्त पड़ सकती है। अगर यूबीटी अघाड़ी से अलग होगी तो पिछले दो चुनाव में वोट देने वाले समर्थकों के बीच गलत मैसेज जा सकता है। गठबंधन से बाहर निकलने का एक मायने और निकल सकता है कि उद्धव ठाकरे एक बार फिर हार्ड हिंदुत्व की राह पर चल पड़े हैं। सिर्फ उद्धव सेना नहीं हारी, अघाड़ी में सब हारे हैं एक नेता ने बताया कि अघाड़ी में जीता कोई नहीं है, मगर हारे सब हैं। विधानसभा चुनाव में न सिर्फ उद्धव सेना बल्कि पूरी महाविकास अघाड़ी को नुकसान हुआ है। शिवसेना यूबीटी सबसे ज्यादा 20 सीटें जीतने में सफल रही है, मगर कांग्रेस 16 और शरद पवार की एनसीपी 10 सीटों पर सिमटी है। निकाय चुनाव में जब सीटों के बंटवारे पर बात होगी, तब उद्धव सेना की पोजिशन मजबूत रहेगी। अघाड़ी से बाहर निकलते ही उद्धव की शिवसेना के वोट और कम हो जाएंगे। जहां तक बीएमसी चुनाव का सवाल है, उद्धव सेना का परफॉर्मेंस कांग्रेस और एनसीपी से बेहतर रहा है। एक्सपर्ट मानते हैं कि उद्धव की नजर सिर्फ निकाय चुनाव पर नहीं है, बल्कि वह विधानसभा में विपक्ष की हैसियत को अपने पास रखना चाहते हैं।

दिल्ली चुनाव के लिए कांग्रेस की रणनीति, हम 70 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे और जीत के बाद ही हमारे नेता का चुनाव होगा

नई दिल्ली हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड के विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद अब दिल्ली में चुनावी मैदान सजने लगा है. यहां सियासी बिसात बिछने लगी है और इसी के साथ दिल्ली की सत्ता किसके हाथ होगी इस पर भी चर्चाओं के बाजार गर्म होने लगे हैं. इसी बीच दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने पार्टी के मुख्यमंत्री चेहरे और गठबंधन को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा चुनाव के बाद ही अपने सीएम चेहरे का ऐलान करती है और इस बार भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी. दिल्ली के रण में अकेले उतरेगी कांग्रेस देवेंद्र यादव ने स्पष्ट किया, “हम कभी पहले से कुछ घोषित नहीं करते. हम 70 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे और जीत के बाद ही हमारे नेता का चुनाव होगा. यही प्रक्रिया दिल्ली में भी अपनाई जाएगी.” उन्होंने कहा कि इस समय कांग्रेस का किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं है. उन्होंने दोहराया कि “हमारा किसी से गठबंधन नहीं है, हम अकेले ही चुनाव लड़ेंगे.” दिल्ली में कांग्रेस का चुनावी रुख देवेंद्र यादव ने दिल्ली में कांग्रेस की रणनीति और चुनावी तैयारी पर भी चर्चा की. उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं को जीत के लिए पूरी मेहनत करने की बात कही और भरोसा जताया कि कांग्रेस दिल्ली के लोगों के समर्थन से अच्छी जीत हासिल करेगी. यह बयान ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और विपक्षी दलों के बीच संभावित गठबंधनों की चर्चा हो रही है.

संजय राउत ने महायुति और केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला, कहा- ‘EVM का मंदिर बने, मोदी-शाह की मूर्तियां लगें’

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को प्रचंड बहुमत मिलने के बाद सियासी दल बौखलाए हुए हैं। विपक्ष एमवीए की हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ रहा है। इसी बीच उद्धव ठाकरे की शिवसेना के नेता संजय राउत ने महायुति और केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला है। उनका कहना है कि ईवीएम का एक मंदिर बनना चाहिए और एक तरफ पीएम मोदी और दूसरी तरफ अमित शाह की मूर्तियां होनी चाहिए।   यह ईवीएम का कमाल संजय राउत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ”महाराष्ट्र में महायुति की जीत के बाद से सरकार के सभी फैसले राज्य के बजाय दिल्ली में लिए जाएंगे।” राउत ने एक बार फिर ईवीएम पर संदेह जताते हुए दावा किया कि गठबंधन ”ईवीएम के कमाल” की वजह से खुश है। उन्होंने कहा, ”आजकल उनके चेहरों पर काफी खुशी है, लोकसभा चुनाव के बाद उनके चेहरों की चमक गायब हो गई थी, जो अब लौट आई है, यह ईवीएम का कमाल है। ईवीएम का एक मंदिर बनना चाहिए, इसमें तीन मूर्ति होनी चाहिए। एक तरफ पीएम और दूसरी तरफ अमित शाह और बीच में ईवीएम।” महाराष्ट्र के फैसले दिल्ली में लिए जाएंगे- राउत राउत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “गर्व, जो अब नहीं रहा। एकनाथ शिंदे और अजित पवार को अपने मुद्दे रखने के लिए बार-बार दिल्ली आना पड़ेगा। भले ही वे अलग-अलग पार्टियों से हैं, लेकिन उनका हाईकमान दिल्ली में है, मोदी और शाह उनके हाईकमान हैं।” उन्हें (एकनाथ शिंदे और अजित पवार) महाराष्ट्र में जो कुछ भी करवाना है, उसे दिल्ली से मंजूरी लेनी होगी, कल भी वे (दिल्ली में) मिले थे। तो अब महाराष्ट्र में बैठक कर वे क्या करेंगे? इसलिए मोदी और शाह जो भी आदेश दे रहे हैं, उन्हें सुनना होगा।” आत्मसम्मान जैसी कोई चीज नहीं बची उन्होंने आगे देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा नेताओं की राजनीतिक यात्रा काफी घटनापूर्ण रही है, क्योंकि वे मुख्यमंत्री से उपमुख्यमंत्री (डीसीएम) तक बदलते रहे हैं। “पहले भी देवेंद्र फडणवीस सीएम थे, वे डीसीएम बन गए, एकनाथ शिंदे उनसे काफी जूनियर थे। एकनाथ शिंदे ने फडणवीस के मंत्रिमंडल में भी काम किया है, अचानक फडणवीस शिंदे के मंत्रिमंडल में काम करने लगे। महाराष्ट्र में जिस तरह की राजनीति हो रही है, उसमें अब आत्मसम्मान जैसी कोई चीज नहीं बची है।”

भाजपा की नई रणनीति को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ी, नए मंत्रिमंडल से सीनियर नेताओं को बाहर किया जा सकता है

महाराष्ट्र महाराष्ट्र चुनाव में महायुति गठबंधन की जीत के बाद मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर ऐलान का इंतजार है। राज्य मंत्रिमंडल के गठन के लिए भी कोशिशें तेज हैं। इस बीच, भाजपा की नई रणनीति को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। सूत्रों की मानें तो महायुति के नए मंत्रिमंडल से सीनियर नेताओं को बाहर किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि युवा विधायकों को मौका देने की तैयारी है। बीजेपी के नेतृत्व वाली की सरकार में नई ऊर्जा भरने और भविष्य के चुनावों को ध्यान में रखते हुए इसे अहम माना जा रहा है। फिलहाल, पार्टी आलाकमान स्तर तक मुख्यमंत्री पद के नाम पर चर्चा चल रही है। इसके बाद देवेंद्र फडणवीस, अजित पवार और एकनाथ शिंदे अपनी-अपनी पार्टियों के कैबिनेट मंत्रियों के नाम आगे बढ़ाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा आलाकमान की ओर से तीनों नेताओं को एक रिपोर्ट सौंपी गई थी। इसमें बदलाव की जरूरत पर जोर दिया गया। हालांकि, लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन न हो पाने पर इस योजना को टाल दिया गया। सूत्रों ने बताया कि महाराष्ट्र कैबिनट से किन चेहरों को बाहर किया जाएगा, यह काफी हद तक तय किया जा चुका है। इसे देखते हुए ही कहा जा रहा है कि अगले मंत्रिमंडल में तीनों दलों से नए चेहरे शामिल होंगे। कुछ दिग्गजों को आराम दिया जाएगा। हालांकि, उन्हें गठबंधन या अपने-अपने दलों के लिए काम करते रहना होगा। ‘50 साल से कम आयु के विधायकों को मिलेगा मौका’ सूत्रों की मानें तो भाजपा 50 साल से कम आयु के विधायकों को मंत्री पद के लिए प्राथमिकता देना चाहती है। इसका मकसद युवा मतदाताओं को पार्टी की ओर से आकर्षित करना है। ऐसा करने से अगले चुनाव में मजबूत प्रदर्शन की संभवना बढ़ जाएगी। नए लोग पार्टी और गठबंधन से जुड़ने के लिए आगे आएंगे। यह जरूर है कि इस घटनाक्रम को लेकर सीनियर विधायकों में चिंता पैदा हो गई है। कई लोगों को अपना मंत्री पद खोने का डर सताने लगा है। हालांकि, यह बात भी निकलकर सामने आ रही कि युवा और अनुभवी चेहरों के साथ मंत्रिमंडल में संतुलन बैठाने का प्रयास किया जाएगा। अजित पवार पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के भी आज राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने की उम्मीद है, जहां सीएम पद पर अंतिम मुहर लग सकती है।

महायुति की अहम बैठक भी कैंसल, एकनाथ शिंदे गए गांव, विभागों के बंटवारे को लेकर फंसा पेच

मुंबई महाराष्ट्र में नई सरकार में विभागों को लेकर पेच फंसता नजर आ रहा है। इसके चलते महायुति की अहम बैठक भी कैंसल हो गई है। इसके बाद एकनाथ शिंदे अपने गांव चले गए हैं। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही दिल्ली में महायुति के तीनों अहम नेताओं, देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और अजित पवार की बैठक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के घर हुई। बताया जाता है कि इसमें देवेंद्र फडणवीस के सीएम बनने और अहम विभागों के बंटवारे को लेकर सबकुछ तय हो चुका है। अब इससे आगे की बैठक आज मुंबई में होने वाली थी। लेकिन उससे पहले ही कुछ अड़चन आती नजर आ रही है। अनुमान है कि शपथ ग्रहण दो दिसंबर को होगा। एकनाथ शिंदे के बैठक छोड़कर अचानक जाने से अनुमान लगाया जा रहा है नई सरकार के गठन को लेकर वह कुछ नाराज हैं। सूत्रों के मतुाबिक शिंदे अपने सतारा स्थित गांव निकल गए हैं। अब शिंदे के वापस आने के बाद यह बैठक होगी। शिवसेना प्रवक्ता मनीषा कायंदे ने इस बात की पुष्टि कि मुख्यमंत्री शिंदे के आज के सभी अप्वॉइंटमेंट्स कैंसल कर दिए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार गठन को लेकर हो रही बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है। शिवसेना सूत्रों के मुताबिक शिंदे सतारा में महाबलेश्वर के पास स्थित अपने गृहस्थान डारे गए हुए हैं। इससे पहले एकनाथ शिंदे ने प्रेस कांफ्रेंस करके खुद कहा था कि भाजपा जिस किसी को भी मुख्यमंत्री बनाए, उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। इसके बाद देवेंद्र फडणवीस के लिए तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता खुल गया था। अमित शाह से मुलाकात के बाद एकनाथ शिंदे ने इस बातचीत को अच्छा और सकारात्मक बताया था। उन्होंने कहाकि मुंबई में महायुति गठबंधन के बाद अगले मुख्यमंत्री के बारे में फैसला हो जाएगा। सूत्रों के मुताबिक अभी मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम की पोस्ट को लेकर बातें सबकुछ स्पष्ट है। लेकिन कुछ मंत्री पद को लेकर बातचीत अटकती नजर आ रही है। एनडीटीवी के मुताबिक एक सीएम और दो डिप्टी सीएम का फॉर्मूला जारी रहने का अनुमान है। लेकिन नई सरकार में एकनाथ शिंदे खुद डिप्टी सीएम बनने के इच्छुक नहीं हैं। शिवसेना के विधायक और प्रवक्ता संजय शिरसाट ने कहाकि उनके डिप्टी सीएम बनने के चांसेज कम हैं। मुख्यमंत्री रहने के बाद डिप्टी सीएम बनना ठीक नहीं रहेगा। उन्होंने कहाकि शिंदे की जगह यह पद शिवसेना में किसी और को दिया जाएगा। बताया जाता है कि नई सरकार में भाजपा अपने पास गृह मंत्रालय रखेगी। इसके अलावा, अजित पवार की एनसीपी के पास वित्त और शिंदे की सेना के बाद शहरी विकास व पीडब्लूडी रहेगा। सरकार में भाजपा को 22 मंत्री, शिवसेना को 12 और एनसीपी को 9 मंत्रीपद मिलने का अनुमान है। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में महायुति गठबंधन ने जोरदार जीत हासिल की है। 288 सीटों वाले विधानसभा में महायुति को 230 सीटें मिली हैं। इसमें भाजपा को अकेले 132 सीटें, शिवसेना को 57 और एनसीपी को 42 सीटें मिली हैं।

अक्टूबर में हुए एक सर्वे में 103 सीटों को कवर किया गया, उसमें एमवीए केवल 44 सीटों पर आगे चल रही थी

मुंबई महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद कांग्रेस नेतृत्व द्वारा ईवीएम पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, पार्टी में ही इसको लेकर मतभेद की स्थिति है। महाराष्ट्र की हार इसलिए भी करारी थी क्योंकि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस, शरद पवार की एनसीपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने शानदार प्रदर्शन किया था। चुनाव से पहले कांग्रेस के द्वारा कराए गए गए आंतरिक सर्वे में ही हार के संकेत मिल गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर में हुए एक सर्वे में 103 सीटों को कवर किया गया था। उसमें एमवीए केवल 44 सीटों पर आगे चल रही थी। वहीं, लोकसभा चुनावों में यह आंकड़ा 54 था। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ‘लड़की बहिन योजना’ ने चुनाव परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कांग्रेस के एक आंतरिक सर्वेक्षण के अनुसार, 88% लोगों को इस योजना के बारे में जानकारी थी। 17% ने स्वीकार किया कि इस योजना के कारण उनके मतदान की प्राथमिकता बदल गई। एमवीए की रणनीति में इस योजना का प्रभाव समझने में देरी हुई। कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि एक बैठक में रणनीतिकारों ने एमवीए को महिलाओं को 3000 रुपये की मासिक सहायता देने का सुझाव दिया था। लेकिन महायुति ने पहले ही योजना के तहत 2100 मासिक सहायता की घोषणा कर दी थी, जिससे उन्हें महिलाओं के बीच व्यापक समर्थन मिला। हार के बाद ईवीएम पर सवाल हार के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का निर्णय लिया। हालांकि पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह रणनीति महाराष्ट्र और केंद्रीय नेतृत्व का चेहरा बचाने की एक कोशिश है। आपक बता दे कि कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) शुक्रवार को विधानसभा चुनाव परिणामों की समीक्षा करेगी। संभावना है कि समिति ईवीएम के खिलाफ अभियान तेज करने और मतपत्र (पेपर बैलट) की वापसी की मांग करने का प्रस्ताव पारित कर सकती है।

बुधनी उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी ने जीत तो हासिल की, लेकिन कांग्रेस के उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन ने बीजेपी की चिंता बढ़ाई

सीहोर  बुधनी विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी रामाकांत भार्गव ने जीत तो हासिल की, लेकिन कांग्रेस के उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। 23 नवंबर 2024 को हुए इस चुनाव में भाजपा को मात्र नौ प्रतिशत वोटों से जीत मिली, जबकि कुछ महीने पहले ही हुए विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह चौहान को लगभग 70% वोट मिले थे। इस बार भाजपा को 52% और कांग्रेस को 43% वोट मिले। कांग्रेस के वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी और भाजपा के वोट शेयर में गिरावट ने भाजपा के लिए चिंता का विषय पैदा कर दिया है। खासकर 136 पोलिंग बूथ पर मिली हार और 98 बूथ पर बेहद कम अंतर से जीत ने भाजपा के लिए आत्ममंथन की स्थिति पैदा कर दी है। 20 साल बाद ऐसी टक्कर बुधनी विधानसभा में लगभग 20 साल बाद इतना रोमांचक मुकाबला देखने को मिला। रामाकांत भार्गव ने जीत तो हासिल की, लेकिन दोनों दलों के लिए यह चुनाव सीख देने वाला रहा। पिछले दो विधानसभा चुनावों के नतीजों पर गौर करें तो कांग्रेस ने भले ही चुनाव हारा हो, लेकिन उसके वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई है। इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। बीजेपी का प्रदर्शन गिरा भाजपा के प्रदर्शन में गिरावट साफ दिखी। 2018 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 43 पोलिंग बूथ पर हार का सामना करना पड़ा था। 2023 के विधानसभा चुनाव में यह संख्या घटकर 16 रह गई थी। लेकिन हाल ही में हुए उपचुनाव में भाजपा को 136 पोलिंग बूथ पर हार मिली। 16 से 136 तक पहुंचने वाली हार के आंकड़ों ने भाजपा के लिए आत्ममंथन की स्थिति पैदा कर दी है। 98 बूथों पर कांटे की टक्कर इस उपचुनाव में 98 पोलिंग बूथ ऐसे रहे, जहां दोनों दलों के बीच कांटे की टक्कर रही। इन बूथों पर जीत और हार का अंतर 50 वोटों से भी कम रहा। भाजपा 50 ऐसे बूथों पर जीती, जहां जीत का अंतर 50 से कम था। कांग्रेस 48 ऐसे बूथों पर जीती, जहां जीत का अंतर 50 से कम था। इन बूथों पर जीत-हार का अंतर 2 से लेकर 49 वोटों तक रहा। कई बूथ ऐसे रहे, जहां जीत का अंतर सिर्फ 2, 7, 9 और 10 वोटों का रहा। डोबा और महागांव बूथ पर भाजपा सिर्फ 2 वोटों से जीती। नारायणपुर में 13 वोट, ग्वाडिया में 6 वोट, जोशीपुरा में 10 वोट, बुधनी के पांच बूथों पर 30, 49, 6, 18, 35 वोटों से जीत मिली। किरार समाज पर भारी बारेला वोट इस चुनाव में बारेला समाज के वोट किरार समाज के वोटों पर भारी पड़े। कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार पटेल किरार समाज से आते हैं। विधानसभा क्षेत्र में किरार समाज के लगभग 23,000 वोट हैं। ऐसा माना जा रहा था कि किरार वोट बैंक कांग्रेस के पक्ष में जाएगा। लेकिन राजकुमार पटेल को अपने समाज का पूरा समर्थन नहीं मिला। बारेला समाज के वोट भाजपा की तरफ चले गए। भाजपा प्रत्याशी को 38 पोलिंग बूथ पर बारेला समाज के 12,000 से ज्यादा वोट मिले। 16 अन्य बूथों पर बारेला समाज के 4,000 से ज्यादा वोट भाजपा को मिले। कुल मिलाकर भाजपा को बारेला समाज के 16,000 से ज्यादा वोट मिले, जो उसकी जीत की बड़ी वजह बने। किरार समाज में भी भाजपा ने सेंध लगाई। इस वजह से राजकुमार पटेल अपने गृह क्षेत्र से बड़ी बढ़त नहीं बना पाए। कांग्रेस का भी यही हाल कांग्रेस को 48 पोलिंग बूथ पर 50 से भी कम वोटों से जीत मिली। कई बूथ ऐसे थे जहां जीत का अंतर सिर्फ 1, 2, 5, 7 और 11 वोटों का रहा। तीन बूथों पर 1 वोट और एक बूथ पर 2 वोटों से कांग्रेस जीती। सलकनपुर में 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से देवीलोक का निर्माण हो रहा है। लेकिन सलकनपुर पंचायत के मतदाताओं ने भाजपा को 1 वोट से हरा दिया। यह भाजपा के लिए चिंता का विषय है। रमाकांत भार्गव ने जिस गांव को गोद लिया, उसमें जीत बसंतपुर गांव में बारेला, बंजारा, गोंड और अन्य समाज के लोग रहते हैं। रमाकांत भार्गव ने सांसद रहते हुए इस गांव को गोद लिया था, लेकिन अपने कार्यकाल में एक बार भी गांव नहीं गए। पिछले साल ग्रामीणों ने इसका विरोध भी किया था। लेकिन फिर भी बसंतपुर के मतदाताओं ने रमाकांत भार्गव को 540 वोट देकर 349 वोटों से जीत दिलाई। राजकुमार पटेल को यहां सिर्फ 191 वोट मिले। गांव में कुल 796 वोट पड़े थे।

MLA निर्मला सप्रे की सदस्यता को लेकर हाईकोर्ट पहुंची कांग्रेस, भाजपा पर भी कसा तंज

   भोपाल  मध्यप्रदेश में विजयपुर उपचुनाव में जीत के बाद अब कांग्रेस नए तेवर और अंदाज में नजर आ रही है। विजयपुर में जीत के बाद अब कांग्रेस ने बीना विधानसभा पर टिका दी है। कांग्रेस ने बीना विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता खत्म करने को लेकर हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दाखिल की है। दरअसल बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे ने लोकसभा चुनाव में पाला बदलते हुए भाजपा में शामिल हो गई थी और वह लगातार भाजपा के मंचों पर शिरकत करने  के साथ भोपाल में भाजपा मुख्यालय में अपनी हाजिरी लगा रही है। निर्मला सप्रे भले ही भाजपा के मंच से लेकर पार्टी दफ्तर में नजर आ रही हो लेकिन उन्होंने अपनी विधानसभा की  सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया है। वहीं कांग्रेस ने निर्मला सप्रे की सदस्यता खत्म करने को लेकर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के पास याचिका लगा चुकी है, लेकिन अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं हो सकता है। ऐसे में कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हाईकार्ट में याचिका लगाई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस ने निर्मला सप्रे की सदस्यता को लेकर विधानसभा अध्यक्ष के पास याचिका लगा चुका है लेकिन जब इस पर कोई निर्णय नहीं हो पाया है तब पार्टी ने हाईकोर्ट का रूख किया है। वहीं नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भाजपा बताएं कि निर्मला सप्रे उनके साथ है या नहीं। वहीं अब जब 16 दिसंबर में विधानसभा की शीतकालीन सत्र होना है तब कांग्रेस निर्मला सप्रे को लेकर काफी अक्रामक नजर आ रही है। वहीं निर्मला सप्रे के विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा नहीं देने के पीछे कई कारण है। निर्मला सप्रे बीना को जिला बनाने की मांग को लेकर भाजपा में शामिल हुई थी, वहीं पिछले दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नए जिलों  को लेकर परिसीमन आयोग के गठन का एलान कर बीना को जिला बनाए जाने की मांग को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। ऐसे में अब निर्मला सप्रे चुनाव का सामना करने से बचना चाह रही है। निर्मला को साथ नहीं बैठाएगी कांग्रेस कांग्रेस ने यह पहले ही साफ कर दिया है कि बीना से विधायक निर्मला सप्रे को वे अपने साथ नहीं बैठाएंगे। कांग्रेस ने इस बात को मान लिया है कि वे अब भाजपा की सदस्य हैं। वे भाजपा की बैठकों में भी शामिल हुई हैं। 16 दिसंबर से विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है, इसमें निर्मला को कांग्रेस सदस्य विपक्ष में अपने साथ नहीं बैठाएंगे। इसके साथ ही विधानसभा सत्र से पहले 15 दिसंबर को जो विधायक दल की बैठक होगी उसमें भी निर्मला सप्रे को नहीं बुलाया जाएगा।

डीके शिवकुमार ने जल और संरक्षण परियोजनाओं पर मंजूरी में तेजी लाने के लिए किया आग्रह, केंद्रीय मंत्रियों से की मुलाकात

नई दिल्ली कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने केंद्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी से मुलाकात की और राज्य में महत्वपूर्ण जल और संरक्षण परियोजनाओं पर मंजूरी में तेजी लाने के लिए उनका समर्थन मांगा। श्री शिवकुमार ने गुरुवार को श्रीयादव से मुलाकात के बाद ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘नई दिल्ली में केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की और उनसे जल-संरक्षण की जरूरतों को पूरा करने, वन्यजीव कल्याण का विकास और संवर्द्धन में बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण महादायी कलासा और बंडुरा नाला डायवर्जन परियोजनाओं के लिए मंजूरी में तेजी लाने का आग्रह किया।” श्री शिवकुमार ने केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के साथ एक अलग बैठक में उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और कई जरूरी मुद्दे उठाए। उन्होंने मेकेदातु परियोजना की शीघ्र मंजूरी, कृष्णा जल विवाद के संबंध में गजट अधिसूचना और ऊपरी कृष्णा और ऊपरी भद्रा नदी परियोजनाओं को राष्ट्रीय परियोजनाओं के रूप में घोषित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला श्री शिवकुमार ने कर्नाटक की जल और कृषि आवश्यकताओं के लिए उनके महत्व पर जोर देते हुए, कलासा बंडुरा नाला डायवर्जन परियोजना के लिए वन और वन्यजीव मंजूरी भी मांगी उन्होंने श्री जोशी से इन पहलों के त्वरित कार्यान्वयन के लिए केंद्र पर दबाव डालने का आग्रह किया, जिसे उन्होंने कर्नाटक में पेयजल उपलब्धता में सुधार और कृषि को समर्थन देने के लिए महत्वपूर्ण बताया। ये परियोजनाएं, विशेष रूप से मेकेदातु और कलासा बंडुरा, लंबे समय से लंबित मुद्दे रहे हैं और राज्य में पानी की कमी और संरक्षण प्रयासों को संबोधित करने के लिए आवश्यक माने जाते हैं। श्री शिवकुमार ने क्षेत्र के विकास परिदृश्य को बदलने की उनकी क्षमता पर जोर दिया।  

महाराष्ट्र: भाजपा सीएम के साथ आधे से ज्यादा विभाग अपने पास रख सकती है, आज हो सकती तस्वीर साफ

मुंबई महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री को लेकर तस्वीर गुरुवार को साफ हो सकती है। इसी बीच खबरें हैं कि शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे को 3 बड़े मंत्रालय दिए जा सकते हैं। हालांकि, अब तक आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ, लेकिन अटकलें हैं कि भारतीय जनता पार्टी सीएम के साथ आधे से ज्यादा विभाग अपने पास रख सकती है। महाराष्ट्र सरकार में अधिकतम 43 मंत्रालय हो सकते हैं। किसे क्या मिलेगा मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि भाजपा शिवसेना को 3 बड़े समेत 12 कैबिनेट बर्थ दे सकती है। वहीं, अजित पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के खाते में कैबिनेट की 9 सीटें आ सकती हैं। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि भाजपा करीब आधी कैबिनेट बर्थ अपने विधायकों में बांट सकती है। अभी आधिकारिक ऐलान बाकी है। एकनाथ शिंदे को क्या मिलेगा रिपोर्ट के मुताबिक, शिवसेना को शहरी विकास, लोक निर्माण विभाग और जल संसाधन मिल सकता है। अटकलें ये भी हैं कि राज्य में पहले की तरह एक मुख्यमंत्री और दो डिप्टी सीएम का फॉर्मूला चल सकता है। इनमें एक-एक पद शिवसेना और एनसीपी को मिल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि अजित पवार ने अपने नेताओं से कहा है कि शपथ ग्रहण इस वीकेंड हो सकता है। भाजपा से हो सकता है सीएम भाजपा या महायुति के अन्य दो दलों की तरफ से अभी तक आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन माना जा रहा है कि राज्य का मुख्यमंत्री भाजपा से आ सकता है। इस दौड़ में पहले भी राज्य का शीर्ष पद संभाल चुके देवेंद्र फडणवीस का नाम आगे है। महायुति ने 288 में से 230 सीटें हासिल की है, जिनमें भाजपा 132 सीटों पर विजयी रही। क्या बोले एकनाथ शिंदे एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए शिंदे ने कहा, ‘मोदी और शाह जो भी निर्णय लेंगे, शिवसेना उसका पालन करेगी। उन्होंने दोहराया कि मैंने मोदी और शाह से कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री उम्मीदवार पर फैसला लेना चाहिए और यह हमारे लिए अंतिम होगा।’ उन्होंने कहा, ‘हम बालासाहेब ठाकरे और आनंद दिघे के विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं। हमें शाह और मोदी दोनों ने कहा था कि हम आपके पीछे पहाड़ की तरह खड़े हैं।

प्रियंका गांधी ने सांसद की शपथ के साथ दिया बड़ा संदेश, संविधान वाले दांव को भी शपथ के साथ ही चलने की कोशिश

नई दिल्ली वायनाड लोकसभा सीट से चुनी गईं प्रियंका गांधी ने आज सांसद के तौर पर शपथ ली। कांग्रेस की नेता शपथ के दौरान हाथ में संविधान की कॉपी लिए रहीं। इस तरह उन्होंने संविधान वाले दांव को भी शपथ के साथ ही चलने की कोशिश की, जिस पर कांग्रेस समेत विपक्ष ने लोकसभा चुनाव के दौरान नैरेटिव तैयार किया था। लोकसभा इलेक्शन में कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि सरकार इसलिए 400 सीट चाहती है ताकि संविधान बदला जा सके और गरीबों का आरक्षण छीन लिया जाए। इसके बाद जब लोकसभा का सत्र शुरू हुआ तो कांग्रेस के सांसदों ने संविधान लेकर ही शपथ ली थी। अखिलेश यादव और अवधेश प्रसाद जैसे नेता भी संविधान की कॉपी लिए दिखे। उसी को अब प्रियंका गांधी ने भी आगे बढ़ाया है। प्रियंका गांधी की शपथ के मौके पर उनके पति रॉबर्ट वाड्रा, बेटे रिहान वाड्रा और बेटी मिराया वाड्रा भी लोकसभा पहुंचे। इसके अलावा उनकी मां सोनिया गांधी और भाई राहुल गांधी पहले से ही सदन में मौजूद थे। राहुल गांधी खुद रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद हैं, जबकि सोनिया गांधी राज्यसभा की मेंबर हैं। प्रियंका गांधी ने वायनाड लोकसभा सीट का उपचुनाव 4 लाख 10 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की है। उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के प्रत्याशी सत्यन मोकेरी को मात देकर लोकसभा में एंट्री की है। यहां से भाजपा ने नव्या हरिदास को चुनाव में उतारा था। बुधवार को ही अपने निर्वाचन का सर्टिफिकेट प्रियंका गांधी ने लिया था और कहा था कि यह हमारी मेहनत, प्यार और जनता के भरोसे की जीत है। प्रियंका गांधी ने एक्स पर लिखा था, ‘मेरे साथ वायनाड से मेरी जीत का सर्टिफिकेट लेकर आए। मेरे लिए यह सिर्फ एक दस्तावेज नहीं है बल्कि प्यार, भरोसे और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। मुझे चुनने के लिए वायनाड का धन्यवाद।’ इसी साल जून में आए लोकसभा के नतीजों में राहुल गांधी यहां से जीते थे। इसके अलावा रायबरेली से भी वह जीते थे, ऐसे में उन्होंने वायनाड की सीट छोड़ी दी और अब यहां उपचुनाव हुआ तो प्रियंका गांधी को जीत मिली है।

MLA निर्मला सप्रे के मामले पर बोले VD Sharma, Nirmala Sapre का Congress से मोह भंग हो चुका है

भोपाल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने विधायक निर्मला सप्रे के भाजपा में शामिल होने को लेकर सवालों के जवाब दिए।सागर जिले की एकमात्र कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे ने लोकसभा चुनाव के दौरान 5 मई को राहतगढ़ में सीएम के सामने बीजेपी की सदस्यता ली थी। इस कार्यक्रम में निर्मला ने सीएम के हाथों बीजेपी का गमछा गले में डाला था। निर्मला को दलबदल किए आज 84 दिन हो चुके हैं निर्मला ने विधानसभा को दिया जवाब-कांग्रेस से मोहभंग बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से  पूछा कि आपने निर्मला सप्रे को बीजेपी में शामिल किया है तो अब उन्हें बीजेपी और कांग्रेस के बीच क्यों लटका कर रखा है? इसके जवाब में उन्होंने कहा- मुझे जो जानकारी है उन्होंने शायद विधानसभा को लिखकर दिया कि मेरा कांग्रेस से मोहभंग हुआ है। मैं विधायक हूं। जनता की सेवा के लिए चुनकर आई हूं। जनता के लिए मेरा अधिकार है कि मुख्यमंत्री से मिलूं। जीतू बोले- निर्मला का इस्तीफा देकर चुनाव लड़वाएं सीएम निर्मला सप्रे को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा- मैं मोहन यादव को चुनौती दे रहा हूं कि आप इतने लोकप्रिय मुख्यमंत्री हो तो आप निर्मला सप्रे को इधर से उधर क्यों घुमा रहे हो। आप में दम होगा तो आप जीतोगे, हम जनता के बीच में जाएंगे हम में दम होगा तो हम जीतेंगे। जनता के ऊपर छोड़ो, वह क्या करना चाहती है। आप पहले लोकसभा चुनाव में उन्हें ले गए। और हाथ ऊंचा करा दिया ये हमारी पार्टी में आईं। और अब डर क्यों? क्या कारण है कि आप इस्तीफा नहीं दिलवा रहे हो अगर आपकी बहादुरी है तो इस्तीफा दिलवाओ। हम कोर्ट से हटवाएंगे दिसंबर के सत्र में विधानसभा में बैठने को लेकर जीतू पटवारी ने कहा हम तो चाहते हैं वह सदन में बैठें। अगर बीजेपी में गई है तो इस्तीफा दे। हम तो उन्हें कोर्ट जाकर हटवाएंगे ही और फिर जनता के जहां पर ऊपर जाकर छोड़ेंगे कि वह क्या चाहती है। लेकिन मोहन यादव और जो विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है उनका इस्तीफा क्यों नहीं करवा रही है? निर्मला सप्रे तो डरेगी क्योंकि उसको हारना है लेकिन बीजेपी तो बहादुर है इस्तीफा दिलवाओ और जनता के बीच में जाओ। सप्रे के खिलाफ इसी हफ्ते कोर्ट जाएगी कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता खत्म करने को लेकर कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष को शिकायत भी की थी। लेकिन, अब तक इस मामले में कोई स्पष्ट निर्णय नहीं हुआ है। ऐसे में अब कांग्रेस हाईकोर्ट जाने वाली है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार याचिका पर लीगल एक्सपर्ट के साथ काम करवा रहे हैं। संभव है कि इसी हफ्ते भर के अंदर कांग्रेस सप्रे की विधानसभा सदस्यता खत्म करने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगी। विजयपुर के रिजल्ट से सप्रे टेंशन में उपचुनाव में कांग्रेस ने मंत्री रामनिवास रावत को हराकर विजयपुर सीट जीती है। वहीं, बुधनी सीट पर 2023 विधानसभा चुनाव के मुकाबले उप चुनाव में बीजेपी की लीड 91000 तक घटाने में कामयाबी मिली है कांग्रेस इसे बड़ी सफलता मानकर चल रही है। पार्टी उत्साहित है। ऐसे में कांग्रेस निर्मला सप्रे को इस्तीफा देकर चुनाव लड़ने की खुली चुनौती दे रही है। वहीं, विजयपुर के रिजल्ट के बाद अब निर्मला सप्रे टेंशन में है। रावत छह बार के विधायक होने के बावजूद अपनी ही सीट पर सत्ताधारी दल की टिकट पर चुनाव लड़े और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वे पहली बार विधायक बनी हैं, ऐसे में उन्हें डर है कि उपचुनाव में यदि भाजपाइयों ने साथ ना दिया तो उनकी मुश्किल बढ़ सकती है।

कांग्रेस संगठन पदाधिकारियों के काम में निष्क्रिय रहने वाले की छुट्टी कर देगा

भोपाल लंबी ऊहापोह के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यसमिति का गठन हो चुका है। सभी पदाधिकारियों को दायित्व भी मिल गया है। अब कांग्रेस पार्टी की प्रदेश इकाई ने तय किया है कि इन सबके कामों का त्रैमासिक मूल्यांकन किया जाएगा। सभी पदाधिकारियों को प्रतिमाह अपने कामकाज का ब्यौरा प्रदेश कांग्रेस को देना होगा। इसमें दौरे, बैठकों और कार्यक्रमों की जानकारी रहेगी। वहीं, जिला और ब्लॉक इकाइयों से भी प्रदेश पदाधिकारियों की गतिविधियों का फीडबैक लिया जाएगा। इसके आधार पर मूल्यांकन होगा। जो भी कसौटी पर खरा नहीं उतरेगा, उसकी छुट्टी करने का इरादा है। विरोध के बाद साधा संतुलन यहां पर यह बता दें कि कांग्रेस ने पहले छोटी कार्यसमिति बनाने का निर्णय लिया था। इसके हिसाब से 17 उपाध्यक्ष और 71 महासचिव बनाए गए। विरोध के स्वर उभरे तो 84 सचिव और 36 संयुक्त सचिव नियुक्त करके संतुलन साधने का प्रयास किया गया। महासचिवों को जिले का प्रभारी बनाया गया है और उनका सहयोग करने के लिए सचिव और सह सचिवों को सह प्रभारी बनाया है। जिलों का करना होगा दौरा इन्हें निर्देश दिए गए हैं कि सबको माह में कम से कम एक बार प्रभार के जिले का दौरा करना होगा। जिला और ब्लॉक कांग्रेस पदाधिकारियों के साथ बैठक करके संगठन की गतिविधियों की समीक्षा करनी होगी। कांग्रेस द्वारा दिए जाने वाले कार्यक्रमों का नेतृत्व करने के साथ उसकी रिपोर्ट भी प्रदेश मुख्यालय को देनी होगी। इसके आधार पर कामकाज का त्रैमासिक मूल्यांकन होगा। संगठन के कामों में रुचि न दिखाने वाले निष्क्रिय पदाधिकारियों की छुट्टी कर दी जाएगी। इनके स्थान पर युवा नेताओं को मौका दिया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि सभी के कामकाज का मूल्यांकन करेंगे। सबका मकसद संगठन को मजबूत बनाना है। इसके लिए यह व्यवस्था बनाई गई है। जिलों में होंगे प्रशिक्षण पार्टी ने यह भी तय किया है कि संगठन को हर स्तर पर सक्रिय किया जाएगा। जिलों में प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसमें बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया जाएगा। प्रशिक्षण विभाग द्वारा पार्टी की रीति-नीति और कार्यक्रम बताए जाएंगे। इसके साथ ही भाजपा सरकार की वादाखिलाफी को मुद्दा बनाकर प्रदर्शन भी किए जाएंगे।

बीजेपी के सामने अगली बड़ी चुनौती पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष तय करना , संभावित नामों में शिवराज और देवेंद्र फडणवीस, डॉ सरोज पांडेय का नाम भी

नई दिल्ली  हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव में शानदार जीत के बाद बीजेपी के सामने अगली बड़ी चुनौती पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष तय करना होगा। हालांकि बीजेपी की ओर से नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन को लेकर कवायद तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली मुख्यालय में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर लगातार बैठकों का दौर जारी है। इन बैठकों पर पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ समेत कई दिग्गज नेता नजर रखे हुए हैं। इस बीच कुछ नाम सामने आए हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इन नामों में से ही एक नाम बीजेपी के नए अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल सकता है। ये नाम हैं- शिवराज सिंह चौहान, डॉ सरोज पांडेय और देवेंद्र फडणवीस। सूत्रों ने बताया कि बीजेपी अध्यक्ष का नाम तय करने के लिए पीएम मोदी, अमित शाह और आरएसएस के नेताओं के बीच बैठक के बाद ये तीन नाम सामने आए हैं। शिवराज सिंह चौहान, देवेंद्र फडणवीस और डॉ सरोज पाण्डेय में से ही कोई अध्यक्ष बनाया जाएगा। चर्चा में क्यों हैं ये नाम? राजनीतिक जानकारों का कहना है कि शिवराज सिंह चौहान बीजेपी के दिग्गज नेता हैं। पार्टी के अंदर उनकी अच्छी साख है। ऐसे में वह प्रबल दावेदार हैं। उधर देवेंद्र फडणवीस बीजेपी के युवा चेहरे हैं। महाराष्ट्र जीत के बाद बीजेपी फडणवीस को भी राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपने को लेकर पार्टी मंथन कर रही है। फडणवीस को पीएम मोदी और अमित शाह का भी करीबी माना जाता है। वहीं बीजेपी इस बार चौंकाने वाला फैसला करते हुए बीजेपी की कद्दावर महिला नेता डॉ सरोज पाण्डेय को भी अध्यक्ष पद पर बैठा सकती है। उधर राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चा भी है कि बीजेपी का नया अध्यक्ष दक्षिण भारत से हो सकता है, क्योंकि इस समय बीजेपी के अहम पदों में से किसी भी पद पर दक्षिण भारत का नेता नहीं है। लोकसभा चुनाव के लिए बढ़ाया गया था नड्डा का कार्यकाल बीजेपी के मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जून तक बढ़ा दिया गया था। उनका कार्यकाल इस साल जनवरी में खत्म हो रहा था। बीजेपी में नए अध्यक्ष के चयन से पहले संगठन का चुनाव जरूरी होता है, जिसमें आमतौर पर 6 महीने का समय लगता है। इसलिए वर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल 6 महीने तक बढ़ा दिया गया था।

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