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उन्हें बालासाहेब ठाकरे का नाम लेने का कोई अधिकार नहीं है, हमको पता है कि बाला साहेब ठाकरे क्या हैं और आप क्या हैं?: संजय राउत

मुंबई शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) से राज्यसभा सांसद एवं दिग्गज नेता संजय राउत ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने भाजपा पर निशाना साधा। पीएम मोदी और अमित शाह ने शिवसेना (यूबीटी) को कांग्रेस से बालासाहेब ठाकरे की तारीफ कराने की बात पर संजय राउत ने कहा क‍ि पीएम मोदी और अमित शाह एक जमाने में बहुत तारीफ करते थे, लेकिन अब उन्होंने बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना के साथ जो विश्वासघात किया है, उसके बारे में बताना चाहिए। उन्होंने बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना को बेचने का काम किया है। पहले खरीदा और फिर शिंदे को बेच दिया। उन्होंने कहा कि उनको बालासाहेब ठाकरे का नाम लेने का कोई अधिकार नहीं है। हमको पता है कि बाला साहेब ठाकरे क्या हैं और आप क्या हैं? एकनाथ शिंदे जैसे व्यक्ति, जिसका शिवसेना के निर्माण से कोई संबंध नहीं रहा, उसको आपने हमारी पार्टी को बेच दिया। तो ऐसे में अब उन लोगों को बालासाहेब ठाकरे को लेकर झूठा प्यार दिखाने की जरूरत नहीं है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के इस बयान पर की भाजपा की फसल तैयार हो गई है, अब सिर्फ कीटनाशकों को मारने की जरूरत है, पर संजय राउत ने कहा कि तो वो कीटनाशक को मारते क्यों नहीं हैंं, हम उनको दवा भी दे देंगे। जम्मू-कश्मीर पर भाजपा को घेरते हुए संजय राउत ने कहा क‍ि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद भी वहां आतंकवादी घटनाएं होती हैं और हमारे सुरक्षाकर्मी जान गंवा रहे हैं। वहीं, हमारे गृहमंत्री अमित शाह और पीएम मोदी महाराष्ट्र में डेरा डालकर बैठे हैं। उन्‍होंने जम्मू-कश्मीर और मणिपुर को हवा में छोड़ दिया है। बता दें कि महाराष्ट्र में कुल 288 विधानसभा सीटें हैं। इनके लिए एक ही चरण में 20 नवंबर को मतदान प्रस्तावित है। सभी निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजे एक साथ 23 नवंबर को सामने आएंगे। विपक्षी महागठबंधन महाविकास अघाड़ी में शामिल कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी), सत्ता पर काबिज महायुति सरकार को हटाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। वहीं, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना, भाजपा और अजित पवार की एनसीपी के गठबंधन वाली महायुति सरकार के सामने सत्ता में बने रहने की चुनौती है।

कांग्रेस ने महाराष्ट्र में भाजपा नीत महायुति सरकार का प्रचार अभियान नफरत से भरा है, आरोप लगाया

नई दिल्ली कांग्रेस ने सोमवार को महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत महायुति सरकार पर अपने चुनाव प्रचार अभियान में जानबूझकर ‘‘नफरत एवं जहर’’ घोलने और ‘‘राज्य में साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने’’ का प्रयास करने का आरोप लगाया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यह प्रचार अभियान भाजपा की ‘‘बीमार मानसिकता’’ को सामने लाता है। रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति के प्रचार अभियान में केवल एक ही एजेंडा है – सिर्फ और सिर्फ धर्म के आधार पर समाज का ध्रुवीकरण करना और राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ना। ऐसा खतरनाक अभियान उनकी बीमार मानसिकता को सामने लाता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उनका पूरा प्रचार अभियान नफरत से भरा है और जानबूझकर समाज में जहर घोलने का काम कर रहा है। लेकिन महाराष्ट्र की जनता 20 नवंबर को इस तरह के प्रचार अभियान को निर्णायक रूप से खारिज करेगी।’’ रमेश ने कहा कि महाराष्ट्र में कांग्रेस नीत महा विकास आघाडी (एमवीए) का प्रचार अभियान लोगों की दैनिक समस्याओं, परेशानियों और बुनियादी मुद्दों पर है जैसे कि किसानों और महिलाओं के गंभीर संकट, आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि और श्रमिकों में असुरक्षा। उन्होंने कहा कि गठबंधन के एजेंडे में युवाओं के लिए नौकरियों की कमी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए अपर्याप्त सामाजिक न्याय और बड़ी निवेश परियोजनाओं में महाराष्ट्र के साथ भेदभाव भी शीर्ष पर हैं। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के लिए 20 नवंबर को मतदान होगा जिसमें एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना, भाजपा और अजित पवार नीत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) समेत सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन का मुकाबला कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और शरद पवार नीत राकांपा (एसपी) वाले एमवीए से है। मतगणना 23 नवंबर को होगी।  

राजग और महागठबंधन दलों के नेताओ ने चुनाव प्रचार में ताकत झोंक दी, उपचुनाव को मान रहे विधानसभा का सेमीफाइनल

पटना बिहार विधानसभा की चार विधानसभा सीट तरारी, रामगढ़, बेलागंज और इमामगंज (सु) सीट पर 13 नवंबर को होने वाले उपचुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और महागठबंधन दोनों के प्रत्याशी इस चुनाव को 2025 में होने वाले विधानसभा का सेमीफाइनल मानकर एक-दूसरे को चुनौती देते नजर आयेंगे। बिहार के चार विधानसभा क्षेत्र तरारी, रामगढ़, बेलागंज और इमामगंज (सु) में 13 नवंबर को उपचुनाव होंगे। इनमें से तीन सीट तरारी, रामगढ़ और बेलागंज में महागठबंधन जबकि एकमात्र सीट इमामगंज (सु) पर राजग का कब्जा है। तरारी में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी( भाकपा-माले) जबकि रामगढ़ और बेलागंज में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का कब्जा है। इमामगंज सीट हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के पास है। राजग और महागठबंधन दोनों दलों के दिग्गज नेताओ ने चुनाव प्रचार में ताकत झोंक दी है। राजग और महागठबंधन दोनों दल के प्रत्याशी इस उपचुनाव को अगले वर्ष 2025 में होने वाले विधानसभा का सेमीफाइनल मानकर चुनावी दंगल में एक-दूसरे को चुनौती देते नजर आयेंगे। इन सभी चार सीटों पर उपचुनाव को लेकर 38 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं,जिसमें तरारी में 10, रामगढ़ में 05, इमामगंज में 09 और बेलगंज में 14 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। उपचुनाव की जंग राजग और महागठबंधन के बीच मानी जा रही है। हालांकि इस बार चारों सीटों पर प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी ने भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं। तरारी बिहार विधानसभा उपचुनाव में जहां महागठबंधन में शामिल भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा-माले) हैट्रिक लगाने की फिराक में है, वहीं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के घटक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर पूर्व बाहुबली विधायक नरेंद्र कुमार पाण्डेय उर्फ सुनील पांडे के पुत्र विशाल प्रशांत अपनी सियासी पारी का आगाज कर रहे हैं। तरारी विधानसभा सीट पर लगातार दो बार 2015 और 2020 के चुनाव में भाकपा माले के सुदामा प्रसाद ने जीत का परचम लहराया है। भाकपा माले प्रत्याशी राजू यादव के कंधे पर तरारी सीट को जीतने की चुनौती है।तरारी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा, भाकपा माले , बहुजन समाज पार्टी (बसपा), जनसुराज पार्टी ,चार निर्दलीय समेत 10 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा और भाकपा माले के बीच मानाा जा रहा है।इस मुकाबले को प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज दिलचस्प बना सकती है। जनसुराज ने किरण सिंह को पार्टी का उम्मीदवार बनाया है। बेलागंज विधानसभा क्षेत्र से जहां दिग्गज नेता सुरेन्द्र प्रसाद यादव लगातार आठ बार निर्वाचित हुये वहीं उनके पुत्र राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रत्याशी विश्वनाथ कुमार सिंह अपनी सियासी पारी का आगाज कर रहे हैं।बेलागंज क्षेत्र में राजद, जनता दल यूनाईटेड (जदयू),जनसुराज पार्टी ,ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम), छह निर्दलीय समेत 14 प्रत्याशी हैं। यहां से राजद के विश्वनाथ कुमार सिंह, जदयू से पूर्व विधान पार्षद मनोरमा देवी, जनसुराज पार्टी से मोहम्मद अमजद और एआईएमआईएम से मोहम्मद जामिद अली हसन चुनाव मैदान में हैं।बेलागंज सीट राजद का सबसे मजबूत किला माना जाता है, लेकिन इस बार उसे लड़ाई दो मोर्चो पर लड़नी है।एक ओर जहां उन्हें यादव वोटो को इंटैक्ट रखना है तो दूसरी तरफ प्रशांत किशोर के अल्पसंख्यक उम्मीदवार भी उनके लिए चुनौती हैं। जनसुराज और एआईएमआईएम जहां अल्पसंख्यक वोटों को डिस्टर्ब करेगी, वहीं जदयू यादव वोट में सेंधमारी करने की कोशिश करेगी। ऐसे में मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है। रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में करीब चार दशक से पूर्व सांसद और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह और उनके परिवार के सदस्यों का दबदबा रहा है। इस सीट पर श्री सिंह के छोटे पुत्र अजीत कुमार सिंह यहीं से अपनी राजनीति की शुरूआत कर रहे हैं। रामगढ़ विधानसभा उपचुनाव में राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर है। रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में राजद,भाजपा, जनसुराज ,बसपा समेत पांच प्रत्याशी मैदान में हैं।इस मुकाबले में भारतीय जनताा पार्टी (भाजपा) की ओर से पूर्व विधायक अशोक कुमार सिंह मैदान में हैं, तो प्रशांत किशोर ने सुशील कुमार सिंह को मैदान में उतार दिया।बहुजन समाज पार्टी ने पूर्व विधायक अंबिका सिंह के भतीजे सतीश कुमार सिंह यादव उर्फ पिंटू यादव ,यादव उम्मीदवार को मैदान में उतारकर मुकाबले को चतुष्कोणीय बना दिया है।जातिगत समीकरण के हिसाब से रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में राजपूत जाति के सर्वाधिक मतदाता है। दूसरे नंबर पर मुस्लिम मतदाता हैं।तीसरे नंबर पर यादव वोटर हैं। राजद उम्मीदवार अजीत सिंह और भाजपा उम्मीदवार अशोक सिंह की दावेदारी राजपूत वोटों पर है।बसपा के उम्मीदवार पिंटू यादव और जन सुराज के उम्मीदवार सुशील कुमार सिंह दोनों ही मुस्लिम यादव (माई) समीकरण में सेंध मारी कर सकते हैं। राजद यहां एमवाई समीकरण को दुरुस्त करने में लगा है। इस समीकरण का बिखराव राजद उम्मीदवार को नुकसान पहुंचा सकता है। बिहार विधानसभा उपचुनाव में हाइप्रोफाइल इमामगंज (सुरक्षित) सीट पर जहां हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) एक बार फिर से कब्जा बरकरार रखने की कोशिश में है वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पार्टी की ‘लालटेन’ को रोशन करने की जद्दोजहद में है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संस्थापक जीतन राम मांझी ने वर्ष 2015 और वर्ष 2020 लगातार दो बार इमामगंज सीट पर जीत हासिल की थी।

उपचुनाव के रिजल्ट के बाद कांग्रेस संगठन में बड़ा फेरबदल, बदले जाएंगे कई जिलाध्यक्ष

भोपाल  मध्य प्रदेश में दो विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव कांग्रेस के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. कांग्रेस की ओर से इस उपचुनाव के रिजल्ट के बाद संगठन में बड़ा फेरबदल करने की बात कही जा रही है. चर्चा है कि मध्य प्रदेश के कई जिला अध्यक्षों को बदल दिया जाएगा. इसके अलावा संगठन के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे कांग्रेस नेताओं की जिम्मेदारी में भी बदल सकती है. मध्य प्रदेश में बुधनी और विजयपुर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव पर पूरे प्रदेश के लोगों की नजर है. खास तौर पर विजयपुर सीट पर सभी राजनेताओं की निगाह है. यहां पर कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी से रामनिवास रावत अपना भाग्य आजमा रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने उपचुनाव के पहले ही बड़ा ऐलान कर दिया है. मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता मुकेश नायक के मुताबिक, उपचुनाव के बाद संगठन में बड़े फेरबदल की संभावना है. उन्होंने कहा, “मध्य प्रदेश में जिन जिला अध्यक्षों को तीन साल से अधिक का वक्त हो गया है, उन्हें हटाकर नए लोगों को मौका दिया जाएगा. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी चाहते हैं कि सभी कांग्रेस नेताओं को काम करने का मौका मिले. इसी को देखते हुए प्रदेश स्तर पर भी कई और नियुक्तियां हो सकती है.” उपचुनाव के पहले मच सकता था घमासान राजनीति के जानकार मानते हैं कि उपचुनाव के पहले संगठन में फिर फेरबदल से घमासान मच सकता था, इसी वजह से उपचुनाव के बाद ही संगठन में फेरबदल किया जाएगा. वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा के मुताबिक, “मध्य प्रदेश में कई कैसे पदाधिकारी हैं जो पूर्व अध्यक्ष की ओर से बनाए गए थे. जीतू पटवारी अपनी नई टीम तैयार करना चाहते हैं शायद इसी वजह से फेर बदल की संभावना है.”

रामकुमार गौतम ने कहा- हुड्डा के खिलाफ एक तरह का नैरेटिव चल पड़ा, जिससे भाजपा को तीसरी बार सत्ता में आने में मदद मिली

जींद हरियाणा में जींद जिले के सफीदों से भाजपा विधायक रामकुमार गौतम ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा की तारीफ की है। उन्होंने दावा किया कि हुड्डा के खिलाफ एक तरह का नैरेटिव चल पड़ा, जिससे भाजपा को हरियाणा में लगातार तीसरी बार सत्ता में आने में मदद मिली। हिसार में अपने गृह नगर नारनौंद में अभिनंदन समारोह के दौरान सभा को संबोधित करते हुए गौतम ने ये बातें कहीं। उन्होंने चुनाव के दौरान अपने भाषणों में हुड्डा पर की गई टिप्पणियों पर भी खेद भी जताया। भाजपा विधायक रामकुमार गौतम पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के खिलाफ भी अपना गुस्सा जाहिर कर चुके हैं। भूपिंदर सिंह हुड्डा को लेकर उन्होंने कहा, ‘मैं हुड्डा को नापसंद नहीं करता हूं। वह अच्छे इंसान हैं। उनका नाता स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार से रहा है। हुड्डा के पिता रणबीर सिंह एक स्वतंत्रता सेनानी थे।’ उन्होंने कहा कि अगर मैंने उनके खिलाफ नहीं बोला होता तो भाजपा हरियाणा में सत्ता में नहीं आती। मैंने उनके खिलाफ ऐसी बहुत सी बातें कहीं, जो मुझे नहीं कहनी चाहिए थीं। उन्हें बुरा लगा होगा। चुनाव से पहले भाजपा में हुए शामिल रामकुमार गौतम ने कहा, ‘बीजेपी के फायदे के लिए हुड्डा के खिलाफ नकारात्मक बातें फैलाईं। मैं उस हद तक चला गया जो मुझे शोभा नहीं देता।’ बता दें कि रामकुमार गौतम 5 साल से मंत्री पद की दौड़ में रहे। साल 2019 में जननायक जनता पार्टी ने नारनौंद सीट से उन्हें टिकट दिया। उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु को हरा भी दिया था। उस वक्त हरियाणा में भाजपा और जजपा गठबंधन की सरकार बनी। जजपा कोटे से वह मंत्री नहीं बन पाए तो दुष्यंत चौटाला से उनका विवाद हो गया। साल 2024 में चुनाव से पहले वह भाजपा में शामिल हो गए।

मल्लिकर्जुन खड़गे का मोदी सरकार पर हमला: ओबीसी आरक्षण और जातिगत जनगणना पर दोहरा रुख

Mallikarjun Kharge’s sharp comment on Modi government: Double stance on OBC reservation and caste census नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकर्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। खड़गे ने कहा कि मोदी जी चुनावी लाभ के लिए खुद को बार-बार ओबीसी बताने का दावा करते हैं, लेकिन यह कभी नहीं बताते कि वे जातिगत जनगणना से पिछड़ी जातियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को क्यों छुपाए रखना चाहते हैं।खड़गे ने इस संदर्भ में मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया और कहा, “जब मंडल आयोग की सिफारिशें लागू की गईं, तो बीजेपी ने इसका विरोध करते हुए यात्रा निकाली थी। अब मोदी जी ओबीसी वोट हासिल करने के लिए ओबीसी होने का दावा करते हैं, लेकिन जब बात उनके वास्तविक कामकाजी रुख की आती है, तो वे पिछड़ों के हक में कभी खड़े नहीं हुए।” राहुल गांधी के हालिया बयान का हवाला देते हुए खड़गे ने कहा कि हाल ही में धनबाद में राहुल गांधी ने यह खुलासा किया था कि देश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी ओबीसी वर्ग से है, 15 प्रतिशत दलित हैं, और 8 प्रतिशत आदिवासी वर्ग के लोग हैं। इन वर्गों की बेहतर सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने का सबसे बड़ा तरीका जातिगत जनगणना है।खड़गे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ओबीसी, दलित और आदिवासी वर्ग के खिलाफ है, और यह बात झारखंड की गठबंधन सरकार द्वारा किए गए एक बड़े कदम से स्पष्ट होती है। झारखंड विधानसभा ने OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के लिए प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन मोदी सरकार ने इसे गवर्नर से रोकवा दिया। “यह दोहरा चरित्र दर्शाता है कि मोदी जी अपने घोषणापत्र में OBC आरक्षण बढ़ाने की बात करते हैं, लेकिन जब असल में इसे लागू करने का समय आता है, तो वे उसे रोकने में किसी भी हद तक जा सकते हैं। क्या इस तरह के दावे पर आप लोग विश्वास करेंगे?” खड़गे ने सवाल उठाया। खड़गे ने यह भी कहा कि मोदी सरकार का यह दोगला रुख ही उनकी असल नीयत को दर्शाता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे पर गंभीर सोच-विचार करें और सही पक्ष का समर्थन करें।

महाराष्ट्र चुनाव के बीच कांग्रेस का बड़ा कदम , 28 बागी उम्मीदवारों को किया पार्टी से निष्कासित

 मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly Election 2024) से पहले कांग्रेस ने बागियों के खिलाफ सख्ती की शुरुआत कर दी है. पार्टी से बागी होकर चुनाव लड़ने वाले 22 नेताओं को कांग्रेस ने सस्पेंड कर दिया है. इन नेताओं को पार्टी के खिलाफ काम करने के चलते 6 साल के लिये निलंबित कर दिया गया है. दरअसल, महाराष्ट्र में होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले बागी उम्मीदवार कांग्रेस के लिए चुनौती खड़ी करते दिख रहे हैं. जिन 22 नेताओं को पार्टी से निकाला गया है, उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव में महा विकास अघाड़ी (MVA) के उम्मीदवारों के खिलाफ ही ताल ठोंक रखी है. पार्टी से निकाल दिये गए ये दिग्गज कांग्रेस से निकाले गए नेताओं में कई दिग्गज भी शामिल हैं. इनमें पूर्व मंत्री राजेंद्र मुलक (रामटेक निर्वाचन क्षेत्र), याज्ञवल्क जिचकर (काटोल), कमल व्यवहारे (कसबा), मनोज शिंदे (कोपरी पचपखाड़ी) और आबा बागुल (पार्वती) शामिल हैं. बागियों पर एक्शन के बाद कांग्रेस की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि यह फैसला अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रभारी रमेश चेन्निथला के निर्देश पर लिया गया है. कब है महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव? महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग 20 नवंबर को होगी. महाराष्ट्र, झारखंड और अन्य उपचुनावों के नतीजे 23 नवंबर को घोषित किए जाएंगे. महाराष्ट्र में इस समय दो मुख्य गठबंधन के बीच मुकाबला है जिसमें MVA और महायुति शामिल हैं. महायुति में बीजेपी, शिवसेना (एकनाथ शिंदे)और NCP (अजित पवार) शामिल हैं. इन्हें भी किया पार्टी से बाहर जिन बागी उम्मीदवारों को पार्टी से निष्कासित किया गया है, उनमें सिंदखेडा से बागी शामकांत सनेर, श्रीवर्धन से राजेंद्र ठाकूर, पर्वती से आबा बागुल, शिवाजीनगर से मनीष आनंद, परतूर से सुरेश कुमार जेथलीया और  कल्याण बोराडे, रामटेक सीट से चंद्रपाल चौकसे, सोनल कोवे, मनोज सिंधे, अविनाश लाड, आनंदराव गेदाम, शब्बीर खान, हंसकुमार पांडे, मंगल भुजबल, अभिलाषा गावतुरे, कमल व्यवहारे, मोहनराव दांडेकर, प्रेमसागर गणवीर, याज्ञवल्क्य जिचकर, अजय लांजेवार, राजेंद्र मुलक, विजय खडसे और विलास पाटिल का नाम शामिल हैं. बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में महायुति और महा विकास अघाड़ी के बीच कांटे की टक्कर होने वाली है. 20 नवंबर को वोटिंग के होगी और 23 नवंबर को काउंटिंग होगी. महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 26 नवंबर को समाप्त होने वाला है. इस चुनाव में महाविकास अघाड़ी के सामने लोकसभा चुनाव परिणाम को दोहराने की चुनौती है तो वहीं महायुति को दोबारा सत्ता में आने के लिए 145 सीटें हासिल करनी होंगी. दोनों पार्टियां अपना दम-खम दिखाने की पूरी कोशिश कर रही हैं.  

राशिद अल्वी ने कहा- हरियाणा में कांग्रेस को मिली हार पर कांग्रेस नेता ने कहा कि हरियाणा में कांग्रेस हारी नहीं है, कांग्रेस को हराया गया

नई दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने रविवार बातचीत की। उन्होंने मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बयान, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव, उद्धव ठाकरे, केंद्रीय मंत्री अमित शाह, नेता विपक्ष राहुल गांधी के बयानों सहित अन्य मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली हार पर कांग्रेस नेता ने कहा कि हरियाणा में कांग्रेस हारी नहीं है, कांग्रेस को हराया गया है। मैं बार-बार कहता हूं की जब तक ईवीएम से चुनाव होगा, तब तक हम लोगों को इसका बहिष्कार करना चाहिए। फ्री एंड फेयर चुनाव के ल‍िए बैलेट पेपर से चुनाव कराना चाहिए। चुनाव आयोग पर देश की जनता भरोसा नहीं कर रही है। उन्‍होंने कहा क‍ि ईमानदारी से चुनाव होने पर महाराष्‍ट्र में कांग्रेस और उसकी एलायंस की सरकार बनेगी। महाराष्ट्र की जनता ने इस बार तय कर लिया है कि ऐसे लोगों को बाहर करना है, जो कानून के दबाव व ईडी-सीबीआई का डर दिखाकर सरकार में आए थे। राज ठाकरे द्वारा मस्जिदों से सभी लाउडस्पीकर हटाने की बात कहने पर कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी की कोई अहमियत नहीं है, इसलिए उनके बयान का कोई मतलब नहीं है। मीडिया में बने रहने के लिए वह इस तरह के बयान देते हैं। उनके बयानों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। नेता विपक्ष राहुल गांधी पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राशिद अल्वी ने कहा है कि इस देश के अंदर संविधान के साथ सबसे ज्यादा खिलवाड़ भारतीय जनता पार्टी ने किया है। उनके मंत्री, नेता लगातार बयान देते हैं कि मुसलमानों की दुकानों से कुछ भी नहीं खरीदा जाए, क्या यह सब संविधान के मुताबिक है। ‘बंटेगे तो कटेंगे’ जैसे नारे लगाए जा रहे हैं, क्या यह संविधान के मुताबिक ठीक है। एक मुख्यमंत्री कहता है कि सब्जी के दामों को मुसलमानों ने बढ़ा दिया है। डोनाल्ड ट्रंप पर मणि शंकर अय्यर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राशिद अल्वी ने कहा है कि उनके खिलाफ 34 मुकदमे पेंडिंग में है। कहा जाता है कि वह इनकम टैक्स भी नहीं भरते थे। उनके खिलाफ तो बहुत सारे मुद्दे हैं। इसके बावजूद भी वहां की जनता ने उन्हें चुना है और भारत के अंदर भाजपा खुशियां मना रही है। यह बातें तो मेरी समझ से बाहर हैं। सेवानिवृत्त हो रहे भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के कार्यकाल पर कांग्रेस नेता ने कहा है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में कुछ अच्छे फैसले भी दिए। कुछ ऐसे भी बयान दिए, जिन पर लोग उंगली उठा रहे हैं। राम मंदिर-बाबरी मस्जिद पर फैसला देते हुए उन्होंने कहा था कि मैंने भगवान श्री राम की शरण में जाकर यह फैसला द‍िया। अगर सारे फैसले भगवान की शरण में जाकर होने लगेंगे, तो फिर संविधान का क्या होगा। जज तो संविधान के अनुसार फैसला करते हैं। आप बात इंसाफ की करते हैं और पूजा पर अपने घर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुलाते हैं। बाला साहब ठाकरे पर पूछे गए एक सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि मेरा मानना है विचार अलग-अलग हो सकते हैं, एक दूसरे के खिलाफ हो सकते हैं। लेकिन जब कोई नेता इस दुनिया से चला गया हो, तो उसके खिलाफ बयान देना मर्यादा के खिलाफ है। यह काम सिर्फ भारतीय जनता पार्टी कर सकती है। जो इस दुनिया में नहीं हैं, उनकी इज्जत करनी चाहिए न कि मतभेद के कारण बयानबाजी करनी चाहिए। उद्धव ठाकरे(शिवसेना) के साथ कांग्रेस का गठबंधन होने पर भी राहुल गांधी द्वारा मंच से बाला साहेब ठाकरे का नाम नहीं लेने पर उन्होंने कहा कि शिवसेना और कांग्रेस पार्टी दो अलग-अलग पार्टि‍यां हैं, दोनों के विचारों में बहुत सारी बातें ऐसी हो सकती हैंं, जो एक-दूसरे से इत्तेफाक न रखती हों। यह जरूरी नहीं है क‍ि हर चीज की तारीफ की जाए, हर चीज की हिमायत की जाए, बहुत सारी बातें कांग्रेस की हैं, जो सहायक शिवसेना को पसंद न हो। इसलिए राहुल गांधी पर इस तरह का इल्जाम लगाना गलत है। बाला साहेब ठाकरे और उद्धव ठाकरे में क्या अंतर है, क्या कांग्रेस को उद्धव ठाकरे को साथ लेना चाहिए था। इस सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं यह जानने की कोशिश नहीं करता हूं कि दोनों में क्या अंतर है। उद्धव ठाकरे आज शिवसेना के लीडर हैं। उन्होंने महाराष्ट्र में विकास करने की कोशिश की है। यहां पर कांग्रेस और उनकी पार्टी का एलायंस है। मुझे लगता है उनमें कई ऐसी बातें हैं, जो महाराष्ट्र के लिए फायदेमंद हैं।

राहुल गांधी 100 करोड़ रुपये खर्च करके चुनाव में पार्टी को 100 सीट भी नहीं मिल रही तो ये उपलब्धि नहीं दुर्भाग्य है: संजय निरुपम

महाराष्ट्र महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच एकनाथ शिंदे गुट के नेता संजय निरुपम ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है. संजय निरुपम ने कहा, “कांग्रेस का पतन तो होना ही है. अगर राहुल गांधी 100 करोड़ रुपये खर्च करके पूरे देश में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ कर रहे हैं और लोकसभा चुनाव में पार्टी को 100 सीट भी नहीं मिल रही तो ये कांग्रेस की उपलब्धि नहीं दुर्भाग्य है.” एबीपी न्यूज के सवाल अगर शिवसेना टूटी हुई नहीं होती और इसका नेतृत्व उद्धव ठाकरे कर रहे होते तो क्या संजय निरुपम वापस से शिवसेना में आते? इसका जवाब देते हुए संजय निरुपम ने कहा, “मुझे कांग्रेस छोड़ने की जरूरत ही नहीं पड़ती. साल 2019 में जब शिवसेना और कांग्रेस का गठबंधन हुआ तो पूरे देश में अकेला मैं था जिसने विरोध किया. मैंने मुखर होकर कहा था कि ये गठबंधन सही नहीं है. इसमें कांग्रेस और शिवसेना दोनों का नुकसान होगा. आखिर कांग्रेस का पतन हुआ.” उन्होंने कहा, “हालांकि, लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की कुछ सीटें बढ़ीं, लेकिन वो सीटें कांग्रेस के प्रताप से नहीं बढ़ी है. दरअसल, इस बार प्रचार छोटा था, बीजेपी का चुनाव प्रचार भी लो मूड में था, पीएम मोदी के खिलाफ फेक नैरेटिव चलाया गया और अल्पसंख्यक समाज ने इस बार जैसे वोट दिया वो पहले कभी नहीं हुआ था, लेकिन हमेशा वैसा ही वातावरण होगा ये जरूरी नहीं है. महाराष्ट्र और हरियाणा में लोकसभा चुनाव हारने के बाद बीजेपी ने अपने आप को सुधारने का जबरदस्त प्रयास किया, जिसके नतीजे दिख रहे हैं.” कांग्रेस का पतन तो होना ही है- संजय निरुपम वहीं आगे एक सवाल का जवाब देते हुए संजय निरुपम ने कहा, “अगर राहुल गांधी 100 करोड़ रुपये खर्च करके पूरे देश में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान चार हजार किलोमीटर पैदल चलते हैं और कहते हैं कि करोड़ों लोगों से उन्होंने सीधे बात की. इसके बावजूद अगर लोकसभा चुनाव में पार्टी को 100 सीट भी नहीं मिल रही तो ये कांग्रेस की उपलब्धि नहीं दुर्भाग्य है.” उन्होंने कहा, “इसके साथ ही कांग्रेस के नेताओं की कर्महीनता है, कि दो बार लगातार लोकसभा चुनाव हारने के बाद जब तीसरी बार हारते हैं तो चाहते हैं आपको नेता प्रतिपक्ष मिले. तीसरी बार भी आप विपक्ष में बैठने पर जश्न मना रहे हैं, दिवाली मना रहे हैं, फटाखे फोड़ हैं तो ये आपकी कर्महीनता है. इसे मैं कांग्रेस की उपलब्धि नहीं बोलूंगा. बस कांग्रेस के पतन की जो स्पीड थी वो थोड़ा स्लो हो गई है, लेकिन कांग्रेस का पतन तो होना ही है. कांग्रेस की अब कभी वापसी नहीं हो सकती है.”

महाराष्ट्र में जातिगत राजनीति के पीछे शरद पवार ही हैं. इतना ही नहीं, राज ठाकरे ने बोला तीखा हमला

महाराष्ट्र महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बीच मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने एनसीपी (एसपी) नेता शरद पवार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में जातिगत राजनीति के पीछे शरद पवार ही हैं. इतना ही नहीं, राज ठाकरे ने शरद पवार पर राजनीतिक लाभ के लिए 1999 से महाराष्ट्र में जाति की राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महज 10 दिन बचे हैं. इस बीच राज ठाकरे ने पुणे में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि जातिवादी राजनीति के नए संस्करण में मराठा अब ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के खिलाफ खड़े हैं. उन्होंने कहा, ‘‘शरद पवार ने महाराष्ट्र में जाति की राजनीति शुरू की. राजनीतिक लाभ के लिए समाज में नफरत फैलाई गई. पहले ब्राह्मणों और मराठा समुदाय के बीच जातिगत तनाव पैदा किया गया. अब मराठा समुदायों और ओबीसी के बीच जातिवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है.” ‘शरद पवार ने किया जाति-पाति का जहर घोलने का काम’ मनसे चीफ राज ठाकरे ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बीच कहा कि राज्य को आज जाति-पाति में उलझा दिया गया है. महाराष्ट्र के पास महान नेताओं और साधु-संतों की विरासत है, लेकिन मौजूदा समय में एक ऐसा संत है, जिसने जाति-पाति का जहर घोलने का काम किया है. वह संत और कोई नहीं बल्कि शरद पवार हैं. इतना ही नहीं, राज ठाकरे ने जनता से कहा कि जाति में न उलझते हुए सोच समझ कर वोट करें, यह महाराष्ट्र के विकास के लिए बहुत जरूरी है. लाडली बहन योजना का भी किया जिक्र मनसे प्रमुख ने कहा कि लाडली बहन योजना महायुति सरकार ने शुरू की है, जिसका फायदा कुछ महिलाओं को मिला है. हालांकि, कुछ महिलाएं इस योजना से अब भी वंचित हैं. महिलाओं को मुफ्त में कुछ देने के बजाय उनको काम देकर मजबूत करने पर जोर देना चाहिए.

योगी आदित्यनाथ रैलियों में ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ का नारा देते आ रहे हैं, लेकिन कुछ इसका समर्थन कर रहे कुछ विरोध

महाराष्ट्र महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में सियासी हलचल मची हुई है. इसी बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अमरावती में रैली के दौरान बंटेंगे तो कटेंगे का नारा दिया है. देश में यह नारा चर्चा का विषय बना हुआ है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस नारे का कुछ नेता समर्थन कर रहे हैं तो कुछ इसके खिलाफ में नजर आ रहे हैं. इसी कड़ी में एनसीपी चीफ अजित पवार ने भी इस बयान का विरोध किया है. अजित पवार ने किया विरोध महाराष्ट्र चुनाव में प्रचार के दौरान PM मोदी ने ‘एक हैं तो सेफ हैं’ का नारा दिया था. वहीं, योगी आदित्यनाथ भी लगातार अपनी रैलियों में ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ का नारा देते आ रहे हैं. लेकिन अब महायुति के ही साथी अजित पवार ही इस पर लगातार सवाल उठा रहे हैं. इससे पहले अजित पवार ने कहा था कि महाराष्ट्र शिवाजी, आंबेडकर, शाहू जी महाराज की धरती है. इस बयान महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार ने कहा,”राज्य में बाहर के लोग आकर ऐसी बातें बोल जाते हैं.  दूसरे राज्यों के बीजेपी सीएम तय करें कि उन्हें क्या बोलना है. हम भले ही महायुति में एक साथ काम कर रहे हैं, लेकिन हमारी पार्टियों की विचारधारा अलग-अलग है. हो सकता है ये दूसरों में चलता हो, लेकिन महाराष्ट्र में ये काम नहीं करता.” संजय निरूपम ने किया समर्थन इसी कड़ी में शिवसेना (शिंदे गुट) नेता संजय निरूपम ने योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन किया है. उन्होंने कहा, “योगी आदित्यनाथ कह रहे हैं कि अगर आप बिखर जाओगे तो आप कमजोर हो जाओगे. अगर आप एक रहेंगे तो मजबूत रहेंगे.  उन्होंने आगे कहा, “अजित दादा अभी समझ नहीं रहे हैं,आगे समझ जाएंगे. ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ ये लाइन महाराष्ट्र में बिल्कुल चलेगी. अजित दादा को समझना पड़ेगा. सीएम योगी कोई गलत बात नहीं कर रहे हैं, इसे समझने में कुछ लोगों को समय लग सकता है. JDU ने भी उठाए सवाल जेडीयू के एमएलसी गुलाम गौस ने भी इस नारे को लेकर सवाल उठाया था. उन्होंने कहा था “देश को अब इस तरह के नारे की जरूरत नहीं है. हम लोग तो एकजुट हैं. इस नारे की जरूरत उन लोगों को हैं, जिन्हें  एक संप्रदाय के नाम पर वोट चाहिए.  जब देश का प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, गृह मंत्री सब हिन्दू हैं, तो फिर हिन्दू कैसे असुरक्षित हो गए? यह जवाब बीजेपी दे.  

उद्धव ठाकरे जी कांग्रेस के नेता राहुल गांधी से कह सकते हैं कि वह वीर सावरकर के लिए दो शब्द बोल दें?: अमित शाह

महाराष्ट्र महाराष्ट्र विधानसभा चुनवा को लेकर बीजेपी लगातार महा विकास अघाड़ी पर हमलावर है. इसी बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र के लिए पार्टी का संकल्प पात्र जारी किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि आज यहां जिस संकल्प पत्र का विमोचन हुआ है, वह महाराष्ट्र की जनता की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी हमला बोला. राहुल गांधी को दी चुनौती कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कहा,”मैं उद्धव ठाकरे जी से पूछना चाहता हूं कि क्या वह कांग्रेस के नेता राहुल गांधी से कह सकते हैं कि वह वीर सावरकर के लिए दो शब्द बोल दें? क्या कांग्रेस का कोई नेता बाला साहब ठाकरे जी के सम्मान में दो वाक्य बोल सकता है? अंतर्विरोध के बीच में अघाड़ी की सरकार बनाने का स्वप्न लेकर जो लोग निकले हैं, उन्हें महाराष्ट्र की जनता जान ले तो अच्छा होगा.” उन्होंने आगे कहा,  “मैं उद्धव ठाकरे को कहना चाहता हूं कि आप को कहां बैठना है, ये आप को ही तय करना है. लेकिन मैं आप को याद दिलाना चाहता हूं कि आप 370 का विरोध करने वाले, रामजन्मी भूमि का विरोध और वक्फ बोर्ड में सुधार का विरोध करने वालों के साथ बैठे हो.” ‘जनता की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है’ संकल्प पत्र का विमोचन करते हुए अमित शाह ने कहा, “महाराष्ट्र एक प्रकार से कई युगों से हर क्षेत्र में देश का नेतृत्व कर रहा है. एक जमाने में जब जरूरत थी, तब भक्ति आंदोलन की शुरुआत भी महाराष्ट्र से हुई, गुलामी से मुक्ति का आंदोलन भी शिवाजी महाराज ने यहीं से शुरू हुआ, समाजिक क्रांति की शुरुआत भी यहीं से हुई है और महाराष्ट्र की जनता की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब हमारे संकल्प पत्र में दिखाई पड़ता है.”  केंद्रीय गृहमंत्री ने महा विकास अघाड़ी पर साधा निशाना  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “अघाड़ी की सारी योजनाएं सत्ता की लालच में तुष्टिकरण की हैं, विचारधाराओं का अपमान करने वाली हैं और महाराष्ट्र की संस्कृति से छल करने वाली हैं. उन्होंने आगे कहा कि भाजपा के संकल्प पत्थर की लकीर होते हैं. केंद्र हो या राज्य, जब हमारी सरकार बनती है, तो हम हमारे संकल्पों को सिद्ध करते हैं.  

मध्य प्रदेश उपचुनावों के लिए प्रचार अब आखिरी दौर में, बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने चुनाव में जीत के लिए अपनी ताकत झोंक दी

 भोपाल मध्य प्रदेश उपचुनावों के लिए प्रचार अब आखिरी दौर में है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने चुनाव में जीत के लिए अपनी ताकत झोंक दी है और दोनों ही पार्टियों के नेता अपनी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं. राज्य की बुधनी और विजयपुर विधानसभा सीट पर 13 नवंबर को चुनाव होना है. शिवराज सिंह चौहान के विदिशा से लोकसभा चुनाव लड़ने के बाद बुधनी सीट खाली हुई थी जिस पर अब पूर्व सांसद रमाकांत भार्गव भारतीय जनता पार्टी की तरफ से मैदान में हैं. उनके सामने कांग्रेस के राजकुमार पटेल की चुनौती है. वहीं, विजयपुर विधानसभा सीट में कांग्रेस से बीजेपी में आए रामनिवास रावत के सामने कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा हैं . बीजेपी के दिग्गज लगातार कर रहे प्रचार बीजेपी और कांग्रेस दोनों की ही तरफ से बड़े नेता प्रचार के लिए दोनों सीटों पर जुटे हैं. बुधनी में शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ कई मंत्री लगातार प्रचार कर रहे हैं. वहीं, कांग्रेस की तरफ से भी प्रदेश अध्यक्ष के साथ-साथ पार्टी के कई बड़े नेता लगातार प्रचार कर रहे हैं. बीजेपी-कांग्रेस दोनों ने किया जीत का दावा हाल ही में जीतू पटवारी ने दावा किया कि विजयपुर विधानसभा सीट में कांग्रेस 50,000 वोटों से अधिक के अंतर से जीत हासिल करेगी. इस पर टिप्पणी करते हुए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि बीजेपी प्रचंड बहुमत से जीत हासिल करेगी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले भी चुनाव में बड़े-बड़े दावे करती रही है और नतीजा सबने देखा है. उपचुनाव में कांटे की टक्कर कुल मिलाकर प्रदेश की दोनों विधानसभा सीटों पर कांटे की टक्कर नजर आ रही है, बीजेपी के सामने बड़ी अंतर से दोनों सीटें जीतकर अपनी प्रतिष्ठा को कायम रखने की चुनौती है तो वहीं कांग्रेस चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करके अपनी खोई हुई जमीन और आत्मविश्वास हासिल करना चाहती है.

वीडी शर्मा ने कहा कि कांग्रेस जम्मू-कश्मीर में अमन-चैन नहीं दहशतगर्दी चाहती है

 भोपाल  भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाकर भाजपा के संकल्प को पूरा किया। धारा-370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में अमन-चैन है, घाटी विकास के पथ पर आगे बढ़ चुकी है। लेकिन जबसे कांग्रेस के समर्थन से जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस की सरकार बनी है, तब से वहां देश विरोधी गतिविधियां शुरू हो गई हैं। उमर अब्दुल्ला सरकार ने असंवैधानिक तरीके से जम्मू-कश्मीर में धारा 370 बहाली का प्रस्ताव विधानसभा में पारित कर राष्ट्र, संविधान और दलित विरोधी मानसिकता को उजागर किया है। प्रदेश भाजपा कार्यालय में मीडियाकर्मियों को प्रतिक्रिया देते हुए वीडी शर्मा ने कहा कि कांग्रेस जम्मू-कश्मीर में अमन-चैन नहीं दहशतगर्दी चाहती है। नौजवानों को रोजगार नहीं पत्थरबाज और उपद्रवी बनाना चाहती है। कांग्रेस फिर से यह बताना चाहती है कि वह वाल्मीकियों, गोरखा समाज, पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी, पहाड़ी और गुर्जर समाज के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि आज पूरा देश जम्मू-कश्मीर सरकार के इस असंवैधानिक निर्णय और षड्यंत्र के विरुद्ध है, इसे देश कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। मैं राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि संविधान विरोधी इस प्रस्ताव का समर्थन करके क्या आप हमारे उन सफाईकर्मियों को जिंदगी भर वहीं सफाईकर्मी रखना चाहते हैं। विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद लाल चौक में शान से तिरंगा फहराया जाता है। घाटी के एक-एक गांव में अमन-चैन है। आतंकवाद का सफाया हो गया है, नौजवान रोजगार से जुड़ रहे हैं, पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है और घाटी विकास की मुख्यधारा से जुड़ गई है। यह विकास कांग्रेस और उसकी सहयोगी नेशनल कांफ्रेंस को पच नहीं रहा है। उमर अब्दुल्ला और कांग्रेस को अमन-चैन नहीं चाहिए। तिरंगा जलाओ, देश का अपमान करो, यही कांग्रेस का असली चरित्र है। विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस ने नेशनल कांफ्रेंस के घोषणा-पत्र का समर्थन कर जम्मू-कश्मीर में आरक्षण को खत्म करने का समर्थन किया था। राहुल गांधी विदेशों में भी आरक्षण को खत्म करने की बात कर चुके हैं, यही उनका असली चेहरा है।

बुधनी में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव बोले – कांग्रेस और कंस हमेशा अन्याय की बातें करते हैं

बुधनी. बुधनी सीट पर हो रहा उप चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में पहुंच गया है, पार्टी उम्मीदवार रमाकांत भार्गव के समर्थन में आमसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव कांग्रेस पर जमकर बरसे, उन्होंने कांग्रेस की तुलना कंस से करते हुए कहा दोनों एक समान हैं। बुधनी पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भाजपा की सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि हमारी सरकार ने किसानों से लेकर बहनों तक हर वर्ग का ध्यान रखा, गरीब कल्याण की कई योजनायें भाजपा सरकार चला रही है इसलिए विकास की बात करते हैं लेकिन दूसरी तरफ विनाश वाले लोग हैं इन्हें अभी भी चैन नहीं पड़ा, कांग्रेस के लोगों की कितनी मोटी चमड़ी है, कुछ किया नहीं फिर भी वोट मांगने की हिम्मत कर रहे हैं, 50 साल पहले कांग्रेस ने विकास किया होता तो हमारे दादाजी पिताजी इन्हें दुआ दे रहे होते। कांग्रेस के नकली गांधी उस नाम को भुना रहे मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने किसानों के लिए जो काम किये ऐसे काम न पहले हुए और ना हो सकते हैं, सीएम ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा हम एक बार नहीं बार बार गोवर्धन पूजा करेंगे कोई कुछ भी करे अरे जब हमरे श्रीकृष्ण कंस से नहीं डरे तो हम कांग्रेससे क्यों डरें, उन्होंने कहा कांग्रेस और कंस एक समान हैं दोनों ही अन्याय की बातें करते हैं उन्होंने गांधी परिवार को नकली गांधी बताते हुए कहा कि असली गांधी तो महात्मा गांधी थे उनका परिवार तो सामने ही नहीं आता, ये कांग्रेस के नकली गांधी उस नाम को भुना रहे हैं।

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