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प्रियंका गांधी इन्वेस्टमेंट के लिए करती हैं सरकारी कंपनियों पर भरोसा, पोर्टफोलियो के 18 में से 6 पीएसयू स्टॉक

नई दिल्ली कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की ओर से अक्सर सरकारी कंपनियों की आलोचना की जाती है, लेकिन निवेश के लिए उनकी पहली पसंद पीएसयू शेयर ही हैं। केरल के वायनाड में लोकसभा के लिए उपचुनाव लड़ रहीं प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा दिए गए हलफनामे के मुताबिक, उन्होंने शेयर बाजार में भी निवेश किया हुआ है और उनके पोर्टफोलियो में कुल 18 कंपनियां शामिल हैं, जिसमें से 6 कंपनियां सरकारी क्षेत्र की हैं। हलफनामे में दी गई जानकारी के मुताबिक कांग्रेस नेत्री के कुल स्टॉक पोर्टफोलियो की वैल्यू 18 अक्टूबर तक 65,72,012 रुपये है। इसमें से 19,08,875 रुपये सरकारी शेयरों में निवेशित हैं। उनके पोर्टफोलियो में शामिल पीएसयू में रेलवे और खनन क्षेत्र की कंपनियां हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा के पास इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के 1,000 शेयर हैं और इनकी वैल्यू 2,21,800 रुपये है। उनके पास नेशनल एलुमिनियम के 2,000 और एनएमडीसी के 1,000 शेयर हैं, जिनकी वैल्यू क्रमश: 4,64,000 रुपये और 2,31,450 रुपये है। इसके अतिरिक्त प्रियंका गांधी वाड्रा के पास रेल विकास निगम लिमिटेड और राइट्स लिमिटेड के 1,000-1,000 शेयर हैं। इनकी वैल्यू क्रमश: 4,77,200 रुपये और 3,02,800 रुपये है। वायनाड से कांग्रेस की प्रत्याशी के पास रेलटेल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के 500 शेयर हैं। इसकी वैल्यू 2,11,625 रुपये है। इसके अलावा प्रियंका गांधी वाड्रा ने उषा मार्टिन, इन्फोसिस, एनआईआईटी, टाटा पावर, स्पाइसजेट, पीसी ज्वेलर्स और फिनोलेक्स इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों में भी निवेश किया हुआ है। चुनावी हलफनामे के मुताबिक, कांग्रेस नेत्री ने म्यूचुअल फंड में भी निवेश किया हुआ है, जिसकी वैल्यू 2 करोड़ 24 लाख है। इसके अलावा उनके पीपीएफ खाता में 17 लाख रुपये जमा है। प्रियंका गांधी ने सोने और चांदी में भी निवेश किया हुआ है। उनके पास 59.83 किलो के चांदी से बनी चीजें हैं, जिसकी वैल्यू 29.55 लाख रुपये और 4.41 किलो की ज्वेलरी है, जिसमें 2.5 किलो सोने से बनी चीजें शामिल हैं और इनकी कीमत 1.15 करोड़ रुपये है। इसके अतिरिक्त उनके पास शिमला में घर और गाड़ी भी है।

BJP में शामिल हुए सोहन सिंह ठंडल को बीजेपी ने चब्बेवाल से उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया

होशियारपुर पंजाब में विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी चौथी सीट चब्बेवाल से भी उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है। अकाली दल को अलविदा कहकर BJP में शामिल हुए सोहन सिंह ठंडल को बीजेपी ने चब्बेवाल से उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है। बता दें कि पंजाब विधानसभा की 4 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए BJP ने होशियारपुर जिले की आरक्षित सीट चब्बेवाल से किसी उम्मीदवार की घोषणा नहीं की थी। अब पार्टी ने सोहन सिंह ठंडल पर दांव लगाया है और उन्हें चुनाव मैदान में उतारा है।   यहां बता दें कि इससे पहले पार्टी ने बाकी 3 सीटों पर गिद्दड़बाहा से मनप्रीत सिंह बादल, बरनाला से केवल सिंह ढिल्लों और डेरा बाबा नानक से रविकरण सिंह को मैदान में उतारा है। बता दें कि उपचुनाव से पहले आज अकाली दल को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब सीनियर नेता और पूर्व मंत्री सोहन सिंह ठंडल BJP में शामिल हो गए। सोहन ठंडल चब्बेवाल से विधायक रह चुके हैं और अकाली दल के दिग्गज नेताओं में से एक हैं। माहिलपुर और चब्बेवाल से 4 बार विधायक रहे ठंडल का BJP में शामिल होना पार्टी के लिए एक अहम राजनीतिक कदम माना जा रहा है। इस मौके पर गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी होशियारपुर पहुंचे। ठंडल के भाजपा में शामिल होने की औपचारिक घोषणा करने के लिए होशियारपुर में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। ठंडल के भाजपा में शामिल होने से पंजाब में आगामी चुनाव से पहले एक मजबूत नेता के रूप में पार्टी के मजबूत होने की उम्मीद है।

हिमंत बिस्वा सरमा ने पुछा, हेमंत सोरेन बताएं, वो क्यों जेल गए

रांची असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को झारखंड के सीएम हि‍मंत सोरेन के इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि उनको साजिश के तहत जेल भेजा गया। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि उनको साजिश के तहत जेल भेजा गया है, इस पर हेमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि लोग झारखंड आंदोलन और भारत के स्वाधीनता संग्राम में जेल जाते हैं। हेमंत सोरेन को बताना चाहिए कि वो जेल क्यों गए थे? ऐसे में अगर आलमगीर आलम भी कल को ये बात बोलने लगेंं, तो इसका उपाय क्या होगा? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ह‍िमंत सोरेन झारखंड आंदोलन या भारत की स्वाधीनता के कारण जेल गए होते तो वो अलग बात रहती, उनको जनता को बताना चाहिए कि वो किस लिए जेल गए? झारखंड में हुसैनाबाद नाम में बदलाव को लेकर उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा के पवित्र भूमि में हुसैनाबाद का नाम क्यों रहना चाहिए? हर जगह का अपना फ्लेवर होता है। उन्होंने कहा बिरसा मुंडा और सिद्धू कान्हू के वीर भूमि में हुसैनाबाद जैसा नाम क्यों नहीं होना चाहिए। इसके अलावा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के शेयर किए गए वीडियो को लेकर उन्होंने कहा कि हमने दिखाया कि कांग्रेस पार्टी के अंदर दलितों की स्थिति क्या है? बाहर राहुल गांधी दिखाते हैं कि वो दलितों का समर्थन करते हैं और पार्टी में दलितों को भागीदारी देते हैं। लेकिन, अंदर खाने में दलितों को कैसे अपमानित किया जाता है, कल का केरल का वीडियो उसको दिखाता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ जो हुआ, उसके बाद बताने को अब कुछ नहीं रह गया है। अब कांग्रेस पार्टी का पर्दाफाश हो चुका है। मुझे लगता है कि कांग्रेस पार्टी में जो भी दलित समाज का नेता है या उनका समर्थन करता है, कल का वीडियो देखने के बाद कांग्रेस को लेकर उनका मन साफ हो जाना चाहिए। उस पार्टी में दलितों और पिछड़ों का कोई सम्मान नहीं है, राहुल गांधी ढोंगी हैं और ड्रामा करते हैं।

भाजपा विधायक दल की बैठक आज, स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के नामों पर लगेगी मुहर

चंडीगढ़ हरियाणा में भाजपा ने आज विधायक दल की एक और मीटिंग बुलाई गई है। यह मीटिंग चंडीगढ़ में CM आवास संत कबीर कुटीर में होगी। इसमें विधानसभा स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के नाम पर चर्चा कर फैसला लिया जाएगा। चर्चा है कि स्पीकर पद के लिए घरौंडा से विधायक हरविंदर कल्याण का नाम सबसे आगे चल रहा है। वहीं जींद विधानसभा सीट से जीते कृष्ण मिड्‌ढा को डिप्टी स्पीकर बनाया जा सकता है। बता दें कि कल 25 अक्टूबर से विधानसभा सत्र शुरू होगा। बता दें कि इससे पहले स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के लिए CM नायब सैनी और प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली दिल्ली से हरी झंडी ला चुके हैं। दोनों ही नेता बीते मंगलवार से 2 दिन के दिल्ली दौरे पर रहे। ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से उन्हें स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के लिए इशारा मिल चुका है। वहीं, CM सैनी मंगलवार शाम को ही केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्‌टर से मिलने के लिए दिल्ली पहुंचे हुए थे।

MVA में होने के कारण उद्धव ठाकरे को सेक्युलर पॉलिटिक्स करने की मजबूरी, हिंदुत्‍व का भी विरोध

मुंबई ये ठाकरे परिवार की ताकत नहीं तो क्या है, बीजेपी को महाराष्ट्र की राजनीति में अपने बूते खड़े होने के लिए अब भी जूझना पड़ रहा है. मुश्किल ये है कि बालासाहेब ठाकरे ने जो कुछ कमाया था, उद्धव ठाकरे ने एक झटके में गंवा दिया. महाराष्‍ट्र की राजनीति में अब मातोश्री का वो महत्‍व नहीं है, जो भाजपा से गठबंधन के दौर में हुआ करता था. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की जिस कुर्सी के लिए उद्धव ठाकरे ने बीजेपी के खिलाफ जंग छेड़ी, उस पर भी आधे कार्यकाल तक ही टिक पाये, और जब सरकार गई तो संगठन से भी हाथ धोना पड़ा. उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र के लोगों को शुक्रिया कहना चाहिये कि लोकसभा चुनाव 2024 में थोड़ी बहुत इज्जत रख ली – लेकिन कांग्रेस को ज्यादा सीटें देकर उद्धव ठाकरे को कहीं का छोड़ा भी नहीं. और अब तो उद्धव ठाकरे की हालत और भी बुरी होती लग रही है. मुख्यमंत्री पद देने की बात तो दूर, शरद पवार और राहुल गांधी ने महाविकास आघाड़ी में उद्धव ठाकरे के लिए उनके मनमाफिक सीटें भी नहीं छोड़ी हैं – अब तक ये तो साफ हो ही गया है कि बीजेपी के साथ ही उद्धव ठाकरे के भी अच्छे दिन हुआ करते थे. क्या से क्या हो गये देखते देखते! पांच साल पहले उद्धव ठाकरे कहां थे, और अब कहां पहुंच चुके हैं – अगर परिस्थितियों, उपलब्धियों और चुनौतियों के पैमाने पर रखकर तुलना करें तो बहुत कुछ बदल चुका है. उद्धव ठाकरे के खाते में उपलब्धि के नाम पर सिर्फ एक ही चीज दर्ज हुई है, ढाई साल के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की कुर्सी – लेकिन बाकी सब घाटे का ही सौदा रहा है. 1. उद्धव ठाकरे जब भारतीय जनता पार्टी के साथ हुआ करते थे चुनावों के दौरान बीजेपी के साथ साथ करीब 50-50 के पार्टनर हुआ करते थे, लेकिन MVA में उनकी हिस्सेदारी एक-तिहाई बनकर रह गई है. 2. 2019 में उद्धव ठाकरे की पार्टी 165 सीटों पर चुनाव मैदान में उतरी थी, लेकिन इस बार उनको महज 85 सीटों से संतोष करना पड़ रहा है. MVA में जो सीट शेयरिंग का फार्मूला तय हुआ है, उसके हिसाब से शिवसेना (UBT), कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) तीनों को 85-85-85 सीटें मिल रही हैं. मतलब, अभी 255 सीटों पर तस्वीर साफ हुई है, जबकि 33 सीटें रिजर्व रखी गई हैं. संजय राउत का तो दावा है कि 270 सीटों पर बात बन गई है. बताते हैं कि 33 सीटें INDIA ब्लॉक के बाकी सहयोगी दलों समाजवादी पार्टी और सीपीएम के लिए बचाकर रखी गई हैं, लेकिन अभी तस्वीर नहीं साफ है. 3. सवाल ये है कि कितना भी बेहतर परफॉर्मेंस कर लें, क्या उद्धव ठाकरे पिछली बार जितनी सीटें नहीं जीत पाएंगे? 2019 में बीजेपी-शिवसेना में बीजेपी को 105 सीटें और शिवसेना को 56 सीटें मिली थी. महाराष्ट्र में 20 नवंबर को एक ही फेज में वोटिंग होगी – और 23 नवंबर को नतीजे आने की अपेक्षा है. मुख्यमंत्री बन पाना तो किस्मत की बात होगी!   उद्धव ठाकरे ने खुद को एमवीए के मुख्यमंत्री पद का चेहरा बना दिये जाने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन न तो शरद पवार और न ही राहुल गांधी ने ऐसा कोई वादा किया – अब तो जो ज्यादा सीटें जीतेगा, दावेदारी उसीकी मजबूत होगी. 1. पहले मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनने के लिए उद्धव ठाकरे ने सार्वजनिक बयानों का सहारा लिया. फिर शरद पवार का साथ मिलने की उम्मीद रही, लेकिन वो भी दगा दे गये. बल्कि, वो तो जयंत पाटिल का भी नाम लेने लगे हैं. दिल्ली पहुंचकर गांधी परिवार से मिलकर गुजारिश भी की, लेकिन मुख्यमंत्री पद देने के लिए कोई भी राजी नहीं हुआ. 2. जब देखा कि विपक्षी गठबंधन मुख्यमंत्री का नाम घोषित करने से बचना चाह रहा है, तो कदम पीछे खींचकर उद्धव ठाकरे ने सुझाव दिया कि सार्वजनिक घोषणा भले न हो, कम से कम तय तो कर ही लिया जाये कि मुख्यमंत्री कौन होगा – लेकिन ये तो किसी को मंजूर न था. 3. उद्धव ठाकरे के हिस्से वाली शिवसेना के प्रभाव क्षेत्र का दायरा भी सिकुड़ता जा रहा है. महाराष्‍ट्र में महज मुंबई-कोंकण तक सिमट जाने का खतरा पैदा हो गया है. पुणे और आसपास तो एकनाथ शिंदे ही जमे हुए हैं, जहां बीजेपी के लिए भी उनको बेदखल करना मुश्किल हो रहा है. सेक्युलर पॉलिटिक्स करने की मजबूरी MVA में होने के कारण उद्धव ठाकरे की पार्टी के सामने हिंदुत्‍व की राजनीति का विरोध करने की मजबूरी भी है. कांग्रेस और शरद पवार के साथ खड़े होने के लिए उद्धव ठाकरे को भी वही बोलना पड़ता है, जो गठबंधन की पॉलिटिकल लाइन बनी हुई है. हिंदुत्व का एजेंडा ही नहीं, शिवसेना तो कट्टर हिंदुत्व की राजनीति करती आ रही थी. बीजेपी के हिंदुत्व से भी चार कदम आगे. देखा जाये तो नई बीजेपी भी पुरानी शिवसेना के मुकाबले नहीं टिक पाती – लेकिन सेक्युलर दलों का साथ देने के नाम पर उद्धव ठाकरे को क्या क्या नहीं करना और सहना पड़ रहा है. उद्धव ठाकरे बार बार हिंदुत्व की बात दोहराते हैं, लेकिन लोगों तक संदेश पहुंचते पहुंचते वो रस्मअदायगी जैसा ही हो जाता है. उद्धव ठाकरे अपने हिंदुत्व को बीजेपी से बेहतर बताने की कोशिश करते हैं, लेकिन बीजेपी के आक्रामक रुख के आगे वो नहीं टिक पाते. अगर बीजेपी सबका साथ सबका विकास जैसा नारा देती है, तो किसी को दिक्कत नहीं होती, लेकिन उद्धव ठाकरे का हिंदुत्व की बात करना भी असरदार नहीं होता. भले ही उद्धव ठाकरे धारा 370, तीन तलाक और अयोध्या के मुद्दे पर पुराने स्टैंड पर ही कायम क्यों न रहते हों.  

मल्लिकार्जुन खरगे ने उम्मीदवारों के नाम को मंजूरी दी, उपचुनाव के लिए सात उम्मीदवार किए घोषित

नई दिल्ली कांग्रेस ने राजस्थान विधानसभा की सात सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों की आज घोषणा की। कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इन उम्मीदवारों के नाम को मंजूरी दी है। उन्होंने बताया कि पार्टी ने झुंझुनूं से अमित ओला, रामगढ़ से अरयान जुबेर, दौसा से दीनदयाल बैरवा, देवली उनियारा से कस्तूर चंद मीणा, खींवसर से रतन चौधरी, सलूम्बर एसटी से श्रीमती रेशमा मीणा तथा चौरासी एसटी सीट से महेश रोवट को चुनाव मैदान में उतारा है।  

आगामी राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के विधानसभा उप-चुनावों के लिए भाजपा ने आठ उम्मीदवारों की घोषणा की

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के विधानसभा उप-चुनावों के लिए अपने आठ उम्मीदवारों की गुरुवार को घोषणा की। पार्टी महासचिव अरुण सिंह ने यहां एक विज्ञप्ति में कहा कि भाजपा की केन्द्रीय चुनाव समिति ने राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के विधानसभा के आगामी उप-चुनावों के लिए उम्मीदवारों के नामों पर अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की चौरासी (अजजा) सीट से श्री कारीलाल ननोमा को प्रत्याशी बनाया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश में कुंदरकी से श्री रामवीर सिंह ठाकुर, गाजियाबाद से श्री संजीव शर्मा, खैर (अजा) से श्री सुरेंद्र दिलेर, करहल से श्री अनुजेश यादव, फूलपुर से श्री दीपक पटेल, कटेहरी से श्री धर्मराज निषाद तथा मझवां से श्रीमती सुचिस्मिता मौर्या को टिकट दिया गया है।  

दरवाजे के बाहर से झांक रहे थे खरगे, BJP ने शेयर किया वीडियो, कहा- दलित का अपमान

वायनाड कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को वायनाड लोकसभा सीट से उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया। वह कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में उतरी हैं। बुधवार को उनके नॉमिनेशन के लिए भव्य तैयारियां की गईं। कांग्रेस के सभी दिग्गज और राष्ट्रीय स्तर के सीनियर नेता शामिल हुए। इस दौरान एक वीडियो सामने आया है। इसमें मल्लिकार्जुन खरगे नॉमिनेशन के दौरान गेट के बाहर से झांकते नजर आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि उन्हें अंदर एंट्री नहीं दी गई। बीजेपी अब इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा रही है। उन्होंने कहा कि खरगे को नामांकन प्रक्रिया से बाहर इसलिए रखा गया क्योंकि वह दलित हैं। सोशल मीडिया पर आए वीडियो में दिख रहा है कि प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, सोनिया गांधी और उनका पूरा परिवार नॉमिनेशन के दौरान डीएम कार्यालय में मौजूद है। वहीं मल्लिकार्जुन खरगे नदारद हैं। वह गेट के बाहर से जरा से खुले दरवाजे से अंदर झांक रहे हैं। वीडियो में बेबस नजर आए मल्लिकार्जुन खरगे! वीडियो में दिख रहा है कि एक शख्स गेट पर खड़ा है। वह उन्हें अंदर नहीं आने देता तो वह बाहर से ही यहां-वहां किसी तरह झांकने की कोशिश करते हैं। बीजेपी ने कहा कि खरगे का अपमान हुआ और सारा सम्मान गांधी परिवार को मिला। बीजेपी ने यहां तक कहा कि दलित होने के कारण प्रियंका गांधी के नामांकन में मल्लिकार्जुन खरगे को एंट्री नहीं दी गई। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस वीडियो के लेकर कहा गया कि अंदर सिर्फ 5 लोग ही जा सकते थे इसलिए मल्लिकार्जुन खरगे को कलेक्टर ऑफिस के कर्मचारी ने अंदर नहीं जाने दिया। हालांकि जब उन्हें जानकारी हुई तो खरगे को एंट्री दी गई। हिमंत बिस्व सरमा बोले- बेहद निराशाजनक असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने भी इस वीडियो को ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, ‘वायनाड में आज तथाकथित होली ट्रिनिटी के मल्लिकार्जुन खरगे जैसे अनुभवी सांसद और दलित नेता के प्रति दिखाए गए अनादर को देखना बेहद निराशाजनक है। चाहे वह एआईसीसी का अध्यक्ष हो या पीसीसी, क्या परिवार उन लोगों को अपमानित करने में गर्व महसूस करता है जिन्हें वे केवल रबर स्टैंप मानते हैं?’ केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह ने ली चुस्की केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस घटनाक्रम पर चुस्की ली। उन्होंने लिखा, ‘जब आप खरगे हों तो घर के नहीं।’ प्रेम शुक्ला ने इस वीडियो को शेयर करके लिखा, ‘बेचारे खरगे जी ! इटली वाली बाई की बेटी वायनाड से नामांकन कर रही है। कांग्रेस के जीजाजी, सासूजी, बेटा, बेटी के बेटे अंदर हैं और कांग्रेस के अध्यक्ष सुराख से झांक रहे हैं कि कोई उन्हें भी अंदर ले ले। इसीलिए बालासाहब ठाकरे कहते थे कि सोनिया के सामने हिजड़े झुकते हैं!’ गौरव भाटिया ने कहा, गजब बेइज्जती बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा, ‘गजब बेइज्जती है। क्या दलित होना पाप है। मल्लिकार्जुन खड़गे जी को प्रियंका वाड्रा गांधी के नामांकन के दौरान कमरे से बाहर रखा गया। सीताराम केसरी, फिर पीवी नरसिम्हा राव जी अब खड़गे जी। संदेश स्पष्ट है- अगर तुम गांधी परिवार से नहीं हो तो याद रखो गांधी परिवार के पिद्दी की हैसियत भी कांग्रेस अध्यक्ष से ज्यादा है।’

by-election के नामांकन में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, आज बुधनी 25 को विजयपुर में पहुंचेंगे सभी बड़े नेता

भोपाल मध्य प्रदेश के दो सीटों बुधनी और विजयपुर होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी पूरी दमखम के साथ उतर रही है। उपचुनाव 13 नवंबर को होने जा रहे है। जिसको लेकर बीजेपी और कांग्रेस ने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। हालांकि अभी तक कैंडिडेट्स ने नामांकन दाखिल नहीं किया है। कांग्रेस के उम्मीदवार 24 और 25 अक्टूबर को ही नामांकन जमा करेंगे। इस दौरान कांग्रेस रैली निकालकर शक्ति प्रदर्शन करेगी। जिसमे जीतू पटवारी सहित कई नेता शामिल होंगे।   बुधनी और विजयपुर विधानसभा सीटों पर 25 अक्टूबर को नामांकन का आखिरी दिन है। इससे पहले गुरुवार को विजयपुर में भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत और बुधनी से कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार पटेल नामांकन दाखिल करेंगे। रावत के नामांकन में सीएम डॉ. मोहन यादव, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला मौजूद रहेंगे। जबकि बुधनी में पटेल का फॉर्म भरवाने के लिए पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा, पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे, विधायक आरिफ मसूद, सचिन यादव, रजनीश सिंह और पूर्व विधायक शैलेंद्र पटेल सहित कई दिग्गज शामिल होंगे। गेहूं की पोटली रखकर प्रचार करेंगे पटवारी बुधनी में प्रचार के दौरान पीसीसी चीफ जीतू पटवारी की गाड़ी में गेहूं और धान की पोटली रहेगी। उससे वे लोगों को संदेश देंगे कि आपके विधानसभा क्षेत्र के शिवराज सिंह चौहान देश के कृषि मंत्री बने हैं। लेकिन, उन्होंने गेहूं के दाम 2700 रुपए नहीं किए और जनता से छूट बोला है। जीतू पटवारी ने कहा है कि अगर बुधनी की जनता पूरे प्रदेश के किसानों का भला चाहती है तो इस पोटली को देखो और वोट करो। जहां तक विजयपुर का सवाल है वहां भी लोग खोटे सिक्के से सवाल पूछ रहे हैं। दोनों सीटें कांग्रेस जीतेगी। विजयपुर में दोनों पार्टियों के प्रत्याशी एक ही दिन करेंगे नामांकन कांग्रेस द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार बुधनी से कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार पटेल 24 अक्टूबर को नामांकन दाखिल करेंगे। जबकि विजयपुर में कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश मल्होत्रा 25 अक्टूबर को नामांकन भरेंगे। इधर विजयपुर विधानसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी रामनिवास रावत गुरुवार (24 अक्टूबर) को नामांकन फार्म जमा करेंगे, जबकि बुधनी विधानसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी रमाकांत भार्गव शुक्रवार 25 अक्टूबर को अपना नामांकन फार्म जमा करेंगे। दोनों सीटों पर नामांकन फार्म जमा करने की प्रक्रिया 18 अक्टूबर से शुरू हो गई है।    बुधनी पहुंचे ये कांग्रेसी नेता सिहोर जिले की बुधनी विधानसभा में उपचुनाव के लिए कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी राजकुमार पटेल द्वारा 24 अक्टूबर को नामांकन दाखिल किया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा, मप्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया, मप्र विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे, विधायकगण आरिफ मसूद, सचिन यादव और रजनीश सिंह एवं पूर्व विधायक शैलेन्द्र पटेल 24 अक्टूबर को सुबह 10 बजे भोपाल से प्रस्थान कर पूर्वान्ह 11.30 बजे बुधनी पहुंचेंगे। प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष संगठन प्रभारी राजीव सिंह ने बताया कि नेतागण गुरूवार, 24 अक्टूबर को कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार पटेल द्वारा द्वारा विधानसभा उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल रैली में शामिल होंगे। 

रणनीतिकार प्रशांत किशोर बिहार के चुनावी रण में उतर गए , स्टार प्रचारकों की सूची में पीके का नाम सबसे नीचे बना चर्चा का विषय

पटना बिहार की चार सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए प्रशांत किशोर ने अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं. हालांकि इस दौरान उन्हें काफी माथापच्ची करनी पड़ी. कहीं प्रत्याशी का नाम बिहार की वोटर लिस्ट में नहीं था तो किसी प्रत्याशी ने फंड की कमी का हवाला देते हुए चुनाव लड़ने से मना कर दिया. फाइनली उन्होंने चारों उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया और अब जनसुराज पार्टी की ओर से स्टार प्रचारकों की लिस्ट भी जारी कर दी गई है. इस लिस्ट में भी चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर ने नई स्ट्रैटजी बनाई है.   जनसुराज ने चार सीटों पर होने वाले उपचुनाव में प्रचार करने के लिए 20 स्टार प्रचारक बनाए हैं. इस लिस्ट में हर वर्ग के नेता को जगह दी गई है ताकि हर वर्ग और समाज के बीच जाकर वोटरों को आकर्षित किया जा सके. इसके अलावा जो सबसे खास बात है, वो इसमें जनसुराज के संयोजक प्रशांत किशोर का नाम सबसे आखिरी में है. पहले नंबर पर जनसुराज के कार्यकारी अध्यक्ष मनोज कुमार भारती का नाम है, जबकि दूसरे नंबर पर श्रीकृष्ण सिंह (SK Singh) का नाम है, जिनका वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने की वजह से तरारी में पार्टी को उम्मीदवार बदलना पड़ा. स्टार प्रचारकों की लिस्ट में पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रसाद यादव, सीतामढ़ी के पूर्व सांसद सीताराम यादव का नाम भी शामिल है. इसके अलावा एजाज अली, दुर्गा प्रसाद सिंह, मुनाजिर हसन, यदुवंश गिरी, बसंत चौधरी, केसी सिन्हा, संतोष महतो, विनीता विजय, रामबली चंद्रवंशी, आनंद मिश्रा, सकल देव साहनी, वसीम नय्यर अंसारी, अनुराधा यादव, आजम हुसैन अनवर, सुनील कुमार सिंह उर्फ छैला बिहारी का नाम भी शामिल है. बिहार की इन चार सीटों पर होना है उपचुनाव    बिहार की जिन सीटों पर उपचुनाव होने हैं, भोजपुर की तरारी सीट के अलावा कैमूर जिले की रामगढ़ सीट, गया की बेलागंज और इमामगंज सीटें शामिल हैं. इन चारों सीटों पर 13 नवंबर को वोटिंग होगी और इनके नतीजे महाराष्ट्र-झारखंड चुनाव के नतीजों के साथ ही घोषित किए जाएंगे.    क्यों खाली हुई थीं ये सीटें?    बिहार की जिन सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उनके सभी विधायक लोकसभा चुनाव में सांसद चुन लिए गए हैं. तरारी से विधायक सुदामा प्रसाद आरा से, रामगढ़ से विधायक सुधाकर सिंह बक्सर से, इमामगंज से विधायक जीतनराम मांझी गया से और बेलागंज से विधायक सुरेंद्र यादव जहानाबाद से सांसद चुने गए हैं. अगर देखा जाए तो इस बार के उपचुनाव में सबसे ज्यादा महागठबंधन की साख दांव पर है क्योंकि चार में से तीन सीटों पर उसी के विधायक थे, जबकि गया की इमामगंज सीट पर एनडीए का विधायक था. उपचुनाव में महागठबंधन की ओर से 3 सीट पर आरजेडी तो एक पर भाकपा (माले) चुनाव लड़ेगी. वहीं, एनडीए से बीजेपी 2, जेडीयू और हम 1-1 सीट पर चुनाव लड़ सकती हैं.    

उमंग सिंघार का ABVP पर हमला: बीजेपी को दलित-आदिवासी विरोधी बताया

Umang Singhar’s attack on ABVP: Called BJP anti-Dalit-Tribal भोपाल। कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा पर हमला करते हुए उसे दलित और आदिवासी विरोधी बताया है। उन्होंने इंदौर में ABVP के छात्रों के द्वारा हॉस्टल में घुसकर आदिवासी और दलित छात्रों के साथ अभद्रता को लेकर बीजेपी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को आड़े हाथों लिया है। नेता प्रतिपक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्वीट करते हुए लिखा कि भाजपा अपने पाले हुए सड़क छाप गुंडों के जरिए दलित और आदिवासी विरोधी एजेंडा की प्रतिपूर्ति करती है। ये ABVP छात्रों का नहीं कुकृत्य करने वालों का संगठन है, जिसे भाजपा अपनी अगली पीढ़ी के लिए तैयार कर रही है। उमंग सिंघार ने ABVP संगठन पर तंज कसते हुए कहा कि ये लोग आदिवासी और दलित छात्रों को अपना निशाना बनाते रहते हैं। दो दिन पहले भाजपा की नई पीढ़ी ABVP के “गुंडे” इंदौर में आदिवासी और दलित छात्रों को उनके होस्टल कैम्पस में जाकर गालियां दी और होस्टल पर पत्थर फेंके। कानून को मजाक समझने वालों पर मौन यादव कार्रवाई करेंगे या दलित और आदिवासी अत्याचारों पर भी “मौन” रहेंगे? सिंघार ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव जी इस मामले पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने के आदेश दें।

‘दंगल’ की कमाई ₹2000 करोड़, बबीता फोगाट के परिवार को मिले मात्र ₹1 करोड़

मुंबई पूर्व महिला पहलवान बबीता फोगाट ने एक बड़ा दावा दंगल फिल्म को लेकर किया है, जो उनके और उनके परिवार के ऊपर बनी। इस फिल्म का मुख्य किरदार सुपरस्टार आमिर खान ने निभाया था। इस फिल्म में गीता और बबीता की उपलब्धियों का भी जिक्र है। ये फिल्म ब्लॉकबस्टर रही थी और करीब 2000 करोड़ रुपये कमाए थे। हालांकि, आपको जानकर हैरानी होगी कि साल 2016 में रिलीज हुई ये सुपरहिट फिल्म के लिए फोगाट परिवार को सिर्फ एक करोड़ रुपये ही मिले। इसका खुलासा खुद पहलवान बबीता फोगाट ने किया है। बबीता फोगाट ने इंटरव्यू में जब ये बताया कि फिल्म ने वर्ल्डवाइड 2000 करोड़ रुपये कमाए और उसमें से एक करोड़ रुपये ही फोगाट फैमिली को मिले तो ये जानकर एंकर हैरान रह गया। इस बातचीत के दौरान एंकर ने इस चीज की पुष्टि करनी चाहिए कि क्या 2000 करोड़ रुपये दंगल ने कमाए और उसमें से फोगाट परिवार को सिर्फ एक करोड़ रुपये मिले? इसके जवाब में पहलावन से राजनीति में आईं बबीता ने कहा कि जी हां ये सच है। इसके अलावा, जब उनसे पूछा गया कि क्या इससे उन्हें निराशा हुई, तो बबीता ने अपने पिता महावीर फोगाट द्वारा सिखाए गए मूल्यों को दर्शाते हुए एक शालीन जवाब दिया। बबीता ने कहा, “नहीं, पापा ने एक चीज कही थी कि लोगों का प्यार और सम्मान चाहिए।” 23 दिसंबर 2016 को ये फिल्म रिलीज हुई थी। इसका डायरेक्शन नितेश तिवारी ने किया था, जिसमें आमिर खान ने ना केवल महावीर फोगाट की मुख्य भूमिका निभाई थी, बल्कि वे फिल्म के को-प्रोड्यूसर भी थे। इसमें महावीर फोगाट की उस यात्रा को दर्शाया गया था कि कैसे उनके बेटा नहीं हुआ तो उन्होंने अपनी बेटियों को इस खेल में उतारा और देश को बड़ी स्पर्धाओं में मेडल दिलाए। आपको बता दें, बबीता फोगाट का कुश्ती करियर शानदार रहा है। उन्होंने 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीता और 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था। साल 2012 में उन्होंने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था। उन्होंने 2016 के रियो ओलंपिक खेलों में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन मेडल नहीं मिला। 2019 में बबीता ने पेशेवर कुश्ती को अलविदा कहा और राजनीति में कदम रखा।

वायनाड लोकसभा उपचुनाव: प्रियंका गांधी ने भरा नामांकन, सोनिया, राहुल और खरगे ने दिखाई एकजुटता

Wayanad Lok Sabha by-election: Priyanka Gandhi filed nomination, Sonia, Rahul and Kharge showed solidarity. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने आज वायनाड लोकसभा उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। इस दौरान उनके साथ उनकी मां सोनिया गांधी, भाई राहुल गांधी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई अन्य नेता मौजूद रहे। इससे पहले उन्होंने स्थानीय नेताओं की मौजूदगी में नामांकन पर्चा भरा था। नामांकन पर्चा भरने के बाद उन्होंने अपने भाई राहुल गांधी के साथ एक रोड-शो किया। बता दें कि वायनाड उपचुनाव में प्रियंका गांधी का सामना भाजपा उम्मीदवार नव्या हरिदास से होने वाला है। रोड शो में शामिल हुए ये नेताराहुल गांधी के अलावा प्रियंका के इस रोड शो में उनकी मां सोनिया गांधी और पति रॉबर्ट वाड्रा भी मौजूद रहे। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल समेत पार्टी के अन्य नेता भी इस रोड शो में शामिल हुए। प्रियंका गांधी ने किया लोगों को संबोधितरोड-शो में प्रियंका गांधी ने लोगों को संबोधित भी किया। उन्होंने कहा, “पिछले 35 सालों से मैं अलग-अलग चुनावों के लिए प्रचार कर रही हूं। यह पहली बार है जब मैं आपके समर्थन की मांग अपने लिए कर रही हूं। यह एक बहुत ही अलग एहसास है। मैं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी का बहुत आभारी हूं कि उन्होंने मुझे वायनाड से उम्मीदवार बनने का सौभाग्य दिया।” उन्होंने आगे कहा, “सत्य और अहिंसा ने मेरे भाई (राहुल गांधी) को एकता और प्रेम के लिए देशभर में 8000 किमी पैदल चलने के लिए प्रेरित किया। जब पूरी दुनिया उनके खिलाफ थी, तब आप उनके साथ खड़े थे। मेरे भाई को लड़ने के लिए आपलोगों ने साहस दिया। मेरा पूरा परिवार आपका कर्जदार है। मुझे मालूम है कि उसे (राहुल गांधी) आपलोगों को छोड़ना पड़ा और मैं आपसे वादा करती हूं कि मैं आपके और उसके बीच के संबंधों को मजबूत करूंगी। उन्होंने मुझे बताया कि आप किन बड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। मेरे भाई ने मुझे बताया कि आपलोगों की क्या तकलीफ है। मैं आपके घर आना चाहती हूं और आपसे सीधे समझना चाहती हूं कि आपकी समस्याएं क्या हैं और हम उनसे कैसे निपट सकते हैं।” कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी रोड-शो को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “वायनाड देश का ऐसा निर्वाचन क्षेत्र है जहां से दो सांसद हैं, एक आधिकारिक सांसद और दूसरा अनौपचारिक सांसद।” प्रियंका गांधी के नामांकन पर कांग्रेस सांसद ने दी प्रतिक्रियाप्रियंका गांधी के नामांकन पर कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा, “आप जो ऊर्जा यहां देख रहे हैं, यह कुछ ऐसा है, जिसका हम सभी इंतजार कर रहे थे। हम चाहते थे कि प्रियंका गांधी किसी भी सीट से चुनाव लड़े, लेकिन हमने कभी ऐसा नहीं सोचा था कि किस्मत हमारे पास चलकर आएगी। हम सभी उत्साहित हैं। हर तरफ उत्साह है। यह वायनाड और केरल के लिए दोहरा सौभाग्य है, क्योंकि इसे अब स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा- प्रियंका गांधी वाड्रा, लोकसभा की सदस्य, वायनाड, केरल।” नव्या हरिदास ने प्रियंका गांधी को दी चुनौतीभाजपा उम्मीदवार नव्या हरिदास ने कांग्रेस को पहले ही कड़े मुकाबले की चुनौती दे चुकी हैं। उन्होंने कहा था कि आगामी उपचुनाव में प्रियंका गांधी को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।। उन्होंने कहा,”मेरी प्रतिद्वंद्वी प्रियंका गांधी हैं। मैं केवल इतना कहना चाहूंगी कि वायनाड में कांग्रेस को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। राहुल गांधी ने रायबरेली की सीट बरकरार रखने के लिए वायनाड की सीट छोड़ दी थी। जब वायनाड के लोगों को भूस्खलन का सामना करना पड़ा, तो उनके पास इन मुद्दों को उठाने के लिए संसद में कोई प्रतिनिधि नहीं था।” प्रियंका गांधी का पहला चुनावनव्या ने आगे कहा, “पिछले पांच वर्षों में राहुल गांधी ने शायद ही इस निर्वाचन क्षेत्र का दौरा किया हो। वे यहां के लोगों के मुद्दों को उठाने में भी नाकाम रहें। यह मेरा पहला लोकसभा चुनाव होगा।” उन्होंने यह भी कहा था कि वायनाड गांधी परिवार के लिए सिर्फ एक दूसरी सीट है। बता दें कि प्रियंका गांधी के साथ नव्या हरिदास का भी यह पहला चुनाव होगा। 13 नवंबर को होने वाले इस उपचुनाव में एलडीएफ ने भी उम्मीदवार खड़ा किया। उन्होंने सत्यन मोकेरी को अपना उम्मीदवार बनाया है।

अध्यक्ष नड्डा ने मप्र भाजपा के ‘I am BJP Future Force’ अभियान की तारीफ की और उन्होंने अन्य राज्यों को भी इसे अपनाने को कहा

भोपाल मध्य प्रदेश भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साकार करने के उद्देश्य से ‘आई एम बीजेपी फ्यूचर’ नामक अनूठे सदस्यता अभियान का आयोजन किया। इस अभियान की सफलता ने राष्ट्रीय स्तर पर भी पार्टी का ध्यान आकर्षित किया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस अभियान की प्रशंसा की और कहा कि मध्य प्रदेश भाजपा ने प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करने में अग्रणी भूमिका निभाई है। ‘आई एम बीजेपी फ्यूचर’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गैर-राजनीतिक युवाओं और प्रोफेशनल्स को पार्टी की विचारधारा से जोड़ना था। मध्य प्रदेश के भोपाल, जबलपुर, उज्जैन, और इंदौर में आयोजित इन कार्यक्रमों के जरिए 5000 से ज्यादा प्रोफेशनल्स ने भाजपा की सदस्यता ली। इस अनूठी पहल के तहत मध्य प्रदेश भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप एक सशक्त और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नड्डा ने की तारीफ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश भाजपा का यह कदम एक मिसाल है। प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करने में मध्यप्रदेश भाजपा अग्रणी भूमिका निभा रहा है। सभी राज्यों को भी इस तरह के प्रोग्राम आयोजित करने चाहिए, ताकि युवा और प्रोफेशनल्स राजनीति में शामिल हो सकें और 2047 के विकसित भारत के सपने को साकार कर सकें। चार प्रमुख शहरों में सफलता का सफर भोपाल (5 अक्तूबर): सफल लांच भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित इस अभियान का लांच 5 अक्तूबर को हुआ, जहां 150 प्रोफेशनल्स ने भाजपा की सदस्यता ली। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने इस कार्यक्रम का नेतृत्व किया और पार्टी के मूल्यों व दृष्टिकोण को साझा किया। जबलपुर (11 अक्तूबर): जोश और उमंग जबलपुर में 11 अक्तूबर को 300 से अधिक प्रोफेशनल्स भाजपा से जुड़े। वीडी शर्मा ने इस अवसर पर कहा, “युवा प्रोफेशनल्स का जुड़ना पार्टी के लिए एक नई ऊर्जा का संचार है।” उज्जैन (13 अक्तूबर): मुख्यमंत्री का नेतृत्व उज्जैन में 13 अक्तूबर को 500 से अधिक प्रोफेशनल्स ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस कार्यक्रम का नेतृत्व किया और प्रोफेशनल्स को भाजपा की विचारधारा से अवगत कराया। इंदौर (15 अक्तूबर): ग्रैंड फिनाले इंदौर में आयोजित ग्रैंड फिनाले में 1500 से अधिक प्रोफेशनल्स भाजपा से जुड़े। वीडी शर्मा ने इस मौके पर कहा, “यह कार्यक्रम हमारे भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेगा।

‘नए जोडे 16-16 बच्चे पैदा करें…’ CM चंद्रबाबू नायडू के बाद अब CM स्टालिन ने जनसंख्या बढ़ाने पर दिया जोर

चेन्नई आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने हाल ही में महिलाओं से राज्य में जनसंख्या स्थिर करने के लिए अधिक बच्चे पैदा करने के लिए कहा था। इसके सिर्फ दो दिन बाद ही तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एक तमिल कहावत का हवाला देते हुए कहा है कि लोकसभा परिसीमन की प्रक्रिया लोगों को 16 बच्चे पालने के बारे में सोचने पर मजबूर कर सकती है। स्टालिन का यह बयान 21 अक्टूबर को चेन्नई में एक सामूहिक विवाह समारोह में शामिल होने के दौरान आया। इस कार्यक्रम में स्टालिन ने जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया के बारे में बात की। इस दौरान उन्होंने एक तमिल कहावत का उल्लेख किया “पथिनारुम पेत्रु पेरु वझवु वझगा,” जिसका अर्थ है 16 अलग-अलग तरह की संपत्ति अर्जित करना और समृद्ध जीवन जीना। मुख्यमंत्री ने कहा, “संसद परिसीमन प्रक्रिया लोगों को कई बच्चे पैदा करने और छोटे परिवार के विचार को त्यागने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। परिणाम जो भी हो अपने बच्चों को तमिल नाम दें।” कार्यक्रम में स्टालिन ने कहा कि पहले बुजुर्ग नवविवाहित जोड़ों को 16 तरह की संपत्ति (पथिनारुम पेत्रु पेरु वझवु वझगा) पाने का आशीर्वाद देते थे, जिसमें प्रसिद्धि, शिक्षा, वंश, धन आदि शामिल थे, न कि 16 बच्चे। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे लोग समृद्धि के लिए छोटे परिवार को बढ़ाने में विश्वास करने लगे हैं। स्टालिन ने कहा, “उस आशीर्वाद का मतलब 16 बच्चे पैदा करना नहीं है, अब ऐसी स्थिति पैदा हो गई है कि लोगों को लगता है कि अब उन्हें सचमुच 16 बच्चे पैदा करने चाहिए, न कि एक छोटा और समृद्ध परिवार।” आपको बता दें कि भारत के दक्षिणी राज्यों को चिंता है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया संसद में उनके प्रतिनिधित्व को कम कर सकती है। इस साल फरवरी में तमिलनाडु विधानसभा ने परिसीमन प्रक्रिया का विरोध करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था। चंद्रबाबू नायडू ने क्या कहा 19 अक्टूबर को अमरावती में एक रैली के दौरान चंद्रबाबू नायडू ने कहा था कि आंध्र प्रदेश में जनसंख्या प्रबंधन की आवश्यकता है। यहां वृद्ध लोगों की संख्या में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा, “2047 तक हम अधिक युवा होंगे। 2047 के बाद अधिक वृद्ध लोग होंगे। एक महिला अगर दो से कम बच्चे जन्म देती है तो जनसंख्या कम हो जाएगी। यदि आप दो से अधिक बच्चों को जन्म देती हैं तो जनसंख्या बढ़ जाएगी।” आपको बता दें कि दक्षिणी राज्य की जन्म दर 1.6 तक गिर गई है। उन्होंने आशंका जताई कि वर्तमान स्थिति के जारी रहने से जन्म दर में 1 या उससे भी कम की गिरावट आ सकती है। उन्होंने कहा कि समाज में केलव वृद्ध लोग ही दिखाई देंगे। नायडू के बयान से राजनीतिक बखेरा चंद्रबाबू नायडू की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआरसीपी के वरिष्ठ नेता जुपुडी प्रभाकर राव ने मुख्यमंत्री के लोगों से लगभग 10 साल पहले कम बच्चे पैदा करने और अब अधिक बच्चे पैदा करने के विजन की प्रभावशीलता पर सवाल उठाया।

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