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इस टीडीपी नेता के खूब चर्चे, केंद्रीय मंत्री पद की शपथ लेने से पहले 21 बार लिखा ‘ओम श्री राम’

तमिलनायडु तेलुगु देशम पार्टी के नेता और नवनिर्वाचित लोकसभा सांसद किंजरापु राम मोहन नायडू ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया है। इससे पहले, गुरुवार को पारंपरिक अनुष्ठान करते हुए एक समारोह का आयोजन हुआ। इस दौरान उन्होंने एक शीट पर 21 बार ‘ओम श्री राम’ लिखा। दोपहर 1:11 बजे बताए गए शुभ समय पर इसे अंजाम दिया गया। इस कार्य ने कई सहकर्मियों और पर्यवेक्षकों का ध्यान खींचा। रिपोर्ट के मुताबिक, नायडू ने इसके बाद अपनी मां, पत्नी और टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू को नई भूमिका के बारे में बताया। उन्होंने नागर विमानन मंत्री का कार्यभार संभाला है। राम मोहन नायडू ने रविवार को कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली थी। तीन बार के सांसद 36 वर्षीय नायडू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले मंत्रिमंडल में सबसे कम उम्र के कैबिनेट मंत्री हैं। वह नागर विमानन मंत्रालय में ज्योतिरादित्य सिंधिया की जगह ले रहे हैं। सिंधिया को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में संचार मंत्री बनाया गया है। नायडू ने अपना पदभार ग्रहण करने के बाद कहा कि उड़ान में सुगमता का परिदृश्य बनाना उनकी सबसे अहम प्राथमिकताओं में से एक होगा। उड़ान में सुगमता शब्द पर दिया जोर केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘हम हवाई यात्रा को देश के आम आदमी के लिए अधिक सुलभ और अधिक आसान बनाएंगे। मैं उड़ान में सुगमता शब्द पर जोर दे रहा हूं, चाहे वह आराम या सुविधा या सुरक्षा के संदर्भ में हो। हम आज जो भी योजना या विचार प्रक्रिया से गुजर रहे हैं, उसमें इसे केंद्र बना देंगे।’ उन्होंने कहा कि वह मंत्रालय के लिए 100-दिवसीय कार्ययोजना तैयार करना चाहेंगे, जो प्रधानमंत्री मोदी का बेहतरीन सुझाव है। हवाई टिकटों की ऊंची कीमतों से जुड़े सवाल पर मंत्री ने कहा, ‘मैं समीक्षा बैठकें करने जा रहा हूं। निश्चित रूप से मेरा इरादा इन कीमतों को कम करना होगा क्योंकि यह आम आदमी के लिए एक चुनौती है। हमारा इरादा हवाई यात्रा को आम आदमी तक पहुंचाना है।’

TMC ने की उम्मीदवारों की घोषणा, 10 जुलाई को बंगाल की चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव..

कोलकाता/शिमला  पश्चिम बंगाल में सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस ने राज्य की चार विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों के लिए शुक्रवार को पार्टी उम्मीदवारों के नाम शुक्रवार को घोषित कर दिये। प्रदेश की रायगंज, रानाघाट (अजा), बगदाह(अजा) और मानिकतला विधानसभा उपचुनाव के लिए आगामी 10 जुलाई को मतदान कराये जायेंगे। तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि रायगंज से पूर्व विधायक कृष्ण कल्याणी को दोबारा उम्मीदवार बनाया गया है। इसके साथ ही रानाघाट से मुकुटमणि अधिकारी, बगदाह से मधुपर्णा ठाकुर और मानिकतला से सुप्ति पांडे चुनाव लडेंगी। भारत चुनाव आयोग ने देश के सात राज्यों की 13 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराये जाने की घोषणा की है। घोषित कार्यक्रम के मुताबिक उपचुनाव के लिए अधिसूचना 14 जून को जारी की जायेगी। नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 21 जून है और 24 जून को इनकी जांच होगी तथा 26 जून तक नाम वापस लिये जा सकेंगे। मतदान 10 जुलाई को होगा और 13 जुलाई को मतगणना होगी। भाजपा ने उपचुनाव के लिए तीन उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की  हिमाचल प्रदेश की तीन सीटों पर होने वाले आगामी विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह ने केंद्रीय चुनाव समिति की ओर से उम्मीदवारों के नामों पर मंजूरी दी है। इनमें देहरा से होशियार सिंह चम्बयाल, हमीरपुर से आशीष शर्मा और नालागढ़ से कृष्ण लाल ठाकुर शामिल हैं। इस सीटों पर 10 जुलाई को मतदान होगा और 13 जुलाई को मतगणना होगी।  

विपक्ष ने उन वोटों पर जीती है , जिनके हिंदू हृदयसम्राट बाल ठाकरे के बजाय ‘जनाब’ बालासाहब कहना शुरू कर दिया : फडणवीस

Sanjay Raut had fun by posting photos.

मुंबई बीजेपी नेता और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने कहा, मुंबई में NDA को MVA से 2 लाख ज्यादा वोट मिले, लेकिन उनकी चार और हमारी दो सीटें आईं. फडणवीस ने आगे कहा, उद्धव ठाकरे को ना मराठी मानुष का वोट मिला, ना उत्तर भारतीयों का वोट मिला. उन्हें सिर्फ उन लोगों का वोट मिला है, जिनके लिए उद्धव ठाकरे ने हिंदू भाई और बहनों कहना छोड़ दिया है. जिनके लिए उद्धव ठाकरे हिंदू हृदय सम्राट बाल ठाकरे के बजाए जनाब बालासाहब कहने लगे हैं. हाल ही में संपन्न हुए आम चुनावों में शिवसेना (यूबीटी) ने मुंबई की छह में से तीन सीटें जीतीं हैं. जबकि भाजपा, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और कांग्रेस एक-एक सीट पर चुनाव जीती है. पूरे राज्य में सबसे ज्यादा 13 सीटें कांग्रेस ने जीती हैं. बीजेपी और उद्धव गुट ने 9-9 सीटों पर जीत हासिल की है. शरद पवार गुट ने 9 सीटें जीती हैं. शिंदे गुट ने 7 और अजित पवार गुट ने एक सीट पर जीत दर्ज की है. बीजेपी ने राज्य की 28 सीटों पर चुनाव लड़ा था. शिंदे की अगुआई वाली शिवसेना ने 15 सीटों पर चुनाव लड़ा था. महाराष्ट्र में कुल 48 सीटें हैं. ‘विपक्ष की झूठी कहानी से हमें नुकसान हुआ’ फडणवीस ने आगे दावा किया कि अल्पसंख्यकों का समर्थन हासिल करने के लिए पिछले छह महीनों में उद्धव ठाकरे ने अपने भाषणों की शुरुआत ‘मेरे हिंदू भाइयों और बहनों’ कहना बंद कर दिया था. उन्होंने स्वीकार किया कि लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान विपक्ष ने एक झूठी कहानी फैलाई और कहा कि बीजेपी संविधान बदलना चाहती है और आरक्षण समाप्त करना चाहती है, इससे हमें भारी नुकसान हुआ. अब जनता बताएगी कि फर्जी कहानी से काम नहीं चलेगा फडणवीस का कहना था कि मुंबई स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनावों की घोषणा हो चुकी है. हमें इसे फिर से जीतना है. हमने इसे कुछ साल पहले अपने पूर्व राजनीतिक सहयोगी (शिवसेना) को दे दिया था. अब इसे वापस जीतने का समय आ गया है. हमारी उम्मीदवार किरण शेलार जीतेंगी और यह साबित करेंगी कि बीजेपी के खिलाफ फर्जी कहानी अब से काम नहीं चलेगा. मोदी ने पूरे देश में संविधान लागू किया उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के पहले मुखिया हैं, जिन्होंने पूरे देश में संविधान लागू किया. पहले अनुच्छेद 370 के कारण संविधान जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होता था. उसके (अनुच्छेद 370) हटने के बाद अब वहां भी संविधान लागू है. हमें मुंबई में MVA से 2 लाख से ज्यादा वोट मिले फडणवीस ने कहा, बीजेपी को मुंबई में 26 लाख वोट मिले. जबकि एमवीए उम्मीदवारों को 24 लाख वोट मिले, लेकिन वोटों के अंकगणित ने उनकी मदद की और हम (सत्तारूढ़ भाजपा और शिवसेना) सिर्फ दो सीटें जीत सके. डिप्टी सीएम ने कहा, यह भी एक अच्छा संकेत है कि आदित्य ठाकरे की वर्ली विधानसभा सीट उनके उम्मीदवार (दक्षिण मुंबई लोकसभा सीट) को सिर्फ 6 हजार वोटों की बढ़त दे सकी है. इसका स्पष्ट मतलब है कि उद्धव गुट का करिश्मा खत्म हो गया है और नागरिक चुनावों में बीजेपी बढ़त बनाएगी. तुष्टिकरण के लिए गले लग रहे हैं… मुंबई में बीजेपी अध्यक्ष आशीष शेलार ने कहा, जब मोदी, अमित शाह ने पीएफआई पर प्रतिबंध लगाया था. तब भी यूथ टॉक ने इसका स्वागत नहीं किया था. लेकिन वोट बैंक तुष्टिकरण के लिए आज मुस्लिम समाज के लोग गले लग रहे हैं और नंगी तलवारें अपना रहे हैं अस्तित्व में ले रहे हैं.  

मेरी पार्टी की कोशिश राज्य विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करनी होगी – शरद पवार

Arvind Kejriwal's troubles increased, CBI arrested him in liquor policy case

पुणे,  राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद पवार (राकांपा-एसपी) प्रमुख शरद पवार ने  कहा कि उनका प्रयास महाराष्ट्र की कमान संभालना है और इसके लिए उनकी पार्टी को इस साल के अंत में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करनी होगी। हाल में संपन्न आम चुनावों में शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (एसपी) ने महाराष्ट्र में लोकसभा की दस सीट पर चुनाव लड़ा था और आठ पर जीत हासिल करके प्रभावशाली प्रदर्शन किया। पवार की पुत्री और राकांपा (एसपी) उम्मीदवार सुप्रिया सुले ने अपने चचेरे भाई अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को हराकर बारामती सीट पर लगातार चौथी बार जीत हासिल की। लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही शरद पवार बारामती में लोगों से मिल रहे हैं और राज्य विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रहे हैं। बारामती के शिरसुफल गांव में लोगों को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चुनाव के दौरान बारामती निर्वाचन क्षेत्र के लोग चुप रहे। उन्होंने कहा, ‘हमारी पार्टी के पदाधिकारी मुझसे कहते थे कि बारामती के लोग चुप हैं और वह खुलकर कुछ भी नहीं कह रहे हैं। मैंने उनसे कहा कि चिंता न करें क्योंकि भले ही यहां कि जनता कुछ नहीं कह रही हो, लेकिन वे बटन (ईवीएम में) सही दबाएंगे। और अंत में वही हुआ। जैसे ही ईवीएम खुलीं, जादू दिखा क्योंकि आप लोगों ने बड़ी संख्या में मतदान किया।’ नजदीक आते हुए राज्य विधानसभा चुनाव के मद्देनजर शरद पवार ने लोगों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘अगले तीन या चार महीने में राज्य विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। मेरा प्रयास राज्य की कमान संभालने का होगा और इसे हासिल करने के लिए हमें विधानसभा चुनाव जीतना होगा।’ शरद पवार ने इस दौरान याद दिलाया कि वह चार बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, एक दशक तक केंद्रीय कृषि मंत्री और दो साल तक रक्षा मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने कहा, ‘यह सब तभी संभव हो सकता है जब आपके पास सामूहिक शक्ति हो। आपने जो मुद्दे मेरे सामने रखे हैं, मैं उनका समाधान करने का प्रयास करूंगा। हालांकि, अभी मैं आश्वासन नहीं दे सकता क्योंकि दूसरी सरकार है। लेकिन चार महीने बाद, हम निश्चित रूप से इन मुद्दों का समाधान कर सकते हैं।’ शरद पवार ने लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई टिप्पणियों को लेकर उनकी आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री ने कई ऐसे विषयों पर बात की, जिन पर टिप्पणी करने से बचा जा सकता था।’    

नीट परीक्षा में हुई धांधली के आरोपों पर सरकार का जो रवैया रहा है, उस पर आत्ममंथन करने की जरूरत -गोगोई

नई दिल्ली  कांग्रेस ने चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित ‘राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा -स्नातक’ (नीट-यूजी), 2024 में कथित धांधली की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग  फिर उठाई और कहा कि 24 जून से आरंभ हो रहे संसद के सत्र के दौरान इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जाएगा। पार्टी नेता गौरव गोगोई ने कहा कि कांग्रेस इस मामले में सीबीआई जांच चाहती है, लेकिन अगर सरकार इसके लिए तैयार नहीं है तो फिर उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच होनी चाहिए। मुख्य विपक्षी पार्टी इस मामले में लगातार यह मांग कर रही है। केंद्र सरकार ने  उच्चतम न्यायालय से कहा कि नीट (स्नातक) के 1,563 अभ्यर्थियों को कृपांक (ग्रेस मार्क) देने के फैसले को निरस्त कर दिया गया है और उन्हें 23 जून को पुन: परीक्षा देने का विकल्प मिलेगा। केंद्र और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के वकीलों ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की अवकाशकालीन पीठ को बताया कि जिन विद्यार्थियों को कृपांक दिए गए थे, उन्हें पुन: परीक्षा का विकल्प दिया जाएगा। उधर, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नीट में प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों को खारिज करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि इसका कोई प्रमाण नहीं है। कांग्रेस सांसद गोगोई ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘नीट परीक्षा में हुई धांधली के आरोपों पर सरकार का जो रवैया रहा है, उस पर उन्हें आत्ममंथन करने की जरूरत है। उच्चतम न्यायालय की सुनवाई में सरकार ने जताया है कि 1563 छात्रों का स्कोरकार्ड रद्द किया जाएगा और उन्हें 23 जून को दोबारा परीक्षा देने का विकल्प मिलेगा। वे बच्चे जो दोबारा परीक्षा नहीं देना चाहते, उनके कृपांक हटाने के बाद जो अंक रहेंगे, वही फाइनल अंक माने जाएंगे। जो छात्र 23 जून को दोबारा परीक्षा देंगे, उनका 30 जून को परिणाम आएगा और फिर 6 जुलाई से काउंसलिंग शुरू होगी।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस मामले पर चर्चा से भाग रहे हैं। गोगोई ने कहा, ‘‘जिस एनटीए के नेतृत्व में यह पूरा घोटाला हुआ, आप उसी एजेंसी से मामले में जांच करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है?’’ उन्होंने कहा, ‘‘परीक्षा केंद्र और कोचिंग सेंटर का एक गठजोड़ बन चुका है, जिसने आज हमारे मध्यम-गरीब वर्ग को हिला कर रख दिया है। ‘पैसे दो-पेपर लो’ जैसी सांठगांठ की जांच एनटीए कैसे कर पायेगा ? इसमें एनटीए का कोई न कोई अधिकारी शामिल है। ऐसे में एनटीए निष्पक्ष जांच कैसे करेगा ?’’ कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘ कांग्रेस इस मामले में सीबीआई जांच चाहती है। यदि सरकार सीबीआई जांच के लिए तैयार नहीं है तो हम उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग करते हैं।’’ गोगोई ने दावा किया, ‘‘हमने अलग-अलग रिकॉर्डिंग सुनी है कि कैसे लाखों रुपये मांगे जा रहे हैं। एक ही सेंटर में बच्चों को एक जैसे नंबर मिल रहे हैं। इस मामले पर सरकार का रवैया कमजोर रहा है और वह इस मुद्दे से भाग रही है। लेकिन देश के मुद्दों को उठाना विपक्ष का कर्तव्य है और हम सदन के अंदर अपने 24 लाख छात्रों की आवाज जोर-शोर से उठाएंगे।’’ सरकार को नीट परीक्षा को लेकर जल्द लेना चाहिए फैसला : गहलोत  राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (नीट) में एनटीए की भूमिका को संदेहास्पद बताते हुए कहा है कि अगर सरकार की अभ्यर्थियों के साथ न्याय करने की मंशा है तो नीट परीक्षा को लेकर जल्द से जल्द फैसला लेना चाहिए। गहलोत ने गुरुवार को यहां सोशल मीडिया पर यह बात कही। उन्होंने कहा कि परीक्षा में हुईं गड़बड़ियों को लेकर आ रहीं सूचनाओं से यह स्पष्ट है कि यह पूरी परीक्षा संदेह के घेरे में है। परीक्षा कराने वाली एजेंसी एनटीए की भूमिका ही संदेहास्पद है। यदि सरकार की अभ्यर्थियों के साथ न्याय करने की मंशा है तो नीट परीक्षा को लेकर जल्द से जल्द फैसला लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर मेडिकल की प्रवेश परीक्षा में ही ऐसी अनियमितताएं हो जाएंगी तो यह देश में मेडिकल सेवाओं के भविष्य पर सवालिया निशान लगा देगा।  

विधानसभा चुनाव में आदित्य के खिलाफ उतारेंगे राज ठाकरे, जानें तैयारी

मुंबई लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद महाराष्ट्र में बीजेपी के अगुवाई वाली महायुति और विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाडी ने विधानसभा की तैयारियां शुरू कर दी हैं। विधानसभा चुनाव में शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे का मुकाबला मनसे के कैंडिडेट से हो सकता है। सूत्रों के अनुसार महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) चीफ राजठाकरे ने संदीप देशपांडे को चुनाव मैदान में उतरने की हरी झंडी दे दी है। मनसे की तरफ से विधानसभा चुनावों में बीजेपी से गठबंधन के तहत 20 सीटों की मांग की गई है। ऐसे में राज ठाकरे संदीप देशपांडे को आदित्य के खिलाफ महायुति को कैंडिडेट बनाना चाहते हैं। आदित्य ठाकरे मुंबई की वर्ली सीट से विधायक हैं। 2019 के चुनाव में आदित्य ठाकरे ने एनसीपी कैंडिडेट सुरेश माने को 67,427 वोटों से हराया था। मनसे ने शुरु किया पोस्टर वार राज ठाकरे की तरफ से हरी झंडी मिलने के बाद मनसे नेता संदीप देशपांडे तैयारियों में जुट गए हैं। मनसे ने वर्ली विधानसभा क्षेत्र में पोस्टर भी लगाए गए हैं। संदीप देशपांडे राज ठाकरे के सबसे करीबी लोगों में गिने जाते हैं। अगर देशपांडे वर्ली सीट से चुनाव लड़ते हैं तो महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में इस सीट पर जबरदस्त मुकाबला देखने काे मिल सकता है। मनसे ने महायुति में मनसे महायुति 20 सीटों की मांग की है। वर्ली विधानसभा सीट पर कभी भी बीजेपी को जीत नहीं मिली है। इस सीट पर अळभी तक कांग्रेस और शिवसेना का ही कब्जा रहा है। 1978 में एक बार कम्युनिस्ट पार्टी को जीत मिली थी। ऐसे में मुमकिन है कि यह सीट मनसे को मिल जाए। शहरी क्षेत्रों पर है मनसे की नजर राज ठाकरे की अगुवाई वाली महाराष्ट्र नव निर्माण सेना ने लोकसभा चुनावों में बिना शर्त बीजेपी को समर्थन दिया था। पार्टी ने कोई सीट नहीं ली थी, लेकिन लोकसभा चुनाव नतीजे आने के बाद पार्टी चुनावी मोड में आ गई है। सूत्रों की मानें तो मनसे ने जिन 20 सीटों को लड़ने के लिए चिन्हित किया है। उनमें से ज्यादा सीटें मुंबई और मुंबई से जुड़े मेट्रोपॉलिटन रीजन की हैं। इसके अलावा कुछ सीटें नासिक, औरंगाबाद और पुणे की हैं। पार्टी ने मुंबई की सीटों से अपने बड़े चेहरों को उतार सकती हैं। इनमें संदीप देशपांडे के अलावा नितिन सरदेसाई, शालिनी ठाकरे के नाम चर्चा में हैं।

सरकार ने करोड़ों युवाओं का भविष्य बर्बाद किया, पैसे दो, पेपर पाओ का खेल चल रहा है: खरगे

नई दिल्ली मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में पेपर लीक के मामले को लेकर कांग्रेस ने सरकार की तीखी आलोचना की है। पार्टी ने कहा कि इस मामले को लेकर देश में जो गुस्सा है उसकी गूंज संसद में भी सुनाई देगी। साथ ही कांग्रेस ने नीट परीक्षा मुद्दे की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की अपनी मांग दोहराई। कांग्रेस ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के महानिदेशक को हटाने की भी मांग की है। पार्टी ने दावा किया है कि नीट परीक्षा की जांच के लिए चल रही मांग के प्रति भाजपा सरकार का रवैया गैरजिम्मेदाराना और असंवेदनशील है। सरकार ने करोड़ों युवाओं का भविष्य बर्बाद किया कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को कहा कि पिछले दस सालों में मोदी सरकार ने पेपर लीक और धांधली के जरिए करोड़ों युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया है। पैसे दो, पेपर पाओ का खेल चल रहा है- खरगे कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “नीट परीक्षा में ग्रेस मार्क्स ही एकमात्र समस्या नहीं थी। इसमें धांधली हुई है, पेपर लीक हुए हैं, भ्रष्टाचार हुआ है। मोदी सरकार के कामों की वजह से नीट परीक्षा में शामिल होने वाले 24 लाख छात्रों का भविष्य दांव पर है।” उन्होंने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि परीक्षा केंद्र और कोचिंग सेंटर का गठजोड़ बन गया है, जहां “पैसे दो, पेपर पाओ” का खेल चल रहा है। मोदी सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “मोदी सरकार अपने कामों की जिम्मेदारी एनटीए के कंधों पर डालकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। पूरे नीट घोटाले में कांग्रेस पार्टी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक निष्पक्ष जांच की मांग करती है।” जांच के बाद दोषियों को कड़ी-से कड़ी सजा दी जाए उन्होंने कहा, “जांच के बाद दोषियों को कड़ी-से कड़ी सजा दी जाए और लाखों छात्र-छात्राओं को मुआवजा देकर उनका साल बर्बाद होने से बचाया जाए। पिछले दल सालों में मोदी सरकार ने पेपर लीक और धांधली से करोड़ों युवाओं का भविष्य बर्बाद किया है।”

कांग्रेस ने फिर की मांग, NEET परीक्षा घोटाले की हो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच

Will Arvind Kejriwal get relief? Hearing on bail plea continues in court

नई दिल्ली मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित ‘राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक’ (NEET-UG) 2024 में कथित धांधली की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की है। गुरुवार को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने फिर से अपनी मांग दोहराई है और कहा है कि 24 जून से आरंभ हो रहे संसद के सत्र के दौरान इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जाएगा। गोगोई ने कहा कि कांग्रेस इस मामले में सीबीआई जांच चाहती है, लेकिन अगर सरकार इसके लिए तैयार नहीं है तो फिर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच होनी चाहिए। इससे पहले केंद्र सरकार ने गुरुवार को ही सुप्रीम कोर्ट में कहा कि नीट (स्नातक) के 1,563 अभ्यर्थियों को ग्रेस मार्क्स देने के फैसले को निरस्त कर दिया गया है और उन छात्रों को 23 जून को पुन: परीक्षा देने का विकल्प दिया जाएगा। केंद्र और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के वकीलों ने जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की अवकाशकालीन पीठ को बताया कि जिन विद्यार्थियों को ग्रेस मार्क्स दिए गए थे, उन्हें पुन: परीक्षा का विकल्प दिया जाएगा। उधर, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नीट में प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इसका कोई प्रमाण नहीं है। कांग्रेस सांसद गोगोई ने संवाददाताओं से कहा, “यह रहस्य की बात है कि नीट के नतीजे 4 जून को क्यों घोषित किए गए, जब पूरा देश चुनाव नतीजों पर ध्यान केंद्रित कर रहा था।  इससे यही संकेत मिलता है कि उन्हें पता था कि कोई तूफान आने वाला है। इसलिए वे 4 जून को नीट के नतीजे घोषित करके इस पर किसी भी तरह की चर्चा से बचना चाहते थे। ” गोगोई ने कहा, “इसीलिए हम इस पूरे घोटाले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच चाहते हैं क्योंकि यह 24 लाख युवाओं की जिंदगी का मसला है और उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।” उन्होंने कहा, ‘‘नीट परीक्षा में हुई धांधली के आरोपों पर सरकार का जो रवैया रहा है, उस पर उन्हें आत्ममंथन करने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में सरकार ने जताया है कि 1563 छात्रों का स्कोरकार्ड रद्द किया जाएगा और उन्हें 23 जून को दोबारा परीक्षा देने का विकल्प मिलेगा। वे बच्चे जो दोबारा परीक्षा नहीं देना चाहते, उनके गे्रस मार्क्स  हटाने के बाद जो अंक रहेंगे, वही फाइनल अंक माने जाएंगे। जो छात्र 23 जून को दोबारा परीक्षा देंगे, उनका 30 जून को परिणाम आएगा और फिर 6 जुलाई से काउंसलिंग शुरू होगी।’’ गोगोई ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस मामले पर चर्चा से भाग रहे हैं।  उन्होंने कहा, ‘‘जिस एनटीए के नेतृत्व में यह पूरा घोटाला हुआ, आप उसी एजेंसी से मामले में जांच करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है?’’ उन्होंने कहा, ‘‘परीक्षा केंद्र और कोचिंग सेंटर का एक गठजोड़ बन चुका है, जिसने आज हमारे मध्यम-गरीब वर्ग को हिला कर रख दिया है। ‘पैसे दो-पेपर लो’ जैसी सांठगांठ की जांच एनटीए कैसे कर पायेगा ? इसमें एनटीए का कोई न कोई अधिकारी शामिल है। ऐसे में एनटीए निष्पक्ष जांच कैसे करेगा ?’’ कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘कांग्रेस इस मामले में सीबीआई जांच चाहती है। यदि सरकार सीबीआई जांच के लिए तैयार नहीं है तो हम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग करते हैं।’’ गोगोई ने दावा किया, ‘‘हमने अलग-अलग रिकॉर्डिंग सुनी है कि कैसे लाखों रुपये मांगे जा रहे हैं। एक ही सेंटर में बच्चों को एक जैसे नंबर मिल रहे हैं। इस मामले पर सरकार का रवैया कमजोर रहा है और वह इस मुद्दे से भाग रही है। लेकिन देश के मुद्दों को उठाना विपक्ष का कर्तव्य है और हम सदन के अंदर अपने 24 लाख छात्रों की आवाज जोर-शोर से उठाएंगे।’’ दूसरी तरफ, घोटाले के आरोपों को खारिज करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “कोई पेपर लीक नहीं हुआ है, अभी तक कोई सबूत नहीं मिला है। लगभग 1,560 छात्रों के लिए कोर्ट द्वारा सुझाए गए मॉडल को अपनाया गया था और इसके लिए शिक्षाविदों का एक पैनल बनाया गया है।” बता दें कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने 5 मई को 4,750 केंद्रों पर नीट परीक्षा आयोजित की थी, जिसमें लगभग 24 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। मूल रूप से, परिणाम 14 जून को घोषित किए जाने थे, लेकिन निर्धारित समय से पहले ही 4 जून को नतीजे घोषित कर दिए गए, जिससे एनटीए पर और अधिक संदेह हो रहा है।  हालांकि, एनटीए ने स्पष्ट किया है कि उत्तर पुस्तिकाओं के तेजी से मूल्यांकन के कारण ऐसा किया गया। कुल 67 छात्रों ने 720 में 720 मार्क्स लाए हैं। एनटीए के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। हरियाणा के फरीदाबाद के एक केंद्र के छह छात्र उनमें शामिल थे, जिससे संभावित अनियमितताओं को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। 

भाजपा की टीमें इसी हफ्ते लोकसभा क्षेत्रों में जाएंगी, पता लगाएगी 8% वोट कहाँ गए

नईदिल्ली यूपी के नतीजों से भाजपा परेशान है। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक हड़कंप है। पार्टी का करीब आठ फीसदी वोट चोरी हो गया है। पार्टी मंथन में जुट गई है। इस चोरी का पता लगाने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित की जा रही है। फोर्स में संगठन के पदाधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधि तक सबको जगह मिलेगी। सब क्षेत्र में जाएंगे। गांव-गली, मोहल्लों में जाकर पता करेंगे कि इतनी रखवाली के बावजूद आखिर वोटों की चोरी कैसे हो गई। इसमें कौन-कौन शामिल थे। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बन चुकी है। मगर यूपी को लेकर पार्टी नेतृत्व के मन में भारी टीस है। समझ नहीं आ रहा कि सुरागरशी कैसे हो ताकि देश के सबसे बड़े सूबे में पार्टी की सियासी जमीन खिसकने के कारणों का पता लग सके। यूपी की हार को लेकर दिल्ली और यूपी के अपने तर्क हैं। मगर सच्चाई यह है कि 2019 में अकेले दम पर करीब 50 फीसदी वोट लाने वाली भाजपा अबकी बार 41 फीसदी का आंकड़ा पार करते में हांफ गई। यूपी की हार से दिल्ली बेहद चिंतित है। भाजपा की टीमें इसी हफ्ते लोकसभा क्षेत्रों में भेजी जाएंगी  प्रदेश मुख्यालय में फिर प्रदेश अध्यक्ष और महामंत्री संगठन ने चर्चा की। तय किया गया है कि प्रदेश की सभी सीटों पर हार के कारणों का पता लगाने के लिए स्पेशल टीमें गठित की जाएं। इन्हें हर जिले में लोकसभा और विधानसभा स्तर तक भेजा जाए। इसके लिए 50 से 60 चेहरे चुन लिए गए हैं। इन्हें वो सारे कारण पता लगाने होंगे, जो पार्टी की हार का कारण बने। हारी सीटें जीतना तो दूर, जीती हुई सीटें तक गंवानी पड़ी। टीमें यह भी पता लगाएंगी कि आखिर पार्टी के अगड़े-पिछड़े वोट बैंक में सेंध कैसे लगी। पार्टी के पास इतना बड़ा तंत्र होने के बावजूद चूक कहां और किस स्तर पर हुई। पार्टी सूत्रों की मानें तो इसी सप्ताह टीमों को लोकसभा क्षेत्रों में भेजा जाएगा। 1962 के बाद तीसरी बार रिपीट हुई कोई सरकार “इस जनादेश के कई पहलू हैं. 1962 के बाद यह पहली बार है कि कोई सरकार अपने दो कार्यकाल पूरे करने के बाद लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटी है…” विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA को लेकर पीएम मोदी ने कहा, “पूरा गठबंधन सारे विरोधी मिलकर उतनी सीटें नहीं जीत पाए, जितनी बीजेपी ने जीती.” मोदी ने कहा कि NDA के तीसरे कार्यकाल में देश कई बड़े फैसलों का नया अध्याय लिखेगा.”  

10 जुलाई को हिमाचल प्रदेश में 3 विधानसभा सीटों पर होंगे उपचुनाव, कांग्रेस ने बनाया प्रभारी

Tejashwi Yadav said on NEET issue

हमीरपुर हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (HPCC) के महासचिव रजनीश खिमटा ने गुरुवार को कहा कि पार्टी राज्य में आगामी विधानसभा उपचुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है और एकजुटता के साथ धनबल का मुकाबला करेगी। उन्होंने यहां जारी एक बयान में बताया कि कांग्रेस ने देहरा, नालागढ़ और हमीरपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए तीन मंत्रियों को प्रभारी नियुक्त किया है। उपचुनाव के लिए मतदान 10 जुलाई को होगा। ये सीटें तीन निर्दलीय विधायकों आशीष शर्मा (हमीरपुर), होशियार सिंह (देहरा) और केएल ठाकुर (नालागढ़) के इस्तीफे से खाली हुई हैं। तीनों विधायकों ने 22 मार्च को विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था और अगले दिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए थे। कृषि मंत्री चंद्र कुमार को देहरा विधानसभा सीट, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर को नालागढ़ सीट और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी को हमीरपुर विधानसभा सीट का प्रभारी नियुक्त किया गया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि 27 फरवरी को हुए राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने धनबल का इस्तेमाल कर सरकार को गिराने का प्रयास किया था। इस चुनाव में कांग्रेस के छह बागी विधायक और तीन निर्दलीय विधायकों समेत कुल नौ विधायकों ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया था। खिमटा ने कहा कि पार्टी ने हाल में हुए विधानसभा उपचुनाव में चार सीट जीती हैं, जिससे साबित होता है कि हिमाचल प्रदेश की जनता कांग्रेस सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों और नेतृत्व से खुश है और मतदाताओं ने भाजपा की खरीद-फरोख्त की नीतियों को नकार दिया है। उन्होंने कहा कि आगामी उपचुनाव में कांग्रेस एकजुट होकर भाजपा की अनैतिक रणनीतियों का सामना करेगी और इन तीनों सीट पर जीत दर्ज करेगी। इससे पहले भाजपा ने बुधवार को इन तीन सीट के लिए प्रभारी नियुक्त किये थे। इससे पहले हाल ही में प्रदेश की 6 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में पार्टी को 4 सीटों पर जीत मिली थी। जिसे लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था कि ‘विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास हुआ है कि जिन लोगों ने सरकार गिराने की साजिश की थी, उनके खिलाफ कार्रवाई तेज की जाए। जनता ने हमें 4 विधानसभा सीटें जिताईं हैं। लोकसभा में भी हमारा मत 14 प्रतिशत बढ़ा है। यह सब हमारे 15 महीने के कार्यकाल का परिणाम है।’  

अभिषेक बनर्जी के वयान से पश्चिम बंगाल की राजनीति में सियासी अटकलें तेज, एक्स पर लिखा फिलहाल ब्रेक ले रहा हूं…

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनावों में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए कुल 42 सीटों में से 29 पर जीत दर्ज की है। यह पिछले चुनाव से सात सीट ज्यादा है। पार्टी के महासचिव और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने भी डायमंड हार्बर सीट पर 7.10 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज की है। उन्हें कुल 10 लाख से ज्यादा वोट मिले लेकिन इस बड़ी जीत के एक हफ्ते बाद उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर कुछ ऐसा लिखा कि राज्य में और खासकर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के भीतर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को सोशल मीडिया एक्स पर एक लंबे पोस्ट में इस चुनाव में बड़ी जीत दिलाने के लिए जनता को धन्यवाद दिया है लेकिन उसी पोस्ट में उन्होंने लिखा कि वह थोड़े समय के लिए फिलहाल ब्रेक ले रहे हैं। उनके ब्रेक लेने की सूचना से राज्य की सियासत में तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगी हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बनर्जी नई सरकार के गठन के बाद पहले संसदीय सत्र और जुलाई में प्रस्तावित बजट सत्र में भी शामिल नहीं होंगे। एक्स पर अभिषेक बनर्जी ने लिखा, “पिछले साल इसी समय के आसपास मुझे नबोजोवार यात्रा में भाग लेने का मौका मिला था। मैंने जमीनी स्तर पर लोगों के सामने आने वाली समस्याओं और चुनौतियों को समझने के लिए तब पूरे पश्चिम बंगाल की यात्रा की थी। बढ़ती कीमतों और मनरेगा के बकाया भुगतान में रोक के कारण होने वाली कठिनाइयों को प्रत्यक्ष रूप से देखने से मैं बहुत प्रभावित हुआ। इसके जवाब में @AITCofficial ने राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे और लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने के लिए मामले को दिल्ली तक ले गया।। शुक्र है कि फरवरी में इस पर ध्यान दिया गया और परिवारों की मदद के लिए लक्ष्मी भंडार योजना के माध्यम से वित्तीय सहायता में वृद्धि की गई।” इसी के साथ उन्होंने विश्वास जताने के लिए जनता के प्रति आभार जताया और लिखा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे आम लोगों के गुस्से और हताशा को दर्शाते हैं। उन्होंने लिखा कि लोकसभा चुनावों का जनादेश राज्य के प्रति केंद्र की उपेक्षा से लोगों में नाराजगी का प्रदर्शन है। इसके बाद बनर्जी ने लिखा कि इलाज के लिए मैं संगठन से कुछ समय के लिए ब्रेक ले रहा हूं। इस दौरान इस समय का इस्तेमाल लोगों की जरूरतों को समझने के लिए होगा। बता दें कि इससे पहले अभिषेक बनर्जी साल 2023 में आंखों के इलाज के लिए विदेश गए थे लेकिन यह पहला मौका है, जब उन्होंने इस तरह सार्वजनिक रूप से ब्रेक लेने का ऐलान किया है। बंगाल के राजनीतिक हलकों और उनकी पार्टी में इस अचानक राजनीतिक घोषणा को लेकर चर्चा है। दूसरी तरफ, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ममता बनर्जी और उनके राजनीतिक वारिस अभिषेक के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद रहा है। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनावों के दौरान टिकट बंटवारे के दौरान यह विरोध तब दिखा, जब अभिषेक बनर्जी के विरोध के बावजूद कुछ चेहरों की उम्मीदवारी बरकरार रही, जबकि अभिषेक वहां नए और  युवा चेहरों को उतारना चाहते थे।  

हरियाणा में कांग्रेस क्रॉस वोटिंग का डर, हुड्डा की सीट भाजपा के खाते में जा सकती है

Great news! The 17th installment of Samman Nidhi will come on June 18

रोहतक कांग्रेस नेता दीपेंदर हुड्डा हरियाणा की रोहतक लोकसभा सीट से चुनाव जीत गए हैं। अब उन्हें राज्यसभा से इस्तीफा देना होगा, जिस पर दोबारा चुनाव होगा। इस तरह कांग्रेस को लोकसभा की एक सीट मिल गई है, लेकिन राज्यसभा में एक सीट छिनने का भी खतरा है। इसकी वजह यह है कि हरियाणा विधानसभा के ज्यादातर सदस्य भाजपा के पक्ष में हैं। इसके अलावा क्रॉस वोटिंग भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में हुड्डा की यह सीट भाजपा के खाते में जा सकती है। दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी के विधायक और कुछ निर्दलीय क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। ऐसा हुआ तो फिर कांग्रेस के लिए जीत संभव नहीं होगी। दीपेंदर हुड्डा 2020 में राज्यसभा पहुंचे थे और उनका कार्यकाल 2026 तक के लिए था। मौजूदा स्थिति में भाजपा मजबूत दिखती है। उसके अपने विधायकों के अलावा जेजेपी का एक गुट, कुछ निर्दलीय और एक विधायक वाली पार्टियां उसके पक्ष में हैं। नियम के अनुसार यदि कोई राज्यसभा का सांसद लोकसभा के लिए चुना जाता है तो फिर उसे अपनी सीट छोड़नी होती है। ऐसे में रोहतक से जीत के बाद दीपेंदर हुड्डा की राज्यसभा सीट खाली हो गई है। अब चुनाव आयोग को राज्यसभा सीट पर उपचुनाव के लिए नोटिफिकेशन जारी करना होगा। नियम के मुताबिक 6 महीने के भीतर ही चुनाव हो जाना चाहिए। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले इस सीट पर इलेक्शन हो सकता है। कांग्रेस एक विधायक वरुण चौधरी अब अंबाला लोकसभा सीट से सांसद चुने गए हैं। इस तरह विधानसभा की संख्या 87 ही रह गई है। यहां बहुमत का आंकड़ा 44 ही है। वहीं जेजेपी के कुल 10 विधायक हैं, लेकिन खेमेबाजी है। दो विधायकों ने खुलकर भाजपा का साथ दिया है। उसके एक विधायक देवेंदर सिंह बबली तो कांग्रेस का लोकसभा चुनाव में समर्थन कर चुके हैं। इसके अलावा एक अन्य विधायक रामकुमार गौतम भी जेजेपी लीडरशिप से नाराज हैं। राज्य में कांग्रेस के 29 विधायक हैं और उसे तीन का समर्थन हासिल है। इस तरह विपक्ष की संख्या राज्य में 32 है। जेजेपी के कुछ और विधायक कर सकते हैं क्रॉस वोटिंग वहीं भाजपा के 41 विधायक हैं और गोपाल कांडा एवं नयनपाल रावत का उसे समर्थन हासिल है। इनोलो के इकलौते विधायक अभय चौटाला और निर्दलीय बलराज कुंडू अब तक भाजपा के खिलाफ ही रहे हैं। लेकिन जेजेपी के कुछ और विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। बता दें कि राज्यसभा में विधायक किसी भी कैंडिडेट को वोट कर सकते हैं और उन पर कोई दल ऐक्शन भी नहीं ले सकता। ऐसे ही एक मामले में फैसला सुनाते हुए 22 अगस्त, 2006 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विधायक यदि राज्यसभा में दूसरे दल के नेता को वोट करता है तो उसकी मेंबरशिप खारिज नहीं हो सकती।  

राज्यसभा जाएंगी अजित पवार की पत्नी सुनेत्र, NCP ने बनाया उम्मीदवार

मुंबई महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी अध्यक्ष अजित पवार की पत्नी सुनेत्र पवार राज्यसभा उपचुनाव के लिए नामांकन करने वाली हैं। वह मुंबई में विधान भवन में अपना पर्चा दाखिल करेंगी। राज्यसभा चुनाव के लिए आवेदन दाखिल करने का आज आखिरी दिन है। सुनेत्र पवार हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में बारामती से एनसीपी उम्मीदवार और अपनी ननद सुप्रिया सुले से 1.5 लाख से अधिक मतों से हार गई थीं। आपको बता दें कि महाराष्ट्र में राज्यसभा की एक सीट के लिए उपचुनाव हो रहा है। प्रफुल्ल पटेल के इस्तीफे से यह सीट खाली हुई है। एनसीपी की ओर से सुनेत्रा पवार को मैदान में उतारा जाएगा। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, एनसीपी विधायकों ने सुनेत्रा पवार को राज्यसभा भेजने की मांग की थी। इसके बाद सुनेत्रा पवार के नाम पर मुहर लगी। प्रफुल्ल पटेल ने दिया था इस्तीफा महाराष्ट्र में राज्यसभा की दो सीटें केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल के इस्तीफे से खाली हुई हैं। प्रफुल्ल पटेल ने राज्यसभा की एक सीट से इस्तीफा दिया था। पटेल ने राज्यसभा की जिस सीट से इस्तीफा दिया था। उस सीट के कार्यकाल में चार साल बाकी थे। चुनाव आयोग (ईसीआई) ने फरवरी में पटेल द्वारा खाली की गई राज्यसभा सीट के लिए चुनाव की घोषणा की। नए राज्यसभा सांसद का चुनाव राज्य के विधायकों द्वारा किया जाएगा और एनसीपी के पास दो सत्तारूढ़ सहयोगियों भाजपा और शिवसेना की मदद से सीट जीतने की पूरी ताकत है। राज्यसभा सीट के लिए 25 जून को मतदान होना है। पवार परिवार के अलावा तीसरा नाम छगन भुजबल का है। सूत्रों की मानें तो सुनेत्रा पवार को अजित पवार दिल्ली भेज सकते हैं। क्या है एनसीपी की ताकत? अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी के पास लोकसभा में अभी सिर्फ एक सांसद है। पार्टी के महाराष्ट्र ईकाई के अध्यक्ष सुनील तटकरे इस बार जीते हैं। प्रफुल्ल पटेल राज्यसभा में इकलौते सांसद हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र में पार्टी के पास 40 विधायक है। इसके अलावा 6 विधान परिषद् सदस्य महाराष्ट्र में हैं। 3 विधायक हाल ही में संपन्न हुए अरुणाचल प्रदेश के चुनाव में जीते हैं। लोकसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग अजित पवार के अगुवाई वाली एनसीपी के गुट को असली एनसीपी माना था। इसके बाद उन्हें पार्टी के सिंबल घड़ी का भी इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी थी।  

महाराष्ट्र में बड़ा खेल होना अभी बाकी है! NCP के साथ रिश्ता खत्म कर सकती है बीजेपी

मुंबई  महाराष्ट्र लोकसभा चुनाव में महायुति को मिली कम सीटों को लेकर बयानबाजी जारी है. बीजेपी, एकनाथ शिंदे की पार्टी शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी कारणों की तलाश में जुटी है. साथ ही तीनों ही दल विपक्ष पर संविधान को लेकर झूठा प्रचार करने का आरोप लगा रही है. इस बीच आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गनाइजर में कहा गया है कि महाराष्ट्र में बीजेपी की लोकसभा चुनाव में हार का एक कारण उपमुख्यमंत्री अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी के साथ गठबंधन था. ऐसे में अब अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या बीजेपी अजित पवार के साथ संबंध तोड़ देगी. बीजेपी सीएम एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ सकती है. दी न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों ने बताया कि आरएसएस बीजेपी नेतृत्व के एनसीपी को तोड़ने और लोकसभा चुनाव से पहले अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट के साथ गठबंधन करने के फैसले से खुश नहीं है. नाम न बताने की शर्त पर एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने कहा, “आरएसएस-बीजेपी कार्यकर्ताओं को पवार विरोधी नारे के साथ तैयार किया जा रहा है. सिंचाई और महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटालों से जुड़े होने के कारण वे अजित पवार के विरोधी हैं. लेकिन जूनियर पवार के बीजेपी से हाथ मिलाने के बाद पवार विरोधी बयान पीछे छूट गया. घाव पर नमक छिड़कते हुए उन्हें महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री बना दिया गया.” नेता ने आगे कहा, “लोकसभा चुनावों में यह स्पष्ट था कि आरएसएस-बीजेपी के कार्यकर्ता एनसीपी उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने के लिए तैयार नहीं थे और कई जगहों पर आत्मसंतुष्ट रहे. नतीजतन, 2019 में बीजेपी की सीटों की संख्या 23 से घटकर 2024 में नौ रह गई.” आजीवन आरएसएस कार्यकर्ता रतन शारदा ने ऑर्गनाइजर में अपने लेख में कहा कि अजित के साथ गठबंधन करने से “बीजेपी की ब्रांड वैल्यू” कम हो गई और यह “बिना किसी अंतर वाली एक और पार्टी” बन गई. सूत्रों ने कहा कि बीजेपी नेतृत्व इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों में अजित के साथ गठबंधन न करने के प्रभाव पर विचार-विमर्श कर रहा है. “अगर हमारी पार्टी अजित को छोड़ देती है और विधानसभा चुनावों में शिंदे के साथ आगे बढ़ती है, तो ऐसा लग सकता है कि बीजेपी ने अजित का इस्तेमाल किया और बाद में उन्हें फेंक दिया. यह इस्तेमाल करो और फेंको की नीति उल्टी पड़ सकती है. लेकिन एक और परिदृश्य यह है कि अजित को सहयोगी के रूप में रखना फायदेमंद नहीं हो सकता है.”

सिंधिया की जगह पर प्रदेश से कौन जाएगा राज्यसभा? केपी यादव की दावेदारी पर भारी पड़ सकते ये तीन नाम

भोपाल लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद अब प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर में बड़ा बदलाव हो गया है। कहीं विधानसभा सीटें रिक्त हो गई हैं, तो कहीं राज्यसभा सीटों पर भी निर्वाचन होगा। सत्तारूढ़ भाजपा सहित कांग्रेस भी अपनी रणनीति बनाने में जुट गई है। ऐसे में एक सीट काफी चर्चा का विषय बनी हुई है। वह है मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट, जो कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद रिक्त हो गई है। अब इस रिक्त सीट पर उपचुनाव होना है। ऐसे में सवाल है कि भाजपा की तरफ से ज्योतिरादित्य सिंधिया की जगह कौन लेगा? दावेदारों के नाम सामने आने लगे है। भाजपा के खाते में तय है यह सीट मध्य प्रदेश में वर्तमान में विधानसभा में सदस्य संख्या के हिसाब से देखा जाए तो खाली होने वाली राज्यसभा की सीट फिर भाजपा के खाते में जाना तय मानी जा रही है। भाजपा इस सीट से किसी वरिष्ठ नेता को राज्यसभा भेजने का मन बना रही है। इससे पहले फरवरी 2024 में मध्य प्रदेश में हुए राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने दलित, ओबीसी और महिला कार्ड खेला था। इस बार भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में मध्य प्रदेश के किसी सामान्य वर्ग के नेता को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। ऐसे में इस बार संभावना जताई जा रही है कि ठाकुर या ब्राह्मण कोटे से यह पद भरा जा सकता है। पूर्व सांसद केपी यादव रेस में आगे हालांकि गुना लोकसभा सीट से पूर्व सांसद केपी यादव का टिकट काटकर ज्योतिरादित्य सिंधिया को टिकट दिया गया था। लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान अशोक नगर में केंद्रीय मंत्री अमित शाह एक सभा में पूर्व सांसद केपी यादव को दिल्ली ले जाने का संकेत दे चुके हैं। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि भाजपा यादव को राज्यसभा का टिकट दे सकती है। ऐसे में सबसे पहली दावेदारी केपी के नाम की है, लेकिन वे ओबीसी वर्ग से आते हैं। अप्रैल में ये गए हैं राज्यसभा गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के 5 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल 2 अप्रैल 2024 को समाप्त हुआ था। इसमें भाजपा के चार सांसद धर्मेंद्र प्रधान, डॉ. एल मुरुगन, अजय प्रताप सिंह और कैलाश सोनी थे, जबकि कांग्रेस के राजमणि पटेल राज्यसभा सांसद थे। तब भाजपा ने 4 सीटों में से 3 पर ओबीसी से बंशीलाल गुर्जर, दलित समाज से उमेश नाथ महाराज और महिला कोटे से माया नारोलिया को उम्मीदवार बनाया और राज्यसभा में भेजा। डॉ मुरुगन को फिर से मध्यप्रदेश के कोटे से राज्यसभा में भेजा था। इस बार जातीय समीकरण के हिसाब से अब ठाकुर या ब्राह्मण को मौका दिया जा सकता है। यह नाम सबसे उपर पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, राम मंदिर अभियान के प्रमुख नाम पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया और शिवराज सिंह चौहान के लिए विदिशा से सीट छोड़ने वाले पूर्व सांसद रमाकांत भार्गव का नाम सबसे उपर है। अगर सामान्य कार्ड नहीं चला तो पूर्व सांसद केपी यादव के नाम पर विचार किया जाएगा।   जातीय समीकरण पर होगा ध्यान माना जा रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया की खाली लोकसभा सीट पर बीजेपी जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए ही अपने प्रत्याशी का चयन करेगी. क्योंकि हाल ही में तीन राज्यसभा सीटों पर भी बीजेपी जातीय समीकरणों का पूरा ध्यान रखा था. पार्टी ने तीन राज्यसभा सीटों पर ओबीसी, अनुसूचित जाति और महिला प्रत्याशी को मौका दिया था. ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी इस बार किसी सवर्ण को मौका देगी. इसके अलावा बीजेपी किसी नए और चौंकाने वाले चेहरे को भी मौका दे सकती है. पवैया और भार्गव भी दावेदार इसके अलावा पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया और पूर्व सांसद रमाकांत भार्गव भी दावेदार हैं. क्योंकि सिंधिया के बीजेपी में आने के बाद उनके समर्थक भी बड़ी संख्या में भाजपा में आए थे. ऐसे में जयभान सिंह पवैया लंबे समय से न तो कोई चुनाव लड़ पाए और न ही उन्हें पार्टी में कोई दूसरा मौका मिला था. जबकि वह बीजेपी के फॉयरब्रांड नेता माने जाते हैं. पवैया बजरंग दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं  और राम मंदिर आंदोलन के दौरान सक्रिए थे. ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें राज्यसभा भेज सकती है. वहीं एक और दावेदार विदिशा के पूर्व सांसद रमाकांत भार्गव हैं, भार्गव ने अपनी सीट पूर्व सीएम के लिए खाली की थी. ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी सर्वण चेहरे के तौर पर उन्हें भी भेज सकती है. 

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