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अनिमेष देबबर्मा ने ‘मुझे आवंटित विभागों से मैं खुश नहीं हूं, वन विभाग तो ठीक है, लेकिन ……

अगरतला/कोझिकोड  लोकसभा चुनाव से पहले, त्रिपुरा की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व में बनी सरकार में मंत्री बने टिपरा मोथा नेता अनिमेष देबबर्मा ने कहा कि वह उन्हें आवंटित विभागों से नाखुश हैं और इस मुद्दे को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष उठाने पर विचार कर रहे हैं।संवाददाताओं से बातचीत में अनिमेष देबबर्मा ने कहा कि वह मुख्यमंत्री मणिक साहा के सामने इस मुद्दे को उठा चुके हैं। उन्होंने कहा, ‘मुझे आवंटित विभागों से मैं खुश नहीं हूं। वन विभाग तो ठीक है, लेकिन प्रिंटिंग एवं स्टेशनरी तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (टीआरईडीए को छोड़कर)… इससे मैं खुश नहीं हूं। मैंने कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी और उनसे कुछ महत्वपूर्ण विभाग आवंटित करने का आग्रह किया था, ताकि मैं ग्रामीण लोगों की मदद कर सकूं। इसमें कुछ भी छिपाने जैसा नहीं है।’ देबबर्मा ने कहा कि वह जल्द ही दिल्ली जाकर गृह मंत्री अमित शाह से मिलेंगे और उन्हें दोबारा गृह मंत्रालय का कार्यभार संभालने के लिए बधाई देंगे। उन्होंने कहा कि अपने मुद्दे को भी शाह के सामने उठाएंगे। उन्होंने कहा, ‘मैं पिछले 22 साल से राजनीति में हूं। कई विधायकों को राजनीति में केवल पांच वर्ष पूरे करने के बाद ही कई चीजें मिल जाती हैं। अगर मुझे (महत्वपूर्ण विभाग) नहीं मिलता तो कोई बात नहीं है। मैं सरकार के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन मुझे काम करना है।’ अनिमेष देबबर्मा ने आगे कहा, ‘अगर कोई मेरे अनुभव को देखे तो मैं कई साल पहले विधायक चुना गया था और उसके बाद मैंने त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) में कार्यकारी सदस्य के रूप में काम किया। इसके साथ ही विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में भी मैंने अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। मैं मुख्यमंत्री से आग्रह करता हूं कि वे मुझे महत्वपूर्ण विभाग प्रदान करें और मैं उस विभाग के लिए कुशलता से काम करूंगा।’ मार्च में टिपरा मोथा पार्टी के राज्य सरकार में शामिल होने के बाद विपक्ष के नेता अनिमेष देबबर्मा और बृषकेतु देबबर्मा को मंत्री बनाया गया है। बृषकेतु देबबर्मा को उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में राज्य मंत्री बनाया गया है। वहीं, अनिमेष देबबर्मा को वन विभाग के साथ साथ प्रिंटिंग एवं स्टेशनरी तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। मुझे बड़ी जिम्मेदारी मिली, सभी के समर्थन की बदौलत यहां पहुंचा हूं : सुरेश गोपी  केंद्रीय मंत्री और त्रिशूर लोकसभा सीट से सांसद सुरेश गोपी ने  कहा कि उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी दी गई है और क्षेत्र के सभी लोगों के समर्थन के कारण उन्हें नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के सदस्य के रूप में एक नई भूमिका मिली है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार में गोपी को पर्यटन एवं पेट्रोलियम राज्य मंत्री का पद सौंपा गया है। मंत्री बनने के बाद पहली बार केरल लौटे गोपी ने आज (बुधवार) सुबह कोझिकोड शहर में थली महादेव मंदिर में पूजा की। अभिनेता से राजनेता बने सुरेश ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनका मंदिरों और लोगों के साथ खास संबंध है और उन्होंने इन सब बातों को ध्यान में रखा है। उन्होंने कहा, ”सभी वर्ग के लोगों ने मेरा साथ दिया। मैं किसी को भी नहीं छोड़ सकता। मैंने एक जिम्मेदारी ली है। सबके समर्थन से ही मैं यहां तक पहुंचा हूं।” सुरेश गोपी ने कहा कि जनता की उन्हें अपने करीब रखेगी। गोपी ने भारत के पर्यटन राज्य मंत्री का पद संभालने पर कहा कि उनके पास बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पर्यटन गतिविधियों के लिए देश में प्रमुख स्थानों की पहचान करना उनका अहम कार्य होगा। सांसद गोपी ने कहा कि फिलहाल प्रधानमंत्री ने उनसे केवल केरल के बारे में ही बात की है। गोपी ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की एक पुजारी पर की गई टिप्पणी और कांग्रेस सांसद एम के राघवन की कोझिकोड में एम्स अस्पताल की मांग सहित किसी भी राजनीतिक मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए कहा कि वह ऐसी किसी भी चर्चा का हिस्सा नहीं बनेंगे। राघवन की एम्स अस्पताल की मांग पर गोपी ने कहा कि कांग्रेस सांसद को यह मांग करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा, ”मेरे भी कुछ अधिकार हैं। मैंने अपने अधिकार और इच्छाएं बता दी है।” भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार के तौर पर सुरेश गोपी ने त्रिशूर सीट पर जीत हासिल करते हुए केरल में पार्टी के लिए इतिहास रचा है।

भाजपा का अगला अध्यक्ष कौन, यूपी में साख लौटाना बड़ी चुनौती, विनोद, संतोष, ठाकुर, ओम माथुर, और स्मृति ईरानी के नाम चर्चा में

नई दिल्ली  नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरी बार शपथ ग्रहण लेने के बाद अब भाजपा के नए अध्यक्ष की चर्चा शुरू हो गई है। अध्यक्ष कौन बनेगा इसकी अटकलें तेज हो गई हैं। 2019 लोकसभा चुनाव के बाद जगत प्रकाश नड्डा जनवरी 2020 में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे। नड्डा का बतौर बीजेपी अध्यक्ष कार्यकाल जनवरी 2023 में खत्म हो गया। हालांकि, लोकसभा चुनाव को देखते हुए उनके कार्यकाल को जून 2024 तक बढ़ा दिया गया था। चुनाव बाद नड्डा को नरेंद्र मोदी सरकार की कैबिनेट में जगह दी गई है। माना जा रहा है कि बीजेपी के एक व्यक्ति एक पद की नीति के तहत पार्टी जल्द ही अपना नया अध्यक्ष तय करेगी। हाल ही में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयानों के बाद माना जा रहा है कि अध्यक्ष पद के चुनाव में अब संघ की ही चलेगी। विनोद, अनुराग, ओम और स्मृति के नामों की चर्चा नड्डा के बाद पहले तो अध्यक्ष पद के लिए मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर के नाम भी चर्चा में थे। मगर, इन तीनों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के बाद अब इनकी चर्चाओं पर विराम लग गया है। अब भाजपा अध्यक्ष पद की दौड़ में पार्टी महासचिव विनोद तावड़े, बीएल संतोष, अनुराग ठाकुर, के लक्षमण, ओम माथुर, सुनील बंसल के अलावा स्मृति ईरानी के नाम भी आगे चल रहे हैं। मोहन भागवत के बयान के बाद बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव में संघ की भूमिका की चर्चा तेज हो गई है इस बार भाजपा अध्यक्ष के चुनाव में संघ की चलेगी दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर राजीव रंजन गिरि के अनुसार, भाजपा भले ही राजनीतिक पार्टी हो, मगर संगठन में हमेशा संघ की ही चलती है। क्योंकि इसे चलाने वाले लोग ज्यादातर संघ से ही जुड़े होते हैं। मोहन भागवत ने हाल ही में बयान दिया था कि एक सच्चा सेवक मर्यादा का पालन करता है। जिसमें मैंने किया का भाव नहीं होता, अहंकार नहीं होता, केवल वही व्यक्ति सही अर्थों में सेवक कहलाने का अधिकारी होता है। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व को लेकर भागवत यह बयान बेहद मायने रखता है। ऐसे में आगामी वक्त में पार्टी अध्यक्ष के चुनाव में संघ की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है। भाजपा को आरएसएस का राजनीतिक संगठन माना जाता है, ऐसे में संघ अब नहीं चाहेगा कि आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन खराब हो। विनोद तावड़े प्रभावशाली महासचिव, संघ से जुड़ाव महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रह चुके तावड़े को बीएल संतोष के बाद सबसे ज्यादा प्रभावशाली महासचिव माना जाता है। उनके पास दो दशक का संगठन का अनुभव है। वह बचपन से ही संघ से जुड़े हुए हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले तावड़े के नाम पर इसलिए भी मुहर लग सकती है, क्योंकि इसी साल महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं। लक्ष्मण का नाम ओबीसी दावेदारों में आगे नड्डा के बाद भाजपा अध्यक्ष की इस रेस में बीजेपी ओबीसी मोर्चा चीफ के लक्ष्मण का नाम भी चर्चा में हैं। तेलंगाना से आने वाले लक्ष्मण बेहद कर्मठ और जुझारू जाने जाते हैं। दक्षिण के राज्यों में आंध्र प्रदेश के बाद तेलंगाना पर बीजेपी सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है। बंसल की अगुवाई में ओडिशा में बीजेपी का परचम बीजेपी अध्यक्ष की रेस में सुनील बंसल का नाम भी सामिल है, जो वर्तमान में महासचिव हैं। अमित शाह के चहेते बंसल पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और ओडिशा जैसे तीन राज्यों के इंचार्ज भी हैं। उन्हीं की अगुवाई में बीजेपी ने ओडिशा में शानदार प्रदर्शन किया और नवीन पटनायक सरकार को चारों खाने चित कर दिया। बीएल संतोष पर्दे के पीछे के रणनीतिकार भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष आरएसएस के बड़े प्रचारक भी रह चुके हैं। बीएल संतोष को बीजेपी में यह पद तब मिला, जब 13 वर्षों से यह पद संभाल रहे रामलाल की विदाई हुई। बीएल संतोष को परदे के पीछे रणनीति बनाने में माहिर माना जाता है। ओम माथुर गुजरात के प्रभारी, पीएम मोदी के चहेते राजस्थान से राज्यसभा सदस्य और भैरों सिंह शेखावत के शिष्य ओम माथुर भी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की दौड़ में हैं। पीएम मोदी के चहेते माथुर को चेहरे पर मुस्कुराहट के साथ अपनी बात कहने के लिए जाना जाता है। ओम माथुर आरएसएस के सक्रिय प्रचारक रहे हैं और पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात के प्रभारी भी रह चुके हैं। अनुराग ठाकुर को यूथ विंग के अध्यक्ष पद का अनुभव हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर का नाम भी भाजपा अध्यक्ष पद के लिए चर्चा में है। हमीरपुर लोकसभा सीट से पांच बार के सांसद अनुराग ठाकुर को इस बार मोदी मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई है। इससे भी उनको पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चाओं ने जोर पकड़ा। अनुराग ठाकुर यूथ बीजेपी के अध्यक्ष के रूप में काम कर चुके हैं। वह बीसीसीआई के संयुक्त सचिव भी रह चुके हैं। स्मृति ईरानी का नाम भी रेस में, पहली महिला अध्यक्ष संभव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी कई सभाओं में महिला वोटर्स की वकालत करते आ रहे हैं। उन्होंने अपनी लगातार तीन बार की जीत में महिलाओं की भूमिका भी मानी है। वहीं, भाजपा ने संगठन में भी महिला सदस्यों की संख्या बढ़ाने के लिए व्यापक संपर्क अभियान की योजना बनाने जा रही है। वैसे भी महिला आरक्षण अधिनियम लागू हो गया तो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित होंगी। इस बार अध्यक्ष पद के लिए स्मृति ईरानी के नाम की भी चर्चा है। अमेठी की पूर्व सांसद रहीं स्मृति को इस बार कैबिनेट में जगह नहीं मिली है, ऐसे में भाजपा अध्यक्ष के लिए उनका नाम भी आगे चल रहा है। अगर, ऐसा होता है तो वह भाजपा की पहली महिला अध्यक्ष बन सकती हैं। अध्यक्ष पद से पहले राज्यों में होंगे संगठन चुनाव भाजपा अपने नए अध्यक्ष के चुनाव से पहले नए सदस्यता अभियान की शुरुआत करेगी और उसके बाद राज्यों में संगठन के चुनाव कराएगी। दरअसल, तय नियमों के मुताबिक अध्यक्ष चुनने से पहले कम से कम 50 फीसदी राज्यों … Read more

जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले को लेकर मोदी की चुप्पी पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सवाल उठाए

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिस दिन इस देश में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद की शपथ ले रहे थे। कई राष्ट्रों के अध्यक्ष आए हुए थे, उसी दिन रियासी में आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 9 तीर्थयात्री मारे गए थे। उसमें कुछ बच्चे भी थे। वो नजारा देखकर हम सभी का दहल गया। उसके बाद से लगातार जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले हो रहे हैं। कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि क्या यह आपका नया कश्मीर है? इस नए कश्मीर में रोज आतंकी हमले हो रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंह से एक शब्द तक नहीं निकल रहा है। वो प्रधानमंत्री जो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को बधाई देने पर तुरंत धन्यवाद देते हैं, लेकिन आतंंकी हमले पर एक शब्द तक नहीं बोलते हैं। देश के बड़े विपक्षी दलों के नेताओं ने शोक प्रकट की, उन्होंने इस हमले की निंदा भी की, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंह से एक शब्द तक नहीं निकला। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर ऐसा क्यों हुआ? आखिर क्यों प्रधानमंत्री इस विषय पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दावों को खोखला बताते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रहे आतंकी हमलों से आपके दावों की पोल खुल रही है। खेड़ा ने कहा कि पिछले 10 साल में 2 हजार 262 आतंकी हमले हुए हैं, जिसमें हमारे 596 वीर जवान शहीद हो गए। इसका जवाब कौन देगा? किसकी जिम्मेदारी है ये? पीर पंजाल और पूंछ आतंकवादियों का गढ़ बन गया है और रियासी में भी आतंकी हमले होने लगे हैं, जबकि इसे हमेशा से ही शांत इलाका माना जाता था। अब इस पर जवाब कौन देगा? प्रधानंमत्री जी अगर आपने पटाखे छोड़ना और लड्डू बांटना बंद कर दिया हो, तो मेहरबानी करके इस पर भी बोलना शुरू कीजिए, क्योंकि देश आपको सुनना चाहता है कि आपका इन आतंकवादी हमलों पर क्या रूख है। कांग्रेस नेता ने कहा कि आप मणिपुर पर चुप रहे। अब क्या आप इस पर भी चुप रहेंगे। अगर आप चुप रहेंगे तो मैं आप से कह देना चाहता हूं कि देश आपको बर्दाश्त नहीं कर सकेगा। इसके अलावा, आपको इस पर भी जवाब देना चाहिए कि जम्मू–कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी, जो अपने आपको विश्व की सबसे बड़ी पार्टी मानती है, वो इस बार वहां चुनाव नहीं लड़ी है। यह गंभीर सवाल है और प्रधानमंत्री जी आपको इसका जवाब देना होगा। बता दें कि जम्मू-कश्मीर का रियासी इलाका आतंकी गतिविधियों का कभी भी केंद्र नहीं रहा है, लेकिन, बीते दिनों आतंकवादियों ने यहां से गुजर रही तीर्थयात्रियों की बस पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिसमें 9 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। इसके बाद उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने समीक्षा बैठक की। उन्होंने बैठक में इस हमले में संलिप्त आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया।

आगामी विधानसभा चुनाव के लिए ऐक्टिव AAP सरकार, ‘गांवों के विकास पर खर्च करेंगे 900 करोड़’, समस्याओं पर मंथन

नई दिल्ली लोकसभा चुनाव में शिकस्त झेलने वाली दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार विधानसभा की जंग के लिए तैयारी में जुट गई है। एक तरफ जहां गांवों में 900 करोड़ की लागत से युद्धस्तर पर विकास कार्य किए जाएंगे तो दूसरी तरफ हर विधानसभा क्षेत्र में जनता की समस्याओं को दूर करने की कवायद चल रही है। दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय ने कहा कि अक्टूबर तक सभी कामों को पूरा कर लिया जाएगा। ‘गांवों के विकास पर खर्च करेंगे 900 करोड़’ गोपाल राय ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनकी सरकार गांवों के विकास पर तेजी से काम करने जा रही है। उन्होंने कहा, ‘लोकसभा चुनाव की वजह से दो महीने से नए काम नहीं हो पा रहे थे। आचार संहिता खत्म होते ही दिल्ली सरकार ने अपनी गति बढ़ा दी है। दिल्ली में गांवों की बड़ी संख्या है। इनके विकास के लिए केजरीवाल सरकार ने 2024-25 के बजट में पहली बार 900 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। सरकार ने दिल्ली के सभी गांवों के विकास के लिए 900 करोड़ रुपए की लागत से काम करवाने के लिए युद्धस्तर पर तैयारी शुरू की है। खासतौर पर सड़कों को प्राथमिकता दी जाएगी।’ हर विधानसभा की समस्याओं पर मंथन गोपाल राय ने कहा कि 19 जून को सभी विधायकों की बैठक बुलाई गई है। इसमें जमीन पर समस्याओं और समाधान को लेकर चर्चा की जाएगी। बैठक में सभी क्षेत्रों में चल रहे कामों की समीक्षा की जाएगी और जहां भी दिक्कत होगी, उन्हें ठीक किया जाएगा। 27-28 जून को दिल्ली सरकार के सभी विभाग सचिवालय में कैंप लगाएंगे, जिससे सभी कागजी काम निपटाए जा सकें और विकास कार्यों को तेजी से बढ़ाया जा सके। 15 जून तक ऐक्शन प्लान बनाने को कहा गोपाल राय ने बताया कि आचार सहिंता लागू होने से पहले बोर्ड की मीटिंग में 1387 प्रस्ताव दिल्ली के विधायकों ने रखे थे। बोर्ड ने इन सभी प्रस्तावों को पास कर दिया था। आज बोर्ड और एजेंसियों को 15 जून तक ऐक्शन प्लान तय करने का निर्देश दे दिया है। इस बार सभी कामों को पूर्ण करने के लिए अक्टूबर तक का ही समय है। यह बेहद कम समय है लेकिन सभी कामों को पूरा कर लिया जाएगा।    

चंद्रबाबू नायडू के शपथ ग्रहण समारोह के मौके पर अमित शाह हुए नाराज, सबके सामने पूर्व राज्यपाल को चेताया

नई दिल्ली आंध्र प्रदेश के नए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के शपथ ग्रहण समारोह के मौके पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कथित तौर पर नाराज नजर आए। दरअसल, एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें कहा जा रहा है कि वह पूर्व राज्यपाल तमिलिसाई सौंदरराजन को ‘चेतावनी’ देते नजर आ रहे हैं। हालांकि, इसे लेकर अब तक भारतीय जनता पार्टी की ओर से या सौंदरराजन ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। सौंदरराजन ने भाजपा के टिकट पर तमिलनाडु से लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। शाह और उनके बीच हुई बातचीत का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। खास बात है कि यह ऐसे समय पर सामने आया है, जब सौंदरराजन और तमिलनाडु प्रदेश प्रमुख के अन्नामलाई के समर्थकों के बीच खींचतान की खबरें हैं। हाल ही में संपन्न हुए चुनाव में एक ओर जहां अन्नामलाई को कोयम्बटूर और सौंदरराजन को चेन्नई दक्षिण सीट से हार का सामना करना पड़ा था। करीब 20 सेकंड के वीडियो में नजर आ रहा है कि सौंदरराजन मंच पर बैठे शाह से बात करती हैं और आगे निकल जाती हैं। इसके बाद शाह उन्हें वापस बुलाते हैं और कुछ समझाइश देते नजर आ रहे हैं। भाजपा के प्रदेश सोशल मीडिया सेल के उपाध्यक्ष कार्तिक गोपीनाथ की तरफ से वीडियो भी शेयर किया गया है। वह लिखते हैं, ‘यह अमित शाह जी की तरफ से तमिलिसाई अक्का को कड़ी चेतावनी जैसा लगता है, लेकिन सार्वजनिक चेतावनी की वजह क्या हो सकती है? सार्वजनिक रूप से गैर जरूरी बयान देना?’ इस दौरान शाह के पास मंच पर केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और नितिन गडकरी भी नजर आ रहे हैं। बीते कुछ दिनों से अन्नामलाई और सौंदरराजन के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर तनातनी देखी जा सकती है। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सौंदरराजन ने अप्रत्यक्ष रूप से अन्नामलाई पर निशाना साधा था।  

बीजेपी 240 सीट से घटकर 237 हो जाएगी बीजेपी, इस पार्टी के नेता का बड़ा दावा, टेंशन में भाजपा !

कोलकत्ता ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के सांसद साकेत गोखले ने बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि भाजपा के तीन सांसद टीएमसी के संपर्क में हैं और लोकसभा में जल्दी ही भाजपा की ताकत घटकर 237 ही रह जाएगी। लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा को 240 सीटों पर ही जीत मिली है और वह फिलहाल टीडीपी, जेडीयू जैसे कई दलों के साथ मिलकर केंद्र में गठबंधन सरकार चला रही है। ऐसे में यदि उसके ही तीन सांसद पाला बदल लेते हैं तो फिर मुश्किल होगी। वहीं साकेत गोखले के बयान पर बंगाल भाजपा ने जवाब दिया है और कहा कि ऐसे दावे बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी की प्रदेश इकाई एकजुट है। लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल की 42 सीट में से 29 पर जीत दर्ज की। वहीं राज्य में भाजपा की सीट संख्या 2019 के 18 से घटकर 12 हो गई। टीएमसी के राज्यसभा मेंबर गोखले ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘अभी लोकसभा में भाजपा का संख्या बल 240 और INDIA अलायंस का 237 है। पश्चिम बंगाल में भाजपा के तीन सांसद हमारे संपर्क में हैं और जल्द ही एक सुखद आश्चर्य होगा। उसके बाद भाजपा का संख्या बल घटकर 237 रह जाएगा जबकि INDIA गठबंधन के सांसदों की संख्या बढ़कर 240 हो जाएगी।’ उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी का गठबंधन टिकाऊ नहीं है। यह ज्यादा दिन चल नहीं पाएगा। हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा 240 सीट पर जीत दर्ज करने के साथ बहुमत के आंकड़े से चूक गई, लेकिन एनडीए ने 293 सीट के साथ बहुमत का आंकड़ा हासिल कर लिया। कांग्रेस ने 99 सीट पर जीत दर्ज की, जबकि ‘इंडिया’ गठबंधन ने 234 सीट हासिल की। चुनाव के बाद दो विजेता निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी कांग्रेस को समर्थन देने का वादा किया, जिससे विपक्षी गठबंधन का संख्या बल बढ़कर 236 हो गया है। एग्जिट पोल से शेयर बाजार में नुकसान का दावा, सेबी से शिकायत गोखले के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने कहा कि तृणमूल दिन में सपने देख रही है। उन्होंने कहा, ‘2014 से ही तृणमूल कांग्रेस केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण ताकत बनने के दिन में सपने देखती रही है। लेकिन एक बार नहीं बल्कि तीन बार उसकी उम्मीदें टूट गईं। भाजपा और राजग एकजुट है। बंगाल से भाजपा का कोई सांसद तृणमूल के संपर्क में नहीं है।’ गौरतलब है कि साकेत गोखले ने एग्जिट पोल के दावों और वास्तविक नतीजों में अंतर को लेकर सेबी से शिकायत की है। उन्होंने कहा कि चुनाव नतीजों की ओर इशारा करते हुए लोगों से शेयर में निवेश करने के लिए कहा गया था। इसलिए भाजपा नेताओं के बयानों की जांच होनी चाहिए। इससे निवेशकों का पैसा डूबा है।  

अमरवाड़ा विधानसभा सीट पर उपचुनाव, कमलनाथ की एक और ‘अग्निपरीक्षा’

 भोपाल  मध्य प्रदेश में छिंदवाड़ा जिला ही ऐसा रहा है, जहां कि सभी सातों विधानसभा सीटें 2018 और 2023 में कांग्रेस ने जीती थीं। इसका श्रेय पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ को ही जाता है। दोनों चुनाव कमल नाथ के नाम पर लड़े गए। टिकट भी उन्हीं ने तय किए। बीच लोकसभा चुनाव में उनके भरोसेमंद साथी कमलेश शाह ने अमरवाड़ा विधानसभा सीट से त्यागपत्र देकर भाजपा की सदस्यता लेकर बड़ा झटका दिया। इसका नुकसान कमल नाथ के बेटे नकुल नाथ को लोकसभा चुनाव में हुआ और वे इस विधानसभा सीट पर भाजपा के विवेक बंटी साहू से 15 हजार 39 मतों से पीछे रह गए थे। अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए सुरक्षित छिंदवाड़ा जिले की अमरवाड़ा विधानसभा सीट से कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा को बढ़त मिली है। 2008 से पार्टी ने यहां कमलेश शाह को चुनाव मैदान में उतारा पर वे 1,140 मतों के अंतर से हार गए थे। 2013 के चुनाव में कमल नाथ ने फिर उन पर भरोसा जताया और उन्होंने 4,063 मतों के अंतर से जीत प्राप्त की। 2018 में 10,393 और 2023 के चुनाव में 25 हजार 286 मतों से पराजित कर फिर विधानसभा पहुंचे। आदिवासियों के बीच शाह की छवि का लाभ कांग्रेस को पूरे जिले में मिलता रहा। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस के किले में सेंध लगाने के लिए कमल नाथ के विश्वासपात्र कमलेश शाह को अपने पाले में करने में सफलता प्राप्त की। उन्होंने बाकी नेताओं की तरह पद पर बने रहने के स्थान पर पहले विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दिया और फिर विधिवत भाजपा में शामिल हुए। कांग्रेस पदाधिकारियों का कहना है कि यह उप चुनाव कांग्रेस और खासतौर पर कमल नाथ के लिए बहुत अहम है। प्रतिष्ठा भी उनकी ही दांव पर रहेगी क्योंकि लोकसभा चुनाव में उनमें बेटे नकुल नाथ को पराजय मिलने के बाद अब उनको पास वापसी का यह बड़ा अवसर है। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उपचुनाव के लिए पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे और पूर्व विधायक सुनील जायसवाल को चुनाव प्रभारी नियुक्त कर दिया है। दोनों कमल नाथ समर्थक हैं। ये प्रत्याशी चयन को लेकर संगठन को नाम भी सुझाएंगे। कमल नाथ से चर्चा करने के बाद केंद्रीय संगठन को अंतिम निर्णय के लिए नाम प्रस्तावित किया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया सलाहकार केके मिश्रा का कहना है कि अमरवाड़ा में उपचुनाव किस कारण से हो रहा है, यह जनता जानती है। निर्वाचित जनप्रतिनिधि के धोखे का वह उपचुनाव में बदला लेगी। जहां तक बात कमल नाथ की है तो वे छिंदवाड़ा ही नहीं देश के वरिष्ठ नेता हैं और मात्र एक चुनाव में हार-जीत राजनीतिक भविष्य का पैमाना नहीं होती है। कमलेश शाह को ही मैदान में उतार सकती है भाजपा उधर, भारतीय जनता पार्टी कमलेश शाह को ही अमरवाड़ा विधानसभा से चुनाव लड़ा सकती है। इसके लिए स्थानीय नेताओं के बीच सहमति बनाई जाएगी। संगठन जल्द ही उपचुनाव के लिए प्रभारी की नियुक्ति करेगा। मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव के दौरे भी अगले सप्ताह से प्रारंभ हो जाएंगे। कमलेश शाह ने दिया था इस्तीफा अमरवाड़ा से तीन बार कांग्रेस विधायक रहे कमलेश शाह ने इस साल 29 मार्च को इस्तीफा दे दिया। जिसके तुरंत बाद वे भाजपा में शामिल हो गए। अब इस विधानसभा सीट पर उपचुनाव की आवश्यकता है। शाह ने बाद में राज्य विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। उपचुनाव के कार्यक्रम की घोषणा सोमवार को निर्वाचन आयोग ने कर दी है। काउंटिंग 13 जुलाई को होगी। अमरवाड़ा से कौन होगा बीजेपी का प्रत्याशी हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार बंटी विवेक साहू ने छिंदवाड़ा के पूर्व सांसद एवं कांग्रेस उम्मीदवार नकुल नाथ को 1.13 लाख मतों के अंतर से हराया था। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार लोकसभा चुनावों के दौरान अमरवाड़ा विधानसभा सीट के अंतर्गत मतदान केंद्रों पर भाजपा को 93,512 वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 78,473 वोट मिले यानी भाजपा ने इस सीट पर 15,000 अधिक वोट हासिल किए। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अब कमलेश शाह को अमरवाड़ा सीट के लिए भाजपा द्वारा मैदान में उतारा जा सकता है। चुनाव अधिसूचना 14 जून को जारी की जाएगी, नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 21 जून है। मतपत्रों की जांच 24 जून को की जाएगी और नामांकन पत्र वापस लेने की अंतिम तिथि 26 जून है।

लद्दाख से निर्दलीय सांसद मोहम्मद हनीफा ने राहुल गांधी से की मुलाकात

नई दिल्ली लद्दाख लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय सांसद मोहम्मद हनीफा जान ने वहां के कई स्थानीय नेताओं के साथ कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की है। इस दौरान कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद रहे। मोहम्मद हनीफा लद्दाख निर्वाचन क्षेत्र से वर्तमान में सांसद और नेशनल कॉन्फ्रेंस के पूर्व जिला अध्यक्ष रहे हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान निर्दलीय उम्मीदवार मोहम्मद हनीफा ने अपने निकटतम कांग्रेस प्रतिद्वंद्वी त्सेरिंग नामग्याल को 27,906 मतों के अंतर से हराकर लद्दाख लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की थी। यहां से भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर ताशी ग्यालसन मैदान में थे। जिन्हें भाजपा ने जामयांग सेरिंग नामग्याल का टिकट काटकर मैदान में उतारा था। हनीफा को 65,303 वोट मिले जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के त्सेरिंग नामग्याल को 37,397 वोट मिले। इस त्रिकोणीय चुनावी मुकाबले में भाजपा के ताशी ग्यालसन को 31,956 वोट मिले थे। दरअसल लोकसभा चुनाव में त्सेरिंग नामग्याल को कांग्रेस की ओर से प्रत्याशी बनाए जाने के बाद नेशनल कांफ्रेंस के पूर्व नेता हनीफा ने पार्टी छोड़ दी थी। इसके बाद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ते हुए करीबी अंतर से उन्होंने जीत हासिल की है। लद्दाख लोकसभा सीट पर 2014 और 2019 में भाजपा ने जीत दर्ज की थी। इस सीट पर सबसे ज्यादा बार जीत का रिकॉर्ड कांग्रेस पार्टी के नाम दर्ज है। दिलचस्प बात यह है कि 1989, 2004 और 2009 के आम चुनावों में इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी। मोहम्मद हनीफा लद्दाख से जीतने वाले चौथे निर्दलीय सांसद हैं।

राहुल गांधी ने कहा- बलिदान की परंपरा को परिवारवाद कहने वाले अपने ‘सरकारी परिवार’ को सत्ता की वसीयत बांट रहे

नई दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली नई मंत्रिपरिषद के कई सदस्यों का हवाला देते हुए मंगलवार को कहा कि पीढ़ियों के संघर्ष, सेवा और बलिदान की परंपरा को परिवारवाद कहने वाले अपने ‘सरकारी परिवार’ को सत्ता की वसीयत बांट रहे हैं। उन्होंने यह दावा भी किया कि कथनी और करनी के इसी फर्क को नरेन्द्र मोदी कहते हैं।   राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर जिन मंत्रियों के नाम साझा किए उनमें इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू, संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और कई अन्य नाम शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पीढ़ियों के संघर्ष, सेवा और बलिदान की परंपरा को परिवारवाद कहने वाले अपने ‘सरकारी परिवार’ को सत्ता की वसीयत बांट रहे। कथनी और करनी के इसी फर्क को नरेन्द्र मोदी कहते हैं।”

जेपी नड्डा मोदी कैबिनेट में शामिल होने के कारण भाजपा को नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश

नई दिल्ली भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री बनने के बाद पार्टी को नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश करनी है। भाजपा में आमतौर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के मुताबिक, सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करने की परंपरा रही है। भाजपा के संविधान की धारा-19 के अनुसार, पार्टी अध्यक्ष का चुनाव एक निर्वाचक मंडल करता है, जिसमें राष्ट्रीय और प्रदेश परिषद के सभी सदस्य शामिल होते हैं। इससे पहले पार्टी को जिला से लेकर राज्य स्तर तक चुनाव की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव राष्ट्रीय कार्यकारिणी के निर्धारित नियमों के अनुसार ही कराया जाता है। पार्टी संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष वही व्यक्ति हो सकेगा जो कम से कम चार अवधियों तक सक्रिय सदस्य और कम से कम 15 वर्ष तक प्राथमिक सदस्य रहा हो। निर्वाचक मंडल में से कोई भी 20 सदस्य राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की अर्हता रखने वाले व्यक्ति के नाम का संयुक्त रूप से प्रस्ताव कर सकेंगे। यह संयुक्त प्रस्ताव कम से कम ऐसे पांच प्रदेशों से आना जरूरी है, जहां राष्ट्रीय परिषद के चुनाव संपन्न हो चुके हों। नामांकन पत्र पर उम्मीदवार की स्वीकृति आवश्यक है। इससे पहले आम तौर पर देशभर में पार्टी सदस्यता अभियान भी चलाती है। ऐसे में इस सारी प्रक्रिया को पूरा होने में तीन से चार महीने का वक्त लगता है। यही वजह है कि निर्वाचन प्रक्रिया से गुजर कर राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन में लगने वाले समय को देखते हुए पार्टी स्तर पर कई विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। सूत्रों की माने तो, भाजपा पूर्णकालिक अध्यक्ष चुने जाने तक किसी नेता को उसी तरह से पार्टी का कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त कर सकती है, जैसे 2019 में तत्कालीन अध्यक्ष अमित शाह के कैबिनेट मंत्री बनने पर जेपी नड्डा को कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति होने तक जेपी नड्डा केंद्रीय मंत्री और पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष दोनों का कामकाज देखते रहेंगे। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के गृह मंत्री बनने पर जुलाई 2019 में नड्डा को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था, इसके कुछ महीने बाद ही उन्हें तीन वर्षीय कार्यकाल के लिए सर्वसम्मति से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। उन्होंने पार्टी के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर पार्टी की कमान 20 जनवरी 2020 को संभाली थी। उनका कार्यकाल जनवरी 2023 में ही समाप्त हो गया था। लेकिन, लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जेपी नड्डा के कार्यकाल को जून 2024 तक बढ़ा दिया गया था। उनका अध्यक्षीय कार्यकाल 30 जून को खत्म हो रहा है। इसी वर्ष फरवरी 2024 में दिल्ली में हुए भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन की बैठक में पार्टी संविधान में संशोधन करते हुए पार्टी के फैसले लेने वाली सर्वोच्च इकाई संसदीय बोर्ड को आपात स्थिति में पार्टी अध्यक्ष से संबंधित फैसला लेने की शक्ति दी गई। पार्टी का संसदीय बोर्ड परिस्थिति के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यकाल को बढ़ाने या घटाने का फैसला कर सकता है। भाजपा के संविधान की धारा-21 में अध्यक्ष के कार्यकाल का जिक्र है। इसके मुताबिक, कोई व्यक्ति तीन-तीन साल के लगातार दो कार्यकाल तक ही भाजपा का अध्यक्ष रह सकता है।  

ओडिशा में CM के अलावा मुख्यमंत्री आवास की भी चल रही खोज, भाजपा नहीं कर पारही तय

भुवनेश्वर नई दिल्ली ओडिशा विधान सभा चुनाव के नतीजे आए हुए एक हफ्ते हो चुके हैं लेकिन अभी तक भाजपा यह तय नहीं कर सकी है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। हालिया चुनावों में भाजपा को सरकार बनाने का जनादेश मिला है और तब से ही कयासों का दौर जारी है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और भूपेंद्र यादव को पर्यवेक्षक बनाकर भुवनेश्वर भेजा है। आज (मंगलवार) शाम ओडिशा भाजपा विधायक दल की बैठक होने जा रही है। माना जा रहा है कि देर शाम तक यह साफ हो जाएगा कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। राज्य में  नए मुख्यमंत्री की खोज के साथ-साथ दूसरी तरफ राज्य के अधिकारी नया मुख्यमंत्री आवास ढूंढ़ने में परेशान हैं क्योंकि पिछले 24 साल से नवीन पटनायक वर्क फ्रॉम होम कर रहे थे और अपने घर ‘नवीन निवास’ को ही आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री का आवास बना दिया था। बता दें कि साल 2000 में नवीन पटनायक ने ओडिशा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उसके बाद उन्होंने सरकार द्वारा आवंटित सीएम आवास में शिफ्ट होने की बजाय अपने घर से ही काम करने का विकल्प चुना था। पटनायक के इस फैसले की तब काफी सराहना की गई थी और इसे एक मिसाल के तौर पर लिया गया था। नवीन पटनायक के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक ने नवीन निवास नाम की भव्य हवेली बनवाई थी। नवीन पटनायक पिछले 24 साल से इसी हवेली से राज्य का बागडोर संभाल रहे थे। वह सबसे लंबी अवधि तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाने से एक महीने पहले ही चुनावों में भाजपा से हार गए थे। हालिया चुनावों में 147 सदस्यीय राज्य विधानसभा में भाजपा को 78 सीटों पर जीत के साथ ही बहुमत मिला है।  राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) तथा जम्मू कश्मीर के पूर्व उप राज्यपाल गिरीश मुर्मू का भी नाम सीएम पद की दौड़ में शामिल है। जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब मुर्मू उनके प्रधान सचिव रहे थे। कई पार्टी नेताओं ने कहा कि भाजपा नेतृत्व मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की तरह किसी नए नाम को प्रस्तुत कर सभी को चौंका सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह 12 जून को शाम पांच बजे आयोजित किया जा सकता है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुधवार को अपराह्न ढाई बजे भुवनेश्वर पहुंच सकते हैं और हवाई अड्डे से राजभवन जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार बाद में वह शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए जनता मैदान पहुंचेंगे। शपथ ग्रहण समारोह के लिए प्रस्तावित स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं।  

कैसे इस नेता की लगी लॉटरी- शपथ समारोह देखने पहुंचे थे और बन गए मोदी सरकार के मंत्री

नई दिल्ली भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में किसी भी मुस्लिम नेता को एंट्री नहीं मिली है। पीएम मोदी समेत कुल 72 मंत्रियों में एक भी मुस्लिम नहीं है, लेकिन अल्पसंख्यक समुदाय के 5 मंत्री जरूर हैं। इनमें से एक मंत्री जॉर्ज कुरियन की काफी चर्चा हो रही है, जो लोकसभा या राज्यसभा किसी भी सदन के मेंबर नहीं हैं। इसके बाद भी वह अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री हैं। वह केरल के रहने वाले हैं और ईसाई समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। उन्हें मंत्री पद दिए जाने के पीछे भाजपा की केरल में ईसाइयों को लुभाने की रणनीति बताई जा रही है। केरल में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई तीनों ही समुदायों की अच्छी आबादी है। भाजपा को आमतौर पर हिंदुओं के एक वर्ग का समर्थन मिलता है। वहीं मुस्लिमों के बीच कांग्रेस की अच्छी पैठ है, जबकि ईसाई मत के लोग वामपंथी दलों के पाले में रहे हैं। जॉर्ज कुरियन को जिस तरह से मंत्री पद दिया गया, उस पर ज्यादातर लोगों को हैरानी हो रही है। यही नहीं खुद जॉर्ज कुरियन भी उस वक्त हैरान हो गए थे, जब उन्हें पता चला कि वह आज मंत्री पद की शपथ लेंगे। जॉर्ज कुरियन के मुताबिक वह शनिवार की शाम को मोदी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह का गवाह बनने के लिए दिल्ली आए थे। लेकिन रविवार की सुबह वह हैरान रह गए, जब पता चला कि वह भी मंत्री पद की शपथ लेंगे। इसका उन्हें खुद भी किसी तरह से अंदाजा नहीं था क्योंकि वह न तो लोकसभा के और ना ही राज्यसभा के सांसद हैं। केरल में भाजपा से जुड़ने वाले ईसाई समुदाय के कई नेता रहे हैं। फिर भी कुरियन पर ही भरोसा जताने की वजह यह है कि वह भाजपा के लिए वफादार रहे हैं। आरएसएस के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से वह जुड़े रहे हैं। इसके अलावा दशकों से भाजपा में सक्रिय हैं। इसलिए उन्हें मौका देना एक तरह से वफादारी का इनाम भी है। इसके अलावा ईसाई समुदाय के बीच अपनी विचारधारा में ही पले-बढ़े एक नेता को पार्टी तैयार करना चाहती है। मंत्री बन बोले- अल्पसंख्यक समाज के लिए काम करूंगा साइरो-मालाबार कैथोलिक चर्च से जुड़े जॉर्ज कुरियन केरल में काफी सक्रिय रहे हैं। वह राज्य में ईसाई समुदाय के लोगों के बीच भाजपा की पहुंच बढ़ाने के प्रयास करते रहे हैं। अब उनका कहना है कि मुझे अल्पसंख्यक मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है, जिसमें पूरी गंभीरता के साथ काम करूंगा। अपने समुदाय समेत पूरे अल्पसंख्यक समाज के हित के लिए काम करूंगा। उन्हें पशुपालन विभाग में भी राज्य मंत्री का जिम्मा मिला है। 

एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार वाली एनसीपी के तमाम विधायक टूट सकते हैं: कांग्रेस

महाराष्ट्र लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में उथल-पुथल के कयास लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि खराब नतीजों के बाद एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार वाली एनसीपी के तमाम विधायक टूट सकते हैं। इस बीच विधानसभा में कांग्रेस के नेता सदन विजय वडेट्टीवार ने दावा किया है कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी के 40 विधायक उनके संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि ये विधायक घर वापसी करना चाहते हैं। वडेट्टीवार ने कहा कि लोकसभा चुनाव के नतीजे बता रहे हैं कि हवा किस ओर है। इसलिए विधायक भी हवा का रुख भांपते हुए पाला बदलना चाहते हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि चुनाव नतीजों का असर विधानसभा चुनाव पर भी देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा, ‘हमें भरोसा है कि राज्य में शरद पवार की एनसीपी, उद्धव की शिवसेना और कांग्रेस की सरकार वापस लौटेगी।’कांग्रेस लीडर ने कहा कि चुनाव नतीजों के ट्रेंड बताते हैं कि महाविकास अघाड़ी को राज्य की कुल 150 विधानसभा सीटों पर जीत मिली है। वहीं महायुति को 130 सीटों पर ही बढ़त मिल पाई। बता दें कि महाराष्ट्र में कुल 288 विधानसभा सीटें हैं। लोकसभा चुनाव के नतीजों को देखते हुए कांग्रेस, शरद पवार और उद्धव ठाकरे की उम्मीदें परवान चढ़ गई हैं।   विजय वडेट्टीवार ने कहा कि शिवसेना और एनसीपी से टूटे 40 विधायकों को लगता है कि अब महाविकास अघाड़ी की सत्ता आएगी। इसलिए ये लोग अपने मूल दलों की ओर लौटना चाहते हैं। इसके लिए ये विधायक आग्रह कर रहे हैं। शरद पवार की एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने भी कहा है कि कुछ विधायक संपर्क में हैं। यही नहीं सूत्रों का कहना है कि ऐसे कुछ विधायकों ने लोकसभा चुनावों में मदद भी की थी। अजित पवार गुट के एक विधायक का हवाला देते हुए एक रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हम यहां केंद्रीय एजेंसियों से बचने के लिए हैं। भाजपा अब 2014 और 2019 जैसी पावरफुल नहीं रही। यदि जेडीयू और टीडीपी ने अलग रास्ता चुना तो फिर यह सरकार गिर भी सकती है।’ अजित पवार ने की चाचा शरद की तारीफ, लगने लगे कयास बता दें कि खुद अजित पवार ने सोमवार को एनसीपी के 25 साल पूरे होने के मौके पर शरद पवार की तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि शरद पवार ने 25 साल पहले इस पार्टी को खड़ा किया था। उनका कहना था कि शरद पवार आज भी एनसीपी के मुखिया हैं और मार्गदर्शक हैं।    

लोकसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों ने मर्यादा नहीं रखी, चुनाव प्रचार पर मोहन भागवत की नसीहत

नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने चुनाव के दौरान होने वाली बयानबाजी को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों ने मर्यादा नहीं रखी। नागपुर में हुए आरएसएस के कार्यक्र में उन्होंने कहा, असली जनसेवक वही है जो अहंकार नहीं दिखाता और सार्वजनिक जीवन में काम करते हुए भी मर्यादा बनाए रखता है। उन्होंने कहा, चुनाव संपन्न हो गए, परिणाम और सरकार भी बन गई लेकिन उसकी चर्चा अभी तक चल रही है। जो हुआ वह क्यों हुआ। उन्होंने कहा, यह अपने प्रजातांत्रिक देश में पांच वर्ष में होने वाली घटना है जो कि होती है। देश के  संचालन के लिए यह महत्वपूर्ण है। लेकिन हम यही चर्चा करते रहें इतना महत्वपूर्ण नहीं है। समाज ने अपना मत दे दिया और उसके अनुसार अब काम हो रहा है। संघ के लोग इसमें नहीं पड़ते। हम अपना कर्तव्य करते रहते हैं। संघ प्रमुख ने कहा, जो वास्तविक सेवक है उसकी एक मर्यादा रहती है। काम करते सब लोग हैं लेकिन कार्य करते समय वह मर्यादा का पालन भी करता है। जैसा तथागत ने भी बताया है कि कुशलस्य उपसंपदा। शरीर को भूखा नहीं रखना है लेकिन कौशल पूर्वक जीविका कमानी है। इससे दूसरों को धक्का नहीं लगना चाहिए। यह मर्यादा निहित है। इसी तरह की मर्यादा के साथ हम लोग काम करते हैं। काम करने वाला मर्यादा का ध्यान रखता है। जो मर्यादा का पालन करता है उसमें अहंकार नहीं आता और  वही सेवक कहलाने का अधिकारी है। भागवत ने कहा कि चुनाव में स्पर्धा रहती है इसलिए किसी को पीछा रहने का काम होता है। लेकिन इसमें भी मर्यादा है। असत्य का उपयोग नहीं करना चाहिए। संसद में बैठकर सहमित बनाकर चलाने के लिए चुनाव होते हैं। चित्त अलग-अलग होने के बाद भी साथ ही चलना है। सबका चित्त एक जैसा नहीं हो सकता इसलिए बहुमत का प्रयोग किया जाता है। सिक्के के दोनों पहलू होते हैं इसीलिए संसद में सत्ता और प्रतिपक्ष की व्यवस्था है। भागवत ने कहा, प्रचार के दौरान मर्यादा का ध्यान नहीं रखा गया। यह भी नहीं सोचा गया कि इससे समाज में मनमुटाव पैदा हो सकता है। बिना कारण संघ को भी इसमें खींचा गया। तकनीक का सहारा लेकर असत्य बातों को प्रसारित किया गया। क्या विद्या और विज्ञान का यही उपयोग है। ऐसे देश कैसे चलेगा। मैं विरोधी पक्ष नहीं प्रतिपक्ष कहता हूं। उसे विरोधी नहीं मानता।उसका भी विचार होना चाहिए। चुनाव लड़ने में मर्यादा का पालन नहीं हुआ। भागवत ने कहा, सरकार बन गई। वही सरकार फिर से आ गई। 10 सालों में बहुत कुछ अच्छा हुआ। हमारे देश में आर्थिक स्थिति अच्छी हुई। सामरिक स्थिति पहले से अधिक अच्छी है। दुनियाभर में प्रतिष्ठा बढ़ी है। कला और खेल के क्षेत्र  में हम सब लोग आगे बढ़े हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि हम चुनौतियों सो मुक्त हो गए हैं। अभी आवेश से मुक्त होकर आगे वाली बातों का विचार करना है। मणिपुर पर भी बोले मोहन भागवत मणिपुर को लेकर मोहन भागवत ने कहा कि देश में शांति की जरूरत है। एक साल से मणिपुर शांति की राह देख रहा है। उससे पहले 10 साल एकदम शांत रहा। लेकिन फिर ऐसा लगा कि पुराना जन कल्चर समाप्त हो गया। अचानक वहां उपजी या उपजाई गई कलह अब तक चल रही है। उसका ध्यान कौन देगा। प्राथमिकता देकर उसपर विचार करना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संचार मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को संचार मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया। पदभार संभालते ही उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कहा कि दूरसंचार क्षेत्र और भारतीय डाक विभाग दोनों को आगामी वर्षों में वैश्विक और स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। 53 वर्षीय सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में क्रांति आई है और उन्होंने प्रधानमंत्री तथा देश की जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप सर्वोत्तम कार्य करने का संकल्प लिया है। सिंधिया ने कार्यभार संभालने के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘यह वास्तव में मेरे लिए सम्मान की बात है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुझे संचार मंत्रालय की जिम्मेदारी दी है। दूरसंचार प्रभाग के साथ-साथ भारतीय डाक प्रभाग को वैश्विक स्तर के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है, ताकि देश और दुनिया भर में लाखों लोगों के दिलों में जगह बनाई जा सके।’’ बता दें कि सिंधिया ने लगभग डेढ़ दशक पहले संचार राज्य मंत्री के रूप में सेवाएं दी थीं। सिंधिया ने कहा, ‘‘यह मेरे लिए एक तरह से एक चक्र पूरा करने जैसा है। मैंने कई साल पहले 2007, 2008 और 2009 में इस विभाग में कनिष्ठ मंत्री के तौर पर काम किया। इसलिए मेरे लिए यह एक ऐसा विभाग है जिसके साथ मेरा भावनात्मक जुड़ाव रहा है।’’ नए दूरसंचार मंत्री के रूप में सिंधिया के सामने इस महीने के अंत में होने वाली 5जी स्पेक्ट्रम नीलामी को पूरा करने का कार्य है। स्पेक्ट्रम नीलामी के अलावा सिंधिया को उपग्रह ब्रॉडबैंड सेवाओं, उद्योगपति एलन मस्क नीत स्टार्टलिंक के लिए सुरक्षा मंजूरी जैसे मुद्दों को भी प्राथमिकता देनी होगी और नए दूरसंचार अधिनियम के लिए नियम तैयार करने होंगे। सिंधिया को 100 दिवसीय एजेंडा पर काम शुरू करना होगा, जिसमें दूरसंचार क्षेत्र के लिए स्पष्ट प्राथमिकता वाले क्षेत्रों, प्रमुख उपलब्धियों, मार्ग दर्शन और लक्ष्यों की रूपरेखा होगी। सिंधिया पहली बार मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA)-1 सरकार में मंत्री बने थे। वह तब दूरसंचार, डाक तथा आईटी राज्य मंत्री थे। तब उन्होंने प्रोजेक्ट एरो योजना के साथ डाकघरों के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अब डेढ़ दशक बाद सिंधिया प्रमोशन पाकर फिर से उसी मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री के रूप में  पूरे 360 डिग्री का एक चक्कर लगाकर वापस लौटे हैं। इससे पहले वह मोदी सरकार-2.0 में 2021 से नागरिक उड्डयन मंत्रालय देख रहे थे। (भाषा इनपुट्स के साथ)  

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