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विरूद्व वन अपराध प्रकरण क्रमांक 31/12 दिनांक 24 फरवरी 24 के माध्यम से पंजीबद्ध किया गया,अनुमति के विरुद्ध 27.9 हेक्टेयर पर निर्माण किया

construction was done on 27.9 hectares against the permission.

Forest offence case number 31/12 dated 24 February 24 was registered against him, construction was done on 27.9 hectares against the permission. (विशेष संवाददाता ) भोपाल। कंपनी द्वारा स्थल पर कक्ष कमांक पी-546 में 182.00 हेक्टेयर में निर्माण कार्य किया गया है, जिसमें सीमेन्ट फैक्ट्री प्लांट, रिहायसी कॉलोनी, स्कूल, रेस्टहाउस आदि सम्मिलित हैं। कक्ष कमांक पी-546 में 182 हेक्टेयर में निर्माण कार्य के अतिरिक्त कंपनी द्वारा कक्ष कमांक पी-555 में 27.9 हेक्टेयर में बैंक, लेबर कॉलोनी, कॉलेज, हॉस्पिटल, बाजार आदि का निर्माण किया गया है। अतएव फैक्ट्री प्रबंधन को कुल आवंटित 188.23 हेक्टेयर वनभूमि में से कन्वेयर बेल्ट हेतु आवंटित 5.855 हेक्टेयर वनभूमि को हटाकर कुल 182.375 हेक्टेयर में निर्माण कार्य करने की अनुमति प्राप्त थी किंतु कंपनी द्वारा आवंटित 182.375 हेक्टेयर वन भूमि के विरुद्ध बीट सगमनिया के कक्ष क्रमांक पी-546 में 182 हेक्टेयर तथा बीट बम्हनी के कक्ष क्रमांक पी-555 मैं 27.9 हेक्टेयर में निर्माण कार्य किया गया। इस प्रकार कंपनी को निर्माण कार्य हेतु कुल आवंटित वन भूमि 182.375 हेक्टेयर के विरुद्ध कुल 209.9 हेक्टेयर वन भूमि में फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा निर्माण कार्य किया गया। अतएव कंपनी द्वारा 27.9 हेक्टेयर वन भूमि अतिरिक्त अवैध निर्माण कार्य किया गया है।  वर्किंग प्लान में भी अतिक्रमण का था उल्लेख  वनमण्डल सतना की कार्य आयोजना में वर्ष 2008-09 से 2017-18 में 30 हेक्टेयर तथा वर्तमान कार्य आयोजना वर्ष 2019-20 से 2028-29 भाग-3 आलेख में 24.94 हेक्टेयर अतिक्रमण कक्ष कमांक पी-555 में लेख किया गया है। जो 2005 के पूर्व का है। कार्य आयोजना (वर्ष 2008-09 से 2017-18) एवं वर्तमान कार्य आयोजना (वर्ष 2019-20 से 2028-29) के अनुसार भी कक्ष कमांक पी-555 में कंपनी प्रबंधन द्वारा किये गये 27.9 हेक्टेयर में निर्माण कार्य अतिक्रमण के रूप में अंकित है एवं यह अतिक्रमण वर्ष 2005 से पूर्व का है।  गूगल इमेजरी में भी अतिक्रमण उजागर  गूगल अर्थ इमेजरी वर्ष 2002 तक ही उपलब्ध है एवं वर्ष 2002 के पूर्व की गूगल इमेजरी उपलब्ध नहीं है। वर्ष 2002 की गूगल इमेजरी में यह अतिक्रमण देखा जा सकता है। अतएव यह अतिक्रमण वर्ष 2002 के पूर्व का है। फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा इनके निर्माण वर्ष के सम्बन्ध में कोई भी दस्तावेज तथा कथन प्रदाय नहीं किये गये हैं। जांच के समय स्थानीय बुजुर्गों से पूछतांछ की गई, जिसमें उनके द्वारा बताया गया कि अस्पताल, कॉलोनी एवं ग्राउन्ड वर्ष 1981 से 1984 के मध्य में बना है तथा कॉलेज एवं बाजार 2000 से 2002 के मध्य प्रारंभ किया गया है तथा कॉलेज को वर्ष 2005 में मान्यता प्राप्त हुई है।  किसी राजस्व अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं  अल्ट्राटेक सीमेण्ट फैक्ट्री द्वारा उक्त भूमि के संबंध में आज दिनांक तक केवल कलेक्टर, सतना द्वारा वर्ष 1993 में (1977 से 2078, 99 वर्ष की अवधि के लिए) दी गई लीज डीड की छायाप्रति प्रदाय की गई है। साथ ही फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा वर्ष 1990 के एक नक्शे की छायाप्रति प्रदाय की गई है, जिसमें किसी भी राजस्व के अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं, इसमें केवल एसएन नाचने तत्कालीन डीएफओ सतना के हस्ताक्षर है। यह कोई मानचित्र नहीं है, बल्कि कंपनी द्वारा स्थल पर किये गये निर्माण कार्य का लेआउट प्लान है, जो कि उन्होंने अतिक्रमण पश्चात् बनाया है, जिसकी कोई वैधता नहीं है। साथ ही लेख है कि इस क्षेत्र के राजस्व मानचित्र भू-अभिलेख कार्यालय जिला सतना एवं मैहर में उपलब्ध नहीं है। साथ ही कलेक्टर जिला सतना द्वारा वर्ष 1993 में प्रदाय की गई लीज डीज की मूल फाइल तथा संबंधित अन्य अभिलेख भी अद्यतन स्थिति में प्राप्त नहीं हुए है।

व्हाट्सएप, ई-मेल और टेक्स्ट मैसेज से भेजे जाएंगे वारंट, नोटिफिकेशन जारी

Warrants will be sent through WhatsApp, e-mail and text message, notification issued

मध्यप्रदेश में न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक सुगम और प्रभावी बनाने के लिए एक नया नियम लागू किया गया है। इस नियम के तहत अब समन और वारंट ऑनलाइन माध्यमों जैसे व्हाट्सएप, ई-मेल, और टेक्स्ट मैसेज के जरिए भेजे जाएंगे और उन्हें तामील माना जाएगा। इस नई पहल के साथ मध्यप्रदेश ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इसको लेकर गृह विभाग ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। बता दें मध्यप्रदेश सरकार ने नए कानून के लिए डेढ़ महीने में यह नियम तैयार किया है, जिसके अनुसार अब कोर्ट से सीधे समन और वारंट जारी किए जा सकेंगे। ई-मेल के जरिए भेजे गए समन और वारंट की तामील तब मानी जाएगी, जब ई-मेल बाउंस बैक नहीं होता। इसका मतलब है कि अगर ई-मेल डिलीवर हो जाता है, तो समन या वारंट तामील माना जाएगा। हालांकि, यह नया नियम उन लोगों पर लागू नहीं होगा जो ई-मेल, फोन नंबर, या मैसेजिंग एप्लिकेशन का उपयोग नहीं करते हैं। ऐसे मामलों में पारंपरिक तरीका अपनाया जाएगा और संबंधित थाने का स्टाफ समन या वारंट की तामील करवाएगा। गृह विभाग ने इस नए नियम को लागू करने के लिए गजट नोटिफिकेशन जारी किया है। इस कदम से न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है और डिजिटल युग में न्याय व्यवस्था को और सशक्त बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस नए नियम के लागू होने से न्यायिक प्रक्रियाओं में समय और संसाधनों की बचत होगी, साथ ही अदालती आदेशों की तामील अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।

पैसो का कमाल :- आनलाईन स्थानांतरण प्रक्रिया मे खेला,आधाअधूरा सीएचसी मे कर दिया ट्रांसफर ,सीएचसी मे सुख रहे कपडे स्वास्थ्य मंत्री के बंगले से लेकर एनएचएम की बिल्डिंग में बैठकर होते है नाम तय

Miracle of money:- Played in the online transfer process

Miracle of money:- Played in the online transfer process, half-finished transfer was made to CHC, clothes were drying in CHC, names were finalized from the Health Minister’s bungalow to the NHM building. भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार द्वारा संचालित नेशनल स्वास्थ्य मिशन में दावों को लेकर अधिकारियों की मनमानी खुले आम चल रही है। यूं तो मध्य प्रदेश सरकार ने अभी तबादलों पर से बैन नहीं हटाया है लेकिन यह योजना केंद्र सरकार के अंतर्गत आता है इसलिए इसमें बहुत सारे फैसले लेने के अधिकार मिशन संचालक के हाथों में है उन्ही अधिकारों का उपयोग करते हुए नेशनल स्वास्थ्य मिशन योजना में अधिकारी – कर्मचारियों की भर्ती कर्मचारियों व तबादले से लेकर विभाग में होने वाली सप्लाई सामग्री सभी में मनमानी करने पर उतारू है। मध्य प्रदेश सरकार का चुकी हस्तक्षेप काम है इसलिए यहां पदस्थ अधिकारी अपनी मोनोपोली चलाते हैं । कोई सुनने और देखने वाला नहीं है |मध्य प्रदेश सरकार में तबादलो पर प्रतिबंध है लेकिन नेशनल स्वास्थ्य मिशन की मिशन संचालक ने जिलो व ब्लाक स्तर पर तैनात सीएचओ की दो तबादला सूचिया जारी कर दी है। इसमें एक 72 और एक 60 सीएचओ की सूची है इस सूचि में कुछ ऐसे नाम भी शामिल है उन स्थानों पर पदस्थापना के आदेश जारी किए गए हैं जहां अभी स्वास्थ्य केंद्र बने ही नहीं है। उदाहरण के तौर पर बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी ब्लाक मे सुखाढाना है उस स्वास्थ्य केंद्र का अभी निर्माण कार्य ही पूरा नहीं हुआ है वहां निर्माण काम चल रहा है पर बिना केंद्र के बने ही इस उप स्वास्थ्य केंद्र पर सीएचओ का तबादला कर पदस्थापना कर दी । इस सेंटर पर एक और बात सामने आई जब इस सेंटर पर कुछ कर्मचारी आवेदन कर रहे थे तो वहा पर आवेदन स्विकार ही नही हो रहा था याने सेंटर ही नही दिख रहा था अब सवाल जब आनलाईन प्रक्रिया चल रही है और आनलाईन मे सेंटर शो ही नही कर रहा तो यहा स्थानांतरण कैसे हो गया । यह इस बात का प्रमाण है कि यह तबादला लेनदेन या किसी अन्य व्यवस्था के अंतर्गत किया गया है । कि जैसे ही यह उप स्वास्थ्य केंद्र बनकर तैयार हो जाएगा तब तक यह कर्मचारी छतरपुर के उसे उप स्वास्थ्य केंद्र पर काम करेगा और जैसे ही एक केंद्र बनकर तैयार होगा उसे वहां से रिव्यू होकर बैतूल जिले में भेज दिया जाएगा ऐसे और भी कई उदाहरण हो सकते हैं मध्य प्रदेश सरकार के अधिकारियों को विशेष कर प्रमुख सचिव जिनके अधीन पूरा प्रदेश प्रशासन है प्रदेश के सभी वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों से लेकर कनिष्ठ अधिकारी उनके अधीन है तो उन्हें ऐसे मामलों में संज्ञान लेना चाहिए और इस तरह अधिकारियों द्वारा की जा रही मनमानी पर ब्रेक लगाना चाहिए माना कि यह योजना केंद्र सरकार की है लेकिन संचालित मध्य प्रदेश सरकार के अधिकारियों और मध्य प्रदेश सरकार के अधीन होती है तो मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला से लेकर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य और प्रमुख सचिव मध्य प्रदेश सरकार की भी यह जवाबदारी बनती है कि इस विभाग में भी अधिकारियों द्वारा इस तरह की तानाशाही और मनमानी नहीं की जा सके इस पर सरकार को और प्रमुख सचिव को लगाम लगाना चाहिए। आधूरे निर्माणाधिस Chc पर सुख रहे कपडे कुछ दिन पहले जो स्थानांतरण सूची आई उसमे सुखाढाना सीएससी भी है जहा स्थानंतरण होकर कर्मचारी तो चला गया पर उसे काम करने के लिये जगह नही है इस मामले की तहकिकात करने हमारा संवादताता गया तो वहा आज की तारिख मे आधाअधूरा निर्माण कार्य है और उस निर्माण कार्य पर कपडे सुख रहे है ।

आदिवासी युवक की पिटाई के मामले पर कांग्रेस ने मोहन सरकार सरकार को घेरा

Congress cornered Mohan Sarkar government on the issue of beating of tribal youth

Congress cornered Mohan Sarkar government on the issue of beating of tribal youth भोपाल ! ट्रेनी अग्निवीर लूट का मास्टरमाइंड निकला और 50 लाख की लूट की वारदात को अंजाम दिया. वहीं, इंदौर में आदिवासी युवक के साथ हुई मारपीट की घटना सामने आई. इसको लेकर अब कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार पर निशाना साधा है. एमपी कांग्रेस चीफ जीतू पटवारी ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए बीजेपी सरकार पर सवाल खड़े किए हैं. दूसरी तरफ, बीजेपी दोनों ही मामलों में कड़ी कार्रवाई की बात कह रही है. इंदौर में आदिवासी युवक के साथ मारपीटइंदौर के भंवर कुवा थाना क्षेत्र में आदिवासी युवक के साथ बाइक को कट करने की बात को लेकर मारपीट की घटना हुई. आरोपी रितेश राजपूत के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है. वह इलाके का लिस्टेड गुंडा है. उसके एक साथी के खिलाफ भी कार्रवाई हुई है. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जारी करते हुए प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार मध्य प्रदेश में आदिवासियों पर अत्याचार की घटनाएं नहीं रोक पा रही है. उन्होंने एक बार फिर कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए. इंदौर में आदिवासी युवक के साथ मारपीट करने और जूते के फीते बँधवाने के मामले पर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार को घेरा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि इंदौर में पुलिस कमिश्नरी लागू के होने के बाद आपराधिक मामले लगातार बढ़ रहे हैं। वहीं उन्होंने ज़िले के प्रभारी मंत्री होने के नाते मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर भी सवाल उठाए हैं। उमंग सिंघार ने लगाए आरोपये पूरी घटना सीसीटीवी में क़ैद हो गई सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल हो गया। अब इस मामले को लेकर कांग्रेस ने आदिवासी उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक्स पर लिखा है कि ‘इंदौर के भंवरकुआं इलाके में सड़क पर ठीक से न चलने की बात पर एक आदिवासी युवक के साथ अकारण मारपीट की गई। बदमाश ने आदिवासी युवक की पिटाई करने के साथ उससे अपने जूते के लेस भी बंधवाए। आश्चर्य है कि इस बदमाश पर दर्जनभर मुकदमें दर्ज हैं, फिर भी वो खुला घूम रहा था। इंदौर में पुलिस कमिश्नरी लागू होने के बाद शहर में आपराधिक मामले लगातार बढ़ रहे हैं। एमपी के गृहमंत्री का प्रभार सीएम के पास है और अब तो वे इंदौर के प्रभारी मंत्री भी हैं। इसके बाद भी शहर में कानून व्यवस्था की हालत कैसी है, इसे समझा जा सकता है!

नेताजी सुभाषचन्द्र बोस केन्द्रीय जेल में रक्षा बंधन पर्व पर विशेष मुलाकात कार्यक्रम 

Raksha Bandhan festival in Netaji Subhash Chandra Bose Central Jail

Special meeting program on Raksha Bandhan festival in Netaji Subhash Chandra Bose Central Jail जीतेन्द्र श्रीवास्तव (विशेष संवाददाता) जबलपुर ‌। रक्षा बंधन पर्व के अवसर पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस केन्द्रीय जेल जबलपुर म.प्र. में श्री अखिलेश तोमर जेल अधीक्षक के निर्देशन में बंदियों को अपनी बहनों एवं बहनों को अपने भाईयों से रक्षा बंधन त्यौहार में राखी बांधने के लिए विशेष मुलाकात की व्यवस्था की गई साथ ही जेल की सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए जेल अधिकारी/कर्मचारियों को मुलाकात व्यवस्था का अलग-अलग दायित्व सौंपा गया । 1244 बंदी / हवालाती पुरूष बंदियों से दूर दराज से आई लगभग 2705 माताओं / बहनों एवं उनके साथ 899 बच्चों ने अपने-अपने भाईयों को कुमकुम का तिलक लगाकर रक्षा सूत्र बांधकर मिष्ठान खिलाया और उनसे बुराईयों के रास्ते को छोड़ने का संकल्प लिया एवं मुलाकात की। जेल में परिरूद्ध 50 बंदी/ हवालाती महिला बंदियों से भाईयो ने राखी बंधवाई । कुल 3604 बहनों/भाईयो एवं परिजनों ने कुल 1294 पुरुष / महिला बंदी से जेल पर आकर रक्षा बंधन का पवित्र त्यौहार बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए जेल कैंटीन के माध्यम से बंदियों के लिए राखी, मिठाई, कुमकुम एवं फल की व्यवस्था जेल प्रशासन द्वारा की गई। जेल अधीक्षक द्वारा जेल की सुरक्षा व्यवस्था के लिए जेल स्टाफ, पुलिस प्रशासन एवं मीडिया का भी सहयोग सराहनीय रहा। इस अवसर पर डॉ. लक्ष्मण शाह (जेल चिकित्सक), श्री मदन कमलेश (जेल उप अधीक्षक), श्री नारायण सिंह राणा (जेल उप अधीक्षक), श्री गणेश सिंह (जेल उप अधीक्षक), श्रीमति रूपाली मिश्रा (जेल उप अधीक्षक) एवं समस्त सहायक जेल अधीक्षक एवं समस्त अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहें एवं सहयोग किया गया ।

जीतू पटवारी ने काफिला लेकर चलने वालों नेताओं की लगा दी क्लास, बताई चुनाव में हार की वजह

President Jitu Patwari organized a class for the leaders carrying

President Jitu Patwari organized a class for the leaders carrying the convoy. विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद अब कांग्रेस मैदान में नजर आ रही है. यही कारण है कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में कांग्रेस पिछले करीब 1 महीने से लगातार प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में आंदोलन कर रही है. इस बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का बयान खूब वायरल हो रहा हे. जिसमें वो टिकट लेने वालों पर तंज कसते नजर आ रहे हैं. क्या बोले जीतू पटवारी?दरअसल विधानसभा चुनाव के समय कई बीजेपी नेताओं बड़े दम-खम के साथ कांग्रेस ज्वाइन की थी. जिस वक्त वो पार्टी का दामन थामते उस वक्त लंबा काफिला प्रदेश भर में चर्चा का विषय बन जाता, जीतू पटवारी एक बार फिर पूरी तरीके से सक्रिय नजर आ रहे हैं. मध्य प्रदेश के तमाम इलाकों में जा रहे हैं. सरकार को घेरने के लिए मुद्दे उठा रहे हैं. लेकिन इस बार बीजेपी नहीं कांग्रेस के नेता उनके निशाने पर आ गए हैं. वे नेता जो काफिला लेकर चलते हैं. विधानसभा का टिकट मांगते हैं. सबके सामने जीतू पटवारी ने काफिला लेकर चलने वाले नेताओं को नसीहत दे दी है. यह भी कह दिया 100- 200 गाड़ी से आने वाले यह लोग टिकट मांगते हैं. जमीन पर हकीकम कुछ और ही होती है. यही कारण है कि हम आज 66 पर आ गए हैं. कब होगी जीतू की टीम तैयार?जीतू पटवारी ने अब एक बार फिर मध्य प्रदेश में कांग्रेस का संगठन मजबूत कर रहे हैं. इसी को लेकर वे पूरे प्रदेश भर में दौरा कर रहे हैं. आपको बता दें कि इस समय प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पंचायत कमेटी की गठन के काम में जुटे हुए हैं. तो वहीं भी प्रदेश कार्यकारिणी को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है. आपको बता दें कि पिछले दिनों भंवर जितेंद्र सिंह ने दावा किया था कि आने वाले 15 दिनों में प्रदेश कार्यकारिणी गठित हो जाएगी. लेकिन, इस बात को भी एक महीने से ज्यादा बीत गया है. अब देखना होगा कि जीतू अपनी टीम कब तक तैयार कर पाते हैं.

श्रावण माह की आखिरी सवारी में भगवान महाकाल पांच रूप में दर्शन देंगे

Lord Mahakaal will appear in five forms in the last ride of Shravan month.

Lord Mahakaal will appear in five forms in the last ride of Shravan month. सावन माह में निकलने वाली अंतिम सवारी में भगवान महाकाल पांच रूपों में दर्शन देंगे. सावन की अंतिम सवारी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे. सवारी को भव्य रूप देने के लिए इसमें सीआरपीएफ का बैंड भी शामिल होगा. महाकालेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष और कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि महाकालेश्वर भगवान की श्रावण माह में निकलने वाली सवारी के क्रम श्रावण माह की आखिरी सवारी 19 जुलाई रक्षाबंधन के पर्व पर निकलेगी. इस दौरान पालकी में श्री चन्द्रमौलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, गरुड़ रथ पर श्री शिवतांडव, नन्दी रथ पर श्री उमा-महेश और डोल रथ पर श्री होल्कर स्टेट के मुखारविंद सम्मिलित रहेगा. पालकी में विराजित भगवान को दी जाएगी सलामीमहाकालेश्वर भगवान की सवारी निकलने के पूर्व श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर का विधिवत पूजन-अर्चन होगा. उसके पश्चात भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे. मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में विराजित भगवान को सलामी दी जाएगी. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बताया कि सावन माह की अंतिम सवारी में सीआरपीएफ का बैंड शामिल होगा. वह खुद भी सवारी में शामिल होंगे. गोण्ड जनजातीय का दल सवारी में सम्मिलित होगाश्री महाकालेश्वर की सवारी में जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद के माध्यम से कलाकारों का दल भी सहभागिता करेगा. सवारी में शामिल होने वाले दल के प्रमुख प्रताप सिंह धुर्वे ने बताया कि आदिवासी गोड़ जनजाति का मैला करमा नृत्य कर्म की प्रेरणा देने वाला नृत्य है. ग्राम वासियों में श्रम का महत्व है, श्रम को ही कर्मदेवता के रूप में मानते है..पूर्वी मध्यप्रदेश में कर्मपूजा का उत्सव मनाया जाता है. उसमें करमा नृत्य किया जाता है. इस नृत्य में युवक-युवतियाँ दोनों भाग लेते है और उनके बीच गीत रचना होड़ लग जाती है.

आवारा पशुओं को लेकर सरकार सख्त, सड़कों से हटाने के लिए 15 दिन का विशेष अभियान चलेगा

Government is strict about stray animals, a special 15-day campaign will be run to remove them from the roads

Government is strict about stray animals, a special 15-day campaign will be run to remove them from the roads भोपाल (विशेष संवाददाता) । प्रदेश सरकार ने प्रमुख मार्गों से आवारा मवेशियों को हटाने के लिए 15 दिवसीय विशेष अभियान चलाएगी। इस अभियान के तहत सड़कों से मवेशियों को हटाने के लिए एक समिति बनाई गई है, जिसमें विभिन्न विभागों के वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को शामिल किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस विशेष अभियान के लिए आईएएस अधिकारियों को अध्यक्ष और सदस्य के रूप में नियुक्त किया है। ये अधिकारी 15 दिनों के भीतर अभियान चलाकर सड़कों से आवारा मवेशियों को हटाने का काम करेंगे। समिति में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अध्यक्ष, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव सदस्य, नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव सदस्य सचिव, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव सदस्य और पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव सदस्य होंगे।

NCL के CMD के पीए और सप्लायर रवि के ठिकाने पर CBI का छापा

CBI also raided the house of NCL CMD's PA Subedar Ojha

CBI raids the residence of NCL CMD’s PA and supplier Ravi भोपाल। प्रदेश के सिंगरौली जिले के एनसीएल (नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड ) क्षेत्र में रविवार की सुबह सीबीआई की टीम ने अनेक ठिकानों पर छापामारी की। इस दौरान जहां कुछ अफसरों के घर सीबीआई के अफसर पहुंचे, तो कुछ बड़े सप्लायरों को सीबीआई की टीम ने रडार पर लिया। इस कार्रवाई से एनसीएल सिंगरौली में हड़कंप व्याप्त है। जबलपुर से आई सीबीआई की टीम ने सुबह-सुबह एनसीएल के दो अधिकारियों समेत एक ठेकेदार के यहां दबिश दी। टीम सबसे पहले एनसीएल के सीएमडी बी. साईराम के पीए सूबेदार ओझा के आवास पर पहुंची और यहां उसने पूछताछ का सिलसिला शुरू किया। सूबेदार ओझा के आफिस में भी सीबीआई अफसरों ने खुर्दबीनी की। इसी दौरान सीबाआई टीम के कुछ सदस्य सुरक्षा विभाग में पदस्थ वरिष्ठ अधिकारी बीके सिंह के यहां भी पहुंचकर जांच में जुट गए।  एनसीएल के इन दोनों बड़े अधिकारियों के यहां दबिश के साथ ही सीबीआई की की टीम ने एनसीएल के एक बड़े सप्लायर रवि सिंह के जयंत स्थित घर पर भी धावा बोला। रवि सिंह को उनके आवास से गिरफ्तार किए जाने की भी अपुष्ट सूचना मिली है। रवि सिंह से कुछ देर की पूछताछ के बाद ही सीबीआई की टीम ने उन्हें सिंगरौली कोतवाली के सुपुर्द कर दिया। इसी बीच रवि सिंह ने खुद के अस्वस्थ होने की बात कही, जिसके बाद कोतवाली पुलिस ने उसे ट्रामा सेंटर में भर्ती करा दिया। फिलहाल सीबीआई टीम के सदस्यों ने इस बारे में कुछ नहीं बताया है कि वहां जांच किस बात की चल रही है। कौन है रवि सिंह सप्लायर रवि सिंह के बारे में कहा जाता है कि वो एनसीएल का सबसे बड़ा सप्लायर है। वो कंपनी को विभिन्न प्रकार की महंगी मशीनें और उनके पार्ट उपलब्ध कराता है। वो सिंगरौली के बड़े रसूखदारों में शुमार है। इसके रसूख का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सीबीआई ने जैसे ही रवि सिंह को कोतवाली पुलिस के भरोसे छोड़ा, वो बीमार हो गया और उसे ट्रामा सेंटर तक पहुंचा दिया गया।

NCL सीएमडी के पीए सूबेदार ओझा के यहा भी सीबीआई की रेड

CBI also raided the house of NCL CMD's PA Subedar Ojha

CBI also raided the house of NCL CMD’s PA Subedar Ojha भोपाल। सिंगरौली के एनसीएल  में छापेमारी के दौरान सीबीआई को लगभग 4 करोड रुपए नगद मिलने की खबर है, सीबीआई ने इस मसले पर NCL के सप्लायर रवि सिंह को गिरफ्तार कर लिया है, रवि सिंह के यहां से भी डेढ़ करोड़ रुपए नगद मिले हैं, सीबीआई ने रवि सिंह को गिरफ्तार करके बैढन थाने में रखा है।

पूर्व मुख्य मंत्री कमलनाथ : राजधानी भोपाल आवास पर बहिनों द्वारा आयोजित रक्षाबंधन समरोह में हुए सामिल 

Former Chief Minister Kamal Nath: Participated in Rakshabandhan celebration organized by sisters at his residence in the capital Bhopal

Former Chief Minister Kamal Nath: Participated in Rakshabandhan celebration organized by sisters at his residence in the capital Bhopal भोपाल । प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ पिछले काफी समय से मध्य प्रदेश की राजनीति में समय नहीं दे पा रहे थे हालांकि वह प्रदेश की सभी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थे और सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर हमला बोल रहे थे। अब एक बार फिर से कमलनाथ भोपाल पहुंच गए हैं और कार्यकर्ताओं से मेल मुलाकात शुरू कर दी। रविवार को उन्होंने सुबह भोपाल के सरकारी निवास पर बहनों से राखी बंधवाई। बहनों के प्रेम और स्नेह से हृदय में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार  पूर्व सीएम कमलनाथ ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी दी। उन्होंने अपने सोशल अकाउंट एक्स पर लिखा कि आज भोपाल में बहनों से राखी बंधवाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बहनों के इस प्रेम और स्नेह से हृदय में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है। पवित्र राखी हमें बहनों की रक्षा करने की प्रेरणा देती है। ईश्वर मुझे शक्ति दे कि मैं आजीवन बहनों के सम्मान की रक्षा करता रहूं।

महाकाल दर्शन कर रक्षा बंधन के कार्यक्रम में हुए शामिल : सीएम मोहन यादव

CM: After visiting Mahakal, he participated in the Raksha Bandhan program

CM: After visiting Mahakal, he participated in the Raksha Bandhan program उज्जैन। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सुबह उज्जैन पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने बाबा महाकाल के दर्शन किए और फिर रघुनंदन गार्डन में आयोजित रक्षा बंधन कार्यक्रम में पहुंचे। आज वे विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। रात यहीं विश्राम कर सोमवार सुबह 11.30 बजे उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड के भवन में खुले धर्मस्व विभाग के राज्य कार्यालय का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद भगवान महाकाल की परंपरागत पांचवीं सवारी (श्रावण मास) में सम्मिलित होंगे। मालूम हो कि इस बार मुख्यमंत्री पूरे डेढ़ महीने बाद अपने गृह नगर उज्जैन आए हैं। पिछली बार वे 6 जुलाई को नगर निगम की कपिला गोशाला में रखे गोसंवर्धन कार्यक्रम में आए थे। इसके बाद 21 जुलाई, फिर 5 अगस्त को उज्जैन आने की संभावना बनी। पहले सीएम के आने का कार्यक्रम हो गया था स्थगित तैयारी स्वरूप झालरिया मठ में जिला शिक्षा विभाग ने गुरु पूर्णिमा उत्सव मनाने, होनहार 429 विद्यार्थियों संग 604 शिक्षकों का सम्मान करने, हरिफाटक ब्रिज पर लगाई आकर्षक लाइट का शुभारंभ, धर्मस्व विभाग के कार्यालय का उद्घाटन और शासकीय धन्वंतरि आयुर्वेद महाविद्यालय परिसर में हर्बल गार्डन का पौधारोपण कार्यक्रम की तैयारी की थी।

एक दशक से सक्रिय सिंडीकेट पर वन बल प्रमुख का चोट, पूर्व में किए गए टेंडर निरस्त करने के आदेश

Forest Force chief hits out at syndicate active for a decade, orders to cancel tenders made earlier

Forest Force chief hits out at syndicate active for a decade, orders to cancel tenders made earlier उदित नारायण भोपाल। वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने डीएफओ-सीएफ और सप्लायर्स के बीच बने सिंडीकेट को तोड़ने की मंशा से कड़ा फैसला लिया है। वन बल प्रमुख ने बुधवार को एक आदेश जारी कर फील्ड के अफसरों को सख्त निर्देश दिए हैं कि टेंडर की नई शर्ते बनने तक पूर्व में किए गए खरीदी संबंधित निविदाएं निरस्त किए जाएं। यही नहीं, विभाग के मुखिया ने खरीदी के कारोबार में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की मंशा से पूरे प्रदेश में एक समान शर्तें लागू करने के लिए कमेटी बना दी है। इसके पहले भी श्रीवास्तव ने एक आदेश जारी कर सभी टेंडर विभागीय वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि इस निर्देश का पालन कई डीएफओ नहीं कर रहे हैं।  जंगल महकमेमें एक दशक से अधिक समय से फील्ड के अफसरों और सप्लायर्स के बीच एक सिंडीकेट बना हुआ है। इस सिंडीकेट को अभी तक कोई तोड़ नहीं पाया। सिंडीकेट से जुड़े 10 -12 बड़े सप्लाययर्स ही वन विभाग में हर वित्तीय वर्ष में 90-100 करोड़ के करोड़ के कारोबार करते आएं है। उनके इस कारोबारी साम्राज्य में कोई और घुसपैठ न कर सके, इसके लिए फील्ड के अफसर से खरीदी संबंधित निविदाओं में नई-नई शर्तों जुड़वाते आ रहे थे। इन निविदाओं की जानकारी भी उन्हें ही लगती थी, जो सिंडीकेट से जुड़े होते हैं। वन बल प्रमुख बनने के बाद से असीम श्रीवास्तव को लगातार शिकायतें मिल रही थी कि टेरिटोरियल में बैठे डीएफओ और सीएफ कमीशन बाजी का खेल खेलने के लिए मनमानी शर्तें जोड़ रहे हैं। इसके कारण मध्य और लघु कारोबारी प्रतिस्पर्धा से बाहर होते जा रहे हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सबसे पहले वन बल प्रमुख ने एक आदेश जारी किया जिसमें सभी को निर्देशित किया है कि निविदा चाहे जेम (Gem) के जरिये हो या फिर अखबार में प्रकाशित की गई हो, उन्हें विभाग के साइट पर भी अपलोड कराया जाएं। हालांकि इस आदेश के बाद मॉनिटरिंग की व्यवस्था मुख्यालय स्तर पर नहीं की गई है जिसके कारण डीएफओ और सीएफ अभी भी नफरमानी कर रहे हैं। लेकिन 14 अगस्त को जारी आदेश से सिंडीकेट से जुड़े अधिकारियों और सप्लायर्स में हड़कंप है।  क्या क्या खरीदी होती है वन विभाग में हर साल चैनलिंक, वायरवेड, टिम्बर पोल्स, रूट ट्रेनर्स, मिट्टी, गोबर एवं रासायनिक खाद की खरीदी में बड़े पैमाने पर खरीदी होती है। सबसे अधिक खरीदी कैंपा फंड से की जा रही है। इसके अलावा विकास और सामाजिक वानिकी (अनुसंधान एवं विस्तार ) शाखा से भी खरीदी होती है। विभाग के उच्च स्तरीय सूत्रों की माने तो कुल रिलीज बजट की 18 से 20% धनराशि कमीशन के रूप में टॉप -टू – बॉटम बंटती है। यानि सप्लायर्स को हर साल लगभग 10-12 करोड़ कमीशन में बांटने पड़ते हैं।  चहेती फर्म को उपकृत करने जोड़ देते हैं ये शर्तें राजनीतिक दबाव में बदल दी जाती है शर्तें मैनेजमेंट कोटे से फील्ड में पदस्थ हुए आईएफएस अधिकारी राजनीतिक दबाव के आगे झुक जाते हैं। इसके बाद सिंडीकेट से जुड़े आईएफएस अपनी स्वार्थ सिद्धी के लिए सप्लायर्स के अनुसार शर्तें जोड़-घटा कर कमीशनबाजी के खेल से जुड़ हैं। इस खेल में उन्हें तब अफसोस होने लगता है जब उनके खिलाफ जांच शुरू होने हो जाती है। इसी खेल से जुड़े तत्कालीन छतरपुर डीएफओ एवं वर्तमान अवर सचिव वन अनुराग कुमार के खिलाफ लोकायुक्त संगठन कर रहा है। बालाघाट मुख्य वन संरक्षक अरविंद प्रताप सिंह सेंगर के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है। सूत्रों की माने तो एक दर्जन से अधिक डीएफओ के खिलाफ शिकायतें विभागीय विजिलेंस में लंबित है।  सीनियर अधिकारियों ने की है तारीफ  वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव द्वारा बुधवार को किए गए आदेश की तारीफ की है। एक सीनियर अधिकारी ने कहा है कि इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और लघु एवं मध्यम कारोबारी भी प्रतिस्पर्धा से जुड़ जाएंगे। यही राज्य शासन की भी मंशा है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के एक अधिकारी का कहना है कि फील्ड के अधिकारी अनावश्यक जांच और सप्लायर्स के  दबाव से मुक्त रहेंगे।

वन भवन की अनोखी पहल, बनाया बीज बैंक

A unique initiative of Van Bhavan, created a seed bank

A unique initiative of Van Bhavan, created a seed bank उदित नारायण बीज बैंक स्थापना एक ऐतिहासिक पहल है. वन विभाग के समस्त स्टाफ तक एक मैसेज पास कर देंगे तो बहुत बड़ा काम हो जाएगा.  इस तरह है वन भवन में स्थापित बीज बैंक में करोडो बीज जुटाने में सफल हो जायेंगे  कृपया  वन भवन  स्टाफ अपने घरों में आने वाले सभी फलों के बिजों को गुठलियों को कचरे में ना फेंके उन्हें धोकर सुखाकर पॉलिथीन में पैक करके वन भवन में बीज बैंक के बॉक्स में दान करें.  सांसें हो रही हैं कम आओ वृक्ष लगाएं हम

कोविड-19 महामारी में बचाव कार्य करने वाले समस्त कोविड स्टाफ को बहाल किया जाए एवं संविदा नियुक्ति दी जाए:- डॉ सूर्यवंशी

All the Covid staff doing rescue work during Covid-19 pandemic should be reinstated and given contractual appointment:- Dr. Suryavanshi

All the Covid staff doing rescue work during Covid-19 pandemic should be reinstated and given contractual appointment:- Dr. Suryavanshi भोपाल। कोविड-19 आयुष चिकित्सक संघ मध्यप्रदेश प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य डॉ देवेंद्र सूर्यवंशी ने बताया कि कोविड-19 महामारी एवं बचाव कार्य के लिए कोविड स्टाफ़ आयुष चिकित्सक, दंत चिकित्सक, लैब टेक्नीशियन एवं नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट, ईसीजी टेक्निशियन, पैरामेडिकल स्टाफ की सेवाएं 28 मार्च 2022 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा बजट का हवाला देकर समाप्त कर दी गई थी। आज कोविड-19 आयुष चिकित्सक संघ मध्यप्रदेश के तत्वधान में माननीय मुख्यमंत्री के नाम भोपाल कलेक्टर को पुनः बहाली एवं संविदा नियुक्ति दी जाने हेतु ज्ञापन पत्र सौंपा गया और मांग की गई की तत्काल समस्त कोविड स्टाफ को पुनः बहाल किया जाए। पिछले 2 वर्ष से लगातार कोविड स्टाफ दुवारा पुनः बहाल की सरकार से मांग की जा रही है। कोविड स्टाफ को पुनः सेवा में लिए जाने हेतु मध्यप्रदेश के 200 से अधिक विधायको ने मुख्यमंत्री जी को समर्थन पत्र लिखा व समय समय पर विधानसभा में मुद्दा भी उठाया गया। परन्तु आज दिनांक तक कोरोना योद्धाओं को सरकार दुवारा सेवा में नही लिया गया। कोविद 19 आयुष चिकित्सक संघ ने आज पुनः कलेक्टर भोपाल को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर बहाली की मांग की।ज्ञापनकर्ता कोविड-19 आयुष चिकित्सक संघ प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य डॉ देवेंद्र सूर्यवंशी, डॉ प्रिया आर्य, डॉ हर्षा पाटिल, डॉ रेणु मिश्रा, डॉ चंद्रकांता वर्मा, डॉ सना मंसूर, डॉ पुष्पेंद्र मीना लैब टेक्नीशियन रचना साहू, नरेंद्र लोधी, स्वेता, प्रियंका सिंह, देवेंद्र चौधरी, तरवार जगदीश, स्टाफ नर्स कंचन, ममता सोनी, दीपिका आदि प्रमुख ने माननीय मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर भोपाल को ज्ञापन सौंपा।

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