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पन्ना के किशनगढ़ बफर में मिश्रित वृक्षारोपण के पहले ही वर्ष गायब होने लगे पौधे

Plants started disappearing in the very first year of mixed plantation in Panna's Kishangarh buffer.

Plants started disappearing in the very first year of mixed plantation in Panna’s Kishangarh buffer. भोपाल। पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर जोन की किशनगढ़ रेंज के तहत 50 हैक्टेयर रकबा में 25 हजार पौधों का रोपण किया गया है। इस पौध रोपण पर प्रति एकड़ करीब 2 लाख रुपए खर्च किए जा रहा हैं। इसमें पहले साल के लिए स्वीकृत राशि खर्च कर दी गई है। इसके बावजूद रोपे गए ज्यादातर पौधे एक साल में ही गायब हो गए हैं।बफर जोन की किशनगढ़ रेंज के तहत राईपुरा बीट के कक्ष क्रमांक पी- 454 के तहत 50 हैक्टेयर में पौधरोपण किया जा रहा है। मि​श्रित वृ​क्षारोपण योजना के तहत वर्ष 2023-24 में गड्‌ढा करके 25 हजार पौधों का रोपण किया गया है। स्वीकृत परियोजना के तहत इन पौधों के रखरखाव के नाम पर 10 सालों तक राशि खर्च की जाना है, लेकिन इनमें से ज्यादातर पौधे पहले साल में ही खराब हो गए हैं। तार फेंसिंग निकालकर खकरी बनाने के नाम पर राशि का दुरुपयोग :जिस स्थान पर प्लांटेशन को मंजूर किया गया है। उस स्थान पर विभाग ने अन्य प्रोजेक्ट के तहत तार फेंसिंग करके राशि को खर्च किया। इसके बाद उसी स्थान पर अब पत्थरों की नई खकरी बना दी गई है। इस कारण तार फेंसिंग को निकालकर फेंक दिया गया है अब भी तार मौके पर पड़े हुए हैं। 600 मीटर लंबाई में खकरी बनाकर राशि को बर्बाद किया गया है। इनका कहना 25000 गड्‌ढों की गिनती करने के बाद पौधों का रोपण किया गया है। परियोजना में तार फेंसिंग और पत्थरों की खकरी दोनों स्वीकृत हैं। इसी कारण पुरानी तार फेंसिंग को हटाकर पत्थरों की खकरी को बनाया गया है।प्रतीक अग्रवाल, रेंजर बफर जोन किशनगढ़ रेंज राईपुरा बीट की परियोजना 10 साल के लिए स्वीकृत है। पहले साल में 20 फीसदी पौध सूख सकते हैं। इसके लिए दूसरे साल में बजट रखा गया है। पौधों की गिनती कराई जाएगी। इसमें बड़बड़ी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।अंजना सुचिता तिर्की, फील्ड डायरेक्टर, पन्ना टाइगर रिजर्व

वकील को धमकी देते हुए SDM बोले- ‘जो उखाड़ना है, उखाड़ लेना’, आखिर क्या है ?

Threatening the lawyer, SDM said - 'Whatever has to be uprooted, uprooted', what is it?

Threatening the lawyer, SDM said – ‘Whatever has to be uprooted, uprooted’, what is it? रीवा ! एसडीएम और वकील के बीच सिविल केस के एक मामले को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि एसडीएम ने एडवोकेट को यह धमकी दे डाली, “यह मेरा न्यायालय है, आपको जो उखाड़ना है वह उखाड़ लेना”. इस पूरे विवाद को लेकर अभिभाषकों ने संभाग आयुक्त और कलेक्टर एसडीएम के खिलाफ ज्ञापन भी सौंपा है. यह पूरा घटनाक्रम वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. बताया जा रहा है कि पवन कुमार और जितेंद्र कुमार के बीच जमीन विवाद चल रहा है, जिसकी पेशी अनुविभागीय अधिकारी त्योंथर के यहां चल रही है. पेशी के दौरान जब वकील राजेंद्र गौतम दोपहर 2 बजे एसडीएम कार्यालय में पहुंचे तो विवाद शुरू हो गया. निर्धारित समय से लेट आने पर हुआ विवाददरअसल, एसडीएम संजय कुमार जैन का कहना था कि वे दोपहर 12:00 बजे से बैठे हुए हैं जबकि वकील का कहना था कि उनकी पेशी का समय 2.00 बजे निर्धारित किया गया था, इसलिए वे 2.00 बजे पहुंचे. इसी बात को लेकर विवाद धीरे-धीरे बढ़ता चला गया. इस दौरान एसडीएम की ओर से वीडियो भी बनाया गया, जबकि एसडीएम कोर्ट में मौजूद एक अन्य व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस विवाद के दौरान अन्य एडवोकेट भी राजेंद्र गौतम के समर्थन में एसडीएम कोर्ट में आ गए, तब हंगामा और भी बढ़ गया. प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायतइस पूरे विवाद को लेकर वकीलों ने त्योंथर एसडीएम संजय कुमार जैन की शिकायत संभाग आयुक्त और कलेक्टर से की है. आरोप है कि एसडीएम वकीलों पर दबाव बनाने के लिए अभद्र भाषा का भी उपयोग कर देते हैं. एसडीएम के खिलाफ वकीलों ने कार्रवाई की मांग की है. तारीख बढ़ाने पर शुरू हुआ विवादएसडीएम और वकील के बीच विवाद की शुरुआत उसे समय हो गई. जब एसडीएम ने वकील को समय पर कोर्ट में मौजूद नहीं होने पर तारीख बढ़ा दी. दूसरी तरफ एडवोकेट राजेंद्र गौतम का कहना था कि उन्हें 2 बजे का वक्त दिया गया था, इसलिए 2 बजे कोर्ट में पहुंचे मगर एसडीएम पहले से ही तारीख आगे बढ़ा दी. एडवोकेट का कहना है कि न्याय में देरी भी अन्याय की श्रेणी में आता है इसलिए बार-बार तारीख बढ़ने से उनके क्लाइंट को परेशानी उठाना पड़ रही थी.

राजस्व मंडल में नहीं हुई अध्यक्ष व सदस्यों कि नियुक्तियां हजारों मामले लंबित

Appointments of Chairman and members not made in Revenue Board, thousands of cases pending

Appointments of Chairman and members not made in Revenue Board, thousands of cases pending मध्य प्रदेश के राजस्व मंडल (Revenue Board) में अजब गजब हाल है. दस्तावेज में भले ही नाम चले, लेकिन हकीकत में राजस्व मंडल ग्वालियर ठप पड़ा हुआ है. पिछले 2021 से यहां न कोई केस सुना गया, न ही निराकरण हुआ. यहां दूर-दूर से लोग अपनी जमीन के प्रकरण के निपटारे के लिए आ रहे हैं, लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लग रही है. क्योंकि राजस्व मंडल में कोरम पूरा न होने के कारण सुनवाई नहीं हो रही है. भोपाल । मध्य प्रदेश का राजस्व मंडल बेकाम साबित हो रहा है। यहां पर बीते डेढ़ माह से सुनवाई के नाम पर लोगों को सिर्फ तारीख पर तारीख दी जा रही है। दरअसल विभाग में न अध्यक्ष है और न ही सदस्य, ऐसे में सुनवाई के लिए जरुरी कोरम ही पूरा नहीं हो पा रहा है। प्रदेश सुशासन ऐसा है कि शासन भी इस अपने संस्थान में नए अध्यक्ष व सदस्य की नियुक्ति में रुचि नहीं ले रहा है। ऐसे में लोगों का समय और पैसा दोनों ही बर्बाद हो रहे हैं। ऐसे में किसान परेशान होकर वापस लौटने का मजबूर बने हुए हैं। मंडल के अध्यक्ष आईएएस अश्विनी राय 31 मई को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनकी जगह किसी नए अफसर की पदस्थापना नहीं की गई है। इसकी वजह से तभी से सुनवाई का काम ठप पड़ा हुआ है। दरअसल नियमानुसार अध्यक्ष के अलावा कम से कम दो सदस्यों के रहते सुनवाई की जा सकती है। इसी तरह से एक सदस्य पूर्व एडीजे वीआर पाटिल का भी मंगलवार को कार्यकाल पूरा हो चुका है। इस वजह से अब मंडल में बतौर सदस्य आईएएस उमाकांत उमराव ही बचे हैं। मंडल में सचिव सपना निगम, अवर सचिव अंशु सोनी व रजिस्ट्रार प्रदीप शर्मा हैं। उनके अलावा अन्य कक्षों में ताले लटके रहते हैं। काम नहीं होने की वजह से स्टेनोग्राफर कक्ष में पीए और अन्य कर्मचारी हाथ पर हाथ धरे आराम करते रहते हैं। सुनवाई नहीं होने की वजह से सदस्य उमाकांत उमराव एवं सचिव सपना निगम के कक्ष भी अधिकांश समय बंद ही रहते हैं। अभिभाषक भी परेशान राजस्व के प्रकरणों में अपने हितग्राहियों की तरफ से पक्ष रखने के लिए जरुर बड़ी संख्या अभिभाषकों का आना जाना लगा रहता है, लेकिन वे भी तारीख बढ़ने की वजह से अधिकांश समय खाली ही रहते हैं। यहां पर मौजूद एक वरिष्ठ अभिभाषक का कहना है कि अश्विनी राय की सेवानिवृत्ति के बाद से सुनवाई बंद है। इससे सबसे ज्यादा किसान परेशान हैं, क्योंकि वह न्यायालय जाने के लिए सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा कि वैसे भी सरकार ने वर्ष 2018 में नियमों में संशोधन कर राजस्व मंडल को अधिकार विहीन कर दिया है, क्योंकि अब यहां आयुक्त के खिलाफ पुनरीक्षण वर्जित किया जा चुका है। एसडीएम के बाद न्यायालय जाना पड़ता है। इसी तरह एक अन्य वकील भी नई व्यवस्था से खुश नजर नहीं आए। उन्होंने कहा कि सरकार की अनदेखी की वजह से बीते डेढ़ माह से सुनवाई बंद है। अश्विनी राय ने करीब 500 प्रकरणों में सुनवाई तो की, लेकिन वे इन मामलों में निर्णय नहीं द गए, जिसकी वजह से यह मामले भी अटके हुए हैं। मंडल का कोरम अधूरा तो नहीं होता कोई कार्य अध्यक्ष और सदस्यों का कोरम पूरा नहीं होने पर राजस्व मंडल कार्य नहीं करता है। पिछले डेढ़ माह से यही स्थिति है। यहां आने वाले मामलों में लिपिक तारीख बढ़ाने का काम कर रहे हैं। इसलिए न्याय के लिए उम्मीद लगाए बैठे मुवक्किल परेशान हैं। इस सिलसिले में विधानसभा में भी सवाल उठ चुके, लेकिन फिर भी कोरम पूरा करने के लिए नियुक्ति नहीं की गई है। अध्यक्ष का पद अतिरिक्त मुख्य सचिव और सदस्य प्रमुख सचिव स्तर का होता है। ऐसा नही है कि यहां पर पहली बार इस तरह की स्थिति बनी है, बल्कि पूर्व में भी ऐसा ही हाल कई बार रह चुका है। अश्विनी कुमार राय के समय मनु श्रीवास्तव सदस्य थे, लेकिन एक सदस्य की कमी के कारण कोरम अधूरा रहने पर सुनवाई नहीं हो सकी। इसी तरह से दिसंबर 2021 तक राजेश बहुगुणा सदस्य पद पर थे उनके बाद से यह पद खाली रहा। जिससे द्वितीय अपील में आने वाले बंटवारे नामांतरण के प्रकरणों पर सुनवाई नहीं हुई और तारीख आगे बढ़ती रही। गठन का उद्देश्य ही नहीं हो पा रहा पूरा मध्य भारत राजस्व मंडल अध्यादेश 1948 के अधीन राजस्व मंडल का गठन किया गया था। मंडल का गठन मप्र भू राजस्व संहिता 1959 के अन्तर्गत किया गया है। राजस्व मंडल प्रदेश में भू-राजस्व संहिता के अन्तर्गत राजस्व प्रकरणों की अपीलें-निगरानी सुनने की उच्चतम संस्था है। राज्य शासन द्वारा ग्वालियर को मंडल का प्रधान स्थान नियत किया गया है। राजस्व मंडल में द्वितीय अपील आती है। वर्ष 2018 में राज्य शासन ने राजस्व मंडल की समीक्षा करने की शक्ति को खत्म कर दिया था, इसलिए रिवीजन के पुराने मामले ही चल रहे हैं। अब राजस्व मंडल बंटवारे-नामांतरण की द्वितीय अपील सुनता है। सीमांकन तक के मामले यहां नहीं आते हैं, वे सीधे एसडीएम के बाद न्यायालय में ले जाना पड़ते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने “अग्रदूत पोर्टल” लांच किया

Chief Minister Dr. Yadav launched “Agradoot Portal”

Chief Minister Dr. Yadav launched “Agradoot Portal” मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार पारदर्शिता के साथ नागरिकों तक पहुंच बनाने एवं लाभार्थियों को योजनाओं संबंधी जानकारी भेजने के लिए संचार क्रांति का बेहतर उपयोग कर रही है। आज मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में जनसंपर्क विभाग द्वारा तैयार किए “अग्रदूत पोर्टल” को लाँच किया है। “सूचना ही शक्ति है” के मंत्र को सार्थक करने वाला अग्रदूत पोर्टल अपने आप में अद्भूत पहल है। किसी भी राज्य के जनसंपर्क विभाग द्वारा नागरिकों की सुविधा एवं त्वरित सूचनाओं के लिए इस तरह की अभिनव पहल पहली बार की गई है। लांचिग के अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पहला मैसेज लाडली बहनों को भेजा। यह मैसेज सावन में रक्षाबंधन के शगुन स्वरूप 1 अगस्त को लाडली बहनों के खातों में ₹250 अंतरित करने संबंधी है । क्या है अग्रदूत पोर्टल मध्यप्रदेश सरकार के जनसंपर्क विभाग द्वारा तैयार किया गया अग्रदूत पोर्टल सूचना ही शक्ति है की पहल पर काम करेगा। यह लक्षित समूह तक सिंगल क्लिक में सूचनाएं प्रसारित करने के लिए जनसंपर्क विभाग की अभिनव पहल है। अग्रदूत पोर्टल द्वारा सिंगल क्लिक के माध्यम से प्रदेश के टारगेट ऑडियंस तक सूचनाएं पहुंचाई जा सकेंगी। पोर्टल के माध्यम से त्रि-स्तरीय रिव्यू के बाद संदेश लोकप्रिय मोबाइल मैसेजिंग एप – व्हाट्सअप पर शेयर किया जाएगा एवं इसके माध्यम से एक साथ मल्टी मीडिया मैसेज ( ग्राफिक्स, टैक्स्ट, लिंक, वीडियो) भी शेयर किए जा सकेंगे। इसके माध्यम से नागरिकों तक आसानी से सूचनाएं पहुंचाई जा सकेंगी। अग्रदूत पोर्टल की विशेषताएँ अग्रदूत पोर्टल सूचना क्रांति के क्षेत्र में अभिनव पहल है। इससे कम समय में लक्षित नागरिकों तक पहुँच बनाई जा सकेगी। सूचना प्रसार, व्यापक संचार, समग्र डेटाबेस का उपयोग, WhatsApp के माध्यम से सूचना का प्रसार, सिंगल क्लिक आधारित, यूजर फ्रेंडली, त्रि-स्तरीय अनुमोदन प्रक्रिया कम समय में संपन्न होगी। श्रेणी अनुसार कर सकेंगे जानकारियाँ अलग-अलग अग्रदूत पोर्टल से प्रदेश के नागरिकों द्वारा चाही गई जानकारियाँ फ़िल्टर की जा सकती हैं। उन्हें श्रेणी अनुसार विभाजित कर मैसेज या सूचनाएं भेजी जा सकेंगी, जैसे उम्र, लिंग, जाति, धर्म, व्यवसाय, विकलांगता, जिला/ स्थानीय निकाय/ क्षेत्र के अनुरूप चयनित कर जानकारी भेज सकेंगे।

कटनी के झिन्ना की खदान का वन भूमि प्रकरण में कंसोटिया के आदेश को वर्णवाल ने बदला

Varnwal changed the order of Consotiya in the forest land issue of Jhinna mine of Katni.

Varnwal changed the order of Consotiya in the forest land issue of Jhinna mine of Katni. भोपाल। अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल ने पूर्व एसीएस वन जेएन कंसोटिया के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें कटनी जिले की तहसील ढीमरखेड़ा के ग्राम झिन्ना की खदान के मामले में सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी वापस लेने का आदेश दिया था। अपने आदेश को तत्काल अमल में लाने के लिए कंसोटिया ने बाकायदा डीएफओ कटनी को कारण बताओं नोटिस की तलब किया था। यहां यह भी तथ्य उल्लेखनीय है कि जब वर्णवाल प्रमुख सचिव वन थे तब उन्होंने भी एसएलपी वापस लेने का आदेश जारी किया था। अब वही बता सकते है कि वे तब सही थे या फिर अब..? गत दिवस वन विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने वन मुख्यालय को निर्देश दिये हैं कि यदि यह केस अब तक वापस नहीं लिया गया है तो केस वापस लेने की कार्रवाई आगामी आदेश तक रोक दी जाये। वर्णवाल के आदेश के बाद जंगल महकमे में लाख टके का सवाल उठ रहा है कि आखिर किस अदृश्य शक्ति के दबाव में आकर पूर्व एसीएस कंसोटिया ने एसएलपी वापस लेने का आदेश जारी किया था। एसएलपी वापस लेने संबंधित आदेश जारी करने के पूर्व 13 अक्टूबर 23 को अपर मुख्य सचिव वन कंसोटिया की अध्यक्षता में एक विशेष बैठक बुलाई गई थी। बैठक में अतुल कुमार मिश्रा सचिव वन, अशोक कुमार पदेन सचिव, आरके गुप्ता तत्कालीन वन बल प्रमुख, अतुल कुमार श्रीवास्तव तत्कालीन पीसीसीएफ वर्किंग प्लान और अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक भू अभिलेख डॉ वीएस अन्नागिरी भी उपस्थित थे। यह बैठक में ग्राम झिन्ना एवं हरैया तहसील ढीमरखेड़ा जिला कटनी में स्वीकृत खनिज पट्टे विवाह के निराकरण के लिए बुलाई गई थी। उल्लेखनीय है कि उक्त खदान के वन भूमि में आने के कारण इस पर रोक लगाई गई थी परन्तु खदान स्वामी हाईकोर्ट से जीत गया था जिस पर वन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट में 2017 से लंबित है मामला क्या है मामला-शिकायती पत्र के मुताबिक, कटनी के खनन कारोबारी आनंद गोयनका मेसर्स सुखदेव प्रसाद गोयनका को मध्य प्रदेश की तत्कालीन दिग्विजय सरकार के कार्यकाल में 1994 से 2014 तक की अवधि के लिए 48.562 हेक्टेयर भूमि पर खनिज करने का पट्टा मिला था। खनिज पट्टा आवंटित होने की पीछे भी बहुत कुछ छिपा है। दरअसल मध्य प्रदेश शासन ने ग्राम झिन्ना तहसील ढीमरखेड़ा जिला कटनी के वन क्षेत्र की 48.562 हेक्टेयर भूमि पुराना खसरा नम्बर 310, 311, 313, 314/1, 314/2, 315, 316, 317, 318, 265, 320 में खनिज के लिए एक अप्रैल 1991 में 1994 से लेकर 2014 तक की अवधि के लिए निमेष बजाज के पक्ष में खनिज पट्टा स्वीकृत किया था। जिसे वर्ष 1999 में मध्य प्रदेश शासन के खनिज विभाग के आदेश से 13 जनवरी 1999 को उक्त खनिज पट्टा मेसर्स सुखदेव प्रसाद गोयनका प्रोप्राइटर आनंद गोयनका के पक्ष में हस्तांतरित किया गया। लेकिन साल 2000 में वन मंडल अधिकारी कटनी के पत्र के आधार पर कलेक्टर कटनी ने आदेश पारित कर लेटेराइट फायर क्ले और अन्य खनिज के खनन पर रोक लगा दी थी। वन भूमि का इतिहास-ग्राम झिन्ना की भूमि जमींदारी उन्मूलन के बाद वन विभाग को वर्ष 1955 में 774.05 एकड़ भूमि प्रबंधन में मिली थी। जो वर्ष 1908-09 से 1948-49 तक जमींदार रायबहादुर खजांची, बिहारी लाल व अन्य के नाम दर्ज थी जिसे 10 जुलाई 1958 की सूचना और एक अगस्त 1958 की प्रकाशन तिथि से संरक्षित वन घोषित किया गया। इसके बाद भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 4 की अधिसूचना क्रमांक डी-3390-3415-07-दस-3 दिनांक 24 सितम्बर 2007 प्रकाशन दिनांक 14 दिसम्बर 2007 से वनमंडल झिन्ना के अंतर्गत ग्राम झिन्ना के खसरा नम्बर 304, 333, 320 में कुल रकबा 153.60 एकड़ क्षेत्र अधिसूचित कर एसडीएम ढीमरखेड़ा को वन व्यवस्थापन अधिकारी नियुक्त किया गया जो कि वन विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज है। वर्ष 2019-19 में एसडीएम ढीमरखेड़ा (वन व्यवस्थापन अधिकारी) द्वारा राजस्व प्रकरण क्रमांक /01अ-19(4)/2018-19 में पारित आदेश दिनांक 18-9-2019 के अंतर्गत उल्लेख किया गया कि वादग्रस्त भूमि खसरा नम्बर 320 वर्ष 1906 से 1951 तक मालगुजारी की जमीन नहीं थी। एसडीएम ढीमरखेड़ा (वन व्यवस्थापन अधिकारी) द्वारा पारित आदेश दिनांक 18-07-2008, 18-10-2011 और 18-09-2019 को पारित प्रत्येक आदेश में उक्त भूमि को वन भूमि मानने से इंकार किया। जिसे कलेक्टर कटनी द्वारा अपने आदेश दिनांक 4-मार्च 2010, 19-मार्च -2013 और 19-दिसम्बर -2019 के माध्यम से एसडीएम ढीमरखेड़ा (वन व्यवस्थापन अधिकारी) द्वारा पारित आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक लगाई गई है।

स्वावलंबन, भारतीय गांवों की है मुख्य शक्ति और विशेषता – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

Self-reliance is the main strength and specialty of Indian villages - Chief Minister Dr. Yadav

Self-reliance is the main strength and specialty of Indian villages – Chief Minister Dr. Yadav मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वावलंबन ही भारतीय गांव की मुख्य शक्ति और उनकी विशेषता रही है। हजारों साल की गुलामी के बावजूद भारतीय समाज ने अपने सांस्कृतिक स्वरूप और मूल्यों को गाँवों के स्वावलंबन के बल पर ही अक्षुण्य बनाए रखा है। “आत्मनिर्भर पंचायत-समृद्ध मध्यप्रदेश” विषय पर संगोष्ठी, पंचायतों और ग्रामों को आर्थिक रूप से अधिक सशक्त और विकास परक बनाने में प्रभावी रूप से सहायक होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा “आत्मनिर्भर पंचायत- समृद्ध मध्य प्रदेश” विषय पर कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आयोजित संगोष्ठी के शुभारंभ अवसर पर यह बातें कही। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर संगोष्ठी का शुभारंभ किया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल, किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री ऐदल सिंह कंषाना, पशुपाल राज्य मंत्री श्री लखन पटेल एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्रीमती राधा सिंह तथा अपर मुख्य सचिव श्री मलय श्रीवास्तव विशेष रूप से उपस्थित थे। हर घर में जल और हर खेत में सिंचाई के लिए हो रहे हैं विशेष प्रयास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रावण मास में आरंभ हुई तीन दिवसीय कार्यशाला में महाकाल बाबा के जयघोष के साथ अपना संबोधन आरंभ करते हुए कहा कि भारतीय गाँव अनुशासित, संयमित और परम्परा व मूल्यों के अनुसार जीवन जीने के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के स्वावलंबी ग्राम की व्यवस्था को सशक्त करने के प्रयासों से ग्रामीण जीवन अधिक सुविधाजनक हो रहा है और ग्रामीणों को प्रगति के भी पर्याप्त अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा हर घर में नल से जल उपलब्ध कराने के लिए जल जीवन मिशन संचालित है तथा हर खेत में सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था के उद्देश्य से स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार पूरे प्रदेश में प्रयास किए जा रहे हैं। इस दिशा में नर्मदा घाटी विकास के परिणाम सबके सामने हैं। केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश को 45-45 हजार करोड़ रूपए उपलब्ध कराए गए हैं। कालीसिंध-पार्वती और चंबल लिंक परियोजना की गतिविधियां आरंभ हो रही हैं। प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ने से किसानों का भी आर्थिक सशक्तिकरण हो रहा है। दस से अधिक गाय पालने वालों को मिलेगा अनुदान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के आधार खेती के साथ-साथ पशुपालन को भी राज्य सरकार विशेष महत्व दे रही है। वृद्ध, अस्वस्थ, अपाहिज व असहाय गायों को पालने के लिए राज्य सरकार द्वारा राशि उपलब्ध कराई जाएगी। कांजी हाऊसों को गौ-शाला के रूप में विकसित किया जाएगा और ऐसी गायों की व्यवस्था कांजी हाऊस में की जाएगी। गायों पर दिए जाने वाले अनुदान की राशि में भी वृद्धि की गई है, जो किसान 10 से अधिक गाय पालेंगे, उन्हें अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही फसलों के समान दूध पर बोनस उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी आरंभ की जाएगी। गौ-माता की संवदेनशीलता और आत्मीयता अद्भुत है, गौ-पालन को प्रोत्साहन देने के लिए भी राज्य शासन द्वारा विशेष नीति बनाई जा रही है। प्रदेश में आयुर्वेदिक केन्द्र विकसित किए जाएंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर है, यहाँ आयुर्वेदिक औषधियों की भी भरपूर सम्पदा है। प्रदेश में आयुर्वेदिक केन्द्र भी विकसित किए जाएंगे। प्रदेश में लघु, कुटीर उद्योग तथा बहनों के स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने व आय में वृद्धि के लिए हरसंभव व्यवस्था की जाएगी। प्रधानमंत्री श्री मोदी की मंशा के अनुरूप किसान, महिला, युवा और गरीब को जोड़ते हुए, उन्हें सशक्त बनाते हुए मध्यप्रदेश आगे बढ़ेगा, पंचायतें भी आत्मनिर्भर होंगी और प्रदेश की समृद्धि को बढ़ाएंगी। पंचायतों के सम्मुख चुनौतियों और ई-पंचायत व्यवस्था पर भी होगी चर्चा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि “आत्मनिर्भर पंचायत-समृद्ध मध्यप्रदेश” पर संगोष्ठी पंचायतराज व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सशक्त बनाने में मील का पत्थर सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि कृषि को लाभकारी बनाने, हरित मध्यप्रदेश, शहरीकरण से पंचायतों पर प्रभाव, केन्द्र पोषित योजनाओं का क्रियान्वयन, पेसा अधिनियम का क्रियान्वयन तथा वन क्षेत्र से लगी पंचायतों के सम्मुख चुनौतियों पर चर्चा के साथ ही ई-पंचायत व्यवस्था और पंचायतों की कार्य प्रणाली में वित्तीय अनुशासन तथा पारदर्शिता आदि विषयों पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया प्रदर्शनी का अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर आत्मनिर्भर पंचायत-समृद्ध मध्य प्रदेश” विषय पर लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। उन्होंने द्रव्य जीवामृत, सामुदायिक जैव संसाधन केंद्र, मनरेगा से आजीविका, संवर्धन पोषण शिक्षा, सामुदायिक पोषण वाटिका और प्राकृतिक खेती पर मंडल मॉडल के स्टॉल देखे। जिला एवं जनपद पंचायतों के अध्यक्ष, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, सरपंचों के लिए आयोजित तीन दिवसीय संगोष्ठी में लगभग 500 प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। आभार प्रदर्शन जर्मन कार्पोरेशन (जीआइजेड) के प्रोग्राम डायरेक्टर फरहद वानिया ने किया।

MP News: मंदसौर और कटनी के कलेक्टर बदले, तीन अफसरों के तबादले

MP News: Collectors of Mandsaur and Katni changed, three officers transferred

MP News: Collectors of Mandsaur and Katni changed, three officers transferred मध्य प्रदेश सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के तीन अफसरों के तबादला आदेश जारी किए हैं। मंदसौर और कटनी के कलेक्टरों को बदला गया है। कटनी के कलेक्टर अवि प्रसाद को मध्य प्रदेश शासन में उप सचिव बनाया गया है। डॉ. मोहन यादव सरकार ने लंबे इंतजार के बाद तीन भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के ट्रांसफर आदेश जारी किए है। मंगलवार को सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से जारी आदेश में तीन आईएएएस अधिकारियों के ट्रांसफर आदेश जारी किए है। 2014 बैच के आईएएस अफसर अवि प्रसाद को कटनी से हटाया गया है। उन्हें मंत्रालय में उप सचिव बनाया गया है। 2014 बैच के अधिकारी और मंदसौर कलेक्टर दिलीप कुमार यादव को कटनी कलेक्टर बनाया गया है। 2015 बैच की आईएएस अधिकारी सीएमओ में उप-सचिव अदिति गर्ग को मंदसौर कलेक्टर बनाया गया है। अब जल्द ही और अधिकारियों के ट्रांसफर की सूची जारी होने की संभावना है। युवा अधिकारी जाएंगे मैदान मेंडॉ. मोहन यादव सरकार में लंबे समय से आईएएस अधिकारियों के ट्रांसफर की अटकलें लग रही थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव चाहते हैं कि नए और युवा अफसरों को मैदानी ड्यूटी दी जाए। इसी कड़ी में इन ट्रांसफर्स को देखा जा रहा है।

प्रदेश में झमाझम बारिश ने रोके ट्रेनों के पहिये, आज जिलों में भारी बरसात का अलर्ट

Heavy rain in the state stopped the wheels of trains, alert of heavy rain in the districts today

Heavy rain in the state stopped the wheels of trains, alert of heavy rain in the districts today MP Weather Update: मध्य प्रदेश में झमाझम बारिश का दौर जारी है. मानसून अब अपने पूरे शबाब पर है. झमाझम बारिश की वजह से रेलवे विभाग को दो ट्रेने रद्द करना करना पड़ी तो वहीं मौसम विभाग ने आज भी प्रदेश के 27 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. बता दें प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश हो रही है. अगले दो दिन 26 जुलाई तक भारी बारिश से राहत की उम्मीद नहीं है. मौसम विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़ के मध्य हिस्से में लो प्रेशर है, इस वजह से मानसून ट्रफ लाइन मध्यप्रदेश के बीच से गुजर रही है. साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी एक्टिव है, जिसकी वजह से प्रदेश में भारी बारिश हो रही है. सोमवार को प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश हुई. छिंदवाड़ा जिले के सिवनी में भारी बारिश की वजह से बिठली गेट के पास रेलवे ट्रैक पर बारिश् का पानी भर गया, जिससे रेलवे ने सोमवार शाम 6 बजे छिंदवाड़ा से नैनपुर और नैनपुर से छिंदवाड़ा के बीच चलने वाली दो पैंसेजर ट्रेनों को रद्द करना पड़ा. आज 27 जिलों में बारिश का अलर्टमौसम विभाग ने आज प्रदेश के 27 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग के अनुसार मुरैना, सीहोर, श्योपुरकलां, विदिशा, रायसेन, सागर, दमोह, पन्ना, जबलपुर, कटनी, उमरिया, शहडोल, मंडला, बालाघाट, भोपाल, ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, शाजापुर, टीकमगढ़, छतरपुर, सतना, नरसिंहपुर, सिवनी, डिंडौरी में भारी बारिश होगी, जबकि उज्जैन, इंदौर, रतलाम, नीमच, मंदसौर सहित प्रदेश के अन्य जिलों में हल्की बारिश होगी. 26 जुलाई तक राहत की उम्मीद नहींमौसम विभाग के आगामी चार दिन तक प्रदेश में भारी बारिश का दौर रहेगा. 26 जुलाई से सिस्टम कमजोर होगा, इसके बाद ही भारी बारिश से राहत की उम्मीद है. मौसम विभाग ने कल 24 जुलाई को नीमच, भोपाल, मंदसौर, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, विदिशा, सीहोर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, रीवा, मऊगंज, सीधी, मुरैना, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, मंडला, सिंगरौली और शाजापुर में बारिश का अलर्ट जारी किया है जबकि 25 व 26 जुलाई को मंदसौर, नीमच, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, हरदा, बैतूल में तेज बारिश होगी, जबकि भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन सहित बाकी जिलों में हल्की बारिश होगी.

BJP छोड़ेंगे मंत्री नागर सिंह चौहान? विभाग जाने से नाराज

Will Minister Nagar Singh Chauhan leave BJP? angry about going to department

Will Minister Nagar Singh Chauhan leave BJP? angry about going to department MP Politics: मध्य प्रदेश में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए और मंत्री बनाए गए रामनिवास रावत को वन एवं पर्यावरण विभाग दिए जाने से मंत्री नागर सिंह चौहान नाराज हैं. अब तक यह विभाग नागर सिंह चौहान के ही पास था. अब नागर सिर्फ अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के मंत्री रह गए हैं. गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में रामनिवास रावत को कैबिनेट मंत्री की शपथ दिलाई गई थी और रविवार को उन्हें वन एवं पर्यावरण विभाग आवंटित किया गया. नागर सिंह चौहान के पास वन पर्यावरण के अलावा अनुसूचित जाति कल्याण विभाग था. वर्तमान समय में वह सिर्फ एक विभाग के मंत्री हैं. कांग्रेस से आए नेता को मिली जिम्मेदारी से नाराजवन एवं पर्यावरण विभाग लेकर रामनिवास रावत को दिए जाने से नागर सिंह चौहान नाराज हैं. कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में अपनी नाराजगी साफ जाहिर की और कहा कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता की बजाय कांग्रेस छोड़कर आए नेता को यह जिम्मेदारी दी गई है. कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं नागर सिंह चौहान?नागर सिंह चौहान ने कहा, “वे अनुसूचित जनजाति वर्ग से आते हैं और उनके पास जो विभाग रह गया है, वह अनुसूचित जाति वर्ग का है. वे इस फैसले से काफी आहत हैं क्योंकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उनसे इस मसले पर कोई चर्चा नहीं की. हम आपको बता दें कि नागर सिंह चौहान की पत्नी अनीता सिंह चौहान रतलाम झाबुआ संसदीय क्षेत्र से भाजपा की सांसद हैं. मंत्री चौहान का कहना है कि वह आने वाले समय में अपने करीबियों से चर्चा करने के बाद कोई बड़ा फैसला भी ले सकते हैं.

प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में खुलेंगे 94 सीएम राइज स्कूल

94 CM Rise schools will open in tribal areas of the state

94 CM Rise schools will open in tribal areas of the state भोपाल ! प्रदेश के जनजातीय वर्ग के बच्चों की शिक्षा-दीक्षा और इनके सर्वांगीण विकास के लिये राज्य सरकार कृत-संकल्पित होकर कार्य कर रही है। जनजातीय वर्ग के बच्चे शिक्षा के मामले में किसी से भी पीछे या कमतर न रहें, इसके लिये सरकार ने जनजातीय बहुल अंचलों/जिलों में इन बच्चों की बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था की चिंता की है। इसके लिये सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों में 94 सीएम राइज स्कूल्स स्थापित करने का निर्णय लेकर इस पर काम भी प्रारंभ कर दिया है। इन विद्यालयों के माध्यम से जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों को शैक्षणिक व शारीरिक विकास सहित खेल एवं अन्य विधाओं की शिक्षा भी दी जाएगी। जनजातीय क्षेत्रों में स्थापित होने वाले 94 सीएम राइज स्कूल्स में से वर्तमान वित्तीय वर्ष 2024-25 में 38 सीएम राइज स्कूलों का निर्माण कार्य पूरा कर इनमें जल्द से जल्द पढ़ाई भी प्रारंभ कर दी जाएगी। इसके लिये युद्ध स्तर पर स्कूलों का निर्माण एवं अन्य जरूरीविकासकार्य किये जा रहे हैं। जनजातीय क्षेत्रों में सीएम राइज स्कूलों के निर्माण के लिये सरकार ने जारी वर्ष के सालाना बजट में 667 करोड़ रूपये आरक्षित कर दिये हैं। विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अधोसंरचना, प्रोत्साहक परिवेश एवं अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये सरकार ने सीएम राइज स्कूलों की स्थापना कर प्रदेश का शैक्षणिक परिदृश्य बदलने का बीड़ा उठाया है। प्रदेश में सीएम राइज स्कूलों की स्थापना के लिये सरकार ने वर्तमान वित्तीय वर्ष के बजट में 2 हजार 738 करोड़ रूपये प्रावधानित किये हैं। पहले चरण में 275 प्रारंभ, आगामी 10 साल में 9200 सीएम राईज स्कूल खोलने की योजना सरकारी स्कूलों में सर्व-सुविधायुक्त वातावरण के साथ विद्यार्थियों को रोचक एवं आनंददायक शिक्षा देने के लिये सरकार ने सीएम राइज स्कूल्स की स्थापना की है। पहले चरण में 275 सीएम राइज स्कूल प्रारंभ किये जा चुके हैं। आगामी 10 सालों में प्रदेश में 9 हजार 200 सीएम राइज स्कूल्स शुरू करने की सरकार की योजना है। इन सीएम राइज स्कूल में के.जी. से कक्षा 12वीं तक संचालन की व्यवस्था के साथ अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की व्यवस्था की गई है। इन स्कूलों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिये डिजिटल कक्षा, पूर्ण रूप से सुसज्जित प्रयोगशाला एवं पुस्तकालय, कला, नृत्य, संगीत एवं योग शिक्षा की पढ़ाई की व्यवस्था भी की गई है। स्कूलों में परिवहन की व्यवस्था सीएम राइज स्कूलों में दूर-दराज से आने वाले विद्यार्थियों को सुविधा देने की मंशा से परिवहन की व्यवस्था भी की जा रही है। इससे स्कूल के आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। सीएम राइज स्कूल में बेहतर नेतृत्व प्रदान करने की दृष्टि से इन स्कूलों के प्राचार्यों को भारतीय प्रबंधन संस्थान, इंदौर में विशेष प्रशिक्षण दिलाया गया है। साथ ही प्राचार्यों को राष्ट्रीय स्तर के ख्याति-प्राप्त विद्यालयों में एक्सपोजर विजिट भी कराई गई है। प्राचार्य हैण्ड-बुक सीएम राइज स्कूलों में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं को वैश्विक-मानकों के अनुरूप पूरा करने के लिये प्राचार्यों और शिक्षकों के लिये अलग-अलग हैण्ड-बुक तैयार की गई हैं। विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति के लिये सीएम राइज स्कूलों में स्टूडेन्ट डायरी भी तैयार की गई है। विद्यार्थियों के विचार, चिंतन, मंथन एवं प्रभावी शिक्षण के लिये आवश्यक टूल्स को डायरी के पृष्ठों में शामिल किया गया है। इसके जरिये विद्यार्थियों की रचनात्मक गतिविधियाँ एवं उनकी शैक्षणिक प्रगति पालकों/अविभावकों को भी बताई जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले कॉग्निजेंट और हेक्सावेयर आईटी संस्थानों के पदाधिकारी

Officials of Cognizant and Hexaware IT institutes met Chief Minister Dr. Yadav

Officials of Cognizant and Hexaware IT institutes met Chief Minister Dr. Yadav भोपाल ! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान कॉग्निजेंट टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन्स कार्पोरेशन और वैश्विक स्तर पर आईटी कंसल्टिंग और डिजिटल समाधान प्रदाता हेक्सावेयर के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री निवास में भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को उपाध्यक्ष श्री गौरव हजारा ने कार्पोरेशन की गतिविधियों की जानकारी दी। कार्पोरेशन द्वारा इंदौर में कॉग्निजेंट डेवलपमेंट सेंटर तैयार किया गया है। इसी तरह हेक्सावेयर टेक्नोलॉजी द्वारा भी भोपाल में केन्द्र तैयार किया गया है। हेक्सावेयर टेक्नोलॉजी के पदाधिकारी श्री डेनी दिवाकरन द्वारा संस्थान के कार्यों की जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव को दी गई। दोनों संस्थानों ने एक-एक हजार कर्मचारियों को रोजगार देने की पहल की है।

जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी, किसानों को सता रही फसल की चिंता

Heavy rain in the state stopped the wheels of trains, alert of heavy rain in the districts today

Heavy rain alert issued in districts, farmers worried about crop प्रदेश में मानसून सक्रिय है. इसका असर राज्य के कई जिलों में देखने को मिल रहा है. मौसम विभाग ने कुछ जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. MP Weather News: मध्य प्रदेश के मौसम विभाग ने रविवार को सीहोर (Sehore), बैतूल, नर्मदापुरम (Narmadapuram) में भारी बारिश की चेतावनी देते हुए कई जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग के अधिकारियों का दावा है कि मध्य प्रदेश में एक बार फिर मानसून (Monsoon) अपना असर दिखने वाला है. एमपी के कई जिलों में मध्यम और हल्की बारिश हो सकती है. बारिश का यह क्रम अगले कुछ दिनों तक जारी रहने के आसार हैं. मध्य प्रदेश के मौसम विभाग के अधिकारी डॉ वेद प्रकाश सिंह ने बताया कि हरदा, देवास, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, बुरहानपुर, शाजापुर, धार में मध्यम बारिश की संभावना है. इसके अलावा इंदौर, रायसेन, अलीराजपुर, झाबुआ, रतलाम, बालाघाट, नीमच, मंदसौर, गुना, शिवपुरी, आगर, विदिशा, सांची, छिंदवाड़ा, श्योपुर कलां, जबलपुर में भी हल्की और मध्यम बारिश हो सकती है. राज्य के कई हिस्सों में शनिवार को भी बारिश हुई थी.किसानों की बढ़ी चिंतामौसम विभाग की चेतावनी के बाद किसानों की चिंता बढ़ गई है. एक किसान हरिराम चौधरी ने कहा कि अभी तक बारिश की वजह से फसलों को कोई नुकसान नहीं हुआ है. वर्तमान में वर्षा की जरूरत है लेकिन भारी बारिश की चेतावनी से चिंता भी बढ़ गई है. नदी के जल स्तर पर प्रशासन की नजरमौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी के बाद जिला प्रशासन द्वारा नदियों के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है. मध्य प्रदेश की नर्मदा, शिप्रा, चंबल, कालीसिंध, गंभीर आदि नदियों के जलस्तर में लगातर बढ़ोतरी हो रही है. राज्य में औसत बारिश की संभावनामौसम विभाग द्वारा बारिश को लेकर जिस प्रकार की संभावना जताई जा रही है उसके मुताबिक आने वाले दिनों में बारिश का आंकड़ा सामान्य वर्षा के आंकड़े को छू जाएगा. वर्तमान में पूर्वी मध्य प्रदेश में कम बारिश हुई है जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में 5% अधिक बारिश दर्ज की जा गई है.

जबलपुर में बनेगा टेक्सटाइल का अत्याधुनिक स्किल डेवलपमेंट सेंटर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

State-of-the-art skill development center for textile will be built in Jabalpur: Chief Minister Dr. Yadav

State-of-the-art skill development center for textile will be built in Jabalpur: Chief Minister Dr. Yadav मध्यप्रदेश में सेना के लिये तोप के साथ टैंक निर्माण भी होगारक्षा उपकरण निर्माण क्षेत्र में आएगा 600 करोड़ रूपये का निवेशमुख्यमंत्री की उपस्थिति में अशोक लीलैंड और आर्मड व्हीकल के बीच हुआ करारनामामध्यप्रदेश में हीरे मिलते हैं, उन्हें प्रदेश में ही तराशने का काम भी शुरू होगाजबलपुर में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में हुआ 67 औद्योगिक इकाइयों का लोकार्पण और भूमि-पूजननई औद्योगिक इकाइयों से 12 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार, इकाइयों को सौंपे गये आशय-पत्र मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में अनेक क्षेत्रों में उद्द्योग स्थापना का कार्य प्राथमिकता से किया जायेगा। मध्यप्रदेश में टेक्सटाइल, रक्षा संस्थान के लिए एक टैंक निर्माण, फार्मा क्षेत्र और पर्यटन के क्षेत्र में नए-नए उद्योग प्रारंभ किये जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज जबलपुर के “सुभाष चंद्र बोस कल्चरल एंड इनफॉरमेशन सेंटर” में रीजनल इंडस्ट्री कांक्लेव में उद्योगों से जुड़ी महत्वपूर्ण घोषणाएं की। यह सभी घोषणाएं उद्योगों के प्रोत्साहन से संबंधित हैं। कॉन्क्लेव में देश-विदेश के अनेक प्रमुख उद्योगपति शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जबलपुर में टेक्सटाइल के अति आधुनिक स्किल डेवलपमेंट सेंटर की शुरुआत की जायेगी, जिससे विशेष रूप से बहनों को रोजगार प्राप्त होगा। मध्यप्रदेश में वर्ष 2024 की आज दूसरी रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव जबलपुर में हुई। इसमें ताईवान, मलेशिया, ब्रिटेन, फिजी और इंडोनेशिया के साथ और देश के विभिन्न राज्यों से बड़े उद्योगपति शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि गत मार्च-2024 में उज्जैन में इंडस्ट्री कॉन्क्लेव हुई थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कॉन्क्लेव में प्रदेश की 29 औद्योगिक इकाइयों के लोकार्पण और 38 औद्योगिक इकाइयों का भूमि-पूजन किया। प्रदेश के विभिन्न 10 स्थान से जन-प्रतिनिधि लोकार्पण और भूमि पूजन कार्यक्रम से जुड़े। इनमें कुल 1500 करोड रुपए का निवेश होगा और 4500 लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। औद्योगिक इकाइयों को आशय-पत्र सौंपे गये, जिससे करीब 12 हजार लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। कुल 340 एकड़ भूमि के आवंटन के लिए आशय-पत्र सौंपे गये। कॉन्क्लेव में आईटी, आईटीईएस एवं ईएसडीएम पॉलिसी-2023 का विमोचन भी किया गया। अशोक लीलैंड का करारनामा कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में 600 करोड रूपये के निवेश के लिए अशोक लीलैंड और आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड के बीच करारनामा हुआ। उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र में यह नया कदम है। यह रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण निवेश है। साथ ही सहयोग क्षेत्र में विकास और नवाचार को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में रक्षा संस्थान के लिए अब तक तोप निर्माण का कार्य होता रहा है, अब सेना के लिए टैंक भी बनाये जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 16 औद्योगिक पार्क के माध्यम से कुल 517 लघु, मध्यम और सूक्ष्म उद्योगों द्वारा पौने छः हजार करोड़ का निवेश किया गया, जिससे 20 हजार लोगों को रोजगार मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि आज 67 औद्योगिक इकाइयों का लोकार्पण और भूमिपूजन एक महत्वपूर्ण समेकित प्रयास है। प्रदेश के 10 स्थानों से मंत्री, सांसद, विधायक वर्चुअली जुड़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जन-प्रतिनिधियों से चर्चा कर उन्हें नवीन इकाइयों की सौगात के लिये बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज कॉन्क्लेव में अनेक विभागों ने उद्द्योग हितैषी नीतियों की जानकारी दी है। खनिज के क्षेत्र में उड़ीसा के बाद मध्यप्रदेश द्वितीय स्थान पर है। खदानों की निलामी में मध्यप्रदेश की पारदर्शी प्रक्रिया देश में अग्रणी मानी गई है। इसके लिये भारत सरकार द्वारा पुरस्कार भी प्रदान किया गया। प्रदेश में हीरे का खनन तो होता है, अब इन्हें तराशने का कार्य भी किया जायेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सक्षम नेतृत्व का उल्लेख करते हुये मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने भारत ने दुनिया में अलग पहचान बनाई है। काल के प्रवाह में अनेक बाधाएं भी देश ने देखीं लेकिन भारत ने पराक्रम, परिश्रम और आत्मविश्वास से आगे बढ़ कर दिखा दिया है कि हमारी प्रगति को कोई रोक नहीं सकता। उद्योगपतियों को दिया मध्यप्रदेश आने का आमंत्रण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से आहवान किया कि वे मध्यप्रदेश आएं। उन्होंने कहा कि श्रम के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश में प्रोत्साहनकारी नीतियां हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनेक नए कार्य हो रहे हैं। पिछले दो-तीन वर्ष में विश्वविद्यालयों के माध्यम से रोजगार की संभावनाओं को बढ़ाया गया है। प्रदेश में पहले कभी सिर्फ 5 मेडिकल कॉलेज होते थे, अब यह संख्या बढ़कर 25 होने जा रही है। प्रदेश में सघन वन क्षेत्र है। इस क्षेत्र में भी संभावनाओं को तलाश कर उन्हें साकार किया जायेगा। फार्मास्युटिकल क्षेत्र में 275 इकाइयां कार्य कर रही हैं। अकेले पीथमपुर में 60 इकाइयां हैं। हमारे प्रदेश से 160 से अधिक देशों को फार्मा प्रोडक्ट निर्यात किये जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खाद्य प्र-संस्करण के क्षेत्र में 150 प्रतिशत प्रोत्साहन के लिये हम तैयार हैं। प्रदेश में उद्योगों को पानी और बिजली की आपूर्ति पर विशेष राहत प्रदान की गई है। दो मेगा फूड पार्क आ रहे है। पहले से 8 फूड पार्क संचालित है। ऐसी इकाइयों की संख्या निरन्तर बढ़ाई जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वोल्वो आयशर के एमडी से आग्रह किया कि वे मध्यप्रदेश में रिसर्च सेंटर भी प्रारंभ करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रारंभ में उद्योगों के विकास से संबंधित प्रदर्शनी का शुभारंभ कर अवलोकन किया। जबलपुर हाट के अंतर्गत विभिन्न लघु उद्योग इकाइयों और व्यवसायियों द्वारा उत्पाद सामग्री का विवरण प्रदर्शनी में दिया गया। उद्घाटन सत्र के प्रारंभ में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन एवं मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री राघवेंद्र कुमार सिंह ने विभिन्न उद्योगपतियों का शॉल और पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। उपस्थित अतिथियों में अडानी पॉवर, नेटलिंक, वैद्यनाथ ग्रुप दावत फूड्स, वोल्वो आयशर, एवीएनएल, एनसीएल, स्वराज शूटिंग लोहिया एनर्जी, आदि-शक्ति राइस मिल, फिनिक्स पोल्ट्री, इनफो-विजन दुबई और दलित चेंबर ऑफ कॉमर्स (डिक्की) सहित अन्य अनेक उद्योग संगठनों के पदाधिकारी शामिल थे। प्रमुख सचिव श्री राघवेंद्र कुमार सिंह ने मध्यप्रदेश की निवेश नीति और निवेश संभावनाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने प्रदेश में औद्योगिक अधो-संरचना और औद्योगिक कॉरिडोर की विशेषताओं के साथ निवेशक अनुकूल औद्योगिक नीति में सब्सिडी और वित्तीय प्रोत्साहन पर भी प्रकाश डाला। साथ ही सभी निवेशकों को आगामी … Read more

मप्र में उठी भील प्रदेश बनाने की मांग, आदिवासी नेताओं ने बांसवाड़ा की रैली में भरी हुंकार

Demand for creation of Bhil state raised in Madhya Pradesh, tribal leaders shouted in Banswara rally

Demand for creation of Bhil state raised in Madhya Pradesh, tribal leaders shouted in Banswara rally भील प्रदेश की मांग और समुदाय के जनप्रतिनिधियों की इसे लेकर क्या सोच है? इसका मध्यप्रदेश सहित राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा ‘ SAHARA SAMACHAAR ने इसे लेकर पड़ताल की तो कई हैरान वाले तथ्य सामने आए हैं। भोपाल । राजस्थान के बांसवाड़ा में भील प्रदेश की मांग को लेकर हुए जमावड़े के बाद पश्चिमी मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों में हलचल बढ़ गई है। अलग प्रदेश की मांग पर जनजातीय समाज के नेताओं में दो फाड़ नजर आ रही है। जहां समाज के कुछ नेता इसके समर्थन में हैं तो कुछ जनप्रतिनिधि इसे विदेशी और विघटनकारी शक्तियों की साजिश बता रहे हैं। जो भी हो, लेकिन बांसवाड़ा के भानगढ़ में हुई रैली के बाद आदिवासी प्रदेश की मांग प्रदेश में फिर जोर पकड़ रही है। भील प्रदेश की मांग के इस आंदोलन में मध्यप्रदेश को धुरी क्यों माना जा रहा है? आंदोलन का नेतृत्व करने वाले नेता मध्यप्रदेश पर सबसे ज्यादा फोकस क्यों कर रहे हैं? एक दशक से भी पहले से चल रही भील प्रदेश की मांग अचानक आंदोलन में कैसे बदली और समुदाय के जनप्रतिनिधियों की इसे लेकर क्या सोच है? इसका मध्यप्रदेश सहित राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा द सूत्र ने इसे लेकर पड़ताल की तो कई हैरान वाले तथ्य सामने आए हैं। सवाल: भील प्रदेश की मांग को लेकर राजस्थान के बांसवाड़ा में हुई आदिवासी समुदाय की रैली के बाद यह मामला क्यों चर्चा में है? पहले बताते हैं भील आदिवासी समाज की प्रदेश और देश में क्या स्थिति है। दरअसल, भील मूल रूप से जंगलों में रहने वाली जनजाति है। यह मुख्य रूप से मध्यप्रदेश के अलावा राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में निवासरत है। मध्यप्रदेश में इस जनजाति की संख्या करीब 60 लाख है। वहीं राजस्थान में 28 लाख, महाराष्ट्र में 18 लाख और गुजरात में 35 लाख भील आदिवासी हैं। यानी जनसंख्या के लिहाज से भील आदिवासी सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश में हैं। पश्चिमी मध्यप्रदेश के आलीराजपुर और झाबुआ के अलावा रतलाम, धार, बड़वानी, खंडवा, खरगोन जिले भील आबादी बाहुल्य हैं। वहीं राजस्थान के उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर और चित्तौड़गढ़ और महाराष्ट्र में जलगांव, नासिक, ठाणे, नंदूरबाग, धुलिया और पालघर में भील सबसे ज्यादा संख्या में रहते हैं। मध्य प्रदेश में भील जनजाति की आबादी 1.42 करोड़ यानी मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात प्रदेशों में भील समुदाय की आबादी। करोड़ 42 लाख से ज्यादा है। बाकी पूरे देश में भी भील आदिवासी लाखों की संख्या में बिखरे हुए हैं। सबसे ज्यादा आबादी होने की वजह से ही भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा और आदिवासी परिवार के आव्हान पर बांसवाड़ा में समुदाय की रैली निकाली गई थी। समुदाय के लोगों ने एकजुट होकर मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के भील आबादी बाहुल्य जिलों को जोड़कर अलग राज्य की मांग उठाई है। इस टैली के बाद राजनीतिक दलों से जुड़े भील समुदाय के जनप्रतिनिधियों लोगों में भी मतभेद सामने आ गए हैं। भाजपा नेता और थांदला के पूर्व विधायक कलसिंह भांबर ने इसे विदेशी ताकतों की साजिश बताया है तो सेलाना से निर्दलीय आदिवासी विधायक कमलेश्वर डोडियार भील प्रदेश की मांग का पुरजोर पक्ष ले रहे हैं। वहीं झाबुआ से कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने भील प्रदेश की मांग या विरोध में कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी है। एक दशक पुरानी है मांग अब बात करते हैं अलग भील प्रदेश की मांग और अचानक उठ खड़े हुए इस आंदोलन की। भील प्रदेश की मांग एक दशक से भी पुरानी है। मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात से सीमावर्ती जिलों में बसे भील-भिलाला समुदाय के लोग यह मांग उठाते रहे हैं। आदिवासी समुदाय का संगठन जयस भी इस मांग के समर्थन में कई बार आंदोलन-टैलियां कर चुका है। सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने फरवरी माह में हुए मध्यप्रदेश विधानसभा के सत्र में भी भील प्रदेश की मांग और सरकार की कार्रवाई का मामला उठाया था। अब इस समुदाय का अचानक एकजुट होना और राजस्थान के बांसवाड़ा से भील प्रदेश की मांग बुलंद करने का राजनीति पर क्या असर होगा यह तो आने वाले दिनों में ही नजर आएगा। फिलहाल आदिवासी समुदाय के सामाजिक संगठन भी इस मांग के समर्थन में उतर आए हैं। क्या कहते हैं समुदाय के जनप्रतिनिधि ? कुछ संगठन जनजाति समाज को गुमराह करने के लिए भील प्रदेश की मांग कर रहे हैं। भील प्रदेश कीमांग आज से नहीं जबसे मिशनरी इस अंचल में आए हैं तबसे शुरु हुई है। ये मांग उन्होंने रखी थी। साऊदी अरब के लोग नारा लगा रहे हैं जय जोहार का नाटा है भारत देश हमारा है। ये किसका षडयंत्र है। आज कहा जा रहा है हमारी बहन बेटियों को की मंगलसूत्र पहनना, मांग भरना हमारा रिवाज नहीं है। ये रिवाज युगों से चले आ रहे हैं। आदिवासी समुदाय युगों से हिंदू पद्धति, परम्पराओं से पूजा पाठ करता आ रहा है। हमारी संस्कृति, रीति-रिवाज उससे जुड़े हैं। भानू भूरिया, बीजेपी नेता झाबुआ मांग तो जायज हैं, लेकिन जातिगत तौर पर देखा जाए तो यह देश को तोड़ने वाला होगा। क्षेत्रीयता और भाषा के आधार पट हो तो ऐसा होना चाहिए। भील प्रदेश की मांग के आंदोलन में कुछ लोग तो ठीक हैं, लेकिन अभी ऐसा नहीं लगता कि भील प्रदेश की आवश्यकता है। विक्रांत भूरिया, कांग्रेस विधायक, झाबुआ मुझे अभी इस आंदोलन की विस्तृत जानकारी नहीं है। अलग भील प्रदेश को लेकर जो मूवमेंट शुरु हुआ है उस पर मैं फिलहाल अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहता कमलेश्वर डोडियार, निर्दलीय विधायक, सैलाना बीते 12 साल से पश्चिमी मध्यप्रदेश के आदिवासी भील प्रदेश की मांग कर रहे हैं। मैंने इस संबंध में फरवरी में विधानसभा सत्र में प्रश्न लगाकर जानकारी चाही कि भील प्रदेश गठन को लेकर क्या कार्रवाई की जा रही है। इस संबंध में जनजातीय कार्य मंत्रालय ने जानकारी इकट्ठा करने की सफाई दी गई। वहीं मुख्यमंत्री ने नए राज्य गठन की कार्रवाई का अधिकार केंद्र सरकार के पास होने का जबाव देकर पल्ला झाड़ लिया था।

अनुभवहीन महिला अधिकारियों की पोस्टिंग कर विंध्या हर्बल्स को बंद करने की साज़िश

Conspiracy to close Vindhya Herbals by posting inexperienced women officers

Conspiracy to close Vindhya Herbals by posting inexperienced women officers भोपाल। लघुवनोपज संघ की इकाई लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र बरखेड़ा पठानी (एमएसपी पार्क) अनुभवहीन महिला अधिकारियों की पोस्टिंग विंध्या हर्बल बंद की साजिश चल रही है। यही वजह है कि एमएसपी पार्क बरखेड़ा पठानी में उत्पादित होने वाली औषधियों की क्वांटिटी और क्वालिटी में निरंतर गिरावट आ रही है। औषधि के गुणवत्ता को लेकर कई बार सवाल उठे। जांच के आदेश भी हुए किंतु महिला अधिकारी के रसूख के चलते कई जांच के आदेश डंप कर दिए जा रहें हैं।  सीनियर अफसर की कमी बताकर एमएसपी पार्क के निर्माण से अब तक सबसे जूनियर और अनुभवहीन सीईओ बनाया गया। जबकि इसके पहले तक अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक से लेकर मुख्य वन संरक्षण स्तर तक के आईएफएस अधिकारी सीईओ के पद पर पदस्थ होते रहे हैं। ऐसा भी नहीं है कि विभाग में सीनियर अधिकारियों का एकदम अकाल पड़ गया हो, बल्कि अनुसंधान एवं विस्तार भोपाल में पदस्थ सीसीएफ राखी नंदा को एमएसपी पार्क का सीईओ बनाया जा सकता है। या फिर किसी सीनियर एपीसीसीएफ को अतिरिक्त प्रभार दिया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि ऐसा करने पर लघु वनोपज संघ में सत्ता के दो केंद्र बिंदु स्थापित हो जाते।  ऑडिट में ढेरों कमियां लघुवनोपज संघ की इकाई लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र बरखेड़ा पठानी “विंध्या हर्बल” नाम से आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्माण करता आ रहा है। विगत वर्षों में केंद्र निरंतर प्रगतिशील रहा लेकिन 2 वर्षों में प्रशासनिक उदासीनता और भ्रष्ट नीतियों से केंद्र को बहुत नुक़सान हुआ। कभी भारत के 17 राज्यों में आयुर्वेदिक दवाओं को सप्लाई करने वाले केंद्र को आयुष मार्क के बिना ऑर्डर नहीं मिलेगा। आयुष मार्क के प्रथम ऑडिट में ढेरों कमियां निकलने के बाद भी अभी तक कोई कार्यवाही नहीं कर रहे वन अधिकारी। बतौर एसडीओ दागी रही बना दी गई सीईओ एमएसपी पार्क की सीईओ अर्चना पटेल जब सीधी में एसडीओ के पद पर पदस्त थी तब तेंदूपते की गड़बड़ी में तत्कालीन वन बल प्रमुख यू प्रकाशम ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 10 (1) में निहित प्रावधानांतर्गत उनको “परिनिन्दा” के दण्ड से दण्डित कर प्रकरण समाप्त कर दिया था। यही नहीं, यहां पदस्थ सीईओ अर्चना पटेल को न तो आयुर्वेदिक दवाई उत्पादन का ज्ञान है न ही कभी मार्केटिंग की ज़िम्मेदारी निभाई। यही हाल रेंजर सुनीता अहीरवार का है। दिलचस्प पहलू यह भी है कि इन नौसिखिये महिला अधिकारियों का आपसी समन्वय नहीं होने के कारण आयुष विभाग मध्य प्रदेश ने तो विंध्या हर्बल्स को ऑर्डर देना ही बंद कर दिया है। पिछले दिनों एक छोटा सा ऑर्डर इस वित्तीय वर्ष में केवल 1.8 करोड़ का आर्डर मिला है। लेकिन सीईओ और रेंजर और प्रभारी एसडीओ सुनीता अहीरवार की आपसी खींचतान में उत्पादन ही शुरू नहीं हो पा रहा है। रॉ मैटेरियल और पैकेजिंग आइटम की ख़रीदी का टेंडर मार्च में होना था जो कि अभी इस माह किया है। सवाल यह है कि ऐसे में कब सप्लाई करेंगे दवाई? पहले फूलजले और फिर एसडीओ हटे  रेंजर और प्रभारी एसडीओ उत्पादन सुनीता अहीरवार की लापरवाही का आलम ये है कि वह अभी तक पिछले वित्तीय वर्ष का लेखा नहीं दे रहीं है। न तो उत्पादन कर रही है और न ही केंद्र का आयुष मार्क का सर्टिफ़िकेशन कराने का प्रयास रही है। अहिरवार के रसूख का आलम यह है कि जब सीईओ के पद पर रहे पीएल फूलजले ने अहिरवार को नोटिस जारी करने जा रहे थे तो उन्हें तत्काल वहां से हटा दिया। फेडरेशन के एमडी के आदेश पर एमएसपी पार्क के एसडीओ मणिशंकर मिश्रा ने अहिरवार के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए दस्तावेज मांगे तब उन्हें जांच से संबंधित कागज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसे लेकर एसडीओ मिश्रा ने एमडी विभाग ठाकुर को कई पत्र लिखें और  पत्र में यह उल्लेख किया कि आपने 7 दिन के भीतर जांच कर प्रतिवेदन देने के निर्देश दिए थे किंतु दस्तावेज उपलब्ध होने के कारण मैं जांच शुरू नहीं कर पा रहा हूं। एसडीओ के पत्र को एमडी ठाकुर ने डस्टबिन में डाल दिया। जांच प्रारंभ न हो सके, इसके लिए एसडीओ मिश्रा को एमएसपी पार्क से फेडरेसन पदस्थ कर दिया।  विल-बाउचर को लेकर टकराव  अभी कुछ दिन पहले आई सहायक प्रबंधक रेंज़र प्रियंका बाथम को मिले काम जिसमें ख़रीदी के बिल वाउचर और अन्य प्रबंधन को लेकर एसडीओ सुनीता अहीरवार की खींचतान शुरू हो गई है। सुनीता अहीरवार डीडीओ का हक़ जताने के चक्कर में सबको अपने अधीन रखना चाहती है। ऐसी स्थिति में अन्य कर्मचारी भी परेशान है।आलम ये है कि तीनों महिला अधिकारी एक ही बात को अलग-अलग तरीक़े से प्रबंध संचालक को सूचित करती है। अगर यही आलम रहा तो केंद्र को घाटे में ताला डाल कर ये अधिकारी अपने मूल विभाग में वापस चले जायेंगे।

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