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छह बजे तक 63.38 फीसदी मतदान, बालाघाट-छिंदवाड़ा में 70% से ज्यादा वोटिंग

63.38 percent voting till 6 o’clock, more than 70% voting in Balaghat-Chhindwara पांच बजे तक मतदान का आंकड़ाशाम पांच बजे तक प्रदेश में 63.25 प्रतिशत मतदान हुआ। छिंदवाड़ा सीट पर सबसे ज्यादा 73.85 फीसदी तो सीधी में सबसे कम 51.24 प्रतिशत वोट पड़े। इस सीट पर इतना मतदानबालाघाट: 71.08 फीसदीछिंदवाड़ा: 73.85 फीसदीजबलपुर: 56.74 फीसदीमंडला: 68.31 फीसदीशहडोल: 59.91 फीसदीसीधी: 51.24 फीसदी

मतदान केंद्र के अंदर के फोटो वायरल करना पड़ा भारी, पीठासीन अधिकारी निलंबित

Photos from inside the polling station had to go viral, presiding officer suspende जबलपुर में मतदान केंद्र के अंदर के फोटो खींचकर व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर करने पीठासीन अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जबलपुर। जबलपुर में जारी लोकसभा चुनाव के प्रथम चरण के मतदान के बीच चुनावी ड्यूटी में तैनात पीठासीन अधिकारी को मतदान केंद्र के अंदर के फोटो शेयर करना भारी पड़ गया। जिसके चलते जिला निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। दरअसल, मतदान केन्द्र क्रमांक 173 पर तैनात पीठासीन अधिकारी रतन कुमार ने मतदान केन्द्र के अंदर के फोटो खिंचवाकर अपने मोबाइल नम्बर से किसी वाट्सएप ग्रुप में पोस्ट किए थे। मामले में अधिकारियों को शिकायत मिलने पर जांच करवाई गई। जिसके बाद सेक्टर अधिकारी हेमंत अमहिया द्वारा मोबाइल फोन जब्त कर जांच की जो शिकायत सही पाई गई। वर्जित है मोबाइल का उपयोगबता दें कि मतदान केंद्र में मोबाइल फोन का उपयोग वर्जित है। नियम का उल्लंघन करने पर पीठासीन अधिकारी को निलंबित कर मतदान अधिकारी क्रमांक -1 को पीठासीन अधिकारी का दायित्व सौंपा गया है।

CM मोहन यादव का रास्ते में खराब हुआ प्रचार रथ, सुरक्षाकर्मियों को देना पड़ा धक्का

CM Mohan Yadav’s campaign chariot broke down on the way, security personnel had to push it भिंड ! सीएम मोहन यादव का रथ लहार चौराहे से शुरू होकर जेल रोड की तरफ आगे बढ़ा, लेकिन जैसे ही किले रोड के पास सीएम का रथ पहुंचा तभी अचानक रथ में खराबी आ गई. यह देखकर सभी के हाथ पैर फूल गए. रथ के साथ चल रहे सुरक्षाकर्मियों ने सीएम के रथ को धक्का देकर आगे बढ़ाने की कोशिश भी की मध्य प्रदेश के भिंड में बीजेपी प्रत्याशी संध्या राय का नामांकन दाखिल करवाने पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव का रोड शो फ्लॉप हो गया. यहां रोड शो के दौरान बीच रास्ते में ही चुनावी रथ खराब हो गया. रथ को आगे बढ़ाने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने धक्का भी दिया, लेकिन आगे नहीं बढ़ सका. इस बात से नाराज होकर सीएम बीच रास्ते में ही रोड शो छोड़कर रथ से नीचे उतर आए और कार में सवार होकर हेलीपैड के लिए रवाना हो गए. गुरुवार को सीएम मोहन यादव भिंड से बीजेपी की लोकसभा प्रत्याशी संध्या राय का नामांकन दाखिल करवाने के लिए भिंड पहुंचे थे. वह हेलीपैड से कार के जरिए कलेक्टर कार्यालय रवाना हुए. नामांकन दाखिले के बाद सीएम का रोड शो लहार चौराहे से शुरू हो गया. सीएम मोहन यादव रथ में सवार हो गए.सीएम का रथ लहार चौराहे से शुरू होकर जेल रोड की तरफ आगे बढ़ा, लेकिन जैसे ही किले रोड के पास सीएम का रथ पहुंचा, तभी अचानक रथ में खराबी आ गई. यह देखकर सभी के हाथ पैर फूल गए. रथ के साथ चल रहे सुरक्षाकर्मियों ने सीएम के रथ को धक्का देकर आगे बढ़ाने की कोशिश भी की, लेकिन रथ आगे नहीं बढ़ सका सीएम रोड शो को बीच रास्ते में ही छोड़कर हेलीपैड के लिए रवाना हो गए. हालां,कि तय कार्यक्रम के तहत सीएम मोहन यादव को लहार चौराहे से रोड शो करते हुए शहर के बीचो-बीच परेड चौराहे तक पहुंचना था और यहां रथ में से ही खड़े होकर पब्लिक को संबोधित करने था, लेकिन रथ के खराब होने की वजह से ऐसा नहीं हो सका. इस बारे में जब बीजेपी की लोकसभा प्रत्याशी संध्या राय से बातचीत की गई, तो उन्होंने पहले तो इस पूरी घटनाक्रम से खुद को अनभिज्ञ बताया, लेकिन जब उन्हें बताया गया कि इसके वीडियो भी हमारे पास उपलब्ध है, तो उन्होंने इस बात को कबूल किया कि मशीनरी है इसलिए खराबी आ जाती है, टेक्निकल प्रॉब्लम हो जाती है. हम आपको बता दें कि सीएम का रोड शो फ्लॉप होने से पहले भी भिंड में ही बीजेपी का संयुक्त मोर्चा का कार्यक्रम भी फ्लॉप हो चुका है. पिछले दिनों भिंड में बीजेपी का संयुक्त मोर्चा का कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें कार्यकर्ता ही नहीं पहुंचे. इस वजह से कार्यक्रम से खुद संध्या राय ने भी दूरी बना ली थी

प्रदेश में आज थम जाएगा पहले चरण का प्रचार, 19 अप्रैल को होगी वोटिंग

Campaigning for the first phase will end in the state today, voting will take place on April 19. मध्य प्रदेश की 6 सीटों पर पहले चरण में होने वाले मतदान का प्रचार आज थम जाएगा। भोपाल। मध्य प्रदेश की 6 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए चुनाव प्रचार आज शाम 6 बजे थम जाएगा, लिहाजा इन क्षेत्रों में रोड शो और रैलियां नहीं की जाएगी। जबकि बालाघाट लोकसभा क्षेत्र के बैहर, लांजी और परसवाड़ा विधानसभा क्षेत्रों में यह प्रतिबंध चार बजे से लागू होगा। ऐसे में उन सभी लोगों को निर्वाचन क्षेत्र छोड़ना होगा, जो वहां के मतदाता नहीं हैं। इसके लिए होटल, लाज और धर्मशालाओं की जांच होगी। जहां राजनीतिक दलों का प्रचार थमने जा रहा है वहीं पहले चरण के मतदान के लिए प्रशासनिक तैयारियां भी अंतिम दौर में हैं। सुरक्षा एवं जांच समग्र रूप से की जा रही है। चुनाव आयोग के निर्देश हैं कि मतदान पूरी तरह से निष्‍पक्ष एवं पारदर्शी होना चाहिये, इसी को ध्‍यान में रखते हुए मैदानी अमला पूरी तरह से जुटा हुआ है। गौरतलब है कि 19 अप्रैल को सीधी, शहडोल, मंडला, जबलपुर, बालाघाट और छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्रों में मतदान होगा। जिसके चलते बुधवार को शाम पांज बजे के बाद रोड शो, रैली और सभाओं पर प्रतिबंध लग जाएगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन ने बताया है कि प्रचार-प्रसार समाप्त होने की समय-सीमा के बाद बाहरी क्षेत्र के व्यक्तियों को जो उस निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता नहीं हैं, उन्हें वह क्षेत्र छोड़ना होता है। इसके लिए सघन अभियान चलाया जाएगा। पुलिस प्रशासन द्वारा होटल, लाज, धर्मशालाओं की जांच कर ऐसे लोगों को चिन्हित कर बाहर भेजा जाएगा, जो वहां के मतदाता नहीं हैं। संवेदनशील केंद्रों पर केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल तैनात किया गया है तो अन्य केंद्रों पर जिला पुलिस बल रहेगा। गुरुवार को रवाना होंगे मतदान दल मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि पहले चरण का मतदान संपन्न कराने के लिए मतदान दल गुरुवार को रवाना होंगे। रात में ही मतदान को लेकर सभी व्यवस्थाएं कर ली जाएंगी। अभ्यर्थियों की उपस्थिति में स्ट्रांग रूम से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन मतदान केंद्रों में पहुंचाई जाएंगी। यहां मतदान से एक घंटे पहले अभ्यर्थी या उसके अधिकृत प्रतिनिधि की उपस्थिति में माकपोल होगा। 50-50 वोट डलवाए जाएंगे। बालाघाट के तीन विधानसभा क्षेत्रों में चार बजे तक ही होगा मतदानबालाघाट लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत तीन विधानसभा क्षेत्र ऐसे आते हैं, जो नक्सल प्रभावित हैं। इनमें बैहर, लांजी और परसवाड़ा शामिल हैं। तीनों में सुबह सात से चार बजे तक मतदान होगा। बाकी निर्वाचन क्षेत्रों में शाम छह बजे तक मतदान कराया जाएगा।

मोबाइल एप्प में रजिस्ट्रेशन के बाद ही करा सकेंगे नलकूप खनन

Tube well mining will be done only after registration in mobile app. भोपाल। खुले ट्यूबवेल बोर में लगातार हो रहे हादसों को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम ने ट्यूबवेल बोरिंग के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। जिसके तहत एक मोबाइल एप डेवलप किया गया है। इसकी मदद से ही नया बोर किया जा सकेगा। इसके साथ प्राइवेट और सरकारी बोरिंग एजेंसियों को इस एप में रजिस्ट्रेशन करना पड़ेगा। बोरिंग कराने वाले व्यक्ति को भी बोर के संबंध में पूरी जानकारी अपलोड करना पड़ेगी। जिसके आधार पर सरकारी एजेंसियों को बोर से संबंधित जानकारी मिल जाएगी।मोबाइल एप में नए बोर के बारे में जानकारी अपलोड करना पड़ेगी, जिसमें बोर के सफल और असफल होने के संबंध में फोटो सहित जानकारी अपलोड होगी। अगर बोर असफल हो गया है, तो उसे सुरक्षित रूप से बंद करना पड़ेगा। विभाग ने बुधवार से नए मोबाइल एप का ट्रॉयल भी शुरू कर दिया है। खुले और बंद बोर की मिलेगी जानकारी विभाग ने इस पोर्टल पर बोरिंग से जुड़ी सभी तरह की जानकारी का आप्शन रखा है। जिसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में सभी निजी और सरकारी खुले और बंद नलकूपों की जानकारी अपलोड की जाएगी। जिससे पता चल सकेगा, कि कहां-कहां बोर हैं, जिन्हें सुरक्षित करने की जरूरत है।- बनाना पड़ेगा सीमेंटेड चबूतराबोरिंग के दौरान अगर यहां पानी नहीं निकलता है, तो उसे मिट्टी, गिट्टी सहित अन्य मटेरियल से भरना पड़ेगा। इसके साथ सीमेंट का ब्लॉक बनाकर उसे सुरक्षित करना पड़ेगा। जिसकी जानकारी फोटो के साथ मोबाइल एप पर डाली जाएगी। जल्द सामने आएगा बोरिंग का डेटा प्रमुख अभियंता केके सोनगरिया का कहना है कि विभाग ने पोर्टल के साथ मोबाइल एप भी लांच किया है। जिसमें नए बोर के साथ बोरिंग एजेंसियों को भी अपना रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा। खुले बोर की जानकारी भी पोर्टल पर अपडेट की जाएगी, जिससे हादसों को रोका जा सकेगा।

ग्राउंड रिपोर्ट: भाजपा के लिए कब्जा बरकरार रखना कठिन, भूरिया दे रहे कड़ी टक्कर

Ground report: It is difficult for BJP to retain control, Bhuria is giving tough competition लोकसभा सीट- रतलाम: प्रत्याशी- अनीता नागर सिंह चौहान भाजपा, कांतिलाल भूरिया कांग्रेस रतलाम में भाजपा मजबूत, झाबुआ में कांग्रेस को बढ़त- अलीराजपुर में अनीता- भूरिया में बराबरी का मुकाबला भोपाल। रतलाम संभवत: पहला ऐसा लोकसभा क्षेत्र है, जहां से भाजपा ने प्रदेश सरकार के मंत्री नागर सिंह चौहान की पत्नी अनीता चौहान को टिकट दिया है। नरेंद्र मोदी-अमित शाह के युग में इस तरह परिवार में दो लोगों को टिकट देने की पंरपरा नहीं है। पार्टी के कई बड़े नेताओं के बेटे और परिजन टिकट का इंतजार ही कर रहे हैं। नियम तोड़ने की वजह है रतलाम सीट, जो कांग्रेस से ज्यादा कांतिलाल भूरिया का गढ़ है। भाजपा नेतृत्व किसी भी हालत में इस सीट पर कब्जा बरकरार रखना चाहता है। पहले सीट का नाम झाबुआ था लेकिन 2008 में हुए परिसीमन के बाद नाम बदलकर रतलाम कर दिया गया। इसके बाद हुए चार चुनावों में से दो बार कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया जीते और दो बार भाजपा। इनमें से एक बार कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए स्व दिलीप सिंह भूिरया जीते और दूसरी बार 2019 के चुनाव में जीएस डामोर ने जीत दर्ज की। भाजपा ने कांतिलाल भूिरया को हराने वाले डामोर का टिकट ठीक उसी तरह काट दिया जैसे गुना-शिवपुरी में ज्योतिरािदत्य सिंधिया को हराने वाले सांसद केपी सिंह यादव का काटा गया।भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही अनीता नागर सिंह चौहान भिलाला आदिवासी हैं जबकि कांतिलाल भूिरया भील आदिवासी। क्षेत्र में भील समाज की तादाद िभलाला से काफी ज्यादा है। इसके अलावा झाबुआ में ईसाई मिशनियों का काम भी काफी है। दो से ढाई लाख आदिवासी धर्म परिवर्तन कर चुके हैं। इसका सीधा लाभ कांग्रेस के भूिरया को मिलता है। दूसरी तरफ क्षेत्र में संघ का काम भी अच्छा है। रतलाम में विधायक चेतन कश्यप के कारण भाजपा को ताकत मिलती है। लोगों से बातचीत करने पर पता चलता है कि झाबुआ जिले के झाबुआ, थांदला और पेटलावद में कांग्रेस की स्थिति अच्छी है लेकिन पेटलावद कांग्रेस के हाथ से निकल सकता है। रतलाम जिले की तीन सीटों में से सैलाना और रतलाम ग्रामीण में कांग्रेस- भाजपा के बीच अच्छी टक्कर है जबकि रतलाम शहर में भाजपा बढ़त में बताई जाती है। अलीराजपुर िजले के जोबट में कांग्रेस की स्थिति अच्छी है जबकि अलीराजपुर में भाजपा मजबूत दिखती है। कुल मिलाकर रतलाम में भाजपा- कांग्रेस के बीच कडा मुकाबला देखने को मिल रहा है। भाजपा-कांग्रेस लड़ रहे विकास के मुद्दे पर चुनाव रतलाम चूंकि आदिवासी बाहुल्य सीट है, इसलिए यहां राम मंदिर और हिंदू-मुस्िलम से जुड़े मुद्दों का ज्यादा असर नहीं है। यहां चुनाव का पहला मुद्दा आदिवासी विकास है। भाजपा और कांग्रेस दोनों बता रहे हैं कि उन्होंने इस वर्ग के लिए क्या-क्या किया है। भाजपा की अनीता केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा कराए गए काम गिना रही हैं तो कांतिलाल अपने कार्यकाल में किए कामों का प्रचार कर रहे हैं। शहरी इलाकों में जरूर राम मंदिर, धारा 370, भोजशाला जैसे मुद्दों का असर देखने को मिल रहा है। यही वजह है कि रतलाम शहर और ग्रामीण क्षेत्र में भाजपा को ज्यादा फायदा होता दिख रहा है। यहां कांग्रेस बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की आय दोगुनी न होने जैसे मुद्दे उठा रही है। कांग्रेस घोषणा पत्र में किए वादों का भी प्रचार कर रही है। भाजपा के पास न मुद्दों की कमी है और नेताओं की। इसलिए उसका प्रचार ज्यादा व्यवस्थित और तेज दिखाई पड़ रहा है। विधानसभा में कांग्रेस पर भाजपा को मामूली बढ़त रतलाम लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली 8 विधानसभा सीटों के लिए 4 माह पहले हुए चुनाव में भाजपा को कांग्रेस पर मामूली बढ़त हािसल है। क्षेत्र की तीन विधानसभा सीटें कांग्रेस जीती जबकि भाजपा के खाते में 4 सीटें गई हैं। एक सीट सैलाना में भारत आदिवासी पार्टी ने जीत कर सबको चौंका दिया था। इस तरह विधानसभा में ताकत के लिहाज से भाजपा-कांग्रेस में बहुत ज्यादा फर्क नहीं है। भाजपा ने चार विधानसभा सीटें 1 लाख 4 हजार 402 वोटों के अंतर से जीती हैं जबकि कांग्रेस की तीन सीटों में जीत का अंतर 55 हजार 808 वोट रहा है। सैलाना में भारत आदिवासी पार्टी 4 हजार 618 वोटों के अंतर से जीतने में सफल रही है। लोकसभा चुनाव की दृष्टि से यह अंतर इतना ज्यादा नहीं है कि इसे कवर न किया जा सके। हालांकि 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने क्षेत्र की 8 में से 5 सीटें जीती थीं और भाजपा सिर्फ 3 में सिमट गई थी। बावजूद इसके 2019 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस नहीं जीत सकी थी। रतलाम में तीन जिलों की विधानसभा सीटें रतलाम लोकसभा सीट का भौगोलिक एरिया तीन जिलों तक फैला है। ये जिले झाबुआ, रतलाम और अलीराजपुर हैं। लोकसभा क्षेत्र में झाबुआ जिले की तीन विधानसभा सीटें झाबुआ, थांदला, जोबट और रतलाम जिले की भी तीन रतलाम ग्रामीण, रतलाम शहर और सैलाना आती हैं। अलीराजपुर की दो विधानसभा सीटें जोबट और अलीराजपुर भी इसी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं। इनमें से झाबुआ जिले की 2 और अलीराजपुर की एक सीट कांग्रेस के पास हैं जबकि रतलाम जिले की 2 और झाबुआ-अलीराजपुर की एक-एक सीट पर भाजपा का कब्जा है। जहां तक सीट के राजनीतिक मिजाज का सवाल है तो यहां कांग्रेस ज्यादा जीती है। जब सीट का नाम झाबुआ था तब कांग्रेस के दिलीप सिंह भूरिया यहां जीतते थे लेकिन परिसीमन के बाद जब सीट का नाम रतलाम हो गया तब वे भाजपा में चले गए। इसके बाद 2009 के पहले चुनाव में कांतिलाल ने दिलीप सिंह को हरा दिया जबकि 2014 में दिलीप ने कांतिलाल को हरा कर जीत दर्ज की। दिलीप सिंह के निधन के बाद 2015 के उप चुनाव में भाजपा ने उनकी बेटी निर्मला भूरिया को टिकट दिया लेकिन वे कांतिलाल से हार गईं। सामाजिक, जातीय आधार पर होता रहा मतदान रतलाम लोकसभा सीट के कई हिस्सों में जातीय और सामाजिक आधार पर मतदान होता रहा है। इस बार भी ऐसा हो सकता है। जैसे अनीता नागर सिंह चौहान को आदिवासियों में भिलाला समाज का पूरा वोट मिलेगा और कांतिलाल भूरिया को भील समाज का। इन दोनों समाजों के वोट यहां ज्यादा हैं। झाबुआ जिले में ईसाई मिशनरियों का बड़ा नेटवर्क है। इनके प्रयास … Read more

वित्त विभाग से गैर हाजिर होकर वन मंत्री के लिए ओएसडी के रूप में काम करने वाले चौहान को निलंबित करने मुख्य सचिव को लिखा पूर्व विधायक ने पत्र

The former MLA wrote a letter to the Chief Secretary to suspend Chauhan who was working as OSD for the Forest Minister while being absent from the Finance Department भोपाल। पूर्व विधायक एवं संयुक्त क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष किशोर समरीते ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर वित्तीय सेवा के अधिकारी रणजीत सिंह चौहान को निलंबित कर जांच करने की मांग की। पूर्व विधायक समरीते ने पत्र लिखा है कि चौहान वित्त विभाग से गैरहाजिर होकर वन मंत्री नागर सिंह चौहान के लिए अनाधिकृत तौर पर ओएसडी के रूप में काम कर रहे हैं। चौहान स्वयं को ओएसडी बता कर  विभाग के सीनियर आईएफएस अधिकारियों से लेकर डीएफओ तक पर दबाव डालकर अपनी मनमर्जी से काम करवा रहे हैं।  पूर्व विधायक ने मुख्यमंत्री को लेकर पत्र में कहा है कि  रणजीत सिंह चौहान वित्तीय सेवा अधिकारी जिसकी सेवाएं प्रमुख सचिव वित्त विभाग द्वारा  अभी तक विधिवत तौर पर प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन विभाग को स्थानांतरित नहीं की है। दिलचस्प पहलू यह है कि मुख्यमंत्री सचिवालय ने भी इनके द्वारा वन मंत्री के जरिए भिजवाई गई ओएसडी बनाने संबंधित नोटशीट को भी वापस कर दी गई है। इन सबके विपरीत रणजीत सिंह चौहान वित्त अधिकारी, अनाधिकृत तौर पर विशेष कर्तव्य अधिकारी, वन मंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं। यह मामला पद एवं अधिकारों के दुरूपयोग एवं कदाचरण  का है तथा गंभीर जांच का विषय है।  पूर्व में भी इनके खिलाफ की गई थी शिकायतें  पूर्व में  इनके विरूद्ध श्रीनिवास मूर्ति सदस्य सचिव जैव विविधता बोर्ड की शिकायत पर भी शासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई। अपर मुख्य सचिव केके सिंह के वित्तीय सलाहकार रहते हुये इनके द्वारा अपने लिये लग्जरी कार की मांग एवं अतिरिक्त वित्तीय लाभ लेने के कारण हटाये गये थे। बीजनेस रूल का हवाला देते हुये गलत तरीके से शासन में बैठे अधिकारियों के बीच कार्य विभाजन करवाने के पीछे भी चौहान ही मुख्य सूत्रधार थे। इस मुद्दे पर तत्कालीन वन मंत्री उमंग सिंघार और अतिरिक्त मुख्य सचिव एपी श्रीवास्तव के बीच विवाद ब्यूरोक्रेसी में खूब उछला था और मामला अभी भी जांच के लिये लंबित है।   पूर्व विधायक ने लगाए कथित रूप से पैसे लेने का आरोप  अपने पत्र में पूर्व विधायक ने सिवनी सीसीएफ  एवं भारतीय वन सेवा के अधिकारी एसएस उद्दे की प्रमाणित शिकायत पर जांच को प्रभावित करने तथा निलंबन नहीं करने में 20 लाख रूपये लिये गये। इसी तरह बालाघाट के प्रभारी मुख्य वन संरक्षक सेंगर को टीकमगढ़ में वन मण्डलाधिकारी रहते हुये चैन लिंक (बारवेड) एवं अन्य खरीदी में निलंबन से बचाने 50 लाख रूपये लिये तथा उसे बालाघाट में प्रभारी मुख्य वन संरक्षक बना दिया गया। बालाघाट डीएफओ  अभिनव पल्लव वन मण्डलाधिकारी उत्तर वन मण्डल सामान्य के विरूद्ध शिकायत में सप्लाई तथा खरीदी में लाखों के फर्जी भुगतान में निलंबन से बचाने के लिए  रिश्वत के रूप लाखों रुपए लिये गये। यह अत्यंत गंभीर मामला है। अंत में समरीते ने मुख्य सचिव से अनुरोध किया है कि आप इस मामले की जांच करवाकर विशेष कर्तव्य अधिकारी रणजीत सिंह चौहान को तत्काल निलंबित कर इसकी सेवायें वित्त विभाग को वापिस करने तथा इसकी सम्पत्ति की जांच करवाएं।

पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस भी दोषमुक्त होगे

Chief Secretary Iqbal Singh Bains will also be acquitted भोपाल। उज्जैन हवाई पट्टी के किराये को वसूल न करने के मामले लोकायुक्त प्रकरण में अब पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस भी दोषमुक्त होंगे। इस मामले में आईएएस अधिकारी अनिरुध्द मुखर्जी सहित तीन आईएएस पहले ही दोषमुक्त हो चुके हैं।  दरअसल उज्जैन हवाई पट्टी को एक निजी एजेंसी यश एयरवेज को वर्ष 2006 में प्रशिक्षण कार्यक्रम हेतु ठेके पर दिया गया था तथा अनुबंध की शर्तों में हवाई पट्टी का का उसे उपयोग करने की अनुमति थी। परन्तु एक शिकायत पर लोकायुक्त ने इसमें अपराध पंजीबध्द कर आठ से अधिक तत्कालीन कलेक्टरों को आरोपी बना दिया था। इस मामले में विमानन विभाग के तत्कालीन मुखिया अनिरुध्द मुखर्जी एवं इकबाल सिंह बैंस के खिलाफ लोकायुक्त ने सामान्य प्रशासन विभाग को पत्र लिख दिया था कि दोनों ने उक्त आठ तत्कालीन कलेक्टरों को बचाने का प्रयास किया। इस पर सामान्य प्रशासन विभाग ने अनिरुध्द मुखर्जी को कारण बताओं नोटिस जारी किया था, जिस पर मुखर्जी ने जो जवाब पेश किया उससे संतुष्ट होकर सामान्य प्रशासन विभाग ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया। अब इकबाल सिंह बैंस को भी इसी आधार पर दोषमुक्त किया जायेगा। इधर आठ कलेक्टरों के खिलाफ लोकायुक्त ने अभियोजन की स्वीकृति राज्य शासन से मांगी है। लेकिन इसमें स्वीकृति मिलना इसलिये कठिन है क्योंकि इकबाल सिंह बैंस ने केबिनेट से 10 मई 2021 को अप्रूवल ले लिया था कि उज्जैन हवाई पट्टी का उपयोग करने की चयनित एजेन्सी को उपयोग करने की अनुमति थी। इसलिये किराया न वसूलने की बात बेमानी है क्योंकि जिसे हवाई पट्टी ठेके पर देते हैं उससे किराया नहीं लिया जाता है। क्या था मामला बहुचर्चित उज्जैन हवाई पट्टी घोटाले में नई सरकार के आने के बाद नए सिरे से पड़ताल शुरू हुई है। इस बार जांच के दायरे में पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस का भी नाम आया है। उज्जैन के देवास रोड पर दताना-मताना हवाई प‌ट्टी है। लोकायुक्त संगठन ने इस हवाई पट्टी की लीज और पार्किंग शुल्क में आर्थिक गड़बड़ी का मामला दर्ज किया हुआ है। कुछ आइएएस अफसर इस केस में पहले से ही आरोपी हैं। इकबाल सिंह बैंस के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त होने के बाद केस की फाइल पर पड़ी धूल हटाई गई तो घोटाले के रन वे पर नया नाम उभर आया। सरकार ने यह हवाई पट्टी 2006 में यश एयरवेज और सेंटॉर एविएशन एकेडमी इंदौर को लीज पर दी थी। राज्य सरकार और कंपनी के बीच 7 साल के लिए अनुबंध हुआ था। दो वर्ष बाद ही इसकी लीज अवधि को 10 वर्ष कर दिया गया। लोकायुक्त संगठन ने इस समय वृद्धि को अनुचित माना है। अवधि बढ़ाने का आदेश तत्कालीन विमानन सचिव इकबाल सिंह बैस ने किया। एयरवेज को नाइट पार्किंग के लिए 5 हजार 700 किलो वजनी विमानों के लिए 100 रुपए चुकाने थे। इससे ज्यादा वजनी विमानों के लिए यह चार्ज 200 रुपए था, लेकिन कंपनी ने यह रकम सरकार को नहीं दी। वर्ष 2016 में अनुबंध समाप्त हो गया और कंपनी से पार्किंग शुल्क की वसूली तय हुई। तब 10 मई 2021 को केबिनेट में प्रस्ताव लाकर पार्किंग शुल्क माफ किया गया। यह प्रस्ताव बतौर मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस न रखा। केबिनेट से यह प्रस्ताव छलपूर्वक मंजूर करवाया गया। शिवराज के विश्वसनीय रहे हैं इकबाल 1985 बैच के आइएएस इकबाल सिंह बैंस को पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का विश्वसनीय अफसर माना जाता है। बैस कृषि, उद्यानिकी, ऊर्जा, विमानन, आबकारी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, संसदीय कार्य जैसे विभागों में काम कर चुके हैं। सीहोर, खंडवा, गुना और भोपाल के कलेक्टर भी रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय में सचिव, प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव रह चुके हैं। जब जुलाई 2013 में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर संयुक्त सचिव बनकर चले गए थे, उन्हें भाजपा सरकार बनने के बाद अगस्त 2014 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्र से विशेष आग्रह करके वापस बुलाया था।

हमीदिया अस्पताल: नई बिल्डिंग में शिफ्ट होगी ओपीडी, 100 मीटर के दायरे में होंगी सभी सुविधाएं

Hamidia Hospital: OPD will be shifted to the new building, all facilities will be within 100 meters radius सोमवार से ऑर्थोपेडिक्स विभाग की ओपीडी एच 1 बिल्डिंग में होगी संचालित  भोपाल। हमीदिया अस्पताल में आने वाले मरीजों को अब जांच, इलाज के साथ भर्ती जैसी सुविधाओं के लिए भटकने की जरूरत नहीं होगी। अब मरीजों को अस्पताल की सारी सुविधाएं 100 मीटर के दायरे में ही मिल जाएगी। इसके लिए अस्पताल के पुराने भवन और ट्रॉमा इमरजेंसी बिल्डिंग में संचालित ओपीडी को नई बिल्डिंग यानि एच 1 और एच 2 ब्लॉक में शिफ्ट किया जाएगा। इसकी शुरूआत सोमवार से की जाएगी। सोमवार को ऑर्थोपेडिक्स विभाग की ओपीडी एच 1 बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर संचालित होगी। इसके बाद अन्य विभागों की ओपीडी को चरणबद्ध तरीके से शिफ्ट कर दिया जाएगा। मालूम हो कि हमीदिया अस्पताल में करीब 250 करोड़ रुपए की लागत से 11 मंजिला नए ओपीडी ब्लॉक का निर्माण किया जा रहा है। यह ब्लॉक अस्पताल के पुराने भवनो की जगह तैयार किया जाना है। ऐसे में पुराने अस्पताल के भवन के एक हिस्से को पूरी तरह से तोड़ा जा चुका है, अब दूसरे हिस्से को तोड़ा जाएगा। इसी हिस्से में ओपीडी संचालित होती है, यही कारण है कि ओपीडी को नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया जा रहा है। मरीजों को यह होगी सुविधा अस्पताल प्रबंधन के इस कदम से मरीजों को खासा फायदा होगा। दरअसल अभी अस्पताल में ओपीडी, रजिस्ट्रेशन, ब्लड बैंक, दवा लेने और वार्ड तक जाले में मरीजों को करीब एक किलोमीटर का फासला तय करना होता है। यही नहीं 11 मंजिल पर स्थित वार्ड में भर्ती मरीजों को बिलिंग के लिए गेट के पास बने रजिस्ट्रेशन सेंटर आना पड़ता है। अब यह सारी व्यवस्थाएं मरीजों को एक ही जगह पर ही मिल जाएंगी। एमआरआई और कैथलैब का प्लान नहीं ओपीडी शिफ्टिंग का प्लान को तैयार कर लिया गया है, लेकिन पुराने भवन में स्थित एमआरआई, सीटी स्कैन के सथ कैथ लैब की शिफ्टिंग का कोई प्लान नहीं है। इन सभी सुविधाओं की शिफ्टिंग में तीन से चार महीने का वक्त लगता है। यही नहीं इसमें भारी भरकम खर्च भी होता है। ऐसे में अगर बिल्डिंग टूटती है तो इन सुविधाओं को बंद करना पड़ेगा, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना होगा। गिरी फॉलसीलिंग हमीदिया अस्पताल के एच1 ब्लॉक के सेकेंड फ्लोर पर ओटी कॉम्प्लेक्स कॉरीडोर की फाल्स सीलिंग गिर गई। घटना गुरुवार को चली तेज हवाओं और आंधी के चलते हुई है। इन घटनाओं से 750 करोड़ रुपए में बने नए भवनों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे है। हमीदिया अस्पताल अधीक्षक का कहना है कि मरीजों की सुविधाओं को देखते हुए ओपीडी शिफ्ट की जा रही है। मरीजों को सभी सुविधाएं आस पास ही मिले ऐसी व्यवस्थाएं की जा रही है।

930 रुपए किलो का गुग्गल 1700 रूपये किलो में खरीदा, 30 लाख से अधिक का गड़बड़झाला

Guggal worth Rs 930 per kg bought for Rs 1700 per kg, fraud worth more than Rs 30 lakh भोपाल। अपर मुख्य सचिव वन जेएन कंसोटिया का संरक्षण होने की बदौलत ही लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक बिभास ठाकुर भी एमएफपी पार्क बरखेड़ा पठानी में रॉ मटेरियल खरीदी में गड़बड़झाला को नहीं रोक पा रहे हैं। ताजा मामला गुग्गल खरीदी का प्रकाश में आया है। प्रभारी एसडीओ एवं उत्पादन प्रबंधक ने टेंडर की दर से न खरीदकर आर्यन फार्मेसी से ₹1700 किलो की दर से खरीदी की है। सूत्रों ने बताया कि एमएसपी पार्क के प्रबंधक ने गूग्गल सहित प्रष्टपर्णी, काली मिर्च, हींग, पुनर्नवा आदि रॉ मैटेरियल की खरीदी के लिए टेंडर किया था। टेंडर में गुग्गल के लिए हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार का रेट 930 रूपये प्रति किलोग्राम था। एसपी पार्क के कर्ताधर्ता ने हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार से खरीदी ना करके आर्यन फार्मेसी से ₹1700 की कीमत पर 4000 किलो खरीदी की। हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार फर्म से न तो वर्क आर्डर दिया गया और न किसी प्रकार का पत्राचार किया गया। आर्यन से खरीदी से संघ को 30 लाख 80000 रुपए का अधिक भुगतान करना पड़ा है। प्रभारी एसडीओ एवं उत्पादन प्रबंधक ⁠सुनीता अहीरवार के कार्यकाल में 6 करोड़ों की govt सप्लाई में 3 करोड़ से अधिक की रॉ -मटेरियल ख़रीदी के भुगतान किये गये है, जिसमें 2 करोड़ के बिल तो आर्यन फ़ार्मेसी के थे। इसके अलावा 30-35 लाख के मरम्मत के भुगतान किये जा चुके है।लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र बरखेड़ा पठानी के सीईओ प्रसन्ना फुलझले हटने के बाद से प्रभारी एसडीओ सुनीता अहीरवार मनमानी बढ़ गई है। यहां तक कि फुलझले की जगह प्रमोट आईएफएस अर्चना पटेल को डमी के रूप में सीईओ बनाया गया है। पार्क के अधिकारी और कर्मचारी इसकी मुख्य वजह भी एसीएस से मिल रहे हैं संरक्षण को बताया जा रहा है। एमडी के आदेश का ही नहीं हो रहा पालन लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक ठाकुर ने भंडारण की जांच के लिए एसीएफ मणि शंकर मिश्र को 7 दिन में जांच का रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे किंतु 15 दिन से अधिक का समय बीत गया, अभी तक जांच शुरू नहीं हुई। मिश्रा को भंडारण से संबंधित दस्तावेज उत्पादन प्रबंधन द्वारा नहीं दिए जा रहे हैं। दस्तावेज मांगने के लिए अभी तक मिश्रा ने करीब चार रिमाइंडर सुनीता अहिरवार को भेज चुके हैं। इसकी जानकारी भी एमडी को भेजी गई है किंतु वहां से भी किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है। यही नहीं विद्या निनारे को भंडार में रा मटेरियल जाँच करने के मौखिक निर्देश प्रबंध संचालक और सीईओ ने मीटिंग में सबके सामने दिये थे। उस मीटिंग में सुनीता अहीरवार भी मौजूद थी फिर भी अपने भ्रष्टाचार को छुपाने और एसीएस वन से जानपहचान की धुन में नियमों को भी धता बता रही है। नरेंद्र नागर पर क्यों मेहरबान है केंद्र के अफसर एमएसपी पार्क बरखेड़ा पठानी के सीईओ से लेकर प्रबंधक तक उन पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान है। पिछले एक दशक से एमएसपी पार्क बरखेड़ा पठानी में कंस्ट्रक्शन, फेब्रिकेशन, पुताई कार्य से लेकर दवाइयां के रॉ मैटेरियल प्रदाय करने का ठेका तक के वर्क आर्डर नरेंद्र नागर को दिया जाता है। जबकि उनका मूल काम कंस्ट्रक्शन का है। नियमों की अनदेखी कर नरेंद्र नागर के कंस्ट्रक्शन फर्म को बिना टेंडर कोटेशनों के आधार पर लाखों रुपए के कार्य दिए जा रहे हैं। वर्तमान में उनके द्वारा मेंटेनेंस का कार्य किया गया है, जो कि लगभग 30 से 35 लाख रुपए की बिलिंग हो चुकी है। चर्चा है कि अधिक कमीशन पर उन्हें काम दिए जा रहे हैं। हद तो तब है जब विंध्या हर्बल में कंस्ट्रक्शन वर्क हो या पुताई का कार्य या फिर फेब्रिकेशन के कार्य कोई भी अन्य एजेंसी ही क्यों न करें लेकिन बिल नागर के फर्मो के नाम पर ही बनता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका कैलाश रघुवंशी की होती है। आर्यन फार्मेसी का एकाधिकार पिछले एक दशक में एमएसपी पार्क में आर्यन फार्मेसी अथवा सिस्टर कंसर्न का एकाधिकार रहा है। दवाइयां को बनाने के लिए जो भी संबंधित रॉ मटेरियल खरीदे जाते हैं, उसमें 70 से 80% रॉ मैटेरियल आर्यन फार्मेसी के ही होते हैं। हालांकि फेडरेशन के एमडी ठाकुर दावा कर रहे हैं कि वह व्यवस्था को बदलने में जुटे हैं। यानी उनके अनुसार अब भविष्य में गड़बड़ियों की गुंजाइश बहुत कम रहेगी। बावजूद इसके, जांच के नाम पर फेडरेशन के एमडी को सिर्फ खाली गुमराह किया जा रहा है।

कलेक्टर भिंड विधायक के इशारे पर कर रहे हैं काम, निर्वाचन आयोग से शिकायत

Collector is working on the instructions of Bhind MLA, complaint to Election Commission भोपाल।  पूर्व नेता-प्रतिपक्ष डॉ गोविन्द सिंह ने कहा है कि निर्वाचन आयोग से कलेक्टर भिण्ड संजीव श्रीवास्तव की भाजपा के पक्ष में कार्य करने की अनेक शिकायतें करने के बाद कोई कार्यवाही नहीं हुई, जिससे उनके हौसले बुलंद है। लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी के पक्ष में श्रीवास्तव द्वारा चुनाव प्रभावित कर रहें है। नेता – प्रतिपक्ष डॉ सिंह का आरोप है कि भिण्ड जिले में सिन्ध नदी से रेत (बालू) का अवैध उत्खनन भाजपा के नेताओं से मिलकर लहार थाने के माध्यम से प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक उप्र में ले जाकर बेची जा रही है। रेत माफियाओं के लठेतों द्वारा इन्ट्री के नाम से प्रति ट्रक 10 हजार व प्रति ट्रेक्टर ट्राली 2 हजार रूपये वसूल की जा रही है। जिसका उदाहरण भिण्ड नगर में रेत माफियाओं के लठैतो को इन्ट्री फीस न देने पर 3 अप्रैल 24 को 26 वर्षीय नवयुवक शिवमसिंह तोमर की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उन्होंने कहा है कि लहार क्षेत्र के स्थानीय विधायक के सजातीय थाना प्रभारियों की पदस्थापना कर दी गई है। इन थाना प्रभारियों की रिश्तेदारियां भाजपा के नेताओं से है। जिससे पुलिस के माध्यम से मतदाताओं में भय बनाया जा रहा है। चुनाव को प्रभावित करने हेतु क्षेत्र के काग्रेस कार्यकर्ताओं पर असत्य अपराध पंजीबद्ध कराना प्रारंभ कर दिया है। काग्रेस कार्यकर्ताओं पर काग्रेस पार्टी छोड़कर भाजपा की सदस्यता लेने का दबाव डाला जा रहा है।  दांगी सहकारी संस्थाओं को बनाया खरीदी केंद्र वरिष्ठ नेता सिंह का कहना है कि कलेक्टर भिण्ड संजीव श्रीवास्तव ने स्थानीय विधायक के आदेश से जिन सहकारी संस्थाओं को मप्र में उत्कृष्ठ होने से सम्मानित किया गया उन्हें गेहूँ, सरसों आदि अनाजों का खरीदी केन्द्र नहीं बनाया। इसकी वजह यह है कि इन संस्थाओं पर कांग्रेस पार्टी के निर्वाचित अध्यक्ष है। यह भिण्ड जिले की सर्वोत्तम संस्थाएं है। बीजेपी विधायक के इशारे पर अनेकों ऐसी संस्थाओं को खरीदी केन्द्र बनाया, जिनके कर्मचारियों पर गबन तथा संस्था की राशि वसूली होने के साथ-2 लाखों रूपये के घाटे में चल रही है।

1479 करोड़ के बजट के बंटवारे का अधिकार हाथ से छीनने के भय से ठेके पर देने में वन विभाग कर रहा है ना-नुकुर

The Forest Department is reluctant to give the right to distribute the budget of Rs 1479 crore on contract due to the fear of snatching it away. भोपाल। राज्य शासन को अपने एक आदेश का पालन कराने के लिए अब तक एक के बाद एक, चार आदेश जारी करना पड़े। इसके बाद भी उस पर क्रियान्वयन होने में 6 महीने का समय और लग सकता है। ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि वन विभाग के कैंपा शाखा और विकास शाखा में पदस्थ पीसीसीएफ नहीं चाहते हैं कि रिटायरमेंट के पहले ही बजट बांटने का अधिकार उनके हाथ से निकल जाए। यही वजह है कि मैन्युअल और शर्तों के निर्धारण की आड़ में पीसीसीएफ द्वय टेंडर प्रक्रिया से वानिकी कार्य कराने संबंधित आदेश का क्रियान्वयन अक्टूबर-नवंबर तक टालने की उधेड़बुन में लगे हैं। अक्टूबर में पीसीसीएफ महेंद्र सिंह धाकड़ (कैम्पा) और नवंबर में पीसीसीएफ (विकास) उत्तम कुमार सुबुद्धि सेवानिवृत होने जा रहे हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि अंधा बांटे रेवड़ी….की तर्ज पर कैंपा शाखा 959 करोड़ और विकास शाखा 520 करोड रुपए का बंदरबांट किया जाता है। प्रदेश में वन और वन्य प्राणियों के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ-साथ जंगलों की सुरक्षा और बढ़ते अपराध पर रोकने की दिशा में पूरा अमला मुस्तैद रहे। इसी बात को दृष्टिगत रखते हुए राज्य शासन ने वन विभाग में अधोसंरचना निर्माण कार्य, पशु अवरोधक दीवार से लेकर वारवेड वायर एवं चैनलिंक फेंसिंग और पॉलीहाउस आदि के कार्य निविदा बुलाकर कराने का पहला आदेश 29 मई 23 को प्रसारित किया था। जबकि इसकी स्क्रिप्ट 29 अप्रैल 22 को लिखी गई थी। तत्कालीन वन मंत्री डॉ विजय शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विभाग के सभी अधिकारियों को निविदा बुलाकर वानिकी कार्य करने के निर्देश दिए थे। यहीं नहीं, शाह ने विकास शाखा के तत्कालीन प्रमुख चितरंजन त्यागी को इसके लिए नियम और शर्तें बनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। चूंकि त्यागी अक्टूबर 22 में रिटायर होने वाले थे, इसलिए नियम बनाने में टालमटोल करते रहे। उनके सेवानिवृत्ति के बाद मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया। जब एसीएस जेएन कंसोटिया ने वन विभाग का दायित्व संभाला तब फिर से निविदा बुलाकर कार्य करने संबंधित फाइल मंत्रालय में मूव होने लगी। 29 मई 23 को शासन ने पहला आदेश जारी किया कि 2 लाख के कार्य विभागीय रूप से किया जाएगा। विभागीय अधोसंरचना निर्माण कार्य ग्रामीण यांत्रिकीय विभाग के निर्माण कार्यों की दरों के आधार पर वन विभाग अपने मैन्युअल के आधार पर कराए। 31 दिसंबर तक निविदा प्रक्रिया के स्थान पर विभाग में पुरानी व्यवस्था अनुसार निर्माण कार्यों की अनुमति दी जाती है। 1 जनवरी 24 से जो भी कार्य प्रारंभ हो, उन्हें निविदा प्रक्रिया के उपरांत कराए जाएं। विभागीय अफसरों ने नहीं दिखाई रुचि वन बल प्रमुख से लेकर कैंपा शाखा और विकास शाखा के प्रमुख तक शासन के आदेश के क्रियान्वयन में कोई रुचि नहीं दिखाई। 31 दिसंबर 23 तक पूर्व वन बल प्रमुख आरके गुप्ता चाहते थे कि उनके सेवानिवृत होने के बाद इस पर क्रियान्वयन हो। यही वजह रही कि शासन के 29 में 23, 17 अगस्त 23 और 19 अक्टूबर 23 को जारी आदेश का क्रियान्वयन नहीं हो पाया। इस बीच सभी पीसीसीएफ स्तर के अधिकारियों ने एक प्रेजेंटेशन बनाकर अपर मुख्य सचिव कंसोटिया को सौपा। इसमें निविदा से कार्य करने की तमाम सारी विसंगतियां बताई गई थी। बताते हैं कि कंसोटिया भी विभाग के शीर्ष अधिकारियों के तर्क पर सहमत हो गए थे। निविदा से कार्य करने का मामला ठंडा पड़ चुका था। अचानक 7 मार्च 24 को कंसोटिया ने फिर से आदेश जारी करने का हुक्म अपने मातहत को दिया। आदेश जारी होते वन भवन से फील्ड तक में हड़कंप मच गया। वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव और उनके सिपहसालार पीसीसीएफ सक्रिय हुए। वन बल प्रमुख ने आनन-फानन में पीसीसीएफ स्तर के अधिकारियों की बैठक बुलाई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इसके लिए वन विभाग एक मैन्युअल और शर्ते बनाए। ऐसा करने में 6 महीने का समय निकल जाएगा और तब तक 1479 करोड़ रुपए का 30% बजट पहले त्रेमासिक के लिए पुरानी व्यवस्था के आधार पर चहेते डीएफओ को अपने मन माफिक बजट आवंटित कर दिया जाएगा। बैठक में ही उपस्थित एक सीनियर आईएफएस अधिकारी का कहना है कि मैन्युअल और शर्ते बनाने में अधिक से अधिक 1 महीने का समय लग सकता है। प्रदेश में आचार संहिता लागू है। ऐसे में अफसर चाहे तो 15-20 दिन में ही मैन्युअल और निविदा की शर्ते से बना सकते है। चर्चा है कि कैंपा और विकास शाखा में पदस्थ से पीसीसीएफ नहीं चाहते हैं कि उनके रिटायरमेंट के पहले शासन के आदेश पर क्रियान्वयन हो।

भाजयुमो ने प्रदेश के सभी मंडलों पर मनाया भाजपा स्थापना दिवस

BJYM celebrated BJP Foundation Day in all the divisions of the state भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्री वैभव पवार ने भोपाल में वार्ड क्रमांक 50 के बूथ क्रमांक 202 पर महापुरुषों की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यकर्ताओं को मिठाई खिलाई व कार्यकर्ताओं के यहां घर-घर पार्टी का झंडा लगाया। इस अवसर पर उन्होंने युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं के साथ संगठन के माइक्रो डोनेशन अभियान में सहभागिता कर नमो ऐप के माध्यम से डोनेशन किया।उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सेवा ही संगठन के भाव को समर्पित संगठन है। राष्ट्र सेवा और जन सेवा ही हमारे मूल सिद्धांत हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि 5 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक यथा संभव माइक्रो डोनेशन अभियान में सहभागी बनकर संगठन को और अधिक सशक्त बनाने में अपना योगदान दें।उन्होंने कहा कि युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं ने पूरे उत्साह के साथ प्रदेशभर में स्थापना दिवस मनाया है और माइक्रो डोनेशन अभियान में सहभागिता की। उन्होंने कहा कि यह स्थापना दिवस हम सभी कार्यकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भाजपा को निरंतर मिल रहे अपार जनसमर्थन के साथ हम सभी को मिलकर मोदी जी के विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करने के लिए अपनी भूमिका निभाना है। प्रदेश अध्यक्ष ने इंदौर संभाग में की बैठक मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष श्री वैभव पवार शनिवार को इंदौर पहुंचे और उन्होंने इंदौर संभाग के युवा मोर्चा पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। उन्होंने बैठक में कहा कि युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं ने बीते चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जिसका उल्लेख हमारी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने भी पूरे मन से किया था। हमें इस बार भी लोकसभा चुनाव में दोगुनी ताकत के साथ संगठन कार्यों को सिद्धि तक पहुंचाना है।उन्होंने कहा कि हम सभी कार्यकर्ताओं को इस बात का गर्व होना चाहिए कि हमें माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के रूप में एक सशक्त नेतृत्व मिला है। आज विदेशों में भी भारत का डंका बज रहा है। उन्होंने कहा कि जिस अंत्योदय की बात हमारे महापुरुषों ने सोची थी आज उसे मोदी जी के नेतृत्व में हम पूरा होते देख रहे हैं। इसलिए हम सभी मोर्चा कार्यकर्ताओं का भी ये दायित्व बनता है कि हम लाभार्थियों से संपर्क करें उन तक मोदी जी की राम राम भी पहुंचाएं और बदलते भारत की चर्चा युवाओं के साथ करें। उन्होंने कहा कि नवमतदाताओं को इस बात से जरूर अवगत कराएं कि कांग्रेस शासन में देभ की स्थिति क्या थी और मोदी जी के नेतृत्व में आज स्थिति कितनी बदल गयी है।

पिछले साल से टैक्स वसूली में लक्ष्य से पिछड़ा नगर निगम, आखिरी दिन वसूले 14 करोड़

Municipal Corporation lagged behind the target in tax collection since last year, recovered Rs 14 crore on the last day जोनल अधिकारी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी, दो वार्ड प्रभारी और दो प्रभारी स्वास्थ्य पर्यवेक्षक को आयुक्त ने किया नोटिस जारी भोपाल। नगर निगम ने चालू वित्त वर्ष के आखिरी दिन 14 करोड़ से अधिक की राजस्व वसूली की। इस तरह निगम ने इस साल करीब 350 करोड़ से ज्यादा की वसूली की, जो तय आंकड़े से करीब 75 करोड़ कम है। दरअसल नगर निगम ने चालू वित्तीय वर्ष 2023.24 के लिए 425 करोड़ की वसूली का लक्ष्य रखा थाए लेकिन पूरे साल सरकारी योजनाओं पर काम करने के चलते राजस्व अमला तय लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाया। रविवार को वसूली का आखिरी दिन था, लिहाजा निगम आयुक्त हरेन्द्र नारायण ने राजस्व वसूली कार्य का औचक निरीक्षण किया और जोनल अधिकारियों एवं वार्ड प्रभारियों से विभिन्न मदों में की गई राजस्व वसूली व बकायादारों से किए गए संपर्क आदि के संबंध में जानकारी प्राप्त की और अधिक से अधिक राजस्व वसूली करने तथा करों की अदायगी करने आने वाले करदाताओं को राजस्व भुगतान सुविधापूर्ण ढंग से कराने के निर्देश दिए। इसके चलते निगम कार्यालय करीब रात नौ बजे तक खुले रहे। जोनल अधिकारी और वार्ड प्रभारी को जारी किया नोटिसनिगम आयुक्त ने वार्ड क्र. 35 बरखेड़ी में वार्ड कार्यालय के आसपास कचरे के ढ़ेर पाए जाने और नालियां कचरे से भरी हुई पाए जाने पर सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए सहायक स्वास्थ्य अधिकारी जोन 07 योगेश दुबे, वार्ड प्रभारी वार्ड क्रं. 35 अहसान अली एवं प्रभारी स्वास्थ्य पर्यवेक्षक वार्ड क्रं. 35 दीपक जैनवार को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। निगम आयुक्त नारायन ने वार्ड क्रं 23 में राजस्व एवं सम्पत्तिकर वसूली संतोषजनक न पाए जाने, वार्ड में उपस्थित कर्मचारियों द्वारा वसूली संबंधी जानकारी उपलब्ध न करा पाने तथा वार्ड कार्यालय में समुचित साफ-सफाई व्यवस्था नहीं होने पर सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए जोनल अधिकारी जोन क्रं 05 राजभान त्रिपाठी एवं वार्ड प्रभारी वार्ड क्रं. 23 एहसान रजा जैदी को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। निगम आयुक्त नारायन ने जोन क्रं. 05 के अंतर्गत वार्ड 19 में निरीक्षण के दौरान बालविहार रोड स्थित बालविहार शॉपिंग काम्प्लेक्स के समीप एवं नाले के पास एवं अंदर कचरे के ढेर पाए जाने पर प्रभारी स्वास्थ्य पर्यवेक्षक वार्ड 19 अनिल कुमार श्रवण को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह को फिर एक वर्ष की सेवावृद्धि

Principal Secretary of State Assembly AP Singh gets one year extension in service 31 मार्च को समाप्त हो गई थी पहली सेवावृद्धि की अवधि, एक अप्रैल से फिर दी गई। भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह अभी यह दायित्व संभालते रहेंगे। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने उन्हें फिर एक वर्ष के लिए सेवावृद्धि दी गई है। वहीं, लोकसभा सचिवालय के संचालक अरविंद शर्मा की सेवाएं प्रतिनियुक्ति पर लेकर उन्हें विधानसभा का सचिव बनाया गया है। मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों का कहना है कि हमारे यहां अधिकारियों की कमी है। सचिव पर पर शिशिर चौबे की संविदा नियुक्ति दी गई थी पर उनकी अवधि समाप्त होने के बाद से सचिव का पद रिक्त था।विधानसभा अध्यक्ष ने प्रयास कर लोकसभा सचिवालय के संचालक अरविंद सिंह की सेवाएं प्रतिनियुक्ति पर ली हैं। उन्हें सचिव पद पदस्थ किया है। वहीं, अपर सचिव के चार पद हैं। एक पद पर वीडी सिंह पदस्थ हैं, जो सचिवालय के अधिकारी हैं।राज्य वित्त सेवा के अधिकारी वीरेंद्र कुमार की सेवाएं विधानसभा सचिवालय में अपर सचिव पद पर समाहित कर ली गई हैं तो एक पद पर प्रतिनियुक्त पर आए राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी उमेश शर्मा पदस्थ हैं।एक पद का प्रभार पुनीत श्रीवास्तव के पास है। उप सचिव स्तर के तीन पद रिक्त हैं। इन स्थितियों को देखते हुए विधानसभा सचिवालय ने शासन की नीति के अनुसार पात्रता रखने वाले कुछ अधिकारियों को उच्च पदों का प्रभार दिया है।

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