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संसद मामला : पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने किया हमलावरों का समर्थन, भाजपा ने किया विरोध.

Parliament Case: Former Minister Sajjan Singh Verma expressed support for the attackers; BJP opposed the statement. कहा-देश की युवाओं की बात को संसद तक पहुंचाने की कोशिश की भोपाल। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने संसद में हुए हमले को लेकर हमलावरों का समर्थन किया है। सज्जन सिंह वर्मा का कहना है कि जो हमलावर सदन के अंदर दाखिल हुए थे उन्होंने अपने विरोध की आवाज उठाई थी। बेरोजगारी सहित कई मुद्दों को लेकर अब उनके पास कोई चारा नहीं था। इसलिए सदन के अंदर दाखिल होकर ऐसा कदम उठाया है। आज देश की यही स्थिति बन रही है। उन्होंने देश की युवाओं की बात को संसद तक पहुंचाने की कोशिश की है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी ने कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा के बयानों पर किया पलटवारभाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व विधायक सज्जन सिंह वर्मा के संसद के सुरक्षा घेरे को तोड़कर उत्पात मचाने वालों का समर्थन करने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कांग्रेस नेता को नसीहत देते हुए कहा कि कांग्रेसी सदैव जिहादी, अपराधी और अराजक मानसिकता का समर्थन करते हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या इनके विचारों का समर्थन सोनिया गांधी व राहुल गांधी भी करते हैं, इसे स्पष्ट करना चाहिए। अग्रवाल ने अपने ट़्वीटर एक्स हैंडल पर किए गए ट्वीट में कहा कि इनके दुर्जन विचारों को सुनिए…। उन्होंने लिखा कि वर्मा संसद के सुरक्षा घेरे को तोड़कर उत्पात मचाने वालों का समर्थन कर रहे हैं। आखिर क्यों कांग्रेसी सदैव जिहादी, अपराधी और अराजक मानसिकता का समर्थन करती है। क्या इनके विचारों का समर्थन सोनिया गांधी और राहुल गांधी भी करते हैं उन्हें स्पष्ट करना चाहिए।

मप्र के विपक्ष का नेता दिल्ली में तय करेगा पार्टी सुप्रीमो, रिपोर्ट भेजी.

The opposition leader of Madhya Pradesh will decide the party supremo in Delhi, as per the sent report. उदित नारायण भोपाल। मध्यप्रदेश में कांग्रेस विधायक दल की पहली बैठक भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय में गुरुवार को हुई। चुरहट विधायक अजय सिंह ने कहा कि बैठक में एक लाइन का प्रस्ताव पारित हुआ है कि नेता प्रतिपक्ष का फैसला दिल्ली हाईकमान करेगा। करीब 40 मिनट की बैठक में दिग्विजय सिंह ने लोकसभा चुनाव के बारे में विधायकों को सक्रिय होने के लिए कहा। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला और स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने विधायकों से वन टू वन चर्चा की। सुरजेवाला ने कहा कि आर्ब्जवर भंवर जीतेंद्र सिंह ने बैठक में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ शामिल नहीं हुए।कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने बताया कि कमलनाथ का कार्यक्रम छिंदवाड़ा जिले में पहले से तय है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला, स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष भंवर जितेंद्र सिंह, पूर्व उट दिग्विजय सिंह बैठक में पहुंचे। दिग्विजय सिंह ने मीडिया के सवालों पर बस इतना कहा कि कैबिनेट का गठन हो गया क्या। भाजपा के ओबीजी मुख्यमंत्री बनाने के साथ ही सामान्य और अनुसूचित जाति वर्ग से एक-एक डिप्टी सीएम बनाए हैं। ऐसे में कांग्रेस में आदिवासी विधायक को नेता प्रतिपक्ष पद देने पर विचार हो रहा है। हालांकि, कांग्रेस में ओबीसी चेहरे के तौर पर विजयपुर विधायक रामनिवास रावत और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाह के नाम भी चर्चा में हैं। वहीं, संसदीय मामलों में अनुभवी नेताओं के तौर पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल भैया, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष और अमरपाटन से विधायक राजेंद्र कुमार सिंह को लेकर भी अंदरखाने विचार हो रहा है। भाजपा को विधायक याद दिलाएंगे संकल्पबैठक के बाद रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि हाईकमान का संदेश विधायकों को दिया गया है। उन्हें लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए कहा गया है। साथ ही विपक्ष में बैठने वाले विधायक जनता के प्रहरी के तौर पर काम करेंगे। सदन के भीतर जनता के मुद्दों को उठाने की जिम्मेदारी निभाएंगे। जनता के लिए सरकार का समर्थन भी करेंगे। इसके अलावा भाजपा को विधायक संकल्प पत्र को पूरा करने के लिए भी आगाह करते रखेंगे। आदिवासी नेताओं में इनके नाम शामिल

गुंडे-अपराधी समझ लें, उनके लिए अब सुरक्षित नहीं है मध्यप्रदेश : विष्णुदत्त शर्मा.

Consider goons and criminals warned, Madhya Pradesh is not safe for them anymore: Vishnudatt Sharma. प्रदेश अध्यक्ष ने कहा: मोदी की गारंटी को पूरा करने प्रदेश सरकार ने बढ़ाया पहला कदम उदित नारायणभोपाल। गुंडे और अपराधी अब यह सोच लें कि मध्यप्रदेश उनके लिए सुरक्षित नहीं है और ऐसे लोगों के लिए प्रदेश में कोई स्थान नहीं है। सरकार के निर्णय से आदतन अपराधियों पर शिकंजा और कसेगा तथा वे कोई नया अपराध करने की स्थिति में नहीं होंगे। यह बात भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने कही। जनहितैषी निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनकी सरकार के प्रति आभार जताते हुए गुरूवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि 2003 में भाजपा सरकार को ऐसा मप्र मिला था, जो असुरक्षित था और जहां गुंडों-अपराधियों का बोलबाला था। भाजपा की सरकार ने गुंडों, अपराधियों और डकैतों की नकेल कसकर प्रदेश को सुरक्षित बनाया। इससे आगे बढ़कर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने निर्णय लिया है कि ऐसे आदतन अपराधियों के द्वारा पूर्व में किए गए अपराधों में प्राप्त जमानत को दंड प्रक्रिया संहिता सीआरपीसी की धारा 437 438 439 के तहत संबंधित न्यायालयों में आवेदन प्रस्तुत करके जमानत निरस्त करने की कार्रवाई की जाए। देश के अंदर अगर कोई गारंटी है, तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटीप्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि देश के अंदर अगर कोई गारंटी है, तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी है। विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश की जनता को यह विश्वास दिलाया था कि ’मोदी की गारंटी, हर गारंटी के पूरा होने की गारंटी’ है। प्रधानमंत्री के इस वादे को पूरा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट मीटिंग में ही तेंदूपत्ता की दर 4000 रुपये प्रति मानक बोरा करने का निर्णय ले लिया है, जिसके लिए भाजपा के संकल्प पत्र में वादा किया गया था। राज्य सरकार का यह निर्णय मोदी की गारंटी को पूरा करने की दिशा में उठाया गया पहला कदम है। सरकार के इस निर्णय से उन आदिवासी भाईयों का सशक्तीकरण होगा, जो वनोपज एकत्र करके अपनी आजीविका चलाते हैं। जनता की तकलीफें दूर होंगी, मिलेंगी सुविधाएं प्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार के निर्णयों से व्यवस्था पारदर्शी होगी और किसान भाईयों, ग्रामीणों, आम लोगों की परेशानियां कम होंगी। शर्मा ने कहा कि गुड गवर्नेंस का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए राज्य सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट में जो निर्णय लिए हैं, उनके लिए मैं मुख्यमंत्री और उनकी कैबिनेट को बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। मोदी की गारंटी को घर-घर पहुंचाएगी विकसित भारत संकल्प यात्राप्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मंत्र पर आगे बढ़ रही है। उनकी सरकार की योजनाओं के केंद्र में आम नागरिक, नौजवान, महिलाएं, किसान और गरीब होते हैं। इन योजनाओं के बारे में जनजागरूकता तथा इनका लाभ लोगों को दिलाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश एवं अन्य राज्यों में 16 दिसम्बर से विकसित भारत संकल्प यात्रा निकाली जा रही हैं। ये यात्राएं सभी ग्राम पंचायतों और नगरीय निकाय क्षेत्रों में भ्रमण करेंगी तथा यात्राओं में शामिल ’गारंटी रथ’ के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी घर-घर पहुंचेगी।

बालाघाट के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई, 14 लाख के इनामी नक्सली को किया ढेर.

Significant action taken in the Naxal-affected area of Balaghat, a reward of 14 lakhs announced for the apprehension of a Naxalite. सूपखार के जंगल में हुई मुठभेड़, माओवादियों का एरिया कमेटी मेंबर था मड़काम हिड़मा उर्फ चैतु मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिलों में था सक्रिय भोपाल, 14 दिसंबर 2023/ मध्यप्रदेश पुलिस की हॉकफोर्स को एक और बड़ी सफलता मिली है। हॉकफोर्स ने आसूचना आधारित नक्सल विरोधी अभियान के दौरान 14 दिसंबर को 14 लाख रुपये के इनामी नक्सली मड़काम हिड्मा उर्फ चैतु (लगभग 32-33 वर्ष) निवासी ग्राम पोमरा, थाना मिरतुर, जिला बीजापुर (छत्तीगढ़) को मार गिराया है। यह मुठभेड़ बालाघाट जिले के गढ़ी थाना क्षेत्र के सूपखार के खमकोदादर वन क्षेत्र में हुई। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में था सक्रिय :- हिड़मा, माओवादियों के एमएमसी (मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़) जोन की जीआरबी (गोंदिया, राजनांदगांव, बालाघाट) डिविजन के एसजेडसीएम (स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर) राजेश उर्फ दामा का विश्वस्त सहयोगी था। हिड़मा पूर्व में माओवादियों की भैरमगढ़ एरिया कमेटी की चेतना नाट्य मंच तथा प्लाटून का सदस्य रहा है। वह पुलिस बल पर हमले की विभिन्न घटनाओं में शामिल रहा है। माओवाद के विस्तार हेतु इसे दो वर्ष पूर्व एमएमसी जोन में भेजे जाने की सूचनाएं आत्मसमर्पित नक्सलियों से पूछताछ में संज्ञान में आई हैं। मृतक के विरुद्ध दर्ज आपराधिक मामलों की विस्तृत जानकारी बस्तर के विभिन्न जिलों से प्राप्त की जा रही हैं। वहीं, मृतक नक्सली हिड़मा का भाई सीतु मड़काम उर्फ सीतु मुचाकी माओवादियों की भैरमगढ़ एरिया कमेटी के अंतर्गत सक्रिय प्लाटून नंबर 13 का डिप्‍टी कमांडर है। इस साल तीसरी बड़ी कार्रवाई :- मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश के नक्सल प्रभावित जिलों में नक्सल उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियानों के तहत वर्ष 2023 में तीन बड़ी कार्रवाई की गई हैं। इन कार्रवाइयों में हॉकफोर्स ने 2 महिला नक्सलियों सहित 4 हार्डकोर नक्सलियों को धराशायी किया है। इन सभी नक्सलियों पर मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संयुक्त रूप से 14-14 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वर्ष 2023 के अप्रैल में हुई कदला मुठभेड़ में महिला नक्सली सरिता तथा सुनीता, कुंदुल-कोद्दापार जंगल क्षेत्र में सितंबर में हुई नक्सली कमलू को भी धराशायी किया जा चुका है। वहीं 14 दिसंबर को हॉकफोर्स ने हिड़मा को भी धराशायी कर दिया। बता दें कि अगस्त 2023 में मध्यप्रदेश पुलिस ने जबलपुर शहर से नार्थ बस्तर तथा आरकेबी डिविजन की मास संगठन का प्रभारी एसजेडसीएम अशोक रेड्डी उर्फ बलदेव को उसकी पत्नी एसीएम रेमती के साथ गिरफ्तार किया। विगत 5 वर्षों में 17 नक्सली ढेर :- छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिलों में विगत 5 वर्षों में विभिन्न पुलिस नक्सल मुठभेड़ के दौरान 17 हार्डकोर नक्सली धराशायी किए जा चुके हैं। इनमें 8 महिला नक्सली भी शामिल हैं। मारे गए नक्सलियों पर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सरकार द्वारा संयुक्त रूप से 2.68 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। वहीं विगत 5 वर्षों में 5 नक्सलियों ने आत्म समर्पण भी किया है। वर्ष 2022 में डीवीसी स्तर के दो नक्सलियों के साथ चार अन्य नक्सलियों को भी धराशायी किया गया तथा दो एके 47 राइफल भी जब्त की गई। नक्सलियों के विरुद्ध आक्रामक रणनीति अपनाई गई तथा आसूचना आधारित अभियानों द्वारा टांडा दलम के चार तथा दर्रेकसा दलम के दो, कुल 6 नक्सलियों को धराशायी कर ट्राइ जंक्शन क्षेत्र में नक्सलियों की कमर तोड़ दी गई। मध्यप्रदेश पुलिस के लगातार प्रयासों और अभियानों से नक्सली बैकफुट पर हैं। नक्सल उन्मूलन के लिए ये उठाए कदम :- क्रमांक-130/2023 आशीष शर्मा

विधानसभा में सुरक्षा घेरा सख्त. (M.P)

Tight security cordon in the Legislative Assembly Madhya Pradesh. अब विधायक केवल एक बाहरी व्यक्ति को दिलवा सकेंगे दीर्घा में प्रवेश विधानसभा में बगैर पास और वैध पहचान पत्र के कोई बाहरी व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकता। गेट के अलावा दीर्घा में प्रवेश से पहले जांच। बिना पहचान पत्र नहीं कर सकता कोई प्रवेश।खान-पान की सामग्री भी दीर्घा में ले जाना मना है।गेट पर होती है तगड़ी सुरक्षा जांच। भोपाल। देश की राजधानी दिल्ली में संसद पर आतंकी हमले की बरसी के दिन ही दो युवक सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए लोकसभा की दर्शक दीर्घा से सदन में कूदकर स्मोक बम सरीखी सामग्री से धुआं छोड़ने की घटना को देखते हुए विधानसभा सचिवालय भी हरकत में आ गया है। गुरुवार को प्रमुख सचिव एपी सिंह ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और निर्देश दिए कि अब विधायक केवल एक ही बाहरी व्यक्ति को दर्शक दीर्घा में प्रवेश दिला पाएंगे। दो स्तर पर जांच होगी और कोई भी ऐसी सामग्री ले जाने की अनुमति नहीं होगी, जिसे सुरक्षा को कोई खतरा हो। इसी माह होगा विधानसभा सत्र मध्य प्रदेश में 16वीं विधानसभा का गठन हो चुका है। दिसंबर में पहला सत्र प्रस्तावित है। लोकसभा की सुरक्षा में सेंध की घटना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर समीक्षा की गई। अभी विधानसभा अध्यक्ष या सदस्य अपने क्षेत्र के लोगों को विधानसभा की कार्यवाही देखने के लिए प्रवेश पत्र जारी करवाते हैं। इसमें बैठक व्यवस्था के अनुसार सदस्यों की अनुशंसा पर प्रवेश पत्र जारी किए जाते हैं, लेकिन अब विधायक के स्वजन के अलावा वे केवल एक बाहरी व्यक्ति की ही अनुशंसा कर सकेंगे। विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ने बताया कि सत्र के पहले एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। विधानसभा परिसर और दीर्घा में प्रवेश से पहले जांच होगी। अभी ऐसी व्यवस्था मप्र विधानसभा में आगंतुकों के लिए विधानसभा सचिवालय द्वारा प्रवेश पत्र जारी किए जाते हैं। यह विधानसभा अध्यक्ष या विधायक की अनुशंसा पर ही जारी किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त उनके पास आधार कार्ड या अन्य फोटोयुक्त पहचान पत्र होना अनिवार्य रहता है। प्रवेश पत्र में ही इस बात का उल्लेख होता है कि संबंधित व्यक्ति किस दीर्घा में जाकर बैठ सकता है। दो जगह सुरक्षा जांच विधानसभा में पहुंचने वाले व्यक्ति को दो जगहों पर सुरक्षा जांच से गुजरना होता है। पहले परिसर के बाहरी द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मी उनकी जांच करते हैं। इसके बाद दीर्घा में प्रवेश से पहले फिर उनकी जांच होती हैं। यहां उनके जूते-चप्पल, बेल्ट उतरवा रखवा लिए जाते हैं। खाने-पीने की कोई चीज अपने साथ नहीं ले जा सकते हैं। मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति तो रहती है, पर उसे बंद करके रखना होता है। सत्र के दौरान राज्य पुलिस के अधीन होती है सुरक्षा व्यवस्था विधानसभा के अपर सुरक्षा सचिव उमेश शर्मा ने बताया कि सत्र के दौरान विधानसभा परिसर की पूरी सुरक्षा व्यवस्था राज्य पुलिस बल के हवाले रहती है। सामान्य दिनों में राज्य के विशेष सशस्त्र बल के 27 जवान तैनात रहते हैं। वहीं, विधानसभा का सुरक्षा अमला, जिसमें लगभग सौ जवान हैं, भी परिसर के भीतर तैनात रहता है।

मुख्यमंत्री की ताजपोशी के बाद नए मुख्य सचिव को लेकर चर्चाएं शुरू.

Discussions have commenced on the appointment of the new Chief Secretary following the swearing-in of the Chief Minister. अनुराग जैन, विवेक अग्रवाल व हरिरंजन राव मप्र लौटेंगे, मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी. Anurag Jain, Vivek Agrawal, and Hariranjan Rao will return to Madhya Pradesh, taking on significant responsibilities. भोपाल। प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. मोहन यादव की ताजपोशी के साथ नए मुख्य सचिव को लेकर चर्चाएं प्रारंभ हो गई है। इसके साथ ही यह चचर्चा भी है कि केंद्रीय भूतल परिवहन सचिव अनुराग जैन प्रदेश लौट सकते हैं। यदि अनुराग जैन प्रदेश लौटते हैं तो श्रीमती बीरा राणा के बाद उन्हें प्रदेश का मुख्य सचिव बनाया जाएगा। अतिविश्वसनीय सूत्रों के अनुसार श्रीमती राणा का कार्यकाल पूरा होने के एक माह पूर्व यानी फरवरी 2024 के अंतिम या मार्च के प्रथम सप्ताह में राज्य सरकार किसी वरिष्ठ अधिकारी को मंत्रालय मेंओएसडी नियुका कर देगी। ओएसडी ही श्रीमती राणा की सेवानिवृत्ति पर 31 मार्च 2024 को राज्य के प्रशासनिक मुखिया का पदभार संभाल लेगा। सूत्रों का कहना है कि अनुराग जैन यदि प्रदेश नहीं लौटते तो अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य च चिकित्सा शिक्षा मोहम्मद सुलेमान, अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा या अपर मुख्य सचिव नर्मदा घाटी विकास एसएन मिश्रा में से किसी एक को मुख्य सचिव बनाया जा सकता है। अंतिम फैसला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लेना है। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ अतिरिक्त सचिव वित्त विवेक अग्रवाल तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में पदस्थ अतिरिक्त सचिव हरिरंजन राव भी प्रदेश लौट सकते हैं। यदि अग्रवाल व राव प्रदेश लौटते हैं तो उन्हें महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। दोनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले उजजैन में कलेक्टर रह चुके हैं। मुख्यमंत्री यादव जब पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष थे, तब हरिरंजन राव निगम के एमडी थे।

गोपाल भार्गव बने एमपी के प्रोटेम स्पीकर.

Gopal Bhargav becomes the Protem Speaker of Madhya Pradesh. राज्यपाल ने दिलाई शपथ; सबसे सीनियर और नौ बार के विधायक हैं भार्गव The Governor administered the oath; Bhargav is the most senior and a nine-time legislator. भाजपा के सबसे सीनियर व रहली से नौ बार के विधायक गोपाल भार्गव ने गुरुवार को प्रोटेम स्पीकर पद की शपथ ली। सुबह 11 बजे राजभवन में गवर्नर मंगुभाई पटेल उनको शपथ दिलाई। बाद में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर विधायकों को शपथ प्रोटेम स्पीकर दिलाएंगे। यहां स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर भी शपथ लेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस करेंगे। इसके बाद एसीएस की बैठक लेंगे। वे इससे पहले विधानसभा स्पीकर और प्रोटेम स्पीकर के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में शामिल हुए। सीएम ने पहली कैबिनेट बैठक में बुधवार को खुले में मांस की बिक्री और तेज आवाज में बजने वाले लाउड स्पीकर को लेकर अहम फैसले किए। पूर्व सीएम उमा भारती ने गुरुवार को इनकी तारीफ की है। ऐसी है प्रोटेम स्पीकर की व्यवस्था प्रोटेम स्पीकर का जिक्र संविधान के अनुच्छेद 180(1) में है। इसमें प्रावधान है कि जब विधानसभा अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का पद रिक्त हो तो कार्यालय के कर्तव्यों का पालन ऐसे विधानसभा सदस्य द्वारा किया जाना चाहिए जिसे राज्यपाल नियुक्त कर सकते हैं। आमतौर पर सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य को प्रोटेम स्पीकर चुना जाता है। इस मामले में वरिष्ठता सदन में सदस्यता से देखी जाती है न कि सदस्य की उम्र से तय की जाती है। संवैधानिक परंपरा के अनुसार प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति के लिए कोई विशिष्ट संवैधानिक या वैधानिक प्रावधान नहीं है।

मंत्रिमंडल विस्तार में नहीं चलेगा पट्ठावाद, चौंकाने वाले हो सकते मंत्रियों के नाम.

The expansion of the cabinet, here are the names of the ministers who could be surprising. हर अंचल से बनाए जाएंगे 4 से 6 तक मंत्री- खाली रखे जा सकते हैं आधा दर्जन मंत्री पद, मंत्रिमंडल में जातीय संतुलन साधने की तैयारी उदित नारायण भोपाल। जिस प्रकार मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्रियों के चयन में रसूखदार नेताओं की नहीं चली, ठीक इसी तर्ज पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के मंत्रिमंडल का गठन होगा। लोकसभा चुनाव की दृष्टि से इसमें क्षेत्रीय और जातीय संतुलन तो साधा जाएगा लेकिन पट्ठावाद बिल्कुल नहीं चलेगा। अर्थात रसूखदार नेताओं का समर्थक होने के कारण किसी को मंत्री नहीं बनाया जाएगा। सूत्रों के अनुसार पहले चरण में 26-27 मंत्रियों को शामिल कर शपथ दिलाई जाएगी और आधा दर्जन से ज्यादा मंत्री पद खाली रखे जाएंगे। हमेशा की तरह नेतृत्व मंत्रिमंडल के गठन में भी सभी को चौंका सकता है। मोहन-वीडी लेकर जाएंगे संभावित मंत्रियों की सूचीमंत्रिमंडल के गठन पर भी केंद्रीय नेतृत्व की मुहर लगेगी। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा संभावित मंत्रियों की सूची लेकर दिल्ली जाएंगे। वहां नेतृत्व के साथ सूची पर डिस्कशन होगा। नाम जोड़े और घटाएं जाएंगे। इसके बाद फायनल सूची के अनुसार मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी।वरिष्ठ और नए के बीच होगा संतुलनमंत्रिमंडल के गठन में भी मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्रियों का फार्मूला अपनाया जा सकता है। इसके तहत वरिष्ठ और नए विधायकों के बीच संतुलन साधा जा सकता है। कुछ वरिष्ठों के साथ नए मंत्री ज्यादा बनाए जा सकते हैं। जैसे 8-9 वरिष्ठ मंत्रियों के साथ 16-18 नए विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। चंबल-ग्वालियर अंचल से ये बन सकते मंत्रीभाजपा सूत्रों के अुनसार अंचलों में मिली सीटों के संख्या के आधार पर मंत्रियों की संख्या तय हो सकती है। इस आधार पर चंबल- ग्वालियर, बुंदेलखंड, विंध्य और मध्य अंचल से 4-4 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इनमें जातीय संतुलन भी साधा जाएगा। जैसे, चंबल-ग्वालियर से नेता प्रतिपक्ष को हराने वाले अंबरीश शर्मा, जनता के बीच सक्रिय प्रद्युम्न सिंह तोमर, केपी सिंह को हराने वाले देवेंद्र कुमार जैन और घनश्याम सिंह को हराने वाले प्रदीप अग्रवाल को मंत्री बनाया जा सकता है। नरेंद्र सिंह तोमर पहले ही विधानसभा अध्यक्ष घोषित किए जा चुके हैं। बुंदेलखंड, विंध्य में ये हो सकते चेहरेबुंदेलखंड और विंध्य से मंत्रिमंडल में वरिष्ठ और कनिष्ठ के बीच संतुलन के तहत चेहरे तय किए जाएंगे। बुंदेलखंड से नरयावली विधायक प्रदीप लारिया, छतरपुर की ललिता यादव और जबेरा के धर्मेंद्र लोधी को मौका मिल सकता है। इनके अलावा वरिष्ठों में गोपाल भार्गव, भूपेेंद्र सिंह, गोविंद सिंह राजपूत, जयंत मलैया और बृजेंद्र प्रताप सिंह में से 1 अथवा 2 को मौका मिल सकता है। विंध्य अंचल से सीधी की रीति पाठक, जयसिंह नगर की मनीषा सिंह, मऊगंज से प्रदीप पटेल और रामपुर बघेलान से जीते विक्रम सिंह को मौका मिल सकता है। इस अंचल के राजेंद्र शुक्ला पहले ही उप मुख्यमंत्री बन चुके हैं। महाकौशल से बनाए जा सकते हैं 5 मंत्रीमहाकौशल अंचल में भाजपा को इस बार 38 में से 21 सीटें मिली हैं। यह कमलनाथ का भी इलाका है। इसलिए यहां से 5 मंत्री बनाए जा सकते हें। इनमें बहोरीबंद के प्रणव पांडे, नरसिंहपुर के प्रहलाद पटेल और बैतूल के हेमंत खंडेलवाल को मौका मिल सकता है। इनके अलावा जबलपुर के राकेश सिंह और गाडरवारा के उदयप्रताप सिंह में से किसी एक को मौका मिल सकता है। ये दोनों पूर्व सांसद हैं। इसी प्रकार शहपुरा के ओम प्रकाश धुर्वे और मंडला की संपतिया उइके में से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है। मालवा-निमाड़ से बन सकते सर्वाधिक मंत्रीमालवा- निमाड़ अंचल में सर्वाधिक 66 सीटें हैं। भाजपा ने इनमें से 48 सीटें जीती हैं। इसलिए यहां से सर्वाधिक मंत्री बनाए जा सकते हैं। इंदौर से तुलसीराम सिलावट के अलावा कैलाश विजयवर्गीय और रमेश मैंदोला में से किसी एक काे मंत्री बनाया जा सकता है। इनके अलावा सज्जन सिंह वर्मा को हराने वाले राजेश सोनकर, दीपक जोशी को हराने वाले आशीष शर्मा, हरसूद के विजय शाह, नेपानगर की मंजू राजेंद्र दादू मंत्री बन सकते हैं। भोपाल के आसपास भी कम दावेदार नहींप्रदेश के मध्य अंचल अर्थात भोपाल के आसपास मंत्री पद के दावेदारों की संख्या कम नहीं है। इस बार रामेश्वर शर्मा, विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, विष्णु खत्री में से दो मंत्री बन सकते हैं। रायसेन जिले में प्रभुराम चौधरी और सुरेंद्र पटवा में से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है। इनके अलावा सीहोर के सुदेश राय और खिलचीपुर में पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह को हराने वाले हजारीलाल दांगी मंत्री बनाए जा सकते हैं। संभावित मंत्रियों की यह सूची सूत्रों पर आधारित है क्योंकि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी क्या करेगी, कोई नहीं जानता।

पहला आदेश पर्यावरण के हित में ,सीएम मोहन.

The first order in the interest of the environment, CM Mohan. भोपाल। म.प्र. में धार्मिक स्थल एवं अन्य स्थानों पर म.प्र. कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के प्रावधानों तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर जारी दिशा निर्देशों के अनुक्रम में राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया गया है कि किसी भी प्रकार के धार्मिक स्थल अथवा अन्य स्थान में निर्धारित मापदण्ड के अनुरूपही ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकर / डी.जे.) आदि का उपयोग किया जा सकेगा। ■ धार्मिक स्थल एवं अन्य स्थानों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकर / डी.जे.) को अवैधानिक रूप से और निर्धारित मापदंड से अधिक आवाज में बजाने पर लगेगा प्रतिबंध। ■ म.प्र. कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के प्रावधानों, माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशा- निर्देशों के अनुक्रम में लिया गया निर्णय। ■ धर्म गुरुओं से संवाद और समन्वय के आधार लाउडस्पीकरों को हटाने का प्रयास किया जाएगा और ऐसे धार्मिक स्थलों की सूची बनाई जाएगी जहां उक्त नियमों/निर्देशों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। ■ ध्वनि प्रदूषण तथा लाउडस्पीकर आदि के अवैधानिक उपयोग की जांच के लिये सभी जिलों में उड़नदस्तों के गठन का निर्णय लिया गया है।• जिला स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी एवं इस संबध में 31 दिसंबर 2023 तक पालन प्रतिवेदन गृह विभाग को उपलब्ध कराना होगा। ■ ध्वनि प्रदूषण के मामलों की सतत निगरानी के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान विभाग पुलिस मुख्यालय को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

शपथ के दौरान स्टेडियम के बाहर Shivraj के चाहने वालों ने काफिला रोका, मामा मामा के नारे लगाए.

During the swearing-in ceremony, supporters of Shivraj outside the stadium stopped the procession, chanting slogans in favor of Mama (referring to Shivraj Singh Chouhan).

प्रदेश के नए उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला, शपथ ग्रहण समारोह, मोतीलाल नेहरू स्टेडियम भोपाल.

The new Deputy Chief Minister of the state, Rajendra Shukla, will take the oath at the Motilal Nehru Stadium in Bhopal during the swearing-in ceremony.

वन एवं पर्यावरण स्वीकृति हुई आसान, केंद्र ने किया वन एवं पर्यावरण नियमों में संशोधन.

Approval for forest and environment became easier as the central government made amendments to the forest and environmental regulations. उदित नारायण,    भोपाल। केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों को सरल कर दिया है ताकि बड़े प्रोजेक्ट के क्लीयरेंस जल्द से जल्द मिल सके। नए संशोधन के तहत अब कंसलटेंट वन और पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए सीधे तकनीकी कमेटी को फॉरेस्ट और पर्यावरण  के लिए अपना प्रस्ताव भेज सकेंगे। यानी अब सिया कमेटी की भूमिका को निष्प्रभावी बना दिया गया है।  केंद्र सरकार ने वैज्ञानिक डेटा संचालित तरीके से हितधारकों और तकनीकी मूल्यांकन को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए, मंत्रालय ने जीआईएस, एडवांस डेटा एनालिटिक्स आदि जैसी उभरती तकनीकी परिवेश के दायरे का विस्तार किया है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के नियमों में संशोधन करते हुए कठिन और जटिल प्रक्रियाओं को सरल बनाने की कोशिश की है। अब से, सभी नए प्रस्ताव चाहे किसी भी प्रकार के हों, प्रारंभिक जांच के लिए सदस्य सचिव (एमएस), एसईएसी ( स्टेट  एक्सपर्ट अप्रैज़ल कमेटी ) को प्रस्तुत किए जाएंगे। परिवेश पोर्टल पर ही संबंधित एसईआईएए को स्पष्ट सिफारिशें करने के लिए विशेषज्ञ समिति (एसईएसी) द्वारा जांच और आगे विचार किया जाएगा। नए संस्करण ने अब एमएस, एसईएसी को उपरोक्त ओएम में उल्लिखित प्रक्रिया के अनुसार मानक टीओआर जारी करने में सक्षम बना दिया है। क्या थी पुरानी व्यवस्था संशोधन के पहले तक व्यवस्था यह थी कि प्रोजेक्ट के कंसलटेंट को अपने प्रस्ताव को पहले सिया कमेटी के किंतु-परंतु बिंदुओं के सवालों जवाबों से गुजरना पड़ता था। इसके कारण प्रस्ताव को वन और पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए काफी समय तक इंतजार करना पड़ता था। कई बार ऐसा भी हुआ कि सरकारी प्रोजेक्ट भी सिया कमेटी के समक्ष ही महीना और वर्षों तक लंबित रहे। इन समस्याओं को लेकर कई बार भारत सरकार केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को शिकायत भी कई गई और इस शिकायत के आधार पर नया संशोधन आदेश जारी किया गया है।

मध्य प्रदेश के बड़े दलित नेता को मिली बड़ी जिम्मेदारी, जगदीश देवड़ा को बनाया गया उप मुख्यमंत्री।

Big Dalit Politician Jagdish Devda got Big opportunity as Deputy Chief Minister of Madhya Pradesh. संतोष सिंह तोमर भोपाल। मध्य प्रदेश में 11 दिसंबर को भाजपा विधायक दल की बैठक हुई। भाजपा विधायक दल की बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का एलान होने के साथ ही राज्य में दो उप मुख्यमंत्री बनाने का फैसला हुआ है। मल्हारगढ़ से विधायक जगदीश देवड़ा और उज्जैन दक्षिण से विधायक राजेंद्र शुक्ला मध्य प्रदेश के नए उप मुख्यमंत्री बनाए गए हैं। यूं तो जगदीश देवड़ा मध्य प्रदेश की राजनीति में किसी परिचायक मौहताज नहीं हैं। फिर भी आपको बता दें कि जगदीश देवड़ा वर्तमान शिवराज सरकार में वित्त मंत्री का जिम्मा संभाल रहे थे ।वह मल्हारगढ़ विधानसभा सीट से विधायक हैं। देवड़ा लगातार सातवीं बार जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। थावरचंद गहलोत के बाद एक बड़े दलित चेहरे देवड़ा मध्यप्रदेश में थावरचंद गहलोत के बाद एक बड़े दलित चेहरे जगदीश देवड़ा को मध्य प्रदेश का उप मुख्यमंत्री बनाया गया है। 1993 में पहली बार विधायक बनने के बाद से अपने लगभग 33 वर्ष के लंबे राजनीतिक कार्यकाल में जगदीश देवड़ा 7वीं बार विधायक बने हैं। थावरचंद गहलोत के राज्यपाल बनने के बाद से जगदीश देवड़ा को मध्य प्रदेश बीजेपी में बड़े दलित चेहरे के रूप में देखा जा रहा था। उसके चलते अब उन्हें उप मुख्यमंत्री के तौर पर बड़ी जिम्मेदारी मिली है। देवड़ा को उप मुख्यमंत्री बनाने के बाद उनके समर्थकों में खुशी का माहौल है। मल्हारगढ़ क्षेत्र में भी जश्न का माहौल है। विवादों से दूर, संघठन में मजबूत पकड़ रखते हैं देवड़ा मल्हारगढ़ विधानसभा सीट से जगदीश देवड़ा विधायक हैं। वह शिवराज सरकार में वित्त मंत्री हैं। जगदीश देवड़ा 66 साल की उम्र में भी फिट हैं। शांत स्वभाव को जगदीश देवड़ा पार्टी के कद्दावर नेता हैं। साथ ही वह विवादों से दूर रहते हैं। उनकी सजगता की वजह से ही वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभाग की कमान उनके हाथों में है। संगठन और सरकार में उनकी अच्छी पकड़ है। दरअसल, जगदीश देवड़ा का जन्म एक जुलाई 1957 को हुआ है। वह मूल रूप से नीमच जिले के रामपुरा के रहने वाले हैं। एमए के बाद उन्होंने एलएलबी किया है। जगदीश देवड़ा की शादी रेणु देवड़ा से हुई है। राजनीति के साथ-साथ जगदीश देवड़ा वकालत भी करते हैं। उनके दो पुत्र हैं। साथ ही सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहते हैं। वहीं, खेलकूद में भी उनकी विशेष रुचि है। इसके साथ ही वे एथलेटिक्स चैंपियन भी रहे हैं। छात्र जीवन से ही राजनीतिक पारी की शुरुआत जगदीश देवड़ा वर्तमान में मंदसौर के मल्हारगढ़ विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक हैं। मध्य प्रदेश के नवनियुक्त उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा का ताल्लुक प्रदेश की अनुसूचित जाति से है। पेशे से जगदीश देवड़ा समाजसेवी और वकील हैं। छात्र जीवन से ही राजनीति में उनकी दिलचस्पी थी। वर्ष 1979 में वह शासकीय महाविद्यालय रामपुरा से छात्र संघ के अध्यक्ष रहे हैं। साथ ही विक्रम विश्वविद्यालय में सीनेट के सदस्य रहे हैं। इसके बाद उन्होंने भाजयुमो से जुड़कर सियासी करियर को रफ्तार दी है। वर्ष 1993 में बीजेपी ने उन्हें चुनाव लड़ने का मौका दिया। पहली बार में ही वह चुनाव जीत गए और विधायक बन गए। तब से लेकर अब तक वे लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं।इसके बाद विधानसभा में कई समितियों के सदस्य रहे। इसके साथ ही कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी उन्होंने पूरी ईमानदारी और निष्ठा पूर्वक निभाई। जगदीश देवड़ा भाजपा संगठन और सरकार के भरोसेमंद चेहरे हैं। तीन बार मंत्री और एक बार बने प्रोटेम स्पीकर मध्य प्रदेश की दसवीं विधानसभा में जगदीश देवड़ा वर्ष 1993 विधायक निर्वाचित हुए। वर्ष 2003 विधानसभा चुनाव में लगातार जीत दर्ज करने पर उन्हें प्रदेश में राज्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद साल 2008 में शिवराज सरकार में जदीश देवड़ा को परिवहन, जेल, योजना सहित कई महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार सौंप कर कैबिनेट मंत्री बनाया गया। वर्ष 2020 में बनी शिवराज सरकार में उन्हें वित्तमंत्री बनाया गया। इसके साथ ही 15वीं विधानसभा में उन्हें प्रोटेम स्पीकर भी चुना गया था लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने प्रोटेम स्पीकर का पद छोड़ दिया था। 7वीं बार जीते जगदीश देवड़ा जगदीश देवड़ा ने मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार में तीन बर मंत्री रहते हुए कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी निभाई। 66 साल के नवनियुक्त उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा का नाम मध्य प्रदेश तेज तर्रार और कद्दावर नेताओं में शुमार होता है। मध्य प्रदेश के मालवी रीजन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। इस क्षेत्र में भाजपा ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है। वर्ष 1993 से लेकर आज तक वे लगातार चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंच रहे हैं। वर्ष 2023 विधानसभा चुनाव में उन्होंने मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ सीट से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी श्यामलाल जोकचंद को 59,024 वोटों के अंतर से हरा कर मध्य प्रदेश के विधानसभा में 7वीं बार अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है।

अब नहीं सोना पड़ेगा बेंच पर, जेपी अस्पताल में बनेगा रैन बसेरा.

A Renbaseara will be built in J P Hospital. प्रस्ताव तैयार, परिसर में मंदिर के पास की जगह तय भोपाल। जेपी अस्पताल शहर का तीसरा सरकारी अस्पताल है, जहां रैन बसरे की सुविधा होगी। अब तक हमीदिया अस्पताल व एम्स में दूर दराज से आने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था थी। प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार रोजाना जेपी में 60 से 80 मरीज भर्ती होते हैं। अस्पताल में वार्ड में एक मरीज के साथ एक परिजन के ही रुकने की अनुमति होती है। जिसके कारण रात में कई परिजन फर्श व बेंच पर सोते नजर आते हैं। ठंड के मौसम इसके चलते वे भी बीमार हो सकते हैं। इसी को देखते हुए रैन बसेरा बनाने का फैसला लिया गया है। परिसर में मौजूद हनुमान मंदिर के रैन बसेरा बनाना तय किया गया है। जिसका प्रस्ताव भी विभाग को भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही इसका निर्माण शुरू किया जाएगा। नई व्यवस्था का परिजनों को ठंड से बचाने के लिए अलाव जलाया जाएगा। यह व्यवस्था तब तक रहेगी, जब तक शीतलहर का प्रकोप रहेगा। जेपी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल में रूकने वाले परिजनों की सुविधा के लिए रैन बसेरा बनाया जाएगा। जमीन का चयन कर प्रस्ताव विभाग को भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही रैन बसेरा तैयार किया जाएगा।

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