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मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला हैं अजेय, हर बार चुनाव जीते और मंत्री भी बने।

The Deputy Chief Minister of Madhya Pradesh is Rajendra Shukla; he is invincible in every election and has also become a minister each time. मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री जबकि राजेंद्र शुक्ला, जगदीश देवड़ा के साथ उप मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे। In Madhya Pradesh, Dr. Mohan Yadav is the Chief Minister, while Rajendra Shukla and Jagdish Devda will assume the positions of Deputy Chief Ministers. संतोष सिंह तोमर भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री का नाम आखिरकार फाइनल हो गया है। बीजेपी ने डॉ. मोहन यादव का नाम मुख्यमंत्री के लिए चुनकर एक बार फिर सबको चौंका दिया है। उज्जैन दक्षिण से विधायक मोहन यादव मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगे। वहीं राजेन्द्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा को उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर उप मुख्यमंत्री पद पर बैठाया गया है। राजेंद्र शुक्ला मध्यप्रदेश के रीवा से विधायक हैं और विंध्य के कद्दावर नेता के तौर पर उन्हें जाना जाता है। राजेंद्र शुक्ला लगातार चुनाव जीतकर चार बार कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। विंध्य के बड़े नेता हैं अजेय विधायक राजेंद्र शुक्ला रीवा विधानसभा क्षेत्र से विधायक राजेंद्र शुक्ला को विंध्य क्षेत्र से ब्राह्मण समाज के बड़े चैहरे और कद्दावर नेता के तौर पर जाना जाता है। अपने चुनावी कैरियर में वह 2003 से लेकर अब तक अजेय रहे हैं। खास बात है कि वह ऐसे विधायक हैं जिन्हें हर बार चुनाव जीतने पर मंत्री पंद मिला है। वर्ष 2003 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर उमा भारती की सरकार में मंत्री बने। इसके बाद बाबूलाल गौर सरकार में भी उन्हें मंत्री पद मिला। शिवराज सिंह चौहान की सरकार में भी वह राज्य में कैबिनेट मंत्री रहे। बता दें कि वह अब तक लगातार चार बार मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वर्ष 2003 से लेकर अब तक राजेंद्र शुक्ला लगातार रीवा से चुनाव जीतते आए हैं। छात्र नेता के रूप में शुरू हुआ राजनैतिक जीवन मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने वाले राजेंद्र शुक्ला ब्राह्मण समाज से आते हैं। उनकी ब्राह्मण वोटर्स पर मजबूत पकड़ मानी जाती है। पेशे से इंजीनियर राजेंद्र शुक्ला का जन्म वर्ष 1964 को रीवा में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1986 से छात्र नेता के तौर पर राजनैतिक जीवन की शुरुआत कर दी थी। वर्ष 1986 में राजेंद्र शुक्ला सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्र संघ के अध्यक्ष रहे थे। राजेंद्र शुक्ला ने वर्ष 1998 में पहला विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन वह कांग्रेस के पुष्पराज सिंह से 1394 वोटों से हार गए। वर्ष 2003 में रीवा सीट से एक बार फिर बीजेपी ने राजेंद्र शुक्ला को उम्मीदवार बनाया है, इस बार उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी पुष्पराज हराकर पहली मध्य प्रदेश विधानसभा में अपनी जगह बनाई। इससे पहले रीवा सीट से पुष्पराज सिंह ने लगातार तीन बार जीत दर्ज की थी। राजेंद्र शुक्ला ने साल 2003 में रीवा से जीत दर्ज कर उनके विजय रथ पर ब्रेक लगा दिया। इसके बाद उन्होंने यहां से साल 2003 के अलावा साल 2008, 2013, 2018 और 2023 विधानसभा चुनाव में जीत दर्जी की है कैबिनेट मंत्री से लेकर उप मुख्यमंत्री तक का सफर वर्ष 2003 में पहली बार रिकॉर्ड वोटों से विधानसभा चुनाव जीतने वाले राजेंद्र शुक्ला को आवास और पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पद दिया गया। वर्ष 2008 में वह रीवा विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार जीते। और इस बार उन्हें ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्री बनाकर मंत्रीपरिषद में शामिल किया गया। वर्ष 2013 की बात करें तो मध्य प्रदेश की 14वीं विधानसभा में चुनाव जीतकर आने वाले राजेंद्र शुक्ला को उद्योग नीति और निवेश संवर्धन मंत्री बनाया गया। इसके साथ ही उन्होंने जनसंपर्क विभाग भी संभाला।बता दें कि वर्ष 2018 में भी राजेंद्र शुक्ला रीवा से विधायक चुने गए थे लेकिन मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी थी जो की अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी और वर्ष 2020 में यह सरकार गिर गई। जिसके बाद एक बार फिर भाजपा सत्ता में आई। इस बार भी राजेंद्र शुक्ला लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री के दायित्व के साथ एक बार फिर यानी कुल चौथी बार शिवराज मंत्रिमंडल में जगह मिली। इसके साथ ही वर्तमान में पांचवी बार चुनाव जीतकर मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए हैं। सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं विधायक सरकार राजेंद्र शुक्ला राजेंद्र शुक्ला की X (ट्विटर) प्रोफाइल देखें तो पता चलता है कि वह  सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं हैं। उन्हें 65000 से ज्यादा लोग X पर फॉलो करते हैं। इसके साथ ही विधायक राजेंद्र शुक्ला फेसबुक पर भी काफी एक्टिव रहते हैं। यहां भी उनके फॉलोवर बहुत बड़ी तादाद में हैं।

कटनी के बरही में कोयले का अवैध कारोबार, प्रशासन कार्रवाई करने में नाकाम, माफियाओं के हौसले बुलंद.

Illegal coal trade is rampant in Barhi, Katni; the administration’s failure to take action has emboldened the coal mafia. बरही नगर के वार्ड क्रमांक 15 तैयब नगर में किया जा रहा कोयले का अवैध स्टॉक। प्रशासन कार्रवाई करने में नाकाम। Illegal stocking of coal is taking place in Ward Number 15 of Barhi Nagar, but the administration has failed to take any action. कटनी, बरही नगर मे कोयल का अवैध कारोबार बेखौफ फल फूल रहा है। इस पर कार्रवाई न होने से माफिया के हौसले बुलंद है। गौरतलब है कि नगर के वार्ड क्रमांक 15 तैयब नगर मे शासकीय भूमि पर कोयले का अवैध स्टॉक किया गया है। खनिज विभाग से बिना अनुमति लिए भारी मात्रा में कोयले का अवैध स्टॉक किया गया है। बताया गया है कि सरई ग्राम से कोयला लोड होकर खन्ना बंजारी रेलवे स्टेशन से मालगाड़ी पहुंचती है। गाड़ी खड़ी होते ही कोयला माफिया के गुर्गे बोगी में चढ़कर ट्रैक के किनारे कोयला उतार देते हैं और ट्रैक्टर ट्राली लगाकर कोयला भरकर तैयब नगर में स्टॉक करते है यहां अवैध कारोबार कई से चल रहा है लेकिन प्रशासन के के द्वारा कार्यवाई नहीं की जाती जिससे माफियाओं के हौसले बुलंद है। बताया गया है कि कोयला माफिया व रेलवे के अधिकारियों से बड़ी सेटिंग है जिसके तहत यह कारोबार मिलीभगत में बेखौफ चल रहा है। इस ओर पुलिस,आरपीएफ,रेलवे प्रशासन ध्यान नही दे रहा है जिससे अवैध कारोबार करने वालों के हौसले बुलंद है। कोयले के अवैध कारोबार पर नहीं हो रही कार्रवाई माफियाओं के हौसले बुलंद बरही नगर के वार्ड क्रमांक 15 तैयब नगर में किया जा रहा कोयले का अवैध स्टॉक प्रशासन कार्रवाई करने में नाकाम माफियाओं के हौसले बुलंद बरही नगर मे कोयल का अवैध कारोबार बेखौफ फल फूल रहा है। इस पर कार्रवाई न होने से माफिया के हौसले बुलंद है। गौरतलब है कि नगर के वार्ड क्रमांक 15 तैयब नगर मे शासकीय भूमि पर कोयले का अवैध स्टॉक किया गया है। खनिज विभाग से बिना अनुमति लिए भारी मात्रा में कोयले का अवैध स्टॉक किया गया है। बताया गया है कि सरई ग्राम से कोयला लोड होकर खन्ना बंजारी रेलवे स्टेशन से मालगाड़ी पहुंचती है। गाड़ी खड़ी होते ही कोयला माफिया के गुर्गे बोगी में चढ़कर ट्रैक के किनारे कोयला उतार देते हैं और ट्रैक्टर ट्राली लगाकर कोयला भरकर तैयब नगर में स्टॉक करते है यहां अवैध कारोबार कई से चल रहा है लेकिन प्रशासन के के द्वारा कार्यवाई नहीं की जाती जिससे माफियाओं के हौसले बुलंद है। बताया गया है कि कोयला माफिया व रेलवे के अधिकारियों से बड़ी सेटिंग है जिसके तहत यह कारोबार मिलीभगत में बेखौफ चल रहा है। इस ओर पुलिस,आरपीएफ,रेलवे प्रशासन ध्यान नही दे रहा है जिससे अवैध कारोबार करने वालों के हौसले बुलंद है। प्रतिदिन उतर रहा कोयला,शासन को लग रहा लाखों रुपए का चूना खन्ना बंजारी रेलवे स्टेशन में मालगाड़ी से प्रतिदिन कोयला उतर रहा है जिसमे शासन को लाखों रुपए का चूना लग रहा है लेकिन प्रशासन इस अवैध कारोबार पर रोक लगाने में नाकाम है वही माफिया व रेलवे आरपीएफ पुलिस के जिम्मेदार चांदी काट रहे है।खन्ना बंजारी रेलवे स्टेशन में मालगाड़ी से प्रतिदिन कोयला उतर रहा है जिसमे शासन को लाखों रुपए का चूना लग रहा है लेकिन प्रशासन इस अवैध कारोबार पर रोक लगाने में नाकाम है वही माफिया व रेलवे आरपीएफ पुलिस के जिम्मेदार चांदी काट रहे है।

पुल निर्माण कार्य घोटाला, सीमेंट गायब है रेत ही रेत और सिर्फ गिट्टी -ग्रामीण.

Bridge construction scam, where cement is absent, only sand after sand, and just gravel – rural. जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के अंतर्गत ग्राम पंचायत खम्हा से संबंधित ग्राम करही मैं मैं चल रहे पुल निर्माण कार्य कार्य जो पूर्ण रूप से गुणवत्ताहीन है! The ongoing bridge construction work in the village Karahi, under the jurisdiction of Janpad Panchayat Dheemarkheda, related to Gram Panchayat Khamha, is entirely devoid of quality. Special Correspondent, Sahara Samachaar, Katni कटनी, ढीमरखेड़ा, ग्राम करही के ग्रामीणों ने बताया कि बहुत ही घटिया निर्माण हो रहा है! इस निर्माण कार्य मे सीमेंट गायब है रेत ही रेत और सिर्फ गिट्टी ही नजर आ रही है! जिसे हाथ से उखाडा जाए तो उखड़कर बाहर आ जाती है जो खुलेआम भ्रष्टाचार के संकेत दे रही है।एक माह निर्माण कार्य चल रहा है जिसमे सिर्फ प्लांथ भी पूरा नहीं हुआ है! और जो काम हुआ भी है तो ऐसा की पूरी गिट्टी उखड़ रही है जिसकी शिकायत ग्रामीणों ने जनपद में भी किया है! लेकिन जनपद में बैठे अधिकारी भी खूब मलाई काट रहे हैं इसी वजह से सब कुछ आंख में दिख रहा पर नजर अंदाज कर रहे आला अधिकारी,जबकि वर्तमान कलेक्टर महोदय द्वारा गुणवत्ताहीन कार्यों पर सख्त कार्रवाई की हिदायत भी दी गई है! ग्राम पंचायत खाम्हा मैं सही तरीके से कार्यों को खंगाला जाए तो और भी कार्य हैं जो जनता को छती पहुंचा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए हैं। आम जनता सिर्फ़ जांच और न्याय हेतू उचित कार्यवाही कि मांग कर रही है।

मध्यप्रदेश में सीएम और सरकार चुनने के छह फार्मूले.

The six formulas for selecting the Chief Minister and the government in Madhya Pradesh. प्रहलाद पटेल के सीएम बनने की संभावना सबसे अधिक भोपाल में बंगले की सुरक्षा बड़ाई गई, समर्थकों का जमावड़ा. Likelihood of Prahlad Patel becoming the Chief Minister was heightened by increased security at his residence in Bhopal, expressing the confidence of his supporters.” जीतेन्द्र रिछारिया, छतरपुरभोपाल, प्रहलाद पटेल के सीएम बनने की संभावना सबसे अधिक भोपाल में बंगले की सुरक्षा बड़ाई गई, समर्थकों का जमावड़ाप्रहलाद पटेल को सीएम बनाने पर कैलाश विजयवर्गीय और गोपाल भार्गव को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता हैं। नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा स्पीकर बनाया जा सकता है। एसटी/एससी वर्ग से किसी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। वीडी शर्मा और शिवराज सिंह चौहान को केंद्र में बड़ा रोल दिया जा सकता है। ज्योतिरादित्य सिंधिया केंद्र में ही रहेंगे।नरेंद्र सिंह तोमर को सीएम बनाने पर प्रहलाद पटेल और गोपाल भार्गव को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। कैलाश विजयवर्गीय को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। वीडी शर्मा और शिवराज सिंह चौहान को केंद्र में बड़ा रोल दिया जा सकता है। ज्योतिरादित्य सिंधिया केंद्र में ही रहेंगे।कैलाश विजयवर्गीय को मुख्यमंत्री बनाने पर नरेंद्र सिंह तोमर और प्रहलाद पटेल को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। एसटी/एससी वर्ग से किसी को प्रदेश अध्यक्ष और गोपाल भार्गव को विधानसभा अध्यक्ष बनाया जा सकता है। वीडी शर्मा और शिवराज को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। ज्योतिरादित्य सिंधिया केंद्र में ही रहेंगे।वीडी शर्मा को सीएम बनाने पर प्रहलाद पटेल और किसी एसटी/एससी चेहरे को डिप्टी सीएम बना सकते हैं। नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा अध्यक्ष बनाया जा सकता है। कैलाश विजयवर्गीय को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जा सकती है। शिवराज केंद्र में जाएंगे। ज्योतिरादित्य सिंधिया केंद्र में ही रहेंगे।ज्योतिरादित्य सिंधिया को सीएम बनाने पर प्रहलाद पटेल और वीडी शर्मा को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा अध्यक्ष बनाया जा सकता है। कैलाश विजयवर्गीय को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। शिवराज सिंह चौहान केंद्र में जाएंगे।शिवराज सिंह चौहान के ही सीएम बने रहने पर, कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। गोपाल भार्गव को विधानसभा अध्यक्ष बनाया जा सकता है। नरेंद्र सिंह तोमर को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिल सकती है। वीडी शर्मा केंद्र में जा सकते हैं।

पदस्थापना को बदलवाने के दुष्चक्र में पड़ जाते है हम आईएफएस एसोसिएशन के व्हाट्सप्प ग्रुप में पोस्ट के बाद अफसरों में सन्नाटा.

In the cycle of positions upheaval occurs, Silence prevails among officers after the post in the IFS Association WhatsApp group is altered. उदित नारायण भोपाल। 1993 बैच के आईएफएस शशि मलिक ने सेवानिवृत के आठ महीने पहले एसोसिएशन के व्हाट्सप्प ग्रुप पर अपने भावनाओं को संकलित कर ब्लॉग के रूप में एक पोस्ट किया है। एसोसिएशन के व्हाट्सप्प ग्रुप में ब्लॉग पोस्ट होते ही लोकसेवक बिरादरी में सन्नाटा खींच गया। मलिक ने लिखा है कि पदस्थापना को बदलवाने के फेर में हम ऐसे दुष्चक्र में फंस जाते कि आईने के सामने खड़े होकर स्वयं से भी नजरें नहीं मिला पाते है. हम केवल एक कठपुतली मात्र बनकर रह जाते हैं तथा हमारा सम्पूर्ण व्यक्तित्व कहीं न कहीं विलीन हो जाता है।नए साल के जुलाई में रिटायर होने वाले शशि मलिक जहां भी सदस्य रहे, वहां सुर्खियों में बने रहे। वर्तमान में वे मुख्यालय के समन्वय शाखा में प्रमुख हैं। यहां का पदभार संभालते ही उन्होंने तृतीय और चतुर्थ कर्मचारी को कार्यालय में गणवेश (वर्दी) पहनकर आने की अनिवार्यता आदेश जारी कर सुर्खियों में है। इसकी वजह यह है कि मुख्यालय में ही उनके आदेश का माख़ौल उड़ाया जा रहा है। अपने तमाम पदस्थापनाओं के दौरान अनुभवों को समेटते हुए एक ब्लॉग में लिखा कि कई बार हम अपनी वर्तमान पद स्थापना से संतुष्ट नहीं होते है तथा येन-केन-प्रकारेण पदस्थापना को बदलवाने के दुष्चक्र में पड़ जाते है। इस सम्पूर्ण प्रक्रिया में हमारा कई प्रकार से दोहन किया जाता है। जिसका प्रभाव पुनः हमारे प्राकृतिक संसाधनों पर भी पड़ता है। इस प्रकार हम एक दुष्चक्र में फंस जाते है जिससे निकलने का हमें कोई भी मार्ग नहीं मिलता है। हम केवल एक कठपुतली मात्र बनकर रह जाते हैं तथा हमारा सम्पूर्ण व्यक्तित्व कहीं न कहीं विलीन हो जाता है। इस दुष्वक्र में फंसकर हम न तो स्वतंत्र रूप से कोई निर्णय ले पाते हैं तथा न ही कर्तव्यों का सम्पादन उचित रूप से कर पाते है, जिसकी हमसे अपेक्षा की जाती है। हम अपने वर्तमान की उस समय से तुलना करें, जब हम इस पवित्र शासकीय सेवा के सदस्य नहीं थे। उस समय हमारी विचारधारा क्या थी, हम क्या सोचते थे ? परन्तु शासकीय सेवा में आते ही हमारे विभिन्न प्रकार के स्वार्थ जाग्रत हो जाते हैं तथा हम उन्ही की पूर्ति में लग जाते है। हमें इस प्रकार की मानसिकता से बाहर निकलने की आवश्यकता है। जहां भी हमारी पदस्थापना होती है, हमें उसी में पूर्ण रूप से आनंद लेना चाहिए, क्योंकि कई बार इस दुष्चक्र में फंसकर जाने-अनजाने में हम कोई ऐसा कार्य कर जाते हैं कि आईने के सामने खड़े होकर स्वयं से भी नजरें न मिला सकेंगे तो ऐसी स्थिति उत्पन्न ही क्यों होने दी जाए ? हमसे अपेक्षा की जाती है कि प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्य को हम नौकरी समझ कर नही बल्कि एक पवित्र कार्य मानते हुये निष्काम भाव से पूर्ण करे। हमारे कर्तव्य पालन का केवल एक ही तरीका है।

क्या बच्चे के गार्जियन के क्रिमिनल रिकॉर्ड को लेने का अधिकार है या नहीं?

Does the guardian have the right to obtain the criminal record of a child? राज्य सूचना आयोग में आया ससुराल वालों के क्रिमिनल रिकॉर्ड की जानकारी लेने का मामला राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कारण बताओ नोटिस किया जारी, तत्कालीन एडिशनल एसपी ग्वालियर ऋषिकेश मीणा को कारण बताओं नोटिस किया जारी. तत्कालीन एडिशनल एसपी ग्वालियर को भोपाल किया तलब, प्रकरण में अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी ग्वालियर में उमेश नागर ने लगाई थी आरटीआई, राजस्थान के कोटा के रहने वाले हैं उमेश नागर, ससुराल वालों के क्रिमिनल रिकॉर्ड की मांगी थी जानकारी भोपाल। क्या RTI आवेदक को अपने ससुरालवालों के क्रिमिनल रिकार्ड जानने का हक़ है? राजस्थान के एक व्यक्ति ने अपनी बेटी के नाना और उनके परिवार वालों का क्रिमिनल रिकार्ड नहीं देने पर ग्वालियर पुलिस के विरुद्ध मप्र सूचना आयोग में अपील लगाई है। इस मामले में सुनवाई करते हुए सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने स्पष्ट किया कि अपने बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी को प्राप्त करना न केवल एक पैरंट का अधिकार है बल्कि बच्चे से जुड़ी उसकी जवाबदेही और जिम्मेदारी भी है। राजस्थान के कोटा शहर के उमेश नागर ने अपने ससुराल वालों के क्रिमिनल रिकार्ड की जानकारी के लिए ग्वालियर एसपी कार्यालय में RTI लगाई थी। पर ग्वालियर पुलिस ने क्रिमिनल रिकार्ड की जानकारी को व्यक्तिगत जानकारी बताते हुए नागर को जानकारी देने से मना कर दिया। नागर ने सुनवाई के दौरान सूचना आयोग को बताया कि यह जानकारी उनके लिए बेहद जरूरी है क्योंकि उनकी बेटी की कस्टडी उनके ससुराल वालों के पास है। दरसल कोटा निवासी नागर की शादी ग्वालियर में हुई थी। पर शादी के बाद पारिवारिक मतभेद होने पर उनकी पत्नी अपनी बेटी को लेकर ग्वालियर में अपने परिवार वालों के साथ रहने लगी। डाइवोर्स और चाइल्ड कस्टडी के लिए भी मामला अदालत में चल रहा है। आयोग ने पूछा अपराध कैसे निजी जानकारी?सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने सुनवाई के दौरान ग्वालियर पुलिस से यह पूछा किसी व्यक्ति का क्रिमिनल रिकॉर्ड व्यक्तिगत जानकारी कैसे हो सकती है? सिंह ने स्पष्ट किया कि कोई भी अपराध समाज के विरुद्ध किया जाता है और समाज में रहने वाले व्यक्तियों को जानने का अधिकार है कि अपराध किनके द्वारा किया जा रहा है ताकि वह अपने आप को सजग और सुरक्षित रख पाए। पुलिस के जानकारी रोकने पर सवाल उठाते हुए सिंह ने कहा कि अगर अपराध को निजी जानकारी की श्रेणी में रखा जाए तो हर अपराधी अपराध करने के बाद यह रहेगा कि उसके द्वारा किया गया अपराध उसका निजी विषय है और इसकी जानकारी किसी को न दी जाए। बच्चे से अलग रहे पिता को क्या जानकारी लेने अधिकार है? सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने अपने आदेश में लिखा कि ये मामला डाइवोर्स प्रकरण के चलते चाइल्ड कस्टडी और बच्चों के वेलफेयर से जुड़ा हुआ विषय है। पिता को शक है कि उनके ससुराल पक्ष के सदस्यों का क्रिमिनल रिकॉर्ड है जो कि उनके बच्चे की सुरक्षा के एवं नैसर्गिक विकास के लिए उपयुक्त नहीं है। इस जानकारी को RTI में लेकर वे अपने बच्चे के भविष्य को सुरक्षित रखना चाहते हैं। सिंह ने कहा कि इस RTI को लेकर सवाल ये उठना है कि अपने बच्चों से अलग रह रहे पिता को क्या बच्चे के गार्जियन के क्रिमिनल रिकॉर्ड को लेने का अधिकार है या नहीं? सूचना आयुक्त ने बताया बच्चों की सुरक्षा की जानकारी है अहम सिंह ने कहा कि भारतीय संविधान की व्यवस्था में बच्चों के प्रति दोनों ही पेरेंट्स की सामान जवाबदेही और जिम्मेदारी बनती है। वही इस देश का संविधान बच्चों की सुरक्षा एवं उनके नैसर्गिक विकास और उनके अधिकारों की गारंटी देता है। RTI में मांगी जानकारी को पिता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए राहुल सिंह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के करीब ढाई सौ से अधिक विभिन्न कानून लागू है जो बच्चों की सुरक्षा और वेलफेयर के लिए बने हुए हैं। आयोग: बच्चों की सुरक्षा की जानकारी में पारदर्शिता जरूरी बच्चों के सुरक्षा से जुड़े मामलों की व्याख्या करते हुए सिंह ने बताया कि संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत परित सूचना का अधिकार कानून जीवन और स्वतंत्रता जैसे मूलभूत अधिकारों से भी सीधे तौर से जुड़ा हुआ है।सूचना का अधिकार अधिनियम के अनुरूप अगर कोई बच्चा खतरे में है या उसकी स्वतंत्रता या जीवन को लेकर सवाल है तो इस देश का नागरिक बच्चों से जुड़ी हुई जानकारी को जानने का अधिकार रखता है ताकि संविधान के अनुरूप बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाए। आयोग के बाद 5 दिन में मिली जानकारीराज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने ग्वालियर एसपी के जानकारी रोकने के आदेश को खारिज कर दिया। आयोग से जानकारी मिलने के आदेश के बाद ग्वालियर पुलिस ने आवेदक को जानकारी प्रेषित भी कर दी है। जानकारी को अवैध तरीके से रोकने के लिए तत्कालीन एडिशनल एसपी ग्वालियर ऋषिकेश मीणा को कारण बताओं नोटिस जारी कर भोपाल तलब किया है। अब इस प्रकरण में अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी।

सीएम के सलाहकार और पूर्व आईएएस केसरी अडानी की कंपनी में बने एडवाइजर.

Advisors to the Chief Minister and former IAS officer Kesari Adani are appointed as advisors in Adani’s company. भोपाल। मप्र के सीनियर रिटायर्ड आईएएस अधिकारी आईसीपी केशरी ने अडानी ग्रुप ज्वाइन कर लिया है। वह ग्रुप के एनर्जी सेक्टर को देखेंगे और वहां एडवाइजर की भूमिका में रहेंगे। केशरी ने ग्रुप ज्वाइन कर लिया है। केशरी का शासकीय अधिकारी के तौर पर एनर्जी सेक्टर में करीब दस साल का अनुभव रहा है और वह इस विभाग में प्रमुख सचिव, एसीएस स्तर के अधिकारी रहे हैं। केंद्र में भी उन्होंने इस सेक्टर में काम किया है। केशरी के रिटायरमेंट के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें दिसंबर 2022 में मीडिया सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया था। करीब एक साल इस पद पर काम करने के बाद उन्होंने हाल ही में आचार संहिता लगने के पहले 30 नवंबर को यह पद त्याग दिया था और इसके बाद ग्रुप में ज्वाइनिंग की उनकी प्रक्रिया शुरू हो गई थी। केशरी 1988 बैच के अधिकारी है और एनर्जी सेक्टर में उनके काम का लंबा अनुभव रहा है। केंद्र में प्रतिनियुक्ति के दौरान करीब साढ़े पांच साल तक वह ऊर्जा मंत्रालय में ज्वाइंट सेक्रेटरी (थर्मल) रहे। ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव और मप्र भवन, नई दिल्ली के आवासीय आयुक्त रहे आईसीपी केशरी बाद में मुख्य सचिव के वेतनमान पर पदोन्नत के बाद अपर मुख्य सचिव, ऊर्जा भी रहे।केशरी आईएएस एमपी के साथ मप्र, छग और केंद्र में ग्रासरूट एंड पॉलिसी लेवल का अनुभवी अधिकारी बताया है। खासकर इन्फ्रा-पॉवर, रोड, एरिगेसन सेक्टर में। साथ ही लिखा है ज्वाइन्ड एनर्जी ग्रुप।

दिसंबर और जनवरी में घूमने जाने वाले यात्रियों का ट्रेन बिगाड़ेगी खेल.

The train will disrupt the plans of travelers going on vacation in December and January. कई रूटों पर रेलवे लगातार कर रहा ट्रेनों को निरस्त भोपाल। पमरे जोन व भोपाल रेल मंडल से गुजरने वाली कई ट्रेनों को रेलवे की ओर से लगातार कैंसिल किया जा रहा है। भोपाल से ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों की यात्रा मुश्किलों भरी हो सकती है। यदि आप दिसंबर और जनवरी में ट्रेन से घूमने जाने की योजना बना रहे हैं तो थोड़ा संभल जाएं। दिसंबर अंत और जनवरी में ट्रेनों को रेलवे एक के बाद एक कर रद करने जा रहा है। रेलवे ने इन दिनों पटरियों की मरम्मत का काम तेज कर दिया है । तो वहीं नई परियोजनाओं की सुस्त रफ्तार भी बढ़ाई जा रही है, ताकि लोकसभा चुनाव तक अटकी रेल परियोजनाओं को पूरा किया जा सके। इस वजह से कई ट्रेनों को रद कर पटरियों पर काम करने की योजना है। रिजर्वेशन कराने से डर रहे यात्रीऐसे में दिसंबर व जनवरी में बाहर घूमने जाने वाले यात्रियों को अब ट्रेन में सफर के लिए रिजर्वेशन कराने वाले यात्री डर रहे है। दरअसल यात्रियों को लग रहा है रिजर्वेशन कराने के बाद यात्रा वाली तारीख पर अगर रेलवे ने ट्रेन निरस्त कर दी। तो सारी प्लानिंग बेकार हो जाएगी। बाहर यानी जिस जगह जाना है। वहां की कई होटल आदि की बुकिंग में घटा हो सकता है। तो वहीं कई ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट बढ़ रही है। इसके चलते कई यात्रियों को कंफर्म टिकट नहीं होने के चलते भी परेशान होना पड़ रहा है। अब लखनऊ मंडल में चल रहे कार्यहाल ही में झांसी और भोपाल मंडल ने कई ट्रेनों को रद किया था और अब मथुरा स्टेशन पर जनवरी से काम शुरू होने जा रहा है। इस वजह से ट्रेनों को बड़ी संख्या में रद किया जाएगा। इसका सबसे ज्यादा असर भोपाल मंडल व पमरे जोन से दिल्ली जाने वाली ट्रेनों में देखने को मिलेगा। रेलवे सूत्रों के अनुसार इस वजह से लगभग 100 से ज्यादा ट्रेनें प्रभावित होंगी और लगभग इनमें यात्रा करने वाले 20 हजार से ज्यादा यात्रियों का सफर मुश्किलों भरा हो सकता है।जनवरी व फरवरी में यह ट्रेन रहेगी निरस्त 21,24,26,28,31 जनवरी और 02, 04 फरवरी तक को गाडी संख्या 12121 जबलपुर- निजामुद्दीन एक्सप्रेस रद्द रहेगी। 22,25,27,29 जनवरी से 01,03,05 फरवरी तक को निजामुद्दीन से रवाना होने वाली गाडी संख्या 12122 निजामुद्दीन- जबलपुर एक्सप्रेस रद्द रहेगी। इसके अलावा अन्य ट्रेनें भी निरस्त रहेगी।

भोपाल स्टेशन पर बनी 6 करोड़ की बिल्डिंग में यात्रियों को नहीं मिल रही सुविधाएं.

The building worth 60 million at Bhopal station lacks facilities for passengers  तीन साल पहले बनी थी बिल्डिंग, न फूड कोर्ट, न ही पैसेंजर लाउंज भोपाल। भोपाल स्टेशन पर करीब साढ़े तीन साल पहले करीब 6 करोड़ रुपए की लागत से सेंकड एंट्री पर प्लेटफॉर्म नंबर 6 की ओर नई बिल्डिंग बनाई थी। उस समय बिल्डिंग में यात्रियों को पैसेंजर लाउंज, फूड कोर्ट और बजट होटल जैसी शुरू होनी थी, ताकि सफर के दौरान यात्रियों को राहत मिल सके। लेकिन अभी तक यात्रियों को यह सुविधा नहीं मिल सकी। तो वहीं रानीकमलापति स्टेशन पर आए दिन यात्रियों को कई नई सुविधा दी जा रही है।  उल्लेखनीय है कि स्टेशन बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर वीआईपी लाउंज, फर्स्ट फ्लोर पर फूड कोर्ट और सेकंड फ्लोर पर बजट होटल के लिए रेलवे और आईआरसीटीसी के बीच करीब 8 साल पहले अनुबंध हुआ था। लेकिन अब आईआरसीटीसी पीछे हट गया। इसके बाद पिछले साल फिर से आईआरसीटीसी के अधिकारियों के बीच बातचीत हुई। जिसके बाद सहमति बन गई थी। लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई काम नहीं हो सका। इस वजह से यह सब सुविधा यात्रियों को नहीं मिल पा रही है। तो वहीं भोपाल रेल मंडल के अधिकारी इस मामले पर कुछ भी कहने से बच रहे है।  आईआरसीटीसी ने पीछे खींचे हाथ  रेल सूत्रों के अनुसार आईआरसीटीसी द्वारा इस बिल्डिंग का उपयोग इसलिए नहीं किया जा रहा है कि यहां यात्रियों की संख्या कम है। यहां पर सिर्फ 8 से 10 ट्रेनें रुकती हैं। प्लेटफॉर्म नंबर 1 की ओर ज्यादा ट्रेनें रुकने से वहां यात्रियों की आवाजाही अधिक होती है, इसलिए उन्हें ज्यादा फायदा नहीं होगा। इस बिल्डिंग को आईआरसीटीसी नहीं ले रहा है। तो वहीं आईआरसीटीसी के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें जितनी जगह की जरूरत थी रेलवे उससे ज्यादा जगह देना चाहता है। इसलिए मामला अटका हुआ है। उधर, रेल अधिकारियों का कहना है कि छह नंबर की नई बिल्डिंग पर यात्रियों को सुविधा को बढ़ाया गया है। आने वाले दिनों में ओर सुविधा बढ़ाई जाएगी। इस दिशा में नए तरीके से योजना पर काम चल रहा है। 132 ट्रेनें भोपाल स्टेशन पर रोजाना रुकती हैं। सबसे ज्यादा 46 ट्रेनें प्लेटफॉर्म-1 की ओर रुकती हैंसबसे कम 08 से10 ट्रेनें प्लेटफॉर्म नंबर 6 की ओर रुकती हैं।

इस्तीफा देने वाले BJP सांसदों को खाली करना होगा घर, 30 दिन की मोहलत!

BJP MPs resigning will have to vacate their homes within 30 days. दिल्ली ! विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद लोकसभा सांसदों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया है. अब खबर है कि दिल्ली में आवास समिति की ओर से इस्तीफा देने वाले सांसदों को बंगला खाली करने को कहा है. पिछले दिनों 5 राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर से 4 केंद्रीय मंत्रियों समेत 21 सांसद चुनाव मैदान में उतरे थे, जिसमें से 12 सांसदों को जीत मिली थी और इनमें से 11 सांसदों ने जीत के बाद सांसदी से इस्तीफा दे दिया था. अब सूत्रों के हवाले से खबर है कि लोकसभा आवास समिति ने विधानसभा चुनाव जीतने के बाद संसद सदस्यता से इस्तीफा देने वाले उन सभी बीजेपी सांसदों को 30 दिन में सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिया है. इनमें से 8 सांसदों को लोकसभा आवास समिति पूल से आवास आवंटित किया गया था. जबकि 3 सांसद केंद्रीय मंत्री हैं, इसलिए उन्हें शहरी विकास मंत्रालय से आवंटन मिलता है. सूत्रों का कहना है कि नियम सिर्फ विपक्षी सांसदों के लिए ही नहीं, सभी के लिए सामान हैं. जिन लोकसभा सांसदों को 30 दिन में घर खाली करने का नोटिस दिया गया हैं उनमें राकेश सिंह, गोमती साय, अरुण साव, रिति पाठक, बाबा बालकनाथ, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, दिया कुमारी और उदयप्रताप सिंह शामिल हैं. राष्ट्रपति ने स्वीकार किए इस्तीफेइससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कल गुरुवार देर रात केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद सिंह पटेल और रेणुका सिंह का इस्तीफा स्वीकार कर लिया. इन तीनों मंत्रियों ने हाल में विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की थी. इस्तीफा स्वीकार किए जाने के साथ ही राष्ट्रपति मुर्मू ने जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा को कृषि मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया. पीएम मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति मुर्मू ने अर्जुन मुंडा को कृषि मंत्रालय और किसान कल्याण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर को राज्य मंत्री के तौर पर जल शक्ति मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है. इसी तरह केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. जीत के बाद सांसदों ने दिया इस्तीफाइससे पहले बीजेपी ने फैसला किया था कि हाल में चुने गए उसके सभी 12 सांसद अपने पद से इस्तीफा दे देंगे. इसके बाद केंद्रीय मंत्रियों नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद पटेल और रेणुका सिंह ने इस्तीफा दे दिया. इन इस्तीफों के बाद माना जा रहा है कि वे राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में नई सरकारों में शामिल हो सकते हैं. छत्तीसगढ़ से लोकसभा सांसद रेणुका सिंह ने भरतपुर-सोनहत सीट से जीत दर्ज की थी. अन्य सांसदों में मध्य प्रदेश से उदय प्रताप सिंह, रीति पाठक और राकेश सिंह के अलावा राजस्थान से राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा, राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और दिया कुमारी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ से गोमती साई और अरुण साव शामिल हैं. मीणा के अलावा सभी सांसद लोकसभा सांसद थे.

कटनी में शासकीय मेडिकल कॉलेज बनने का मार्ग प्रशस्त शासकीय मेडिकल कॉलेज हेतु कछगवॉं में भूमि आवंटित.

Path to establishing a government medical college in Katni has been paved, with land allocated in Kachgawan for the purpose of setting up the government medical college. आयुक्त चिकित्सा शिक्षा को पत्र लिखकर दी जानकारी कटनी। शासकीय मेडिकल कॉलेज के भवन बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। कलेक्टर अवि प्रसाद ने कटनी जिले में शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिये कछगवॉं में 12.45 हेक्टेयर भूमि चिन्हित कर राज्य शासन के चिकित्सा शिक्षा विभाग को भूमि भी हस्तांतरित कर दिया है। मुड़वारा विधायक संदीप जायसवाल के सार्थक प्रयासों से जिले के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीते 6 अक्टूबर को कटनी में शासकीय मेडिकल कॉलेज खोलने की स्वीकृति प्रदान कर जिले को बड़ी सौगात दी थी। इस संबंध में कलेक्टर श्री प्रसाद ने आयुक्त चिकित्सा शिक्षा को बुधवार को एक पत्र लिखकर जिले में सौ एम.बी.बी.एस. सीट की प्रवेश क्षमता के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना हेतु नेशनल मेडिकल कौंसिल के नियमानुसार वांछित भूमि हस्तांतरित किये जाने की जानकारी भेज दी है। नेशनल मेडिकल कौंसिल के नियमानुसार चिकित्सा महाविद्यालय हेतु 25 एकड़ से अधिक भूमि होनी चाहिए। साथ ही यह भूमि जिला चिकित्सालय के 10 किलोमीटर की परिधि के भीतर होनी आवश्यक है। कलेक्टर ने प्रेषित पत्र में ग्राम कछगवां स्थित शासकीय भूमि खसरा नंबर 36/1 रकवा 6.01 हेक्टयेर, खसरा नंबर 36/2 रकवा 5.56 हेक्टेयर में 4.25 हेक्टेयर, खसरा नंबर 37 रकवा 0.07 हेक्टेयर, खसरा नंबर 91 रकवा 1.99 हेक्टेयर तथा खसरा नंबर 93 रकवा 0.13 हेक्टेयर को मिलाकर कुल 12.45 हेक्टेयर भूमि को भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत व्यपवर्तित कर मेडिकल कॉलेज निर्माण हेतु निःशुल्क हस्तांतरित होने की जानकारी दी है। प्रेषित पत्र के साथ जिला चिकित्सालय कटनी मेे 350 बिस्तर का जिला चिकित्सालय स्वीकृति एवं क्रियाशील होकर सुचारू रूप से संचालित होने सहित भूमि हस्तांतरण का नजरी नक्शा, खसरा -खतौनी आदि भी भेजी गई है। इसके बाद अब मेडिकल कॉलेज स्थापना से संबंधित डी.पी.आर तैयार करने की कार्यवाही निर्माण एजेंसी द्वारा की जा सकेगी।

रीवा लोकायुक्त टीम ने केंद्रीय विद्यालय के रिश्वतखोर प्राचार्य को 19000/ कि रिश्वत लेते हुए आज धर दबोचा.

Lokayukta team in Rewa today caught the corrupt principal of a central school accepting a bribe of Rs. 19,000. रीवा। रीवा लोकायुक्त पुलिस टीम ने केंद्रीय विद्यालय रीवा के रिश्वतखोर प्राचार्य को रिश्वत कि रकम लेते हुए आज धर दबोचा है, जहाँ लोकायुक्त टीम ने आवेदक सत्य प्रकाश पिता सत्येंद्र कुमार प्रभाकर निवासी पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 2 कर्मचारी आवास टाइप रीवा उच्च श्रेणी लिपिक (एस एस )केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 2 रीवा कि शिकायत पर कार्यवाई करते हुए विद्यालय के आरोपी प्राचार्य सतपाल सिंह पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 2 रीवा को रिश्वत कि राशि ₹. 19000 लेते हुए प्राचार्य को उसी के कक्ष में पकड़ लिया गया है, लोकायुक्त ने बताया कि..आरोपी प्राचार्य जो अपने ही कार्यालय में पदस्थ एस एस लिपिक से 200000 रुपए के इंटरएक्टिव पैनल क्रय करने के बाद बिल के भुगतान के लिए बिल का 12% कमिशन के रूप में रिश्वत कि मांग कि थी, जिसे आज दिनांक 07.12.2023 को ₹19000 की रिश्वत लेते हुए प्राचार्य को उसी के कक्ष में रंगे हाथ पकड़ा गया है, *ट्रेपकर्ता अधिकारी* प्रवीण सिंह परिहार उप पुलिस अधीक्षक, ट्रेप दल के सदस्य प्रवीण सिंह परिहार के साथ निरीक्षक प्रमेंद्र कुमार सिंह सहित 15 सदस्यीय टीम शामिल रही।

बागियों का कमाल: भाजपा- कांग्रेस को गंवाना पड़ गईं कई विधानसभा सीटें.

Several assembly seats were lost by both the BJP and Congress. – पार्टी में बगावत के बावजूद कई सीटें जीती भाजपा – कांग्रेस को दोनों दलों के बागियों से हुआ नुकसान -अरविंद, गोविंद, लक्ष्मण, एनपी, चौधरी जैसे दिग्गज हारे   *उदित नारायण*  भोपाल। हर बार की तरह विधानसभा के इस चुनाव में भी भाजपा-कांग्रेस को बागियों के कारण कई सीटें गंवाना पड़ गईं। खास बात यह कि भाजपा के पक्ष में ऐसी आंधी चली कि वह वे सीटें भी जीत गई, जहां उसके मजबूत बागी मैदान में थे। इसके विपरीत कांग्रेस को अपनी पार्टी के साथ भाजपा के बागियों से भी नुकसान हुआ। चार सीटें ही ऐसी थीं जहां भाजपा को पार्टी के से बगावत कर मैदान में उतरे प्रत्याशियों के कारण पराजय का सामना करना पड़ा। बगावत की वजह से अरविंद भदौरिया, डॉ गोविंद सिंह, लक्ष्मण िसंह, एनपी प्रजापति और चौधरी राकेश सिंह जैसे दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा।अटेर सहित चार जगह हुआ भाजपा को नुकसानभाजपा को जहां पार्टी के बागियों के कारण पराजय का सामना करना पड़ा, उनमें अटेर, टीकमगढ़, मुरैना और महिदपुर शामिल हैं। अटेर में पार्टी के बागी मुन्ना सिंह भदौरिया के मैदान में होने के कारण प्रदेश के सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया हार गए। टीकमगढ़ में केके श्रीवास्तव ने निर्दलीय लड़कर भाजपा के राकेश गिरि को हरवा दिया। अटेर में कांग्रेस के हेमंत कटारे और टीकमगढ़ में यादवेंद्र सिंह चुनाव जीत गए। इसी प्रकार मुरैना में पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह ने अपने बेटे राकेश को चुनाव लड़ा दिया। उन्होंने 37 हजार से ज्यादा वोट लेकर भाजपा को हरा दिया और कांग्रेस के दिनेश गुर्जर चुनाव जीत गए।  महिदपुर में भाजपा के प्रताप सिंह बगावत कर चुनाव लड़ रहे थे। वे 20 हजार से ज्यादा वोट ले गए और भाजपा के बहादुर सिंह 290 वोट के अंतर से चुनाव हार गए।बगावत के बावजूद यहां जीत गई भाजपाप्रदेश की आधा दर्जन से ज्यादा सीटें ऐसी हैं, जहां भाजपा में बगावत हुई। मजबूत नेता मैदान में उतर गए, फिर भी भाजपा ने सीट में कब्जा किया। इनमें सुमावली, भिंड, लहार, चाचौड़ा और होशंगाबाद जैसी सीटें शामिल हैं। सुमावली में भाजपा के बागी कुलदीप सिंह सिकरवार के मैदान में होने के बावजूद भाजपा जीत गई और कांग्रेस तीसरे नंबर पर खिसक गई। भिंड में संजीव सिंह की बगावत के बावजूद भाजपा जीती और कांग्रेस के चौधरी राकेश सिंह चुनाव हार गए। लहार में भाजपा के बागी रसाल सिंह ने बगावत की फिर भी भाजपा जीती और नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह को हार का सामना करना पड़ा।  चाचौड़ा में भाजपा की पूर्व विधायक ममता मीणा आप से चुनाव लड़ गईं फिर भी भाजपा जीती और कांग्रेस के लक्ष्मण सिंह हार गए। होशंगाबाद में भगवती चौरे भाजपा से बगावत कर चुनाव लड़ गए लेकिन यहां भाजपा ही जीती और कांग्रेस तीसरे नंबर पर खिसक गई।कांग्रेस के बागियों के कारण पार्टी की हुई हार कांग्रेस में भी बागियों ने कई जगह कमाल दिखाए। भाजपा से फर्क यह है कि बागियों के होने के कारण कांग्रेस सिर्फ हारी, उसे एक भी सीट में जीत नसीब नहीं हुई। गोटेगांव में कांग्रेस ने शेखर चौधरी काे टिकट देकर काट दिया था। वे नाराज होकर निर्दलीय चुनाव लड़ गए। उन्हें 47 हजार से ज्यादा वोट मिले और कांग्रेस के एनपी प्रजापति बुरी तरह हारे।  देपालपुर में कांग्रेस के बागी राजेंद्र चौधरी लगभग 38 हजार वोट ले गए और कांग्रेस विधायक विशाल पटेल 13 हजार से ज्यादा वोटों से हार गए। बड़नगर में भी कांग्रेस ने राजेंद्र सोलंकी को टिकट देकर काट दिया था। वे निर्दलीय चुनाव लड़कर 31 हजार से ज्यादा वोट ले गए और कांग्रेस विधायक मुरली मोरवाल को बड़ी पराजय का सामना करना पड़ा। आलोट में प्रेमचंद गुड्डू बगावत कर मैदान में थे। उन्हें 37 हजार से ज्यादा वोट मिले और विधायक मनोज चावला को पराजय का सामना करना पड़ा। इसी प्रकार महू में अंतर सिंह दरबार बगावत कर निर्दलीय लड़े तो कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे नंबर पर पहुंच गए और भाजपा की ऊषा ठाकुर बड़े अंतर से चुनाव जीत गईं।

पुराने वाहनों पर 15 दिसंबर तक ही लग सकेगी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट.

High-security number plates can only be affixed on old vehicles until December 15th. भोपाल । एक अप्रैल 2019 से पहले के पुराने वाहनों में हाई सिक्युरिटी नंबर प्लेट(एचएसआरपी)लगवाने के लिए परिवहन विभाग ने अंतिम तिथि 15 दिसंबर रखी है। लोग एसआइएएम पोर्टल पर एचएसआरपी लगवाने के लिए आनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसमें संबंधित वाहन मालिक, इंजन नंबर, पता व अन्य जानकारी देकर आवेदन कर सकते हैं। वहीं वाहन-चार पोर्टल पर भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। पोर्टल पर आनलाइन आवेदन करने के बाद निर्धारित शुल्क जमा करके संबंधित वाहन कंपनी के नजदीकी शोरूम पर जाकर कागजात दिखा कर एचएसआरपी लगवा सकते हैं। बता दें कि पुराने वाहनों में एचएसआरपी लगवाने को लेकर वाहन मालिकों में असमंसज है। लोगों जानकारी नहीं होने से परेशान हो रहे हैं। वाहन डीलरों का भी कहना है कि उनके पास पुराने वाहन मालिक कम ही संख्या में एचएसआरपी लगवाने के लिए शोरूमों पर पहुंच रहे हैं।

केंद्र की योजना के लिए मुख्य सचिव राणा ने दिए निर्देश

Chief Secretary Rana has issued directives for the implementation of the central government’s plan. – भारत संकल्प यात्रा में जनता से लेंगे फीडबैक, 13 हजार इलाकों में पहुंचने का टारगेट फिक्स विधानसभा के बाद अब लोकसभा की तैयारी तेज, योजनाओं से वंचित हितग्राहियों को दिलाया जाएगा लाभ- आज से शुरू होगी यात्रा, जिला स्तर पर बनी समितियां और नियुक्त हुए नोडल अधिकारी उदित नारायण भोपाल – केन्द्रीय योजनाओं के सभी पात्र हितग्राहियों को लाभ दिलाने और योजनाओं से देश हुए विकास से आम लोगों को जानकारी देने के लिए भारत संकल्प यात्रा की शुरुआत की जा रही है। इस यात्रा की शुरुआत शुक्रवार से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों गुजरेगी। केन्द्री य योजनाओं से वंचित हितग्राहियों को लाभ दिलाया जाएगा। खास बात है कि विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए प्रदेश भर में दौरा किया था। ठीक विधानसभा चुनाव की तर्ज पर लोकसभा चुनाव में भी जनता के बीच केंद्रीय योजनायों की सौगात लेकर प्रदेश भर में यात्रा के जरिए पहुंचने की कवायद शुरू हो गई है। मध्य्प्रदेश में कृषि और ग्रामीण विकास विभाग की यात्रा में अहम भूमिका रहेगी। मुख्य सचिव वीरा राणा ने विकसित भारत संकल्प यात्रा के संबंध में गुरुवार को संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए कलेक्टरों के साथ बैठक की है। ग्राम स्वराज अभियान, विस्तारित ग्राम स्वराज अभियान, प्रमुख योजनाओं का शत प्रतिशत कवरेज सुनिश्चिभत करने संकल्प यात्रा निकाली जा रही है। जिलों से भी गुजरेगी जहाँ जनजातीय गौरव दिवस मनाया गया। ग्राम पंचायतों स्तर पर भी जन-जागरूकता की गतिविधियां संचालित की जाएगी। जिसमें जागरूकता, सामुदायिक, सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल हैं। इसके अलावा सूचना-शिक्षा-संचार वेन, आईटी प्लेटफार्म, और मोबाइल एप्लीकेशन भी उपयोग में लाई जाएगी। राज्य सरकार, जिला, ग्राम पांचायत और स्थानीय शासन की समिति और केन्द्र सरकार के संगठन और संस्थाओं से प्लानिंग, समन्वय और निगरानी की जाएगी। प्रदेश के 13 हजार के अधिक इलाकों में यात्रा को पहुंचाने का टारगेट फिक्स किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में यात्रा गरीब कल्याण का मिलेगा लाभ- ग्रामीण इलाकों के लिये प्रमुख योजनाओं में आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, दीनदयाल अत्योदय योजना, प्रधानमंत्री उज्वन ला योजना, प्रधानमंत्री विश्व कर्मा योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान, किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री पोषण अभियान, हर घर जल, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री स्वामत्वि , जन धन योजना, जीवन ज्योति बीमा योजना, अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री प्रणाम, नैनो फर्टिकलाइजर शामिल हैं। साथ ही जनजातीय परिवारों के कल्याण से संबंधित योजनाओं में सिकल सेल एनीमिया निवारण मिशन, एकलव्य मॉडल आवासीय विदयालयों में प्रवेश, स्कॉलरशिप, वन अधिकार, वन-धन विकास केन्द्र शामिल हैं। शहरी क्षेत्रों में यात्रा में इन योजनाओं का होगा प्रचार- शहरी क्षेत्रों में यात्रा के दौरान शहरी योजनाओं में प्रधानमंत्री स्वनिधि, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा लोन, स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत अभियान, प्रधानमंत्री ई-बस सेवा, अटल मिशन फॉर रिजूवनेशन एंड अर्बन ट्रांसपोर्टेशन-अमृत योजना, प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना, सौभाग्य योजना, डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, खेलो इंडिया, उड़ान, वंदे भारत ट्रेन, अमृत भारत स्टेशन योजना शामिल हैं। इन योजनाओं में पात्र हितग्राहियों को चिंहित कर लाभान्वित किया जायेगा।

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