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राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा प्रदेश में जिन जिलों से गुजरने वाली है वहां का जीतू पटवारी लेंगे जायजा

Jitu Patwari will take stock of the districts through which Rahul Gandhi’s Bharat Jodo nyaay Yatra is going to pass in Madhya Pradesh. प्रदेश कांग्रेस जीतू पटवारी अभा कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष श्री राहुल गांधीकी आयोजित भारत जोड़ों न्याय यात्रा की तैयारियों के संबंध में 22 से24 फरवरी तक रतलाम, धार, उज्जैन, शाजापुर, राजगढ़,गुना और शिवपुरी जिलों का सघन दौरा करेंगे भोपाल ! मध्य प्रदेश कांग्रेस कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी अभा कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष श्री राहुल गांधी की आयोजित भारत जोड़ों न्याय यात्रा की तैयारियों के संबंध में 22 से 24 फरवरी तक रतलाम, धार, उज्जैन, शाजापुर, राजगढ़, गुना और शिवपुरी जिलों का सघन दौरा करेंगे।उक्त आशय की जानकारी देते हुये प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष संगठन प्रभारी राजीव सिंह ने बताया कि श्री पटवारी 22 फरवरी को सुबह 10 बजे रतलाम में दोपहर 12 बजे सैनाला में, दोपहर 2.30 बजे बदनावर और अपरान्ह 4.30 बजे बड़नगर में श्री राहुल गांधी जी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा की तैयारियों के संबंध में इन जिलों के स्थानीय वरिष्ठ नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे।श्री पटवारी 23 फरवरी को सुबह 10 बजे शाजापुर में, दोपहर 12.30 बजे सारंगपुर में और अपरान्ह 3.30 बजे ब्यावरा में शाजापुर और राजगढ़ जिले के स्थानीय नेताओं के साथ राहुल गांधी जी की यात्रा की तैयारियों के संबंध में पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं से चर्चा करेंगे।श्री राजीव सिंह ने बताया कि श्री पटवारी 24 फरवरी को गुना जिले के चाचौड़ा में सुबह 10 बजे, गुना में दोपहर 12.30 बजे बम्होरी में अपरान्ह 3 बजे और शिवपुरी जिले के कोलारस में शाम 5.30 बजे और शिवपुरी में शाम 7.30 बजे जिले के स्थानीय नेताओं के साथ राहुल गांधी जी की यात्रा की तैयारियों के संबंध में पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं से चर्चा करेंगे।

पार्टी पलायन: 5 साल में कांग्रेस से भाजपा पहुंचे 62 नेता, 7 का भविष्य हुआ उज्जवल, बांकी मुंह ताक रहे

Party exodus: 62 leaders moved from Congress to BJP in 5 years, 7 have a bright future, the rest are staring at them भोपाल। पिछले पांच साल में कांग्रेस से भाजपा में 62 नेता पलायन कर गए। इसमें दावा किया है कि भाजपा में शामिल सिर्फ 7 नेताओं की ही किस्मत चमकी है। शेष पूर्व विधायक, जिलाध्यक्ष राजनीति में हाशिये पर हैं। भाजपा ने भले ही टिकट दिया लेकिन चुनाव नहीं जीत सके हैं। अब भाजपा में भी उनकी पूछ परख नहीं हो रही है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके सांसद बेटे नकुलनाथ के कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने की अटकलें हैं। दोनों नेता दिल्ली में हैं। रविवार को दिनभर अटकलें लगती रहीं कि कमलनाथ और नकुलनाथ रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर भाजपा में शामिल होंगे, लेकिन देररात तक ऐसा कुछ नहीं हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के कांग्रेस छोड़ने की चर्चाओं के बीच प्रदेश कांग्रेस में खलबली मच गई है। अब पिछले 5 साल में कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं के करियर पर भी चर्चा शुरू हो गई है। पिछले पांच साल में जिन 62 कांग्रेस नेताओं ने पार्टी छोड़ी। इनमें सिर्फ 7 नेता ही चांदी काट रहे है, बाकी पूर्व विधायक और जिलाध्यक्ष अब तक बैकबेंचर्स ही बने हुए हैं।  इनकी चमकी किस्मत   मध्य प्रदेश में 2018 में कमलनाथ ने भाजपा के विजय रथ को रोक कर कांग्रेस की सत्ता में वापसी कराई थी। हालांकि, 15 माह की सरकार के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इससे कांग्रेस की सरकार गिर गई थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा ने राज्यसभा में भेजा और उनके साथ आए समर्थक विधायकों को प्रदेश सरकार में मंत्री बनाया। सिंधिया केंद्र सरकार में उड्डयन मंत्री है। उनका कद भाजपा में लगातार बढ़ रहा है। उनके समर्थक विधायक तुलसी सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, प्रद्घुमन सिंह तोमर समेत अन्य नेता भाजपा सरकार में मजबूत हुए।  55 नेताओं का भविष्य भाजपा में खत्म   कांग्रेस नेताओं का दावा है कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए 62 में से 55 नेताओं का भविष्य खत्म हो गया या राजनीति के हाशिये पर चले गए। अब वह भाजपा में बैकबैंचर्स की भूमिका में हैं। कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि भाजपा उनका उपयोग करने के बाद उनकी राजनीति ही खत्म कर देगी। जानकारों का कहना है कि कांग्रेस अब अपने विधायक और बड़े नेताओं को भाजपा में शामिल होने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रही है। इन नेताओं का संकट में राजनैतिक भविष्य – पूर्व विधायक रघुराज सिंह कंसाना, गिर्राज डंडोतिया, कमलेश जाटव, राकेश मावई, उम्मेद सिंह बना, ओपीएस भदौरिया, रणवीर सिंह जाटव, मुन्नालाल गोयल, इमरती देवी, रामवरण सिंह गुर्जर, प्रदीप जायसवाल, अजय चौरे, सविता दीवान, लोकसभा प्रत्याशी मोना सुस्तानी, विजय सिंह सोलंकी सहित कई और भी नेता हैं। जिनके राजनैतिक भविष्य पर संकट आ गया है।

विधायक पर एफआईआर कराने सीएम हाउस पहुंचा संयुक्त संघर्ष मोर्चा  

United Sangharsh Morcha reached CM House to file FIR against MLA भोपाल। आठ साल पहले इकबाल मैदान में मध्य क्षेत्र के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के एक बयान को लेकर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारी शनिवार को सीएम हाउस पहुंचे, जहां उन्होंने सीएम मोहन यादव के ओएसडी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में विधायक पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। मोर्चा अध्यक्ष शमसुल हसन बल्ली ने बताया कि आठ साल पहले (2016) में आरिफ मसूद ने मिली काउंसिल के सदस्यों के साथ इकबाल मैदान में धर्म सभा का आयोजन किया था, जिसमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह को लेकर अपशब्दों का प्रयोग किया गया। जिसमें मसूद और मिली काउंसिल के मौलानाओं ने हिंदू-मुस्लिम धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले बयान भी दिए थे। जिसके बाद इनके खिलाफ तलैया थाने में मामला लंबित है। मोर्चा पदाधिकारियों की शिकायत पर आठ साल में भी कार्रवाई नहीं की गई है। इस मामले में सीएम से विधायक पर कार्रवाई की मांग की गई है।

बीजेपी में जाने के सवाल पर कमलनाथ ने नहीं किया इनकार; बोले- आप उत्साहित क्यों?.. बता दूंगा

Kamal Nath did not deny the question of joining BJP;  Said- Why are you excited?..I will tell you भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ और उनके सांसद बेटे नकुलनाथ के बीजेपी में शामिल होने को लेकर अटकलें तेज हैं। इस बीच कमलनाथ, नकुलनाथ के साथ दिल्ली पहुंच गए हैं। दिल्ली पहुंचने पर कमलनाथ ने बीजेपी में जाने के मीडिया के सवाल पर इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि आप सभी उत्साहित क्यों हो रहे हैं? ऐसा कुछ होता है तो मैं आप सभी को सूचित करूंगा’ पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ दोनों का भाजपा में जाना लगभग तय ही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा- ‘ये खबरें निराधार हैं। क्या आप सपने में भी सोच सकते हैं कि इंदिरा जी का तीसरा बेटा कांग्रेस छोड़ सकता है। वहीं पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने कहा कि कमलनाथ के भाजपा में जाने की उम्मीद ही नहीं करनी चाहिए।  हाइलाइट्स

लोकसभा चुनाव से पहले बाबा महाकाल की शरण मे पहुंचेंगे राहुल गांधी, 25 फरवरी को लेंगे सभा

Before the Lok Sabha elections, Rahul Gandhi will reach Baba Mahakal’s shelter, will hold the meeting on 25th February. भोपाल। कांग्रेस पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी इन दिनों भारत जोड़ो न्याय यात्रा पर हैं। इसके साथ राहुल 25 फरवरी 2024 को उज्जैन आएंगे। जहां पर वे बाबा महाकाल के दर्शन करेंगे और उसके बाद यहां पर सभा को संबोधित भी करेंगे। लोकसभा चुनाव के पहले राहुल गांधी के उज्जैन आने की इस यात्रा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मालवा निमाड़ क्षेत्र मे कई संसदीय सीट हैं, जिन पर राहुल गांधी के आने और सभा लेने से काफी प्रभाव पड़ सकता है।  कांग्रेस पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा को लेकर 25 फरवरी की शाम 5 बजे उज्जैन आने वाले हैं, जहां पर वे मक्सी से उज्जैन पहुंचेंगे और सीधे बाबा महाकाल के दर्शन करने जाएंगे। उन्होंने बताया कि बाबा महाकाल के दर्शन करने के बाद राहुल इंदौर गेट पर पहुंचेंगे जहां कार्यकर्ता अभिनंदन करेंगे। इसके बाद यात्रा शुरू होगी।  यह यात्रा दौलतगंज, देवासगेट पर रुकेगी, जहां राहुल गांधी द्वारा सभा को संबोधित किया जाएगा। उसके बाद यह यात्रा मोहनपुरा पहुंचेगी जहां पर भी एक सभा का आयोजन होगा। राय ने बताया कि यह यात्रा इस सभा के बाद लगभग पांच दिनों तक यहां स्टे करेगी और उसके बाद यात्रा मुरलीपुरा क्षेत्र से 2 मार्च को फिर से शुरू होगी जो कि बड़नगर, बदनावर, झाबुआ होते हुए गुजरात जाएगी। 2022 को उज्जैन आए थे राहुल गांधी- राहुल गांधी 29 नवंबर 2022 को भारत जोड़ो यात्रा लेकर उज्जैन आए थे, जहां उन्होंने बाबा महाकाल के दर्शन कर आगर रोड पर आमसभा को संबोधित भी किया था। इस यात्रा के बाद अब कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी फिर यात्रा लेकर उज्जैन आ रहे हैं।

भारतीय जनता पार्टी ने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित किए ,

Bharatiya Janata Party announced candidates for the upcoming Rajya Sabha elections भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने दो राज्यों में होने वाले आगामी राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव हेतु निम्नलिखित नामों

बजट की माया, कौन समझ पाया… साहित्य की भाषा में समझें

The illusion of the budget who could understand… understand in the language of literature भोपाल। मध्यप्रदेश का वित्त बजट 3 लाख, 14, हजार, 25 करोड़ के लिए वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत किया गया है, वह वास्तव में पूर्ण बजट न होकर 31 जुलाई 2024 तक के लिए लेखानुदान है। इस बजट में यह समझदारी तो परिलक्षित होती ही है कि आगत लोकसभा के चुनाव को देखते हुए कोई कड़वी दवा न दी जाए। अत: इसको चुनावी बजट तो कहा ही जा सकता है। बड़ी बात यह कि जैसा विपक्षी दल यह दुष्प्रचार कर रहे थे, कि मामाजी के जाते ही लाडली बहनों को मिलने वाली राशि बंद कर दी जाएगी, उस आशंका और दुष्प्रचार को मोहन सरकार ने यथावत रखने हेतु वित्तीय प्रावधान रखकर, निर्मूल कर दिया। दूसरी बात यह कि भाजपा की नए वोटर पर पैनी दृष्टि है अत: 12 कक्षा में अच्छे नंबरों से पास होने वाली छात्राओं को अब साइकिल के स्थान पर ई स्कूटी देने हेतु बजट में प्रावधान रखना चतुराई का प्रमाण है। पहली बार पेपरलेस ई बजट प्रस्तुत करना डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ता हुआ एक कदम है। देश की जीडी पी में मध्यप्रदेश का योगदान 3.6 से बढ़कर 4.8 हो जाना आर्थिक स्थिरता और समृद्धि का परिचायक है।  इस बार का बजट युवा, महिला, बेटी और जनजातीय वर्ग को समर्पित है। साथ ही मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को गति देने वाला है भोपाल, इंदौर मेट्रो को गति देने हेतु फंड का आवंटन इसका प्रमाण है। सरकार द्वारा 1000 वाहनों को अपने बेड़े में से कम करके उनकी जगह प्रदूषण रहित ई वाहन चलाने की घोषणा करना जहां पर्यावरण प्रदूषण को कम करने की स्वागत योग्य पहल है वहीं केंद्र सरकार की योजनाओं से तालमेल स्थापित करने का प्रयास भी है। मिलेट्स को बढ़ावा देने हेतु सब्सिडी की योजना से किसानों की आय बढ़ेगी, सीएम राइज स्कूलों के लिए बजट में वृद्धि निश्चित ही शिक्षा के क्षेत्र में एक सराहनीय पहल है। गरीबों को मकान की रजिस्ट्री की दर 5 प्रतिशत से 0 प्रतिशत कर देना भी राहत देने वाला कदम है। अनुसूचित जनजाति का बजट 37 प्रतिशत बढ़ा देना बताता है कि आदिवासी वोटों को सरकार अगले चुनावों में हाथ से नहीं जाने देना चाहती। भले ही बजट में कोई नया कर नहीं लगाया परंतु किसी तरह की कोई राहत भी नहीं दी गई। कुल मिलाकर नई सरकार मोदी के फुट प्रिंट पर चलती दिखाई दी। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस की कीमतों में कमी होने की अपेक्षा थी जो पूरी नहीं हुई। मैं चूंकि साहित्यकार हूं तो अपनी बात कहूंगा कि अधिकांश राज्यों में सरकार द्वारा पुस्तक खरीदी योजना चलाई जाती है, जिससे सत्साहित्य को एवम साहित्यकारों को बढ़ावा मिलता है तथा सामाजिक उत्थान होता है। मध्यप्रदेश में भी यह योजना लागू थी परंतु कुछ वर्षों से पुस्तक खरीदी योजना बंद होने से साहित्यकारों में निराशा और आक्रोश है। साहित्यकार कई वर्षों से यह मांग करते आ रहे हैं परंतु इस बार भी सरकार ने निराश किया। आशा है मुख्यमंत्री इसपर ध्यान देंगे।

हरदा में आमने-सामने प्रशासन और दिग्विजय : सोशल मीडिया पर लिखा भारत रत्न, राम मंदिर और ईवीएम भाजपा के राजनीतिक हथियार

Administration and Digvijay face to face in Harda: Bharat Ratna, Ram Temple and EVM are political weapons of BJP, written on social media  फिर पीएम मोदी : बहन जी को खुश करने के लिए काशीराम को और उद्धव को खुश करने के लिए बाला साहेब ठाकरे को क्यों नहीं: राज्य सभा सांसद भोपाल। हरदा में पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट मामले में घटनास्थल पर जा रहे पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह को पुलिस और प्रशासन ने रोक दिया। इस दौरान बहस जैसी स्थिति भी बनी, दोनों ही आमने-सामने हो गए। बाद में कलेक्टर आदित्य सिंह से मोबाइल फोन पर चर्चा के बाद उन्हें जाने दिया गया। दिग्विजय सिंह के साथ पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और हरदा विधायक डॉ. आरके दोगने भी मौजूद रहे। उन्होंने कुछ पीड़ित परिवारों के सदस्यों के साथ क्षतिग्रस्त मकानों का निरीक्षण किया।वहीं दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत रत्न, राम मंदिर और ईवीएम भाजपा के राजनीतिक हथियार है।  इस पर भाजपा विधायक सिद्धार्थ तिवारी ने पलटवार किया। उन्होंने दिग्विजय सिंह से पूछा कि क्या कमलनाथ ने छिंदवाड़ा फजीर्वाड़े से जीता। उन्होंने दिग्विजय को रीवा संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने की चुनौती भी दी। पीएम मोदी को लेकर लिखा कि क्या यह आपके राजनीतिक खेल का एक और हथियार है। इसमें कोई संदेह नहीं कि सभी का राष्ट्रीय राजनीति और भारत की प्रगति में बहुत बड़ा योगदान था, तो फिर बहन जी को खुश करने के लिए काशीराम को और उद्धव को खुश करने के लिए बाला साहेब ठाकरे जी को क्यों नहीं।  राजनीतिक शस्त्रागार में राम और ईवीएम दिग्विजय सिंह ने आगे लिखा कि यह 2024 के संसद चुनावों के लिए आपके एजेंडे में फिट होगा। आप इतने हताश क्यों हो। आपके राजनीतिक शस्त्रागार में पहले से ही प्रभु राम और ईवीएम हैं। आप ऐसे शक्तिशाली मुद्दों के साथ, 2024 का संसद चुनाव मतपत्र के माध्यम से कराने का साहस रखें। विदेशों में संदिग्ध संगठनों के कुछ प्रमाणित सर्वेक्षणों के अनुसार आपकी दुनिया में सबसे अधिक लोकप्रिय रेटिंग है। पुतिन, बाइडेन, शी जिनपिंग से भी ऊपर। फिर आपको किस बात का डर है। आगे बढ़ें और मतपत्र के माध्यम से 2024 के संसद चुनावों की घोषणा करें। अब तो पाकिस्तान ने भी ऐसा कर दिया है।

केंद्र सरकार के इशारे पर आयकर विभाग कार्यवाही के नाम पर कांग्रेस नेताओं पर दबाव डाल रहा है : जीतू पटवारी

At the behest of the Central Government, the Income Tax Department is putting pressure on Congress leaders in the name of action: Jitu Patwari भोपाल । मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा के दौरान कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार के इशारे पर आयकर विभाग द्वारा हाल ही में कांग्रेस पार्टी के देश एवं प्रदेश के सैकड़ों नेताओं व कार्यकर्ताओं को समन जारी किये जाने की खबरें सामने आ रही हैं। आयकर विभाग द्वारा कांग्रेस नेताओं पर की जा रही यह कार्यवाही केंद्र सरकार के इशारे पर आयकर विभाग द्वारा केवल दबाव डालने और राजनैतिक उद्देश्यों से प्रेरित होकर की जा रही है। जब-जब चुनाव आते हैं सत्ता में बैठी भाजपा का यह घिनौना कृत्य करने का तरीका सामने आने लगता है।   पटवारी ने कहा कि इससे पूर्व भी 2019 में लोकसभा चुनाव के ठीक पहले ऐसी ही कार्यवाही राजनैतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए केंद्र सरकार के दबाव में आयकर विभाग द्वारा कांग्रेस नेताओं पर की गई थी, अवैधानिक तरीके से छापे मारी की गई थी, इस कार्यवाही को लेकर न्यायालय में भी चुनौती दी गई थी जो आज भी लंबित है। आयकर विभाग इस न्यायालयीन प्रक्रिया में न्यायालय के समक्ष दस्तावेज तक पेश नहीं कर सकी। इसी तरह अब 2024 में भी निकट भविष्य में लोकसभा चुनाव होना है तो फिर आयकर विभाग ने केंद्र सरकार के इशारे पर उसी तरह की कार्यवाही को दोहराना शुरू कर दिया है। कांग्रेस से जुड़े नेताओं, कार्यकर्ताओं को कभी समन तो कभी नोटिस देकर प्रताड़ित किया जा रहा है। आयकर विभाग से जारी नोटिस एवं समन में किसी भी करदाता से कोई दस्तावेज नहीं मांगा गया, केवल उनकी उपस्थिति के आदेश जारी किये गये हैं। इनता ही नहीं समन जारी होने पर उनके विधिक जबाव भी पेश किये गये, जिसमें समन जारी करने के विधिक कारण भी चाहे गये हैं। आयकर विभाग द्वारा केवल एक पंक्ति का आदेश दिया गया है जिसमें कोई दस्तावेज नहीं, बल्कि कांग्रेस के पूर्व मंत्रियों, वर्तमान एवं पूर्व विधायकों को दिल्ली स्थित आयकर विभाग के कार्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया है। वहीं पटवारी ने यह भी कहा कि जो हमारे पूर्व साथी आज भाजपा में चले गये हैं, जो मौजूदा सरकार में मंत्री, विधायक हैं उनमें से किसी भी व्यक्ति को आयकर विभाग द्वारा एक भी समन अथवा नोटिस जारी नहीं किया गया है। इस तरह की पक्षपातपूर्ण राजनीति से स्पष्ट है कि आयकर विभाग स्वयं एक राजनैतिक पार्टी की तरह हर चुनाव के पूर्व मात्र सनसनी पैदा करने व राजनैतिक प्रतिद्धंदियों की मानहानि के उद्देश्य से काम करता है। पटवारी ने पत्रकारों से पूछे गए सवाल में कहा कि मैं राज्यसभा सदस्य की दौड़ में शामिल नहीं हूं। एक व्यक्ति एक पद की गरिमा पर कायम हूं और रहूंगा। वहीं प्रदेश सरकार द्वारा किसानों, महिलाओं के साथ किये जा रहे धोखे पर कहा कि किसानों को 2700 और 3100 रू. धान एवं गेहूं पर समर्थन मूल्य दे सरकार। वहीं महिलाओं को 3000 रूपयें और 450 रू. में सिलेण्डर देने की जो राज्य सरकार ने अपने घोषणा पत्र में बात कही भी, उस पर भी सरकार अमल करें। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जितनी कोशिश आंदोलन को असफल बनाने में कर रही है, यदि उससे आधे प्रयास भी किसानों की मांगों व समस्याओं को सुनने में लगा दे तो बहुत हद तक असलियत समझ आ जाएगी। पटवारी ने कहा कि भाजपा द्वारा कांग्रेस के लोगों पर ईडी और आयकर का दबाव बनाकर उन्हें भाजपा में शामिल करने का दबाव बनाया जा रहा है। वहीं कुछ स्वार्थी प्रकार के नेता ईडी आयकर के डर से अपने धंधा बचाने स्वयं भाजपा में शामिल हो रहे हैं।

कमलनाथ की जिद के आगे बौने पड़े प्रदेश प्रभारी जितेंद्र सिंह और जीतू

State in-charge Jitendra Singh and Jitu were dwarfed by Kamal Nath’s stubbornness. भोपाल। ‘वक्त है बदलाव का’ यह स्लोगन कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दरमियान जारी किया था। स्लोगन का असर न तो मतदाताओं पर पड़ा और न ही कांग्रेस जनों पर दिखाई दे रहा है । अलबत्ता बदलाव के नाम पर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हुई अप्रत्याशित हार के बाद पार्टी हाई कमान ने प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को हटाकर जीतू पटवारी को नया अध्यक्ष मनोनीत कर दिया। नेताओं और कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि अब कांग्रेस में बदलाव होगा पर ऐसा नहीं हो रहा है। कमलनाथ के जमाने के वही पदाधिकारी आज भी महत्वपूर्ण पदों पर काबिज हैं। यही कारण है कि प्रदेश प्रभारी महामंत्री भंवर जितेंद्र सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी एआईसीसी सदस्य को बहाल नहीं करवा पा रहे हैं। दरअसल, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद एआईसीसी सदस्य सिवनी के राजा बघेल को निष्कासित कर दिया था। यह बात अलग है कि एआईसीसी के सदस्य को निष्कासित करने का अधिकार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को नहीं है पर कमलनाथ का का कद कांग्रेस में इतना ऊंचा है कि पार्टी हाई कमान से लेकर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी तक बौने नजर आते हैं। सूत्रों का कहना है कि पार्टी हाई कमान से लेकर प्रदेश के मुख्य प्रभारी जितेंद्र सिंह तक ने प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को लिखित और मौखिक आदेश देने के बाद भी आज तक राजा बघेल की बहाली नहीं हो पाई है। हद तो तब हो गई, जब प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने कुछ पदाधिकारी की उपस्थिति में स्पीकर ओपन कर टेलीफोन पर संगठन प्रभारी राजीव सिंह को बहाली के निर्देश दिए। बघेल को बहाल करने के निर्देश देते समय पटवारी ने एआईसीसी पदाधिकारी और प्रभारी जितेंद्र सिंह के लिखित और मौखिक फरमानों का संदर्भ दिया। पटवारी को उनके निर्देश पर दो-टूक जवाब मिला कि कमलनाथ ने निष्कासित किया है, इसलिए बहाल का आदेश जारी नहीं करेंगे। यह जवाब सुनकर पटवारी के पास बैठे कतिपय सीनियर पदाधिकारी स्तब्ध रह गए। स्वाभाविक तौर पर उनके मन में एक यक्ष प्रश्न उठने लगा है कि क्या कमलनाथ के आगे प्रदेश अध्यक्ष की कोई भी साथ नहीं है? राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी यूं ही नहीं गूंज रहा है। दरअसल प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अभी तक अपनी कोई नई टीम नहीं बना पाए हैं। यहां तक कि पटवारी के सबसे नजदीकी पूर्व विधायक कुणाल चौधरी को ही कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दे पा रहे हैं। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष पटवारी को पूर्व प्रदेश अध्यक्षों कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और सुरेश पचौरी के समर्थक पदाधिकारियों के सहारे संगठन का संचालन करना पड़ रहा है। दिलचस्प पहलू यह है कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के मुख्य सिपहसालार रहे सज्जन वर्मा आज जीतू पटवारी के राइट हैंड माने जाते हैं। वैसे राजनीति में नेताओं की आस्था और निष्ठा बदलती रहती है।

आदिवासी,दलित एवं वंचित समाज के साथ न्याय करें प्रधानमंत्री : जीतू पटवारी

Prime Minister should do justice to tribal, Dalit and deprived society: Jitu Patwari कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पूछे प्रधानमंत्री से 5 प्रश्न भोपाल । मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का मध्य प्रदेश में स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से पांच प्रश्न किए हैं। पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश में 22% से अधिक आबादी वाला आदिवासी समुदाय डबल इंजन की सरकार से बहुत सारी उम्मीदें रखता है एवं यह अपेक्षा भी रखता है कि उसकी सुनवाई तत्काल हो परंतु प्रदेश सरकार एवं केंद्र सरकार उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही है।  पटवारी ने पहला प्रश्न करते हुए पूछा कि अब तक  वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्टे वितरित क्यों नहीं किए गए, जबकि राज्य में आदिवासी और अन्य परंपरागत वन निवासी, पीढ़ियों से वन भूमि पर खेती करते आ रहे हैं। कई साल पहले उन्हें इसका अधिकार देने वाला क़ानून – वन अधिकार अधिनियम – भी बन गया है। फिर भी ये लोग बीते कई सालों से अपने वन अधिकारों के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। ऐसा क्यों?  पटवारी ने दूसरे प्रश्न में पूछा कि  एससी/एसटी के रिक्त बैकलॉग पदों की संख्या बढ़कर 1 लाख 50 हजार के करीब हो चुकी है तथा अनुमान के मुताबिक करीब 40 हजार पद सिर्फ शिक्षक पात्रता परीक्षा के वर्ग-1, वर्ग -2 और वर्ग तीन में खाली हैं, इसके अलावा सामाजिक न्याय, महिला बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में हजारों की संख्या में पद रिक्त पड़े हैं इन पर भर्ती क्यों नहीं की जा रही? तीसरे प्रश्न में श्री पटवारी ने पूछा कि मध्य प्रदेश में पिछले आठ वर्ष से सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नतियां नहीं हुई हैं। वर्ष 2016 में हाई कोर्ट जबलपुर ने पदोन्नति नियम 2002 को निरस्त कर दिया था। तब से अब तक  कई बार भाजपा सरकार आ चुकी है, लेकिन अब तक सरकार पदोन्नति का रास्ता क्यों नहीं निकाल पाई हैं? चौथे प्रश्न में पटवारी ने पूछा कि यूपीए सरकार द्वारा शुरू की गई मनरेगा योजना ने आदिवासी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर पलायन को रोक दिया था परंतु आदिवासी मजदूरों को आजकल मनरेगा योजना के तहत भुगतान प्राप्त करना क्यों मुश्किल हो रहा है, 10 साल की आपकी सरकार और 20 साल की प्रदेश सरकार ने पलायन रोकने के लिए कोई निर्णायक प्रयास क्यों नहीं किए?  पटवारी ने प्रधानमंत्री से पांचवे प्रश्न में पूछा कि क्या यह सच नहीं है कि  देशभर में आदिवासियों पर सर्वाधिक अत्याचार मध्यप्रदेश में ही होते हैं? एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 में आदिवासियों के खिलाफ 2979 मामले सामने आए, जो कि पिछले साल के मुकाबले में 13% अधिक हैं! क्या आप प्रदेश के गृहमंत्री का पद संभालने वाले मुख्यमंत्री को आदिवासी अत्याचार रोकने को लेकर कोई प्रभावी निर्देश देकर जाएंगे?  पटवारी ने कहा कि उम्मीद है झाबुआ के जरिए प्रधानमंत्री जी भाजपा सरकारों के योगदान का आत्म विश्लेषण जरूर करेंगे और वंचित वर्ग के साथ न्याय करेंगे।

महिला अपराधों को लेकर विधानसभा में गरजें , जौरा पंकज उपाध्याय

Roar in the assembly regarding crimes against women, Jaura Pankaj Upadhyay भोपाल । प्रदेश में महिलाओं पर घटित अपराधों पर विधायक जौरा पंकज उपाध्याय ने विधानसभा में उठाया मुद्दा सरकार ने दिया आधी अधूरी जानकारी प्रदेष में तेज से बढ रहे है अपराध  श्री पंकज उपाध्यायः- धन्यवाद, माननीय अध्यक्ष जी पहली बार ही सदन में आया हूं और पहली बार ही बोलने का मौका मिला है. आप जब अध्यक्ष बने थे, जब भी मैंने सोचा था कि बोला जाये, परंतु पता नहीं था कि सदन में किस तरह से बोला जाता है. आप जब अध्यक्ष बने थे तो हमें बडी प्रसन्नता हुई थी कि आप हमारे क्षेत्र के हैं और बडा गौरव है कि आप इस स्थान पर विराजित         अशोधित ध् प्रकाशन के लिए नहीं हैं बडा गरिमामय सदन है और उच्चकोटि के ज्ञानी यहां पर बैठे हुए हैं. श्री प्रहलाद सिंह पटेल जी हैं, हमारे संसदीय कार्य मंत्री आदरणीय कैलाश जी यहां पर हैं, पहली बार सदन में आया हूं, समझता हूं कुछ सीखने के लिये मिलेगा, कुछ गलती करूं तो आप मुझे क्षमा करियेगा. मैंने प्रश्न उठाया था उसका कोई यथोचित उत्तर नहीं दिया गया है, मेरा प्रश्न था कि प्रत्येक थाने में क्षेत्र में कितनी आबादी होनी चाहिये ? जब थाना बनता है और कितनी आबादी पर कितना पुलिस बल होना चाहिये. इसको कोई उचित जानकारी नहीं दी गयी है. मैंने खण्ड (ग) में पूछा था कि एससीएसटी महिला अपराधों की संख्या कितनी हुई है और अपराधों में किन-किन लोगों को सजा दी गयी है. उसकी भी अधूरी जानकारी दी गयी है. मैं जानकारी चाहता हूं. श्री पंकज उपाध्याय  माननीय अध्यक्ष जी, मैंने जानकारी चाही थी कि 7 थानों में वर्ष 2015 से 2023 तक कितनी एससीएसटी महिलाओं के खिलाफ अपराध दर्ज हुए और कितने लोग बरी हुए, यह तो साधारण सी जानकारी है, जिसको आप दे सकते थे. दूसरा कि मेरे विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत 7 थाने हैं. एक थाना 90 किलोमीटर वर्ग क्षेत्र में आता है और दूसरा 900 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में आता है. बागचीनी में 2 एसआई, 4 थाना प्रभारी और 14 आरक्षक हैं. जबकि निरार थाने में जो 500 स्क्वेयर मीटर में मात्र 1 एसआई, 3 प्रधान आरक्षक और 11 आरक्षक हैं और कोई अपराधों की जानकारी भी नहीं दी गयी है. महिला स्टॉफ की भी जानकारी नहीं दी गयी है. सम्पूर्ण विधान सभा क्षेत्र में स्टॉफ की मात्रा बहुत कम है. जैसा कि इन्होंने जो जानकारी दी है, उसमें देवगड में 14 आरक्षक होना चाहिये, लेकिन 4 हैं. चिन्नौनी में 22 आरक्षण होना चाहिये, परंतु वहां 11 आरक्षण हैं. हमारे जौरा में 22 आरक्षक होना चाहिये, लेकिन 20 हैं. लगभग आधा स्टॉफ है हम अपेक्षा करते हैं कि आप सुशासन लेकर आयेंगे. तो इस आधे स्टॉफ से तो हम सुशासन नहीं ला सकते हैं. क्योंकि हमारा क्षेत्र बडा अपराधों का क्षेत्र है, वहां पर बडे अपराध होते हैं. ऐसी ही महिलाओं के प्रति अपराधों में लगातार वृद्धि हो रही है, बलात्कार हो रहे हैं, वर्ष 2021 में इसमें 400 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वर्ष 2023 में तो इन्होंने जानकारी देना भी उचित नहीं समझा तो जो लूट हो रही हैं. मैंने एक चीज और पूछी थी कि चेन श्रेचिंग की घटनाएं लगातार बढती जा रही हैं. हमारे विधान सभा क्षेत्र में पिछले 3 दिन में 2-3 घटनाएं हो गईं. एक एफआईआर हुई है. श्रीमती पुष्पा गोयल नाम की हमारी चाची लगती हैं, श्री केशव गोयल जी की पत्नी हैं, उनकी सरेआम दिन दहाडे चेन लूट ली गई, लेकिन उस पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई. ऐसी कई सारी घटनाएं हैं जो चर्चा में भी नहीं आ पाती हैं. एफआईआर भी थानों में लिखाने में लोग हिचकिचाते हैं. (’क्र. 750) श्री पंकज उपाध्याय क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मुरैना जिला में महिलाओं के विरूद्ध घटित अपराधों की शीर्षवार सूची वर्ष 2015 से दिसम्बर 2023 तक की वर्षवार, विधान सभावार देवें तथा बतायें कि 2019 की तुलना में 2023 में किस- किस शीर्ष में कितने प्रतिशत वृद्धि तथा कितने प्रतिशत कमी हुई? (ख) जौरा विधानसभा क्षेत्र में कितने थाने हैं? प्रत्येक थाने का क्षेत्र एरिया कितना है तथा कितनी आबादी शामिल है? उक्त थानों में स्वीकृत पद किस-किस प्रकार के कितने हैं तथा नियुक्ति कितनी है तथा खाली पद कितने हैं? दिसम्बर 2023 अनुसार बतावें। (ग) प्रश्नांश (ख) के थानों के अनुसार महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विरूद्ध घटित अपराधों की शीर्षवार वर्ष 2015 से 2023 तक की जानकारी देवें तथा बतावें कि वर्ष 2019 से 2023 तक प्रतिवर्ष किस-किस शीर्ष में कितने प्रतिशत वृद्धि तथा कमी हुई? (घ) जौरा विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2015 से 2023 तक में महिलाओं, अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के विरूद्ध घटित अपराधों में शीर्षवार, वर्षवार, थाने अनुसार बतायें कि सजायाबी की दर कितने प्रतिशत है? (ड.) जौरा विधानसभा क्षेत्र में 2018 से दिसम्बर 2023 तक नाबालिग बालक-बालिका तथा महिलाओं के गुम होने के कितने प्रकरण हुए तथा कितने नाबालिग बालक-बालिका तथा महिलाएं दस्तयाब की गईं?

मप्र से राज्यसभा को मिलेगी एक सीट, दावेदारों ने बढ़ाई कांग्रेस की मुसीबत

Rajya Sabha will get one seat from MP, claimants increase Congress’s troubles सोनिया गांधी से मिले कमलनाथ, राज्यसभा जाने जोर अजमाइश शुरू कमलनाथ ने 13 फरवरी को भोपाल में निवास पर विधायकों को डिनर पर बुलाया मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के आला नेता कमलनाथ ने सोनिया गांधी से मुुलाकात की। सूत्रों की माने तो मुलाकात के दौरान मप्र की राज्यसभा सीट को लेकर उनकी चर्चा हुई है। हालांकि अभी ऐसा कोई ऐलान नहीं हुआ है।  भोपाल। कांग्रेस के आला नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शुक्रवार को दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात की है। कमलनाथ ने सोनिया गांधी से खुद के लिए राज्यसभा टिकट की मांग की है। मध्य प्रदेश से कांग्रेस को एक राज्यसभा सीट मिलनी है। मध्यप्रदेश से स्थानीय उम्मीदवार देने की सूरत में आलाकमान ओबीसी उम्मीदवार पर दांव लगाने के मूड में है, जिसमें पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव और वर्तमान अध्यक्ष जीतू पटवारी के नाम की चर्चा है। इस बीच, 13 फरवरी को कमलनाथ ने कांग्रेस विधायकों को डिनर पर बुलाया है। ये डिनर पहले से प्रस्तावित है। बता दें कि अपने बेटे नकुलनाथ को छिंदवाड़ा से लड़ाने का ऐलान कर चुके कमलनाथ खुद के लिए राज्यसभा चाहते हैं। कमलनाथ के करीबी सूत्रों के मुताबिक, अगर पिछड़ों को आरक्षण का कार्ड खेल रहे राहुल गांधी के चलते आलाकमान ओबीसी या एससी एसटी को राज्यसभा देने पर अड़ता है तो कमलनाथ आखिरी मौके में अपने करीबी पूर्व सांसद सज्जन (एससी) पर दांव लगा सकते हैं, लेकिन फिलहाल तो वो खुद के लिए राज्यसभा की जुगत में हैं। ऐलान: नकुलनाथ फिर लड़ेंगे छिंदवाड़ा से चुनाव बता दें कि इसके पहले कमलनाथ ने कहा था कि उनके बेटे नकुल एआईसीसी द्वारा सीट के लिए नामांकित किए जाने के बाद आगामी चुनाव में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे। कमलनाथ का बयान नकुल के बयान के एक दिन बाद आया था, जो वर्तमान में छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन्होंने घोषणा की थी कि वह आगामी चुनावों में इस सीट से फिर से चुनाव लड़ेंगे। एआईसीसी द्वारा औपचारिक घोषणा से पहले कमलनाथ के बेटे द्वारा छिंदवाड़ा लोकसभा सीट के लिए अपनी उम्मीदवारी की घोषणा ने कांग्रेस सर्कल में कई लोगों की भौंहें चढ़ा दी थी, जिससे पूर्व मुख्यमंत्री को इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देने के लिए मजबूर होना पड़ा था। कमलनाथ की सफाई: एआईसीसी करेगी नामांकित, तो बेटा लड़ेगा पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा था, कांग्रेस ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए तैयारी शुरू कर दी है और नकुल नाथ एआईसीसी द्वारा नामांकित किए जाने के बाद छिंदवाड़ा से फिर से चुनाव लड़ेंगे। बेटे नकुलनाथ की घोषणा के बाद कमलनाथ की सोनिया गांधी से मुलाकात राजनीतिक रूप से काफी अहम मानी जा रही है। इस बीच, कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि वह आगामी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, क्योंकि राज्यसभा सदस्य के रूप में उनके पास अभी भी दो साल बाकी हैं।

विधानसभा: लाइसेंस पटाखे का, बन रहे थे बम: बरैया

Assembly: License of firecrackers, bombs were being made: Baraiya भोपाल। हरदा विस्फोट मामले को लेकर गुरूवार को कांग्रेस विधायकों ने सरकार को घेरते हुए जमकर हंगामा किया। कांग्रेस विधायक राम किशोर दोगने ने दोषियों को फांसी देने की बात कही, तो दूसरी ओर से विधायक फूल सिंह बरैया ने कहा कि लाइसेंस जरूर पटाखे का था, लेकिन वह इसमें बम बनाने लगे थे, क्योंकि पटाखों से इतना बड़ा विस्फोट नहीं हो सकता। बरैया ने कहा कि यदि सरकार से इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच करनी है तो कलेक्टर और एसपी पर एफआईआर करके जेल भेजा जाना चाहिए। क्योंकि यदि वह लोग समय-समय पर जांच करते रहते तो यह घटना नहीं होती। बरैया ने कहा कि मृतकों को एक-एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए। अधिकारियों की मिलीभगत से चल रही थी बम फैक्ट्री  कटारेकांग्रेस के विधायक और उपनेता हेमंत कटारे ने आरोप लगाया कि अधिकारियों की मिलीभगत से ही हरदा में वह फैक्ट्री संचालित हो रही थी, जो कई लोगों की मौत का कारण बनी। कटारे ने कहा कि कई लोग अपने परिचितों को तलाश रहे हैं। ट्रांसफर करना यह हटाना कोई कार्रवाई नहीं है। विधायक रामेश्वर ने किया पलटवारकांग्रेस विधायकों के आरोपों को लेकर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि बम, पटाखा, आतंकवाद इनकी जड़ कांग्रेस ही है। विपक्ष के विधायकों को चाहिए कि इस तरह का आचरण न करें और सदन की कार्यवाही में सहयोग करें।

भारत जोड़ों न्याय यात्रा, डोनेट फॉर न्याय अभियान के तहत कांग्रेसजनों ने किया डोनेशन

Congressmen made donations under Bharat Jodo Nyay Yatra, Donate for Nyay campaign भोपाल। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा निकाली जा रही है भारत जोड़ो ने यात्रा के लिए डोनेट फॉर न्याय अभियान के माध्यम से मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आज अभा कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष अजय माकन, महासचिव मप्र प्रभारी जितेन्द्र सिंह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और उपनेता हेमंत कटारे की उपस्थिति में एक कांग्रेस नेताओं को डोनेट फॉर न्याय योजना के अंतर्गन में डोनेशन देने के प्रमाण पत्र और भारत जोड़ो न्याय यात्रा की प्रिंटेड टी-शर्ट प्रदान की। पटवारी, सिंघार सहित वरिष्ठ नेताओं ने योजना के तहत 6700 रूपये तथा उससे अधिक की राशि जमा की। इस दौरान कुछ ही मिनिटों में सैकड़ों कांग्रेसजनों ने राशि जमा कर योजना में अपनी सहभागिता दर्ज करायी और वरिष्ठ नेताओं द्वारा सर्टिफिकेट और टी-शर्ट प्राप्त की।  पटवारी ने इस दौरान कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए डोनेट फॉर न्याय योजना कांग्रेस पार्टी चलायी गई है। हम सभी का दायित्व है कि वह इस अभियान में शामिल होकर देश और लोकतंत्र की रक्षा करने में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। अजय मकहा बहुत ही कम समय में इस अभियान से काफी लोग जुड़े है। मध्य प्रदेश में तीसरे नंबर पर है। उन्होंने कहा कि जानकर हैरानी होगी कि इस तरह की शुरुआत आजादी की लड़ाई के दौरान महात्मा गांधी ने 1920 में 25-25 पैसे पूरे देश की जनता से एकत्र कर शुरुआत की थी और क्राउड फंडिंग से राशि जमा हुई थीं महात्मा गांधी के नेतृत्व में उस समय कुछ ही समय में एक करोड़ रूपया एकत्रित हो गया था, जिसका उपयोग देश की आजादी के लिए किया गया।  उन्होंने कहा कि उस समय तो हमें ज्यादा फंडिंग की जरूरत नहीं पड़ती थी क्योंकि लेकिन पार्टी को चलाने के लिए अब हमें उनकी आवश्यकता होती है। हम धनाण्य पूंजीपतियों के सामने अपनी झोली नहीं फैला रहे हैं, बल्कि कांग्रेस के एक छोटे से सिपाही से देश और लोकतंत्र को बचाने के लिए यह अभियान चला रहे है। मौजूदा स्थिति में आज कांग्रेस के सामने दो विकल्प हैं, या तो हम पूंजीपतियों के सामने झोली लेकर खड़ें हों या देश की जनता और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से ही धनराशि प्राप्त करें, लिहाजा राहुल गांधी जी ने जनता और कार्यकर्ताओं के सामने झोली फैलाना उचित समझा। इस अभियान में जो 67 रूपये दे रहा है वह पूंजीपतियों से ज्यादा महत्व रखेगा। इस अभियान से हमारा उद्देश्य कार्यकर्ताओं को जोड़ना है। वहीं उन्होंने कहा कि जो संगठन जितनी राशि एकत्र करेगा उसकी आधी राशि उस संगठन को दी जायेगी।

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