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CM मोहन यादव आज ग्वालियर में, लाड़ली बहना योजना के तहत 1.25 करोड़ बहनों को 1836 करोड़ का लाभ

 ग्वालियर  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव शुक्रवार को ग्वालियर जिले के घाटीगांव के समीप स्थित शबरी माता मंदिर परिसर में आयोजित होने जा रहे सम्मेलन में “मुख्यमंत्री लाडली बहना” के तहत प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख से अधिक बहनों के बैंक खातों में 1836 करोड़ रुपये से अधिक राशि सिंगल क्लिक से अंतरित करेंगे। इसमें ग्वालियर जिले की 3 लाख 2 हजार 850 बहनों के खातों में पहुंचने वाली 44 करोड़ 83 लाख रुपये की राशि शामिल है। यह राशि योजना की 34वीं किश्त के रूप में बहनों को प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री इस अवसर पर ग्वालियर जिले के अंतर्गत लगभग 122 करोड़ रुपये लागत के 54 कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण भी करेंगे। सरकार की विभिन्न स्वरोजगार मूलक योजनाओं के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिये आर्थिक सहायता भी वितरित करेंगे। ग्वालियर जिले की 3 लाख 2 हजार 850 महिलाओं के खातों में 44 करोड़ 83 लाख रुपए की राशि अंतरित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस अवसर पर जिले में लगभग 122 करोड़ रुपए की लागत के 54 विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण भी करेंगे। साथ ही सरकार की विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आर्थिक सहायता भी वितरित की जाएगी। लाड़ली बहना सम्मेलन में केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, राज्य सरकार के मंत्री नारायण सिंह कुशवाह और प्रद्युम्न सिंह तोमर, सांसद भारत सिंह कुशवाह, विधायक मोहन सिंह राठौर तथा जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गेश कुंवर सिंह जाटव सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। मंदिर पहुंचकर करेंगे पूजा-अर्चना प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 13 मार्च को दोपहर वायुमार्ग से राजमाता विजयाराजे सिंधिया एयर टर्मिनल, महाराजपुरा पहुंचेंगे। वहां से वे हेलीकॉप्टर से घाटीगांव के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित देवनारायण मंदिर परिसर में बने हेलीपैड पर उतरेंगे। मुख्यमंत्री देवनारायण मंदिर और शबरी माता मंदिर में पूजा-अर्चना भी करेंगे। कार्यक्रम के बाद वे हेलीकॉप्टर से पुनः विमानतल पहुंचकर भोपाल के लिए प्रस्थान करेंगे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी क्रम में योजना के अंतर्गत नवंबर माह से मासिक सहायता में 250 रुपए की वृद्धि की गई है, जिससे अब पात्र हितग्राही महिलाओं को प्रतिमाह 1,500 रुपए की आर्थिक सहायता मिल रही है। प्रदेश में जून 2023 से प्रारंभ हुई यह योजना महिलाओं के आर्थिक आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान को मजबूत आधार दे रही है। जून 2023 से फरवरी 2026 तक योजना की 33 किस्तें जारी की जा चुकी हैं। इस अवधि में 54,140 करोड़ रुपए की राशि महिलाओं के खातों में सीधे अंतरित की गई है। प्रदेश सरकार अब योजना से जुड़ी महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें कौशल उन्नयन, रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से भी जोड़ेगी, जिससे वे आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। इन कार्यों का होगा भूमिपूजन और लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शबरी माता परिसर में आयोजित लाड़ली बहना सम्मेलन के दौरान ग्वालियर जिले में लगभग 122 करोड़ रुपए की लागत के 54 विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण करेंगे। इनमें लगभग 62 करोड़ रुपए के 19 कार्यों का लोकार्पण और लगभग 60 करोड़ रुपए के 35 कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। लोकार्पित होने वाले प्रमुख कार्यों में करीब 40 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित सांदीपनि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुलैथ का भवन और 9.11 करोड़ रुपए की लागत से डाडा खिरक–तिघरा मार्ग पर सांक नदी पर बना उच्च स्तरीय पुल शामिल हैं। इसके अलावा उप स्वास्थ्य केंद्र बन्हेरी तथा शहर और ग्रामीण क्षेत्र की नव-निर्मित सड़कों का लोकार्पण भी किया जाएगा। भूमिपूजन किए जाने वाले प्रमुख कार्यों में आईएसबीटी के समीप 6.17 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला 100 सीटर श्रमिक विश्रामगृह तथा 12.16 करोड़ रुपए की लागत से अंबेडकर धाम के द्वितीय चरण में बाबा साहब के जीवन पर आधारित संग्रहालय का निर्माण शामिल है। इसके अलावा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की विभिन्न सड़कों, आयुर्वेदिक महाविद्यालय में एनाटॉमी विभाग के लिए बनने वाले हॉल व छात्रावास तथा भितरवार में लगभग 4 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले नए शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण भी प्रस्तावित है।  

ईरान के सुप्रीम लीडर पर विवादित रिपोर्ट, कोमा और पैर कटने की खबरें वायरल

तेहरान ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. सबसे हैरान करने वाला दावा है कि मोजतबा खामेनेई कोमा में हैं. उनका एक पैर भी काट दिया गया है और उनकी हालत बेहद संजीदा है. ये दावा ब्रिटिश अखबार ‘द सन’ ने अपनी रिपोर्ट में किया है।  ‘द सन’ की ये रिपोर्ट उस समय सामने आई, जब कुछ घंटों पहले ही मोजतबा खामेनेई का पहला संदेश सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में हमले जारी रखे जाएंगे और होर्मुज स्ट्रेट की भी नाकेबंदी रहेगी।   ‘द सन’ ने ये रिपोर्ट अपने सूत्र के हवाले से चलाई है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मोजतबा खामेनेई की हालत बहुत खराब है और वह कोमा में है. वह अस्पताल में ईरान के स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री मोहम्मद रजा जफरगंदी की निगरानी में हैं. जफरगंदी ईरान के टॉप सर्जन्स में से एक हैं।  रिपोर्ट में क्या दावा किया गया? ‘द सन’ ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि मोजतबा खामेनेई तेहरान की सिना यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में इंटेसिव केयर में है. इस बिल्डिंग के एक हिस्से को भारी सिक्योरिटी के बीच सील कर दिया गया है।  रिपोर्ट में बताया गया कि मोजतबा का एक पैर कट गया है और उनके पेट और लिवर को भी गंभीर चोटें आई हैं. हालांकि, यह साफ नहीं है कि मोजतबा खामेनेई 28 फरवरी को उसी हमले में घायल हुए थे, जिसमें आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. हालांकि, ईरान के सरकारी टीवी के एंकर मोजतबा खामेनेई को ‘रमजान का जांबाज’ यानी ‘घायल योद्धा’ बताते हैं।  ‘द सन’ को सूत्र ने बताया, ‘उनका एक या दोनों पैर काट दिए गए हैं. उनका लिवर या पेट भी फट गया है. वह शायद कोमा में भी हैं.’ रिपोर्ट में कहा गया है कि दो दिन पहले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान चुपके से मोजतबा खामेनेई से मिलने गए थे. सिना हॉस्पिटल की इंटेंसिव केयर यूनिट में सिर्फ कुछ ही ऑथराइज्ड लोगों को ही जाने की इजाजत है.  कितना मजबूत है ये दावा? 28 फरवरी से जब से अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग शुरू हुई है, तब से मोजतबा खामेनेई एक बार भी सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं।  मोजतबा खामेनेई को 8 मार्च को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया था. खामेनेई की मौत के लगभग एक हफ्ते बाद. उसी दिन ईरानी मीडिया ने खबरें दी थीं कि मोजतबा खामेनेई देश को संबोधित करेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ।  सुप्रीम लीडर चुने जाने के पांच दिन के बाद मोजतबा खामेनेई का पहला संदेश दुनिया के सामने आया. लेकिन उनके संदेश को टीवी पर एक एंकर ने पढ़ा. वह कैमरे पर भी दिखाई नहीं दिए।  ईरान के सरकारी टीवी रिपोर्ट्स के एंकर्स ने मोजतबा खामेनेई को ‘रमजान युद्ध का जांबाज’ यानी ‘घायल योद्धा’ बताया. हालांकि, इस बात की पुष्टि नहीं की कि मोजतबा 28 फरवरी को घायल हुए थे या नहीं।  इन्हीं सब बातों के कारण उनकी हेल्थ को लेकर अटकलें, अफवाहें और दावे और भी बढ़ गए हैं. हालांकि, अब तक मोजतबा खामेनेई को सिर्फ दावे ही किए जा रहे हैं, कुछ पुष्टि नहीं हुई है।   

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आश्वासन—प्रदेश में घरेलू गैस की निर्बाध आपूर्ति बनी रहेगी

प्रदेश में घरेलू गैस की कोई कमी नहीं-निर्बाध आपूर्ति रहेगी जारी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव एलपीजी सहित अन्य ईंधन के परिवहन, भंडारण और वितरण पर फोकस मुख्य सचिव  जैन ने कलेक्टर्स के साथ की वी.सी. भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्तमान में मिडिल ईस्ट-एशिया में युद्ध की स्थितियों के संदर्भ में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मंत्रीगण सजग हैं। नागरिकों को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है, केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर कालाबाजारी रोकने के लिए पूरे प्रबंधन किए गए हैं। नागरिकों को रसोई गैस संबंधी परेशानी नहीं होगी। प्रदेश में घरेलू रसोई गैस सहित पीएनजी और सीएनजी की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक गतिविधियों के कारण से पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस के संबंध में वर्तमान स्थितियों में अभी तक अधिकांश कच्चे तेल की आपूर्ति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होती थी, जिसे परिवर्तित कर अन्य स्थानों से भी कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। साथ ही देश की रिफाइनरी उच्च क्षमता पर कार्य कर रही है। प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिये वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता के माध्यम से खरीदी प्रक्रिया जारी है। घरेलू पीएनजी और सीएनजी की आपूर्ति बिना कटौती के हो रही है। रिफाइनरी को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे वर्तमान में एलपीजी उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि भी हुई है। इसके अलावा एक विशेष उपलब्धि प्राप्त हुई है कि जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले ऐसे जहाज एवं टेंकर जिनमें भारतीय फ्लेग लगे हैं उनको नहीं रोका जाएगा, यह एक राजनयिक विजय है, जिससे पेट्रोलियम सप्लाई में बाधा समाप्त होगी। गैस आपूर्ति प्रबंधन के लिये प्राकृतिक गैस नियंत्रण आदेश जारी किया गया है, जिससे देश में किसी भी प्रकार की घरेलू गैस की आपूर्ति में कमी न हो। उपरोक्त के अनुक्रम में प्रदेश में पेट्रोल, डीजल, एटीएस, क्रूड ऑयल और घरेलू गैस की किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है तथा निरंतर आपूर्ति जारी है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं हुई है। इसी के दृष्टिगत मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार वरिष्ठ मंत्रियों की समिति का गठन भी किया गया है। मुख्य सचिव  जैन ने जिला कलेक्टर्स को दिये निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर मुख्य सचिव  अनुराग जैन ने गुरूवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कमिश्नर-कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के साथ पश्चिम-मध्य एशिया में युद्ध के कारण उत्पन्न हुई स्थिति के दृष्टिगत एलपीजी सहित अन्य ईंधन की उपलब्धता की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में डीजीपी  कैलाश मकवाना और एसीएस  शिवशेखर शुक्ला एवं मती रश्मि अरूण शमी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्य सचिव  जैन ने कलेक्टर्स से कहा कि घरेलू गैस वितरण की ऑनलाइन व्यवस्था को और मजबूत करें तथा इससे जुड़ी कंपनियां भी सर्वर आदि की क्षमता बढाएं जिससे रिफिल बुकिंग ओटीपी जनरेशन और वितरण बिना असुविधा के सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि सुनिश्चत करें कि गलत सूचनाओं का प्रसार और अफवाहों को सख्ती से रोंके और उपभोक्ताओं तक मीडिया आदि का उपयोग कर सही सूचना पहुचाएं। उन्होंने कहा कि नागरिकों के बीच सकारात्मक माहौल बनाए और सूचना तंत्र मजबूत कर अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी की कोई भी घटना नही हो, यह सुनिश्चत करें। मुख्य सचिव  जैन ने कई कलेक्टर्स द्वारा होटल्स, रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन आदि के संचालकों से बात कर रसोई गैस की जगह इलेक्ट्रिक भट्टी और इंडेक्शन आदि का उपयोग बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सभी कलेक्टर्स से कहा कि वे भी वैकल्पिक और सुरक्षित ईंधन के उपयोग के प्रति नागरिकों और खानपान व्यवसाय में लगे लोगों बीच वैकल्पिक ईंधन के उपयोग के प्रति जागरूकता बढाएं। मुख्य सचिव  जैन ने विभिन्न शहरों में पीएनजी के कनेक्शन की जानकारी ली और कलेक्टर्स से कहा कि वे अधिकाधिक उपभोक्ताओं को पाइप लाइन गैस प्रणाली से जोड़ें। उन्होंने कलेक्टर्स से कहा कि सी एम हेल्पलाइन की शिकायतों का उसी दिन संतुष्टि पूर्वक समाधान सुनिश्चित किया जाए। डी.जी.पी.  मकवाना ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे सोशल मीडिया सहित विभिन्न प्लेट फार्म पर गलत सूचनाओं और अफवाह फैलाने वालों पर कार्यवाही करें और संपूर्ण व्यवस्था में सुरक्षात्मक इंतजाम सुनिश्चित करें। अपर मुख्य सचिव खाद्य नागरिक आपूर्ति मती रश्मि अरूण शमी ने बताया कि प्रदेश में एलपीजी सहित पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है। प्रदेश के सीएनजी स्टेशन एवं पीएनजी उपभोक्ताओं के उपयोग के लिए एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है। प्रदेश मे पेट्रोलियम/ सीएनजी/पीएनजी गैस की आपूर्ति लगातार जारी है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त मात्रा में एलपीजी की लगातार उपलब्धता है। शैक्षणिक एवं चिकित्सा संस्थानों को वाणिज्यिक सिलेंडर के उपयोग की छूट प्रदान की गई है। उन्होंने कलेक्टर्स से मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने के लिए भी कहा है। कांफ्रेंस में इंदौर, भोपाल, उज्जैन, जबलपुर, सागर, धार के कलेक्टर्स सहित ग्वालियर एवं रीवा के कमिश्नर ने किए जा रहे उपायों की जानकारी दी। एसीएस मती शमी ने अधिकारियों से कहा कि वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध स्टॉक का विवेकपूर्ण उपयोग करने एवं वैकल्पिक ईंधन स्रोतों को अपनाने की सलाह दें। जहां पीएनजी लाइन उपलब्ध है वहां पीएनजी के कनेक्शन लेने के लिए प्रेरित किया जाए। जिन कामो में गैस ज्यादा खर्च होती है उनको नियंत्रित करने एवं विकल्प तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाए। जिला कलेक्टर, जिले के खाद्य नियंत्रक/अधिकारी, ऑयल कंपनी के नोडल अधिकारी तथा एलपीजी वितरकों से समन्वय कर एलपीजी की आवश्यकता तथा उपलब्धता की प्रतिदिन समीक्षा भी करें। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा प्रदेश में घरेलू रसोई गैस की कोई कमीं नहीं है और उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। राज्य शासन एलपीजी सहित अन्य ईंधन के परिवहन, भंडारण और वितरण पर पूरी तरह से सतर्क है। खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव को समन्वय अधिकारी बनाया गया है, वे प्रतिदिन सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों से संवाद और समन्वय करेंगी। मुख्य सचिव  जैन ने कहा कि पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद गलत सूचनाओं के कारण घरेलू गैस की कमी की अफवाह फैलने से रोका जाए। उन्होंने कहा कि रसोई गैस सहित अन्य ईंधन का सुरक्षित परिवहन, भंडारण और वितरण सुनिश्चित किया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य स्तर के साथ ही … Read more

सिलेंडर सप्लाई को लेकर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दिए जरूरी निर्देश

भोपाल  युद्ध के बाद खाड़ी देशों में बिगड़े हालातों का असर अब अन्य देशों में भी दिखने को मिल रहा है. इस कारण भारत में भी एलपीजी गैस की सप्लाई बाधित (LPG Supply Shortage) हो रही है. इसको देखते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव ने गुरुवार को गैस सिलेंडर आपूर्ति को लेकर कलेक्टरों की महत्वपूर्ण बैठक ली. इसके बाद मुख्य सचिव ने भोपाल कलेक्टर के लिए आदेश जारी किया है. ईंधन के आयात में हुई रुकावट को देखते हुए पेट्रोलियम और गैस मंत्रालय के निर्देश पर मुख्य सचिव ने कलेक्टरों की बैठक ली।  फिलहाल एलपीजी की आपूर्ति केवल घरेलू उपभोक्ताओं को ही करने का निर्देश दिया है. उपभोक्ताओं के लिए गैस एजेंसियों ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं, जहां भारत गैस उपभोक्ताओं के लिए हेल्पलाइन नंबर-1800-22-4344, इंडेडेन ऑयल गैस- 1800-2333-555, एचपी गैस- 1800-2333-555 नंबर है. इसके साथ ही मुख्य सचिव ने गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी और अवैध गैस रिफलिंग की जांच करने का भी आदेश दिया है।  मुख्य सचिव ने गैस सिलेंडर आपूर्ति को लेकर कलेक्टरों की महत्वपूर्ण बैठक ली मुख्य सचिव की बैठक लेने के बाद भोपाल कलेक्टर ने आदेश जारी किया एलपीजी की आपूर्ति केवल घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को करने के संबंध में आदेश दिया आयात में हुई रूकावट को देखते हुये पेट्रोलियम और गैस मंत्रालय के निर्देश पर मुख्य सचिव ने कलेक्टरों की बैठक ली   भारत गैस हेल्पलाईन नंबर-1800-22-4344, इण्डेन ऑयल गैस हेल्पलाईन नंबर 1800-2333-555, एचपी गैस हेल्पलाईन नंबर 1800-2333-555 गैस सिलेण्डरों की कालाबाजारी एवं अवैध गैस रिफलिंग की सतत जांच करने मुख्य सचिव ने दिया आदेश होटल-रेस्तरां में नहीं होगी सप्लाई भोपाल कलेक्टर ने भी आदेश जारी करते हुए कहा कि कमर्शियल गैस सिलेंडरों की होटल, रेस्तरां और मॉल में सप्लाई नहीं होगी. इसके अलावा एलपीजी का उपयोग करने वाले औद्योगिक क्षेत्र और फैक्ट्री में भी गैस सिलेंडर की आपूर्ति नहीं की जाएगी. फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है. कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सिर्फ चिकित्सालय और शैक्षणिक संस्थाओं में की जाएगी। इसके साथ ही निर्देश दिए हैं कि सिलेंडर की जमाखोरी करने वालों पर जिला प्रशासन निगरानी रखेगा. अगर कोई ऐसा करता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी. SDM, ACP और आपूर्ति अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी गई है। 

देवांगन के विभागों के लिए 1823 करोड़ रुपये से ज्यादा की अनुदान मांगों को मिली मंजूरी

मंत्री  लखनलाल देवांगन के विभागों के लिए 01 हजार 823 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें पारित राज्य को अब तक 8 लाख करोड़ रूपए से अधिक निवेश प्रस्ताव भूमि का आबंटन अब ई-निविदा के माध्यम से किया-जिससे राजस्व 20 प्रतिशत बढ़ा*  श्रमिक आवास एवं ई-रिक्शा की राशि 01 लाख रूपए से बढ़ाकर  1.50 लाख रूपए कर दी गई अगले वर्ष से श्रमिकों के 200 बच्चों को उत्कृष्ट स्कूलों में दाखिला हेतु अभिनव पहल  रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज वाणिज्य एवं उद्योग विभाग तथा श्रम विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 01 हजार 823 करोड़ 87 लाख 69 हजार रूपए की अनुदान मांगे पारित की गईं। इसमें वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के लिए 01 हजार 567 करोड़ 86 लाख 79 हजार रूपए, श्रम विभाग के लिए 256 करोड़ 90 हजार रूपए शामिल हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश मंे नई औद्यागिक नीति लागू की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।  उद्योग विभाग उद्योेग मंत्री  देवांगन नेे कहा कि इस बजट में सरकार द्वारा राज्य के औद्योगिक विकास हेतु वाणिज्य एवं उद्योग विभाग को बजट में रुपए 1750 करोड़ आबंटित किया गया है। इसमें रूपए 652 करोड़ उद्योगों को अनुदान हेतु तथा औद्योगिक प्रयोजन हेतु भू-अर्जन, भूमि विकास तथा औद्योगिक अधोसंरचना विकास के लिए लगभग रूपए 700 करोड़ का प्रावधान किया गया है। उन्होंने सदन को जानकारी देते हुए कहा कि औद्योगिक भूमि आबंटन को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने हेतु औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि का आबंटन अब ई-निविदा के माध्यम से किया जा रहा है। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ी है बल्कि राजस्व में भी 20 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। इन सतत प्रयासों का ही परिणाम है कि राज्य द्वारा 140 से अधिक निवेशकों को इन्विटेशन टू इन्वेस्ट जारी किया गया है। राज्य को अब तक 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों में स्टील, पावर, सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल्स, आईटी, बीपीओ तथा क्लीन एनर्जी जैसे विविध और उभरते हुए क्षेत्रों के निवेश शामिल हैं, जो राज्य की औद्योगिक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मंत्री  देवांगन नेे कहा कि विगत एक वर्ष में 951 उद्योग स्थापित हुए हैं, जिनके द्वारा रु 8000 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया एवं हमारी सरकार आने के बाद लगभग 45000 से अधिक रोजगार उत्पन्न हुए। राज्य में बस्तर से सरगुजा तक 23 नवीन औद्योगिक क्षेत्रों एवं पार्कों का निर्माण किया जा रहा है जिनमें से 4 फ्लेटेड फैक्ट्री अधोसंरचना है। राज्य शासन सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास हेतु प्रतिबद्ध है एवं इस दिशा में तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उद्योगों में रोजगार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने एवं उनके जीवन को सरल करने की दृष्टि से बिलासपुर जिले में 2 कामकाजी महिला हॉस्टल निर्माणाधीन है, जिसके लिए बजट में रुपए 20 करोड़ का प्रावधान किया गया है। निजी भूमि पर औद्योगिक पार्क की स्थापना के लिए निवेशकों को आकर्षित करने की दृष्टि से अधोसंरचना लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान औद्योगिक विकास नीति में किया गया है। इससे राज्य केन औद्योगिक अधोसंरचना विकास को बल मिलेगा। मुख्यमंत्री के पहल पर स्टार्ट-अप मिशन के लिए रूपए 100 करोड़ का प्रावधान बजट के अंतर्गत किया है। श्रम विभाग  मंत्री  देवांगन सदन में कहा कि मुख्यमंत्री  साय के नेतृत्व में श्रम विभाग छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के अंतर्गत अधिसूचित 56 प्रवर्ग के असंगठित श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण के लिये वर्ष 2026-27 के बजट में कुल रुपये 128 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है, जो गत वर्ष से लगभग 3 करोड़ अधिक है। श्रमिक बच्चों को उत्कृष्ट स्कूल में शिक्षा की अभिनव पहल करते हुए प्रदेश में 96 श्रमिकों के बच्चों को 6वीं क्लास में डी.पी.एस. राजकुुमार कॉलेज, कांगेर वैली एकेडमी में निःशुल्क पढ़ाई कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अगले वर्ष अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत 200 बच्चों को प्रदेश के उत्कृष्ट स्कूलों में दाखिला देने की घोषणा की थी, इस पर अमल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मंडल द्वारा उपकर के माध्यम से संकलित राशि से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवार के लिये उपलब्ध निधि से 60 प्रवर्ग में पंजीकृत 32.58 लाख निर्माण श्रमिकों के लिए संचालित 31 योजनाओं के क्रियान्वयन में वर्ष 2025 में लगभग रूपये 387 करोड़ से अधिक राशि कल्याणकारी योजनाओं में व्यय किया गया है। वर्ष 2026-27 में पंजीकृत 02.01 लाख संगठित श्रमिकों के लिये 14 योजनाओं हेतु बजट में राज्य शासन के अनुदान हेतु रुपये 06 करोड़ प्रावधान किया गया है। श्रम मंत्री ने बताया कि श्रम विभाग के मुख्य दायित्व विभिन्न श्रम कानूनों के प्रावधानों के अंतर्गत श्रमिकों के हित संरक्षण किया जाना है, जिसके पालन हेतु श्रमायुक्त संगठन में रुपये 30 करोड़ 63 लाख का बजट प्रावधान किया गया है। श्रमिक आवास की राशि प्रति आवास 01 लाख रूपए से बढ़ाकर 1.50 लाख कर दी है। इसी तरह ई-रिक्शा की राशि भी एक लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रूपए की जाएगी।  औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा हेतु वर्ष 2026-27 में रुपये 10 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है। संचालनालय द्वारा कारखाना अधिनियम के अंतर्गत कारखानों का लायसेंस नवीनीकरण, आनसाइट आपात योजना एवं कारखाना भवनों के नक्शे आदि का निराकरण भी आनलाईन ही किया जा रहा है। इंडस्ट्रियल हाईजिन लैब हेतु वर्ष 2026-27 में रुपये 05 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है।  वर्ष 2026-27 हेतु कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं के लिए रुपये 76 करोड़ 38 लाख का प्रावधान किया गया है।  वाणिज्यक कर (आबकारी) विभाग मंत्री  देवांगन नेे कहा कि विभागीय दक्षता बढ़ाने हमने इस वित्तीय वर्ष में 10 जिला अधिकारी, 85 आबकारी उपनिरीक्षक की भर्ती की है तथा 200 आबकारी आरक्षक की भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण पर है। वर्ष 2024-25 हेतु निर्धारित किये गये 10500 करोड़ (दस हजार पांच सौ करोड़) आबकारी राजस्व लक्ष्य के विरूद्ध 10145 करोड़ (दस हजार एक सौ पैतालीस करोड़) का आबकारी राजस्व अर्जित किया गया जो कि इससे पूर्व के वित्तीय वर्ष 2023-24 में अर्जित आबकारी राजस्व 8430 करोड़ (आठ हजार चार सौ तीस करोड़) की तुलना में 20.35 प्रतिशत अधिक है तथा राज्य के कुल कर राजस्व प्राप्ति का लगभग 11 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि उपयुक्त नीति एवं विभागीय कार्ययोजना … Read more

ट्रैफिक से मुक्ति! Air Taxi का टेस्ट रन, मिनटों में पहुंचे ऑफिस और एयरपोर्ट

नई दिल्ली  आसमान में उड़ती टैक्सी. सुनने में अब भी थोड़ा साइंस-फिक्शन जैसा लगता है. लेकिन तकनीक की दुनिया इस सपने को धीरे-धीरे सच में बदल रही है. अमेरिकी कंपनी Joby Aviation ने अपनी पहली प्रोडक्शन इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी (Air Taxi) की उड़ान शुरू कर दी है. यानी एक ऐसी मशीन, जिसमें आने वाले समय में लोग बैठकर शहर के ऊपर से उड़ते हुए ऑफिस या एयरपोर्ट जा सकेंगे. कंपनी का दावा है कि अगर सब ठीक रहा तो जल्द ही यह एयर टैक्सी आम लोगों के लिए भी उपलब्ध हो सकेगी। जॉबी एविएशन ने घोषणा की है कि, कंपनी ने अपनी पहली प्रोडक्शन एयर टैक्सी की टेस्टिंग शुरू कर दी है. कंपनी का कहना है कि यह कदम पैसेंजर सर्विस शुरू करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो आने वाले समय में लोग शहरों के ऊपर से इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी में सफर करते नजर आ सकते हैं। कंपनी ने बताया कि शुरुआती उड़ानें उसके मरीना, कैलिफोर्निया स्थित प्लांट में की जा रही हैं. यहां कंपनी के पायलट एयरक्राफ्ट की टेस्टिंग कर रहे हैं. दरअसल, कंपनी ये टेस्टिंग इसलिए कर रही है ताकि एयरक्रॉफ्ट बिना किसी तकनीकी खामी के फेडरेशन के सामने पेश किया जा सके. अमेरिकी विमानन नियामक संस्था फेडरेशन एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) इसकी आधिकारिक जांच और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया शुरू करेगी. कंपनी को उम्मीद है कि इसी साल इसके लिए जरूरी टेस्ट पूरे कर लिए जाएंगे। कैसी है ये Air Taxi Joby Aviation कई साल से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है. कंपनी पहले ही नियामकों (रेगुलेटर्स) के साथ मिलकर एयरक्राफ्ट के डिजाइन, उसके पार्ट्स और प्रोडक्शन प्लान को मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया में काफी आगे बढ़ चुकी है. कंपनी के डेवलपमेंट मॉडल पहले की टेस्टिंग में 50,000 मील से ज्यादा उड़ान भी भर चुके हैं. यानी टेक्निकली अब तक इस फ्लाइंग प्रोसेस में कंपनी कोई ख़ास समस्या नहीं आई है। Joby की एयर टैक्सी का डिजाइन काफी खास है. यह हेलिकॉप्टर और हवाई जहाज दोनों का मिला-जुला रूप है. इसमें 6 रोटर लगे हैं जो इसे अपनी जगह से ही सीधा टेक-ऑफ और लैंडिंग करने में मदद करते हैं. इसके बाद यह सामान्य एयरक्रॉफ्ट की तरह आगे की ओर उड़ान भरती है. यह इलेक्ट्रिक एयरक्राफ्ट एक पायलट और 4 पैसेंजर को लेकर उड़ान भर सकता है. कंपनी का दावा है कि यह हेलिकॉप्टर की तुलना में ज्यादा साइलेंट है। ये एक इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) एयरक्राफ्ट जैसा होगा. इसकी अधिकतम रफ्तार करीब 200 मील प्रति घंटा (321 किमी/घंटा) होगी और एक बार चार्ज करने पर यह लगभग 100 मील (160 किमी) तक उड़ान भर सकेगी. शहर के भीतर यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए इसमें कई अलग-अलग लेवल की सेफ्टी सिस्टम भी लगाए गए हैं। जल्द शुरू होगी पैसेंजर सर्विस कंपनी की योजना इस साल के अंत तक Dubai में अपनी पहली पैसेंजर सर्विस शुरू करने की है. इसके लिए शहर में 4 लैंडिंग साइट बनाने की योजना है, जिनमें से दो पर काम शुरू हो चुका है. इसके अलावा कंपनी अमेरिका में भी लिमिटेड लेवल पर ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी कर रही है. यह एक फेडरल प्रोग्राम का हिस्सा होगा, जिसका मकसद इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी को नेशनल एयरस्पेस में शामिल करना है। UBER का ऐलान हाल ही में मशहूर राइड-हेलिंग ऐप Uber ने ऐलान किया था कि, कंपनी जॉबी एविएशन के साथ मिलकर एयर टैक्सी सर्विस शुरू करने जा रही है. एयर टैक्सी की बुकिंग प्रक्रिया बिल्कुल सामान्य राइड की तरह होगी. आप ऐप खोलेंगे, अपना डेस्टिनेशन डालेंगे और अगर उस रास्ते पर हवाई सफर संभव होगा तो एयर टैक्सी का विकल्प अपने आप दिख जाएगा. इस एक ही बुकिंग में आपको पहले टेक-ऑफ प्वाइंट तक वाया रोड ले जाया जाएगा, फिर हवा में उड़ान होगी और उतरने के बाद आखिरी मंजिल तक फिर सड़क मार्ग से ही सफर कराया जाएगा. यानी पूरा सफर एक ही टिकट और एक ही ऐप में। आने वाले वर्षों में कंपनी अपने प्रोडक्शन को भी तेजी से बढ़ाने की योजना बना रही है. इसके लिए कैलिफोर्निया के प्लांट के साथ-साथ डेटन, ओहियो स्थित फैक्ट्री में भी प्रोडक्शन बढ़ाया जाएगा. कंपनी का टार्गेट है कि साल 2027 तक हर महीने करीब 4 एयरक्राफ्ट का निर्माण किया जाए. इससे भविष्य में बड़े पैमाने पर एयर टैक्सी सेवा शुरू करने का रास्ता साफ हो सकता है।

सेमीकंडक्टर मिशन को नई दिशा देगी आइसर की स्वदेशी तकनीक, फोटोमास्क और हार्ड मास्क का निर्माण होगा आसान

भोपाल भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आइसर) भोपाल के वैज्ञानिकों ने कम लागत और कम कार्बन उत्सर्जन वाली स्वदेशी माइक्रोफैब्रिकेशन तकनीक विकसित की है। यह तकनीक सेमीकंडक्टर चिप निर्माण की जटिल और महंगी प्रक्रिया को सरल और किफायती बनाने की क्षमता रखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नवाचार से भारत में सेमीकंडक्टर अनुसंधान और उत्पादन को नई गति मिल सकती है। साथ ही यह तकनीक बड़े उद्योगों के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स के लिए भी चिप निर्माण अनुसंधान को सुलभ बनाएगी। आइसर भोपाल के वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि     आइसर भोपाल के विद्युत अभियांत्रिकी और कंप्यूटर विज्ञान विभाग के डॉ. शांतनु तालुकदार और उनकी टीम ने कई वर्षों के शोध के बाद यह स्वदेशी तकनीक विकसित की है। उनकी टीम में डॉ. स्वप्नेंदु घोष और देबजीत डे सरकार भी शामिल रहे।     वैज्ञानिकों ने माइक्रोफैब्रिकेशन प्रक्रिया में उपयोग होने वाले फोटोमास्क और हार्ड मास्क के निर्माण के लिए नई विधि विकसित की है। इस शोध का प्रकाशन अंतरराष्ट्रीय जर्नल “माइक्रो एंड नैनो इंजीनियरिंग” में भी किया गया है, जिससे इसकी वैश्विक स्तर पर भी सराहना हो रही है। माइक्रोफैब्रिकेशन प्रक्रिया होगी आसान     आधुनिक सेमीकंडक्टर चिप निर्माण में फोटोमास्क और हार्ड मास्क की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनकी सहायता से नैनोमीटर से लेकर माइक्रोन स्तर तक के सूक्ष्म पैटर्न चिप के सब्सट्रेट पर स्थानांतरित किए जाते हैं।     पारंपरिक तकनीक में इन मास्क को तैयार करने के लिए अत्यंत महंगे उपकरण, अत्याधुनिक लिथोग्राफी मशीनें, विशेष क्लीनरूम और कई प्रकार के खतरनाक रसायनों की आवश्यकता होती है।     यही कारण है कि भारत के कई शैक्षणिक और शोध संस्थानों के लिए इस क्षेत्र में कार्य करना चुनौतीपूर्ण रहा है। नई स्वदेशी तकनीक इन जटिलताओं को कम करते हुए कम संसाधनों में माइक्रोफैब्रिकेशन को संभव बना सकती है। क्रोमियम परत से बनाए जाते हैं सूक्ष्म पैटर्न     नई तकनीक में नैनोमीटर मोटाई की क्रोमियम धातु की परत का उपयोग किया जाता है। वैज्ञानिकों ने एक अत्यंत नुकीले धातु प्रोब की सहायता से इलेक्ट्रोकेमिकल ऑक्सीकरण अभिक्रिया को बेहद सीमित क्षेत्र में नियंत्रित करने की विधि विकसित की है। इस प्रक्रिया में क्रोमियम की सतह पर सीधे पैटर्न बनाए जाते हैं।     वैज्ञानिक इसे इस तरह समझाते हैं जैसे कागज पर पेन से लिखकर आकृति बनाई जाती है। इसी सिद्धांत पर अत्यंत सूक्ष्म स्तर पर चिप के लिए जरूरी डिजाइन तैयार किए जा सकते हैं। इस नवाचार से फोटोमास्क और हार्ड मास्क का निर्माण अपेक्षाकृत सरल और सस्ता हो जाता है। पर्यावरण के लिए भी लाभकारी तकनीक     इस नई विधि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें अतिरिक्त रेजिस्ट परत, महंगे लिथोग्राफी उपकरण या खतरनाक रसायनों की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे उत्पादन लागत में कमी आने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरणीय जोखिम भी कम हो जाते हैं।     इसके अलावा यह तकनीक माइक्रोफैब्रिकेशन की दो प्रमुख प्रक्रियाओं—लिथोग्राफी और एचिंग—का एक साथ समाधान प्रस्तुत करती है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह मौजूदा सेमीकंडक्टर निर्माण प्रणालियों के साथ भी आसानी से एकीकृत की जा सकती है। स्टार्टअप और संस्थानों के लिए नए अवसर     विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक माइक्रोफैब्रिकेशन अनुसंधान को बड़े उद्योगों और सीमित प्रयोगशालाओं से बाहर निकालकर शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स तक पहुंचाने में सहायक होगी। इससे नवाचार की गति तेज होगी और भारत में सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत आधार मिलेगा। आइसर भोपाल के निदेशक प्रो. गोवर्धन दास के अनुसार यह तकनीक उद्योगों के साथ साझा की जाएगी, ताकि बड़े पैमाने पर कम लागत में सेमीकंडक्टर चिप निर्माण को बढ़ावा दिया जा सके। क्या होते हैं फोटोमास्क और हार्ड मास्क     फोटोमास्क एक पारदर्शी प्लेट होती है, जो आमतौर पर कांच या क्वार्ट्ज से बनाई जाती है। इसमें बहुत छोटे-छोटे पैटर्न बनाए जाते हैं, जिनकी मदद से फोटोलिथोग्राफी प्रक्रिया के दौरान चिप पर डिजाइन तैयार किया जाता है।     वहीं हार्ड मास्क एक मजबूत परत होती है, जो सिलिकॉन, ऑक्साइड या नाइट्राइड जैसे पदार्थों से बनाई जाती है। इसका उपयोग माइक्रोफैब्रिकेशन में संरचना को सुरक्षित रखते हुए पैटर्न ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। दोनों तकनीकों का उपयोग सेमीकंडक्टर चिप निर्माण में व्यापक रूप से किया जाता है। सेमीकंडक्टर का बढ़ता महत्व     सेमीकंडक्टर ऐसी सामग्री होती है जिसकी विद्युत चालकता धातुओं और इंसुलेटर के बीच होती है। यही विशेषता इसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए अत्यंत उपयोगी बनाती है। मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर प्रोसेसर, मेमोरी चिप, ट्रांजिस्टर, डायोड, एलईडी और सोलर सेल जैसे उपकरणों में इसका व्यापक उपयोग होता है।     इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों, सेंसर, एयरबैग सिस्टम, रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक में भी सेमीकंडक्टर का महत्वपूर्ण योगदान है। 5जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसे आधुनिक प्रौद्योगिकी प्रकल्प भी इसी पर निर्भर हैं। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम     विशेषज्ञों के अनुसार आइसर भोपाल के वैज्ञानिकों की यह उपलब्धि भारत के लिए सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि इस तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग शुरू होता है तो देश में चिप निर्माण की लागत कम हो सकती है और अनुसंधान संस्थानों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं। इससे न केवल तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा बल्कि भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में अपनी मजबूत उपस्थिति भी दर्ज करा सकेगा।  

मध्य प्रदेश में लौह अयस्क का बड़ा भंडार मिला, नीलामी शुरू, सरकार का खजाना होगा भरपूर

जबलपुर   मध्य प्रदेश के करीब 15 जिलों में छोटे-बड़े स्तर पर आरयन ओर (लौह अयस्क) के ब्लॉक के बीच जबलपुर से अच्छी खबर है। यहां तीन तहसील मझौली, सिहोरा और पनागर में चार जगह आयरन ओर का बड़ा ब्लॉक मिला है। इसका रकबा 1081 हेक्टेयर है। सबसे बड़ा 936 हेक्टेयर का ब्लॉक मझौली के दर्शनी में मिला है। यह पहला मौका है, जब इतने बड़े क्षेत्र में लौह अयस्क मिला है। जबलपुर व कटनी की वर्तमान खदानें 20 से 35 हेक्टेयर की हैं। यहां से चीन तक लौह अयस्क भेजा जा चुका है। अब नए ब्लॉक मिलने के बाद प्रदेश का राजकोष और मजबूत होगा। संचालक को भेजी गई रिपोर्ट आयरन ओर व मैग्नीज का रकबा मझौली, सिहोरा, पनागर तहसील के 14 गांवों में है। सिहोरा के झीटी और कोड़ामुकुर में 86 हेक्टेयर का ब्लॉक है। मझौली के खुड़ावल में आयरन ओर, लैटराइट व मैग्नीज का रकबा 11, पनागर के कटैया में दोनों खनिज 49 हेक्टेयर में फैले हैं। तीनों का रकबा 1000 हेक्टेयर है। नीलामी प्रक्रिया प्रशासन ने शुरू की है। फैक्ट फाइल – प्रदेश में जबलपुर आयरन ओर का सबसे बड़ा उत्पादक। – 03 साल पहले भी सिहोरा और पनागर में कुछ ब्लॉक मिले थे।  – इनमें 10 लाख टन से अधिक आयरन ओर होने का अनुमान। – अभी 42 छोटी-बड़ी खदानें, इनमें 35 आयरन ओर की हैं। मुख्यालय भेजी है रिपोर्ट जिले में 4 जगह आयरन ओर, मैग्नीज, लैटराइट का ब्लॉक मिला है। रकबा 1081 हेक्टेयर है। ब्लॉक क्षेत्र की भूमि सीमांकन किया जा रहा है। रिपोर्ट मुख्यालय भेजी है। -एके राय, खनिज अधिकारी जबलपुर

80 किमी लंबी हाईस्पीड सड़क से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा MP का शहर, योजना को मिली मंजूरी

उज्जैन मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन को जल्द ही देश के सबसे बड़े हाईस्पीड रोड नेटवर्क से सीधा कनेक्शन मिलने वाला है। केंद्र सरकार ने उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे जोड़ने के लिए नई सड़क परियोजना को मंजूरी दे दी है। करीब 80.45 किमी लंबी सड़क बनने से महाकाल की नगरी तक पहुंचना आसान हो जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 3839 करोड़ रुपए बताई जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि सिंहस्थ मेले से पहले इस कनेक्टिविटी को तैयार कर लिया जाए, ताकि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिल सके। 2025 में बना नेशनल हाईवे, अब तेजी से आगे बढ़ेगा काम इस मार्ग को मई 2025 में राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया गया था। इसके बाद 6 महीने में ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली गई है। अब भूमि अधिग्रहण और अन्य प्रक्रियाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक 17 मार्च तक टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। जबकि अप्रैल 2026 से निर्माण कार्य शुरू करने की योजना है। परियोजना को 2028 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अभी संकरी सड़क, एक्सप्रेस वे बनने पर होगी तेज रफ्तार फिलहाल जिस मार्ग से यह कनेक्टिविटी बनेगी, वहां कई हिस्सों में मार्ग की चौड़ाई करीब 5.5 मीटर है। यहां वाहन की रफ्तार 20-25 किमी प्रतिघंटा ही है। लेकिन नई सड़क 4 लेन होगी, इसके बनने के बाद वाहनों की रफ्तार 80-100 किमी प्रतिघंटा होगी। गुजरात, महाराष्ट्र से उज्जैन का सफर होगा आसान दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे से जुड़ने के बाद गुजरात और महाराष्ट्र से उज्जैन आने का रास्ता काफी छोटा हो जाएगा। वर्तमान में यहां के यात्रियों को उज्जैन आने के लिए एक लंबा सफर तय करना पड़ता है। नई सड़क बनने के बाद श्रद्धालुओं, पर्यटकों और व्यापारिक गतिविधियों को भी बड़ा फायदा होगा। उद्योगों को भी मिलेगा लाभ इस परियोजना से इंदौर, देवास, उज्जैन के साथ ही पीथमपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को भी फायदा होगा। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से माल परिवहन तेज होगा और लॉजिस्टिक लागत कम होने की उम्मीद भी नजर आ रही है।

13 मार्च को किसानों को मिलेगा 22वीं किस्त का भुगतान, यह किसान नहीं होंगे पात्र, जानें लेटेस्ट अपडेट

नई दिल्ली  देशभर के करोड़ों किसान जिस किस्त का इंतजार कर रहे थे, उसका समय अब करीब आ गया है. सरकार ने साफ कर दिया है कि किसानों को मिलने वाली अगली राशि जल्द उनके खातों में पहुंचने वाली है. दरअसल पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को हर साल आर्थिक मदद दी जाती है। जिससे खेती से जुड़े छोटे खर्चों में राहत मिल सके. कई दिनों से यह चर्चा चल रही थी कि अगली किस्त कब जारी होगी. अब इस पर तस्वीर साफ हो गई है. सरकार के मुताबिक पात्र किसानों के बैंक खातों में 13 मार्च को 22वीं किस्त भेजी जाएगी. हालांकि हर बार की तरह इस बार भी कुछ किसान ऐसे होंगे जिनके खाते में पैसे नहीं पहुंचेंगे। कब खाते में आएंगे 2 हजार रुपये? काफी समय से किसानों के बीच यह सवाल चल रहा था कि अगली किस्त कब जारी होगी. पहले माना जा रहा था कि फरवरी के आखिर तक पैसे आ सकते हैं. फिर यह चर्चा भी हुई कि होली से पहले किस्त जारी हो सकती है. अब सरकार की तरफ से यह साफ कर दिया गया है कि 13 मार्च को किसानों के खातों में 2000 रुपये भेजे जाएंगे. यह पैसा सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाता है, इसलिए किसानों को कहीं जाने की जरूरत नहीं होती। किसान योजना में ऐसे मिलता है फायदा     हर साल किसानों को कुल 6000 रुपये की मदद मिलती है.     यह रकम तीन किस्तों में दी जाती है.     हर चार महीने में 2,000 रुपये खाते में भेजे जाते हैं.     अब तक किसानों को 21 किस्तें मिल चुकी हैं.     अब 22वीं किस्त जारी होने के बाद लाखों किसानों को एक बार फिर सीधी आर्थिक मदद मिलने वाली है. इन किसानों को नहीं मिलेंगे पैसे हालांकि सभी किसानों को इस बार किस्त का फायदा नहीं मिलेगा. कुछ जरूरी नियम पूरे न होने पर किस्त अटक सकती है. सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है कि योजना का लाभ लेने के लिए कुछ प्रक्रियाएं पूरी करना जरूरी है। अगर ये काम पूरे नहीं हैं तो पैसे रुक सकते हैं:     ई-केवाईसी पूरा नहीं किया है.     फार्मर आईडी नहीं बनवाई है.     बैंक खाते की जानकारी गलत है.     आधार और बैंक अकाउंट लिंक नहीं है. इन कारणों से कई किसानों की किस्त रुक जाती है. इसलिए जिन किसानों ने अभी तक ये काम पूरे नहीं किए हैं. उन्हें जल्द से जल्द अपडेट कर लेना चाहिए। आपके खाते में पैसे आएंगे या नहीं किसानों के लिए यह जानना भी आसान है कि उनके खाते में किस्त आएगी या नहीं. इसके लिए ऑनलाइन स्टेटस चेक किया जा सकता है.स्टेटस चेक करने के लिए ये आसान तरीका अपनाएं। ऐसे चेक करें स्टेटस     पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं.     Farmers Corner में Know Your Status ऑप्शन पर क्लिक करें.     अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और कैप्चा भरें.     इसके बाद स्क्रीन पर पूरी जानकारी दिखाई दे जाएगी. यहां से किसान यह भी देख सकते हैं कि उनका ई-केवाईसी, लैंड सीडिंग और आधार बैंक सीडिंग पूरा है या नहीं. अगर पहले किसी वजह से किस्त रुक गई थी और अब सभी जरूरी काम पूरे कर दिए गए हैं. तो आगे आने वाली किस्त फिर से मिल सकती है।

एलपीजी सप्लाई में सुधार, उत्पादन 28% बढ़ा; 2.5 दिन में घर पहुंचेगा सिलेंडर: पुरी

नई दिल्ली पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को संसद में कहा कि पिछले पांच दिनों में रिफाइनरियों को दिए गए निर्देशों के बाद एलपीजी उत्पादन में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। साथ ही अतिरिक्त एलपीजी की खरीद भी सक्रिय रूप से की जा रही है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि देश के 33 करोड़ से अधिक परिवारों, खासकर गरीब और वंचित वर्ग की रसोई में गैस की कमी न हो। उन्होंने बताया कि घरेलू गैस की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है और सिलेंडर की डिलीवरी का समय पहले की तरह ही बना हुआ है। पुरी ने संसद को बताया कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक का औसत समय अभी भी 2.5 दिन है, जो संकट से पहले भी इतना ही था। इसके अलावा, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर बिना रुकावट गैस सप्लाई दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों से ऐसी जानकारी मिली है कि डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेल स्तर पर गैस सिलेंडर जमा करने और घबराहट में ज्यादा बुकिंग करने की प्रवृत्ति देखी जा रही है। हालांकि यह स्थिति किसी वास्तविक सप्लाई की कमी के कारण नहीं, बल्कि लोगों की चिंता के कारण पैदा हुई है। पुरी ने आगे कहा कि सरकार डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) प्रणाली का विस्तार कर रही है। अभी यह करीब 50 प्रतिशत उपभोक्ताओं के लिए लागू है, जिसे बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक किया जा रहा है। इस व्यवस्था में सिलेंडर की डिलीवरी तभी दर्ज होगी, जब उपभोक्ता अपने मोबाइल पर आए वन-टाइम कोड से इसकी पुष्टि करेगा, जिससे गैस की गलत तरीके से सप्लाई या हेरफेर को रोकना आसान होगा। मांग को संतुलित रखने के लिए शहरी क्षेत्रों में गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अंतर और ग्रामीण तथा दुर्गम क्षेत्रों में 45 दिन का अंतर तय किया गया है। मंत्री ने बताया कि तेल मार्केटिंग कंपनियों के फील्ड अधिकारी और एंटी-अडल्टरेशन सेल डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा केंद्रीय गृह सचिव ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक कर राज्य प्रशासन को इस व्यवस्था के साथ जोड़ने पर चर्चा की है। पुरी ने कहा कि कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई को नियंत्रित करने का उद्देश्य काला बाजारी रोकना है, न कि होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को नुकसान पहुंचाना। कमर्शियल एलपीजी पूरी तरह बाजार आधारित कीमत पर बिना सब्सिडी के बेची जाती है और इसके लिए कोई पंजीकरण या बुकिंग प्रणाली नहीं होती। उन्होंने कहा कि अगर कमर्शियल एलपीजी की बिक्री पूरी तरह खुली छोड़ दी जाती, तो काउंटर से खरीदे गए सिलेंडर अवैध बाजार में भेजे जा सकते थे, जिससे असली व्यावसायिक और घरेलू उपभोक्ताओं को नुकसान होता। इसलिए सरकार ने स्पष्ट प्राथमिकता और पारदर्शी आवंटन प्रणाली लागू की है। इस व्यवस्था की निगरानी के लिए इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के कार्यकारी निदेशकों की तीन सदस्यीय समिति 9 मार्च को बनाई गई थी। इस समिति ने देश भर में राज्य के नागरिक आपूर्ति विभागों और रेस्तरां संघों के साथ बैठकें आयोजित की हैं और ये बैठकें जारी हैं। समिति ने विभिन्न क्षेत्रों और सेक्टरों के आधार पर कमर्शियल एलपीजी की वास्तविक जरूरत का आकलन किया है। इसके तहत एक बड़े फैसले में आज से तेल कंपनियां औसत मासिक कमर्शियल एलपीजी मांग का 20 प्रतिशत हिस्सा आवंटित करेंगी, ताकि जमाखोरी और काला बाजारी न हो। पुरी ने कहा कि एलपीजी और गैस पर दबाव कम करने के लिए वैकल्पिक ईंधन विकल्पों को भी सक्रिय किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हालिया 60 रुपए के समायोजन के बाद बिना सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपए है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से इसकी कीमत करीब 987 रुपए होनी चाहिए थी। वैश्विक कीमतों के अनुसार, प्रति सिलेंडर 134 रुपए की बढ़ोतरी की जरूरत थी, लेकिन सरकार ने 74 रुपए खुद वहन किए। इसके कारण उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए अतिरिक्त खर्च प्रतिदिन 80 पैसे से भी कम बैठता है। पुरी ने बताया कि पड़ोसी देशों में एलपीजी की कीमतें भारत से ज्यादा हैं। पाकिस्तान में एलपीजी सिलेंडर करीब 1,046 रुपए, श्रीलंका में 1,242 रुपए और नेपाल में 1,208 रुपए के आसपास है। उन्होंने यह भी कहा कि तेल मार्केटिंग कंपनियों को 2024-25 में हुए करीब 40,000 करोड़ रुपए के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने 30,000 करोड़ रुपए के मुआवजे को मंजूरी दी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली में केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान से की मुलाकात

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सतत् प्रयासों का परिणाम है कि मध्यप्रदेश के किसानों को केंद्र सरकार से बड़ी राहत और कई महत्वपूर्ण मंजूरियां मिली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर राज्य के किसानों और ग्रामीण विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रह्लाद सिंह पटेल और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस उच्च स्तरीय चर्चा में ग्रामीण सड़कों सहित अनेक विषयों पर मध्यप्रदेश को बड़ी राहत देने वाले निर्णय लिये गये। सरसों किसानों को मिलेगा भावांतर भुगतान मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आग्रह पर सरसों की खरीद से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। केंद्रीय कृषि मंत्री  चौहान ने भावांतर भुगतान योजना के तहत मध्यप्रदेश के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए संबंधित विभागों को भुगतान प्रक्रिया तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। इससे राज्य के सरसों उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। तुअर की शत-प्रतिशत खरीद का मार्ग प्रशस्त केंद्रीय मंत्री  चौहान ने बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को तुअर (अरहर) की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद का स्वीकृति-पत्र भी सौंपा। इस निर्णय से मध्यप्रदेश के तुअर उत्पादक किसानों की उपज का पूर्ण सरकारी उपार्जन सुनिश्चित होगा, जिससे उन्हें बाजार में भाव गिरने का जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा और आय में स्थिरता आयेगी। दलहन–तिलहन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश को दलहन और तिलहन उत्पादन का अग्रणी केंद्र बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस पर केंद्र और राज्य की संयुक्त टीम द्वारा मूंग, उड़द, चना, तिल, सरसों और पाम ऑयल जैसी फसलों के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने पर सहमति बनी। फसल बीमा में किसानों के हितों की सुरक्षा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों के हितों की बेहतर सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। केंद्रीय मंत्री  चौहान ने निर्देश दिए कि सोयाबीन जैसी फसलों के आंकलन में केवल सैटेलाइट डेटा के बजाय क्रॉप कटिंग और रिमोट सेंसिंग तरीकों का उपयोग किया जाए, जिससे किसानों को वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा मिल सके। कृषि से जुड़े मुद्दों और योजनाओं की हुई समीक्षा बैठक में मध्यप्रदेश के लिए सरसों और सोयाबीन के भावांतर भुगतान, दलहन मिशन के तहत मूंग-उड़द के अतिरिक्त लक्ष्य, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता कार्यक्रम, मनरेगा मजदूरी और सामग्री भुगतान, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जुड़े मुद्दों पर बिंदुवार चर्चा की गई। केन्द्रीय मंत्री  चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मध्यप्रदेश से जुड़े लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता से निपटाया जाए, जिससे राज्य के किसानों, मजदूरों और ग्रामीण गरीबों को शीघ्र राहत मिल सके। ग्रामीण विकास योजनाओं को मिलेगी गति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है और मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाते हुए किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण विकास को नई गति देने के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। केन्द्रीय कृषि मंत्री  चौहान ने मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश मेरा अपना घर है। किसान कल्याण वर्ष में यह सुनिश्चित किया जायेगा कि सरसों, तुअर, मूंग, उड़द और तिलहनों की खेती करने वाले किसानों को हर संभव सहायता मिले और राज्य ग्रामीण विकास के हर पैमाने पर अग्रणी बने।  

ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी क्षेत्रों में भी चलाएं अभियान की गतिविधियां 19 मार्च से प्रारंभ होगा प्रदेश व्यापी अभियान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘जल गंगा संवर्धन अभियान-2026’ के माध्यम से प्रदेश की जल-संस्कृति को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन की वह महती आवश्यकता है जिसे हमें भावी पीढ़ियों को उपलब्ध कराने के लिये सहेजकर रखना है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि इस अभियान में जल संरक्षण की पारंपरिक पद्धतियों के साथ नवीन तकनीकी नवाचारों को अपनाया जाए और प्रदेश के प्रत्येक जल स्रोत की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि इस वर्ष “वर्षा जल की एक-एक बूंद का संचयन और संरक्षण” ही हमारा परम ध्येय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 19 मार्च से पूरे प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरूआत होगी। भविष्य की चुनौतियों का समाधान: जल-समृद्ध मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों के बीच जल-सुरक्षा ही विकास का मूल मंत्र है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ में प्रदेश जल संरचनाओं की नदियों, तालाबों, बावड़ियों और कुओं का पुनरुद्धार एक मिशन मोड में किया जायेगा। जन-भागीदारी से बनेगा जन आंदोलन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपील की है कि जल गंगा संवर्धन अभियान से जन-जन को जोड़कर एक ‘जन-आंदोलन’ का रूप दिया जाए। उन्होंने समाज के हर वर्ग, स्वयंसेवी संस्थाओं और युवाओं से इस पुनीत कार्य में आगे बढ़कर श्रमदान करने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब समाज का हर व्यक्ति जल संरचनाओं की सुरक्षा का प्रहरी बनेगा, तभी हम “परम वैभवशाली और जल-समृद्ध मध्यप्रदेश” के स्वप्न को साकार कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि अभियान में प्रत्येक जिले में जल स्रोतों के आसपास स्वच्छता सुनिश्चित की जाए और जल गुणवत्ता परीक्षण के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। अभियान की प्रमुख गतिविधियां              जल संरचनाओं का कायाकल्प।              नवीन जल स्त्रोतों का निर्माण।              भू-जल स्तर बढ़ाने भवनों पर रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग।              पुराने जल स्त्रोतों का संधारण।              जल स्त्रोतों के पास साफ-सफाई।              सोक पिट का निर्माण।              पेयजल की टेस्टिंग और टंकियों की सफाई।              पुराने तालाबों का गहरीकरण।              स्टॉप डेम का संधारण एवं नवीन निर्माण।              पेयजल पाइप लाइनों का संधारण।              जल स्त्रोतों के पास वृहद पौध-रोपण।              जल संरक्षण के लिए जन-भागीदारी बढ़ाना।  

एलपीजी उपभोक्ताओं को राहत: वित्त वर्ष 2025-26 में 30,000 करोड़ की सब्सिडी का ऐलान

नई दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (पीएसयू) को एलपीजी सब्सिडी के लिए 30,000 करोड़ रुपए देने को मंजूरी दी है। यह राशि इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियों को दी जाएगी ताकि वे घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर को रियायती कीमतों पर उपलब्ध करा सकें। यह जानकारी गुरुवार को संसद में दी गई। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत फिलहाल 913 रुपए है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत गरीब उपभोक्ताओं को प्रति सिलेंडर 300 रुपए की लक्षित सब्सिडी देने के बाद केंद्र सरकार लाभार्थियों को 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर 613 रुपए प्रति सिलेंडर (दिल्ली में) की प्रभावी कीमत पर उपलब्ध करा रही है। घरेलू बाजार में एलपीजी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए मंत्रालय ने सभी घरेलू तेल रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को सी3 और सी4 गैस स्ट्रीम को एलपीजी उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है। मंत्री ने बताया कि यह एलपीजी उत्पादन सिर्फ सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को सप्लाई किया जाएगा। यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जारी किए गए हैं। सुरेश गोपी ने यह भी कहा कि सरकार ने इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (आईएसपीआरएल) नाम की विशेष कंपनी के जरिए 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाले रणनीतिक कच्चे तेल भंडार बनाए हैं। ये भंडार ईरान युद्ध जैसे हालात में सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं से निपटने में मदद करेंगे। मंत्री ने बताया कि देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बाजार के अनुसार तय होती हैं, और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल मार्केटिंग कंपनियां इनकी कीमतों पर फैसला करती हैं। हालांकि जरूरत पड़ने पर सरकार टैक्स संरचना में बदलाव करके उपभोक्ताओं पर बोझ कम करने के लिए वित्तीय हस्तक्षेप भी करती है।उन्होंने बताया कि नवंबर 2021 और मई 2022 में केंद्र सरकार ने दो चरणों में पेट्रोल पर 13 रुपए और डीजल पर 16 रुपए प्रति लीटर तक केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) कम की थी, जिसका पूरा फायदा उपभोक्ताओं को दिया गया था। इसके अलावा मार्च 2024 में तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में 2 रुपए प्रति लीटर की कटौती की थी। हालांकि अप्रैल 2025 में जब पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ाई गई, तब इसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया।

डॉ. यादव के नेतृत्व में जल प्रबंधन अभियान तेज, जनभागीदारी से मिल रहा व्यापक समर्थन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये प्रभावी रूप से जनभागीदारी की पहल की गई है। प्रदेश में “जल महोत्सव-2026” आयोजित किया जा रहा है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत यह अभियान केवल पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन के लिये समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक दूरदर्शी प्रयास है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति व्यवस्था को दीर्घकालिक, उत्तरदायी और आत्मनिर्भर बनाने की अवधारणा को सुदृढ़ किया जा रहा है। प्रदेश के चयनित ग्रामों में 8 मार्च से 22 मार्च 2026 के बीच जल महोत्सव 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव का उद्देश्य उन ग्रामों की उपलब्धियों को सामने लाना है जहाँ हर घर तक नल से जल की सुविधा सुनिश्चित हो चुकी है और पेयजल योजनाओं का संचालन, प्रबंधन तथा रख-रखाव ग्राम पंचायतों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी से सफलतापूर्वक किया जा रहा है। जल महोत्सव ग्रामीण समुदाय को जल प्रबंधन की जिम्मेदारी के प्रति और अधिक जागरूक एवं सहभागी बनाने का अवसर भी प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में जल जीवन मिशन को एक व्यापक जनभागीदारी आधारित पहल के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। जल महोत्सव के माध्यम से ग्राम पंचायतों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों, स्वयं सहायता समूहों तथा स्थानीय समुदाय की सक्रिय भूमिका को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे जल स्रोतों के संरक्षण, पेयजल प्रणालियों के सुचारु संचालन और सामुदायिक स्वामित्व की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके। प्रदेश में जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिये निरंतर उल्लेखनीय कार्य किये जाते रहे है। देश का पहला “जल अर्पण दिवस” राजगढ़ जिले में गोरखपुरा समूह जल प्रदाय योजना के अंतर्गत 23 दिसम्बर 2025 को आयोजित किया गया था, जिसने जल प्रबंधन में सामुदायिक सहभागिता का एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। जल महोत्सव के लिए ऐसे ग्रामों का चयन किया गया है जहाँ हर घर जल की स्थिति सत्यापित हो चुकी है और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति द्वारा पेयजल आपूर्ति व्यवस्था का संचालन प्रभावी रूप से किया जा रहा है। प्रत्येक जिले से ऐसे 2 ग्राम चिन्हित किए गए हैं जहाँ जल जीवन मिशन के मानकों के अनुरूप जल प्रदाय की व्यवस्था सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। इन ग्रामों में कार्यक्रमों का आयोजन कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिला पंचायत तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के समन्वय से किया जा रहा है। उत्कृष्ट कार्य करने वाले होंगे सम्मानित महोत्सव में ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वाल्वमैन, स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्य तथा ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सक्रिय सदस्यों को चिन्हित किया जाएगा। जिला जल एवं स्वच्छता समिति की बैठक में कलेक्टर के द्वारा इनका सम्मान किया जाएगा, जिससे समुदाय आधारित जल प्रबंधन के उत्कृष्ट प्रयासों को प्रोत्साहन मिल सके। कार्यक्रम के आयोजन के लिए प्रत्येक चयनित ग्राम में परियोजना क्रियान्वयन इकाई स्तर पर उपलब्ध मद से अधिकतम 25 हजार रु. तक की राशि व्यय की जा सकेगी। प्रदेश की विभिन्न परियोजना क्रियान्वयन इकाइयों के अंतर्गत आने वाले जिलों में यह आयोजन किया जा रहा है। इनमें प्रमुख रूप से भोपाल, सीहोर, राजगढ़, ग्वालियर, इंदौर, रतलाम, नीमच, छिंदवाड़ा, शहडोल, अनूपपुर, रीवा, सीधी, छतरपुर, दमोह, पन्ना, उज्जैन तथा बड़वानी सहित अन्य जिलों के चयनित ग्राम शामिल हैं। जल महोत्सव-2026 के माध्यम से प्रदेश में सुरक्षित पेयजल उपलब्धता की दिशा में प्राप्त उपलब्धियों को रेखांकित करने के साथ जल प्रबंधन में सामुदायिक सहभागिता को और अधिक सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति व्यवस्था को स्थायी और प्रभावी रूप से संचालित किया जा सके।  

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