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28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को मिलेगी 757 करोड़ रुपये से अधिक की राहत

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय स्थित सभागार से मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने योजना का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किया और अधिक से अधिक लोगों से योजना का लाभ लेने की अपील की। साथ ही मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 2 हजार 931 हितग्राहियों को 8 करोड़ 79 लाख रुपए की सब्सिडी भी अंतरित की। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बिजली आज हमारी मूलभूत जरूरतों में शामिल हो चुकी है और इसके बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। कई परिवार आर्थिक कारणों से समय पर बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाते, जिससे सरचार्ज के कारण बकाया राशि बढ़ जाती है और पूरा भुगतान करना कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने समाधान योजना शुरू की है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान योजना के माध्यम से लंबे समय से बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाने वाले प्रदेश के निम्न एवं मध्यम आय वर्ग तथा कृषि उपभोक्ताओं को राहत देने की पहल की गई है। योजना के तहत प्रदेश के 28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को कुल 757 करोड़ रुपए की राहत दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद देश के लगभग 18 हजार गांवों तक बिजली पहुंचाई गई, जिससे आजादी के बाद से अंधेरे में रहे गांव भी रोशन हुए। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में हमारे अपने संसाधनों से लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है और प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने बताया कि कोरोना काल में आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई उपभोक्ता बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाए थे, जिससे बकाया राशि बढ़ गई थी। राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं की इस परेशानी को समझते हुए समाधान योजना लागू की है।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रति प्रदेश में लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है और अब तक लगभग 36 हजार लोग इससे जुड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिला स्व सहायता समूहों द्वारा सोलर पैनल वेंडर के रूप में कार्य किया जाना एक सकारात्मक पहल है। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से बिजली की बचत करने और घरेलू बिजली के अनावश्यक उपयोग से बचने की अपील की।   मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को समाधान योजना के लिए बधाई देते हुए निर्देश दिए कि शिविर लगाकर और व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को समाधान योजना से जोड़ा जाए। उल्लेखनीय है कि योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं की तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, जिनमें 31 मार्च 2023 की स्थिति में निष्क्रिय उपभोक्ता, सक्रिय एकल बत्ती कनेक्शनधारी उपभोक्ता तथा सक्रिय अशासकीय घरेलू एवं अशासकीय कृषि उपभोक्ता शामिल हैं। इन श्रेणियों के उपभोक्ताओं को विद्युत देयक जमा करने के लिए प्रोत्साहन के रूप में अधिभार की राशि में 100 प्रतिशत छूट तथा मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान किया गया है। योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को पंजीयन कराना होगा और पंजीयन के समय बकाया राशि का न्यूनतम 10 प्रतिशत भुगतान करना अनिवार्य होगा। शेष राशि का भुगतान किस्तों में किया जा सकेगा और आगामी माह में कोई अधिभार नहीं लगेगा। यह योजना 30 जून 2026 तक प्रभावशील रहेगी। इस अवसर पर रायपुर उत्तर विधायक  पुरंदर मिश्रा, रायपुर नगर निगम महापौर मती मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी और विद्युत उपभोक्ता उपस्थित थे।

8th Pay Commission अपडेट: 6% वार्षिक इंक्रीमेंट और नए DA फॉर्मूले की मांग, सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव संभव

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए बनने वाले अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी संघ (AIDEF) ने 8वां केंद्रीय वेतन आयोग को कई अहम सुझाव दिए हैं। कर्मचारी संगठन ने आयोग की चेयरपर्सन न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को भेजे अपने जवाब में कुल 17 मांगें रखी हैं। इनमें सबसे बड़ी मांग महंगाई भत्ता (DA) की गणना के तरीके को बदलने की है। AIDEF का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था कर्मचारियों को मिलने वाले वास्तविक महंगाई प्रभाव को सही तरह से नहीं दर्शाती। क्या है डिटेल अभी केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के 12 महीने के औसत के आधार पर तय होता है। इस इंडेक्स को लेबर ब्यूरो तैयार करता है, जिसमें सब्जी, फल, कपड़े और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों को शामिल किया जाता है। इसी के आधार पर साल में दो बार DA बढ़ोतरी तय होती है। क्या है DA कैलकुलेशन लेकिन, AIDEF का कहना है कि यह इंडेक्स कर्मचारियों और पेंशनरों की वास्तविक खर्च स्थिति को नहीं दिखाता। संगठन के मुताबिक CPI बास्केट में कई वस्तुओं की कीमतें पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (राशन) या सब्सिडी वाली दरों पर मानी जाती हैं, जबकि ज्यादातर कर्मचारी बाजार से ऊंची कीमत पर सामान खरीदते हैं। इसलिए महंगाई की असली मार इस इंडेक्स में दिखाई नहीं देती। इसी वजह से AIDEF ने सुझाव दिया है कि 8वें वेतन आयोग में DA की गणना के लिए नया और ज्यादा वास्तविक इंडेक्स बनाया जाए। संगठन का कहना है कि इसमें खुली रिटेल मार्केट में मिलने वाली कीमतों या सरकारी कोऑपरेटिव कंज्यूमर स्टोर्स की दरों को आधार बनाया जाना चाहिए। इससे कर्मचारियों को महंगाई के अनुसार सही भत्ता मिल सकेगा। इसके अलावा AIDEF ने कई अन्य अहम मांगें भी रखी हैं। संगठन ने सेना में लागू अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीर जैसी फिक्स्ड टर्म भर्ती व्यवस्था को खत्म करने और सभी अग्निवीरों को नियमित करने की मांग की है। साथ ही मौजूदा मिलिट्री सर्विस पे (MSP) को हटाकर ‘डायनेमिक रिस्क एंड रेडीनेस प्रीमियम’ देने का प्रस्ताव रखा गया है, जो पुलिस और अन्य बलों की एंट्री लेवल सैलरी से कम से कम 25% ज्यादा होना चाहिए। वेतन और प्रमोशन से जुड़े मामलों में भी AIDEF ने बड़े बदलाव सुझाए हैं। संगठन ने मौजूदा 3% सालाना वेतन वृद्धि को बढ़ाकर 6% करने, सेवा के 30 साल में कम से कम 5 गारंटीड प्रमोशन देने और सबसे ज्यादा तथा सबसे कम वेतन के बीच अनुपात 1:10 रखने की मांग की है। इसके अलावा सशस्त्र बलों के लिए पुरानी पेंशन योजना को जारी रखने और सेवानिवृत्ति आयु में मानवीय तरीके से चरणबद्ध बढ़ोतरी जैसे सुझाव भी दिए गए हैं।

ओरल कैंसर रोकथाम के लिए बड़ा कदम: भोपाल GMC में बनेगा नोडल सेंटर, पूरे MP के डॉक्टरों को ट्रेनिंग

भोपाल  प्रदेश भर के जिला अस्पतालों में पदस्थ दंत चिकित्सकों (डेंटिस्ट) और चिकित्सा अधिकारियों में मुंह के कैंसर (ओरल कैंसर) की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान के लिए उनकी तकनीकी समझ बढ़ाई जाएगी। इसके लिए भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था बनाई गई है। स्वास्थ्य विभाग ने इसे प्रदेश भर में मुंह के कैंसर की रोकथाम के लिए नोडल ट्रेनिंग सेंटर की भूमिका दी है। शुरुआती लक्षणों की पहचान और विशेषज्ञों का प्रशिक्षण अक्सर देखा गया है कि ओरल कैंसर के शुरुआती लक्षणों को सामान्य संक्रमण या छाला समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इस देरी के कारण मरीज तब अस्पताल पहुंचता है जब बीमारी एडवांस चरण (थर्ड या फोर्थ स्टेज) में होती है। जीएमसी में होने वाले इस प्रशिक्षण के दौरान डेंटल और ऑन्कोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डेंटिस्ट और चिकित्सा अधिकारियों को सिखाएंगे कि कैसे मुंह के अंदर होने वाले सफेद दाग (ल्यूकोप्लाकिया), लाल चकत्ते या लंबे समय से न भरने वाले छालों को देखकर कैंसर की आशंका का सटीक पता लगाया जाए। मृत्यु दर में कमी और मास्टर ट्रेनर मॉडल अधिकारियों का कहना है कि इस मुहिम से न केवल प्रदेश में ओरल कैंसर से होने वाली मृत्यु दर में कमी आएगी, बल्कि बड़े अस्पतालों पर बढ़ने वाला मरीजों का अतिरिक्त दबाव भी कम होगा। यह प्रशिक्षण ‘ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स’ मॉडल पर आधारित होगा, यानी यहाँ से सीखकर जाने वाले डॉक्टर अपने जिले के अन्य छोटे केंद्रों के स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करेंगे। रेफरल सिस्टम होगा मजबूत एक बार जब जिलों में पदस्थ डॉक्टर इस स्क्रीनिंग में माहिर हो जाएंगे, तो वे संदिग्ध मरीजों को तत्काल मेडिकल कॉलेज रेफर कर सकेंगे। इससे मरीजों का समय बचेगा और इलाज की सफलता की दर बढ़ेगी। कैंसर के इन शुरुआती लक्षणों पर रहेगी नजर सफेद या लाल धब्बे – मुंह के अंदर ऐसे पैच जो रगड़ने पर भी न हटें। असामान्य गांठ – मसूड़ों या गालों के अंदर की तरफ गांठ का महसूस होना। पुराने छाले – ऐसे छाले जो दो सप्ताह से अधिक समय तक दवा के बाद भी ठीक न हों। जबड़े में जकड़न – मुंह खोलने में परेशानी होना या निगलते समय दर्द होना। विभागाध्यक्ष का वक्तव्य प्रदेश के 51 जिलों के दंत चिकित्सकों और चिकित्सा अधिकारियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा। हमारा मुख्य उद्देश्य ओरल कैंसर के शीघ्र निदान पर है। यदि शुरुआती चरण में ही कैंसर के लक्षणों की पहचान हो जाए, तो मरीज की जान बचाना काफी आसान हो जाता है। – डॉ. अनुज भार्गव, विभागाध्यक्ष, डेंटल सर्जरी विभाग, जीएमसी भोपाल

मंत्री राजवाड़े के विभागों को 11,763 करोड़ रुपये का अनुदान, पारित हुई मांगें

मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े के विभागों के लिए लगभग 11 हजार 763 करोड़ रुपये की अनुदान मांगें पारित समाज के अंतिम व्यक्ति तक के सम्मान और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध :  राजवाड़े महतारी वंदन योजना से राज्य की 70 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित  समाज कल्याण का बजट पिछले 5 वर्षों की तुलना में 59 प्रतिशत अधिक प्रधानमंत्री श्री मोदी की गारंटी को पूरा करने बेटियों के भविष्य के लिए रानी दुर्गावती योजना होगी शुरू  नशा मुक्ति के लिए सामाजिक सहयोग से चलेगा अभियान, वरिष्ठ नागरिकों केे देखभाल के लिए “सियान गुड़ी” डे-केयर सेंटर की होगी स्थापना रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के विभागों के लिए 11 हजार 762 करोड़ 53 लाख रूपए की अनुदान मांगें पारित कर दी गईं है। इनमें महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए 10,162 करोड़ 53 लाख रूपए तथा समाज कल्याण विभाग के लिए 1600 करोड़ रूपए से अधिक का बजट प्रावधान किया गया है।  महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने सदन में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए अनेक योजनाओं का प्रभावी संचालन कर रही है।  राजवाड़े ने कहा कि महतारी वंदन योजना राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में से एक है। यह योजना राज्य की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल साबित हुई है। इसके तहत प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं को लाभान्वित किया जा रहा है। अब तक 25 किश्तों में 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की जा चुकी है। इससे महिलाओं के जीवन में आर्थिक मजबूती के साथ आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिला है और उनके जीवन में स्वावलंबन लाने का काम किया है। राजवाड़े ने सदन में कहा कि महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए 120 करोड़ रुपये तथा मिशन वात्सल्य योजना के लिए 80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन के लिए 800 करोड़ रुपये तथा पूरक पोषण आहार के लिए 650 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों के उन्नयन और आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है। राजवाड़े ने कहा कि किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य और पोषण के लिए ’किशोरी बालिका योजना’ के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही छात्राओं की स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए ’शुचिता योजना’ के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।  राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोेदी जी के गारंटी को पूरा करने राज्य सरकार बेटियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए ’रानी दुर्गावती योजना’ प्रारंभ करने जा रही है। इस योजना के तहत बेटी के 18 वर्ष पूर्ण होने पर उन्हेें 1.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके लिए इस वर्ष के बजट में 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा पोषण अभियान के संचालन के लिए 125 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना के लिए 40 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान रखा गया है।  राजवाड़े ने कहा कि हमारी सरकार महिलाओं की सम्मान और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि वन स्टॉप सेंटर, सखी निवास और चाइल्ड हेल्पलाइन जैसी योजनाओं के संचालन के लिए भी बजट में पर्याप्त राशि का प्रावधान किया गया है। महिला सुरक्षा से संबंधित कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जनजागरूकता कार्यक्रमों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। समाज कल्याण विभाग सदन को जानकारी देते हुए राजवाड़े ने बताया कि समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1600 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है, जो पिछले पांच वर्षों की तुलना में लगभग 59 प्रतिशत अधिक है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत प्रदेश में लगभग 21 लाख 76 हजार हितग्राहियों को पेंशन का लाभ डीबीटी के माध्यम से दिया जा रहा है। इसके लिए 1402 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों केे देखभाल और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए राज्य में “सियान गुड़ी” डे-केयर सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं, जिसके लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा वृद्धाश्रमों के संचालन के लिए 6 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के लिए 20 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के लिए 20 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए विशेष विद्यालयों के संचालन, कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण तथा पुनर्वास कार्यक्रमों के लिए भी बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। साथ ही उभयलिंगी कल्याण बोर्ड की स्थापना के लिए 1 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।  लक्ष्मी राजवाड़े ने सदन में कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं का संचालन करना नहीं बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय, सम्मान और सुरक्षा पहुंचाना है। इन्हीं बातों को ध्येय में रखकर हमारी सरकार सेवा, संवेदना और संकल्प के साथ समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं।

Iran-US War: FBI की चेतावनी के बाद अमेरिका में सुरक्षा बढ़ी, ईरान के हमले की आशंका

तेहरान  ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद से पश्चिम एशिया में भीषण जंग छिड़ चुकी है। बौखलाए ईरान ने इजरायल के साथ साथ सऊदी अरब, बहरीन, UAE और कतर जैसे खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को लगातार निशाना बनाया है। अब खबर है कि ईरान सीधा अमेरिका पर ही हमला बोल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान अमरीकी राज्य कैलिफोर्निया पर हमला करने की योजना बना रहा है। अमेरिका की फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने हाल ही में कैलिफोर्निया के पुलिस डिपार्टमेंट को चेतावनी दी है कि ईरान पश्चिमी तट पर ड्रोन के जरिए अमेरिकियों पर हमला कर सकता है। फर्स्टपोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक FBI के अधिकारियों ने एक अलर्ट जारी किया है जिसमें अमेरिकी सरकार को चेतावनी दी गई है कि युद्ध जारी रहा तो ईरान के बदले के लिए तैयार रहें। अलर्ट पर कैलिफोर्निया रिपोर्ट में ABC न्यूज की एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। इसमें फरवरी के आखिर में भेजे गए अलर्ट के मुताबिक, “हमें हाल ही में जानकारी मिली है कि फरवरी 2026 की शुरुआत में, ईरान कथित तौर पर अमेरिकी होमलैंड के तट पर एक अनजान जहाज से UAV का इस्तेमाल करके अचानक हमला करने की सोच रहा था। अगर US ईरान पर हमला करता है तो ईरान कैलिफोर्निया को निशाना बना सकता है।” जानकारी के मुताबिक राज्य इसे लेकर हाई अलर्ट पर है। डोनाल्ड ट्रंप को भी दी थी धमकी इससे पहले ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी अपनी जान बचाने की चेतावनी दी थी। ईरान के एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ट्रंप को धमकी दी। अली लारिजानी ने बीते मंगलवार को एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ”ईरान जैसा बलिदानी राष्ट्र तुम्हारी खोखली धमकियों से नहीं डरता। तुमसे बड़े भी ईरान को खत्म नहीं कर सके। सावधान रहें, कहीं खुद आपका सफाया ना हो जाए।” ईरान ने रखी शर्तें इस बीच ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए 3 शर्तें रख दी हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बुधवार को कहा है कि अमेरिका को ईरान के अधिकारों को मान्यता देनी ही होगी और यह गारंटी देनी होगी कि देश पर भविष्य में हमले नहीं होंगे। बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किए गए एक बयान में, पेजेशकियन ने कहा कि जंग का हल सिर्फ इन शर्तों के जरिए ही निकलेगा। पेजेशकियन ने लिखा, “इस जंग को, जिसे यहूदियों और अमेरिका ने शुरू किया है, को खत्म करने का एक मात्र तरीका है, ईरान के कानूनी अधिकारों को मान्यता देना, युद्ध का हर्जाना देना और भविष्य में हमले के खिलाफ पक्की अंतर्राष्ट्रीय गारंटी देना।”

“आदि कैलाश यात्रा 1 मई से शुरू, 30 हजार श्रद्धालु पहुंचे थे पिछले साल, इस बार भी उम्मीदें हैं बड़ी

पिथौरागढ़ उत्तराखंड के सीमांत पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में भगवान शिव के धाम की प्रसिद्ध आदि कैलाश यात्रा इस वर्ष आठ मई को प्रदेश के तीन स्थानों से शुरू होगी. यात्रा की नोडल एजेंसी ‘कुमाऊं मंडल विकास निगम लिमिटेड’ (केएमवीएन) के महाप्रबंधक विजयनाथ शुक्ला ने बताया कि हल्द्वानी, टनकपुर और धारचूला से श्रद्धालुओं के कुल 15 जत्थे आदि कैलाश की यात्रा करेंगे.उन्होंने बताया हल्द्वानी से होने वाली आदि कैलाश यात्रा आठ दिन की होगी. टनकपुर से छह दिन और धारचूला से यात्रा पांच दिन में संपन्न होगी. विजयनाथ शुक्ला ने बताया यात्रा का पहला चरण 10 जून को समाप्त होगा. आदि कैलाश यात्रा को पीएम मोदी ने दिया बढ़ावा: अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री के आने से पहले हर साल करीब 2000 श्रद्धालु आदि कैलाश यात्रा पर आते थे. 2023 में मोदी के यहां आने के बाद तीर्थयात्रियों की संख्या 28,000 पहुंच गई. पिछले साल यह आंकड़ा 36,000 को पार कर गया. उत्तराखंड में आदि कैलाश यात्रा 1 मई से शुरू करने की तैयारी है. मौसम अनुकूल रहा तो प्रशासन अप्रैल के आखिरी सप्ताह से इनर लाइन परमिट जारी कर सकता है. पिछले साल यहां 30 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे थे. ऐसे में इस बार और बड़ी संख्या में यात्रियों के आने की उम्मीद है. आदि कैलाश पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र की व्यास घाटी में स्थित है. नवंबर से मार्च तक यहां भारी बर्फबारी के कारण आवागमन बंद रहता है. सुरक्षा कारणों के चलते व्यास घाटी में छियालेख से आगे जाने के लिए इनर लाइन परमिट अनिवार्य होता है. जिसे तहसील प्रशासन जारी करता है. आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट धारचूला स्थित एसडीएम कार्यालय से ऑफलाइन लिया जा सकता है. आवेदन के लिए आधार कार्ड, मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट और पासपोर्ट साइज फोटो जरूरी होते हैं. यात्रा के लिए ऑनलाइन आवेदन की भी सुविधा है. आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन के लिए आने वाले पर्यटकों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है. साल 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद इस धार्मिक स्थल को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान मिली. इसके बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. साल 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड दौरे के दौरान आदि कैलाश क्षेत्र का भ्रमण किया था. तब उन्होंने पिथौरागढ़ जिले में स्थित आदि कैलाश और पार्वती कुंड में पूजा-अर्चना की, साथ ही कुमाऊं के प्रसिद्ध जागेश्वर धाम में भी दर्शन किए थे. आदि कैलाश उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में भारत की सीमा के भीतर स्थित है, इसलिए यहां की यात्रा अपेक्षाकृत आसान मानी जाती है. इसके लिए केवल इनर लाइन परमिट, मेडिकल जांच और स्थानीय प्रशासन की अनुमति जरूरी होती है. सड़क बनने के बाद अब श्रद्धालु धारचूला, गुंजी और जोलिंगकोंग तक वाहनों से पहुंचकर पार्वती सरोवर और गौरी कुंड के साथ आदि कैलाश के दर्शन कर सकते हैं. कैलाश पर्वत तिब्बत (चीन) में स्थित है और उसके पास पवित्र मानसरोवर झील है. वहां की यात्रा अंतरराष्ट्रीय होने के कारण पासपोर्ट-वीजा और भारत सरकार की आधिकारिक प्रक्रिया से होकर गुजरती है. यह यात्रा अधिक कठिन मानी जाती है.

भारत मंडपम में महिला सशक्तिकरण और शहरी विकास का संगम होगा: आयुक्त भोंडवे

महिला सशक्तिकरण और शहरी विकास के संगम का साक्षी बनेगा भारत मंडपम: आयुक्त  भोंडवे नई दिल्ली में 13 मार्च को आयोजित महोत्सव में मध्यप्रदेश की 300 अमृत मित्र महिलाएँ होंगी सम्मिलित केंद्रीय मंत्री  खट्टर उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को करेंगे सम्मानित भोपाल नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त  संकेत भोंडवे ने बताया कि विभाग द्वारा शहरी महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में राज्य के 55 नगरीय निकायों में 312 स्व-सहायता समूहों की 1,028 महिलाओं को अमृत मित्र के रूप में ‘जल गुणवत्ता परीक्षण’ जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये समूह सार्वजनिक उद्यानों के रख-रखाव और केंद्र सरकार के ‘वुमन फॉर ट्रीज़’ कार्यक्रम के तहत पौधरोपण एवं उनकी सुरक्षा का दायित्व का भी सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं। अमृत मित्र महोत्सव में मध्यप्रदेश की लगभग 300 महिलाएँ उत्साहपूर्वक भाग लेंगी। इस महोत्सव में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों की अमृत मित्र महिलाएँ भी सम्मिलित हो रही हैं। भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा अमृत 2.0 के अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं के अतुलनीय योगदान को रेखांकित करने के लिये शुक्रवार 3 मार्च को नई दिल्ली के प्रतिष्ठित ‘भारत मंडपम’ में “अमृत मित्र महोत्सव” का भव्य आयोजन किया जा रहा है।इस राष्ट्रीय समागम में देशभर से ‘अमृत मित्र’ के रूप में कार्यरत स्व-सहायता समूह की महिलाएँ, नगरीय निकायों के प्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी सहभागिता करेंगे। उत्कृष्टता का सम्मान केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री  मनोहर लाल खट्टर अमृत मित्र पहल के अंतर्गत जल संरक्षण, स्वच्छता और शहरी प्रबंधन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को सम्मानित करेंगे। यह आयोजन उत्कृष्ट कार्य करने वालों के कार्यों को पहचान दिलाएगा। साथ ही महिला नेतृत्व के माध्यम से सतत शहरी विकास की संकल्पना को भी सुदृढ़ करेगा। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त  संकेत भोंडवे ने नई दिल्ली जा रही सभी अमृत मित्र महिलाओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। उन्होंने कहा कि अमृत मित्र पहल शहरी विकास में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और नेतृत्व का एक प्रेरक उदाहरण है। आयुक्त  भोंडवे ने विश्वास व्यक्त किया कि मध्यप्रदेश की महिलाएँ इस राष्ट्रीय मंच पर राज्य के नवाचारों और उत्कृष्ट कार्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगी। 

मुकेश मल्होत्रा को मिला राहत, HC ने विजयपुर विधायक पद पर अपने फैसले पर लगाया स्टे

श्योपुर  मध्य प्रदेश का श्योपुर विधानसभा क्षेत्र में बीते 2-3 दिनों से चर्चाओं में बना हुआ है. इसकी वजह है, सोमवार यानि 9 मार्च को हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ का सुनाया गया फैसला. जहां कोर्ट ने विजयपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर फैसला सुनाते हुए बीजेपी के हारे हुए प्रत्याशी रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया था, जबकि कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा की विधायकी शून्य की थी. वहीं हाईकोर्ट ने राज्यसभा सांसद विवेक तंखा की याचिका पर संज्ञान लेते हुए अपने ही फैसले पर 15 दिन का स्टे लगा दिया है. जिसके बाद कांग्रेस अब सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी। अपने ही फैसले पर हाईकोर्ट ने लगाया स्टे विजयपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद विवेक तंखा ने तुरंत कोर्ट का रूख किया. जहां विवेक तंखा की याचिका पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने अपने ही फैसले को 15 दिन के लिए स्थगित कर दिया है. जिसका मतलब है कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट में अपील करके स्थगन आदेश प्राप्त करने का मौका दिया गया है. यह स्थगन RP एक्ट के प्रावधान अनुसार दिया गया है. यानि तब तक मुकेश मल्होत्रा विजयपुर से कांग्रेस विधायक रहेंगे. जस्टिस एसजी अहलूवालिया ने मुकेश मल्होत्रा ​​की इस दलील पर सहमति जताई कि अगर फैसले के असर और अमल पर रोक नहीं लगाई गई तो उन्हें भारी नुकसान होगा. उन्होंने कहा कि “फैसले के असर और अमल पर 15 दिनों के लिए रोक लगाने की अर्ज़ी न्याय के हित में है, ताकि प्रतिवादी मुकेश मल्होत्रा ​​सुप्रीम कोर्ट से रोक का आदेश ले सकें। जीतू पटवारी ने बताया लोकतांत्रिक लड़ाई जीतू पटवारी ने कहा कि हम लोकतांत्रिक तरीके से फिर से कांग्रेस का विधायक बनवाएंगे. कांग्रेस अध्यक्ष ने इसे लोकतंत्र बचाने की इस लड़ाई बताया है. उन्होंने कहा कि हम राज्यसभा सांसद के साथ मजबूती से लगे हुए हैं. साथ ही कहा कि बीजेपी दलित, आदिवासी और आरक्षण विरोधी है. बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट में विवेक तंखा और अभिषेक मनु संघवी मामले की पैरवी करेंगे। क्या है मुकेश मल्होत्रा और रामनिवास का पूरा मामला दरअसल, विजयपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा को जीत मिली थी, जबकि बीजेपी रामनिवास रावत को हार का सामना करना पड़ा था. हार के बाद रामनिवास रावत ने हाईकोर्ट में मुकेश मल्होत्रा के खिलाफ याचिका लगाई थी, जिसमें दावा किया गया था कि कांग्रेस विधायक ने आपराधिक जानकारी छिपाई है. मामले में सोमवार को ग्वालियर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए मुकेश मल्होत्रा द्वारा आपराधिक जानकारी छिपाने की बात सही पाई गई, जिसके बाद कोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा की विधायकी शून्य कर दी और रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया।

नक्सलियों पर बड़ा वार: डंप से 3.61 करोड़ कैश, सोना और AK-47 सहित 101 हथियारों का जखीरा मिला

जगदलपुर बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में आज नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के 108 नक्सली कैडरों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें 44 महिला और 64 पुरुष नक्सली शामिल हैं, जिन पर 3.29 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। नक्सलियों के 101 घातक हथियार बरामद यह आत्मसमर्पण पुणे मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन पहल के तहत हुआ। कार्यक्रम राज्य के डीजीपी अरुण देव गौतम और एडीजी विवेकानंद सिन्हा की मौजूदगी में हुआ। बस्तर आईजी सुंदरराज पी सहित सीआरपीएफ, बीएसएफ और जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। इस दौरान नक्सलियों द्वारा जमा किए गए हथियारों और अन्य सामग्री की प्रदर्शनी लगाई गई। अधिकारियों ने 101 घातक हथियार बरामद होने की जानकारी दी। करोड़ों रुपये के हथियार समेत नगद मिला इन हथियारों में एके 47, इंसास, एलएमजी और बीजीएल शामिल थे। नक्सल इतिहास में पहली बार 3.61 करोड़ रुपये नकद और 1.64 करोड़ रुपये मूल्य का एक किलो सोना बरामद किया गया। इसे अब तक के नक्सल विरोधी अभियानों में सबसे बड़ी डंप बरामदगी माना जा रहा है। यह सभी सामग्री बस्तर रेंज के विभिन्न जिलों से बरामद की गई थी। इनमें बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और बस्तर जिले शामिल हैं। बरामद किए गए सभी डंप और सामग्री को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया। यह प्रदर्शन जगदलपुर स्थित रेंज मुख्यालय में आयोजित आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान हुआ। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह सामग्री अलग-अलग अभियानों में मिली थी। इसमें 101 घातक हथियार और बड़ी मात्रा में नकदी व सोना शामिल था। अधिकारियों का कहना है कि सरकार की पुनर्वास नीति प्रभावी साबित हो रही है। लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों के कारण नक्सली मुख्यधारा में लौट रहे हैं। बड़ी संख्या में नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज में वापसी की है। यह आत्मसमर्पण बस्तर में शांति और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल क्षेत्र में स्थिरता लाने में सहायक होगी।

दिल्ली में सीएम मोहन यादव ने प्रहलाद के साथ की शिवराज से बैठक, तुअर की फसल सरकार करेगी पूरी तरह खरीद

भोपाल   दिल्ली में हुई एक बड़ी राजनतिक बैठक के बाद मध्यप्रदेश के किसानों के लिए बड़ी राहत की घोषणा हुई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर राज्य के किसानों के मुद्दों पर चर्चा की, जिसके बाद सरसों और तुअर की खरीद को लेकर बड़ी मंजूरी मिली है। तुअर की 100% सरकारी खरीद को मंजूरी बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को तुअर की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद का स्वीकृति पत्र सौंपा। इस फैसले बाद मध्यप्रदेश के तुअर उत्पादक किसानों की पूरी उपज का सरकारी उपार्जन सुनिश्चित होगा, जिससे किसानों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। सरसों पर भावांतर भुगतान योजना लागू इसके साथ ही सरसों की फसल के लिए भावांतर भुगतान योजना के तहत खरीद को भी केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है। इस योजना के माध्यम से किसानों को बाजार मूल्य और समर्थन मूल्य के अंतर की भरपाई की जाएगी। विजयवर्गीय भी दिल्ली में थे मौजूद एमपी के बजट सत्र के दौरान विधानसभा में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयानों से सीएम और विजयवर्गीय के बीच अंदरूनी मतभेद नजर आए थे। इसके बाद पिछले हफ्ते सीएम डॉ मोहन यादव, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल ने एक ही दिन अलग-अलग समय पर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इस बार शिवराज सिंह चौहान से सीएम ने मंत्री प्रहलाद पटेल के साथ मुलाकात की है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी दिल्ली पहुंचे थे, लेकिन वे एक निजी शादी समारोह में शामिल होने गए थे। शिवराज-मोहन और प्रहलाद के बीच चर्चा तीनों दिग्गजों के बीच हुई बैठक के बाद केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से जारी प्रेस नोट में बताया गया कि खेती से जुड़े इन मुद्दों पर चर्चा हुई है।     सरसों उत्पादकों को भावांतर का तोहफा : लंबे समय से लंबित सरसों की खरीद पर भावांतर भुगतान योजना को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरी झंडी दे दी है। इससे प्रदेश के लाखों सरसों उत्पादक किसानों को बाजार और समर्थन मूल्य के अंतर की राशि सीधे खाते में मिलेगी।     तुअर की 100% सरकारी खरीद: शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री को स्वयं स्वीकृति पत्र सौंपा, जिसके तहत अब प्रदेश के किसानों की पूरी की पूरी तुअर फसल सरकार खरीदेगी। यह दलहन उत्पादन के क्षेत्र में मध्य प्रदेश के लिए एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।     2026 किसान कल्याण वर्ष का रोडमैप: वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाते हुए केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि मध्य प्रदेश को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इसमें मूंग, उड़द और सोयाबीन जैसे तिलहनों पर भी विशेष फोकस रहेगा। कई योजनाओं पर हुई चर्चा बैठक के दौरान ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल और अधिकारियों की मौजूदगी में दलहन–तिलहन मिशन, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना और ग्रामीण सड़कों के मुद्दों पर भी चर्चा हुई। आवास और ग्रामीण विकास को बढ़ावा बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण के तहत 2018 की आवास प्लस सूची के सभी पात्र परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने के लक्ष्य पर भी सहमति बनी। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बचे पात्र परिवारों को भी आवास स्वीकृत करने की दिशा में काम करेंगी। इतना ही नहीं ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता और चौड़ाई को लेकर भी समाधान निकालने का आश्वासन दिया गया है।

ईरान के सैन्य दबदबे के बीच इराक, सऊदी और बहरीन में हमलों की लहर, अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला

तेहरान   मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव और भी गहरा होता जा रहा है. खाड़ी देश के इलाके में ईरान भारी पड़ता दिख रहा है. अमेरिका और इजरायल पर काल बनकर टूट पड़ा है. गुरुवार को ईरान ने पर्शियन गल्फ में दो तेल टैंकरों पर सुसाइड अटैक किया, जिसमें एक अमेरिकी स्वामित्व वाली टैंकर थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने यूएई और कुवैत में तीन स्ट्रेटेजिक टारगेट पर हमला किया. सैटेलाइट इमेज में साफ दिख रहा है कि फुजैराह के तेल जोन, शारजाह के इंडस्ट्रियल एरिया और कुवैत के अल-सलेम बेस पर हमले हुए हैं. दुबई के क्रीक हार्बर जैसे रिहायशी इलाकों में ईरानी ड्रोन हमलों ने पेंटागन की नींद उड़ा दी है. इराक से लेकर सऊदी अरब तक फैले इस बारूदी खेल और तेल टैंकरों पर होते लगातार हमलों ने साबित कर दिया है कि ईरान अब आर-पार की जंग के मूड में है, जिससे पूरी दुनिया पर महायुद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा मंडराने लगा है. ईरान ने गुरुवार को इराक के क्षेत्रीय जल क्षेत्र (Territorial Waters) में दो विदेशी तेल टैंकरों ड्रोन हमला किया. इस भीषण हमले में चालक दल के एक सदस्य की मौत हो गई है, जबकि इराकी अधिकारियों ने अब तक 38 लोगों को सुरक्षित बचा लिया है. ईरान ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उसके अंडरवॉटर ड्रोन ने टैंकरों को उड़ा दिया, जिसे इराक ने अपनी संप्रभुता का सीधा उल्लंघन करार दिया है. दुबई के इन इलाके पर हमला दुबई मीडिया ऑफिस ने बताया कि अधिकारियों ने कन्फर्म किया है कि आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है और बिल्डिंग में रहने वाले सभी लोग सुरक्षित हैं. दुबई क्रीक हार्बर के पास एक बिल्डिंग पर ड्रोन गिरने की घटना हुई थी. सिविल डिफेंस टीमों ने ड्रोन के बिल्डिंग से टकराने के बाद लगी छोटी सी आग पर तुरंत काबू पा लिया. अधिकारियों ने कन्फर्म किया कि किसी के घायल होने की खबर नहीं है. अमेरिका के तीन ठिकानों पर ईरान का हमला ईरान ने तेहरान के तेल ठिकानों पर हुए हालिया अमेरिका-इजरायल हमले का करारा जवाब देते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत में तीन रणनीतिक ठिकानों पर भीषण हमला किया है. सैटेलाइट तस्वीरों ने पुष्टि की है कि यूएई के फुजैराह तेल क्षेत्र और शारजाह के औद्योगिक इलाके को निशाना बनाया गया है. इसके अलावा, कुवैत स्थित ‘अल-सालेम’ सैन्य अड्डे पर अमेरिकी लॉजिस्टिक्स सेंटर्स पर भी सीधे प्रहार हुए हैं. ईरान का यह प्रतिशोध न केवल खाड़ी देशों में युद्ध की आग भड़का रहा है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन गया है. तेल टैंकरों पर हमले के बाद इराक का बयान इराकी पोर्ट्स कंपनी के महानिदेशक फरहान अल-फर्तूसी ने बताया कि हमला उस समय हुआ जब माल्टीज़ ध्वज वाला जेफिरोस (Zefyros) और मार्शल द्वीप समूह के ध्वज वाला सेफसी विष्णु (Safesea Vishnu) इराक के खोर अल-जुबैर बंदरगाह के पास साइडलोडिंग क्षेत्र में लंगर डाले हुए थे. चश्मदीदों और सैटेलाइट फुटेज में दोनों टैंकरों को आग की लपटों में घिरा देखा गया. आग इतनी भीषण थी कि तेल रिसाव के कारण समुद्र की सतह पर भी लपटें फैल गईं, जिससे बड़े पर्यावरणीय संकट का खतरा पैदा हो गया है. इराक ने दी ईरान को चेतावनी ईरानी के सरकारी न्यूज एजेंसी ने बताया कि उनकी सेना ने अंडरवॉटर ड्रोन के जरिए इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है. दूसरी ओर, इराक के संयुक्त अभियान कमान के लेफ्टिनेंट जनरल साद मान ने इसे इराकी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है. सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि धमाके के लिए विस्फोटकों से लदी एक ईरानी नाव का भी इस्तेमाल किया गया होगा. हमले के तुरंत बाद, इराक ने एहतियात के तौर पर अपने तेल बंदरगाहों का संचालन रोक दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान आने की आशंका है. ऑयल टैंकर का अमेरिका-ग्रीक कनेक्शन ईरान के हमले का शिकार हुए जहाजों में से एक सेफसी विष्णु का मालिकाना हक अमेरिका की कंपनी सेफसी ट्रांसपोर्ट इंक के पास है. वहीं, दूसरी जहाज जेफिरोस ग्रीस की एक कंपनी का है. चूंकि एक जहाज अमेरिकी कंपनी का है, इसलिए इस घटना में वाशिंगटन के सीधे हस्तक्षेप की संभावना बढ़ गई है. इराक के तेल मंत्रालय ने इसे तनाव बढ़ाने वाला एक चिंताजनक संकेतक बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए वैश्विक समुदाय से संयम और सुरक्षा की अपील की है. खतरनाक जंग की आहट? इराकी मीडिया सेल ने इसे सोची-समझी तोड़फोड़ करार दिया है. वर्तमान में लापता चालक दल के सदस्यों की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन जारी है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान और इराक के बीच यह समुद्री टकराव और बढ़ा, तो फारस की खाड़ी में वैश्विक व्यापार पूरी तरह ठप हो सकता है. इराक ने साफ कर दिया है कि वह इस हमले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखता है.  

बिना पर्चे वाली दवाइयों से किडनी पर असर, AIIMS के डॉक्टर ने बताए जरूरी टेस्ट और यूरिन का रंग

नई दिल्ली World Kidney Day:12 मार्च को वर्ल्ड किडनी डे मनाया जाता है और इस दिन लोगों को किडनी हेल्थ के लिए अवेयर किया जाता है. भारत में किडनी की बीमारियों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है और दुनिया भर में भारत दूसरे नंबर पर है जहां पर सबसे अधिक क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) के मरीज हैं. भारत में किडनी की बीमारी अब सिर्फ बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गई है, 15 साल से ऊपर की आबादी में भी क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) की चपेट में आ रहे हैं. ‘ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज’ के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में लगभग 17% आबादी किसी न किसी रूप में किडनी की समस्या से जूझ रही है. वर्ल्ड किडनी डे पर AIIMS भोपाल के डॉक्यर ने बताया है कि कैसे छोटी-छोटी गलतियां आपकी किडनी फेल कर सकती हैं। यंगस्टर्स में क्यों बढ़ रहा है खतरा? AIIMS भोपाल के यूरोलॉजिस्ट और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. केतन मेहरा ने बताया, ‘किडनी की समस्या सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है. मेरे पास ऐसे कई मरीज आते हैं जो 20 साल के आसपास के हैं या उससे भी कम हैं. ऐसे लोगों में किडनी खराब होने का एक बड़ा कारण ‘ऑटो-इम्यून डिजीज’ है जिसमें शरीर की इम्यूनिटी ही किडनी को नुकसान पहुंचाने लगती है. इसके अलावा, कई मामलों में कारण का पता नहीं चल पाता जिसे मेडिकल भाषा में ‘क्रिप्टोजेनिक’ कहते हैं. युवाओं में सिरदर्द, पैरों में सूजन और धुंधला दिखना जैसे लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है जो बाद में किडनी फेलियर के रूप में सामने आते हैं। पेनकिलर्स बन रहे दुश्मन डॉ. कहते हैं, ‘आजकल सिरदर्द या शरीर में दर्द होने पर लोग बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाइयां खा लेते हैं. ऐसे में हैवी डोज वाली पेनकिलर्स किडनी को सीधा नुकसान पहुंचाती हैं. हालांकि पैरासिटामोल को सुरक्षित माना जाता है लेकिन अन्य हेवी पेनकिलर्स का लगातार सेवन किडनी फेलियर का बड़ा कारण बन रहा है. बिना डॉक्टरी पर्चे के कोई भी दर्द निवारक दवा लेना जोखिम भरा हो सकता है। किडनी की सेहत के लिए जरूरी टेस्ट हमारी किडनी 50% तक खराब होने पर भी खुद को कॉम्पेंसेट (एडजस्ट) कर लेती है, इसलिए लक्षण तब दिखते हैं जब नुकसान ज्यादा हो चुका होता ह इसलिए समय-समय पर जांच ही बचाव का एकमात्र रास्ता है। डॉ. मेहरा ने बताया, ‘अगर आपको ऊपर दिए गए लक्षण महसूस होते हैं तो तुरंत जांच करानी चाहिए. इसके अलावा समय-समय पर कुछ टेस्ट कराते रहें ताकि आपको अपनी किडनी की सेहत का पता चलता रहे। KFT/RFT (किडनी फंक्शन टेस्ट): इसमें मुख्य रूप से सेरम यूरिया और सेरम क्रिएटिनिन की जांच की जाती है। इलेक्ट्रोलाइट्स: ब्लड में सोडियम और पोटेशियम के लेवल की जांच। यूरिन रूटीन: यूरिन में प्रोटीन या अन्य तत्वों की मौजूदगी देखने के लिए। यूरिन भी बताती है किडनी खतरे में है डॉ. मेहरा के अनुसार, ‘किडनी शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का काम करती है. यूरिन का रंग और उसकी फ्रीक्वेंसी किडनी की सेहत का हाल बता देती है इसलिए सभी को अपनी यूरिन के कलर और फिक्वेंसी पर भी ध्यान देना चाहिए। कम यूरिन आना: अगर आपको पहले की तुलना में कम पेशाब आ रहा है, तो यह किडनी के सही से काम न करने का संकेत है। डार्क या कॉफी कलर: यदि यूरिन का रंग गहरा यानी कोला या ब्लैक कॉफी कलर का आ रहा है तो समझ लीजिए कि मामला गंभीर है। झाग या सूजन: चेहरे और पैरों पर सूजन आना इस बात का संकेत है कि किडनी लिक्विड को शरीर से बाहर नहीं निकाल पा रही है और वह अंदर ही जमा हो रहा है।

“सीएम योगी ने हनुमानगढ़ी और रामलला मंदिर में मत्था टेका, विकास कार्यों की समीक्षा की”

 अयोध्या गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को एक दिवसीय दौरे पर अयोध्या पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले संकटमोचन हनुमानगढ़ी मंदिर में दर्शन-पूजन किया और प्रदेश की सुख-शांति की कामना की। इसके बाद सीएम योगी ने श्रीराम मंदिर में श्रीरामलला के चरणों में शीश झुकाया। उन्होंने श्रीराम मंदिर परिसर के निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी भी ली। मुख्यमंत्री ने अपने दौरे की शुरुआत संकटमोचन हनुमानगढ़ी मंदिर से की। उन्होंने यहां विधिवत पूजा-अर्चना करते हुए प्रदेशवासियों के सुखमय जीवन की प्रार्थना की। यहां से निकल कर मुख्यमंत्री श्रीराम मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने श्रीरामलला के दर्शन किए, आरती उतारी और मंदिर की परिक्रमा की। इस अवसर पर उन्होंने मंदिर परिसर में निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी भी ली। श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति और आगामी योजनाओं से अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने संतों से भी की मुलाकात, पूछा कुशलक्षेम मुख्यमंत्री ने हनुमानगढ़ी में संतों से भी मुलाकात की और उनका कुशलक्षेम जाना। मुख्यमंत्री यहां सबसे पहले महंत प्रेमदास जी महाराज से मिले। इसके बाद मुख्यमंत्री ने अन्य संतों से भी मिलकर उनका हालचाल जाना। इससे पहले मुख्यमंत्री के अयोध्या आगमन पर रामकथा पार्क हेलीपैड पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान जनपद के प्रभारी मंत्री/कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, महापौर गिरीश पति त्रिपाठी, विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, रामचंद्र यादव, चंद्रभानु पासवान, अमित सिंह चौहान, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय आदि मौजूद रहे।

ईरान ने अमेरिका से युद्ध खत्म करने की दी बात, तीन शर्तें ट्रंप के लिए बनी चुनौती

वाशिंगटन ईरान के खिलाफ जारी युद्ध अमेरिका के लिए बेहद महंगा साबित हो रहा है. पेंटागन के शुरुआती अनुमान के मुताबिक जंग के पहले छह दिनों में ही अमेरिकी टैक्सपेयर्स के कम से कम 11.3 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं. इस बीच ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका के सामने युद्ध खत्म करने का ऑफर रखा है. लेकिन इसके साथ उन्होंने तीन शर्तें भी रखी हैं. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि तेहरान क्षेत्रीय शांति के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन मौजूदा संघर्ष तभी खत्म हो सकता है जब ईरान के ‘वैध अधिकारों’ को मान्यता दी जाए. उन्होंने साफ किया कि किसी भी समाधान के लिए ईरान की मुख्य मांगों को स्वीकार करना जरूरी होगा। ईरान ने युद्ध खत्म करने की क्या शर्तें रखीं? पेजेश्कियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत की है. उन्होंने दोहराया कि ईरान का मानना है कि मौजूदा संघर्ष की शुरुआत ‘जायनिस्ट शासन और अमेरिका’ की कार्रवाई से हुई. ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि इस संकट के समाधान के लिए तीन अहम बातें जरूरी हैं।     ईरान के वैध अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी जाए.     युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई यानी मुआवजा दिया जाए.     भविष्य में ईरान पर हमले रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए. अमेरिका ईरान से जीत गया- ट्रंप एक तरफ जब पेंटागन कह रहा है कि अरबों डॉलर हर रोज इस युद्ध में खर्च हो रहे हैं. तो वहीं दूसरी तरफ ट्रंप जीत का दावा कर रहे हैं. केंटकी में एक रैली करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्ध अमेरिका जीत चुका है. हालांकि उन्होंने आगे बताया कि ऑपरेशन खत्म नहीं होगा. वहीं उन्होंने दावा किया कि अब तक 58 नौसैनिक जहाज नष्ट किए गए हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका काम पूरा होने तक अभियान जारी रखेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यह युद्ध जल्द खत्म हो सकता है, लेकिन उन्होंने कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई है। युद्ध में अब तक कितनी मौत? अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर संयुक्त हमले शुरू किए थे. इसके बाद से दोनों देशों ने ईरान के कई सैन्य और राजनीतिक ठिकानों पर हमले किए. रिपोर्टों के मुताबिक इन हमलों में 1,200 से ज्यादा ईरानी नागरिकों की मौत हो चुकी है. दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों पर हमले किए, जिनमें 7 अमेरिकी सैनिकों की मौत और 140 से ज्यादा घायल हुए हैं।

रूस से तेल आयात में 50% की वृद्धि, भारत ने युद्ध के संकट में बढ़ाई आयात की मात्रा

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तनाव ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है. विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाली आपूर्ति ठप होने से देश में कुकिंग गैस की भारी किल्लत देखी जा रही है। रूस बना संकटमोचक, कच्चे तेल के आयात में उछाल ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत ने मार्च महीने में रूस से कच्चे तेल की खरीद में 50 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की है. फरवरी में जहां भारत रूस से 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) तेल खरीद रहा था, वहीं मार्च में यह आंकड़ा बढ़कर 15 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया है. भारत अपनी तेल जरूरतों का 88% आयात करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता था. इस रास्ते के बंद होने के बाद भारत ने तेजी से अपनी निर्भरता रूस की ओर स्थानांतरित की है। LPG का असली संकट: क्यों खाली हो रहे हैं सिलेंडर? कच्चे तेल की आपूर्ति को तो रूस के जरिए काफी हद तक संभाल लिया गया है, लेकिन रसोई गैस का संकट अभी भी बरकरार है. विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अपनी जरूरत का लगभग 55-60% LPG आयात करता है. इस आयातित गैस का 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज की खाड़ी से होकर आता है. युद्ध के कारण इस समुद्री मार्ग से आवाजाही लगभग बंद है. भारत प्रतिदिन करीब 10 लाख बैरल LPG की खपत करता है, लेकिन घरेलू उत्पादन केवल 40-45% ही है। आम जनता और व्यापार पर असर गैस की इस किल्लत का सबसे बुरा असर कमर्शियल सेक्टर पर पड़ा है. मुंबई, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे महानगरों में लगभग 20% होटल और रेस्टोरेंट या तो बंद हो गए हैं या उन्होंने अपना मेन्यू सीमित कर दिया है. कई जगहों पर लोग अब पुराने समय की तरह लकड़ी के चूल्हों या इलेक्ट्रिक इंडक्शन का सहारा ले रहे हैं। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए अनिवार्य वस्तु अधिनियम लागू किया है और रिफाइनरियों को उत्पादन 25% बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. हालांकि, स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है. केप्लर के विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले हफ्ते भारत के लिए चुनौतीपूर्ण होंगे. तेल का विकल्प तो मिल गया है, लेकिन LPG की आपूर्ति को सुचारू करना एक बड़ी कूटनीतिक और लॉजिस्टिक चुनौती है।

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