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छत्तीसगढ़ में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी पर सख्त कानून, नकल करने पर 5 लाख जुर्माना और 5 साल की जेल

रायपुर  छत्तीसगढ़ में सीजीपीएससी (CGPSC) भर्ती घोटाले से सबक लेते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश में पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने जा रही है। विधानसभा के वर्तमान बजट सत्र में जल्द ही सरकार “छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक-2026” पेश करेगी। यह कदम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस “गारंटी” को पूरा करने की दिशा में है, जिसमें उन्होंने परीक्षा सुधार का वादा किया था। नकल करते पकड़े जाने पर पांच साल जेल, पांच लाख जुर्माना नए कानून के तहत, भर्ती परीक्षाओं में नकल करते पकड़े जाने पर परीक्षार्थी को एक से पांच साल तक की जेल और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। वहीं, यदि कोई गिरोह या व्यक्ति पेपर लीक या नकल कराने में शामिल पाया जाता है तो उसे कठोर कारावास के साथ एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना देना होगा। कोचिंग संस्थानों पर भी लगेगी लगाम विधेयक में कोचिंग संस्थानों के लिए भी सख्त नियम बनाए जा रहे हैं। अब कोई भी संस्थान चयन की “सौ प्रतिशत गारंटी” देकर युवाओं को प्रलोभन नहीं दे सकेगा। भ्रामक प्रचार या सफलता के झूठे दावे करना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। सरकार का लक्ष्य भर्ती प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म कर युवाओं का विश्वास बहाल करना है। CGPSC 2021–22 भर्ती घोटाले में हुआ था बड़ा खुलासा छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) 2021–22 भर्ती घोटाले में तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ ता। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की ओर से कोर्ट में पेश की गई पूरक चार्जशीट और उसमें शामिल सरकारी गवाह के बयान से सामने आया था कि सोनवानी का कथित वसूली तंत्र एनजीओ से लेकर कोचिंग संस्थानों तक फैला हुआ था। जांच में पहले यह तथ्य सामने आया था कि सोनवानी की पत्नी के एनजीओ जीवीएस में सीजीपीएससी के सहायक परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर कोषाध्यक्ष के रूप में जुड़े हुए थे। इसी एनजीओ के माध्यम से बजरंग पावर से 50 लाख रुपये की वसूली की गई थी। अब जांच में कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। आरोप है कि उत्कर्ष ने अभ्यर्थियों से करीब सवा करोड़ रुपये वसूले।  

एमपी में LPG की कमी, केवल इमरजेंसी के लिए 15% गैस, घरेलू सिलेंडर के लिए 5-7 दिन तक इंतजार

भोपाल   मध्य प्रदेश में रसोई गैस की सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। प्रदेश में LPG की सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। प्रदेश में LPG का स्टॉक सामान्य से भी काफी कम रह गया है। वहीं कई जिलों में घरेलू गैस सिलेंडर की डिलिवरी के लिए लोगों को 5-7 दिन का इंतजार करना पड़ रहा है। सिर्फ 15% स्टॉक, प्राथमिकता के आधार पर मिलेगा सिलेंडर जानकारी के मुताबिक प्रदेश में इस समय कुल मांग के मुकाबले करीब 15% LPG का स्टॉक ही उपलब्ध है। इसे भी मुख्य रूप से इमरजेंसी जरूरतों के लिए सुरक्षित रखा गया है। ऐसे में प्रशासन ने प्राथमिकता के आधार पर घरेलू गैस उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने का फैसला किया है। यही कारण है कि फिलहाल औद्योगिक उपयोग और अन्य परियोजनाओं के लिए गैस सप्लाई सीमित कर दी गई है। LPG की कमी की आंच अब किचन तक पहुंच गई है। 3 दिन से प्रदेश में कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई ठप है। घरेलू सिलेंडर की वेटिंग भी 5 से 7 दिन की हो गई है। ऑयल कंपनियों ने 15% गैस ही उपलब्ध होने की बात कही है, जो इमरजेंसी सेवा और घरों के लिए ही उपयोग हो सकेगी। ऐसे में गुरुवार से पूरे प्रदेश में गैस का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। इधर, ऑयल कंपनियों की सप्लाई के बाद कमर्शियल सिलेंडर सिर्फ अस्पताल, सेना-पुलिस की कैंटीन, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट स्थित कैंटीन, बस स्टैंड स्थित भोजनालय को ही मिलेंगे। हालांकि, खाद्य विभाग को जरूरत के हिसाब से ऑयल कंपनियों को लिस्ट देना होगी। दूसरी ओर होटल, मैरिज गार्डन, सराफा कारीगरों के साथ भोपाल और इंदौर मेट्रो को कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल सकेंगे। दोनों ही शहरों में मेट्रो का काम चल रहा है, जिसमें वेल्डिंग के लिए एलपीजी का उपयोग होता है। भोपाल-इंदौर मेट्रो को भी नहीं मिलेगी गैस गैस की कमी (LPG Shortage) का असर राज्य की बड़ी परियोजनाओं पर भी पड़ रहा है। भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजनाओं को फिलहाल एलपीजी की सप्लाई नहीं दी जाएगी। सरकार का कहना है कि जब तक सप्लाई सामान्य नहीं हो जाती, तब तक गैस का उपयोग सिर्फ जरूरी आवश्यकताओं के लिए ही किया जाएगा। घरेलू सिलेंडर डिलिवरी में देरी गैस एजेंसियों के मुताबिक सप्लाई कम (LPG Shortage) होने की वजह से बुकिंग के बाद सिलेंडर को डिलिवरी में 5-7 दिन तक का समय लग रहा है। कुछ शहरों में यह इंतजार और भी बढ़ सकता है। एजेंसी संचालकों का कहना है कि जैसे ही गैस की नई खेप पहुंचेगी, डिलीवरी की स्थिति सामान्य होने लगेगी। पहले घरों को गैस, फिर इंडस्ट्री को सप्लाई का संकट (LPG Shortage) देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद ही उद्योग और प्रोजेक्ट्स को गैस उपलब्ध कराई जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि कुछ दिनों में ही सप्लाई आने की उम्मीद है, जिसके बाद धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी। स्टॉक इतना कि 48 घंटे तैसे-जैसे निकलेंगे भोपाल होटल एसोसिएशन के तेजकुल पाल सिंह पाली का कहना है कि राजधानी में ही डेढ़ हजार से ज्यादा होटल और रेस्टॉरेंट हैं। जहां हर रोज 2 से ढाई हजार सिलेंडर उपयोग होते हैं। जिन होटल या रेस्टॉरेंट में स्टॉक है, वहां 48 घंटे ही तैसे-जैसे निकल पाएंगे। इसके बाद होटल और रेस्टॉरेंट बंद हो जाएंगे। सरकार से मांग की है कि होटल, रेस्टॉरेंट और रेहड़ी वालों को कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति की जाए, लेकिन सरकार ने सिर्फ इमरजेंसी सेवा के लिए गैस देने की बात कही है। मार्च में ही 20 हजार से ज्यादा शादियां प्रदेश में मार्च में ही 20 हजार से ज्यादा शादियां होना हैं। इनमें कमर्शियल सिलेंडर का उपयोग होता है, लेकिन ये 3 दिन से नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में शादियों में भोजन पकाने में दिक्कतें खड़ी हो रही हैं। भोपाल में 3 हजार आभूषण कारीगर हैं। इन्हें महीने में 9000 हजार सिलेंडर की जरूरत होती है। दाल, मसाले और ड्राई फ्रूट्स हुए महंगे ईरान-इजरायल के बीच युद्ध का असर भोपाल के बाजारों में भी दिख रहा है। भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री एवं कैट के पूर्व प्रवक्ता विवेक साहू ने बताया कि दालों में तेजी बनी हुई है। हरी मूंग करीब 100 रुपए प्रति क्विंटल, मसूर 100 रुपए, चना 150 रुपए, मूंग मोगर लगभग 125 रुपए और चना दाल करीब 100 रुपए प्रति क्विंटल तक तेज बताई जा रही है। वहीं, तूअर दाल के भाव में भी करीब 200 से 300 रुपए प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मसालों के बाजार में भी तेजी देखने को मिल रही है। थोक व्यापारी अनिल कुकरेजा के मुताबिक, मिर्ची लगभग 50 रुपए प्रति किलो और धनिया करीब 40 रुपए प्रति किलो तक महंगी हो गई है। वहीं थोक ड्राई फ्रूट व्यापारी किशोर राजदेव के अनुसार, पिस्ता करीब 250 रुपए प्रति किलो, अंजीर 100 रुपए प्रति किलो, केसर लगभग 20 हजार रुपए प्रति किलो और दाल चीनी करीब 5 रुपए प्रति किलो तक महंगी हो चुकी है। ईरान के रास्ते आती हैं सामग्री भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री के मुताबिक, पिस्ता, अंजीर, दाल, चीनी सहित कई ड्राई फ्रूट्स ईरान के रास्ते भारत आते हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय हालात का सीधा असर इनके दामों पर पड़ा है। वहीं, भारत से जाने वाले कुछ उत्पादों के दामों में गिरावट भी देखी जा रही है। खोपरा पाउडर करीब 50 रुपए, मखाने 100 रुपए और हरी इलायची लगभग 200 रुपए प्रति किलो तक सस्ती हुई है। पैकेजिंग व्यापार से जुड़े मोतीलाल आडवाणी ने बताया, क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने से कच्चा माल महंगा हो गया है, जिसके कारण पैकेजिंग से जुड़े सामानों के रेट में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसके चलते प्लास्टिक से बने अधिकांश पैकेजिंग आइटम महंगे हो गए हैं।

मुख्यमंत्री साय का बयान: प्रशिक्षु न्यायाधीश लोकतंत्र के तीसरे स्तंभ में होंगे महत्वपूर्ण

प्रशिक्षु न्यायाधीश लोकतंत्र के तीसरे स्तंभ के रूप में निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका : मुख्यमंत्री  साय छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के प्रशिक्षु न्यायाधीशों ने मुख्यमंत्री से की सौजन्य मुलाकात रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित उनके कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, बिलासपुर के प्रशिक्षु न्यायाधीशों ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री  साय ने सभी प्रशिक्षु न्यायाधीशों को न्यायिक सेवा में चयन के लिए बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का महत्वपूर्ण और सशक्त स्तंभ है। आने वाले समय में आप सभी के कंधों पर समाज और न्याय व्यवस्था से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारियां होंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आप सभी निष्पक्षता, संवेदनशीलता और संविधान के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए इन जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करेंगे। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि न्यायपालिका आमजन के अधिकारों की रक्षा और न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है।  इस अवसर पर विधि विभाग की प्रमुख सचिव मती सुषमा सांवत, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की संचालक मती निधि शर्मा तिवारी सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

108 एम्बुलेंस सेवा ने किया कमाल, समय रहते पहुंचकर हजारों मरीजों की जान बचाई

“108 एम्बुलेंस बनी जीवन रक्षक – समय पर पहुंचकर हजारों मरीजों की बचाई जान” दो महीनों में 13,977 सड़क दुर्घटना पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाया, गोल्डन आवर में मिली चिकित्सा सहायता भोपाल  मध्यप्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में 108 एम्बुलेंस सेवा घायलों के लिए एक सच्ची जीवन रक्षक सेवा बनकर सामने आई है। आपातकालीन कॉल मिलते ही तेज़ी से घटनास्थल पर पहुंचकर 108 एम्बुलेंस की टीम न केवल घायलों को अस्पताल पहुंचा रही है बल्कि मौके पर ही प्राथमिक उपचार देकर कई गंभीर मामलों में मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जनवरी और फरवरी 2026 के दौरान प्रदेशभर में 13,977 सड़क दुर्घटना (रोड ट्रैफिक एक्सीडेंट) मामलों में 108 एम्बुलेंस ने घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई। इसमें जनवरी 2026 में 7,335 और फरवरी 2026 में 6,642 दुर्घटना पीड़ितों को एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया। विशेष बात यह है कि इन मामलों में औसतन हर दिन 230 से अधिक घायलों को 108 एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से त्वरित चिकित्सा सहायता मिल रही है। समय पर एम्बुलेंस पहुंचने के कारण कई गंभीर घायलों की जान बच पाई। गोल्डन आवर में जीवन रक्षक साबित हो रही 108 सेवा स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं में “गोल्डन आवर” यानी दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस समय के भीतर यदि मरीज को प्राथमिक उपचार और अस्पताल तक पहुंचा दिया जाए तो जीवन बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। 108 एम्बुलेंस सेवा इसी गोल्डन आवर में तेजी से पहुंचकर घायलों को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने का कार्य कर रही है, जिससे यह सेवा आम नागरिकों के लिए “जीवन रेखा” साबित हो रही है। प्रशिक्षित टीम मौके पर देती है प्राथमिक उपचार 108 एम्बुलेंस में तैनात प्रशिक्षित ईएमटी (Emergency Medical Technician) और पायलट की टीम घटनास्थल पर पहुंचते ही मरीज की स्थिति का आकलन कर प्राथमिक उपचार प्रदान करती है। कई मामलों में गंभीर रूप से घायल मरीजों को मौके पर ही ऑक्सीजन सपोर्ट, ब्लीडिंग कंट्रोल और बेसिक लाइफ सपोर्ट देकर उनकी स्थिति को स्थिर किया जाता है, जिसके बाद उन्हें नजदीकी अस्पताल तक पहुंचाया जाता है। इन जिलों में सबसे अधिक दुर्घटना मामले प्रदेश के कई जिलों में दुर्घटनाओं के मामले अधिक दर्ज किए गए। इनमें सागर में 844, इंदौर में 591, भोपाल में 576, जबलपुर में 510, रीवा में 499 और सतना में 451 मामलों में 108 एम्बुलेंस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। इसके अलावा धार, छिंदवाड़ा, खरगोन, सीधी, उज्जैन और विदिशा सहित कई जिलों में भी बड़ी संख्या में एम्बुलेंस सेवाएं प्रदान की गईं। 15 से 20 मिनट में पहुंच रही एम्बुलेंस आपातकालीन कॉल प्राप्त होने के बाद 108 एम्बुलेंस की टीम औसतन 15 से 20 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंच रही है। तेज़ प्रतिक्रिया और बेहतर समन्वय के कारण दुर्घटना पीड़ितों को समय पर उपचार मिल पा रहा है। सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या को कम करने के लिए यातायात नियमों का पालन, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग, तेज गति से वाहन न चलाना और मोबाइल फोन का उपयोग न करना बेहद जरूरी है। आंकड़ों में 108 एम्बुलेंस सेवा ▪ जनवरी 2026 – 7,335 सड़क दुर्घटना मामलों में घायलों को सहायता ▪ फरवरी 2026 – 6,642 सड़क दुर्घटना मामलों में घायलों को सहायता ▪ दो महीनों में कुल – 13,977 दुर्घटना पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाया ▪ औसतन प्रतिदिन – 230 से अधिक घायलों को मिली त्वरित सहायता ▪ औसत रिस्पॉन्स टाइम – 15 से 18 मिनट में घटनास्थल पर पहुंची एम्बुलेंस सबसे अधिक दुर्घटना मामले वाले जिले ▪ सागर – 844 ▪ इंदौर – 591 ▪ भोपाल – 576 ▪ जबलपुर – 510 ▪ रीवा – 499 ▪ सतना – 451 जीवन रक्षक उपकरणों से लैस हैं 108 एम्बुलेंस मध्यप्रदेश में संचालित 108 एम्बुलेंस अत्याधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों से लैस हैं। 108 एम्बुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर, मध्यप्रदेश, तरुण सिंह परिहार ने बताया कि प्रदेशभर में संचालित सभी एम्बुलेंस में आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं और एम्बुलेंस स्टाफ पूरी निष्ठा एवं प्रतिबद्धता के साथ अपनी सेवाएं दे रहा है। एम्बुलेंस में अम्बुवैग, ब्लड प्रेशर मापने की मशीन, पल्स ऑक्सीमीटर, ग्लूकोमीटर (शुगर जांच उपकरण), थर्मोमीटर तथा जीवन रक्षक ऑक्सीजन की समुचित व्यवस्था रहती है। इसके साथ ही आपातकालीन स्थिति में उपयोग होने वाली आवश्यक दवाइयां भी उपलब्ध रहती हैं, जिनका उपयोग प्रशिक्षित इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) द्वारा विशेषज्ञ चिकित्सकों के मार्गदर्शन में किया जाता है। 108 एम्बुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर, मध्यप्रदेश, तरुण सिंह ने आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में निजी वाहन के बजाय एम्बुलेंस सेवा का उपयोग करें, क्योंकि एम्बुलेंस में जीवन रक्षक उपकरणों के साथ प्रशिक्षित चिकित्सा स्टाफ मौजूद होता है, जो रास्ते में ही मरीज को प्राथमिक उपचार प्रदान कर उसकी स्थिति को स्थिर करने में मदद करता है।उन्होंने कहा कि किसी भी दुर्घटना या स्वास्थ्य आपात स्थिति में तुरंत 108 एम्बुलेंस सेवा पर कॉल करें। हमारी संस्था और एम्बुलेंस कर्मचारी पूरी प्रतिबद्धता के साथ नागरिकों की सेवा में सदैव तत्पर हैं।

मुख्यमंत्री मोहन का ऐतिहासिक कदम, हटा का नाम बदला, 405 करोड़ के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन

सागर   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जहां बेटियां जन्म से लेकर आजीवन पूजी जाती हैं, वह सिर्फ़ और सिर्फ़ अपना मध्यप्रदेश ही है। नारी सदैव पूजनीय हैं। हम अपने देश को भी जननी मानकर भारत माता की जय कहकर पूजते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बेटियों और महिलाओं के समग्र विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। सरकार की योजनाएं महिलाओं के जीवन में हर कदम पर पक्की सहेली बनकर उनके साथ खड़ी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को दमोह जिले के हटा में महिला सशक्तिकरण सम्मेलन सह शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना के कारण प्रदेश के लिंगानुपात में व्यापक सुधार हुआ है। साथ ही बेटियों के प्रति समाज की सोच में भी सकारात्मक परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहनों की प्रगति और आशीर्वाद से ही प्रदेश में समृद्धि आ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से दमोह जिले के लिए 405 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की लागत के 13 विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। इसमें लगभग 232 करोड़ रूपए की लागत से हटा से गैसाबाद सिमरिया मार्ग (एसएच-55) के 73 किमी मार्ग के टू-लेन रोड के रूप में उन्नयन एवं चौड़ीकरण, 74 करोड़ 44 लाख रूपए की लागत से मडियादो से बर्धा किशनगढ़ सड़क निर्माण और 48 करोड़ 89 लाख रूपये की लागत से मड़ियादो से रजपुरा मार्ग के निर्माण कार्य का भूमि-पूजन शामिल है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विरासत से विकास के मूल मंत्र को अपनाते हुए प्रदेश में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। विगत वर्ष बुंदेलखंड क्षेत्र के वैश्विक पर्यटन स्थल खजुराहो में स्टेट कैबिनेट की मीटिंग कर सरकार ने 27 हजार 500 करोड़ रूपए से अधिक के विकास कार्यों को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हाल में ही सर्वाइकल कैंसर की वैक्सीन का टीकाकरण शुरू हुआ है। उन्होंने सभी माताओं-बहनों से अपील करते हुए कहा कि अपनी 14 वर्ष से अधिक उम्र कीबेटियों को यह टीका अवश्य लगवाएं और दूसरे लोगों को भी ऐसा ही करने के लिए जागरूक करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है, इससे हमारी बेटियों का भविष्य आजीवन सुरक्षित रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एचपीवी वैक्सीन का टीका लगवाने वाली हटा की 8 बेटियों को मंच से प्रमाण पत्र भी सौंपे। मुख्यमंत्री ने पात्र हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किए।     हटा अ‍ब बनेगा शिवकाशी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हटावासियों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी करते हुए हटा का नाम बदलकर इसे शिवकाशी नाम देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि हटा श्री श्री 1008 देवश्री गौरीशंकर की नगरी है, इसलिए अब इसे शिवकाशी के रूप में ही जाना जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हटावासियों को और भी कई सौगातें दीं। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि हटा में नवीन आईटीआई भवन बनाया जाएगा। हटा में सर्वसुविधायुक्त नवीन नगर पालिका भवन एवं भव्य गीता भवन भी निर्मित किया जाएगा।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में कार्य का दायदा बहुत विस्तृत है, इसलिए हटा के महाविद्यालय में अब कृषि, उद्यानिकी एवं पशुपालन संकाय/विषय भी पढ़ाये जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विनती-मड़ियादौ-चौरईया मार्ग का चौड़ीकरण कराया जाएगा। हटा के शासकीय पीएमश्री महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल में इंडोर ऑडिटोरियम बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पटेरा में नया महाविद्यालय खोले जाने की घोषणा करते हुए कहा कि मड़ियादो एवं देवरी फतेहपुर में नया हायर सेकेण्डरी भवन बनाया जाएगा। इसी प्रकार नगर परिषद तेंदूखेड़ा में तारादेही तिराहे से चौरई तक मार्ग चौड़ीकरण एवं सौन्दर्यीकरण कार्य कराए जाएंगे। नगर परिषद तेंदूखेड़ा में वार्ड क्रमांक 3 में सी.सी. रोड निर्माण कराया जाएगा। गहरा से चौपरा-सिमरी तक मार्ग का चौड़ीकरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दमोह जिले में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना के जरिए बुंदेलखंड के हर खेत को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। खेतों में फसलें लहलहाएंगी, अब हटा से कोई रोजगार की तलाश में बाहर नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा अब 55 लाख हैक्टेयर तक पहुंच गया है। इसमें 10 लाख हैक्टेयर रकबा तो पिछले 2 साल में ही बढ़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में महिला कल्याण से जुड़ी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाना है। बेटियों और महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने के लिए हम कोई कसर नहीं रखेंगे। महिलाओं की खुशहाली में ही प्रदेश की खुशहाली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने 2 दिन पहले महिला दिवस मनाया है। अब आगे नवरात्रि आ रही है। राज्य सरकार नारी कल्याण के लिए समर्पित है। प्रदेश की एक करोड़ 25 लाख से अधिक लाड़ली बहनों को हर माह सम्मानपूर्वक 1500 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द लोकसभा और विधानसभा में बहनों को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। राज्य में नगरीय निकायों में यह आरक्षण 50 प्रतिशत तक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हटा विधायिका उमादेवी खटीक को जन्मदिवस की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे हटावासियों की दीर्घकाल तक सेवा करती रहें।  हटा विधायिका खटीक ने स्वागत संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहली बार हटा विधानसभा क्षेत्र आए हैं। साथ में 405 करोड़ रूपए के विकास कार्यों की सौगातें भी लाये हैं। उन्होंने कहा कि नारी पूरे समाज के विकास की प्रमुख आधारशिला होती है। आज हमारी महिलाएं शिक्षा, सेना और हर क्षेत्र में देश को गौरव दिला रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में माताओं-बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मजबूती से काम हो रहा है। प्रदेश में हर बेटी का सम्मान और हर महिला को रोजगार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। आज दमोह जिले के लिए अनेक विकास कार्यों का भूमि-पूजन पूरा हुआ है। इससे इस क्षेत्र के विकास को नए पंख लगेंगे।  कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री एवं दमोह जिले के प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार, प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) … Read more

तमिलनाडु में 24 बंधुआ श्रमिकों का रेस्क्यू, बैतूल और हरदा के 24 श्रमिक सुरक्षित घर लौटे

तमिलनाडु में बंधुआ बनाए गए 24 श्रमिकों का प्रशासन ने कराया सफल रेस्क्यू बैतूल के 20 श्रमिक और हरदा के 4 श्रमिकों की सुरक्षित हुई घर वापसी सभी ने राज्य सरकार का माना आभार प्रत्येक को मिलेगी 30-30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता बैतूल रेलवे स्टेशन पर कलेक्टर एवं एसपी ने किया श्रमिकों का आत्मीय स्वागत भोपाल मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीबों के कल्याण के कार्य निरंतर कर रही हैं। तमिलनाडु के इरोड जिले में बंधुआ बनाकर रखे गए बैतूल जिले के 20 और हरदा के 4 श्रमिकों को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, जिला प्रशासन तथा वनवासी कल्याण आश्रम  के त्वरित एवं समन्वित प्रयासों से सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया। सभी श्रमिकों के बैतूल रेलवे स्टेशन पहुंचने पर स्थानीय कलेक्टर  नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी एवं पुलिस अधीक्षक  वीरेंद्र जैन ने आत्मीय स्वागत किया। वनवासी कल्याण आश्रम के जिला अध्यक्ष  महेश्वर भलावी, जिला श्रम पदाधिकारी  धम्मदीप भगत सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। स्टेशन पर सभी श्रमिकों की पहचान सुनिश्चित की गई। कलेक्टर  सूर्यवंशी ने श्रमिकों से चर्चा करते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि प्रशासन द्वारा उनके सुरक्षित घर पहुंचने की समुचित व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए राजस्व, पुलिस और श्रम विभाग निरंतर उनके संपर्क में रहेंगे। साथ ही श्रम पदाधिकारी को निर्देशित किया कि श्रमिकों से संपर्क बनाए रखते हुए आर्थिक सहायता स्वीकृति हेतु आवश्यक दस्तावेज प्राप्त किए जाएं। रेलवे स्टेशन से सभी श्रमिकों को उनके गृह ग्राम तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई तथा भोजन की भी व्यवस्था की गई।सुरक्षित वापसी पर श्रमिकों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन  आभार व्यक्त किया। जिला श्रम पदाधिकारी  धम्मदीप भगत ने बताया कि उक्त श्रमिक काम करने के लिए तमिलनाडु के इरोड जिले गए थे, जहां होली पर्व पर अवकाश मांगने पर उन्हें छुट्टी नहीं दी गई और बंधुआ बनाकर कार्य कराया जा रहा था। मामले की जानकारी राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य  प्रकाश ऊईके माध्यम से मिलते ही बैतूल जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए श्रम, पुलिस एवं राजस्व विभाग के संयुक्त समन्वय से इरोड जिला प्रशासन से संपर्क स्थापित किया और सभी श्रमिकों को मुक्त कराया। रेस्क्यू किए गए प्रत्येक श्रमिक को शासन द्वारा 30-30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की जाएगी, जिससे वे अपने जीवन को पुनः व्यवस्थित कर सकें। जिला प्रशासन द्वारा उनके पुनर्वास एवं आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने की भी बात कही गई है। उन्होंने बताया कि कुल 24 श्रमिकों में से 4 हरदा जिले तथा 20 बैतूल जिले के निवासी हैं। बैतूल के सभी श्रमिक भीमपुर ब्लॉक के काबरा, बोरकुंड, बीरपुरा और बासिंदा ग्राम के रहने वाले हैं। हरदा जिले के चार श्रमिकों को सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था की गई। उक्त कार्य में समाजसेवी  प्रवीण ढोलके ओर विक्रांत कुमरे ने भी सक्रिय भूमिका निभाई ।  

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरेंगे भारतीय जहाज, जयशंकर और अराघची के बीच हुई महत्वपूर्ण चर्चा

 नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष (ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध) के बीच भारत को बड़ी राहत मिली है. सूत्रों ने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से हुई टेलीफोनिक बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी गई है. ये भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है। सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि विदेश मंत्री ने ईरान के अराघची से बात के बाद ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी है. दोनों देशों के विदेश मंत्री की बातचीत का उद्देश्य इस अहम समुद्री मार्ग को खुला रखना था, जिससे कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो। रूस और फ्रांस के विदेश मंत्रियों से भी की बात सूत्रों ने ये भी बताया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने केवल ईरान ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अन्य प्रमुख शक्तियों के साथ भी तालमेल बिठाया. उन्होंने रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो से भी इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा की. इन चर्चाओं का उद्देश्य समुद्री व्यापारिक मार्गों को खुला रखना और वैश्विक सप्लाई चेन को टूटने से बचाना था.भारत की इस सक्रिय विदेश नीति ने ये साबित कर दिया है कि तनाव के वक्त में भी वह अपने हितों की रक्षा के लिए सभी पक्षों के साथ संवाद स्थापित करने में सक्षम है। USA-यूरोप और इजरायल पर जारी रहेगा प्रतिबंध ईरान ने यह विशेष रियायत भारत को ऐसे वक्त में दी है जब अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों को इस मार्ग पर कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। भारत को छूट देते हुए ईरान ने ये भी स्पष्ट किया है कि अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों पर फिलहाल प्रतिबंध जारी रहेंगे, लेकिन भारतीय टैंकर सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर सकेंगे. ये भारत की कूटनीतिक सफलता है, क्योंकि वर्तमान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों का ट्रैफिक 90% तक कम हो गया है और कई देशों के टैंकर फंस गए हैं।

LPG संकट के बीच PM मोदी की अपील, गृह मंत्रालय ने जिला स्तर पर अलर्ट और कंट्रोल रूम की घोषणा की

नई दिल्ली देश में एलपीजी सप्लाई में कमी आने की अफवाहों के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने अपील की है कि पैनिक में न आएं। उन्होंने कहा कि हम लोग पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष के चलते पैदा हुए संकट से निपटने में सफल होंगे। उन्होंने कहा कि किसी को भी परेशान होने की जरूरत नहीं है और सभी के हितों की रक्षा की जाएगी। तमिलनाडु में एनडीए की मीटिंग को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने यह अपील की। इसके अलावा होम मिनिस्ट्री की ओर से कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। ऐसा इसलिए ताकि एलपीजी सप्लाई पर नजर रखी जा सके और जमाखोरी करने वालों पर ऐक्शन हो। गृह मंत्रालय का कहना है कि किसी भी तरह के पैनिक के हालात ना बनें क्योंकि घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई पहले की तरह ही जारी है। यदि लोग पैनिक में खरीद ना बढ़ाएं तो स्थिति सही रहेगी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा समेत देश के तमाम राज्यों में सरकारें अलर्ट पर हैं और जिला प्रशासन की ओर से लगातार लोगों को अफवाहों से बचने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि गैस की किल्लत नहीं है और यदि कोई जमाखोरी करेगा तो उस पर ऐक्शन लिया जाएगा। सरकार की ओर से पहले ही एस्मा लागू किया जा चुका है। इसके तहत घरेलू गैस सप्लाई को प्राथमिकता दी गई है और बीते 6 महीनों से चली आ रही आपूर्ति के औसत को बनाए रखे का निर्णय हुआ है। इस बीच पीएम मोदी ने किसी भी तरह की अफवाह से बचने को कहा है। उन्होंने कहा कि मैं जनता से अपील करता हूं कि सही सूचना को ही आगे बढ़ाएं। बिना किसी वेरिफिकेशन के सूचनाओं को आगे प्रसारित ना करें। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल हे संकट ऊर्जा की सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। उन्होंने बुधवार को कहा, ‘मैं तमिलनाडु के लोगों से अपील करूंगा कि अफवाहों से बचें। सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। हमें उम्मीद है कि हम संकट से उबरेंगे, जैसा कोरोना के दौर में हुआ था। हमारी विचारधारा इंडिया फर्स्ट की है। किसी भी तरह के पैनिक में रहने की जरूरत नहीं है। सभी के हितों की रक्षा करने के लिए सरकार प्रयास कर रही है।’ पीएम बोले- कोरोना महामारी की तरह इस संकट से भी उबरेंगे पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना महामारी के दौर में 140 करोड़ भारतीयों ने दिखाया था कि हमारा देश कितना परिपक्व है। मुझे भरोसा है कि हम इस संकट से आसानी से उबर जाएंगे, जैसा कोरोना में हुआ था। पीएम मोदी की यह टिप्पणी अहम है क्योंकि देश भर से ऐसी खबरें आ रही हैं, जिसमें कहा जा रहा है कि एलपीजी की सप्लाई प्रभावित है और लोग पैनिक परचेजिंग करने में जुटे हैं। इसी के कारण होम मिनिस्ट्री ने कंट्रोल रूम बना दिए हैं और दिन भर नजर रखी जा रही है। फैक्ट चेक करने में भी जुटे मंत्रालय, कंट्रोल रूम ऐक्टिव होम मिनिस्ट्री ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और पेट्रोलियम मिनिस्ट्री से संपर्क साधा है। तीनों विभाग मिलकर फैक्ट चेक करने और सही सूचना देने के काम में जुटे हैं। इस बीच हालात संभालने के लिए केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और पुलिस प्रमुखों के साथ मीटिंग की है। ऐसा इसलिए ताकि कानून व्यवस्था को बनाए रखा जा सके और अफवाहों से उपजे हालातों से भी निपटने में मदद मिले।

रामविचार नेताम के विभागों को बड़ी सौगात, 50 हजार 537 करोड़ रुपये की अनुदान मांगें मंजूर

मंत्री  रामविचार नेताम के विभागों के लिए 50 हजार 537 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें पारित नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बस्तर अब विकास की तेज उड़ान के लिए तैयार :  रामविचार नेताम  “संकल्प” से ही हासिल करेंगे विकास की सिद्धि मत्स्य बीज उत्पादन में छत्तीसगढ़ अब देश में 5वें स्थान पर  नवा रायपुर में स्थापित जनजातीय संग्रहालय के अध्ययन के लिए आ रहे देश-विदेश के विशेषज्ञ बीजापुर में बनेगा 500 सीटर आवासीय प्रयास विद्यालय रायपुर   छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज कृषि एवं अनुसूचित जनजाति विकास मंत्री  रामविचार नेताम के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 50 हजार 537 करोड़ 98 लाख 68 हजार रूपए की अनुदान मांगे पारित की गईं। इसमें कृषि विभाग के लिए 7075 करोड़ 90 लाख 56 हजार रूपए, पशुपालन विभाग के लिए 656 करोड़ 12 लाख 49 हजार रूपए, मछली पालन विभाग के लिए 110 करोड़ 67 लाख 30 हजार रूपए की अनुदान मांगें शामिल हैं। इसी प्रकार आदिम जाति कल्याण के लिए 157 करोड़ 05 लाख 58 हजार रूपए, अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिए 39,568 करोड़ 18 लाख 20 हजार रूपए, अनुसूचित जनजाति उपयोजना से संबंधित लोक निर्माण कार्य-सड़कें और पुल के लिए 1596 करोड़ 89 लाख रूपए, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा से संबंधित व्यय के लिए 447 करोड़ 30 लाख रूपए, अनुसूचित जनजाति उपयोजना से संबंधित लोक निर्माण कार्य-भवन के लिए 215 करोड़ 69 लाख 19 हजार रूपए, अनुसूचित जनजाति उपयोजना के अंतर्गत त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं को वित्तीय सहायता के लिए 453 करोड़ 91 लाख 68 हजार रूपए तथा अनुसूचित जनजाति उपयोजना के अंतर्गत नगरीय निकायों को वित्तीय सहायता के लिए 256 करोड़ 24 लाख 68 हजार रूपए शामिल हैं।  कृषि एवं संबद्ध विभागों तथा अनुसूचित जनजाति विकास विभाग की अनुदान मांगों पर हुई चर्चा का उत्तर देते हुए  रामविचार नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ का मूलभाव खेती-किसानी से जुड़ा है। यह हमारी आत्मा में बसी हुई है। राज्य में 70-80 प्रतिशत लोगों की कृषि पर निर्भरता है। छत्तीसगढ़ जनजातीय बाहुल्य प्रदेश भी है। राज्य में विश्व स्तरीय जनजातीय संग्रहालय बनाकर हमने इतिहास में जगह नहीं पाने वाले जनजातीय नायकों को स्थान दिया है। हमारे इस विश्व स्तरीय डिजिटल संग्रहालय के अध्ययन के लिए देश-विदेश के विशेषज्ञ और अधिकारी आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बस्तर अब विकास की तेज उड़ान के लिए तैयार है। केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के लगातार प्रयासों से नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब बस्तर अमन-चैन और खुशहाली के रास्ते की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को हमने “संकल्प” की थीम पर तैयार किया है। इस “संकल्प” से ही हम राज्य के विकास की सिद्धि को हासिल करेंगे।   नेताम ने सदन में कहा कि कृषि उन्नति योजना के माध्यम से हम राज्य के किसानों का धान 3100 रूपए प्रति क्विंटल की दर से खरीद रहे हैं। धान के अलावा अन्य फसलें लेने वाले किसानों को हर साल 10 हजार रूपए की आदान राशि दे रहे हैं। इससे दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किसानों के हित में लगातार लिए गए कल्याणकारी फैसलों से खेती अब लाभ का व्यवसाय हो गया है। साथ ही खेती का रकबा बढ़ रहा है, किसान समृद्ध और किसान खुशहाल हो रहे हैं।  आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में खाद्य पोषण सुरक्षा और बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। प्रदेश के कम वर्षा वाले क्षेत्रों एवं पड़ती भूमि में मसूर, तिवरा, चना जैसे दलहनी फसलों की खेती के लिए उन्नत बीज तैयार करने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक फसली जमीन को दो फसली बनाने के काम को अभियान के रूप लेना चाहिए। जैविक खेती को बढ़ावा देने हमारी सरकार निरंतर कार्य कर रही है। पहले भी हमारी सरकार ने गरियाबंद, दंतेवाड़ा और सुकमा को जैविक जिला घोषित किया है, शेष जिलों में भी जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में केन्द्र सरकार के सहयोग से सरसों, अरहर, मूंग और उड़द की खरीदी समर्थन मूल्य पर करने की व्यवस्था की जा रही है।   नेताम ने सदन में बताया कि किसानों के लिए हमारी सरकार ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए 100 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है। वहीं प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की सोच के अनुरूप किसानों को समृद्ध बनाने कम पानी में अधिक फसल लेने की तकनीकों की जानकारी भी दी जा रही है। किसानों को “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।   नेताम ने कहा कि राज्य में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के विकास के लिए सभी काम किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि दूध का उत्पादन बढ़ाने एनडीडीबी के साथ एमओयू किया गया है। आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में हरे चारे के विकास के लिए 7.50 करोड़, चिलिंग प्लांट के लिए 50 लाख, शूकर वितरण के लिए 5 करोड़ और बकरी वितरण के लिए 5 करोड़ का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में मत्स्य बीजों के उत्पादन में बेहतर काम हो रहा है। छत्तीसगढ़ इसके उत्पादन में राष्ट्रीय स्तर पर अब 6वें से 5वें स्थान पर आ गया है। उन्होंने बताया कि धमधा के राजपुर में मत्स्य कॉलेज के लिए भवन और छात्रावास निर्माण के लिए इस बजट में 3 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।   नेताम ने अनुसूचित जनजाति विकास विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के जवाब में कहा कि वनांचलों में बड़ी संख्या में आश्रम-छात्रावासों के भवनों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है। विगत दो वर्षों में 167 आश्रम-छात्रावास भवन स्वीकृत किए गए हैं, जिनके निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। उन्होंने बताया कि राज्य की अति पिछड़ी जनजातियों को आत्मनिर्भर बनाने कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में बीजापुर में 500 सीटर आवासीय प्रयास विद्यालय बनाने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से हमारी सरकार प्रदेश के चिन्हांकित क्षेत्रों में जनजातीय वर्गों के विकास के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। इस योजना के तहत अनेक गांवों का कायाकल्प हुआ है।           कृषि … Read more

पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर फायरिंग की कोशिश नाकाम, पुलिस के दो जवानों ने बदल दी गोली की दिशा

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर बुधवार रात एक शादी समारोह के दौरान जानलेवा हमला हुआ, लेकिन पुलिस के दो जांबाज जवानों- (एक इंस्पेक्टर और एक सब-इंस्पेक्टर) ने अपने साहस से गोली की दिशा बदल दी और हत्या की इस कोशिश को नाकाम कर दिया, जिससे फारूक अब्दुल्ला की जान बाल-बाल बच गई. घटना के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए. वहीं, अब खुफिया सूत्र ने इस घटना को  सुरक्षा में गंभीर चूक करार दिया है। पुलिस के अनुसार, घटना जम्मू के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश में रॉयल पार्क बैंक्वेट हॉल में हुई, जहां फारूक अब्दुल्ला और उप-मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी पार्टी नेता बी.एस. चौहान के बेटे की शादी में शामिल होने गए थे. समारोह खत्म होने के बाद जब दोनों नेता बाहर निकल रहे थे, तभी 63 वर्षीय आरोपी कमल सिंह ने पीछे से आकर पॉइंट-ब्लैंक रेंज से फारूक अब्दुल्ला पर गोली चला दी। सुरक्षाकर्मियों ने बदली गोली की दिशा पुलिस ने बताया कि आरोपी ने अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से एक गोली चलाई, लेकिन सुरक्षा में तैनात दो पुलिसकर्मियों- एक इंस्पेक्टर और एक सब-इंस्पेक्टर- ने तुरंत आरोपी पर झपट्टा मारा. उन्होंने उसे दबोच लिया और गोली चलने के बावजूद उसकी दिशा बदल दी, जिससे गोली किसी को नहीं लगी. आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया और उसके पास से इस्तेमाल की गई पिस्तौल भी बरामद कर ली गई। आरोपी का चौंकाने वाला खुलासा पुलिस ने बयान जारी कर कहा, ‘फारूक अब्दुल्ला पर हत्या की कोशिश की गई थी. सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई की और हमले को नाकाम कर दिया. आरोपी को हिरासत में ले लिया. आरोपी की पहचान जम्मू के पुरानी मंडी निवासी कमल सिंह पुत्र अजीत सिंह के रूप में हुई है। जांच में पता चला है कि आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह पिछले 20 साल से फारूक अब्दुल्ला को निशाना बनाने का इंतजार कर रहा था। उमर अब्दुल्ला ने उठाए सवाल घटना के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (फारूक अब्दुल्ला के बेटे) ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘अल्लाह मेहरबान है. मेरे पिता को बहुत करीब से बचाया गया. क्लोज प्रोटेक्शन टीम ने गोली को डिफ्लेक्ट किया और हत्या के प्रयास को नाकाम कर दिया। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए कि Z+ सुरक्षा के बावजूद हमलावर इतने करीब कैसे पहुंच गया। सीसीटीवी फुटेज में पूरा घटनाक्रम कैद हो गया है, जिसमें दिखता है कि आरोपी पीछे से आता है, पिस्तौल तानता है और गोली चलाता है, लेकिन सुरक्षाकर्मी तुरंत उसे पकड़ लेते हैं. फारूक अब्दुल्ला और सुरिंदर चौधरी दोनों सुरक्षित हैं और किसी को चोट नहीं आई। सुरक्षा में गंभीर चूक है घटना वहीं, घटना के बाद अब खुफिया सूत्रों ने इस घटना को गंभीर सुरक्षा चूक बताया है. सूत्रों कहना है कि क्लोज प्रोटेक्शन टीम (CPT) को प्रोटेक्टी के इतने करीब किसी को आने नहीं देना चाहिए था. NSG टीम ने तब हरकत में आई, जब सुरक्षा में सेंधमारी हो चुकी थी और आरोपी ने गोली चला दी थी। सूत्रों ने खुलासा किया कि बाहरी घेरे की सुरक्षा और कार्यक्रम स्थल के सैनिटाइजेशन की जिम्मेदारी जम्मू-कश्मीर पुलिस की थी, जिसने अपनी ड्यूटी में ढिलाई की. इसके कारण हमलावर हथियार के साथ वेन्यू के अंदर पहुंच गया. हालांकि, NSG टीम ने हमला होने के बाद त्वरित कार्रवाई की, लेकिन सुरक्षा घेरा टूटने और गोली चलने के बाद उनका एक्शन में आना प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े करता है।

जीएसटी 2.0 से आम जनता को राहत, कर राजस्व में भी रिकॉर्ड वृद्धि: वित्त मंत्री ओपी चौधरी

वित्त मंत्री  ओपी चौधरी के विभागों के लिए 11 हजार 470 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें पारित समुचित वित्तीय प्रबंधन के लिए हमारी सरकार दृढ़ संकल्पित :  वित्त मंत्री  ओपी चौधरी जीएसटी 2.0 से आम जनता को राहत, कर राजस्व में भी रिकॉर्ड वृद्धि पंजीयन विभाग में बड़े सुधार, रजिस्ट्री प्रक्रिया हुई सरल और पारदर्शी  रायपुर  छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज वित्त मंत्री  ओपी चौधरी के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु 11 हजार 470 करोड़ 62 लाख 50 हजार रुपए की अनुदान मांगें पारित कर दी गईं। इनमें वित्त विभाग के लिए 9 हजार 630 करोड़ 30 लाख 20 हजार रुपए, आवास एवं पर्यावरण विभाग के लिए 01 हजार 247 करोड़ रुपए, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के लिए 82 करोड़ 49 लाख 60 हजार रुपए तथा वाणिज्यिक कर विभाग के लिए 510 करोड़ 82 लाख 70 हजार रुपए शामिल हैं। अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता, तकनीकी सुधार और समावेशी विकास के माध्यम से राज्य को मजबूत आर्थिक आधार देना है।  आवास, पर्यावरण और नवा रायपुर के विकास पर सरकार का फोकस छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में आवास एवं पर्यावरण विभाग की मांगों पर चर्चा के दौरान मंत्री  ओपी चौधरी ने विभागीय उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज के विकास की मजबूत नींव सुरक्षित और सम्मानजनक आवास पर टिकी होती है, इसलिए राज्य सरकार नागरिकों को बेहतर आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के समय गृह निर्माण मंडल की 442 करोड़ रुपये की 3219 संपत्तियां लंबे समय से अविक्रित थीं और मंडल पर शासकीय कॉलोनी निर्माण के लिए 735 करोड़ रुपये का ऋण था। राज्य शासन ने ऋण के एकमुश्त भुगतान के लिए बजट में व्यवस्था कर मंडल की वित्तीय स्थिति में सुधार किया। मंत्री  चौधरी ने कहा कि लंबे समय से अविक्रित संपत्तियों के विक्रय के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू की गई है। इसके तहत अब तक 1410 संपत्तियों का लगभग 210 करोड़ रुपये में विक्रय किया जा चुका है। भविष्य की परियोजनाओं के लिए मंडल ने मांग आधारित निर्माण प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत पर्याप्त बुकिंग मिलने के बाद ही नए आवासों का निर्माण शुरू किया जाएगा। मंत्री  चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का उद्देश्य केवल मकान बनाना नहीं है, बल्कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, सम्मानजनक और सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराना है। मंडल द्वारा बेहतर वित्तीय स्थिति में आने उपरांत प्रदेश भर में नवीन प्रोजेक्ट प्रारंभ किए गए हैं। उन्होंने कहा कि मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि विगत दो वर्षों में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मण्डल द्वारा प्रदेश के 33 में से 27 जिलों में 3069 करोड़ के 78 नवीन प्रोजेक्ट की लॉचिंग  की गई है जिसके अंतर्गत 16782 नवीन प्रापर्टी निर्माण का लक्ष्य है। जल्द ही मंडल द्वारा शेष जिलों में भी नवीन प्रोजेक्ट प्रारंभ किया जावेगा। मंडल के इस प्रयास को जनता का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। बुकिंग प्रारंभ करने के लिए  राज्य स्तरीय आवास मेला का आयोजन नवम्बर 2025 में किया गया, जिस दौरान 305 करोड़ की 1477 संपत्ति की बुकिंग केवल तीन दिनों में प्राप्त हुई। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए प्रयासों की जानकारी देते हुए मंत्री  ओपी चौधरी ने बताया कि विगत दोे वर्ष में पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। परिवहन के दौरान कच्चे माल, फ्लाई ऐश एवं अन्य ठोस अपशिष्ट के उड़ने एवं गिरने से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम के लिये छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा मानक संचालन प्रक्रिया (एस.ओ.पी.) जारी किया गया है, जिसमें फ्लाई ऐश के समुचित प्रकार से ढककर परिवहन किये जाने का प्रावधान है। उक्त एस.ओ.पी. 01 अगस्त 2024 से प्रभावशील है। एस.ओ.पी. के उल्लंघन की लगातार मानिटरिंग की जा रही है तथा उल्लंघन की स्थिति में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की जाती है।  उद्योगों द्वारा जनित फ्लाई ऐश के निष्पादन के मानिटरिंग हेतु जी.पी.एस. तथा जियोटैगिंग के साथ फ्लाई ऐश के परिवहन/भू-भराव की मानिटरिंग हेतु इण्डस्ट्रीयल वेस्ट मैनेजमेंट एण्ड मानिटरिंग सिस्टम (आई.डब्ल्यू.एम.एम.एस.) विकसित किया गया है। आई.डब्ल्यू.एम.एम.एस. प्रारंभ होने के पश्चात् प्रदेश में कुल 1 लाख 44 हजार 291 ट्रीप की गई है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा राज्य में स्थापित होने वाले उत्सर्जन और प्रदूषण की रियल-टाईम निगरानी करना और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से CG Nigrani  पोर्टल विकसित किया गया है। इस पोर्टल पर कुल 124 उद्योगों को इस सिस्टम से जोड़ा गया है। इन उद्योगों में IoT आधारित डिवाइस लगाये गये हैं, जो Continuous Emission Monitoring System (CEMS), Effluent Quality Monitoring Systems और Continuous Ambient Air Quality Monitoring System  के माध्यम से डेटा एकत्रित करते हैं। यह सिस्टम 17 प्रकार के अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों में स्थापित किया गया है। मंत्री  चौधरी ने कहा कि CG Nigrani  सिस्टम की मदद से उद्योगों के उत्सर्जन और प्रदूषण के स्तर की लगातार ऑनलाईन निगरानी प्रारंभ की गई है। यदि किसी उद्योग का उत्सर्जन निर्धारित अनुमेय सीमा (Permissible Limit) से अधिक हो जाता है तो यह सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करता है। इसके अलावा यदि प्रदूषण मानकों का उल्लंघन होता है तो इस सिस्टम के माध्यम से उद्योगों को नोटिस जारी किया जाता है। उन्होंने कहा कि हमारा राज्य केवल आधुनिक विकास की दिशा में ही नहीं बढ़ रहा है, बल्कि अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के माध्यम से सिरपुर क्षेत्र के विकास के लिए लगभग 36 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि नवा रायपुर में HNLU, IIIT, IIM, जैसे प्रतिष्ठित संस्थान संचालित हो रहे हैं। हमने यह प्रयास किया कि नवा रायपुर को न केवल राज्य का बल्कि देश के शैक्षणिक केन्द्र के रूप में विकसित किया जाये। यह बताते हुए मुझे गर्व हो रहा है कि NIFT] NIELIT] NFSU  जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों की स्थापना भी नवा रायपुर में होने जा रहा है। उन्होंने बताया कि नरसी मोनजी प्रबंधन अध्ययन संस्थान (NMIMS) की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो चुका है … Read more

ऑयल क्राइसिस से बचाव: पहाड़ी गुफाओं में सुरक्षित रखे गए भारत के रणनीतिक तेल भंडार

नईदिल्ली  मिडिल ईस्ट में ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्तों पर खतरे की खबरों के बीच पूरी दुनिया की नजर तेल सप्लाई पर टिक गई है. ऐसे में भारत को लेकर भी एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि अगर वैश्विक सप्लाई अचानक रुक जाए तो देश कितने दिनों तक अपने भंडार के भरोसे चल सकता है. बहुत कम लोगों को पता है कि भारत ने इस तरह की आपात स्थिति के लिए बेहद खास इंतजाम कर रखे हैं. देश ने पहाड़ों की मजबूत चट्टानों के भीतर विशाल गुफाओं जैसी संरचनाओं में कच्चे तेल का भंडार छिपाकर रखा है. ये गुफाएं दरअसल भारत के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व हैं. इन्हें युद्ध, आपदा या वैश्विक सप्लाई रुकने जैसी स्थिति में इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है. दरअसल इस पूरी योजना की शुरुआत अचानक नहीं हुई थी. इसकी कहानी 1991 के उस आर्थिक संकट से जुड़ी है जब गल्फ वॉर के दौरान भारत के सामने गंभीर ऊर्जा संकट खड़ा हो गया था. उस समय ऐसी खबरें सामने आई थीं कि देश के पास तेल का स्टॉक बेहद सीमित रह गया था. कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि भारत के पास सिर्फ तीन दिनों का तेल बचा था, जबकि कुछ में इसे एक सप्ताह या दस दिन बताया गया. असल समस्या यह थी कि तेल खरीदने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खत्म हो रहा था. उस संकट ने भारत को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है. 1991 के संकट ने क्यों बदली भारत की सोच     1991 के समय भारत के पास जो तेल स्टॉक था वह असल में तेल कंपनियों का कमर्शियल भंडार था. यानी वह रोजमर्रा की सप्लाई के लिए रखा जाता था. सरकार के पास अलग से ऐसा कोई रणनीतिक भंडार नहीं था जिसे सिर्फ आपात स्थिति में इस्तेमाल किया जा सके. हालांकि उस समय भी तेल कंपनियां सरकारी नियंत्रण में ही थीं, लेकिन फिर भी संकट के समय अलग से सुरक्षित रिजर्व होना जरूरी समझा गया.     दुनिया के कई बड़े देशों ने पहले से ही अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) बना रखे थे. इनका मकसद यही होता है कि अगर युद्ध, वैश्विक संकट या प्राकृतिक आपदा की वजह से तेल सप्लाई रुक जाए तो देश कुछ समय तक अपने भंडार के सहारे चल सके. इसे ऐसे समझा जा सकता है जैसे पुराने स्कूटरों में पेट्रोल टैंक में एक रिजर्व सिस्टम होता था. जब टैंक का पेट्रोल खत्म हो जाता था तो रिजर्व खोलकर नजदीकी पेट्रोल पंप तक पहुंचा जा सकता था. उसी तरह यह सरकारी रिजर्व होता है जिसे सिर्फ संकट की स्थिति में ही खोला जाता है.     तेल कंपनियों के कमर्शियल भंडार आम तौर पर बड़े-बड़े तेल टैंकों या डिपो में रखे जाते हैं. लेकिन रणनीतिक भंडार के लिए ऐसी जगह चाहिए होती है जहां युद्ध या हमले का असर कम से कम हो. अगर कोई दुश्मन देश तेल डिपो को निशाना बना दे या किसी आपदा में डिपो नष्ट हो जाए तो संकट और बढ़ सकता है. इसलिए तय किया गया कि रणनीतिक भंडार जमीन के ऊपर नहीं बल्कि चट्टानों के भीतर बनाए जाएं.     इसके लिए कई भौगोलिक मानकों पर विचार किया गया. पहली शर्त थी कि वहां मजबूत चट्टानें हों, जिनमें बड़ी गुफाएं बनाई जा सकें. दूसरी शर्त यह थी कि उन चट्टानों से तेल रिसना नहीं चाहिए. तीसरी शर्त थी कि उस इलाके में भूकंप का खतरा कम हो. चौथी शर्त यह थी कि समुद्री बंदरगाह पास हो, ताकि जहाजों से तेल आसानी से लाया जा सके. और पांचवीं शर्त यह थी कि रिफाइनरी भी ज्यादा दूर न हो, ताकि पाइपलाइन से तेल पहुंचाया जा सके. भारत के पास तेल भंडारों की स्थिति:     भारत के पास करीब 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) है.     यह भंडार आपात स्थिति में लगभग 9 से 10 दिनों की तेल जरूरत पूरी कर सकता है.     भारत ने ये रणनीतिक तेल भंडार पहाड़ों की चट्टानों के भीतर गुफाओं जैसी संरचनाओं में बनाए हैं.     देश में फिलहाल तीन प्रमुख स्थानों पर ये भंडार मौजूद हैं- विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पडूर.     इन भंडारों का इस्तेमाल युद्ध, वैश्विक तेल संकट, प्राकृतिक आपदा या सप्लाई रुकने जैसी स्थिति में किया जाता है.     भारत सरकार इन्हें इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (ISPRL) के जरिए संचालित करती है.     भारत अब दूसरे चरण में ओडिशा के चंडीखोल और पडूर विस्तार के जरिए इस क्षमता को और बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है. पहले चरण में तीन जगहों पर कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता के भंडार बनाने का फैसला हुआ. भारत ने कहां बनाए रणनीतिक तेल भंडार     सभी मानकों को देखते हुए दक्षिण भारत के तटीय इलाकों को चुना गया. सरकार ने इस काम के लिए एक अलग कंपनी बनाई इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (ISPRL). इस कंपनी को जिम्मेदारी दी गई कि वह देश के लिए रणनीतिक तेल भंडार तैयार करे.     पहले चरण में तीन जगहों पर कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता के भंडार बनाने का फैसला हुआ. पहला भंडार आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में बनाया गया जिसकी क्षमता 1.33 मिलियन मीट्रिक टन है. दूसरा कर्नाटक के मंगलुरु में 1.5 मिलियन मीट्रिक टन का भंडार बनाया गया. तीसरा कर्नाटक के ही पडूर (उडुपी के पास) में 2.5 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता का बनाया गया.     इन तीनों भंडारों को पहाड़ों की मजबूत चट्टानों के भीतर गुफाओं की तरह बनाया गया है. विशाखापत्तनम में ग्रेनाइट चट्टानों के भीतर सुरंग जैसी संरचनाएं बनाई गई हैं. यह स्थान इसलिए चुना गया क्योंकि यहां भूकंप का खतरा कम है और पास में बंदरगाह तथा HPCL की रिफाइनरी मौजूद है. यह भंडार 2015 में तैयार हुआ और इसमें इराक से लाकर तेल भरा गया.     मंगलुरु में बने भंडार को बसाल्ट चट्टानों के भीतर बनाया गया है. यह 2016 में तैयार हुआ और इसमें अबू धाबी से तेल लाकर रखा गया. तीसरा भंडार पडूर में बनाया गया जो 2018 में पूरा हुआ. यहां भी बसाल्ट … Read more

देश में LPG का हाल: डेढ़ करोड़ घरों में PNG कनेक्शन, हर घर में मिलेगा दो सिलेंडर

नई दिल्ली युद्ध की वजह से कई देशों में तेल और गैस की किल्लतें बढ़ती जा रही हैं. भारत संकट से पहले अलर्ट हो गया है, और जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. सरकार का कहना है कि देश के लोग घबराएं, फिलहाल तेल और गैस को लेकर कोई संकट नहीं है। दरअसल, 140 करोड़ आबादी वाले देश भारत तेल और रसोई गैस के लिए काफी हदतक दूसरे देशों पर निर्भर है. यानी सीधा रसोई से जुड़ा हुआ मामला है, गैस की किल्लत की खबर से लोग परेशान हैं. लेकिन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हालात पर नजर बनाए हुए हैं, और जरूरी आदेश दे रहे हैं, ताकि देश में रसोई गैस की कोई किल्लत न हो। केंद्र सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार देश में करीब 33 करोड़ घरेलू LPG कनेक्शन हैं. अधिकतर घरों में दो सिलेंडर होते हैं, इस हिसाब से देश में LPG सिलेंडर कुल संख्या करीब 66 करोड़ तक हो सकती है. इनमें से बड़ी संख्या प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत दिए गए कनेक्शनों की है, जिससे ग्रामीण और गरीब परिवारों तक भी रसोई गैस की पहुंच बढ़ी है. इसके अलावा देश में कमर्शियल सिलेंडर की संख्या भी करोड़ों में है।  देश में 33 करोड़ गैस कनेक्शन  सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014 में देश में LPG कनेक्शनों की संख्या लगभग 14.5 करोड़ थी. पिछले 10 वर्षों में यह संख्या करीब दोगुनी होकर 33 करोड़ तक पहुंच गई है. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत करीब 10.4 करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त या सब्सिडी वाले LPG कनेक्शन दिए गए हैं. गांव-गांव तक रसोई गैस की उपलब्धता बढ़ाने के लिए देशभर में गैस एजेंसियों और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार किया गया है. दूसरी ओर, शहरों में पाइप के जरिए घरों तक गैस पहुंचाने की व्यवस्था यानी PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) भी धीरे-धीरे बढ़ रही है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार फिलहाल देश में करीब 1.5 करोड़ घरों में PNG कनेक्शन उपलब्ध हैं. यह सुविधा मुख्य रूप से महानगरों और बड़े शहरों में उपलब्ध है,  जहां सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के जरिए घरों तक पाइपलाइन से गैस पहुंचाई जाती है.  PNG नेटवर्क का इस्तेमाल केवल घरों तक ही सीमित नहीं है. इसके अलावा देशभर में करीब 45 हजार से ज्यादा कमर्शियल प्रतिष्ठान, जैसे होटल और रेस्टोरेंट, 20 हजार से ज्यादा उद्योग भी पाइप गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे ऊर्जा आपूर्ति अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित मानी जाती है, क्योंकि इसमें सिलेंडर की जरूरत नहीं होती है.  PNG की सप्लाई बड़े शहरों में  यही नहीं, सरकार आने वाले वर्षों में PNG नेटवर्क का और विस्तार करने की योजना बना रही है. पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन परियोजनाओं के माध्यम से 2032 तक करीब 12.5 करोड़ घरों तक PNG पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए देश के कई नए शहरों और जिलों में गैस पाइपलाइन बिछाने का काम जारी है.  हालांकि फिलहाल भारत में रसोई गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा LPG सिलेंडरों के जरिए ही पूरा होता है, क्योंकि PNG नेटवर्क अभी सीमित शहरों तक ही पहुंच पाया है. भारत में साल 2025 के आसपास लगभग 31–33 मिलियन मीट्रिक टन LPG की खपत हुई. इस हिसाब से लगभग 85 हजार टन LPG की रोजाना खपत होती है. जबकि भारत की कुल प्राकृतिक गैस खपत लगभग 188 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (MMSCMD) के आसपास है.  इसके अलावा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत के पास करीब 8 हफ्ते का तेल भंडार उपलब्ध है. भारत के तेल आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है और इसका एक महत्वपूर्ण भाग होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से गुजरता है. जिस वजह से वैश्विक स्तर पर संकट दिख रहा है.  बता दें, भारत ने जोखिम कम करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में अपनी रणनीति बदली है. देश ने रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से भी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है. लेकिन अगर वैश्विक स्तर पर लंबे समय तक तेल संकट बना रहता है तो इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों, महंगाई और देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है. इस बीच राहत की बात ये है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखी जा रही है. ब्रेंट क्रूड की कीमत सोमवार की हाई 120 डॉलर प्रति बैरल से फिसलकर 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है.

रसोई गैस संकट LIVE: सिलेंडर की किल्लत, ब्लैक मार्केट में कीमत 300 रुपये प्रति किलो तक पहुंची

नई दिल्ली अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान की जंग का असर भारत के करोड़ों लोगों पर पड़ता दिख रहा है. पश्चिम एशिया में जारी इस युद्ध के बीच उत्तर प्रदेश, बिहार से लेकर तेलंगाना और तमिलनाडु तक लाखों लोग एलपीजी सिलेंडर की किल्लत से जूझ रहे हैं. एलपीजी सप्लाई बंद होने जयपुर स्थित बोरोसिल के कारखाने में काम बंद करना पड़ा और कंपनी प्रबंधन ने करीब तीन हजार श्रमिकों को बुधवार से काम पर नहीं आने के लिए कह दिया है. वहीं दिल्ली हाईकोर्ट की लॉयर्स कैंटीन में एलपीजी गैस सिलेंडर उपलब्ध न होने के कारण फिलहाल मुख्य भोजन (मेन कोर्स) तैयार और परोसा नहीं जा रहा है। बिहार सहित कई राज्यों में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई रोक दी गई है. वहीं पटना से लेकर अयोध्या तक कई लोग सुबह ही गैस एजेंसी के गोदाम के बाहर लाइन लगाकर खड़े हैं. कई लोगों की शिकायत है कि गैस सिलेंडर की बुकिंग करवाने के बावजूद 4-5 दिनों तक एलपीजी सिलेंडर उन्हें नहीं मिल पाई है। रसोई गैस की सप्लाई में दिक्कत की खबरों के सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. पूरे देश में केंद्र सरकार ने ईसीए यानी एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू कर दिया है. केंद्र सरकार ने एलपीजी और सीएनजी की आपूर्ति तय करने के लिए बड़ा फैसला लिया है. सरकार के मुताबिक, आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी और कुछ उद्योगों को सीमित गैस आपूर्ति मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने भी कैबिनेट मीटिंग में मंत्रियों को साफ निर्देश दिए कि पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर आम आदमी पर बिल्कुल नहीं पड़ना चाहिए. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस वैश्विक उथल-पुथल के समय जनता का भरोसा बनाए रखना सबसे ज़रूरी है. प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि तेल की क़ीमतें स्थिर हैं, ये बात लोगों तक पहुंचाएं और ये भी बताएं कि देश में तेल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. प्रधानमंत्री ने ये भी कहा कि भारत ने सप्लाई चेन मैनेजमेंट सिस्टम इस संकट को ध्यान में रखकर तैयार किया है, इसे भी जनता तक पहुंचाया जाए। भारत सरकार ने दावा किया है कि इस जंग का तेल की कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा और देश में घरेलू उपभोक्ता के लिए गैस की कोई कमी नहीं है. सरकार की तरफ से बताया गया कि भारत में फ़िलहाल पेट्रोल और डीज़ल के दाम स्थिर ही रहेंगे वो नहीं बढ़ेंगे. वहीं गैस क़ीमतों में हुआ 60 रुपये का इजाफा मौजूदा हालत की वजह से नहीं, बल्कि पिछले साल की अंडरकवरी की वजह से बढ़े हैं। दरअसल इजरायल और अमेरिका के खिलाफ ईरान की जंग के चलते मिडिल ईस्ट के प्रमुख ऊर्जा परिवहन मार्गों में आई बाधाओं के चलते पिछले एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में शनिवार को ही इजाफा किया गया था. घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कीमत में 60 रुपये और कमर्शियल रसोई गैस सिलेंडरों की कीमत में 115 रुपये की बढ़ोतरी की गई। न रसोई गैस की बुकिंग हो रही, न एलपीजी सिलेंडर मिल रहा… ब्लैक मार्केट में 300 रुपये किलो पहुंचा दाम एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत से देशभर के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. नोएडा के रहने वाले लोगों का कहना है कि पिछले 5-6 दिनों से ऑनलाइन गैस बुकिंग नहीं हो पा रही है. जब लोग गैस एजेंसी से संपर्क करते हैं तो उन्हें बताया जाता है कि सिस्टम में तकनीकी खराबी है. वहीं एजेंसी पर जाकर पूछने पर भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है. गैस बुक कराने के लिए लोगों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है, लेकिन इसके बाद भी सिलेंडर मिलने की कोई गारंटी नहीं है। गैस बुकिंग में दिक्कत के चलते लोगों को ब्लैक में गैस खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक किलो गैस के लिए 300 से 400 रुपये तक देने पड़ रहे हैं. गैस बुकिंग कराने आई महिलाओं ने बताया कि एजेंसी वाले उनका नंबर लिखकर बाद में फोन करने की बात कहते हैं, लेकिन कई दिनों बाद भी न तो फोन आता है और न ही गैस मिलती है. लोगों का कहना है कि एजेंसी के बाहर कहा जा रहा है कि गैस उपलब्ध नहीं है, जबकि इलाके में ब्लैक में गैस बेची जा रही है। एक महिला ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे दिल्ली-नोएडा कमाने आए हैं, भूखे रहने के लिए नहीं. अगर सारी कमाई गैस खरीदने में ही खर्च हो जाएगी तो परिवार का गुजारा कैसे होगा. गैस की कमी के कारण कई परिवारों को मजबूरन बाहर से खाना खरीदकर गुजारा करना पड़ रहा है. रसोई गैस हुई खत्म तो इंडक्शन खरीदने भागे लोग, दुकानों पर भीड़ रसोई गैस संकट की खबरों के बीच अब इलेक्ट्रिकल शॉप्स पर इंडक्शन की मांग में इजाफा देखने को मिल रहा है. दिल्ली के दरियागंज की एक इलेक्ट्रिकल शॉप्स के मालिक विकास ने बताया कि पिछले दो तीन दिन से इंडक्शन की मांग और इंक्वायरी बढ़ गई है. इंडक्शन खरीदने आए एक ग्राहक मोहम्मद शफी ने बताया कि गैस की दिक्कत है इसलिए खरीद रहे हैं. गैस की बुकिंग नहीं हो पा रही है. फिलहाल के लिए गैस है, लेकिन सेफ साइड के लिए ले रहे हैं, अगर नहीं मिली तो इंडक्शन रहे।  दिल्ली हाईकोर्ट की कैंटीन में एलपीजी खत्म, मेन कोर्स हुआ बंद दिल्ली हाईकोर्ट की लॉयर्स कैंटीन में एलपीजी गैस सिलेंडर उपलब्ध न होने के कारण फिलहाल मुख्य भोजन (मेन कोर्स) तैयार और परोसा नहीं जा रहा है. कैंटीन प्रबंधन की ओर से जारी सूचना के अनुसार, वर्तमान में एलपीजी गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते मुख्य भोजन की तैयारी संभव नहीं हो पा रही है. गैस सप्लाई कब तक बहाल होगी, इसकी अभी कोई जानकारी नहीं है. गैस उपलब्ध होते ही मुख्य भोजन की तैयारी फिर से शुरू कर दी जाएगी. हालांकि इस दौरान सैंडविच, सलाद, फ्रूट चाट और अन्य हल्के नाश्ते उपलब्ध रहेंगे और इन्हें परोसा जाता रहेगा। एलपीजी सप्लाई बंद होने जयपुर का बोरोसिल प्लांट ठप, 3000 मजदूरों की कर दी गई छुट्टी अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान की जंग का असर अब भारत के उद्योगों पर भी दिखने लगा है. जयपुर के गोविंदगढ़ क्षेत्र में स्थित बोरोसिल लिमिटेड की फैक्ट्री में एलपीजी गैस की … Read more

सरकार का कदम: संपत्ति रजिस्ट्री का खर्च सरकार देगी, योजनाओं के फीडबैक के लिए हजारों युवाओं को लगाया मैदान में

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में 33,000 करोड़ रुपए से अधिक की विभिन्न विभागों की योजनाओं को निरंतरता दी गई। इस बड़े वित्तीय आवंटन के माध्यम से प्रदेश में जारी विकास कार्यों और जन-कल्याणकारी योजनाओं को निर्बाध रूप से जारी रखने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार भूमि स्वामित्व योजना के तहत 46 लाख लोगों की संपत्ति रजिस्ट्री का स्टांप शुल्क खुद वहन करेगी, जिससे सरकार पर करीब 3000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च आएगा। कैबिनेट ने प्रदेश में योजनाओं के जमीनी फीडबैक के लिए सीएम यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस प्रोग्राम शुरू करने का फैसला भी किया है। यह कार्यक्रम तीन साल तक चलेगा। इसके लिए हर विकास खंड से 15 युवाओं का चयन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण स्कूल के माध्यम से होगी। कार्यक्रम तीन साल तक चलेगा     हर विकासखंड से 15 युवाओं का चयन होगा     कुल 4865 युवाओं की नियुक्ति होगी     युवाओं को 10 हजार रुपए मासिक मानदेय मिलेगा एक साल के अनुबंध पर नियुक्ति होगी इन युवाओं की जिम्मेदारी अपने विकासखंड में संचालित योजनाओं का फीडबैक और जमीनी रिपोर्ट तैयार करना होगी। यह रिपोर्ट सीधे सुशासन एवं नीति विश्लेषण स्कूल के माध्यम से मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों तक पहुंचेगी। इस कार्यक्रम पर करीब 170 करोड़ रुपए खर्च होंगे। भूमि स्वामित्व योजना क्या है     भूमि स्वामित्व योजना की शुरुआत केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने 2020 में की थी।     ड्रोन सर्वे के जरिए गांवों की जमीन का सीमांकन किया जाता है।     ग्रामीणों को प्रॉपर्टी कार्ड (स्वामित्व कार्ड) दिए जाते हैं।     इससे भूमि विवाद कम होते हैं।     बैंक से लोन लेना आसान होता है। अनुबंध पर रखे जाएंगे युवा चयनित युवाओं को 10 हजार रुपए मासिक मानदेय दिया जाएगा और एक साल के अनुबंध पर सेवा में रखा जाएगा। कुल 4865 युवाओं का चयन होगा और इस कार्यक्रम पर तीन साल में करीब 170 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इन युवाओं की जिम्मेदारी अपने विकासखंड में संचालित योजनाओं की जमीनी स्थिति और फीडबैक की रिपोर्ट तैयार करना होगी। यह रिपोर्ट सीधे सुशासन स्कूल के माध्यम से मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों तक पहुंचेगी। इसके लिए डैशबोर्ड और पोर्टल भी विकसित किया जाएगा। रजिस्ट्री का खर्च उठाएगी सरकार भूमि स्वामित्व योजना में प्रदेश के करीब 46 लाख ग्रामीण नागरिकों को जमीन का स्वामित्व मिलेगा। इस योजना की शुरुआत केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने वर्ष 2020 में की थी। ड्रोन तकनीक के माध्यम से ग्रामीण आबादी की जमीन का सीमांकन कर प्रॉपर्टी कार्ड (कानूनी स्वामित्व कार्ड) दिए जाते हैं, जिससे भूमि विवाद कम होते हैं और बैंक से ऋण लेना भी आसान होता है। सात विभागों की योजनाएं 2031 तक जारी कैबिनेट ने ऊर्जा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, योजना-आर्थिक एवं सांख्यिकी, जनजातीय कार्य और महिला-बाल विकास सहित सात विभागों की योजनाओं को 2031 तक जारी रखने के लिए 33,240 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। इसमें महिला आयोग, बाल संरक्षण आयोग, छात्रवृत्ति योजनाएं, आरडीएसएस, दिव्यांगों के लिए प्रोफेशनल टैक्स में छूट और स्टार्टअप के लिए 600 करोड़ रुपए का प्रावधान शामिल है। स्वास्थ्य केंद्रों में 51 पदों पर भर्ती मंत्री काश्यप ने बताया कि मैहर, निमरानी और कैमोर में पीएफआईसी के तहत अस्पतालों के लिए स्टाफ भर्ती की जाएगी। श्रम विभाग के माध्यम से डॉक्टर और अन्य कर्मचारियों सहित कुल 51 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इसके अलावा चितरंगी में व्यवहार न्यायाधीश के पद को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है। एक जिला-एक उत्पाद को मिलेगा बढ़ावा राज्य सरकार ने एक जिला-एक उत्पाद योजना के तहत स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग के लिए 37.50 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार की है। इस योजना में एमएसएमई, उद्योग, कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग संयुक्त कार्ययोजना के तहत काम करेंगे।                          

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