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क्या अंतरराष्ट्रीय कानून किसी देश को दूसरे देश को हड़पने की अनुमति देता है?

संयुक्त राष्ट्र दुनियाभर में अभी दो जंगे चल रही हैं, जिनकी चर्चा हर जगह हो रही है। इसमें पहला युद्ध तो अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हो रहा है, जबकि दूसरा रूस-यूक्रेन के बीच चल रहा है। रूस-यूक्रेन जंग फरवरी 2022 से ही जारी है। इस युद्ध में रूस ने यूक्रेन के कई हिस्सों को कब्जाया है, जिसमें डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया जैसी जगहें शामिल हैं। इसके अलावा वह 2014 से ही क्रीमिया पर कब्जा करके बैठा है, जो कभी यूक्रेन का हिस्सा हुआ करता था। ये तो बस एक ताजा उदाहरण है, जिसमें किसी देश ने दूसरे देश के हिस्सों को कब्जाया है। अगर इतिहास उठाकर देखें तो ऐसे कई उदाहरण मिलेंगे, जहां किसी देश ने पहले दूसरे मुल्क के खिलाफ जंग छेड़ दी। फिर उस मुल्क के किसी हिस्से को कब्जा लिया। ईरान के साथ चल रही अमेरिका-इजरायल की जंग में भी ऐसा होने की संभावना जताई जा रही है। अब यहां सवाल उठता है कि क्या कोई देश ऐसा कर सकता है? क्या किसी देश को दूसरे मुल्क की जमीन पर जबरन कब्जा करने का अधिकार है? संयुक्त राष्ट्र के नियम इस संबंध में क्या कहते हैं? अगर आप इंटरनेशनल रिलेशन के स्टूडेंट हैं या फिर सरकारी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो फिर आपको इसका जवाब भी मालूम होना चाहिए। देश कब्जाने को लेकर UN के नियम क्या हैं? संयुक्त राष्ट्र (UN) एक ऐसी संस्था है, जिसका प्रमुख काम दुनिया में शांति बनाए रखना है, ताकि युद्ध की संभावना पैदा ना हो। मगर फिर भी कई देशों के बीच युद्ध होते रहते हैं। UN के 193 सदस्य देश हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पालन करना होता है। इस चार्टर को आप UN का संविधान मान सकते हैं, जिसमें बताया गया है कि किसी देश को क्या करना है और क्या नहीं करना है। इसी चार्टर में इस बात की भी जानकारी दी गई है कि क्या कोई देश दूसरे देश के किसी हिस्से पर कब्जा कर सकता है या नहीं। UN चार्टर के आर्टिकल 2 में इस बारे में विस्तार से बात की गई है। इस आर्टिकल में 7 प्वाइंट्स हैं, जिसमें आर्टिकल 2(4) में कब्जे से संबंधित बातें हैं। आर्टिकल 2(4) में कहा गया है, ‘सभी सदस्य देश अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में किसी भी मुल्क की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल प्रयोग या धमकी से परहेज करेंगे, या किसी भी अन्य ऐसे तरीके से परहेज करेंगे जो संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों के साथ मेल नहीं खाता हो।’ आसान भाषा में कहें तो इस आर्टिकल में कहा गया है कि दूसरे देशों पर ना तो हमला करें और ना ही उन्हें धमकी दें। यहां जिस क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने की बात हुई है, उसका मतलब है कि किसी देश की ना तो जमीन कब्जाई जाए और ना ही उसके बॉर्डर चेंज किए जाएं। कुल मिलाकर शांति से रहें और युद्ध ना करें। जमीन कब्जाने के बाद क्या नियम लागू होते हैं? हालांकि, ऐसा देखने को मिलता है कि भले ही हर देश UN चार्टर पर साइन कर दे, लेकिन वह इसके नियमों का पालन नहीं करता है। जैसे रूस का ही उदाहरण लेते हैं, उसने UN के नियमों का पालन नहीं किया और यूक्रेन के कई हिस्सों को कब्जा लिया। अब यहां सवाल उठता है कि अगर कोई देश ऐसा कर देता है, तो फिर उसे कब्जे वाली जगह पर किन नियमों का पालन करना चाहिए। 12 अगस्त, 1949 को अपनाई गई चौथी जिनेवा संधि में इस बारे में विस्तार से बात हुई है। ये संधि युद्ध के समय और कब्जे वाले क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा के लिए समर्पित है। इसमें कहा गया है कि कब्जे वाले इलाके में उन सभी लोगों की सुरक्षा करनी चाहिए, जो सेना के सदस्य नहीं हैं। कब्जे वाले इलाके में रहने वाले सभी लोगों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाना चाहिए। उनके साथ मारपीट या उन्हें टॉर्चर नहीं किया जा सकता है। कब्जाने वाले देश को इस बात की इजाजत नहीं है कि वह लोगों को भगाए या उन्हें डिपोर्ट करे। उसे इस बात की भी इजाजत नहीं है कि वह कब्जे वाले इलाके में अपने देश के नागरिकों को बसा सके। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि कब्जा वाले इलाके में खाना और दवाएं पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उसी की है।

राज्यसभा की 26 सीटों पर नेताओं की एंट्री, शरद पवार-सिंघवी चुने गए; हरियाणा-बिहार में चुनाव से होगा फैसला

नई दिल्ली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) प्रमुख शरद पवार और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले समेत 26 उम्मीदवार सोमवार (9 मार्च) को राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए। नाम वापसी की आखिरी तारीख बीत जाने के बाद, अब उच्च सदन की 11 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होगा। बिहार में पांच, ओडिशा में चार और हरियाणा में दो सीटे हैं जहां चुनाव होगा। इन द्विवार्षिक चुनावों में बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा के लिए चुने जाने की पूरी संभावना है। 10 राज्यों में खाली हुई 37 सीटों के लिए कुल 40 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया था। नाम वापसी के बाद, अब बिहार, ओडिशा और हरियाणा में एक-एक सीट के लिए कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। 11 सीटों के लिए अब कुल 14 उम्मीदवार चुनावी मैदान में बचे हैं। भाजपा ने नियुक्त किए केंद्रीय पर्यवेक्षक भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार (9 मार्च) को बिहार, हरियाणा और ओडिशा में राज्यसभा चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की एक अधिसूचना जारी की। बिहार: केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा। हरियाणा: गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी। ओडिशा: महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले। राज्यों में चुनावी समीकरण और कड़ा मुकाबला बिहार (5 सीटें) बिहार में एक सीट के लिए दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा क्योंकि राजद (RJD) ने व्यवसायी से राजनेता बने अपने मौजूदा सांसद अमरेंद्र धारी सिंह को फिर से उम्मीदवार बनाया है। एनडीए के उम्मीदवार: केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर (हैट्रिक की कोशिश में), रालोमो (RLM) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (लगातार दूसरे कार्यकाल की उम्मीद में) और भाजपा के प्रदेश महासचिव शिवेश कुमार अपना संसदीय पदार्पण कर रहे हैं। नीतीश कुमार का ऐतिहासिक कदम: नीतीश कुमार ने पिछले सप्ताह राज्यसभा जाने के अपने फैसले की घोषणा की थी, जिससे राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री (20 वर्ष) के रूप में उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। राजद का समीकरण: राजद के पास 25 विधायक हैं और कांग्रेस-वाम दलों सहित महागठबंधन के 10 अन्य विधायकों का समर्थन है। पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) और बसपा (BSP) की मदद से छह वोटों की अपनी कमी को पूरा करने की उम्मीद कर रही है। बिहार विधानसभा सचिव ख्याति सिंह के अनुसार, छह उम्मीदवारों में से किसी ने भी अपना नामांकन वापस नहीं लिया, जिसके कारण राज्य में एक दशक से अधिक समय में पहली बार मतदान की आवश्यकता पड़ रही है। ओडिशा (4 सीटें) ओडिशा में भी एक सीट के लिए मुकाबला तय है। भाजपा उम्मीदवार: प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार। बीजद उम्मीदवार: संतरूप मिश्रा और प्रख्यात यूरोलॉजिस्ट डॉ. दातेश्वर होता। भाजपा के समर्थन से दिलीप रे ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा है, जिससे यहां क्रॉस-वोटिंग की संभावना बढ़ गई है। हरियाणा (2 सीटें) हरियाणा में भी एक सीट के लिए कड़ा मुकाबला होना है, जहां पहले भी क्रॉस-वोटिंग का इतिहास रहा है। कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं और एक सीट जीतने के लिए विपक्षी पार्टी को केवल 31 पहली पसंद वाले वोटों की आवश्यकता है। मैदान में उम्मीदवार: भाजपा से संजय भाटिया, कांग्रेस से करमवीर सिंह बौद्ध और निर्दलीय सतीश नांदल। नांदल ने 2019 में भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था और अब वह मैदान में तीसरे उम्मीदवार के रूप में उतरे हैं। विभिन्न राज्यों से निर्विरोध चुने गए उम्मीदवार चुनावों के इस दौर के बाद राज्यसभा में भाजपा की सीटें बढ़ने की उम्मीद है और वह उच्च सदन में सबसे अधिक सीटों वाली पार्टी बनी रहेगी। लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष एम. थंबीदुरई और कांग्रेस के जाने-माने वकील अभिषेक मनु सिंघवी भी उन नेताओं में शामिल हैं जो उच्च सदन के लिए निर्विरोध चुने गए हैं। महाराष्ट्र (7 सीटें): सभी सात उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। इनमें सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के छह और विपक्षी महाविकास अघाड़ी के उम्मीदवार शरद पवार शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, भाजपा नेता विनोद तावड़े, रामराव वडकुटे (भाजपा), नागपुर की पूर्व मेयर माया इवनाते (भाजपा), एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की ज्योति वाघमारे और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार निर्विरोध निर्वाचित हुए। पश्चिम बंगाल (5 सीटें): सत्तारूढ़ टीएमसी (TMC) के चार उम्मीदवार – बाबुल सुप्रियो, पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार, सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी और अभिनेत्री कोयल मल्लिक निर्विरोध चुने गए। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा भी निर्विरोध जीते। असम (3 सीटें): सत्तारूढ़ एनडीए के तीन उम्मीदवार- जोगेन मोहन और तेरश गोवाला के साथ-साथ यूपीपीएल (UPPL) के प्रमोद बोरो- निर्विरोध निर्वाचित हुए। तेलंगाना (2 सीटें): कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक सिंघवी और वेम नरेन्दर रेड्डी निर्विरोध चुने गए। तमिलनाडु (6 सीटें): सभी छह उम्मीदवार निर्विरोध जीते। अन्नाद्रमुक (AIADMK) के मौजूदा सांसद एम. थंबीदुरई, पीएमके नेता अंबुमणि रामदास, सत्तारूढ़ द्रमुक (DMK) के तिरुची शिवा और जे कॉन्स्टेंटाइन रवींद्रन, कांग्रेस के एम क्रिस्टोफर तिलक और डीएमडीके के कोषाध्यक्ष एल.के. सुधीश निर्वाचित हुए। छत्तीसगढ़ (2 सीटें): भाजपा की लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस की फूलो देवी नेताम निर्विरोध जीतीं, क्योंकि दो सीटों के लिए केवल यही दो उम्मीदवार मैदान में थीं। हिमाचल प्रदेश (1 सीट): मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबी विश्वासपात्र कांग्रेस उम्मीदवार अनुराग शर्मा निर्विरोध निर्वाचित हुए।  

इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा, फिर भी नहीं मिल रहीं लेट नाइट फ्लाइट्स; भोपाल एयरपोर्ट पर एयरलाइंस उदासीन

भोपाल इस माह के अंत से लागू हो रहे समर शेड्यूल में एक भी लेट नाइट उड़ान शामिल नहीं हो सकी है। एयरपोर्ट अथारिटी ने एयरलाइंस कंपनियों को टाइम लिमिट से हटकर 24 घंटे में किसी भी समय स्लाट देने की पेशकश की है। इसके बावजूद एयरलाइंस कंपनियां रुचि नहीं दिखा रही हैं। फिलहाल लेट नाइट उड़ान के रूप में केवल पुणे रूट पर एक उड़ान है। एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने के उद्देश्य से लंबे समय से दिल्ली, मुंबई, कोलकात्ता एयरपोर्ट्स की तरह 24 घंटे उड़ान संचालन को बढ़ावा दे रही हैं, लेकिन एयरलाइंस कंपनियां इसमें रूचि नहीं ले रही हैं। राजा भोज एयरपोर्ट पिछले डेढ़ साल से 24 घंटे खुल रहा है। इस अवधि में इंडिगो ने ही एक स्थाई पुणे उड़ान प्रारंभ की। कुछ समय के लिए मुंबई उड़ान प्रारंभ हुई फिर बंद हो गई। भोपाल से बेंगलुरू के लिए लंबे अर्से से लेट नाइट उड़ान की जरूरत महसूस की जा रही है। इस रूट पर दो नियमित उड़ाने हैं इसके बावजूद सस्ते टिकट नहीं मिलते। लेट नाइट उड़ानों से यह लाभ लेट नाइट उड़ानों में आमतौर पर सस्ते किराये में सीटों की बुकिंग होती है। एयरलाइंस कंपनियां देर रात को विमान पार्किंग में खड़े करने के बजाय ऐसे रूट पर इनका संचालन करती हैं जहां से 70 प्रतिशत से अधिक पैंसेजर लोड मिल सके। भोपाल से पुणे के बीच 80 प्रतिशत बुकिंग हो रही है। यदि बेंगलुरु, मुंबई एवं दिल्ली तक देर रात की उड़ानें प्रारंभ हो जाएं तो यात्रियों को बड़ी राहत मिल सकती है। दिल्ली बंद, नवी मुंबई शुरू होगी 29 मार्च से लागू हो रहे समर शेड्यूल में भोपाल से केवल नवी मुंबई तक एक उड़ान प्रारंभ हो रही है। मुंबई की एक उड़ान बंद होने का प्रस्ताव है। एयर इंडिया की मार्निंग उड़ान भी एक माह के लिए बंद हो रही है। गोवा एवं अहमदाबाद उड़ान भी बंद करने का प्रस्ताव है। यानि पहली बार समर सीजन में भोपाल से एयर कनेक्टिविटी बढ़ने के बजाय कम होने जा रही है। मिड सीजन में बढ़ेंगी उड़ानें समर शेड्यूल करीब छह माह लागू रहता है। मिड सीजन में कुछ नए रूट भोपाल से जुड़ेंगे। एयर इंडिया ने तकनीकी कारण से दिल्ली उड़ान एक माह के लिए बंद करने का निर्णय लिया है। अगले दो-तीन माह में एयर कनेक्टिविटी बढ़ेगी। लेट नाइट उड़ानें शुरू कराने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

अक्टूबर-नवंबर से MP में लागू हो सकता है ‘VB G-RAMJI’, राज्य सरकार बनाएगी अलग नियम

भोपाल मनरेगा की जगह शुरू होने जा रही विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) के लिए गारंटी वीबी जी रामजी योजना प्रदेश में इसी वर्ष अक्टूबर-नवंबर से प्रारंभ हो सकती है। इसके लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तैयारियों में जुटा है। तैयारियों के संबंध में मंगलवार-बुधवार को दिल्ली में बैठक होने जा रही है, जिसमें सभी राज्यों से तैयारियों के संबंध में पूछा जाएगा। पंचायतों के बारे में जानकारी भी साझा की जाएगी, जिससे केंद्र सरकार राज्य को अनुदान के संबंध में नीति बना सके। अधिसूचना के बाद राज्य सरकार बनाएगी अपने नियम बता दें कि वीबी जी रामजी विधेयक संसद से पारित हो गया है। इसकी अधिसूचना अप्रैल या मई में जारी हो सकती है। इसके बाद राज्य सरकार अपने नियम बनाएगी, जो विधानसभा से पारित होंगे। इसमें लगभग छह माह का समय लगेगा। यह भी बता दें कि योजना में राज्य सरकारों को विकल्प दिया गया है कि वह केंद्र के नियम उसी रूप में स्वीकार कर लें या अपने अनुसार बदलाव कर लें। हर राज्य की परिस्थितियां अलग-अलग हैं।   स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर होगा नियमों में बदलाव उदाहरण के तौर पर शहरी और ग्रामीण क्षेत्र, श्रमिकों की संख्या, मनरेगा के अंतर्गत हुए काम, विकास कार्यों को लेकर राज्य सरकार की प्राथमिकता आदि। इन आधारों पर राज्य सरकार नियमों में कुछ परिवर्तन कर सकती है। विधानसभा से पारित होने के बाद इसे अमल में लाया जाएगा। अधिसूचना जारी होने के बाद सबसे पहले संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्हें बताया जाएगा कि मनरेगा से नई योजना किस तरह अलग है, कौन से नए काम शामिल किए गए हैं और सामाजिक अंकेक्षण किस तरह से किया जाना है।   काम के आधार पर तीन श्रेणियों में बंटेंगी पंचायतें अगले चरण में पंचायतों को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। पहली वह पंचायतें जिनमें मनरेगा में कम काम हुआ है, उन्हें प्राथमिकता में रखकर वहां अधिक काम कराया जाएगा। इसके बाद मध्यम स्तर की ग्राम पंचायतें और तीसरी ऐसी पंचायतें होंगी जिन पर बहुत अधिक काम हो चुका है, वहां अब ज्यादा काम की आवश्यकता नहीं है। इस तरह सभी जगह समान रूप से विकास होगा। मनरेगा में कुछ ग्राम पंचायतों में बहुत अधिक तो कुछ में बहुत कम काम हुआ है।

मार्च में ही झुलसाने वाली गर्मी: राजस्थान की लपट से MP, दिल्ली-UP में पारा 40 के पास

नई दिल्ली राजस्थान से आ रही गर्म हवाओं का असर अब पूरे मध्य भारत में दिखने लगा है। मध्य प्रदेश के अधिकांश जिलों में तापमान तेजी से बढ़ा है और कई जगहों पर यह सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल प्रदेश में मौसम शुष्क रहने के आसार हैं और अगले एक सप्ताह तक तेज धूप और गर्म हवाओं का असर बना रह सकता है। दिल्ली में भी तापमान बढ़ने लगा है। मंगलवार को राजधानी में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान 24 डिग्री के करीब रहेगा। हालांकि शहर की हवा की गुणवत्ता खराब बनी हुई है। एयर क्वालिटी इंडेक्स 326 दर्ज किया गया, जो Severe श्रेणी में आता है।   UP में मौसम का बदला मिजाज उत्तर प्रदेश में भी मौसम तेजी से करवट ले रहा है। आगरा, झांसी और बांदा जैसे जिलों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। वहीं मेरठ, हापुड़ और कासगंज में सुबह हल्की धुंध और कोहरा भी देखने को मिला। मध्यप्रदेश में बढ़ी गर्मी प्रदेश में सबसे अधिक तापमान रतलाम में दर्ज किया गया, जहां पारा 39.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से 6.4 डिग्री अधिक है। पचमढ़ी को छोड़कर प्रदेश के अधिकांश संभागों में अधिकतम तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। दिन में तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों को गर्मी का तीखा असर महसूस होने लगा है। ट्रफ सिस्टम का असर, कहीं हल्की बारिश संभव मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय बिहार से मराठवाड़ा तक एक ट्रफ लाइन झारखंड, छत्तीसगढ़ और विदर्भ के ऊपर से गुजर रही है। इसके प्रभाव से मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में कहीं-कहीं हल्की बारिश या बादल छाने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा मध्य क्षोभमंडल में पश्चिमी हवाओं के साथ एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है और जम्मू-कश्मीर के ऊपर उपोष्ण पश्चिमी जेट स्ट्रीम भी बह रही है। प्रमुख शहरों का तापमान भोपाल – अधिकतम 36.8°C, न्यूनतम 15°C इंदौर – अधिकतम 36.4°C, न्यूनतम 15.5°C ग्वालियर – अधिकतम 37.2°C, न्यूनतम 18.2°C जबलपुर – अधिकतम 36°C, न्यूनतम 17°C राजस्थान में मार्च में ही हीटवेव राजस्थान में गर्मी ने मार्च की शुरुआत में ही अपने तेवर दिखा दिए हैं। बाड़मेर में तापमान 40.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश का सबसे अधिक रहा। वहीं जयपुर में पारा 37.8 डिग्री तक पहुंच गया है। मौसम विभाग ने जैसलमेर और बाड़मेर सहित चार जिलों में 10-11 मार्च के लिए हीटवेव का येलो अलर्ट जारी किया है। जल्दी क्यों बढ़ रही गर्मी मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि फरवरी में उत्तर और मध्य भारत में सामान्य से कम बारिश हुई। इसके कारण आसमान साफ रहा और सूर्य की किरणें सीधे जमीन तक पहुंचने लगीं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ गया। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले तीन-चार दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। 15 मार्च के बाद पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने पर कुछ जगहों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना भी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खाड़ी देशों में उपजी परिस्थितियों के मद्देनजर की नागरिक आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में आपूर्ति व्यवस्था में कहीं किसी प्रकार की कोई कठिनाई नहीं है। सरकार के पास पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति संसाधन उपलब्ध हैं। किसी को भी खाद्य पदार्थ, गैस या तेल आपूर्ति के लिए परेशान या पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे प्रदेश में बेहतर से बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार परिस्थितियों पर गहनता से नजर बनाए हुए हैं। केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में देश के साथ मध्यप्रदेश में भी कहीं कोई आपूर्ति संबंधित दिक्कत नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में खाड़ी देशों में उपजी विषम परिस्थितियों के मद्देनजर मध्यप्रदेश में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्व और देश के समक्ष उपजी परिस्थितियों और संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए मध्यप्रदेश में बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि तीन सदस्यीय मंत्री और अधिकारियों की समिति प्रदेश की आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी करेगी और आपूर्ति बहाल रखने के लिए सभी कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खाड़ी देशों में रह रहे या वर्क वीजा पर गए या पर्यटन के लिए गए भारतीय नागरिकों, विशेषकर मध्यप्रदेश के निवासियों की स्वदेश वापसी के लिए मध्यप्रदेश सरकार लगातार केंद्र सरकार के सम्पर्क में है। राज्य सरकार से हेल्पलाइन के जरिए अब तक 255 लोगों ने संपर्क किया है, जिनकी सकुशल स्वदेश वापसी के लिए प्रयास तेज किए जा रहे हैं। बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल, सभी मंत्रीगण सहित प्रभारी मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण रश्मि अरूण शमी, सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह एवं अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।  

सरकार की राहत योजना का असर: फरवरी में लाखों उपभोक्ताओं को बिजली बिल में करोड़ों की छूट

भोपाल  मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं को दिन के टैरिफ में 20 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है। स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं के लिए यह सभी छूट अथवा प्रोत्साहन की गणना सरकारी सब्सिडी (यदि कोई हो) को छोड़कर की जा रही है। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने स्मार्ट मीटरिंग पहल के अंतर्गत, माह फरवरी 2026 के दौरान कुल 6, 13, 877 उपभोक्ताओं को उनके मासिक विद्युत बिल में टाइम ऑफ डे (ToD) छूट का लाभ प्रदान किया है, इसकी कुल राशि 3 करोड़, 68 लाख 01 हजार रूपए है। स्‍मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को उनकी खपत के आधार पर ये छूट दी गई है। कंपनी ने बताया कि स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं के लिए जिसमें घरेलू, गैर घरेलू, सार्वजनिक जल कार्य और स्ट्रीट लाइट और निम्‍नदाब औद्योगिक उपभोक्‍ताओं के लिए सोलर ऑवर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक की अवधि के दौरान उपभोग की गई ऊर्जा के लिए ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर पर 20 प्रतिशत की छूट 10 किलोवाट तक स्वीकृत लोड / अनुबंध मांग वाले उपभोक्‍ताओं को ही दी जा रही है। स्मार्ट मीटर के फायदे स्मार्ट मीटर ऊर्जा की खपत को ट्रैक करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद करता है। बिजली की खपत को सटीक रूप से मापता है, जिससे बिल में कोई गलती नहीं होती। ऐप के जरिए मोबाइल पर रियल-टाइम डेटा देखकर ऊर्जा की खपत को नियंत्रित कर सकते हैं। ऊर्जा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है, जिससे ऊर्जा की खपत को बेहतर बना सकते हैं। ऊर्जा की खपत को ऑनलाइन ट्रैक करने और नियंत्रित करने की सुविधा मिलती है। ऊर्जा की खपत को कम करने से पर्यावरण पर पड़ने वाला दुष्प्रभाव कम होता है। ऊर्जा की खपत को नियंत्रित करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद कर सकता है।

भारतीय ज्ञान परंपरा हमारी ताकत, इसे आगे बढ़ाना समय की मांग : मंत्री परमार

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कार्यक्रम 2026 का किया शुभारंभ भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि भारत देश कभी गरीब नहीं था, बल्कि एक समृद्ध देश था। भारत को सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था। भारत का ज्ञान सर्वश्रेष्ठ था और यहां का किसान आत्मविश्वासी और सामर्थ्यवान था। भारत का समाज, शिक्षित समाज था। भारत की संस्कृति और परंपराएं मजबूत थी। वैज्ञानिक भारतीय समाज की विशेषता थी। भारत की इसी समृद्धि के कारण ही विदेशी लुटेरे, मुगल और अंग्रेज भारत आए तथा समृद्ध भारत को हर स्तर पर लूटने का प्रयास किया। संस्कृति, परंपराओं,वेदों , शिक्षा केंद्रों, खेल परिसरों आदि को नष्ट करने के कार्य के साथ भारतीय समाज के अशिक्षित होने, रूढ़िवादी होने, अंधविश्वासी होने का दुष्प्रचार भी किया। अब समय आ गया है जब हम भारत के महानतम ज्ञान एवं भारतीय समाज के बारे में भ्रांतियां को दूर करने के सशक्त उपाय करते हुए देश की स्वतंत्रता की 100वी वर्षगांठ वर्ष-2047 तक भारत को, विकसित भारत के महानतम लक्ष्य के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के वैशिष्ट्य को पूरी क्षमता से मनाए। मंत्री परमार ने कहा भारतीय समाज की अवधारणा को समझने और पुनः स्मरण करने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान दिवस एक उपयुक्त अवसर है कि जब हम वैज्ञानिक शोध करें और यदि हमें सामाजिक मान्यताओं में रूढ़िवाद, अंध विश्वास दिखे, तो हमें छोड़ना पड़ेगा। हम युगानुकल परिवर्तन के पक्षधर हैं। मंत्री परमार नेसोमवार को महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में आयोजित 2 दिवसीय राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कार्यक्रम 2026 का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। इसके पहले मंत्री परमार ने एविएशन विंग का भ्रमण कर गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। मंत्री  परमार ने उड़ान अकादमी के अधिकारियों से विचार विमर्श कर कार्यक्रम के प्रगति की जानकारी भी ली। कार्यक्रम में महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भारत सरकार, नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एस. पी. गौतम एवं अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा के कुलगुरु प्रो. राजेंद्र कुमार कुडरिया, अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा डॉ आर पी सिंह, पूर्व कुलगुरु प्रो भरत मिश्रा, पूर्व कुलगुरु प्रो कपिल देव मिश्रा सहित शिक्षकगण, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिभागी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

मंत्री भूरिया ने कहा- सीएम यादव, महान शिक्षाविद सावित्रीबाई फुले के सपनों को कर रहे हैं साकार

भोपाल महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार महान समाजसेविका और देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले के महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के सपने को पूरा करने का कार्य कर रही है। नारी सशक्तिकरण के लिये प्रदेश में अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है। भारत के सामाजिक इतिहास में सावित्रीबाई फुले नाम महिला शिक्षा और सशक्तिकरण की पहली अग्रदूत के रूप में आदर के साथ लिया जाता है। वे देश की पहली महिला शिक्षिका थीं, जिन्होंने ऐसे समय में बालिकाओं की शिक्षा के लिए अलख जगाई, जब समाज में महिलाओं को पढ़ाने की कल्पना भी नहीं की जाती थी। सावित्रीबाई फुले ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए बेटियों को शिक्षा से जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य किया और महिलाओं के सम्मान, अधिकार और समानता की नींव रखी। भारत के सामाजिक इतिहास में चुनिंदा ऐसे महान व्यक्तित्व हुए हैं जिन्होंने अपने साहस, दूरदर्शिता और समाज के प्रति समर्पण से देश को नई दिशा दी। ऐसी ही महिला सशक्तिकरण की अग्रदूत थीं सावित्री बाई फुले। उनकी पुण्यतिथि हमें पुण्य स्मरण कराती है कि महिलाओं को शिक्षा के साथ समानता के अधिकार और सम्मान के बिना समाज की वास्तविक प्रगति संभव नहीं है। सावित्रीबाई फुले ने ऐसे समय में महिलाओं और बालिकाओं की शिक्षा के लिए संघर्ष किया, जब समाज में महिलाओं को शिक्षा से वंचित रखा जाता था। उन्होंने न केवल देश का पहला बालिका विद्यालय शुरू किया, बल्कि समाज में व्याप्त कुरीतियों और भेदभाव के खिलाफ भी आवाज़ बुलंद की। उनके प्रयासों ने महिलाओं को आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और स्वावलंबन की राह दिखाई। आज उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मध्यप्रदेश सरकार भी सावित्रीबाई फुले के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए महिलाओं और बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित, शिक्षित, स्वस्थ और आत्मनिर्भर बनाना है। प्रदेश में लाड़ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। यह योजना बेटियों की शिक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है। इसी प्रकार लाड़ली बहना योजना महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत आधार दे रही है, जिससे वे परिवार और समाज में अधिक आत्मनिर्भर बन रही हैं। महिलाओं और बच्चों के पोषण को ध्यान में रखते हुए पोषण अभियान तथा आंगनवाड़ी सेवाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों के समुचित पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और गर्भवती और धात्री माताओं के स्वास्थ्य तथा बालिकाओं के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभिन्न हेल्पलाइन सेवाओं, जागरूकता अभियानों और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र को सुदृढ़ कर रही है। स्व-सहायता समूहों और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को रोजगार और स्व-रोजगार तथा उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जा सके। महान शिक्षाविद सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि के अवसर पर हम उन्हें केवल स्मरण ही न करें, बल्कि उनके स्थापित आदर्शों को अपनाकर अन्य लोगों को भी प्रेरित करें। प्रत्येक बेटी को जब शिक्षा, सम्मान और अवसर मिलेगा, तभी एक समतामूलक और सशक्त समाज का निर्माण संभव होगा। राज्य सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना भी है, जहां महिलाएँ आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को साकार कर सकें। शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक अवसरों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्री सुश्री भूरिया ने सभी से अपील की है कि सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि पर हम सभी यह संकल्प लें कि महिलाओं के अधिकारों, शिक्षा और सम्मान के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे। यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी और यही एक विकसित और सशक्त भारत की दिशा में हमारा महत्वपूर्ण कदम होगा।  

महिला आरक्षण पर सरकार का नया प्लान, यूपी चुनाव से पहले कानून में संशोधन संभव

 नई दिल्ली अब सरकार महिला आरक्षण को 2027 के यूपी और उत्तराखंड चुनाव से ही लागू करने की तैयारी में है। पंजाब और गोवा के चुनाव भी यूपी के साथ ही होने हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने इस संबंध में विपक्ष की राय लेने का प्रयास किया है। उसने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से इस मसले पर बात की है। लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिए जाने वाले कानून में सरकार बदलाव करना चाहती है। महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 में प्रावधान था कि जनगणना और परिसीमन के बाद इसे लागू किया जाएगा। लेकिन अब सरकार इसे 2027 के यूपी और उत्तराखंड चुनाव से ही लागू करने की तैयारी में है। पंजाब और गोवा के चुनाव भी यूपी के साथ ही होने हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने इस संबंध में विपक्ष की राय लेने का प्रयास किया है। उसने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से इस मसले पर बात की है। जानकारी के मुताबिक इन विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षण करने का फैसला लॉटरी सिस्टम से लिया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मसले पर राय लेने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दो बार कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से संपर्क साधा है। सरकार ने दोनों सदनों से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित कराया था और इस पर राष्ट्रपति के साइन के साथ मुहर लग गई थी। इसमें प्रावधान है कि जनगणना और परिसीमन के बाद इसे लागू किया जाएगा। अब माना जा रहा है कि तब तक काफी देर हो जाएगी। इसलिए विधानसभा चुनावों से ही इसकी शुरुआत कर दी जाए। विपक्ष ने भी इसके लागू होने में देरी को लेकर सवाल उठाया था। जानकारी मिली है कि रिजिजू ने कांग्रेस से कहा है कि हम इस संशोधन विधेयक को मौजूदा बजट सेशन में ही लाना चाहते हैं, जो 2 अप्रैल तक चलने वाला है। सरकार चाहती है कि इस मसले पर सहमति बना ली जाए। इसी मकसद से उसने कांग्रेस के अलावा भी अन्य दलों से संपर्क साधने की कोशिश की है। कांग्रेस एवं अन्य कई दलों ने पहले ही मांग की थी कि इस कानून को पहले लागू किया जाए। यदि इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया तो फिर सालों का वक्त लगेगा। कांग्रेस के साथ ही डीएमके और टीएमसी की भी ऐसी मांग थी। बता दें कि भाजपा ने बुधवार के लिए अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है। सांसदों से कहा गया है कि कुछ जरूरी विधायी काम संसद में पेश किए जाएंगे। इस पर अपने दल का समर्थन करने के लिए सभी सांसदों को सदन में मौजूद रहना है। 2024 के आम चुनाव से पहले सितंबर 2023 में इस कानून को लाया गया था। इसके तहत यह तय किया गया था कि जनगणना और परिसीमन के बाद इसे लागू किया जाएगा। ऐसी स्थिति में इस कानून का 2029 के आम चुनाव में भी लागू होना मुश्किल दिखता है। 2021 में होने वाली जनगणना पहले ही देरी से चल रही है। इसलिए अब इस मामले में सरकार चाहती है कि संशोधन करके जल्दी से कानून लागू किया जाए।  

हर घर जल योजना को बढ़ावा: कैबिनेट ने जल जीवन मिशन विस्तार सहित 6 फैसलों को दी मंजूरी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आज केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में 6 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है, जिन पर कुल 8.8 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है। इस मीटिंग में कैबिनेट ने जल जीवन मिशन का विस्तार करने और उसे 2028 तक जारी रखने को मंजूरी दी है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मदुरै हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कैबिनेट मीटिंग में लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “जल जीवन मिशन 2.0 को आज मंज़ूरी मिल गई… अब इस प्रोजेक्ट को सस्टेनेबल बनाने का समय आ गया है। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह से रीस्ट्रक्चर किया जा रहा है। अब इंफ्रा क्रिएशन से सर्विस डिलीवरी पर फोकस होगा। वैष्णव ने बताया कि इसकी अलॉटेड रकम बढ़ाकर 8 लाख 70 करोड़ रुपये कर दी गई है और इसका मुख्य फोकस ऑपरेशन और मेंटेनेंस में समुदायों को शामिल करना होगा। उन्होंने बताया कि योजना के तहत सभी एसेट्स की डिजिटल मैपिंग की जाएगी… सभी प्रोग्राम सर्टिफाइड किए जाएंगे। एक रिलीज़ के मुताबिक, एक यूनिफ़ॉर्म नेशनल डिजिटल फ्रेमवर्क, जिसका नाम “सुजलम भारत” है, बनाया जाएगा, जिसके तहत हर गाँव को एक यूनिक सुजल गाँव / सर्विस एरिया ID दी जाएगी, जो सोर्स से नल तक पूरे पीने के पानी के सप्लाई सिस्टम की डिजिटल मैपिंग करेगी। ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी पक्का करने के लिए, “जल अर्पण” के ज़रिए स्कीमों को शुरू करने और फॉर्मल हैंडओवर करने में ग्राम पंचायतों और VWSCs को शामिल किया जाएगा। कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश के जेवर एयरपोर्ट को एलिवेटेड रोड के जरिए फरीदाबाद से जोड़ने वाली योजना को भी मंजूरी दी है और इसके लिए 3,631 करोड़ रुपये बजट को मंजबरी दी है।

ASI की रिपोर्ट से बढ़ी हलचल: भोजशाला के शिलालेखों के अक्षर जानबूझकर मिटाए गए

धार ऐतिहासिक भोजशाला एक बार फिर इतिहास के सबसे संवेदनशील सवालों के केंद्र में है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की मैसूर स्थित एपिग्राफी (उत्कीर्णित लेखों का अध्ययन) शाखा ने वर्ष 2024 के सर्वे के दौरान यहां 244 शिलालेखों का विस्तृत अध्ययन किया था। ये शिलालेख 12वीं से 16वीं शताब्दी के बीच के माने जा रहे हैं। इन पर नागरी लिपि में संस्कृत, प्राकृत तथा स्थानीय बोली में रचनाएं अंकित हैं। सर्वे की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कई शिलालेखों के अक्षर जानबूझकर छेनी से मिटाए गए और उन्हें भवन के अलग-अलग हिस्सों में पुनः इस्तेमाल कर लिया गया। मध्यकालीन धरोहर पर आघात और नए साक्ष्य ये जानकारियां मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में प्रस्तुत एएसआइ की सर्वे रिपोर्ट में दर्ज हैं। रिपोर्ट पर 16 मार्च को सुनवाई होनी है। याचिकाकर्ता आशीष गोयल के अनुसार अभिलेखविदों ने रिपोर्ट में बताया है कि ये खंड कभी बड़े शिलालेखों का हिस्सा थे, जिनमें साहित्यिक रचनाएं अंकित थीं। अक्षरों को जानबूझकर मिटाना मध्यकालीन सांस्कृतिक धरोहर पर गंभीर आघात रहा। हालिया सर्वे में 50 नए शिलालेख खंड और एक टूटी हुई प्रतिमा के आसन के टुकड़े का भी परीक्षण किया गया है। पारिजातमंजरी से नागबंध तक: सम्राट भोज का वैभव सर्वे में तीन शिलालेख विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताए गए हैं। पहला, ‘पारिजातमंजरी नाटिका शिलालेख’ बताता है कि इस नाटक की रचना धार के राजा अर्जुनवर्मन के गुरु मदन ने की थी और इसका पहला मंचन ‘शारदा देवी के सदन’ में हुआ था। दूसरा, ‘अवनिकूर्मशतम शिलालेख’ में प्राकृत भाषा के दो काव्य हैं, जिनमें प्रत्येक में 109 श्लोक हैं और दोनों की रचना सम्राट भोजदेव द्वारा की गई। तीसरा, ‘नागबंध शिलालेख’ व्याकरण और शिक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, जिसमें परमार वंश के राजा नरवर्मन का उल्लेख है। इतिहास की धूल से निकले सदियों पुराने शिल्पकारों के नाम सर्वे में 34 छोटे उत्कीर्ण नाम भी सामने आए। 13वीं सदी के शिल्पकारों में मदन, माधव और जकिजु के नाम हैं, जबकि 16वीं सदी में मोहिला, कामदेव, सोमदेव, रणपाल और परमार सहित डेढ़ दर्जन से अधिक शिल्पकारों के नाम मिले हैं। ये नाम उन कारीगरों की जीवित गवाही हैं जो सदियों से इतिहास की धूल में दबे थे। बता दें, भोजशाला से जुड़े शिलालेखों का पहला अध्ययन वर्ष 1951 में हुआ था।  

मध्यप्रदेश को मिलेगी एक और बड़ी पहचान: नौरादेही अभयारण्य में बसेंगे चीते, सीएम डॉ. यादव की घोषणा

भारतीय क्रिकेट टीम ने बढ़ाया देश का मान मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंत्रीगण से चर्चा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नौरादेही का रानी दुर्गावती अभयारण्य चीतों का तीसरा घर बनने जा रहा है। जल्द ही वहाँ भी चीते छोड़े जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतकर भारतीय क्रिकेट टीम ने एक बार फिर सफलता का परचम लहराया है। खेलने वाले कुल 20 देश, 55 मैच और विजेता- भारत, यह आंकड़े बताते हैं कि भारतीय क्रिकेट टीम ने दृढ़ संकल्प, साहस और पराक्रम से यह उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे खिलाड़ियों ने पूरे विश्व में देश का मान-सम्मान बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश सरकार और पूरी मंत्रि-परिषद् की ओर से भारतीय क्रिकेट टीम को बधाई और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संघ लोक सेवा आयोग-2026 के हालिया घोषित रिजल्ट में मध्यप्रदेश के 2 होनहार अभ्यर्थियों द्वारा टॉप टेन अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट में स्थान प्राप्त करने पर दोनों ही अभ्यर्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष प्रदेश के कई विद्यार्थियों का यूपीएससी की परीक्षा में आईएएस, आईपीएस, आईआरएस इत्यादि कई पदों पर चयन हुआ है। हमारे विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में चयनित होकर प्रदेश का नाम रौशन कर रहे हैं। रानी दुर्गावती अभयारण्य (नौरादेही) में भी छोड़ेंगे चीते मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में चीते तेजी से फल-फूल रहे हैं। हाल ही में 5 नये शावकों की आमद से चीतों का परिवार और भी समृद्ध हुआ है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार करीब 2 महीने बाद रानी दुर्गावती अभयारण्य (नौरादेही) में भी चीते छोड़ने जा रही है। इससे मध्यप्रदेश में चीतों के 3 घर तैयार हो जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम मगर/घड़ियाल और कछुए भी विभिन्न जल क्षेत्रों में मुक्त करेंगे, ताकि हमारी जैव सम्पदा और भी समृद्ध हो सके। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री को भायी मध्यप्रदेश की जल संचय पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण से कहा कि मध्यप्रदेश में जल संचयन के लिए चलाए गए जल गंगा संवर्धन अभियान की केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सीआर पाटिल द्वारा सराहना की गई है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने 5 मार्च को हुई वीडियो काँफ्रेंसिंग में कहा था कि मध्यप्रदेश सामुदायिक सहभागिता से जल संरक्षण और सतत् जल प्रबंधन देश के सामने श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। मध्यप्रदेश में 250 से अधिक नदियां हैं। मध्यप्रदेश बांधों की संख्या के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा था कि जल संचयन के प्रोत्साहन के लिए भारत सरकार भी जल इस दिशा में जनभागीदारी से ऐसा ही कदम बढ़ाने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि केंद्र से मिली सराहना हमारी जल संचय नीति की सफलता का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के प्रथम चरण में 2.79 लाख से अधिक जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण कर महत्वपूर्ण योगदान दिया गया। दूसरे चरण में भी मध्यप्रदेश में 72 हजार 647 जल संग्रहण संरचनाओं के निर्माण कार्य पूरे कर लिए गए हैं और 64 हजार 395 जल संरचना निर्माण कार्य फिलहाल प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में इस साल 19 मार्च 2026 से जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण से कहा कि वे भी अपने-अपने क्षेत्रों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के काम बढ़ाएं। डिजिटल पंजीयन में मध्यप्रदेश ने रचा इतिहास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में दस्तावेजों के डिजिटल पंजीयन का काम शुरू हो गया है। मध्यप्रदेश में प्रति वर्ष करीब 16 लाख से अधिक दस्तावेजों का पंजीयन किया जाता है। यह एक बड़ा काम है पर हम इसे समय-सीमा में ही पूरा करेंगे। उन्होंने बताया कि संपदा 2.0 प्रणाली से दस्तावेजों का पूर्णत: पेपरलेस ई- पंजीयन शुरु कर दिया है। यह व्यवस्था नागरिकों को त्वरित सेवाएं देने के साथ-साथ प्रशासन में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित करेगी। संपदा प्रणाली से ई-पंजीयन और ई-स्टाम्पिंग की सुविधा प्रदान कर पूरी प्रक्रिया को इलेक्ट्रॉनिक बनाया गया है। इस प्रणाली में कोई भी व्यक्ति कहीं से भी ई-स्टॉम्प तैयार कर सकता है। यह व्यवस्था लागू करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। गेहूं उपार्जन 2026 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि मध्यप्रदेश सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं उपार्जन पर 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने जा रही है। साथ ही दलहन उत्पादन को प्रोत्साहन के लिए उड़द की खरीद पर भी 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने जा रही है। उड़द की खरीद पर बोनस देने के मामले में मध्यप्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जिसने यह कदम उठाया है। उन्होंने बताया कि गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन की अवधि 10 मार्च 2026 रखी गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को समय पर भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पचमढ़ी को बनाएंगे बेस्ट इन्वायरमेंटल मॉडल मुख्यमंत्री ने बताया कि पचमढ़ी को जर्मनी की एक अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण संस्था द्वारा ग्रीन डेस्टिनेशन के रूप में प्रमाणित किया गया है। यह मध्यप्रदेश में पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए हो रहे प्रयासों का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि पचमढ़ी देश का ऐसा पहला स्थल है, जिसे इस तरह का प्रमाणन मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम पचमढ़ी को देश के अनुकरणीय और बेस्ट इन्वायरमेंटल मॉडल के रूप में विकसित करेंगे। खाड़ी देशों में वर्तमान स्थिति के मद्देनजर हेल्पलाइन/कंट्रोल रूम स्थापित मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) में उपजी विषम परिस्थितियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खाड़ी देशों में रह रहे मध्यप्रदेश के निवासियों की सहायता के लिए मध्यप्रदेश भवन नई दिल्ली में एवं भोपाल के वल्लभ भवन (मंत्रालय) में 24×7 हेल्पलाइन/कंट्रोल रूम की स्थापना कर दी गई है। मध्यप्रदेश के निवासी जो खाड़ी देशों में अध्ययन, नौकरी, व्यवसाय, पर्यटन, इत्यादि के लिए गए मध्यप्रदेश के निवासी वर्तमान परिस्थतियों में किसी प्रकार की सहायता की अपेक्षा करते हों तो वे कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं। मध्यप्रदेश के लोगों की सकुशल स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए हम सभी … Read more

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट शुरू होने की ओर एक और कदम, एयरोड्रम लाइसेंस सीएम योगी को सौंपा गया

लखनऊ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर भारत सरकार की ओर से जारी एयरोड्रम लाइसेंस प्रस्तुत किया। इसके साथ ही जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम पूरा हो गया है। इस लाइसेंस के बाद अब एयरपोर्ट के उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन समेत वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री को परियोजना की प्रगति और आगामी चरणों की जानकारी भी दी। अधिकारियों के अनुसार एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद अब नियामकीय स्वीकृतियों की अंतिम प्रक्रिया जारी है। एयरपोर्ट का एयरोड्रम सिक्योरिटी प्रोग्राम इस समय ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी के पास समीक्षा के लिए लंबित है। सुरक्षा से जुड़ी यह मंजूरी मिलते ही एयरपोर्ट प्रबंधन सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर औपचारिक उद्घाटन और वाणिज्यिक संचालन की तिथि तय करेगा। गौतमबुद्ध नगर के जेवर में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा है। इस एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है, जहां स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का समन्वय देखने को मिलेगा। एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन हैं। एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में एक रनवे और एक यात्री टर्मिनल भवन बनाया गया है, जिसकी क्षमता प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ 20 लाख यात्रियों की होगी। दूसरे चरण में क्षमता बढ़ाकर 3 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाई जाएगी। तीसरे और चौथे चरण में विस्तार के बाद कुल क्षमता 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल लगभग 1.38 लाख वर्गमीटर है, जिसमें 48 चेक इन काउंटर, 9 सुरक्षा जांच लेन और 9 इमिग्रेशन काउंटर बनाए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय लाउंज भी विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा यहां 10 एयरोब्रिज और 28 विमान पार्किंग स्टैंड की व्यवस्था की गई है। रनवे पर प्रति घंटे लगभग 30 उड़ानों के संचालन की क्षमता विकसित की गई है। एयरपोर्ट परिसर में आधुनिक कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब भी तैयार किया जा रहा है। प्रारंभिक चरण में इसकी क्षमता लगभग 2.5 लाख टन कार्गो प्रतिवर्ष होगी, जिसे आगे चलकर 15 लाख टन तक बढ़ाया जाएगा। तकनीकी दृष्टि से भी यह एयरपोर्ट अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। यहां डिजीयात्रा आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और डिजिटल पैसेंजर प्रोसेसिंग सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रहीं हैं ताकि यात्रियों को तेज और सहज यात्रा का अनुभव मिल सके। सतत विकास को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट को नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है। परिसर में सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर में हवाई यातायात का दबाव कम होगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

ईंधन और गैस आपूर्ति सुचारू रखने के लिए MP सरकार अलर्ट, तीन मंत्रियों को दी अहम जिम्मेदारी

भोपाल मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को निर्देश दिए कि वे अपने प्रभार के जिलों में स्थिति की समीक्षा करें। कहीं पर भी पैनिक नहीं होना चाहिए। पेट्रोल डीजल रसोई गैस की स्थिति पर नजर रखने और केंद्र सरकार व आयल कंपनियों से समन्वय के लिए तीन मंत्रियों की समिति बनाई। उच्च स्तरीय समिति का गठन उप मुख्यमंत्री वित्त जगदीश देवड़ा, खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप को समिति में रखा। कैबिनेट बैठक के बाद खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी ने बताया कि पेट्रोल डीजल की उपलब्धता में निरंतरता बनी हुई है।   ईंधन और गैस आपूर्ति की वर्तमान स्थिति रसोई गैस सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर भी फिलहाल कोई दिक्कत नहीं है। कमर्शियल गैस का स्टॉक रिटेलर के पास दो दिन और तेल कंपनियों के पास सात दिन का है। विभाग ने कलेक्टर कमिश्नर को निर्देश दिए हैं कि वह कमर्शियल गैस के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए उपभोक्ताओं से संवाद करें।

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