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जगदलपुर के विकास को रफ्तार: इंद्रावती नदी पर बैराज की मंजूरी पर सीएम का जताया आभार

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज यहाँ विधानसभा भवन स्थित उनके कार्यालय में जगदलपुर के महापौर  संजय पाण्डेय के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।              प्रतिनिधिमंडल ने इंद्रावती नदी पर नए बैराज निर्माण की स्वीकृति मिलने पर मुख्यमंत्री को पुष्प गुच्छ भेंट कर आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इस नए बैराज के माध्यम से जगदलपुर शहर में पेयजल आपूर्ति सुचारू रूप से हो पाएगी।          इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि बस्तर में कई महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। क्षेत्र में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है और धीरे-धीरे शांति स्थापित हो रही है, जिससे विकास कार्यों को गति मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। इसी दिशा में मटनार और देऊरगांव सिंचाई परियोजनाओं को भी सहमति दी गई है। उन्होंने बताया कि पानी के कम अपव्यय और किसानों तक बेहतर ढंग से पानी पहुंचाने के लिए सरकार पाइपलाइन के माध्यम से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की योजना पर भी कार्य कर रही है         उल्लेखनीय है कि बजट में लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से इंद्रावती नदी के महादेव घाट पर बैराज निर्माण की घोषणा की गई है। इस बैराज के निर्माण से जगदलपुर शहर को पेयजल की समस्या से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।            इस अवसर पर नगर निगम के सभापति  खेम सिंह देवांगन,  निर्मल पाणिग्रही,  सुरेश गुप्ता,  योगेन्द्र पाण्डेय,  राणा घोष सहित प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

SDM से लेकर IPS तक-50 अफसरों पर गिरी गाज, भ्रष्टाचार पर भजनलाल सरकार का सबसे बड़ा एक्शन

जयपुर. राजस्थान में सुशासन और पारदर्शिता की दिशा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक ऐतिहासिक और बेहद सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने सरकारी तंत्र में बैठे ‘सफेदपोश’ अपराधियों और लापरवाह अधिकारियों की लंबी कुंडली खंगालते हुए अभियोजन स्वीकृति और विभागीय जांच के 50 से अधिक प्रकरणों का एक साथ निस्तारण कर दिया। इस कार्रवाई की जद में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के एक बड़े अधिकारी से लेकर उपखंड अधिकारी (SDM), विकास अधिकारी और सचिव स्तर के कार्मिक आए हैं। सरकार के इस ‘क्लीनअप ऑपरेशन’ से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। मुख्यमंत्री ने सुशासन की मिसाल पेश करते हुए भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के एक अधिकारी के खिलाफ दो अलग-अलग मामलों में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के परामर्श से दण्ड की मात्रा बढ़ाने का कड़ा निर्णय लिया है। इसके साथ ही, निजी व्यक्तियों को अवैध लाभ पहुँचाने के आरोप में तत्कालीन उपखंड अधिकारी (SDM) सहित सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Sanction) दे दी गई है। अब इन अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय में कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। कृषि उपज मण्डी सचिव बर्खास्त, कई अधिकारी सेवा से बेदखल भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में मुख्यमंत्री ने ‘अंतिम प्रहार’ करते हुए कई अधिकारियों का करियर खत्म कर दिया है। कृषि उपज मण्डी समिति के तत्कालीन सचिव: अदालत से दोषसिद्ध होने के तुरंत बाद उन्हें राज्य सेवा से पदच्युत (Dismissed) कर दिया गया। लंबी अनुपस्थिति: ड्यूटी से लगातार गायब रहने वाले एक अन्य अधिकारी को भी नौकरी से हटा दिया गया है। विकास अधिकारी (BDO) पर 17-ए: पद के दुरुपयोग और राजकोष को हानि पहुँचाने के आरोप में तत्कालीन विकास अधिकारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं। वेतन वृद्धि रोकी, पेंशन पर भी चला ‘चाबुक’ राज्य सेवा के अधिकारियों में अनुशासन का पाठ पढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने सीसीए नियम-16 के तहत कड़़ी शास्ति लगाई है। वेतन वृद्धि पर रोक: गंभीर आरोपों में घिरे 23 प्रकरणों के 27 अधिकारियों की 2 से 4 वेतन वृद्धियां (Increment) संचयी प्रभाव से रोक दी गई हैं। इसका सीधा असर उनके पूरे करियर और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभों पर पड़ेगा। रिटायर्ड अधिकारियों पर गाज: मुख्यमंत्री ने 5 सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन रोकने का अनुमोदन किया है। इसके अलावा 9 अन्य मामलों में जांच निष्कर्षों के आधार पर राज्यपाल को कार्रवाई के लिए फाइल अग्रेषित की गई है। अपीलों को किया खारिज मुख्यमंत्री कार्यालय में जब सजा के खिलाफ अधिकारियों ने अपील पेश की, तो मुख्यमंत्री ने उनमें से 4 अपीलों को सिरे से खारिज कर दिया। केवल एक मामले में परिस्थितियों को देखते हुए दण्ड की मात्रा कम की गई। राजस्थान में ‘सुशासन’ का नया मॉडल भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट कर दिया था कि वे भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ रखेंगे। 50 से अधिक फाइलों का एक झटके में निस्तारण करना यह साबित करता है कि मुख्यमंत्री सचिवालय अब भ्रष्ट अधिकारियों के लिए ‘सेफ हेवन’ नहीं रहा। आमजन को संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन देने के लिए सरकार अब निचले स्तर से लेकर शीर्ष अधिकारियों तक की जवाबदेही तय कर रही है।

लोकसभा में स्पीकर Om Birla को हटाने का प्रस्ताव, लंबी चर्चा के लिए 10 घंटे निर्धारित

नई दिल्ली लोकसभा में मंगलवार को उस समय जोरदार बहस छिड़ गई जब कांग्रेस ने स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव के पेश होते ही सदन में प्रक्रिया और नियमों को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली और आखिरकार सदन ने इस प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दे दी। इस मुद्दे पर 10 घंटे की बहस तय की गई। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने औपचारिक रूप से यह प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव पर 118 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर हैं। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के दौरान ‘पक्षपातपूर्ण रवैया’ अपनाया है। विपक्ष का कहना है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी गई, जिसे लेकर असंतोष बढ़ा। प्रस्ताव पेश होने के बाद सदन में एक नया विवाद खड़ा हो गया। सवाल यह उठा कि जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन है, तब सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कौन करेगा। उस समय सदन की कार्यवाही जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में चल रही थी। इस मुद्दे पर एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी और तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया। ओवैसी ने संसदीय नियमों का हवाला देते हुए कहा कि जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव चर्चा में हो, तो स्पीकर या उनके द्वारा नामित व्यक्ति को कार्यवाही नहीं चलानी चाहिए। ओवैसी ने यह भी कहा कि अभी तक लोकसभा में उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) की नियुक्ति नहीं हुई है। ऐसे में जो सदस्य चेयर पर बैठे हैं, उन्हें स्पीकर की स्वीकृति से ही नामित किया गया है। इसलिए उनके द्वारा इस प्रस्ताव पर चर्चा कराना उचित नहीं होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि बहस शुरू होने से पहले सदन को इस बात पर सहमति बनानी चाहिए कि कार्यवाही की अध्यक्षता कौन करेगा। इस पर भाजपा की ओर से जवाब भी सामने आया। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि संसदीय नियमों के अनुसार चेयर पर बैठा कोई भी सदस्य स्पीकर के समान अधिकारों का प्रयोग करते हुए कार्यवाही चला सकता है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की बात का समर्थन किया और कहा कि नियम स्पष्ट रूप से चेयर को यह अधिकार देते हैं। वहीं, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब तक डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति नहीं की गई है, जो एक गंभीर मुद्दा है। उन्होंने कहा कि बहस आगे बढ़ाने से पहले सदन को इस बात पर सहमति बनानी चाहिए कि कार्यवाही कौन संचालित करेगा। इस दौरान भाजपा सांसद रवि शंकर प्रसाद ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जो सदस्य चेयर पर बैठा है, उसे सदन की कार्यवाही संचालित करने का पूरा अधिकार है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल ने कहा कि स्पीकर का पद खाली नहीं है, इसलिए चेयर को कार्यवाही चलाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी बताया कि स्पीकर ओम बिरला ने खुद इस बहस के दौरान सदन की अध्यक्षता न करने का फैसला लिया है। जगदंबिका पाल ने कहा कि स्पीकर ने नोटिस में मौजूद शुरुआती तकनीकी गलतियों को ठीक करने में उदारता दिखाई और आवश्यक सुधारों की सूचना खुद जारी की। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने औपचारिक रूप से स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव सदन में पेश किया। अंत में यह तय हुआ कि लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 10 घंटे तक चर्चा होगी।

मुख्यमंत्री डॉ.यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय

निःशक्तजन को वृत्तिकर से छूट को 31 मार्च 2030 तक निरंतर किये जाने की स्वीकृति 7 जिलों के लिए “एक जिला-एक उत्पाद” परियोजना का किया अनुमोदन सिंगरौली में कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश सहित 7 पदों की स्वीकृति मैहर, कैमोर और निमरानी में 3 नये औषधालयों को मंजूरी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद ने कल्याणकारी योजनाओं सहित विभिन्न 7 विभागों की महत्वपूर्ण योजनाओं की आगामी 5 वर्षों तक निरंतरता के लिए लगभग 33 हजार 240 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद ने मुख्यमंत्री यंग इंटनर्स फॉर गुड-गवर्नेंस प्रोगाम को भी मंजूरी दी है। सिंगरौली के चितरंगी में कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश सहित कुल 7 नवीन पदों के सृजन की भी मंत्रि-परिषद द्वारा स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद ने मैहर, कैमोर जिला कटनी और निमरानी जिला खरगोन में कर्मचारी राज्य बीमा निगम के 3 औषधालय खोलने सहित चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टॉफ के 51 पदों के सृजन को स्वीकृति दी गयी है। मुख्यमंत्री यंग इंटर्नस फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम को 3 वर्ष क्रियान्वयन के लिए 190 करोड़ रूपये की स्वीकृति त्रि-परिषद द्वारा “मुख्यमंत्री यंग इंटर्नस फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम” को 3 वर्ष के लिए क्रियान्वयन के लिए लगभग 190 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। लोक सेवा प्रबंधन विभाग को अग्रिम कार्यवाही तथा प्रक्रिया निर्धारण कर नियमों एवं निर्देशों को जारी कर क्रियान्वयन के लिए अधिकृत किया गया है। निःशक्त जन को वृत्तिकर से छूट की निरंतरता कीस्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश वृत्तिकर अधिनियम, 1995 के अंतर्गत निःशक्त जन को वृत्तिकर से छूट को 31 मार्च, 2030 तक निरंतर किये जाने की स्वीकृति दी गयी गई है। 7 जिलों के लिए “एक जिला-एक उत्पाद” परियोजना का अनुमोदन मंत्रि-परिषद द्वारा “एक जिला-एक उत्पाद” परियोजना अंतर्गत चयनित 07 जिलों में पारंपरिक व विशिष्ट उत्पाद के सरंक्षण, विकास और विपणन हेतु आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए आगामी 5 वर्षों में 37.50 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इस परियोजना में चयनित 07 जिलों में सीधी जिले में दरी एवं कारपेट, दतिया में गुड़, अशोकनगर में चंदेरी, हाथकरघा वस्त्र, भोपाल मे जरी-जरदोजी एवं जूट उत्पाद (जैसे पर्स आदि), धार में बाग प्रिंट, सीहोर में लकड़ी के खिलौने तथा उज्जैन में बटिक प्रिंट में आगामी 5 वर्षों के लिए 37.50 करोड़ रूपये की डी.पी.आर, तैयार की गयी है।इस परियोजना से स्थानीय शिल्पकारों, बुनकरों और कारीगरों को प्रशिक्षण, डिजिटलीकरण, ब्रांडिंग, विपणन तथा बाजार उपलब्धता जैसी सुविधायें प्रदान की जाएगी। यह परियोजना प्रदेश में स्थानीय उद्यमिता को बढावा, रोजगार सृजन एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। सिंगरौली में कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश सहित 7 पदों की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने चितरंगी जिला सिंगरौली में व्यवहार न्यायालय की स्थापना के लिए व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड का एक नवीन पद और उनके कार्यालयीन अमले के लिए तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के 6 नवीन पद सहित कुल 7 नवीन पदों का सृजन किये जाने की स्वीकृत प्रदान की है। मैहर, कैमोर और निमरानी में 3 नये औषधालयों को मंजूरी मंत्रि-परिषद ने भारत सरकार के कर्मचारी राज्य बीमा निगम (इएसआईसी) द्वारा मैहर (जिला-मैहर), कैमोर (जिला कटनी), तथा निमरानी (जिला खरगौन) में 3 नये औषधालयों को खोलने एवं चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टॉफ के 51 पदों का सृजन की स्वीकृति प्रदान की गयी है। मैहर, कैमोर तथा निमरानी में नये कर्मचारी राज्य बीमा औषधालय खोलने एवं नये पद सृजित करने की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इससे रजिस्टर्ड 15,686 श्रमिकों एवं उन पर आश्रित लगभग 62,744 परिजनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त होंगी। रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के अंतर्गत केन्द्रांश पर देय एसजीएसटी की राशि वितरण कंपनियों को अंशपूंजी के रूप में प्रदान करने की स्वीकृति मंत्रि-परिषद् द्वारा निर्णय लिया गया कि रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के अंतर्गत वितरण अधोसंरचना के उन्नयन, यथा वितरण हानियों में कमीं तथा वितरण प्रणाली सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिकीकरण से संबंधित बुनियादी अधोसंरचना के निर्माण और विकास कार्यों के लिए प्राप्त केन्द्रांश पर देय एसजीएसटी की राशि राज्य की वितरण कंपनियों को राज्य शासन द्वारा अनुदान के स्थान पर अंशपूंजी के रूप में उपलब्ध कराई जायेगी।स्कीम के अंतर्गत माह नवम्बर 2024 तक ऋण के रूप में प्रदत्त राशि 887 करोड़ 91 लाख रूपये को राज्य शासन द्वारा वितरण कंपनियों को अंशपूंजी के रूप में प्रदान किए जाने का अनुमोदन किया गया। विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण व विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति के उद्देश्य से वित्तीय रूप से साध्य व परिचालन में दक्ष वितरण क्षेत्र विकसित करने के लिए रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) लागू की गई है। योजना अन्तर्गत विद्युत अधोसंरचनात्मक कार्यों के लिए केन्द्र शासन द्वारा 60 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है एवं शेष 40 प्रतिशत राशि राज्य शासन द्वारा वितरण कंपनियों को अंशपूंजी के रूप में प्रदान की जा रही है। लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों और योजनाओं की निरंतरता के लिए 63 करोड़ 76 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद् द्वारावित्त विभाग की लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों, योजनाओं एवं परियोजनाओं के परीक्षण तथा प्रशासकीय अनुमोदन की प्रक्रिया के अन्तर्गत 16 वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि (01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक) के लिए निरंतरता के लिए कुल 63 करोड़ 76 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। ग्रामीण, पिछड़े और खनिज क्षेत्रों में ग्रामीण अवसंरचना एवं पेयजल आपूर्ति के लिए 6090 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा खनिज साधन विभाग के अंतर्गत “खनिज अधिभार का रक्षित निधि में अतंरण” योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर रखे जाने के लिए 6090 करोड़ 12 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। यह योजना खनिज साधन विभाग के अंतर्गत पूर्व से संचालित योजना पूर्णतः राज्य वित्त पोषित एवं भारित व्यय से संबंधित योजना है। इस राशि का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों, पिछड़े क्षेत्रों, खनि क्षेत्रों में ग्रामीण अवसंरचना, पेयजल आपूर्ति योजना तथा सड़क विकास कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिये किया जायेगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास की योजनाओं के सुचारू संचालन के लिये 7,127 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि परिषद द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की 31 मार्च 2031 तक निरंरता एवं सुचारू संचालन के लिये 7,127 करोड़ 38 लाख रूपये की स्वीकृति दी गयी है। स्वीकृति अनुसार विभागीय परिसंपत्तियों का संधारण के लिए 16 करोड़ 78 लाख रूपये, महात्मा गांधी राज्य ग्रामीण … Read more

LPG सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता, PM मोदी ने पेट्रोलियम और विदेश मंत्री संग की चर्चा

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी के साथ ही पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी मौजूद थे। ईरान में इजरायल और अमेरिका के हमलों के चलते हालात बिगड़ गए हैं। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई को बाधित किया है और इससे भारत समेत कई एशियाई देशों में गैस और तेल की किल्लत हो गई है। देश में LPG सिलेंडरों की किल्लत चल रही है और सरकार ने उसके प्रबंधन को लेकर एस्मा लागू कर दिया है। इससे सरकार ने यह तय करने की कोशिश की है कि घरेलू उपभोक्ताओं को पर्याप्त एलपीजी मिलती रहे। इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने भी इस मसले पर एक हाईलेवल मीटिंग की है। इस बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ ही पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी मौजूद थे। ईरान में इजरायल और अमेरिका के हमलों के चलते हालात बिगड़ गए हैं। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई को बाधित किया है और इससे भारत समेत कई एशियाई देशों में गैस और तेल की किल्लत हो गई है। फिलहाल केंद्र सरकार का फोकस इस बात पर है कि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर की सप्लाई कम ना होने पाए। इसकी एवज में औद्योगिक यूनिट्स को सप्लाई कम कर दी गई है। इसके अलावा कॉमर्शियल सिलेंडर भी कम दिए जा रहे हैं। होटल इंडस्ट्री ने इस पर आपत्ति भी जताई है कि क्योंकि उनका कॉमर्शियल सिलेंडरों से ही होता है। ऐसी स्थिति में होटल इंडस्ट्री के कामकाज के ही ठप होने का खतरा है। अगले कुछ दिन देश में एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई के लिहाज से अहम हो सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ही भारत को आने वाले ज्यादातर तेल और गैस सप्लाई होता है। ऐसी स्थिति में संकट गहरा गया है। भारत अपनी जरूरत का कुल 62 फीसदी एलपीजी आयात करता है। यही नहीं तेल के मामले में यह निर्भरता 85 फीसदी के करीब है। ऐसी स्थिति में ज्यादा दिनों तक यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहा तो फिर संकट बढ़ेगा। देश में अब बड़े पैमाने पर खाना बनाने के लिए लोगों की निर्भरता एलपीजी पर बढ़ गई है। दो दशक पुरानी स्थिति नहीं है। ऐसे में गैस की किल्लत देश में बड़े गुस्से का कारण भी बन सकती है। यही वजह है कि सरकार ने इसे प्राथमिकता से लिया है और एस्मा लागू करके एलपीजी की सप्लाई का वर्गीकरण कर दिया है। गैस की जरूरत का 85 फीसदी हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है भारत अपनी गैस की जरूरत का करीब 85 फीसदी हिस्सा फिलहाल सऊदी अरब से खरीद रहा है। इसका आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ही होता है। अभी यह बंद है। ऐसे में संकट गहरा है और सरकार फिलहाल सप्लाई के दूसरे रास्ते तलाश रही है। भारत में हर साल करीब 31.3 मिलियन टन एलपीजी की खपत होती है। बता दें कि देश में कुल एलपीजी की खपत में 87 फीसदी हिस्सा घरेलू उपभोक्ताओं का ही है। इसके बाद 13 फीसदी हिस्सा उद्योग, होटल और रेस्तरां आदि में इस्तेमाल होता है।  

सर्दियों के पीक टूरिस्ट सीजन में उतारने का है प्लान, राजस्थान में जल्द दौड़ेंगी ‘डबल डेकर’ बसें

जयपुर. राजस्थान की राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के तीन बड़े शहरों की सार्वजनिक परिवहन में जल्द ही बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। दरअसल, सार्वजनिक परिवहन के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (JCTSL) ने 50 अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक डबल-डेकर बसों की खरीद के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। खास बात यह है कि केंद्र की ‘पीएम ई-बस सेवा’ से इतर, इन डबल डेकर बसों का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। किन शहरों को कितनी बसें मिलेंगी? योजना के अनुसार, कुल 50 बसों में से सर्वाधिक बसें इस तरह से अलग-अलग शहरों के हिस्से में आएंगी: जयपुर: 30 डबल डेकर बसें (शहर के प्रमुख मार्गों और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी के लिए)। जोधपुर: 10 डबल डेकर बसें (पर्यटन स्थलों को जोड़ने के लिए)। उदयपुर: 10 डबल डेकर बसें (झीलों की नगरी के खूबसूरत रास्तों के अनुकूल)। JCTSL के प्रबंध निदेशक नारायण सिंह के अनुसार, विभाग का लक्ष्य है कि दीपावली (2026) के आसपास इन बसों की पहली खेप मिल जाए ताकि दिसंबर की सर्दियों वाले पीक टूरिस्ट सीजन से पहले इन्हें सड़कों पर उतारा जा सके। पर्यटन और कनेक्टिविटी पर फोकस इन डबल डेकर बसों का मुख्य उद्देश्य केवल परिवहन नहीं, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देना भी है। अधिकारियों के मुताबिक, इन बसों के रूट इस तरह तय किए जाएंगे कि वे: शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों (जैसे आमेर किला, मेहरानगढ़, सिटी पैलेस) को जोड़ें। एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और मुख्य बस स्टैंडों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करें। यात्रियों को शहर का ‘पैनोरमिक व्यू’ (Panoramic View) प्रदान करें, जो विशेषकर विदेशी और घरेलू सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा। रूट चयन की चुनौतियां, होगा सर्वे जयपुर के कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान (CMP) के तहत 25 बस कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। हालांकि, डबल डेकर बसें चलाने से पहले प्रशासन पुराने फ्लाईओवर, रेलवे ओवरब्रिज (RoB), अंडरपास और हाइट बैरियर की जांच कर रहा है। बस की ऊंचाई को देखते हुए उन रूट्स को प्राथमिकता दी जाएगी जहाँ मार्ग में बाधाएं कम हों। पर्यावरण के अनुकूल ‘ग्रीन ट्रांसपोर्ट’ ये बसें पूरी तरह से इलेक्ट्रिक होंगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन शून्य होगा। राजस्थान सरकार का यह कदम ‘नेट जीरो’ लक्ष्य की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। इससे शहरों में शोर और वायु प्रदूषण कम होगा, जिससे निवासियों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।

ईरान के हमले की आहट से दुबई एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी, सायरन बजते ही भागे यात्री

दुबई पश्चिम एशिया में तनाव एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने जवाबी कार्रवाई की, जिसकी लपटें अब दुबई तक पहुंच गई हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दुबई के आसमान में मिसाइलें और एयरपोर्ट से धुआं उठता देखा गया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने न केवल खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और पर्यटन के प्रमुख केंद्र दुबई में भी डर का माहौल पैदा कर दिया है। दुबई एयरपोर्ट पर हमले का असर ईरान की जवाबी कार्रवाई के दौरान दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DXB) को निशाना बनाया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, एयरपोर्ट के कॉनकोर्स एरिया में मिसाइल या ड्रोन के गिरने से मामूली क्षति हुई है। घटना के तुरंत बाद वहां धुआं उठते देखा गया, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, दुबई मीडिया ऑफिस ने स्पष्ट किया है कि स्थिति को तुरंत काबू में कर लिया गया। इस हमले में चार लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज जारी है और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।  बुर्ज अल अरब के पास दुर्घटना दुबई के आसमान में सक्रिय डिफेंस सिस्टम ने एक संदिग्ध ड्रोन को समय रहते इंटरसेप्ट कर लिया। हालांकि, नष्ट किए गए ड्रोन का जलता हुआ मलबा विश्व प्रसिद्ध ‘बुर्ज अल अरब’ होटल की बाहरी दीवार पर जा गिरा। इससे होटल के एक हिस्से में हल्की आग लग गई, जिसे दमकल विभाग ने तुरंत बुझा दिया। गनीमत यह रही कि इस घटना में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में मलबे का गिरना सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा गया है। सुरक्षा एजेंसियां और हाई अलर्ट इस हमले के बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह हाई अलर्ट पर हैं। पूरे शहर और संवेदनशील ठिकानों के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है। एयरपोर्ट संचालन को जल्द से जल्द सामान्य करने की कोशिशें की जा रही हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर इसका ज्यादा असर न पड़े। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। फिलहाल, सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है।

5 लाख 66 हजार करोड़ हुई देनदारी, MP सरकार फिर लेगी 5800 करोड़ का कर्ज

भोपाल. वित्तीय वर्ष के अंतिम दौर में मध्य प्रदेश सरकार एक बार फिर तीन किस्तों में 5,800 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है। यह भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से लिया जाएगा। होली के पहले सरकार ने 6,300 करोड़़ रुपये का कर्ज लिया था। इस प्रकार देखा जाए तो प्रदेश के ऊपर 5,66,000 करोड़ रुपए के करीब कर्ज हो जाएगा। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार 10 मार्च यानी मंगलवार को तीन किस्तों में 1,900, 1,700 और 2,200 करोड़ रुपए का कर्ज लिया जाएगा। यह राशि विकास परियोजना और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए ली जा रही है। इसका उपयोग पूंजीगत कार्यों यानी अधोसंरचना विकास के कामों में ही किया जाएगा। इसके पहले 6300 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया था। नए कर्ज को मिला लिया जाए तो वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल मिलाकर कर्ज की राशि 85,000 करोड़ रुपये हो जाएगी। जीतू पटवारी ने लगाया प्रदेश को कर्ज में डुबोने का आरोप प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर प्रदेश को कर्ज में डुबोने के आरोप लगाए हैं। वहीं, सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि जो कर्ज लिया जा रहा है वह राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम के प्रविधान के अनुसार है।

LPG संकट गहराया, सरकार ने लगाया एस्मा; जानें सबसे पहले किन्हें मिलेंगे सिलेंडर

 नई दिल्ली देश में एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई में कमी आ गई है। ईरान में चल रही जंग के चलते ऐसी स्थिति पैदा हुई है। इससे निपटने के लिए मंगलवार को सरकार ने एस्मा लागू कर दिया। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि घरेलू गैस सिलेंडरों की कमी ना रहे। इसके अलावा रिफाइनरीज को केंद्र सरकार ने आदेश दिया है कि वे एलपीजी का उत्पादन बढ़ा दें। इसके अलावा कॉर्मशियल सिलेंडरों की बजाय घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई में इजाफा किया जाए। सरकार ने अपने आदेश में बताया है कि किन सेक्टरों को 100 फीसदी सप्लाई जारी रहेगी और उसमें किसी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी। आदेश के अनुसार सरकार ने कुछ सेक्टरों को प्राथमिकता में रखने को कहा है। इन्हें 100 फीसदी सप्लाई जारी रहेगी और किसी भी तरह की कटौती नहीं की जाएगी। इन सेक्टरों में पीएनजी, सीएनजी, एलपीजी और अन्य पाइपलाइन सेवाएं शामिल हैं। आदेश में कहा गया है कि फर्टिलाइजर प्लांट्स को उनको होती रही सप्लाई का 70 फीसदी हिस्सा दिया जाए। इसके अलावा चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक संस्थानों को भी उनके कोटे की 80 फीसदी तक सप्लाई जारी रखने का आदेश दिया गया है। गैस डिस्ट्रिब्यूशन करने वाली कंपनियों से कहा गया है कि वे कॉमर्शियल और इंडस्ट्रियल जरूरतों के लिए 80 फीसदी तक गैस सप्लाई जारी रखें। इसके अलावा आदेश दिया गया है कि रिफाइनिंग कंपनियां उत्पादन में तेजी लाएं। इसके अलावा एलपीजी की सप्लाई घरेलू सिलेंडरों के इस्तेमाल के लिए पहले की तरह जारी रखने को कहा गया है। सरकार का कहना है कि इस आदेश को सख्ती से लागू किया जाए। उत्पादन से लेकर ट्रांसपोर्ट तक में किसी तरह की कमी नहीं आनी चाहिए। घरेलू गैस सिलेंडरों की बुकिंग पर रहेगा 25 दिन वाला नियम यही नहीं गैस सिलेंडरों की बुकिंग के लिए सरकार ने 25 दिन की तय सीमा भी लागू कर दी है। इसके तहत यदि आपने एक सिलेंडर ले लिया है तो अगले की बुकिंग 25 दिन के बाद ही कर पाएंगे। कुछ अरसे से ऐसी सीमा खत्म हो गई थी, लेकिन इसे लागू कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि कुछ लोग जमाखोरी ना करने लगें। यदि लोगों को ऐसा करने दिया गया तो कालाबाजारी बढ़ सकती है। इसके अलावा अफवाह फैलने के चलते लोग परेशान हो सकते हैं। गौरतलब है कि ईरान में जारी जंग के चलते सप्लाई की कमी देखी जा रही है। हालांकि अमेरिका का कहना है कि अब ईरान में जंग आखिरी चरण में है। ऐसी स्थिति में माना जा रहा है कि जल्दी ही सप्लाई चेन पहले वाली स्थिति में आ सकती है।  

कोरोना वैक्सीन के दुष्प्रभावों पर मुआवजा पॉलिसी बनाने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश

नई दिल्ली मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया था कि कोविड 19 वैक्सीन के बाद हुए कथित दुष्प्रभावों के चलते मृतकों के परिवार को मुआवजा दिया जाए। Covid 19 वैक्सीन के दुष्परिणामों के कारण कथित मौतों के मामले में याचिका सुनवाई हुई। याचिका के जरिए मृतकों के लिए मुआवजे की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने टीकाकरण के बाद दुष्प्रभावों की जांच के लिए एक्सपर्ट पैनल के गठन से इनकार कर दिया है। साथ ही शीर्ष न्यायालय ने सरकार को मुआवजा नीति बनाने और टीकाकरण के दुष्प्रभावों से जुड़े आंकड़े समय-समय पर सार्वजनिक करने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया था कि कोविड 19 वैक्सीन के बाद हुए कथित दुष्प्रभावों के चलते मृतकों के परिवार को मुआवजा दिया जाए। अब अदालत ने इन याचिकाओं का निपटारा किया और कहा है कि टीकाकरण के बाद होने वाले दुष्प्रभावों की निगरानी के लिए मौजूद व्यवस्था जारी रहेगी। कोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था को देखते हुए टीकाकरण के बाद दुष्प्रभावों की जांच के लिए कोर्ट की तरफ से अलग समिति बनाने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति कानून का सहारा नहीं ले सकता है। कोर्ट ने कहा कि मुआवजा नीति बनाने का मतलब यह नहीं माना जाएगा कि भारत सरकार या किसी अन्य अथॉरिटी ने अपनी गलती या कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है। सरकार को दिए निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि कोविड 19 वैक्सीन लगवाने के बाद गंभीर दुष्परिणामों के लिए मुआवजा नीति बनाई जाए। साथ ही कहा कि दुष्परिणामों के मामलों को देखने के लिए मौजूदा व्यवस्था ही जारी रहेगी। साथ ही समय समय पर इससे जुड़ा जरूरी डेटा सार्वजनिक किया जा सकता है। याचिका दरअसल, यह याचिका कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के चलते जान गंवाने वाली दो लड़कियों के पैरेंट्स की तरफ से दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि मौतों के मामलों की स्वतंत्र जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति का गठन किया जाए। साथ ही ऑटोप्सी और जांच की रिपोर्ट्स को जारी किया जाए। याचिका में कहा गया था कि बच्चियों के माता-पिता को आर्थिक मुआवजा दिया जाए।  

MP हाईकोर्ट में दोनों पक्ष करेंगे बहस, धार भोजशाला विवाद में 2189 पेज की रिपोर्ट दाखिल

धार. धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने 98 दिनों तक चले वैज्ञानिक सर्वे के बाद 2189 पेज की विस्तृत रिपोर्ट मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में प्रस्तुत कर दी है। रिपोर्ट सामने आने के बाद दोनों पक्षों में हलचल तेज हो गई है और अब 16 मार्च को होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। भोजशाला परिसर में एएसआई की ओर से लगभग तीन महीने तक वैज्ञानिक पद्धति से सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान परिसर के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद संरचनात्मक अवशेषों, पत्थरों पर उकेरी गई आकृतियों, स्तंभों और स्थापत्य शैली का विस्तृत अध्ययन किया गया। सर्वे के दौरान मिले अवशेषों का वैज्ञानिक परीक्षण कर उन्हें दस्तावेजी रूप से रिपोर्ट में शामिल किया गया। अदालत ने अध्ययन के लिए दिया समय मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने दोनों पक्षों को रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था। अब निर्धारित तिथि 16 मार्च को होने वाली सुनवाई में दोनों पक्ष अदालत के सामने अपने-अपने तर्क और आपत्तियां पेश करेंगे। इस कारण भोजशाला विवाद से जुड़े इस मामले की अगली सुनवाई को लेकर धार सहित पूरे प्रदेश में विशेष रुचि बनी हुई है। रिपोर्ट में स्थापत्य अवशेषों का उल्लेख सूत्रों के अनुसार एएसआई की रिपोर्ट में परिसर के भीतर मंदिर से जुड़े स्थापत्य अवशेषों और संरचनात्मक साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है। सर्वे के दौरान पत्थरों पर उत्कीर्ण आकृतियां, प्राचीन स्तंभ, नक्काशीदार हिस्से और अन्य अवशेषों का वैज्ञानिक परीक्षण किया गया। इन सभी तथ्यों को एएसआई ने विस्तृत रूप से दस्तावेजी रूप में अदालत के सामने प्रस्तुत किया है। दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया रिपोर्ट सामने आने के बाद मंदिर पक्ष में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। मंदिर पक्ष के याचिकाकर्ता आशीष गोयल का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट में मिले साक्ष्य स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि भोजशाला परिसर में पहले मंदिर था और बाद में उसे तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया गया। उनके अनुसार एएसआई की रिपोर्ट से मंदिर पक्ष के दावों को मजबूती मिली है। वहीं दूसरी ओर कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी के सदर अब्दुल समद ने कहा कि वे एएसआई की रिपोर्ट का अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 16 मार्च को होने वाली सुनवाई में रिपोर्ट के विभिन्न पहलुओं पर अपनी आपत्तियां और तर्क अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।

राफेल को टक्कर देगा तेजस MK-2… बंकर-बस्टर मिसाइलों से दुश्मन के ठिकाने तबाह

नई दिल्ली भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को पानी पिलाने वाले राफेल लड़ाकू विमान जैसा ही तेजस MK-2 को बनाने का प्लान किया है। भारत के स्वदेशी और अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान तेजस एमके-2 को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) बना रहा है, जिसने तेजस एमके-2 को और उन्नत ओर ताकतवर बनाने का फैसला किया है। इसमें SCALP‑EG और Crystal Maze जैसी मिसाइलें लगाई जाएंगी। HAL के तेजस फैमिली के सबसे ताकतवर एडवांस संस्करण के रूप में डिजाइन किया गया यह विमान आने वाले दशक में भारतीय वायु सेना की रीढ़ बनने की उम्मीद है। दुश्मन के भीतरी इलाकों तक सटीक मार करेगा तेजस एमके-2     मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जैसे-जैसे भारत अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमता का विस्तार कर रहा है, तेजस एमके2 को एडवांस स्टैंडऑफ मिसाइलों को एकीकृत करने के लिए पहले से ही लैस किया जा रहा है।     इसका मकसद यह है कि भारी सुरक्षा वाले हवाई क्षेत्र से बाहर रहते हुए दुश्मन के क्षेत्र में गहराई तक स्थित रणनीतिक लक्ष्यों को भेदने में तेजस एमके-2 सक्षम होगा। इससे वायुसेना की सटीक मारक क्षमता भी बढ़ेगी। तेजस MK-2 वायुसेना के MK-1 से ज्यादा ताकतवर     रिपोर्टों के अनुसार, तेजस एमके-2 को एक मध्यम-वजन बहु-भूमिका लड़ाकू विमान के रूप में परिकल्पित किया गया है, जो वर्तमान में सेवा में मौजूद एचएएल तेजस एमके-1 संस्करणों की तुलना में बड़ा और कहीं अधिक ताकतवर है।     इस विमान का विकास वैमानिकी विकास एजेंसी द्वारा किया जा रहा है और इसका निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। तेजस MK-2 की ये हैं खूबियां, जो बनाती हैं मारक     तेजस MK-2 का बड़ा एयरफ्रेम होगा।     तेजस MK-2 में अधिक पेलोड क्षमता होगी।     बेहतर एवियोनिक्स और सेंसर से लैस होगा।     इसकी दुश्मन के इलाके में अधिक युद्धक रेंज होगी।     GE F414-GE-INS6 टर्बोफैन इंजन से शक्ति मिलेगी।     Mk1 सीरीज में इस्तेमाल इंजन की तुलना में अधिक थ्रस्ट देता है।     लंबी दूरी के मिशनों के दौरान भारी हथियार भी ले जा सकेगा। लंबी दूरी की मारक मिसाइलों से लैस होगा तेजस एमके-2     तेजस Mk2 के लिए नियोजित सबसे महत्वपूर्ण अपग्रेड में से एक लंबी दूरी की सटीक मारक हथियारों का एकीकरण है। इसमें सबसे पहले SCALP-EG क्रूज मिसाइल और इजरायली मूल की क्रिस्टल मेज मिसाइलें लगाई जाएंगी।     ये दोनों हथियार पहले से ही भारतीय वायु सेना के हथियार भंडार का हिस्सा हैं और वर्तमान में डसॉल्ट राफेल और उन्नत डसॉल्ट मिराज 2000 लड़ाकू विमानों जैसे विमानों पर तैनात हैं। SCALP-EG क्रूज मिसाइल की खूबी जान लीजिए     SCALP-EG एक लंबी दूरी की वायु-प्रवेशित क्रूज मिसाइल है जिसे अत्यधिक सुरक्षित लक्ष्यों पर सटीक हमले करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह बंकरों और सैन्य ठिकानों पर तेजी से वार करती है।     यह रडार से बचते हुए कम ऊंचाई पर चुपके से उड़ान भरने में सक्षम है। ऊंचाई वाले लक्ष्यों के लिए सटीक मार्गदर्शन प्रणाली से लैस होगी। सैकड़ों किलोमीटर दूर के लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता है। यह दुश्मन की सीमा में जाए बिना ही टारगेट्स तबाह कर सकती है। क्रिस्टल मेज से कोई बच नहीं सकता है क्रिस्टल मेज मिसाइल वायु से सतह तक सटीक मारक हथियार के रूप में भी जाना जाता है। यह दुश्मन के रडार स्टेशनों, कमांड केंद्रों और वायु रक्षा प्रतिष्ठानों जैसे ज्यादा अहम टारगेट्स पर हमला करने के लिए डिजाइन की गई है। इसकी मारक क्षमता करीब 250 किमी तक है। इन चीजों से भी लैस होंगे तेजस विमान एस्ट्रा एमके-1 बियॉन्ड-विजुअल-रेंज मिसाइल, एस्ट्रा एमके-2 एक्सटेंडेड-रेंज बीवीआर मिसाइल और एस्ट्रा एमके-3 का भविष्य में एकीकरण। निकटवर्ती हवाई लड़ाइयों के लिए लड़ाकू विमान इन्फ्रारेड-गाइडेड एएसराम मिसाइल ले जाएगा, जिसका उपयोग भारतीय वायु सेना पहले से ही तेजस एमके1ए सहित कई प्लेटफार्मों पर कर रही है।

MP की 1.28 करोड़ महिलाओं को खुशखबरी, जल्द जारी होगी लाडली बहना योजना की 34वीं किस्त

ग्वालियर  मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी लाडली बहना योजना की पात्र महिलाओं के लिए बड़ी खबर है। लाडली बहना योजना की 34वीं किस्त जल्द ही जारी होने वाली है। इस बार प्रदेश की करीब 1.28 करोड़ महिलाओं के खातों में सीधे 1500-1500 रुपए की राशि भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री Mohan Yadav सिंगल क्लिक के माध्यम से यह राशि पात्र महिलाओं के खातों में ट्रांसफर करेंगे। 1.28 करोड़ को मिलेगा योजना का लाभ वर्तमान में 1.28 करोड़़ लाडली बहनें इस योजना (Ladli Behna Yojana) का लाभ ले रही हैं। इन महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1500-1500 रुपए की राशि ट्रांसफर की जाती है। इस सरकारी आंकड़े के मुताबिक मार्च महीने में आने वाली लाडली बहना योजना की 34वीं किस्त के कुल 1920 रुपए मोहन सरकार पात्र महिलाओं के खातों में ट्रांसफर करेगी। यह पैसा सीधे DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से महिलाओं के बैंक में पहुंचाया जाएगा। प्रदेश की बीजेपी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बता दें कि लाडली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) प्रदेश की बीजेपी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। जो प्रदेश की राजनीति में एक बड़ी गेम चेंजर योजना साबित हुई है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर करना है। शुरुआत में इस योजना की पात्र महिलाओं को 1000 रुपए की राशि दी जाती थी। जिसे बढ़ाकर पहले 1250 रुपए किया गया और अब यह राशि 1500 तक बढ़ाई जा चुकी है। सरकार का दावा, महिलाएं हुईं आत्मनिर्भर, मिला सम्मान मध्य प्रदेश की मोहन सरकार का दावा है कि इस योजना का शुरू होने से प्रदेश की करोड़ों महिलाओं को बड़ा सहारा मिला है। वे न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनी हैं, परिवार में उनके आर्थिक योगदान से उनका सम्मान बढ़ा है और वे अब निर्णायक भूमिका में आ गई हैं। घर खर्च के साथ ही वे बच्चों की पढ़ाई और अपनी छोटी-मोटी जरूरतें खुद पूरी कर रही हैं।

2041 तक नया नोएडा: अबू धाबी स्टाइल स्मार्ट सिटी में 3000 फैक्ट्रियां और 6 लाख लोग बसेंगे

नोएडा उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर और बुलंदशहर के बीच बसने वाला ‘नया नोएडा’ (Naya Noida Master Plan 2041) (दादरी-नोएडा-गाजियाबाद विशेष निवेश क्षेत्र – DNGIR) भविष्य का सबसे आधुनिक औद्योगिक शहर बनने जा रहा है। इसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। औद्योगिक हब… 3 हजार फैक्ट्रियां और 21 हजार हेक्टेयर क्षेत्र नया नोएडा करीब 21,000 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में फैला होगा। मास्टर प्लान 2041 के अनुसार, इसका सबसे बड़ा हिस्सा यानी 8,811 हेक्टेयर क्षेत्र केवल उद्योगों के लिए आरक्षित किया गया है। यहां लगभग 3,000 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां लगाई जाएंगी, जिससे यह क्षेत्र निवेश का ग्लोबल हब बनेगा।  इस नए शहर की अनुमानित आबादी करीब 6 लाख होगी। खास बात यह है कि इसमें से 3.5 लाख लोग माइग्रेंट (प्रवासी) होंगे, जो यहाँ के उद्योगों में काम करने के लिए आएंगे। आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए 2,000 हेक्टेयर से अधिक जमीन का उपयोग किया जाएगा। ईडब्ल्यूएस से लेकर एचआईजी फ्लैट्स तक यहां हर आय वर्ग के लिए घर उपलब्ध होंगे। मास्टर प्लान में चार कैटेगरी और तीन टाइप के मकानों का प्रस्ताव है…     EWS (आर्थिक रूप से कमजोर): 18.1 हेक्टेयर क्षेत्र।     LIG (निम्न आय वर्ग): 40.8 हेक्टेयर क्षेत्र।     MIG (मध्यम आय वर्ग): 29.9 हेक्टेयर क्षेत्र।     HIG (उच्च आय वर्ग): 1.8 हेक्टेयर क्षेत्र। पानी और पर्यावरण: गंगाजल और झीलों का संगम शहर की प्यास बुझाने के लिए 300 MLD पानी की व्यवस्था की जाएगी, जिसमें गंगाजल और भूजल का मिश्रण होगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए मास्टर प्लान में खास प्रावधान हैं…     झीलों और नहरों का निर्माण: 58.96 हेक्टेयर में लेक और 91.75 हेक्टेयर में कैनाल बनाई जाएंगी।     जल संचयन: गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए वेटलैंड विकसित किए जाएंगे।     वाटर सप्लाई: कुल पानी में से 212 MLD उद्योगों को और 85 MLD घरेलू उपयोग के लिए दिया जाएगा। 80 गांवों की जमीन पर ‘लैंड पूल’ मॉडल नया नोएडा को बुलंदशहर और दादरी के 80 गांवों की जमीन पर बसाया जा रहा है। यहां जमीन का अधिग्रहण ‘लैंड पूलिंग’ नीति के जरिए किया जाएगा, जिससे किसानों को भी शहर के विकास में भागीदार बनाया जा सके।

MP बार काउंसिल चुनाव 2026: 12 मई को मतदान, 16 जून से काउंटिंग; 87 हजार अधिवक्ता चुनेंगे नई कार्यकारिणी

इंदौर राज्य अधिवक्ता परिषद के पांच साल में एक बार होने वाले चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके अनुसार पूरे प्रदेश में 12 मई 2026 को एक साथ मतदान कराया जाएगा, जबकि मतगणना 16 जून 2026 से शुरू होगी। कार्यकारिणी सदस्य के कुल 25 पदों में से इस बार सात पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें से पांच पदों पर चुनाव होगा, जबकि दो पदों पर मनोनयन किया जाएगा। इस चुनाव में प्रदेशभर के लगभग 87 हजार वकील हिस्सा लेंगे। राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव के लिए प्रारंभिक मतदाता सूची 16 मार्च 2026 को जारी की जाएगी। इस सूची को लेकर 24 मार्च 2026 तक दावे और आपत्तियां प्रस्तुत की जा सकेंगी। इसके बाद एक अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी। मतदान का अधिकार केवल उन्हीं वकीलों को मिलेगा, जिन्होंने निर्धारित प्रावधानों के अनुसार अपना सत्यापन करा लिया है।   नामांकन के लिए तीन दिन का समय प्रत्याशियों को नामांकन फार्म जमा करने के लिए तीन दिन का समय मिलेगा। आठ, नौ और दस अप्रैल को नामांकन फार्म जमा किए जा सकेंगे। 15 और 16 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। वहीं 20 से 22 अप्रैल शाम चार बजे तक नाम वापस लिया जा सकेगा। 22 अप्रैल 2026 को शाम पांच बजे प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी। दो महीने से अधिक चलती है मतगणना मतदान के बाद सभी मतपेटियों को सीलबंद कर जबलपुर भेजा जाएगा। वहां 16 जून 2026 से मतगणना शुरू होगी। आमतौर पर राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव की मतगणना लगभग दो महीने तक चलती है। महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ेगी इस बार राज्य अधिवक्ता परिषद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना तय है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 25 में से सात पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। पिछली कार्यकारिणी में 25 सदस्यों में से केवल एक महिला थी, लेकिन इस बार यह संख्या सात तक पहुंच जाएगी। प्रत्याशियों के लिए चुनौतीपूर्ण होगा चुनाव पिछले चुनाव की तुलना में इस बार चुनाव अधिक चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। इसका कारण यह है कि पुरुष प्रत्याशियों के लिए 25 के बजाय सिर्फ 18 पद ही उपलब्ध होंगे। अनुमान के अनुसार प्रथम वरीयता के लगभग 2500 मत पाने वाले प्रत्याशी खुद को सुरक्षित स्थिति में मान सकते हैं। इंदौर से 30 से ज्यादा संभावित प्रत्याशी नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही संभावित प्रत्याशियों ने प्रचार शुरू कर दिया है। इंटरनेट मीडिया के साथ-साथ प्रत्यक्ष संपर्क के माध्यम से भी प्रचार किया जा रहा है। प्रत्याशी वकीलों के कार्यालयों और घरों तक पहुंचकर प्रथम वरीयता का मत देने की अपील कर रहे हैं। इस बार राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव में अकेले इंदौर से 30 से अधिक प्रत्याशियों के मैदान में उतरने की तैयारी है, जिनमें वर्तमान कार्यकारिणी के पांच सदस्य भी शामिल हैं।

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