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Heat Wave का खतरा बढ़ा: भारत के 417 जिले हाई रिस्क में, रात का तापमान भी बना चिंता

नई दिल्ली भारत में क्लाइमेट चेंज का असर अब सिर्फ “चिलचिलाती दोपहर” तक ही सीमित नहीं है, बल्कि “घुटन भरी रातें” और “बढ़ती नमी” भी बड़ी आबादी के लिए जानलेवा खतरा बन रही हैं। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) की तरफ से जारी की गई नई स्टडी, “बहुत ज्यादा गर्मी भारत पर कैसे असर डाल रही है: जिला-लेवल हीट रिस्क का आकलन 2025”, ने चौंकाने वाले तथ्य सामने लाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 57 प्रतिशत ज़िले, जहां देश की 76 प्रतिशत आबादी रहती है, अब बहुत ज़्यादा से लेकर बहुत ज्यादा गर्मी के खतरे का सामना कर रहे हैं। यह स्टडी पहली बार 35 इंडिकेटर्स के आधार पर 734 ज़िलों का डिटेल्ड एनालिसिस करती है, जो 1982 से 2022 तक बदलते ट्रेंड्स को दिखाता है। हीट ‘हॉटस्पॉट’: दिल्ली और महाराष्ट्र लिस्ट में सबसे ऊपर CEEW डेटा के मुताबिक, देश के 417 जिले ‘हाई रिस्क’ कैटेगरी में हैं, जबकि 201 जिलों में मीडियम रिस्क है। सबसे ज्यादा गर्मी के खतरे वाले टॉप 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की लिस्ट इस तरह है: दिल्ली, आंध्र प्रदेश, गोवा, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश दिलचस्प और चिंता की बात यह है कि यह खतरा सिर्फ़ शहरी इलाकों तक ही सीमित नहीं है। जहाँ दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे आर्थिक केंद्र खतरे में हैं, वहीं महाराष्ट्र, केरल, उत्तर प्रदेश और बिहार के ग्रामीण ज़िले, जहाँ खेती करने वाले मज़दूर खुले आसमान के नीचे काम करने को मजबूर हैं, भी ज़्यादा खतरे में हैं। रातें दिनों से ज्यादा खतरनाक स्टडी की सबसे डरावनी बात ‘गर्म रातों’ (बहुत ज़्यादा गर्म रातें) में बढ़ोतरी है। रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले एक दशक (2012-2022) में, लगभग 70 प्रतिशत ज़िलों में हर गर्मी के मौसम में कम से कम पाँच और बहुत ज़्यादा गर्म रातें दर्ज की गई हैं। “साइंस साफ़ है—हम अब बहुत ज़्यादा, लंबे समय तक चलने वाली गर्मी और खतरनाक रूप से गर्म रातों के दौर में आ गए हैं।” जब रात का टेम्परेचर नॉर्मल से काफ़ी ज़्यादा रहता है, तो इंसान के शरीर को दिन की गर्मी से उबरने का समय नहीं मिलता, जिससे हीट स्ट्रोक और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। डेटा के मुताबिक, गर्म दिनों के मुकाबले गर्म रातें बहुत तेज़ी से बढ़ रही हैं। उत्तर भारत में बढ़ती ह्यूमिडिटी उत्तर भारत के ज़िले, जिन्हें पहले सूखा माना जाता था, अब तटीय इलाकों के बराबर ह्यूमिडिटी महसूस कर रहे हैं। पिछले दस सालों में इंडो-गैंगेटिक मैदानों में रिलेटिव ह्यूमिडिटी में 10 परसेंट की बढ़ोतरी देखी गई है। बदलाव: कानपुर, जयपुर, दिल्ली और वाराणसी जैसे शहरों में ह्यूमिडिटी का लेवल 30-40 परसेंट से बढ़कर 40-50 परसेंट हो गया है। असर: ज्यादा ह्यूमिडिटी की वजह से महसूस होने वाला टेम्परेचर असल टेम्परेचर से 3-5 डिग्री सेल्सियस ज़्यादा हो जाता है। इससे शरीर के पसीना निकलने के नैचुरल कूलिंग प्रोसेस में रुकावट आती है, जिससे नॉर्मल टेम्परेचर भी जानलेवा हो जाता है। आगे का रास्ता: डिस्ट्रिक्ट लेवल पर हीट एक्शन प्लान CEEW में सीनियर प्रोग्राम लीड, डॉ. विश्वास चिताले ने ज़ोर दिया कि लोकल लेवल पर हीट एक्शन प्लान लागू करने का समय आ गया है। महाराष्ट्र, ओडिशा और गुजरात जैसे राज्यों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं, लेकिन इसे नेशनल लेवल पर बढ़ाने की जरूरत है। मुख्य सुझाव:     फाइनेंशियल मदद: 2024 में हीटवेव को डिजास्टर कैटेगरी में शामिल किए जाने के साथ, राज्य अब स्टेट डिज़ास्टर मिटिगेशन फंड का इस्तेमाल कर सकते हैं।     समाधान: नेट-जीरो कूलिंग शेल्टर, कूल रूफ और अर्ली वार्निंग सिस्टम को ज़रूरी करें।     डेटा अपडेट: हीट एक्शन प्लान में सिर्फ टेम्परेचर ही नहीं, बल्कि रात में होने वाली गर्मी और ह्यूमिडिटी का डेटा भी शामिल करें।     यह रिपोर्ट साफ करती है कि बहुत ज़्यादा गर्मी अब भविष्य की चेतावनी नहीं है, बल्कि आज की एक त्रासदी है, जिससे निपटने के लिए पॉलिसी और स्ट्रक्चरल बदलावों की जरूरत है।  

असम में सीट शेयरिंग ने BJP की मुश्किलें बढ़ाईं, NDA के साथी अब फ्रेंडली फाइट के मूड में

गुवाहाटी असम में 2026 की चुनावी बिसात बिछ चुकी है, लेकिन सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही खेमों के भीतर सीटों के गणित को लेकर तनातनी कम होने का नाम नहीं ले रही है। गठबंधन की राजनीति के इस दौर में सहयोगी दलों की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं ने रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है। हालात यह हैं कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में गठबंधन के सहयोगियों के बीच ही ‘मैत्रीपूर्ण मुकाबला’ होने की संभावना प्रबल हो गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार एक तरफ विकास के दावों के साथ मैदान में है, वहीं दूसरी ओर उसे अपने सहयोगियों असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) को संतुष्ट रखने की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। असम गण परिषद (AGP) 2014 से भाजपा की वफादार साथी रही है। इस बार अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए दबाव बना रही है। पिछले 2021 के चुनावों में एजीपी ने 29 सीटों पर दांव आजमाया था, जिनमें से 26 पर उसने अकेले चुनाव लड़ा और 3 सीटों पर भाजपा के साथ दोस्ताना मुकाबला किया था। अंततः पार्टी 9 सीटें जीतने में सफल रही थी। इस बार एजीपी के जमीनी कार्यकर्ताओं की मांग है कि पार्टी को अधिक सीटों पर मौका मिलना चाहिए, जिससे भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने संकेत दिया है कि एजीपी के साथ शुरुआती दौर की चर्चा शुरू हो चुकी है और 9 या 10 मार्च तक सीटों का अंतिम खाका तैयार हो सकता है। हालांकि, जब उनसे सहयोगियों की बढ़ती मांगों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी औपचारिक मांग से अवगत नहीं हैं, लेकिन उन्होंने ‘फ्रेंडली फाइट’ की संभावना से इनकार भी नहीं किया। बोडोलैंड का पेच गठबंधन की सबसे पेचीदा स्थिति बोडोलैंड क्षेत्र में देखने को मिल रही है। यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) ने अपनी आक्रामक रणनीति का ऐलान करते हुए 21 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। इनमें से 15 सीटें बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (BTC) क्षेत्र की हैं और 6 सीटें उससे बाहर की हैं। सबसे बड़ी बाधा यह है कि बीपीएफ (BPF) और यूपीपीएल (UPPL) के बीच की कड़वाहट खत्म होने का नाम नहीं ले रही। दोनों दलों ने साफ कर दिया है कि वे न तो साथ चुनाव लड़ सकते हैं और न ही किसी सीट-शेयरिंग फॉर्मूले पर सहमत होंगे। यह स्थिति भाजपा के लिए सिरदर्द बन गई है, क्योंकि उसे इन दोनों क्षेत्रीय ताकतों के बीच संतुलन बनाना है। विपक्ष की एकजुटता दूसरी ओर सत्ता से बाहर कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर चार प्रमुख विपक्षी दलों ने हाथ मिलाया है और संयुक्त अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने गठबंधन की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि सभी सहयोगी दल जल्द ही पूरे राज्य में समन्वयित अभियान बैठकें करेंगे। गोगोई ने कहा, “हमारे पास केवल 30 दिन बचे हैं और ये 30 दिन असम के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हमें एकजुट होकर जनता के बीच जाना होगा।” विपक्ष के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे कितनी जल्दी अपनी सीटों का बंटवारा कर पाते हैं, ताकि प्रचार के आखिरी दिनों में कोई आंतरिक कलह सामने न आए। जैसे-जैसे नामांकन की तारीखें नजदीक आ रही हैं, असम की राजनीति में गठबंधन धर्म और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के बीच का संघर्ष गहराता जा रहा है। जहां भाजपा के लिए अपने सहयोगियों की नाराजगी को दूर करना एक बड़ी परीक्षा है, वहीं विपक्ष के लिए 30 दिनों के भीतर एक साझा और प्रभावी नैरेटिव तैयार करना आसान नहीं होगा।

एयर ट्रैवल अपडेट: 29 मार्च से राजा भोज एयरपोर्ट से मुंबई की सीधी फ्लाइट नहीं मिलेगी

भोपाल राजा भोज इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 29 मार्च से शुरू हो रहे समर शेड्यूल में इस बार फ्लाइट बढ़ाने की बजाए कम होने जा रही हैं। एयर इंडिया एवं इंडिगो एयरलाइंस ने मुंबई के लिए एक उड़ान बंद करने की घोषणा की है। इसके अलावा इंडिगो एयरलाइंस ने गोवा और अहमदाबाद के डायरेक्ट फ्लाइट की जल्द समीक्षा कर इसे भी बंद करने के संकेत दिए हैं। इंडिगो एयरलाइंस एकमात्र नई उड़ान नवी मुंबई के लिए शुरू करने जा रही है। गर्मियों की छुट्टी में जब लोग टूरिस्ट डेस्टिनेशन जाने के लिए अपना प्रोग्राम बना रहे हैं, उसी वक्त विमानन कंपनियों द्वारा भोपाल से फ्लाइट कनेक्टिविटी कम किए जाने से निराशा का माहौल है। एयरपोर्ट प्रबंधन के मुताबिक युद्ध की आशंका के चलते और कमजोर यात्री संख्या के कारण फिलहाल विमानन कंपनियां किसी भी फ्लाइट एक्सटेंशन पर विचार नहीं कर रही हैं। इंडिगो ने नवी मुंबई के लिए स्लॉट, किराया 5 हजार इंडिगो ने नवी मुंबई के लिए स्लॉट भी ले लिया है और फ्लाइट का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। यात्रियों के लिए इस उड़ान की बुकिंग भी शुरू कर दी गई है। इस नई उड़ान का शुरुआती किराया लगभग चार से पांच हजार रुपए के बीच रखा गया है। नवीं मुंबई के लिए नई उड़ान शुरू करने के साथ ही इंडिगो ने भोपाल से मुंबई जाने वाली अपनी एक उड़ान बंद करने का निर्णय लिया है। इसके बाद 29 मार्च से भोपाल और मुंबई के बीच इंडिगो की केवल एक ही उड़ान संचालित होगी।   पर्याप्त यात्रियों के बावजूद कटौती भोपाल से गोवा और अहमदाबाद की उड़ानों को बंद करने का प्रस्ताव भी सामने आया है। गोवा की उड़ान करीब छह महीने पहले ही शुरू की गई थी, इसलिए इसे बंद किए जाने के कारण स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। ट्रेवल एजेंटों के अनुसार गोवा की इस उड़ान को लगभग 80 प्रतिशत यात्रियों का लोड मिल रहा था।

विश्व क्रिकेट में भारत का दबदबा, न्यूजीलैंड को हराकर तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप जीता

नई दिल्ली भारतीय टीम रविवार को न्यूजीलैंड को टी20 विश्व कप के फाइनल में हराकर चैंपियन बन गई है। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रनों से करारी शिकस्त दी। भारत ने संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा, ईशान किशन और आखिरी में शिवम दुबे की तेजतर्रार पारी की बदौलत 20 ओवर में 5 विकेट खोकर 255 रन बनाए। इसके जवाब में न्यूजीलैंड की टीम ने नियमित अंतराल पर विकेट गंवाए और 19 ओवर में सभी विकेट खोकर 159 रन ही बना सकी। भारत के लिए जसप्रीत बुमराह ने 4, अक्षर पटेल ने तीन विकेट लिए। भारत ने लगातार दूसरी बार टी20 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया है। वहीं भारतीय टीम तीन बार टी20 विश्व कप ट्रॉफी जीतने वाली टीम बन गई है। आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल मुकाबला इंडिया और न्यूजीलैंड के बीच खेला जा रहा है। न्यूजीलैंड की टीम के कप्तान मिचेल सैंटनर ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया, लेकिन भारतीय ओपनर्स ने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों के धागे खोल दिए। पावरप्ले में ही अभिषेक शर्मा ने अपना अर्धशतक पूरा कर लिया था। वहीं, भारतीय टीम ने 6 ओवर में बिना विकेट खोए 92 रन बनाए। बाद में संजू सैमसन और ईशान किशन के बल्ले से अर्धशतक आए। शिवम दुबे ने आखिरी ओवर में 24 रन बटोरे और कुल 255 रन 5 विकेट खोकर भारत ने बनाए। अब न्यूजीलैंड को 256 रनों का टारगेट मिला है। अभिषेक ने 18 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया, लेकिन 21 गेंदों में 52 रन बनाकर वे आउट हो गए। हालांकि, भारत को तब तक दमदार शुरुआत मिल चुकी थी। सैमसन ने 33 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया, जो इस टी20 विश्व कप में उनका लगातार तीसरा अर्धशतक है। संजू फिर से 89 रनों की पारी खेलकर आउट हुए। ईशान किशन ने 23 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया, लेकिन वे 54 रन की पारी खेलकर आउट हो गए। सूर्या का खाता नहीं खुला और हार्दिक ने सिर्फ 18 रन बनाए। शिवम दुबे ने 8 गेंदों में 26 रन बनाए। 256 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही। टीम ने तीसरे ओवर में पहला विकेट गंवाया। फिल एलन 7 गेंद में नौ रन ही बना सके। रचिन रविंद्र दो गेंद में ही एक रन ही बना पाए। ग्लेन फिलिप्स ने 5 गेंद में 5 रन बनाए। मार्क चैपमैन 8 गेंद में तीन रन ही बना सके। टिम साइफर्ट ने 26 गेंद में ताबड़तोड़ 52 रन बनाए। NZ 159/8 (19 ओवर)* IND 255/5 (20 ओवर)

रंग पंचमी पर CM मोहन यादव का बड़ा पिटारा, अशोकनगर के लिए 115.35 करोड़ के विकास कार्य

भोपाल/अशोकनगर  रंग पंचमी के मौके पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अशोकनगर जिले के लिए खुशियों का पिटारा खोल दिया। उन्होंने 8 मार्च को यहां 115 करोड़ 35 लाख रुपये की लागत के 50 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन किया। उन्होंने करीला माता धाम में आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता भी की। सीएम डॉ. यादव ने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ दिए। इससे पहले उन्होंने वनोपज, कृषि आधारित उत्पादों और स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मद्देनजर उन्होंने विभिन्‍न क्षेत्रों में उत्‍कृष्‍ट कार्य करने वाली जिले की सात महिलाओं को सम्‍मानित भी किया। महिलाओं के कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाई इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार महिलाओं के कल्याण के लिए अनेको योजनाएं संचालित कर रही है। साथ ही, आगामी लोकसभा-विधानसभा निर्वाचन में भी 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहनों को प्रदेश सरकार हर महीने 1500 रुपये दे रही है। महिलाओं को विभिन्न विभागों में आरक्षण देकर उच्च पदों पर नियुक्ति दी गईं हैं। किसान कल्याण वर्ष का आयोजन प्रदेश में किया जा रहा है। किसानों के उत्थान के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार 6-6 हजार रुपये की राशि किसान सम्मन निधि के रूप में दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की बड़ी घोषणा इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ यादव ने ग्राम दीपनाखेड़ा से करीला धाम तक 10 किलोमीटर की सड़क की स्वीकृत किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कलेक्टर को निर्देश दिए कि करीला धाम तीर्थ के लिए कार्य योजना बनाई जाए। बता दें, इससे पहले उन्होंने करीला धाम पहुंचकर माता जानकी के दर्शन किए। यहां उन्होंने प्रदेश वासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। पूजा-पाठ के बाद उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ खेली फूलों की होली भी खेली। इस दौरान उन्होंने कहा कि करीला धाम में आस्था के साथ पूर्ण श्रद्धा भाव से श्रद्धालु माता जानकी के दर्शन करने आते हैं। माता जानकी श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण करती हैं। उन्होंने कहा कि आज का दिन अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर माता जानकी के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया है। माता सीता शक्ति पराक्रम की देवी है, माता सीता का प्रताप गौरवशाली संस्कृति है। इस पवित्र स्थान से महर्षि वाल्मीकि, सीता माता एवं लव कुश की कहानी जुड़ती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक काल में अलग-अलग देवताओं का महत्व रहा है। हमारी भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति को प्रथम स्थान दिया गया है। इतनी लागत के होंगे निर्माण कार्य अशोकनगर में सांदीपनी शासकीय उच्‍चतर माध्‍यमिक विद्यालय महिदपुर (लागत 29.45 करोड़), मोहन पुर लिधोरा मार्ग से किर्राया सड़क (लागत 1.26 करोड़), मुंगावली चंदेरी मार्ग से डुंगासरा तक सड़क निमार्ण (लागत 25 लाख रुपये), नदी पर उच्‍च स्‍तरीय पुल निमार्ण (लागत 7.06 करोड़ रुपये), 30 बिस्‍तरीय सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र भवन राजपुर (लागत 10.94 करोड़ रुपये), आंगनवाड़ी भवन निर्माण ग्राम खैरोना (लागत 95 लाख रुपये), पंचायत भवन निमार्ण कजराई (लागत 2 लाख 25 हजार रुपये), शासकीय गणेश शंकर विद्यार्थी महाविद्यालय (लागत 5.42 करोड़ रुपये), 100 बिस्‍तरीय बालिका छात्रावास मल्‍हारगढ़ (लागत 1.78 करोड़ रुपये), प्राथमिक शाला भवन अथाई घाट (लागत 43 लाख रुपये) का लोकार्पण हुआ। इसके अलावा मां जानकी करीला धाम परिसर में वीआईपी दर्शन एप्रोच मार्ग (लागत 6.50 लाख रुपये), सीता रसोई के पास हट निर्माण (लागत 5 लाख रुपये), टीनशेड निर्माण (लागत 2.5 लाख रुपये), हेलीपेड-रोड निर्माण (लागत 15 लाख रुपये), वीआईपी पार्किंग के लिए रैंप निर्माण (लागत 5 लाख रुपये), पानी टंकी निर्माण (लागत 40 लाख रुपये), पेयजल के लिए नए 5 हैंडपंप (लागत 89 लाख रुपये) का लोकार्पण भी हुआ।  

कांग्रेस का होली सेलिब्रेशन: जीतू पटवारी ने दिग्विजय सिंह को रंगा, नेताओं ने की मस्ती

भोपाल देशभर की तरह एमपी में भी रंगपंचमी पारंपरिक हर्षोल्लास से मनाई जा रही है। इंदौर की विश्व विख्यात गैर में हजारों लोग शामिल हुए। रंगपंचमी पर राजधानी भोपाल में भी श्री हिंदू उत्सव समिति के तत्वावधान में पंरपरागत चल समारोह निकाला गया जिसमें हुरियारों ने खूब रंग-गुलाल उड़ाया। ढोल-ताशे, डीजे और बैंड की थाप पर लोग नाचते थिरकते आगे बढ़े। इधर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी Jitu Patwari ने अपने निवास पर होली मिलन समारोह आयोजित किया। यहां कांग्रेसी मस्ती मूड में नजर आए, एक दूसरे को खूब रंग, गुलाल लगाया। रविवार को सुबह से ही रंगपंचमी का उत्साह नजर आने लगा था। श्री हिंदू उत्सव समिति के चल समारोह में पूरा रास्ता रंगों से रंग गया। इसमें कई झांकियां भी शामिल हुईं। एक झांकी में टी 20 क्रिकेट वर्ल्ड कप में भारत की जीत की कामना करते हुए ट्रॉफी लेने का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया गया। चल समारोह सुभाष चौक कोतवाली से प्रारंभ हुआ। जुमेराती गेट, पुराना पोस्ट आफिस, सिंधी मार्केट, भवानी चौक सोमवारिया, लखेरापुरा, पीपल चौक, चिंतामन चौराहा, इतवारा, जैन मंदिर रोड, गणेश चौक मंगलवारा, घोड़ा नक्कास, छोटे भैया चौराहा, हनुमान मंदिर, गल्ला बाजार होते हुए हनुमानगंज थाना पर इसका समापन हुआ।   दिग्विजय सिंह भी शामिल हुए रंगपंचमी के मौके पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी Jitu Patwari ने अपने भोपाल स्थित निवास पर होली मिलन समारोह आयोजित किया। इसके लिए एक्स पर पोस्ट कर कांग्रेसियों व आमलोगों को बाकायदा आमंत्रित किया गया था। रंगों के इस पर्व को मनाने डी-13, 74 बंगला पर रविवार सुबह से ही बड़ी संख्या में कांग्रेसी आ जुटे थे। उत्साह और उल्लास के साथ एक दूसरे को रंग-गुलाल लगाया। प्रदेश के पूर्व सीएम वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह भी होली मिलन समारोह में शामिल हुए। जीतू पटवारी ने उन्हें भी रंगों से रंग दिया। होरी खेलत रघुवीरा की धुन पर लोग खूब नाचे। कांतिलाल भूरिया, अशोक सिंह सहित अनेक वरिष्ठ नेताओं ने भी होली खेली।

बस्तर की धरती से मातृशक्ति को बड़ा संबल : महतारी वंदन योजना की 25वीं किश्त जारी

रायपुर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 69 लाख 48 हजार महिलाओं के खातों में 25वीं किश्त के रूप में 641 करोड़ 58 लाख रुपये अंतरित मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बस्तर के लाल बहादुर शास्त्री मिनी स्टेडियम में आयोजित वृहद महतारी वंदन सम्मेलन–2026 में प्रदेश की माताओं-बहनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति समाज की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण ही विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव है और राज्य सरकार का हर निर्णय महिलाओं के कल्याण, सम्मान और आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर लिया जा रहा है।  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने इस अवसर पर महतारी वंदन योजना की 25वीं किश्त जारी करते हुए प्रदेश की 69 लाख 48 हजार महिलाओं के खातों में 641 करोड़ 58 लाख रुपये अंतरित किए। इसके साथ ही इस योजना के अंतर्गत अब तक महिलाओं को 16 हजार 237 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि माताओं-बहनों के आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने वाला जनकल्याणकारी अभियान बन चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें 10 मार्च 2024 का वह दिन याद है, जब प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने महतारी वंदन योजना का शुभारंभ किया था। उसी समय यह संकल्प लिया गया था कि प्रदेश की प्रत्येक पात्र महिला के खाते में हर महीने निर्धारित तिथि पर एक हजार रुपये की राशि पहुंचेगी। पिछले 25 महीनों से यह संकल्प लगातार पूरा किया जा रहा है और इस किश्त के साथ अब तक प्रत्येक हितग्राही महिला को 25 हजार रुपये की राशि प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने जो वादा किया था, उसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाया है। मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि महतारी वंदन योजना को निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए राज्य सरकार ने इस वर्ष के बजट में 8 हजार 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि यह राशि माताओं-बहनों के जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव ला रही है। महिलाएं इस सहायता का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य, घरेलू जरूरतों, बचत और स्वरोजगार जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में कर रही हैं। इससे परिवारों में आर्थिक स्थिरता बढ़ रही है और समाज के समग्र विकास को नई दिशा मिल रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश की माताएं-बहनें केवल परिवार का संचालन ही नहीं करतीं, बल्कि वे उत्कृष्ट वित्तीय प्रबंधक भी होती हैं। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि का महिलाओं ने अत्यंत समझदारी से उपयोग किया है। किसी ने बेटियों के भविष्य के लिए बचत की, किसी ने स्वरोजगार शुरू किया, किसी ने परिवार के छोटे व्यवसाय को बढ़ाया, तो किसी ने बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च कर घर की स्थिति को मजबूत बनाया। यह इस योजना की सबसे बड़ी सफलता है कि महिलाओं ने इसे स्वयं और परिवार की उन्नति का माध्यम बनाया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के दृढ़ संकल्प तथा सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार ने 15 हजार आवास स्वीकृत किए हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर सहित दूरस्थ अंचलों में शांति, विकास और विश्वास का नया वातावरण बन रहा है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार अनेक स्तरों पर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत पिछले दो वर्षों में 21 हजार 754 बेटियों के विवाह कराए गए हैं। महिलाओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और गरिमापूर्ण कार्यस्थल उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में 368 महतारी सदन बनाने की स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 137 महतारी सदन का निर्माण पूर्ण हो चुका है। ग्राम पंचायत स्तर पर इनका उपयोग महिलाओं की बैठकों, प्रशिक्षण, विपणन और सामुदायिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में किया जाएगा। मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार लगातार पहल कर रही है। प्रदेश में अब तक 8 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया जा चुका है और अब सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 10 लाख लखपति दीदी बनाने का है। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब केवल सहभागी नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई नेतृत्वकारी शक्ति बनकर उभर रही हैं। इसी दिशा में महिला स्वसहायता समूहों के माध्यम से  रेडी टू ईट फूड निर्माण का कार्य पुनः प्रारंभ कराया गया है और इसे चरणबद्ध रूप से प्रदेश के शेष जिलों में भी लागू किया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर महिलाओं को व्यापक रोजगार के अवसर मिल सकें। मुख्यमंत्री ने बस्तर क्षेत्र के संदर्भ में कहा कि नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से नक्सल प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं पुनः प्रारंभ की गई हैं, बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू कराया गया है, बिजली पहुंची है, मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं तथा स्वच्छ पेयजल और बेहतर सड़कों की सुविधा दूरस्थ बसाहटों तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि केवल सड़कों का निर्माण ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री बस सेवा योजना के माध्यम से बस्तर और सरगुजा अंचल के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा भी मजबूत की गई है, जिससे लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक पहुंचने में आसानी हो रही है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से धमतरी की नीतू साहू, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की मिथलेश चतुर्वेदी, जांजगीर-चांपा की सरस्वती केंवट, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की अनीता साहू तथा सरगुजा की निधि जायसवाल से संवाद किया।  मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की मिथलेश चतुर्वेदी ने बताया कि पति के निधन के बाद उनके सामने परिवार चलाने की बड़ी चुनौती थी। शासन से मिली सहायता राशि और महतारी वंदन योजना के संबल से उन्होंने ई-रिक्शा खरीदकर आजीविका का नया साधन शुरू किया, जिससे अब वे अपने परिवार का भरण-पोषण आत्मसम्मान के साथ कर पा रही हैं। धमतरी की नीतू साहू ने बताया कि मजदूरी से होने वाली सीमित आय के कारण बेटियों के भविष्य के लिए बचत करना कठिन था, लेकिन महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि से … Read more

नगर में परंपरागत निकलने वाले चल समारोह (गेर) को निरंतर बनाए रखने प्रदान की जाएगी सवा लाख रुपए की सहयोग राशि

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्राचीन अवंतिका नगरी में सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल के दौरान परंपरागत रूप से सैनिक छावनियों से सैनिक विजयी पताका और चिन्ह लेकर चल समारोह के रूप में नगर में उत्सव मनाते थे। बाद में इस उत्सव को गेर नाम दे दिया। यह प्राचीन परंपरा आज भी कायम है। यह परंपरा हमारे सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को उज्जैन में सुबह  महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर भगवान  महाकाल का पूजन अभिषेक करने के बाद मंदिर के सभा मंडप में रंगपंचमी के अवसर पर ध्वज चल समारोह में भगवान वीरभद्र जी के ध्वज और  महाकाल ध्वज के साथ ही शस्त्रों का विधि विधान पूर्वक पूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ध्वज हाथ में लेकर मंदिर के कुंड परिसर तक गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कलेक्टर  रौशन कुमार सिंह को निर्देश दिए कि उज्जैन में परंपरागत रूप से निकलने वाले चल समारोह (गेर) की परंपरा को आगे भी कायम रखने के लिए सवा-सवा लाख रुपए की राशि दी जाए। रंगपंचमी के अवसर पर  महाकालेश्वर मंदिर से परंपरागत रूप से निकलने वाले  महाकालेश्वर ध्वज चल समारोह ( वीरभद्र ध्वज चल समारोह) के पहले सुबह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  महाकालेश्वर मंदिर पहुंच कर गर्भगृह में भगवान  महाकाल का पूजन कर देश व प्रदेश की खुशहाली की कामना की। पूजन के बाद नंदी हाल में मंदिर के पुजारी-पुरोहितों द्वारा स्वस्ति वाचन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान महाकाल का ध्यान लगाया। इस अवसर पर कलेक्टर  रौशन कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को भगवान महाकाल का अंगवस्त्र, भगवान महाकाल का प्रसाद व स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रंग पंचमी पर उज्जैन में खेली फूलों की होली ये देश है वीर जवानों का” गाना गाया, सभी को रंग पंचमी की शुभकामनाएं दीं उज्जैनवासियों ने मुख्यमंत्री का किया अभिनंदन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को रंगपंचमी के पावन अवसर पर टॉवर चौक उज्जैन में आमजन के साथ फूलों की होली खेली। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंधी कॉलोनी से निकाली गई गेर (चल समारोह) में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अपने बीच पाकर नागरिकों ने हर्षोल्लास से रंगपंचमी मनाई और मुख्यमंत्री का अभिवादन किया। टॉवर चौक पर बनाये गये मंच से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी पर गुलाब के फूल बरसाकर होली खेली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ये फूल हमें याद दिलाते हैं कि जीवन में रंग भले कितने भी हों, असली रंग तो दिल के रंग होते हैं, जो एक-दूसरे के लिए सम्मान, भाईचारा और देशभक्ति से भरे हों।  रंगपंचमी पर हमारे जीवन में आत्मीयता बढ़े, प्रेम और स्नेह बढ़े यही ईश्वर से प्रार्थना है। इसके बाद मुख्यमंत्री और आम जनता ने मिलकर ‘ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का’ गाना गाया तो लगा जैसे पूरा उज्जैन, एक सुर में गूंज रहा है। ये गाना उन वीर जवानों के लिए समर्पित था, जो सीमा पर खड़े होकर हमें ये रंग खेलने की आजादी देते हैं। आज टॉवर चौक पर रंगपंचमी पर हजारों लोगों का एक साथ नाचते और गाने में मालवी परंपरा की सोंधी खुशबू भी थी। 

भारत की अविरल संस्कृति और सभ्यता को आगे बढ़ाने वाली भारत की महिलाएं हैं –उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

रायपुर 2000 से अधिक महिलाओं की ऐतिहासिक भागीदारी, रायपुर में गूंजा राष्ट्रभक्ति और नारी शक्ति का संदेश2000 से अधिक महिलाओं की ऐतिहासिक भागीदारी, रायपुर में गूंजा राष्ट्रभक्ति और नारी शक्ति का संदेश अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में “मैं भारत हूं” थीम पर भव्य बाइक-स्कूटी रैली का आयोजन किया गया। मातृशक्ति की ऐतिहासिक भागीदारी से सजी इस रैली में 2000 से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया और राष्ट्रभक्ति, अनुशासन तथा महिला सशक्तिकरण का सशक्त संदेश दिया। यह रैली अपनी विशिष्टता और व्यापक सहभागिता के कारण गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज की गई।        रैली का शुभारंभ माँ काली मंदिर से हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक वंदे मातरम् गान के साथ हुई। इसके बाद अखिल भारतीय धर्मजागरण समन्वय कार्यसमिति सदस्य  राजेंद्र प्रसाद वास्तव और  विभा अवस्थी ने हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया। रैली का नेतृत्व महिला पुलिस कर्मियों के अनुशासित दस्ते ने किया, जिसके पीछे हजारों महिलाएं हाथों में तिरंगा लिए उत्साहपूर्वक आगे बढ़ीं। यह रैली माँ काली मंदिर से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए राम मंदिर, वीआईपी चौक पर संपन्न हुई। रास्ते भर नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर रैली का स्वागत किया। कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. भारवि वैष्णव और सह-संयोजिका तथा नगर निगम पार्षद डॉ. अनामिका सिंह के नेतृत्व में पूरे आयोजन का सफल संचालन किया गया।          समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा भी शामिल हुए। उन्होंने महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि समाज में यातायात नियमों का पालन करने का संदेश देने के लिए आज महिलाओं ने जो स्कूटी रैली निकाली वह गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल हो गयी है यह हमारे लिए गर्व का विषय है। उन्होंने अपने जीवन में अपनी बुआ अपनी मां अपनी पत्नी जैसी सशक्त महिलाओं के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि महिलाएं पुरुषों से अधिक सहनशील और ज्यादा मजबूत होती हैं।  उन्होंने स्वामी विवेकानंद के प्रेरक प्रसंग को याद करते हुए कहा कि यदि आज भारत की संस्कृति शाश्वत है, इस अविरल संस्कृति और सभ्यता को कोई आगे लेकर जाने वाला है तो वह भारत की महिलाएं हैं। अगर जीजा बाई ना होती तो शिवाजी का अस्तित्व नहीं होता और कौशल्या माता के संस्कार से ही तो भगवान  राम का अस्तित्व है। हर कामियाब व्यक्ति के पीछे महिला का हाथ होता है।          उन्होंने कहा कि आज महिलाएं शासन की योजनाओं का लाभ लेकर लखपति दीदी से करोड़पति दीदी तक का सफर तय कर रहीं हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ करने का भी कार्य कर रही हैं। महिलाओं के संकल्प के आगे कोई टिक नहीं सकता आज नक्सलावाद के नासूर को जड़ से मिटाने के लिए दिन रात पहाड़ों में रहकर कार्य करने वाली पुलिस विभाग की महिलाओं का भी उन्होंने अभिनंदन किया। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के अधिकृत उद्घोषक सोनल शर्मा ने घोषणा करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक संदेश देने और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित यह स्कूटी रैली गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल की गई है, जो रायपुर और पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।           अखिल भारतीय धर्मजागरण विभाग के प्रमुख  राजेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि संगठित मातृशक्ति ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति और संस्कृति की संरक्षक है। वहीं बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ वर्णिका शर्मा ने कहा कि आज की नारी हर क्षेत्र में अग्रणी है और यह आयोजन महिलाओं के आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक है। आयोजन की संयोजिका डॉ. भारवि वैष्णव ने कहा कि रायपुर की सड़कों पर उमड़ा मातृशक्ति का यह जनसैलाब भारतीय नारी के राष्ट्रप्रेम और समर्पण का प्रमाण है। वहीं डॉ. अनामिका सिंह ने कहा कि महिला सशक्तिकरण तभी पूर्ण है जब नारी मानसिक और सामाजिक रूप से सशक्त हो। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने के लिए पुलिस प्रशासन और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया।          इस अवसर पर विभिन्न महिला संगठनों ने इस आयोजन में सहभागिता की और सभी प्रतिभागियों को हेलमेट भी प्रदान किया गया। सभी ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और आदर्श नागरिक कर्तव्यों के पालन का संकल्प लिया। हाथों में तिरंगा और “भारत माता की जय” के उद्घोष के साथ संपन्न हुई यह रैली महिला शक्ति, संस्कार और आत्मविश्वास का प्रेरक उदाहरण बन गई।

राजवाड़ा पर रंगों की बौछार: इंदौर रंगपंचमी 2026 में कोई जनप्रतिनिधि नहीं, सिर्फ उत्साह और उत्सव

इंदौर इंदौर की रंग-रंगीली रंगपंचमी का उल्लास शुरू हो चुका है। टोरी कॉर्नर सहित अन्य इलाकों से निकली गेर रंगों की बौछार करते हुए आगे बढ़ी। अपनेपन और उमंग के रंगों में डूबने के लिए हजारों लोग यहां जुटे। रंगपंचमी की गेर में भगीरथपुरा की घटना का असर दिखा, इस बार इंदौर की गेर नेताओं के बग़ैर रही। इसमें कोई भी जनप्रतिनिधि नजर नहीं आया। शहर की दशकों पुरानी परंपरा एक बार फिर सजीव हो उठी। 77 वर्षों से चली आ रही गेर (Indore Rang Panchami Ger 2026) की परंपरा को निभाने के लिए शहर की प्रतिष्ठित संस्थाएं अपने-अपने बैनर तले गेर निकाली। इंदौर नगर निगम ने टैंक की गेर निकाली है, इस पर ऑपरेशन सिंदूर लिखा है। यह गेर राजवाड़ा से सीतलामाता बाजार लौटी। रसिया कार्नर, टोरी कार्नर, मारल क्लब और संगम कार्नर की गेर के साथ ही नगर निगम तथा हिंद रक्षक संगठन की फागयात्रा रंगों की इस अनूठी यात्रा को आगे बढ़ा रही है। चार किलोमीटर लंबे मार्ग पर जब रंग और गुलाल की बौछारों के बीच कारवां आगे बढ़ा। ढोल-नगाड़ों की थाप, उत्साह से झूमती भीड़ और हवा में उड़ते रंग-गुलाल के बीच इंदौर की रंगपंचमी (Rang Panchami 2026) का यह दृश्य सचमुच देखने लायक है। देशभक्ति के रंग हर चेहरा रंगा हुआ है और हर दिल उत्सव के रंग में डूबा नजर आ रहा है। गेर (Rang Panchami Indore) में धार्मिक-सामाजिक के साथ ही देशभक्ति के रंग नजर आ रहे हैं । हिंद रक्षक की फाग यात्रा में महाकाल मंदिर की प्रतिकृति तो संगम कार्नर की गेर में महाकाल की जटा से गंगाजी के अवतरित होने का दृश्य नजर आ रहा है। शहर की हृदय स्थली दोपहर तीन बजे तक टैंकरों, बोरिंग मशीन, मिसाइलों के साथ ही विभिन्न उपकरणों से लाल-गुलाबी, हरे, पीले, नीले रंग उत्साह से उड़ाकर धरती के साथ आसमान भी रंगों से सराबोर होती रहेगी।   गेर देखने के लिए तीन इमारतों पर बैठक व्यवस्था स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा रंगपंचमी पर इंदौर में निकलने वाली पारंपरिक गेर को निहारने के लिए तीन इमारतों की छतों पर बैठक व्यवस्था की गई है। इसमें गौराकुंड के पास पृथ्वी लोक होटल की दो इमारत व बालाजी टावर पर यह बैठक व्यवस्था है। यहां की छतों पर तिरपाल लगाई गई है और दर्शकों के लिए पेयजल व सुविधाघर की व्यवस्था भी है।  

महतारी वंदन योजना की 25वीं किस्त जारी, 69 लाख ‘महतारियों’ के खाते में पहुंचे 641 करोड़ रुपये

बस्तर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बस्तर के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में ‘महतारी वंदन उत्सव’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लगभग 69 लाख महिलाओं के खातों में योजना की 25वीं किस्त के रूप में 641 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार अब तक दो वर्षों में इस योजना के तहत 16 हजार करोड़ रुपये वितरित कर चुकी है। ‘लक्ष्मी सखी मिलेट कार्ट’ का वितरण मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से पांच जिलों की महिलाओं से संवाद किया और ‘लक्ष्मी सखी मिलेट कार्ट’ का वितरण भी किया। इसके साथ ही, पुनर्वासित महिलाओं को सक्षम योजना के अंतर्गत ऋण प्रदान किया गया। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े, वन मंत्री केदार कश्यप और विधायक किरण देव भी उपस्थित रहे। कैफे एवं मिलेट कार्ट खोले जाने की योजना प्रारंभ महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा लक्ष्मी सखी मिलेट कार्ट के लिए सक्षम योजना से हितग्राहियों को एक-एक लाख रुपए की वित्तीय सहायता प्रद्दत की जा रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आव्हान पर मिलेट उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कृषि महाविद्यालय के साथ साथी परियोजना (प्रशिक्षण कार्यक्रम) अंतर्गत स्व सहायता समूहों एवं युवा महिला उद्यनियों के माध्यम से मिलेट कैफे एवं मिलेट कार्ट खोले जाने की योजना प्रारंभ की गई है। 400 मिलेट कैफे एवं मिलेट कार्ट खोला जाएगा योजना अंतर्गत राज्य के समस्त शैक्षणिक संस्थानो, कार्यालयों एवं पर्यटन स्थलो में स्व सहायता समूहों एवं युवा महिला उद्यमियों के माध्यम से प्रथम चरण में 400 मिलेट कैफे एवं मिलेट कार्ट खोला जाएगा। साथी परियोजना अतर्गत स्व सहायता समूहो एवं महिला उद्यमियों को निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदाय किया जावेगा, जो महिलाओं के आर्थिक उन्नयन की दृष्टि में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।  

LPG के दाम बढ़ने के बाद, क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी होंगी महंगी? सरकार का प्लान सामने आया

नई दिल्ली घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) के दामों में शनिवार को भारी बढ़ोतरी की गई है. गैर-सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ा दी गई है. ये पिछले 11 महीनों में दूसरी बार कीमतों में वृद्धि है. सरकार का कहना है कि इस साल की शुरुआत में तेल कंपनियों ने बंपर मुनाफा कमाया था और उनके पास इस तरह के प्रभाव को झेलने के लिए पर्याप्त वित्तीय क्षमता है। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण वैश्विक बाजार में ऊर्जा कीमतों में आए भारी उछाल के चलते भारत सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में ₹60 की भारी बढ़ोतरी कर दी है. हालांकि, राहत की बात ये है कि सरकार ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करने से इनकार कर दिया है। सूत्रों ने स्पष्ट किया कि एलपीजे के दाम बढ़ने के बावजूद सरकार ने साफ कर दिया है कि पेट्रोल-डीजल के दामों में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी, क्योंकि तीन ईंधन विपणन कंपनियों- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने इस साल की शुरुआत में बंपर मुनाफा कमाया था और उनके पास इस तरह के प्रभाव को झेलने के लिए पर्याप्त वित्तीय क्षमता है। 2022 से स्थिर थी कीमतें भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अप्रैल 2022 से स्थिर बनी हुई हैं. कंपनियां कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के अनुसार अपने मुनाफे और नुकसान को समायोजित कर रही हैं, ताकि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। अब दिल्ली में इतने के मिलेगा LPG सिलेंडर भारतीय ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) की वेबसाइट के अनुसार, इस भारी बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में अब गैर-सब्सिडी वाला 14.2 किलोग्राम का घरेलू एलपीजी सिलेंडर 913 रुपये का हो गया है, जो पहले 853 रुपये था. मुंबई में ये 912.50 रुपये, कोलकाता में 939 रुपये और चेन्नई में 928.50 रुपये हो गया है. कीमतों में अंतर राज्य स्तर पर स्थानीय सेल्स टैक्स या वैट के कारण होता है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों  (जिन्हें 2016 से मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए हैं और जो 10 करोड़ से अधिक हैं) को भी ये बढ़ोतरी सहन करनी होगी. उन्हें प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी मिलती है (साल में अधिकतम 12 रिफिल तक), इसलिए अब उन्हें 613 रुपये प्रति सिलेंडर चुकाने पड़ेंगे। सरकार के शीर्ष सूत्रों ने बताया कि ये बढ़ोतरी वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल के कारण की गई है.  इसके बावजूद भारत में एलपीजी की कीमत ब्रेकईवन स्तर (लागत पर बराबर) से कम है जो 1,050 रुपये प्रति सिलेंडर के आसपास है। उन्होंने कहा कि एक औसत परिवार साल में 4-5 सिलेंडर इस्तेमाल करता है तो ये बढ़ोतरी प्रति परिवार प्रतिदिन मात्र 80 पैसे और चार सदस्यों वाले परिवार में प्रति व्यक्ति सिर्फ 20 पैसे के बराबर है। अन्य देशों से सस्ती है भारत में LPG गैस सूत्रों ने कहा कि बढ़ी हुई कीमतों के बाद भी भारत में एलपीजी ज्यादातर देशों से सस्ती है. उदाहरण  के लिए- काठमांडू में एक सिलेंडर 1,207 रुपये, श्रीलंका में 1,241 रुपये और पाकिस्तान में 1,046 रुपये का पड़ता है। वहीं, घरेलू गैस के साथ-साथ होटलों और रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भी ₹114.5 की बड़ी बढ़ोतरी की गई है. दिल्ली में अब कमर्शियल सिलेंडर ₹1,883 का मिलेगा। इस साल अब तक कमर्शियल गैस की कीमतों में ₹302.50 की वृद्धि हो चुकी है. इससे पहले 1 मार्च को भी इसकी कीमत में ₹28 का इजाफा किया गया था. व्यापारियों के लिए ये इस महीने का दूसरा बड़ा झटका है, जिससे बाहर खाना खाना और महंगा हो सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आवाजाही ठप कीमतों में इस अचानक उछाल की मुख्य वजह अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले हैं. इस सैन्य संघर्ष के कारण तेल और गैस से समृद्ध मध्य पूर्व में स्थिति तनावपूर्ण हो गई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (जलडमरूमध्य) जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, वहां टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है. ईरान और ओमान के बीच स्थित ये रास्ता बंद होने से ऊर्जा की वैश्विक आपूर्ति चेन चरमरा गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल और गैस के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतों में 35.63 प्रतिशत की ऐतिहासिक साप्ताहिक वृद्धि देखी गई है. वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर्स $90.90 प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड $92.69 प्रति बैरल पर बंद हुआ है। एशियाई बाजारों में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की कीमतें भी उछल कर $25.40 प्रति एमएमबीटीयू (MMBtu) पर पहुंच गई हैं जो तीन साल का उच्चतम स्तर है. कतर से निर्यात रुकने की आशंका और रसद संबंधी बाधाओं ने एलपीजी बाजार में भी भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारत अपनी जरूरत का लगभग आधा कच्चा तेल और 40 प्रतिशत प्राकृतिक गैस होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ही आयात करता है. एलपीजी के मामले में ये निर्भरता और भी अधिक है. भारत ने साल 2024-25 में 31.3 मिलियन टन एलपीजी की खपत की, जिसमें से केवल 12.8 मिलियन टन का उत्पादन घरेलू स्तर पर हुआ. शेष आयातित मात्रा का 85-90 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब जैसे उन देशों से आता है जो इसी जलमार्ग का इस्तेमाल करते हैं. ईरान द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमलों के बाद ये मार्ग प्रभावी रूप से अवरुद्ध हो गया है। उत्पादन में तेजी लाएं रिफाइनरी घरेलू बाजार में रसोई गैस की कमी न हो, इसके लिए केंद्र सरकार ने शुक्रवार को अपनी विशेष ‘इमरजेंसी पावर’ का इस्तेमाल किया है. इसके तहत तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी क्षमता बढ़ाकर एलपीजी के उत्पादन में तेजी लाएं। सरकार का टारगेट है कि अंतरराष्ट्रीय बाधाओं के बावजूद देश के अंदर ईंधन की आपूर्ति निरंतर बनी रहे. हालांकि, वैश्विक स्तर पर कीमतों का बढ़ना भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती साबित हो रहा है।

भारत पर हाई टैरिफ को सही मानने वाले ट्रंप के मंत्री ने अब बदला सुर, कही ये नई बात

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में भीषण जंग (Middle East Conflict) छिड़ी है. अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान पर घातक हमले (US-Israel Iran War) कर रहे हैं, तो दूसरी ओर Iran भी जमकर मिसाइल अटैक करता नजर आ रहा है. युद्ध से बढ़ी ग्लोबल टेंशन के बीच भले भी डोनाल्ड ट्रंप के सख्त तेवर दिख रहे हैं, लेकिन उनके मंत्रियों के अब सुर बदले-बदले नजर आ रहे है. जी हां, दो महीने पहले तक अमेरिकी वित्त मंत्री भारत पर निशाना साधते हुए रूसी तेल की खरीद को लेकर लगाए गए 50% US Tariff को सही ठहरा रहे थे, तो वहीं अब कुछ अलग ही बात कहते हुए नजर आ रहे हैं। मिडिल ईस्ट जंग के बीच बड़ा बयान अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bassent ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर एक पोस्ट के जरिए जो नया बयान दिया है, वो उनकी दो महीने पहले के तेवरों से बिल्कुल अलग है. जी हां, बेसेंट, जो दो महीने पहले भारत पर निशाना साध रहे थे और ज्यादा टैरिफ को सही करार दे रहे थे, अब ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा बड़े कंज्यूमर देशों को दूसरे सोर्स खोजने के लिए बढ़ावा देने को सही ठहराते हुए नजर रहे हैं. उन्होंने कहा है कि अमेरिका दुनिया के एनर्जी मार्केट में स्थिरता के लिए मिलकर काम कर रहा है।  ‘हम सबसे बड़े उत्पादकों के साथ…’ वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘US दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे ताकतवर इकोनॉमी है और अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े प्रोड्यूसर, कंज्यूमर और रिफाइनर के साथ मिलकर एनर्जी मार्केट में स्थिरता बनाए रखने के लिए काम कर रहा है, जबकि हम अपनी सेफ्टी और सिक्योरिटी के लिए खतरों को खत्म कर रहे हैं.’ उन्होंने आगे कहा कि यह एक साझा मकसद है, जिसके लिए हम सब काम कर रहे हैं और हम इसी लक्ष्य को शेयर करने वाले अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को धन्यवाद देते हैं। ऐसे भारत पर साधते रहे थे निशाना गौरतलब है कि अब ट्रंप टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट गैरकानूनी करार दे चुका है, लेकिन बीते साल भारत पर लगाए गए 50 फीसदी के हाई टैरिफ को लेकर अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट लगातार निशाना साधते हुए नजर आ रहे थे और टैरिफ को सही ठहरा रहे थे. उन्होंने भी ट्रंप के सुर में सुर मिलाकर कहा था कि रूस से तेल खरीद कर भारत यूक्रेन युद्ध में रूसी को आर्थिक मदद पहुंचा रहा है। यही नहीं दावोस वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF Davos 2026) में भी उन्होंने रूसी तेल खरीदने वाले देशों के बारे में खुलकर बात की थी. एक इंटरव्यू के दौरान बेसेंट ने बड़ी धमकी देते हुए कहा था कि सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा सीनेट के समक्ष रखे गए उस प्रस्ताव में रूसी तेल खरीदना जारी रखने वालों को 500% टैरिफ लगाकर दंडित (500% Tariff For Buying Russian Oil) करने का प्रावधान है. हालांकि, टैरिफ पर ट्रंप को SC ने बड़ा झटका दे दिया और अब उनके मंत्री के भी सुर बदल गए हैं।

राष्ट्रपति मुर्मू के प्रोटोकॉल उल्लंघन पर केंद्र की सख्त कार्रवाई, ममता सरकार से रिपोर्ट की मांग

 नई दिल्ली पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल उल्लंघन और कार्यक्रम स्थल में अचानक बदलाव को लेकर विवाद गहरा गया है।सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस पूरे मामले का बड़े स्तर पर संज्ञान लिया है. केंद्रीय गृह सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शाम पांच बजे तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें प्रोटोकॉल न दिए जाने, रास्ते की सही जानकारी न प्रदान करने और अन्य व्यवस्थाओं में चूक के बारे में स्पष्टीकरण मांगा गया है। दरअसल, ये विवाद राष्ट्रपति मुर्मू के उत्तर बंगाल दौरे के दौरान सामने आया, जहां वह दार्जिलिंग जिले में 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं थीं. मूल रूप से कार्यक्रम बिधाननगर (फांसीदेवा ब्लॉक) में प्रस्तावित था, जहां बड़ी संख्या में संथाल आदिवासी समुदाय के लोग पहुंच सकते थे. लेकिन राज्य प्रशासन ने सुरक्षा, भीड़भाड़ और अन्य कारणों का हवाला देकर इसे बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोशाईपुर (या गोसाईंपुर) में स्थानांतरित कर दिया. राष्ट्रपति ने खुद इस बदलाव पर नाराजगी जताई और कहा कि नया स्थान छोटा था, जिससे कई लोग पहुंच नहीं पाए। उन्होंने ममता बनर्जी को छोटी बहन बताते हुए पूछा कि क्या वो उनसे नाराज हैं, क्योंकि न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई मंत्री उन्हें रिसीव करने पहुंचीं, जबकि पद की गरिमा के लिए प्रोटोकॉल का पालन जरूरी है। इन प्रोटोकॉल्स का हुआ उल्लंघन सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल में कई पैमानों पर सुरक्षा संबंधित ब्लू बुक के नियमों का उल्लंघन हुआ है. जिसमें- प्रेसिडेंट को रिसीव करने और सी-ऑफ करने के लिए CM, CS और DGP क्यों नहीं थे?. सिर्फ सिलीगुड़ी के मेयर ही उन्हें रिसीव करने के लिए वहां थे. प्रेसिडेंट के लिए बने वॉशरूम में भी पानी नहीं था. एडमिनिस्ट्रेशन जिस रास्ते से गुज़रा, वह कचरे से भरा हुआ था. सूत्रों का ये भी कहना है कि इस परिस्थितियों के लिए दार्जिलिंग के डीएम, सिलीगुड़ी के CP और ADM जिम्मेदार हैं। अमित शाह ने ममता को घेरा इस मामले में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एक्स पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की TMC सरकार ने अराजक व्यवहार करते हुए भारत के राष्ट्रपति का अपमान कर एक नया निचला स्तर छू लिया है. उन्होंने इसे भारत के संवैधानिक लोकतंत्र के मूल्यों पर आघात बताया और कहा कि आज लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला हर नागरिक आहत और दुखी महसूस कर रहा है.कार्यक्रम में प्रोटोकॉल की खुली अनदेखी कर राष्ट्रपति पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई है। शाह ने आरोप लगाया कि ये घटना टीएमसी सरकार में व्याप्त अव्यवस्था और गिरावट को दिखाती है. सरकार न सिर्फ नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है, बल्कि राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद का भी सम्मान नहीं करती. खास तौर पर आदिवासी भाई-बहनों के कार्यक्रम में हुआ ये व्यवहार पूरे देश के लिए अपमानजनक है। केंद्रीय गृह ने इस घटना को भारत के संवैधानिक लोकतंत्र के मूल्यों पर आघात करार दिया है. आज लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला हर नागरिक आहत और दुखी महसूस कर रहा है। ममता ने आरोपों को किया खारिज दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोपों को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रपति का सम्मान करती हैं, लेकिन अगर कोई 50 बार भी आए तो हर कार्यक्रम में शामिल होना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि वह इस वक्त धरने पर बैठी हैं और जिस कार्यक्रम का जिक्र किया जा रहा है, उसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने इस कार्यक्रम के राज्य को जानकारी न होने की बात करते हुए कहा, ‘उस कार्यक्रम के आयोजकों, फंडिंग या आयोजन को लेकर राज्य सरकार को कोई जानकारी नहीं दी गई थी. जब भी राष्ट्रपति राज्य में आती हैं या जाती हैं तो इसकी सूचना मिलती है, लेकिन संबंधित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और न ही राज्य सरकार उस कार्यक्रम का हिस्सा थी।

PM मोदी ने लॉन्च किए मेट्रो के दो नए कॉरिडोर, लागत ₹33,500 करोड़

नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आठ मार्च को मेट्रो के दो कॉरिडोर चालू हो जाएंगे। इसमें से एक कॉरिडोर के शुरू होने से दिल्ली को देश की पहली रिंग मेट्रो मिलेगी। वहीं, तीन अन्य कॉरिडोर की नींव भी रखी जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन प्रोजेक्टों का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। वहीं, प्रधानमंत्री दिल्ली को 33,500 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न विकास परियोजनाओं की बड़ी सौगात देंगे।   नई कनेक्टिविटी से दिल्ली के कई इलाकों को फायदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली मेट्रो के 2 नए कॉरिडोर का उद्घाटन किया। इनमें लगभग 12.3 किमी का मजलिस पार्क-मौजपुर बाबरपुर (पिंक लाइन) कॉरिडोर और लगभग 9.9 किमी का दीपाली चौक-मजलिस पार्क (मैजेंटा लाइन) कॉरिडोर शामिल हैं। नई कनेक्टिविटी से दिल्ली के कई इलाकों को फायदा होगा, जिनमें बुराड़ी, जगतपुर-वजीराबाद, खजूरी खास, भजनपुरा, यमुना विहार, मधुबन चौक, हैदरपुर बादली मोड़, भलस्वा और मजलिस पार्क आदि शामिल हैं। पीएम मोदी की दिल्ली को ₹33,500 करोड़ की सौगात अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आज दिल्ली मेट्रो के दो कॉरिडोर चालू हो गए। इसमें से एक कॉरिडोर के शुरू होने से दिल्ली को देश की पहली रिंग मेट्रो मिली। वहीं, तीन अन्य काॅरिडोर की नींव भी रखी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन प्रोजेक्टों का उद्घाटन और शिलान्यास किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दिल्ली को 33,500 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न विकास परियोजनाओं की बड़ी सौगात दी। इसमें जनरल पूल रेजिडेंशियल अकोमोडेशन (जीपीआरए) पुनर्विकास योजना के अंतर्गत तैयार की गई परियोजनाएं भी शामिल हैं। यह दिल्ली के लोगों के जीवन को आसान बनाएंगे: सीएम रेखा गुप्ता दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, ‘आज प्रधानमंत्री मोदी जिन 2 महत्वपूर्ण कॉरिडोर का उद्घाटन करने वाले हैं (मजलिस पार्क-मौजपुर बाबरपुर और दीपाली चौक-मजलिस पार्क) यह दिल्ली के लोगों के जीवन को आसान बनाएंगे। जिन 3 कॉरिडोर का यहां शिलान्यास होने वाला है, वे भी दिल्ली को गति देने वाले हैं।’   दिल्ली मेट्रो के दो नए कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे पीएम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही दिल्ली मेट्रो के दो नए कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे। इनमें लगभग 12.3 किमी का मजलिस पार्क-मौजपुर बाबरपुर (पिंक लाइन) कॉरिडोर और लगभग 9.9 किमी का दीपाली चौक-मजलिस पार्क (मैजेंटा लाइन) कॉरिडोर शामिल हैं।   महत्वपूर्ण रहा यह प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि यह कॉरिडोर इंजीनियरिंग की दृष्टि से भी अहम है। दीपाली चौक-मजलिस पार्क कॉरिडोर का एक हिस्सा लगभग 28.36 मीटर की ऊंचाई तक जाता है। यह दिल्ली मेट्रो के एलिवेटेड सेक्शनों में सबसे ऊंचे हिस्सों में से एक है। वहीं, मजलिस पार्क-मौजपुर बाबरपुर कॉरिडोर के निर्माण में यमुना नदी पर एक नए पुल का निर्माण करना पड़ा और डबल-डेकर वायडक्ट तैयार किया गया। यह दिल्ली मेट्रो का यमुना नदी पर पांचवां पुल है।

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