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रामगढ़ताला झील में संचालित ‘लेक क्वीन क्रूज’ बना घाटे का सौदा, 89 लाख रुपये का किराया बकाया

गोरखपुर  गोरखपुर की रामगढ़ताला झील में 2 साल पहले ‘लेक क्वीन क्रूज’ शुरू किया गया था। लेकिन अब इसे बंद किया जा सकता है। कहा जा रहा है कि संचालक गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) को किराया नहीं दे रहे हैं। यह किराया धीरे-धीरे बढ़कर 89 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। जीडीए की तरफ से नोटिस भेजे जाने के बाद इसके संचालकों ने निर्णय लिया है कि घाटे का सौदा होने की वजह से जल्द ही इसे बंद किया जा सकता है। वहीं नौका विहार आने वाले पर्यटकों की शिकायत है कि इसका किराया बहुत ज्यादा है। रामगढ़ताल में नौका विहार के लिए आने वाले पर्यटकों के लिए यह बुरी खबर की तरह है। 2 साल पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों उद्घाटन किए जाने के बाद लेक क्वीन क्रूज को बड़े जोर-शोर से रामगढ़ ताल झील में उतारा गया था। शुरुआत में इसको लेकर दर्शकों और पर्यटकों में बेहद उत्साह का माहौल था। लेकिन अब इसे बंद किया जा सकता है, क्योंकि इसका संचालन करने वाली फर्म ने जीडीए का अब तक 89 लाख रुपए किराया नहीं जमा कराया। इस संदर्भ में जीडीए द्वारा तीन बार नोटिस भेजा जा चुका है। इसके बाद संचालकों ने क्रूज को बंद करने की तैयारी शुरू कर दी है। क्रूज का संचालन करने वाली फर्म ने 7,41000 रुपए प्रति माह की बोली लगाकर इसके संचालन का ठेका अपने नाम किया था। हालांकि जब इसकी बोली लगाई गई थी उस समय इसका बेस प्राइस 3 लाख रुपए रखा गया था। इस बारे में संचालकों का कहना है कि पर्यटक आते हैं, लेकिन जिस हिसाब से इसके रखरखाव, स्टाफ के खर्चे और किराया है, उसे निकालना मुश्किल हो रहा है। घाटे का सौदा साबित होने के कारण इसे बंद करने के बारे में विचार चल रहा है। वहीं इस बारे में पर्यटकों का कहना है कि क्रूज का किराया और यहां लंच या डिनर करना महंगा है किसी भी आम परिवार के लिए इतना पैसा अफोर्ड करना मुश्किल है। इस बारे में क्रूज के मालिक राजकुमार राय ने बताया कि प्रदेश के लिए इतिहास रचने वाले क्रूज को लेकर शुरुआत में तो पर्यटकों में उत्साह रहा। लेकिन अब धीरे-धीरे इसका किराया निकालना भी मुश्किल होता जा रहा है। जिस फर्म ने इसे चलवाने वाले का ठेका लिया था, उन्होंने जीडीए का किराया भी अभी तक नहीं दिया,जो बढ़कर 89 लाख रुपए पहुंच चुका है। नोटिस के अलावा, फिलहाल इस बारे में जीडीए की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

देश के कई शहरों में रेसिडेंशियल रियल एस्टेट की कीमतों में 88 फीसदी का उछाल दिखा

नई दिल्ली रियल एस्टेट (Real Estate) मार्केट में इन दिनों भारी उछाल दिख रहा है। कोरोना काल से पहले की बात करें तो तब से अब तक स्थिति काफी बदल गई है। बीते पांच साल में ही देश के टॉप 10 शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें (Property Price) काफी बढ़ गई है। इन शहरों में मकान की कीमतों में 88 फीसदी तक का उछाल आया है। इसकी जानकारी रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स फर्म प्रॉपइक्विटी (PropEquity) की एक रिपोर्ट से मिलती है। सबसे ज्यादा कीमत कहां बढ़ी इस रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान गुरुग्राम में सबसे अधिक, 160 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है। साल 2019 में वहां मकान की औसत कीमतें 7,500 रुपये प्रति वर्ग फुट थी। यह साल 2024 में बढ़कर 19,500 रुपये प्रति वर्ग फुट पर पहुंच गई हैं। मतलब कि पांच साल पहले गुड़गांव में 75 लाख रुपये में 1,000 वर्ग फुट का मकान मिल जाता था। अब यह करी दो करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सबसे कम बढ़ोतरी कहां बीते पांच साल की अवधि के दौरान मकान की कीमतें सबसे कम मुंबई में बढ़ी है। साल 2019 में मुंबई में रेसिडेंशियल रियल एस्टेट की प्रति वर्ग फुट कीमत 25,820 रुपये थी। यह साल 2024 में बढ़ कर 25,820 प्रति वर्ग फुट हो गई। मतलब कि महज 37 फीसदी की बढ़ोतरी। अन्य शहरों का क्या रहा हाल रिपोर्ट के अनुसार गुरुग्राम के बाद कीमतों में सबसे अधिक बढ़ोतरी नोएडा में (146 फीसदी), बेंगलुरु (98 फीसदी), हैदराबाद (81 फीसदी), चेन्नई (80 फीसदी), पुणे (73 फीसदी), नवी मुंबई(69 फीसदी), कोलकाता (68 फीसदी) और ठाणे में (66 फीसदी)। सबसे महंगी और सबसे सस्ती प्रॉपर्टी कहां प्रति वर्ग फीट कीमतों की बात करें तो मुंबई इस दृष्टि से सबसे महंगा शहर है। वहां मकानों की औसत कीमत 35,500 रुपये प्रति वर्ग फुट है। इसके बाद गुरुग्राम में 19,500 रुपये प्रति वर्ग फुट। इन शहरों में सबसे कम प्रॉपर्टी रेट नोएडा में दिखा जहां आवासी परिसंपत्ति की औसत कीमत 16,000 रुपये प्रति वर्ग फुट है। कितनी परियोजनाएं हुई लॉन्च? इस अवधि के दौरान देश के टॉप 10 शहरों- बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबद, कोलकाता, मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पुणे, नोएडा और गुरुग्राम में करीब 15,000 परियोजनाएं लॉन्च की गईं। इनमें अपार्टमेन्ट, फ्लोर और विला शामिल हैं। जमीन वाले मकानों की संख्या इनमें काफी कम रही। कीमत में बढ़ोतरी के क्या हैं कारण प्रॉपइक्विटी के संस्थापक एवं सीईओ समीर जसूजा का कहना है, ‘‘पिछले 5 सालों में सभी बड़े शहरों में रियल एस्टेट की कीमतों में ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है। इस बढ़ोतरी में कई कारकों का योगदान है जैसे बुनियादी सुविधाओं का विकास, एनआरआई की बढ़ती रुचि, एचएनआई/यूएचएनआई और स्टॉक मार्केट में मुनाफ़ा हासिल करने वालों द्वारा रियल एस्टेट में निवेश तथा सम्पत्ति बनाने और आय कमाने की चाह, मकान खरीदने की चाह, लक्ज़री/सुपर लक्ज़री मकानों की ओर झुकाव।”

बसपा प्रमुख मायावती ने बड़ा ऐलान कर दिया, महाराष्ट्र-झारखंड और यूपी में बसपा नहीं करेगी गठबंधन

लखनऊ चुनाव आयोग ने मंगलवार को महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी। इसके साथ ही यूपी में नौ विधानसभा सीटों के उपचुनाव का ऐलान भी कर दिया गया है। वहीं, बसपा प्रमुख मायावती ने भी बड़ा ऐलान कर दिया। उन्होंने साफ किया है कि उनकी पार्टी बसपा महाराष्ट्र और झारखंड में अकेले ही चुनाव लड़ेगी। इसके साथ ही मायावती ने कहा कि यूपी में 9 विधानसभा की सीटों पर हो रहे उपचुनाव में पार्टी अपने उम्मीदवार उतारेगी और यह चुनाव भी अकेले ही अपने बलबूते पर लड़ेगी। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक के बाद एक कई पोस्ट किए। उन्होंने लिखा, ”भारत निर्वाचन आयोग द्वारा महाराष्ट्र व झारखंड राज्य विधानसभा आम चुनाव के लिए तारीखों की आज की गई घोषणा का स्वागत। चुनाव जितना कम समय में तथा जितना पाक-साफ अर्थात धनबल और बाहुबल आदि के अभिशाप से मुक्त हो उतना ही बेहतर, जिसका पूरा दारोमदार चुनाव आयोग पर ही निर्भर है।” एक अन्य पोस्ट में मायावती ने लिखा, ”बीएसपी इन दोनों राज्यों में अकेले ही चुनाव लड़ेगी और यह प्रयास करेगी कि उसके लोग इधर-उधर न भटकें, बल्कि पूरी तरह बीएसपी से जुड़कर परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान कारवां के सारथी बनकर शासक वर्ग बनने का अपना प्रयास जारी रखें।” आखिर में बसपा प्रमुख ने लिखा, ”यूपी में 9 विधानसभा की सीटों पर हो रहे उपचुनाव में भी बीएसपी अपने उम्मीदवार उतारेगी और यह चुनाव भी अकेले ही अपने बलबूते पर पूरी तैयारी एवं दमदारी के साथ लड़ेगी।” महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों पर 1 चरण में 20 नवंबर को वोट डाल जाएंगे। वहीं, झारखंड की 81 विधानसभा सीटों पर 2 फेज में 13 और 20 नवंबर को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होंगे। जबकि, चुनाव के नतीजे 23 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। इसके अलावा यूपी समेत 47 विधानसभा सीटों पर 13 नवंबर को मतदान होंगे। यूपी की जिन 9 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उनमें गाजियाबाद सदर सीट, प्रयागराज की फूलपुर सीट, कानपुर की सीसामऊ सीट, मैनपुरी की करहल सीट, अंबेडकरनगर की कटेहरी सीट, मिर्जापुर की मझवां सीट, अलीगढ़ की खैर सीट, मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट और मुरादाबाद की कुंदरकी सीट शामिल है। हालांकि, अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर उपचुनाव अभी नहीं होगा।

दिल्‍ली-एनसीआर में खराब आबोहवा के बाद ग्रैप लागू, अब लगेगी कई चीजों पर पावंदी

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) खतरे के निशान के पार पहुंच गया है। दिल्ली एनसीआर के कई इलाके ऐसे हैं, जहां का एक्यूआई 300 से ज्यादा है। स्थिति को देखते हुए दिल्ली सरकार ने एनसीआर में ग्रैप का पहला चरण लागू कर दिया है। ऐसे में आईए जानते हैं कि ग्रैप के कितने चरण होते हैं और किस चरण में किन-किन चीजों पर पाबंदी होती है। एक्यूआई 201 से 300 के बीच रहने पर ग्रैप का पहला चरण लागू किया जाता है। इसमें निर्माण और विध्वंस से निकलने वाली धूल और मलबे के प्रबंधन से संबंधित निर्देश लागू होते हैं। खुली जगहों पर कचरा जलाने और फेंकने पर रोक लगाई जाती है। नियमित रूप से कूड़ा उठाने के निर्देश दिए जाते हैं। सड़कों पर धूल उड़ने से रोकने के लिए कुछ दिनों के अंतराल पर पानी का छिड़काव किया जाता है। डीजल जनरेटर सेट के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाती है और पीयूसी के नियमों को सख्ती से लागू किया जाता है। वाहनों से निकलने वाले धुएं पर सख्ती बरती जाती है। एक्यूआई 301 से 400 के बीच होने पर ग्रैप का दूसरा चरण लागू किया जाता है। इसमें अस्पतालों, रेल और मेट्रो सेवाओं को छोड़कर अन्य जगहों पर डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया जाता है। रोजाना सड़कों की साफ-सफाई और पानी का छिड़काव किया जाता है। फैक्ट्रियों में केवल उचित ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है। लोगों को सार्वजनिक परिवहन का अधिकतम इस्तेमाल करने के लिए पार्किंग फीस बढ़ाई जाती है, निर्माण स्थलों पर निरीक्षण बढ़ा दिया जाता है। एक्यूआई 401 से 450 के बीच होने पर तीसरा चरण लागू किया जाता है। इसमें हर दिन सड़कों की सफाई की जाती है, नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाता है। निर्माण और विध्वंस से निकलने वाले धूल और मलबे का सही तरीके से निष्पादन किया जाता है। दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में पेट्रोल से चलने वाले बीएस-3 इंजन और डीजल से चलने वाले बीएस-4 चार पहिया वाहनों के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाती है। एक्यूआई 450 से अधिक होने पर ग्रैप का चौथा चरण लागू किया जाता है। इस चरण में ट्रक, लोडर जैसे भारी वाहनों को दिल्ली में प्रवेश करने पर रोक लगा दी जाती है। केवल आवश्यक सामग्री वाली आपूर्ति करने वाले वाहनों को प्रवेश दिया जाता है। सभी प्रकार के निर्माण और विध्वंस कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। राज्य सरकार स्कूली छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं और सरकारी तथा निजी कार्यालयों के लिए घर से काम करने का निर्णय भी ले सकती है। ऑड-ईवन का निर्णय भी चौथे चरण में लिया जा सकता है, हालांकि यह अनिवार्य नहीं है, लेकिन ऐसा करने के लिए राज्य सरकार को अधिकार दिए गए हैं।

ओलंपिक पदक विजेता सुश्री मनु भाकर की मौजूदगी में होगा भव्य समापन कार्यक्रम

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव को राजधानी रायपुर में 16 से 20 अक्टूबर तक आयोजित 27वें अखिल भारतीय वन खेलकूद प्रतियोगिता में शामिल होने का आमंत्रण मिला है। श्री साय से आज यहाँ उनके निवास कार्यालय में वन मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व में वन विभाग के अधिकारियों ने भेंटकर उन्हें शुभारंभ कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों को सफल आयोजन  के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की मेजबानी करना छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है। इस मौके पर अधिकारियों ने  उन्हें स्पोर्ट्स किट भी भेंट किया। इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री व्ही. श्रीनिवास राव,  एडिशनल पीसीसीएफ श्री सुनील मिश्रा, एडिशनल पीसीसीएफ श्री अरूण पाण्डेय, एडिशनल पीसीसीएफ श्रीमती संजीता गुप्ता, मुख्य वन संरक्षक श्रीमती शालिनी रैना, सीसीएफ श्री राजू अगासिमनी भी उपस्थित थे। प्रतियोगिता की नोडल अधिकारी श्रीमती शालिनी रैना (मुख्य वन संरक्षक मानव संसाधन व आईटी) ने बताया कि यह एक वृहद व प्रतिष्ठित आयोजन है जो वनों की सुरक्षा व वन्य प्राणियों के संरक्षण को लेकर समर्पित है, जिसमें देशभर के अनेक प्रतिभागी शामिल होने वाले हैं। उन्होंने बताया कि राजधानी के 27वें अखिल भारतीय वन खेलकूद प्रतियोगिता में देशभर से करीब 3 हजार से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे। वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी इस पांच दिवसीय प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए सतत प्रयासरत है। गौरतलब है कि राजधानी रायपुर में 16 से 20 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले अखिल भारतीय वन खेलकूद प्रतियोगिता का उद्घाटन राजधानी के कोटा स्थित स्टेडियम में होगा। कार्यक्रम में भारतीय टी-20 क्रिकेट टीम के कप्तान और युवाओं में स्काई के नाम मशहूर क्रिकेटर सूर्य कुमार यादव शामिल होंगे। साथ ही आयोजन के समापन समारोह में ओलंपिक पदक विजेता सुश्री मनु भाकर भी शामिल होंगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भी वीडियो जारी कर प्रतियोगिता में भाग लेने वाले देशभर के वन सेवा के अधिकारी व कर्मचारियों को बधाई देते हुए आयोजक वन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन को शुभकामनाएं प्रेषित की है।

दीक्षांत समारोह में 126 गोल्ड मैडल, 297 पीएचडी एवं 397 स्नातकोत्तर उपाधियाँ प्रदान की गईं

भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि विद्यार्थी भावी जीवन में निरंतर सीखने की भावना जागृत रखें और “अन-लर्निंग, रि-स्किलिंग व अप-स्किलिंग” पर विशेष ध्यान दें। साथ ही यह संकल्प लें कि जीवन के उतार-चढ़ाव और विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आदर्शों, ज्ञान और आचरण के उच्चतम प्रतिमानों का निष्ठा के साथ पालन करेंगे। राज्यपाल श्री पटेल ने यह बात जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर के दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कही। उन्होंने गोल्ड मैडल व उपाधियाँ प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों, उनके अभिभावक व गुरुजनों को बधाई दी और सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। राज्यपाल श्री पटेल की अध्यक्षता एवं नालंदा विश्वविद्यालय बिहार के चांसलर पद्मभूषण डॉ. विजय पी. भटकर के मुख्य आतिथ्य में आयोजित हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अविनाश तिवारी, कुलाधिसचिव प्रो. डी. एन. गोस्वामी, कुल सचिव श्री अरूण सिंह चौहान एवं कार्य परिषद के सदस्यगण मंचासीन थे। दीक्षांत समारोह में पद्मभूषण डॉ. विजय पी. भटकर को डॉक्टर ऑफ साइंस की मानद उपाधि और साहित्यकार व वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नरेन्द्र नाथ लाहा को डीलिट् की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। साथ ही शिक्षण सत्र 2022-23 और 2023-24 के 81 विद्यार्थियों को 126 गोल्ड मैडल, 297 विद्यार्थियों को पीएचडी (डॉक्टर ऑफ फिलोसपी) एवं 397 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर उपाधियाँ प्रदान की गईं। विश्वविद्यालय की प्रतिभावान छात्रा सुश्री अंकिता मिश्रा को 4 एवं सुश्री त्रिपर्णा बारिक को 3 गोल्ड मैडल देकर सम्मानित किया गया। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि दीक्षांत कार्यक्रम सदैव से हमारी प्राचीन संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। प्राचीन काल में गुरुकुल शिक्षा में अध्ययन के समापन के बाद घर वापस लौटने के लिये समावर्तन संस्कार होता था। आधुनिक दीक्षांत समारोह उसी का एक रूप है। उन्होंने कहा दीक्षांत समारोह एक भावनात्मक अनुबंध का प्रतीक भी हैं, जिसमें छात्र-छात्राएँ अपने ज्ञान और मेधा के साथ गुरुजनों के बताए मार्ग पर चलने और राष्ट्र सेवा की शपथ लेते हैं। राज्यपाल श्री पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक परिवेश में या तो आप परिवर्तन को प्रेरित करते हैं अथवा परिवर्तन आपको प्रेरित करता है। इसलिए विद्यार्थी अपने जीवन के लक्ष्य निर्धारित करें और एकाग्र होकर उन लक्ष्यों को हासिल करने के लिये प्राण-पण से जुट जाएँ। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से समर्थ, सशक्त, समृद्ध और विकसित भारत बनाने के लिये भावी पीढ़ी को मति, गति और दिशा निर्धारण करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी विश्वविद्यालयों को सौंपी है। विश्वविद्यालयों से अपेक्षा है कि शिक्षा के इस मंदिर में विद्यार्थियों को ज्ञान, विज्ञान के साथ बौद्धिकता और संस्कारों के समन्वय की सीख भी दें। हर विधा के विद्यार्थियों को शोध एवं नवाचारों को समझने और अपनाने का अवसर भी विश्वविद्यालय में मिले। पद्मभूषण डॉ. विजय पी. भटकर ने दीक्षांत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि अच्छे विश्वविद्यालय देश को महान बनाते हैं। खुशी की बात है कि जीवाजी विश्वविद्यालय “मेक द नेशन” के पथ पर चलकर देश को महान बनाने के लक्ष्य पर आगे बढ़ रहा है। हमारी कामना है कि यह विश्वविद्यालय विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय का रूप लेकर नॉलेज बेस्ड इंडिया के निर्माण में अपना अहम योगदान दे। डॉ. भटकर ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जीवाजी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में गोल्ड मैडल व उपाधियाँ प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में छात्राओं की संख्या अधिक है। इससे निश्चित ही महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को बल मिलेगा। जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरू (कुलपति) प्रो. अविनाश तिवारी ने दीक्षांत उपदेश दिया एवं गोल्ड मैडल व उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शपथ दिलाई। डॉ. नरेन्द्र नाथ लाहा ने मानद डीलिट् उपाधि प्रदान करने के लिये जीवाजी विश्वविद्यालय के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया और यह उपाधि अपने माता-पिता को समर्पित की। दीक्षांत समारोह के आरंभ में शोभा यात्रा निकली। शुभारंभ व समापन राष्ट्रगान जन-गण-मन के सामूहिक गान के साथ हुआ। राज्यपाल श्री पटेल सहित अन्य अतिथियों ने दीक्षांत समारोह में जीवाजी विश्वविद्यालय की स्मारिका का विमोचन भी किया। संचालन विश्वविद्यालय के कुल सचिव श्री अरूण सिंह चौहान द्वारा किया गया। राज्यपाल श्री पटेल ने 8 विभागों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दर्जा मिलने पर दी बधाई राज्यपाल श्री पटेल ने जीवाजी विश्वविद्यालय के 8 शिक्षण विभागों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दर्जा एवं सरकार की पीएम उषा योजना के तहत 100 करोड़ रूपए का अनुदान मिलने पर बधाई दी। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा अंकुर ऐप के माध्यम से परिसर में किए गए पौध-रोपण की जानकारी प्राप्त कर सराहा। फास्ट फूड की बजाय मिलेट्स को प्राथमिकता दें विद्यार्थी राज्यपाल श्री पटेल ने इस अवसर पर विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे पढ़ाई के साथ अपनी सेहत का भी ध्यान रखें। पूरी नींद लें और नियमित रूप से व्यायाम करें। साथ ही पिज्जा, बर्गर जैसे फास्ड फूड की बजाय मिलेट्स (मोटे अनाज) से बने व्यंजनों को अपने भोजन का हिस्सा बनाएँ।  

लॉरेंस बिश्नोई अपराध से दूर रहने वाले लड़कों को बना रहा शार्प शूटर, पूरे देश में करीब 700 शार्प शूटर की तैयार

नई दिल्ली महाराष्ट्र के सीनियर नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आ रहा है। अब तक पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है तो खंडन भी नहीं किया है। वहीं लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने तो इसकी जिम्मेदारी ही ले ली है। इस हत्याकांड को सलमान खान को धमकी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इसके चलते यह कांड हाईप्रोफाइल हो गया है और पुलिस मुंबई से लेकर दिल्ली तक तफ्तीश में जुटी है। इस बीच जानकारी सामने आई है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग के काम करने का अलग ही तरीका है और पूरे देश में करीब 700 शार्प शूटर उसने खड़े कर लिए हैं। लॉरेंस बिश्नोई गैंग की पड़ताल कर रहे कुछ पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह गैंगस्टर अलग ही तरीके से काम करता है। वह आमतौर पर ऐसे लड़कों को अपने साथ लाता है, जिनका पिछला कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं होता। इनके जरिए ही वह बड़ी से बड़ी हत्याओं को अंजाम दिलाता है, जिससे पुलिस को कोई शक नहीं होता और ये लोग आसानी से मूवमेंट कर पाते हैं। इन लड़कों में उन्हें शामिल किया जाता है, जो जेल में कुछ समय पहले ही आए हों। इसके बाद उनकी मीटिंग लॉरेंस बिश्नोई के गुर्गों से होती है और उन्हें टारगेट सौंपे जाते हैं। गुजरात की साबरमती जेल में लॉरेंस बिश्नोई खुद बीते साल से ही बंद है। इसके अलावा उसकी गैंग के कई लोग राजस्थान, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा की जेलों में कैद हैं। इनके जरिए वह कोई अपराध अंजाम नहीं दे सकता। इसलिए नई पौध खड़ी करता है और उन लोगों को चुनता है, जिनके नाम पर पहले से कोई केस न हों। एनआईए सूत्रों का कहना है कि इसके लिए उन लोगों को भी कई बार चुना जाता है, जो बेरोजगार हों। इन्हें मोटी रकम का लालच मिलता है या फिर विदेश में कहीं सेटल कराने का झांसा दिया जाता है। ऐसा कई लोगों के साथ किया भी गया है और वे कनाडा जैसे देशों में रह रहे हैं। इस साल दो और कांड कर चुका है लॉरेंस बिश्नोई गैंग बाबा सिद्दीकी की हत्या के लिए भी इसी पैटर्न का इस्तेमाल हुआ और नए लोगों को इसके लिए चुना गया। लॉरेंस बिश्नोई गैंग कुख्यात होता जा रहा है और पूरे देश में खौफ का दूसरा नाम बन चुका है। इसी साल की शुरुआत में हरियाणा की पार्टी इनेलो के नेता नफे सिंह राठी की हत्या हुई थी। इसके अलावा गुरुग्राम में बुकी सचिन मुंजाल मारा गया था। इन कत्लों के पीछे भी बिश्नोई गैंग का ही नाम सामने आया था। यही नहीं लॉरेंस बिश्नोई के करीबी गुर्गे रोहित गोदारा ने इसकी जिम्मेदारी भी ली थी, जो फिलहाल कनाडा में बसा हुआ है।

मुख्यमंत्री साय ने माडिया सराय में विकास कार्य हेतु 50 लाख रुपए की घोषणा की

जगदलपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व हमारी आस्था और परम्परा का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है, जो सर्वाधिक लम्बी अवधि तक मनाया जाता है। बस्तर दशहरा पर्व को बस्तर अंचल के सभी लोग पूरी श्रद्धा-आस्था के साथ मनाते हैं और इसमें सक्रिय सहभागिता निभाते हैं। वहीं ऐतिहासिक बस्तर दशहरा अब देश-दुनिया के लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध हो गया है, जिससे अब पर्यटकों की संख्या में वृद्धि के साथ ही स्थानीय लोगों की आय को संबल मिला है। मां दंतेश्वरी के आशीर्वाद से बस्तरवासियों की अगाध श्रद्धा और सभी लोगों के सहयोग से इस वर्ष भी बस्तर दशहरा का भव्य एवं सफल आयोजन हुआ है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने उक्ताशय के उद्गार आज जगदलपुर के सिरहासार भवन में विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व के अवसर पर आयोजित मुरिया दरबार को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने इस अवसर पर माडिया सराय में विकास कार्य के लिए 50 लाख रुपए दिए जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने मांझी-चालकी और मेम्बर-मेंबरीन के मानदेय में बढ़ोतरी हेतु जिला प्रशासन और बस्तर दशहरा समिति से प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बस्तर दशहरा पर्व के ऐतिहासिक मुरिया दरबार में सम्मिलित होने पर खुशी व्यक्त की और कहा कि मुरिया दरबार का आयोजन सदियों से होता आया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा पर्व हमारी समृद्ध संस्कृति का प्रतीक है जिसे हम सभी एकजुट होकर श्रद्धा और सहकार की भावना के साथ हर्षोल्लास मनाते हैं। मुख्यमंत्री ने करीब 3 करोड़ रुपए की लागत से विकसित दशराहा पसरा को बस्तर दशहरा पर्व में आए मांझी-चालकी तथा अन्य लोगों को सुविधा मुहैया करवाने की दिशा में सार्थक प्रयास बताया और कहा कि बस्तर दशहरा पर्व के लिए निर्धारित बजट को 50 लाख रुपए कर दिया गया है। उन्होंने मुरिया दरबार में मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन और बस्तर दशहरा समिति के पदाधिकारियों की मांग एवं समस्याओं को निराकृत किए जाने की बात कही। मुख्यमंत्री ने बस्तर दशहरा पर्व में सक्रिय सहभागिता निभाने के लिए सभी लोगों को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने मुरिया दरबार में बस्तर विकास प्राधिकरण के पुरखती कागजात का अंग्रेजी संस्करण का विमोचन भी किया। बस्तर दशहरा पर्व के ऐतिहासिक मुरिया दरबार में बस्तर अंचल के मंत्री, सांसद एवं विधायकों सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों और बस्तर राज परिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी श्री कमलचन्द्र भंजदेव, बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष,बस्तर संभाग के विभिन्न क्षेत्रों से आये मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, ग्रामीणजन सम्मिलित हुए। इस अवसर पर माटी पुजारी श्री कमलचन्द्र भंजदेव ने बस्तर दशहरा पर्व के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी देते हुए इसे सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण बताया। उन्होंने बस्तर दशहरा पर्व में शामिल होने के लिए आने वाले देवी-देवताओं हेतु देव सराय की व्यवस्था तथा मांझी-चालकी, पुजारी, गायता सहित ग्रामीणों के ठहरने के लिए बेहतर सुविधा को राज्य सरकार के पहल की सराहना की। मुरिया दरबार में वन मंत्री श्री केदार कश्यप सहित सांसद बस्तर एवं अध्यक्ष बस्तर दशहरा समिति श्री महेश कश्यप और विधायक जगदलपुर श्री किरणदेव ने बस्तरवासियों को बस्तर दशहरा पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। इस दौरान बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष श्री लक्ष्मण मांझी ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व सभी के सहयोग तथा व्यापक सहभागिता से सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ है। आने वाले साल में इसे और अधिक  बेहतर और भव्यता के साथ मनाएंगे। इस अवसर पर मांझी-चालकी और मेम्बर-मेम्बरीन को मोबाइल भेट किया गया।  

उत्तर प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव: अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर फिलहाल उपचुनाव नहीं होगा

लखनऊ यूपी में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल कहे जा रहे उपचुनावों का सेट तैयार हो गया है। सभी सीटों पर एक साथ 13 नवंबर को वोटिंग होगी और 23 नवंबर को मतगणना के साथ नतीजे घोषित हो जाएंगे। चुनाव आयोग ने मंगलवार को यूपी की दस विधानसभा सीटों में से नौ सीटों पर उपचुनाव का ऐलान कर दिया। अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर फिलहाल उपचुनाव नहीं होगा। इसके पीछे कुछ त्योहारों और मेलों को कारण बताया गया है। जिन सीटों पर वोटिंग होगी उनमें मैनपुरी की करहल, अलीगढ़ की खैर, बिजनौर की मीरापुर, प्रयागराज की फूलपुर, गाजियाबाद की गाजियाबाद, मिर्जापुर की मझवां, अम्बेडकरनगर की कटेहरी, संभल की कुंदरकी और कानपुर की सीसामऊ सीट है। चुनाव आयोग की तरफ से जारी कार्यक्रम के अनुसार 18 अक्टूबर को अधिसूचना के साथ ही नामांकन शुरू हो जाएंगे। 25 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल किया जा सकेगा। 28 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 30 अक्टूबर तक नाम वापस लिये जा सकेंगे। लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के इंडिया गठबंधन से हारने के बाद भाजपा के पास 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले माहौल बनाने का उपचुनाव एक मौका है। भाजपा ने इसके लिए तैयारियां भी काफी समय पहले से शुरू कर दी हैं। सभी सीटों पर तीन-तीन मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद लोकसभा चुनाव के बाद सभी दस सीटों पर दौरे कर चुके हैं। सपा ने दस में से छह सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है। पहली बार उपचुनाव के मैदान में आ रही बसपा भी मिल्कीपुर समेत दस में से पांच सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। भाजपा के प्रत्याशियों का ऐलान भी एक दो दिन में होने की संभावना है। भाजपा दस में से नौ सीटों पर खुद उतरने की तैयारी में है। एक सीट मीरापुर जयंत चौधरी की पार्टी रालोद को दी जा सकती है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी को सबसे ज्यादा नुकसान यूपी में ही हुआ था। भाजपा यूपी की 80 में से पिछली बार 62 सीटें जीती थी। इस बार उसे 33 पर ही जीत मिली। सहयोगी रालोद ने दो और अपना दल ने एक सीट जीती। इससे एनडीए 36 सीटें जीत सका। सपा अकेले इससे ज्यादा 37 सीटें जीत गई। कांग्रेस को छह सीटों पर जीती मिली थी। उपचुनाव का परिणाम यह तय करेगा कि सपा-कांग्रेस को यूपी में मिली जीत एक तुक्का था या बीजेपी को आगे भी मुश्किलें झेलनी होंगी। उपचुनाव में बीजेपी के सामने चुनौती इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि लोकसभा चुनाव के दौरान इन नौ में से पांच सीटों पर सपा को बढ़त मिली है। सपा-भाजपा की क्या है रणनीति भाजपा ने हर सीट पर तीन-तीन मंत्रियों को मैदान में उतारा है। अयोध्या की मिल्कीपुर और मैनपुरी की करहल सीट पर चार-चार मंत्री उतारे गए हैं। भाजपा का जोर फिलहाल हिन्दुत्व और विकास कार्यों पर ही वोटिंग कराना है। वहीं, सपा एक बार फिर पीडीए के फार्मूले पर काम कर रही है। दस में छह सीटों पर उतारे गए प्रत्याशी भी पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समाज से हैं। भाजपा के सामने ज्यादा चुनौती उपचुनाव में भाजपा के सामने चुनौती ज्यादा मानी जा रही है। सपा-भाजपा दोनों के पास पांच चार महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव के समय उपचुनाव वाली सीटों पर पड़े वोटों को देखें तो सपा भारी दिखाई देती है। दस में से छह सीटों पर सपा ने भाजपा पर बढ़त बनाई थी। पिछले विधानसभा चुनाव में सपा और भाजपा के पास पांच-पांच सीटें थीं। लोकसभा चुनाव में विधायक से सांसद बने सभी विधायक (प्रवीण पटेल को छोड़कर) अपनी सीटों पर बढ़त हासिल करने में कामयाब हुए। फूलपुर से सांसद बने भाजपा विधायक प्रवीण पटेल केवल अपनी सीट पर पिछड़ गए थे। इन विधायकों के इस्तीफे से रिक्त हुई सीटें मैनपुरी की करहल सीट सपा प्रमुख अखिलेश यादव के सांसद बनने से खाली हुई है। इसी तरह अयोध्या की मिल्कीपुर सीट सपा के अवधेश प्रसाद, अम्बेडकरनगर की कटेहरी सीट सपा के लालजी वर्मा, संभल की कुंदरकी सीट सपा के जियाउर्रहमान बर्क के सांसद बनने से रिक्त हुई। अलीगढ़ की खैर सीट भाजपा के अनूप प्रधान वाल्मीकि, बिजनौर की मीरापुर सीट रालोद के चंदन चौहान, प्रयागराज की फूलपुर सीट भाजपा के प्रवीन पटेल, गाजियाबद की सीट भाजपा के अतुल गर्ग, मिर्जापुर की मझवां सीट निषाद पार्टी के विनोद बिंद के इस्तीफे से रिक्त हुईं है। कानपुर की सीसामऊ सीट सपा विधायक इरफान सोलंकी को सजा के कारण खाली हुई है।

हरियाणा विधानसभा चुनावों में 13 महिला विधायक चुनी गई, 4 के सैनी कैबिनेट में शामिल होने के आसार

सोनीपत हरियाणा में बीजेपी ने सियासी हैट्रिक लगाते हुए तीसरी बार सरकार बनाने की तैयारी कर ली है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की नेतृत्व वाली नई सरकार का 17 अक्टूबर को शपथ ग्रहण समारोह होने वाला है. इस नई सरकार में चार महिला मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है. 2024 के विधानसभा चुनावों में 13 महिला विधायक चुनी गई हैं जिसमें से 5 बीजेपी की हैं. इसके अलावा हिसार से निर्दलीय विधायक सावित्री जिंदल ने भी बीजेपी को समर्थन दे दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, सावित्री जिंदल के अलावा अटेली से विधायक आरती राव, तोशाम से विधायक श्रुति चौधरी और राई से विधायक कृष्णा गहलावत कैबिनेट में शामिल होने की दौड़ में सबसे आगे हैं. सवित्री जिंदल ने हिसार सीट से जीता है चुनाव बीजेपी से टिकट न मिलने पर बागी हुई सवित्री जिंदल ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर हिसार विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था. उन्होंने इस सीट पर कांग्रेस के रामनिवास रारा 18941 वोटों से मात दी. जिंदल को 49231 वोट मिले थे, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी को 30290 वोट मिले थे. इसके अलावा बीजेपी के डॉ. कमल गुप्ता 17385 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे. प्रभावशाली बनिया समुदाय से आने वाली सावित्री के पति की 2005 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. इसके बाद 2005 में उन्होंने पहली बार उपचुनाव जीता थी. वे हुड्डा सरकार में 2 बार मंत्री भी रही. हिसार सीट पर उनका खासा प्रभाव माना जाता है. केंद्रीय मंत्री की बेटी हैं आरती राव अटेली से विधायक आरती राव केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत की बेटी हैं. उन्होंने अटेली सीट पर बसपा के अत्तर लाल को 3085 वोटों से मात दी थी. राव को 57737 वोट मिले थे. वहीं, बसपा प्रत्याशी को 54652 वोट मिले. इसके अलावा कांग्रेस की अनीता यादव 30037 वोटों के साथ तीसरे नंबर रही थी. आरती राव के पिता राव इंद्रजीत दक्षिण हरियाणा में एक प्रमुख प्रभावशाली ताकत रखते हैं. वे कई मौकों पर मुख्यमंत्री पद की दावेदारी भी कर चुके हैं. ऐसे में आरती राव के लिए डिप्टी सीएम पद की मांग की जा रही है. हुड्डा के गढ़ में गहलावत ने जीता चुनाव वहीं राई विधानसभा सीट पर कृष्णा गहलावत ने जीत दर्ज की है. ये सीट पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गढ़ मानी जाती है. इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के जय भगवान अंतिल को 4673 वोटों से हराया है. गहलावत को 64614 वोटों मिले थे, तो वहीं कांग्रेस प्रत्याशी को 59941 वोट मिले. जाट समुदाय से आने वाली कृष्णा गहलावत 1996 में बंसीलाल सरकार में मंत्री रह चुकी है. बीजेपी सोनीपत, रोहतक और झज्जर की जाट बेल्ट में अपना आधार बढ़ाने के लिए उन्हें कैबिनेट में जगह दे सकती है. श्रुति चौधरी का भाई से था मुकाबला तोशाम विधानसभा सीट पर बीजेपी से श्रुति चौधरी ने जीत दर्ज की है. इस सीट पर उनका मुकाबला अपने चचेरे भाई अनिरूद्ध चौधरी से था. श्रुति चौधरी से कांग्रेस के अनिरुद्ध चौधरी 14257 वोटों से मात दी. श्रुति चौधरी को 76414 वोट और अनिरूद्ध चौधरी को 62157 वोट मिले थे. भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से सांसद रही श्रुति चौधरी को इस बार कांग्रेस से टिकट नहीं मिला था. इसके बाद वे अपनी मां किरण चौधरी के साथ बीजेपी में शामिल हो गई. तोशाम पर बंसीलाल परिवार का खासा प्रभाव रहा है. इससे पहले किरण चौधरी इस सीट से लगातार जीत हासिल करती रही हैं. उन्हें अब राज्यसभा भेज दिया गया है. ऐसे में श्रुति चौधरी कैबिनेट में मंत्रीपद के मजबूत दावेदारी मानी जा रही है. 16 अक्टूबर को बीजेपी विधायक दल की बैठक हरियाणा में 16 अक्टूबर को बीजेपी विधायक दल की बैठक सुबह 10 बजे होने वाली है. ऑब्जर्वर के तौर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह विधायकों के साथ बैठक करेंगे. 16 और 17 अक्टूबर को सभी बीजेपी विधायक चंडीगढ़ में ही मौजूद रहने वाले हैं. प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली की तरफ से इसको लेकर आदेश जारी किए गए है. इस बैठक में नायब सिंह सैनी को विधायक दल का नेता चुना जाएगा, जिसके बाद राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा.

विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को किया सम्मानित

प्रतापपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि वे भी आदिवासी समाज के ही बेटे हैं इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति के सुख- दुख व जरूरतों को समझते हैं। पूर्व की सरकार में प्रदेश का विकास रुका हुआ था। भाजपा सरकार अब तेजी से विकास कार्यों को पूरा करने में लगी हुई है। विधानसभा चुनाव से पूर्व मोदी की गारंटी नाम से किए गए प्रत्येक वादे को पूरा किया जा रहा है। आप लोगों के आशीर्वाद से ही सरगुजा संभाग की पूरी 14 सीटों पर भाजपा को विजय मिली। इसी का परिणाम है कि शीर्ष नेतृत्व ने प्रदेश की बागडोर संभालने सरगुजा संभाग से ही आने वाले आप सबके विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री के रूप में चुना है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आदिवासी समाज के लोगों के बीच करमा त्यौहार के प्रतीक करमदेव की पूजा अर्चना कर क्षेत्रवासियों की सुख समृद्धि की कामना की। विभिन्न विभागों द्वारा जनहितैषी योजनाओं से संबंधित लगाए गए स्टालों का निरीक्षण कर हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं से लाभांवित किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि करमा आदिवासियों का प्रमुख त्यौहार है। यह एकता का प्रतीक है। हमारी पुरानी परंपरा है। इस परंपरा को जीवित रखने के लिए हमें प्रत्येक वर्ष करमा त्यौहार मनाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पीएम जनमन योजना का संचालन किया जा रहा है जिसमें प्रदेश की अति पिछड़ी जनजातियों को सभी प्रकार की मूलभूत सुविधाएं दी जा रही हैं। उन्होंने कहा की प्रदेश के पिछड़े हुए प्रत्येक गांव को विकास की धारा से जोड़कर मूलभूत सुविधाओं का विस्तार करने केन्द्र सरकार छत्तीसगढ़ को अस्सी हजार करोड़ का पैकेज देगी। कार्यक्रम को मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल व लक्ष्मी राजवाड़े ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने चलचित्र के माध्यम से स्वच्छता को लेकर प्रत्येक गांव में ठोस एवं अपशिष्ट पदार्थ के बेहतर प्रबंधन के लिए हमर सुघ्घर गांव पहल का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने पद्मश्री माता राजमोहनी देवी की पुत्री रामबाई व समाज में बदलाव लाने वाले कर्मियों का भी सम्मान किया। प्रगति पत्र का विमोचन किया तथा जिलेवासियों के लिए प्रशासन तक अपनी समस्याओं, मांगों व सुझाव पहुंचाने के लिए समाधान सूरजपुर 24 घंटे के नाम से एक व्हाट्सएप नंबर भी जारी किया। कार्यक्रम में विधायक शकुंतला सिंह, अंबिकापुर विधायक राजेश अग्रवाल, सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो, सामरी विधायक उद्धेश्वरी पैकरा, बैकुंठपुर विधायक भईयालाल राजवाड़े, प्रेमनगर विधायक भूलन सिंह मराबी, लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज, सूरजपुर भाजपा जिलाध्यक्ष बाबूलाल अग्रवाल, बलरामपुर जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश जायसवाल , आइजी अंकित गर्ग, कमिश्नर जीआर चुरेंद्र, भाजपा जिला उपाध्यक्ष लाल संतोष सिंह, प्रतापपुर भाजपा मंडल अध्यक्ष अक्षय तिवारी, भाजपा नेता प्रेमपाल अग्रवाल, आनंद मित्तल, अजीत शरण सिंह, अरविंद जायसवाल, प्रवीण दुबे, अवधेश पांडेय, जिला पंचायत सीईओ कमलेश नंदिनी साहू, एसडीएम ललिता भगत, जनपद पंचायत सीईओ राधेश्याम मिर्झा व बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। विधायक पोर्ते की मांगों पर मुख्यमंत्री ने की घोषणाएं जिला स्तरीय सर्व आदिवासी समाज करमा महोत्सव के दौरान प्रतापपुर विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते ने आयोजन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न मांगें रखीं। जिनमें प्रतापपुर क्षेत्र अंतर्गत चंदौरा-जजावल मार्ग का जिर्णोद्धार, पीडब्ल्यूडी कार्यालय, पीडब्ल्यूडी रेस्टहाउस, चार एंबुलेंस, स्वास्थ्य केंद्र में डिलेवरी से संबंधित रेफरल सेंटर, रिंग रोड,पीएचई भवन, एडीएम कार्यालय तथा वाड्रफनगर में रजिस्ट्री कार्यालय, बैडमिंटन इंडोर स्टेडियम व चलगली मार्ग के जिर्णोद्धार की मांग शामिल थी। जिस पर मुख्यमंत्री ने रेफरल सेंटर, एडीएम कार्यालय, पीडब्ल्यूडी रेस्टहाउस, चंदौरा -जजावल मार्ग व वाड्रफनगर में बैडमिंटन इंडोर स्टेडियम की मांगों को पूरी करने की घोषणा करने के साथ ही अन्य मांगों को भी जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया। इस दौरान विधायक पोर्ते ने मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेशवासियों के हित में किए जा रहे कार्यों को लेकर उन्हें एक अभिनंदन पत्र भी सौंपा। कार्यक्रम के समापन पश्चात विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते ने भी सिलौटा में दस लाख की लागत से मंगल भवन का निर्माण कराने की घोषणा की।  

सपनों को साकार करने वालों में से एक थे ”मिसाइल मैन” डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी डॉ. अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम जिन्हें समस्त भारतवासी प्यार से ’’मिसाइल मैन’’ के नाम से जानते हैं, जिनका जीवन एक साधारण परिवार से उठकर विश्व पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ने की अद्भुत कहानी है। वे न केवल एक वैज्ञानिक के रूप में प्रसिद्ध हुए बल्कि अपने सरल और प्रेरक व्यक्तित्व के कारण वे देश के करोड़ों युवाओं के आदर्श बने। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के एक छोटे से गांव रामेश्वरम में हुआ। उनका परिवार आर्थिक रूप से बहुत साधारण था, लेकिन उनके माता-पिता ने उन्हें उच्च नैतिक मूल्यों और शिक्षा के प्रति समर्पण की सीख दी। उनके पिता एक नाविक थे और उनकी माँ एक धार्मिक महिला थीं। डॉ. कलाम का बचपन संघर्षों से भरा हुआ था, लेकिन उन्होंने कभी अपने सपनों को मरने नहीं दिया। बाल्यावस्था में ही उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए अखबार बेचने का काम किया। इस दौरान उन्होंने अपनी पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी और अपनी शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी। कलाम की शिक्षा का प्रारंभ रामेश्वरम के एक प्राथमिक विद्यालय से हुआ। वे एक प्रतिभाशाली छात्र थे और विज्ञान और गणित में विशेष रुचि रखते थे। उनके शिक्षक उनके उज्ज्वल भविष्य को लेकर हमेशा उत्साहित रहते थे और उन्हें प्रेरित करते थे। आगे की शिक्षा के लिए उन्होंने श्वार्ट्ज हायर सेकेंडरी स्कूल में दाखिला लिया, जहाँ उनकी वैज्ञानिक दृष्टि और रुचि को और अधिक विकसित होने का अवसर मिला। विज्ञान के प्रति उनके लगाव ने उन्हें मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी तक पहुँचाया, जहाँ उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया। यहाँ पर भी उन्होंने अपने कठिन परिश्रम और लगन से सभी को प्रभावित किया। उनकी प्रतिभा और कार्य के प्रति समर्पण ने उन्हें इस क्षेत्र में गहरी समझ और अद्वितीय ज्ञान दिया, जिसने भविष्य में भारत के अंतरिक्ष और रक्षा अनुसंधान में उनका मार्ग प्रशस्त किया। वैज्ञानिक करियर की शुरुआत अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद डॉ. कलाम ने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) में एक वैज्ञानिक के रूप में अपना करियर शुरू किया। उनके प्रारंभिक कार्य ने उन्हें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से जोड़ दिया, जहाँ उन्होंने देश के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (SLV) के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस सफलता ने उन्हें वैज्ञानिक समुदाय में एक प्रमुख स्थान दिलाया। उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें भारत के मिसाइल विकास कार्यक्रम का नेतृत्व करने का अवसर दिया, जहाँ उन्होंने कई प्रमुख मिसाइलों के विकास में अहम योगदान दिया। इसके कारण ही उन्हें ’’मिसाइल मैन’’ के नाम से प्रसिद्धि मिली। उनकी देखरेख में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया और कई मिसाइल प्रौद्योगिकियों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। अग्नि और पृथ्वी मिसाइल का किया विकास डॉ. कलाम का सबसे महत्वपूर्ण योगदान अग्नि और पृथ्वी मिसाइलों के विकास में था। यह मिसाइलें भारत की रक्षा क्षमता को एक नई ऊँचाई पर ले गईं। उनके नेतृत्व में भारत ने सामरिक महत्व की मिसाइलों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया, जिसने न केवल भारत की सैन्य शक्ति को मजबूत किया, बल्कि विश्व स्तर पर भारत को एक मजबूत राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। डॉ. कलाम के इस योगदान ने उन्हें भारत के रक्षा विज्ञान के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित स्थान दिलाया। उनका दृष्टिकोण यह था कि देश को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने के लिए तकनीकी और वैज्ञानिक प्रगति अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनका विश्वास था कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से देश के युवा अपनी सच्ची क्षमता को पहचान सकते हैं और राष्ट्र की प्रगति में योगदान दे सकते हैं । भारत के राष्ट्रपति के रूप में दिया महत्वपूर्ण योगदान विज्ञान और तकनीकी उपलब्धियों के बावजूद डॉ. कलाम का सबसे बड़ा सम्मान तब हुआ जब उन्होंने भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। उनका राष्ट्रपति काल सादगी, ईमानदारी और देश के विकास के प्रति समर्पण का प्रतीक था। उन्होंने राष्ट्रपति पद को न केवल एक संवैधानिक पद माना, बल्कि इसे जनसेवा का एक माध्यम समझा। राष्ट्रपति बनने के बाद भी उनका सारा ध्यान युवाओं को प्रेरित करने पर था। वे नियमित रूप से छात्रों से मिलते रहे और उन्हें अपने सपनों का पीछा करने और जीवन में कुछ बड़ा करने के लिए प्रेरित करते रहे। डॉ. कलाम का छत्तीसगढ़ से लगा रहा लगाव डॉ. कलाम ने छत्तीसगढ़ के विकास में भी कई महत्त्वपूर्ण योगदान दिए। वे विभिन्न अवसरों पर छत्तीसगढ़ आए और अपने विचारों तथा योजनाओं से क्षेत्र के विकास को गति प्रदान की। 2006 में उन्होंने रायपुर जिले के आरंग तहसील के बकतारा में PURA (Providing Urban Amenities to Rural Areas) परियोजना का उद्घाटन किया, जिसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में शहरी सुविधाएं प्रदान कर लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना था। इस परियोजना के तहत 22 गांवों को शामिल किया गया, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कृषि के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सुधार किए जाने की योजना बनाई गई थी। इसके साथ ही शिक्षक दिवस के मौके पर वह बेमेतरा आने वाले थे, लेकिन वह नहीं आ पाए थे. इसके बाद वह बेमेतरा आए और रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी में लेक्चर दिया था, उन्होंने छत्तीसगढ़ के लोगों पर श्ग्लोरी टू द ग्रेट पीपल ऑफ़ छत्तीसगढ़’ नाम की कविता लिखी थी । डॉ. कलाम ने रायपुर स्थित ही पुरखौती मुक्तांगन में एक अद्वितीय सांस्कृतिक संग्रहालय और विज्ञान पार्क का उद्घाटन किया। उन्होंने इस संग्रहालय को एक सीखने की प्रयोगशाला बताया, जहां लोग छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और जैव विविधता को समझ सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने छत्तीसगढ़ में जैव ईंधन के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया और राज्य को जैव ईंधन उत्पादन में अग्रणी बनने का सुझाव दिया। उनका यह सुझाव राज्य के किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बना और जैव ईंधन के क्षेत्र में नई संभावनाओं का द्वार खोला। उनका मानना था कि युवा भारत के भविष्य के निर्माता हैं, और यदि उन्हें सही दिशा में प्रेरित किया जाए, तो वे देश को नई ऊँचाइयों पर ले जा सकते हैं। डॉ. कलाम का दृष्टिकोण और नेतृत्व डॉ. कलाम के नेतृत्व में भारत ने कई क्षेत्रों में प्रगति की। वे हमेशा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से देश के समग्र विकास में विश्वास … Read more

देश में चीतों की धरती कूनो नेशनल पार्क में अब चीते खुलकर जिएंगे, दो-दो की संख्या में नेशनल पार्क में छोड़ा जाएगा

शिवपुरी देश में चीतों की धरती कूनो नेशनल पार्क में अब चीते खुलकर जिएंगे। उन्हें बड़े बाड़े से खुले जंगल में छोड़े जाने की स्वीकृति चीता स्टीयरिंग (संचालन) कमेटी से मिल गई है। दो-दो की संख्या में चीतों को छोड़ा जाएगा। इसके बाद स्थिति को देखते हुए अन्य चीतों और शावकों को भी खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। चीतों को छोड़ने की तैयारी शुरू कर दी गई है। खास बात यह है कि चीते समीपस्थ राज्यों में भी स्वच्छंद विचरण कर सकेंगे। इनके भोजन, सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित राज्य के वन मंडल की होगी। इस आशय का निर्णय पिछले दिनों कूनो नेशनल पार्क में मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के 22 वन मंडलाधिकारियों की कार्यशाला में लिया गया। 12 वयस्क और 12 चीता शावक बता दें, कूनो नेशनल पार्क में वर्तमान में 12 वयस्क और 12 चीता शावक हैं। सभी को बड़े बाड़े में रखा गया है। भारत में पहली बार चीते 17 सितंबर, 2022 को लाए गए थे। 11 मार्च, 2023 को पहली बार चीता पवन व आशा को खुले जंगल में छोड़ा गया था। इसके कुछ ही दिन बाद चीता गौरव (एल्टन) और शौर्य (फ्रेडी) को छोड़ा गया था। राजस्थान और यूपी की सीमा तक पहुंच गए थे चीते कूनो से राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सीमा नजदीक है। जब चीतों को खुले जंगल में छोड़ा गया था तब कुछ कूनो से बाहर निकलकर नजदीकी जिले मुरैना, शिवपुरी के अलावा उत्तर प्रदेश के झांसी-ललितपुर, राजस्थान के करौली व बारां तक पहुंच गए थे। बारिश के दौरान रेडियो कालर की बेल्ट की वजह से गर्दन में संक्रमण के बाद एक चीते की मौत हो गई तो सभी चीतों को कूनो लाकर बड़े बाड़े में रखा गया। यहां शावकों का जन्म भी हुआ। चीतों को वापस नहीं लाया जाएगा अब खुले जंगल में चीतों को दोबारा छोड़ने के निर्णय के साथ यह भी तय किया गया है कि उन्हें वापस नहीं लाया जाएगा। संबंधित वन मंडल उनकी निगरानी करेगा। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार चीता प्राकृतिक रहवास वाला प्राणी है इसलिए इनके स्वच्छंद विचरण में बाधा नहीं होनी चाहिए। इस बीच, कूनो में चीता सफारी की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। वाहनों को तैयार किया जा रहा है। टूरिस्ट गाइडों की भर्ती प्रक्रिया भी चल रही है। एक चीते को चाहिए होता है 100 वर्ग किमी का क्षेत्र वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार एक चीते के लिए करीब 100 वर्ग किमी क्षेत्र की जरूरत होती है। कूनो के जंगल का क्षेत्र करीब 1200 वर्ग किमी है। इसमें 748 वर्ग किमी मुख्य जोन में और 487 किमी बफर जोन में है। कूनो में शावकों सहित 24 चीते हैं इस लिहाज से कूनो के जंगल का क्षेत्र चीतों के लिए कम ही होगा।

मप्र में दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीख का हुआ एलान, 13 नवंबर को मतदान, 23 नवंबर को मतगणना

भोपाल   मध्य प्रदेश की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का ऐलान हो गया है. मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस कर चुनाव के शेड्यूल की जानकारी विस्तार से दी है. मध्य प्रदेश की बुधनी और विजयपुर विधानसभा सीटों पर 13 नवंबर को मतदान होंगे और 23 नवंबर को मतगणना के बाद नतीजे सामने आ जाएंगे. मध्य प्रदेश विधानसभा उपचुनाव 2024 का शेड्यूल चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए शेड्यूल के मुताबिक, नोटिफिकेशन जारी करने की तारीख 10 अक्टूबर 2024 होगी नामांकन भरने की आखिरी तारीख 25 अक्टूबर 2024 होगी नामांकन पत्रों की जांच 28 अक्टूबर 2024 को होगी नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर तक होगी मतदान की तारीख 13 नवंबर 2024 होगी मतगणना 23 नवंबर 2024 को होगी इन वजहों से खाली हुईं बुधनी और विजयपुर सीटें सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा सीट और श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं. बुधनी सीट पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लंबे समय तक विधायक रहे. इस बार के लोकसभा चुनाव में विदिशा से सांसद चुने जाने के बाद शिवराज सिंह को केंद्रीय मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली और इसी के साथ बुधनी सीट खाली हो गई. वहीं, विजयपुर विधानसभा सीट रामनिवास रावत के कांग्रेस छोड़ने के बाद से खाली है. रामनिवास रावत अब बीजेपी में शामिल हो गए हैं. ऐसे में बीजेपी उन्हें ही इस सीट से फिर चुनाव में उतार सकती है.

महाराष्ट्र में खुशखबरी…दिवाली से पहले सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में होगी बंपर बढ़ोतरी !

मुंबई निर्वाचन आयोग द्वारा महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की घोषणा से चंद मिनट पहले, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने निचले स्तर के सरकारी कर्मचारियों के लिए दिवाली बोनस की घोषणा की. उन्होंने बीएमसी (बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कारपोरेशन) कर्मचारियों को भी 29 हजार रुपये बोनस देने की घोषणा की है. यह पिछले साल से तीन हजार रुपये ज्यादा है. किंडरगार्टन शिक्षकों और आशा वर्कर्स को भी बोनस मिलेगा. भारतीय निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को महाराष्ट्र चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया. चीफ इलेक्शन कमिश्नर राजीव कुमार ने बताया कि महाराष्ट्र में 288 विधानसभा सीटों के लिए एक चरण में 20 नवंबर को मतदान होगा और 23 नवंबर को नतीजे घोषित होंगे. बता दें कि कुछ दिन पहले राज्यसभा सांसद रामदास आठवले की अध्यक्षता वाले नगर मजदूर संघ ने बीएमसी के कर्मचारियों के लिए 40,000 रुपये के दिवाली बोनस की मांग की थी. यूनियन ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और नगर निगम आयुक्त से कर्मचारियों को एक्स ग्रेसिया बोनस देने का अनुरोध किया था. पिछले साल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 8 नवंबर को, बीएमसी कर्मचारियों के लिए 26,000 रुपये के दिवाली बोनस की घोषणा की थी. कर्मचारियों के खाते में सरकार देगी तोहफा  केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है. केंद्र की मोदी सरकार ने महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी के ऐलान से पहले कर्मचारियों को दिवाली बोनस का तोहफा दिया है. वित्त मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए केंद्रीय कर्मचारियों के लिए नॉन-प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (एड हॉक बोनस) का ऐलान किया है. इसके तहत ग्रुप बी और ग्रुप सी कैटेगरी के कर्मचारियों को 30 दिन के वेतन के बराबर पैसा मिलेगा.     वित्त मंत्रालय के खर्च विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि पात्र कर्मचारियों में ग्रुप ‘सी’ और ग्रुप ‘बी’ के गैर-राजपत्रित कर्मचारी शामिल हैं, जो किसी उत्पादकता से जुड़े बोनस योजना का हिस्सा नहीं हैं. बोनस की गणना के लिए इस्तेमाल की जाने वाली अधिकतम मासिक सैलरी 7,000 रुपये तय की गई है. इन कर्मचारियों को मिलेगा फायदा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और सशस्त्र बलों के पात्र कर्मचारियों को भी इसका फायदा मिलेगा. साथ ही यह बोनस उन कर्मचारियों को मिलेगा जो 31 मार्च 2024 तक सेवा में रहे हैं. और साल 2023-24 के दौरान कम से कम 6 महीने काम किया है. दूसरे शब्दों में कहें तो वे कार्मिक जो 31 मार्च से पहले चिकित्सा आधार पर अशक्त होकर सेवानिवृत्त हो गए हैं या उनकी मृत्यु हो गई है, लेकिन उन्होंने वित्तीय वर्ष में छह महीने तक नियमित ड्यूटी की है, उन्हें एडहॉक बोनस के लिए पात्र माना जाएगा. सभी भुगतान निकटतम रुपए में पूर्णांकित किए जाएंगे और खर्च संबंधित मंत्रालयों और विभागों द्वारा उनके स्वीकृत बजट के भीतर वहन किए जाएंगे. ऐसे होगी बोनस की गणना एडहॉक बोनस के तहत दी जाने वाली राशि निर्धारित करने के लिए एक नियम बनाया गया है. बोनस राशि की गणना औसत परिलब्धियों को 30.4 से विभाजित करके, फिर उसे 30 दिनों से गुणा करके की जाएगी. उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी का मासिक वेतन 7,000 रुपए है, तो उनका बोनस लगभग (7000 x 30/30.4 + 6907.89/- रुपए) 6,908 रुपए होगा. लगातार तीन वर्षों तक एक वर्ष में कम से कम 240 दिन काम करने वाले कैजुअल मजदूर भी इस बोनस के पात्र होंगे, जिसकी गणना 1,200 रुपए प्रति माह के आधार पर की जाएगी. इस निर्णय से लाखों केन्द्रीय सरकारी कर्मचारियों को लाभ होगा.

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