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अवैध कॉलोनी में रहने वालो के लिए सरकार ने सुगम विद्युत योजना बनाई, परमानेंट बिजली कनेक्शन मिलेगा आसानी से

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के लिए बड़ी खबर है. अब अवैध कॉलोनी में रहने वाले लोग भी परमानेंट बिजली कनेक्शन ले सकेंगे. हालांकि, उन्हें सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट देनी होगी. ये कीमत वे किश्तों में दे सकते हैं. इससे पहले इन कॉलोनी के रहवासियों के लिए परमानेंट बिजली कनेक्शन लेना आसान नहीं था. उन्हें इसके लिए बहुत बड़ी कीमत एक साथ देनी होती थी. इस वजह से वे इस तरह का बिजली कनेक्शन नहीं ले पाते थे. ऐसे लोगों को सरकार ने बड़ी राहत दी है. सरकार ने इन लोगों के लिए सुगम विद्युत (सुविधा) योजना बनाई है. ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के लिए ही यह योजना लाई गई है. यह योजना दो साल तक लागू रहेगी. इस योजना का लाभ लेने वाले लोगों को इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट देनी होगी. वे इस कॉस्ट को किश्तों में दे सकेंगे. दो साल बाद इस योजना का रिव्यू किया जाएगा. उसी के आधार पर फैसला किया जाएगा कि इस योजना को जारी रखें या नहीं. भोपाल से प्रकाशित अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, सरकार की इस योजना में नए ग्राहक भी शामिल हो सकते हैं. जिन लोगों की कॉलोनियां रेरा में रिजस्टर्ड नहीं हैं वे भी इसका लाभ ले सकते हैं. इसके अलावा वे लोग भी लाभ ले सकते हैं जो एक साथ इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट नहीं दे सकते. दो साल में चुकाना होगा सारा रुपया सूत्रों ने बताया कि इस योजना में लोग व्यक्तिगत रूप से और सामूहिक रूप से शामिल हो सकते हैं. यह योजना हाउसिंग सोसायटी, बिल्डर और कॉलोनाइजर के लिए नहीं है. लोगों को योजना की शुरुआत में आवेदन के साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट का 25 फीसदी रुपया देना होगा. उनका बिजली कनेक्शन चालू होने के बाद उन्हें बिल के साथ-साथ ब्याज भी देना होगा. उन्हें दो साल में सारा रुपया सरकार को चुकाना होगा.

पाक में नहीं होगी चैम्पियंस ट्रॉफी? भारतीय टीम के कारण में ICC ने बनाए ये 3 प्लान

 लाहौर  पाकिस्तान में अगले साल होने वाली ICC चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. भारतीय टीम के चक्कर में इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) को इस टूर्नामेंट के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है. आईसीसी ने चैम्पियंस ट्रॉफी के लिए तीन खास प्लान तैयार किए हैं. आज तक को मिली बड़ी जानकारी में आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी को लेकर पूरा प्लान सामने आ गया है. इसमें खुलासा हुआ है कि अब आईसीसी इस बड़े टूर्नामेंट को लेकर खास तैयारी कर रहा है. इस रिपोर्ट में भारतीय टीम के पाकिस्तान दौरे पर जाने और टूर्नामेंट को किसी अन्य देश में खेले जाने समेत तमाम जानकारी शामिल है. ICC ने बनाए ये तीन बड़े प्लान दरअसल, चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 की आधिकारिक मेजबानी पाकिस्तान के पास है. मगर BCCI ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वो अपनी भारतीय टीम को पाकिस्तान दौरे पर नहीं भेजेंगे. ऐसे में पाकिस्तान समेत ICC का सिरदर्द बढ़ गया है. आज तक को मिली जानकारी के अनुसार अब ICC 3 ऑप्शन पर काम कर रही है. आइए जानते हैं क्या हैं वो 3 प्लान…     पहला ऑप्शन: पूरा टूर्नामेंट पाकिस्तान में ही कराया जाए. हालांकि इसके लिए भारतीय टीम का मामला फंसता दिखाई दे रहा है.     दूसरा ऑप्शन: चैम्पियंस ट्रॉफी को हाइब्रिड मॉडल के आधार पर कराया जाए. इसके तहत भारतीय टीम अपने सभी मैच दुबई में खेल सकती है. इसके तहत सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले भी दुबई में होंगे.     तीसरा ऑप्शन: आखिरी विकल्प यही है कि चैम्पियंस ट्रॉफी को पूरी तरह से शिफ्ट कर दिया जाए. यानी पूरे टूर्नामेंट को पाकिस्तान से बाहर कराया जा सकता है. इसमें दुबई, श्रीलंका और साउथ अफ्रीका में से किसी एक देश में चुना जा सकता है, जहां यह टूर्नामेंट कराया जा सके. आखिरी 2 ऑप्शन पर हो सकता है काम बता दें कि भारत सरकार ने अब तक BCCI को अनुमति नहीं दी है कि वो भारतीय टीम को पाकिस्तान भेज सके. ऐसे में ICC के पास आखिरी 2 ऑप्शन पर काम करने के अलावा कोई दूसरा विकल्म दिख नहीं रहा है. हालांकि, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) पूरी तरह से टूर्नामेंट को अपने घर में कराए जाने पर अडिग है. जिस पर अंतिम फैसला नवंबर में आ सकता है क्योंकि एक दिसंबर से जय शाह ICC चेयरमैन का पद संभालने वाले हैं. अगले साल कब होगा ये टूर्नामेंट? ICC चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 का आधिकारिक शेड्यूल अब तक सामने नहीं आया है. जबकि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चैम्पियंस ट्रॉफी का आगाज 19 फरवरी से होगा और इसका फाइनल मुकाबला 9 मार्च को खेला जा सकता है.  

रतन टाटा के बाद अब कौन संभालेगा टाटा ग्रुप, जानें कैसे चुना जाएगा उत्तराधिकारी, कौन है रेस में सबसे आगे

मुंबई टाटा समूह के मानद चेयरमैन रतन टाटा अब इस दुनिया में नहीं रहे। 86 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। इसके साथ ही टाटा समूह की कमान को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि रतन टाटा के बाद अब अगुवाई कौन करेगा। हालांकि, इस रेस में कई नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन सबसे आगे उनके सौतेले भाई नोएल टाटा का नाम है। हालांकि, अब तक समूह की तरफ से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। कौन हैं नोएल टाटा नवल एच टाटा और सिमोन एन टाटा के बेटे हैं। टाटा इंटरनेशनल की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, नोएल टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड के नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। वह टाटा समूह से 40 सालों से जुड़े हुए हैं और टाटा ग्रुप की कई कंपनियों में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हैं। वह ट्रेंट, टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड, वोल्टास और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन के चेयरमैन हैं। साथ ही वह नोएल स्टील और टाइटन कंपनी लिमिटेड के वाइस चेयरमैन हैं। वह सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के बोर्ड के ट्रस्टी भी हैं। उन्होंने ब्रिटेन की ससेक्स यूनिवर्सिटी से शिक्षा हासिल की है। साथ ही INSEAD से इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम पूरा किया है। नोएल टाटा के 3 बच्चे टाटा ट्रस्ट्स में हैं शामिल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टाटा समूह ने नोएल टाटा के 3 बच्चों को परोपकारी संस्थाओं के बोर्ड में शामिल किया था। इनमें लेह, माया और नेविल का नाम शामिल है। खास बात है कि इन नियुक्तियों से ट्रस्ट्स की 132 साल पुरानी परंपरा में भी बदलाव के संकेत मिलते हैं, जहां पहले आमतौर पर दिग्गजों को ट्रस्टीशिप दी जाती थी। लेह, माया और नेविल टाटा की कई कंपनियों में मैनेजर लेवल के पदों पर भी हैं। इन ट्रस्टों में शामिल अन्य लोगों ने सिटी इंडिया के पूर्व सीईओ परमीत झावेरी सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और रतन टाटा के छोटे भाई जिमी टाटा और जहांगीर अस्पताल के सीईओ जहांगीर एचसी जहांगीर सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी हैं. कैसे चुने जाते हैं इन ट्रस्टों के चेयरमैन टाटा ट्रस्ट के प्रमुख का चुनाव ट्रस्टियों में से बहुमत के आधार पर होता है. विजय सिंह और वेणु श्रीनिवास इन दोनों ट्रस्टों के उपाध्यक्ष हैं. लेकिन इनमें से किसी एक के प्रमुख चुने जाने की संभावना अपेक्षाकृत कम है. जिस व्यक्ति को टाटा ट्रस्ट का प्रमुख बनाए जाने की अधिक संभवाना है, वो है 67 साल के नोएल टाटा. नोएल की नियुक्ति से पारसी समुदाय भी खुश होगा. रतन टाटा पारसी थे. इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि एक पारसी है इस संगठन का नेतृ्त्व करे. इस ट्रस्ट ने वित्त वर्ष 2023 में 470 करोड़ रुपये से अधिक का दान दिया था. पारसी को प्राथमिकता एक ऐतिहासिक तय्थ यह भी है कि केवल पारसियों ने ही टाटा ट्रस्ट की कमान संभाली है. हालांकि कुछ के नाम में टाटा नहीं लगा था और उनका ट्रस्ट के संस्थापक परिवार से कोई सीधा रिश्ता नहीं था. अगर नोएल टाटा इन ट्रस्टों के प्रमुख चुने जाते हैं तो वे सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के 11वें अध्यक्ष और सर रतन टाटा ट्रस्ट के छठे अध्यक्ष बनेंगे. नोएल चार दशक से अधिक समय से टाटा समूह से जुड़े हुए हैं. वो ट्रेंट, टाइटन और टाटा स्टील समेत छह प्रमुख कंपनियों के बोर्ड में हैं. उन्हें 2019 में सर रतन टाटा ट्रस्ट का ट्रस्टी नियुक्त किया गया था. वो 2022 में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के बोर्ड में शामिल किए गए थे. टाटा का कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद माना जाता था कि वो टाटा संस के चेयरमैन का पद संभालेंगे. लेकिन उस पर नोएल के बहनोई साइरस मिस्त्री को बैठा दिया गया. टाटा संस से साइरस मिस्त्री के निकाले जाने के बाद टाटा संस के अध्यक्ष की कमान टीसीएस के सीईओ एन चंद्रशेखरन ने संभाली.नोएल और रतन टाटा कभी एक साथ नजर नहीं आए. दोनों ने अपने बीच दूरी बनाए रखी.हालांकि रतन टाटा के अंतिम दिनों में अपने सौतेले भाई से रिश्ते काफी मधुर हो गए थे.

भगवान राम और हनुमान को मुस्लिम बताकर नमाज पढ़वाना पड़ा भारी, बिहार-बेगूसराय में शिक्षक पर मामला दर्ज

बेगूसराय. बेगूसराय में एक मुस्लिम शिक्षक के द्वारा भगवान राम और हनुमान पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का मामला अब गहराता ही जा रहा है। आज भाजपा नेता सह वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार अमर के नेतृत्व में सिंहपुर गांव के राजेश कुमार पोद्दार ने बछवाड़ा थाने में आरोपी शिक्षक जियाउद्दीन के विरुद्ध मामला दर्ज करवाया है दरअसल जियाउद्दीन के द्वारा सप्तम वर्ग में पढ़ाई के दौरान बच्चों को यह सिखाया जा रहा था कि हनुमान एवं भगवान राम मुसलमान थे और भगवान राम के कहने पर हनुमान जी नमाज पढ़ा करते थे। यही बात जब बच्चों ने अपने अभिभावकों को बताई थी तो अभिभावक आक्रोशित हो गए थे और स्कूल पर जाकर हो हंगामा किया था। बाद में बेगूसराय के सांसद सह केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी आपत्ति दर्ज करते हुए सामाजिक सौहार्द को बिगड़ने का आरोप लगाया था। आज आरोपी शिक्षक जियाउद्दीन के विरुद्ध बछवारा थाने में मामला दर्ज करवाया गया है। पूरा मामला बछवारा थाना क्षेत्र के कद्राबाद सिंहपुर उत्क्रमित मध्य विद्यालय का है। इसी क्रम में अमरेंद्र कुमार अमर ने बताया कि आज वामपंथी विचारधारा के कुछ लोग इस बात का खंडन करते फिर रहे हैं। उन्होंने बिना नाम लिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह एवं बछवारा के भाकपा पूर्व विधायक अवधेश राय पर आरोप लगाते हुए कहा है कि जब पाकिस्तान एवं बांग्लादेश में हिंदुओं का कत्ल आम किया गया तब यह लोग चुप थे और फिलिस्तीन की घटना के बाद तख्ती लगाकर प्रदर्शन कर रहे थे । लेकिन आज जब एक मुस्लिम शिक्षक के द्वारा हिंदुओं की भावना पर आघात किया गया है तो वोट के लिए यह लोग घूम घूम कर उल्टी राजनीति कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश, देश के अग्रणी राज्यों में है : मंत्री कुशवाह

भोपाल उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा है कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश, देश के अग्रणी राज्यों में है। प्रदेश की इस उपलब्धि के दृष्टिगत केन्द्र सरकार द्वारा मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की अवधि एक वर्ष बढ़ाई गई है। मंत्री कुशवाह ने केन्द्र सरकार के इस निर्णय पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय खाद्य प्र-संस्करण मंत्री चिराग पासवान के प्रति आभार व्यक्त किया है। प्रमुख सचिव उद्यानिकी अनुपम राजन ने बताया कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए केन्द्रीय खाद्य प्र-संस्करण मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश में योजना के क्रियान्वयन अवधि को 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया है। इस योजना के तहत मध्यप्रदेश में 420 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिये बैंकों द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है, जो एक रिकार्ड है। प्रमुख सचिव राजन ने बताया कि मध्यप्रदेश में पीएमएफएमई योजना वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक 5 वर्षों के लिए लागू की गई थी। पीएमएफएमई योजना के माध्यम से खाद्य प्र-संस्करण उद्योग इकाइयों की स्थापना के लिए निजी और समूह को 35 प्रतिशत या अधिकतम 10 लाख रूपये का अनुदान दिया जाता है। इससे प्रेरित होकर प्रदेश में कृषि/उद्यानिकी के क्षेत्र में युवा स्वयं की औद्योगिक यूनिट स्थापना के लिए प्रेरित हुए है। राजन ने बताया कि प्रदेश में खाद्य प्र-संस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी के माध्यम से प्रस्तावों का परीक्षण किया जाता है, इसके उपरांत ही केन्द्रीय इंटरमिनिस्ट्रियल इम्पावर कमेटी को प्रस्ताव भेजे जाते है। योजना में प्राप्त 917 प्रकरणों में से 420 प्रकरणों की स्वीकृति प्राप्त कर मध्यप्रदेश, देश में अग्रणी राज्य बना है। उल्लेखनीय है कि अपर सचिव, केन्द्रीय खाद्य प्र-संस्करण मिनहाज आलम ने पत्र लिखकर प्रमुख सचिव उद्यानिकी अनुपम राजन और उनकी टीम के कार्य की सराहना की है।  

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने कुंभ मेले में गैर-सनातनी लोगों के फूड स्टॉल पर रोक लगाने और उर्दू शब्दों को बदलने का निर्णय लिया

प्रयागराज  अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (एबीएपी) ने देशभर के महामंडलेश्वरों, मंडलेश्वरों और संतों के साथ-साथ भक्तों और अनुयायियों को निर्देश दिया है। वे ऐसे दुकानदारों से सामान खरीदें जो ‘सनातनी’ हों। परिषद ने आगे कहा कि सामान केवल उसी दुकान से खरीदा जाना चाहिए, जिस पर मालिक का नाम लिखा हो और यह सत्यापित करने के बाद कि दुकान, ढाबा, रेस्टोरेंट या किसी अन्य प्रतिष्ठान के अंदर देवी-देवताओं की मूर्ति या तस्वीर है या नहीं। ऐसा इसलिए जरूरी था क्योंकि ‘एक खास धर्म के लोग’ दुर्भावनापूर्ण इरादे से काम कर रहे थे। परिषद ने कहा कि एक खास धर्म के लोग उनकी पवित्रता और पवित्रता को खत्म करना चाहते हैं। इसके लिए खाने-पीने की चीजें, यहां तक कि पूजा में इस्तेमाल होने वाले फूल, प्रसाद, कंठी-माला आदि थूक लगाकर बेचा जाता है। सब्जियों को बेचने से पहले गंदे पानी में डुबोया जाता है। देशभर में ऐसे मामले सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर कई वीडियो शेयर किए गए हैं। एबीएपी के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा, ‘इसे देखते हुए खुद को इससे अलग करने का फैसला किया गया।’ महाकुंभ में अखाड़ों समेत सभी संप्रदायों के संतों के शिविरों में भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे के लिए प्रयागराज में हिंदुओं के अलावा सिख, जैन और बौद्ध दुकानदारों को फल, सब्जी, दूध, अनाज, दोना-पत्तल और कुल्हड़ की व्यवस्था की गई। रवींद्र पुरी ने आगे कहा कि अखाड़ा परिषद किसी जाति या वर्ग के खिलाफ नहीं है, लेकिन वे अपनी पवित्रता और परंपरा से समझौता नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, ‘हम देख रहे थे कि हमारी परंपरा और साधना को तोड़ने के लिए लगातार साजिश रची जा रही थी। खाने और पूजा सामग्री में थूक और मूत्र मिलाया जा रहा था। यह देखकर दिल बेचैन हो गया कि कोई ऐसा घृणित काम कैसे कर सकता है।’ उन्होंने कहा, ‘इसके बावजूद हिंदुओं ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया, उन्होंने सिर्फ अपना रास्ता बदल लिया।’ उन्होंने मांग की, ‘हिंदू संतों और भक्तों की साधना को बाधित करने के ऐसे प्रयासों को रोकने के लिए सरकार को सख्त कानून बनाने चाहिए।’ पुरी ने यह भी सवाल उठाया कि मुस्लिम समुदाय के किसी धार्मिक नेता ने इस तरह की हरकतों के खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठाई। उन्होंने कहा, ‘इसलिए यह तय हुआ कि हम हिंदू दुकानदारों से ही सामान खरीदेंगे। हिंदुओं के साथ-साथ सिखों, जैनियों और बौद्धों से भी सामान लिया जाएगा।’ एबीएपी अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि परिषद ने महाकुंभ में मुसलमानों को आने से रोकने की मांग नहीं की। यह अनुचित है। उन्होंने कहा, ‘सनातन धर्म वसुधैव कुटुंबकम का संदेश देता है। हमारे धर्म को बदनाम करने के लिए अखाड़ा परिषद के नाम पर फर्जी एजेंडा चलाया जा रहा है। हम चाहते थे कि हर कोई श्रद्धा के साथ महाकुंभ में आए।’ उन्होंने कहा कि अगर वे आएंगे और हमारा त्याग, भजन-पूजन और सेवा देखेंगे तो उन्हें सद्बुद्धि आएगी और हमारे आचरण से उनका वैचारिक शुद्धिकरण होगा।

राफेल नडाल ने किया संन्यास का ऐलान, 22 ग्रैंड स्लैम के साथ टेनिस को कहा अलविदा

मैड्रिड स्पेन के महान टेनिस खिलाड़ी राफेल नडाल ने इस खेल को अलविदा कह दिया है। उन्होंने गुरुवार 10 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी करते हुए अपने रिटायरमेंट की जानकारी दी। सिंगल्स में 22 ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने वाले राफेल नडाल ने कहा कि वह अपने प्रोफेशनल टेनिस करियर को समाप्त कर रहे हैं। यह निर्णय डेविस कप फाइनल के बाद प्रभावी होगा। 38 वर्षीय खिलाड़ी ने रिकॉर्ड 14 बार फ्रेंच ओपन का खिताब जीता है और इसी वजह से उनको लाल बजरी का बादशाह कहा जाता, क्योंकि फ्रेंच ओपन क्ले कोर्ट (लाल मिट्टी) पर होता है। राफेल नडाल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा, “यह कुछ कठिन वर्ष रहे हैं, खासकर पिछले दो साल। मैं बहुत उत्साहित हूं कि मेरा आखिरी टूर्नामेंट मेरे देश का प्रतिनिधित्व करने वाला डेविस कप होगा। यह चक्र पूरा हो रहा है, क्योंकि मेरी पहली खुशियों में से एक 2004 में सेविला में फाइनल था।” डेविस कप के नॉकआउट मैच 19 नवंबर से शुरू होंगे। 24 नवंबर को फाइनल मुकाबला खेला जाएगा। इस टूर्नामेंट में जहां तक स्पेन की टीम खेलेगी, वही मैच राफेल नडाल का आखिरी मैच होगा। नडाल का करियर चोटों से प्रभावित रहा है और वह 2023 फ्रेंच ओपन से चूक गए थे और इस साल उन्हें पहले दौर में जर्मन अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने हराया था। उन्होंने अपना आखिरी रोलैंड गैरोस खिताब 2022 में जीता और पेरिस क्ले को 112-4 की जीत-हार के रिकॉर्ड के साथ छोड़ा है।

बीजेपी सरकार से अच्छे रिश्तों से ही जम्मू-कश्मीर को फायदा: उमर अब्दुल्ला

श्रीनगर  जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव जीतते ही उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि पहली ही कैबिनेट बैठक में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने वाला प्रस्ताव पारित किया जाएगा। नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि सरकार गठन के बाद पहली बैठक में मंत्रिमंडल, राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए केंद्र पर दबाव डालने के वास्ते एक प्रस्ताव पारित करेगा। इसके बाद सरकार इस प्रस्ताव को प्रधानमंत्री के पास भेजेगी। जम्मू-कश्मीर चुनाव में पूर्व राज्य का दर्जा बहाली मुद्दा सबसे बड़ा था। एनसी-कांग्रेस के घोषणापत्र में भी इसका वादा किया गया था। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि दिल्ली के विपरीत जम्मू-कश्मीर में सरकार सुचारू रूप से काम कर पाएगी। उन्होंने कहा, ‘हमारे और दिल्ली के बीच एक फर्क है। दिल्ली कभी एक राज्य नहीं रहा। किसी ने दिल्ली को राज्य का दर्जा देने का वादा नहीं किया। जम्मू-कश्मीर 2019 से पहले राज्य था। हमसे प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों ने राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया, जिन्होंने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में तीन कदम उठाए जाएंगे – परिसीमन, चुनाव और फिर राज्य का दर्जा।’ केंद्र के प्रति उमर का रुख नरम उमर अब्दुल्ला ने कहा, ‘परिसीमन हो गया, अब चुनाव भी हो गए हैं। इसलिए केवल राज्य का दर्जा देना बाकी है जिसे जल्द ही बहाल किया जाना चाहिए।’ यह पूछे जाने पर कि जम्मू-कश्मीर सरकार और केंद्र के बीच समन्वय कितना जरूरी है, इस पर उन्होंने कहा कि नई दिल्ली से टकराव लेकर कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। एनसी नेता ने कहा, ‘पहले सरकार बनने दीजिए। यह सवाल मुख्यमंत्री से पूछा जाना चाहिए। नयी दिल्ली के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध होने चाहिए। मेरी उन्हें (मुख्यमंत्री) सलाह होगी कि हम केंद्र के साथ टकराव करके किसी भी मुद्दे का समाधान नहीं कर सकते।’ ‘केंद्र से अच्छे रिश्ते जम्मू-कश्मीर के लिए फायदेमंद’ अब्दुल्ला ने कहा, ‘ऐसा नहीं है कि हम भाजपा की राजनीति स्वीकार करेंगे या भाजपा हमारी राजनीति स्वीकार करेगी। हम भाजपा का विरोध करते रहेंगे लेकिन केंद्र का विरोध करना हमारी मजबूरी नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘केंद्र के साथ अच्छे रिश्ते रखना जम्मू-कश्मीर और उसके लोगों के लिए फायदेमंद होगा। लोगों ने टकराव के लिए वोट नहीं किया है। जम्मू-कश्मीर के लोगों ने इसलिए वोट दिया है क्योंकि वे रोजगार चाहते हैं, वे विकास चाहते हैं, वे राज्य का दर्जा बहाल कराना चाहते हैं, वे बिजली तथा अन्य समस्याओं से छुटकारा चाहते हैं और नयी दिल्ली से टकराव करके इनका समाधान नहीं निकलेगा।’ विधायक दल की बैठक आज अब्दुल्ला ने कहा कि एनसी सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए गुरुवार को विधायक दल की एक बैठक बुलाई गई है। इसके बाद गठबंधन के सहयोगियों की बैठक होगी जिसमें गठबंधन का नेता चुना जाएगा और फिर हम सरकार गठन का दावा जताने के लिए राज भवन जाएंगे। मुझे उम्मीद है कि अगले कुछ दिन में नई सरकार बन जाएगी। पीडीपी से गठबंधन पर क्या बोले उमर अब्दुल्ला? यह पूछने पर कि क्या पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) गठबंधन सरकार का हिस्सा होगी, इस पर एनसी नेता ने कहा कि अभी तक इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने कहा, ‘पीडीपी ने हमसे या हमने उनसे कोई संपर्क नहीं किया है। इस चुनाव के नतीजों को देखते हुए मुझे लगता है कि कुछ अंदरुनी चर्चा चल रही होगी। मुझे लगता है कि चुनावी नतीजे उनके लिए झटका हैं।

नायब सिंह सैनी का ही मुख्यमंत्री बनना तय, बनेगा एक दलित डेप्युटी सीएम

नई दिल्ली  हरियाणा में बीजेपी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। बुधवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के सीनियर नेताओं से मुलाकात की। पार्टी के हरियाणा अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने कहा कि सैनी और उनकी पार्टी के सीनियर नेताओं से मुलाकात शिष्टाचार मुलाकात है। सरकार बनाने को लेकर दशहरे के बाद बात होगी। मुख्यमंत्री और शपथ ग्रहण के साथ ही मंत्रिमंडल को लेकर तभी बात होगी। उधर, सैनी ने कहा कि केंद्रीय पर्यवेक्षक जल्द ही राज्य का दौरा करेंगे और विधायक दल के नेता का चयन करेंगे। इसके बाद संसदीय बोर्ड फैसला लेगा कि कौन सीएम होगा। क्या बनेगा दलित डेप्युटी सीएम? नायब सिंह सैनी का ही मुख्यमंत्री बनना तय माना जा रहा है। बीजेपी ने चुनाव सैनी को ही सामने रखकर लड़ा था। लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने मनोहर लाल खट्टर की जगह सैनी को मुख्यमंत्री बनाया था। मंगलवार को हरियाणा जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया था तब भी खट्टर और सैनी का जिक्र किया था। चर्चा चल रही है कि बीजेपी हरियाणा में डेप्युटी सीएम भी बना सकती है। बीजेपी सर्कल में यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी दो डिप्टी सीएम बना सकती है और एक डेप्युटी सीएम दलित समाज से होगा। 2019 में दुष्यंत चौटाला का बनाना पड़ा था डेप्युटी सीएम 2014 में जब पहली बार बीजेपी हरियाणा में सत्ता में आई थी तब कोई डेप्युटी सीएम नहीं बनाया था। 2019 में जब जेजीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई तब जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला को डेप्युटी सीएम बनाया था। हरियाणा में मुख्यमंत्री समेत कुल 14 मंत्री हो सकते हैं। पिछली सरकार के 8 मंत्री चुनाव हार चुके हैं। 3 मंत्रियों को इस बार टिकट ही नहीं मिला था और दो मंत्री चुनाव नहीं जीत पाए। पीएम से मिले सैनी नायब सिंह सैनी बुधवार को दिल्ली पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मोदी ने सैनी को बीजेपी की जीत के लिए बधाई दी और विश्वास जताया कि विकसित भारत के संकल्प में हरियाणा की भूमिका और अहम होने जा रही है। सैनी ने प्रधानमंत्री मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा से भी मुलाकात की। मोदी ने सोशल मीडिया मंच X पर मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए पोस्ट किया, ‘हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जी से मिला और विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली ऐतिहासिक जीत के लिए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुझे विश्वास है कि विकसित भारत के संकल्प में हरियाणा की भूमिका और अहम होने जा रही है।’ नायब सैनी ने जीत का श्रेय़ पीएम मोदी की नीतियों को दिया प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सैनी ने पार्टी की सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों को दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव विश्लेषकों ने भले ही कांग्रेस के चुनाव जीतने की संभावनाओं का दावा किया हो लेकिन उन्होंने हमेशा जोर दिया कि लोग बीजेपी सरकार की नीतियों के कारण उस पर भरोसा करेंगे। EVM पर कांग्रेस की ओर से संदेह जताए जाने के मसले पर उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टी झूठ का बवंडर खड़ा कर रही है।

इजरायल ने एयर स्ट्राइक कर हिज्बुल्लाह की पूरी कमर तोड़ी, अब तक 11 टॉप कमांडर ढेर हो चुके

तेल अवीव इजरायल ने लगातार एयर स्ट्राइक कर हिज्बुल्लाह की पूरी कमर तोड़ दी है. हसन नसरल्लाह, हाशिम सफीद्दीन और फौद शुक्र सहित अब तक हिज्बुल्लाह के 11 टॉप कमांडर ढेर हो चुके हैं. इजरायल के इन हमलों ने हिज्बुल्लाह के दूसरे लड़ाकों का मनोबल भी तोड़कर रख दिया है. इस बीच अब लड़ाकों की उम्मीदें हिज्बुल्लाह के तीन टॉप कमांडर्स पर टिकी हुई हैं. ये टॉप कमांडर अभी कहां हैं और इनकी आगे की प्लानिंग क्या है, ये किसी को नहीं पता है. इन तीन कमांडर्स के नाम हैं. नईम कासिम, तलाल हामिह और अबु अली रिदा. नईम कासिम शेख नईम कासिम को 1991 में तब हिज्बुल्लाह के जनरल सेक्रेट्री अब्बास अल-मुसावी ने डिप्टी लीडर नियुक्त किया था. बता दें कि अगले ही साल अल मुसावी के काफिले को 1992 में इजरायली अपाचे हेलिकॉप्टर ने निशाना बनाया था, जिसमें उसकी मौत हो गई थी. इसके बाद नसरल्लाह ने कमान संभाली, लेकिन नईम कासिम अपनी भूमिका में बने रहे. पिछले साल कासिम ने इजरायल के साथ तनाव पर विदेशी मीडिया को इंटरव्यू भी दिया था. तलाल हामिह तलाल हामिह को तलाल होस्नी हामिह, इस्मत मजरानी या अबू जाफर के नाम से भी जाना जाता है. वह हिज्बुल्लाह के बाहरी संचालन का इंचार्ज है, जिसे यूनिट 910 के नाम से भी जाना जाता है, जो दुनिया भर में गुप्त अभियानों की देखरेख करता है. तलाल हामिह को हिज्बुल्लाह की पहली पीढ़ी का हिस्सा माना जाता है, जो 1980 के दशक के मध्य में संगठन से जुड़े. तलाल उन कुछ लोगों में शामिल हैं, जिनका हसन नसरल्लाह से सीधा संपर्क था. अबु अली रिदा हिज्बुल्लाह के लड़ाके जिस तीसरे शख्स की तरफ उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं, उसका नाम है अबु अली रिदा. अबु हिज्बुल्लाह की बदर डिवीजन का कमांडर है. इजरायल की सेना उसका पता लगाने के लिए लगातार ऑपरेशन चला रही है, लेकिन उसका ठिकाना किसी को नहीं पता है. बताया जा रहा है कि हिज्बुल्लाह के टॉप कमांडर पर एक के बाद एक होते हमले को देखते हुये, वह किसी अज्ञात ठिकाने पर छिपा हुआ है. अमेरिका इन लड़ाकों को IDF ने किया ढेर > हसन नसरल्लाह: इजरायल ने सीक्रेट बंकर में छिपे हिज्बुल्लाह चीफ को एयरस्ट्राइक कर ढेर कर दिया था. > हाशिम सफीद्दीन: हसन नसरल्लाह के उत्तराधिकारी माने जा रहे हाशिम सफीद्दीन को भी हवाई हमलों में मार गिराया. > इसके अलावा इब्राहिम अकील (ऑपरेशन हेड), मोहम्मद कबीसी (मिसाइल और रॉकेट यूनिट हेड), फौद शुक्र (हिज्बुल्लाह का सर्वोच्च कमांडर), अली कराकी (साउथ फ्रंट कमांडर) को भी मार गिराया. > इजरायल ने हिज्बुल्लाह की दूसरी पंक्ति के नेताओं में विसम अल तवील (रादवां फोर्स कमांडर), अबू हसन समीर (रादवां फोर्स का ट्रेनिंग हेड), मोहम्मद हुसैन सरौर (एरियल कमांड कमांडर), सामी तालेब अब्दुल्लाह (नासेर यूनिट कमांडर) और मोहम्मद नासेर (अजीज यूनिट कमांडर) को हवाई हमले में ढेर कर दिया था.  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुरजनपुर में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का किया उद्घाटन, स्व. अमर सिंह डण्डोतिया की समाधि पर पुष्प अर्पित किये

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश के चहुँमुखी विकास के लिये हरसंभव कार्य किये जा रहे हैं। चंबल की पवित्र भूमि में विकास की गंगा बहेगी। चंबल का कोई भी क्षेत्र विकास के किसी भी पहलू में पीछे नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुरैना के सुरजनपुर में विकास कार्यों के लोकार्पण और भूमि-पूजन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने यहाँ 35 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले सीएम राइज़ स्कूल का भूमि-पूजन और लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का लोकार्पण भी किया। उन्होंने कहा कि दिमनी में 2 करोड़ रुपये की लागत से सामुदायिक भवन बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुरजनपुर में स्व. अमर सिंह डण्डोतिया की समाधि पर पुष्प अर्पित किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष और क्षेत्रीय सांसद ने इस क्षेत्र के लिये जो मांगे रखी है, उन सभी मांगो को पूर्ण करने की घोषणा की जाती है। दिमनी में 2 करोड़ की लागत से सामुदायिक भवन, क्वारी नदी को रोककर कमतरी बिरहरूआ-गोपी कंचनपुर के मध्य बांध निर्माण कार्य, बड़ेगांव से महेबा का पुरा होकर अजनौधा बाया सिरमिती डोंगरपुर मार्ग, दोहाटी, बरगमां, कटेलापुरा पी.डब्ल्यू.डी. मार्ग पर क्वारी नदी पर पुल निर्माण कार्य, ग्राम चैटा बरैथा में 33/11 के.वी. सब स्टेशन निर्माण कार्य, ग्राम नयापुरा खिरेंटा में 33/11 के.वी. सब स्टेशन निर्माण कार्य, ग्राम लहर में 33/11 के.वी. सब स्टेशन निर्माण कार्य की घोषणा की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में नई शिक्षा नीति-2020 तय की गई थी, जिसमें भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण और महापुरूषों की जीवनी शामिल की गई है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति को प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू किया गया है। मुरैना का यह क्षेत्र मथुरा के नजदीक है। इस क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण की कृपा बनी रहे। मुरैना से मथुरा ज्यादा दूर नही है, जल्दी ही यहाँ नया सिक्स लेन रोड बनना शुरू हो जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सुरजनपुर के साथ दिमनी की भूमि को पवित्र भूमि बनाना है। यह कर्मशील लोगों की भूमि है। दिमनी विधानसभा के वर्तमान विधायक एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष और हमारी पार्टी के दो बार प्रदेश अध्यक्ष रहे नरेंद्र सिंह तोमर की कर्मभूमि है। साथ ही हमारे वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद वी.डी. शर्मा की जन्मभूमि है। यहां आकर हमको ऐसा लगा कि इस भूमि में अलग ही बात है। यहां की मिट्टी की खुशबू में भी एक अलग ही प्रकार की ऊर्जा महसूस हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं स्वर्गीय अमर सिंह डंडोतिया जी को भी नमन करता हूं। उन्होंने अपने सपूत को पूर्णकालिक रूप से देश की सेवा के रूप में सौंप दिया है। दिमनी की भूमि एक की कर्म-भूमि है और एक की जन्म-भूमि है। इस भूमि पर आकर जब मैं बीडी शर्मा के घर गया तो उनकी माताजी से मिल कर मुझे अपनी मां की याद आ गई। मैं यहाँ आकर अपने आप को गौरांवित महसूस कर रहा हूं। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि ग्राम सुरजनपुर में सीएम राइज स्कूल और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खुलने से इस क्षेत्र की जनता को सीधा लाभ मिलेगा और बच्चों को उच्च स्तर की शिक्षा ग्रहण करने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि विकास कार्यो में प्रदेश सरकार ने कोई कमी नहीं छोड़ी है। विकास कार्य किसी से छिपे नहीं है। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, प्रभारी मंत्री करण सिंह वर्मा, खजुराहो सांसद वी.डी. शर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह और सांसद शिवमंगल सिंह तोमर ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर हितानंद, विधायक, जन-प्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।  

स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए प्राइवेट सेक्टर की भी भागीदारी जरूरी – उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिये अत्याधुनिक निजी अस्पताल भी जरूरी – मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्वालियर में किया 100 बिस्तरीय देवराज मल्टी स्पेशिलिटी हॉस्पिटल का उदघाटन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिये अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित निजी अस्पताल भी जरूरी हैं। खुशी की बात है ग्वालियर की धरती पर आज ऐसे ही एक बड़े अस्पताल की शुरूआत हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार की शाम ग्वालियर में 100 बिस्तरीय देवराज अस्पताल (देवराज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस) के उदघाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अस्पतालों को आरोग्य मंदिर का नाम दिया है। प्रसन्नता का विषय है कि एक किसान परिवार ने ग्वालियर में अपने बेटे की स्मृति में एक अस्पताल अर्थात आरोग्य मंदिर की स्थापना की है। उन्होंने इसके लिये देवराज अस्पताल के संस्थापक करन सिंह किरार एवं उनके परिवार को बधाई और शुभकामनायें दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार भी इस पुनीत पहल के लिये करन सिंह के परिवार का सम्मान और आदर करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब पूरी दुनिया में कोरोना का हाहाकार मचा हुआ था, तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के संसाधनों और बौद्धिक क्षमताओं का उपयोग कर स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के समस्त नागरिकों को कोरोना से बचाव के नि:शुल्क टीके लगवाए। साथ ही दुनिया भर में कोरोना वैक्सीन भेजकर “जियो और जीने दो” के सिद्धांत को चरितार्थ करके दिखाया। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि ऋषि गालव की तपोभूमि, तानसेन की साधना स्थली, वीरांगना लक्ष्मीबाई की बलिदान स्थली एवं राजमाता विजयाराजे सिंधिया की कर्म भूमि ग्वालियर में यह अस्पताल गरीब मरीजों के इलाज में अहम योगदान देगा। परिवार में आई रिक्तता को सेवा से भरने का काम सराहनीय – विधानसभा अध्यक्ष तोमर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि नवरात्रि के पावन पर्व पर ग्वालियर में स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ा अस्पताल जुड़ रहा है। उन्होंने कहा परिवार में किसी भी व्यक्ति के असमय चले जाने से परिवार में बड़ी रिक्तता आती है। बिरले ही लोग होते हैं जो इस रिक्तता को सेवा से भरने के प्रयासों को मूर्तरूप दे पाते हैं। ग्वालियर में स्व. शीतला सहाय जी ने अपने पुत्र की कैंसर से मृत्यु होने पर देश का प्रतिष्ठित कैंसर हॉस्पिटल स्थापित कर यह काम करके दिखाया था। उसी श्रृंखला में आज करन सिंह किरार ने अपने दिवंगत पुत्र स्व. देवराज सिंह किरार की याद को चिरस्थायी बनाने के लिये बड़े अस्पताल की स्थापना की है। उन्होंने ईश्वर से कामना की है कि यह अस्पताल उत्तरोत्तर प्रगति करे, जिससे ग्वालियर क्षेत्र के निवासियों को बेहतर से बेहतर इलाज की सुविधा मिल सके। विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए समर्पित भाव से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में मध्यप्रदेश में केवल ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, जबलपुर व रीवा में मेडिकल कॉलेज थे। अब प्रदेश में 14 सरकारी मेडीकल कॉलेज हो गए हैं। इसके अलावा निजी मेडिकल कॉलेज की भी स्थापना हुई है। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए प्राइवेट सेक्टर की भी भागीदारी जरूरी – उप मुख्यमंत्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएँ तभी बेहतर और पर्याप्त होंगी, जब सरकार के साथ प्राइवेट सेक्टर भी बराबरी के साथ खड़ा होगा । उन्होंने दिल्ली, नागपुर व मुम्बई का उदाहरण देते हुए कहा कि प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी से ही ये महानगर मेडिकल हब के रूप में स्थापित हुए हैं। शुक्ल ने कहा खुशी की बात है कि ग्वालियर में 100 बैड के अत्याधुनिक अस्पताल की स्थापना हुई है और यह अस्पताल आगे चलकर एक हजार बैड और मेडिकल कॉलेज के साथ तैयार होगा। इससे प्रदेश सरकार भी उत्साहित है कि इस अस्पताल में सस्ती दर पर गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य सेवाएँ मिलेंगीं। उन्होंने पीड़ित मानवता की सेवा के क्षेत्र में कदम बढ़ाने के लिये देवराज अस्पताल प्रबंधन को बधाई व शुभकामनाएं दीं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के इलाज के लिये रियायत सराहनीय पहल – सांसद शर्मा सांसद एवं प्रदेश अध्यक्ष वी.डी. शर्मा ने कहा खुशी की बात है कि देवराज अस्पताल में मात्र 50 रूपए कंसलटेशन फीस पर इलाज की सुविधा मिलेगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मरीज भी एक अच्छे अस्पताल में अपना इलाज करा सकेंगे। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिये आयुष्मान भारत जैसी क्रांतिकारी योजना को मूर्तरूप दिया है। हमें आशा है कि प्रधानमंत्री मोदी की भावना के अनुरूप देवराज अस्पताल भी गरीब मरीजों के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। भगवान गणेश का पूजन एवं फीता काटकर किया अस्पताल का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं अन्य सभी अतिथियों ने भगवान गणेश का पूजन कर और फीता काटकर देवराज अस्पताल का उदघाटन किया। साथ ही अस्पताल परिसर में स्व. देवराज सिंह किरार की प्रतिमा का अनावरण भी किया। अस्पताल का जायजा भी लिया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उदघाटन करने के बाद देवराज अस्पताल का जायजा भी लिया। उन्होंने अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर, जनरल और प्राइवेट वार्ड, आईसीयू, ओपीडी और फॉर्मेसी सहित अस्पताल में उपलब्ध अन्य स्वास्थ्य सेवाओं को देखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर उदघाटन समारोह का शुभारंभ किया। ज्ञात हो राष्ट्रीय राजमार्ग क्र.-44 पर ग्राम खुरैरी – बड़ागाँव के समीप देवराज मल्टी स्पेशिलिटी हॉस्पिटल का निर्माण किया गया है। इस अस्पताल में 24 घंटे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हैं। साथ ही अत्याधुनिक तकनीक के साथ ऑपरेशन थियेटर बनाए गए हैं। इसके अलावा वातानुकूलित जनरल वार्ड, सेमी प्राइवेट एवं प्राइवेट वार्ड, अत्याधुनिक आईसीयू और सीसीयू, फूड कोर्ट, फॉर्मेसी (मेडिकल स्टोर), सीएससीडी रेडियो इमेजिंग सुविधाएँ (एक्सरे, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउण्ड) की सुविधा उपलब्ध है। हॉस्पिटल के उदघाटन कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, लोक स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, सांसद भारत सिंह कुशवाह, महापौर श्रीमती शोभा सिकरवार, विधायक नरेन्द्र सिंह कुशवाह, श्रीमती सरला रावत एवं अस्पताल के संस्थापक प्रबंधन से जुड़े अधिकारी, चिकित्सक व … Read more

मुंबई: रतन टाटा का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए NCPA परिसर लाया गया ,रतन टाटा का राजकीय अंतिम संस्कार आज होगा

मुंबई टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा अब नहीं रहे. उनका 86 साल की उम्र में निधन हो गया. रतन टाटा ने बुधवार रात मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली. यहां उन्हें कुछ दिन पहले उम्र संबंधी दिक्कतों की वजह से भर्ती कराया गया था. बुधवार रात ही उनके पार्थिव शरीर को अस्पताल से घर लाया गया. अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को मुंबई के नेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स हॉल में रखा जाएगा. यहां गुरुवार सुबह 10 बजे से दोपहर 3.30 बजे तक लोग उनके अंतिम दर्शन कर सकेंगे. भारत के बाहर भी प्रेरणादायक रहे हैं रतन टाटा: नेपाल के PM नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने रतन टाटा के निधन पर कहा कि उद्योग जगत के अनमोल रत्न रतन टाटा के निधन की खबर से दुखी हूं. बिजनेस और सामाजिक कार्यों में उनका दूरदर्शी नेतृत्व भारत के बाहर भी बहुत प्रभावकारी और प्रेरणादायक रहा है, इससे बहुत लोगों को प्रेरणा मिली. रतन टाटा के लिए भारत रत्न की मांग शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) ने दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा के लिए भारत रत्न की मांग की है. पार्टी नेता राहुल कनाल ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को चिट्ठी लिखकर भारत रत्न के लिए रतन टाटा का नाम केंद्र सरकार को भेजने का आग्रह किया है. नीतीश कुमार ने रतन टाटा के निधन पर जताया शोक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उद्योगपति एवं टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा जी का निधन दुखद है. उन्होंने अपनी दूरदर्शिता, सहजता और सादगी भरे जीवन से सबको प्रेरित किया. उन्होंने अपने कार्यों से देश की अर्थव्यवस्था में अपना सराहनीय योगदान दिया. रतन टाटा जी के निधन से उद्योग जगत को अपूरणीय क्षति हुई है. दिवंगत आत्मा की चिर शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना है.     प्रख्यात उद्योगपति एवं टाटा संस के पूर्व चेयरमैन, पद्म विभूषण रतन टाटा जी का निधन दुःखद। उन्होंने अपनी दूरदर्शिता, सहजता और सादगी भरे जीवन से सबको प्रेरित किया। उन्होंने अपने कार्यों से देश की अर्थव्यवस्था में अपना सराहनीय योगदान दिया। रतन टाटा जी के निधन से उद्योग जगत को अपूरणीय…   रतन टाटा के जीवन की दिलचस्प बातें साल 1937 में जन्मे रतन टाटा का पालन-पोषण 1948 में उनके माता-पिता के अलग होने के बाद उनकी दादी नवाजबाई टाटा ने किया था. रतन टाटा साल 1962 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से बी.आर्क की डिग्री प्राप्त की थी. 1962 के अंत में भारत लौटने से पहले उन्होंने लॉस एंजिल्स में जोन्स और इमन्स के साथ कुछ समय काम किया. 2008 में भारत सरकार ने उन्हें देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म विभूषण, प्रदान किया था. वह 28 दिसंबर 2012 को टाटा संस के चेयरमैन के रूप में रिटायर हुए थे. रतन टाटा का सफ़र: रतन टाटा का सफर एक प्रेरणादायक कहानी है, जो उनकी दूरदर्शिता, मेहनत और नेतृत्व कौशल को दर्शाता है- जन्म      28 दिसंबर 1937 कॉलेज डिग्री      1962 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से बी.आर्क (Bachelor of Architecture) विदेश में कार्य अनुभव      1962 के अंत में भारत लौटने से पहले लॉस एंजिल्स में जोन्स और इमन्स के साथ काम किया मैनेजमेंट ट्रेनिंग      1975 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एडवांस्ड मैनेजमेंट प्रोग्राम पूरा किया टाटा संस के चेयरमैन बने      मार्च 1991 रिटायर      28 दिसंबर 2012 टाटा समूह की आय      1991 में ₹10,000 करोड़ से बढ़कर 2011-12 में USD 100.09 बिलियन टाटा के मुख्य अधिग्रहण      – 2000 में टाटा टी द्वारा 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर में टेटली का अधिग्रहण – 2007 में टाटा स्टील द्वारा 6.2 बिलियन पाउंड में कोरस का अधिग्रहण – 2008 में टाटा मोटर्स द्वारा 2.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर में जगुआर लैंड रोवर का अधिग्रहण सम्मान      2008 में पद्म विभूषण (भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान) निधन      09 अक्टूबर 2024 …जब रतन टाटा ने संभाली कमान: रतन टाटा की उल्लेखनीय यात्रा तब शुरू हुई जब उन्होंने साल 1991 में ऑटोमोबाइल से लेकर स्टील तक के विभिन्न उद्योगों में फैले टाटा समूह की बागडोर संभाली. साल 1996 में उन्होंने टाटा टेली-सर्विसेज की स्थापना की और 2004 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध करवाया, जो कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ. रतन टाटा के नेतृत्व में ऐतिहासिक अधिग्रहण:     टेटली (2000): टाटा टी द्वारा 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर में ब्रिटिश चाय कंपनी टेटली का अधिग्रहण किया गया. यह भारतीय कंपनी का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहण था.     कोरस (2007): टाटा स्टील ने 6.2 बिलियन पाउंड में यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी स्टील निर्माता कंपनी कोरस का अधिग्रहण किया. यह भारतीय स्टील उद्योग का अब तक का सबसे बड़ा सौदा था.     जगुआर लैंड रोवर (2008): टाटा मोटर्स ने 2.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर में प्रतिष्ठित ब्रिटिश कार ब्रांड जगुआर और लैंड रोवर का अधिग्रहण किया। यह सौदा टाटा मोटर्स के लिए एक बड़ी सफलता साबित हुआ और कंपनी को वैश्विक ऑटोमोबाइल बाजार में मजबूती दी. टाटा ग्रुप की कमान किसके हाथ? रतन टाटा की सेवानिवृत्ति के बाद, टाटा ग्रुप की कमान एन चंद्रशेखरन (Natarajan Chandrasekaran) के हाथों में है. उन्होंने 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पदभार संभाला था. एन चंद्रशेखरन इससे पहले टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं.    

गरीबों को मुफ्त अनाज देने की योजना को दिसंबर 2028 तक बढ़ाया, केंद्रीय कैबिनेट ने लिया निर्णय

नई दिल्ली केंद्रीय कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है जिसके अनुसार गरीबों को मुफ्त अनाज देने की योजना को दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया गया है। यह फैसला विशेष रूप से उन परिवारों के लिए राहत भरा है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना है। सरकार का मानना है कि इस पहल से सामाजिक और आर्थिक विकास में मदद मिलेगी, खासकर उन परिवारों के लिए जो रोजमर्रा के भोजन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। योजना का दायरा इस योजना के तहत, गरीब परिवारों को हर महीने अनाज प्रदान किया जाएगा। यह अनाज विभिन्न प्रकार के अनाज, जैसे गेहूं और चावल, शामिल होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी जरूरतमंद लोगों को उचित मात्रा में खाद्य सामग्री मिल सके। सीमावर्ती इलाकों में किया जाएगा सड़क निर्माण साथ ही इस बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया से बातचीत की और सरकार के नए कदमों के बारे में जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। उनका मानना है कि मजबूत बुनियादी ढांचा देश की सुरक्षा और विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। निवेश का विवरण बैठक में निर्णय लिया गया कि सीमावर्ती इलाकों में 4,406 करोड़ रुपये के निवेश से 2,280 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाएगा। यह परियोजना न केवल स्थानीय लोगों के लिए सुविधाएं बढ़ाएगी, बल्कि देश की सुरक्षा को भी सुदृढ़ करेगी। विकास के लाभ इस सड़कों के निर्माण से सीमावर्ती क्षेत्रों में आवागमन में सुधार होगा, जिससे व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, यह सुरक्षा बलों की तैनाती और ऑपरेशन में भी मदद करेगा।केंद्रीय कैबिनेट के इस निर्णय से स्पष्ट होता है कि सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दे रही है। इससे न केवल स्थानीय लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि यह देश की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

नहीं रहे रतन टाटा, मुंबई हॉस्पिटल में ली अंतिम सांसें, देश के लिए किए ये 5 बड़े काम

मुंबई दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा अब हमारे बीच नहीं रहे, 86 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. भारतीय इतिहास में रतन टाटा का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा. भारत में जब भी उद्योगपतियों का जिक्र होगा. सबसे पहले रतन टाटा का नाम लिया जाएगा. उन्होंने अपने जीवन की सार्थक यात्रा में बहुत से ऐतिहासिक काम किए. दरअसल, रतन टाटा को भारतीय उद्योग का पितामह भी कहा जाता है. अपने व्यक्तित्व से उन्होंने लोगों को प्रभावित किया. रतन टाटा ने इस दुनिया को कई बहुमूल्य उपहार दिए. उनका योगदान आज भारत समेत पूरे विश्व के लिए एक नजीर है. यूं तो देश निर्माण में रतन टाटा के अनगिनत योगदान हैं, जिसे भुलाया नहीं जा सकता. लेकिन इनमें से कुछ ऐसे हैं, जिन्होंने समय की परिधि पर अमिट छाप छोड़ दी है. जिस समय पूरा विश्व कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा था, उस समय भारत भी हेल्थ संकटों से लड़ रहा था. इस संकट के समय में  रतन टाटा सामने आए और उन्होंने 500 करोड़ रुपये की देश को सहायता दी. उन्होंने एक्स (x) पर लिखा था, कोविड-19 हमारे सामने आने वाली सबसे कठिन चुनौतियों में से एक है. टाटा ट्रस्ट और टाटा समूह की कंपनियां अतीत में भी देश की जरूरतों के लिए आगे आईं हैं. इस समय आवश्यकता किसी भी अन्य समय से अधिक है.   रतन टाटा अपने सौम्य स्वभाव और उदार दिल के लिए जाने जाते थे. उनको कुत्तों से बड़ा लगाव रहा. अभी कुछ दिन पहले ही उन्होंने कुत्तों के लिए एक हास्पिटॉल खोला. उन्होंने हॉस्पिटल खोलते समय कहा था कि मैं कुत्तों को अपने परिवार का हिस्सा मानता हूं. रतन टाटा ने आगे कहा था कि मैं जीवन कई पेट्स रखे हैं. इस वजह से मुझे हॉस्पिटल की अहमियत पता है. उनके द्वारा नवी मुम्बई बनाया गया अस्पताल 5 मंजिला है, जिसमें 200 पालतू जानवरों का एक साथ इलाज किया जा सकता है. इसको 165 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है. रतन टाटा को कुत्तों से कितना नेह है उसे इस बात से भी समझा जा सकता है कि एक बार एक कुत्ते को वो यूनिवर्सिटी ऑफ मिनिसोटा लेकर गए थे. जहां कुत्ते का जॉइंट रिप्लेसमेंट किया गया था. टाटा ग्रुप पहले केवल बड़ी गाड़ियों के निर्माण के लिए जाना जाता था. लेकिन 1998 रतन टाटा ने छोटी गाड़ियों की दुनिया में भी उतरने का फैसला लिया और उन्होंने टाटा इंडिका (Tata Indica) को बाजार में लॉन्च किया. टाटा इंडिका पूरी तरह से एक स्वदेशी कार थी. जिसको लोगों ने खूब पसंद किया और इसने बिक्री के सारे रिकॉर्ड तोड़ कर बाजार में नया कीर्तिमान को स्थापित कर दिया. उसके लगभग एक दशक बाद टाटा ने एक और प्रयोग किया और वो 2008 में बाजार में नैनो कार लेकर आए, जिसकी कीमत एक लाख रुपये से भी कम थी. कहते हैं अगर मन में ठान लें तो कोई लक्ष्य बड़ा नहीं होता, टाटा इंडिका इतना ब्रेकडाउन हो रही थी कि साल 1999 में टाटा ने उसे बेचने का फैसला कर लिया. ये जज्बे से भरे रतन टाटा के लिए एक बहुत बड़ा झटका था. उसी समय वो बिल फोर्ड को अपनी कार की कंपनी बेचना चाहते थे. लेकिन बिल फोर्ड  ने तंज कसते हुए कहा कि जब पैसेंजर कार बनाने का कोई अनुभव नहीं था तो ये बचपना क्यों किया. ये बात उनको चुभ गई और उन्होंने कंपनी को बेचने से इनकार कर दिया. एक दशक बाद वक्त ने करवट ली और फोर्ड मोटर्स की हालत खराब हो गई. जिस वजह से फोर्ड को बेचना और उसे रतन टाटा ने खरीद लिया. भारत में जब भी सॉफ्टवेयर कंपनी का जिक्र करते ही लोगों की जुबान से सबसे पहले टीसीएस का ही नाम आता है. टीसीएस दुनिया की सबसे बड़ी सूचना तकनीकी और बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग सेवा देने वाली कंपनियों में से एक है. जिसने तकनीक के क्षेत्र में अहम योगदान के साथ-साथ बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन भी किया.

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